दुर्गापूजा पंडालों में 9 टू 9 पांच दिवसीय कोविड वैक्सीनेशन एवं जाँच शिविर शुरू

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– 15 अक्टूबर तक चलेगा शिविर, -लोगों को दी जाएगी वैक्सीन एवं बचाव को लेकर किया जाएगा जागरूक
– लखीसराय नगर परिषद के बड़ी और छोटी दोनों दुर्गा मंदिर परिसर शुरू हुआ शिविर

लखीसराय-

जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित एवं कोविड-19 संक्रमण वायरस को पूरी तरह जड़ से मिटाने के लिए जिले में लगातार वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। जिसे और तेज गति देने के लिए इसबार दुर्गा पूजा के अवसर पर पूजा पंडालों में भी वैक्सीनेशन एवं जाँच शिविर आयोजित करने का निर्णय लिया गया था। जिसे सुनिश्चित करने को लेकर सोमवार को जिले के लखीसराय पीएचसी अंतर्गत नगर परिषद के बड़ी एवं छोटी दोनों दुर्गा मंदिर में 09 टू 09 वैक्सीनेशन व जाँच शिविर का शुभारंभ हुआ। जिसके माध्यम से किसी भी कारणवश अबतक वैक्सीन से वंचित लोगों को वैक्सीन दी जाएगी एवं कोविड जाँच भी जाएगी। ताकि सभी लोग वैक्सीनेटेड हो सकें और संक्रमण का खतरा उत्पन्न नहीं हो।

– लोगों को वैक्सीनेशन एवं बचाव के लिए जागरूक भी किया जाएगा :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया, दुर्गा पूजा के अवसर पर पूजा पंडालों में वैक्सीनेशन एवं जाँच शिविर आयोजित करने का निर्देश प्राप्त हुआ था। जिसे सुनिश्चित करने के लिए पाँच दिवसीय शिविर शुरू किया गया है। ताकि पूजा पंडालों में आने वाले वैक्सीन से वंचित लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके और संक्रमण का खतरा उत्पन्न नहीं हो। वहीं, उन्होंने बताया, किउल रेलवे स्टेशन के समीप वाहन स्टैंड के पास खगौर दुर्गा मंदिर परिसर में शिविर का शुभारंभ किया गया। दरअसल, यह लोगों के आवाजाही का मुख्य मार्ग है और यहाँ भी बड़ी संख्या में लोग पूजा-अर्चना के लिए आते हैं।

– शिविर के सफल संचालन के लिए शिफ्ट वाइज मेडिकल टीम की तैनाती :
लखीसराय पीएचसी के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक निशांत राज ने बताया, पूजा पंडालों में शुरू 09 टू 09 वैक्सीनेशन व जाँच शिविर पूजा समापन यानी 15 अक्टूबर तक चलेगा। शिविर के सफल संचालन के शिफ्ट वाइज मेडिकल टीम की तैनाती की गई। प्रत्येक टीम में एक चिकित्सक, एक एएनएम, एक डेटा ऑपरेटर एवं जाँच कर्मी की तैनाती की गई है। वहीं, उन्होंने बताया, इसके अलावा पूजा स्थलों पर जागरूकता से संबंधित पोस्टर-बैनर लगाकर भी लोगों को जागरूक किया जाएगा। ताकि अधिकाधिक लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके एवं संक्रमण से संबंधित किसी प्रकार की खतरा उत्पन्न नहीं हो।

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें और प्रोटोकॉल का पालन करें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।

भागलपुर के 35 पूजा पंडालों में सुबह नौ से रात बजे तक टीकाकरण

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-16 प्रखंडों के 20 पंडालों में कोरोना टीकाकरण हुआ शुरू
-शहरी क्षेत्र के 15 पंडालों में आज से लगेगा लोगों को टीका

भागलपुर-

दुर्गापूजा में कोरोना टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक इंतजाम किए हैं। इसके तहत जिले के 35 पूजा पंडालों में 9 टू 9 टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं। यहां पर लोग सुबह 9 से रात 9 बजे तक कोरोना का टीका ले सकेंगे। जिले के 16 प्रखंडों के 20 पंडालों में कोरोना टीकाकरण शुरू भी हो गया। कहलगांव, सन्हौला, शाहकुंड और सुल्तानगंज में दो-दो पूजा पंडालों में टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं तो बाकी सभी प्रखंडों में एक-एक। शहरी क्षेत्र के 15 पूजा पंडालों में मंगलवार से शुरू होगा टीकाकरण। सभी केंद्रों पर एएनएम और टीका की व्यवस्था जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से रहेगी, जबकि डाटा ऑपरेटर से लेकर हर तरह के इंतजाम केयर इंडिया करेगी। प्रचार-प्रसार का काम भी केयर इंडिया की तरफ से कराया जाएगा।
सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने बताया कि दुर्गापूजा को देखते हुए टीकाकरण को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए हैं। इस समय बड़ी संख्या में लोग बाहर से घर आते हैं। बाहर से आने वाले जिनलोगों ने कोरोना का टीका अबतक नहीं लिया है, उनका टीकाकरण कराया जाएगा। साथ ही अबतक जिले के जिन लोगों ने कोरोना का टीका नहीं लिया है, उनका भी टीकाकरण होगा। इसे लेकर प्रचार-प्रसार की भी व्यवस्था की गई है। सभी केंद्रों पर कोरोना टीके की दूसरी डोज की भी व्यवस्था रहेगी। जिन्होंने कोई टीका नहीं लिया है, उन्हें पहली डोज और जिन्होंने एक टीका ले लिया है और समय पूरा हो गया है उन्हें दूसरी डोज दी जाएगी। लोगों से मेरी अपील है कि जल्द से जल्द कोरोना का टीका ले लें।
पंडालों मे कोरोना जांच की भी व्यवस्थाः सभी इन पूजा पंडालों में कोरोना टीकाकरण के साथ कोरोना जांच की भी व्यवस्था रहेगी। त्यौहार के समय बाहर से घर आने वाले लोग जरूर अपनी कोरोना जांच कराएं। लोगों की जांच हो जाने से कोरोना संक्रमण का खतरा नहीं रहेगा। बाहर से अगर कोई व्यक्ति संक्रमित होकर भी आता है तो जांच में उसकी पुष्टि हो जाएगी और आइसोलेट कर उसका इलाज किया जाएगा। ऐसा करने से उस व्यक्ति से दूसरे में कोरोना संक्रमण का खतरा नहीं रहेगा। इसलिए यह परिजनों की भी जिम्मेदारी है कि त्योहार में बाहर से घर आने वाले व्यक्ति की कोरोना जांत करवा लें।
स्वास्थ्य की भी होगी जांचः पूजा पंडालों में न सिर्फ कोरोना टीकाकरण और जांच की व्यवस्था रहेगी, बल्कि अन्य तरह की बीमारियों की भी जांच हो सकेगी। अगर किसी व्यक्ति को बीपी की शिकायत आती है तो उसकी बीपी की भी जांच की जाएगी। इसी तरह अन्य बीमारी की भी जांच होगी पूजा पंडाल स्थित स्वास्थ्य कैंप में। साथ ही लोग त्यौहार के मौसम में भीड़भाड़ से बचें और सामाजिक दूरी का पालन करें। एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी बनाकर रहें। साथ ही घर से बाहर निकलते वक्त मास्क अवश्य लगाएं। बाहर से घर आने पर 20 सेकेंड तर हाथ की धुलाई अवश्य करें। ऐसा करते रहने से कोरोना की संक्रमण से लोग बचे रहेंगे।

