चुनौतियों के बावजूद अपने कर्तव्य पथ पर अनवरत सेवा दे रही एएनएम कुमारी अंजना

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– स्वास्थ्य और कोविड दोनों क्षेत्रों में पूरी मुस्तैदी के साथ कर रही अपनी जिम्मेदारी का  निर्वहन
– पीएचसी आने वाली सभी प्रसूताओं को परिवार के सदस्य समझ उपलब्ध करा रही बेहतर स्वास्थ्य सुविधा
खगड़िया, 24 मई-
चिकित्सा व्यवस्था की रीढ़ की हड्डी कही जाने वाली एएनएम (नर्स) के बिना चिकित्सकीय व्यवस्था संभाल पाना मुश्किल है। वैसे तो शुरू ही एएनएम की जिम्मेदारी चुनौतीपूर्ण रही है। किन्तु, वर्ष 2020 में शुरू हुए कोविड के दौर से जिले में तैनात तमाम एएनएम की जिम्मेदारी और बढ़ गई तथा कार्य भी काफी चुनौतीपूर्ण हो गया। इस दौरान एएनएम को तमाम चुनौतियों और कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ा। किन्तु, इन चुनौतियों और कठिनाइयों को दरकिनार कर जिले की एएनएम सकारात्मक उम्मीद के साथ अपने कर्तव्य पथ पर पूरी मुस्तैदी के साथ अग्रसर हैं। ताकि लोगों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा सके और लोग स्वास्थ्य सुविधा से वंचित नहीं रहें। ऐसे ही कर्मियों में परबत्ता सीएचसी की एएनएम कुमारी अंजना का नाम जिले में शुमार है। अंजना, यूँ तो परबत्ता सीएचसी के अधीनस्थ सिराजपुर गाँव में संचालित स्वास्थ्य उपकेंद्र में तैनात है। किन्तु, ये अपने कार्य क्षेत्र के साथ-साथ सीएचसी मुख्यालय में प्रसव कक्ष में अनवरत सेवा दे रही है। इसके अलावा अपने क्षेत्र में कोविड वैक्सीनेशन और नियमित टीकाकरण में भी लगातार कार्य कर रही है। वह अपने कर्तव्य पथ पर बगैर थकी लोगों को लगातार बेहतर स्वास्थ्य सेवा दे रही है। इतना ही नहीं, वैक्सीनेशन के साथ-साथ लोगों को वैक्सीन लेने के लिए प्रेरित भी कर रही हैं। इसके लिए वह समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच कर लोगों को वैक्सीन की सही जानकारी, वैक्सीन लेने के फायदे समेत अन्य आवश्यक और जरूरी जानकारियाँ भी दे रहीं हैं। ताकि लोग अफवाहों से बाहर आकर वैक्सीन लें और जल्द से जल्द शत-प्रतिशत योग्य लाभार्थियों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके।
– मुश्किल वक्त में सकारात्मक परिणाम की उम्मीद के साथ कर्तव्य पथ पर डटी रही :
एएनएम अंजना बताती हैं कोविड के शुरुआती दौर में वक्त जरूर मुश्किल से भरा था, पर मेरी जिम्मेदारी बड़ी थी। इसलिए, सकारात्मक परिणाम की उम्मीद के साथ अपने कर्तव्य पथ पर डटी रही । इस दौरान तमाम चुनौतियों का सामना करना पड़ा। दरअसल, जिले में वैक्सीनेशन अभियान के साथ अफवाहों का भी दौर शुरू हो गया था, जो ना सिर्फ मेरे लिए बल्कि पूरे सिस्टम के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों के रूप उभर कर सामने आया। किन्तु, तमाम स्वास्थ्य कर्मी इसे चुनौती नहीं, बल्कि अवसर समझकर अपने कर्तव्य पथ पर डटे रहे। जिसका परिणाम यह रहा कि लोगों में वैक्सीन के प्रति विश्वास बढ़ा और अब लोग खुद वैक्सीन लेने के प्रति आगे आने लगे हैं। इससे ना सिर्फ वैक्सीनेशन अभियान को गति मिली, बल्कि लोगों के सकारात्मक सहयोग से अफवाहों को भी मात मिली।
– प्रसूति महिलाओं को परिवार के सदस्य समझ दे रही बेहतर स्वास्थ्य सेवा :
परबत्ता सीएचसी प्रभारी डाॅ राजीव रंजन ने बताया, एएनएम कुमारी अंजना अपने कार्य क्षेत्र के साथ सीएचसी के प्रसव कक्ष में बेहतर स्वास्थ्य सेवा दे रही हैं। ये प्रसव के लिए सीएचसी आने वाली सभी प्रसूताओं को अपने परिवार का सदस्य समझ सीएचसी स्तर पर  मिलने वाली तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं। प्रसव के दौरान प्रसूति महिलाओं को किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो, इस बात का विशेष ख्याल रखती है। साथ प्रसव होने के बाद प्रसूताओं को  खुद और नवजात के लिए किन-किन बातों का ख्याल रखना है, खान-पान, बतरी जाने वाली सावधानियाँ, नियमित टीकाकरण समेत अन्य जानकारियाँ भी उपलब्ध कराती हैं।
– पाँच हजार से अधिक लोगों का कर चुकी हैं वैक्सीनेशन :
परबत्ता सीएचसी में तैनात केयर इंडिया के प्रखंड प्रबंधक गोपाल शर्मा समेत अन्य चिकित्सकों ने बताया, अंजना हमेशा अपने कार्य के प्रति मुस्तैद और सजग रहती हैं। वह तमाम चुनौतियों के बाबजूद कभी अपने कर्तव्य पथ पर नहीं थकी और पूरी मुस्तैदी के साथ डटी रही। जिसका सकारात्मक परिणाम यह रहा कि अंजना की इस पहल का लोगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा और अफवाहों को मात मिली। वह अबतक पाँच हजार से अधिक योग्य लाभार्थियों का वैक्सीनेशन कर चुकी है ।  एक भी व्यक्ति  वैक्सीन लेने से वंचित नहीं रहें, इसके लिए हमेशा तत्पर रहती है।

