मैडम ने तो मुझे और बच्चे दोनों को बचा लिया, लाख-लाख शुक्रिया

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-अमरपुर रेफरल अस्पताल में बेटे को जन्म देने के बाद बोली प्रसूता डॉली
-शॉर्ट सर्किट से कुछ समय के लिए लाइट चली गई थी, फिर भी सफल सर्जरी
बांका, 16 मई-
मैडम ने तो मुझे बचा लिया। मेरे साथ मेरे बच्चे को भी जीवन दिया। इसके लिए उनका लाख-लाख शुक्रिया। यह दुआ ऐसे नहीं निकलती है। इसके लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। वैसे तो डॉक्टरी पेशा को ही सेवा माना जाता है, लेकिन कुछ ऐसे विरले होते हैं, जो न सिर्फ इस कहावत पर खरा उतरते हैं, बल्कि दूसरों के लिए एक नया मापदंड भी बना देते हैं। ऐसा ही किया है अमरपुर रेफरल अस्पताल की डॉ. दीप्ति सिन्हा ने।
दरअसल, सोमवार को अमरपुर रेफरल अस्पताल में शॉर्ट शर्किट लगने की वजह से कुछ समय के लिए लाइट चली गई थी और गोपालपुर गांव की डॉली कुमारी का सिजेरियन से प्रसव हो रहा था। अंधेरे में ऑपरेशन करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, लेकिन बहादुर डॉ दीप्ति सिन्हा ने टॉर्च और मोबाइल के जरिये सफल ऑपरेशन किया। डॉली ने बेटे को जन्म दिया। जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ है। इसके बाद तो सिर्फ डॉली ही नहीं, बल्कि उसके परिजन और अस्पताल आए पड़ोसी भी डॉ. दीप्ति सिन्हा को लाख-लाख शुक्रिया अदा कर रहे हैं।
मैंने सिर्फ अपना कर्तव्य निभायाः डॉ. दीप्ति सिन्हा कहती हैं कि मैंने कुछ विशेष नहीं किया। सिर्फ अपने कर्तव्य को निभाया। अगर कभी कोई मुश्किल आ जाती है तो उस समय यह निर्णय लेना होता है कि हमारे लिए क्या सबसे महत्वपूर्ण है। एक डॉक्टर के लिए मरीजों की सुरक्षा से बड़ी जिम्मेदारी और कुछ नहीं हो सकती। मैं जब डॉली की सर्जरी कर रही थी तो अचानक थोड़ी देर के लिए बिजली चली गई थी। वैसे तो हमारे अस्पताल में कभी ऐसी घटना नहीं होती है, लेकिन तकनीकी वजह से कुछ इस तरह की परेशानी हो गई तो मैं कैसे वहां पर पीछे हट सकती थी। ऐसे समय में फैसले लेने की क्षमता महत्वपूर्ण होती है। मैंने फैसला लिया कि ऑपरेशन को रोकना नहीं है। अगर बिजली आने में देरी होती है तो मरीज को परेशानी हो सकती है। इसलिए मैं अपना काम वैकल्पिक व्यवस्था के जरिये करती रही, जिसका सुखद परिणाम सभी के सामने हैं।
डॉ दीप्ति और रायबहादुर का शुक्रियाः अमरपुर रेफरल अस्पताल के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि हम डॉक्टरों को चुनौती में काम करने की आदत होती है। पिछले दो सालों से कोरोना काल में एक से बढ़कर एक चुनौती का सामना किया और उसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इसलिए सिर्फ डॉक्टर ही नहीं, बल्कि अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को भी इसमें महारत हासिल है। अस्पताल में शॉर्ट सर्किट की वजह से थोड़ी देर के लिए लाइट चली गई थी, लेकिन इसके बावजूद दीप्ति ने अपना कर्तव्य सफलतापूर्वक निभाया। दीप्ति के साथ-साथ बेहोशी के डॉ रायबहादुर का भी शुक्रिया, जिन्होंने इसमें अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वैसे तो अमरपुर रेफरल अस्पताल में तमाम अत्याधुनिक सुविधाएं हैं, इसके बावजूद इस तरह की कुछ घटनाएं हो जाती हैं। हालांकि समय रहते ही उससे हमलोग पार पा लेते हैं।

