टीके को लेकर एक समान नीति बने, तीसरी लहर की दहशत ना फैलाएं- राजीव कौशिक, डायरेक्टर, बीएनएफटी

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नईदिल्ली-

बीएनएफटी के डायरेक्टर राजीव कौशिक ने कहा कि देश में कोरोना का कहर जारी है। वहीं देश के विभिन्न इलाकों में वैक्सीन का कार्य भी बड़ी तेजी के साथ किया जा रहा है। लेकिन अभी भी कई कमियां है। सरकार के निर्देश के बाद अब 18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति को भी वैक्सीन लगाया जा रहा है जिसके लिए निरंतर रजिस्ट्रेशन भी किया जा रहा है लेकिन अभी कई समस्याएं हैं।

राजीव कौशिक देश में 18 वर्ष से अधिक आयु के 91 करोड़ लोगों के लिए टीके की आवश्यकता है। देश में उत्पादन क्षमता को देखते हुए इतनी बड़ी आबादी के टीकाकरण में बहुत विलंब होगा। यह तय है। इसलिए केंद्र सरकार को टीका आयात के लिए भी करार करना चाहिए। पूरे देश में टीकाकरण की एक समान नीति बने जिसके क्रियान्वयन की सामूहिक जिम्मेदारी केंद्र और राज्यों की हो। निर्वाचन आयोग के बूथ लेवल पर नियुक्त बीएलओ के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग के निर्देशन में दैनिक या साप्ताहिक कैंप लगाकर कम समय में पूर्ण टीकाकरण किया जा सकता है।

राजीव कौशिक ने कहा कि निश्तिततौर आज कोरोना पर नियंत्रण पाने के लिए समस्त देशवासियों को टीका लगना आवश्यक है। इसके लिए केंद्र सरकार अपने स्तर पर टीके खरीदकर राज्यों की जनसंख्या के आनुपातिक आधार पर आवंटित करें। टीके की आपूर्ति बढ़ाने के लिए सरकार पेटेंट कानून में संशोधन तथा आयात बढ़ाने के उपाय करें।

राजीव कौशिक ने कहा कि राज्यों को टीकाकरण तो करना ही चाहिए। साथ ही गांवों, कस्बों ओर शहरी बस्तियों में कैंप लगाकर सबको चरणबद्ध तरीके से टीका लगाना चाहिए। इसके लिए स्वास्थ्य कर्मचारियों, पैरामेडिकल स्टाफ एवं व्यवस्था के लिए स्थानीय लोगों की सहायता लेनी चाहिए। जिससे गांव गांव तक हर स्तर के लोगों को वैक्सीन लगाया जाए। गांव में एक एक घर जाकर उनका सर्वे करके जन जागरण अभियान चलाना बेहद जरूरी है। आज देश में तीसरी लहर की दहशत फैलाई जा रही है उसे भी दूर करने की जरूरत है। जिसे जनजागरण से ही दूर किया जा सकता है। बीएनएफटी लगातार मोहल्ले में जाकर सेनिटाइजर का कार्य कर रहा है जिसमें आम आदमी का सहयोग भी हासिल हो रहा है।

 

रोहिणी विधानसभा में दूसरे “कोविड केयर सेंटर“ की शुरुआत’

