एशियन बिजनेस स्कूल, एबीएस और यूएएस इंटरनेशनल ने एमओयू पर साइन किये

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नईदिल्ली-
यूएएस इंटरनेशनल और एशियन बिजनेस स्कूल, एबीएस ने एमओयू पर साइन किए। एबीएस के डीन, सीआरसी रवि शर्मा ओर यूएएस इंटरनेशनल के सीईओ व एमडी ईशान तनेजा ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस एमओयू के साथ ही यूएएस ग्रुप ऑफ कंपनी का ओफिसियल पार्टनर के रूप में एबीएस, नोएडा कार्य करेगा। दोनों कंपनियां प्लेसमेंट इंटर्नशिप और ग्लोबल एक्सपोजर पर कार्य करेंगे। जिसके लिए यूएएस इंटरनेशनल जाना जाता है। एबीएस के डीन, सीआरसी रवि शर्मा ने हस्ताक्षर करते हुए कहा कि पिछले आठ वर्षों सेहत जिस प्रकार से एजुकेशन के क्षेत्र में यूएएस इंटरनेशनल कार्य कर रहा है यह अद्भूत है। निश्चितरूप से एबीएस को भी इससे फायदा मिलेगा।
रवि शर्मा ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य छात्रों में व्यावसायिक कुशलता की उन्नति करना है। इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण की आवश्यकता है। जिसकी पूर्ति यूएएस इंटरनेशनल लगातार कर रहा है। यूएएस इंटरनेशनल का ध्यान लगातार छात्रों में व्यावसायिक क्षमता की उन्नति करना है जिससे उनकी कार्यकुशलता को बढ़ावा मिले। इसके लिए कई तरह की बाउंडिंग भी करता है। छात्रों को यहीं इंटरनेशनल एक्सपोजर भी एमओयू साइन करने से मिलेगा।
इस मौके पर यूएएस इंटरनेशनल के एमडी व सीईओ ईशान तनेजा ने एमओयू पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि एबीएस बेहतर बिजनेस स्कूल है। जहां के छात्र देश व विदेश में काफी बेहतरीन परफोर्मेंशन के साथ नाम रोशन कर रहे हैं। निश्चिततौर पर यूएएस इंटरनेशनल इनके कार्यों में चार चांद लगा देगा।
ईशान तनेजा ने कहा कि आज नई शिक्षा नीति में कई ऐसे प्रावधान है जिसके लिए संस्थान में एक्सपोजर लाने की जरूरत है जिसके लिए यूएएस इंटरनेशनल लगातार कार्य कर रहा है। एबीएस जैसी संस्थान के साथ एमओयू साइन होने पर युवाओं को काफी लाभ मिलेगा।
गौरतलब है कि यूएएस ग्रुप ऑफ कंपनी पिछले आठ वर्षों में चार कंपनियों सफलतापूर्वक चल रहा है। जिसमें यूएएस इंटरनेशनल वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी, यूएएस इंटरनेशनल हॉस्टल चेन, यूएएस इंटरनेशनल हॉलिडेज प्रा. लि. है और अभी एलोफ्ट करियर नाम से ऑन लाइन एजुकेशन का नया प्लेटफोर्म तैयार किया गया है जिसको लेकर युवाओं में उत्साह है।

ग्रामीण विकास ट्रस्ट को फिक्की द्वारा “उत्कृष्ट स्थायी किसान आय वृद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ एनजीओ” से सम्मानित किया गया

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*ग्रामीण विकास ट्रस्ट; सतत किसान आय वृद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ एनजीओ*

*नई दिल्ली-
* ग्रामीण विकास ट्रस्ट (जीवीटी) एक राष्ट्रीय स्तर का विकास संगठन है जिसे कृभको द्वारा प्रोत्साहित और समर्थित किया गया है, और 1999 से भारत के 25 राज्यों में काम कर रहा है। वर्षों से अपने विभिन्न हस्तक्षेपों के माध्यम से, जीवीटी ने सीमांत और वंचित समुदायों को एकीकृत कृषि और आजीविका सहायता प्रदान करने वाले आय वृद्धि कार्यक्रमों को विकसित और कार्यान्वित करने में कामयाबी हासिल की है। फिक्की ने हाल ही में एग्रीकल्चर समिट की मेजबानी की और स्थायी कृषि विकास को बढ़ावा देने वाले संगठनों और कार्यक्रमों को पहचानने और प्रदर्शित करने के उद्देश्य से अपना पहला सस्टेनेबल एग्रीकल्चर अवॉर्ड आयोजित किया। फिक्की द्वारा आयोजित एग्री समिट एंड एग्री अवॉर्ड में ग्रामीण विकास ट्रस्ट को “उत्कृष्ट स्थायी किसान आय वृद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ एनजीओ” से सम्मानित किया गया है। GVT ने कई फंडिंग और परोपकारी विकास एजेंसियों के साथ भागीदारी की है, ग्रामीण विकास ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री शिव शंकर सिंह, श्री शैलेश कोतरू, प्रमुख व्यवसाय विकास और श्रीमती तृप्ति खन्ना, राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रमुख के साथ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