डेंगू को लेकर जिलेभर में हुआ जागरूकता कार्यक्रम

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-स्वास्थ्यकर्मियों को लक्षण और बचाव की दी गई जानकारी
-स्वास्थ्यकर्मी अब क्षेत्र के लोगों को करेंगे इसे लेकर जागरूक
बांका, 16 मई-
विश्व डेंगू दिवस पर सोमवार को जिलेभर में जागरूकता कार्यक्रम हुआ। जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में स्वस्थ्यकर्मियों को डेंगू के लक्षण और बचाव की जानकारी  दी गई। स्वास्थ्यकर्मी इस जानकारी को अब क्षेत्र के लोगों को जाकर देंगे। जिला वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल पदाधिकारी डॉ. बीरेंद्र कुमार यादव और वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी आरिफ इकबाल ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बाराहाट और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रजौन का दौरा किया। बाराहाट में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रश्मि सीमा और स्वास्थ्य प्रबंधक अवध किशोर श्यामला ने एएनएम, जीएनएम व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को डेंगू के लक्षण और उससे बचाव की जानकारी दी। वहीं रजौन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. ब्रजेश कुमार और स्वास्थ्य प्रबंधक राजेश कुमार ने स्वास्थ्यकर्मियों को डेंगू को लेकर जानकारी दी।
एडीज मच्छर के काटने से होता है डेंगूः डॉ. बीरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि एडीज मच्छर के काटने से डेंगू होता है। यह मच्छर दिन में काटता है और स्थिर एवं साफ पानी में पनपता है। तेज बुखार, बदन, सिर एवं जोड़ों में दर्द और आंखों के पीछे दर्द हो तो सतर्क हो जाएं। त्वचा पर लाल धब्बे या चकते का निशान, नाक- मसूढ़ों से या उल्टी के साथ रक्तस्राव होना और काला पखाना होना डेंगू के लक्षण हैं। इन लक्षणों के साथ यदि तेज बुखार हो तो तत्काल सदर अस्पताल जाएं और अपना इलाज करवाएं। डॉ. बीरेंद्र ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को पहले डेंगू हो चुका है तो उसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। ऐसे व्यक्ति दोबारा डेंगू बुखार की आशंका होने पर सरकारी अस्पताल या फिर डॉक्टर से संपर्क करें।
दिन में भी करें मच्छरदानी का इस्तेमालः आरिफ इकबाल ने कहा कि दिन में भी सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। इसके साथ-साथ मच्छर भगाने वाली क्रीम या दवा का प्रयोग दिन में भी करें। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। घर के सभी कमरों को साफ-सुथरा रखें। टूटे-फूटे बर्तनों, कूलर, एसी, फ्रीज में पानी जमा नहीं होने दें। पानी टंकी और घर के आसपास अन्य जगहों पर भी पानी नहीं जमने दें। घर के आसपास साफ-सफाई का ध्यान रखें और कीटनाशक दवा का इस्तेमाल करें। गमला, फूलदान का पानी हर दूसरे दिन बदल दें। घर के साथ-साथ सार्वजनिक स्थलों पर भी सतर्कता जरूरी है। मॉल व दुकान चलाने वाले लोग भी खाली जगहों पर रखे डिब्बे और कार्टनों में पानी जमा नहीं होने दें। जमे हुए पानी पर मिट्टी का तेल डालें।
सिर्फ गंभीर मरीजों को भर्ती की जरूरतः डॉक्टर बीरेंद्र ने बताया कि सभी तरह के बुखार डेंगू नहीं होता है। बुखार होने पर बिना समय गंवाए डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर जांच के बाद जैसा कहेंगे, उसके अनुसार अपना इलाज करवाएं। डेंगू होने की स्थिति में सभी मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। सिर्फ गंभीर मरीजों को ही भर्ती होना पड़ता है। समय पर इलाज कराने पर मरीज पूरी तरह से स्वस्थ्य हो सकता है।

डेंगू से घबराने की जरूरत नहीं, बहुत सामान्य है इसका इलाजः सिविल सर्जन

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-सिर्फ गंभीर मरीजों को ही अस्पताल में भर्ती होने की पड़ती है जरूरत
-डेंगू दिवस पर अस्पताल में सिविल सर्जन की अध्यक्षता में हुई बैठक
भागलपुर, 16 मई-
विश्व डेंगू दिवस पर सोमवार को सदर अस्पताल में बैठक की गई। बैठक की अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने की। इस दौरान प्रभारी जिला वेक्टर्न बॉर्न डिजीज नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. दीनानाथ, वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी रविकांत, निगरानी कार्यकर्ता राजीव रंजन और फाइलेरिया नियंत्रण इकाई के भी पदाधिकारी मौजूद थे। बैठक को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने कहा कि डेंगू से घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि इससे बचने की जरूरत है। कैसे डेंगू से बचे रहें, इस पर ध्यान देने की जरूरत है। डेंगू के लक्षण की जानकारी बहुत लोगों को है और इससे कैसे बचा जाए, यह भी जानते हैं। दिन में मच्छर काटने से यह बीमारी होती है, इसलिए इससे बचाव पर फोकस करना चाहिए। डेंगू के सिर्फ गंभीर मरीजों को ही भर्ती करने की जरूरत पड़ती है।
सिविल सर्जन ने बताया कि डेंगू के कुछ गंभीर लक्षण हैं। जैसे आंखों के पीछे दर्द होना, हड्डियों के जोड़ों पर भयानक दर्द होना और मच्छर के काटने पर लाल चकते होना। डेंगू के गंभीर मरीज का प्लेटलेट्स काफी कम हो जाता है, इसलिए उसे भर्ती करना पड़ता है। इसके अलावा सिर में दर्द होना, तेज बुखार होना जैसे लक्षण सभी को मालूम हैं। आज डेंगू दिवस मनाने का मतलब यह है कि आज से ही हमलोग इसके प्रति सतर्क हो जाएं। अभी भीषण गर्मी पड़ रही है। इस मौसम में कूलर भी लोग अधिक चलाते हैं। इसलिए अभी से ही सावधानी बरतनी होगी।
सफाई है इसका रामबाण इलाजः बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. दीनानाथ ने कहा कि डेंगू से बचाव में सफाई है रामबाण इलाज। अगर सफाई रहेगी तो न कूलर में पानी जमा रहेगा और न ही नारियल के खोली में। साफ रहने पर सभी कुछ खत्म रहेगा। इसलिए नियमित तौर पर सफाई पर ध्यान देने की जरूरत है। इसके अलावा शरीर को पूरी तरह से ढकने वाला कपड़ा पहनें। शरीर का जो हिस्सा ढका नहीं है, उस पर मच्छर भगाने वाला क्रीम लगाएं। साथ ही मच्छरदानी का प्रयोग करें। ऐसा करते रहने से डेंगू से बचे रहेंगे।
एडीज मच्छर के काटने से होता है डेंगूः डॉ. दीनानाथ ने बताया कि एडीज मच्छर के काटने से डेंगू होता है। यह मच्छर दिन में काटता है और स्थिर एवं साफ पानी में पनपता है। तेज बुखार, बदन, सिर एवं जोड़ों में दर्द और आंखों के पीछे दर्द हो तो सतर्क हो जाएं। त्वचा पर लाल धब्बे या चकते का निशान, नाक- मसूढ़ों से या उल्टी के साथ रक्तस्राव होना और काला पखाना होना डेंगू के लक्षण हैं। इन लक्षणों के साथ यदि तेज बुखार हो तो तत्काल सदर अस्पताल या फिर मायागंज अस्पताल जाएं और अपना इलाज करवाएं। डॉ. दीनानाथ ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को पहले डेंगू हो चुका है तो उसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। ऐसे व्यक्ति दोबारा डेंगू बुखार की आशंका होने पर सरकारी अस्पताल या फिर डॉक्टर से संपर्क करें।
सभी बुखार डेंगू नहीं:डॉ दीनानाथ ने बताया कि सभी तरह के बुखार डेंगू नहीं होता है। बुखार होने पर बिना समय गंवाए डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर जांच के बाद जैसा कहेंगे, उसके अनुसार अपना इलाज करवाएं। डेंगू होने की स्थिति में सभी मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। सिर्फ गंभीर मरीजों को ही भर्ती होना पड़ता है। समय पर इलाज कराने पर मरीज पूरी तरह से स्वस्थ्य हो सकता है।

