मास्क पहनने को लेकर पुलिस चला रहा है जागरूकता अभियान

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लोग भी पुलिस के अभियान को बता रहे सही, सहयोग करने का कर रहे वादा

भागलपुर-

होली को लेकर बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई है. चौक-चौराहों पर काफी भीड़ देखी जा रही है. इसके साथ कोरोना के नए मामले भी आने लगे हैं. इस वजह से सतर्कता बढ़ा दी गई है. स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ पुलिस भी लोगों को सतर्क करने में लग गई है. गुरुवार को चौक चौराहों पर रोककर पुलिस लोगों से मास्क पहने की अपील कर रही थी. जो लोग मास्क नहीं पहने थे, उन्हें मास्क पहनने के लिए कहा जा रहा था.

चौक- चौराहों पर कराई जा रही है माइकिंग: गुरुवार को शहर के विभिन्न चौराहों पर पुलिस माइकिंग करती दिखी. इस दौरान लोगों से हर हाल में मास्क पहनने की अपील की जा रही थी. सभी को बताया जा रहा था कोरोना के मामले फिर से सामने आ रहे हैं. ऐसे समय में लापरवाही नहीं करें और स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन का पालन करें.

लोगों का भी मिल रहा साथ: कचहरी चौक से जा रहे अमन कुमार ने बताया कि मैंने मास्क नहीं पहना था. इस वजह से पुलिस ने मुझे रोका. मैं डर गया था कि अब जुर्माना भरना पड़ेगा, लेकिन पुलिस अधिकारी ने आगे से मुझे मास्क लगाकर बाहर निकलने की हिदायत दी. अब मैं घर से मास्क लगाकर ही निकलूंगा. उसी चौक पर मिहिर कुमार ने बताया कि पुलिस का कहना सही है. हमलोग कल से मास्क लगाकर निकलेंगे.

तिलकामांझी चौक पर थी ज्यादा सख्ती: शहर के व्यस्ततम चौक माने जाने वाले तिलकामांझी चौक पर पुलिस मास्क की चेकिंग कर रही थी. जो लोग मास्क नहीं पहने हुए थे, उन्हें आगे से मास्क लगाकर आने की बाहर निकलने की हिदायत दी जा रही थी. चौक से गुजर रहे संतोष कुमार मिश्रा ने बताया कि हड़बड़ाहट में आज मैं बिना मास्क का ही निकल गया. कल से मास्क पहनकर ही निकलूंगा. वहीं रागिनी झा ने बताया कि पुलिस बिल्कुल सही काम कर रही है| मैंने मास्क पहनी है और लोगों को भी ऐसा करना चाहिए.

निजी चिकित्सक डॉ विनय कुमार झा ने कहा ऐसे समय में जब कोरोना के मामले दोबारा से बढ़ने लगे हैं तो लोगों को किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए. घर से मास्क पहनकर बाहर निकलना चाहिए. भीड़भाड़ में जाने से बचना चाहिए. इसके अलावा सामाजिक दूरी का पालन भी करना चाहिए. ऐसा करते रहने से हमलोग कोरोना से बचे रहेंगे

होली में घर आए प्रवासियों को परिवार नियोजन को लेकर जागरूक कर रही हैं आशा कार्यकर्ता

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परिवार नियोजन को लेकर अस्थाई संसाधन भी करा रही हैं उपलब्ध
शादी के बाद 2 साल तक बच्चा नहीं हो इसकी दे रही हैं सलाह

भागलपुर-

होली के मौके पर बड़ी संख्या में प्रवासी लोग घर आ रहे हैं. उन्हें कोरोना को लेकर जागरूक तो किया ही जा रहा है, साथ ही परिवार नियोजन को लेकर भी जानकारी दी जा रही है. आशा कार्यकर्ता प्रवासी लोगों के घर जाकर परिवार नियोजन के अस्थाई साधन भी उपलब्ध करा रही हैं. उन्हें कंडोम, टैबलेट इत्यादि मुहैया कराई जा रही है.
यह सही मौका होता है उन्हें किसी भी योजना के बारे में बताने के लिए-
आशा के जिला समन्वयक मो. जफरुल इस्लाम ने बताया कि त्यौहार के मौके पर बड़ी संख्या में बाहर में रहने वाले लोग घर आते हैं. यह सही मौका होता है उन्हें किसी भी योजना के बारे में बताने के लिए. अन्य दिनों में कुछ परिवार के पुरुष सदस्य घर से बाहर रहते हैं. इस वजह से उन्हें जानकारी नहीं मिल पाती है. पुरुष को भी जानकारी मिल जाएगी तो परिवार नियोजन को लेकर दोनों तरफ से जागरूकता बढ़ेगी.

