ब्लैक फंगस संक्रामक रोग नहीं, अफवाहों पर नहीं दें ध्यान

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• कोविड-19 नेशनल टास्क फोर्स ने जारी की एडवाइजरी
• म्यूकोरमाइकोसिस या ब्लैक फंगस से मधुमेह रोगी रहें सावधान
• लक्षणों की रखें जानकारी, मास्क का नियमित करें इस्तेमाल
• आपदा मित्र हेल्पलाइन 14410 से ले सकते हैं जरूरी सलाह

भागलपुर, 22 मई:

म्यूकोरमाइकोसिस यानी ब्लैक फंगस से बचाव के लिए कोविड- 19 नेशनल टास्क फोर्स और एक्सपर्ट ग्रूप द्वारा दिशा निर्देश जारी किया गया है, जिसमें गंभीर रोग से प्रभावित लोगों को इस बीमारी से बचने की विशेष सलाह दी गयी है. एक्सपर्ट ग्रूप में इस रोग से बचाव के उपायों की जानकारी देते हुए इस रोग से जुड़े अफवाहों व भ्रांतियों से भी बचने की अपील की है. एक्सपर्ट ग्रूप ने बताया है म्यूकोरमाइकोसिस एक फंगस संक्रमण है जिसका प्रसार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं होता है.
बुखार व ठंड सहित कोविड 19 के अन्य लक्षण दिखने पर आपदा मित्र हेल्पलाइन नंबर 14410 या कोविड हेल्पलाइन नंबर 1912 पर फोन कर आवयश्क जानकारी ली जा सकती है. साथ ही हेल्थ हेल्पलाइन सेवा 104 से भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

स्टेरायड सेवन करने वालों को करता है प्रभावित:
म्यूकोरमाइकोसिस एक फंगल संक्रमण है जो मुख्य रूप से उन लोगों को प्रभावित करता है जो अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए दवा ले रहे हैं. विशेषरूप से स्टेरायड दवा लेने वालों को म्यूकोरमाइकोसिस अधिक प्रभावित करता है. ऐसे व्यक्तियों के साइनस या फेफड़े, हवा से फंगल बीजाणुओं के अंदर जाने के बाद प्रभावित होते हैं. म्यूकोरमाइकोसिस से ग्रस्त होने की संभावना उन लोगों को अधिक होती है जो अनियंत्रित मधुमेह से प्रभावित है. इसके अलावा लंबे समय तक आइसीयू में भर्ती रहे मरीज, अंग प्रत्यारोपण आदि रोगियों को यह बीमारी सबसे अधिक प्रभावित करती है.

आंख व नाक में दर्द व लाली हो तो रहें सावधान:
म्यूकोरमाइकोसिस गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है जिसके चेतावनी के संकेत ओर लक्षणों में आंख और नाक के आसपास दर्द और लाली रहना, बुखार, सिर दर्द, खांसी, सांस लेने में कठिनाई, खूनी उल्टी व मानसिक स्थिति में बदलाव आना शामिल है.

बचाव के उपायों को अपनायें और लगाये मास्क:
विशेष सुरक्षात्मक उपाय अपना कर म्यूकोरमाइकोसिस की रोकथाम की जा सकती है. यदि धूल भरे निर्माण स्थल पर जा रहें हैं तो मास्क का इस्तेमाल अवश्य करें. मिट्टी, बागबानी, काई या खाद आदि से जुड़े काम करते समय जूते, लंबी पैंट, पूरी बाजू वाली कमीज और दस्ताने अवश्य पहनें.

मधुमेह पीड़ित लोगों को रखना है अधिक ध्यान:
कोविड 19 नेशनल टास्क फोर्स और एक्सपर्ट ग्रूप द्वारा जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि कोविड-19 रोगियों सहित मधुमेह रोगियों एवं कमजोर इम्यूनिटी वाले व्यक्तियों म्यूकोरमाइकोसिस होने की संभावना अधिक होती है. ऐसे लोगों को यदि नाक में रूकावट या जमाव, नाक से काल और खूनी स्राव, गाल की हड्डी पर दर्द, चेहरे के एक तरफ दर्द, सुन्न ओर सूजन होना, नाक व तालू के उपर कालापन आना, दांत में दर्द, दांतों का ढ़ीला होना, जबड़े में दिक्कत आदि हो तो म्यूकोरमाइकोसिस होने की संभावना बहुत अधिक होती है. इसके अलावा छाती में दर्द और सांस लेने में परेशानी भी म्यूकोरमाइकोसिस होने के लक्षण होते हैं

