बिहार के लखीसराय जिले में डायरिया से बचाव को लेकर चलेगा सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा 

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– पखवाड़े के दौरान आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर करेंगी ओआरएस पैकेट का वितरण
– राज्य स्वास्थ्य समिति के प्रशासी पदाधिकारी ने पत्र जारी कर प्रदेश के सभी सिविल सर्जन को दिए निर्देश
लखीसराय, 19 मई।
 जून/जुलाई से मानसून सत्र का आगमन हो जाएगा। इस दौरान जिले भर में सघन दस्त पखवाड़ा का आयोजन होगा। जिसके माध्यम से संबंधित क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता द्वारा अपने पोषक क्षेत्र में घर-घर जाकर पाँच आयु वर्ग तक के सभी बच्चों के बीच ओआरएस पैकेट का वितरण करेंगी। जबकि, दस्त ग्रसित बच्चों को समुचित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिले के सभी स्वास्थ्य स्थानों को पर्याप्त मात्रा में जिंक टैबलेट और ओआरएस घोल उपलब्ध कराई जाएगी। ताकि आवश्यकतानुसार पीड़ित बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा सके और पीड़ित बच्चे सुविधाजनक तरीके से अपना उपरचार करा सकें। इसे सुनिश्चित करने को लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति के प्रशासी पदाधिकारी कमल नयन ने पत्र जारी कर प्रदेश के सभी सिविल सर्जन को आवश्यक निर्देश दिए हैं।
– सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को दिए गए हैं निर्देश :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र कुमार चौधरी ने बताया मानसून सत्र के दौरान सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा का आयोजन कराने का निर्देश प्राप्त हुआ है। जिसे हर हाल में सफल बनाने को लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक और जरूरी निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अपने-अपने स्तर से एक्शन प्लान तैयार कर उक्त पखवाड़ा के सफल संचालन के लिए सारी तैयारियाँ पूरी करने को कहा गया है। ताकि हर हाल में में निर्धारित समय पर पखवाड़े का शुभारंभ और सफलतापूर्वक समापन सुनिश्चित हो सके। वहीं, उन्होंने बताया, मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है। जिसके कारण जहाँ सर्दी-खाँसी, जुकाम समेत अन्य मौसमी बीमारी आम हो गई है। वहीं, इसके साथ डायरिया की भी संभावना बढ़ गई है। ऐसे में हमें विशेष सावधान और सतर्क रहने की जरूरत है। डायरिया से बचाव को लिए लोगों को स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना चाहिए। दरअसल, बदलते मौसम में डायरिया के प्रकोप में आने का प्रबल संभावना हो जाती है। जिसके दायरे में कोई भी यानी सभी आयु वर्ग के लोग आ सकता है। डायरिया के कारण अत्यधिक निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) होने से समस्याएँ बढ़ जाती है और उचित प्रबंधन के अभाव में यह जानलेवा भी हो जाता है। इसके लिए डायरिया के लक्षणों के प्रति सतर्कता एवं सही समय पर उचित प्रबंधन कर बच्चों को डायरिया जैसे गंभीर रोग से आसानी से सुरक्षित किया जा सकता है।
– जानें क्या है डायरिया और लक्षण :
टट्टी (पैखाना) की अवस्था बदलाव या सामान्य से ज्यादा बार, ज्यादा पतला या पानी जैसी होने वाली टट्टी ही डायरिया (दस्त) का पहला लक्षण है। इसके अलावा बच्चा बेचैन व चिड़चिड़ा है, अथवा सुस्त या बेहोश है। बच्चे की ऑखें डाउन हो रही हैं। बच्चे को बहुत ज्यादा प्यास लगना अथवा पानी ना पाना। चिकोटी काटने पर पेट के बगल की त्वचा खींचने पर धीरे-धीरे पूर्वावस्था में आना अर्थात त्वचा के ललीचेपन में कमी आना आदि डायरिया का ही कारण और लक्षण है।
– डायरिया होने पर 14 दिनों तक जिंक का करें सेवन :
डायरिया होने पर लगातार 14 दिनों तक जिंक का सेवन करें। 02 माह से 06 माह तक के बच्चों को जिंक की 1/2 गोली 10 मिग्रा पानी में घोलकर या माँ के दूध के साथ घोलकर चम्मच से पिलाएं। 06 माह से 05 साल के बच्चों को एक गोली साफ पानी के साथ माँ के दूध में घोलकर पिलाएं। जबकि, दो माह से कम आयु के बच्चों को 05 चम्मच ओआरएस प्रत्येक दस्त के बाद पिलाएं। 02 माह से 02 वर्ष तक बच्चे को 1/4 ग्लास से 1/2 ग्लास प्रत्येक दस्त के बाद पिलाएं। 02 से 05 वर्ष तक के बच्चों को 1/2 से ग्लास प्रत्येक दस्त के बाद पिलाएं।
– जिंक सेवन के ये हैं विशेष लाभ :
जिंक सेवन से दस्त और तीव्रता दोनों कम होता है। तीन महीने तक दस्त का खतरा नहीं के बराबर रहता है। रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। जबकि, ओआरएस से शरीर में पानी की कमी नहीं होती है एवं दस्त के खतरे से बचाव करता है।
– बदलते मौसम में सिर्फ मौसमी बीमारियाँ का ही नहीं, बल्कि डायरिया की भी रहती है आशंका :
बदलते मौसम में ना सिर्फ मौसमी बीमारी का आशंका रहती है। बल्कि, डायरिया समेत अन्य बीमारियों की भी संभावना बढ़ जाती है। इसलिए, लोगों को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की जरूरत है और खानपान का विशेष ख्याल रखना चाहिए। पौष्टिक आहार का सेवन पर बल देना चाहिए। क्योंकि, पोषण युक्त खाना संक्रामक और मौसमी बीमारियों से बचाव में काफी हद तक सहयोग करता है।
– साफ-सफाई का रखें विशेष ख्याल :
डायरिया से बचाव को लेकर साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखने की जरूरत है। दरअसल, साफ-सफाई हमें ना सिर्फ किसी एक बीमारी बल्कि अनेकों बीमारी (खासकर संक्रामक)   से दूर रखती है। इसके लिए खाने से पहले हाथों की नियमित तौर पर अच्छी तरह सफाई करें। घर के आसपास गंदगी और जलजमाव नहीं होने दें।
– गर्म व ताजा खाना का करें सेवन :
डायरिया से बचाव को लेकर गर्म व ताजा खाना खाएँ और बासी खाना से दूर रहे हैं। साथ ही गर्म पानी का सेवन करें तो यह और बेहतर होगा। फ्रिज में रखें खाना खाने से परहेज करें। इसके अलावा समय पर खाना खाएं और अधिक देर तक भूखा नहीं रहें।

