5 साल तक के बच्चों को पोलियो  के संक्रमण से बचाने के लिए दो चरणों में चलेगा पल्स पोलियो अभियान 

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– 19 से 23 जून और 18 से 22 सितंबर तक जिलाभर में पांच साल तक के बच्चों को पिलाई जाएगी पोलियो की खुराक
– राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने जिलाधिकारी सहित अन्य पदाधिकारियों को जारी किए निर्देश
मुंगेर, 01 जून-
0 से 5 साल तक के बच्चों को पोलियो वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए दो चरणों में पल्स पोलियो अभियान चलेगा । मालूम हो कि आगामी 19 से 23 जून और 18 से 22 सितंबर तक जिलाभर में पांच साल तक के बच्चों को पल्स पोलियो की खुराक पिलाई जाएगी। इसको ले राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने सभी जिलों के जिलाधिकारी सहित अन्य पदाधिकारियों को अभियान के गुणवत्तापूर्ण तरीके से सफल संचालन को ले चिठ्ठी जारी कर आवश्यक निर्देश दिए हैं।
जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) विकास कुमार ने बताया कि भारत के दो पड़ोसी देशों अफगानिस्तान और पाकिस्तान में पोलियो संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य भर में दो चरणों में पल्स पोलियो अभियान चलाए जाने को ले आवश्यक निर्देश जारी हुए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में अभी तक अफगानिस्तान में 1 और पाकिस्तान में 2 पोलियो के मरीज मिले हैं। जब तक विश्व के किसी भी देश में पोलियो का संक्रमण जारी है तब तक राज्य और जिला में पोलियो वायरस के संक्रमण का खतरा बना हुआ है। इस खतरे से बचाव के लिए आवश्यक है कि उच्च गुणवत्ता के साथ पल्स पोलियो अभियान को चलाया जाए और नियमित टीकाकरण से भी बच्चों को आच्छादित किया जाए।
उन्होंने बताया कि पल्स पोलियो अभियान के सफल संचालन के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला टास्क फोर्स और प्रखण्ड स्तर पर प्रखण्ड टास्क फोर्स का गठन किया जाना है। प्रखण्ड स्तर पर प्रखण्ड विकास पदाधिकारी और बाल विकास परियोजना पदाधिकारी की सहभागिता से गुणवत्तापूर्ण तरीके से अभियान का संचालन किया जाना है। ट्रांजिट स्थल जैसे बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, चौक-चौराहों आदि पर प्रशिक्षित टीककर्मियों के द्वारा वहां से गुजरने वाले सभी बच्चों पर विशेष ध्यान देते हुए उन्हें पल्स पोलियो की खुराक पिलाई जाएगी। अभियान के दौरान नवजात शिशुओं को पल्स पोलियो की खुराक दी जाएगी। किसी भी परिस्थिति में किसी भी क्षेत्र, सामान्य दूर-दराज के क्षेत्र, बासा, ईट भट्टा, प्रवासी एवं भ्रमणशील आबादी के बच्चे पोलियो की खुराक पीने से वंचित नहीं रहे , इसके लिए विशेष निगरानी दल गठित कर शत-प्रतिशत बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाना सुनिश्चित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पल्स पोलियो के राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान के दौरान टीककर्मियों और अन्य लोगों के द्वारा मास्क, आदि का उपयोग करते हुए कोविड 19 के तहत बनाये गए कोविड प्रोटोकॉल का अनिवार्य रूप से अनुपालन किया जाएगा ।

मैथिली के लिए विज्ञान प्रसार ने किया सीएम साइंस कॉलेज से करार 

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मैथिली में जन-जन तक पहुचाएंगे विज्ञान की बात : डॉ नकुल पराशर