कोरोना काल मे विपरीत परिस्थितियों में बेहतर कार्य करने का मिला अनुभव: आज़ाद

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सासाराम/ 24 मई-
कोरोना संक्रमण माहमारी ने विपरीत परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारी व दायित्व निभाने में लोगों को एक नई सोच व राह दिखाई है जो अब किसी भी परिस्थितियों से निपटने के लिए मील का पत्थर साबित होगा। खास कर स्वास्थ्य विभाग के लिए कोरोना संक्रमण ने एक नया मार्ग प्रशस्त किया है कि किस तरह से हर समुदाय के लोगों तक पहुँच कर स्वास्थ्य सुविधा उप्लब्ध करायी जाए। खास कर रोहतास जिले में जो भौगोलिक स्थित है उस स्थिति में जिले के प्रत्यके लोगों तक पहुँच कर सुविधा पहुँचाना अपने आप में एक उपलब्धि ही माना जा सकता है।  रोहतास प्रखण्ड भी उन्ही में से एक है जहां कई गांव हज़ारों फिट ऊपर पहाड़ों पर बसे है और आवा गमन भी काफी कठिनाईयों से भरा हुआ है। उस स्थिति में भी पहाड़ पर बसे लोगों को कोरोना काल से लेकर अब तक सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। रोहतास प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के बीसीएम आज़ाद कुमार कोरोना काल से लेकर अभी तक उक्त पहाड़ पर बसे लोगों के बीच पहुँच कर सभी गतिविधियों को पूरा करने में अपने टीम के साथ बेहतर भूमिका निभा रहे हैं।
रात भर अभियान चला कर लोगों को किया गया टीकाकृत:
बीसीएम आज़ाद कुमार ने बताया कि कोरोना काल एक ऐसा वक्त था जो यह सीखा गया कि एक स्वास्थ्य कर्मी के दायित्व की कोई सीमा नहीं होती है। संक्रमण के भय के साये में रह कर दुसरो की जिंदगी बचाना एक बेहतर खुशी देने वाला अनुभव रहा है। उन्होंने बताया कि पहाड़ पर बसे नागाटोली, बुधुआ कला एवं तारडीह कुछ ऐसे गावँ थें जहाँ पहुंचने में तीन से चार घण्टा का समय लग जाता था ऐसे में वहां रात में रुक कर लोगों को कोरोना का जांच से लेकर टीकाकरण तक किया गया। उन्होंने बताया कि किसी किसी गाँव मे बिजली की व्यवस्था नही होती थी उस परिस्थिति में अपने वाहन का लाइट जल कर लोगों का कोरोना जाँच किया गया एवं उनको टीकाकृत किया गया।
खुद से रास्ता बना कर पहुँचना पड़ता था गावँ में:
आज़ाद कुमार ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्र पर कुछ ऐसा गांव है जहां जाने के लिए रास्ते नहीं होते थे वहां वाहनों को पहुंचाने के लिए खुद से पत्थरों का इस्तेमाल करके रास्ता बना कर गांव में बसे लोगों तक पहुंचकर लोगों को टीकाकरण किया गया. बीसीएम ने बताया कि पहाड़ पर टीकाकरण के लिए 2 से 3 दिन तक रुकना पड़ता था ताकि सभी लोगों को टीकाकृत किया जा सके.
टीकाकरण को लेकर लोगों को समझाना होता था मुश्किल:
आजाद कुमार ने बताया कि टीकाकरण को लेकर जो लोगों के मन में भय बना हुआ था वह पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों में देखने को मिला। जितने संक्रमण से लोग भयभीत नहीं थे उससे कई ज्यादा अधिक टीका को लेकर भय देखने को मिला। इस परिस्थिति में भी लोगों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर उन्हें टीकाकृत किया गया।
कम्युनिकेशन सुविधा ना होना बन रहा था बाधा
आजाद कुमार ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्र पर कोई भी मोबाइल नेटवर्क काम नही कर रहा था। ऐसे में लोगों तक पहुंचना बहुत ही कठिन स्थिति थी। टीकाकरण से पूर्व आशा कर्मी को 1 दिन पूर्व उस गांव में भेजा जाता था. उन्होंने बताया कि वाहन कम्युनिकेशन के साथ-साथ मोबाइल कम्युनिकेश का ना होना भी हम लोगों के लिए एक चैलेंज साबित हो रहा था। बावजूद इसके जिला स्वास्थ समिति के वरीय अधिकारियों एवं आशा कर्मियों तथा टीम में शामिल है एएनएम के सहयोग से बेहतर उपलब्धि हासिल की जा सकी.