जेएलएनएमसीएच में लगेगा ऑक्सीजन प्लांट

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ऑक्सीजन प्लांट को बीएमजीएफ व पाथ मिलकर लगाएंगे, दो माह में होगा तैयार
मायागंज में प्लांट के लिए जमीन हुई चिह्नित, डॉ. महेश बने इसके नोडल प्रभारी
भागलपुर, 21 मई
जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) में ऑक्सीजन (पीएसएस यानी प्रेशर स्विंग एडसॉपर्शन) प्लांट लगाया जायेगा। इस प्लांट के लगने के बाद अस्पताल ऑक्सीजन के मामले में पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो जायेगा। इस ऑक्सीजन प्लांट को लगाने के लिए न केवल मायागंज अस्पताल में जमीन को चिह्नित कर लिया गया है, बल्कि प्लांट को लगाने के लिए स्थानीय स्तर पर नोडल प्रभारी का भी चयन कर लिया गया है।
जेएलएनएमसीएच के अलावा सूबे के 4 और स्थानों पर ऑक्सीजन प्लांट लगाया जायेगा। इसमें डीएमसीएच लहरिया सराय दरभंगा, एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर परिसर व सदर अस्पताल समस्तीपुर और पूर्णिया जिले शामिल हैं। हरेक प्लांट की क्षमता 1000 एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) होगी। इससे हरेक प्लांट में हर रोज औसतन 400 बड़े सिलेंडर में करीब 2800 क्यूरी मीटर ऑक्सीजन की रिफलिंग की जा सकेगी। जेएलएनएमसीएच में आज की तारीख में हर रोज 500 से अधिक बड़े सिलेंडर यानी 3500 से 3600 क्यूरी मीटर ऑक्सीजन की खपत हो रही है। जबकि सामान्य दिनों में 120 से 160 क्यूरी मीटर ऑक्सीजन की खपत होती थी।
बीएमजीएफ-पाथ मिलकर लगाएंगे प्लांट
बिहार के प्रधान सचिव स्वास्थ्य प्रत्यय अमृत द्वारा जेएलएनएमसीएच के प्राचार्य व मायागंज अस्पताल के अधीक्षक को भेजे गये पत्र में बताया गया है कि इस ऑक्सीजन प्लांट को बीएमजीएफ (बिल एन्ड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन) व पीएटीएच यानी पाथ संगठन मिलकर लगाएंगे। पाथ जहां प्लांट लगाने को लेकर पहले जरूरी सिविल कार्य व इलेक्ट्रिक इंस्टॉलेशन आदि का काम करेगा तो बीएमजीएफ पीएसएस प्लांट को लगाएगा। इसे लेकर बीएमजीफ ने फाउंडेशन के बिहार-यूपी के उपनिदेशक डॉ. देवेंद्र खंडैत व डॉ. हेमंत शाह व पाथ ने प्रोग्राम आफिसर पाथ डॉ. सिद्धार्थ दत्त को निगरानी व काम को पूरा करने का जिम्मा सौंपा है। जबकि जेएलएनएमसीएच में लगने वाले ऑक्सीजन प्लांट का नोडल प्रभारी का चयन कर लिया गया है। पाथ व बीएमजीएफ के जिम्मेदार अब डॉ. महेश कुमार से संपर्क कर यहां पर ऑक्सीजन प्लांट लगाएंगे।
दो माह में तैयार होगा प्लांट: प्राचार्य
जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. हेमंत कुमार सिन्हा ने कहा कि यह ऑक्सीजन प्लांट दो माह में तैयार होगा। प्लांट के इंस्टालेशन आदि के क्वॉडिर्नेट के लिए नोडल प्रभारी का चयन कर लिया गया है। नामित चिकित्सक व प्लांट लगाने के स्थान का चयन करने संबंधी सूचना शनिवार को प्रधान सचिव स्वास्थ्य बिहार को भेज दिया जायेगा। वहीं अधीक्षक डॉ. असीम कुमार दास ने कहा कि जेएलएनएमसीएच परिसर में संचालित जीएनएम स्कूल के बगल में ही आठ बाई आठ मीटर (64 वर्ग मीटर) जमीन का चयन कर लिया गया है। साथ ही बीएमजीएफ व पाथ के पदाधिकारियों से क्वॉडिर्नेट करने के लिए प्लांट के नोडल प्रभारी के रूप में डॉ. महेश कुमार का चयन कर लिया गया है। इसकी सूचना प्रधान सचिव व प्राचार्य को शनिवार को भेज दी जाएगी।

आईसीएमआर ने दी टेस्ट किट को मंजूरी, अब घर पर ही हो सकेगा कोरोना टेस्ट

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बियॉन्ड इंडिया न्यूज़ डेस्क

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने ऐसे टेस्ट किट को मंजूरी प्रदान की है, जिससे अपने घर में ही कोरोना की जांच की जा सकती है। इस टेस्ट के लिए नाक से सैंपल लिया जा सकता है। यह किट उन मरीजों के लिए है, जो सिम्प्टोमेटिक हैं यानी जिनमें कोरोना के लक्षण दिखाई दे रहे हैं।