नई दिल्ली-

आम लोगों तक उनकी भाषा में विज्ञान की बातें पहुंचाने के लिए संकल्पित विज्ञान प्रसार ने मैथिली भाषी में तेज गति से व्यापक काम करने के लिए दरभंगा के प्रसिद्ध सीएम साइंस कॉलेज के साथ समझौता किया है। विज्ञान प्रसार के स्कोप के तहत राजधानी के टेक्नोलॉजी भवन में मैथिली कोर कमिटी की बैठक हुई। इस बैठक के बाद विज्ञान प्रसार के निदेशक डॉ नकुल पराशर और सीएम साइंस कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ दिलीप चौधरी ने एमओयू पर हस्ताक्षर किया। इस समझौता के बाद मैथिली में निरंतर प्रकाशित हो रही पत्रिका विज्ञान रत्नाकर के साथ ही पुस्तक प्रकाशन, ऑडियो-वीडियो निर्माण, मिथिला के हर स्कूल तक मैथिली में विज्ञान के प्रचार प्रसार को तेज किया जाएगा।
समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद विज्ञान प्रसार के निदेशक डॉ नकुल पराशर ने कहा कि स्कोप के तहत हम तमाम भारतीय भाषाओं में काम कर रहे हैं। ंबीते डेढ साल से मैथिली में कुछ काम हो रहे हैं। आज कोर कमिटी की सहमति से सीएम साइंस कॉलेज के साथ समझौता किया गया है। हमने अगले एक वित्तीय वर्ष के लिए रोडमैप तैयार किया है। हमारी पूरी कोशिश है कि हर मैथिली भाषी तक विज्ञान की बात उनके ही शब्दों में पहुंचाएंगे। इसके लिए हमारे पास समर्पित टीम है।
सीएम साइंस कॉलेज दरभंगा के प्रिंसिपल डॉ दिलीप चौधरी ने कहा कि हमारे लिए यह गौरव की बात है कि केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की स्वायत्त संस्था विज्ञान प्रसार ने हमें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिया है। यह हमारे कॉलेज के साथ ही मिथिला के लिए गौरव की बात है। हम विज्ञान प्रसार के साथ मिलकर विज्ञान के क्षेत्र में बेहतर काम करेंगे।
इससे पूर्व देश के जाने माने वैज्ञानिक डॉ प्रभात रंजन की अध्यक्षता में मैथिली कोर कमिटी की बैठक हुए। अपने कई अनुभव को साझा करते हुए डॉ प्रभात रंजन ने मैथिली में किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा करते हुए आगे के लिए निर्देशित किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विज्ञान प्रसार गांव-गांव तक विज्ञान की पहुंच बनाने में बेहतर कार्य कर रहा है, इसलिए मैथिली कोर कमिटी के सदस्यों को पूरी तन्मयता के साथ काम करना होगा। वहीं, विज्ञान प्रसार के वैज्ञानिक डॉ कपिल त्रिपाठी ने इसके प्रचार प्रसार में विपनेट की भूमिका को रेखांकित किया।
कोर कमिटी की बैठक में दिल्ली विश्वद्यिलय के प्रो इन्द्रकांत सिंह, प्रो रूबी मिश्रा, रांची विश्वविद्यालय के डॉ आनंद कुमार ठाकुर, विज्ञान प्रसार के मानवर्धन कंठ, आलोक कुमार, डॉ प्रकाश झा, सुभाष चंद्र, संजीव सिन्हा, रौशन झा, सीएम सांइस कॉलेज के डॉ सुजीत कुमार चौधरी, डॉ सत्येंद्र कुमार झा उपस्थित रहे। सभी ने विज्ञान प्रसार में आगामी एक साल को लेकर मैथिली में क्या सब काम किया जा सकता है, इसको लेकर विचार-विमर्श किया।

