खेतों तक टीकाकरण टीम की दस्तक,किसानों और मजदूरों को दिया जा रहा टीका

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नाथनगर प्रखंड के कजरैली में धान की तैयारी करा रहे किसान को खेतों में ही लगाया गया सुरक्षा का टीका

-जिले लगातार चल रहा है टीकाकरण अभियान, आज फिर चलेगा विशेष अभियान

भागलपुर, 13 दिसंबर।
जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का टीकाकरण सुनिश्चित कराने को लेकर सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग कितनी गंभीर और सजग है, इसका इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि घर-घर दस्तक टीकाकरण अभियान के तहत टीकाकरण टीम ना सिर्फ लोगों के घरों तक ही दस्तक दे रही है बल्कि, खेतों तक भी पहुँच रही है। ताकि खेती से संबंधित कार्य के लिए खेत में ही रहने वाले किसान और कामगार (मजदूर) भी टीका लेने से छूटे नहीं और ऐसे लोगों का भी सुविधाजनक तरीके से टीकाकरण सुनिश्चित हो सके। वहीं, इस पहल को सार्थक रूप देने के लिए सोमवार को नाथनगर पीएचसी की टीकाकरण टीम एएनएम कुमारी राजनंदनी के नेतृत्व में इसी प्रखंड कजरैली गाँव के समीप स्थित खेत पर पहुँची। जहाँ खेतों में ही धान की तैयारी करा रहे किसानों एवं कामगारों का सुविधाजनक तरीके से टीकाकरण किया गया। इस मौके पर एएनएम के साथ संबंधित क्षेत्र की ऑगनबाड़ी सेविका रंजना कुमारी भी मौजूद थी।

– खुद की परेशानी की परवाह नहीं, पर लोगों को नहीं हो असुविधा :
खेत पर जाकर टीकाकरण करने वाली एएनएम कुमारी राजनंदनी ने बताया, मुझे क्या परेशानी हुई या नहीं हुई मुझे इस बात की ना कोई परवाह , ना कोई फर्क पड़ता और ना ही यह मायने रखती है। क्योंकि, मेरा काम ही यही है। पर, मैं इस बात को लेकर जरूर गंभीर रहती हूँ कि टीका लेने वालों को किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और सभी लोग सुविधाजनक तरीके से टीकाकरण करा सकें। मैं हमेशा हर जगह यानी जहाँ भी टीकाकरण के लिए जाती हूँ, वहाँ इस बात का जरूर विशेष ख्याल रखती हूँ।

– जिले में आज फिर चलेगा विशेष टीकाकरण अभियान :
डीआईओ डाॅ मनोज कुमार चौधरी ने बताया, मंगलवार को जिले में फिर विशेष कोरोना टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। जिसके माध्यम से जिले के सभी प्रखंडों में विशेष शिविर आयोजित कर लोगों का सुविधाजनक तरीके से टीकाकरण किया जाएगा। इसलिए, मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि जो पहला डोज ले चुके हैं और दूसरा डोज लेने की निर्धारित समयावधि पूरा कर चुके हैं, वह निश्चित रूप से टीकाकरण कराएं और निर्धारित समय पर टीका लेने पर मिलने वाले उपहार पाने का भागीदार बनें। जो लोग किसी भी कारणवश अबतक टीकाकरण नहीं करा पाएं, वह भी इस घातक महामारी के खतरे से दूर रहने के लिए निश्चित रूप से टीकाकरण कराएं।

स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास के लिए तकनीकी शिक्षा अहम : मंगल पांडेय

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पारा मेडिकल संस्थानों में कई सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स की होगी पढ़ाई
2135 सीटें आवंटित, अगले शैक्षिक सत्र से शुरू होगी नामांकन की प्रक्रिया

पटना। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि आत्मनिर्भर बिहार के सात निश्चय ’अवसर बढ़े आगे पढ़े’ के तहत प्रदेश में तकनीकी शिक्षा के अवसरों को बढ़ाने के उद्देश्य से बीस जिले में संचालित सरकारी पारा मेडिकल संस्थानों में सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्सों को मान्यता प्रदान की गई है। इसमें बक्सर, गोपालगंज, मुंगेर, सहरसा, लखीसराय, जमुई, अरवल,सारण, खगड़िया, मधुबनी, वैशाली, पूर्वी चंपारण, सुपौल, भभुआ, जहानाबाद, शेखपुरा, कटिहार, पश्चिम चंपारण, पूर्णिया एवं किशनगंज जिला शामिल हैं।
श्री पांडेय ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग छात्र- छात्राओं को प्रदेश में ही तकनीकी शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रयास कर रही है। इसके लिए इन जिलों के पारा मेडिकल संस्थानों में कोर्स के लिए कुल 2135 सीटें आवंटित की गई है। अगले शैक्षिक सत्र से नामांकन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। स्वास्थ्य के लिए भी तकनीकी शिक्षा बेहद अहम होता है। इसको ध्यान में रखकर सात निश्चय कार्यक्रम के तहत प्रदेश में कई पारा मेडिकल संस्थान खोले गए, जहां पर कई सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स संचालित किए जा रहे हैं।
श्री पांडेय ने कहा कि कोर्स पूरा करने वाले विद्यार्थियों को प्रदेश में रोजगार भी प्राप्त हो रहे हैं। तकनीकी शिक्षा के बढ़ते महत्व और रोजगारप्रद होने के कारण विभाग द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीक की आवश्यकता को देखते हुए पारा मेडिकल संस्थानों में अधिक से अधिक कोर्स शुरू किये जा रहे हैं। 20 जिले में चल रहे सरकारी पारा मेडिकल संस्थानों में सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। इनमें ईसीजी, एक्सरे, रेडियोलोजी , ऑर्थोपेडिक एंड प्लास्टर, मेडिकल ड्रेसर समेत कई अन्य कई प्रकार के कोर्स शामिल हैं।

