डिजिटल स्कूल से प्रतियोगिता परीक्षा में क्षेत्र के छात्र अग्रणी होंगे- राजेश कुशवाहा, विधायक

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-बिहार में प्रथम डिजिटल स्कूल गोपालगंज में

-Tneos Eduloutions Limited नर्सरी से 12 वीं व प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी डिजिटल माध्यम से करवाएगी

पटना-

 

बिहार में प्रथम डिजिटल स्कूल का उद्घाटन 27 मार्च 2021 को गांव मछागर, हथुआ क्षेत्र में में हुआ। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद विधायक राजेश कुशवाहा ने डिजिटल स्कूल की विशेषता बताते हुए कहा कि बच्चों को सारी जानकारी और रूचिकर अध्ययन उपलब्ध होगा। इस क्षेत्र के बच्चे भी इस आपदा में पिछड़ेंगे नहीं, उन्हें यहां अद्यतन जानकारी भी हासिल होगी।

राजेश कुशवाहा ने कहा कि Tneos Eduloutions Limited ने जो भार उठाया है इससे यह तय है कि आने वाले दिनों में इस क्षेत्र के प्रतिभावान छात्र प्रतियोगिता परीक्षा में भी आगे होंगे।

राजेश कुशवाहा ने कहा है कि डिजिटल स्कूल का लक्ष्य यह है कि बच्चों को एक प्रेरणादायक ऑनलाइन कक्षा में भेजने का मौका देकर माता-पिता के लिए अधिक विकल्प प्रदान करना है जिसके लिए यह प्रयास सराहनीय है।

इस मौके पर Tneos Eduloutions Limited के डायरेक्टर मुकेश कुमार ने कहा कि इस डिजिटल स्कूल में जहां नर्सरी से 12 तक की छात्रों को पढ़ाई की व्यवस्था की गई है वहीं प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी भी कराई जाएगी।

Tneos Eduloutions Limited नर्सरी से 12 वीं तक की विद्यार्थियों के लिए TNEOS digital school खोला है, जिसमें एसबीपी  कंपटिटिव एकेडमी के माध्यम से प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कराई जाएगी।

 

मुकेश कुमार ने कहा है कि डिजिटल स्कूल का विस्तार पूरे बिहार में होगा। जहां आज बच्चे कोविड 19 की वजह से स्कूल से बच्चे दूर हैं वे अब इस ऐप्प के जरिए इस आपदा को अवसर में बदल देंगे।

 

इस मौके पर शैलेंद्र मौर्या ने कहा कि आज प्रतियोगिता परीक्षा का समय है ऐसे में दूर दराज व रिमोट इलाके के छात्र आज के दौर में पीछे न रह जाए इसके लिए विशेष व्यवस्था की जो इस एप्प में छात्रों को मिलेगा। सभी तरह के प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी भी इस ऐप्प के जरिए कर सकते हैं।

 

शैलेंद्र मौर्या ने कहा कि Edu-Tec ओन लाइन शिक्षा का ऐसा नेटवर्क तैयार कर रहा है जिससे यह सुनिश्चित हो कि सभी बच्चों के पास एक बेहतर स्तर की शिक्षा पहुंचे जिसे सभी को बराबर अवसर हासिल हो। इसी उद्देश्य के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं।

गौरतलब है कि Tneos Eduloutions Limited भारत की सबसे नवीन Edu-Tec कंपनी है, जो लोकप्रिय  tneos learning app की निर्माता है। TNEOs class 1-12 और एनडीए, सीडीएस, एएफसीएटी, एयरफोर्स, नेवी, एसएसआर, एए, बैंक, क्लर्क, एसएससी, आईबी, एफसीआई, रेलवे, राज्य पुलिस, बीएड आदि जैसी प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए अत्यधिक व्यक्तिगत और प्रभावी शिक्षण कार्यक्रम प्रदान करता है। यह ऐप्प अभी दुनिया भर में सभी प्रतियोगिता के लिए सबसे पसंदीदा शिक्षा प्लेटफार्मों में से एक बन गया है।

Tneos Eduloutions Limited दिल्ली की कंपनी है जो वर्षों से ओनलाइन शिक्षा पर शोध कार्य कर रहा है जिसने इस ऐप्प का निर्माण किया है जिसमें 24/7 वीडियो उपलब्ध है, छात्र की प्रगति के लिए व्यक्तिगत ज्ञान का आकंलन करता है, स्कूलों के सिलेबस पर आधारित पाठ्यक्रम को तैयार किया है। छात्रों को उनकी ही मातृभाषा में पढ़ाते हैं, वहीं कभी भी छात्र को अपने प्रश्न का जवाब मिल सकता है।

बिहार के पहले डिजिटल स्कूल के उद्घाटन के मौके पर एसडीओ,एसडीपीओ गेस्ट ओफ ओनर के रूप में मौजूद थे। जिन्होंने बच्चों में उत्साह भरे और अपने लक्ष्य को तय कर अध्ययन करने की सलाह भी दिए।

 

आपकी सेहत, आपकी थाली” थीम पर रंगोली बना पोषण पर जगाई अलख

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– पोषण पखवाड़ा के तहत मनेर प्रखंड परियोजना में हुआ विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन
– आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की रैली के साथ पोषण जागरूकता रथ को किया गया रवाना

