हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को विकसित करने को सीएचओ/स्टाफ नर्स, एएनएम और आशा कार्यकर्ता को  दी जा रही है ट्रेनिंग

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– सदर अस्पताल के एएनएम स्कूल सभागार में विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ डॉक्टर  एवं अधिकारी दे रहे हैं ट्रेनिंग
– राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की  योजनाओं के सफल संचालन को ले केयर इंडिया के ब्लॉक मैनेजर के साथ  मीटिंग
मुंगेर, 07 दिसंबर। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को विकसित करने को ले सदर अस्पताल परिसर स्थित एएनएम स्कूल सभागार में विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ डॉक्टर और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के द्वारा सीएचओ/स्टाफ नर्स, एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग दी गई।
हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के नोडल अधिकारी एवं जिला योजना समन्वयक (डीपीसी) विकास कुमार ने बताया कि जिला स्तर पर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित किए जाने वाले स्वास्थ्य उपकेंद्र एवं अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र पर पदस्थापित सीएचओ या स्टाफ नर्स, एएनएम और आशा कार्यकर्ता को वहां दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में उन्मुखीकरण कर उसके सुदृढ़ीकरण के लिए जिलास्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सदर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत आदर्श ग्राम चंडी स्थान, चरौंन, हसनपुर, शंकरपुर और  सौहेलचक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर  से एक-एक सीएचओ, दो-दो एएनएम और पांच- पांच आशा कार्यकर्ता को प्रशिक्षण के लिए आमंत्रित किया गया है। इसी तरह  अम्बेडकर भवन, अरगड़ा, माधोपुर, नागलोक और लेडी स्टीफेन्स अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र से भी 1-1 सीएचओ या स्टाफ नर्स, 2- 2 एएनएम और 5-5 आशा कार्यकर्ता को प्रशिक्षण के लिए आमंत्रित किया गया है।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. के.रंजन ने मेंटल और पालीएटिव हेल्थ, डॉ. रईश ने आंख और ईएनटी केयर, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. राजेश रौशन ने नियमित टीकाकरण, डॉ. पंकज सागर ने नवजात और शिशु स्वास्थ्य, डॉ. माहिद ने ओरल या डेंटल हेल्थ केयर, जिला स्वास्थ्य समिति की जिला मूल्यांकन एवं अनुश्रवण अधिकारी रचना कुमारी ( एम एंड ई) ने वेब पोर्टल से संबंधित, जिला सामुदायिक उत्प्रेरक (डीसीएम) निखिल राज ने आशा कार्यकर्ता से संबंधित, एएनएम स्कूल की प्रिंसिपल रागिनी कुमारी ने हेल्थ केयर, केयर इंडिया मुंगेर की डीटीओएफ डॉ. नीलू ने इट राइट टूल किट से संबंधित, केयर इंडिया के सदर प्रखंड क्षेत्र के ब्लॉक मैनेजर संजीव कुमार ने फैमिली प्लानिग लॉजिस्टिक सर्विसेज ( एफपीएलएस), एनसीडी कार्यालय में कार्यरत राखी मुखर्जी ने तम्बाकू से संबंधित, डब्ल्यूएचओ के एस एमओ और यूनिसेफ के एसएमसी ने टीकाकरण और अन्य के बारे में, सदर अस्पताल के साइकोलॉजिस्ट नितिन कुमार ने मेन्टल हेल्थ , जपाइगो मुंगेर के प्रतिनिधि ने हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से संबंधित, सदर अस्पताल के लैब तकनीशियन अरबिंद कुमार ने टेस्ट और योगाचार्य राजीव कुमार ने योगाभ्यास के बारे में विस्तार से प्रशिक्षण दिया ।
उन्होंने बताया कि ज़ूम कॉल के माध्यम से मुंगेर जिला के सभी प्रखण्डों में कार्यरत केयर इंडिया के प्रखण्ड प्रबंधक से ऑनलाइन मीटिंग की गई। इस मीटिंग के माध्यम से उन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत संचालित होने वाली सभी स्वास्थ्य योजनाओं और उसके सफल किर्यान्वयन ने लिए केंद्र सरकार और राज्य स्वास्थ्य समिति के द्वारा खर्च की जा ही राशि के बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा की गई। इस मीटिंग का मुख्य उद्देश्य यह था कि उन्हें सरकार के द्वारा दी स्वास्थ्य सेवाओं और उसके सफल किर्यान्वयन के लिए सरकार द्वारा खर्च की जा रही राशि के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाय ताकि सरकार की इन योजनाओं का लाभ सही लाभार्थी को सही समय पर उपलब्ध करा दिया जाय। ज़ूम मीटिंग में जिला मुख्यालय से डीपीएम नसीम रजि, केयर इंडिया कि डीडीओ ऑफ डॉ. नीलू और फैमिली प्लानिंग कॉर्डिनेटर तस्नीम रजि ने केयर इंडिया के सभी प्रखण्ड प्रबंधक से परिवार नियोजन, गैर संचारी रोग, शिशु- मातृ मृत्यु समीक्षा, मातृ- शिशु सुरक्षा, जननी बाल सुरक्षा योजना और एनीमिया मुक्त भारत को लेकर आवश्यक जानकारी दी ।