बाहर से आने वाले को किया जा रहा चिह्नित : जिले की 2200 से अधिक आशा कार्यकर्ता अपने क्षेत्र में बाहर से आने वाले प्रवासियों को चिह्नित कर रही हैं. उनका नाम रजिस्टर में दर्ज कर सभी के घर पर बारी-बारी से जाकर उन्हें परिवार नियोजन के बारे में समझाया जा रहा है और सामग्री दी जा रही है.

20 साल से पहले बच्चा नहीं: घर घर जा रही आशा कार्यकर्ता लोगों को 20 साल से पहले पहला बच्चा पैदा नहीं करने की सलाह दे रही हैं. साथ ही शादी के 2 साल बाद ही बच्चा पैदा करने को कह रही हैं. 2 साल तक गर्भ नहीं ठहरे, इसे लेकर आशा कार्यकर्ता लोगों को उपाय भी बता रही हैं. प्रवासी लोगों को यह भी बताया जा रहा है कि गर्भधारण के जो भी अस्थाई संसाधन हैं, उससे किसी तरह का नुकसान नहीं होता है.

दो बच्चे के बीच 3 साल का अंतराल जरूरी: आशा कार्यकर्ता प्रवासियों को दो बच्चे के बीच 3 साल का अंतराल रखने की भी सलाह दे रही हैं. वह उन्हें समझा रही हैं कि अगर दो बच्चे के बीच 3 साल का अंतराल रहता है तो उसकी प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और वह भविष्य में होने वाली किसी भी बीमारियों से लड़ने में सक्षम होता है

इन वजहों से नहीं होगा बैंकों का जरुरी काम-काज

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नई दिल्ली: सभी व्यक्ति को बैंकों में रोज का काम होता हैं अगर आपको बैंक में बहुत जरुरी काम हो और आप बैंक गए लेकिन बैंको में उस वक्त ताला जड़ा हैं तो आपको कितनी परेशानी होगी आपके काम नही हो पाएंगा और आपका किमती समय भी ख़राब हो जाएगा तो ऐसा ना हो आपके साथ इसे बचे और जरुरी ख़बर जान लें.

सात दिन बंद रहेंगे बैंक

सभी निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ग्राहकों के लिए यह खबर जाना बेहद अहम है। इस सप्ताह शनिवार से 4 अप्रैल तक बैंकिंग सेवाएं केवल दो दिनों के लिए उपलब्ध होंगी। 27 मार्च से 4 अप्रैल के बीच केवल 2 कार्य दिवस हैं। इसलिए अगर आपके पास बैंक में कोई काम है तो उसे इस सप्ताह पूरा कर लें या फिर आपको 3 अप्रैल तक इंतजार करना होगा।

31 मार्च को बैंकिंग सेवाएं नहीं मिलेंगी

पूरे देश में 27-29 मार्च से लगातार तीन दिनों तक बैंक बंद रहेंगे। इस बीच केवल दो दिन 30 मार्च और 3 अप्रैल को बैंकिंग सेवाएं मिल सकती हैं। 31 मार्च को बैंकिंग सेवाएं नहीं मिलेंगी क्योंकि यह वित्तीय वर्ष का आखिरी दिन है।