 

covid test kit: US FDA approves first COVID-19 test kit for home use - The Economic Times

सिर्फ लक्षण वाले लोगों के लिए है यह टेस्ट किट

आईसीएमआर ने कोविसेल्फ नाम के एक टेस्टिंग किट को मंजूरी दी है, जिसके जरिये कोविड-19 के लक्षणों वाले लोग घर पर ही कोरोना की जांच कर पाएंगे। जिनमें लक्षण दिखाई नहीं दे रहे हैं, उन्हें यह टेस्ट करने की जरूरत नहीं है। यह किट उन लोगों के लिए भी है, जो किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आए हों, जो कोरोना से पीड़ित है और लैब टेस्ट में उसके नोवेल कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हो चुकी है। कोविसेल्फ किट को लेकर आईसीएमआर ने दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। आईसीएमआर के दिशा-निर्देश के अनुसार, होम टेस्टिंग सिर्फ सिम्प्टोमेटिक मरीजों के लिए है। यह उन लोगों के लिए भी है, जो वैसे लोगों के संपर्क में आए हैं, जिनमें कोरोना की पुष्टि लैब जांच में हो चुकी है।

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ऐसे करना होगा इस्तेमाल

होम टेस्टिंग किट से कोरोना जांच के लिए सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर (एंड्रॉयड मोबाइल के लिए) या एप्प स्टोर (एप्पल मोबाइल के लिए) से इसका मोबाइल एप्प डाउनलोड करना होगा। इस मोबाइल एप्प के जरिये ही पॉजिटिव और निगेटिव होने के बारे में पता चलेगा। जो लोग होम टेस्टिंग किट का इस्तेमाल करेंगे, उन्हें उसी फोन से टेस्ट स्ट्रिप की फोटो लेनी होगी, जिस पर मोबाइल एप्प डाउनलोड किया है। फिर मोबाइल फोन का डाटा सीधे आईसीएमआर के टेस्टिंग पोर्टल पर स्टोर हो जाएगा। इसमें मरीज की जानकारी गुप्त रखी जाएगी। इस टेस्ट में जिनकी पॉजिटिव रिपोर्ट आएगी, उन्हें कोरोना पॉजिटिव माना जाएगा। उसके बाद किसी अन्य टेस्ट की आवश्यकता नहीं होगी।

आईसीएमआर और स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन माननी पड़ेगी

इस सम्बंध में आईसीएमआर और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गाइडलाइन जारी की है। होम टेस्टिंग में जिन लोगों के परिणाम पॉजिटिव आएंगे, उन्हें घर में आइसोलेशन को लेकर आईसीएमआर और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन का पालन करना होगा। होम टेस्टिंग में जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, वे तो पॉजिटिव माने ही जाएंगे, लेकिन अगर किसी में कोरोना के लक्षण हैं और उसकी जांच का परिणाम निगेटिव आता है, तो उनको आरटीपीसीआर टेस्ट कराना होगा।

डीसीजीआई ने भी होम टेस्टिंग किट को दी मंजूरी

FDA grants EUA to Quidel's at-home Covid-19 test

आईसीएमआर के साथ ड्रग कंट्रोलर जेनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने भी इस होम टेस्टिंग किट को मंजूरी दे दी है। होम टेस्टिंग किट के लिए पुणे की कंपनी माई लैब डिस्कवरी सॉल्यूशन लिमिटेड को अधिकृत किया गया है। हालांकि, ये होम टेस्टिंग किट बाजार में तुरंत उपलब्ध नहीं होगी। इसे बड़े पैमाने पर बाजार में आने में अभी कुछ समय लग सकता है। हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित एक खबर के अनुसार, इस किट की कीमत 250 रुपये के आसपास होगी। वैसे कंपनी ने आधिकारिक रूप से इस बारे में कुछ नहीं कहा है।

कोविड-19 से प्रभावित परिवारों को निःशुल्क पहुंच रहा है भोजन

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बियॉन्ड इंडिया न्यूज़ डेस्क

पूर्वी दिल्ली नगर निगम के वार्ड 12ई पटपडगंज के समाजसेवी व व्यापारी सुबोध जैन दीपक के द्धारा ई-166-167 समसपुर रोड पाण्डव नगर के प्रथम मंजिल पर जैन रसोई चलाई जा रही है। जिसमें करीब 350 परिवारों का भोजन प्रतिदिन दोनों समय बनाया जाता है और कोविड-19 से प्रभावित जरूरतमंद लोगों तक यह भोजन पहुंचाया जाता है ताकि इस वैश्यिक महामारी में पीडित परिवार भूखा न रहे और उसे बाहर से भोजन न खरीदकर खाना पडे ।