सही रिपोर्टिंग एवं समीक्षा से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में मिलेगी मददः सिविल सर्जन

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-जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने को लेकर कार्यशाला
बांका, 7 दिसंबर।
राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देश पर जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से मंगलवार को मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से मातृ एवं शिशु मृत्यु समीक्षा प्रशिक्षण कार्यशाला का आय़ोजन किया गया। प्रशिक्षण में जिले के सभी सरकारी अस्पतालों के प्रभारी सम्मिलित हुए। प्रशिक्षण का उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार महतो, डॉ. योगेंद्र मंडल, एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी, डीसीक्यूए डॉ. जावेद अली, सीडीओ, केयर इंडिया डीटीएल  तौसीफ कमर प्रशिक्षक एसपीओ- निपी डॉ. मनीष और पाथ फाउंडेशन के रमाकांत ने संयुक्त रूप से किया।
प्रशिक्षण को सबोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार महतो ने कहा कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की रिपोर्टिंग सही तरीके से करने पर मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी। आशा कार्यकर्ता को एक मौत की रिपोर्टिंग के लिए कुल 1200 रुपये देने का प्रावधान है। सही तरीके से रिपोर्टिंग नहीं हो पाने से इसे लेकर लोगों में जागरूकता की भी कमी है। जागरूकता बढ़ेगी तो मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में अपने आप गिरावट आएगी। इसलिए प्रशिक्षण में मौजूद सभी अस्पताल प्रभारी अपने-अपने क्षेत्र में इसकी रिपोर्टिंग को सही करवाएं। साथ ही प्रशिक्षण में बताई गई बातों को अमल में लाएं इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी। सिविल सर्जन ने बाताया कि रिपोर्टिंग होने से हमें अपनी कमियों के बारे में पता चलता है। इससे आगे हम उन गलतियों को नहीं दोहराते हैं। अलग-अलग मामलों में अलग-अलग कमियां होती हैं, जिसे चिह्नित कर हमलोग उस पर काबू पा सकते हैं। इसलिए अभी से ही रिपोर्टिंग को दुरुस्त करना शुरू कर दें।
मौत के कारणों पर करना होगा कामः प्रशिक्षक डॉ. मनीष ने कहा कि कहा कि 20 प्रतिशत मामलों में मातृ मृत्यु गर्भावस्था के दौरान हो जाती है, जबकि पांच प्रतिशत डिलीवरी के दौरान, 50 प्रतिशत डिलीवरी के 24 घंटे के अंदर, 20 प्रतिशत मौत डिलीवरी के सात दिन के अंदर और पांच प्रतिशत डिलीवरी के दूसरे से छठे सप्ताह के दौरान। इसे हमें सुधारना होगा। ये मौत क्यों होती हैं, इसके कारणों को ढूंढना होगा और उस पर काम करना पड़ेगा, ताकि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके। इसके साथ-साथ शिशु मृत्यु दर पर भी काम करना होगा। उसकी भी कमियों को ढूंढकर उसे दूर करना होगा। राज्य में मातृ मृत्यु के आंकड़े को अगले दो साल से 2 अंक तक करने का लक्ष्य रखा गया है।
रेफर करने में नहीं करें देरीः राज्य स्वास्थ्य समिति के प्रतिनिधियों ने डिलीवरी के दौरान जटिलता बढ़ने पर रेफर करने में देरी नहीं करने की सलाह दी। रेफर करने में देरी करने से भी नुकसान होता है। कार्यशाला के दौरान पाथ फाउंडेशन के प्रतिनिधि रमाकांत ने शिशु मृत्यु समीक्षा के महत्त्व को रेखांकित करते हुए इस प्रक्रिया को सुदृढ़ करने पर बल दिया। उन्होंने  बताया कि शिशु मृत्यु समीक्षा, SDG-2030 के शिशु मृत्यु संबंधी लक्ष्य को हासिल करने का महत्वपूर्ण साधन है। कार्यक्रम में मौजूद निजी चिकित्सकों ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने को लेकर काउंसिलिंग की बात कही।

कोविड से सुरक्षा के लिए वैक्सीनेशन सबसे कारगर उपाय, पर सतर्कता और सावधानी भी जरूरी 