युवा सशक्तिकरण समृद्ध राज्य हेतु आवश्यक -डॉ नयन प्रकाश गाँधी

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आज के युवा को जिम्मेदार,कर्तव्यनिष्ठ ,लगनशील बनना होगा-डॉ. एन .पी .गाँधी

राजस्थान सरकार के निर्देशानुसार आर्थिकी एवं सांख्यिकी निदेशालय योजना भवन द्वारा संचालित राजीव गाँधी युवा मित्र इंटर्नशिप कार्यक्रम राज्य स्तरीय युवा सशक्तिकरण कि इस मुहिम में बकानी झालावाड़ मूल कोटा निवासी ड़ॉ.नयन प्रकाश गाँधी राज्य के समेकित युवा सशक्तिकरण हेतु प्रयासरत है।
गाँधी ने मीडिया वार्ता में बताया कि स्वर्गीय राजीव गाँधी शुरू से ही युवा सशक्तिकरण की बात करते थे ,आज युवा सशक्तिकरण राजनीति का नही राज्य के विकास का सूचक है , गाँधी का मानना है कि माननीय यशस्वी मुख्यमंत्री महोदय राजस्थान सरकार के इस महत्वकांशी ऐतिहासिक प्रोजेक्ट को राष्ट्रोय स्तर पर एक पहचान मिलेगी जब युवा मित्र पूरी लगन से राज्य सरकार की योजनाओ से अधिकधिक आम जन ,सही लाभार्थी ,परिवारजन को जोड़ने में अपनी भूमिका निभाएंगे । राज्य के समस्त जिलों से चयनित युवा प्रतिभागियों को गाँधी द्वारा राज्य सरकार की विभिन्न फ्लैगशिप योजनाओ के बेहतर रूप से क्रियान्वयन हेतु प्रशिक्षण दिया जा रहा है ,साथ ही गांव के प्रत्येक परिवारजन ,लाभार्थी से बेहतर संवाद कैसे स्थापित किया जा सके उसके लिए भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है ।गाँधी ने युवा मित्रो को राज्य सरकार ,सीएमओ राजस्थान के विभिन्न सॉशेल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़कर आमजन हितार्थ कैसे अधिकाधिक राज्य स्तर से क्रियान्वित योजनाओ की उपलब्धियों एवं उनके लिए उपयुक्त लाभार्थी के अधिकाधिक निःशुल्क ऑनलाइन पंजीकरण कैसे किया जा सकता है आदि की जानकारी ऑडियो विजुअल एड ,पॉवरपॉइंट प्रजेंटेंशन के माध्यम से प्रदान की ।साथ ही तनाव प्रबंधन ,कार्यिकी सफलता के विभिन्न आयामो के बारे में प्रेक्टिकल एक्टिविटीज के माध्यम से प्रशिक्षण दिया। गाँधी वर्तमान मे आर्थिकी सांख्यिकी निदेशालय योजना भवन में प्रोग्राम ऑफिसर के रूप में कार्यरत है ।डॉ एनपी गाँधी ने बताया कि वे अटूट नेतृत्व क्षमता के धनी ,आईएएस डॉ.ओम प्रकाश बैरवा जो कि आर्थिक सांख्यिकी निदेशालय राजस्थान सरकार के निदेशक एवं सयुक्त सचिव के निर्देशानुसार पूरी निष्ठा के साथ जुटे हुए है एवं समस्त आरवाईएमपी टीम के समन्वित प्रयासों के साथ इस परियोजना के बेहतर क्रियान्वयन हेतु राज्य सरकार सीएमओ के मंशानुरूप अधिकधिक लाभार्थियों को जन कल्याणकारी योजनाओं से अवगत करवाना ,उनका पंजीकरण करवाना ,उनकी समस्याओं के समाधान हेतु युवा मित्रो को सेतु के रूप में तैयार करना उनका उद्देश्य है । आज चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना ,मुख्यमंत्रो निःशुल्क दवा एवं जांच योजना ,इंदिरा रसोई योजना ,आईएम शक्ति उड़ान योजना ,मुख्यमंत्रो अनुप्रति कोचिंग योजना ,मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना , इंदिरा गाँधी शहरी क्रेडिट कार्ड योजना ,मुख्यमंत्री किसान मित्र ऊर्जा योजना ,कृषि प्रसंस्करण ,युवा सम्बंल योजना
एवं अनेको राज्य स्तर पर आम जन हितार्थ योजनाएं क्रियान्वित है ,आवश्यकता है तो वांछित वर्ग के हर अंतिम छोर तक इन योजनाओं के लाभ को पहुचाने की। गाँधी ने आगे बताया कि प्रत्येक व्यक्ति को जनाधार कार्ड बना लेना चाहिए ताकि योजना के लाभ से वंचित न हो या कोई परेशानी न हो।