अब बेड पर देना होगा जन्म प्रमाणपत्र, व्हाट्सएप पर भेजना होगा फोटो

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-सिविल सर्जन ने जिले के सभी सरकारी अस्पतालों के प्रभारियों को किया पत्र जारी
-इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करने का दिया निर्देश, होगी कार्रवाई
  भागलपुर, 24 मई-
प्रसव के बाद प्रसूताओं को नवजातों का जन्म प्रमाणपत्र लेने के लिए अब भटकना नहीं पड़ेगा, बल्कि अस्पताल से छुट्टी के वक्त ही उन्हें दे दिया जाएगा। इसे लेकर सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने जिले के सभी अस्पतालों के प्रभारियों को पत्र जारी करते हुए निर्देश जारी किया है। उन्होंने पत्र में स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्रसूता को जब प्रसव के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज किया जाए तो उसी वक्त नवजात के जन्म प्रमाण पत्र दे दें। साथ ही इसका फोटों खींचकर व्हाट्सएप भी करें। इसमें कोई लापरवाही नहीं चलेगी।
सिविल सर्जन डॉ. शर्मा ने कहा कि लोगों की सुविधा का ध्यान रखते हुए यह निर्देश जारी किया गया है। ऐसा कई बार देखा जाता है कि प्रसव के बाद नवजात को जन्म प्रमाणपत्र के लिए अस्पताल का चक्कर लगाना पड़ता है। ऐसा नहीं होना चाहिए। अस्पताल में अगर प्रसव होता है तो सारा रिकॉर्ड मौजूद रहता है, इसलिए इसमें देरी नहीं होनी चाहिए। आमलोगों को किसी तरह की कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए यह निर्देश जारी किया गया है।
निर्देश के पालन को लेकर की जाएगी निगरानीः पत्र में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि प्रसूताओं को अस्पताल से छुट्टी देते वक्त नवजातों को प्रमाणपत्र मिल रहा है कि नहीं, इसे लेकर निगरानी भी की जाएगी। निगरानी में किसी तरह की लापरवाही हुई तो अस्पताल के प्रभारी या फिर उपाधीक्षक जिम्मेदार होंगे। इसलिए इस व्यवस्था को सही तरीके से लागू करने में अस्पताल के प्रभारी या फिर उपाधीक्षक अपनी भूमिका निभाएं।
व्यवस्था को लगातार किया जा रहा सुदृढ़ः सदर समेत जिले के सभी अस्पतालों की व्यवस्था को आमलोगों के लिए सुविधाजनक बनाने के लिए सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा लगातार प्रयास कर रहे हैं। जिले के अस्पतालों का लगातार दौरा कर रहे हैं। वहां की व्यवस्थाओं का लगातार जायजा ले रहे हैं। अगर अस्पताल में किसी तरह की कमी रहती तो उसे सुदृढ़ करने का निर्देश देते हैं। इसके बावजूद भी अगर किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो कार्रवाई भी कर रहे हैं। इसी का नतीजा है कि जिले के सभी सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था बेहतर होती जा रही है। डॉक्टर समय से अस्पताल पहुंच रहे हैं। जो डॉक्टर समय पर ओपीडी में नहीं रहते हैं उस पर कार्रवाई से भी नहीं हिचकते हैं।