पटना/मनेर-
होली के पकवानों की तैयारी के बीच पोषण की खुश्बू भी देखने को मिल रही हैं. शनिवार को जिले के मनेर प्रखंड स्थित बाल विकास परियोजना के द्वारा पोषण पर लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें पोषण पखवाड़ा के तहत एक तरफ़ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने रैली निकाली. वहीं पोषण पर अलख जगाने के लिए जागरूकता रथ भी रवाना किया। साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा “आपकी सेहत, आपकी थाली” थीम पर बनाई गयी रंगोली भी आकर्षण के केंद्र रहे. रंगोली के माध्यम से लोगों को बेहतर पोषण की जरुरत पर संदेश दिया गया.
पोषण रथ के माध्यम से पोषण पर दी जाएगी जानकारी :
मनेर बाल विकास परियोजना की सीडीपीओ सुषमा कुमारी ने पंचायतों में लोगों को पोषण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से पोषण जागरुकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जागरुकता उन्होंने बताया कि रथ पर बैनर व पोस्टर्स लगाए गए हैं। साथ ही, माइकिंग की व्यवस्था की गई है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को पोषण से संबंधित जानकारी दी जा सके। उन्होंने बताया कि माइकिंग के माध्यम से यह बताया जाएगा कि शिशु के जन्म के एक घंटे के भीतर मां के गाढे-पीले दूध से बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है. वहीं अगले छह माह तक शिशु को स्तनपान कराने से उनका शिशु डायरिया एवं निमोनिया जैसे रोगों से सुरक्षित रहता है. उन्होंने बताया कि बौनापन एवं दुबलापन से बच्चों को बचाने के लिए 6 माह के बाद अनुपूरक आहार की उपयोगिता बढ़ जाती है. इसलिए जागरूकता रथ के माध्यम से लोगों को अनुपूरक आहार के विषय में भी जानकारी दी जाएगी.

शुरूआती 1000 दिन होते हैं महत्वपूर्ण:
महिला पर्यवेक्षिका अपर्णा राय ने बताया कि महिला व युवतियों में होने वाले एनीमिया के साथ-साथ बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिये उचित पोषक आहार का सेवन जरूरी है। उन्होंने कहा अगर महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान सही पोषण मिले तो उन्हें कई तरह की बीमारियों से बचाया जा सकता है।
वहीं महिला पर्यवेक्षिका रंजना सिंह ने बताया कि गर्भावस्था से लेकर शिशु के 2 साल की आयु तक यानी शुरूआती 1000 दिन माँ एवं बच्चे के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होता है. इस दौरान उनके स्वास्थ्य एवं पोषण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है. उन्होंने बताया कि एनीमिया की समस्या को कम करने के लिहाज से उचित पोषण का विशेष महत्व है। पोषण पखवाड़ा के अलावा आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से समय-समय पर आयोजित होने वाले विभिन्न गतिविधियों में माध्यम से पोषण के प्रति लोगों को जागरूक करने का अभियान संचालित किया जाता है।इसमें हरी साग सब्जी, पालक, बथुआ, मेथी, गाजर, चना, सोयाबीन सहित अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ के सेवन की सलाह दी जाती है.

सभी कार्यकर्ताओं ने निभाई अपनी सहभागिता:
इस दौरान समेकित बाल वकास विभाग मनेर की सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बढ़ चढ़कर अपनी सहभागिता निभाई.

शेखपूरा को तम्बाकू मुक्त जिला बनाने के लिए जिला प्रशासन चलाएगा सघन अभियान : डीडीसी

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– सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने वालों पर होगी दण्डात्मक करवाई

– विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत सरकार द्वारा प्रकाशित गेट्स 2 के सर्वे में बिहार में तम्बाकू सेवन करने वालों में काफी कमी आई

शेखपुरा-
शेखपूरा को तम्बाकू मुक्त जिला बनाने के लिए जिला प्रशासन सघन अभियान चलाएगा। अब
तम्बाकू उत्पाद के निर्माता और थोक एवं खुदरा विक्रेता अब बिना बोर्ड के तम्बाकू उत्पाद नहीं बेच पाएंगे। उक्त बातें राज्य सरकार कि तकनीकी सहयोगी संस्थान सीड्स और जिला नियंत्रण कोषांग शेखपुरा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित त्रि- स्तरीय छापामार दस्ता एवं अन्य हितधारकों के प्रशिक्षण सह उन्मुखीकरण कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए डीडीसी ने कही। उन्होने बताया कि अब शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में कोई भी तम्बाकू उत्पाद नहीं बिकेगा। इसके साथ ही बच्चों और अवयस्कों के तम्बाकू उत्पाद बेचने पर उसके अभिभावकों को एक लाख तक का जुर्माना और 7 साल तक की सजा भी होगी । इस अवसर पर उन्होने जिला के सभी सबंधित अधिकारियों को तम्बाकू नियंत्रण के गुर भी सिखाये।

जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश देते हुए उन्होंने बताया कि तम्बाकू के दुष्परिणामों से बच्चों और अवयस्कों को बचाना बहुत ही आवश्यक है इसलिए स्कूलों में इससे से संबंधित कार्यक्रम का भी संचालन किया जाय और सभी शिक्षण संस्थानों के पास से तम्बाकू उत्पाद कि दुकानों को यथाशीघ्र हटाया जाए। इसके साथ ही आदेश के उलंघनकर्ताओं को सीओटीपीए, जेजे एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में दंडित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को अपने- अपने कार्यक्षेत्रों में कोटपा 2003 के विभिन्न धाराओं का शत प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है।