यूएएस इंटरनेशनल के एमडी ईशान तनेजा और फोरचुन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल बिजनेस के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. भूपेंद्र सोम ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये

 

– एमओयू का उद्देश्य छात्रों में व्यावसायिक कुशलता को बढ़ाना है- डॉ. भूपेंद्र सोम

एमओयू का उद्देश्य अंतररष्ट्रीय और राष्ट्रीय कानूनी शैक्षिक मानक का कार्यान्वयन करना है- ईशान तनेजा

– यूएएस इंटरनेशनल के साथ एमओयू साइन से छात्रों को ग्लोबल एक्सपोजर में फायदा मिलेगा- डॉ. भूपेंद्र सोम –

नईदिल्ली-

यूएएस इंटरनेशनल और फोरचुन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल बिजनेस ने एमओयू पर साइन किए। यूएएस इंटरनेशनल के एमडी ईशान तनेजा और फोरचुन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल बिजनेस के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. भूपेंद्र सोम ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये। यह एमओयू ऑनलाइन साइन किए गए। इस एमओयू के साथ ही यूएएस ग्रुप ऑफ कंपनी का ओफिसियल पार्टनर के रूप में फोरचुन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल बिजनेस कार्य करेगा। दोनों कंपनियां प्लेसमेंट इंटर्नशिप और ग्लोबल एक्सपोजर पर कार्य करेंगे। जिसके लिए यूएएस इंटरनेशनल जाना जाता है। फोरचुन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल बिजनेस के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. भूपेंद्र सोम ने हस्ताक्षर पर प्रशंसा व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले नौ वर्षों से जिस प्रकार से एजुकेशन के क्षेत्र में यूएएस इंटरनेशनल कार्य कर रहा है यह अद्भूत है। निश्चितरूप से फोरचुन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल बिजनेस को भी इससे फायदा मिलेगा।

डॉ. भूपेंद्र सोम ने कहा कि एमओयू का उद्देश्य सहयोग द्वारा व्यापक रूप से शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करना है। दोनों संस्थानों के सहयोगात्मक प्रयासों के माध्यम से शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नई साझेदारी को विकसित करने और पोषित करने की आवश्यकता है।

डॉ. भूपेंद्र सोम ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य छात्रों में व्यावसायिक कुशलता की उन्नति करना है। इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण की आवश्यकता है। जिसकी पूर्ति यूएएस इंटरनेशनल लगातार कार्य कर रहा है। यूएएस इंटरनेशनल का ध्यान लगातार छात्रों में व्यावसायिक क्षमता की उन्नति करना है जिससे उनकी कार्यकुशलता को बढ़ावा मिले। इसके लिए कई तरह की बाउंडिंग भी करता है। छात्रों को यहीं इंटरनेशनल एक्सपोजर भी एमओयू साइन करने से मिलेगा।

इस मौके पर यूएएस इंटरनेशनल के एमडी व सीईओ  ईशान  तनेजा  ने  एमओयू पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि फोरचुन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल बिजनेस बेहतर बिजनेस स्कूल है। जहां के छात्र देश व विदेश में काफी बेहतरीन परफोर्मेंशन के साथ नाम रोशन कर रहे हैं। निश्चिततौर पर यूएएस इंटरनेशनल इनके कार्यों में चार चांद लगा देगा।

ईशान तनेजा ने कहा कि आज नई शिक्षा नीति में कई ऐसे प्रावधान है जिसके लिए संस्थान में एक्सपोजर लाने की जरूरत है जिसके लिए यूएएस इंटरनेशनल लगातार कार्य कर रहा है। फोरचुन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल बिजनेस जैसी संस्थान के साथ एमओयू साइन होने पर युवाओं को काफी लाभ मिलेगा।

ईशान तनेजा ने कहा कि एमओयू का उद्देश्य अंतररष्ट्रीय और राष्ट्रीय कानूनी शैक्षिक मानक का कार्यान्वयन करना है। यह एमओयू फैकल्टी के साथ-साथ विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक और अनुसंधान के क्षेत्र में आपसी सहयोग के आदान-प्रदान और बढ़ावा देने में मददगार होगा।

गौरतलब है कि यूएएस ग्रुप ऑफ कंपनी पिछले नौ वर्षों में चार कंपनियों सफलतापूर्वक चल रहा है। जिसमें यूएएस इंटरनेशनल वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी, यूएएस इंटरनेशनल हॉस्टल चेन, यूएएस इंटरनेशनल हॉलिडेज प्रा. लि. है और अभी एलोफ्ट करियर नाम से ऑन लाइन एजुकेशन का नया प्लेटफोर्म तैयार किया गया है जिसको लेकर युवाओं में उत्साह है।

 

 

 