31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर जिलाभर में आयोजित होंगे कई जागरूकता कार्यक्रम

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– विभिन्न जानलेवा बीमारियों की जड़ है तम्बाकू का सेवन
– मजबूत इच्छाशक्ति के साथ प्रण लेकर छोड़ सकते हैं तम्बाकू सेवन की लत
– तम्बाकू सेवन रोकने के लिए सरकार द्वारा बनाया गया है कानून
मुंगेर, 19 मई। आगामी 31 मई को मनाए जाने वाले विश्व तंबाकू निषेध दिवस को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी है। इस वर्ष का थीम ” तंबाकू हमारे पर्यावरण के लिए है खतरा ”  घोषित किया गया है। आम तौर पर देखा गया है कि तम्बाकू उत्पादों के सेवन के कारण कईं ऐसे तथ्य सामने आए जिसके कारण पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है जैसे कि कोई व्यक्ति सिगरेट पीने के बाद सिगरेट के बट‌ को जमीन पर डाल देते हैं।
जिला के प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. आनंद शंकर शरण सिंह ने बताया कि बहुत से नुकसानदायक बीमारियों की शुरुआत के पीछे तम्बाकू का सेवन ही मुख्य कारण होता है। तम्बाकू के सेवन के प्रति रुचि आजकल न सिर्फ युवाओं में बल्कि स्कूली बच्चों में बढती जा रही है। तम्बाकू सेवन बहुत से गंभीर बीमारियों की जड़ है इसलिए इसको रोकने और इसके बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर वर्ष 31 मई को पूरे विश्व में विश्व तम्बाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। मालूम हो कि विश्व तम्बाकू निषेध दिवस की शुरुआत डब्ल्यूएचओ के द्वारा 1987 में की गयी थी। इसका  उद्देश्य तंबाकू सेवन के व्यापक प्रसार और नकारात्मक स्वास्थ्य प्रभावों की ओर ध्यान आकर्षित करना है, जो वर्तमान में दुनिया भर में हर साल 70 लाख से अधिक मौतों का कारण बनता है।
उन्होंने बताया कि विश्व तम्बाकू निषेध दिवस के अवसर पर जिला भर में विभिन्न जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे ,जैसे तम्बाकू उत्पाद इस्तेमाल नहीं करने को लेकर शपथ ग्रहण कार्यक्रम, हस्ताक्षर अभियान या माइकिंग के साथ प्रभात फेरी ।
विभिन्न जानलेवा बीमारियों की जड़ है तम्बाकू का सेवन :
जिला के गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. के. रंजन ने बताया कि तम्बाकू सेवन बहुत सी नुकसान दायक बीमारियों की जड़ है। कैंसर जैसी बीमारी भी तम्बाकू के सेवन से ही होती है। फेफड़ों की बीमारियां जैसे क्रोनिक ब्रोंकाइटिस व एम्फिसेमा होने की मुख्य वजह धूम्रपान ही है। क्रोनिक यानी लम्बे समय तक धूम्रपान करने से फेफड़े एवं सांस की नली के कैंसर होने की सम्भावना ज्यादा होती है। दुनिया में कैंसर से होने वाली मौतों में फेफड़े के कैंसर के मरीजों की संख्या ज्यादा है। जिसकी मुख्य वजह अत्यधिक धूम्रपान का करना ही होता है। खैनी, पुड़िया, जर्दा, पीला पत्ती आदि के सेवन से मुंह का कैंसर (ओरल कैंसर) की संभावना बनी रहती है। इन सभी तरह की रोगों को पूरी तरह समाप्त करने के लिए धूम्रपान का खत्म होना ही सबसे जरूरी विकल्प है।
मजबूत इच्छाशक्ति के साथ प्रण लेकर छोड़ सकते हैं तम्बाकू सेवन की लत :
एनसीडी विभाग मुंगेर में कार्यरत राखी मुखर्जी ने बताया कि तम्बाकू की लत बहुत खराब होती है। अगर कोई व्यक्ति इसका शिकार हो जाता है तो फिर इससे निकलना थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति इससे निकलना चाहे तो इसके लिए उन्हें चिकित्सकीय उपचार से ज्यादा मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत है। मजबूत इच्छाशक्ति के साथ चिकित्सकीय उपचार व परिवार एवं आसपास के लोगों का सहयोग लेकर लोग तम्बाकू सेवन की लत से बाहर निकल सकते हैं।
तम्बाकू सेवन रोकने के लिए सरकार द्वारा बनाया गया है कानून :
गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. के. रंजन ने बताया कि तम्बाकू सेवन को रोकने के लिए सरकार द्वारा कानून बनाया गया है। इसके लिए तम्बाकू नियंत्रण अधिनियम कोटपा लागू किया गया है। कोटपा के तहत तम्बाकू के गलत इस्तेमाल करते हुए पकड़े जाने पर लोगों को धारा 4, 5, 6 तथा 7 के तहत कानूनी कार्यवाही व आर्थिक दंड वसूला जा सकता है।
तम्बाकू नियंत्रण अधिनियम (कोटपा) के तहत तय किया गया कानून :
उन्होंने बताया कि सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने पर धारा 4 के अनुसार 200 रुपये की जुर्माना देय है। वहीं धारा 5 के अनुसार तम्बाकू पदार्थों के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष विज्ञापन पर 1 से 5 साल की कैद व 1000 से 5000 तक का जुर्माना देय है।
धारा 6 के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु वर्ग के अवयस्कों को तम्बाकू पदार्थ बेचने वालों को 200 रुपये जुर्माना लगाया जाता है। वहीं धारा 7 के अनुसार बिना चित्रित व पैकेट के 85% भाग पर मुख्य रूप से न छपे वैधानिक चेतावनी के तम्बाकू पदार्थ बेचने पर 2 से 5 साल की कैद व 1000 से 10000 तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