इस उपलब्धि पर बोलते हुए, श्री शिव शंकर सिंह, सीईओ, ग्राम विकास ट्रस्ट ने कहा, “यह आदिवासी, किसानों और हाशिए के समुदायों के साथ काम करने के हमारे पिछले 22 वर्षों का पुरस्कार है, जिन्होंने अपनी आजीविका और आय बढ़ाने के लिए मॉडल को क्रियान्वित करने में हमें विश्वास और समर्थन दिया। मैं यह पुरस्कार अपनी पूरी टीम को उनके समर्थन और इसे संभव बनाने में सराहनीय प्रयासों के लिए समर्पित करता हूं।

‘टीम वी केयर’ के प्रयास से 5 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे

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‘टीम वी केयर’ के प्रयास से हो रहे कार्य काफी सराहनीय : सांसद रमेश बिधूड़ी

नई दिल्ली 08 दिसम्बर। युवाओं के जोश से भरी ‘टीम वी केयर’ ट्रस्ट के प्रयास से इस बार दक्षिणपुरी 5 नंबर ब्लॉक स्थित प्राचीन शिव मंदिर में जरुरतमंद परिवार की 5 कन्याओं का सामूहिक विवाह सम्मेलन पूरे धूमधाम एवं रीति रिवाज से संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में दक्षिण दिल्ली के लोकप्रिय सांसद रमेश बिधूड़ी, राम मंदिर अयोध्या के सीए गौरव प्रधान, दक्षिण दिल्ली जिला भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष चंद्रपाल बैरवा, दक्षिणी जिला भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष महेश किलोसिया, निगम के पूर्व भाजपा प्रत्याशी विवेक किलोसिया के अलावा भारी संख्या में वर वधु पक्ष के लोग एवं स्थानीय लोग उपस्थित थे। इस अवसर पर सांसद रमेश बिधूड़ी ने कहा कि कन्यादान महादान है, किसी भी कन्या की शादी कराना एक महान पुण्य का कार्य है। टीम वी केयर इस तरह का कार्य एवं प्रयास कर काफी सराहनीय कार्य कर रही है तथा समाज के लिए यह प्रेरणादाई संदेश देता है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए अपनी लड़कियों की शादी एक बड़ी समस्या होती है परंतु गैर सरकारी संस्था जिस तरह से अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह कर रहे हैं, वह काबिले तारीफ है। टीम वी केयर के अध्यक्ष यशु अग्रवाल ने बताया कि समाज के कमजोर एवं आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की सेवा में यह संस्था काफी लंबे समय से लगी हुई है । परंतु गरीब कन्याओं की शादी संस्था द्वारा पहली बार कराया गया है। टीम वी केयर की ओर से संस्थापक यशु अग्रवाल के साथ, सहयोगी विवेक कलोसिया, अध्यक्ष कासिफ रजा, राहुल अग्रवाल, सोनू जीनवाल सहित सारी युवा टीम ने इस विवाह सम्मेलन में अपना पूरा योगदान दिया।

मेगा स्वास्थ्य शिविर में एच आई वी जांच व परामर्श से उत्साहित हैं ग्रामीण

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– गर्भस्त माँ से शिशु में एचआईवी की रोकथाम की दी जा रही है जानकारी
– 2 दिसम्बर से 15 फरवरी-2022 तक चलेगा अभियान
– प्रवासी कर्मियों की स्क्रीनिंग और परामर्श पर दिया जा रहा है विशेष ध्यान