स्वतंत्रता सेनानी व पूर्व विधायक स्व. श्याम नारायण सिंह की 54वीं पुण्य तिथि के अवसर पर विद्यार्थियों को पढ़ाई सामग्री बांटी गयी

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13 मई,बिन्द.नालंदा जिला के बिन्द क्षेत्र के सपूत स्व. श्याम नारायण सिंह की 54वीं पुण्य तिथि के अवसर पर उनके पुत्र एवं एक बड़ी कंपनी के एसोसिएट वाइस-प्रेसिडेंट कैलाश बिहारी ने अपनी पुश्तैनी धरती बिन्द में अपने पिता की स्मृतियों को याद करते हुए उनकी प्रतिमा का माल्यार्पण किया.
इस अवसर पर अपने नायक की पुण्य तिथि में शामिल होने बिन्द की अधिकाँश जनता भी शामिल हुई. इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पधारे भाजपा प्रवक्ता व पूर्व विधायक प्रेम रंजन पटेल ने उन्हें नमन करते हुए कहा कि स्व. श्याम नारायण सिंह जी जहाँ स्वतंत्रता सेनानी के रूप में अंग्रेज़ों के दांत खट्टे किये थे वहीँ बतौर विधायक भी 15 वर्ष (1937-52) तक उन्होंने अपने क्षेत्र की जनता की सेवा की.
इस अवसर पर कैलाश बिहारी ने भाजपा के प्रवक्ता व पूर्व विधायक प्रेम रंजन पटेल,बिन्द निवासी पूर्व शिक्षक राजा राम बाबू, सूर्यगढ़ा के विधायक के प्रभारी मनोज कुमार एवं भाव अमृत संग संस्थान के अध्यक्ष अरुण कुमार गुरुदेव को अपने हाथों से अपने पिता स्व. श्याम नारायण सिंह की स्मृति चिन्ह भेंट की.
बिन्द के कुछ बुज़ुर्ग निवासियों ने स्व. श्याम नारायण सिंह को याद करते हुए कहा कि वो स्वतंत्रता सेनानी व नेता होने के साथ-साथ एक नेक दिल इंसान और समाज सेवी भी थे जो हर वक़्त अपने क्षेत्र की जनता की सहायता के लिए हमेशा खड़े रहते थे. उनके द्वारा बिन्द के कल्याण के लिए किये गए कार्यों को जनता आज भी नहीं भूली है और आज भी जनता उन्हें प्यार और सम्मान देती है और हमेशा देती रहेगी, वो बिन्द के कण-कण में रचे बसे हैं.
उनके पुत्र कैलाश बिहारी ने अंत में कहा कि पढ़ाई की महत्ता पर उनके पिता स्व. श्याम नारायण सिंह जी हमेशा ज़ोर दिया करते थे और उनका सपना था कि बिन्द की जनता न सिर्फ्र साक्षर हो बल्कि अच्छी तरह से पढ़-लिख कर के समाज में एक बड़ा मुकाम हासिल कर बिन्द का नाम रौशन करें.अपने पिता की इस बात को ध्यान में रखते हुए कैलाश बिहारी ने विद्यार्थियों के बीच कॉपी, पेन,पेन्सिल,पुस्तक,डायरी के साथ चॉकलेट भी वितरित किया और कहा कि वो प्रत्येक वर्ष अपने पिता की जयंती और पुण्य तिथि के अवसर पर इस तरह बच्चों को प्रोत्साहित करने का काम करते रहेंगे.

“डेंगू इज प्रिवेंटिएबल : लेट्स जॉइन हैंड्स ” की थीम पर 16 मई को जिला भर में मनाया जाएगा राष्ट्रीय डेंगू दिवस