“सेवा ही संगठन“ भाव से भाजपा लगातार जनसेवा में लगी है-सिद्धार्थन
’कोरोना प्रोटोकॉल काल का पालन करते हुए वैक्सीन अवश्य लगवाएं-विजेंद्र गुप्ता
नई दिल्ली, 15 मई। भाजपा सांसद उत्तर पश्चिम दिल्ली श्री हंसराज हंस, संगठन महामंत्री दिल्ली प्रदेश भाजपा श्री सिद्धार्थन और दिल्ली भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री विजेंद्र गुप्ता द्वारा आज रोहिणी के रजापुर, सेक्टर-9 संपूर्णा के प्रांगण में दूसरा निःशुल्क कोविड केयर सेंटर दीप प्रज्वलन कर जनता को समर्पित किया गया। इस कोविड केयर सेंटर में ऑक्सिजनयुक्त 15 बेड की व्यवस्था की गई है। जो आज से ही नागरिकों के लिए उपलब्ध है। इस अवसर पर श्री हंसराज हंस और श्री सिद्धार्थन ने श्री विजेंद्र गुप्ता द्वारा कोरोना काल में रोहिणी के निवासियों के लिए कोरोना को हराने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
श्री सिद्धार्थन ने कहा कि सेवा ही संगठन के भाव से भाजपा हर वो सुविधा मुहैया कराने का प्रयास कर रही है, जिससे आम जन को कोई असुविधा नहीं है और यही कारण है कि अब कोविड के केसों में लगातार कमी आ रही है। हमें पूर्ण विश्वास है कि आने वाले कुछ दिनों में ही कोरोना पूरी तरह से खत्म हो जाएगा, लेकिन उसके लिए हमें लगतार प्रयासरत रहना होगा। लॉकडाउन और अस्पतालों की स्थिति को देखते हुए दिल्ली की जनता काफी परेशान है। उन्होंने कहा कि मरीजों को लेकर लोग सरकारी अस्पतालों का चक्कर लगा रहे हैं जहां सुविधाओं का अभाव है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की कोशिश यही है की आम जनता को दवाइयां, ऑक्सीजन अस्पतालों में बेड, भोजन सहित जरूरी सामान उन तक पहुंचे ताकि इन्हें इन सब की चिंता करने की जरूरत ना हो और हम उसमें कामयाब भी हुए हैं।
श्री विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह कोविड केयर सेंटर सेवा भारती, संपूर्ण एनजीओ पुरुषोत्तम बंसल फाउंडेशन सामाजिक संगठनों के सहयोग से कोविड संक्रमित मरीजों के लिए 24 घंटे डॉक्टर, ऑक्सीजन, दवाइयां, नर्सिंग स्टाफ, भोजन सहित इलाज की सभी व्यवस्थाएं की गईं हैं। जिससे कि कोरोना संक्रमित मरीजों को प्राइमरी ऐड दी जा सकेगी। इससे क्षेत्र के लोगों को काफी राहत मिलेगी।
श्री विजेंद्र गुप्ता ने कोरोना काल में पिछले वर्ष लॉकडाउन के समय से लेकर निरंतर संपूर्णा के प्रांगण में प्रतिदिन जरूरतमंद लोगों की सेवा करते हुए कोरोना के कारण जान गवाने वाली श्रीमती आशु खेड़ा, श्रीमती संतोष उदयपुरिया और श्रीमती शशि जैन को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि पहला कोविड-19 सेंटर सेक्टर 15 रोहिणी में पिछले सप्ताह प्रारंभ किया था जो जनसेवा में काम कर रहा है। इस कोविड सेंटर पर भी ऑक्सीजन बेड से लेकर सभी आवश्यक सेवाएं डॉक्टरों की देखरेख में मरीजों को दी जा रही हैं।
श्री हंसराज हंस ने कहा कि पिछले 18 महीनों में पूरे देश में लगभग 25 करोड़ जनता तक हमने पका हुआ भोजन चाहे वह रसोई घर के माध्यम से है फिर होम आइसोलेट हुए लोगों को निजी तौर पर पहुँचाने का काम किया है और अभी भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोरोना से लड़ने के लिए कोरोना का टीका लगवाने, मास्क पहनने व दो गज सामाजिक दूरी के पालन पर विशेष जोर दिया। नंबर आने पर कोरोना का टीका अवश्य लगवाएं। टीका लगवाने के बाद भी कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करने में लापरवाही न बरतें। केवल तभी हम बार बार रूप बदलते हुए इस कोरोना को हरा पायेंगे।
इस अवसर पर उत्तर पश्चिम जिला के अध्यक्ष श्री देवेंद्र सोलंकी, क्षेत्रीय निगम पार्षद श्रीमती चित्रा अग्रवाल, संपूर्ण संस्था के संस्थापिका अध्यक्ष डॉ शोभा विजेंद्र, मंडल अध्यक्ष श्री पंकज गुप्ता, श्री बृजेश शर्मा, सुश्री स्मिता कौशिक व अन्य उपस्थित रहे।

वैक्सीनेशन के 14 दिनों बाद कर सकते हैं रक्तदान

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एनबीटीसी की नई गाइडलाइन में की गयी है चर्चा

भागलपुर, 15 मई:

कोविड आपदा के दौरान रक्तदान में आयी कमी के कारण ब्लड बैंक प्रभावित हुए हैं. ऐसे में युवाओं से रक्तदान के लिए लगातार अपील की जा रही है. कोरोना संकट के बीच आमजन कई अन्य घातक बीमारियों के उपचार में समस्याओं का सामना कर रहे हैं. इनमें ऐसे रोग शामिल हैं जिनके इलाज के लिए मरीज को खून की हमेशा जरूरत होती रहती है. कोविड आपदा खून की कमी से जूझ रहे मरीजों की परेशानी का सबब बन गया है. इस संकटकाल में रक्तदान करने वालों की संख्या में कमी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न संस्थाओं द्वारा रक्तदान करने के प्रति जागरूकता लायी जा रही है.

वैक्सीनेशन के 14 दिन बाद कर सकते हैं रक्तदान:
इस दिशा में स्टेट रिसोर्स यूनिट के मैटरनल हेल्थ ईकाई के टीम लीड डॉ प्रमोद ने लोगों से कोरोना वैक्सीनेशन से पूर्व रक्तदान करने की अपील की है. उन्होंने कहा है कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए बड़े पैमाने पर 18 वर्ष या इससे से अधिक आयुवर्ग के लोगों को टीका लगाया जा रहा है. ऐसे में वैक्सीनेशन के साथ-साथ जरूरतमंदों के लिए रक्त की माँग को पूरा करने हेतु रक्तदान भी आवश्यक है. उनका कहना है कि कोविड संक्रमण काल में भी सुरक्षित रह कर रक्तदान किया जा सकता है. नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यून कांउसिल की नई गाइडलाइन के मुताबिक कोविड टीकाकरण के पहले या दोनों डोज लेने के 14 दिनों बाद रक्तदान किया जा सकता है. उन्होंने कहा है कि रक्तदान किसी भी जरूरतमंद को एक नई जिंदगी दे सकता है.