कब खुले रहेंगे बैंक और कब बंद रहेंगे, पूरी जानकारी

27 मार्च- अंतिम शनिवार

28 मार्च- रविवार

29 मार्च- होली की छुट्टी

30 मार्च- पटना शाखा में अवकाश। बाकी सभी जगह काम-काज होंगे

31 मार्च- साल के अंतिम दिन की छुट्टी

1 अप्रैल- क्लोजिंग अकाउंट

2 अप्रैल- गुड फ्राइडे

3 अप्रैल- शनिवार – कार्य दिवस

4 अप्रैल- रविवार

दो दिवसीय बैंक हड़ताल से काम-काज प्रभावित रहा

कुछ राज्यों में बैंक छुट्टियां अलग-अलग हो सकती हैं। RBI कैलेंडर के अनुसार, चार रविवार और दो शनिवार के अलावा, देश भर में राजपत्रित छुट्टियों पर बैंक बंद रहेंगे। गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा केंद्रीय बजट 2021 में घोषित दो और सरकारी स्वामित्व वाले बैंकों के निजीकरण के खिलाफ 15-16 मार्च को दो दिवसीय बैंक हड़ताल से काम-काज प्रभावित रहा।

20 लाख रुपये को ACB को देख तहसीलदार ने चूल्हे पर जलाए

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New delhi: देश में आय दिन भ्रष्टाचार और अपराध का मामला तुल पकड़ता जा रहा हैं हमारे देश में ना अपराध की कमी है और नहीं भ्रष्टाचार की कमी हैं. कमी है तो सिर्फ रोजगार की, शिक्षा की और मुख्य तौर पर लोगों के अंदर जागरुकता की. भ्रष्टाचार का जन्म राजस्थान से अगल-अलग रुप में पैदा होता जा रहा हैं भ्रष्ट अधिकारियों को राजस्थान में आए दिन पकड़ने के सिलसिला तेज होने के बावजूद भ्रष्टाचार का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है. सिरोही ज़िले के पिंडो बारात तहसील के तहसीलदार ने एंटी करप्शन ब्यूरो के अधिकारियों को देख दरवाज़ा बंद कर लिया और 20 लाख रुपये को चूल्हे पर जलाने की कोशिश की.तहसीलदार ने 20 लाख रुपये जलाने की कोशिश की

अधजले नोट के साथ गिरफ्तार तहसीलदार

दरअसल एसीबी को शिकायत मिली थी कि तहसीलदार अपने राजस्व निरीक्षक पिण्डवाड़ा के ज़रिए वहां होने वाले आंवला उत्पादन के आंवला छाल के ठेके के लिए 1 लाख रुपये की रिश्वत मांग रहा है. सूचना मिलने पर पाली से एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम भेजी गई एंटी करप्शन ब्यूरो ने दरवाज़ा तोड़कर आधे जले नोटों के साथ तहसीलदार कल्पेश कुमार जैन को गिरफ़्तार किया है. और वहां पर मौजूद 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए राजस्व निरीक्षक परबत सिंह को गिरफ़्तार किया गया.

1 लाख 60 हज़ार रूपये के सही सलामत नोट बरामद 

परबत सिंह ने बताया कि यह पैसा वह तहसीलदार कल्पेश कुमार जैन के लिए ले रहा है. इसके बाद परबत सिंह को लेकर एसीबी तहसीलदार कल्पेश कुमार जैन के घर पहुंची एसीबी के आते ही तहसीलदार कल्पेश कुमार जैन ने दरवाज़ा बंद कर लिया और नोटों को आग के हवाले कर दिया. एंटी करप्शन ब्यूरो ने घर से निकलता हुआ धुआं देखा तो दरवाज़ा तोड़कर उसके घर के अंदर घुसे. क़रीब 20 लाख रुपये आधे से ज़्यादा जल चुके थे, मगर इसके बावजूद एंटी करप्शन ब्यूरो ने उसके घर से 1 लाख 60 हज़ार रूपये के सही सलामत नोट बरामद किए. तहसीलदार कल्पेश कुमार जैन को गिरफ़्तार किया गया है और इनके बाक़ी संपत्तियों की जांच और पूछताछ जारी हैं.