मदरौनी में स्वास्थ्य शिविर आज, उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री करेंगे उद्घाटन

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-शिविर में सुबह सात बजे शुरू हो जाएगी लोगों की स्वास्थ्य जांच
-अधिक से अधिक लोग पहुंचकर स्वास्थ्य शिविर का उठाएं लाभ
भागलपुर, 13 दिसंबर।
नवगछिया अनुमंडल के तहत रंगरा चौक प्रखंड के मदरौनी पावर ग्रिड के पास स्थित अर्जुन कॉलेज ऑफ नर्सिंग परिसर में आज बड़ा जांच शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इस शिविर का उद्घाटन प्रदेश के उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे करेंगे। शिविर में 10 हजार लोगों की मुफ्त में जांच की व्यवस्था की गई है। जांच के बाद मरीजों को दवा और चश्मा भी मुफ्त में प्रदान किया जाएगा। इसके साथ-साथ परिसर में ही कोरोना जांच और टीकाकरण की सुविधा भी लोगों को प्रदान की जाएगी। लोगों की खून, पेशाब और शुगर के साथ ब्लड प्रेशर की जांच की भी व्यवस्था की गई है।
सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने बताया कि मंगलवार सुबह सात बजे से लोगों की स्वास्थ्य जांच शुरू हो जाएगी। इसे लेकर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार किया जाएगा। जांच को लेकर स्वास्थ्यकर्मियों की टीम बना दी गई है। शिविर में अधिक से अधिक लोगों की जांच कर उन्हें स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। इसे लेकर सारी तैयारी कर ली गई है। लोगों से अपील है कि जांच शिविर में पहुंचकर लाभ उठाएं। शिविर में अगर अधिक लोग आते हैं तो सभी की जांच की जाएगी। इसलिए संख्या बढ़ भी सकती है।
नामी-गिरामी डॉक्टर करेंगे लोगों की जांचः इस शिविर में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार सिंह, डॉ. बृजेश कुमार, टीबी एंड चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ. डीपी सिंह, सर्जन डॉ. मृत्युंजय कुमार चौधरी, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. सोमेन कुमार चटर्जी, नाक, कान व गला रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमित शंकर, न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. पंकज कुमार, पेट रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव कुमार, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुपमा सिन्हा, दंत चिकित्सक डॉ. कुंदन कुमार, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण कुमार सिन्हा और डॉ. सत्यदीप गुप्ता, डॉ. कुणाल, डॉ. सचिन, डॉ. घनश्याम व डॉ. नलिन समेत दिल्ली और पटना एम्स के डॉक्टर मौजूद रहेंगे। ये लोग शिविर में आने वाले लोगों की स्वास्थ्य जांच करेंगे और जरूरत पड़ने पर उचित सलाह देंगे।
स्वास्थ्य से संबंधित कोई भी परेशानी हो ते पहुंचें स्वास्थ्य शिविरः मदरौनी पावर ग्रिड के पास स्थित अर्जुन कॉलेज ऑफ नर्सिंग परिसर में आज बड़े पैमाने पर लोगों की स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था की गई है। अगर किसी को भी किसी तरह की परेशानी महसूस हो तो जरूर स्वास्थ्य कैंप में पहुंचें। यहां पर नामी-गिरामी डॉक्टर आपको उचित सलाह देंगे। इससे भविष्य में होने वाली किसी भी तरह की परेशानी आप बच जाएंगे और स्वस्थ रहेंगे।