रक्तदान से शरीर में बनता है नया खून, रहें स्वस्थ्य:
रक्तदान महादान है और कोविड काल में तमाम सुरक्षा उपायों का पालन करते हुए रक्तदान किया जा सकता है. रक्तदान का कोविड संक्रमण से कोई संबंध नहीं है. रक्तदान के कई फायदे भी हैं. यह शरीर में नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है और आपको स्वस्थ्य रखता है. रक्तदान से ह्रदयाघात की संभावना कम होती है. कोविड काल में रक्तदान करने से पूर्व ब्लड बैंक में संक्रमण से बचाव जैसे मास्क लगाना, सैनिटाइजर या साबुन पानी से हाथों की नियमित धुलाई, शारीरिक दूरी जैसे मानकों का पालन कर रक्तदान किया जा सकता है.

रक्तविकार संंबंधी रोगियों को होती है ब्लड की जरूरत:
रक्तविकार संबंधी कई ऐसी बीमारियां हैं जिसके लिए ब्लड की जरूरत होती है. ऐसे में उनलोगों का ध्यान रखना भी सभी की जिम्मेदारी हो जाती है. रक्तविकार की समस्याओं जैसे थैलीसीमिया, हीमोफीलिया व ब्लड कैंसर से प्रभावित लोगों को रक्त की हमेशा जरूरत होती है. एनीमिया प्रभावित गर्भवती महिलाओं के प्रसव संबंधी जोखिम को कम करने के लिए भी रक्त की जरूरत होती है. अत्यधिक रक्तस्राव से प्रसूता की जान भी जा सकती है. वहीं अन्य प्रकार के सर्जरी के दौरान भी रक्त की जरूरत लोगों को होती है. ऐसे समय के लिए अधिकतर लोग ब्लड बैंक पर ही निर्भर होते हैं. खून की आवश्यकता की पूर्ति तभी संभव है जब ब्लड बैंक में पर्याप्त खून का भंडारण किया गया हो. ऐसे में एक स्वस्थ्य व्यक्ति द्वारा रक्तदान किया जाना महादान माना जाता है

मुंगेर जिले में अब तक कुल 1,19, 357 लोगों ने ली कोरोना की वैक्सीन

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– जिले भर में कुल 91,840 लोगों ने ली कोरोना वैक्सीन की पहली डोज
– जिले में कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लेने वाले की कुल संख्या है 27,517

मुंगेर, 15 मई-

विगत 16 जनवरी से जिले में शुरू हुए कोरोना टीकाकरण महाअभियान के तहत 14 मई तक जिले में कुल 1,19, 357 लोगों ने कोरोना की वैक्सीन ले ली है। इसके साथ ही जिले के कुल 91,840 लोगों ने कोरोना वैक्सीन की पहली डोज ले ली है। जिले में कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लेने वाले लोगों की कुल संख्या 27, 517 है।
13,610 हेल्थ वर्कर ने कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज ले ली है-
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. पंकज सागर ने बताया कोरोना टीकाकरण महाअभियान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करते हुए जिले भर के कुल 13,610 हेल्थ वर्कर ने कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज ले ली है। इसके साथ ही जिले भर के कुल 8,324 फ्रंट लाइन वर्कर ने भी कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज ले ली है। उन्होंने बताया जिले भर में कोरोना वैक्सीन का पहला डोज लेने वाले 18 से 44 वर्ष के लोगों की कुल संख्या अभी 5977 है| वहीं 45 से 59 वर्ष के लोगों की कुल संख्या 14 मई तक 33,488 है। उन्होंने बताया जिले भर में कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लेने वाले 60 साल से अधिक उम्र के लोगों की कुल संख्या अभी 56408 है।
मुंगेर शहरी क्षेत्र में कुल 28725 लोगों ने कोरोना वैक्सीन ले ली है-
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. पंकज सागर ने बताया विभिन्न सेशन साइट पर 14 मई तक वैक्सीन लेने वाले लोगों की कुल संख्या इस प्रकार से है – असरगंज में कुल 6823 लोगों ने कोरोना का टीका लगवाया है| जिसमें कुल 5836 लोगों ने कोरोना टीका का एक डोज और 987 लोगों ने दोनों डोज ले लिया है। बरियारपुर में कुल 10,447 लोगों ने कोरोना का टीका लगवाया है जिसमें कुल 8044 लोगों ने एक डोज और 2403 लोगों ने दोनों डोज ले लिया है। इसी प्रकार से धरहरा में कोरोना वैक्सीन लगवाने वालों की कुल संख्या 10277 है जिसमें सिंगल डोज लेने वालों की कुल संख्या 7384 जबकि दोनों डोज लेने वालों की कुल संख्या 2893 है। जमालपुर में कोरोना वैक्सीन लगवाने वालों की कुल संख्या 15459 है जिसमें सिंगल डोज वालों की कुल संख्या 12,826 और दोनों डोज लेने वालों की कुल संख्या 2633 है। हवेली खड़गपुर में कुल 12565 लोगों ने वैक्सीन लगवाई है। जिसमें 9459 लोगों ने पहला डोज जबकि 3106 लोगों ने दोनों डोज ले लिया है। जिले के सदर प्रखंड में कुल 11082 लोगों ने वैक्सीन लगवाई है जिसमें 8436 ने फर्स्ट डोज जबकि 2646 ने दोनों डोज ले ली है। साथ ही जिले के संग्रामपुर, तारापुर और टेटिया बम्बर में कुल 9016, 9128 और 4285 लोगों ने टीका लगवाया है जिसमें 7484, 7069 और 3350 लोगों ने फर्स्ट डोज जबकि 1532, 2059 और 935 लोगों ने दोनों डोज ले ली है। बताया मुंगेर शहरी क्षेत्र में कुल 28725 लोगों ने कोरोना वैक्सीन ले ली है जिसमें 20706 ने फर्स्ट डोज जबकि 8019 लोगों ने दोनों डोज ले ली है। जमालपुर रेलवे में भी कुल 1550 लोगों ने वैक्सीन लगवाई है जिसमें 1246 लोगों ने फर्स्ट डोज जबकि 304 लोगों ने वैक्सीन की दोनों डोज ले ली है।