जिनके घर शीशे के होते हैं वो दूसरे के घरों पर पत्थर नहीं मारते- सिंधिया

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नयी दिल्ली-

भाजपा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राज्यसभा में कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जो लोग आज कृषि और किसान के बारे में चर्चा कर रहे हैं। स्वामीनाथन जी की रिपोर्ट 2004 में उस समय की सरकार को पेश की गई थी। मैं पूछना चाहता हूं जो लोग किसानों की दुहाई की बात चिल्ला-चिल्लाकर कर रहे हैं, 10 साल सरकार में रहकर स्वामीनाथन रिपोर्ट का क्रियान्वयन क्यों नहीं किया।

ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस वक्तव्य के बाद राज्यसभा में हंगामा हो गया। हालांकि, फिर भी सिंधिया नहीं रुके और उन्होंने कहा कि जब सच्चाई बोली जाती है तब थोड़ी मिर्ची तो लगती है। इस दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने छह साल में एमएसपी की लागत में डेढ़ गुना की बढ़ोत्तरी की है। गेहूं के भुगतान में यूपीए सरकार ने 23,880 करोड़ रुपए का भुगतान किया था लेकिन इस वर्ष में 75,000 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। जो ढाई गुना ज्यादा है।
इसी बीच सिंधिया ने महाराष्ट्र सरकार का मुद्दा उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि 15 लाख की बात करेंगे तो मैं महाराष्ट्र की बात करूंगा। जो पिछले 3-4 दिनों से जो रिपोर्ट निकल रही है आपकी सरकार की। उन्होंने इस दौरान मुंह नहीं खुलवाने की बात कही। आप 15 साल की बात करते हो, आप 100 करोड़ का हिसाब दो। यह तो केवल मुंबई की बात है बाकी प्रदेश का क्या हाल होगा। उन्होंने कहा कि एक तो यह वसूली कर रहे हैं गरीब लोगों से, रेस्टोरेंट वालो से और मेरे से 15 लाख की बात कर रहे हैं।

बुजुर्गों को स्वस्थ और सुरक्षित रखने में कोविड-19 टीकाकरण की अहमियत सर्वोपरि: गिरीश कुमार

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– मुख्यमंत्री वृद्ध एवं राष्ट्रीय पेंशन योजना के लाभार्थियों को कोविड-19 टीकाकरण में खैरा प्रखंड आगे
– लक्ष्य की पूर्ति के लिए कर रहे हैं लगातार बैठकें व क्षेत्र भ्रमण