मुंगेर, 8 दिसम्बर।
जिले के सभी नौ प्रखंडों में राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देशन में 2 दिसम्बर से मेगा स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जा रहा है | उक्त शिविर के माध्यम से गर्भवती महिला से गर्भस्थ शिशु में एचआईवी की रोकथाम की जानकारी व परामर्श दी जा रही है | यह पहली दफा समुदाय स्तर पर होने वाली एचआईवी जाँच और परामर्श की व्यवस्था है |
इस शिविर की फील्ड मॉनिटरिंग करने खड़गपुर प्रखंड के पहाडपुर और बनबरसा पहुंचे डॉ. ध्रुव कुमार साहा, संक्रामक रोग नियंत्रण अधिकारी ने बताया आगामी 15 फ़रवरी तक अभियान को चलाया जायेगा | इसके अंतर्गत कुल 77 शिविरों का आयोजन किया जाना है | उन्होंने इसके उद्देश्य पर चर्चा करते हुए कहा एचआईवी संक्रमण से बचाने हेतु स्थायी तौर पर टीका की खोज अभी तक नहीं हो पायी है | इसलिए गर्भवती माता से शिशु की शुरुआती स्तर पर ही एचआईवी का पता लगाने और यथोचित उपाय के लिए अभियान को अंजाम दिया गया है तथा एचआईवी के प्रति लोगों में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने के लिए जागरूक किया जाना है | अभी तक करीब 400 लोगों की जाँच हो चुकी है और सभी निगेटिव रिपोर्ट अच्छे संकेत हैं | यदि किसी को एचआईवी पाया भी जाता है तो एड्स में परिणत होने में व्यक्ति के रोग प्रतिरोधी क्षमता पर निर्भर करता है | अमूमन 3 से 5 वर्षों की अवधि में अवसरवादी संक्रमणों के प्रभाव से रोगों से लड़ने की क्षमता समाप्त हो जाती है और मृत्यु हो जाती है | इस स्थिति से बचाने के लिए सरकार ने एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी के तहत निर्धारित समय में दवा को खाने से व्यक्ति सामान्य जीवन को जी सकता है | उन्होंने एचआईवी संक्रमण के चार कारणों को बताया ,पहला असुरक्षित यौन संबध, दूसरा बगैर जांचे परखे रक्त चढाने से और तीसरा संक्रमित व्यक्ति को लगे सिरिंज से और चौथा संक्रमित माता के गर्भ से होने वाले शिशु के संक्रमित होने की सम्भावना होती है | अतः सुरक्षित यौन संबध में कंडोम का उपयोग सबसे आसान है। रक्त के लिए ब्लड बैंक ही बेहतर है। प्रवासी कर्मियों को नियमित अंतराल पर एचआईवी की जाँच करने की सलाह दी |
इस सन्दर्भ में डॉ. लाल बहादुर गुप्ता, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, खड़गपुर ने बताया इएम टीसिटी अभियान के लिए सभी अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और उपस्वास्थ्य केन्द्रों में ओपीडी सह एचआईवी स्क्रीनिंग का निर्देश दिया गया है | इसका पालन भी हो रहा है |
अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पहाड़पुर में डॉ. सुजीत कुमार, चिकित्सा पदाधिकारी, रानी स्वीटी सिन्हा, जीएनएम, पुष्पा, एएनएम, विभा और पुष्पा आशा वर्कर ने अलग-अलग टीम में एचआईवी संक्रमण और बचाव पर चर्चा की।
जिले से मॉनिटरिंग टीम में आदित्य राज, परामर्शी, शैलेंदु कुमार, समन्वयक टी.बी. एचआईवी, प्रियांशु शेखर, एल टी, राजू शर्मा, अहाना प्रतिनिधि, प्रखंड स्तर से डॉ. मोहम्मद हस्नयन, चिकित्सा पदाधिकारी, राजेश कुमार एलटी और चार एएनएम की टोली घर-घर जा कर परामर्श देने में अपनी भूमिका निभा रहे थे
ग्रामीणों में दिखा उत्साह :
पहली बार समुदाय में बड़े स्तर पर एचआईवी की जाँच और परामर्श से ग्रामीणों में सरकार के प्रयास पर संतुष्ट राजो सिंह, बनबरसा ने बताया इस जाँच ने लोगों में एड्स के डर को कम करने का काम किया है | सुरक्षित जीवन शैली को सभी को अपनाना जरूरी है| वहीं रानी देवी ने कहा गर्भवती महिलाओं की एचआईवी की जाँच सुरक्षित मातृत्व और बचपन के लिए नितांत जरूरी है|

कोविड विशेष वैक्सीनेशन अभियान आज…सफलता को लेकर आशा कार्यकर्ताओं को दिया गया प्रशिक्षण