भारत की हरनाज़ संधू के सिर पर सजा मिस यूनिवर्स का ताज

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21 साल बाद भारत की हरनाज़ संधू नई मिस यूनिवर्स का ताज अपने नाम कर लिया। संधू ने इजराइल के इलियट में आयोजित 70वें मिस यूनिवर्स 2021 में भारत का प्रतिनिधित्व किया। पंजाब के 21 वर्षीय हरनाज़ संधू ने पराग्वे की नादिया फरेरा और दक्षिण अफ्रीका की लालेला मसवाने को हराकर ताज अपने नाम किया।
संधू को मेक्सिको की पूर्व मिस यूनिवर्स 2020 एंड्रिया मेजा द्वारा ताज पहनाया गया। चंडीगढ़ बेस्ड मॉडल हरनाज़ संधू से पहले मिस यूनिवर्स का खिताब सिर्फ दो भारतीय मॉडलों ने जीता है, पहला 1994 में एक्ट्रेस सुष्मिता सेन और दूसरा 2000 में लारा दत्ता ने जीता था।
17 साल की उम्र में पेजेंट्री में अपनी यात्रा शुरू करने वाली संधू को पहले मिस दिवा 2021, फेमिना मिस इंडिया पंजाब 2019 का ताज पहनाया गया था और यहां तक कि उन्हें फेमिना मिस इंडिया 2019 में शीर्ष 12 में भी रखा गया था।
यह पूछे जाने पर कि वह युवा महिलाओं को उनके द्वारा सामना किए जाने वाले दबावों से निपटने के लिए क्या सलाह देंगी, एक रचनाकार संधू ने कहा, “आज का युवा जिस सबसे बड़े दबाव का सामना कर रहा है, वह यह है कि आप खुद पर विश्वास करें, यह जानें कि आप अद्वितीय हैं और यही आपको सुंदर बनाता है। अपनी तुलना दूसरों से करना बंद करें और आइए दुनिया भर में हो रही अधिक महत्वपूर्ण चीजों के बारे में बात करें। संधू ने कहा यह वही है जो आपको समझने की जरूरत है। बाहर आओ, अपने लिए बोलो क्योंकि तुम अपने जीवन के नेता हो, तुम अपनी खुद की आवाज हो। मुझे खुद पर विश्वास था और इसलिए मैं आज यहां खड़ी हूं।

परिवार नियोजन साधन अपनाकर राज्य के कुल प्रजनन दर में कमी संभव- मंगल पांडेय

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• सफल कपल अभियान ते तहत तीन जागरूकता वाहन रवाना
• पटना, नालंदा एवं वैशाली जिलों में जागरूकता वाहन रवाना
• राज्य स्वास्थ्य समीति के सहयोग से पाथफाइंडर इंटरनेशनल द्वारा संचालित “सफल कपल अभियान” का हुआ उद्घाटन
• 2 लाख से ज्यादा युवा दम्पत्तियों को परिवार नियोजन साधनों को अपनाने के लिए प्रेरित करने का है लक्ष्य
पटना/ 12 दिसंबर- “विकास दर में वृद्धि कुल प्रजनन दर में गिरावट से ही संभव है, यह सीधा गणित है जिसे सबको समझने की जरुरत है. “सफल कपल अभियान” के अंतर्गत परिवार नियोजन साधनों एवं सेवाओं की मांग युवा दम्पत्तियों में बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है. इस अभियान के तहत युवा योग्य दम्पत्तियों की परिवार नियोजन के साधन अपनाने एवं उनके फायदों के बारे में जागरूक करने में सहायता मिलेगी”, उक्त बातें मंगल पांडेय, स्वास्थ्य मंत्री, बिहार सरकार ने राज्य स्वास्थ्य समीति के सभागार में “सफल कपल अभियान” के उद्घाटन के समय कही.

परिवार नियोजन साधन अपनाकर राज्य के कुल प्रजनन दर में कमी संभव:

श्री पांडेय ने बताया, राज्य की कुल प्रजनन दर राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के आंकड़ों के अनुसार 3.4 से घटकर 3 हुयी है. कुल गर्भ निरोधक प्रचलन दर 23.3 से बढ़कर 44.4 एवं अपूरित मांग की दर 21.2 से घटकर 13.6 पर आ गयी है. इन उपलब्धियों के महत्वपूर्ण कारक स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से दी जा रही परिवार नियोजन सामग्री एवं सेवाओं की बढ़ती पहुँच और गुणवत्ता में सुधार है. स्वास्थ्य मंत्री ने बताया, इस कारण परिवार नियोजन के स्थायी एवं अस्थायी साधनों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है. राज्य की कुल प्रजनन दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है और इसे कम कर राष्टीय औसत तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत रहना होगा.

2 लाख से ज्यादा युवा दम्पत्तियों को परिवार नियोजन साधनों को अपनाने के लिए प्रेरित करने का है लक्ष्य:
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया सामाजिक मुद्दों को ध्यान में रखते हुए राज्य स्वास्थ्य समीति के सहयोग से पाथफाइंडर संस्था द्वारा “सफल कपल अभियान” चलाया जा रहा है. इस अभियान के तहत राज्य के पांच जिलों, पटना, गया, नालंदा, वैशाली तथा मुजफ्फरपुर में अबतक दो लाख से ज्यादा युवा दम्पत्तियों को आधुनिक गर्भ निरोध के साधनों की जानकारी देने एवं उन्हें इस्तेमाल के लिए प्रेरित करने का लक्ष्य रखा गया है.
पटना, नालंदा एवं वैशाली जिलों में जागरूकता वाहन रवाना:
मंगल पांडेय द्वारा “सफल कपल अभियान” के तहत रविवार को राज्य के तीन जिलों पटना, नालंदा एवं वैशाली के लिए तीन जागरूकता वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया.