दुर्गापूजा में कोरोना टीकाकरण पर जोर

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-आज से सभी प्रखंड के एक केंद्र पर सुबह नौ से रात नौ बजे तक होगा टीकाकरण
-सभी प्रखंड के एक पंडाल और शहरी क्षेत्र के दो पंडालों में भी टीकाकरण की व्यवस्था

बांका-

दुर्गापूजा में कोरोना को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क है। खासकर बाहर से आने वाले और छूटे हुए व्यक्तियों के टीकाकरण को लेकर विशेष व्यवस्था की गई है। इसके तहत मंगलवार से शुक्रवार तक जिले के सभी प्रखंडों में एक-एक 9 टू 9 टीकाकरण केंद्र की व्यवस्था की गई है, ताकि लोग वहां पर सुबह 9 से रात 9 बजे तक कोरोना का टीका ले सकें। यह 9 टू 9 टीकाकरण केंद्र सभी प्रखंडों के एक-एक पूजा पंडालों में और बांका शहर के दो पूजा पंडालों में बनाए गए हैं। सभी जगह आज से टीकाकरण शुरू हो जाएगा। पूजा पंडालों में टीकाकरण को लेकर टीका और एएनएम की व्यवस्था जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से की गई है तो एएनएम समेत अन्य व्यवस्था केयर इंडिया की तरफ से की गई है। प्रचार-प्रसार का काम भी केयर इंडिया की तरफ से कराया जाएगा। इसके अलावा गांधी चौक पर 9 टू 9 टीकाकरण की व्यवस्था पहले की ही तरह चलती रहेगी।
सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार महतो ने बताया कि त्यौहार में बड़ी संख्या में बाहर से लोग घर आते हैं। ऐसे लोगों में से जिन लोगों ने कोरोना का टीका नहीं लिया है, उनका टीकाकरण किया जाएगा। साथ ही जिले में रह रहे लोगों में से अब तक जिन्होंने कोरोना का टीका नहीं लिया है, उन्हें भी टीका लेने के लिए जागरूक किया जाएगा। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए इतने बड़े पैमाने पर टीकाकरण की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा नियमित टीकाकरण पहले की ही तरह चलता रहेगा। लोगों से मेरी अपील है कि अगर आपने अब तक कोरोना का टीका नहीं लिया है तो जल्द से जल्द टीका ले लें। साथ ही जिनका समय पूरा हो गया है, वे दूसरी डोज अवश्य ले लें। टीके की दोनों डोज लेना जरूरी है। एक डोज लेकर टीकाकरण की प्रक्रिया को पूरी नहीं समझें।
बाहर से आने वाले व्यक्ति जांच जरूर करवाएः सिविल सर्जन ने कहा कि त्यौहार पर बाहर से आने वाले लोग अपनी जांच जरूर करवाएं। इससे कोरोना का संक्रमण नहीं होगा। अगर बाहर से आने वाले व्यक्ति में कोरोना के लक्षण होंगे तो जांच में यह बात स्पष्ट हो जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद उन्हें आइसोलेट कर इलाज किया जाएगा। इससे दूसरे लोगों में संक्रमण नहीं होगा, इसलिए बाहर से आने वाले व्यक्ति अपनी कोरोना जांच जरूर करवाएं। साथ ही यह परिजनों की भी जिम्मेदारी है कि वह बाहर से घर आने वालों की नजदीकि अस्पताल ले जाकर कोरोना जांच कराएं।
भीड़भाड़ से बचेः त्यौहार के मौसम में हमेशा भीड़भाड़ की संभावना रहती है। एक साथ कई लोग पूजा करने और मेला देखने के लिए घर से निकलते हैं, इसलिए भीड़ लगने की आशंका रहती है। इसलिए भीड़ से बचें। घर से बाहर निकलते वक्त मास्क लगाएं और सामाजिक दूरी का पालन करें। एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी बनाकर रहें। बाहर से घर आने पर 20 सेकेंड तक हाथ की धुलाई आवश्यक तौर पर करें। ऐसा करते रहने से आप भी कोरोना से बचे रहेंगे, साथ ही दूसरे लोगों में भी संक्रमण नहीं होगा।

केयर इंडिया के कर्मियों को खिलाई गई डीईसी और अल्बेंडजोल की दवा

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-जिले में फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर चल रहा अभियान
-31 लाख लोगों को दवा खिलाने का रखा गया है लक्ष्य