जमुई, 24 मार्च –

जिले के खैरा प्रखंड अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सहित अन्य आठ जगहों पर निर्धारित लक्ष्य 14 हजार 464 बुजुर्गों (जो 60 वर्ष या उससे अधिक) का कोविड-19 टीकाकरण सुनिश्चित कराने में स्वास्थ्यकर्मी लगे हुए हैं | यहां टीकाकरण का प्रतिशत 91% समस्त दस प्रखंडों में आगे है |
टीकाकरण के लिए उपस्वास्थ्य केंद्र स्तर पर भी सुविधाओं को लागू किया गया है
इस बाबत प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक गिरीश कुमार कहते हैं हम सभी ने ये तय कर लिया है कि किसी भी परिस्थिति में हमारे प्रखंड के लक्षित लाभार्थियों को कोरोना वायरस से पूरी तरह सुरक्षा प्रदान करने में इसके दोनों टीके निर्धारित समय सीमा के अन्दर लग जायें | लॉकडाउन के शुरुआती दिनों से ही हमें समाज के सभी वर्गों के सहयोग मिले हैं लेकिन वृद्धजनों के अनुभव आधारित सलाह और सम्मान की बदौलत ही कोरोना वायरस के विरुद्ध योद्धा की भांति लड़ाई लड़ने में काफी हद तक सफलता मिल पायी है | इसको ध्यान में रख कर ही हमने हरणी-हरखार जैसे पंचायतों जो जंगल से घिरे और सुदूर क्षेत्रों में टीकाकरण के लिए उपस्वास्थ्य केंद्र स्तर पर भी सुविधाओं को लागू किया है व निरंतर क्षेत्र भ्रमण भी करते हैं और उसी का परिणाम है कि हम अपने निर्धारित लक्ष्य के काफी निकट हैं |
हमनी सबके भरोसा ने हेले की कोरोना से बचे वाला सुइवा लिए पारवे
उक्त व्यवस्था से उत्साहित लाभार्थियों में 65 वर्षीय धनेसरी देवी जो हरणी गाँव की रहने वाली हैं कहती हैं “हमनी सबके भरोसा ने हेले की कोरोना से बचे वाला सुइवा लिए पारवे लेकिन हमर गाँव में सुई दिल्वैके केंद्र बनाईके ई आसान भे गेले ” | इसी गाँव के परमेसर रजक की धर्मपत्नी सुशीला देवी-60 वर्ष प्रथम डोज पाकर बेहद ही प्रसन्न हैं तथा अब दूसरा डोज लेने का इन्तजार कर रही हैं और सभी स्वास्थ्य कर्मियों को निःशुल्क टीका देने हेतु उन्हें लम्बी उम्र की कामना भी करती हैं |
इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए यहाँ की आशा कार्यकर्ता रंजू देवी ने बताया स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोविड-19 टीकाकरण में तेजी लाने और लक्षित समूहवर्गों की सहूलियत के मद्देनज़र पंचायत स्तर पर हेल्थ एवं वेलनेस केन्द्रों के माध्यम से टीकाकरण केन्द्रों की शुरुआत सराहनीय है | इन्हीं केन्द्रों पर राष्ट्रीय टीकाकारण को भी किये जाने की जानकारी दी गयी है |
ये सभी से अनुरोध करती हैं कोविड-19 टीका लेने के बाद भी इन बातों का अवश्य रखें ध्यान:
1. अनावश्यक घर से बाहर निकलना बंद करें
2. जरूरी काम से अगर निकलना है तो मास्क जरूर लगाएं और साथ में सैनिटाइजर लेकर चलें
3. भीड़ भाड़ वाली जगह पर जाने से बचने का हरसंभव प्रयास करें
4. बिना मास्क लगाए हुए किसी भी व्यक्ति से बात करने से बचें
5. थोड़े थोड़े समय के अंतराल पर हाथ को सैनिटाइज करते रहें
6. किसी पार्टी में जाने और घर पर भी किसी तरह का आयोजन करने से बचें
7. दफ्तर या जहां भी काम करते हैं वहां सोशल डिस्टेंसिंग को मेंटेन करें
8. घर के बुजुर्ग और छोटे बच्चों का खासकर ध्यान रखें
9. घर को साफ सुथरा रखें और बाहर से आने पर जूते चप्पल घर के बाहर ही उतारें
10. कोरोना का वैक्सीन ले चुके व्यक्तियों को भी मास्क लगाना जरूरी
11. खांसने और छीकने वाले व्यक्ति से उचित दूरी रखें
12. कोरोना को हराने और लाकडाउन से बचाने के लिए लोगों को इतना सहयोग तो अवश्य करें |

जिले में संक्रमित मरीज मिलने के बाद बढ़ाई गई सतर्कता, तेज हुई कोविड-19 जाँच व वैक्सीनेशन अभियान

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– वैक्सीनेशन के साथ सतर्कता और सावधानी बचाव के लिए सबसे बेहतर उपाय

– बढ़ते संक्रमण पर रोकथाम के लिए जिले में पूरे जोर-शोर के साथ चल रहा है वैक्सीनेशन अभियान

खगड़िया, 24 मार्च।
कोविड-19 संक्रमण के मामले बढ़ते देख स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। वहीं, कोविड-19 जाँच एवं वैक्सीनेशन अभियान की गति तेज कर दी गई है। इसके अलावा जिस इलाके में संक्रमित मरीज मिले हैं, उस इलाके में कंटेनमेंट जोन बनाया गया है एवं जाँच की रफ्तार तेज कर दी गई है। जिले में दो नये संक्रमित मरीज मिले हैं। ऐसे में हमें सावधान और सतर्क होने की जरूरत है। हालाँकि, स्वास्थ्य विभाग संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए पूर्व से ही पूरी तरह अलर्ट मोड में है और संक्रमण पर रोकथाम के लिए हर आवश्यक कदम उठाये जा रहे हैं। किन्तु, संक्रमण पर रोकथाम तभी संभव है, जब हम भी संयम के साथ सावधान और सतर्क रहकर स्वास्थ्य विभाग का सहयोग करेंगे। इसलिए, बढ़ते संक्रमण पर विराम लगे, इसके मद्देनजर हर किसी को एकबार फिर से बीते वर्ष की तरह अपनी संयम और सावधानी की ताकत दिखाने की जरूरत है। क्योंकि, बीते वर्ष भी हम इसी ताकत से इस वैश्विक महामारी के संक्रमण पर काबू पाने में काफी हद तक सफल रहे थे।