इस अवसर पर सीड्स के कार्यक्रम पदाधिकारी सुनील चौधरी ने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से तम्बाकू नियंत्रण कि आवश्यकता पर बल देते हुए कोटपा 2003 के विभिन्न धाराओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होने बताया कि बच्चे व युवा तम्बाकू उद्योग का सबसे सॉफ्ट टारगेट होते हैं जिन्हें लुभाने के लिए तम्बाकू कंपनी तरह- तरह के हथकंडे अख्तियार करती है। उन्होंने तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम में सभी विभागों को अपनी भूमिका निभाने का सुझाव देते हुए तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम कि आवश्यकता पर भी बल दिया

उन्होंने बताया, विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत सरकार द्वारा प्रकाशित GATS 2 के सर्वे में बिहार में तम्बाकू सेवन करने वालों में काफी कमी आई है, यह आंकड़ा 53.5% से घटकर अब 25.9% हो गई है।

इस अवसर पर समाहर्ता , एसडीओ, डीएसपी (हेड क्वार्टर), डीपीएम, कार्यक्रम पदाधिकारी मनोज कुमार झा जिला तम्बाकू नियंत्रण कोषांग के नोडल अफसर सहित सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी एवं थाना प्रभारी उपस्थित थे।

बिहार में प्रथम डिजिटल स्कूल का उद्घाटन 27 मार्च को गोपालगंज में

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पटना-
बिहार में प्रथम डिजिटल स्कूल का उद्घाटन 27 मार्च 2021 को गांव मछागर, हथुआ क्षेत्र में होने जा रहा है। इस डिजिटल स्कूल में जहां नर्सरी से 12 तक की छात्रों को पढ़ाई की व्यवस्था की गई है वहीं प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी भी कराई जाएगी।
TNEOS EDULOUTIons Ltd नर्सरी से 12 वीं तक की विद्यार्थियों के लिए TNEOS digital school खोलने जा रहा है, जहां एसबीपी कंपटिटिव एकेडमी के माध्यम से प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कराई जाएगी। इस डिजिटल स्कूल का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में हथुआ विधानसभा क्षेत्र के विधायक राजेश कुशवाहा करेंगे। इस मौके पर एसडीओ,एसडीपीओ गेस्ट ओफ ओनर के रूप में मौजूद रहेंगे।
TNEOS EDULOUTIONS Ltd के डायरेक्टर मुकेश कुमार ने बताया कि भारत की सबसे नवीन Edu-Tec कंपनी है, जो लोकप्रिय tneos learning app की निर्माता है। TNEOs class 1-12 और एनडीए, सीडीएस, एएफसीएटी, एयरफोर्स, नेवी, एसएसआर, एए, एससीआरए, बैंक, क्लर्क, एसएससी, आईबी, एफसीआई, रेलवे, राज्य पुलिस, बीएड आदि जैसी प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए अत्यधिक व्यक्तिगत और प्रभावी शिक्षण कार्यक्रम प्रदान करता है। यह ऐप्प अभी दुनिया भर में सभी प्रतियोगिता के लिए सबसे पसंदीदा शिक्षा प्लेटफार्मों में से एक बन गया है।
मुकेश कुमार ने कहा है कि हमारा लक्ष्य यह है कि बच्चों को एक प्रेरणादायक ऑनलाइन कक्षा में भेजने का मौका देकर माता-पिता के लिए अधिक विकल्प प्रदान करना है जिसके लिए हम लगातार तत्पर हैं।
गोपालगंज के मछागर हथुआ क्षेत्र में यह पहला डिजिटल स्कूल खोला जा रहा है इसके बाद इसका विस्तार पूरे बिहार में होगा। जहां आज बच्चे कोविड 19 की वजह से स्कूल से बच्चे दूर हैं वे अब इस ऐप्प के जरिए इस आपदा को अवसर में बदलने के संकल्प को आगे बढ़ाएगा। बच्चों को सारी जानकारी और रूचिकर अध्ययन उपलब्ध करना इस ऐप्प का लक्ष्य है।
आज प्रतियोगिता परीक्षा का समय है ऐसे में दूर दराज व रिमोट इलाके के छात्र आज के दौर में पीछे न रह जाए इसके लिए इडु टेक ने विशेष व्यवस्था की। सभी तरह के प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी भी इस ऐप्प के जरिए कर सकते हैं।
TNEOS EDULOUTIONS Ltd ने जारी विज्ञप्ति यह जानकारी दी है कि Edu-Tec ओन लाइन शिक्षा का ऐसा नेटवर्क तैयार कर रहा है जिससे यह सुनिश्चित हो कि सभी बच्चों के पास एक बेहतर स्तर की शिक्षा पहुंचे जिसे सभी को बराबर अवसर हासिल हो। इसी उद्देश्य के साथ कंपनी आगे बढ़ रहा है।
गौरतलब है कि TNEOS EDULOUTIONS Ltd दिल्ली की कंपनी है जो वर्षों से ओनलाइन शिक्षा पर शोध कार्य कर रहा है जिसने इस ऐप्प का निर्माण किया है जिसमें 24/7 वीडियो उपलब्ध है, छात्र की प्रगति के लिए व्यक्तिगत ज्ञान का आकंलन करता है, स्कूलों के सिलेबस पर आधारित पाठ्यक्रम को तैयार किया है। छात्रों को उनकी ही मातृभाषा में पढ़ाते हैं, वहीं कभी भी छात्र को अपने प्रश्न का जवाब मिल सकता है।