नियमित टीकाकरण को लेकर जल्द शुरू होगा सर्वे का काम

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-सर्वे को लेकर अभी आशा कार्यकर्ताओं की हो रही ट्रेनिंग
-31 जुलाई तक छूटे हुए बच्चे-महिलाओं का होना टीकाकरण
भागलपुर, 1 जून-
बच्चे और गर्भवती महिलाएं नियमित टीकाकरण से वंचित न रह जाएं, इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग लगातार अभियान चला रहा है। ऐसे लोगों के टीकाकरण को लेकर अभी हाल ही में मिशन इंद्रधनुष अभियान का तीन चरण चलाया गया। इसमें भागलपुर जिले की सफलता दर 100 प्रतिशत से अधिक रही। एक आकलन के मुताबिक अभी भी बहुत सारे बच्चे और गर्भवती महिलाएं टीकाकरण से वंचित हैं। ऐसे लोगों को टीका लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग फिर से तैयारी कर रहा है। इसी सिलसिले में आशा कार्यकर्ता जल्द ही क्षेत्र में सर्वे का काम करेंगी। इसे लेकर अभी जिले में आशा कार्यकर्ताओं की ट्रेनिंग चल रही है। ट्रेनिंग के बाद 31 जुलाई तक सभी छूटे हुए बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण करना है।
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार चौधरी ने बताया कि नियमित टीकाकरण से कोई भी छूट न जाए, इसे लेकर हमलोग लगातार काम कर रहे हैं। अभी मिशन इंद्रधनुष अभियान के तहत ऐसे लोगों को टीका दिया गया। अब एक बार फिर से छूटे हुए लोगों का टीकाकरण किया जाना है। सर्वे का काम जल्द ही शुरू होगा। अभी आशा कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग दी जा रही है। ट्रेनिंग पूरी हो जाने के बाद जल्द ही घर-घर जाकर वे लोग सर्वे का काम करेंगी। आशा कार्यकर्ता एक-एक घर जाकर नियमित टीकाकरण से वंचित बच्चों और गर्भवती महिलाओं की सूची बनाएगी। सूची तैयार हो जाने के बाद उसके मुताबिक टीकाकरण किया जाएगा।
सुरक्षित और सामान्य प्रसव को मिलता है बढ़ावाः जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ.चौधरी ने बताया कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों को गंभीर बीमारी से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी है। इससे न केवल गंभीर बीमारी से बचाव होता है, बल्कि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा भी मिलता । बच्चों का शारीरिक विकास भी बेहतर तरीके से होता है। 12 तरह की बीमारियों से बच्चों का बचाव तो करता ही है, साथ में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करता है। इससे बच्चे अगर भविष्य में किसी बीमारी की चपेट में आ भी जाता तो उससे वह जल्द उबर जाता है।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर होता है नियमित टीकाकरणः नियमित टीकाकरण का आयोजन जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर होता है। इसके माध्यम से दो वर्ष तक के बच्चों को बीसीजी, ओपीवी, पेंटावेलेंट, रोटा वैक्सीन, आईपीवी, मिजल्स, विटामिन ए, डीपीटी बूस्टर डोज, मिजल्स बूस्टर डोज और बूस्टर ओपीवी के अलावा जेएई (जापानी बुखार) के टीके लगाए जाते हैं। इसके अलावा अभियान में गर्भवती को टेटनेस-डिप्थीरिया (टीडी) का टीका भी लगाया जाता है। नियमित टीकाकरण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारी से बचाव करता है। साथ ही प्रसव के दौरान जटिलताओं से सामना करने की भी संभावना नहीं के बराबर रहता है।

आशा सीता देवी ने संस्थागत प्रसव को लेकर लोगों को किया जागरूक

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-अमरपुर प्रखंड के सलेमपुर के वार्ड नंबर पांच और छह में हैं कार्यरत
-परिवार नियोजन के क्षेत्र में विशेष योगदान देकर बनाई अपनी पहचान
बांका, 1 जून-
सलेमपुर गांव के वार्ड नंबर पांच और छह के लोग संस्थागत प्रसव के प्रति काफी जागरूक हैं। क्षेत्र की अधिकतर प्रसूता अस्पताल में ही अपना प्रसव कराती हैं। लोगों को यह बात समझ में आ गई है कि संस्थागत प्रसव के क्या फायदे हैं। ऐसा करने में आशा कार्यकर्ता सीता देवी का अहम योगदान है। अपने क्षेत्र के एक-एक लोगों को वे जानती हैं। इस वजह से उन्हें इस बात की जानकारी होती है कि किस घर में प्रसूता है और उसे क्या मदद चाहिए। जब डिलीवरी की बात आती है तो उसे अमरपुर रेफरल अस्पताल ले जाने से लेकर सुरक्षित प्रसव तक की जिम्मेदारी का काम वह करती हैं।
आशा सीता देवी कहती हैं कि क्षेत्र के सभी लोगों को मैं जानती हूं। इसलिए मुझे यह बात पता होता है कि किसका अभी क्या समय चल रहा  और उसे मैं क्या मदद कर सकती हूं। गर्भावस्था की शुरुआत से ही मैं निगरानी में लग जाती हूं। इस वजह से मुझे काम करने में दिक्कत नहीं होती है। साथ ही मैं इतने दिनों से काम कर रही हूं। अबतक मैंने जो भी मेहनत की है, उसका बेहतर परिणाम आया है। इस वजह से लोगों को भी मुझ पर भरोसा है और यही कारण है कि मेरा काम भी आसान हो जाता ।
2007 से कर रहीं कामः सीता देवी 2007 से बतौर आशा कार्यकर्ता काम कर रही हैं। अबतक उन्होंने 800 सौ से अधिक डिलीवरी करवायी है। सीता देवी कहती हैं कि जब आप ज्यादा समय से काम कर रहे होते हैं तो स्वाभाविक है कि संख्या भी ज्यादा ही होगी। हां, एक बात संतोषजनक जरूर है कि लोग भी मेरे काम से संतुष्ट हैं। इसी का परिणाम है कि लोग मुझे याद करते हैं। वर्ना आज के समय में जब इतनी संख्या में निजी अस्पताल खुले हुए हैं, जो तमाम तरह के दावे करते हैं। इसके बावजूद लोग मुझे याद करते हैं। यह बात मेरे लिए संतोषजनक है।
कोरोना काल में भी निभाई अहम भूमिकाः सीता देवी ने कोरोना काल में भी अहम भूमिका निभाई। शुरुआत में जब लोग कोरोना का नाम सुनकर ही कांपने लगते थे, उस समय सीता देवी ने आगे बढ़कर अपनी जिम्मेदारी निभाई। सीता देवी कहती हैं कि कोरोना की शुरुआत के समय से ही मैं समझ गई थी कि लोगों को जागरूक करना बहुत जरूरी है। जागरूकता में हर बीमारी का हल है। इसलिए मैं लोगों को मास्क पहनने, घर से कम निकलने और सामाजिक दूरी का पालन करने के लिए कहती थी। लोग इसे मानते भी थे। इसका परिणाम भी सुखद रहा। अमरपुर रेफरल अस्पताल के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि आशा सीता देवी अपने क्षेत्र में काफी घुली-मिली हैं। इनका काम सराहनीय है। प्रसव को लेकर तो यह काम करती ही हैं। कोरोना काल में भी इन्होंने बेहतर काम किया।