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– सदर अस्पताल के उपाधीक्षक सहित सभी सरकारी अस्पतालों के प्रभारियों को भेजी गई चिट्ठी
– डेंगू की रोकथाम को लेकर चर्चा के लिए विभिन्न स्तर पर होगी बैठक
मुंगेर, 13 मई।
16 मई सोमवार को “डेंगू इज प्रिवेंटिएबल : लेट्स जॉइन हैंड्स ” की थीम पर सदर अस्पताल मुंगेर सहित जिला भर के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में ” राष्ट्रीय डेंगू दिवस” मनाया जाएगा । इसको ले जिला वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोलिंग ऑफिसर डॉ. अरविंद कुमार सिंह ने सदर अस्पताल के उपाधीक्षक सहित जिला भर के के सभी प्राथमिक/ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को एक चिट्ठी जारी की है। सदर अस्पताल में भी बैठक व जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
डिस्ट्रिक्ट वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोलिंग ऑफिसर डॉ. सिंह ने बताया कि प्रति वर्ष 16 मई को राष्ट्रीय डेंगू दिवस मनाया जाता है। यह दिवस विभिन्न स्थानीय अधिकारियों, विभागों तथा गैर सरकारी संगठनों एवम विभिन्न पार्टनर्स/स्टेक होल्डर्स के साथ समन्वय स्थापित कर डेंगू की रोकथाम के प्रति जनसमुदाय को जागरूक करने का उचित अवसर है। इस दिन से ही डेंगू की रोकथाम की गतिविधियों को तेज कर दिया जाता जो ट्रांसमिशन सीजन के समाप्त होने तक जारी रहता है।  उन्होंने बताया कि 16 मई को बुद्ध पूर्णिमा को लेकर सरकारी छुट्टी है, इसके बावजूद विभाग के सभी कर्मियों को दफ्तर आने के लिए कहा गया है। उस दिन बैठकर हमलोग इस पर चर्चा करेंगे। इस दौरान डेंगू के इलाज को लेकर दवा व अन्य जरूरी चीजों की उपलब्धता पर बात की जाएगी।
एडिस मच्छर के काटने से होता है डेंगू : वेक्टर डिजीज कंट्रोलिंग ऑफिसर संजय कुमार विश्वकर्मा  ने बताया कि एडिस मच्छर के काटने से डेंगू होता है। यह मच्छर दिन में काटता है और स्थिर एवं साफ पानी में पनपता है। तेज बुखार, बदन, सिर एवं जोड़ों में दर्द और आंखों के पीछे दर्द हो तो सतर्क हो जाएं। त्वचा पर लाल धब्बे या चकते का निशान, नाक- मसूढ़ों से या उल्टी के साथ रक्त स्राव होना और काला पखाना होना डेंगू के लक्षण हैं। इन लक्षणों के साथ यदि तेज बुखार हो तो तत्काल सदर अस्पताल जाएं और अपना इलाज करवाएं। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को पहले डेंगू हो चुका है तो उसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। ऐसे व्यक्ति दोबारा डेंगू बुखार की आशंका होने पर सरकारी अस्पताल या फिर डॉक्टर से संपर्क करें।
समय पर इलाज कराने पर मरीज हो जाता स्वस्थ्य : संजय कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि सभी तरह का बुखार डेंगू नहीं होता है। बुखार होने पर बिना समय गंवाए डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर जांच के बाद जैसा कहेंगे, उसके अनुसार अपना इलाज करवाएं। डेंगू होने की स्थिति में सभी मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। सिर्फ गंभीर मरीजों को ही भर्ती होना पड़ता है। समय पर इलाज कराने पर मरीज पूरी तरह से स्वस्थ्य हो सकता है।
दिन में सोते समय भी लगाएं मच्छरदानी :  डिस्ट्रिक्ट वेक्टर बोर्न डिजीज कंसलटेंट पंकज कुमार प्रणव ने बताया कि दिन में भी सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। इसके साथ-साथ मच्छर भगाने वाली क्रीम या दवा का प्रयोग दिन में भी करें। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। घर के सभी कमरों को साफ- सुथरा रखें। टूटे-फूटे बर्तनों, कूलर, एसी, फ्रीज में पानी जमा नहीं होने दें। पानी टंकी और घर के आसपास अन्य जगहों पर भी पानी नहीं जमने दें। घर के आसपास साफ-सफाई का ध्यान रखें और कीटनाशक दवा का इस्तेमाल करें। गमला, फूलदान का पानी हर दूसरे दिन बदल दें। घर के साथ-साथ सार्वजनिक स्थलों पर सतर्कता जरूरी है। मॉल व दुकान चलाने वाले लोग भी खाली जगहों पर रखे डिब्बे और कार्टनों में पानी जमा नहीं होने दें। जमे हुए पानी पर मिट्टी का तेल डालें।

समय से पूर्व प्रसव होने पर चिकित्सकों की सलाह अनुसार ही कराएं उपचार

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– जच्चा-बच्चा दोनों को परेशानियाँ का करना पड़ सकता है सामना
– समय से पूर्व प्रसव होने पर शिशु रहता है बेहद कमजोर, इसलिए उचित इलाज जरूरी
खगड़िया, 13 मई।
हर महिला में गर्भावस्था के दौरान ससमय एवं सुरक्षित प्रसव होने की लालसा रहती और इस दौरान मन में तरह-तरह के सवाल और खुशियाँ भी रहती है। हालाँकि, इस दौरान थोड़ी सी अनदेखी और लापरवाही बड़ी मुश्किल बन जाती और महिलाओं को तरह-तरह की परेशानियाँ से जूझना पड़ता है। ऐसी ही एक परेशानी समय पूर्व प्रसव होना है। जो जच्चा-बच्चा दोनों के लिए परेशानी बन जाती है। हालाँकि, समय पूर्व प्रसव होने के कई कारण हैं। किन्तु सामान्यतः कमजोर महिलाएं खासकर इस दायरे में आ ही जाती हैं। समय पूर्व प्रसव में जन्म लेने वाले शिशु भी बेहद कमजोर होते हैं। क्योंकि, समय पूर्व प्रसव होने के कारण शिशु गर्भ के दौरान मानसिक, शारीरिक रूप से संबल नहीं हो पाता है। इसलिए ऐसी स्थिति में जच्चा-बच्चा का योग्य चिकित्सकों की सलाह के अनुसार ही इलाज कराएं। क्योंकि, ऐसे शिशु जन्म लेने के साथ कई तरह की समस्याओं से घिर जाते हैं। इसलिए, ऐसे शिशु के स्वस्थ्य शरीर निर्माण के लिए उचित और समुचित इलाज जरूरी है।
– कम उम्र में गर्भधारण से भी होता है समय पूर्व प्रसव :
सदर अस्पताल खगड़िया के उपाधीक्षक (डीएस) डाॅ योगेन्द्र नारायण प्रेयसी ने बताया, समय पूर्व प्रसव होने के कई कारण हैं। जैसे कि माता का 40 किलोग्राम से कम वजन होना, शरीर में खून की कमी, गर्भावस्था के दौरान या प्रसव पूर्व ब्लीडिंग होना, गर्भाशय मुख का बेहद कमजोर होना आदि। इसलिए गर्भावास्था के दौरान समय-समय पर चिकित्सकों से जाँच करानी चाहिए एवं उनके चिकित्सा परामर्श के अनुसार आवश्यक इलाज भी कराना चाहिए। हालाँकि, इसमें कम उम्र में गर्भधारण करना और गर्भावस्था के दौरान उचित खान-पान का सेवन नहीं करना आदि मुख्य कारण हैं। क्योंकि, ऐसी स्थिति में महिलाएँ काफी कमजोर हो जाती हैं। जिसके कारण सुरक्षित प्रसव नहीं हो पाता है।
– गर्भधारण के लिए सही उम्र होना जरूरी :
गर्भधारण के लिए महिलाओं का सही उम्र होना भी बेहद जरूरी है। क्योंकि, कम उम्र में गर्भधारण होने से हमेशा समय पूर्व प्रसव होने की संभावना बनी रहती है। जिससे महिलाओं को कई प्रकार की जटिल परेशानियों से जूझना पड़ जाता है। इसलिए, गर्भधारण के लिए महिलाओं का कम से कम 20 वर्ष का होना जरूरी है। इसलिए, इस उम्र में ही गर्भधारण करना चाहिए। ताकि किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी उत्पन्न नहीं हो।
– प्रसव पूर्व समय-समय पर कराते रहें जाँच :
सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं को समय-समय पर जाँच कराते रहना चाहिए। प्रसव पूर्व जाँच के लिए सरकार द्वारा पीएचसी स्तर पर भी मुफ्त जाँच की व्यवस्था की गई है। जहाँ हर माह नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क जाँच होती और जाँचोपरांत आवश्यक चिकित्सा परामर्श दी जाती है।
 – गर्भावस्था के दौरान प्रोटीन, आयरन और कैल्सियम युक्त खाने का सेवन ज्यादा करना चाहिए :
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को प्रोटीन, आयरन  और कैल्सियमयुक्त खाने का ज्यादा से ज्यादा सेवन करना चाहिए। दाल, पनीर, अंडा, पालक, सोयाबीन, नॉनवेज, गुड़, अनार, नारियल, चना, हरी सब्जी आदि का सेवन करना चाहिए। साथ ही व्यक्तिगत साफ-सफाई का भी विशेष ख्याल रखना चाहिए।
– क्या है समय से पूर्व प्रसव :
37 हफ्ते के बाद होने वाली प्रसव को सामान्य एवं परिपक्व प्रसव कहा जाता है। किन्तु, इससे पूर्व प्रसव होने पर समय पूर्व प्रसव कहा जाता है। इस स्थिति माँ के साथ-साथ जन्म लेने वाले शिशु काफी कमजोर होते हैं और दोनों को कई तरह की परेशानियाँ का सामना करना पड़ जाता है। दरअसल, समय से पूर्व जन्म लेने वाले बच्चे मानसिक एवं शारीरिक रूप से तो बेहद कमजोर होते ही हैं। इसके अलावा ऐसे शिशु में स्तनपान के लिए माँ की छाती को चूसने एवं साँस लेने की क्षमता भी नहीं होती है। जिसके कारण बच्चे कई तरह की समस्याओं से घिर जाते हैं।

आरसीएच पोर्टल और अनमोल एप की जिलास्तरीय  समीक्षात्मक बैठक आज 

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– सिविल सर्जन ने सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को प्रतिभागियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने का दिया निर्देश
– जिला स्वास्थ्य समिति परिसर स्थित सभागार में दोपहर 01 बजे से आयोजित होगी बैठक
लखीसराय, 13 मई।
शनिवार को जिला स्वास्थ्य समिति परिसर स्थित सभागार हाॅल में आरसीएच पोर्टल और अनमोल एप से संबंधित विषयों पर एक दिवसीय जिलास्तरीय समीक्षात्मक बैठक होगी। जिसके सफल संचालन को लेकर सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने पत्र जारी कर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए हैं। जिसमें सभी चिकित्सा पदाधिकारी को अपने-अपने स्वास्थ्य संस्थानों के बीएचएम, बीएम ई, बीसीएम,  समेत बैठक में शामिल होने वाले सभी प्रतिभागियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने को कहा है। साथ ही सभी चिकित्सा पदाधिकारी को अपने-अपने स्वास्थ्य संस्थानों के प्रतिभागियों को अपने स्तर से भी बैठक की सूचना उपलब्ध कराने को कहा है। वहीं, बैठक के सफल संचालन के लिए सारी तैयारियाँ पूरी कर ली गई है। सिविल सर्जन ने बताया, बैठक के दौरान सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रतिभागियों से बारीकी के साथ बारी-बारी से आरसीएच पोर्टल और अनमोल एप से संबंधित आवश्यक जानकारी और फीडबैक ली जाएगी। जिसके बाद आवश्यक और जरूरी दिशा-निर्देश दिए जाएँगे।
– आरसीएच पोर्टल और अनमोल एप से की जाती है गर्भवती, धातृ , नवजात शिशुओं और बच्चों के स्वास्थ्य की मॉनिटरिंग :
आरसीएच पोर्टल और अनमोल एप के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, धातृ माताओं, नवजात शिशुओं और बच्चों के स्वास्थ्यय की मॉनिटरिंग की जाती है। सरकार के सुरक्षित संस्थागत प्रसव और सुरक्षित मातृत्व कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं, धातृ माताओं के साथ ही नवजात शिशु और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित मॉनिटरिंग के लिए अनमोल एप और आरसीएच वेब पोर्टल का निर्माण किया गया है। जिसके सफल संचालन के लिए संबंधित एएनएम को समय-समय पर प्रखंड स्तर पर प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
– जानें क्या है आरसीएच पोर्टल और अनमोल एप  :
एएनएम द्वारा स्वास्थ्य विभाग से जुड़े तरह-तरह के कार्य किए जाते हैं। जैसे कि, प्रसव पूर्व जांच, परिवार कल्याण, प्रसव, टीकाकरण समेत खासकर शिशु एवं मातृ कार्यक्रम से जुड़े सभी कार्य। जिसे आरसीएच रजिस्टर में भरना होता है एवं इसके बाद इसे आरसीएच पोर्टल पर अपलोड भी करना पड़ता है। जिसमें परेशानी के साथ-साथ समय भी बर्बाद होता है। इस समस्या को दूर करने के लिए अनमोल एप लांच किया गया है। इससे ना सिर्फ काम करना आसान होगा। बल्कि, समय पर सभी प्रकार के प्रतिवेदन ऑनलाइन प्रेषित किए जा सकेंगे। साथ ही इस एप के संचालन से स्वास्थ्य सेवा भी सुदृढ़ होगी और इस एप से संबंधित सभी कार्यों का ऑनलाइन डेटा सुरक्षित रहेगा। जिससे सारा रिकार्ड सुरक्षित रहेगा और एएनएम को रजिस्टर ढोने से भी मुक्ति मिलेगी। अनमोल एप में गर्भवती महिला का पंजीकरण, एएनसी जाँच का विवरण, प्रसव का परिणाम, पीएचसी प्रसवोत्तर देखरेख, शिशु की देखभाल, मातृ मृत्यु सूचना, गर्भपात सूची, शिशु मृत्यु सूची समेत अन्य जानकारियाँ अपलोड की जाएगी।

16 को डेंगू दिवस पर आयोजित किए जाएंगे कार्यक्रम

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-डेंगू की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मी करेंगे चर्चा
-आने वाले समय में डेंगू से बचाव को लेकर तैयारियों पर किया जाएगा विचार
भागलपुर, 13 मई-
16 मई को डेंगू दिवस है। इसे लेकर जिला स्वास्थ्य समिति तैयारी में जुट गया है। उस दिन सदर अस्पताल में इसे लेकर बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में प्रभारी जिला वेक्टर्न बॉर्न डिजीज नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. दीनानाथ भी मौजूद रहेंगे। इस दौरान विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मी भी शिरकत करेंगे और डेंगू की रोकथाम को लेकर चर्चा करेंगे। आने वाले दिनों में डेंगू से बचाव को लेकर तैयारियों पर विचार किया जाएगा।
डॉ. दीनानाथ ने बताया कि 16 मई को डेंगू दिवस पर जिलेभर में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। डेंगू से बचाव को लेकर लोगों को जागरूक किया जाएगा। उस दिन बुद्ध पूर्णिमा को लेकर सरकारी छुट्टी है, इसके बावजूद विभाग के सभी कर्मियों को दफ्तर आने के लिए कहा गया है। उस दिन बैठकर हमलोग इस पर चर्चा करेंगे। डेंगू से बचाव को लेकर दवा व अन्य जरूरी चीजों की उपलब्धता पर बात की जाएगी।
एडिस मच्छर के काटने से होता है डेंगूः डॉ. दीनानाथ ने बताया कि एडिस मच्छर के काटने से डेंगू होता है। यह मच्छर दिन में काटता है और स्थिर एवं साफ पानी में पनपता है। तेज बुखार, बदन, सिर एवं जोड़ों में दर्द और आंखों के पीछे दर्द हो तो सतर्क हो जाएं। त्वचा पर लाल धब्बे या चकते का निशान, नाक- मसूढ़ों से या उल्टी के साथ रक्तस्राव होना और काला पखाना होना डेंगू के लक्षण हैं। इन लक्षणों के साथ यदि तेज बुखार हो तो तत्काल सदर अस्पताल या फिर मायागंज अस्पताल जाएं और अपना इलाज करवाएं। डॉ. दीनानाथ ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को पहले डेंगू हो चुका है तो उसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। ऐसे व्यक्ति दोबारा डेंगू बुखार की आशंका होने पर सरकारी अस्पताल या फिर डॉक्टर से संपर्क करें।
ये हैं बचाव के उपायः डॉ. दीनानाथ ने कहा कि दिन में भी सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। इसके साथ-साथ मच्छर भगाने वाली क्रीम या दवा का प्रयोग दिन में भी करें। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। घर के सभी कमरों को साफ-सुथरा रखें। टूटे-फूटे बर्तनों, कूलर, एसी, फ्रिज में पानी जमा नहीं होने दें। पानी टंकी और घर के आसपास अन्य जगहों पर भी पानी नहीं जमने दें। घर के आसपास साफ-सफाई का ध्यान रखें और कीटनाशक दवा का इस्तेमाल करें। गमला, फूलदान का पानी हर दूसरे दिन बदल दें। घर के साथ-साथ सार्वजनिक स्थलों पर भी सतर्कता जरूरी है। मॉल व दुकान चलाने वाले लोग भी खाली जगहों पर रखे डिब्बे और कार्टनों में पानी जमा नहीं होने दें। जमे हुए पानी पर मिट्टी का तेल डालें।
सभी बुखार डेंगू नहीः डॉक्टर दीनानाथ ने बताया कि सभी तरह के बुखार डेंगू नहीं होता है। बुखार होने पर बिना समय गंवाए डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर जांच के बाद जैसा कहेंगे, उसके अनुसार अपना इलाज करवाएं। डेंगू होने की स्थिति में सभी मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। सिर्फ गंभीर मरीजों को ही भर्ती होना पड़ता है। समय पर इलाज कराने पर मरीज पूरी तरह से स्वस्थ्य हो सकता है।