इस मौसम में टायफाइड को लेकर रहें सतर्क

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– दूषित पानी पीने और संक्रमित भोजन करने से होता है टायफाइड
– अधिक दिनों तक लगातार बुखार रहने पर खून की करा लें जांच
मुंगेर, 21 मई-
इस मौसम में कई तरह की वेक्टर जनित बीमारियों के होने का खतरा रहता है। डायरिया, डेंगू, चिकनगुनिया से लेकर अभी कोरोना तक का खतरा लोगों पर बना हुआ है, लेकिन टायफाइड को लेकर अभी ज्यादा सतर्क रहते हुए सेहत पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके लिए स्वच्छ पानी और भोजन का सेवन जरूरी है। गंदा पानी व भोजन के सेवन से कई प्रकार की पेट संबंधी बीमारियां होती हैं। इनमें एक बीमारी टायफाइड भी है जो दूषित पानी व संक्रमित भोजन के सेवन से होता है। गर्मी और बरसात के मौसम में पानी व भोजन का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। ऐसे मौसम में टायफाइड यानी मियादी बुखार के मरीज अधिक मिलते हैं। टायफाइड सालमोनेला टाइपी नामक बैक्टीरिया से फैलने वाला एक गंभीर रोग है। यह बैक्टीरिया दूषित पानी एवं संक्रमित भोजन में पनपते हैं।
गंदे परिवेश वाली जगहों पर टायफाइड फैलने की संभावना अधिक होती है, लिवर में हो जाती है सूजन :  वेक्टर डिजीज कंट्रोलिंग ऑफिसर संजय कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि दूषित पानी व संक्रमित भोजन के सेवन से व्यक्ति मियादी बुखार से ग्रसित हो जाता है। टायफाइड के कारण लिवर में सूजन हो जाती है। ऐसे में साफ पानी और भोजन का ध्यान रखना जरूरी है। सब्जियों का सही से नहीं धोना, शौचालय का इस्तेमाल नहीं होना और खुले में मलमूत्र त्याग करना, खाने से पहले हाथों को नहीं धोना, आदि कई कारणों से टायफाइड हो सकता है। इसके साथ ही तेज बुखार के साथ दस्त व उल्टी का होना, बदन में दर्द रहना, कमजोरी और भूख नहीं लगना टाइफाइड के प्रमुख लक्षण हैं। इसके अलावा इस बीमारी में पेट, सिर और मांसपेशियों में भी दर्द रहता है।
पाचन तंत्र को बुरी तरह से करता है प्रभावित :  उन्होंने बताया कि टायफाइड पाचन तंत्र को बुरी तरह प्रभावित करता है। खून की जांच कर इसका पता लगाया जाता है। बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं में बुखार के लंबे समय तक रहने पर तुरंत चिकित्सीय परामर्श प्राप्त करना चाहिए। टायफाइड होने पर मरीज को पूरी तरह आराम करना चाहिए। उन्हें ऐसे भोजन दिये जाने चाहिए जो आसानी से पचाया जा सके। पीने के लिए उबाले हुए पानी को ठंडा कर दें। रोगी को मांस-मछली का सेवन नहीं करने दें। इसके लिए अधिक से अधिक तरल पदार्थ लेना बेहतर है। इसके साथ ही भोजन में हरी सब्जियां, दूध और पाचन तंत्र को बेहतर बनाये रखने वाले भोजन लें और ताजे मौसमी फल का सेवन करें।
किसी व्यक्ति को बार-बार टायफाइड होना है गंभीर बातः उन्होंने बताया कि चाय कॉफी तथा अन्य कैफिन युक्त पदार्थ, रिफाइंड और प्रोसेस्ड फूड और अधिक तेल मसाले वाले भोजन से दूरी बनायें। इसके अलावा घी, तेल, गरम मसाला व अचार तथा गर्म तासीर वाले भोजन से परहेज करें। सही तरीके से इलाज नहीं होने और अधिक समय तक टायफाइड रहने से व्यक्ति काफी कमजोर हो जाता है। बार-बार टायफाइड का होना गंभीर है। इसलिए जिसे पहले कभी टायफाइड हुआ है, वह खास तौर पर सतर्क रहें।

लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की  जानकारी पहुँचा रही जीविका सीसी निक्की कुमारी 