टीका देने वाली दीदी के नाम से मशहूर हैं एएनएन मीना मुर्मू

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-अमरपुर प्रखंड के सलेमपुर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में हैं तैनात
-क्षेत्र के लोगों को जागरूक कर उनका करा रहीं रूटीन टीकाकरण
बांका, 24 मई-
नौकरी के दौरान अपनी ड्यूटी तो हर कोई करता लेकिन इस दौरान जो ड्यूटी को अपना काम समझ कर करते , उनकी क्षेत्र में एक अलग पहचान बन जाती है। अमरपुर प्रखंड के सलेमपुर स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में तैनान एएनएम मीना फ्लोरा मुर्मू ऐसी ही हैं। उन्हें क्षेत्र के लगभग सभी लोग जानते हैं। बहुत से लोग तो उन्हें प्यार से टीका देने वाली दीदी के रूप में जानते हैं। क्षेत्र के लोगों को जागरूक कर रूटीन टीकाकरण कराने में तो उन्हें महारत हासिल है। आज क्षेत्र का हर कोई जानता है कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों को टीका लगना कितना जरूरी है। टीका लगने से बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। यही कारण है कि क्षेत्र के सभी लोग समय पर आकर टीका दिलवाते हैं।
मीना कहती हैं कि काम तो हर कोई करता है, लेकिन काम को अच्छे तरह से करने के लिए लोगों से जुड़ना पड़ता है। काम को जब आप अपना समझ कर करेंगे तो हर कोई उसमें सपोर्ट भी करेगा। उन्हें लगेगा कि ये तो हमारे लिए ही काम कर रहे हैं। इसलिए उनका समर्थन भी आपको मिलेगा। सबसे महत्वपूर्ण है लोगों को जागरूक करना। जब एक बार आप लोगों को जागरूक कर देते हैं तो फिर काम में तेजी आ जाती है। मैंने भी यही किया। मेरे अंदर 10 आशा कार्यकर्ता हैं। मैंने उनके जरिये क्षेत्र के एक-एक व्यक्ति  को समझा दिया कि रूटीन टीकाकरण कितना जरूरी है। अब लोग खुद से ही गर्भवती महिलाओं और बच्चों को लाकर टीका दिलवाने के लिए आते हैं।
अमानत से हैं प्रशिक्षितः मीना मुर्मू अमानत से प्रशिक्षित हैं। इस वजह से संस्थागत प्रसव कराने में भी उन्हें महारत हासिल है। इससे पहले छपरा में पोस्टिंग थी। 2000 में नौकरी शुरू की। अमनौर और एकमा प्रखंड में योगदान देने के बाद 2010 से बांका जिले में काम कर रही हैं। यहां भी पांच सौ से अधिक संस्थागत प्रसव करा चुकी हैं। मीना कहती हैं कि क्षेत्र के लोगों को जब मैं आशा कार्य़कर्ता के जरिये टीकाकरण को लेकर जागरूक करती हूं तो उन्हें उस दौरान संस्थागत प्रसव के बारे में भी बताती हूं। उन्हें समझाती हूं कि यह कितना जरूरी और फायदेमंद है। इसका सकारात्मक असर पड़ा है। क्षेत्र के लोग अधिक-से-अधिक संख्या में अमरपुर रेफरल अस्पताल आकर ही प्रसव कराते हैं। इसका लोगों को फायदा भी मिल रहा है।
क्षेत्र में परिवार नियोजन की अलख जला रहीं मीनाः अमरपुर रेफरल अस्पताल के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि बेहतर सेवा देने के लिए जरूरी है कि हर स्तर पर मेहनती और ईमारदार कर्मी हों। मीना उन्हीं में से एक हैं। दिनभर अपने क्षेत्र में रहती हैं। आशा कार्यकर्ताओं के जरिये क्षेत्र के एक-एक लोगों के बारे में जानकारी रखती हैं। किसे कब टीके पड़ेगा, इससे वह अवगत रहती हैं। यही कारण है कि वह अपना काम बेहतर तरीके से कर पाती हैं। इसका फायदा क्षेत्र के लोगों को भी मिल रहा है।

जरूरतमंदों को आरबीएसके टीम की सहयोग से मिल रही है बेहतर स्वास्थ्य सुविधा

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– आरबीएसके के माध्यम से मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत हृदय रोग से पीड़ित बच्चों का हो रहा है समुचित इलाज
– कोविड के दौर में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने में निभाई अग्रणी भूमिका
लखीसराय, 23 मई-
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) बच्चों को सुविधाजनक तरीके से समुचित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए एक नई पहल है। जिसके माध्यम से जिले में पीएचसी से लेकर जिला स्तर पर तैनात आरबीएसके टीम के सहयोग से जरूरतमंद बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल रही है। आरबीएसके में शामिल मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत जिले में हृदय रोग से पीड़ित बच्चों का समुचित इलाज हो रहा और पीड़ित बच्चे स्वस्थ्य भी हो रहें हैं, जो आरबीएसके टीम की सकारात्मक पहल का परिणाम है। इसके लिए जिले में पीएचसी से लेकर जिला स्तर के अस्पतालों में तैनात आरबीएसके टीम क्षेत्र भ्रमण कर ऐसे बच्चों को ना सिर्फ चिह्नित कर रहे हैं। बल्कि, उसका निःशुल्क समुचित इलाज भी सुनिश्चित करवा रहे हैं। ताकि पीड़ित बच्चे को सुविधाजनक तरीके से सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं का लाभ मिल सके और लोगों में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं के प्रति विश्वास बढ़े तथा उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी मिल सके। वहीं, सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी भी दी जा रही और लाभ लेने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है। जिससे अधिकाधिक लोग सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का सुविधाजनक तरीके से लाभ ले सकें और अनावश्यक परेशानियाँ से दूर रहें।
– कोविड के दौर में भी आरबीएसके टीम का रहा है सराहनीय योगदान :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र कुमार चौधरी ने बताया, कोविड के दौर में आरबीएसके टीम का सराहनीय योगदान रहा है। कोविड जैसे घातक महामारी के दौर में जहाँ लोग अपनों से भी परहेज कर रहे थे वहीं, आरबीएसके की टीम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने में अग्रसर थी। कोविड पीड़ित मरीजों की ट्रेसिंग, दवाई मुहैया कराने समेत कोविड से संबंधित अन्य कार्यों में भी आरबीएसके टीम की अहम योगदान रहा है। इसके अलावा वर्तमान दौर में भी लोगों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जा सके, इसके लिए आरबीएसके की टीम लगातार क्षेत्र भ्रमण कर जरूरतमंदों को चिह्नित कर समुचित स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने में अग्रसर है।
– प्रखंड से लेकर जिला स्तर पर हमारी टीम कर रही है कार्य :
आरबीएसके के कंसल्टेंट डाॅ शिव शंकर कुमार ने बताया, समाज के अंतिम व्यक्ति को भी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके, इसके लिए हमारी टीम इलाके का भ्रमण कर जरूरतमंदों को चिह्नित कर उन्हें सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करती है। यही नहीं, जरूरतमंदों को सरकारी स्वास्थ्य आने से लेकर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने तक हमारी टीम जरूरी सहयोग भी करती है। ताकि लोगों को सरकारी स्वास्थ्य सेवा का लाभ लेने में किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और सभी लोगों को सुविधाजनक तरीके से सरकारी स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिल सके। वहीं, उन्होंने बताया, जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में हमारी टीम तैनात है। जिसमें दो चिकित्सक, एक एएनएम और फर्मासिस्ट शामिल हैं। वहीं, उन्होंने कहा, मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि जिनका भी बच्चा हृदय रोग से पीड़ित हैं, वह अपने स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र आकर हमारी टीम को सूचना दें। उनके बच्चे का पूरी तरह निःशुल्क समुचित इलाज करवाया जाएगा।
– जानें क्या है आरबीएसके का उद्देश्य :
आरबीएसके का उद्देश्य जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों में विशिष्ट रोग सहित 4डी अर्थात चार प्रकार की परेशानियों के लिए शीघ्र पहचान और प्रारंभिक हस्तक्षेप करना है। जिसमें जन्म दोष, बीमारी, कमी और विकलांगता सहित विकास में रुकावट की जाँच शामिल है। ऐसे पीड़ित को चिह्नित कर उसे समुचित स्वास्थ्य सुविधाओं उपलब्ध कराई जाती है।