वैक्सीनेशन के 14 दिनों बाद कर सकते हैं रक्तदान

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एनबीटीसी की नई गाइडलाइन में की गयी है चर्चा

लखीसराय, 15 मई:

कोविड आपदा के दौरान रक्तदान में आयी कमी के कारण ब्लड बैंक प्रभावित हुए हैं. ऐसे में युवाओं से रक्तदान के लिए लगातार अपील की जा रही है. कोरोना संकट के बीच आमजन कई अन्य घातक बीमारियों के उपचार में समस्याओं का सामना कर रहे हैं. इनमें ऐसे रोग शामिल हैं जिनके इलाज के लिए मरीज को खून की हमेशा जरूरत होती रहती है. कोविड आपदा खून की कमी से जूझ रहे मरीजों की परेशानी का सबब बन गया है. इस संकटकाल में रक्तदान करने वालों की संख्या में कमी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न संस्थाओं द्वारा रक्तदान करने के प्रति जागरूकता लायी जा रही है.

वैक्सीनेशन के 14 दिन बाद कर सकते हैं रक्तदान:
इस दिशा में जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने लोगों से कोरोना वैक्सीनेशन से पूर्व रक्तदान करने की अपील की है. उन्होंने कहा है कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए बड़े पैमाने पर 18 वर्ष या इससे से अधिक आयुवर्ग के लोगों को टीका लगाया जा रहा है. ऐसे में वैक्सीनेशन के साथ-साथ जरूरतमंदों के लिए रक्त की माँग को पूरा करने हेतु रक्तदान भी आवश्यक है. उनका कहना है कि कोविड संक्रमण काल में भी सुरक्षित रह कर रक्तदान किया जा सकता है. नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यून कांउसिल की नई गाइडलाइन के मुताबिक कोविड टीकाकरण के पहले या दोनों डोज लेने के 14 दिनों बाद रक्तदान किया जा सकता है. उन्होंने कहा है कि रक्तदान किसी भी जरूरतमंद को एक नई जिंदगी दे सकता है.

रक्तदान से शरीर में बनता है नया खून, रहें स्वस्थ्य:
रक्तदान महादान है और कोविड काल में तमाम सुरक्षा उपायों का पालन करते हुए रक्तदान किया जा सकता है. रक्तदान का कोविड संक्रमण से कोई संबंध नहीं है. रक्तदान के कई फायदे भी हैं. यह शरीर में नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है और आपको स्वस्थ्य रखता है. रक्तदान से ह्रदयाघात की संभावना कम होती है. कोविड काल में रक्तदान करने से पूर्व ब्लड बैंक में संक्रमण से बचाव जैसे मास्क लगाना, सैनिटाइजर या साबुन पानी से हाथों की नियमित धुलाई, शारीरिक दूरी जैसे मानकों का पालन कर रक्तदान किया जा सकता है.

रक्तविकार संंबंधी रोगियों को होती है ब्लड की जरूरत:
रक्तविकार संबंधी कई ऐसी बीमारियां हैं जिसके लिए ब्लड की जरूरत होती है. ऐसे में उनलोगों का ध्यान रखना भी सभी की जिम्मेदारी हो जाती है. रक्तविकार की समस्याओं जैसे थैलीसीमिया, हीमोफीलिया व ब्लड कैंसर से प्रभावित लोगों को रक्त की हमेशा जरूरत होती है. एनीमिया प्रभावित गर्भवती महिलाओं के प्रसव संबंधी जोखिम को कम करने के लिए भी रक्त की जरूरत होती है. अत्यधिक रक्तस्राव से प्रसूता की जान भी जा सकती है. वहीं अन्य प्रकार के सर्जरी के दौरान भी रक्त की जरूरत लोगों को होती है. ऐसे समय के लिए अधिकतर लोग ब्लड बैंक पर ही निर्भर होते हैं. खून की आवश्यकता की पूर्ति तभी संभव है जब ब्लड बैंक में पर्याप्त खून का भंडारण किया गया हो. ऐसे में एक स्वस्थ्य व्यक्ति द्वारा रक्तदान किया जाना महादान माना जाता है