जरूरतमंदों तक पहुंचाई जा रही सेवा

इस रसोई का निरीक्षरण कई विधायक समाजसेवी लोगों ने किया और सभी ने प्रशंसा की । आज महामंडलेश्वर संत नवल किशोरदास जी जैन रसोई पर पहुंचे और उन्होने रसोई का निरीक्षण किया और रसोई में भोजन बनाने में सहयोग दिया और सुबोध जैन दीपक तथा उनकी पूरी टीम को इस पुनीत कार्य करने के लिए बधाई दी और कहा कि आप जैसे ही लोग समाज का दर्पण हैं और समाज आप जैसों से ही सीखता है।

सेवा भाव व मार्गदर्शन से किया जा रहा कार्य

सुवोध जैन दीपक ने कहा कि यह रसोई भाजपा जिला मयूर विहार के नेतृत्व में 1 मई से संचालित हो रही है और सभी का सहयोग एंव मार्गदर्शन हमें प्रतिदिन मिलरहा है। इस मौके पर पूर्व महापौर व निगम पार्षद पटपडगंज बिपिन बिहारी सिंह , नितिन जैन, संजीव जैन, प्रवीन जैन, ज्योति जैन, विक्की, पुष्पा सिंह, आशीष गुप्ता, सोनू कानोजिया, एस.मोहन, पंकज, पुष्पा सिंह, मेघा जैन, सुनील गुप्ता, हरपाल सिंह, एस एन द्धिवेदी हेमन्त गोस्वामी सहित अनेकों लोग उपस्थित रहे।

 

बीमारी को छुपाएं नहीं,इलाज करवाएं

बीमारी को छुपाएं नहीं,इलाज करवाएं

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लापरवाही से दूसरे लोग भी हो सकते हैं बीमार

कोरोना होने पर बड़ी संख्या में लोग आ सकते हैं चपेट में

बांका, 17 मई

कोरोना की दूसरी लहर के बीच तरह-तरह के मामले सामने आ रहे हैं। पिछले दिनों कुछ मामलों में देखा गया कि परिवार के एक सदस्य से कई सदस्य संक्रमित हो गए। जब इसके पीछे के कारणों को जाना गया तो पता चला कि घर का कोई सदस्य पहले बीमार पड़ा था। उन्होंने इसे सामान्य वायरल समझकर इलाज कराया, लेकिन बाद में वह कोरोना निकला। साथ ही परिवार के दूसरे सदस्य भी संक्रमित हो गए। ऐसी परिस्थिति से बचना है तो बीमार पड़ने पर तत्काल डॉक्टर के पास जाकर इलाज करवाएं।

शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि अभी कोरोना की दूसरी लहर तो चल रही है और इस वजह से लोग संक्रमित भी हो रहे हैं, लेकिन लापरवाही की वजह से भी लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। इससे बचने के लिए लोगों को सावधानी बरतनी होगी। बीमार पड़ने पर तत्काल इलाज करवाना होगा। नहीं तो परिवार के दूसरे लोगों में भी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए परिवार के लोगों को बचाने के लिए बीमार पड़ने पर तत्काल इलाज करवाएं।

खुद डॉक्टर नहीं बनेः डॉ. चौधरी कहते हैं कि इस तरह के ज्यादातर मामले खुद के डॉक्टर बन जाने के कारण होता है। ऐसा बिल्कुल नहीं करें। कभी भी बीमार पड़ने पर खुद या फिर मेडिकल दुकानदार के बताए दवा खाने से बचें। अभी कोरोना काल चल रहा है। इस समय में ऐसा रिस्क नहीं लें। यह आपके साथ परिवार के लिए भारी पड़ सकता है। बीमार पड़ने पर तत्काल डॉक्टर को दिखाएं और उनके बताए दवा का सेवन करें। साथ ही अगर कोरोना के लक्षण दिखे, मसलन- सर्दी, खांसी, बुखार, गले में खरास, बदन में दर्द, स्वाद नहीं आना आदि हो तो कोरोना की जांच करा लें।

घर में हो जाएं आइसोलेटः डॉ. चौधरी कहते हैं कि कोरोना को हमलोग सतर्कता से ही कोरोना को मात दे सकते हैं। इसलिए अगर आप बीमार पड़ें तो सबसे पहले आइसोलेट हो जाएं। घर के सदस्यों से दूरी बनाकर रहें। ऐसे कमरे का चयन करें, जिसमें शौचालय की व्यवस्था हो। साथ ही हवादार भी हो। कमरे की सारी खिड़कियों और वेंटिलेशन को खोलकर रखें। अपने इस्तेमाल की वस्तुओं को अलग कर लें। इस बात का भी ध्यान रखें कि उसका इस्तेमाल घर के दूसरे सदस्य नहीं करे।

कोरोना की गाइडलाइन का हर हाल में करें पालनः डॉ. चौधरी कहते हैं कि अभी के समय में जो सबसे महत्वपूर्ण है, वह है कोरोना की गाइडलाइन का पालन करना। घर से बाहर निकलते वक्त मास्क पहनें। सामाजिक दूरी का पालन करें। भीड़भाड़ से बचें और दो गज की दूरी को मेंटेन करें। घर में भी बात करते वक्त मास्क लगाएं और दो गज की दूरी बनाएं रखें। घर से बाहर बहुत जरूरी पड़ने पर ही निकलें। कोरोना की गाइडलाइन का पालन करने का सबसे बेहतर उपाय यही है। घर से जो जितना कम निकलेगा, उतना बेहतर तरीके से वह कोरोना की गाइडलाइन का पालन करेगा।

अब गर्भवती महिलाओं को मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, कोविड जांच की अनिवार्यता खत्म

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• आईसीएमआर के गाइडलाइन का होगा शत-प्रतिशत अनुपालन
• कोविड रिपोर्ट के इंतजार में इलाज में होती थी देरी
• गर्भवती महिलाओं के उपचार से इनकार नहीं करने की सलाह

बांका-

जिले में कोरोना के रोकथाम व इससे बचाव के लिए विभाग संकल्पित है। जिले में 25 मई तक लॉक डाउन लागू किया गया है। लेकिन कोरोना काल में गर्भवती महिलाओं एवं धात्री माताओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के लिए विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है। इसी कड़ी में स्वास्थ्य विभाग ने एक अहम निर्णय लिया है। अब गर्भवती महिलाओं को बिना किसी देरी के तुरंत उपचार प्रदान किया जायेगा। इस संबंध में राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने पत्र जारी कर आवश्यक दिशा-निदेश दिया है। जारी पत्र में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के संक्रमण की रोकथाम हेतु सुरक्षा एवं सावधानी का पालन करना बहुत आवश्यक है। भारत सरकार के पत्र के अनुसार गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व, प्रसव के दौरान एवं प्रसव पश्चात् सेवा प्रदान करना सुनिश्चित किया जाना है। इसके लिए सभी स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए विशेष कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। ऐसा देखा गया है कि गर्भवती महिला को कोविड-19 की निगेटिव रिपोर्ट दिखाने की माँग सेवा प्रारंभ करने से पूर्व की जाती है जो अनावश्यक देरी का कारण बनती है। चिकित्सकों को निर्देश दिया गया है कि गर्भवती महिलाओं को बिना देरी किए सेवाएं प्रदान की जाए।

किसी भी स्थिति में सेवा देने से नहीं करें इंकार:

पत्र में कहा गया है कि सभी स्वास्थ्य कर्मियों (निजी एवं सरकारी) द्वारा वैक्सीन की दोनों खुराक अवश्य ले ली गई होगी, इसकी उम्मीद की जाती है। इसलिए कोविड-19 प्रोटोकॉल के साथ सभी सेवाएँ गर्भवती महिलाओं को प्रदान की जाए एवं किसी भी स्थिति में सेवा से इंकार नहीं किया जाए। सेवा से इंकार किये जाने को काफी गंभीरता लिया जाएगा। पत्र में कहा गया है कि 104 कॉल सेंटर के माध्यम से शिकायतों को दर्ज करने के लिए लाभुकों को प्रेरित किया जाए और सेवा से इंकार जैसी स्थित से तुरंत ही निपटा जाए ताकि गर्भवती महिलाओं की सेवाओं की निरंतरता बनी रहे।

संस्थागत प्रसव को दें प्राथमिकता:

कोरोना काल में भी सदर अस्पताल समेत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षित प्रसव के लिए सुरक्षा के मद्देनजर समुचित व्यवस्था उपलब्ध हैं। इसके अलावा प्रसव के बाद महिलाओं को स्वास्थ्य एवं शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आवश्यक जानकारी भी दी जाती है। ताकि प्रसव के पश्चात भी माता एवं शिशु को किसी प्रकार की शारीरिक पीड़ा नहीं हो और होने पर तुरंत आवश्यक उपचार करा सकें।गर्भावस्था के दौरान हर महिलाओं के मन में सामान्य व सुरक्षित प्रसव को लेकर तरह-तरह के सवाल उठते हैं। हर महिला सामान्य और सुरक्षित प्रसव चाहती है। इस दौरान छोटी सी लापरवाही और नजरअंदाज करना बड़ी मुसीबत का सबब बन जाती है। इसलिए, सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देने की जरूरत है। सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थान यानी अस्पतालों में पर्याप्त सुविधा उपलब्ध हैं और सुरक्षा के हर मानकों का भी ख्याल रखा जाता है। इससे न सिर्फ सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि मातृ-शिशु मृत्यु दर में भी कमी आएगी।

बांका जिला के निजी अस्पतालों में होगी रैपिड एंटीजन टेस्ट से कोरोना की जांच

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• निदेशक प्रमुख डॉ नवीन चंद्र प्रसाद ने पत्र जारी कर सिविल सर्जन को दिया दिशानिर्देश

•जांच के लिए सिविल सर्जन को किया गया है प्राधिकृत

बांका/ 17 मई-

जिला में कोरोना का संक्रमण तेजी से फ़ैल रहा है. संक्रमित मरीजों की संख्या में भी लगातार वृद्धि देखी जा रही है. मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लगातार अस्पतालों में मरीजों की चिकित्सा को लेकर प्रयासरत है. सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है ताकि कोरोना के मरीजों को तत्काल चिकित्सीय उपचार उपलब्ध हो सके. स्वास्थ्य विभाग संक्रमण की जांच हेतु पूरे जिले में रैपिड एंटीजन टेस्ट से कोरोना की जांच के लिए संकल्पित है. इसी क्रम में अब निजी अस्पतालों में संक्रमण की जांच के लिए व्यवस्था की गयी जाएगी. जिस मद्देनजर रोग नियंत्रण, लोक स्वास्थ्य, पारा मेडिकल स्वास्थ्य सेवाएं, बिहार पटना के निदेशक प्रमुख डॉ. नवीन चंद्र प्रसाद ने सिविल सर्जन को पत्र जारी कर निजी अस्पतालों के लिए जरुरी दिशानिर्देश जारी किये हैं.

जांच के लिए सिविल सर्जन को किया गया है प्राधिकृत:

भारतीय आर्युविज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की दिशा निर्देश के आलोक में यह निर्णय लिया गया है कि सभी प्रकार के निजी चिकित्सा सेवा संस्थान, डायग्नोस्टिक सेंटर एवं लैबोरेट्री में रैबिट एंटीजन कीट के माध्यम से कोविड-19 जांच की सुविधा प्रदान की जाएगी। निजी चिकित्सा संस्थानों में रैपिड एंटीजन किट के माध्यम से जांच के लिए सिविल सर्जन को प्राधिकृत किया गया है। सिविल सर्जन से अनुमति प्रदान करने के बाद ही रैपिड एंटीजन किट के माध्यम से निजी संस्थान जांच कर सकते हैं। संबंधित निजी अस्पताल कोविड-19 से संबंधित सभी प्रोटोकॉल के साथ आईसीएमआर पोर्टल पर दिए गए निर्देश का पालन करेंगे। हर दिन के पूरे टेस्टिंग का विवरण आईसीएमआर पोर्टल पर अपलोड करना होगा और पोर्टल पर अपलोड करने संबंधी जानकारी जिला स्वास्थ समिति, पटना को देनी होगी।

निजी स्वास्थ्य संस्थानों को इन शर्तों का करना होगा पालन:

रैपिड एंटीजन कीट जांच के लिए निजी स्वास्थ्य संस्थानों को शर्तों का पालन करना होगा। संबंधित निजी चिकित्सा संस्थान में अनिवार्य रूप से पैथोलॉजिस्ट, माइक्रोबायोलॉजिस्ट उपलब्ध कराने होंगे तथा संबंधित संस्थान के लैब टेक्नीशियन एवं डाटा एंट्री ऑपरेटर उपलब्ध कराना होगा तथा उनका
दो दिवसीय प्रशिक्षण सदर अस्पताल में कराया जाएगा। जिन्हें रैपिड इंजन किट से जांच एवं राज्य के पोर्टल पर जांच से संबंधित आंकड़ों को प्रविष्ट करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। बायो मेडिकल वेस्ट डिस्पोजल के लिए बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देश का पालन करना अनिवार्य होगा। राज्य स्वास्थ्य समिति से संपर्क कर निजी संस्थानों को डाटा एंट्री ऑपरेटर को लॉगिन पासवर्ड उपलब्ध कराया जाएगा ।अनुमति प्राप्त निजी चिकित्सा संस्थान अनिवार्य रूप से प्रतिदिन किए जाने वाले जांच राज्य स्वास्थ समिति बिहार के पोर्टल पर प्रविष्ट भी करेंगे।

प्रसिद्ध डॉक्टरों ने कहा कि अपनी मानसिक संतुलन बनाए रखें और घबराएं नहीं

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-आशा और चिकित्सा की कड़ी बनाएं और कोरोना की कड़ी तोड़े।

-प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय पटना के द्वारा ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन

-बिहार इंटर फेथ फोरम फॉर चिल्ड्रन और यूनिसेफ के सहयोग से आयोजन

पटना, 16, मई: “मेरा सभी से निवेदन है कि आप सभी शरीर के इलाज के साथ अपने मन को भी स्वस्थ और मजबूत रखें। सकारात्मक सोचें और अपना और अपने परिवार का ध्यान रखें।” उक्त बातें राज्य स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ल ने सभी को प्रेरणा और हौसला देते हुए ऑनलाइन मैसेज के द्वारा कही। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय पटना के द्वारा, बिहार इंटर फेथ फोरम फॉर चिल्ड्रन (बीआईएफसी) और यूनिसेफ के सहयोग से किये गए “आशा और चिकित्सा की कड़ी बनाएं और कोरोना की कड़ी तोड़े” बी. के. ज्योति, प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ने ईश्वरीय विश्वविद्यालय, पटना, सभी को बताया, “कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था कोरोना के वक्त लोगों, डॉक्टर, नर्सें और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों के बढ़ते डर और चिंता को कैसे संभाला जाये और उनकी भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य को सकारात्मक रूप से बनाये रखा जाये।”

सकारत्मक सोच जरूरी:

डॉ सी. एम. सिंह, अधीक्षक, एम्स, पटना, ने बताया कि “हम सभी डॉक्टर, नर्सें और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी लोगों के मानसिक तनाव को संभालने में प्रशिक्षित हैं। हम मरीज़ो की और उनके परिवार वालों की सकारात्मक मानसिकता बनाए रखने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि सभी इस समय पूरी सावधानी से काम कर रहे हैं। सभी कर्मचारी पी. पी. ई. किट्स पहनकर और सारी सावधानियों को बरतकर लोगों का ध्यान रख रहे हैं।

5 से 10 % लोगों को ऑक्सीजन की होती है जरूरत:

“कोविड -19 के मरीज़ो में से 80-85 % लोगों को सिर्फ सर्दी या बुखार जैसे लक्षण दिखाई देंगे और वह ठीक हो जाते हैं। सिर्फ 5-10 % लोगों को ऑक्सीजन की जरुरत होती है और उसमे से भी चंद लोग आई. सी. यु. में भर्ती होते हैं।” यह बातें डॉ शेखर कुमार, सलाहकार, न्यूरो फिज़िशियन, पटना न्यूरो केयर, ने कही
साथ ही उन्होंने लोगों से अनुरोध किया कि वे इस दौर में घबराएं नहीं।

गंभीर मरीज ही अस्पताल में हों भर्ती:

डॉ वीणा सिंह, सह-प्राध्यापक, एम्स, पटना, ने बताया कि, “सारे हस्पतालों में प्रोटोकॉल्स के मुताबित केवल उन्ही मरीज़ो को भर्ती किया जा रहा है जिनकी गंभीर स्थिति है। बाकी सभी को हम सलाह देते हैं कि वह घर पर कोविड-19 सुरक्षा व्यवहारों का पालन करते हुए अपना ध्यान रखें और हम उनके साथ लगातार संपर्क में रहते हैं सलाह देने के लिए।”

निपुण गुप्ता, संचार विशेषज्ञ, यूनिसेफ, बिहार, ने कहा कि , “सभी डॉक्टरों से निवेदन है कि वह सारे हस्पतालों में मनोवैज्ञानिक परामर्श (साइकोलॉजिकल काउंसलिंग) की सुविधा उपलब्ध करवाएं। मरीजों और उनके रिश्तेदारों और खासकर उनके बच्चों के लिए। ” उन्होंने बताया कि कई बच्चे कोविड-19 की वजह से अनाथ हो गए हैं और सभी बच्चों के ऊपर मानसिक और भावनात्मक तनाव बढ़ गया है। बच्चों की मदद के लिए सभी बिहार सरकार की परवरिश योजना का ध्यान रखें और राष्ट्रीय हेल्पलाइन CHILDLINE 1098 पर कॉल करें।

अधिक जानकारी मानसिक अवसाद का कारण:

डॉ बनारसी लाल शाह, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के मेडिकल विंग के एवर-हेअल्थी अस्पताल के निदेशक ने कहा कि , “हमें जानकारी सिर्फ उतनी ही लेनी चाहिए जितनी आवश्यक हो। हमे ज़्यादा जानकारी से अपने मानसिक तनाव को बढ़ाना नहीं चाहिए।”

डॉ प्रमोद कुमार, पी. के. इमेजिंग, ने कहा, “सभी डॉक्टरों को यह प्रयास करना चाहिए कि मरीज़ो को सकारत्मक विचारों से उनकी मानसिक स्तिथि संभालने में मदद करें ताकि वह जल्द से जल्द स्वस्थ हो जाएं।”

कार्यक्रम का संचालन बी. के. ज्योति जी द्वारा किया गया और बी. के संगीता जी द्वारा प्रतिभागियों को ध्यान लगाने की और सकारात्मक विचार रखने की तकनीक बताई गई।

कार्यक्रम के मुख्य प्रतिभागी के रूप में डॉ सी. एम. सिंह (अधीक्षक, एम्स, पटना), डॉ शेखर कुमार (सलाहकार, न्यूरो फिज़िशियन , पटना न्यूरो केयर ), डॉ प्रमोद कुमार (पी. के. इमेजिंग), डॉ वीणा सिंह (सह-प्राध्यापक, एम्स पटना), डॉ बनारसी लाल शाह (प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के मेडिकल विंग के एवर-हेअल्थी अस्पताल के निदेशक), डॉ अजय कुमार (निदेशक पारस एच. एम. आर. आई. हॉस्पिटल और पाम व्यू हॉस्पिटल), निपुण गुप्ता (संचार विशेषज्ञ, यूनिसेफ, बिहार) और बी. के. ज्योति और बी. के संगीता (प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, पटना) शामिल हुए।

*कोरोना काल में ‘प्रतिष्ठा’ संस्था के द्वारा गरीबो को मदद*

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दिल्ली:
कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर के बीच देश के गरीब और मिडिल क्लास परिवारों पर दोहरी मार पड़ रही है। गरीब एवं मज़दूर वर्ग पर जहाँ एक तरफ संक्रमण से जान जाने का खतरा बना हुआ है तो वहीं दूसरी तरफ भूख से। कोरोना महामारी की इस लहर ने करोड़ों लोगों को गरीबी की ओर धकेल दिया है।

जहाँ सरकारें अनेकों योजनाओं के माध्यम से गरीबों की मदद कर रही हैं, वहीँ कई सामाजिक एवं निजी संस्थान भी आगे आ रहे हैं। मज़दूरों से बात करने पर उन्होंने बताया की कोरोना के इस दौर में जहां रोज़ की दिहाड़ी-मज़दूरी तो बंद ही हुई है साथ ही साथ उनके सामने दो वक़्त के भोजन की समस्या भी उत्पन हो गयी है।

इसी कड़ी में दिल्ली भाजपा युवा मोर्चा के भूतपूर्व प्रवक्ता एवं ‘प्रतिष्ठा’ नामक समाज सेवी संस्था के संस्थापक सुरेंद्र कुमार दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में गरीबों और बेघर लोगो को मुफ्त भोजन वितरित कर रहे हैं। सुरेंद्र कुमार रोजाना दिल्ली के अलग-अलग कैंपो के माध्यम से हज़ारों गरीब लोगों की सहयता कर रहे हैं।

बता दें कि सुरेंद्र कुमार भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को अपना प्रेरणा स्त्रोत मानते हैं और उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन मानव कल्याण और पर्यावरण संरक्षण में समर्पित किया है। सुरेंद्र कुमार को संयुक्त राष्ट्र संग के बाल सुधार से जुडी संस्था ‘चिल्ड्रन फाउंडेशन एवं जल वायु परिवर्तन और पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था ने भी सम्मानित किया है।

“सुमित्रा शर्मा एक युग का समापन”

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देश की जानी मानी समाज सेविका और सुमित्रा फाउंडेशन की नींव रखने वाली श्रीमती सुमित्रा शर्मा का देहांत पांच मई को 73 वर्ष की उम्र मे हदय गति रूकने से हो गया।

श्रीमती सुमित्रा शर्मा प्रदेश के जाने-माने व्यापारिक और राजनीतिक परिवार से सम्बंध रखती थी, अपने पीछे वो अपने चार बेटों और उनके परिवार को छोड़कर गयी है, जिसमे देश के जाने-माने औधोगिक सलाहकार और मानवाधिकार परिषद के राष्ट्रीय सचिव चिरंजीत कुमार शर्मा उनके सबसे छोटे पुत्र है,जो देश की राजनीति और औधोगिक जगत में जाना पहचाना नाम है, चिरंजीत शर्मा अपनी माताजी को ईश्वर की तरह पूजते थे और उनके नाम से सुमित्रा फाउंडेशन बनाकर भूखमरी और ब्लाइंड लोगों के लिए महत्वपूर्ण कार्य करते हैं वो भी बिना किसी सामाजिक और सरकारी आर्थिक मदद लिये।
सुमित्रा जी ने अपने सभी बेटों को इस तरीके से पाला था कि आज उनके हर बच्चा समाज को एक नयी दिशा दे रहा है, उन्होंने अपने साथ अपने बच्चों को जीवन में कडा संघर्ष के साथ कैसे अनुशासित रहा जाता है सिखाया और गरीबों के उत्थान के लिए कैसे जीवन समर्पित किया जाता है सिखाया।
समाज के हर स्तर पर सुमित्रा जी ने अपनी अमिट छाप छोड़ी है, समाज के जाने-माने लोग उनके जीवन को एक युग मानकर उनकी मृत्यु को एक युग के अंत के रूप में मान रहें हैं।