– बढ़ते संक्रमण की ताकत को तोड़ने के लिए बचाव से संबंधित गाइडलाइन का पालन जरूरी :-
जिला सिविल सर्जन डॉ अजय कुमार सिंह ने बताया, कुछ दिनों पूर्व तक हमारा जिला कोरोनामुक्त था तथा संक्रमित मरीजों की संख्या शून्य थी। किन्तु, देश के विभिन्न प्रदेशों में कोविड-19 के बढते मामलो ने चिन्ता बढा दी है। ऐसे में बढ़ते संक्रमण की ताकत को तोड़ने के लिए सभी लोगों को पूर्व की भाँति बचाव से संबंधित गाइडलाइन का पालन करना जरूरी है। ताकि एकबार फिर से बढ़ते संक्रमण को विराम लगाया जा सके। इसलिए, मैं पूरे जिले वासियों से अपील करता हूँ कि पूर्व की तरह फिर से गाइडलाइन का पालन कर संक्रमण को रोकने के लिए आगे आएं और अपनी जिम्मेदारी निभाएँ।

– वैक्सीन लेने में बुजुर्ग सबसे आगे :-
जिले में 20 से अधिक वैक्सीनेशन सेंटरों पर पूरे जोर-शोर के साथ वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। जहाँ स्वास्थ्य कर्मी, फ्रंटलाइन वर्कर, 60 वर्ष एवं इससे अधिक उम्र वाले वरीय नागरिक के साथ 45 से 59 वर्ष के बीमार लोगों को दिया जा रहा है। मंगलवार तक के वैक्सीनेशन रिपोर्ट की अगर हम बात करें तो अबतक पूरे जिले में कुल 17337 बुजुर्गों को वैक्सीन की पहली डोज दी जा चुकी है। जो इस बात का बड़ा संकेत है कि वैक्सीन के प्रति अन्य लोगों के सापेक्ष बुजुर्ग सबसे अधिक गंभीर है।

– जिले के सभी वैक्सीनेशन सेंटरों पर बुजुर्गों की दिख रही भीड़ :-
वैक्सीन के प्रति बुजुर्ग व्यक्ति कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले के सभी वैक्सीनेशन सेंटरों पर बुजुर्गों की अच्छी-खासी भीड़ देखी जा रही है। जो इस बात का भी बड़ा संकेत है कि वैक्सीन के प्रति आमलोगों में काफी जागरूकता आई है। शायद, यही वजह होगा कि सुबह होते ही तकरीबन सभी वैक्सीनेशन सेंटरों पर खासकर बुजुर्गों की भीड़ दिखने लगती है।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– अनावश्यक यात्रा से बचें।
– बाहरी खाना खाने से परहेज करें।
– साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।
– यात्रा के दौरान आवश्यक दूरी का ख्याल रखें और निश्चित रूप से मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– गर्म व ताजा खाना का सेवन करें, बासी खाना से बिलकुल दूर रहें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं।
– बाहर से आने पर कोविड-19 जाँच कराएं।

मानसिक समस्या को गंभीरता से लेने की है जरुरत- मनोज कुमार

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मानसिक स्वास्थ्य पर तीन दिवसीय ऑनसाईट प्रशिक्षण कार्यशाला का हुआ आयोजन
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति, एम्स पटना और निमहांस बंगलुरू में हुआ एमओयू पर हस्ताक्षर

पटना/ 24 मार्च-

“मानसिक समस्या से ग्रसित लोगों के साथ समुदाय में व्याप्त उदासीनता एवं भेदभाव का चलन मानसिक स्वास्थ्य की प्रगति में सबसे बड़ा अवरोधक है. मानसिक समस्याओं के कारण होने वाली मृत्यु दर कई और रोगों जैसे एनीमिया, डायरिया, मधुमेह आदि से कहीं ज्यादा है और यह स्वास्थ्य विभाग एवं समाज के सामने एक चुनौती है. इसे गंभीरता से लेने की जरुरत है और मैं मानता हूँ कि राज्य स्वास्थ्य समिति, एम्स पटना और निमहांस के आपसी सहयोग से इस दुर्भाग्यपूर्ण स्वास्थ्य समस्या का निवारण करने में मदद मिलेगी”।उक्त बातें कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति मनोज कुमार ने मानसिक स्वास्थ्य पर एम्स पटना में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में अपने संबोधन में कही।