सीपीजे कॉलेज में 12 जून को होगा वार्षिक दीक्षांत समारोह-2022 का आयोजन

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सीपीजे कॉलेज ऑफ हायर स्टडीज एंड स्कूल ऑफ लॉ नरेला, (गुरुगोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, दिल्ली से संबद्ध) रविवार, 12 जून, 2022 को वार्षिक दीक्षांत समारोह का आयोजन करेगा। सीपीजे कॉलेज के महासचिव डॉ अभिषेक जैन और महानिदेशक श्री युगांक चतुर्वेदी ने एक संयुक्त बयान जारी किया और कहा – यह वास्तव में सभी के लिए सम्मान का क्षण होगा, खासकर उन उत्तीर्ण छात्रों के लिए जिन्हें माननीय अतिथियों द्वारा उनकी कड़ी मेहनत से अर्जित बीबीए(जनरल)/ बीबीए(कैम)/ बीसीए/ बीकॉम(ऑनर) और बी.ए.एलएलबी/ बीबीएएलएलबी की स्नातक डिग्री से सम्मानित किया जाएगा। विश्वविद्यालय के स्वर्ण पदक विजेता विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जाएगा।
प्रो. (डॉ.) महेश वर्मा, कुलपति, गुरुगोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय और प्रो. (डॉ.)अमिता देव, कुलपति, इंदिरा गांधी दिल्ली महिला तकनीकी विश्वविद्यालय इस अवसर पर क्रमशः मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि होंगे।

विश्व तम्बाकू निषेध दिवस • जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में  कर्मियों ने धूम्रपान नहीं करने की ली शपथ 

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– स्वास्थ्य कर्मियों ने कहा – ना तम्बाकू का सेवन करेंगे और दूसरों को भी नहीं करने के लिए करेंगे प्रेरित
– तम्बाकू ना सिर्फ वर्तमान के लिए, बल्कि भविष्य के लिए भी खतरनाक
लखीसराय, 31 मई-
मंगलवार को जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में विश्व तम्बाकू निषेध दिवस के अवसर पर एक शपथ कार्यक्रम का आयोजन हुआ। जिसमें संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों के सभी पदाधिकारी एवं कर्मियों ने भाग लिया। इस दौरान नशा मुक्त समाज का संदेश देने के लिए सभी स्वास्थ्य कर्मियों ने शपथ ली कि ना किसी प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन करेंगे और अपने परिवार के सदस्यों समेत अन्य लोगों को भी नहीं करने के लिए प्रेरित करेंगे। वहीं, सदर अस्पताल लखीसराय में अस्पताल उपाधीक्षक (डीएस) डाॅ राकेश कुमार की अध्यक्षता में शपथग्रहण समारोह का आयोजन हुआ। जिसमें अस्पताल के सभी पदाधिकारी एवं कर्मी शामिल होकर जीवन में तम्बाकू का सेवन नहीं करने की शपथ ली। इस मौके पर डीपीएम मो. खालिद हुसैन, वित्त सह लॉजिस्टिक सलाहकार पूजा कुमारी आदि मौजूद थे। इसके अलावा जिले के सभी पीएचसी, सीएचसी, हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर समेत अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में भी शपथग्रहण समारोह का आयोजन किया गया।
– सप्ताह भर लोगों को किया जाएगा जागरूक :
लखीसराय सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डाॅ राकेश कुमार ने बताया, पूरे सप्ताह स्वास्थ्य संस्थानों पर कार्यक्रम का आयोजन कर लोगों को तम्बाकू का सेवन नहीं करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही नेशनल तंम्बाकू प्रोग्राम की कुमारी शिप्रा जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों का भ्रमण कर लोगों को जागरूक करेंगी। इसके अलावा आशा कार्यकर्ता भी अपने पोषक क्षेत्र में गृह भ्रमण एवं शिविर के माध्यम से पूरे सप्ताह लोगों को धूम्रपान का सेवन नहीं करने के लिए जागरूक करेंगी।
– तम्बाकू ना सिर्फ वर्तमान के लिए, बल्कि भविष्य के लिए भी खतरनाक :
डीपीएम (हेल्थ) मो. खालिद हुसैन ने कहा, किसी भी प्रकार का नशा ना सिर्फ वर्तमान के लिए हानिकारक है बल्कि, भविष्य के लिए भी खतरनाक है। इतना ही नहीं, इससे आने वाले पीढ़ी पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए, मैं तमाम जिलेवासियों से अपील करता हूँ कि नशा से बिलकुल दूर रहें और स्वस्थ्य जीवन की जिंदगी जीए । नशा जीवन के लिए सबसे खतरनाक है। इसलिए, स्वस्थ्य जिंदगी जीने के लिए नशे से दूर रहें और ना ही नशा करें और दूसरों को भी नहीं करने के लिए प्रेरित करें।
– जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को किया जाएगा जागरूक :
नशा मुक्त समाज निर्माण के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। जिसके माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाएगा और तम्बाकू का सेवन नहीं के लिए प्रेरित भी किया जाएगा। ताकि नशा मुक्त समाज का निर्माण हो सके। इस दौरान नशा से स्वास्थ्य को होने वाले परेशानियाँ को भी बताया जाएगा। ताकि लोगों को नशा से नफरत हो सके। इसके अलावा जगह-जगह पोस्टर-बैनर भी लगाया जाएगा।