छः माह तक केवल स्तनपान है सर्वोत्तम आहार, करें कुपोषण पर प्रहार: शोभा कुमारी

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-अनुश्रवण व गृहभ्रमण से लगातार कुपोषण को दूर करने को व्यवहार परिवर्तन के लिए प्रयासरत हैं सेविका
-पोषक क्षेत्र में माता-बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए विभागीय प्रशिक्षणों का पालन कर दर्जनों बच्चों की बनी हैं दीदी

जमुई-

सदर प्रखंड के थेगुआ गाँव के आंगनवाड़ी केंद्र सं.179 की सेविका 41 वर्षीय शोभा कुमारी ने 14 वर्षों से अपने पोषक क्षेत्र की महिलाओं एवं बच्चों में कुपोषण से लड़ने की सुरक्षा प्रणाली सुदृढ़ की है| वह सभी महिलाओं को छः माह तक केवल स्तनपान की सलाह देती हैं | वह कहती नवजात के लिए यह सर्वोत्तम आहार है जिससे बच्चे को कुपोषण से बचाया जा सकता है | उसकी बानगी को बयां करती हैं पहले संतान की माँ 20 वर्षीय काजल कुमारी| वह कहती हैं दीदी के बताये व्यक्तिगत स्वच्छता को अपनाते हुए छः माह तक शिशु को केवल स्तनपान ही कराया | इसका ही परिणाम है कि मेरी पायल बिटिया (2 वर्ष) आज स्वस्थ और खुशहाल है | वहीं माता समिति की सदस्य 39 वर्ष की पार्वती देवी कहती हैं शोभा दीदी बैठकों व क्षेत्र भ्रमण में पोषण को बनाए रखने के उपायों के बारे में जरूर बताती हैं| उसके लिए वह व्यक्तिगत स्वच्छता से शुरू करती हैं | एक धात्री माता गायत्री देवी ने बताया पोषण के बारे में दीदी से ही पता चला| उन्होंने बताया शिशु जन्म के छः माह तक केवल माँ का दूध ही पिलाने से कुपोषण को दूर करने में मदद मिलती है| जिसे मैं पूरी तरह अपना रही हूँ |
इस बाबत र सेविका शोभा ने बताया पायल जन्म के समय मात्र 1 किलो 900 ग्राम की थी जो चिंता का विषय था | इस पर मेरे द्वारा तत्काल पोषण पुनर्वास केंद्र में जाने की सलाह दी गयी | परंतु घरेलू परेशानियों की वजह से वो नहीं जा पायी | फिर भी काजल कुमारी के पति संतोष ठाकुर से आश्वस्त होने के बाद व्यक्तिगत स्वच्छता, केवल स्तनपान एवं सम्पूर्ण टीकाकरण को ध्यान में रख कर नियमित गृह-भ्रमण जारी रखा गया | इसके लिए अलग से वृद्धि द्धि चार्ट तैयार कर अनुश्रवण करती रही | समेकित प्रयास से नन्हीं पायल में शीघ्र ही वजन की वृद्धि होने लगी और आज वो सभी स्वस्थ बच्चों की तरह ही प्रगति की ओर अग्रसर है | लाभार्थी कहती हैं प्रखंड स्तरीय संसाधन समूह के माध्यम से राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत मोड्यूल -9 में पोषण के महत्व पर और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हरी साग सब्जियों से प्राप्त लौह तत्व के अवशोषण हेतु विटामिन-सी युक्त पेय लेने के बारे में बताया गया जो काफी उपयोगी है |
वरीय पदाधिकारियों की हैं प्रशंसा पात्र :
पोषण की स्थितियों को बनाये रखने के शोभा कुमारी के प्रयासों को लेकर महिला पर्यवेक्षिका अर्चना कुमारी ने बताया शोभा विभाग द्वारा दिए गए सुझावों/प्रशिक्षणों का पालन करती हैं| साथ हीं इसमें वो मानवीय मूल्यों को शामिल कर परिणामों में परिणत करवाकर व्यवहार परिवर्तन की कहानी गढ़ने में सभी से आगे निकल जाती हैं | इनका कार्य हमेशा से सराहनीय रहा है |
शोभा की कार्य शैली से क्षेत्र के बच्चों व महिलाओं में स्वस्थ व्यवहारों का प्रभाव है
इस सम्बन्ध में बाल विकास परियोजना पदाधिकारी निहारिका नीतू ने कहा शोभा की कार्य शैली से क्षेत्र के बच्चों व महिलाओं में स्वस्थ व्यवहारों का प्रभाव है, कुपोषण की स्थिति काफी कम है और अपनी बैठकों में इससे जुड़े मुद्दे को अनिवार्य तौर पर शामिल करने से चूकती नहीं हैं | ये एक बेहतर सम्वादवाहक और समय का अनुपालन करने वाली सेविका हैं |

कोरोना काल में सही पोषण से ही मजबूत होगी लोगों कि रोग प्रतिरोधक क्षमता, खान-पान का रखें विशेष ध्यान

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– बदलते मौसम में कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए बच्चे और बुजुर्गों के साथ ही किशोर व युवा भी रहें सावधान

