शंतनुराव किर्लोस्कर ने स्वतंत्रता-पूर्व काल में ही की आत्मनिर्भर भारत की शुरुआत : डॉ. विजय भटकर

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सूर्यदत्ता ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूटद्वारा शंतनुराव किर्लोस्कर की २७ वीं पुण्यतिथि के अवसर पर पहला ‘आत्मनिर्भर भारत राष्ट्रीय पुरस्कार-२०२१’ प्रदान

पुणे : व्यापार और उद्यमी क्षेत्र में योगदान देनेवाले उद्योजक और किर्लोस्कर ग्रुप के प्रमुख पद्मभूषण शंतनुराव किर्लोस्कर के २७ वे पुण्यस्मरण पर सूर्यदत्ता ग्रुप ऑफ इन्स्टिट्यूट की और से ‘आत्मनिर्भर भारत राष्ट्रीय पुरस्कार-२०२१’ ख्यातनाम कंप्यूटर सायंटिस्ट पद्मभूषण डॉ. विजय भटकर को प्रदान किया. विज्ञान और माहिती तंत्रज्ञान क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए भारत को पहला सुपर कंप्यूटर देकर आत्मनिर्भर बनाने के कार्य के लिए डॉ. भटकर को सम्मानित किया गया. बावधन में डॉ. भटकर के कार्यालय में हुए इस कार्यक्रम में सूर्यदत्ता ग्रुप ऑफ इन्स्टिट्यूट के संस्थापक अध्यक्ष प्रा. डॉ. संजय चोरडिया, सल्लागार सचिन इटकर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी व समूह संचालक प्रा. डॉ. शैलेश कासंडे, कार्यकारी संचालक प्रा. सुनील धाडीवाल, प्रा. अक्षित कुशल आदी उपस्थित थे.

इस वक्त अपनी भावना व्यक्त करते हुए डॉ. विजय भटकर ने कहा की,”शंतनुराव किर्लोस्कर के स्मृती प्रित्यर्थ ये पुरस्कार मुझे मिल रहा है इसकी मुझे बहोत ख़ुशी है. डॉ. भटकर बोले स्वतंत्रपूर्व कालखंड में किर्लोस्कर उद्योग समूह ने भारतीय मूल के विश्व स्तरीय उत्पाद बनाए है. इसे कई देशों में निर्यात भी किया गया था. लक्ष्मणराव किर्लोस्कर के बाद शंतनुराव किर्लोस्कर के नेतृत्व ने भारत को विश्व में एक अलग पहचान दिलाई. शंतनुराव किर्लोस्कर ने वास्तव में आत्मनिर्भर भारत की शुरुआत को चिह्नित किया. स्वातंत्र्यपूर्व काल में ही इसकी पहल की गई थी.”

प्रा. डॉ. संजय चोरडिया ने कहा, “किर्लोस्कर ग्रुप ऑफ़ इंडस्ट्रीज के माध्यम से भारत को एक अलग पहचान दी है. उनकी स्मृति में हर साल भारत को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान देने वालों को सम्मानित करके समाज के लिए एक उदाहरण स्थापित करने के उद्देश्य से ‘आत्मनिर्भर भारत राष्ट्रीय पुरस्कार’ दिया जाएगा. भारत को पहला सुपर कंप्यूटर देकर आत्मनिर्भर बनाने के लिए इस वर्ष के पहले पुरस्कार से डॉ.विजय भटकर को सम्मानित किया गया. इस वर्ष का पहला पुरस्कार विजय भटकर को देकर खुशी मिल रही है. डॉ. विजय भटकर के नेतृत्व में निर्मित ‘परम’ सुपरकंप्यूटर ने माहिती तंत्रज्ञान के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को साबित कर दिया. उनका सम्मान हमारा सम्मान है.”

“कोरोना में वृद्धि हो रही है उसके साथ ऑक्सीजन और अन्य आपूर्ति में कुछ कमी लग रही थी. हालांकि इसमें सुधार हो रहा है. भारत में सबसे ज्यादा टीकाकरण शुरू है. आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए प्रकृति पर काबू पाने के बजाय, हमें प्रकृति के साथ प्रगति की दिशा में कदम उठाना होगा. भारत में आयुर्वेद, योग है. इसलिए हम आत्मनिर्भर हैं. इस पर शोध किए जाने की जरूरत है, दुनिया के सामने आए नए आविष्कारों और इससे उबरने के लिए नई चुनौतियों का सामना करना होगा. कोरोना पर काबू पाने के लिए एक सुपर कंप्यूटर की मदद ली जा रही है. भारतीय पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का मेल बनाते हुए नई दवाओं, टीकों को खोजने का प्रयास किया जा रहा है,” ऐसा डॉ. भटकर ने कहा.