मुंगेर जिले में 0 से 5 साल तक के बच्चों को दी जायेगी दो बूंद जिंदगी की

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-पल्स पोलियो अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रखंड स्तर पर आयोजित होगा प्रशिक्षण कार्यक्रम
मुंगेर, 23 मई।19 जून से जिले भर में पोलियो अभियान चला कर नौनिहालों को पल्स पोलियो की खुराक दी जायेगी ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके। पल्स पोलियो अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षण सहित अन्य तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। अभियान के सफल संचालन के लिए प्रखंड स्तर पर प्रशिक्षण शुरू किया जायेगा।
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. राजेश कुमार रौशन ने बताया कि अभियान के सफलतापूर्वक संचालन को लिए गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके बाद पोलियोकर्मी यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी बच्चा पोलियो की खुराक लेने से वंचित न रहे। उन्होंने बताया कि पोलियोकर्मी अपने कार्यक्षेत्र में शतप्रतिशत पोलियो की खुराक पिलाने के साथ ही कोविड टीकाकरण करवाने के लिए भी लोगों को प्रेरित करेंगे। इसके साथ ही पोलियो चक्र में नियुक्त सभी सदस्य कोविड सुरक्षा मानकों का ध्यान रखते हुए पांच साल से कम उम्र के सभी बच्चों को ‘दो बूंद जिंदगी की’ यानि पोलियो की खुराक देना सुनिश्चित करेंगे।
मुख्य टांजिट स्थलों पर प्रतिनियुक्त होंगे कर्मी:
उन्होंने बताया कि अभियान के सफल संचालन के लिए प्रखंड स्तर पर बीडीओ तथा सीडीपीओ की सहभागिता के साथ प्रखंड टास्क फोर्स की बैठक की जानी है। अभियान के पूर्व सभी स्तर पर कार्यरत टीकाकर्मियों एवं पर्यवेक्षकों का शतप्रतिशत प्रशिक्षण किया जाना है । सभी दलकर्मियों को पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध कराना सुनिश्चित करना है। मुख्य ट्रांजिट स्थलों पर प्रशिक्षित टीकाकर्मियों को नियुक्त कर लक्षित बच्चों को पोलियो की खुराक देना सुनिश्चित किया जाना है।
विशेष निगरानी दल होगा गठित :
उन्होंने बताया कि पल्स पोलियो अभियान के दौरान नवजात शिशुओं को पोलियो की खुराक पिलाये जाने पर विशेष ध्यान देने और खुराक पिलाने के पश्चात नियमित टीकाकरण के ड्यू लिस्ट में इन्हें शामिल करने संबंधी निर्देश दिये गये हैं। अभियान के दौरान किसी भी परिस्थिति में ईंट भट्ठा, प्रवासी व भ्रमणशील आबादी आदि के बच्चे पोलियो की खुराक लेने से वंचित नहीं रहें इसके लिए विशेष निगरानी दल गठित कर पोलियो की खुराक देनी है। पल्स पोलियो के राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान के दौरान मास्क, ग्लब्स आदि का इस्तेमाल कर कोविड प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन करना है।

स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ताओं का छः  दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शुरू 