– मास्क और सामाजिक दूरी के नियम का पालन करते हुए साफ-सफाई का भी रखें विशेष ख्याल

लखीसराय-

कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच लगातार बदल रहे मौसम के कारण तरह- तरह की मौसमी बीमारी के होने की भी संभावना बढ़ गई है। इसलिए कोरोना के साथ ही इससे भी बचने के लिए हमें और अधिक सावधान रहने की जरूरत है। इस दौरान बच्चों और बुजुर्गों के साथ ही किशोर व युवा को भी कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए सही पोषण का भी ख्याल रखना बेहद जरूरी है। क्योंकि सही पोषण ही लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है और कोरोना संक्रमण से बचने के साथ ही मौसमी बीमारियाँ से हमें बचाने में भी संजीवनी साबित होगी। इसके साथ कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच लोगों को मास्क और सामाजिक दूरी के नियम को अभी पूरी सावधानी के साथ पालन करना है।

कोरोना काल में लोग मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए पौष्टिक आहार का करें सेवन:-
जिला के अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने बताया बदलते मौसम में एलर्जी, सर्दी-खाँसी, बुखार समेत अन्य वायरल टाइप की बीमारी की भी चपेट में लोग आ जाते हैं। इसलिए इससे बचाव के लिए हरी सब्जी, दाल, साग समेत अन्य पौष्टिक आहार का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें। बच्चों का सही पोषण का उनके माता-पिता व परिवार के अन्य सदस्यों को विशेष ख्याल रखना चाहिए और ससमय खाना खिलाना चाहिए।

कोरोना सहित अन्य मौसमी बीमारियों के संक्रमण से बचने के लिए समय पर खाएं खाना :—-
उन्होंने बताया मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए प्रत्येक दिन समय पर खाना खाएं और पर्याप्त मात्रा में उचित व शुद्ध पानी का सेवन करें। हरी सब्जी व साग का ज्यादा उपयोग करें, इससे हमारे शरीर में पोषक तत्व बढ़ता और हमें बीमारी से लड़ने में सहयोग करता है।

बीमारियों के संक्रमण से बचने के लिए साफ -सफाई का भी रखें विशेष ख्याल :
उन्होंने बताया सभी तरह की बीमारियों के संक्रमण से बचने के लिए सभी लोग साफ-सफाई का भी विशेष ख्याल रखें और घर से लेकर आसपास के जगहों पर भी साफ-सफाई का विशेष ध्यान दें। ब्लीचिंग पाउडर का नियमित रूप से छिड़काव कराएँ | साथ ही आसपास के लोगों को भी साफ- सफाई के प्रति जागरूक करें। इसके अलावा रहन-सहन के तरीके में भी बदलाव लायें । जो हमें बीमारी के दायरे से बचाये ।

शरीर में पानी की नहीं होने दें कमी:
उन्होंने बताया शरीर में पानी की कमी होने के कारण भी तरह- तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए शरीर में पानी की कमी नहीं होने दें। इसके लिए लगातार शुद्ध पानी पीयें । यात्रा के दौरान पानी साथ लेकर चलें।

कोरोना संक्रमण के दौर के बीच सभी अनिवार्य रूप से करें कोरोना गाइड लाइन का पालन :
– सभी लोग घर से बाहर निकलने की स्थिति में मास्क, गमछा, रुमाल या अन्य कपड़े से अपने नाक और मुंह को ढकें कें ताकि कोरोना वायरस के संक्रमण को कम से कम किया जा सके।

– भीड़ भाड़ वाले स्थान पर जाने पर शारीरिक दूरी के नियम के तहत कम से कम दो गज या छह फीट के नियम का पालन करें ।

– कुछ भी छूने कि स्थिति में साबून या हैंड सैनिटाइजर से अपने हाथों को एक निश्चित अंतराल के बाद साफ करें ताकि हाथों के जरिये कोरोना वायरस का संक्रमण न फैलने पाए।
– संक्रमण वाली जगहों या जहां पर पर साफ -सफाई नहीं हो वहां खाना खाने से बचना चाहिए।
– घर के आसपास गंदगी जमा नहीं होने दें।
– संक्रमण वाले स्थानों से दूर रहें।

नवजात शिशु की जीवन रक्षा के लिए माताएं अपनाएं कंगारू मदर केयर तकनीक

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– माँ की धड़कन सुनकर शिशु के स्वस्थ शरीर का होता है निर्माण
– शिशु को माँ के सीने से चिपकाने से शिशु को मिलती है गर्माहट

मुंगेर, 26 मार्च –

नवजात शिशु को जन्म के वक्त वजन 2 किलो से कम होने या जन्म निर्धारित समय से पहले होने की स्थिति में बहुत सारी परेशानियों से गुजराना पड़ता है। जन्म के बाद यदि नवजात शिशु ठीक से अपनी मां का स्तनपान नहीं करता है तो मां को सही तरीके से शिशु की देखभाल के लिए कंगारू मदर केयर तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए। समय पूर्व जन्म लेने वाले शिशु का ना सिर्फ वजन कम होता है बल्कि शिशु जन्म के साथ ही कई तरह की समस्याओं से भी घिर जाते हैं। ऐसी स्थिति में किसी तरह की लापरवाही नवजात शिशु की परेशानी को कई गुना बढ़ा देती है। खासकर कोविड-19 के संक्रमण के इस दौर में तो ऐसे शिशु और भी कई तरह की समस्याओं से घिर जाते हैं। ऐसे समय में इन शिशुओं का उसके स्वस्थ शरीर के निर्माण के लिए विशेष ख्याल रखना बेहद जरूरी है। ऐसे में शिशु के मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए कंगारू मदर केयर तकनीक को अपनाना सबसे आसान एवं बेहतर उपाय है|
बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास का होता है निर्माण :
केयर इंडिया मुंगेर की डीटीओएफ डॉ. नीलू ने बताया कंगारू मदर केयर तकनीक नवजात शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास में काफी सहयोग करता है। शिशु जब अपने माँ के नजदीक रहता है तो वह खुद को तनावमुक्त महसूस करता है| इससे शिशु के स्वस्थ शरीर का निर्माण होता है। कंगारू मदर केयर तकनीक किसी बिना खर्च का सबसे अच्छा उपाय है।