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– मानसी पीएचसी में स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया द्वारा दिया गया प्रशिक्षण
– सेकेंड डोज लेने की निर्धारित समयावधि पूरा करने वालों को प्राथमिकता के आधार पर दी जाएगी वैक्सीन

खगड़िया, 08 दिसंबर।
गुरुवार को जिले में फिर विशेष कोविड वैक्सीनेशन अभियान चलाया जाएगा। जिसके माध्यम से जिले के सभी प्रखंडों में विशेष कोविड वैक्सीनेशन शिविर आयोजित कर वैक्सीन लेने वाले योग्य व्यक्तियों को सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन दी जाएगी। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा सारी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। वहीं, अभियान की सफलता को लेकर बुधवार को जिले के मानसी पीएचसी में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ताओं को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें सेकेंड डोज लेने की निर्धारित समय पूरा करने वाले व्यक्तियों एवं वैक्सीन से वंचित लोगों को चिह्नित करने समेत अन्य आवश्यक जानकारी दी गई। साथ ही अभियान को सफल बनाने के लिए घर-घर जाकर लोगों को आयोजित होने वाले विशेष वैक्सीनेशन शिविर की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया। ताकि अधिकाधिक लाभार्थी शिविर में आकर वैक्सीनेशन करा सकें और अभियान सफल हो सके। यह प्रशिक्षण स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से दिया गया। इस मौके पर मानसी पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ राजीव रंजन, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक गौतम कुमार, बीसीएम नीतीश कुमार सहित केयर इंडिया की टीम मौजूद थी।

– सेकेंड डोज लेने की निर्धारित समयावधि पूरा करने वालों को प्राथमिकता के आधार पर दी जाएगी वैक्सीन :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, विशेष वैक्सीनेशन अभियान के दौरान सभी सेशन साइटों पर दोनों डोज की वैक्सीन दी जाएगी। किन्तु, सेकेंड डोज लेने की निर्धारित समयावधि पूरा करने वालों को प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन दी जाएगी। इसको लेकर सारी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं एवं सभी सेशन साइटों पर पर्याप्त वैक्सीन वाइल की व्यवस्था रहेगी।

– शिविर स्थल आने में असमर्थ व्यक्तियों को उपलब्ध कराई जाएगी होम डिलीवरी की सुविधा :
मानसी पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ राजीव रंजन ने बताया, जो लोग वैक्सीन लेने के लिए शिविर स्थल तक आने में असमर्थ हैं, उन्हें होम डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। यानी उनके घर जाकर स्वास्थ्य टीम वैक्सीन देगी। इसको लेकर प्रशिक्षण के दौरान आशा कार्यकर्ताओं को ऐसे लोगों को चिह्नित कर सूची तैयार करने को कहा गया है। वहीं, उन्होंने बताया, अगर किसी के घर में ऐसे लोग हैं तो उनके परिजन भी नजदीकी शिविर स्थल पर तैनात स्वास्थ्य टीम या फिर स्थानीय स्वास्थ्य संस्थानों को जानकारी दे सकते हैं। इसके बाद उन्हें निश्चित रूप से होम डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।

जिले में आज चलेगा कोविड मेगा ड्राइव

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– –विशेष वैक्सीनेशन शिविर आयोजित कर टीका से वंचित लोगों को दी जाएगी वैक्सीन

– जिले के सभी प्रखंडों में आयोजित होगा विशेष शिविर, घर – घर जाकर वंचितों को चिह्नित कर दी जाएगी वैक्सीन
– सेकेंड डोज की वैक्सीन लेने वालों का प्राथमिकता के तौर पर किया जाएगा वैक्सीनेशन

लखीसराय, 08 दिसम्बर।
जिले में शत-प्रतिशत लोगों का कोविड-19 वैक्सीनेशन जल्द से जल्द सुनिश्चित करने को लेकर लगातार विशेष वैक्सीनेशन के तहत शिविर आयोजित कर लोगों को वैक्सीन दी जा रही है। साथ ही हर जरूरी निर्णय भी लिए भी लिए जा रहे हैं और हर आवश्यक पहल भी की जा रही है। जिसका सार्थक परिणाम भी दिखने लगा है। वहीं, गुरुवार को पुनः जिलेभर में कोविड मेगा ड्राइव चलाया जाएगा। जिसके माध्यम से जिले के सभी प्रखंड में विशेष कोविड वैक्सीनेशन शिविर आयोजित कर अबतक किसी भी कारणवश वैक्सीन से वंचित लोगों को वैक्सीनेटेड किया जाएगा। विशेष शिविर के सफल संचालन के लिए सारी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। ताकि शिविर में वैक्सीन लेने वालों लोगों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हो और सभी लोग सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन ले सकें तथा विशेष अभियान का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

– सेकेंड डोज की वैक्सीन लेने वालों का प्राथमिकता के तौर किया जाएगा वैक्सीनेशन :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया, जिले के सभी प्रखंडों में विशेष वैक्सीनेशन शिविर आयोजित किया जाएगा। सभी सेशन साइटों पर दोनों डोज की वैक्सीन दी जाएगी। किन्तु, इसबार सेकेंड डोज की वैक्सीन लेने की निर्धारित समयावधि पूरी करने वाले व्यक्तियों का प्राथमिकता के तौर पर वैक्सीनेशन किया जाएगा। इसको लेकर सारी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। साथ ही सभी सेशन साइटों पर पर्याप्त संख्या में कर्मियों की तैनाती एवं वैक्सीन वाइल की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। ताकि एक भी लोगों को वैक्सीन के अभाव में लौटना नहीं पड़े। वहीं, उन्होंने बताया, जिले में चल रहे वैक्सीनेशन अभियान को और तेज गति देने के लिए वैक्सीनेशन टीम को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।

– जरूरतमंदों के घर जाकर किया जाएगा वैक्सीनेशन :
मेगा वैक्सीनेशन ड्राइव के तहत जिले के सभी प्रखंडों में चयनित जगहों पर तो विशेष कोविड वैक्सीनेशन शिविर का आयोजन किया ही जाएगा। किन्तु, जो लोग शिविर स्थल तक आने में असमर्थ हैं, उन्हें होम डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, यानी उनके घर जाकर स्वास्थ्य टीम द्वारा वैक्सीन दी जाएगी। इसे सुनिश्चित करने को लेकर संबंधित क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं को ऐसे लोगों चिह्नित करने समेत अन्य जरूरी निर्देश दिए गए हैं। साथ ही ऐसे व्यक्ति परिवार वाले भी अपने नजदीकी वैक्सीनेशन शिविर पर मौजूद स्वास्थ्य टीम को होम डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कारण की जानकारी दी सकती है। जिसके बाद उन्हें सुनिश्चित रूप से होम डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।

परिवार नियोजन के आधुनिक संसाधनों के इस्तेमाल से घट रही प्रजनन दर

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-परिवार नियोजन के स्थाई और अस्थाई सामग्री का जमकर इस्तेमाल कर रहे लोग
-राज्य के कुल प्रजनन दर को कम करने में बांका जिले के लोगों का अहम योगदान
बांका, 8 दिसंबर।
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस-5) में बिहार की कुल प्रजनन दर में गिरावट आई है। एनएफएचएस-4 में बिहार की कुल प्रजनन दर 3.4 थी जो अब घटकर 3 हो गई है। इसमें बांका जिले के लोगों का अहम योगदान है। जिले में परिवार नियोजन के स्थाई से लेकर अस्थाई उपायों का लोग भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका फायदा न सिर्फ जिले को हो रहा है, बल्कि राज्य भी कई मामलों में बेहतर कर रहा है।
एनएफएचएस-5 के मुताबिक जिले में परिवार नियोजन के संसाधनों का इस्तेमाल करने वालों की संख्या में जबरदस्त उछाल आया है। पहले जहां (एनएफएचएस-4) जिले के 26.9 प्रतिशत लोग परिवार नियोजन के किसी एक साधन का इस्तेमाल करते थे, अब इसकी संख्या बढ़कर 71.5 हो गई है। यानी कि 44.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी। इसी तरह परिवार नियोजन के सभी साधनों का उपयोग करने वालों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। पहले जिले के 25.8 प्रतिशत लोग परिवार नियोजन के सभी साधनों का इस्तेमाल करते थे, अब इसकी संख्या बढ़कर 55.7 हो गई है। यानी कि 29.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी। दोगुने से भी ज्यादा की। इसी तरह बंध्याकरण कराने वाली महिलाओं की संख्या एनएफएचएस-4 के मुकाबले एनएफएचएस-5 में 24.3 से बढ़कर 44.7 हो गई है। इसमें भी 20.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा जो सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि परिवार नियोजन को लेकर अस्थाई व स्थाई संसाधनों के इस्तेमाल की इच्छा रखने के बावजूद सामग्री उपलब्ध नहीं होने वाले लोगों की संख्या भी घटकर 18.9 से 9.7 सात पर आ गई है। इसमें भी 9.2 प्रतिशत की गिरावट। इस मामले में राज्य का औसत 13.2 है। यानी की कई मामलों में जिला राज्य से भी बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।
सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार महतो कहते हैं, जिले में परिवार नियोजन को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। अभी चार दिसंबर को ही परिवार नियोजन पखवाड़ा का समापन हुआ है। इस दौरान जिलेभर में लोगों को परिवार नियोजन को लेकर जागरूक किया गया। परिवार नियोजन से संबंधित स्थाई और अस्थाई संसाधनों के इस्तेमाल की जानकारी दी गई। इससे होने वाले फायदे के बारे में लोगों को बताया गया। इस वजह से जागरूकता बढ़ रही है और परिवार नियोजन के संसाधनों का इस्तेमाल करने वालों की संख्या जिले में तेजी से बढ़ी है। यही कारण है कि जिले समेत राज्य की कुल प्रजनन दर में कमी आ रही है।
काउसिलिंग की भूमिका अहमः सिविल सर्जन कहते हैं कि परिवार नियोजन की सामग्री का इस्तेमाल करने वालों की संख्या बढ़ाने में काउसिलिंग की भूमिका अहम है। परिवार नियोजन पखवाड़ा के दौरान तो सभी लोगों की एएनएम काउंसिलिंग करती ही हैं। साथ में अन्य दिनों में भी काउसिलिंग का काम चलता रहता है। बुधवार और शुक्रवार को जिले में आयोजित होने वाले नियमित टीकाकरण के दौरान भी योग्य दंपतियों की काउंसिलिंग कराई जाती है।

बच्चों का सर्वांगीण विकास करना विद्यालय स्वास्थ्य कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य : केशवेंद्र कुमार 

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पटना/ 7, दिसम्बर: आयुष्मान भारत अंतर्गत विद्यालय स्वास्थ्य कार्यक्रम से संबंधित जिला साधन सेवियों का पाँच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण का शुभारंभ राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान, शेखपुरा, पटना  में दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। विद्यालय जाने वाले बच्चों के स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ाने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू) का एक संयुक्त पहल है। प्रशिक्षण में राज्य के 5 जिले अररिया, औरंगाबाद, बांका, बेगुसराय एवं खगड़िया से शिक्षा विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रशिक्षक के रूप में स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग एवं सहयोगी संस्था यूएनएफपीए केयर इंडिया, इनजेंडर हेल्थ तथा सी 3 के पदाधिकारी योगदान दे रहे हैं।
केशवेन्द्र कुमार, अपर कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार  ने अपने संबोधन में कहा कि यह किसी एक विभाग का कार्यक्रम नहीं है बल्कि बच्चों का कार्यक्रम है। हमारा मुख्य लक्ष्य बच्चों का सर्वांगिण विकास करना है। जब भी हम बच्चों से केवल स्वास्थ्य को लेकर बात करते हैं तो बच्चे रूचि नहीं लेते हैं, हमें उनके रूचि के अनुसार बात करनी चाहिए। यह भारत सरकार का बहुत महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। अभी राज्य के 14 जिलों में विद्यालय स्वास्थ्य कार्यक्रम का क्रियान्वन हो रहा है। आने वाले एक-दो वर्ष में हमलोग राज्य के सभी जिलों में इस कार्यक्रम को क्रियान्वित करेंगे ।
विजय कुमार हिमांशु, निदेशक, एस.सी.ई.आर.टी, पटना ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए अपने संबोधन में कहा कि यह कार्यक्रम न केवल शिक्षा विभाग और न ही स्वास्थ्य विभाग का है बल्कि हम सबका कार्यक्रम है। उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि जिस जिला में स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग के जिला स्तर के पदाधिकारियों का समन्वय बेहतर होता है। वहाँ प्रखंड स्तर पर भी दोनों विभाग के पदाधिकारियों का भी समन्वय देखने को मिलता है और विद्यालय में भी कार्यक्रम का सफल क्रियावयन होता है। उन्होंने प्रतिभागियों को जिला में  बेहतर समन्वय बनाने पर बल दिया ।

फोरम थिएटर द्वारा प्रचलित सामाजिक कुरीतियों पर किया गया वार

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•          शिक्षक एवं जन-प्रतिनिधियों ने भी रखी अपनी राय
•          बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों ने किया प्रतिभाग
पटना: 07 दिसम्बर, 2021 : मंगलवार को राजकीय मध्य-उच्च विद्यालय, पैनाठी, बिहटा में  16 दिवसीय पखवाड़े के अंतर्गत फोरम थिएटर का मंचन कार्यक्रम सहयोगी संस्था एवं इब्तिदा नेटवर्क के द्वारा आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम के आयोजन द्वारा समाज में कुरीति के रूप में व्याप्त घरेलू हिंसा एवं जेंडर आधारित भेदभाव पर अलख जागते हुए समुदाय को संवेदनशील बनाने की कोशिश की गयी. इस दौरान बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे समुदाय के लोग शामिल हुए. साथ ही शिक्षक एवं जन-प्रतिनिधियों ने भी आयोजन में सरीक होते हुए घरेलू हिंसा एवं जेंडर आधारित भेदभाव पर अपनी राय रखी.
समाज में लड़कियों की स्थिति पर दिया गया सन्देश:
फोरम थिएटर के माध्यम से समाज में लड़कियों के साथ हो रहे भेदभाव पर प्रकाश डाला गया. प्रस्तुती के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया गया कि किस तरह एक लड़की को लड़के की तुलना में अधिक भेदभाव झेलना पड़ता है. यह भेदभाव उनके जन्म से ही शुरू हो जाती है. जो आगे चलकर उनके पोषण, शिक्षा, निर्णय लेने की स्वतंत्रा में भी सपष्ट रूप से दिखती है.  कार्यक्रम के प्रस्तुतीकरण द्वारा यह सन्देश दिया गया कि संतुलित विकास के लिए यह अनिवार्य शर्त है कि महिलाओं की अनदेखी न हो. सामाजिक कुरीतियों/कुप्रथाओं पर तंज करते हुए कन्या भ्रूण हत्या, बाल विवाह, दहेज़ प्रथा, आदि के कारण लड़कियों-महिलाओं पर होने वाले शोषण पर मजबूत सन्देश दिया गया.
अभी भी महिलाओं को झेलने पड़ती है यातनाएं:
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सहयोगी संस्था की कार्यक्रम निदेशिका रजनी ने कहा कि सहयोगी संस्था अपने आरम्भ से ही सक्रीय रूप से महिलाओं के प्रति हो रहे हिंसा एवं इसके व्यक्तिगत एवं सामाजिक दुष्परिणामों के बारे में समुदाय एवं विभिन्न हितधारकों को जागरूक एवं संवेदनशील बनने के लिए प्रयास कर रही है. समुदाय एवं सभी हितधारकों को इस मुद्दे पर जागरूक कर जेंडर आधारित हिंसा एवं भेदभाव जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि घर के बाहर की हिंसा के साथ-साथ लडकियाँ-महिलाएँ घर में भी अनेक तरह की हिंसा और भेदभाव झेलती हैं. उन्होंने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 का हवाला देते हुए कहा कि 18-49आयु-वर्ग की विवाहित महिलाओं में 40% महिलाओं ने पति की हिंसा का सामना किया है. वहीं इसी आयु-वर्ग में 2.8% गर्भवती महिलाओं ने भी  शारीरिक हिंसा को झेला. उन्होंने कहा कि नए सर्वे में यह बात निकलकर आती है कि  18-29 आयु-वर्ग की 8.3% महिलाओं ने 18 वर्ष तक की आयु पहुंचने तक कभी न कभी यौन हिंसा का सामना किया. उन्होंने उपस्थित प्रतिभागियों से अपील किया कि बेटी-बेटे को समान अवसर और अधिकार दें, तभी हमारे समाज का संतुलित और स्थायी  विकास हो सकेगा.
शिक्षकों एवं जन-प्रतिनिधियों ने भी रखी अपनी राय:
इस अवसर पर पैनाठी के राजकीय मध्य-उच्च विद्यालय के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं स्थानीय महिला-पुरुषों द्वारा प्रतिभागिता की गई. कार्यक्रम में पैनाठी के मुखिया श्री विनय विभूति, सरपंच श्री वीरेंदर कुमार के साथ अन्य पंचायत प्रतिनिधियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज की.
मुखिया श्री विनय विभूति ने कहा, “ हमारे समाज में बहुत-सी कुरीतियाँ व्याप्त हैं, जिसे हम सभी को मिलकर समाप्त करना है, हम बेटे-बेटी में अंतर न करें, दोनों को समान शिक्षा, पोषण, अवसर और अधिकार दें।“
सरपंच श्री वीरेन्द्र कुमार ने कहा, “ सहयोगी संस्था बहुत सराहनीय कार्य कर रही है, लड़का-लड़की के भेद को समाप्त करने, हिंसा की पहचान कर उसका विरोध करना तथा अपने आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए समुदाय को जागरूक करने के लिए प्रयास कर रही है।“
इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षकों ने भी अपने विचार रखे. शिक्षक श्री बच्चा प्रसाद ने कहा कि महिलाओं को यह कहना कि घर का काम आसान होता है, लेकिन घर संभालना आसान नहीं है। अध्यापक श्री कृष्ण लाल ने कहा कि हमारे शास्त्र में संतान का मतलब केवल पुत्र नहीं कहा गया है. संतान का अर्थ पुत्र-पुत्री दोनों हैं. यह कहीं नहीं लिखा गया है कि मृत्यु के बाद बेटा ही अग्नि देगा.
कार्यक्रम में उन्नति, उषा, संजू, बिंदु, निर्मला, रिंकी, रूबी, मुन्नी, लाजवंती, मनोज, धर्मेन्द्र, नितीश एवं सुरेन्द्र ने भी भाग लिया।