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– जिले के परबत्ता सीएचसी में स्वास्थ्य विभाग व केयर के संयुक्त तत्वावधान में प्रशिक्षण
– एक बैच में खगड़िया सदर पीएचसी की चयनित 30 आशा कार्यकर्ता और 02 फैसिलिटेटर प्रशिक्षण में हुए शामिल
खगड़िया, 23 मई-
जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ताओं का मॉड्यूल 05, 06 एवं 07 के चतुर्थ चरण का छः दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण सोमवार से शुरू हो गया। प्रशिक्षण का शुभारंभ स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में जिले के परबत्ता सीएचसी में हुआ। जिसमें आशा कार्यकर्ताओं को लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने समेत स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी अन्य सेवाओं के क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। ताकि आशा कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन बेहतर तरीके से कर सकें और समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा का लाभ पहुँचा सके। साथ ही लोगों को स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ सके और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिलना सुनिश्चित हो सके। यह प्रशिक्षण केयर इंडिया के प्रखंड प्रबंधक गोपाल शर्मा, प्रशिक्षक धीरज कुमार और नवनीत कुमार दिया जा रहा है।
– 30 आशा कार्यकर्ता और 02 फैसिलिटेटर को दिया जा रहा है प्रशिक्षण :
प्रशिक्षक सह केयर इंडिया के प्रखंड प्रबंधक गोपाल शर्मा ने बताया यह छः दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण बैच वाइज चयनित आशा एवं फैसिलिटेटर को दिया जा रहा है। जिसमें खगड़िया सदर पीएचसी की 30 आशा कार्यकर्ता और 02 फैसिलिटेटर को चयनित कर शामिल किया गया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी सभी सेवाओं का आशा कार्यकर्ता को विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराना। ताकि वह अपने क्षेत्र के लोगों को सुविधाजनक तरीके से बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करा सके और लोगों को भी सरकार द्वारा चलाई जा रही तमाम स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी मिल सके।
– 28 मई तक चलेगा प्रशिक्षण :
प्रशिक्षक नवनीत कुमार ने बताया  प्रशिक्षण का शुभारंभ सोमवार को हुआ व समापन 28 मई को होगा। यह प्रशिक्षण पूर्णतः आवासीय है। यानी सभी प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले लाभार्थी प्रशिक्षण स्थल पर रहकर प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। सभी लाभार्थियों के लिए प्रशिक्षण स्थल पर रहने, खाना-पीना समेत अन्य सभी व्यवस्थाएं की गई है। ताकि लाभार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो और सभी लोग सुविधाजनक तरीके से प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें।

कोरोना का टीका लेने से लोग कतराते थे, आज पूरी पंचायत का हो गया है टीकाकरण

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-बलियामहरा एपीएचसी में तैनात एएनएम ज्योति प्रिया की मेहनत ने लाया रंग
-लोगों को स्वास्थ्य़ के प्रति जागरूक करने में निभा रही हैं अपनी अहम भूमिका
बांका, 23 मई।
कोरोना की तीन लहर खत्म हो चुकी है। इससे निपटने में आमलोगों ने तो अपनी भूमिका निभाई ही है। साथ में स्वास्थ्यकर्मियों ने भी इसमें अपना अहम योगदान दिया है। कोरोना से लोगों को बचाने में स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही। खासकर जांच और टीकाकरण कराने में। इसमें महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने भी बढ़-चढ़कर अपनी भूमिका निभाई। लोगों की कोरोना जांच से लेकर टीकाकरण तक में महत्वपूर्ण योगदान दिया। बलियामहरा एपीएचसी में तैनात एएनएम ज्योति प्रिया भी इनमें से एक हैं।
 2020 में जब से कोरोना काल शुरू हुआ है, तब से वह अपनी भूमिका निभा रही हैं। कोरोना की जब शुरुआत हुई थी तो नाम सुनकर भी लोग डरते थे, लेकिन ज्योति प्रिया उसी समय से जांच से लेकर टीकाकरण तक में बढ़-चढ़कर अपनी भूमिका निभा रही हैं। जब कोरोना टीकाकरण की शुरुआत हुई तो उसमें भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीकाकरण में उनके योगदान का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बलियामहरा पंचायत में लगभग सभी लोगों को कोरोना का टीका लग चुका है। अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र होने के बावजूद उन्होंने सभी लोगों को टीका लेने के लिए मना लिया। पंचायत के लोग पहले कोरोना का टीका लगाने से कतराते थे, लेकिन आज के समय में पूरी पंचायत का हो गया है टीकाकरण।
एक ही व्यक्ति के पास बार-बार जाकर किया जागरूकः ऐसा नहीं था कि सभी लोग राजी-खुशी से टीका लेने को तैयार थे। ज्योति प्रिया कहती हैं, शुरुआत में लोग बिल्कुल भी टीका नहीं लेना चाहते थे। उनके मन में तमाम तरह की आशंकाएं थी, जिसे दूर किया गया। तब जाकर लोगों ने कोरोना का टीका लिया। कई लोग तो ऐसे भी थे जो साफतौर पर टीका लेने से मना कर रहे थे, लेकिन एक ही व्यक्ति के पास बार-बार जाकर उन्हें टीका लेने के लिए मनाया। आज इसका परिणाम भी दिख रहा है। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि ज्योति प्रिया की सबसे अच्छी बात यह है कि जो भी काम देते हैं, उसे पूरी मेहनत और लगन के साथ करती है। इसी का परिणाम है कि शत-प्रतिशत परिणाम मिलता है। चाहे कोरोना हो या नियमित टीकाकरण, दोनों में उसका काम सराहनीय है।
नियमित टीककारण के लिए भी लोगों को किया जागरूकः ज्योति प्रिया की बलियामहरा एपीएचसी में तैनाती 2019 में हुई है। इससे पहले 2014 से लेकर 19 तक धोरैया पीएचसी में तैनात थी। जब ज्योति प्रिया बलियामहरा आई थी तो उस वक्त यहां पर नियमित टीका लेने से भी लोग कतराते थे। गर्भवती महिलाएं तो खुद टीका लेने से बचती ही थीं, साथ में बच्चों को भी टीका दिलवाने से परहेज करती थी। लेकिन ज्योति प्रिया ने हार नहीं मानी और काउंसिलिंग के जरिये लगातार लोगों को जागरूक करने का काम करती रहीं। आज बलियामहरा पंचायत के लोग नियमित से लेकर कोरोना टीकाकरण को लेकर काफी सजग हैं। पंचायत के लोगों में स्वास्थ्य के प्रति गजब की जागरूकता आई है।