क्या कंगारू मदर केयर तकनीक ? किस तरह से होता है इस तकनीक का उपयोग :
डीटीओएफ डॉ.नीलू ने बताया कंगारू मदर केयर तकनीक एक ऐसा उपाय है जो कम वजन के साथ जन्म लेने वाले शिशु के स्वास्थ में सुधार लाने के लिए अपनाया जाता है। इससे शिशु का वजन तो बढ़ता ही है साथ ही वो स्तनपान भी बेहतर ढंग से कर पाता है। इस तकनीक को अपनाने से शिशु के शरीर का तापमान भी ठीक रहता है और वो किसी प्रकार के इन्फेक्शन से भी दूर रहता है। बताया इस तकनीक को अपनाने से शिशु और उसकी माँ के बीच मां और बच्चे का रिश्ता भी मजबूत होता है। इस तकनीक के तहत शिशु को माँ के सीने पर में चिपकाकर रखा जाता है। इस दौरान माँ की छाती पूरी तरह से खुली होनी चाहिए जिससे माँ के शरीर की गर्माहट आसानी से और जल्दी से शिशु में स्थानांतरित हो सके। इस तकनीक से शिशु के शरीर का तापमान मेंटेन रखा जाता है। इस इस तकनीक का माँ के अलावा शिशु के परिवार की अन्य महिला व पुरुष भी उपयोग कर शिशु को सुरक्षित रख सकते हैं । इस दौरान सिर्फ इस बात का ख्याल रखना आवश्यक है कि शिशु को कंगारू मदर केयर की सुविधा देने वाला व्यक्ति पूरी तरह से स्वस्थ हो।

निमोनिया जैसी बीमारी से भी सुरक्षित करता है कंगारू मदर केयर तकनीक :
उन्होंने बताया नवजात शिशु को गर्म रखने एवं निमोनिया जैसी संकामक बीमारी से बचाने में भी कंगारू मदर केयर तकनीक कारगर है। इस तकनीक के जरिये नवजात शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सकता है । कंगारू मदर केयर तकनीक वीक न्यू बोर्न प्रोजेक्ट से जुड़ा हुआ है। इसके तहत कमजोर नवजात शिशु की जीवन रक्षा और उसकी उचित देखभाल के लिए उनकी मां एवं अन्य लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

उन्होंने बताया नवजात शिशुओं को निमोनिया से बचाव के लिए हमेशा गर्म कपडे पहनाकर या उसमें लपेटकर रखने की आवश्यकता है। इसके साथ ही घर के जिस स्थान पर नवजात शिशु को रखा जा रहा हो उस स्थान को भी हमेशा गर्म रखने की आवश्यकता है। साथ हीं बच्चे का बेड एवं उसके नैपकिन पैड को भी हमेशा सूखा रखना चाहिए । नवजात शिशु की मां को हमेशा अपने बच्चे को स्तनपान हीं करना चाहिये ताकि बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो और वो कई बीमारियों से लड़ने में सक्षम हो सके।
उन्होंने बताया नवजात शिशु के लिए आवश्यक टीका अनिवार्य तौर पर लगवाएं। इसके साथ हीं नवजात बच्चे की मां को अपने रहन- सहन, खानपान में काफी सावधानी बरतने की आवश्यकता है ताकि नवजात बच्चे के देखभाल में कोई चूक नहीं हो और नवजात शिशु की मृत्यु दर को समाप्त किया जा सके।

आशा कार्यकर्ता क्षेत्र में बांट रही हैं परिवार नियोजन किट

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-परिवार नियोजन को लेकर क्षेत्र के लोगों को किया जा रहा जागरूक
-महिला की उम्र 20 साल होने पर पहला बच्चा पैदा करने की दी जा रही सलाह

भागलपुर, 26 मार्च

स्वास्थ्य विभाग परिवार नियोजन को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है. इसी क्रम में आशा कार्यकर्ता क्षेत्र के लोगों को परिवार नियोजन किट दे रही हैं. किट में परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री रहती है. कंडोम, टैबलेट और अंतरा सुई से भरे किट को देने के बाद आशा कार्यकर्ता लोगों को इसके उपयोग की भी जानकारी देती हैं.
परिवार नियोजन को लेकर कई कार्यक्रम चल रहे

आशा के जिला समन्वयक मोहम्मद जफरुल इस्लाम ने बताया अभी परिवार नियोजन को लेकर कई कार्यक्रम चल रहे हैं. उनमें से किट बांटने वाला एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है. इसके तहत आशा कार्यकर्ता अपने क्षेत्र के दंपति को चिह्नित करती हैं और उसे किट उपलब्ध कराती हैं. किट में उपलब्ध सामग्री के इस्तेमाल के तरीके भी बताए जाते हैं.