आंगनबाड़ी केंद्रों पर अन्नप्राशन कार्यक्रम का आयोजन, उचित पोषण की दी गई जानकारी

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– छः माह की उम्र पार करने वाले बच्चों का कराया गया अन्नप्राशन, पौष्टिक आहार के महत्व की दी गई जानकारी
– कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर लोगों को किया गया जागरूक, दी गई आवश्यक जानकारी

खगड़िया, 19 मई।
गुरुवार को जिले के सभी प्रखंडों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर उत्साह के साथ अन्नप्राशन कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस दौरान जिले की सभी सेविका-सहायिका अपने-अपने आंगनबाड़ी केंद्रों पर छः माह की उम्र पार करने वाले बच्चों को पहलीबार अन्नप्राशन कराया और बच्चे की माँ को बच्चे के 6 माह के बाद ऊपरी आहार की विशेषता बताते हुए अन्नप्राशन के महत्व की विस्तार से जानकारी दी। ताकि बच्चे के स्वस्थ्य शरीर का निर्माण हो सके। वहीं, बच्चों के सर्वांगीण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए उचित पोषण की जानकारी दी गई और कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर जागरूक किया गया। जिसमें बताया गया कि कुपोषण को मिटाने के लिए उचित पोषण बेहद जरूरी है। इसलिए, सरकार द्वारा इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन कर उचित पोषण के लिए जागरूक किया जा रहा है। दरअसल, कुपोषण मुक्त समाज निर्माण की दिशा में सरकार पूरी तरह सजग और कटिबद्ध है।

– अन्नप्राशन के साथ कोविड और नियमित टीकाकरण के प्रति किया गया जागरूक :
आईसीडीएस के जिला समन्वयक (डीसी) अंबुज कुमार ने बताया, अन्नप्राशन के साथ संभावित चौथी लहर को देखते हुए जहाँ कोविड से बचाव और सुरक्षित रहने के वैक्सीनेशन कराने के लिए जागरूक किया गया। वहीं, जिले में चल रहे नियमित टीकाकरण अभियान की सफलता एवं बच्चों को विभिन्न प्रकार की बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए निश्चित तौर पर आरआई कराने को लेकर भी जागरूक किया गया। इसके अलावा कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

– अन्नप्राशन के साथ दो वर्षों तक स्तनपान भी जरूरी :
आईसीडीएस की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सुनीता कुमारी ने बताया, इस दौरान मौजूद बच्चों की माँ को बच्चे के स्वस्थ्य शरीर निर्माण को लेकर आवश्यक जानकारियाँ दी गई। जिसमें बताया गया कि बच्चों को अन्नप्राशन के साथ कम से कम दो वर्षों तक स्तनपान भी कराएं और छः माह तक सिर्फ स्तनपान ही कराएं। तभी बच्चे का स्वस्थ शरीर निर्माण संभव है। इसके अलावा 6 माह से ऊपर के बच्चों के अभिभावकों को बच्चों के लिए पूरक आहार की जरूरत के विषय में जानकारी दी गयी। 6 से 9 माह के शिशु को दिन भर में 200 ग्राम सुपाच्य मसला हुआ खाना, 9 से 12 माह में 300 ग्राम मसला हुआ ठोस खाना, 12 से 24 माह में 500 ग्राम तक खाना खिलाने की सलाह दी गयी। इसके अलावा अभिभावकों को बच्चों के दैनिक आहार में हरी पत्तीदार सब्जी और पीले नारंगी फल को शामिल करने की बात बताई गयी। चावल, रोटी, दाल, हरी सब्जी, अंडा एवं अन्य खाद्य पदार्थों की पोषक तत्वों के विषय में चर्चा कर अभिभावकों को इसके विषय में जागरूक किया गया।

– पौष्टिक आहार की महत्ता की दी गई जानकारी :
केयर इंडिया के परिवार नियोजन योजना के जिला समन्वयक राजेश पांडेय ने बताया, शिशु के जन्म के एक घंटे के भीतर माँ का गाढ़ा-पीला दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। अगले छह माह तक केवल मां का दूध बच्चे को कई गंभीर रोगों से सुरक्षित रखता है। 6 माह के बाद बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास काफी तेजी से होता है। इस दौरान स्तनपान के साथ ऊपरी आहार की काफी जरूरत होती है। घर का बना मसला व गाढ़ा भोजन ऊपरी आहार की शुरुआत के लिए जरूरी होता है।