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– लखीसराय सदर प्रखंड में संचालित जीविका कार्यालय में है तैनात, तीन पंचायतों की संभाल रही है कमान
– कोविड क्षेत्र में भी कर चुकी है बेहतर कार्य, वैक्सीनेशन और जाँच के लिए भी लोगों को कर रही है प्रेरित
लखीसराय, 21 मई-
लखीसराय सदर प्रखंड में संचालित प्रखंड जीविका कार्यालय में तैनात सामुदायिक समन्वयक (सीसी) निक्की कुमारी ना सिर्फ विभागीय कार्यों की जिम्मेदारी संभाल रही  बल्कि, स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बेहतर कार्य कर दोहरी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन कर रही है। निक्की प्रखंड के तीन पंचायतों की कमान संभाल रही है। जिसमें प्रखंड के अमहारा, बालगुदर एवं मेहिसोना पंचायत का नाम शामिल है। हालाँकि, बीस दिन पूर्व मेहिसोना पंचायत की जिम्मेदारी से हट गई है। किन्तु, इससे पूर्व इन्होंने तीनों पंचायतों में जीविका समूह से संबंधित  सभी कार्यों का बेहतर तरीके से संचालन किया है। इसके अलावा स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर कार्य किया है। इस दौरान वह उक्त तीनों पंचायतों के गाँव-गाँव व टोले-मोहल्ले जाकर ना सिर्फ लोगों को सरकार द्वारा जनहित में चलाई जा रही स्वास्थ्य से संबंधित तमाम योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई बल्कि, स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित भी किया। साथ ही लोगों को पूरी पारदर्शिता के साथ बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
– कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर भी सामुदायिक स्तर पर लोगों को किया जागरूक :
सीसी निक्की कुमारी कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर भी सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक कर रही हैं। इसके दौरान अपने पोषक क्षेत्र में गृह भ्रमण की तर्ज पर घर-घर जाकर एक-एक गर्भवती महिला को सुरक्षित व सामान्य प्रसव के लिए गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सतर्कता समेत अन्य आवश्यक जानकारी दे रही है । संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए जागरूक भी कर रही है। साथ ही धातृ महिला एवं उसके शिशु को स्वस्थ्य रहने के लिए उचित पोषण की भी जानकारी उपलब्ध करा रही है। इस दौरान धातृ महिलाओं को अपने बच्चे को जन्म के बाद 06 माह तक सिर्फ ऊपरी आहार देने, 06 से 08 माह के बच्चों को कम से कम एक पाव कटोरी की आधी माप दिन में दो बार, 09 से 11 माह के बच्चों को कम से कम एक पाव कटोरी की आधी माप दिन में तीन बार एवं 12 से 24 माह के बच्चों को कम से कम पूरी कटोरी दिन में तीन बार ऊपरी आहार देने के लिए जागरूक कर रही हैं। साथ ही गर्भवती और धातृ महिलाओं को उचित पोषणयुक्त आहार के सेवन की जानकारी उपलब्ध करा रही हैं। इसके लिए वह बैनर, पोस्टर समेत अन्य माध्यमों से सामुदायिक स्तर पर उचित पोषण की जानकारी पहुँचा रहीं हैं।
– कोविड क्षेत्र में भी कर चुकी है बेहतर कार्य, वैक्सीनेशन और जाँच के लिए भी लोगों कर रही हैं प्रेरित :
सीसी निक्की कुमारी कोविड क्षेत्र में बेहतर कार्य कर चुकी हैं। वह शुरुआती दौर से घर-घर जाकर सामुदायिक स्तर पर लोगों को जहाँ कोविड जाँच कराने के लिए प्रेरित कर रही वहीं, लोगों को वैक्सीनेशन कराने के लिए भी जागरूक कर रही है। इस दौरान उन्हें तमाम चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। किन्तु, वह ना ही कभी घबराई और ना ही कभी अपने कर्तव्य पथ पर पीछे मुड़ी। जिसका सकारात्मक परिणाम यह रहा कि कोविड से संबंधित सामुदायिक स्तर पर काफी तेजी के साथ फैली अफवाहों को मात मिली और सामुदायिक स्तर पर लोगों में जागरूकता आई। निक्की वर्तमान में लोगों को कोविड से बचाव के लिए वैक्सीनेशन एवं जाँच के लिए जागरूक कर रही हैँ । वह सामुदायिक स्तर पर लोगों को सरकारी स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिले इसके लिए अपने कर्तव्य पथ पर अग्रसर हैं।

बच्चों और बुजुर्गों को निमोनिया से बचाव को लेकर रहें सतर्क

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-बच्चे को दो साल के अंदर सभी तरह के टीके अवश्य लगवाएं
-निमोनिया समेत 12 अन्य बीमारियों से भी बच्चे का होगा बचाव
बांका, 21 मई-
मौसम में लगातार उताच-चढ़ाव हो रहा है। कभी तेज धूप तो कभी बारिश हो रही है। ऐसे मौसम में बच्चों और बुजुर्गों को निमोनिया से बचाव को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। निमोनिया सांस से जुड़ी गंभीर बीमारी है। यह बैक्टीरिया, वायरस और फंगल की वजह से फेफड़ों में संक्रमण से होता है। आमतौर पर यह बीमारी बुखार या जुकाम होने के बाद ही होता है। सर्दी के मौसम में बच्चों और बुजुर्गों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से यह बीमारी ज्यादा होती है। निमोनिया का प्रारम्भिक इलाज सीने का एक्स-रे करने के बाद क्लीनिकल तरीके से शुरू होता है। निमोनिया माइक्रो बैक्टीरिया वायरल, फंगल और पारासाइट की वजह से उत्पन्न संक्रमण की वजह से होता है। इसका संक्रमण सामुदायिक स्तर पर भी हो सकता है। इस बीमारी से बचने का सबसे बेहतर उपाय न्यूमो कॉकल वैक्सीन (पीसीवी) का टीकाकरण ही है।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि निमोनिया के प्रारंभिक लक्षण सर्दी-खांसी जैसे हो सकते हैं। ज्यादातर कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग इससे जल्दी ग्रसित हो जाते हैं। जिन बच्चों को पीसीवी का टीका नहीं पड़ा है, उन बच्चों को इस बीमारी की चपेट में आने की संभावना अधिक रहती है। इस बीमारी में मवाद वाली खांसी, तेज बुखार एवं सीने में दर्द समेत अन्य परेशानी होती है। इस बीमारी को टीकाकरण से रोका जा सकता है। इसलिए, अपने बच्चों को संपूर्ण टीकाकरण के अंतर्गत स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध निःशुल्क पीसीवी का टीका निश्चित रूप से लगवाएं। बच्चे को जन्म के बाद दो साल के अंदर सभी तरीके के पड़ने वाले टीके जरूर लगवाने चाहिए। इससे बच्चे की रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत तो होती ही है, इसके अलावा वह 12 से अधिक प्रकार की बीमारियों से भी दूर रहता है।
ये हैं निमोनिया के प्रारंभिक लक्षणः निमोनिया के प्रारंभिक लक्षण बुखार के साथ पसीना एवं कपकपी होना, अत्यधिक खांसी में गाढ़ा, पीला, भूरा या खून के अंश वाला बलगम आना, तेज-तेज और कम गहरी सांस लेने के साथ सांस का फूलना ( जैसे कि सांस लेने के दौरान आवाज होना), होठ या अंगुलियों के नाखून नीले दिखाई देना, बच्चों की परेशानी व उत्तेजना बढ़ जाना है।
ये हैं निमोनिया से बचाव के उपाय: वैसे तो निमोनिया से बचाव का एकमात्र उपाय टीकाकरण ही है। यह एक सांस संबंधी बीमारी है, इसलिए कुछ सावधानी बरतने के बाद काफी हद तक इसके संक्रमण से बचा जा सकता है। इसके लिए नवजात एवं छोटे बच्चों के रखरखाव, खानपान एवं कपड़े पहनाने में सावधानी बरतने की आवश्यकता है। वैसे लोगों के संपर्क से दूर रखने की आवश्यकता है, जिन्हें पहले से सांस संबंधी बीमारी हो। इसके साथ बुजुर्गों सहित अन्य लोगों को भी काफी सावधानी बरतने की जरूरत है।

किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य-स्वच्छता की अनदेखी एवं उपेक्षा नहीं करने पर जोर

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• माहवारी मेला के आयोजन द्वारा मासिक स्वच्छता प्रबंधन पर किशोरियों का हुआ उन्मुखीकरण
• सहयोगी संस्था द्वारा कार्यक्रम का हुआ आयोजन
• किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य-स्वच्छता की अनदेखी एवं उपेक्षा नहीं करने पर जोर
पटना/20 मई: शुक्रवार को सहयोगी संस्था के द्वारा चांदमारी उच्च विद्यालय, दानापुर में मासिक स्वच्छता प्रबंधन के अंतर्गत माहवारी मेला के आयोजन किया गया। इस दौरान किशोरियों/महिलाओं के व्यक्तिगत स्वच्छता एवं मासिक स्वच्छता प्रबंधन विषय पर विस्तार से चर्चा हुयी। कार्यक्रम में विद्यालय के 100 से अधिक किशोरियों, किशोरों ने भाग लिया।  मासिक स्वच्छता से सम्बंधित समाज में प्रचलित गलत धारणाओं/मिथकों को तोड़ने एवं इनकी अनदेखी करने और परिणामस्वरूप उनसे होने वाली कठिनाइयों तथा रोगों के बारे में किशोरियों से जानकारी साझा की गयी । महिलाओं और किशोरियों को माहवारी के दौरान होने वाली चुनौतियों और इस विषय में ख़ामोशी तोड़ने की बात भी कही गई।

चुप्पी तोड़ने से समाधान संभव:
इस दौरान सहयोगी संस्था की निदेशिका रजनी ने उपस्थित छात्राओं, छात्रों, शिक्षकों को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि महिलाओं और किशोरियों को माहवारी के समय अनेक प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। यह हमारे व्यक्तिगत स्वच्छता का एक महत्वपूर्ण विषय है और इस विषय में चुप्पी तोड़कर एवं खुलकर बात करने की जरूरत है। यद्यपि आज सोशल मीडिया माध्यमों के द्वारा इस विषय में जानकारी दी जाती है। वहीं,  सरकार के द्वारा भी चलाये जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों के अंतर्गत आंगनबाड़ी केन्द्रों, विद्यालयों में स्थानीय स्तर पर सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराया जाता है।  परन्तु अभी भी अधिकांश किशोरियाँ एवं महिलाएँ पारंपरिक तरीकों को ही अपनाती हैं। यह आवश्यक है कि उन्हें कपड़ों के इस्तेमाल के बारे में भी सही जानकारी दी जाये। उन्होंने बताया कि माहवारी अस्वच्छता से किशोरियों को कई यौन रोग होने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसके लिए समाज के हरेक तपके के लोगों को मिलकर इसके प्रति सामुदायिक अलख जगाने की जरूरत है।
माहवारी को छुआ-छूत से करना होगा अलग:
रजनी ने कहा कि किशोरियाँ एवं महिलाएँ माहवारी स्वच्छता पर  बात करने में बहुत संकोच करती हैं। बहुत-सी किशोरियाँ इस दौरान अपने स्कूल नहीं जा पाती हैं। अभी भी लोग इस प्राकृतिक प्रक्रिया के बारे में गलत अवधारणा रखते हैं एवं इसे अपराध मानते हैं। हमारे परिवार में भी इस बारे में कोई बातचीत नहीं की जाती है। उन्होंने बताया कि एनएफएचएस की एक रिपोर्ट के अनुसार देश में 58 प्रतिशत महिलाएँ ही माहवारी प्रबंधन के लिए स्वच्छ साधनों का उपयोग कर पाती हैं। कई परिवारों में लड़कियों को माहवारी चक्र के दौरान अलग-थलग कर दिया जाता है। उनका रसोई और मंदिर जाना वर्जित कर दिया जाता है। परिवार के पुरुषों को इस विषय में बात नहीं करने की हिदायत दी जाती है। यह भी हिंसा एवं भेदभाव का एक प्रकार है। आज आवश्यकता है कि इस बारे में घर में किशोरियों से बात कर उन्हें सही मार्गदर्शन किया जाये। विद्यालायों में भी इस विषय को यौन शिक्षा और स्वच्छता से जोड़कर बातचीत किया जाये क्योंकि मासिक धर्म को लेकर जागरूकता जरूरी है।