किट में मौजूद सामग्री पूरी तरह से सुरक्षित: नवगछिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ वरुण कुमार कहते हैं किट में जो अस्थाई संसाधन रहते हैं, वह पूरी तरह से सुरक्षित रहता है. अंतरा सुई, टैबलेट या फिर कंडोम के इस्तेमाल से किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है. इसलिए लोगों को परिवार नियोजन को लेकर किट के जरिए इन सामग्रियों का वितरण किया जा रहा है.

शादी के बाद 2 साल बाद ही पहला बच्चा: डॉ वरुण ने बताया आशा कार्यकर्ता नव्दंपतियों को भी ढूंढ रही हैं. नए शादीशुदा व्यक्ति को इस बात को लेकर जागरूक किया जा रहा है कि पहला बच्चा शादी के 2 साल बाद ही पैदा करें. इसके अलावा यह भी ध्यान रखने को कहा जा रहा है कि पहला बच्चा होने वक्त महिला की उम्र 20 साल अवश्य हो. इससे जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ रहता है.

एक बच्चे वाले दंपति की हो रही काउंसिलिंग: केयर इंडिया के आलोक कुमार और जितेंद्र कुमार ने बताया आशा कार्यकर्ता क्षेत्र में भ्रमण के दौरान एक बच्चे वाले दंपत्ति की काउंसिलिंग भी करती हैं और उन्हें दूसरे बच्चे के बीच 3 साल का अंतराल रखने की सलाह देती हैं. ऐसा करने से बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और वह भविष्य में होने वाली किसी भी प्रकार की बीमारियों से लड़ने में सक्षम होता है. इसके अलावा काउंसिलिंग में परिवार नियोजन से संबंधित अन्य तरह की जानकारी दी जाती है.

जिले में सभी प्रखंडों समेत रेलवे स्टेशन पर भी कोविड-19 जाँच शुरू

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– दूसरे प्रदेशों से आने वाले लोगों की हो रही जाँच, रखी जा रही है नजर
– संक्रमित मरीजों की पहचान में तेजी लाने के लिए बढ़ाया गया जाँच का दायरा

खगड़िया-

स्वास्थ्य विभाग ने कोविड-19 जाँच की रफ्तार को और गति देने के लिए जिले के सभी प्रखंडों समेत रेलवे स्टेशन व अन्य जगहों पर जाँच शुरू कर दी है। जहाँ दूसरे प्रदेशों से आने वाले लोगों की जाँच की जा रही है। इसके अलावा जिले में 20 से अधिक सेंटरों पर पूरे जोर-शोर के साथ वैक्सीनेशन अभियान भी चल रहा है।
– कोविड-19 जाँच की गति होगी और तेज :-
जिला सिविल सर्जन डॉ अजय कुमार सिंह ने बताया, वर्तमान में विभाग द्वारा मिले लक्ष्य के अनुसार ही जिले में जाँच चल रही है। किन्तु, जाँच की गति को और तेज किया जाएगा। इसके लिए विभागीय तैयारी चल रही है। दरअसल, जाँच जितनी तेजी से होगी, उतनी संक्रमितों की ससमय पहचान होगी। संक्रमण की संभावना को खत्म करने के लिए हर आवश्यक तैयारियाँ की जा रही हैं ।

– जाँच के बाद ही गंतव्य तक जाने की दी जा रही है अनुमति :-
कोविड-19 संक्रमण को खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सख्त है। इसके लिए खासकर महाराष्ट्र, दिल्ली समेत अन्य राज्यों से आने वाले लोगों की स्टेशन पर जाँच के बाद गंतव्य जाने की अनुमति दी जा रही है।

– जाँच कराने के लिए किया जा रहा है जागरूक :-
हर हाल में बाहर से आने वाले शत-प्रतिशत लोगों की जाँच सुनिश्चित हो, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। दरअसल, आशंका है कि कई लोग निजी वाहनों से भी होली के अवसर पर घर आएँगे। ऐसे लोगों को जाँच कराने के लिए जागरूक एवं चिह्नित कर स्थानीय पीएचसी को रिपोर्ट उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ता को दी गई है। ताकि जाँच से एक भी लोग वंचित नहीं रहें।

– जाँच के बाद दिया जा रहा है टीका :-
जिले के सभी वैक्सीनेशन सेंटरों पर पूरे जोर-शोर के साथ वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। जहाँ वैक्सीन लेने वाले लोगों की पहले कोविड-19 जाँच एवं उसके बाद ही वैक्सीनेशन किया जा रहा है। ताकि किसी प्रकार के संक्रमण की संभावना उत्पन्न नहीं हो और सभी लोग वैक्सीनेशन के दौरान खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– अनावश्यक यात्रा से बचें।
– बाहरी खाना खाने से परहेज करें।
– साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।
– यात्रा के दौरान आवश्यक दूरी का ख्याल रखें और निश्चित रूप से मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– गर्म व ताजा खाना का सेवन करें, बासी खाना से बिलकुल दूर रहें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं।
– बाहर से आने पर कोविड-19 जाँच कराएं।

ग्रामीण स्तर पर टीबी मरीजों को चिह्नित कर उनकी सही जांच और बेहतर इलाज सुनिश्चित कराने के लिए आगे आएं आंगनबाड़ी सेविका : पीसी वर्मा