भागलपुर, 11 अक्टूबर

जिले में फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर अभी अभियान चल रहा है। इसके तहत सोमवार को केयर इंडिया के कर्मियों को डीईसी और अल्बेंडाजोल की गोली खिलाई गई। केयर इंडिया के 80 कर्मियों को दवा दी गई। अभियान के तहत जिले के 31 लाख लोगों को दवा खिलाई जाएगी। अभी जिले में अभियान चल रहा है। आशा कार्यकर्ताओं की टीम लोगों को दवा खिला रही है। जहां पर आशा कार्यकर्ता नहीं हैं, वहां पर आंगनबाड़ी सेविका या फिर प्रेरक इस काम को कर रही हैं। अभियान के दौरान लाभुकों को अल्बेंडाजोल की गोली चबाकर खिलाई जा रही है। आशा कार्यकर्ताओं की टीम को क्षेत्र में लोगों को अपने सामने दवा खिला रही हैं। दवा खिलाने के बाद आशा कार्यकर्ता रजिस्टर में लाभुकों का नाम भी दर्ज कर रही हैं। साथ ही अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग को केयर इंडिया और पीसीआई भी सहयोग कर रहा है।
गंभीर रूप से बीमारों को नहीं खिलाई जा रही दवाः जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. कुंदन भाई पटेल ने बताया कि अभियान के दौरान दो से पांच वर्ष के बच्चों को डीईसी और अल्बेंडाजोल की एक गोली, छह से 14 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की दो और अल्बेंडाजोल की एक गोली और 15 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को डीईसी की तीन और अल्बेंडाजोल की एक गोली खिलाई जा रही है। अल्बेंडाजोल की गोली लोगों को चबाकर खानी है। दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कोई दवा नहीं खिलायी जा रही है। साथ ही गंभीर रूप से बीमार लोगों को भी दवा नहीं खिलाई जा रही है। दवा सेवन के बाद किसी तरह के सामान्य साइड इफ़ेक्ट से घबराने की जरूरत नहीं है। अमूमन जिनके अंदर फाइलेरिया के परजीवी होते हैं, उनमें ही साइड इफ़ेक्ट देखने को मिलते हैं। साइड इफ़ेक्ट सामान्य होते हैं, जो प्राथमिक उपचार से ठीक भी हो जाते हैं।

क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है फाइलेरियाः जिला मलेरिया पदाधिकारी (डीएमओ) ने बताया कि कि फाइलेरिया क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। क्यूलेक्स मच्छर घरों के दूषित स्थलों, छतों और आसपास लगे हुए पानी में पाया जाता है। इससे बचाव के लिए लोग घरों के आसपास गंदगी और पानी नहीं जमने देना चाहिए। घर के आसपास साफ-सफाई रखना चाहिए। बुखार आना, शरीर में लाल धब्बे या दाग होना, शरीर के किसी भी अंग में सूजन होना इसके लक्षण हैं। ज्यादातर इस बीमारी से ग्रसित लोगों के पांव या हाइड्रोसिल में सूजन हो जाती है। लोग इस बीमारी से सुरक्षित रह सकें इसके लिए सरकार हर साल में एक बार एमडीए अभियान चलाती है। इससे लोगों को जरूरी दवा उपलब्ध होती है, जो इस बीमारी को रोकने में सहायक होती है।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस और अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस की पूर्व संध्या पर यूनिसेफ के वैश्विक रिपोर्ट- ‘द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रेन 2021: ऑन माई माइंड: प्रोमोटिंग, प्रोटेक्टिंग एंड केयरिंग फ़ॉर चिल्ड्रेन्स मेंटल हेल्थ “ जारी

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कोविड-19 महामारी ने बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर भारी प्रभाव डाला है: यूनिसेफ वैश्विक रिपोर्ट

बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं पर चुप्पी तोडना ज़रूरी; समय रहते मानसिक रोग की पहचान, काउंसलिंग, उपचार व डाटा संकलन पर निवेश को देनी होगी प्रथमिकता: नफीसा बिंते शफीक

माँ-बाप प्यार तो करते हैं पर बच्चों के मन की बात समझ नहीं पाते : बच्चे बोले

पटना, 11 अक्टूबर 2021: बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर कोविड-19 महामारी के प्रभाव को लेकर व्यापक चिंता है। लिंग मानदंड लड़कियों और लड़कों दोनों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। अधिक असुरक्षित होने के कारण, लड़कियों को काम, शिक्षा और परिवार के साथ-साथ वैवाहिक हिंसा के जोखिम के बारे में प्रतिबंधात्मक रूढ़ियों का सामना करना पड़ सकता है, यूनिसेफ की प्रमुख वैश्विक रिपोर्ट – ‘द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रेन 2021: ऑन माई माइंड: प्रोमोटिंग, प्रोटेक्टिंग एंड केयरिंग फ़ॉर चिल्ड्रेन्स मेंटल हेल्थ’ में ये चेतावनी दी गई है।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस और अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस की पूर्व संध्या पर यूनिसेफ के वैश्विक रिपोर्ट को आज एक ऑनलाइन कार्यक्रम में सुश्री नफीसा बिंते शफीक, राज्य प्रमुख, यूनिसेफ बिहार, बिहार सरकार के अधिकारीगण और किशोर-किशोरियों द्वारा जारी किया गया। संजय कुमार सिंह, कार्यकारी निदेशक, राज्य स्वास्थ्य सोसाइटी, बिहार सरकार, राज कुमार, निदेशक, समाज कल्याण विभाग, केशवेंद्र कुमार, अतिरिक्त कार्यकारी निदेशक, एसएचएसबी, डॉ. विजय प्रकाश राय, राज्य कार्यक्रम अधिकारी, बाल स्वास्थ्य, एसएचएसबी, डॉ. राजेश कुमार, प्रोफेसर एवं प्रमुख, मनोरोग विभाग, इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना, शिवेंद्र पांडेय, कार्यक्रम प्रबंधक, यूनिसेफ बिहार, अभिलाषा झा, स्टेट रिसोर्स पर्सन, बिहार शिक्षा परियोजना परिषद और यूनिसेफ के वरिष्ठ अधिकारी रिलीज के दौरान बिहार मौजूद रहे।

एक विशेष सत्र में 4 किशोरों ने मानसिक स्वास्थ्य से निपटने के अपने व्यक्तिगत अनुभव किए साझा

अपनी पीड़ा के बारे में बताते हुए 15 वर्षीय प्रभा ने कहा कि मेरे पिता ने मेरी इच्छाओं की परवाह नहीं की। वे मेरी शादी करना चाहता थे। मैंने ऐसा करने से इनकार कर दिया और अपनी पढ़ाई के लिए घर छोड़ दिया। मेरे जैसे छोटे गाँव की लड़की के लिए ऐसा निर्णय लेना बहुत कठिन था और मुझे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लेकिन किलकारी बाल भवन के सहयोग से न केवल मैं अपने मानसि क कष्ट को दूर कर पाई बल्कि आत्मनिर्भर भी हो सकी। माता-पिता को अपने बच्चों की बात सुननी चाहिए और उनकी भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।

कोरोना पॉजिटिव होने के दौरान अपने तनावपूर्ण दिनों को याद करते हुए 17 वर्षीय सुदीक्षा ने कहा कि लंबे समय तक घर में रहने और मीडिया में कोविड-19 से होने वाली मौतों की ख़बरों ने मुझे बहुत विचलित कर दिया था। मैं योग करके और कुछ अच्छी फिल्में देखकर इस कठिन समय से निकल पाई। मैं चाहती हूँ कि मानसिक समस्याओं से जूझ रहे बच्चों के लिए मजबूत परामर्श तंत्र होना चाहिए।

18 साल की आरती ने मानसिक स्वास्थ्य को एक गंभीर मुद्दे के रूप में स्वीकार करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब मुझे कोविड की वजह से आइसोलेट रखा गया था तो मुझे काफी मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ा था। दवाओं और उचित देखभाल के साथ मुझे मानसिक सहारा भी मिला, जिससे मैं जल्दी ठीक हो पाई।

गया के बाल गृह में रहने वाले एक 16 वर्षीय बच्चे ने जीवन में परिवार के महत्व के बारे में अपनी बातें रखीं। उसने कहा कि मुझे बाल गृह में सभी प्रकार की सहायता मिल रही है, लेकिन कोविड महामारी के दौरान मुझे अपने परिवार की बहुत याद किया।

राज्य भर के विभिन्न बाल गृहों में रहने वाली 4 लड़कियों ने भी शिक्षा, खेल की सुविधा और सरकार से अन्य सहायता जैसी अपनी मांगों को संक्षेप में रखा।

अपने संबोधन में, सुश्री नफीसा बिंते शफीक, राज्य प्रमुख, यूनिसेफ बिहार ने स्वास्थ्य बजट में मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवंटन बढ़ाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में इंडियन जर्नल ऑफ साइकेट्री की रिपोर्ट के अनुसार देश में कुल स्वास्थ्य बजट का केवल 0.05 फीसदी मानसिक स्वास्थ्य पर खर्च किया जाता है। इस संदर्भ में लैंगिक असमानता को दूर करना भी काफी महत्वपूर्ण है।

Key findings
यूनिसेफ और गैलप द्वारा 2021 की पहली छमाही में 21 देशों में कराए गए सर्वेक्षण के अनुसार भारत में 14 से 24 वर्ष की आयु के लगभग 14 प्रतिशत बच्चे युवा अकसर मायूस, उदास और चीजों में रूचि कम होना महसूस करते हैं।
कोविड19 महामारी से पहले भी भारत में पचास मिलियन बच्चे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के शिकार थे। जिसमें 80-90 प्रतिशत बच्चों को किसी तरह की सहायता नहीं प्राप्त हुई (इंडियन जर्नल ऑफ सायक्रायट्री 2019) नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो 2018-19 के अनुसार भारत में प्रत्येक एक घंटे में एक छात्र आत्महत्या करता है, जबकि प्रतिदिन 28 ऐसे ही छात्रों की आत्महत्या की सूचना प्राप्त होती है।
मानसिक स्वास्थ्य परेशानी की वजह से भारत में वर्ष 2012-2030 के अंतराल में अनुमानित यूएसडी 1.03 ट्रिलियन की आर्थिक क्षति का अनुमान है। (विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार)
बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा पर निवेश करने की व्यापक मांग के बावजूद मानसिक स्वास्थ्य निवेश नगण्य या न के बराबर है। भारत में कुल वार्षिक स्वास्थ्य बजट का केवल 0.05 प्रतिशत मानसिक स्वास्थ्य पर खर्च किया गया। (इंडियन जर्नल ऑफ सायक्रायट्री 2019
आगे उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित विश्वसनीय आंकड़ों का अभाव भी एक बड़ी चुनौती है। 2015-16 और 2018-19 में पापुलेशन काउंसिल द्वारा बिहार और उत्तर प्रदेश में 10-19 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों के बीच किए गए अध्ययन “अंडरस्टैंडिंग द लाइवस ऑफ एडोलैसैंट्स एंड यंग एडल्ट्स (उदय)” का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बिहार के 4,578 उत्तरदाताओं (1531 लड़के, 3047 लड़कियां) में से 25.6 फीसदी लड़कियों और 7.8 फीसदी लड़कों ने आत्मघाती व्यवहार की जानकारी दी। लड़कियों की कम उम्र में शादी से उनकी स्थिति और भी खराब हो जाती है।

आगे उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित विश्वसनीय आंकड़ों का अभाव भी एक बड़ी चुनौती है। यूनिसेफ बच्चों और किशोरों के साथ-साथ देखभाल करने वालों के मानसिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए बिहार सरकार और सभी हितधारकों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही, निवेश, प्रोग्रामिंग और नीतियों में मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।

राज कुमार, निदेशक, समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार ने कहा कि हमने NIMHANS और यूनिसेफ़ के सहयोग से एक मनो-सामाजिक मॉड्यूल विकसित किया है। प्रत्येक बाल गृह में एक परामर्शदाता की नियुक्ति की गई है और उन्हें समय-समय पर क्षमता वर्धन प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है। अब तक, बाल गृह में रहने वाले 3,000 से अधिक बच्चों को मनो-सामाजिक सहायता प्रदान की गई है। हालांकि, अभी भी कई और चीजें करने की जरूरत है। हम स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और यूनिसेफ की मदद से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान शुरू करने की योजना बना रहे हैं। हम कमजोर बच्चों के लिए नियुक्त किए गए मनोवैज्ञानिकों के कार्यकाल को भी बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।

केशवेंद्र कुमार, अतिरिक्त कार्यकारी निदेशक, स्टेट हेल्थ सोसाइटी बिहार ने उन बच्चों को हर संभव मानसिक सहायता देने की आवश्यकता को रेखांकित किया, जिन्होंने कोविड के कारण अपने माता-पिता को खो दिया है। बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों में शामिल करना बहुत मददगार हो सकता है। आयुष्मान भारत योजना के तहत स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम स्कूल स्तर पर बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को दूर करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।

आईजीआईएमएस के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ राजेश कुमार ने कहा कि बच्चों और किशोरों में अलग-अलग मनोरोग होते हैं जो ज्यादातर 14 साल की उम्र में शुरू होते हैं। बच्चे विभिन्न प्रकार के मानसिक समस्याओं का सामना करते हैं और चुपचाप झेलने को मजबूर होते हैं। चूँकि, वे बोल नहीं सकते हैं, उनका इलाज बहुत मुश्किल हो जाता है और आम तौर पर इसमें देरी भी हो जाती है। इसलिए, माता-पिता, शिक्षकों और मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की ओर से अत्यधिक धैर्य की आवश्यकता है। कारगर इलाज के लिए सबसे पहले मानसिक बीमारी को स्वीकार करना ज़रूरी है, न कि लापरवाही जो कि माता-पिता और अभिभावकों की सामान्य प्रवृत्ति है।

अभिलाषा झा ने कहा कि 17 महीने की स्कूल बंदी और घर में कैद होने के कारण बच्चे बहुत परेशान पाए गए। शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा मनोदर्पण कार्यक्रम के तहत जारी किया गया टोल फ्री नंबर बच्चों के मानसिक मुद्दों को दूर करने में बहुत मददगार साबित हुआ है। हाल ही में, शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों में दो अनूठी पहल – हैप्पीनेस ज़ोन और लेट्स टॉक! की शुरुआत की गई हैं जिससे बच्चों को काफी मदद मिलेगी। शिवेंद्र पांडेय, कार्यक्रम प्रबंधक, यूनिसेफ बिहार ने कहा कि बिहार में बच्चे महामारी से उत्पन्न जोखिमों और प्रतिबंधों की वजह से एक चुनौतीपूर्ण समय से गुजर रहे हैं।

वेबिनार का संचालन यूनिसेफ बिहार की संचार विशेषज्ञ निपुण गुप्ता ने किया। कहा हमें मानसिक स्वास्थ्य के बारे में खुल कर बात करने और इसके समुचित उपचार की जरूरत है ताकि बच्चों का जीवन बेहतर किया जा सके।

इस कार्यक्रम में मीडियाकर्मियों, छात्रों, सामजिक संगठनों और शिक्षाविदों सहित लगभग 200 लोगों ने भाग लिया।

विश्व बालिका दिवस विशेष: नन्हीं तितलियों को आसमान में स्वच्छंद उड़ने की कई ख्वाहिशें

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• सहयोगी संस्था ने बालिकाओं से किए संवाद
• लगभग 500 बालिकाओं ने रखी अपनी राय
• लिंग आधारित भेदभाव, घरेलू हिंसा एवं शिक्षा पर खुल कर हुयी चर्चा

पटना/ 11, अक्टूबर: नन्हीं आँखों में आसामन छूने की कई चाहतें. ख़ुद को साबित करने का हौसला. समाज में पुरुषों की तरह हर क्षेत्र में समान अधिकार एवं भागीदारी का अवसर पाने की सोच. स्नेह एवं प्रेम की जिम्मेदारियों के साथ अपने अधिकार की हसरत. ये सभी चीजें एक बालिका के मन में जरुर होती है. ऐसे भी देश की प्रगति एवं विकास की पटकथा सिर्फ पुरुषों की भागीदारी से संभव भी नहीं है. लेकिन सत्य और व्यवहारिकता में अभी भी एक बड़ी खाई बनी हुयी है. महिलाएं समाज के लिए इतना महत्वपूर्ण होने के बाद भी उन्हें अपनी उपयोगिता साबित करनी पड़ती है. ऐसी चुनौतियों के प्रति समाज को जागरूक करने के लिए प्रतिवर्ष 11 अक्टूबर को विश्व बालिका दिवस मनाया जाता है. पटना के दानापुर एवं बिहटा प्रखंड में महिलाओं की अधिकार एवं उनके स्वास्थ्य के लिए कार्य करने वाली सहयोगी संस्था ने विश्व बालिका दिवस पर कई बालिकाओं से बात की एवं उनकी राय जानने की कोशिश भी की. इस दौरान बालिकाओं ने लिंग आधारित भेदभाव, घरेलू हिंसा, बालिकाओं के लिए शिक्षा की महत्ता एवं वर्तमान सामाजिक परिदृश्य में महिलाओं की भूमिका जैसे ज्वलंत मुद्दे पर परिचर्चा हुयी.

500 से अधिक बालिकाओं ने किया प्रतिभाग:

सहयोगी संस्था की कार्यकारी निदेशक रजनी ने बताया कि विश्व बालिका दिवस के मौके पर उनकी संस्था ने पटना के दानापुर एवं बिहटा प्रखंड के लगभग 20 गाँवों की 500 से अधिक बालिकाओं के साथ वार्तालाप किया. विश्व बालिका दिवस होने के कारण बातचीत का मुद्दा समाज एवं परिवार से उनकी उम्मीदों , भविष्य में उनकी योजना एवं वर्तमान समय में बालिकाओं एवं महिलाओं की सक्रियता पर अधिक था. उन्होंने बताया कि परिचर्चा के दौरान कई रोचक एवं जरुरी बातें बाहर निकल कर आई. कुछ बालिकाओं ने इस बात को स्वीकारा कि पहले की तुलना में महिलाओं की समाज में सक्रियता बढ़ी है. साथ ही उनकी भूमिका को लोग अधिक तरजीह भी देने लगे हैं. जबकि कई बालिकाओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि अभी भी उनके परिवार एवं समाज में लड़कों की तुलना में उन्हें कम तरजीह मिलती है. शिक्षा में भी लड़कियों की तुलना में लड़कों को अधिक आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त होता है.