विश्व तम्बाकू निषेध दिवस: तम्बाकू सेवन के दुष्परिणाम के प्रति जागरूक करने को  छात्राओं ने निकाली प्रभात फेरी 

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– प्रभातफेरी को प्रभारी सिविल सर्जन, डीपीएम, डिप्टी सुपरिटेंडेंट और एनसीडीओ ने दिखाई हरी झंडी
–  स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों ने ली तम्बाकू उत्पाद इस्तेमाल नहीं करने की शपथ
मुंगेर, 31 मई-
विश्व तम्बाकू दिवस के अवसर पर  लोगों को तम्बाकू सेवन के दुष्परिणाम और माहवारी स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से मंगलवार को एएनएम स्कूल की छात्राओं ने एनसीडीसी कार्यालय से प्रभात फेरी निकली । प्रभात फेरी को जिला के सिविल सर्जन डॉ. आनंद शंकर शरण सिंह, डीपीएम नसीम रजि, हॉस्पिटल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ. प्राण मोहन सहाय , एनसीडीओ डॉ. के. रंजन और एनसीडी कार्यालय की राखी मुखर्जी ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर डीपीसी विकास कुमार, लेखापाल उत्तम कुमार, साइकोलॉजिस्ट नितिन आनंद, डेटा ऑपरेटर राहुल कुमार सहित सदर अस्पताल में कार्यरत कई अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।
प्रभातफेरी को हरी झंडी दिखाते हुए जिला के प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. आनंद शंकर शरण सिंह ने बताया कि तम्बाकू निषेध और माहवारी स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से जिला में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रत्येक वर्ष 28 मई को माहवारी स्वच्छता दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और किशोरियों को माहवारी के दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने और कपड़ा के स्थान पर सैनिटरी पैड का इस्तेमाल करने के लिए जागरूक किया जाता है ताकि वो माहवारी के दौरान किसी प्रकार के संक्रमण की शिकार न हो। उन्होंने बताया कि तम्बाकू उत्पादों के इस्तेमाल से होने वाले दुष्परिणाम से लगभग सभी लोग परिचित हैं। सरकार के द्वारा भी तम्बाकू उत्पादों की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है। बावजूद इसके जागरूकता की कमी के कारण लोग धड़ल्ले से तम्बाकू उत्पादों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
मौके पर मौजूद लोगों को सम्बोधित करते हुए गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. के. रंजन ने बताया कि मुंगेर बिहार का पहला ऐसा जिला है जो जिला कोटपा एक्ट 2003 के अंतर्गत सम्मिलित है। इस अवसर पर उन्होंने एनसीडी द्वारा बनाए गए स्लोगन को दुहराते हुए बताया कि  ” तम्बाकू एवं धूम्रपान की यदि है आपको आदत तो आप देते हैं कई बीमारियों को दावत”। इसलिए  तम्बाकू को छोड़िए और अच्छी सेहत से जुड़िए। उन्होंने बताया कि तम्बाकू छोड़ने के कई फायदे हैं –
1 – हार्ट बीट और ब्लड प्रेशर सामान्य रहता है।
2 – ब्लड में ऑक्सीजन लेवल बेहतर रहता है।
3 – ब्लड सर्कुलेशन और लंग्स बेहतर ढंग से काम करता है।
4 – खाँसी, थकान और सांस टूटने की शिकायत कम होती है।
5 – हार्ट अटैक का जोखिम कम रहता है।
6 – मुंह, गला, भोजन की नली और पेशाब की थैली के कैंसर का जोखिम कम रहता है।