समय से पूर्व जन्म लेने वाले शिशु के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए कंगारू मदर केयर का पालन जरूरी 

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– ठंड के मौसम में कंगारू मदर केयर को अपनाना  बेहद जरूरी
– शिशु को माँ के सीने से चिपकाने से शिशु में होती है गर्माहट
– माँ की धड़कन सुनकर शिशु को राहत का होता है एहसास, मिलता है आराम
लखीसराय, 07 दिसंबर।
समय के पूर्व जन्म लेने वाले शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए कंगारू मदर केयर का पालन बहुत जरूरी है। दरअसल, समय से पूर्व जन्म लेने वाले शिशु का ना सिर्फ वजन कम होता है बल्कि, ऐसे शिशु जन्म लेने बाद भी कई तरह की समस्याओं से घिर जाते हैं। ऐसे शिशु के स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए विशेष ख्याल रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए कंगारू मदर केयर तरीके को अपनाना सबसे आसान एवं बेहतर उपाय है। इस उपाय को अपनाने से ना सिर्फ शिशु स्वस्थ होता है बल्कि, शारीरिक और मानसिक रूप से भी मजबूत होता है।
– बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास का होता है निर्माण :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने बताया, कंगारू मदर केयर बच्चों में मानसिक एवं शारीरिक विकास के निर्माण करने में काफी सहयोग करता है। बच्चा जब अपने माँ के नजदीक रहता है तो माँ और बच्चे के बीच भावनात्मक रिश्ता मजबूत होता है। यह बिना खर्च का सबसे अच्छा उपाय है।
– क्या है कंगारू मदर केयर, इसका उपयोग किस तरह होता है :
कंगारू मदर केयर एक ऐसा उपाय है, जो कम वजन के साथ जन्म लेने वाले शिशु के स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए अपनाया जाता है। इससे शिशु का वजन बढ़ता है। स्तनपान बेहतर होता है। बच्चे का तापमान सही रहता है और वह इन्फेक्शन से दूर रहता है। बच्चे और माँ के बीच रिश्ता मजबूत होता है। इसमें माँ का सीने पर सीधी पोजिशन में शिशु को चिपकाकर रखा जाता है। इस स्थिति में माँ की छाती पूरी तरह खुली होनी चाहिए। जिससे माँ की शरीर की गर्माहट आसानी से और जल्दी शिशु में स्थानांतरित हो सके। इससे शिशु का तापमान सही रहता है। कंगारू मदर केयर माँ के अलावा पिता व परिवार के अन्य सदस्य भी दे सकते है। सिर्फ इस दौरान इस बात का ख्याल रखना है कि शिशु को कंगारू मदर केयर का सुविधा देने वाले स्वस्थ हों।
– ठंड के मौसम में कंगारू मदर केयर बेहद जरूरी :
ठंड के मौसम में तो कंगारू मदर केयर की महत्ता और बढ़ जाती है। इस उपाय का पालन करने से नवजात के परिजन कई तरह की परेशानियाँ से दूर रहते हैं। साथ ही बच्चे का लालन-पालन में किसी प्रकार की परेशानियाँ का सामना नहीं करना पड़ता है। दरअसल, ठंड के मौसम में नवजात को हाइपोथर्मिया का खतरा अधिक रहता है। किन्तु, कंगारू मदर केयर का पालन कर इन परेशानियाँ से भी दूर रखा जा सकता है।