टीबी मरीजों को दवा खाने के बाद परेशानी हो तो डॉक्टर से सलाह लें

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-टीबी मरीजों को दी गई सलाह, बीच में नहीं छोड़ें टीबी की दवा
-कहलगांव अनुमंडल अस्पताल में टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की बैठक
भागलपुर, 23 मई –
कहलगांव अनुमंडल हॉस्पिटल में सोमवार को टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की बैठक हुई। बैठक का आयोजन कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीची) ने स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से किया। इस दौरान कुल 22 टीबी मरीज और 17 देखभाल करने वाले और दो टीबी चैंपियन उपस्थित हुए। बैठक में सभी टीबी मरीज की परेशानी का समाधान अस्पताल प्रभारी डॉ. विवेकानंद ने किया। इस दौरान नियमित दवा का सेवन करने की सलाह दी गई औऱ बीच में दवा नहीं छोड़ने की अपील की गई। दवा खाने के बाद किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर डॉक्टर की सलाह लेने के लिए बताया गया। साथ ही पोषण युक्त भोजन, शराब का सेवन नहीं करने और मरीज को मिलने वाली राशि के बारे में बताया गया। बैठक में धीरज कुमार मिश्रा भी उपस्थित थे।
डॉ. विवेकानंद ने कहा कि टीबी मरीजों से समाज के लोगों को किसी तरह का भेदभाव नहीं करना चाहिए। लोगों को टीबी मरीजों के इलाज में सहयोग करना चाहिए। अगर हमलोग इलाज में सहयोग करेंगे तो जल्द से जल्द समाज टीबी से मुक्त होगा। इसलिए मरीजों के इलाज के लिए लोगों को आगे आना चाहिए। जागरूक लोगों को टीबी मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में बात करनी चाहिए। मानसिक तौर पर मरीजों का सहयोग करना चाहिए। टीबी के लक्षण दिखे तो तत्काल जांच कराएं। जांच में अगर पुष्टि हो जाती है तो दवा का सेवन शुरू कर दें। टीबी का इलाज सरकार की तरफ से बिल्कुल ही मुफ्त है और यह सभी तरह के सरकारी अस्पताल में होता ।
जिनके घर में मधुमेह के मरीज, वे रहें सावधानः डॉ. विवेकानंद ने कहा कि आजकल अधिकतर घरों में मधुमेह के मरीज देखे जा रहे हैं। इस वजह से लोग संतुलित आहार लेते हैं। लोग पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक आहार नहीं ले पाते हैं। इससे भी लोग टीबी की बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। इसलिए अगर किसी के घर में मधुमेह के मरीज हों तो डॉक्टर से पूछकर अपना आहार तालिका बनाएं, ताकि कुपोषण का शिकार होने से बचें और टीबी जैसी बीमारी से बचाव हो सके।
बच्चों के पोषण पर दें ध्यानः डॉ. विवेकानंद ने बताया कि टीबी को लेकर बच्चों को काफी सतर्क रहने की जरूरत है। बच्चे के पोषण में अगर कमी हो जाए तो उसे आसानी से टीबी अपनी चपेट में ले लेता है। इसलिए कम बच्चे ही अच्छे होते हैं। अगर आपके कम बच्चे होंगे तो उसका सही से ध्यान रख पाएंगे। उसके पोषण के प्रति जागरूक रहेंगे और वह टीबी समेत दूसरी बीमारियों से बचा रहेगा।
टीबी के लक्षण
1. दो हफ़्ते या अधिक खांसी आना- पहले सूखी खांसी तथा बाद में बलगम के साथ खून का आना।
2. रात में पसीना आना-चाहे मौसम ठंडे का क्यों न हो।
3. लगातार बुखार रहना
4.थकावट होना
5.वजन घटना
6.सांस लेने में परेशानी होना
बचाव के तरीके-
1. जांच के बाद टीबी रोग की पुष्टि होने पर दवा का पूरा कोर्स लें।
2. मास्क पहनें तथा खांसने या छींकने पर मुंह को पेपर नैपकीन से कवर करें।
3.मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूकें।
4.मरीज हवादार और अच्छी रौशनी वाले कमरे में रहें। एसी से परहेज करें।
5. पौष्टिक खाना खाएं। योगाभ्यास करें।
6. बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तम्बाकू, शराब आदि से परहेज करें।
7.  भीड़भाड़ वाली गंदी जगहों पर जानें से बचें।