अच्छी पहल • स्वास्थ्य संस्थानों में साउंड बाॅक्स के माध्यम से फाइलेरिया और कालाजार के लक्षणों की मिल रही जानकारी 

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–  स्वास्थ्य संस्थानों के रजिस्ट्रेशन काउंटर पर लगाया गया है साउंड बाॅक्स
– कालाजार और फाइलेरिया से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी
खगड़िया, 31 मई-
कालाजार और फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्य विभाग विभाग काफी गंभीर है। इसको लेकर जिले में लगातार तमाम गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में अब सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक करने के लिए साउंड बाॅक्स से उक्त दोनों बीमारियों के लक्षणों की जानकारी देने की नई पहल शुरू की गई है। जिसे सुनिश्चित करने को लेकर को  सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा चार्जेबल साउंड बाॅक्स लगाया गया है। इसे स्वास्थ्य संस्थानों के रजिस्ट्रेशन काउंटर पर लगाया गया है। जिसके माध्यम से इलाज कराने के लिए अस्पताल आने वाले सभी मरीजों को  कालाजार और फाइलेरिया के लक्षणों की जानकारी दी जा रही है। ताकि उक्त दोनों बीमारियों के लक्षणों की जानकारी सामुदायिक स्तर पर लोगों को मिल सके और संबंधित मरीज अपना ससमय जाँच और इलाज करा सके।
– साउंड बाॅक्स की धुन से लोगों को आसानी के साथ मिल रही है लक्षण की जानकारी :
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ विजय कुमार ने बताया सामुदायिक स्तर पर लोगों को सुविधाजनक तरीके से कालाजार और फाइलेरिया के लक्षणों की जानकारी देने के उद्देश्य से जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में साउंड बाॅक्स लगाया गया है। जिसके धुन के माध्यम से इलाज के लिए अस्पताल आने वाले सभी मरीजों को आसानी के साथ उक्त दोनों बीमारियों के लक्षणों की जानकारी मिल रही है। साथ ही लक्षण से पीड़ित व्यक्ति के लिए इलाज की कहां व्यवस्था है,इसकी तमाम जानकारियाँ भी दी जा रही है। वहीं, उन्होंने बताया, कालाजार और फाइलेरिया से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी है। इसी उद्देश्य से साउंड बॉक्स के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
– साउंड बाॅक्स ऑपरेट करने की डेटा ऑपरेटर को दी गई जिम्मेदारी :
केयर इंडिया के डीपीओ कृष्ण कुमार भारती ने बताया, जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में रजिस्ट्रेशन काउंटर पर लगाए गए साउंड बाॅक्स को ऑपरेट करने की जिम्मेदारी डेटा ऑपरेटर को दी गई है। साउंड बॉक्स के माध्यम से अस्पताल आने वाले सभी मरीजों को सुविधाजनक तरीके से कालाजार और फाइलेरिया के लक्षण की जानकारी मिलेगी। इसके अलावा अन्य माध्यमों से भी लोगों को कालाजार और फाइलेरिया के प्रति जागरूक किया जा रहा है । संक्रमित व्यक्तियों को इलाज कराने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है।
– ये हैं कालाजार के लक्षण :
– लगातार रुक-रुक कर या तेजी के साथ दोहरी गति से बुखार आना।
– वजन में लगातार कमी होना।
– दुर्बलता।
– मक्खी के काटे हुए जगह पर घाव होना।
– व्यापक त्वचा घाव जो कुष्ठ रोग जैसा दिखता है।
– प्लीहा में नुकसान होता है।
– जानें, फाइलेरिया क्या है ?
– फाइलेरिया मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है।
– किसी भी उम्र के व्यक्ति फाइलेरिया से संक्रमित हो सकता है।
– फाइलेरिया के लक्षण हाथ और पैर में सूजन (हाँथीपाँव) व हाइड्रोसील (अण्डकोष में सूजन) है।
– किसी भी व्यक्ति को संक्रमण के पश्चात बीमारी होने में 05 से 15 वर्ष लग सकते हैं।