पेंटिग्स एवं चित्रकारी से दिया सन्देश:
माहवारी मेला के अंतर्गत किशोरियों के द्वारा इस विषय पर पेंटिंग, चित्रकारी आदि के माध्यम से अपने विचारों, अनुभवों को साझा किया गया। किशोरियों ने चित्रों, पेंटिंग्स के द्वारा माहवारी के समय होने वाली कठिनाइयों, इस विषय में प्रचलित धारणाओं के बारे में दर्शाया। इस मेले में उनके पेंटिंग्स के साथ सेनिटरी पैड्स, रेड डॉट्स, आदि को भी प्रदर्शित कर प्रतिभागियों को जानकारी दी गई। इस विषय पर चर्चा करते हुए आज आयोजित माहवारी मेला में किशोरियों को मासिक चक्र से सम्बंधित जानकारी पाने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया। उन्हें इस विषय पर प्रश्न पूछने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
किशोरियों ने इस अवसर पर कई प्रश्न पूछे और जानकारी प्राप्त किया। उन्होंने जानना चाहा कि क्या माहवारी आने के बाद हमारी हाईट बढ़ना रुक जाता है, माहवारी नहीं आता है तो क्या बच्चा नहीं होता है, लड़कों को माहवारी क्यों नहीं आता है। एक किशोरी ने बताया कि कुछ लोग बोलते हैं कि माहवारी नहीं आने पर महिला, किशोरी को हिजड़ा कहा जाता है। उनके सभी प्रश्नों का उत्तर दिया गया। साथ ही गलत धारणाओं को दूर करने हेतु सही जानकारी दी गई। इस अवसर पर एक बड़े थाली में लाल रंग के पानी को रखकर किशोरियों को उसमें अपनी परछाई देखने के लिए कहा गया और बताया गया कि माहवारी का लाल रंग किशोरियों, महिलाओं के जीवन से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण अंश है। इस मेले में किशोरियों ने बहुत उत्साहपूर्वक भाग लिया।
यह ज्ञातव्य हो कि सहयोगी द्वारा पटना के विभिन्न गांवों में घरेलु हिंसा एवं जेंडर हिंसा के मुद्दे पर सामुदायिक जागरूकता का कार्यक्रम करती है एवं इस विषय पर सभी हितभागियों के साथ अलग-अलग फोरम पर संवाद करती है। किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य-स्वच्छता की अनदेखी को भी हिंसा का एक रूप माना जाता है। सहयोगी द्वारा किशोर-किशोरियों को जागरूक करने के लिए अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।
आज के माहवारी मेला कार्यक्रम में इस विद्यालय के शिक्षकों –  मंजू बाला सिन्हा, संजय कुमार, निरा सिन्हा, रश्मि कुमारी, निहारिका वर्मा, नमिता कुमारी उपस्थित रहे। सहयोगी से कार्यक्रम प्रमुख रजनी, उषा, रिंकी, लाजवंती, रूबी, उन्नति, प्रियंका, रौनक, ऋतू एवं इंटर्न सृष्टि ने प्रभागिता की।

मुंगेर जिले के 10 से 16 साल के किशोरों को नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत दी जायेगी टीडी वैक्सीन

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– टेटनस व डिप्थेरिया से बचाता है टीडी वैक्सीन
 – आरबीएसके टीम करेगी टीकाकरण में सहयोग
मुंगेर, 20 मई। मुंगेर में भी नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत 10 से 16 वर्ष के किशोर किशोरियों को टीडी वैक्सीन की दो खुराक से आच्छादित किये जाने के संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने जरूरी निर्देश दिये हैं। निर्देश के अनुसार टेटनस व डिप्थेरिया जैसे गंभीर रोगों से बचाव के लिए किशोर- किशोरियों को टीडी वैक्सीन की दो खुराक से अपेक्षा के अनुरूप आच्छादित नहीं होने पर इसे और सुदृढ़ किये जाने के लिए कहा गया है।
प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. आनंद शंकर शरण सिंह ने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह के द्वारा टीडी टीकाकरण टेटनस व डिप्थेरिया जैसे रोग से बचाव के लिए 10 से 16 वर्ष के किशोर- किशोरियों को टीका देने का निर्देश प्राप्त हुआ है। क्योंकि कम उम्र के किशोरों को इन दोनों रोगों का खतरा अधिक होता है। इसलिए जिले में इस आयु वर्ग के सभी किशोर- किशोरियों को यह टीकाकरण शतप्रतिशत सुनिश्चित किया जायेगा । मालूम हो कि पूर्व से ही गर्भवती महिलाओं के लिए टीडी का पहला टीका आरंभिक गर्भावस्था में और दूसरा टीका पहले टीके से एक माह बाद दिया जाता है । वहीं बूस्टर डोज तब दी जाती है , यदि गर्भधारण पिछली गर्भावस्था के तीन वर्ष के भीतर हुआ हो और टीडी की दो खुराक दी जा चुकी हो।
आरबीएसके टीम करेगी टीकाकरण में सहयोग :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ राजेश कुमार रौशन ने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति के प्राप्त  निर्देश के आलोक में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सभी विद्यालयों में बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की जाती है। इसी स्वास्थ्य जांच के क्रम में ही बच्चों को टीडी की वैक्सीन लगायी जानी है। इस वैक्सीनेशन के तहत टीका के दो खुराक दिये जायेंगे । इसमें आरबीएसके टीम की भूमिका महत्वपूर्ण है। टीडी वैक्सीनेशन को लेकर पीएचसी स्तर से आरबीएसके टीम को हर जरूरी मदद उपलब्ध कराने का निर्देश है। विद्यालयों में टीकाकरण के बाद इसका दैनिक प्रतिवेदन संबंधित पीएचसी को उपलब्ध कराया जाना है। टीडी वैक्सीनेशन के लिए संबंधित कर्मियों को जरूरी प्रशिक्षण दिया जायेगा। निर्देश में आरबीएसके टीम में कार्यरत चिकित्सक यह सुनिश्चित करेंगे कि विद्यालयों के लिए निर्धारित कार्ययोजना में टीडी टीकाकरण समाहित हो। निर्देश में यह भी कहा गया है कि प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी यह सुनिश्चित करें कि आरबीएसके टीम के पास पर्याप्त मात्रा में इंजेक्शन उपलब्ध हो तथा टीका लगाने के लिए एएनएम का सहयोग लिया जायेगा ।
टेटनस व डिप्थेरिया दोनों हैं संक्रामक रोग :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ रौशन ने बताया कि टेटनस एक संक्रामक बीमारी है, जो बैक्टीरियम क्लोस्ट्रेडियम टेटानी नामक बैक्टीरिया से होता है। किसी घाव या चोट में संक्रमण होने पर टेटनस हो सकता है। उच्च रक्तचाप, तंत्रिका तंत्र का ठीक से काम नहीं करना, मांसपेशियों में ऐंठन, गर्दन व जबड़े में अकड़न, पीठ का धनुषाकार होना इसके लक्षण हैं। यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है। चिकित्सा के बावजूद मृत्यु दर काफी उच्च है। इसे गलाघोंटू के नाम से भी जाना जाता है। सांस लेने में दिक्कत, गर्दन में सूजन, बुखार एवं खांसी इसके शुरुआती लक्षण होते हैं। इसका जीवाणु पीड़ित व्यक्ति के मुंह, नाक एवं गले में रहता है और छींकने या खांसने से यह दूसरे व्यक्ति तक पहुंचता है। साथ ही सेंटर फॉर डिजीज प्रीवेंशन एंड कंट्रोल के मुताबिक टेटनस और डिप्थेरिया से बचाव के लिए टीडी वैक्सीनेशन किया जाता है। ये दोनों ही संक्रामक रोग है।डिप्थेरिया संक्रमण से रोगी को सांस लेने में तकलीफ होती है। गर्दन में सूजन, बुखार व खांसी रहता है।
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी  ने बताया कि सेंटर फॉर डिजीज प्रीवेंशन एंड कंट्रोल के मुताबिक टेटनस और डिप्थेरिया से बचाव के लिए टीडी वैक्सीनेशन किया जाता है। ये दोनों ही संक्रामक रोग है ।

कोविड की संभावित चौथी लहर से सुरक्षित रहने को रहें सतर्क और सावधान 

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– जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने को लेकर जिले में लगातार चल रहा वैक्सीनेशन अभियान
– प्रीकाॅशनरी और सेकेंड डोज के लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर दी जा रही है वैक्सीन
खगड़िया, 20 मई-
कोविड संक्रमण की संभावित चौथी लहर से सुरक्षा के मद्देनजर जिले में वैक्सीनेशन एवं जाँच अभियान तेज कर दिया गया है। इस घातक महामारी से निपटने के लिए अभी से ही स्वास्थ्य विभाग व्यापक तैयारी में जुट गया है। ताकि चौथी लहर से भी सामुदायिक स्तर पर लोग सुरक्षित रहें और लोगों को आवश्यकतानुसार बेहतर तरीके  से स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। किन्तु, आमलोगों को भी संभावित चौथी लहर से सुरक्षित रहने के लिए इस महामारी के खिलाफ सतर्क और सावधान होने की जरूरत है। तभी हम चौथी लहर से भी खुद को सुरक्षित रख सकते और इस महामारी को एकबार फिर मात दे सकते हैं। इसके लिए बच्चों की भी उचित देखभाल के साथ-साथ खानपान का विशेष ख्याल रखना बेहद जरूरी है। इसलिए, बच्चों की स्वास्थ्य के प्रति पूरी तरह सजग रहें। किसी भी प्रकार की शारीरिक पीड़ा होने पर तुरंत चिकित्सकों से जाँच कराएं और समुचित इलाज कराएं। ताकि बच्चे शारीरिक रूप से स्वस्थ्य और मजबूत रह सकें। जब बच्चा स्वस्थ्य और मजबूत रहेगा तो वह निश्चित ही संक्रामक बीमारी से दूर रहेगा।
– वैक्सीन से वंचित लोग जल्द से जल्द कराएं वैक्सीनेशन और चौथी लहर के खतरे से रहें दूर :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, संभावित चौथी लहर से सुरक्षा के मद्देनजर और जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लाभार्थियों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने को लेकर जिले में लगातार वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है।ताकि वैक्सीन से वंचित लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा 18 से 59 आयु वर्ग के सभी ऐसे लाभार्थी, जो प्रीकाॅशनरी डोज लेने की समयावधि पूरी कर चुके हैं, उन्हें सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क प्रीकाॅशनरी डोज दी जा रही है। यह सुविधा जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध है। वहीं, उन्होंने कहा, मैं तमाम जिलेवासियों से अपील करता हूँ कि जो भी लोग किसी भी कारणवश अबतक वैक्सीनेशन न करा सकें और प्रीकाॅशनरी डोज लेने की समयावधि पूरी कर चुके हैं, वह निश्चित रूप से अपने नजदीकी वैक्सीनेशन सेंटर पर जाकर जाँच कराएं और चौथी लहर के खतरे से खुद को सुरक्षित करें।
– संभावित चौथी लहर को रोकने के लिए वैक्सीनेशन के साथ सावधानी और सतर्कता भी जरूरी :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, एकबार फिर कोविड संक्रमण की चौथी लहर आने की आशंका जताई जा रही है। जिससे बचाव के लिए वैक्सीनेशन के साथ-साथ सावधानी और सतर्कता भी जरूरी है। क्योंकि, इसी के बदौलत अबतक इस घातक महामारी के प्रभाव को रोकने में काफी हद तक सफलता मिली है। इसलिए, मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि जो भी व्यक्ति अबतक किसी कारण वश वैक्सीन नहीं ले पाएं है, वह निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें। साथ ही इस घातक महामारी को पूरी तरह जड़ से मिटाने के लिए सावधानी और सतर्कता भी जारी रखें। इसके लिए मास्क और शारीरिक दूरी के पालन का ख्याल रखें।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।