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– टीबी मरीजों की पहचान कर उन्हें कुपोषण से बचने के लिए जागरूक करें सेविकाएं : इंदू
– लखीसराय के हलसी प्रखण्ड मुख्यालय में यक्ष्मा और पोषण विषय पर परिचर्चा

लखीसराय-
वर्ष 2025 तक लखीसराय को टीबी मुक्त बनाने के लिए जिले के ग्रामीण क्षेत्र में काम करने वाली आंगनबाड़ी सेविकाएं अपने क्षेत्र में टीबी मरीजों की पहचान कर उन्हें सही समय पर सही जांच और बेहतर इलाज के लिए जागरूक करें। यह बातें गुरुवार को जिले के हलसी प्रखंड मुख्यालय स्थित अम्बेडकर सभागार में केयर इंडिया और सीफार के सहयोग से आईसीडीएस लखीसराय के द्वारा टीबी और पोषण विषय पर आयोजित परिचर्चा को सम्बोधित करते हुए जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. पीसी वर्मा ने कही। उन्होंने बताया कि पहले लोगों को टीबी की सही जांच और उसके बेहतर इलाज की कोई जानकारी नहीं थी। लोग टीबी को एक गंभीर संक्रामक बीमारी के साथ ही छुआछूत की बीमारी समझते थे और टीबी मरीज को अपने परिवार से दूर किसी शांत और खुले स्थान पर रहने के लिए छोड़ दिया जाता था। लेकिन अब वो स्थिति नहीं है| हालांकि टीबी अभी भी एक गंभीर संक्रामक बीमारी है लेकिन यह छुआछूत व लाइलाज बीमारी नहीं है। अब टीबी मरीजों की सही समय पर पहचान हो जाने के बाद उसके सही जांच और इलाज की निःशुल्क व्यवस्था जिले के सभी सरकारी अस्पतालों के साथ ही प्राइवेट अस्पतालों में उपलब्ध है। इसके साथ ही टीबी मरीजों के उचित पोषण के लिए प्रधानमंत्री निक्षय योजना के तहत 500 रुपये प्रति माह की राशि सीधे उनके एकाउंट में तब तक क्रेडिट होता रहता है जब तक टीबी मरीजों की दवा जारी रहती है।
उन्होंने बताया कि वर्ल्ड टीबी डे के अवसर पर 24 मार्च से एक नई सुविधा केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा शुरू की गई है| जिसके तहत टीबी मरीजों का नाम और नंबर रजिस्ट्रेशन कराने के बाद राज्य कार्यालय से प्रत्येक एक या दो दिन के अंतराल पर फोन कॉल कर यह बताया जाता है कि वो निक्षय योजना के तहत 500 रुपये की अनुदान राशि का लाभ उठाने के लिए तत्काल टीबी विभाग के अधिकारियों से सम्पर्क कर अपना आधार और बैंक डिटेल्स जमा करवाएं| ताकि इस योजना के तहत उनको अनुदान राशि लगातार भेजी जा सके।

उन्होंने बताया कि ग्रामीण स्तर पर टीबी मरीजों को चिह्नित करने के लिए पांच सदस्यों की एक टीम गठित की गई है| जो टीबी मरीजों की पहचान कर सही समय पर जांच और इलाज सुनिश्चित करवाएंगे। इस टीम में सभी आंगनबाड़ी सेविकाओं के अलावा , आशा कार्यकर्ता, क्षेत्र के दो प्रबुद्ध आदमी, टीबी चैंपियन और स्थानीय वार्ड सदस्य और मुखिया शामिल हैं । इसके लिए एक निश्चित कार्य योजना तैयार कर ली गई है।

टीबी मरीजों को कुपोषण से मुक्ति के लिए पोषक तत्वों से युक्त खाना खाने के लिए करें प्रेरित :
हलसी प्रखंड की बाल विकास परियोजना पदाधिकारी इंदू कुमारी ने कहा पोषण अभियान के तहत आप सभी अपने क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं, धातृ महिलाओं के साथ ही कुपोषित बच्चों की माताओं को कुपोषण से बचने के लिए पोषक तत्वों से युक्त आहार लेने के लिए लगातार प्रेरित कर रही हैं । लोगों में टीबी होने का प्रमुख वजह उसका कुपोषित होना भी होता है। इसलिए आप सभी सेविकाएं अपने क्षेत्र में टीबी मरीजों की पहचान करने के साथ ही उन्हें कुपोषण से बचाने के लिए पोषक तत्वों से युक्त खाद्य पदार्थ को अपने भोजन में शामिल करने के लिए जागरूक करें।

इस अवसर पर जिले के डीटीएल केयर नावेद उर रहमान ने आंगनबाड़ी सेविकाओं को टीबी और पोषण से सम्बंधित आवश्यक जानकारी दी । हलसी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक राजेश कुमार ने बताया कि हलसी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्वास्थ्य विभाग से जारी सभी निर्देशों का अक्षरशः पालन करने के लिए सजग है। टीबी और पोषण जागरूकता के लिए हलसी में लगातार अभियान चलाकर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
इस अवसर पर महिला पर्यवेक्षिका नूतन कुमारी, स्नेहलता कुमारी और ममता कुमारी के अलावा केयर इंडिया के ब्लॉक मैनेजर शंभू कुमार सहित काफी संख्या में सेविका और अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे।