चुनौतियों और विरोधों का सामना करने के बाद भी कर्तव्य पथ से पीछे नहीं मुड़ी आशा फैसिलिटेटर इंदु कुमारी

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– चौथम प्रखंड के मध्य बोरनी पंचायत की रहने वाली हैं इंदु कुमारी
– घर-घर जाकर लोगों को कोविड-19 वैक्सीनेशन एवं जाँच के लिए कर रही हैं प्रेरित

खगड़िया-

जिले में चल रहे कोविड-19 वैक्सीनेशन एवं जाँच अभियान को पूर्ण रूप से सफल बनाने को लेकर स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ताओं का भी अहम योगदान रहा है। आशा कार्यकर्ताओं को भी लोगों के वैक्सीनेशन एवं जाँच के लिए प्रेरित करने तथा समाज में फैली अफवाहों को दूर करने में लोगों के काफी विरोधों का सामना करना पड़ा है। किन्तु, बाबजूद इसके अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की तरह आशा कार्यकर्ता भी अपने कर्तव्य पथ से एक कदम पीछे नहीं हटी। बल्कि, सकारात्मक उम्मीद के साथ अभियान को सफल करने में जुटी रही। जिसका नतीजा भी सकारात्मक रहा। ऐसी ही आशा कार्यकर्ताओं में चौथम सीएचसी में कार्यरत चौथम प्रखंड के मध्य बोरनी पंचायत की आशा फैसिलिटेटर इंदु कुमारी का पूरे प्रखंड में नाम शुमार है। इंदु, ना सिर्फ लोगों को वैक्सीन एवं जाँच कराने के लिए जागरूक करने में सफल रही बल्कि, लोगों को अफवाहों से भी दूर करने में सफल रही।

– विरोधों की कभी नहीं की परवाह, अपने कर्तव्य पथ पर सकारात्मक उम्मीद के साथ चलती रही :
आशा फैसिलिटेटर इंदु कुमारी ने बताया, शुरुआती दौर में यानी जब प्रखंड में वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत हुई थी तब लोगों को वैक्सीनेशन के लिए जागरूक करने के दौरान विरोधों का सामना करना पड़ा था। । किन्तु, ना ही कभी विरोधों की परवाह की और ना ही लोगों से उलझी। तमाम विरोधों को झेलते हुए शालीनता से कठिन स्थिति में भी सरलता के साथ अपने कर्तव्य पथ पर डटी रही। जिसका परिणाम आज यह है कि अब मैं लोगों के घर नहीं जाती हूँ बल्कि, लोग मेरे घर आकर पूछते हैं कि वैक्सीन कब और कहाँ पड़ेगी । जो मेरे लिए रे गर्व की बात है।
– बाढ़ प्रभावित क्षेत्र होने के बाबजूद भी अपने कर्तव्य पथ से पीछे नहीं हटी इंदु :
केयर इंडिया के प्रखंड प्रबंधक करण कुमार ने बताया, जिस क्षेत्र में इंदु कार्यरत है, वह क्षेत्र वर्तमान में पूर्ण रूप से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है। इसके बाबजूद कभी भी वह अपने कर्तव्य पथ से पीछे नहीं हटी और ना ही कभी थकी। बल्कि, पूरी निष्ठा और सकारात्मक उम्मीद के साथ बाढ़ की तबाही के बीच भी नाव समेत अन्य साधनों के माध्यम से गाँव-गाँव पहुँच कर लोगों को वैक्सीनेशन एवं जाँच के लिए प्रेरित करने में जुटी हैं । इनका शुरुआती दौर से वैक्सीनेशन अभियान में काफी सराहनीय कार्य रहा है। इन्होंने ना सिर्फ खुद बेहतर कार्य किया बल्कि, अपने क्षेत्र की अन्य आशा कार्यकर्ताओं को भी बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित किया ।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।

परिवार नियोजन को लेकर सामुदायिक बैठक, योग्य महिलाओं को किया गया जागरूक

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– लखीसराय के दुर्गी महाराज जी गली स्थित ऑगनबाड़ी केंद्र संख्या 58 पर बैठक
– लखीसराय पीएचसी द्वारा केयर इंडिया एवं सीफार के सहयोग से आयोजित की गई बैठक

लखीसराय-

परिवार नियोजन को लेकर लखीसराय के दुर्गी महाराज जी गली स्थित ऑगनबाड़ी केंद्र संख्या 58 पर एक सामुदायिक बैठक हुई । जिसमें संबंधित ऑगनबाड़ी क्षेत्र के पोषक क्षेत्र में आने वाले तमाम 0 से दो वर्ष के बच्चों की माँ समेत परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल हुए। यह बैठक लखीसराय पीएचसी द्वारा केयर इंडिया एवं सीफार के संयुक्त सहयोग से आयोजित की गई। जिसकी अध्यक्षता लखीसराय पीएचसी के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक निशांत राज एवं संचालन सीफार के मुंगेर डिवीजन के डिवीजनल कोर्डिनेटर श्याम त्रिपुरारी ने किया । बैठक के दौरान जागरूकता एवं सहभागिता पर विशेष बल दिया गया। जिसमें मौजूद महिलाओं को परिवार नियोजन की स्थाई एवं अस्थाई उपायों के साथ-साथ अन्य आवश्यक जानकारी दी गई। इसके अलावा परिवार नियोजन को अपनाने के लिए जागरूक किया गया। इस मौके पर केयर इंडिया के परिवार नियोजन योजना के जिला समन्वयक अनुराग गुंजन, प्रखंड समन्वयक सुधांशु कुमार, ऑगनबाड़ी सेविका रूबी कुमारी, स्वास्थ्य कर्मी गोलू कुमार आदि मौजूद थे।

– छोटा व खुशहाल परिवार के लिए परिवार नियोजन को अपनाने की जरूरत :-
लखीसराय पीएचसी के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक निशांत राज ने बताया, परिवार नियोजन को लेकर महिलाओं को जागरूक करने के दौरान उन्हें बताया गया कि छोटा व खुशहाल परिवार के लिए हर महिला को परिवार नियोजन को अपनाने की जरूरत है। क्योंकि, खुशहाल परिवार की जिंदगी जीने के लिए परिवार की संख्या सीमित होना बेहद जरूरी है। किन्तु, यह तभी संभव है जब परिवार नियोजन को अपनाया जाएगा। इसलिए, खुशहाल परिवार की जिंदगी जीने, बच्चों को उचित परवरिश व अच्छी शिक्षा देने के लिए परिवार नियोजन को अपनाना चाहिए।

– स्थाई एवं अस्थाई उपायों समेत अन्य वैकल्पिक व्यवस्था की दी गई जानकारी :-
केयर इंडिया के परिवार नियोजन योजना के जिला समन्वयक अनुराग गुंजन ने परिवार नियोजन योजना को लेकर लोगों को जागरूक करने के दौरान स्थाई एवं अस्थाई उपायों के साथ-साथ समय अंतराल की जानकारी दी । जिसमें बताया, अगर कोई महिला परिवार नियोजन बंध्याकरण के लिए इच्छुक है किन्तु, उनका शरीर बंध्याकरण के लिए सक्षम नहीं है तो ऐसी महिला अस्थाई उपायों को भी अपना सकती है । ऐसी महिलाओं के लिए सरकार द्वारा पीएचसी स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। जैसे कि कंडोम, छाया, अंतरा, काॅपर – टी समेत का अन्य वैकल्पिक व्यवस्था अपना सकती हैं।

– वैकल्पिक व्यवस्था भी है पूरी तरह सुरक्षित, नहीं है किसी प्रकार का साइड इफेक्ट :-
सीफार के डिवीजनल कोर्डिनेटर श्याम त्रिपुरारी ने बताया,
सरकार द्वारा परिवार विकास मिशन के तहत की गई वैकल्पिक व्यवस्था भी पूरी तरह सुरक्षित है। इसका किसी प्रकार का साइड इफेक्ट नहीं है। किन्तु, किसी भी प्रकार की वैकल्पिक व्यवस्था को अपनाने के पूर्व हर हाल में चिकित्सकों से सलाह लें और चिकित्सा परामर्श के बाद ही अपनाएं। ताकि अपनाने के बाद किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो।

– स्वस्थ माँ और मजबूत बच्चे के लिए तीन साल का अंतर जरूरी :-
केयर इंडिया के परिवार नियोजन योजना के प्रखंड समन्वयक सुधांशु कुमार ने बताया, मौजूद महिलाओं को बताया गया कि स्वस्थ माँ और मजबूत बच्चे के लिए बच्चे के जन्म में तीन साल का अंतर रखना जरूरी है। इसलिए, एक बच्चे के जन्म के तीन साल बाद दूसरे बच्चे की योजना बनाएं। इससे ना सिर्फ स्वस्थ माँ और मजबूत बच्चे होंगे बल्कि, जच्चा-बच्चा दोनों भविष्य में अनावश्यक शारीरिक परेशानी से दूर रहेंगे। दरअसल, तीन साल का अंतर रखने से माँ तो स्वस्थ रहती ही है साथ ही बच्चे की भी रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। जिससे दोनों संक्रामक समेत अन्य बीमारियों से भी दूर रहते हैं ।
– परिवार नियोजन अपनाने से मजबूत होगा शारीरिक और आर्थिक विकास :-
लखीसराय पीएचसी की बीसीएम नुसरत प्रवीण ने बताया, परिवार नियोजन योजना को अपनाने से ना सिर्फ छोटा और सीमित परिवार होगा, बल्कि, जहाँ महिलाओं का शारीरिक विकास होगा वहीं, परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। जिससे आप अपने बच्चों की को उचित परवरिश के साथ अच्छी शिक्षा हासिल कराने में समर्थ होंगे और बच्चे को उचित परवरिश का माहौल मिलेगा। साथ ही समाज में अच्छा संदेश जाएगा और सामाजिक स्तर पर लोग जागरूक होंगे। इसके अलावा जब बच्चों की उचित परवरिश मिलेगी तो वह मानसिक और शारीरिक रूप से भी मजबूत होगा।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– दो गज की शारीरिक दूरी का हमेशा पालन करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– साफ- सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।
– सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।
– ताजा और गर्म खाने का उपयोग करें।
– बासी और बाहरी खाना खाने से परहेज करें।

कोरोना का टीका लगवाकर खुद के साथ बच्चों को भी रखें सुरक्षित

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-दूसरी लहर खत्म होने के बावजूद कोरोना से सतर्क रहना जरूरी
तीसरी लहर में बच्चों को प्रभावित करने की जताई गई है संभावना

बांका, 4 सितंबर| कोरोना की दूसरी लहर लगभग समाप्त हो गई है। कभी-कभार इक्का-दुक्का ही मरीज मिल रहे हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि लोग लापरवाह हो जाएं। कोरोना से बचाव के लिए सावधानी बहुत जरूरी है। सबसे जरूरी है जल्द से जल्द कोरोना की टीका लगवाना। काफी संख्या में लोगों ने टीका लगवा लिया है, लेकिन अभी भी कुछ ऐसे लोग हैं जिन्होंने टीका नहीं लगवाया है। ऐसे लोग जल्द से जल्द टीका लगवा लें। कोरोना का टीका लगवाने से न सिर्फ खुद आप सुरक्षित होंगे, बल्कि आपके बच्चे भी सुरक्षित रहेंगे। कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के प्रभावित होने की संभावना जताई गई है। बच्चों के लिए अभी कोरोना का टीका नहीं आया है, उम्मीद है कि जल्ह ही आ जाएगा। इसलिए सतर्क रहना जरूरी है।
कोरोना का टीका लेने में देरी नहीं करें-
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि बड़ों के जरिये ही बच्चों में कोरोना का वायरस आने का खतरा रहता है। इसलिए घर के 18 साल से अधिक उम्र के सदस्यों को टीका लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। हालांकि कोरोना की तीसरी लहर अब तक आई नहीं है। अगर लोग सतर्क रहेंगे तो नहीं भी आ सकती है। अगर घर के सभी लोग टीका लिए रहेंगे तो कोरोना वायरस घर में प्रवेश नहीं करेगा और आपके साथ आपके बच्चे भी सुरक्षित रहेंगे। इसलिए कोरोना का टीका लेने में देरी नहीं करें।
850 लोगों को लगा कोरोना का टीकाः
उधर, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के तहत शनिवार को 850 लोगों को कोरोना का टीका लगाया गया। टीका लेने वालों में पहला और दूसरा, दोनों तरह के डोज लेने वाले लोग थे। टीका देने के बाद सभी लोगों को 30 मिनट की निगरानी में रखा गया। किसी तरह की समस्या नहीं होने पर सभी लोगों को घर जाने दिया गया। साथ ही कोरोना टीका की पहली डोज लेने वालों को समय पर आकर दूसरा डोज ले लेने की हिदायत दी गई। कोरोना टीका का दोनों डोज ले लेने के बाद ही टीकाकरण की प्रक्रिया पूरी होगी। इसलिए टीका की दूसरी डोज लेने में देरी नहीं करें।
325 लोगों की हुई जांचः
उधर, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के तहत शनिवार को 225 लोगों की कोरोना जांच की गई। साथ ही 100 लोगों के सैंपल आरटीपीसीआर जांच के लिए लिया गया। जांच में कोई भी व्यक्ति संक्रमित नहीं मिला, लेकिन सभी लोगों को सावधानी के साथ रहने के लिए कहा गया। घर से बाहर जाने पर मास्क लगाने और सामाजिक दूरी का पालन करने के लिए कहा गया। भीड़भाड़ से बचने और एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी बनाए रखने के लिए कहा गया। बाहर से घर आने पर आवश्यक तौर पर 20 सेकेंड तक हाथों की धुलाई करने के लिए कहा गया। ऐसा करते रहने से लोग कोरोना की चपेट में आने से बचे रहेंगे।

आंगनबाड़ी केंद्रों में लगाए गए सहजन के पौधे

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पोषण माह के तहत जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर हुए कार्यक्रम
गर्भवती महिलाओं के साथ बच्चों को भी पोषण के प्रति किया जागरूक
भागलपुर, 4 सितंबर
सितंबर महीने को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है। इसके तहत पूरे महीने हर दिन कोई न कोई कार्यक्रम कर गर्भवती महिलाएं,धात्रीमाताओं, बच्चों व अभिभावकों को सही पोषण के लिए जागरूक किया जा रहा है। शनिवार को पोषण माह के तहत जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में पौधरोपण कार्यक्रम किया गया। इसके तहत आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका ने अपने केंद्र पर सहजन के पौधे लगाए। इस दौरान मौके पर लाभुक भी मौजूद थे।
आईसीडीएस के जिला समन्वय अरविंद पांडेय ने बताया कि पोषण माह के तहत जिले के सभी केंद्रों और उसके तहत आने वाले क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। शुक्रवार को जागरूकता रैली और शपथ ग्रहण कार्यक्रम किया गया था. वहींशनिवार को आंगनबाड़ी केंद्रों में पौधरोपण किया गया। आंगनबाड़ी केंद्रों में पौधरोपण के दौरान क्षेत्र के लाभुक भी मौजूद रहे। इस दौरान सेविका और सहायिका ने लाभुकों को सहजन के पौधे लगाने से क्या-क्या फायदे होते हैं, इसकी जानकारी दी। किन-किन बीमारियों पर सहजन फायदेमंद होता है। इसके पत्ते से कौन-सी बीमारी पर नियंत्रण होता है और फल खाने से कोन-सी बीमारी दूर होती है, इस बारे में भी लाभुकों को बताया गया। इसके बाद लाभुक अपने घर में भी सहजन के पौधे लगाएंगे।
मानसिक तौर पर भी स्वस्थ रखता है सहजनः नाथनगर प्रखंड की कजरैली पंचायत के तेतरहार गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 80 की सेविका रंजना कुमारी ने भी अपने केंद्र में सहजन का पौधा लगाया। रंजना कहती हैं कि सहजन का सेवन करने से गर्भवती महिलाओं से लेकर हाइपरटेंशन की बीमारी से पीड़ित लोगों को फायदा होता है। गांव के लोग जानकारी की कमी होने के कारण इस पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। सहजन में भरपूर पोषण तो रहता ही है, साथ ही इसके सेवन से मानसिक तौर पर भी लोग मजबूत होते हैं। गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के लिए यह बहुत ही फायदेमंद होता है। साथ ही बच्चों के विकास में सहजन का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह आसानी से उपलब्ध भी हो जाता है। गांव के लोग अगर चाहें तो इसे अपने घर में लगा भी सकते हैं। घर में उपजने के बाद इसका अधिक सेवन भी कर सकेंगे और बीमारियों से भी छुटकारा मिलेगी।
स्वच्छता अभियान के तहत हाथों की धुलाई कराई गईः पोषण अभियान के साथ- सेविका और सहायिक स्वच्छता अभियान भी चला रही हैं। सेविका-सहायिका लोगों के घरों में जाकर हाथ धुलाई के लिए जागरूक कर रही हैं। लोगों से हाथों की धुलाई भी करवा रही हैं। हर दो घंटे पर और बाहर से घर आने पर लोगों को कम-से-कम 20 सेकेंड तक आवश्यक तौर पर हाथों की धुलाई करने के लिए कह रही हैं। लोगों को समझाया जा रहा है कि हाथों की धुलाई से न सिर्फ कोरोना से बचाव होता है, बल्कि दूसरी बीमारी की चपेट में भी नहीं आते हैं। इसलिए स्वच्छता पर ध्यान दें और हाथों की धुलाई नियमित तौर पर करें। स्वच्छ रहने से कई बीमारियों से बचाव होता है।

आज का युवा आगे आए और समाज को नई सोच, ऊर्जा और शक्ति से विकसित करे : संदीप कौशिक

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नई दिल्ली

एक युवा सोच, जो समाज में नए परिवर्तन लाने की भावना अपने में रखती है। संदीप कौशिक एक ऐसे ही उत्साहित भाव वाले युवा हैं। हाल ही में कानून में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने वाले संदीप का मानना हैं कि हमारे समाज को आज की युवा पीढ़ी की बहुत आवश्यकता है, जो अपनी युवा सोच से समाज में नए परिवर्तन ला सकती है। जबकि लोग सोचते हैं कि आज का युवा पथ भ्रमित है। उनकी सोच है कि हमारे समाज को लचीला होना चाहिए और युवा सोच को ग्रहण करना चाहिए। वे समाज को बढ़ती गति से देखते हैं और चाहते हैं कि आज का युवा आगे आए और समाज को नई सोच, ऊर्जा और शक्ति से विकसित करे । वह प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में कौशल, शिक्षा और आजीविका के महत्व को समझते हैं तथा इसे प्राप्त करने में प्रत्येक युवा की मदद चाहते हैं। इसी के साथ समाज में नई युवा सोच विचार को शामिल करना जिसके परिणाम स्वरूप युवा अपने लक्ष्य को सरलता से प्राप्त कर सके व अच्छे नागरिक के रूप में समाज की प्रगति में योगदान दे सके। उनका विश्वास है कि – Action Speaks Louder Than Words अर्थात – क्रियाएं शब्दों की अपेक्षा, ज्यादा मजबूत होती हैं। इसी विश्वास के साथ वह इस राष्ट्र के युवा को एक बेहतर भविष्य एवं एक नई दिशा की ओर अग्रसर करना चाहते हैं।

परिवार नियोजन के प्रति लोगों को जागरूक करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं सेविका- सहायिका और जीविका बहनें : डीएम

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– 6 से 25 सितंबर तक जिला के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में मनाया जाएगा मिशन परिवार विकास अभियान

– 6 से 12 सितंबर तक आयोजित होगा दम्पति सम्पर्क सप्ताह

– सदर अस्पताल सहित जिला के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में 13 से 25 सितंबर तक मनेगा परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा

लखीसराय-

परिवार नियोजन के प्रति लोगों को जागरूक करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं आईसीडीएस की सेविका- सहायिका और जीविका बहनें । उक्त बातें शुक्रवार को जिला मंत्रणा कक्ष में 05 सितंबर से जिला भर में शुरू हो रहे मिशन परिवार विकास अभियान को ले आयोजित बैठक को सम्बोधित करते हुए जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने कही। उन्होंने बताया कि आशा कार्यकर्ता तो स्वास्थ्य विभाग से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं इसलिए वो तो ग्रामीण स्तर पर लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक करेंगी ही। इसके साथ ही आईसीडीएस की सेविका – सहायिका और जीविका बहनें भी क्षेत्रभ्रमण के दौरान घर-घर जाकर नवविवाहिता सहित अन्य दम्पतियों से मिलकर उन्हें परिवार नियोजन के स्थाई साधन के साथ- साथ अस्थाई साधन के इस्तेमाल के लिए प्रेरित करेगी। इसके साथ ही वो परिवार नियोजन के इन्फॉर्मेशन एजुकेशन एवम कम्युनिकेशन (आईईसी) मैटेरियल को लोगों के बीच वितरित कर उन्हें परिवार नियोजन के अस्थाई साधनों के नियमित इस्तेमाल के लिए प्रेरित करेगी। इस दौरान वो लोगों को बताएगी कि अपने बच्चों की उचित शिक्षा, स्वास्थ्य ,पोषण के साथ- साथ अन्य सुख- सुविधा उपलब्ध कराने के लिए परिवार नियोजन कितना महत्वपूर्ण है।

बैठक में मौजूद सभी लोगों को मिशन परिवार विकास अभियान के दौरान आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए डीटीएल केयर नावेद उर रहमान खान ने बताया कि जिला के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में आगामी 6 से 25 सितंबर तक मिशन परिवार विकास अभियान मनाया जाएगा । इस दौरान 6 से 12 सितंबर तक दम्पति संपर्क सप्ताह मनाया जाएगा। इस दौरान शिक्षा विभाग, जीविका और महादलित विकास मिशन के प्रतिनिधियों के साथ भी अभियान को सफल बनाने को ले आंतरिक बैठक आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही पूरे अभियान को सफल बनाने के लिए प्रखण्ड स्तर पर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के साथ -साथ अन्य सम्बन्धित अधिकारियों के द्वारा बैठक कर विस्तृत कार्य योजना तैयार की जाएगी।

13 से 25 सितंबर तक सदर अस्पताल लखीसराय सहित जिला के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में आयोजित होगा परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा : उन्होने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय द्वारा किए गए घोषणा के अनुसार मिशन परिवार विकास अभियान के तहत आगामी 13 से 25 सितंबर तक राज्य के सभी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल, सदर हॉस्पिटल के साथ -साथ जिला के सभी अनुमंडल अस्पताल, रेफ़रल अस्पातल सहित सभी स्वास्थ्य संस्थानों में परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा मनाया जाएगा । इसके साथ ही प्रत्येक महीने की 21 तारीख को राज्य भर में परिवार नियोजन दिवस मनाया जाएगा। इस दौरान सभी स्वास्थ्य संस्थानों में महिला के लिए एक एपैनेल्ड सर्जन और पुरुष नसबंदी के लिए एनएसवी सर्जन अनिवार्य रूप से मौजूद रहेंगे।

उन्होंने बताया कि सर्वोच्य न्यायालय द्वारा दिये गए निर्देश के तहत महिला बंध्याकरण तथा पुरुष नसबंदी की गुणवत्तापूर्ण सेवा के लिए मेडिकल टीम का गठन कर निःशुल्क सेवा सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि मिशन परिवार विकास अभियान के दौरान परिवार नियोजन में पुरुषों की भूमिका बढ़ाने के लिए विशेष जोर दिया जाएगा। इसके लिए दम्पति सम्पर्क सप्ताह के दौरान पुरुषों की काउंसलिंग पर विशेष जोर दिया जाएगा । इसके साथ ही इस पूरे अभियान के दौरान दम्पतियों को परिवार नियोजन के अस्थाई साधन का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

फैमिली प्लानिंग लॉजिस्टिक मैनेजमेंट एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम पर जागरूकता को लेकर दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

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– जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के द्वारा एएनएम स्कूल सभागार में प्रशिक्षण शिविर का आयोजन
– प्रशिक्षण में हिस्सा ले रहे हैं जिला के सभी सीएचसी और पीएचसी पर कार्यरत स्वास्थ्यकर्मी

मुंगेर-

जिला स्वास्थ्य समिति के द्वारा एएनएम स्कूल सभागार में फैमिली प्लानिंग लॉजिस्टिक मैनेजमेंट एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एफपी- एलएमआईसी) के प्रति जागरूकता को लेकर शुक्रवार से दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू हुआ । प्रशिक्षण कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला के सिविल सर्जन डॉ. हरेन्द्र आलोक ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2021- 22 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम के तहत परिवार नियोजन गर्भ निरोधकों का अनुश्रवण एवं प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से फैमिली प्लानिंग लॉजिस्टिक मैनेजमेंट एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एफपी- एलएमआईसी) प्रारम्भ किया गया है। प्रशिक्षण में उपस्थित सभी प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के डीपीएम नसीम रजि ने विस्तार से फैमिली प्लानिंग लॉजिस्टिक मैनेजमेंट एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एफपी- एलएमआईसी) के तकनीकी पहलुओं के बारे में जानकारी दी।
स्वास्थ्य संस्थानों में परिवार नियोजन से सम्बंधित सामग्री की उपलब्धता ऑनलाइन देखी जा सकती है
प्रशिक्षण को सम्बोधित करते हुए जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर की जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी रचना कुमारी ने बताया कि फैमिली प्लानिंग लॉजिस्टिक मैनेजमेंट एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एफपी- एलएमआईसी) एक ऐसी पद्धति है जिसके माध्यम से जिला के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में परिवार नियोजन से सम्बंधित सामग्री की उपलब्धता ऑनलाइन देखी जा सकती है। जिला से लेकर राज्य स्तर के पदाधिकारी ऑनलाइन परिवार नियोजन सामाग्री की उपलब्धता से अवगत रहेंगे। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला के सभी सीएचसी और पीएचसी पर वेब पोर्टल के माध्यम से परिवार नियोजन के लिए साधनों का उपयोग
प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला सामुदायिक उत्प्रेरक (डीसीएम) सुशील कुमार ने वित्तीय वर्ष 2021- 22 में इस पद्धति के माध्यम से क्या- क्या करना है इस संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिला के विभिन्न संस्थानों के माध्यम से परिवार नियोजन के लिए माला एन, कंडोम, अंतरा, छाया एवं आईयूसीपी का उपयोग तो किया जा रहा है लेकिन अब उसे (एफपी – एलएमआईसी) के वेब पोर्टल के माध्यम से किया किया जाना है।
10 प्रतिशत दम्पति सही जानकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण परिवार नियोजन के साधन अपनाने से वंचित
प्रशिक्षण कार्यक्रम को तकनीकी सहयोग दे रही केयर इंडिया की फैमिली प्लानिंग कोऑर्डिनेटर (एफपीसी) तस्नीम रजि ने बताया कि 10 प्रतिशत ऐसे योग्य दम्पति है जिन्हें परिवार नियोजन के विधियों की आवश्यकता है तो है परंतु सही जानकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण वो परिवार नियोजन के साधन अपनाने से वंचित हैं। उन्होने बताया कि (एफपी- एलएमआईसी) आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभावी नियंत्रण रहने में मददगार साबित होगा। इससे आपूर्ति असंतुलन एवं स्टॉक आउट में कमी आएगी और यह कागज के दबाव को भी कम करेगा। इसके साथ ही डाटा संग्रह, संचरण और वितरण के समय को भी काफी हद तक कम करेगा।

फाइलेरिया उन्मूलन अभियान की सफलता को लेकर आशा कार्यकर्ताओं को दिया गया प्रशिक्षण

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– जिले के चौथम सीएचसी में स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से दिया गया प्रशिक्षण
– बारी-बारी से जिले के सभी आशा कार्यकर्ताओं को दी जाएगी ट्रेनिंग

खगड़िया-
जिले में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए एमडीए (मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) अभियान की सफलता को लेकर शुक्रवार को चौथम सीएचसी में आशा में आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण स्वास्थ्य विभाग एवं केयर इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में दिया गया । जिसमें प्रखंड की सभी आशा कार्यकर्ता शामिल हुईं। प्रशिक्षण केयर इंडिया के प्रखंड प्रबंधक करण कुमार एवं बीसी-भीएल श्रवण कुमार के द्वारा दिया गया। इस दौरान पीसीआई के प्रखंड समन्वयक राकेश कुमार भी मौजूद रहे। प्रशिक्षण में प्रशिक्षक द्वारा आशा कार्यकर्ताओं को उक्त अभियान को सफल बनाने के लिए विस्तृत जानकारी दी गई एवं इस बीमारी पर रोकथाम एवं इससे बचाव के लिए लोगों को दी जाने वाली जानकारियाँ को भी बताया गया। ताकि उक्त अभियान का हर हाल में सफल क्रियान्वयन हो सके और लोग दवाई खाने से वंचित नहीं रहे।

– गृह भेंट के तहत घर-घर जाकर लोगों के बीच दवा वितरण करेंगी आशा कार्यकर्ता :
केयर इंडिया के प्रखंड प्रबंधक करण कुमार ने बताया, 20 सितंबर से जिले में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए एमडीए अभियान की शुरुआत होगी। अभियान की सफलता को लेकर संबंधित क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता अपने पोषक क्षेत्र में गृह भेंट की तर्ज पर घर-घर जाकर योग्य व्यक्तियों के बीच अलबेंडाजोल एवं डीईसी की दवाएं वितरित करेंगी और अपने सामने में दवा खिलाना सुनिश्चित करेंगी। वहीं, उन्होंने बताया, उक्त दवा गर्भवती महिलाओं एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के अलावा दो वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों को छोड़कर शेष सभी लोगों को आशा कार्यकर्ताओं द्वारा खिलाई जाएगी। साथ ही इस बीमारी से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी देते हुए जागरूक किया जाएगा। कोविड प्रोटोकॉल का पालन के साथ लोगों को दवाई खिलाई जाएगी और कोविड से बचाव एवं वैक्सीनेशन के प्रति भी लोगों को जागरूक किया जाएगा। इसको लेकर प्रशिक्षण के दौरान भी आशा कार्यकर्ता को विस्तृत जानकारी दी गई है। वहीं, उन्होंने बताया, 2 से 5 साल तक के बच्चों को 100 मिलीग्राम की डीईसी एवं 400 मिलीग्राम अलबेंडाजोल की एक-एक गोली, 6 से 14 साल तक के किशोरों को डीईसी की दो एवं अलबेंडाजोल की एक गोली एवं 15 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को डीईसी की तीन गोलियां एवं अलबेंडाजोल की एक गोली खिलायी जानी है। इस दौरान इस बात का ख्याल रखना है कि किसी व्यक्ति को खाली पेट दवाई नहीं खिलानी है।

– दो बैच में 140 आशा और 07 फैसिलिटेटर को दिया गया प्रशिक्षण :
प्रशिक्षक सह केयर इंडिया के बीसी-भीएल श्रवण कुमार ने बताया, उक्त प्रशिक्षण दो बैच में कुल 140 आशा कार्यकर्ताओं को दिया गया। जिसमें एक बैच में 80 आशा और 04 फैसिलिटेटर एवं दूसरे बैच में 60 आशा एवं 03 फैसिलिटेटर शामिल हुई।, उन्होंने बताया कि बारी-बारी से निर्धारित तिथि के अनुसार जिले की सभी आशा कार्यकर्ताओं को यह प्रशिक्षण दिया जाएगा।

– बचाव के लिए दवाई का सेवन जरूरी :
पीसीआई के प्रखंड समन्वयक राकेश कुमार ने बताया, इस बीमारी से बचाव के लिए दवाई के साथ-साथ एहतियात भी जरूरी है। इसलिए, अभियान के दौरान योग्य व्यक्तियों को दवाई तो खिलाई ही जाएगी इसके अलावा इस बीमारी से बचाव के लिए लोगों को आवश्यक जानकारी भी दी जाएगी। जैसे कि, घर के आस-पास गंदगी जमा नहीं होने दें एवं घरों में सोने से पहले मच्छरदानी का उपयोग करें। साथ ही अन्य लोगों को दवा सेवन के प्रति जागरूक भी करें, ताकि फाइलेरिया जैसी बीमारी जड़ से समाप्त हो सके। इस बीमारी को पूरी तरह से मिटाने के लिए जागरूकता भी बेहद जरूरी है।

– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सैनिटाइजर का उपयोग करें।

बांका सदर प्रखंड में 80 प्रतिशत से ज्यादा लोग ले चुके हैं कोरोना टीका

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-अब तक एक लाख 80 हजार 700 लोगों ने लिया है टीका
-17,250 लोगों ने कोरोना टीका की दूसरी डोज भी ले ली

बांका-
कोरोना का टीका लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग, प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के जागरूकता अभियान का सकारात्मक असर लोगों पर पड़ा है। यही कारण है कि काफी संख्या में टीका लेने के लिए लोग सामने आ गए हैं। बांका सदर प्रखंड के 80 प्रतिशत लोगों ने कोरोना टीका की पहली डोज ले ली है। अब तक 1,80,700 से अधिक लोगों ने कोरोना टीका की पहली डोज ले ली है। इनमें से 17,250 लोगों ने टीका की दूसरी डोज भी ले ली है। दूसरा डोज लेने वालों की संख्या भी काफी तेज गति से बढ़ रही है।
पहला डोज लेने वालों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि सदर प्रखंड में अधिकतर लोगों ने कोरोना का टीका ले लिया है। कुछ जगह ही बचा है, जहां टीकाकरण नहीं हो सका है। लेकिन वहां भी स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार जा रही है। उम्मीद है कि वहां भी जल्द ही टीकाकरण हो जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब दूसरे डोज लेने वालों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। इसमें और तेजी आएगी। हाल के दिनों में पहला डोज लेने वालों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई
है। इनलोगों का समय जैसे ही पूरा होगा, वैसे ही दूसरा डोज लेने वालों की संख्या में काफी बढ़ोतरी होगी।

350 लोगों की हुई जांचः
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 250 लोगों की एंटीजन किट से जांच भी हुई। साथ ही 100 लोगों के सैंपल आरटीपीसीआर मशीन से जांच के लिए लिया गया। जांच में कोई भी व्यक्ति संक्रमित नहीं मिला। हालांकि जांच में कोई भी व्यक्ति संक्रमित नहीं मिला, इसके बावजूद सभी लोगों को सतर्कता के साथ रहने के लिए कहा गया। घर से बाहर जाते वक्त मास्क लगाने और सामाजिक दूरी का पालन करने के लिए कहा गया। भीड़भाड़ से बचने की सलाह देते हुए एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी का पालन करने के लिए कहा गया। बाहर से घर आने पर 20 सेकेंड तक हाथ की धुलाई आवश्यक तौर पर करने के लिए कहा गया।

आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं की समस्याओं को करें दूर

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-गर्भवती महिलाओं को कोई परेशानी हो तो उसे सदर अस्पताल लेकर आएं
-शहरी आशा कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग के दूसरे दिए मास्टर ट्रेनर ने दिए टिप्स
भागलपुर, 3 सितंबर| आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं को चिह्नित करें और अगर उन्हें कोई परेशानी आ रही हो तो उसका समाधान करें। परेशानी ज्यादा हो तो गर्भवती महिलाओं को सदर अस्पताल लेकर आएं और जरूरी जांच कराएं। उक्त बातें क्षेत्रीय प्रबंधन ईकाई की ओर से शहर के एक होटल में शहरी आशा कार्यकर्ताओं की छह दिवसीय ट्रेनिंग के दूसरे दिन शुक्रवार को मास्टर ट्रेनर ने कही। मास्टर ट्रेनर सीमा कुमारी, सुनील कुमार, राजेश कुमार ने आशा कार्यकर्ताओं को क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को चिह्नित करने के दौरान उन्हें होने वाली परेशानियों को दूर करने के तरीके भी बताए।
प्रसव की संभावित तिथि का पता कैसे लगाना है, इसकी जानकारी दी
मास्टर ट्रेनर ने ट्रेनिंग के दौरान आशा कार्य़कर्ताओं को प्रसव की संभावित तिथि का पता कैसे लगाना है, इसकी जानकारी दी। इससे परिजनों और गर्भवती महिलाओं को मानसिक रूप से तैयार होने में मदद मिलती है। साथ ही प्रसव से पहले क्या-क्या तैयारी करनी चाहिए, इसकी भी जानकारी दी गई। इस दौरान क्षेत्र में संस्थागत प्रसव पर जोर देने की सलाह आशा कार्यकर्ताओं को दी गई। प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षित अभियान के तहत लाभुकों को क्या-क्या फायदा मिलता है, इसके बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए भी कहा गया। हर महीने की नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं की जांच होती है। इससे क्या फायदा होता है, इसे लेकर गर्भवती महिलाओं को जागरूक करने के लिए कहा गया। साथ ही इन लोगों को क्या संवैधानिक  अधिकार मिले हुए हैं, इसके बारे में भी आशा कार्यकर्ताओं को जानकारी दी गई।
गर्भसमापन को है कानूनी मान्यताः
मास्टर ट्रेनरों ने आशा कार्यकर्ताओं को बताया कि समाज में गर्भसमापन को लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं। बहुत लोगों को यह जानकारी नहीं है कि भारत में गर्भसमापन को कानूनी मान्यता मिली हुई है। इसे लेकर 1971 के एमपीटी एक्ट  के बारे में भी आशा को बताया गया। आशा कार्यकर्ताओं से कहा गया कि तीन महीने तक की गर्भवती महिलाओं का गर्भसमापन स्थानीय सरकारी अस्पताल में आसानी से हो सकता है। अगर गर्भ दूसरी तिमाही में चला गया है तो वैसी महिलाओं को सदर अस्पताल या फिर मायागंज अस्पताल लेकर जाएं। वहां पर विशेषज्ञों द्वारा आसानी से गर्भसमापन कराया जाएगा। अभी कोरोना काल में बहुत सारी महिलाएं अनचाहे तरीके से गर्भवती हो गई हैं। वे गर्भसमापन करवाना चाहती हैं, लेकिन कानूनी जानकारी नहीं होने और आवागमन की सुविधा कम होने के कारण ऐसा नहीं कर पा रही हैं। ऐसी गर्भवती महिलाओं को चिह्नित कर उन्हें गर्भसमापन में मदद करें।
इससे पहले गुरुवार को छह दिवसीय ट्रेनिंग सत्र का उद्घाटन किया गया। इस दौरान जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार चौधरी, क्षेत्रीय अपर निदेशक डॉ. सुरेश प्रसाद सिन्हा, क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक अरुण प्रकाश और क्षेत्रीय आशा समन्वयक कुणाल कुमार मौजूद थे। उद्घाटन के बाद जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने टीकाकरण की बारीकियों से आशा कार्य़कर्ताओं को अवगत कराया। साथ ही कोरोना टीकाकरण में आशा कार्यकर्ताओं की क्या भूमिका है, इसकी जानकारी दी। डॉ. सुरेश प्रसाद सिन्हा ने आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका, कौशल और क्षेत्र में कैसे विजिट करना है, इसके बारे में बताया। इसके अलावा छह दिन तक चलने वाली ट्रेनिंग का एजेंडा बताया गया, जिसमें किस दिन क्या होगा, इसकी जानकारी दी गई।