सामाजिक कुरीतियों पर भी बालिकाओं ने रखे अपने विचार:

रजनी ने बताया कि परिचर्चा के दौरान कई लड़कियों ने लिंग आधारित भेदभाव के साथ घरेलू हिंसा जैसे गंभीर मुद्दे पर भी अपने विचार रखे. उन्होंने बताया कि कई बालिकाओं ने घरेलू हिंसा को समाज के लिए अभिशाप बताया. इसके लिए पुरुषों को अधिक संवेदनशील होने की बात कही. साथ ही बताया कि आज के समय में महिलाओं को भी अधिक सशक्त होने की जरूरत है. उन्हें अपनी परिवार की जिम्मेदारियों के निर्वहन करते हुए अपने अधिकार को भी समझने की जरूरत है. वहीं कुछ बालिकाओं ने पुरुषों की गंदी मानसिकता पर भी बात की. उनका कहना था कि कई जगह लड़कियों एवं महिलाओं के साथ छेड़-छाड़ एवं बलात्कार की घटना सुनने को मिलती है. जिसमें पुरुषों की कुत्सित मानसिकता का अंदाजा लगता है. ये इसलिए भी होता है क्योंकि पुरुष खुद को अधिक शक्तिशाली एवं ख़ुद को महिलाओं की तुलना में अधिक सक्षम महसूस करते हैं. इस सोच पर सभी पुरुषों को काम करने की जरूरत है.

बेहतर समझना है सीता को, तो मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल 2021 है आपके लिए

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दरभंगा में 12 से 15 दिसंबर तक हो रहा है मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल 2021

नई दिल्ली। मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल, सेंटर फॉर स्टडीज ऑफ ट्रेडिशन एंड सिस्टम, दिल्ली द्वारा आयोजित किया जाने वाला एक प्रमुख कार्यक्रम है। वर्ष 2018, 2019 और 2020 में मिथिला (उत्तरी बिहार) की भूमि पर लगातार तीन साहित्य उत्सवों का सफलता पूर्वक आयोजन किया जा चुका है। लिटरेचर फेस्टिवल आयोजित करने के इसी क्रम को जारी रखते हुए सीएसटीएस चौथे मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल 2021 का आयोजन करने जा रहा है। इस वर्ष लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन 12 से 15 दिसंबर के बीच कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय (केएसडीएसयू)के परिसर में किया जाएगा।
सीएसटीएस की डॉ सविता झा खान ने बताया कि मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल 2021 में मिथिला के सामाजिक आर्थिक, सांस्कृतिक और परंपराओं का प्रतिनिधित्व करने वाले कई क्षेत्रों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। अन्य शब्दों में लिटरेचर फेस्टिवल पूरी तरह से स्थानीय लोगों का उत्सव होगा। पिछले प्रयासों को जारी रखते हुए इस वर्ष एमएलएफ (मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल) शहरीकरण के सामाजिक व आर्थिक संरचना के पीछे दुर्बल जर्जर ग्रामीण संवेदनशीलता को सामने लाने का प्रयास करेगा। इसके अलावा लिटरेचर फेस्टिवल 2021 के माध्यम से 21 ज्ञान परंपराओं के कई आयामों, पांडुलिपियों को संग्रहित करने, विद्वानों के कार्यों का प्रकाशन, ग्रामीण उत्थान, मैथिली भाषा व साहित्य को बढ़ावा देने, महिला सशक्तिकरण, विरासत संरक्षण तथा स्थानीय कला को बढ़ावा देने के लिए एक मंच प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त एमएसएफ के माध्यम से भारत- नेपाल सांस्कृतिक, शिल्प और पर्यावरण संबंधी मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में वक्ताओं ने कहा कि
हर साल मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल में मिथिला की संस्कृति, आध्यात्मिक और दार्शनिक परंपराओं का प्रतिनिधित्व करने वाले कार्यक्रमों को प्रमुखता से शामिल किया जाता है। इस साल मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल का मुख्य आर्कषण मिथिला की बेटी, “सीता” का विभिन्न रूपों में कला के विभिन्न माध्यमों से उत्सव होगा। इसी क्रम में एक अंर्तराष्ट्रीय प्रदर्शनी वैदही का प्रस्तुतिकरण किया जाएगा, जिसमें सीता के 150 से अधिक अवतारों को दर्शाती पेंटिंग को शामिल किया जाएगा। मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल में अंर्तराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त जानी मानी भरतनाट्यम कलाकार वीना सी शेषाद्रि जया जानकी पर अपनी प्रस्तुती देगीं। इसके अतिरिक्त प्रसिद्ध अभिनेत्री कनुप्रिया पंडित, पद्मश्री उषा किरण खान द्वारा लिखित और पद्मश्री रामगोपाल बजार द्वारा निर्देशित नाटक “जाये से पहिने, सिया पिया कथा”, में अभिनय करेगीं। इसके अतिरिक्त एक अन्य कार्यक्रम “एकवस्त्र” का भी आयोजन किया जाएगा, जो कि स्थानीय बुनकरों के सामूहिक योगदान पर आधारित है।
युवाओं के लिए भी इस वर्ष का मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल काफी अहम होगा, क्योंकि इस साल युवा साहित्य के साथ साथ, व्यवसाय के क्षेत्र में पहल करने वाले युवाओं को स्टार्टअप से जुड़े अपने विचारों को साझा करने का मंच दिया जाएगा। इसके अलावा फेस्टिवल के चौथे संस्करण में फिल्म निर्माण कार्यशाला “अरिपन” का आयोजन किया जाएगा, महिलाओं के लिए चित्रकला आयोजन, फोटोग्राफी, पेंटिंग वर्कशॉप, भाषा आधारित वर्कशॉप, स्थानीय थियेटर मंचन स्त्री दलन, राशनचौकी आदि साहित्य से जुड़े शैक्षणिक सत्र के दिलचस्प कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। भाषा, शिक्षा, उद्योग, दर्शन और पर्यावरण सहित मैथिली साहित्य में गांधी पर कार्यशाला के साथ दरभंगा के सांस्कृतिक परिदृश्य को शामिल किया जाएगा, जिसमें दरभंगा के अमता घराने द्वारा ध्रुपद प्रदर्शन, पारंपरिक बग्गी राइड, लोक संगीत, नेपाली सांस्कृतिक कार्यक्रम, बालरंग मंच, भारतीय शास्त्रीय संगीत आदि बहुत कुछ एक मंच के नीचे समेटा जाएगा।
मिथिला की भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने में अमरेश पाठक के बहुमूल्य योगदान को याद रखते हुए मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल 2020 से अमरेश पाठक स्मृति सम्मान की शुरूआत की गई, इस पुरस्कार में प्रशंसा प्रमाणपत्र के साथ 25000 रुपए की नकद धनराशि दी जाती है। पहला अमरेश पाठक स्मृति सम्मान वर्ष 2020 में श्री रामजी पोदार को उनकी असाधारण सात दशकों की समाज सेवा के लिए दिया गया था। इस वर्ष भी यह सम्मान दिया जाएगा।