तंबाकू का सेवन नहीं करने की ली शपथ

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-विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर जिलेभर में आयोजित किया गया कार्यक्रम
-लोगों को तंबाकू के सवन से होने वाली बीमारियों के बारे में बताया
बांका, 31 मई-
जिलेभर में मंगलवार को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया गया। इसे लेकर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें लोगों को तंबाकू के सेवन से होने वाली बीमारियों के बारे में बताया गया। सिविल सर्जन कार्यालय में भी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान सिविल सर्जन डॉ. रविंद्र नारायण ने मौके पर मौजूद सभी डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को तंबाकू का सेवन नहीं करने की शपथ दिलाई। साथ ही कहा कि जो लोग भी तंबाकू का सेवन करते हैं वे अभी से ही इसे छोड़ दीजिए। तंबाकू गंभीर बीमारी का कारण बनता है और एक दिन लोगों को अपनी जान तक गंवानी पड़ती । इसलिए खुद तो तंबाकू का सेवन छोड़े ही दें, साथ में अगर घर या परिवार में भी कोई तंबाकू का सेवन करते हैं तो उन्हें भी इस लत से छुटकारा दिलवाइए। मौके पर जिला स्वास्थ्य समिति से अंजनी नंदन सरल मिश्रा, पवन कुमार, डॉ. अमित कुमार, पटना से आए राज्यस्तरीय पदाधिकारी (आयुष्मान भारत) आलोक रंजन समेत कई लोग मौजूद थे।
दूसरी ओर सदर अस्पताल में भी कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां गैरसंचारी रोग पदाधिकारी डॉ. बीरेंद्र कुमार यादव ने मौके पर मौजूद सभी डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को तंबाकू का सेवन नहीं करने की शपथ दिलाई। इस दौरान डॉ. यादव ने कहा कि आज देश में बीमारियों से होने वाली मौत में बहुत बड़ी संख्या तंबाकू के सेवन करने वालों की हैं। इसलिए इस बुरी लत को अभी से छोड़ें। साथ में अन्य लोगों को भी इसके बारे में बताएं। घर, परिवार और दोस्तों के साथ-साथ अन्य लोगों को भी तंबाकू के सेवन के प्रति आगाह करें। उन्हें बताएं कि तंबाकू का सेवन करना कितना नुकसानदायक होता है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन जाता है तंबाकू। साथ ही इसमें मौजूद निकोटिन लोगों की भूख व प्यास को मार देती है। इस कारण लोग अन्य गंभीर बीमारियों की भी चपेट में आ जाते हैं।
पर्यावरण की भी होगी सुरक्षाः डॉ. यादव ने कहा कि इस बार तंबाकू निषेध दिवस की थीम तंबाकू को छोड़कर पर्यावरण की सुरक्षा करना है। यदि हम तंबाकू का सेवन करना छोड़ देते हैं तो पर्यावरण की सुरक्षा अपने आप में हो जाती है। लोग खैनी, पान और गुटखा खाकर जहां-तहां थूकते हैं, जिससे गंदगी फैलती है। दूसरी तरफ बीड़ी, सिगरेट आदि पीकर धुआं छोड़ते रहते हैं। इससे भी पर्यावरण का नुकसान होता है। अगर लोग इन चीजों को छोड़ देंगे तो पर्यावरण की सुरक्षा खुद-ब-खुद हो जाएगी। साथ में सेहत को भी नुकसान नहीं पहुंचेगा। इसलिए तंबाकू का सेवन जितना जल्द हो सके, छोड़ ही दें। आपके साथ आपके परिवार का भी फायदा होगा। मौके पर अस्पताल प्रबंधक अमरेश कुमार, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. उमर फारुक, डॉ. शौकत अंसारी, सौरभ सुमन समेत कई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे।