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– वैक्सीनेशन के साथ जारी रखें प्रोटोकॉल का पालन और संक्रमण के खतरे से रहें दूर
– संभावित तीसरी लहर को देखते हुए जिले में तेज हुई कोविड जाँच और वैक्सीनेशन अभियान
खगड़िया, 07 दिसंबर।
कोविड से सुरक्षा और इस घातक महामारी के प्रभाव को खत्म करने के लिए वैक्सीनेशन सबसे कारगर उपाय है, पर इसके साथ सतर्कता और सावधानी भी बेहद जरूरी है। इसलिए, जो भी व्यक्ति अबतक किसी कारणवश वैक्सीन नहीं ले पाएं हैं, वह जल्द से जल्द वैक्सीनेशन कराएं । वहीं जो पहला डोज लेने के बाद दूसरा डोज लेने की निर्धारित समयावधि पूरा कर चुके हैं, वह भी निर्धारित समय पर वैक्सीन लें। इसके साथ सतर्कता और सावधानी भी जारी रखें और इस घातक महामारी के खतरे से दूर रहें। जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने को लेकर जिले में लगातार वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। साथ ही संक्रमण का खतरा उत्पन्न नहीं हो, इसके मद्देनजर कोविड जाँच अभियान भी तेज कर दिया गया है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग हर जरूरी कदम भी उठा रहा है। मिशन, सिर्फ एक ही जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने और इस घातक महामारी के प्रभाव को खत्म करने की।
– संभावित तीसरी लहर को रोकने के लिए वैक्सीनेशन के साथ-साथ सावधानी और सतर्कता जारी रखने की जरूरत :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, कोविड संक्रमण वायरस की संभावित तीसरी लहर को रोकने के लिए वैक्सीनेशन के साथ सावधानी और सतर्कता रखने की जरूरत है। क्योंकि, कोरोना के नये वैरिएंट की देश  में भी दस्तक हो चुका है। ऐसे में हमें सुरक्षा कवच को अपनाने के साथ-साथ सतर्क और सावधान भी रहने की जरूरत है। इसलिए, मैं तमाम जिलेवासियों से अपील करता हूँ कि जो भी व्यक्ति अबतक किसी कारणवश वैक्सीन नहीं ले पाएं हैं, वह निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें। साथ ही इस घातक महामारी को पूरी तरह जड़ से मिटाने के लिए सावधानी और सतर्कता भी जारी रखें। यही सबसे बेहतर और कारगर उपाय है।
– जिले में लगातार चल रहा है वैक्सीनेशन अभियान, घर-घर जाकर दी जा रही है वैक्सीन :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, जिले में लगातार वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। अबतक वैक्सीन लेने से छूटे व्यक्ति की घर-घर जाकर पहचान की जा रही और उन्हें सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन भी दी जा रही है। ताकि जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके और सामुदायिक स्तर पर लोग इस घातक महामारी से खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें। इसके अलावा स्वास्थ्य टीम में शामिल एएनएम, ऑगनबाड़ी सेविका, आशा कार्यकर्ता, जीविका दीदी समेत अन्य कर्मियों द्वारा अभियान चलाकर लोगों को वैक्सीनेशन के प्रति प्रेरित किया जा रहा है।
– संभावित तीसरी लहर के खतरे से बचाव के लिए जिले में तेज हुई कोविड जाँच और वैक्सीनेशन अभियान :
संभावित तीसरी लहर यानी कोरोना के नये वैरिएंट को देखते हुए जिले में कोविड जाँच और वैक्सीनेशन अभियान तेज कर दिया गया है। जिले के बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन समेत अन्य सार्वजनिक जगहों पर जाँच एवं वैक्सीनेशन अभियान बढ़ा दिया गया है। साथ ही बाहर यानी दूसरे राज्यों और देशों से आने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही है। ऐसे लोगों का प्राथमिकता के तौर जाँच एवं वैक्सीन से वंचित रहने पर वैक्सीनेशन किया जा रहा है। ताकि संक्रमण का खतरा उत्पन्न नहीं हो और सामुदायिक स्तर पर लोग इस घातक महामारी से सुरक्षित रहें।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।

मातृ एवं शिशु मृत्यु की सही रिपोर्टिंग, समीक्षा एवं आवश्यक कदम उठाएँ, इससे मौत में आएगी कमीः सिविल सर्जन