फाइलेरिया मुक्त मुंगेर बनाने को साल में एक बार जरूर खाएं अल्बेंडाजोल और डीईसी की गोली : सीता देवी

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– पिछले 10 वर्षों से फाइलेरिया रोगी सीता देवी ने लोगों से की अपील
– डीएम ने सीता देवी को ही फाइलेरिया की दवा खिलाकर की थी अभियान की शुरुआत

मुंगेर-
मुंगेर नगर निगम वार्ड संख्या 13 के गुलजार पोखर मुहल्ले की 48 वर्षीय सीता देवी पिछले 10 वर्षों से फाइलेरिया की रोगी हैं | उन्होंने मुंगेर वासियों से अपील करते कहा कि सभी लोग साल में कम से कम एक बार जरूर फाइलेरिया की दवा के रूप में अल्बेंडाजोल की गोली को चबाकर और डीईसी टैबलेट को पानी के साथ निगल कर अवश्य खाएं| तभी मुंगेर जिले से फाइलेरिया का उन्मूलन संभव हो सकेगा। मालूम हो कि विगत 20 सितंबर को मुंगेर के डीएम नवीन कुमार ने सीता देवी को ही फाइलेरिया की दवा के रूप में अल्बेंडाजोल और डीईसी की गोली खिलाकर एमडीए अभियान की शुरुआत की थी।
फाइलेरिया से बचने को सभी लोगों को अल्बेंडाजोल और डीईसी की दवा खानी चाहिए।
सीता देवी ने बताया कि पिछले 10 वर्षों से मेरे बाएं पैर में फाइलेरिया है। मैं लगातार सदर अस्पताल में आकर फाइलेरिया का इलाज करवा रही हूँ। सदर अस्पताल से मुझे एक सेल्फ सेफ्टी किट दिया गया है जिसमें एक टब, एक मग, तौलिया, बैंडेज, साफ करने और लगाने की दवा के अलावा खाने के लिए भी दवा दी गयी है। उन्होंने बताया कि मैं बहुत ही गरीब परिवार से हूँ| मेरे पति फुटपाथ पर घड़ी की दुकान चलाते हैं। मुझ जैसे गरीबों के सदर अस्पताल में उपलब्ध कराई जा रही दवा और सुविधा ही एक मात्र सहारा है। जैसा कि सदर अस्पताल मुंगेर के डॉक्टर ने बताया है और जहां तक मेरी समझ है फाइलेरिया जैसी बीमारी से बचने के सभी लोगों को फाइलेरिया की दवा के रूप में अल्बेंडाजोल और डीईसी की दवा खानी चाहिए।
घर- घर जाकर सभी लोगों को फाइलेरिया की दवा खिलाने में मदद कर रही हैं
इसके लिए मैं भी अपने स्तर से अपने आसपास रहने वाले सभी लोगों को यह बता रही हूँ कि अभी बिहार सरकार के द्वारा मुंगेर जिला भर में सभी लोगों को फाइलेरिया की दवा अपने सामने खिलाने के लिए एमडीए अभियान चल रहा है। मुहल्ले में दवा खिलाने के लिए आशा दीदी के आने पर मैं उनके साथ होकर घर- घर जाकर सभी लोगों को फाइलेरिया की दवा खिलाने में मदद कर रही हूँ। मैं यह काफी भी नहीं चाहती हूं कि हाथी पांव की वजह से जो परेशानी मुझे उठानी पर रही है वो परेशानी और भी किसी लोग को हो।
फाइलेरिया की दवा खाने के बाद किसी प्रकार को कोई साइड इफेक्ट नहीं होता
जिला वेक्टर बोर्न डिजीज सलाहकार पंकज कुमार प्रणव ने बताया कि एमडीए अभियान के दूसरे चरण में जिला मुख्यालय सहित सभी प्रखण्डों में आशा कार्यकर्ता के सहयोग से घर-घर जाकर लोगों को फाइलेरिया की दवा खिलाई जा रही है। इसलिए 2 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोग उनके पास स्वास्थ्य विभाग की टीम के पहुंचने के बाद उनको पूरा सहयोग करते हुए उनके सामने ही अल्बेंडाजोल की गोली को चबाकर और डीईसी की गोली को पानी के साथ निगल का खाएं। उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाएं और किसी गंभीर रोग से ग्रसित लोग फाइलेरिया की दवा खाने से परहेज बरतें, लेकिन बच्चों को स्तनपान कराने वाली माताएं अवश्य फाइलेरिया की दवा का सेवन करें। लोगों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि वैसे तो फाइलेरिया की दवा खाने के बाद किसी प्रकार को कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है फिर भी दवा खाने के बाद किसी को परेशानी हो तो वो अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर डॉक्टर से सलाह लें।

जिले के गाँव-गाँव में शिविर आयोजित कर लोगों दी जा रही वैक्सीन की पहली एवं दूसरी डोज

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– सभी प्रखंडों में चल रहा अभियान, कोविड प्रोटोकॉल के पालन के साथ दी जा रही है वैक्सीन
– लगातार चल रहा है वैक्सीनेशन और जाँच अभियान

खगड़िया-

जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने के लिए जिले में लगातार वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। जिसे और तेज गति देने के लिए पोलियो सुपरवाइजर की सहभागिता के साथ जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धारित तिथि के अनुसार चयनित स्थलों पर वैक्सीनेशन शिविर आयोजित कर लोगों को वैक्सीन दी जा रही है। ताकि एक भी व्यक्ति वैक्सीन से वंचित नहीं रहें और जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो। इसको लेकर जिले में बनाए गए सभी सेशन साइटों पर पहली एवं दूसरी दोनों डोज की वैक्सीन दी जा रही है। ताकि पहला डोज ले चुके व्यक्ति को निर्धारित समय पर दूसरा डोज भी दिया जा सके और पूरा डोज लेने वाले लोगों की संख्या को गति मिल सके।
– कोविड प्रोटोकॉल के पालन के साथ लगातार शिविर का आयोजन कर दी जा रही है वैक्सीन :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, निर्धारित तिथि के अनुसार लगातार चयनित जगहों पर वैक्सीनेशन शिविर का आयोजन किया जा रहा है। सभी जगहों पर जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने के मिशन के तहत लोगों को कोविड प्रोटोकॉल का पालन के साथ वैक्सीन दी जा रही है। इस दौरान लोगों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो, इस बात का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। वहीं, उन्होंने बताया, सभी सेशन साइटों पर पोलियो सुपरवाइजर के सहयोग से वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है।
– जिले के सभी प्रखंडों में शिविर आयोजित कर लोगों को दी जा रही है वैक्सीन :
केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद ने बताया, जिले में चल रहे वैक्सीनेशन अभियान को और तेज गति देने के लिए जिले के सभी प्रखंडों में वैक्सीनेशन शिविर आयोजित कर लोगों को वैक्सीन दी जा रही है। पूरे जिले में तकरीबन 200 सेशन साइटों पर वैक्सीनेशन शिविर का आयोजन किया जा रहा है। वहीं, उन्होंने बताया, पोलियो सुपरवाइजर के सहयोग से पोलियो की ही तर्ज पर वैक्सीनेशन का कार्य किया जाएगा। इससे ना सिर्फ अभियान को गति मिलेगी। बल्कि, शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन भी सुनिश्चित होगा।
– पोलियो सुपरवाइजर के नेतृत्व में आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को वैक्सीनेशन के लिए कर रहीं हैं प्रेरित :
वैक्सीनेशन अभियान को और तेज गति देने के लिए पोलियो सुपरवाइजर के नेतृत्व में संबंधित क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता घर-घर दस्तक दे रही हैं और लोगों को नजदीकी वैक्सीनेशन शिविर स्थल की जानकारी दे रही हैं। साथ ही लोगों को इस महामारी से बचाव के लिए वैक्सीनेशन के प्रति प्रेरित भी कर रही हैं।

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
– सभी जगह प्रोटोकॉल का पालन का पालन करें।

कोविड-19 एवं वायरल फीवर को लेकर बैठक,विशेषज्ञों ने दी बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन की जानकारी

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– बैठक में जिले के चिकित्सक, नर्स एवं पारा मेडिकल कर्मी हुए ई-ग्राउंड राउंड (वेबिनाॅर) में शामिल
-कोविड-19 एवं वायरल बुखार (फीवर) से निपटने एवं इसपर रोकथाम की भी विस्तार पूर्वक जानकारी दी गई
-लोगों को मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवा :सिविल सर्जन

लखीसराय-
शुक्रवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) पटना द्वारा कोविड-19 एवं वायरल बुखार के बेहतर प्रबंधन के विषय पर जूम एप के माध्यम से ई-ग्राउंड राउंड (वेबिनाॅर) एक ऑनलाइन मीटिंग आयोजित की गई। जिसमें राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार के निर्देशानुसार जिले के सभी चिकित्सक नर्स एवं पारा मेडिकल कर्मी शामिल हुए। मीटिंग में मौजूद विशेषज्ञों द्वारा कोविड-19 एवं वायरल फीवर के बेहतर प्रबंधन के लिए विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही इससे निपटने एवं इसपर रोकथाम की भी विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। ताकि ऑनलाइन मीटिंग में शामिल सभी प्रतिभागियों का गुणवत्ता वर्धन हो सके और स्वास्थ्य प्रबंधन की व्यवस्था मजबूत हो सके। यह बैठक शुक्रवार की दोपहर 12 : 30 बजे से 02 बजे तक यानी डेढ़ घंटे हुई।
– बैठक में बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन सुनिश्चित करने की दी गई जानकारी :
सिविल सर्जन डॉ देवेन्द्र चौधरी ने बताया, यह वेबिनाॅर मीटिंग राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक के निर्देशानुसार हुई। जिसमें शामिल सभी प्रतिभागियों को बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन सुनिश्चित करने की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही कोविड-19 एवं वायरल बुखार (फीवर) से निपटने एवं इसपर रोकथाम की भी विस्तार पूर्वक जानकारी दी गई। ताकि स्वास्थ्य सुविधा मजबूत हो सके और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिल सके।
– गुणवत्ता वर्धन होगा मजबूत, लोगों को मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवा :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने बताया, इस तरह की मीटिंग से सभी प्रतिभागियों का गुणवत्ता वर्धन मजबूत होगा और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी। साथ ही सभी प्रतिभागी भी सुविधाजनक तरीके से कार्य करने में खुद को सक्षम महसूस करेंगे। जिससे स्वास्थ्य सुविधा और मजबूत होगी और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना सुनिश्चित होगा।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।