बदलते मौसम में मौसमी बीमारियों की बढ़ी संभावना, रहें सतर्क और सावधान 

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– टायफाइड समेत अन्य बीमारियों से बचाव के लिए रहें सतर्क, अनावश्यक परेशानियाँ से रहेंगे दूर
– लगातार बुखार रहने पर निश्चित रूप से कराएं खून की जाँच और चिकित्सा परामर्श का पालन
लखीसराय, 20 मई-
भीषण गर्मी के साथ तापमान में हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण मौसमी बीमारियों की भी संभावना बढ़ गई। ऐसे में हर आयु वर्ग के लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति विशेष सावधान और सतर्क रहने की जरूरत है। दरअसल, ऐसे मौसम में कई तरह की बीमारियों की चपेट में आने का खतरा बढ़ गया है। इस मौसम में डायरिया, डेंगू, चिकनगुनिया के साथ-साथ कोविड का जहाँ खतरा है वहीं, टायफाइड का भी खतरा तेज हो गया है। इसलिए, ऐसे मौसम में हर आयु वर्ग के लोगों को टायफाइड से बचाव के लिए विशेष सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है।
– टायफाइड से बचाव के लिए शुद्ध पेयजल और भोजन का करें सेवन :
डीआईओ सह एसीएमओ डाॅ अशोक कुमार भारती ने बताया, टायफाइड होने का कारण वैसे तो सामान्यतः कई कारण हैं। किन्तु, मुख्य रूप से गंदा (दूषित) पानी और भोजन का सेवन होता है। इसलिए, इस बीमारी से बचाव के लिए सभी लोगों को शुद्ध पेयजल और भोजन का सेवन करना चाहिए । साफ-सफाई का भी ख्याल रखना जरूरी है। इसलिए, गर्मी और बरसात के मौसम में पानी व भोजन का विशेष ध्यान रखा चाहिए। ऐसे मौसम में टायफाइड यानी मियादी बुखार के मरीज अधिक मिलते हैं। टायफाइड सालमोनेला टाइपी नामक बैक्टीरिया से फैलने वाला एक गंभीर रोग है। यह बैक्टीरिया दूषित पानी एवं संक्रमित भोजन में पनपते हैं।
– टायफाइड के कारण लिवर हो सकता है प्रभावित :
दूषित पानी व संक्रमित भोजन के सेवन से व्यक्ति मियादी बुखार से ग्रसित हो जाता है। टायफाइड के कारण लिवर में सूजन हो जाती है। ऐसे में साफ पानी और भोजन का ध्यान रखना जरूरी है। सब्जियों का सही से नहीं धोना, शौचालय का इस्तेमाल नहीं होना और खुले में मलमूत्र त्याग करना, खाने से पहले हाथों को नहीं धोना, आदि कई कारणों से टायफाइड हो सकता है। तेज बुखार के साथ दस्त व उल्टी होना, बदन दर्द रहना, कमजोरी और भूख नहीं लगना टाइफाइड के प्रमुख लक्षण हैं। इसके साथ ही पेट, सिर और मांसपेशियों में भी दर्द रहता है।
– पाचन तंत्र को बुरी तरह से करता है प्रभावित :
टायफाइड पाचन तंत्र को बुरी तरह प्रभावित करता है। खून की जांच कर इसका पता लगाया जाता है। बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं में बुखार के लंबे समय तक रहने पर तुरंत चिकित्सीय परामर्श लेना चाहिए। टायफाइड होने पर मरीज को पूरी तरह आराम करना चाहिए। उन्हें ऐसे भोजन दिये जाने चाहिए जो आसानी से पचाया जा सके। पीने के लिए उबाले हुए पानी को ठंडा कर दें। रोगी को मांस-मछली का सेवन नहीं करने दें। अधिक से अधिक तरल पदार्थ लेना बेहतर है। भोजन में हरी सब्जियां, दूध और पाचन तंत्र को बेहतर बनाये रखने वाले भोजन लें। ताजे मौसमी फल का सेवन करें।
– बार-बार टायफाइड होना गंभीर बात :
चाय कॉफी तथा अन्य कैफिन युक्त पदार्थ, रिफाइंड और प्रोसेस्ड फूड और अधिक तेल मसाले वाले भोजन से दूरी बनायें। इसके अलावा घी, तेल, गरम मसाला व अचार तथा गर्म तासीर वाले भोजन से परहेज करें। सही तरीके से इलाज नहीं होने और अधिक समय तक टायफाइड रहने से व्यक्ति काफी कमजोर हो जाता है। बार-बार टायफाइड का होना गंभीर है। इसलिए, जिसे पहले कभी टायफाइड हुआ है, वह खास तौर पर सतर्क रहें।

बच्चों को रोगों से बचाने के लिए उनका टीकाकरण अवश्यक कराएं

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-अपने बच्चों का नियमित टीकाकरण कराकर परेशानियों से रहें दूर
बांका, 20 मई-
बच्चों के लिए नियमित टीकाकरण बहुत जरूरी है। यह शरीर में बीमारियों को लेकर प्रतिरोधक क्षमता पैदा करता है। इसके साथ ही एंटीबॉडी बनाकर शरीर को सुरक्षित भी रखता है। नियमित टीकाकरण से बच्चों में जानलेवा बीमारियों का खतरा बहुत हद तक कम हो जाता है। शिशुओं की मौत की एक बड़ी वजह उनका सही तरीके से टीकाकरण नहीं होना है। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि नियमित टीकाकरण विभिन्न बीमारियों के संक्रमण के बाद या बीमारी के खिलाफ व्यक्ति की रक्षा करता और शरीर की रोग प्रतिरक्षा प्रणाली को भी सुदृढ़ करता है। शिशुओं को स्तनपान कराने से भी उनकी रोग प्रतिरक्षण प्रणाली तेज होती है। नियमित टीकाकरण से बच्चों को चेचक, हेपेटाइटिस जैसी अन्य बीमारियों से बचाया जा सकता है।
बुधवार और शुक्रवार को आंगनबाड़ी केंद्रों पर होता है टीकाकरणः डॉ. चौधरी ने बताया कि नियमित टीकाकरण शिशु के लिए बहुत जरूरी है। बच्चों में होने वाली बीमारियों व संक्रमण का असर तेजी से उनके शरीर पर होता और उनके अंगों को प्रभावित करता है। बीसीजी, हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस बी, डीटीपी, रोटा वायरस वैक्सीन, इन्फ्लूएंजा व न्यूमोनिया के लिए टीकाकरण किये जाते हैं। मिशन इंद्रधनुष कार्यक्रम इसी उद्देश्य के साथ चलाया गया कि बच्चों का संपूर्ण टीकाकरण किया जा सके। अगर मिशन इंद्रधनुष कार्यक्रम के तहत बच्चे की टीकाकरण नहीं करा सके हैं तो कोई बात नहीं। बांका में शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में टीकाकरण का ही काम होता है। अन्य जगहों पर जो भी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र है, वहां पर चले जाएं। बच्चों का मुफ्त टीकाकरण होता है। इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्रों पर बुधवार और शुक्रवार को नियमित टीकाकरण होता है।
बीसीजी टीका से टीबी से होगा बचाव: डॉ. चौधरी ने बताया कि टीबी से फेफड़ों, दिमाग और शरीर के अंग प्रभावित होते हैं। यह रोग पीड़ित व्यक्ति के खांसने या छींकने से फैलती है। बीसीजी टीका के जरिये बच्चे को टीबी की बीमारी से बचाया जा सकता है। बच्चों के जन्म लेने के तुरंत बाद उन्हें बैसिले कैल्मेट गुरिन (बीसीजी) के टीके लगाये जाते हैं। यह बच्चों के भविष्य में क्षयरोग, टीबी मेनिनजाइटिस आदि रोगों के संक्रमण की संभावना को कम करता है।
हेपेटाइटिस ए टीका से लीवर का होगा बचाव: डॉ. चौधरी ने बताया कि हेपेटाइटिस ए विषाणु जनित रोग है, जो लिवर को प्रभावित करता है। दूषित भोजन, पानी या संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने की वजह से यह रोग फैलता है। बच्चों में यह रोग ज्यादा होता है। बुखार, उल्टी और जांडिस जैसे रोगों से बच्चा प्रभावित होता है। हेपेटाइटिस ए वैक्सीन का पहला टीका बच्चों को जन्म के एक साल बाद लगाया जाता और दूसरा टीका पहली डोज के 6 महीने बाद लगाया जाता है।