इस अवसर पर केशवेन्द्र कुमार, अपर कार्यपालक निदेशन, राज्य स्वास्थ्य समीति, अनिमेश पराशर, अपर कार्यपालक निदेशन, राज्य स्वास्थ्य समीति, बिहार एवं डॉ. मोहम्मद सज्जाद, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, परिवार नियोजन ने भी अपने सुझाव रखे एवं “सफल कपल अभियान” कार्यक्रम को अपनी शुभकामनायें दीं.
कार्यक्रम का संचालन पाथफाइंडर इंटरनेशनल के निदेशक, मनीष मित्रा ने किया

मनेर में प्रशासन की लापरवाही से मतदाताओं को परेशानी, तीन किलोमीटर दूर बना दिया मतदान केंद्र

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• ग्रामीणों ने किया वोट वहिष्कार
• 1300 वोटर पर एक हीं वार्ड का गठन
• लोदीपुर और शेरभुक्का गांव में 1300 है मतदाता
पटना। बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव चल रहा है। चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण संपन्न कराने का दावा जिला प्रशासन के द्वारा किया जा रहा है। लेकिन एक जगह ऐसा भी है जहां पर प्रशासन की लापरवाही से मतदाताओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल पटना जिले के मनेर प्रखंड के सिंघाड़ा पंचायत में प्रशासन के द्वारा गांव से तीन किलोमीटर की दूरी पर मतदान केंद्र बना दिया गया है। यहां दो गांव लोदीपुर 700 और शेरभुक्का 600 यानि कुल 1300 वोटर है। इस दोनों गांव का वार्ड भी एक है। जो वार्ड नंबर 10 है। आज अंतिम चरण में इस पंचायत में मतदान हो रहा है और इस दोनों गांव के लोगों को काफी परेशानी हो रही है। लोदीपुर गांव के अधिकतर मतदाताओं का मतदान केंद्र शेरभुक्का गांव में बना दिया गया है। वहीं शेरभुक्का गांव के मतदाताओं का केंद्र लोदीपुर में दिया गया है। जिससे मतदाताओं को तीन किलोमीटर की दूरी तय करना पड़ रहा है। इससे दोनों गांव के ग्रामीणों ने में काफी आक्रोश है। यहां के मतदाताओं ने वोट का वहिष्कार कर दिया है। मतदाताओं के वोट वहिष्कार से प्रशासन की परेशानी बढ़ गयी है।

बिहार सरकार बच्चों के सामने आये नयी चुनौतियों का सामना करने के लिए कृतसंकल्प है – आमिर सुभानी

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बाल अधिकारों के क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है किन्तु वंचित तबकों के बच्चे-बच्चियों के लिए जो आवश्यक है वो हम साथ मिलकर ही कर सकते हैं – नफ़ीसा बिंते शफ़ीक

युनिसेफ की 75वीं वर्षगांठ समारोह में शामिल हुए सामाजिक संगठनों एवं सरकारी विभागों के अधिकारी, मीडियाकर्मी एवं बच्चे

11 दिसम्बर 2021, पटना

युनिसेफ के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आज युएन हाउस स्थित युनिसेफ के राज्य कार्यालय में एक विशेष आयोजन किया गया। इस आयोजन का मुख्य आकर्षण एक यात्रा थी, जिसमें चित्रों की प्रदर्शनी के माध्यम से युनिसेफ की 75 वर्षों की यात्रा को दर्शाया गया। इस प्रदर्शनी में स्वास्थ्य एवं टीकाकरण, पोषण, शिक्षा, साफ़-सफाई एवं स्वच्छता, बाल सुरक्षा एवं भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्यों की प्रदर्शित किया गया। इस मौके को यादगार बनाने के लिए आमिर सुभानी (डेवलपमेंट कमिश्नर, बिहार) ने नफीसा बिंते शफीक (यूनिसेफ बिहार प्रमुख), तथा अन्य अतिथियों एवं बच्चों के साथ मिलकर युनिसेफ कैंपस में वृक्षारोपण किया। अतिथियों और बच्चों ने इसके बाद साथ मिलकर इस अवसर पर 75 गुब्बारे उड़ाए और केक काटा।

अतिथियों का स्वागत करते हुए नफीसा बिंते शफीक, ने कहा कि ये युनिसेफ के लिए एक गर्व का मौका है जब हम अपनी सफलताओं में अपने सभी साझा हितधारकों के साथ मिलकर जश्न मना रहे हैं। ये एक ऐसा अवसर भी है जब हम पीछे मुड़कर ये देख सकते हैं कि कैसे आगे के लिए हम बच्चों को और बेहतर भविष्य देने के लिए काम कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि भारत में 1949 में और 1980 के दशक में बिहार में यूनीसेफ ने काम करना शुरू कर दिया था। सरकार और अन्य हितधारकों के साथ साझा प्रयास करते हुए हमने टीकाकरण को 1992 के करीब 10% से आज के लगभग 70% पर पहुँचाया है। इसी दौर में महिलाओं की साक्षरता को देखें तो 1981 में जो साक्षरता दर केवल 17% प्रतिशत के लगभग थी वो आज 2011 की जनगणना में 51% तक जा पहुंची है। स्वच्छता के क्षेत्र में भी हमने नए कीर्तिमान स्थापित किये हैं।