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-सही रिपोर्टिंग एवं समीक्षा से मौत की दर को कम करने में मिलेगी मदद
-मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी को लेकर प्रशिक्षण का आयोजन
भागलपुर, 7 दिसंबर।
जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से भीखनपुर स्थित एक होटल में मंगलवार को मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से मातृ एवं शिशु मृत्यु समीक्षा प्रशिक्षण कार्यशाला का आय़ोजन किया गया। प्रशिक्षण में जिले के सभी सरकारी अस्पतालों के प्रभारी और निजी अस्पताल चलाने वाले डॉक्टर सम्मिलित हुए थे। प्रशिक्षण का उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा, डीपीएम फैजान आलम अशर्फी, प्रशिक्षक यूनिसेफ के डॉ. नलिनी कांत त्रिपाठी और केयर इंडिया के जय किशन ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
प्रशिक्षण को सबोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने कहा कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की रिपोर्टिंग सही तरीके से नहीं हो पाती है, इस वजह से इसमें सुधार उस गति से नहीं हो पा रही है जितनी की अपेक्षा रहती है। जबकि आशा कार्यकर्ता को एक मौत की रिपोर्टिंग के लिए कुल 1200 रुपये का प्रावधान है। सही तरीके से रिपोर्टिंग नहीं हो पाने से इसे लेकर लोगों में जागरूकता की भी कमी है । जागरूकता बढ़ेगी तो मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में अपने आप गिरावट आएगी। इसलिए प्रशिक्षण में मौजूद सभी अस्पताल प्रभारी अपने-अपने क्षेत्र में इसकी रिपोर्टिंग को सही करवाएं। साथ ही प्रशिक्षण में बताई गई बातों को अमल में लाएं इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी।
इसलिए है रिपोर्टिंग जरूरीः सिविल सर्जन ने बाताया कि रिपोर्टिंग होने से हमें अपनी कमियों के बारे में पता चलता है। इससे आगे हम उन गलतियों को नहीं दोहराते हैं। अलग-अलग मामलों में अलग-अलग कमियां होती हैं, जिसे चिह्नित कर हमलोग उस पर काबू पा सकते हैं। इसलिए अभी से ही रिपोर्टिंग को दुरुस्त करना शुरू कर दें। सिविल सर्जन ने मौके पर मौजूद शहर के निजी चिकित्सकों को भी इसकी रिपोटिंग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इससे संबंधित ज्यादातर डॉक्टर महिला हैं। आपलोग महिलाओं के प्रति संवेदनशील बनें और इसकी रिपोर्टिंग कर मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में अपना योगदान दें।
मौत के कारणों पर करना होगा कामः प्रशिक्षक यूनिसेफ के नलिनी कांत त्रिपाठी ने कहा कि कहा कि 20 प्रतिशत मामलों में मातृ मृत्यु गर्भावस्था के दौरान हो जाती है, जबकि पांच प्रतिशत डिलीवरी के दौरान, 50 प्रतिशत डिलीवरी के 24 घंटे के अंदर, 20 प्रतिशत मौत डिलीवरी के सात दिन के अंदर और पांच प्रतिशत डिलीवरी के दूसरे से छठे सप्ताह के दौरान। इसे हमें सुधारना होगा। ये मौत क्यों होती हैं, इसके कारणों को ढूंढना होगा और उस पर काम करना पड़ेगा, ताकि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके। इसके साथ-साथ शिशु मृत्यु दर पर भी काम करना होगा। उसकी भी कमियों को ढूंढकर उसे दूर करना होगा। राज्य में मातृ मृत्यु के आंकड़े को अगले दो साल से 2 अंक तक करने का लक्ष्य रखा गया है।
रेफर करने में नहीं करें देरीः राज्य स्वास्थ्य समिति के प्रतिनिधियों ने डिलीवरी के दौरान जटिलता बढ़ने पर रेफर करने में देरी नहीं करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि रेफर करने में देरी करने से भी नुकसान होता है।
कार्यशाला के दौरान केयर इंडिया के प्रतिनिधि जय किशन ने शिशु मृत्यु समीक्षा के महत्त्व को रेखांकित करते हुए इस प्रक्रिया को सुदृढ़ करने पर बल दिया। उन्होंने ने बताया कि शिशु मृत्यु समीक्षा, SDG-2030 के शिशु मृत्यु संबंधी लक्ष्य को हासिल करने का महत्वपूर्ण साधन है। कार्यक्रम में मौजूद निजी चिकित्सकों ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने को लेकर काउंसिलिंग की बात कही। मौके पर डॉ. रेखा झा, डॉ. अर्चना झा, डॉ. पूनम मिश्रा, केयर इंडिया के डीटीओ डॉ. राजेश मिश्रा और डॉ. सुपर्णा टाट मौजूद थीं।

सुरक्षित प्रसव के लिए उचित स्वास्थ्य प्रबंधन जरूरी, इसलिए संस्थागत प्रसव को दें प्राथमिकता

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– सुरक्षित प्रसव के लिए पीएचसी व अस्पताल में समुचित व्यवस्था है उपलब्ध
– गर्भावस्था के दौरान योग्य चिकित्सकों से ले परामर्श, करें पालन, -प्रसव पूर्व चार जांच सुरक्षित प्रसव के लिए है जरूरी
– प्रसव पूर्व जाँच से ही गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की मिलेगी जानकारी
खगड़िया, 06 दिसंबर।
सुरक्षित प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देना जरूरी है। दरअसल, सुरक्षित प्रसव के लिए उचित स्वास्थ्य प्रबंधन बेहद जरूरी है। पीएचसी से लेकर जिला अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव के लिए पूरी सुविधा उपलब्ध है और लोगों को संस्थागत प्रसव के दौरान बेहतर से बेहतर सुविधा देने के लिए शासन-प्रशासन भी पूरी तरह सजग है। संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देने से ना सिर्फ सुरक्षित प्रसव होगा, बल्कि शिशु-मृत्यु दर में भी कमी आएगी। इसके लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। ताकि सुरक्षित प्रसव के ऑकड़े में वृद्धि हो सके और मातृ शिशु मृत्यु दर पर विराम लग सके।
– सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पताल में उपलब्ध हैं पर्याप्त सुविधा :
सिविल सर्जन डॉ अमरनाथ झा ने बताया,  सुरक्षित प्रसव के लिए पीएचसी एवं जिले के अस्पतालों में पर्याप्त सुविधा उपलब्ध हैं और प्रसव के लिए आने वाली प्रसूता को बेहतर से बेहतर सुविधा मिले इस बात का विशेष ख्याल भी रखा जाता है। इसके अलावा संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके लिए स्वास्थ विभाग से जुड़ी एएनएम और आशा अपने-अपने पोषक क्षेत्र में घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रहीं हैं।
– सुरक्षित मातृत्व के लिए प्रसव पूर्व जाँच है जरूरी :
शिशु-मृत्यु दर में कमी के लिए बेहतर प्रसव एवं उचित स्वास्थ्य प्रबंधन जरूरी है। प्रसव पूर्व जाँच से ही गर्भस्थ  शिशु के स्वास्थ्य की सही जानकारी मिलती है। गर्भावस्था में बेहतर शिशु विकास एवं प्रसव के दौरान होने वाली रक्तस्राव के प्रबंधन के लिए महिलाओं में पर्याप्त मात्रा में खून होना आवश्यक होता है। जिसमें प्रसव पूर्व जाँच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एनीमिया प्रबंधन के लिए प्रसव पूर्व जाँच के प्रति महिलाओं की जागरूकता ना सिर्फ एनीमिया रोकथाम में सहायक होती है बल्कि, सुरक्षित मातृत्व की आधारशिला भी तैयार करती है। ऐसे में प्रसव पूर्व जांच की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है, क्योंकि यह मातृ एवं शिशु-मृत्यु दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
– हर माह की नौ तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत की जाती है मुफ्त जाँच :
सुरक्षित मातृत्व के लिए प्रसव पूर्व जाँच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके लिए हर माह की नौ तारीख को सभी पीएचसी एवं सरकारी अस्पतालों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत मुफ्त जाँच की जाती है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस आदि कार्यक्रम के माध्यम से एनेमिक गर्भवती महिलाओं की जाँच की जा रही है एवं साथ ही सामुदायिक स्तर पर गर्भवती महिलाओं को बेहतर खान-पान के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही अधिक से अधिक गर्भवती माताओं के प्रसव पूर्व जाँच सुनिश्चित कराने पर बल दिया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं की चारों प्रसव पूर्व जांच माता एवं उसके गर्भस्थ शिशु की स्थिति स्पष्ट करती है और संभावित जटिलताओं का पता चलता है। लक्षणों के मुताबिक जरूरी चिकित्सीय प्रबंधन किया जाता है ताकि माता और उसके शिशु दोनों स्वस्थ रहें।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– वैक्सीनेशन के साथ सावधानी और सतर्कता भी जारी रखें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।

10 दिसंबर को मुंगेर में आयोजित होगा जिलास्तरीय एमडीएसआर प्रशिक्षण

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– प्रशिक्षण  में शामिल होंगे जिलाभर के स्वास्थ्य संस्थानों और चिह्नित निजी अस्पताल के लगभग 50 प्रतिनिधि
– एमडीएसआर ट्रेनिंग देंगे  केयर के स्टेट रिसोर्ट पर्सन डॉ. संजीव दौलत राम और जय किशन
मुंगेर, 06 दिसम्बर
आगामी 10 दिसंबर को मुंगेर में जिलास्तरीय मैटरनल डेथ सर्विलांस एंड रेस्पॉन्स (एमडीएसआर) प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। जिला भर के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थान और चिह्नित निजी अस्पताल के लगभग 50 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित सभी 50 स्वास्थ्य प्रतिनिधियों को एमडीएसआर की ट्रेनिंग देने के लिए केयर के स्टेट रिसोर्ट पर्सन डॉ. संजीव दौलत राम और जय किशन मुंगेर आ रहे हैं।
मुंगेर के सिविल सर्जन डॉ. हरेन्द्र आलोक ने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति की राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. सरिता से प्राप्त निर्देश के अनुसार आगामी 10 दिसम्बर शुक्रवार को जिला मुख्यालय में एक दिवसीय मैटरनल डेथ सर्विलांस एंड रेस्पॉन्स (एमडीएस आर) पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। प्रशिक्षण  में जिला के अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (एसीएमओ), प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉक्टर, जिला के सभी प्राथमिक और सामुदायिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक(डीपीएम), जिला योजना समन्वयक (डीपीसी), सलाहकार, गुणवत्ता यकीन तथा जिला भर से चिह्नित किए गए निजी अस्पताल के लगभग 50 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। उन्होंने बताया कि विगत 24 नवम्बर को राज्य स्वास्थ्य समिति के अपर कार्यपालक निदेशक के समक्ष एमडीएसआर से संबंधित की गई समीक्षा में यह बात सामने आयी कि राज्य भर के लगभग सभी जिलों के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों और निजी अस्पतालों में हो रहे मातृ मृत्यु का प्रतिवेदन एचएमआईएस पोर्टल पर नियमित अपलोड नहीं किया जा रहा है। अप्रैल से अक्टूबर तक के प्राप्त प्रतिवेदनों के अनुसार मातृ मृत्यु की रिपोर्ट अनुमानित 14 % से भी कम है। इसके साथ ही मात्र 2.2 % का ही रिव्यू किया गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य भर में सिर्फ जहानाबाद को छोड़कर शेष सभी जिलों में 1 से 11 दिसम्बर के दौरान प्रमंडल स्तर पर एमडीएसआर का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसी कड़ी में आगामी 10 दिसम्बर को मुंगेर जिला सहित पूरे मुंगेर प्रमंडल के बेगूसराय, खगड़िया, लखीसराय, जमूई और  शेखपुरा में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। जिसमें प्रशिक्षक के तौर पर केयर इंडिया,यूनिसेफ, निपी और पाथ  के राज्यस्तरीय मास्टर ट्रेनर/ स्टेट रिसोर्स पर्सन आ रहे हैं। इसी कड़ी में मुंगेर में आयोजित ट्रेनिंग में मास्टर ट्रेनर के रूप में केयर इंडिया के स्टेट रिसोर्स पर्सन डॉ. संजीव दौलत राव और जय किशन आ रहे हैं।

संभावित तीसरी लहर से सुरक्षा को लेकर  वैक्सीन से वंचित लोग जल्द कराएं वैक्सीनेशन, रहें सुरक्षित

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– जरूरतमंदों को  वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने को लेकर लखीसराय पीएचसी ने जारी किया व्हाट्सअप नंबर
– सूचना देने पर घर जाकर मेडिकल टीम द्वारा किया जाएगा वैक्सीनेशन
लखीसराय, 06 दिसंबर।
संभावित तीसरी लहर के मद्देनजर और विदेशों में रहने वालों के दस्तक के साथ जिले में कोविड-19 जाँच और वैक्सीनेशन अभियान तेज कर दिया गया है। जिसे गति देने के लिए जिले के बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों समेत अन्य सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा के लिहाज से जाँच और वैक्सीनेशन अभियान की सुविधा बढ़ा दी गई है। ताकि शत-प्रतिशत लोगों की जाँच के साथ-साथ वंचित लोगों का हर हाल में वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके और सामुदायिक स्तर पर इस घातक महामारी से बचाव के लिए सुरक्षित माहौल बना रहे। वहीं, इसके अलावा अन्य सतर्कता भी बढ़ा दी गई है। जहाँ वैक्सीन से वंचित लोगों को चिह्नित कर टीकाकृत करने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं, एक-एक व्यक्ति तक स्वास्थ्य टीम पहुँच कर वैक्सीनेशन कराने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है।
– वैक्सीन से वंचित लोग जल्द कराएं वैक्सीनेशन और रहें सुरक्षित :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया, एक भी व्यक्ति वैक्सीन से वंचित नहीं रहें, इसको लेकर जिले में लगातार तमाम गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। किन्तु, इसे पूर्णतः सफल बनाने के लिए संपूर्ण जिले वासियों की भी सकारात्मक सहयोग की जरूरत है। इसलिए, मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि जो व्यक्ति अबतक किसी कारणवश वैक्सीन नहीं ले पाएं है, वह जल्द वैक्सीनेशन कराएं और संभावित तीसरी लहर से खुद को सुरक्षित करें। जो व्यक्ति पहला डोज ले चुके हैं और दुसरा डोज लेने की निर्धारित समयावधि पूरा कर चुके हैं, वह भी निर्धारित समय पर सुनिश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं। क्योंकि, इस घातक महामारी से बचाव के लिए वैक्सीन ही सबसे कारगर हथियार है। इसके अलावा वैक्सीनेशन के साथ कोविड प्रोटोकॉल का पालन भी जारी रखें। वहीं, उन्होंने बताया, मैं आमलोगों के साथ जिले के सभी विभागों के तमाम पदाधिकारियों, कर्मचारियों एवं कर्मियों से भी अपील करता हूँ कि जो भी अबतक वैक्सीन नहीं ले पाएं है, वह जल्द से जल्द वैक्सीनेशन कराएं। क्योंकि, वैक्सीन नहीं लेने पर कोविड के खतरे के साथ-साथ विभागीय परेशानियाँ का भी सामना करना पड़ सकता है। वहीं, उन्होंने बताया, विदेश से देश के विभिन्न राज्यों से आने पर लोगों पर नजर रखी जा रही है और ऐसे लोगों को चिह्नित कर जाँच सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
– जरूरतमंदों को सुविधाजनक तरीके से वैक्सीनेशन की सुविधा कराई जाएगी उपलब्ध :
लखीसराय पीएचसी के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक निशांत राज ने बताया, जो व्यक्ति शिविर स्थल पर आकर वैक्सीनेशन कराने में असमर्थ हैं, उन्हें स्वास्थ्य टीम द्वारा होम डिलेवरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। यानी उनके घर जाकर हमारी स्वास्थ्य टीम वैक्सीनेशन करेगी। इसे सुनिश्चित करने को लेकर हमारे पीएचसी द्वारा एक व्हाट्स अप नंबर जारी किया गया है। जिसका नंबर 9709100910 है, इस नंबर पर सूचना देने के पश्चात होम डिलेवरी या उनके सुविधानुसार वैक्सीनेशन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं, उन्होंने प्रखंड वासियों से यह भी अपील की है कि अगर कोई व्यक्ति घर आ गया हो और वह जाँच नहीं कराया हो तो ऐसे व्यक्ति का भी उक्त व्हाट्स अप नंबर पर सूचना दे सकते हैं।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– वैक्सीनेशन के साथ सावधानी और सतर्कता भी जारी रखें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।