टीबी से बचाव को लेकर दी गई जानकारी

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-हबीबपुर के यासिनचक में बैठक का आयोजन
-बैठक में टीबी के लक्षण और बचाव की दी गई जानकारी
भागलपुर, 20 मई-
हबीबपुर के यासिनचक में शुक्रवार को टीबी को लेकर जागरूकता बैठक की गई। बैठक का आयोजन स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीसी) ने कराया। बैठक में जन्नती जीविका की सदस्य भी शामिल थीं। 37 लोगों की उपस्थिति में टीबी को लेकर मूल बातों को बताया गया कि यह कैसे फैलता है और इसका बचाव किस प्रकार किया जा सकता है। लोगों को बताया कि लगातार दो हफ्ते खांसी होना, बलगम के साथ खून आना, वजन कम होना, शाम के वक्त अधिक पसीना आना आदि लक्षण टीबी के हैं। इस तरह की परेशानी होने पर तत्काल सरकारी अस्पताल में जाएं और जांच करवाएं। जांच में अगर टीबी की पुष्टि हो जाती है तो तत्काल इलाज करवाएं। टीबी के इलाज की व्यवस्था सरकार की तरफ से मुफ्त में होती है। साथ टीबी मरीजों को पौष्टिक आहार लेने के लिए 500 रुपये प्रतिमाह सहायता राशि भी मिलती है।
स्क्रीनिंग में तीन संभावित मरीज मिलेः बैठक के बाद शमा परवीन के सहयोग से क्षेत्र में टीबी मरीजों की खोज के लिए अभियान चलाया गया। इस दौरान 103 लोगों तक पहुंचा गया, जिसमें 79 लोगों की जांच की गई। जांच में टीबी के संभावित तीन मरीज मिले। तीनों मरीजों को  सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला टीबी पदाधिकारी डॉ. दीनानाथ कहते हैं कि टीबी को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। 2025 तक जिले को टीबी से मुक्त करना है, इसलिए लोगों के बीच जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। इसमें कई संगठन भी भाग ले रहे हैं। ऐसे आयोजन से लोगों में टीबी के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है।
टीबी मरीजों से नहीं करें भेदभावः अभियान के बारे में बताते हुए सीडीओ डॉ. दीनानाथ ने कहा कि पहले टीबी बीमारी के प्रति छुआछूत अधिक थी, लेकिन जागरूकता बढ़ने से इसमें कमी आई है। टीबी एक संक्रमाक बीमारी जरूर है, लेकिन इसका इलाज संभव है। अगर कोई टीबी के लक्षण वाले लोग दिखते हैं तो उससे घृणा करने के बजाय उसे इलाज के लिए प्रोत्साहित करें। ऐसा करने से मरीज का इलाज समय पर हो जाएगा और वह ठीक हो जाएगा। उसके ठीक होने से इसका संक्रमण दूसरों में भी नहीं होगा। साथ ही टीबी की दवा बीच में नहीं छोड़ें। ऐसा करने से एमडीआर टीबी होने की आशंका रहती है। एमडीआर टीबी होने पर ठीक होने में ज्यादा समय लग जाता है। इसलिए बीच में दवा नहीं छोड़ें।
टीबी को हल्के में नहीं लेना चाहिएः डॉ दीनानाथ ने कहा कि टीबी की बीमारी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। एक टीबी का मरीज साल में 10 से अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है और फिर आगे वह कई और लोगों को भी संक्रमित कर सकता है, इसलिए लक्षण दिखे तो तत्काल इलाज कराएं। एक के जरिए कई लोगों में इसका प्रसार हो सकता है। अगर एक मरीज 10 लोगों को संक्रमित कर सकता है तो फिर वह भी कई और लोगों को संक्रमित कर देगा। इसलिए हल्का सा लक्षण दिखे तो तत्काल जांच कराएं और जांच में पुष्टि हो जाती है तो इलाज कराएं। डॉ दीनानाथ ने कहा कि टीबी अब छुआछूत की बीमारी नहीं रही। इसे लेकर लोगों को अपना भ्रम तोड़ना होगा। टीबी का मरीज दिखे तो उससे दूरी बनाने के बजाय उसे इलाज के लिए प्रोत्साहित करना होगा। इससे समाज में जागरूकता बढ़ेगी और जागरूकता बढ़ने से इस बीमारी पर जल्द काबू पा लिया जाएगा। ऐसा करने से कई और लोग भी इस अभियान में जुड़ेंगे और धीरे-धीरे टीवी समाप्त हो जाएगा।

प्रगति मैदान मे चल रहे वायर एवं केबल मेले में ऊषा केबल इण्डस्ट्रीज ने 40 डिग्री तापमान में भी काम करने वाली तार को प्रदर्शित किया

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दिल्ली प्रगति मैदान मे चल रहे तीन दिवसीय वायर एवं केबल मेला शुक्रवार तक चलेगा। हाल नं 3 व 4 में आयोजित इस मेले मे देश विदेश से 200 से अधिक कम्पनियां आइे हुइ हैं। इस मेले की खासियत यह है कि इसमें 500 से अधिक प्रकार की तारें प्रदर्शित की गई है जैसे फायर प्रूफ, और स्मोग फॉग सिलिकॉन पीवीसी केबल और रबराइस पीबीसी केबल भी यहो प्रदर्शित की गई है। इस मेले में स्टॉल नं सी 4 के प्रदर्शक अमन गुप्ता निदेशक ऊषा केबल इण्डस्ट्रीज ने बताया कि सिलिकॉन रबराइस पीवीसी केबल पर कई सालों से काम चल रहा था जिसकी जरूरत भारत में बार्डर जैसी जगहों पर जहां तापमान माइनस 40 डिग्री तक जाता है वहां इसकी खास जरूरत थी, जहां सामान्य केबल माइनस 20 से 25 डिग्री सेल्सियस पर आते आते टुटने लगती है, वहीं सिलिकॉन रबराइस पीबीसी केबल कामयाब है।
उन्होने बताया कि हमारे पास एैसी तारें भी हैं जो 150 से 200 डिग्री के तापमान पर भी नही जलेगी। इसके अलावा किसानो के लिए खास एग्री कल्चर केबल भी उपलब्ध है।