– इन बातों का रखें ख्याल : –
– 6 माह बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार शिशु को दें।
– स्तनपान के अतिरिक्त दिन में 5 से 6 बार शिशु को सुपाच्य खाना दें।
– शिशु को माल्टिंग आहार (अंकुरित साबुत आनाज या दाल को सुखाने के बाद पीसकर) दें।
– माल्टिंग से तैयार आहार से शिशुओं को अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
– शिशु यदि अनुपूरक आहार नहीं खाए तब भी थोड़ा-थोड़ा करके कई बार खिलाएं।

अभी के मौसम में टायफाइड को लेकर रहें सतर्क

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-दूषित पानी पीने और संक्रमित भोजन करने से होता है टायफाइड
-अधिक दिनों तक लगातार बुखार रहने पर खून की करा लें जांच
बांका, 19 मई
इस मौसम में कई तरह की बीमारियों के होने का खतरा रहता है। डायरिया, डेंगू, चिकनगुनिया से लेकर अभी कोरोना तक का खतरा लोगों पर बना हुआ है, लेकिन टायफाइड को लेकर ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। इसलिए सेहत पर विशेष ध्यान दें। स्वच्छ पानी और भोजन का सेवन करें। गंदा पानी व भोजन के सेवन से कई प्रकार की पेट संबंधी बीमारियां होती हैं। इनमें एक बीमारी टायफाइड भी है जो दूषित पानी व संक्रमित भोजन के सेवन से होता है। गर्मी और बरसात के मौसम में पानी व भोजन का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। ऐसे मौसम में टायफाइड यानी मियादी बुखार के मरीज अधिक मिलते हैं। टायफाइड सालमोनेला टाइपी नामक बैक्टीरिया से फैलने वाला एक गंभीर रोग है। यह बैक्टीरिया दूषित पानी एवं संक्रमित भोजन में पनपते हैं। गंदे परिवेश वाली जगहों पर टायफाइड फैलने की संभावना अधिक होती है।
लिवर में हो जाती है सूजनः शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया दूषित पानी व संक्रमित भोजन के सेवन से व्यक्ति मियादी बुखार से ग्रसित हो जाता है। टायफाइड के कारण लिवर में सूजन हो जाती है। ऐसे में साफ पानी और भोजन का ध्यान रखना जरूरी है। सब्जियों का सही से नहीं धोना, शौचालय का इस्तेमाल नहीं होना और खुले में मलमूत्र त्याग करना, खाने से पहले हाथों को नहीं धोना, आदि कई कारणों से टायफाइड हो सकता है। तेज बुखार के साथ दस्त व उल्टी होना, बदन दर्द रहना, कमजोरी और भूख नहीं लगना टाइफाइड के प्रमुख लक्षण हैं। इसके साथ ही पेट, सिर और मांसपेशियों में भी दर्द रहता है।
पाचन तंत्र को बुरी तरह से करता है प्रभावितः डॉ. चौधरी ने बताया कि टायफाइड पाचन तंत्र को बुरी तरह प्रभावित करता है। खून की जांच कर इसका पता लगाया जाता है। बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं में बुखार के लंबे समय तक रहने पर तुरंत चिकित्सीय परामर्श प्राप्त करना चाहिए। टायफाइड होने पर मरीज को पूरी तरह आराम करना चाहिए। उन्हें ऐसे भोजन दिये जाने चाहिए जो आसानी से पचाया जा सके। पीने के लिए उबाले हुए पानी को ठंडा कर दें। रोगी को मांस-मछली का सेवन नहीं करने दें। अधिक से अधिक तरल पदार्थ लेना बेहतर है। भोजन में हरी सब्जियां, दूध और पाचन तंत्र को बेहतर बनाये रखने वाले भोजन लें। ताजे मौसमी फल का सेवन करे।
बार-बार टायफाइड होना गंभीर बातः डॉ. चौधरी ने बताया कि चाय कॉफी तथा अन्य कैफिन युक्त पदार्थ, रिफाइंड और प्रोसेस्ड फूड और अधिक तेल मसाले वाले भोजन से दूरी बनायें। इसके अलावा घी, तेल, गरम मसाला व अचार तथा गर्म तासीर वाले भोजन से परहेज करें। सही तरीके से इलाज नहीं होने और अधिक समय तक टायफाइड रहने से व्यक्ति काफी कमजोर हो जाता है। बार-बार टायफाइड का होना गंभीर है। इसलिए जिसे पहले कभी टायफाइड हुआ है, वह खास तौर पर सतर्क रहें।