कोरोना के नए मामले सामने आने के बाद स्वास्थ विभाग हुआ सक्रिय, जांच तेज

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-बाहर से आने वाले लोगों की जांच की जा रही, रिपोर्ट आने तक होम आइसोलेशन में रहने की सलाह
-बाहर से आने वाले लोगों के संपर्क में आने वाले लोगों की भी कराई जा रही है कोरोना जांच
भागलपुर, 6 दिसंबर। जिले में कोरोना के नए मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है। जांच की गति तेज कर दी गई है। बाहर से आने वाले सभी व्यक्तियों पर नजर रखी जा रही है। बाहर से आने वाले व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों की भी जांच की जा रही और जब तक रिपोर्ट नहीं आ जाती है तब तक सभी लोगों को होम आइसोलेशन में रहने के लिए कहा जा रहा है।
सदर अस्पताल में कोविड कंट्रोल रूम के प्रभारी डॉ सुरेंद्र ने बताया कि अभी तक बाहर से जितने भी लोग भागलपुर आए हैं लगभग सभी लोगों की आरटीपीसीआर जांच कर दी गई है। उनके संपर्क में आए लोगों की भी एंटीजन किट से जांच की जा रही है। जांच की रिपोर्ट जब तक नहीं आ जाती है तब तक सभी लोगों को होम आइसोलेशन मैं रहने के लिए कहा गया है। साथ में कोरोना की गाइडलाइन का पालन करने के लिए कहा गया है। घर के सदस्यों से बात करते वक्त मास्क पहनने और सामाजिक दूरी का पालन करने के लिए कहा गया है।
सोमवार को एक युवती निकली कोरोना पॉजिटिव: सोमवार को जिले में एक युवती कोरोना पॉजिटिव निकली है। आरटीपीसीआर जांच में उसके कोरोना पॉजिटिव होने की बात सामने आई है।  युवती जगदीशपुर प्रखंड की रहने वाली है और वह कोलकाता से आई है। उसके साथ आने वाली दो बहन भी होम आइसोलेशन में रह रही है और उनकी भी जांच करा दी गई है। जब तक रिपोर्ट नहीं आती है तब तक होम आइसोलेशन में रहने के लिए कहा गया है।
स्वास्थ्य विभाग के पास बाहर से आने वालों की लिस्ट: कोरोना के नए वायरस ओमिक्रोन के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अपनी  तैयारी पूरी कर ली है। न सिर्फ अभी बाहर से आने वालों की लिस्ट है, बल्कि अगले कुछ दिनों में देश और विदेश से जो भी लोग शहर में आएंगे, उनकी सूची भी स्वास्थ विभाग के पास मौजूद है। ऐसे में बाहर से जो भी लोग आने वाले हैं उनसे संपर्क किया जा रहा है। साथ ही उनके परिजनों से भी संपर्क किया जा रहा है। वे लोग जैसे ही शहर में आएंगे, तत्काल उनकी जांच कराई जाएगी और उन्हें आइसोलेट कर दिया जाएगा।

11 से 13 दिसंबर तक नालंदा में मनेगा आयुर्वेद पर्वः मंगल पांडेय

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देश के आयुर्वेद, होमियोपैथ व यूनानी चिकित्सा के विशेषज्ञ लेंगे भाग
माननीय मुख्यमंत्री करेंगे तीन दिवसीय आयुर्वेद पर्व का उद्घाटन
पटना। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि जीवनशैली से संबंधित बीमारियों के लिए इलाज के रूप में आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए आयुष मंत्रालय के सहयोग से बिहार सहित देश के 4 राज्यों में 11, 12 और 13 दिसम्बर को आयुर्वेद पर्व का आयोजन किया जा रहा है। माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 11 दिसम्बर को नालंदा के अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर केंद्रीय आयुष मंत्री, आयुष मंत्रालय के सचिव समेत विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।
श्री पांडेय ने कहा कि बदलते जीवनशैली की वजह से गैर संचारी बीमारियां बढ़ती जा रही हैं। इसके अलावा कोविड के बाद लोगों की रोगों से लड़ने की क्षमता भी कमजोर हुई है। इस स्थिति में लोगों का आयुर्वेद के प्रति भरोसा बढ़ा है। इस आयोजन का उद्देश्य न केवल लोगों के बीच आयुर्वेद की अधिक से अधिक स्वीकृति सुनिश्चित करनी है, बल्कि वर्तमान बीमारियों के इलाज के लिए आयुर्वेद को लोकप्रिय बनाना है। लोगों को अच्छे स्वास्थ्य एवं आयुर्वेद को लेकर जागरूक करना भी है। त्रिदिवसीय आयुर्वेद पर्व के आयोजन के दौरान देशभर के आयुष चिकित्सक लोगों को स्वस्थ रहने की जानकारी देंगे। उनके ज्ञान से आयुष चिकत्सक के साथ-साथ देसी चिकित्सा के विद्यार्थी भी लाभान्वित होंगे।
   श्री पांडेय ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग प्रदेश में आयुष चिकित्सा शिक्षा के विकास को लेकर लगातार प्रयास कर रहा है।  आयुष कॉलेज और अस्पतालों को सुदृढ़ किए जा रहें हैं। इसके आधारभूत संरचनाओं को मजबूत करने के साथ आयुष चिकित्सकों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। अगले साल जनवरी तक 3270 आयुष चिकित्सको की नियुक्ति कर ली जायेगी। इनको आयुर्वेदिक, होमियोपैथिक और यूनानी चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल के साथ- साथ अस्पतालों में नियुक्ति की जाएगी। दरभंगा आयुर्वेद कालेज और अस्पताल में अगले सत्र से पढ़ाई प्रारम्भ कराने को लेकर विभागीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।

घरेलू प्रदूषण भी आपके बच्चे को निमोनिया से कर सकता है ग्रसित

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• राज्य के 14 जिलों में चल रहा सांस कार्यक्रम
• 5 साल तक के बच्चों में निमोनिया मृत्यु का प्रमुख कारण
• पीसीवी, पेंटावेलेंट एवं मिजिल्स का टीका निमोनिया रोकथाम में प्रभावी
• ठण्ड के मौसम में बच्चों को विशेष देखभाल की जरूरत
पटना: ठण्ड के मौसम की शुरुआत के बाद शिशुओं में निमोनिया का खतरा बढ़ गया है. कोविड संक्रमण के इस दौर में बच्चों में निमोनिया का संक्रमण उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. ऐसे में निमोनिया को लेकर अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है. अध्ययन इस बात की पुष्टि भी करते हैं कि 5 तक के बच्चों में निमोनिया मृत्यु का एक प्रमुख कारण है. इस लिहाज से निमोनिया पर प्रभावी नियंत्रण कर बच्चे में होने वाली मृत्यु दर को कम किया जा सकता है.
घरेलू प्रदूषण एक बड़ा कारण :
बाल स्वास्थ्य के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. वीपी राय ने बताया कि बच्चों में निमोनिया होने के कई कारण होते हैं. लेकिन ग्रामीण परिवेश में घरेलू प्रदूषण निमोनिया का एक बड़ा कारण है. कई बार यह देखा जाता है कि गाँवों में लोग मच्छर भगाने के लिए घर में धुआँ करते है. ठण्ड में शिशुओं को गर्मी देने के लिए भी आग जलाते हैं. आग जलाने से काफ़ी मात्रा में धुआं होता है जो बच्चों में निमोनिया का कारण भी बनता है. उन्होंने कहा कि बच्चे को निमोनिया से सुरक्षित रखने के लिए घरेलू प्रदूषण करने से बचना चाहिए.
डॉ. राय ने बताया कि निमोनिया से बच्चे को बचाने के लिए पीसीवी का टीका दिया जाता है. सभी लोगों को अपने बच्चे को यह टीका जरुर लगवाना चाहिए. साथ ही पेंटावेलेंट एवं मीजिल्स का भी टीका निमोनिया रोकथाम में सहायक होता है. इसलिए बच्चों को सभी टीके समय पर लगवाना चाहिए. उन्होंने कहा कि बेहतर पोषण भी निमोनिया रोकथाम में कारगर होता है. शिशु जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान की शुरुआत जरुर करनी चाहिए. इसके बाद 6 माह तक केवल शिशु को स्तनपान कराना चाहिए. इस दौरान ऊपर से पानी भी नहीं देना चाहिए. साथ ही 6 महीने के बाद स्तनपान के साथ बच्चों को संपूरक आहार शुरू कर देना चाहिए. इससे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है एवं बच्चा निमोनिया सहित कई अन्य रोगों से भी सुरक्षित रहता है.
राज्य के 14 जिलों में चल रहा है सांस कार्यक्रम:
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से भी सोशल अवेयरनेस एंड एक्शन प्लान टू नयूट्रीलाइज निमोनिया सक्सेसफुली (सांस) कार्यक्रम का शुरुआत की गयी है. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सभी स्वास्थ्य केंद्रों में निमोनिया प्रबंधन को सुदृढ़ करना है. बिहार में 14 जिलों में सांस कार्यक्रम संचालित की जा रही है. जिसमें नालंदा सहित राज्य के 13 आकांक्षी जिले शामिल हैं.  इसको लेकर फ्रंट लाइन वर्कर्स को ट्रेनिंग भी दी गयी  है. जिसमें उन्हें रोग की पूर्व में ही पहचान करने एवं मरीज की स्थिति को देखकर उनका उचित रेफेरल के विषय में जानकारी दी गयी है. यह एक अच्छी पहल है. जिससे आने वाले समय में निमोनिया पर प्रभावी नियंत्रण में सफलता मिलेगी.
ऐसे बचाएं बच्चे को निमोनिया से
• घर के अंदर किसी भी तरह से धुआं करने से परहेज करें
• बच्चे को धुएं वाली जगहों से दूर रखें
• हाथों की सफाई एवं आस-पास की सफाई पर ध्यान दें
• बच्चे में सर्दी और खांसी के लक्षण दिखने पर आशा या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें
• सर्दी के मौसम में बच्चों को स्वेटर एवं टोपी जरुर लगायें
• धात्री माताएं शिशु को 6 माह तक नियमित तौर पर केवल स्तनपान कराएँ