सिविल सर्जन ने की मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की समीक्षात्मक बैठक 

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–  स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी व  सहयोगी स्वास्थ्य संगठन के पदाधिकारी बैठक में हुए शामिल
– सिविल सर्जन कार्यालय परिसर में सिविल सर्जन की अध्यक्षता में बैठक
खगड़िया, 21 मई-
शनिवार को सिविल सर्जन कार्यालय परिसर में सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा की अध्यक्षता में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की एक समीक्षात्मक बैठक हुई। जिसमें जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के अलावा केयर इंडिया, पिरामल स्वास्थ्य समेत अन्य सहयोगी स्वास्थ्य संगठन के पदाधिकारी और कर्मी शामिल हुए। बैठक के दौरान सिविल सर्जन ने मौजूद सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से बारी-बारी से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर से संबंधित आवश्यक जानकारी ली। जिसके बाद आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इसके अलावा मातृ एवं मृत्यु दर पर किस तरह सर्विलांस रिपोर्टिंग हो, इस पर विस्तृत चर्चा की गई। इस मौके पर जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान, खगड़िया सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डाॅ योगेन्द्र नारायण प्रेयसी, डीपीएम (हेल्थ) पवन कुमार, केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद, पिरामल स्वास्थ्य के डीपीएल प्रफुल्ल झा आदि मौजूद थे।
– मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी :
बैठक के दौरान सिविल सर्जन ने कहा, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने, अर्थात रोकने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। इसलिए, ऐसी घटना के कारणों की लोगों को जानकारी उपलब्ध कराएं और उन्हें बचाव के लिए आवश्यक जानकारी दें। ताकि घटना की पुनरावृत्ति नहीं हो और मातृ-मृत्यु दर पर विराम सुनिश्चित हो सके। वहीं, उन्होंने बताया, इसको लेकर सरकार द्वारा तमाम कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। ताकि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो सके और लोगों में जागरूकता आ सके। वहीं, उन्होंने कहा, मातृ एवं शिशु मृत्यु की रिपोर्टिंग भी सुनिश्चित रूप से करें। ताकि घटना के कारणों की जानकारी मिल सके और फिर कारणों को दूर करने के लिए आवश्यक पहल की जा सके।
– मातृ-मृत्यु दर रोकने के लिए किए जा रहे हर जरूरी प्रयास :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने कहा, हर हाल में शिशु एवं मातृ मृत्यु दर को रोकने के लिए हर जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं। सुमन कार्यक्रम के तहत शत-प्रतिशत मातृ मृत्यु दर की रिपोर्टिंग का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सबसे पहले मातृ-मृत्यु की सूचना देने वाले व्यक्ति को एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में दिया जाता है। जबकि, मृत्यु के 24 घंटे के अंदर स्थानीय पीएचसी में सूचना देने पर आशा कार्यकर्ता को दो सौ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके अलावा इस संबंध में किसी प्रकार की परेशानियाँ होने पर 104 टाॅल फ्री नंबर काॅल कर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
– उचित स्वास्थ्य प्रबंधन जरूरी :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए बेहतर प्रसव एवं उचित स्वास्थ्य प्रबंधन जरूरी है। प्रसव पूर्व जाँच से ही गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की सही जानकारी मिलती है। गर्भावस्था में बेहतर शिशु विकास एवं प्रसव के दौरान होने वाले रक्तस्राव के प्रबंधन के लिए महिलाओं में पर्याप्त मात्रा में खून होना आवश्यक होता है। जिसमें प्रसव पूर्व जाँच की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। एनीमिया प्रबंधन के लिए प्रसव पूर्व जाँच के प्रति महिलाओं की जागरूकता न सिर्फ एनीमिया रोकथाम में सहायक होती बल्कि, सुरक्षित मातृत्व की आधारशिला भी तैयार करती है। ऐसे में प्रसव पूर्व जांच की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है, क्योंकि यह मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए, महिलाओं को इसके जागरूक करने की जरूरत है। क्योंकि, मातृ-मृत्यु दर को कम करने, अर्थात रोकने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है।
– जानें क्या है मैटरनल डेथ सर्विलांस एंड रेस्पांस प्रक्रिया :
यह एक प्रकार का मातृ मृत्यु के कारणों की पहचान, सूचित एवं समीक्षा करने की एक लगातार प्रक्रिया है। इसके जरिये कारणों का पता चलने के बाद आवश्यक उपाय करने के साथ देखभाल की गुणवत्ता में सुधार लाकर भविष्य में होने वाली मातृ मृत्यु दर में कमी लायी जा सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार प्रति वर्ष 2.7 करोड़ से अधिक नवजात बच्चों की मौत 7 दिनों के अंदर और 2.6 करोड़ से अधिक नवजात बच्चों की मौत उसके जन्म से 28 दिनों के अंदर हो जाती है।