एएफपी, खसरा और रूबेला की निगरानी को लेकर कार्यशाला आयोजित

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-जेएलएनएमसीएच के औषधि विभाग में डब्ल्यूएचओ ने कराया आयोजन
-अस्पताल अधीक्षक समेत कई वरिष्ठ डॉक्टरों ने कार्यशाला में लिया भाग
भागलपुर, 19 मई-
जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) के औषधि विभाग में गुरुवार विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में एएफपी, खसरा एवं रूबेला रोग के बारे में बताया गया। अस्पताल अधीक्षक डॉ. असीम कुमार दास, डॉ. विनय कुमार, डॉ. अभिलेष कुमार, डॉ. हेमशंकर शर्मा और डॉ. राजकमल चौधरी एवं डब्ल्यूएचओ के डॉ. आशीष टिग्गा एवं डॉ. सौमाल्या घोष ने कार्यशाला में मौजूद सीनियर और जूनियर रेजिडेंट और इंटर्न को खसरा, रूबेला, डिप्थीरिया, प्रटुसिस एवं नवजात टेटनस के संबंधित केस को तत्काल रिपोर्ट कर उसकी जांच करने के लिए बताया।
एकाएक लुंजपुंज लकवा को ऐसे पहचानें- कार्य़शाला में बताया गया कि अगर पिछले छह माह के दौरान 15 वर्ष तक बच्चे में अचानक शरीर के किसी भी हिस्से में कमजोरी अथवा किसी भी उम्र के व्यक्ति में लकवा जिसमें पोलियो की आशंका हो तो उसकी तत्काल जांच कराएं। यह एकाएक लुंजपुंज लकवा हो सकता है।
खसरा-रूबेला के ये हैं लक्षण- किसी भी उम्र के व्यक्ति को बुखार के साथ लाल दाना हो अथवा कोई भी व्यक्ति जिसमें एक चिकित्सक खसरा-रूबेला संक्रमण का संदेह करता है, उसकी तत्काल जांच कराएं। मरीज की जांच करते वक्त इन बातों का ध्यान रखें।
डिप्थेरिया की ऐसे करें पहचान- यदि किसी भी उम्र के व्यक्ति को बुखार, गले या टॉन्सिल में दर्द हो रहा हो लाल हो गया हो, खांसी के साथ आवाज भारी हो गई हो और टॉन्सिल या उसके आसपास सफेद ग्रे रंग की झिल्ली हो तो यह डिप्थेरिया हो सकता है। डॉक्टरों को इसकी जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।
काली खांसी को पहचानें- किसी भी उम्र का ऐसा व्यक्ति जिसे कम-से-कम दो सप्ताह से खांसी हो रही हो या फिर खांसी का लगातार होना, खाने के बाद सांस लेने की जोरदार आवाज होना, ये सब काली खांसी के लक्षण हैं। इसके अलावा खाने के तुरंत बाद उल्टी होना एवं अन्य स्पष्ट चिकित्सकीय कारण ना होना अथवा शिशुओं में खर्राटे के साथ किसी भी अवधि की खांसी होना देखते हैं तो उसकी जांच करा लेनी चाहिए।
इसे कहते हैं नवजात टेटनेस ऐसा नवजात शिशु जो जन्म के दो दिन तक ठीक से मां का दूध पी रहा था एवं सामान्य रूप से रो रहा था, लेकिन तीसरे दिन से 28 दिन के बीच में मां का दूध पीना बंद कर दिया हो, शरीर अकड़ने लगा हो और झटके आने लगे हो तो नवजात को टेटनेस हो सकता है। अधीक्षक डॉ. असीम कुमार दास ने बताया कि फिजिशियन के पास हर तरह के केस आते हैं, इसलिए इन लक्षणों पर गौर करें और उसकी जांच कराकर इलाज करें।

यूएएस इंटरनेशनल के एमडी ईशान तनेजा और जगन्नाथ इंटरनेशनल मैनेजमेंट स्कूल, जिम्स, कालकाजी नईदिल्ली के डायरेक्टर डॉ.अशोक शर्मा ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये

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– एमओयू का उद्देश्य छात्रों में व्यावसायिक कुशलता को बढ़ाना है- डॉ.अशोक शर्मा

एमओयू का उद्देश्य अंतररष्ट्रीय और राष्ट्रीय कानूनी शैक्षिक मानक का कार्यान्वयन करना है- ईशान तनेजा

– यूएएस इंटरनेशनल के साथ एमओयू साइन से छात्रों को ग्लोबल एक्सपोजर में फायदा मिलेगा- डॉ.अशोक शर्मा

नईदिल्ली-

यूएएस इंटरनेशनल और जगन्नाथ इंटरनेशनल मैनेजमेंट स्कूल,जिम्स, कालकाजी नईदिल्ली ने एमओयू पर साइन किए। यूएएस इंटरनेशनल के एमडी ईशान तनेजा और जिम्स, कालकाजी नईदिल्ली के डायरेक्टर डॉ.अशोक शर्मा ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये। यह एमओयू ऑनलाइन साइन किए गए। इस एमओयू के साथ ही यूएएस ग्रुप ऑफ कंपनी का ओफिसियल पार्टनर के रूप में फोरचुन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल बिजनेस कार्य करेगा। दोनों कंपनियां प्लेसमेंट इंटर्नशिप और ग्लोबल एक्सपोजर पर कार्य करेंगे। जिसके लिए यूएएस इंटरनेशनल जाना जाता है। जिम्स, कालकाजी नईदिल्ली के डायरेक्टर डॉ.अशोक शर्मा ने हस्ताक्षर पर प्रशंसा व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले नौ वर्षों से जिस प्रकार से एजुकेशन के क्षेत्र में यूएएस इंटरनेशनल कार्य कर रहा है यह अद्भूत है। निश्चितरूप से जिम्स को भी इससे फायदा मिलेगा।

डॉ.अशोक शर्मा ने कहा कि एमओयू का उद्देश्य सहयोग द्वारा व्यापक रूप से शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करना है। दोनों संस्थानों के सहयोगात्मक प्रयासों के माध्यम से शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नई साझेदारी को विकसित करने और पोषित करने की आवश्यकता है।