कोविड-19 संक्रमण वायरस को रोकने के लिए सार्वजनिक समारोह से रहें दूर

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– भीड़-भाड़ से दूर और घरों में ही रहना बचाव के लिए सबसे बेहतर और आसान उपाय

– लाॅकडाउन और गाइडलाइन का पालन कराने को लेकर प्रशासन ने बढ़ाई सख्ती, सामाजिक सहयोग भी जरूरी

खगड़िया, 15 मई, 2021

एक तरफ जहाँ कोविड-19 संक्रमण वायरस की दूसरी लहर चल रही है। वहीं, दूसरी ओर शादी समारोह का भी दौर शुरू हो गया है और जिले में श्राद्ध कार्यक्रम का भी आयोजन हो रहा है। हालाँकि, सुरक्षा के मद्देनजर कई लोग सरकार के अपील पर अपनी शादियां को फिलहाल स्थगित कर खुद के साथ परिवार व समाज के हित में बेहतर कदम भी उठा रहें हैं। जो ना सिर्फ परिवार व समाज के लिए बेहतर कदम है। बल्कि, राष्ट्रहित में भी बेहतर निर्णय है। वहीं, कुछ लोग किसी कारणवश कर भी रहें हैं। किन्तु, इस सुरक्षा के मद्देनजर इस दौरान सावधानी बेहद जरूरी है। इसलिए, अगर किसी कारणवश समारोह को रोकने में सक्षम नहीं है तो कम से कम सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित हो, इसका विशेष ख्याल रखें। वहीं, दूसरी ओर लोगों को भी वक्त को देखते हुए जहाँ भीड़ हो, वैसे जगह से फिलहाल दूर रहना चाहिए। साथ सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित हो, इसके लिए सहयोग करना चाहिए।

कम से कम लोग हो शामिल, इसका ख्याल रखना जरूरी :

जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. देवनंदन पासवान ने बताया, शादी समेत अन्य पारिवारिक कार्यक्रम वक्त को देखते हुए सरकार ने भी फिलहाल टालने की अपील की है। इसलिए, मेरा मानना है कि लोगों को भी सरकार की अपील को मानते हुए फिलहाल टाल देना चाहिए। अगर किसी कारणवश टाला नहीं जा सकता है तो समारोह में कम से कम लोग उपस्थित हों। इस बात का हर लोगों को ख्याल रखना जरूरी है। क्योंकि, यह बीमारी संक्रामक है। इसलिए, लोगों की जितनी भीड़ होगी इस बीमारी के संक्रमण को उतनी तेज रफ्तार मिलेगी। इसलिए, उन्होंने तमाम जिले वासियों से अपील की है कि सरकार का अपील का मानें और गाइडलाइन का शत-प्रतिशत पालन करें।

सार्वजानिक समारोह शामिल होने पर पूरी तरह रहे सतर्कत और सावधान :

अगर आप किसी कारण वश ऐसे आयोजनों से दूर नहीं हो सकते हैं तो इस दौरान पूरी तरह सतर्क और सावधान जरूर रहें। जैसे कि, समारोह स्थल पर हमेशा मास्क का उपयोग, शारीरिक दूरी का पालन, सेनेटाइजर का इस्तेमाल और साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें। इसके अलावा बचाव से संबंधित अन्य गाइडलाइन का भी पालन करें। ताकि संक्रमण का खतरा उत्पन्न नहीं हो सकें और खुद के साथ अन्य लोग भी सुरक्षित रहें। इसके बाद घर आने पर कपड़े को धो लें और स्नान करने के बाद ही घर में प्रवेश करें। तभी संक्रमण के खतरे से दूर रहेंगे।

किसी प्रकार की शारीरिक परेशानी होने पर तुरंत कराएं जाँच :

किसी भी समारोह में शामिल होने के पश्चात आपको किसी प्रकार की शारीरिक परेशानी हों तो जाँच कराएं। ताकि आपको समय पर यानी शुरूआती दौर में ही परेशानी का सही कारण पता चल सके और आसानी से परेशानी को दूर किया जा सकें। जाँच के पश्चात चिकित्सा परामर्श का पालन करें और अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें। दरअसल, भीड़-भाड़ से दूर रहना ही इस घातक महामारी से बचाव का सबसे बेहतर और आसान उपाय है।

प्रशासन ने भी बढ़ाई सख्ती, सामाजिक सहयोग भी जरूरी :

इस घातक महामारी को रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन ने भी सख्ती बढ़ा दी है और लगातार क्षेत्र भ्रमण कर लोगों से सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन करने की अपील कर रही है। इस दौरान गाइडलाइन को तोड़ने वाले लोगों को दंडित भी किया जा रहा है। ताकि अन्य लोग भी गाइडलाइन का पालन करें। इसलिए, प्रशासन के भय से नहीं। बल्कि खुद के साथ अपने परिवार व समाज के हित में गाइडलाइन का पालन जरूर करें।

इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर रहें :

– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच कराएं।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें और हमेशा सतर्क रहें।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें और निकलने पर निश्चित रूप से मास्क पहनें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।

शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 220 लोगों को पड़े टीके

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18 साल से अधिक उम्र के 170 युवाओं ने लिए टीके
45 साल से अधिक वाले भी 50 लोगों ने लगवाए टीके

बांका, 15 मई-

जिले में कोरोना के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग का अभियान जारी है। कोरोना की जांच और इलाज के बाद अब टीकाकरण अभियान जोर-शोर से चल रहा है। शनिवार को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 220 लोगों को कोरोना के टीके दिए गए। इनमें 170 लोग सिर्फ 18 साल से अधिक उम्र वाले थे, जबकि 45 साल से अधिक उम्र के भी 50 लोगों को कोरोना का टीका दिया गया। सभी लाभुकों को 30 मिनट की निगरानी के बाद घर जाने दिया गया। जो लोग टीका का पहला डोज ले रहे थे, उन्हें दूसरे डोज की तारीख बता दी गई। साथ ही हर हाल में कोरोना टीका का दूसरा डोज लेने के लिए कहा गया।
टीकाकरण अभियान ने जोर पकड़ लिया है-
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया टीकाकरण अभियान ने जोर पकड़ लिया है। खासकर जब से 18 साल से अधिक उम्र के युवाओं का टीकाकरण शुरू हुआ है, तब से लाभुकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं अब काफी लोगों ने कोरोना का टीका ले लिया है तो दूसरे लोगों में भी भय समाप्त हो रहा है। इस वजह से 44 साल से अधिक उम्र के लोग भी काफी संख्या में टीका लेने के लिए पहुंच रहे हैं।
80 लोगों की हुई जांच:
कोरोना टीकाकरण के साथ-साथ लोगों की कोरोना की जांच भी तेज गति से चल रही है। शनिवार को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 80 लोगों की एंटिजन किट से जांच की गई। डॉ. चौधरी कहते हैं कि कोरोना की चेन तोड़ने के लिए हर मोर्चे पर लड़ाई जारी रखनी होगी। यही वजह है कि कोरोना टीकाकरण के साथ-साथ जांच भी तेज गति से चल रही है। इस सबका असर भी हो रहा है। जिले में धीरे-धीरे कोरोना मरीजों की संख्या में भी गिरावट होती जा रही है।
कोरोना गइडलाइन का हर हाल में करें पालन:
डॉ. चौधरी कहते हैं कि टीकाकरण और जांच के साथ-साथ लोगों को कोरोना की गाइडलाइन का पालन भी हर हाल में करते रहना चाहिए। लोगों को घर से बाहर निकलते वक्त हर हाल में मास्क पहनना चाहिए। भीड़भाड़ से बचना चाहिए और सामाजिक दूरी का पालन करते हुए एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी रखनी चाहिए। ऐसा करते रहने से कोरोना की चपेट में आने से बचे रहेंगे। साथ ही दूसरे लोग भी कोरोना की चपेट में नहीं आएंगे।

राष्टीय पुस्तक न्यास द्वारा लोगों में मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण संबंधी मुद्दों के संबंध में जागरूकता बढ़ाने के लिए हेल्पलाइन की शुरुआत

 

 

राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) ने एक कोरोना हेल्पलाइन का शुरुआत की है ताकि महामारी से उपजे मानसिक – सामजिक चुनोतियों का सामना करने के लिए मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण संबंधित मुद्दों के संबंध में आम लोगों को समुचित जानकारी प्रदान की जा सके।

 

इस परियोजना से जुड़े प्रख्यात मनोवैज्ञानिक/परामर्शदाता सप्ताह के सभी दिनों में सुबह 10 से रात्रि 10 बजे तक कॉल करने वालों को मुफ्त सेवा प्रदान कर रहें हैं। मनोवैज्ञानिकों की टीम को चिकित्सा-सलाह संबंधित प्रश्नों पर सही जानकारी देने हेतु डॉक्टरों की भी एक टीम द्वारा सहायता प्रदान की जा रही है।

 

हेल्पलाइन की पहल को निम्लिखित आयामों के साथ जोड़ा जा रहा है:

 

  • सकारात्मक और प्रेरक मैसेजिंग तथा वीडियो संदेश और पोस्टर की श्रृंखला के साथ जोड़ा जा रहा है ताकि सोशल मीडिया अभियान के तहत जागरूकता पैदा करने व सही तरह की जानकारी लोगों तक पहुंचा कर उन्हें सशक्त बनाया जा सकें।
  • युवाओं, माता-पिता, शिक्षकों, पेशेवरों, वरिष्ठ नागरिकों तथा दिव्यांगों के साथ जुड़ने के लिए विभिन्न आयुवर्ग एवं पेशवरों के साथ संबंधित विषयों पर वेबिनार की एक श्रृंखला भी आयोजित की जा रही है
  • सूचनात्मक पैंफ्लेट एवं पॉकेट बुक्स की एक श्रृंखला का प्रकाशन।
  • हेल्पलाइन के माध्यम से एकत्र किए गए डेटा और इनपुट पर आधारित पुस्तकों का प्रकाशन।