“कोरोना अवधि के दौरान संसाधन उपलब्ध हो गए हैं. सभी मेडिकल स्टाफ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं. हालांकि, इन उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने के लिए कौशल के साथ अधिक लोगों की आवश्यकता है. इसके लिए सूर्यदत्ता समूह जैसे संगठनों को विभिन्न प्रकार के नवीन कौशल सिखाने चाहिए,”ऐसा भी डॉ. भटकर ने कहा. प्रा.डॉ. शैलेश कासंडे और सचिन इटकर ने भी अपने विचार साझा किए.

पद्मविभूषण डॉ. विजय भटकर के नाम से वार्षिक पुरस्कार की घोषणा
सूर्यदत्ता संस्था की और से पद्मविभूषण डॉ. विजय भटकर के नाम से वार्षिक पारितोषिक जाहीर
किए गए. सावित्रीबाई फुले पुणे विद्यापीठ के तहत, बीएससी और एमएससी इन कंप्यूटर साइंस के अंतिम वर्ष में, विश्वविद्यालय में आने वाले पहले छात्र को 51,000 रुपये का पुरस्कार और एक स्वर्ण पदक दिया जाएगा ऐसा डॉ. संजय चोरडिया द्वारा जानकारी दी गयी. माहिती तंत्रज्ञान क्षेत्र में उच्च शिक्षण घेत आत्मनिर्भर भारत के प्रगतीत योगदान देऊ इच्छिणाऱ्या विद्यार्थ्यांना हे पारितोषिक प्रोत्साहन ठरेल, असा विश्वास डॉ. भटकर यांनी व्यक्त केला.

युवाओं को बेहतर अवसर प्रदान करना ही मुख्य उदेश्य: डेम मुन्नी आयरन

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“युवा किसी भी समाज का भविष्य हैं”, यह कथन निस्संदेह इस तथ्य को उजागर करता है कि कोई देश का भविष्य युवाओं के हाथों में है, वे या तो देश को अंधेरे की ओर ले जा सकते हैं या इसे उज्ज्वल बना सकते हैं। परन्तु जैसा आज के समाज में हमारे युवाओं का व्यवहार है उसने किसी भी देश के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है।

युवाओं में शांति स्थापित करना अति आवश्यक है और शांति तब आती है जब कोई व्यक्ति अपने जीवन से वास्तव में संतुष्ट होता है, और इस संतुष्टि के लिए वित्तीय स्थिरता और स्वतंत्रता की आवश्यकता होती है। युवाओं को रोजगार प्रदान करने और उनके विकास के लिए व्यावसायिक अवसर प्रदान करना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

आर्ट 4 पीस अवार्ड्स की संस्थापक डेम मुन्नी आयरन ने युवाओं के बेहतर भविष्य और अवसर प्रदान करने के लिए वर्ष 2021 में ‘वर्ल्ड वाइड यूथ कांग्रेस’ की स्थापना की। इसपर मुन्नी आयरन ने कहा की वर्ल्ड वाइड यूथ कांग्रेस को लॉन्च करने के पीछे मिशन यह है कि समाज में बुरे कामों को खत्म किया जाए। जहां आज का युवा अपने स्वयं के मूल्य और जीवन के उद्देश्य को भूल गए हैं वहीँ इसके साथ क्रोध, अवसाद और खुद को नशीली दवाएँ और शराब जैसे नशे की ओर ले जाने जैसे तर्कहीन व्यवहार की ओर बढ़ रहे हैं जिसे सुधारने की आवश्यकता है और साथ ही नेताओं के समर्थन के साथ वैश्विक शांति कि और बढ़ना चाहिए।

आगे वह कहती हैं की अपने युवाओं को एक पहचान देने के लिए, हम उन्हें पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना चाहते हैं, जिनकी उन्हें वास्तव में आवश्यकता है। हमारे युवाओं की मानसिक, शारीरिक, आर्थिक और भावनात्मक सफलता सुनिश्चित करने के लिए, डॉ। डेम मुन्नी इरोन और उनकी टीम युवाओं को उनके कल्याण के बारे में शिक्षित करने के लिए कई कार्यशालाएं और शिक्षा सेमिनार आयोजित करेगी।

कोरोना के लक्षण दिखाई पड़े तो जांच रिपोर्ट का नहीं करें इंतजार

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-घरेलू स्तर पर अपना इलाज शुरू कर दें, भाप लें और गर्म पानी से गरारा करें
-कोरोना के अधिकतर मरीज सामान्य तरीके से इलाज हो जाने पर हो रहे हैं ठीक