डॉ.अशोक शर्मा ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य छात्रों में व्यावसायिक कुशलता की उन्नति करना है। इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण की आवश्यकता है। जिसकी पूर्ति यूएएस इंटरनेशनल लगातार कार्य कर रहा है। यूएएस इंटरनेशनल का ध्यान लगातार छात्रों में व्यावसायिक क्षमता की उन्नति करना है जिससे उनकी कार्यकुशलता को बढ़ावा मिले। इसके लिए कई तरह की बाउंडिंग भी करता है। छात्रों को यहीं इंटरनेशनल एक्सपोजर भी एमओयू साइन करने से मिलेगा।

इस मौके पर यूएएस इंटरनेशनल के एमडी व सीईओ  ईशान  तनेजा  ने  एमओयू पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि जगन्नाथ इंटरनेशनल मैनेजमेंट स्कूल,जिम्स बेहतर बिजनेस स्कूल है। जहां के छात्र देश व विदेश में काफी बेहतरीन परफोर्मेंशन के साथ नाम रोशन कर रहे हैं। निश्चिततौर पर यूएएस इंटरनेशनल इनके कार्यों में चार चांद लगा देगा।

ईशान तनेजा ने कहा कि आज नई शिक्षा नीति में कई ऐसे प्रावधान है जिसके लिए संस्थान में एक्सपोजर लाने की जरूरत है जिसके लिए यूएएस इंटरनेशनल लगातार कार्य कर रहा है। जिम्स जैसी संस्थान के साथ एमओयू साइन होने पर युवाओं को काफी लाभ मिलेगा।

ईशान तनेजा ने कहा कि एमओयू का उद्देश्य अंतररष्ट्रीय और राष्ट्रीय कानूनी शैक्षिक मानक का कार्यान्वयन करना है। यह एमओयू फैकल्टी के साथ-साथ विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक और अनुसंधान के क्षेत्र में आपसी सहयोग के आदान-प्रदान और बढ़ावा देने में मददगार होगा।

गौरतलब है कि यूएएस ग्रुप ऑफ कंपनी पिछले नौ वर्षों में चार कंपनियों सफलतापूर्वक चल रहा है। जिसमें यूएएस इंटरनेशनल वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी, यूएएस इंटरनेशनल हॉस्टल चेन, यूएएस इंटरनेशनल हॉलिडेज प्रा. लि. है और अभी एलोफ्ट करियर नाम से ऑन लाइन एजुकेशन का नया प्लेटफोर्म तैयार किया गया है जिसको लेकर युवाओं में उत्साह है।

फेम फाइंडर्स मीडिया चुनेगा देश के बेहतरीन उभरते स्टार्टअप

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दिल्ली:
देश की लगातार बढ़ती अर्थव्यवस्था में स्टार्टअप्स का एक महत्वपूर्ण योगदान रहा है। एक स्टार्टअप्स में वित्तीय योजना बनाना, उत्कृष्ट बिज़नेस मॉडल तैयार करना, उपयुक्त कौशल नियुक्त करना एवं प्रतिस्पर्था की इस दौड़ में डटे रहने की चुनौतियों  एक स्टार्टअप के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

फेम फाइंडर्स मीडिया ने देश के उभरते स्टार्टअप्स को व्यापक पहचान दिलाने का अभियान जारी किया है, जिसमे शीर्ष 10 स्टार्टअप कंपनियों को प्रख्यात एवं बेहतरीन समाचार आउटलेट्स पर उनके आगामी संस्करण – “शीर्ष 10 उभरते स्टार्टअप 2021-22,” में प्रकाशित किया जायेगा। इस अभियान के जरिये देश के उभरते स्टार्टअप्स को अपनी सफल यात्रा को देश के लाखों पाठकों के साथ साझा करके उन्हें प्रेरित करने का सुनेहरा अवसर मिलेगा।

प्रतिभागियों को इस अभियान में शामिल होने के लिए +91 9718750379, 8376073113 नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं या famfinders.media@gmail.com पर ईमेल भी कर सकते हैं।