 

इस परियोजना से निम्नलिखित मनोवैज्ञानिक/ मनोचिकित्सक परामर्शदाता/चिकित्सक (जिनमें से कुछ राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के लेखक भी हैं) जुड़े हैं :

 

डॉ. जितेंद्र नागपाल, डॉ. विदुर कौशिक, डॉ. नीतू कृष्णन, सुश्री हेमलता सूरी, डॉ. स्वाति मुखर्जी, डॉ. हर्षिता, कर्नल तरुण उप्पल, सुश्री रेखा चौहान, सुश्री अपराजिता दीक्षित, सुश्री सोनी सिद्धू, सुश्री पायल चौधरी, सुश्री रूचि छिब्बर।

 

 

 

एन बी टी हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त और संबंधित किए जाने वाले प्रश्न :

 

कोविड-19 से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर केंद्रित कॉल प्राप्त की जा रही हैं जिनमें महामारी से जुड़े चिकित्सा संबंधी प्रश्न तथा विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित मुद्दे शामिल हैं।

 

साथ ही कोविड-19 से स्वस्थ होने के उपरांत; टीकाकरण की चिंता, परीक्षा का तनाव, उदासी, चिन्ता और इससे संबंधित अन्य मुद्दे पर भी हेल्पलाइन पर सहायता ली जा रही है।

 

कोरोना स्टडीज़ सीरीज (कोरोना अध्ययन पुस्तकमाला)

 

राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत ने 2020 में कोविड-19 से निपटने के लिए कोरोना स्टडीज़ सीरीज की शुरुआत की। लॉकडाउन के उपरांत “कोरोना स्टडीज़ सीरीज” के नाम से सात पुस्तकों के सेट का प्रकाशन किया गया था। इन पुस्तकों में कोविड-19 के मनो – सामाजिक प्रभाव तथा कोविड-19 द्वारा लाई गई समस्याओं के समाधान के तरीकों के बारे में भी बताया गया है।

 

हेल्पलाइन नं.

8800409846 ( सुबह 10 बजे से सायं4 बजे तक)

8800409359 (शाम 4 बजे से रात्रि 10 बजे तक)

होम क्वारेंटाइन में रहने वाले संक्रमित मरीजों की स्वास्थ्य जाँच

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– होम विजिट कर स्वास्थ्य टीम ने की जाँच,
– ऑक्सीजन बीपी समेत अन्य स्वास्थ्य जाँच

खगड़िया, 14 मई-

होम क्वारेंटाइन में रहने वाले संक्रमित मरीजों को समुचित चिकित्सा सुविधा का लाभ मिले, इसके लिए स्थानीय स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह कटिबद्ध है। । विभागीय निर्देश पर शुक्रवार को जिले के चौथम, परबत्ता समेत अन्य प्रखंडों में होम क्वारेंटाइन में रहकर इलाज करा रहे मरीजों का स्वास्थ्य हाल जानने के लिए गृह भ्रमण (होम विजिट) अभियान चलाया गया। इस दौरान प्रशिक्षण प्राप्त स्वास्थ्य टीम द्वारा डोर-टू-डोर जाकर ऐसे मरीजों का स्वास्थ्य हाल जाना गया और आवश्यकतानुसार आवश्यक चिकित्सा परामर्श दिया गया। स्वास्थ्य टीम ने खुद की सुरक्षा का ख्याल रखते हुए मरीजों की स्वास्थ्य जाँच की ।

– होम विजिट कर मरीजों का हाल जान रही स्वास्थ्य टीम,
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, होम क्वारेंटाइन में रहने वाले संक्रमित मरीजों का लगातार 14 दिनों तक स्वास्थ्य अवलोकन किया जाना है। इस दौरान उनसे मिलकर उनका स्वास्थ्य हाल जानना है और उन्हें किसी भी प्रकार की शारीरिक पीड़ा होने पर आवश्यकतानुसार जरूरी चिकित्सा परामर्श देना है। साथ ही उनके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है या नहीं, इस बात का ख्याल रखना है और उनकी स्थिति से स्थानीय पीएचसी को अवगत कराना है। वहीं, बताया, स्वास्थ्य टीम द्वारा लगातार होम विजिट कर ऐसे मरीजों का स्वास्थ्य हाल जाना जा रहा है और इस महामारी से बचाव के लिए जागरूक भी किया जा रहा है। इस कार्य में केयर इंडिया का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है।

– स्क्रीनिंग, पल्स, ऑक्सीजन, बीपी समेत अन्य स्वास्थ्य जाँच :-
केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन चंदन कुमार ने बताया, होम क्वारेंटाइन में रहने वाले संक्रमित मरीजों की स्वास्थ्य जाँच के दौरान उनका तापमान, पल्सरेट , ऑक्सीजन, बीपी समेत अन्य स्वास्थ्य जाँच की गई । साथ मरीजों के परिजनों को इस महामारी से बचाव के लिए गाइडलाइन का पालन करने के लिए जागरूक किया गया।