उचित पोषण से बच्चों का होगा सर्वांगीण शारीरिक और मानसिक विकास 

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– जन्म के बाद छः माह तक सिर्फ माँ का दें दूध, इसके बाद अल्प ठोस आहार करें शुरू
– मसले हुए फल और सब्जियां निश्चित मात्रा और समय पर दें, पाचन तंत्र होगा मजबूत, विकसित होगा शारीरिक विकास
खगड़िया-
उचित पोषण से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास होगा और बच्चे तंदुरूस्त होंगे। इसलिए, शिशु को जन्म के पश्चात छः माह तक सिर्फ और सिर्फ माँ का ही दूध सेवन कराएं। माँ का दूध बच्चों के लिए अमृत के समान होता और स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है। माँ के दूध में मौजूद पोषक तत्व जैसे पानी, प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट मिनरल्स, वसा, कैलोरी शिशु को न सिर्फ बीमारियों से बचाते हैं, बल्कि उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं। साथ ही बच्चे की पाचन क्रिया भी मजबूत होती है। इसलिए, माँ के दूध को शिशु का प्रथम टीका कहा गया है, जो छ: माह तक के बच्चे के लिए बेहद जरूरी है। वहीं, छ: माह के बाद बच्चे के सतत विकास के लिए ऊपरी आहार की जरूरत पड़ती है। लेकिन, इस दौरान यह ध्यान रखना सबसे ज्यादा जरूरी हो जाता है कि उसे कैसा आहार दें।
– माँ का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार, ठोस आहार देती है मजबूती :
माँ और शिशु के बेहतर स्वास्थ्य के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। बच्चे के लिए माँ के दूध के साथ पोषण से भरे आहार के बारे में लोगों को जानकारी दी जा रही है। घर और परिवार के सदस्यों को बताया जा रहा है कि छ: माह के बाद शिशु को माँ के दूध के अलावा ठोस और ऊपरी आहार देना शुरू कर देना चाहिए। इस दौरान शुरू किया गया बेहतर पोषण आहार शिशु को स्वस्थ, मजबूत और खुशहाल बनाता है। हालाँकि, इस दौरान भोजन की मात्रा कितनी होनी चाहिए और बच्चे को क्या खिलाना है, यह भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस वक्त मां और अभिभावक को सावधानी से यह फैसला लेना होता है कि उन्हें अपने शिशु के लिए कैसा ठोस खाद्य पदार्थ देना शुरू करना चाहिए, जो उसके पाचन शक्ति और स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखें।
– मसली हुई सब्जियां और फल देकर देखें बच्चे की प्रतिक्रिया :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, छ: माह बाद बच्चे को स्तनपान कराने के साथ धीरे-धीरे तरल ठोस खाद्य पदार्थ देना चाहिए। बच्चे के पाचन में प​रेशानी न हो और उसे ग्रहण कर लें। इसलिए, उसे धीरे-धीरे मसले हुए फल और सब्जियां देना शुरू करें। बच्चा जैसे-जैसे दिलचस्पी लेना शुरू करे ठोस खाद्य पदार्थ देना शुरू करें। हर सप्ताह में वृद्धि के अनुसार शिशु को रोजाना एक नए प्रकार का आहार देना आरंभ करें। अनाज के बाद जहाँ तक संभव हो बच्चे को मसली हुई सब्जियां और फल देकर देखें कि वह किस तरह की प्रतिक्रिया देता है। यदि बच्चे ने ठोस खाद्य पदार्थों पर अच्छी प्रतिक्रिया दी है, तो सुनिश्चित करें कि बच्चे को विभिन्न प्रकार के ठोस खाद्य पदार्थों (जैसे, मसला हुआ, नर्म या पका हुआ और सादा आहार) का स्वाद मिलता रहे। शिशु की बढ़ती शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए, मसली हुई सब्जियां और फल लगातार दिए जा सकते हैं।
– इन लक्षणों से पता चलेगा कि बच्चा भूखा है या नहीं :
न केवल आहार देना, बल्कि इसका पता लगाना जरूरी भी है कि बच्चा भूखा है या उसका पेट भर गया है। कुछ लक्षणों से हम इसका पता लगा सकते हैं। जैसे, अधिक भूख लगने पर बच्चा रोने लगेगा। वहीं, बच्चे का मुंह को खुला रखना, उंगलियों और मुट्ठी इत्यादि को चूसने से पता चलता है कि बच्चा और अधिक खाना चाहता है या भूखा है। वहीं, जब बच्चा पर्याप्त खा चुका होगा तो वह अपना मुंह बंद कर लेगा या सिर दूसरी ओर घुमा लेगा। साथ ही पेट भरने पर बार-बार भोजन देने पर लेने से इनकार भी करेगा।
– यह है बच्चे की आहार प्रणाली
– बच्चे के छह माह के होने के बाद से उसे हल्का ऊपरी आहार देना शुरू करें।
– शुरू में नरम खिचड़ी, दाल-चावल व हरी सब्जियां जैसे मसला हुआ आहार दें।
– 7 से 8 माह तक के बच्चों को दो कटोरी, 9-11 महीने के बच्चों को तीन कटोरी  और 12 से 24 माह तक के बच्चों को 4-5 कटोरी अच्छी तरह से कतरा व मसला हुआ आहार दें।