गर्भवती महिलाएं धूप में घर से बाहर निकलने में करें परहेज :डॉ. चौधरी 

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– 6 माह तक के नवजात के लिए सिर्फ स्तनपान ही काफी, नहीं दें अन्य तरल पदार्थ
– भोजन में विविधिता से बेहतर पोषण संभव
लखीसराय, 18 मई।
गर्मी के साथ ही गर्म हवाओं का प्रकोप भी बढ़ने लगा है।  लू से बचने के लिए सही खानपान जरूरी है। ऐसे में विशेषकर नवजात शिशुओं व गर्भवती महिलाओं के पोषण का ख्याल रखा जाना जरूरी है। प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने की जरूरत भी है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को भोजन में हरी साग सब्जी की मात्रा बढ़ाने के साथ भरपूर मात्रा में पानी लेना चाहिए।  इसके अलावा मौसमी फल व दही व छाछ जैसी खाद्य पदार्थ का सेवन भी काफी उपयोगी है।
– धूप में नहीं निकलें गर्भवती महिलाएं :
सिविल सर्जन डॉ देवेन्द्र कुमार चौधरी ने बताया, लू के मद्देनजर गर्भवती महिलाएं गर्मी के मौसम में घर से निकलने में परहेज करें। अर्थात अति आवश्यकता पड़ने पर ही घर से बाहर निकलें। साथ ही इस बात का भी ख्याल रखें कि खाली पेट घर से बाहर न जाएं। लू से बचने के लिए बहुत अधिक देर तक खाली पेट बिल्कुल नहीं रहें। लू लगने की स्थिति में चिकित्सकीय परामर्श जरूरी है। प्राथमिक उपचार के तौर पर ओआरएस का घोल दिया जाना चाहिए ताकि उल्टी व दस्त की समस्या को दूर किया जा सके। उन्होंने बताया, तेज धूप व गर्म हवा के बीच गर्भवती महिलाओं का निकलना घातक होता है। गर्भवती महिला को लू लगना उनके गर्भस्थ शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकता है। घर से बाहर निकलने से पहले पूरी सावधानी बरतें। छाता व तौलिये आदि का इस्तेमाल जरूर करें। बहुत ही आवश्यक होने पर ही पूरी सुरक्षा के साथ घर से बाहर निकलें। बाहर निकलने से पहले प्रचुर मात्रा में नीबू पानी या सत्तु आदि पी कर निकलना लू के असर को रोकता है। इसके साथ ही घर में इलेक्ट्रॉल व ओआरएस आदि भी रखें ताकि समय पड़ने पर इसका उपयोग किया जा सके। इनके नहीं रहने पर नींबू पानी, चीनी और थोड़ा नमक का शरबत बना कर दिया जा सकता है।
– 6 माह तक के शिशुओं के लिए सिर्फ स्तनपान :
6 माह तक के शिशुओं के लिए सिर्फ स्तनपान ही पर्याप्त है। उन्हें कोई भी तरल पदार्थ अलग से नहीं दिया जाना चाहिए। यहां तक की पानी भी नहीं दिया जाये। शिशु को पूरी तरह अधिक से अधिक स्तनपान कराने से डायरिया एवं निमोनिया जैसे रोगों से बचाव संभव है। स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी भरपुर पोष्टिक आहार जैसे दाल व हरी सब्जी सहित तरल पदार्थ के सेवन को बढ़ाना चाहिए।  इससे स्तनपान के माध्यम से बच्चे को आवश्यक पोषण मिल पाता है। वहीं शिशु को गर्म हवा से बचाने के लिए उसे ठंडे व हवादार कमरे में रखें। कमरा उमस भरा नहीं होना चाहिए। शिशु को सूती कपड़ा ही पहनायें ताकि पसीना आसानी से सोख जाये। नायलॉन या टेरीकॉट कपड़े बच्चे को बिल्कुल नहीं पहनाया जाना चाहिए.
– ऐसे पहचाने लू के लक्षण :
 – तेज सिर दर्द का होना
– उल्टी या जी मचलाना
– बुखार का होना
– त्वचा का लाल, गर्म एवं सूखा होना( पसीना नहीं चलना)
– बेहोशी या चक्कर आना
– घबराहट या संशय का बढ़ जाना
– अत्यधिक आलस्य या सुस्ती का होना
– इन बातों का रखें पूरा ध्यान :
– खाली पेट घर से बाहर नहीं निकलें
– सुपाच्य एवं हल्के भोजन का करें सेवन
– अत्यधिक शीतल पेय पदार्थों के सेवन करने से बचें
– रात में कम से कम 8 घन्टे की नींद जरूर लें।

आशा कार्यकर्ता के सकारात्मक सहयोग से स्वस्थ्य हुआ पीकेडीएल संक्रमित युवक

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– सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज करा पीकेडीएल को दी मात
– बेलदौर पीएचसी के पचौत पंचायत के पचौत पुनर्वास  टोले की आशा कार्यकर्ता शान्ति देवी का प्रयास लाया रंग
खगड़िया, 18 मई-
  जिले में कालाजार उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा तमाम गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। जिसे सार्थक रूप देने के लिए बेलदौर पीएचसी के  पचौत पंचायत के पचौत पुनर्वास टोले की आशा कार्यकर्ता शान्ति देवी अपने कर्तव्य पथ पर अग्रसर है। वह अपने पोषक क्षेत्र में ना सिर्फ घर-घर जाकर लोगों को फाइलेरिया और कालाजार से बचाव के लिए जागरूक कर रही बल्कि, जरूरतमंदों को आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा भी उपलब्ध कराने में मदद कर रही हैं । आशा की इस सकारात्मक पहल का  परिणाम यह है कि इसी क्षेत्र का एक युवक पीकेडीएल (चमरा वाला कालाजार) जैसी बीमारी को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में समुचित इलाज करा कर मात देने में सफल रहा। यह सब आशा कार्यकर्ता के सकारात्मक प्रयास और बीमारी की शुरुआती दौर में ही पहचान होने से संभव हुआ। पीड़ित युवक इसी गाँव निवासी धर्मेंद्र साह आज सामान्य लोगों की तरह वह भी पूरी तरह स्वस्थ्य है।
– गृह भ्रमण के दौरान मिला युवक, कराया समुचित इलाज :
आशा कार्यकर्ता शान्ति देवी ने बताया, बीते वर्ष 20 सितम्बर से जिले के साथ-साथ मेरे प्रखंड में फाइलेरिया से बचाव के एमडीए अभियान की शुरुआत हुई थी। जिसके बाद अन्य आशा कार्यकर्ता की तरह मैं भी अपने पोषक क्षेत्र में घर-घर जाकर लोगों को दवाई के सेवन के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ खुद के सामने में लोगों को दवाई का सेवन भी करा रही  थी। इसी दौरान मुझे धर्मेन्द्र कुमार को देखने से लगा कि यह पीकेडीएल संक्रमित है। जिसके बाद मैंने स्थानीय पीएचसी समेत केटीएस और केयर इंडिया की टीम को सूचना दी और फिर अगले दिन केटीएस एवं केयर इंडिया के प्रखंड समन्वयक के साथ युवक के  घर जाकर उनका स्वास्थ्य अवलोकन किया। इसके बाद स्थानीय पीएचसी में जाँच करने के बाद पीकेडीएल संक्रमित होने की बात सामने आई। इसके बाद मैंने  अपनी देखरेख में युवक का स्थानीय सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज शुरू करवाया । जिसका परिणाम यह है कि आज युवक अन्य लोगों की तरह पूरी तरह स्वस्थ्य है।
– आशा कार्यकर्ता के सकारात्मक प्रयास और शुरुआती दौर में ही बीमारी की पहचान होने से पीकेडीएल को मात देने में सफल रहा किशोर :
केयर इंडिया के डीपीओ कृष्ण कुमार भारती एवं बेलदौर पीएचसी के प्रखंड समन्वयक नवीन गुप्ता ने बताया, आशा कार्यकर्ता के सकारात्मक प्रयास और शुरुआत दौर में बीमारी की पहचान होने से पीड़ित पीड़ित युवक पीकेडीएल जैसी बीमारी को मात देने में सफल रहा। इसलिए, मैं तमाम लोगों से अपील करता हूँ कि लक्षण महसूस होने पर लापरवाही नहीं, बल्कि शुरुआती दौर में ही समय पर इलाज शुरू करें। क्योंकि, समय पर इलाज शुरू होने से बीमारी को आसानी के साथ मात देना संभव है।
– आशा कार्यकर्ता के प्रयास से आज मैं पूरी तरह स्वस्थ हूँ :
पीड़ित युवक ने बताया, आशा कार्यकर्ता के प्रयास से ही आज मैं अन्य लोगों की तरह पूरी तरह स्वस्थ्य हूँ। आशा दीदी ने ना सिर्फ मुझे सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी उपलब्ध कराई बल्कि, घर से लेकर अस्पताल तक इलाज के दौरान साथ में खड़ी भी रही। इस कार्य के लिए मेरा पूरा परिवार आशा दीदी का आभारी है।