बांका, 27 अप्रैल
कोरोना की दूसरी लहर चल रही है. जिन लोगों में कोरोना के लक्षण दिखाई पड़ रहे हैं और उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है तो वे लोग अपना इलाज करवा ही ले रहे हैं. कुछ लोग ऐसे भी सामने आ रहे हैं जिनमें लक्षण तो दिखाई दे रहे हैं, लेकिन उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ रही है. ऐसे लोगों को भी अपना तत्काल घरेलू तरीके से उपचार शुरू कर देना चाहिए.
कोरोना के अधिकतर मरीजों में मामूली लक्षण होते हैं:
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कोरोना के अधिकतर मरीजों में मामूली लक्षण होते हैं. इनका सामान्य तरीके से भी इलाज हो सकता है. कुछ ही गंभीर मरीज होते हैं, जिसका इलाज अस्पताल में भर्ती कर किया जाता है. इसलिए अगर आपको कोरोना के लक्षण दिखाई पड़े तो घरेलू स्तर से इलाज शुरू कर देना चाहिए. गर्म पानी से गरारा करने के साथ भाप लेने की भी कोशिश करें. इससे सामान्य स्तर पर आप ठीक हो सकते हैं.

बिना डॉक्टर की सलाह दवा का इस्तेमाल नहीं करें:
डॉ. चौधरी कहते हैं दवा का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बाद ही करें. अपने मन से दवा नहीं खाना चाहिए. इससे साइड इफेक्ट का खतरा रहता है. अगर मन में किसी प्रकार का संकोच हो तो अपने नजदीकी डॉक्टर से संपर्क कर दवा का उपयोग करें. अपने मन से भूलकर भी दवा नहीं खाएं और दवा का स्टोर भी मत करें. इससे दूसरे मरीजों को परेशानी हो सकती है.

घर के सदस्यों से बना लें दूरी:
डॉ. चौधरी कहते हैं अगर आपमें कोरोना के लक्षण दिखाई पड़ रहे हैं और रिपोर्ट नहीं आई हो तो इसके बावजूद आप घर के सदस्यों से दूरी बना लें. होम आइसोलेशन में रहें और कोरोना की गाइडलाइन का पालन करें. ऐसा करने से आपसे घर के सदस्य संक्रमित नहीं होंगे. बहुत सारे मामलों में देखा जा रहा है कि घर के सदस्य से एक दूसरे में संक्रमण हो रहा है. ऐसे में जैसे ही आप में कोरोना के लक्षण दिखाई पड़े, घर के सदस्य से अपना संपर्क दूर से ही रखें.

हर हाल में कोरोना की गाइडलाइन का पालन जरूरी:
डॉ. चौधरी कहते हैं कोरोना की गाइडलाइन का हर हाल में पालन करना जरूरी है. इस बीमारी को हमलोग सतर्कता से ही हरा सकते हैं, इसलिए घर से बाहर निकलते वक्त मास्क जरूर पहने और भीड़भाड़ से बचें. सामाजिक दूरी का पालन करें. घर में भी आप एक दूसरे के बीच 2 गज की दूरी का पालन करें और मास्क लगा कर ही रहें.

कोविड-19 संक्रमण से बचाव के लिए खुद को भी रखें सुरक्षित और दूसरों को भी करें प्रेरित

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– मुश्किल है वक्त पर सामाजिक सहयोग से जीतेंगे जंग, सभी लोग करें गाइडलाइन का पालन

– संक्रमित होने पर घबराएं नहीं, चिकित्सकों के सलाहानुसार कराएं इलाज

खगड़िया, 26 अप्रैल, 2021
कोविड-19 संक्रमण वायरस की रफ्तार दिनोंदिन तेज हो रही है। किन्तु, इससे घबराने की जरूरत नहीं है। बल्कि, यह वक्त है संयम और साकारात्मक सोच का सहारा लेकर इस घातक वैश्विक महामारी को मात देने का.एवं खुद भी सुरक्षित रहने और दूसरों को भी प्रेरित करने का। यह वक्त थोड़ा मुश्किल है, पर सच तो यह भी है कि मजबूत इच्छाशक्ति और साकारात्मक जीवनशैली के सामने कुछ भी असंभव नहीं है। इसलिए, इस घातक महामारी को रोकने, इसे जड़ से मिटाने एवं इससे बचाव के लिए लिए सभी लोग सतर्क और सावधान रहें। क्योंकि, यह बीमारी नहीं, बल्कि महामारी है। इसलिए, इसे खत्म होने में थोड़ा वक्त जरूर लगेगा पर निश्चित यह खत्म होगा। किन्तु, इसके लिए सामाजिक सहयोग की भी बेहद जरूरी है। तभी हम इस घातक महामारी को जड़ से मिटाने में सफल हो सकते हैं।

– संक्रमित होने पर घबराएं नहीं, चिकित्सकों के सलाहानुसार कराएं इलाज :-
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, कोविड-19 संक्रमण का प्रभाव जरूर बढ़ रहा है। इसकी रोकथाम के लिए समाज के हर तबके को आगे आना होगा और गाइडलाइन का पालन कर इस घातक महामारी को रोकने के लिए सहयोग करना होगा। उन्होंने आम लोगों से लोगों से अपील करते हुए कहा इस वैश्विक महामारी को रोकने के लिए सभी लोग आगे आएं और राष्ट्रहित में अपनी जिम्मेदारी निभाएँ। उन्होंने कहा, इस महामारी को रोकने के लिए जहाँ लगातार वैक्सीनेशन एवं जाँच अभियान चल रहा है। वहीं, संक्रमित मरीजों की इलाज के लिए व्यापक व्यवस्था भी उपलब्ध करायी गयी है। इसलिए, संक्रमित होने पर घबराएं नहीं। बल्कि, साकारात्मक सोच और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ चिकित्सकों के सलाहानुसार अपना इलाज कराएं।

मुश्किल है वक्त पर सामाजिक सहयोग से जीतेंगे जंग, सभी लोग करें गाइडलाइन का पालन :
कोविड-19 संक्रमण वायरस का बढ़ते प्रभाव के कारण वक्त जरूर थोड़ा मुश्किल है, पर सामाजिक सहयोग और एकजुटता के सामने कुछ भी मुश्किल नहीं है। इसके लिए लोगों को खुद जागरूक रहकर आस-पास के लोगों को भी जागरूक करने की जरूरत इ. समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन और बचाव से संबंधित एहतियात जारी रखने की जरूरत है। साथ ही अपनी बारी आने पर सभी लोग कोविड का टीका जरुर लें. देश भर में 1 मई से 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों का टीकाकरण किया जाना है. कोरोना को मात देने के लिए 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को टीका लेना जरुरी है.

– लक्षण महसूस होते ही कराएं जाँच :-
इस घातक महामारी के बढ़ते प्रभाव को रोकने के समय पर इस बीमारी की जानकारी होना बेहद जरूरी है। इसलिए, इस महामारी के लक्षण दिखते ही तुरंत स्थानीय स्वास्थ्य संस्थान में जाँच कराएं और चिकित्सा परामर्श के अनुसार आगे का कदम उठाएं। ताकि महामारी का लक्षण गंभीर रूप नहीं ले सकें और समय पर समुचित इलाज हो सकें। क्योंकि, समय पर इलाज शुरु होने से ना महामारी गंभीर रूप से ले सकेगा और ना ही आपको ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर रहें :-
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– गर्म पानी का सेवन करें और सुबह-शाम गर्म पानी में नमक डालकर गरारा करें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– प्रत्येक धूप लगाएं, इससे शरीर में विटामिन-डी मिलेगी।
– अनावश्यक यात्रा से परहेज करें और भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– गर्म व ताजा खाना का सेवन करें और बाहरी व बासी खाना से बिलकुल दूर रहें।

मुंगेर जिले में 7669 कोरोना संक्रमित मरीजों में से 5162 मरीज हुए हैं स्वस्थ्य

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– जिले में अभी मौजूद हैं 2437 सक्रिय मामले , सोमवार को मिले कुल 223 कोरोना संक्रमित मरीज
– कोरोना जांच के लिए लिया गया है कुल 451150 लोगों का सैम्पल

मुंगेर, 26 अप्रैल-

जिले में सोमवार तक कुल 7669 कोरोना संक्रमित मरीजों में से 5162 मरीज कोरोना संक्रमण को हराकर स्वस्थ्य हो चुके हैं। इसके अलावा जिले के कुल 71 लोग कोरोना से लड़ाई हार चुके हैं| साथ ही मुंगेर से बाहर मुंगेर के कुल 13 लोगों ने भी कोरोना संक्रमण की वजह से अपनी जान गवां दी है।
अच्छी खासी संख्या में लोग कोरोना संक्रमण को मात देकर स्वस्थ्य भी हो रहे-
मुंगेर के सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र आलोक ने बताया जिले में लोगों के कोरोना संक्रमित होने की तुलना में अच्छी खासी संख्या में लोग कोरोना संक्रमण से लड़ाई जीतकर स्वस्थ्य भी हो रहे हैं। उन्होंने बताया, सोमवार को एक बार फिर से जिले में कुल 223 लोग कोरोना संक्रमित हो गए हैं| जिसमें 159 पुरुष और 64 महिलाएं हैं। जिले के विभिन्न आइसोलेशन सेंटर में या होम आइसोलेशन में सोमवार तक कुल 1279 मरीज भर्ती हुए। इनमें से 61 मरीज मुंगेर के आइसोलेशन में भर्ती हुए जबकि 46 मरीज को दूसरे जगह रेफर भी किया गया है। इसके साथ ही सोमवार को 24 मरीज आइसोलेशन सेंटर में भर्ती किए गए हैं।
कोरोना जांच के लिए कुल 451150 लोगों का सैम्पल लिया गया है –
उन्होंने बताया जिले में सोमवार तक कोरोना जांच के लिए कुल 451150 लोगों का सैम्पल लिया गया है। जिसमें से अभी कुल 2437 एक्टिव केस हैं । जिले में एंटीजन कोरोना जांच के लिए कुल 906 लोगों का सैम्पल लिया गया था। इसी तरह पीएमसीएच लैब पटना के लिए कुल 527 लोगों का सैम्पल संग्रहित किया गया। इसके अलावा ट्रूनेट जांच के लिए मुंगेर लैब में कुल 48 सैम्पल कलेक्ट किए गए हैं ।
नियमित साफ- सफाई के लिए साबून या हैंड सैनिटाइजर का नियमित इस्तेमाल करें-
उन्होंने बताया कि अभी कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच सभी जिले वासी अनिवार्य रूप से कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए मास्क लगाएं, सामाजिक दूरी के नियम के तहत एक दूसरे से कम से कम दो गज या छह फीट की दूरी बरतें। इसके साथ ही सभी लोग अपने हाथों की नियमित साफ- सफाई के लिए साबून या हैंड सैनिटाइजर का नियमित इस्तेमाल करें तभी कोरोना वायरस के संक्रमण को पूरी तरीके से हराया जा सकता है।

स्वास्थ्य सुविधा केंद्र एवं सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए जारी की गई स्तनपान मार्गदर्शिका

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– स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी की गई है स्तनपान मार्गदर्शिका
– कोरोना काल में माता के कोरोना पॉजिटिव हो जाने के बाद भी स्तनपान जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना है उद्देश्य

लखीसराय, 26 अप्रैल-

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच किसी वजह से यदि माता कोरोना संक्रमित हो जाती है तो वैसी स्थिति में संक्रमित माता के द्वारा तमाम कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए शिशु के स्तनपान जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसको ले देश के सभी स्वास्थ्य सुविधा केंद्र एवं सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए एक स्तनपान मार्गदर्शिका जारी की गई है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के द्वारा एक विस्तृत स्तनपान मार्गदर्शिका जारी की गई-
जिले के सिविल सर्जन डॉ. देवेंद्र चौधरी ने बताया, भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के द्वारा एक विस्तृत स्तनपान मार्गदर्शिका जारी की गई है इसमें स्तनपान के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी दी गई है। उन्होंने बताया, इस मार्गदर्शिका को जारी करने का मुख्य उद्देश्य माता के कोरोना संक्रमित होने के स्थिति में भी उसे स्तनपान कराने के लिए प्रोत्साहित करना है। मां का दूध नवजात शिशु के जीवन को बेहतर बनाने के साथ ही उसके शारीरिक और मानसिक विकास में भी मदद करता है। स्तनपान कराने से मां के स्वास्थ्य में भी सुधार होता है।

उन्होंने बताया , यदि किसी माता के कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि हो जाती है तो मेडिकल पहनें, यदि उसे खांसी है और उसने छाती की ओर मुंह करके खाँसा हो तो वैसी स्थिति में माता अपने स्तनों और छाती को धोएं और इसके बाद ही स्तनपान कराएं। इसके साथ ही यदि माता अपना स्तनपान कराने में सक्षम नहीं हो तो किसी की सहायता से मां का निकाला हुआ दूध बच्चे को पिलाएं इसके बाद जब मां दुबारा स्तनपान कराने की स्थिति में हो तो स्तनपान शुरू कराएं।
इससे अलग यदि मां का दूध अलग से निकलने में सक्षम नहीं हो और डोनर ह्यूमन मिल्क के उपलब्ध होने की स्थिति में माता के बिल्कुल ठीक होने तक बच्चे को डोनर ह्यूमन मिल्क ही पिलाएं। इसके बाद भी यदि माता बच्चे को स्तनपान कराने के लिए तैयार नहीं है तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर के परामर्श के अनुसार मां के दूध के वैकल्पिक साधनों के रूप में डब्बे का दूध दिया जा सकता है।
छह महीने तक नवजात शिशु को सिर्फ और सिर्फ मां का स्तनपान ही कराएं-
उन्होंने बताया यदि किसी माता के कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि नहीं होती है तो माता को नियमित स्तनपान के लिए प्रेरित करने के साथ ही उसकी सहायता भी करनी चाहिए। नवजात बच्चे को उसके जन्म के पहले घन्टे के अंदर मां का गाढ़ा पीला दूध यानी कॉलेस्टरोन अवश्य पिलाएं और जल्द से जल्द बच्चे की त्वचा से सम्पर्क स्थापित करें। इसके बाद छह महीने तक नवजात शिशु को सिर्फ और सिर्फ मां का स्तनपान ही कराएं। इसके बाद ही शिशु को माता के स्तनपान के साथ ऊपरी आहार दें। इस दौरान माता और शिशु एक पल के लिए भी एक- दूसरे से अलग नहीं रहें। माताएं अपने बच्चे को स्तनपान कराने से पूर्व अपने हाथों को साबुन – पानी या हैंड सैनिटाइजर से अच्छी तरह से साफ कर लें।

कोरोना काल में एक बेहतर अवसर हो सकता है डायरेक्ट सेलिंग

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कोरोना वायरस की दूसरी लहर आ चुकी है और कोरोना के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। देखा जाए तो वैक्सीनेशन का प्रभाव नहीं दिख रहा है। वहीँ लोगो को अपने स्वस्थ की चिंता सता रही है और उनकी आय पर भी असर पड़ रहा है।

कंज्‍यूमर सेंटिमेंट पर एक सर्वे से पता चलता है कि कोरोना के चलते 80% कामकाजी लोगों की आय में आई कमी आयी है और 90 फीसदी से ज्‍यादा लोगों का मानना है कि भविष्‍य में और भी कठिन समय आ सकता है। कई लोगों को डर है कि वे अपने परिवार की सुरक्षा कैसे कर पाएंगे और साथ ही साथ उन्‍हें हर स्‍तर पर आर्थिक नुकसान की आशंका है।

आय को बढ़ाने के लिए डायरेक्ट सेलिंग एक कारगर उपाय हो सकता है डायरेक्ट सेलिंग कंपनी अपने प्रॉडक्ट्स दुकानों के जरिए सेल करने के बजाय कंज्यूमर्स को सीधे बेचती हैं। एक डायरेक्ट सैलर दूसरे लोगों को सेल्स टीम से जोड़कर अपना डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क खड़ा कर सकता है। डायरेक्ट सैलर को सेल्फ एंप्लॉयड माना जाता है और उसे कमिशन मिलता है। यह इंडिया में डायरेक्ट सेलिंग का सबसे पॉप्युलर मॉडल है। आजकल डायरेक्ट सेलर्स इंटरनेट और सोशल नेटवर्किंग का इस्तेमाल भी करते हैं।

इसी कड़ी में एल्टॉस इंटरप्राइजेज पिछले 21 साल से डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री में एक जाना माना नाम है। कोई व्यक्ति में जो 18 वर्ष से अधिक आयु का है, इसमें शामिल हो सकता है और एल्टॉस का डायरेक्ट सैलर बन सकता है। इससे ना सिर्फ आय में बढ़ोतरी होती है अपितु परिवार की इच्छाओं को पूरा करने का अवसर भी मिलता है।

दिल्ली की सोनिका चावला ने द इंटरनेशनल ग्लैमर प्रोजेक्ट के अंतिम 60 में जगह बनाई।

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दिल्ली :
जीवन में कई कठिनाइयों से गुजरने के बाद सफलता की ऊंचाइयों को प्राप्त करना हर व्यक्ति के लिए संभव नहीं होता। हर व्यक्ति जीवन में चुनौतियों को जीतने के लिए साहस नहीं रखता है। पर कुछ लोग ऐसा कर जाते हैं, उन्ही में से दिल्ली की रहने वाली “सोनिका चावला” इसका एक आदर्श उदाहरण है।

सोनिका की बचपन से ही इक्छा थी कि वो ग्लैमर की दुनिया में अपना नाम स्थापित करें। जीवन के उतार चढ़ाव के बीच उन्हें ये मौका मिला जब सोशल मीडिया पर द इंटरनेशनल ग्लैमर प्रोजेक्ट के विज्ञापन को देखा, इससे सोनिका को अपने सपनों को सच करने का मौका मिला। सोनिका ने फिर मुड़ कर नहीं देखा और वह लगातार कड़ी मेहनत करती रही जिसका परिणाम यह हुआ की सोनिका को द इंटरनेशनल ग्लैमर प्रोजेक्ट के अंतिम 60 प्रतियोगिओं में जगह मिली।

सोनिका ने अपने सौंदर्य प्रतियोगिता में शिक्षा को एक माध्यम बनाया। शिक्षा जीवन का आधार है और लड़कियों की शिक्षा से महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है। वह इस संदेश को पूरे देश में फैलाना चाहती है। सोनिका पूरे भारत में बाल शिक्षा का प्रसार करना चाहती है ताकि कोई भी लड़की शिक्षा के अधिकार से वंचित न रह सके। सोनिका का मानना है कि समाज का विकास तभी संभव है जब महिला शिक्षित होंगी।

अपने जीवन के बारे में बताने पर कहा कि कम उम्र में ही अपने पिता को खोने के बाद, उनकी माँ ने उन्हें और उनके भाई-बहनों का मुश्किल समय में लालन-पालन किया। कठिन परिस्थिति के बावजूद माँ ने सोनिका की पढ़ाई से समझौता नहीं किया और उन्हें अच्छी शिक्षा दीक्षा दी। सोनिका ने दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया और फिर एनआईआईटी से कंप्यूटर में दो साल का कोर्स पूरा किया। सोनिका अपनी पढ़ाई और खेल दोनों में सर्वश्रेष्ठ साबित हुई। उन्होंने टाईकण्डो महासंघ में येल्लो बेल्ट भी हासिल की।

वह एक दोस्त के माध्यम से अपने पति विशाल से मिली और वह विशाल की महिलाओं के प्रति सम्मान वाली सोच से प्रभावित थी और दोनों ने आखिरकार अपने माता-पिता की सहमति से शादी करने का फैसला किया।

सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने उसकी जिंदगी बदल दी। सोनिका के गर्भावस्था के 9 महीनों में उसकी बेटी की मृत्यु हो गई। इससे वह पूरी तरह से टूट गयी थी। उसने उन तीन महीनों में बहुत कुछ झेला, वह अपने परिवार से घिरी होने के बावजूद अकेली महसूस करती थी। अपने बुरे समय में, उसे एहसास हुआ कि वह कौन है, वास्तव में यह वो दौर था जब समझ पाई की वह अपने जीवन में क्या चाहती है, और फिर अपने सपनों को पूरा करने का फैसला किया। इन्ही सब घटनाओ ने उसे अपनी शर्तों पर एक नया जीवन जीने की शक्ति और साहस दिया है।

आगे बताया की अपने भाई को खोना भी उसके जीवन का वह क्षण था, जब वह टूट गई, लेकिन सोनिका जैसी मजबूत महिला ने कभी भी जीवन को छोड़ना नहीं सीखा। उसने हमेशा अपनी कठिनाइयों के माध्यम से और अधिक मजबूत होना सीखा और हमेशा अपने जीवन में आगे बढ़ती रही।

सोनिका की माँ एक साहसी महिला हैं और उन्होंने अपने जीवन में कभी हार नहीं मानी है। सोनिका का कहना है कि उनके पति विशाल और उनकी माँ हमेशा उनका समर्थन करते हैं, और उनकी सफलता के पीछे उनका बहुत बड़ा हाथ है। सोनिका अपने पिता को अपना आदर्श मानती है, भले ही वह उसके साथ बहुत कम समय के लिए रहे हों, लेकिन पिता का साथ होना उनको आज भी एहसास दिलाता है।

कीट डीम्ड विश्वविद्यालय,भुवनेश्वर विश्व के नामी विश्वविद्यालयों की रैंकिंग के सर्वोच्च सूची में शामिल

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दी टाईम्स हायर एडुकेशन द्वारा प्रकाशित रैंकिंग में कीट डीम्ड विश्वविद्यालय,भुवनेश्वर विश्व के नामी विश्वविद्यालयों की रैंकिंग में 201+ में हुआ शामिल

रीड्युस इन्इक्वालिटींज मानदण्ड पर विश्व में 86रैंक कीट को मिला

भूनेश्वर: 22अप्रैल को कीट डीम्ड विश्वविद्यालय,भुवनेश्वर के जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार 2021 के दी टाईम्स हायर एडुकेशन रैंकिंग में विश्व के नामी विश्वविद्यालयों की रैंकिंग में कीट डीम्ड विश्वविद्यालय,भुवनेश्वर को 201+ में शामिल कर लिया गया है तथा कीट को रीड्युस इन्इक्वालिटींज मानदण्ड पर विश्व में 86रैंक प्रदान किया गया है। पार्टनरशिप मानदण्ड पर कीट 100+ स्थान पर एवं क्वालिटी एडुकेशन ,शांति,न्याय तथा स्ट्रोंग संस्थान की रैंकिंग में 201+ रैंक पर आंका गया है। गौरतलब है कि दी टाईम्स हायर एडुकेशन प्रतिवर्ष कुल अलग-अलग चार मानदण्डों पर विश्व के हजारों नामी विश्वविद्यालयों का सर्वेक्षण कर उसकी लेटेस्ट रैंकिंग का प्रकाशन करता है।2020 के सर्वेक्षण में कीट को 501+रैंक प्रदान किया गया था। साथ ही साथ वर्कप्लेस आफ दी ईयर श्रेणी में कीट को अवार्ड एशिया 2020 भी मिला था। सच तो यह भी है कि पिछले लगभग 17 वर्षों से कीट अपने सामाजिक दायित्व,शोधकार्य तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में सतत अग्रसर है।ऐसे में कीट-कीस के प्राणप्रतिष्ठाता तथा कंधमाल लोकसभा सांसद प्रोफेसर अच्युत सामंत ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए दी टाईम्स हायर एडुकेशन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कीट डीम्ड विश्वविद्यालय,भुवनेश्वर के समस्त शीर्ष अधिकारियों तथा संकायसदस्यों को बधाई दी है।

कोविड-19 संक्रमण: जिले में तेज हुई कोविड-19 जाँच व वैक्सीनेशन अभियान

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– खगड़िया बाजार समिति, पीडब्ल्यूडी सड़क किनारे समेत अन्य जगहों पर जाँच शिविर
– बचाव के लिए नहीं करें लापरवाही, तेजी के साथ फैल रहा है संक्रमण, रहें सावधान और सतर्क

खगड़िया-

कोविड-19 संक्रमण वायरस को रोकने के लिए जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में है और इस वैश्विक महामारी से बचाव के लिए आवश्यक कदम भी उठाये जा रहे हैं। किन्तु, इसके अलावा इस महामारी के दायरे से दूर रहने के लिए हमें सर्तक और सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि, यह महामारी काफी तेजी के साथ फैल रहा है। इसलिए, इससे बचाव के लिए वैक्सीनेशन के अलावा मास्क नियमित उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन ही सबसे बेहतर और आसान उपाय है। वहीं, इस महामारी को रोकने के लिए जिले में कोविड-19 वैक्सीनेशन व जाँच अभियान तेज कर दिया गया है। ताकि अधिकाधिक लोगों का वैक्सीनेशन एवं जाँच हो सके और पूरे समाज के लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें तथा लोगों में जागरूकता आए ।

– संक्रमण से बचाव के लिए उठाए जा रहे हैं आवश्यक कदम.. एहतियात जारी रखना भी जरूरी :-
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, इस महामारी को रोकने के लिए शासन-प्रशासन पूरी तरह सजग और कटिबद्ध है तथा आवश्यकतानुसार हर स्तर पर आवश्यक कदम भी उठाए जा रहे हैं। किन्तु, इसके साथ सामाजिक स्तर पर लोगों का सहयोग भी जरूरी है। इसके लिए लोगों को सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन करना चाहिए और बचाव से संबंधित एहतियात जारी रखना चाहिए। जैसे कि, सभी लोगों को मास्क की अनिवार्यता के साथ उपयोग, शारीरिक दूरी का पालन समेत बचाव से संबंधित अन्य आवश्यक उपाय का पालन जारी रखना चाहिए।

– होम क्वारेंटाइन में रहने वाले संक्रमित मरीजों पर रखी जा रही है नजर :-
जिले के विभिन्न क्षेत्रों में होम क्वारेंटाइन में रहने वाले संक्रमित मरीजों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह कटिबद्ध है। ऐसे मरीजों पर विभाग नजर रख रहा है और नियमित रूप से मेडिकल टीम गृह भ्रमण कर उनका स्वास्थ्य हाल जाना जा रहा है । साथ ही आवश्यकतानुसार आवश्यक दवाई भी उपलब्ध करायी जा रही है । ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो। इसके अलावा मरीज के परिवार वालों को भी इस महामारी से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है।

– राहगीरों का भी की गई कोविड-19 जाँच :-
कोविड-19 जाँच अभियान की रफ्तार को गति देने के लिए खगड़िया बाजार समिति, पीडब्ल्यूडी सड़क सड़क समेत अन्य सडकों व सार्वजनिक चौक-चौराहे पर कोविड-19 जाँच शिविर लगाया गया। जहाँ तैनात मेडिकल टीम द्वारा शिविर स्थल के समीप के स्थानीय लोगों के साथ-साथ राहगीरों की भी कोविड-19 जाँच की गई । ताकि जाँच अभियान की गति तेज हो और अधिकाधिक लोगों की जाँच हो सके । दरअसल, स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस महामारी को रोकने के लिया जाँच का दायरा बढ़ाना जरूरी है। इसी कारण जाँच की गति तेज कर दी गई है।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क का उपयोग एवं शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
– लक्षण महसूस होने पर तुरंत स्थानीय स्वास्थ्य संस्थान में कोविड-19 जाँच कराएं।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– यात्रा के दौरान सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– बाहरी और बासी खाना से बिलकुल दूर रहें।
– गर्म व ताजा खाना का सेवन करें।