– संक्रमितों के संपर्क में आने वाले लोगों को भी किया जा रहा है चिह्नित :-
होम क्वारेंटाइन में रहने वाले संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों को चिह्नित करने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ता को दी गई। जिसका पालन करते हुए आशा कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्र में ऐसे लोगों को चिह्नित कर स्थानीय पीएचसी को रिपोर्ट उपलब्ध करा रही हैं । इसके बाद निर्देशानुसार ऐसे लोगों को उचित स्वास्थ्य सुविधा का लाभ दिया जा रहा है।

– इस महामारी को रोकने के लिए वैक्सीनेशन जरूरी :-
इस महामारी को रोकने के लिए हर व्यक्ति को वैक्सीन जरूर लेनी चाहिए। इसलिए, वैक्सीनेशन की निर्धारित उम्र सीमा के दायरे में आने वाले सभी लोगों को वैक्सीनेशन कराना चाहिए। जिले के सभी वैक्सीनेशन सेंटरों पर लगातार वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है।

– कंटेनमेंटजोन पर प्रशासन रख रहा नजर :-
जिले में बनाए गए कंटेनमेंट जोन पर प्रशासन लगातार नजर रख रहा है। इस क्षेत्र के दायरे में आने वाले सभी लोगों की लगातार कोविड-19 जाँच की जा रही है। साथ ही इस महामारी से बचाव के लिए जागरूक भी किया जा रहा है। खगड़िया सदर के बीडीओ राजेश कुमार ने बताया, जिन गाँव में संक्रमित मरीज पाए गये हैं, उस गाँव में कंटेनमेंट जोन बना दिया गया है। ताकि संक्रमण की चेन को तोड़ा जा सके ।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर रहें :-
– लक्षण महसूस होने पर कोविड-19 जाँच।
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– अनावश्यक यात्रा से परहेज करें और भीड़-भाड़ से दूर रहें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित।

कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए जिले के अस्पतालों में सुरक्षित संस्थागत प्रसव की सुविधा

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– प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से कोरोना संक्रमित गर्भवती महिलाओं को रेफर किया जाता है सदर अस्पताल
– कोरोना संक्रमित महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए सदर अस्पताल के लेबर रूम में विशेष व्यवस्था

मुंगेर, 14 मई-

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच कोरोना गाइड लाइन और लॉकडॉउन के नियमों का पालन करते हुए सदर अस्पताल मुंगेर सहित जिले के सभी रेफरल अस्पताल, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्यय केंद्र पर गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराया जा रहा है।
स्वास्थ्य केंद्र पर सुरक्षित प्रसव स्त्री रोग विशेषज्ञ और जीएनएम नर्स के द्वारा कराया जा रहा-
मुंगेर के सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र आलोक ने बताया, जिले में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच जिले के सभी रेफरल अस्पताल के साथ- साथ सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव प्रसूति एवम स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर और जीएनएम नर्स के द्वारा कराया जा रहा है। उन्होंने बताया, जिले के रेफरल अस्पताल, प्राथमिक एवम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर सुरक्षित संस्थागत प्रसव के लिए आने वाली कोरोना संक्रमित गर्भवती महिलाओं का प्रसव वहां नहीं कराकर सुरक्षित प्रसव के लिए सदर अस्पताल मुंगेर रेफर कर दिया जाता है।

उन्होंने बताया कि विगत 14 अप्रैल को सदर अस्पताल मुंगेर में असरगंज से रेफर की गई कोरोना संक्रमित गर्भवती महिला फूल कुमारी का लेबर रूम सिस्टर नीतू के नेतृत्व में सुरक्षित प्रसव कराया गया था।

सदर अस्पताल मुंगेर में उपलब्ध है कोरोना संक्रमित गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव की सुविधा :
सदर अस्पताल मुंगेर के अस्पताल प्रबंधक तौसीफ हसनैन ने बताया सदर अस्पताल के लेबर रूम के ऊपरी तल पर कोरोना संक्रमित गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए अलग से लेबर रूम के साथ ही आइसोलेशन वार्ड की भी व्यवस्था की गई है। यहां साफ- सफाई के साथ विशेष रूप से सैनिटाइजेशन कि व्यवस्था की गई है। यहां कोरोना प्रोटोकॉल का बहुत ही सख्ती के साथ पालन किया जाता है। बताया कोरोना संक्रमित महिला के प्रसव के लिए आने के बाद लेबर रूम का विशेष तौर पर सैनिटाइजेशन किया जाता है। यहां काम करने वाले सभी स्टाफ के लिए मास्क, फेसशील्ड, पीपीई किट, ग्लव्स के साथ ही हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही बायो वेस्ट मैनेजमेंट के तहत सभी मेडिकल वेस्ट प्रोडक्ट का काफी सावधानी पूर्वक निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है ताकि किसी भी स्तर पर कोरोना का संक्रमण फैलने न पाए और लोगों को इससे बचाया जा सके।