एनीमिया से बचाव के लिए प्रोटीनयुक्त आहार लें 

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-लक्षण दिखते ही समय पर कराएं इलाज, चिकित्सा परामर्श का करें पालन
-लापरवाही बन सकती है बड़ी परेशानी, इसलिए सतर्कता व सावधानी जरूरी
बांका, 18 मई-
एनीमिया से बचाव के लिए प्रोटीनयुक्त आहर का सेवन करना चाहिए। यह बीमारी खून की कमी से होती है। इसलिए इससे बचाव के लिए आयरनयुक्त खाना का सेवन करना जरूरी है। दरअसल, शरीर में पर्याप्त आयरन रहने से इस बीमारी की संभावना न के बराबर रहती है। इसलिए, खान-पान एवं रहन-सहन का विशेष ख्याल रखें और सकारात्मक बदलाव ही बीमारी से बचाव का बड़ा उपचार है। यह बीमारी खून में पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं या हीमोग्लोबिन कम होने से होती है। इसलिए, लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज कराएं और चिकित्सा परामर्श का पालन करें। अन्यथा थोड़ी सी लापरवाही बड़ी मुसीबत और परेशानी का सबब बन सकती है। इससे घबराने की भी जरूरत नहीं है। ऐसे में समय पर जांच के लिए अस्पताल जाने एवं चिकित्सकों की सलाह का पालन करना चाहिए। जो आगे की मुसीबत उत्पन्न नहीं होने देगी एवं आपके लिए फायदेमंद साबित होगा तथा आसानी के साथ आपको बीमारी से छुटकारा मिल सकता है।
आयरनयुक्त खाना का करें सेवन: शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया, आयरन की कमी के कारण एनीमिया होती है। इसलिए आहार बदलने एवं आयरन युक्त आहार का सेवन करने से इस बीमारी से बचाव होगा। साथ ही लक्षण दिखते ही मरीजों को तुरंत जांच करानी चाहिए और चिकित्सा परामर्श का पालन करते हुए आवश्यक इलाज भी कराना चाहिए।
ये हैं एनीमिया के प्रारंभिक लक्षण: एनीमिया बीमारी के शुरुआती लक्षण थकान, कमजोरी, त्वचा का पीला होना, दिल की धड़कन में बदलाव, सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, सीने में दर्द, हाथों और पैरों का ठंडा होना, सिरदर्द आदि  है। ऐसा लक्षण होते ही ससमय इलाज कराएं।
प्रोटीनयुक्त खाने का करें सेवन: एनीमिया के दौरान प्रोटीन युक्त खाने का सेवन करें, जैसे कि पालक, सोयाबीन, चुकंदर, लाल मांस, अंडे, टमाटर, अनार, शहद, सेब, खजूर आदि। जो कि आपके शरीर की कमी को पूरा करता एवं हीमोग्लोबिन जैसी कमी भी दूर होती है। इससे आपको एनीमिया बीमारी से बचाव मिल सकता है।
चिकित्सकों की सलाह का करें पालन: एनीमिया के दौरान आप तुरंत किसी अच्छे चिकित्सक से दिखाएं एवं चिकित्सकों के अनुसार आवश्यक जांच कराएं। इसके बाद चिकित्सकों द्वारा दी गई आवश्यक चिकित्सा परामर्श का पालन करें, जो आपके लिए फायदेमंद साबित होगा।
गर्भवती महिलाएं रखें विशेष ख्याल: गर्भवती महिलाएं को गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए शरीर में रक्त का निर्माण करना पड़ता है। जिसमें कमी होने के कारण एनीमिया होने की प्रबल संभावना हो जाती है। इसलिए गर्भवती महिलाएँ को गर्भ दौरान लगातार हीमोग्लोबिन समेत अन्य आवश्यक जांच करानी चाहिए एवं चिकित्सकों के चिकित्सा परामर्श का पालन करना चाहिए।