उन्होंने कहा कि यूनिसेफ अगले पांच वर्षों के लिए लक्ष्य निर्धारण एवं रणनीति तैयार करने का कार्य पूरा कर चुका है। कोविड के दौर में कई ऐसे काम जो बच्चों के लिए किये गए थे, वो ख़त्म हो गए और अगर हमने फ़ौरन कार्य शुरू नहीं किया तो हम बच्चों का एक पूरा दशक खो देंगे। उन्होंने अपनी बात समाप्त करते हुए बाल-अधिकारों का मुद्दा उठाया और कहा कि हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी बच्ची का विवाह 18 वर्ष से पहले न हो। उन्होंने कहा कि राज्य का विकास तभी संभव है जब बच्चे स्वस्थ, पोषित, सुरक्षित और जागरूक हों – “बच्ची-बच्चा आगे तो बिहार आगे”।

अपने भाषण में मुख्य अतिथि आमिर सुभानी (डेवलपमेंट कमिश्नर, बिहार) ने कहा कि कैसे सरकारी योजनाओं से बिहार के परिवार, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं, लाभान्वित होते हैं। उन्होंने “मुख्यमंत्री साइकिल योजना” और “मुख्यमंत्री पोशाक योजना” जैसी योजनाओं का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे इन योजनाओं से स्कूल छोड़ने वाले या छोड़ गए बच्चे स्कूलों में वापस आये। उन्होंने ये भी बताया कि सर्कार पहले ही एक बाल बजट को 2013-14 में लागू कर चुकी है। पिछले कुछ वर्षों में बच्चों के मुद्दों पर सरकार और अधिक सक्रीय हुई है जिससे उनकी बेहतरी की योजनायें बढ़ी। बिहार में बच्चों के लिए एक अलग “स्टेट प्लान ऑफ़ एक्शन” मौजूद है और सभी सरकारी विभाग उसे लागू करवाने की दिशा में कार्यरत हैं।

इसके आगे एक सामूहिक परिचर्चा का सञ्चालन प्राची प्रियदर्शनी एवं एंजेल वर्मा ने किया। इन दोनों बाल-रिपोर्टरों को यूनिसेफ एवं किलकारी ने प्रशिक्षण दिया था। उनके प्रश्नों का उत्तर देते हुए नफीसा बिंते शफीक ने युनिसेफ के साथ अपनी 19 वर्षों की यात्रा के बारे में बताया। श्री विनोदानंद झा (निदेशक, प्रशिक्षण एवं शोध, शिक्षा विभाग) ने कहा कि शुरू में टीवी के माध्यम से शिक्षा जारी रखने के कार्यक्रमों का प्रसारण किया गया। जब ये पाया गया कि इनकी पहुँच 12-13 लाख घरों तक ही हो पा रही है तो सरकार ने दूसरे माध्यम भी चुने। आज इन्टरनेट आधारित मोबाइल एप्प को बनाकर लागू किया जा चुका है।

नए वाले कोविड के प्रकार की चर्चा करते हुए श्री केशवेन्द्र (एईडी, राज्य स्वास्थ्य समिति) ने कहा कि ऐसा देखा गया है कि जब कोविड का प्रकोप बढ़ता है तब तो लोग काफी ज्यादा ध्यान रखते हैं, मगर जैसे ही असर कम होता दिखता है, लोग ध्यान देना बंद कर देते हैं। इसलिए लोगों में जागरूकता बढ़ाने, ध्यान न देने के नातिजों के बारे में समझाने के प्रयास लगातार जारी हैं। इसके अलावा जांच, इलाज और तैयारी के स्तर पर भी कोई कमी नहीं आई है। इस मौके पर श्री एसके मालवीय (एडीजी, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय) ने कहा कि बच्चों को सूचना का अधिकार देना एक कठिन प्रश्न है। वो युनिसेफ के साथ मिलकर सेमिनारों के माध्यम से पत्रकारों में, बच्चों के मुद्दों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। श्री बालामुरुगन डी (सेक्रेटरी, ग्रामीण विकास) ने कहा कि कोविड के दौर में वंचित तबकों के परिवारों तक भोजन पहुंचे ये सुनिश्चित किया गया। खाने की कमी से भूखमरी की स्थिति न हो इसका सरकारों ने ध्यान रखा है।

धर्मगुरु सैयद शमिमुद्दीन मुन्नैमी, जो बिहार इंटरफेथ फोरम का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, ने कहा कि निजी और सरकारी दोनों तरह के मदरसे, साथ ही गुरूद्वारे, मंदिर और गिरजाघर भी हाशिये पर के वर्ग के लिए कार्य करते हैं। अब जब सरकार भी हमारे प्रयासों को पहचानने और उनकी सराहना करने लगी है तो हम साथ मिलकर बेहतर भविष्य की अपेक्षा कर सकते हैं।

युनिसेफ के साथ कार्य करने वाले अन्य हितधारक समूहों ने भी इस अवसर पर अपने विचार और अनुभव साझा किये। निकू झा ने बाल अधिकारों पर कविता पाठ किया। नालंदा से आई मीना मंच की लड़कियों ने मीना गीत प्रस्तुत किया। अनिषा एवं सिमरन ने सीऍफ़एसएस और एस4डी जैसे माध्यमों से कक्षाओं और सीखने को रोचक बनाए जाने की बात की तथा कहा कि अब वो शिक्षकों के साथ अधिक सहज हैं। मशाल शिक्षण केंद्र, शेखपुरा की युवतियों ने दोबारा पढ़ाई शुरू करने और दूसरे बच्चों को पढ़ाने के अपने अनुभवों को बताया। सुभाष कुमार और चीकू कुमार ने कठपुतली का कार्यक्रम दिखाया। मदरसा के छात्र शारिक ने बच्चों के भले के लिए इक़बाल का लिखा गीत (दुआ) पढ़ा। संज्ञा पलक ने बताया कि मोबाइल और इन्टरनेट के दौर में बच्चों को कैसे सुरक्षित रहना चाहिए। आशा किरण की बच्चियों ने “क्योंकि मैं लड़की हूँ, मुझे पढ़ना है” नाम की प्रस्तुति दी।

धन्यवाद ज्ञापन करते हुए श्री शिवेंद्र पंड्या (प्रोग्राम मेनेजर, यूनिसेफ) ने कहा कि बच्चों को ऐसे प्रश्न पूछते देखना उत्साहवर्धक है। हम कदम दर कदम बाल अधिकारों की और बढ़ रहे हैं। सुश्री नम्रता ने मंच सञ्चालन किया और सामाजिक संगठनों, हितधारकों, स्कूल-कॉलेज से आये छात्र छात्राओं, शिक्षाविदों, के अलावा करीब 500 लोगों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

नारायणपुर पीएचसी में एफपीएलएमआईएस का दिया गया प्रशिक्षण

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परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री ऑनलाइन लेने के बताए गए तरीके
आशा व एएनएम ऑनलाइन सामग्री मंगवाकर क्षेत्र के लोगों में उसे बांटेंगी

भागलपुर, 11 दिसंबर
नारायणपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में शनिवार को क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम को फैमिली प्लानिंग लॉजिस्टिक इनफॉरमेशन सिस्टम (एफपीएलएमआईएस) का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण मास्टर ट्रेनर केयर इंडिया के परिवार नियोजन के जिला समन्वयक जितेंद्र कुमार सिंह ने दिया। प्रशिक्षण के दौरान सभी को परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री को ऑनलाइन कैसे प्राप्त करना है, इसकी जानकारी दी गई। इंडेंट करने से लेकर रिसीव करने के तरीके प्रशिक्षण के दौरान बताए गए। कंडोम, कॉपर टी, अंतरा आदि सामग्री को ऑनलाइन प्राप्त करने की जानकारी प्रशिक्षण के दौरान दी गई। सामग्री प्राप्त कर क्षेत्र में इसका प्रचार-प्रसार से लेकर वितरण करने तक के बारे में प्रशिक्षण के दौरान बताया गया। मौके पर पीएचसी प्रभारी विनोद कुमार, बीएचएम शंकर पासवान, बीसीएम आरती कुमारी और केयर इंडिया के आईसीटी कोआर्डिनेटर संतोष कुमार यादव मौजूद थे। प्रशिक्षण ले रहे लोगों को सभी बारीकी को समझ कर क्षेत्र में बेहतर तरीके से काम करने के लिए कहा।

परिवार नियोजन को लेकर क्षेत्र में प्रचार-प्रसार भी करेंगी आशा व एएनएम: प्रशिक्षण समाप्त हो जाने के बाद आशा कार्यकर्ता और एएनएम अब परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री को ऑनलाइन मंगवाकर उसे क्षेत्र में वितरण करने का काम करेंगी। साथ ही परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री के इंडेंट से लेकर प्राप्त करने के तरीके और इसका क्षेत्र में किस तरह से प्रचार-प्रसार करना है, इसकी जानकारी वे अपने सहयोगी को भी देंगे। साथ ही सामग्री के वितरण के दौरान इसे लेकर लोगों को जागरूक करने का काम भी आशा कार्यकर्ता और एएनएम करेंगी। लोगों को समझाएंगी कि इसके इश्तेमाल से किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है।
तीन तरीके से प्राप्त कर सकेंगे परिवार नियोजन की सामग्रीः प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि परिवार नियोजन सामग्री को ऑनलाइन तीन तरीके से मंगाया जा सकता है। पहला मोबाइल ऐप के जरिये, दूसरा मोबाइल से मैसेज कर और तीसरा कंप्यूटर के जरिये ऑनलाइन मंगवा सकते हैं। आशा कार्यकर्ता इसे मोबाइल एप और मैसेज के जरिये मंगा सकती हैं, जबकि स्टोर कीपर मैसेज और कंप्यूटर से ऑनलाइन इंडेंट कर भी मंगवा सकते हैं। पहले क्षेत्र के लोगों की जरूरतों के मुताबि इंडेंट करेंगे। सामग्री आ जाने के बाद फिर उसका क्षेत्र के लोगों के बीच वितरण करेंगे।
परिवार नियोजन पर किया जा रहा फोकसः जिले में परिवार नियोजन को लेकर लगातार फोकस किया जा रहा है। इसे लेकर परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री के वितरण से लेकर समय-समय पर कैंप और मेला भी लगाया जाता है। जहां पर कि लोगों को परिवार नियोजन से होने वाले फायदे के बारे में बताया जाता है। साथ ही किस तरह से बच्चे की प्लानिंग करती है, इसकी जानकारी दी जाती है। दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल और पहला बच्चा 20 साल से पहले नहीं हो, इस बारे में बताया जाता है।

सहयोगी संस्था महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने में कर रही सहयोग

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पटना / 10 दिसम्बर

शुक्रवार को अन्तराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के अवसर पर सहयोगी संस्था द्वारा इब्तिदा नेटवर्क के सहयोग से महिला हिंसा के विरुद्ध आवाज बुलंद कर उन्हें समान अधिकार दिलाने की पहल करने वाले वाले पुरुषों को सम्मानित किया गया. राजकृत उच्च विद्यालय, पैनाल, बिहटा में एक आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह सम्मान दिया गया. जिसमें स्थानीय विधायक माननीय भाई वीरेन्द्र ने भी सामजिक बदलाव के सूत्रधारों को सम्मानित किया. इस दौरान बड़ी संख्या में विद्यालय के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, पंचायत प्रतिनिधियों तथा स्थानीय लोगों ने भाग लिया।
8 लोगों को मिला सम्मान:
इस दौरान बिहटा प्रखंड के 8 लोगों को सम्मान दिया गया. जिसमें पैनाल पंचायत के सुनील पंडित, शत्रुध्न पंडित, निलेश कुमार एवं देव प्रकाश साव शामिल थे. वहीं दौलतपुर सिमारी पंचायत के खुर्शीद आलम, आनंदपुर पंचायत के धनेश्वर ठाकुर एवं कृष्ण राय एवं पुरशोतमपुर पैनाठी के लालदेव यादव को सम्मानित किया गया.

महिला हिंसा एवं लिंग आधारित भेदभाव को दूर करने में परिवार की भूमिका:

स्थानीय विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि महिलाओं पर हो रही हिंसा एवं लिंग आधारित भेदभाव सामाजिक उत्थान में सबसे बड़ी बाधक है. इसके लिए जरुरी है कि यहां बैठे अभिवावक इसके प्रति संवदेनशील हों और इसके दुष्प्रभाव को समझें. घरों में बच्चे जो देखते हैं वे वही सीखते भी हैं. इसलिए परिवार के लोगों की जिम्मेदारी है कि वह अपने घर की लड़कियों एवं महिलाओं के साथ किसी तरह का भेदभाव न करें. उन्होंने इस दिशा में सहयोगी संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें इस बात की ख़ुशी है कि उन्हें सामाजिक कुरोतियों के खिलाफ़ आवाज बुलंद करने वालों को सम्मानित करने के लिए आमंत्रित किया गया. उन्होंने कहा कि चाहे घरेलू हिंसा हो या लिंग आधारित भेदभाव हो दोनों के खिलाफ़ एकजुट होकर आगे बढ़ने की जरूरत है. उन्होंने सहयोगी संस्था से भविष्य में भी ऐसी सामाजिक चुनौतियों पर कार्य करते रहने की अपील की.

हेल्पलाइन नंबर है कारगर:

सरपंच बबिता देवी ने सहयोगी संस्था को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि उनके सहयोग से विद्यालय की लड़कियों का उत्साह बढ़ा है. वे मानवाधिकार दिवस के दिन के अपने अधिकारों को बेहतर तरीके से समझी हैं. उन्होंने कहा कि महिला हिंसा की रोकथाम के लिए 181, 1090 हेल्पलाइन नंबर की सुविधा उपलब्ध है.इस नम्बर को सभी लड़कियों को याद रखना चाहिए. उन्होंने कहा जब आप हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करते हैं और वो आपकी बात नहीं सुनते हैं. तो आप उनकी बातों को रिकॉर्ड करके शिकायत भी कर सकते हैं और हमारे पंचायत में किसी भी लड़की को किसी प्रकार की दिक्कत होती है हम आप सब के लिए हमेशा उपस्थित हैं.

लड़कियों की शिक्षा है जरुरी:
इस मौके पर सहयोगी संस्था की निदेशिका रजनी ने कहा कि आमतौर पर यह देखा जाता है कि पुरुष या लड़के घर के काम-काज में कोई योगदान नहीं करते हैं. वे अपने परिवार के लिए केवल आय कमाने भर को अपनी जिम्मेवारी समझते हैं. आज के आधुनिक समाज में भी पुरुष अपने घर की महिलाओं-लड़कियों को बाहर नहीं निकलने देना चाहते हैं. जबकि आज सभी क्षेत्रों में महिलाओं ने अपनी क्षमता का बेहतर प्रदर्शन किया है. पढाई या खेलकूद में भी लड़कियों ने भी अपना नाम रोशन किया है. ऐसे पुरुषों ने, जिन्होंने सकारात्मक पहल किया है, उन्हें सम्मानित कर हम यह स्पष्ट सन्देश देना चाहते हैं कि उन्होंने घर-समाज में बेहतर संतुलन बनाने का काम किया है. हमारा यह अनुभव है कि जिस घर में लडकियाँ-महिलाएँ शिक्षित हैं और रोजी-रोजगार में अपना योगदान देतीं हैं, उस घर-परिवार का रहन-सहन बहुत बेहतर होता है. इन पुरुषों ने अपनी शिक्षा और आय-सृजन के साथ घर के कामों में भी अपना हाथ बँटाया. उन्होंने आगे कहा कि आज अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के अवसर पर हम सभी इस बात के लिए कृतसंकल्प हों कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा एवं सम्मान करें, जिससे हमारा संतुलित विकास हो एवं सभी के अधिकारों की सुरक्षा हो सके एवं समाज हिंसा मुक्त हो.
कार्यक्रम में उन्नति, उषा, संजू, बिंदु, निर्मला, रिंकी, रूबी, मुन्नी, लाजवंती, मनोज, धर्मेन्द्र, नितीश एवं सुरेन्द्र ने भी भाग लिया।

मातृ- शिशु मृत्यु की सही रिपोर्टिंग, कारणों की पड़ताल व कार्रवाई कर रोक सकते हैं मातृ- शिशु की असामयिक मृत्यु : जय कृष्ण

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– एमडीएसआर/ सीडीआर पर कार्यशाला का डीएम, सिविल सर्जन ने किया उद्धघाटन
– एक दिवसीय प्रशिक्षण में शामिल हुए जिला के सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी व अन्य स्वास्थ्य पदाधिकारी

मुंगेर, 10 दिसम्बर । मातृ- शिशु मृत्यु की सही रिपोर्टिंग, कारणों की पड़ताल के बाद उचित कार्रवाई कर हम भविष्य में मातृ- शिशु की असामयिक मृत्यु को रोक सकते हैं । इससे हम हेल्थ के इंडिकेटर को अचीव कर सकते हैं। उक्त बातें शुक्रवार को जिला परिषद के सभागार में मैटरनल डेथ सर्विलांस एंड रिस्पांस (एमडीएसआर) और चाइल्ड डेथ रिव्यु (सीडीआर) विषय पर आयोजित कार्यशाला में शामिल स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों को सम्बोधित करते हुए राज्य स्वास्थ्य समिति पटना के प्रतिनिधि केयर इंडिया के स्टेट रिसोर्स पर्सन जयकृष्ण ने कही। उन्होंने बताया कि राज्य और जिलास्तर पर एमडीएसआर और सीडीआर सही रिपोर्टिंग, तदनुसार समीक्षा और क्रियान्वयन के प्रति जिले के स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों को जागरूक करने के उद्देश्य से राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देशानुसार एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है। यह कार्यशाला शुक्रवार को मुंगेर सहित मुंगेर प्रमंडल के सभी जिलों यथा बेगूसराय, खगड़िया, लखीसराय, जमुई, शेखपुरा में आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अभी पूरे राज्य में मैटरनल और चाइल्ड डेथ का आंकड़ा 149 अर्थात तीन डिजिट में है जिसे अगले दो वर्षों में दो डिजिट अर्थात 100 के नीचे लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इसके पूर्व कार्यशाला का उद्घाटन जिलाधिकारी नवीन कुमार, सिविल सर्जन डॉ. हरेन्द्र आलोक, डीपीएम नसीम रजि, डीआईओ डॉ. राजेश कुमार रौशन और केयर इंडिया मुंगेर की डीटीओ ऑफ डा नीलू ने सयुंक्त रूप से किया। इस अवसर पर जिला स्वास्थ्य समिति के डीसीएम निखिल राज, डीपीसी विकास कुमार, डिस्ट्रिक्ट एम &ई रचना कुमारी, स्वास्थ्य प्रशिक्षक राजीव कुमार, एसएनसीयू के इंचार्ज डॉ. पंकज सागर, डॉ. बिंदु, सदर अस्पताल मुंगेर के अस्पताल प्रबंधक तौसिफ हसनैन, मनोवैज्ञानिक सलाहकार नितिन कुमार के साथ जिला के सभी पीएचसी सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और प्रखण्ड सामुदायिक उत्प्रेरक सहित कई अन्य स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित थे।

कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए राज्य स्वास्थ्य समिति के प्रतिनिधि जयकृष्ण ने बताया कि इस कार्यशाला को आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य राज्य और जिलों में होने वाली मातृ और शिशु मृत्यु की समीक्षा करना है । क्योंकि सही रिपोर्टिंग नहीं होने की वजह से मातृ-शिशु मृत्यु के सही कारणों का पता नहीं चल पाता है। ये मृत्य अस्पताल या घर अर्थात फैसिलिटी या कम्युनिटी दोनों जगहों पर हो सकती है। मातृ-शिशु मृत्यु समीक्षा राज्य और जिले में होने वाली अधिकांश मृत्यु को रोकने में कारगर हो सकती है। यह एक ऐसा माध्यम है जिसकी मदद से मातृ -शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में होने वाली कमियों को जानकर इनके मृत्यु के सही कारणों को पता लगाया जा सकता है। मृत्यु के सही कारणों का पता चलने के बाद पदाधिकारियों को किस स्तर पर हस्तक्षेप करना है इसका निर्णय लेने में मदद मिलेगी और सही समय पर सुधारात्मक कदम उठाने पर संस्थानों के प्रबंधकों को मार्गदर्शन मिलेगा। इसके साथ ही उन्होंने सभी तकनीकी पहलूओं से अधिकारियों को अवगत कराया ताकि मातृ-शिशु मृत्यु को समाप्त किया जा सके।