सामुदायिक एवं पंचायत स्तर पर लायी जाएगी जागरूकता:
कार्यपालक निदेशक ने बताया सामुदायिक एवं पंचायत स्तर पर गाँव, क़स्बा, स्कूल एवं अन्य सभी संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं स्वास्थ्य कैंप आयोजित किया जा रहा है. जिला के कारागृह में भी मानसिक स्वास्थ्य सम्बन्धी कैंप नियमित रूप से आयोजित कराया जा रहा है और बंदियों को मानसिक स्वास्थ्य सम्बन्धी उपचार की उपलब्धता की जा रही है. साथ ही चिकित्साकर्मियों को मानसिक स्वास्थ्य के लिए नामित भी किया जा रहा है ।
कार्यपालक निदेशक ने बताया 2021-22 में बाकी 7 जिले अरवल, भोजपुर, दरभंगा, जहानाबाद, लखीसराय, नालंदा, पटना में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारू क्रियान्वयन के लिए 17 सामान्य चिकित्सक जिसमे 10 जिला अस्पताल एवं 7 जिले के कारागृह से 7 चिकित्सक एवं 18 परिचारिकाओं को नामित कर मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सा एवं सेवा में प्रशिक्षण करना निर्धारित हुआ है. एम्स में तीन दिवसीय ऑनसाईट प्रशिक्षण के उपरांत एक वर्ष का ऑनलाइन प्रशिक्षण निमहांस बंगलुरू के कुशल प्रशिक्षकों द्वारा कराया जाएगा.

मानसिक रोग के प्राथमिक लक्षणों को चिन्हित करना जरुरी:
निमहांस बंगलुरू के मानसिक स्वास्थ्य विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतिमा मूर्ति ने बताया देश में 75 से 90 फीसदी आबादी को मानसिक स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं और यह सभी राज्य सरकारों एवं स्वास्थ्य संस्थानों के लिए एक चुनौती है. मानसिक रोग के प्राथमिक लक्षणों को चिन्हित करना अति आवश्यक है क्योंकि इसी से मरीज के उपचार एवं पूर्ण स्वस्थ होने की रूपरेखा तैयार होती है.

इस अवसर पर कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति मनोज कुमार, एम्स पटना के निदेशक डॉ. पी.के.सिंह, निमहांस बंगलुरू के मानसिक स्वास्थ्य विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतिमा मूर्ति, एम्स पटना के डीन डॉ. उमेश कुमार भदानी, एम्स पटना के अधीक्षक डॉ.सी.एम.सिंह के अलावा राज्य स्वास्थ्य समिति के अधिकारीगण, निमहंस बंगलुरु के चिकित्सक और एम्स पटना के चिकित्सक और अधिकारी मौजूद थे.

इस वर्ष ” द क्लॉक इज टिकिंग ” के थीम पर मनाया जा रहा है वर्ल्ड टीबी डे : जिलाधिकारी

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– प्रत्येक वर्ष 24 मार्च को मनाया जाता है ” वर्ल्ड टीबी डे ”
– 24 मार्च 1882 को वैज्ञानिक रॉबर्ट कोच ने सबसे पहले टीबी के जीवाणु की खोज की थी

लखीसराय, 24 मार्च| इस वर्ष विश्व यक्ष्मा दिवस (वर्ल्ड टीबी डे) ” द क्लॉक इज टिकिंग ” के थीम पर पूरे विश्व में मनाया जा रहा है। जो यह बता रहा है कि पूरे विश्व से टीबी को जड़ से समाप्त करने के लिए हमलोगों के पास काफी कम समय है। इसको ध्यान में रखते हुए हमलोगों को काफी काम करने की आवश्यकता है। यह बातें लखीसराय के जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने बुधवार को जिला समाहरणालय सभागार में वर्ल्ड टीबी डे पर केयर इंडिया और सीफार के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित मीडिया कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कही। उन्होंने बताया कि आज के ही दिन सन 1882 ईस्वी में वैज्ञानिक रोबर्ट कोच ने सबसे पहले टीबी के जीवाणु की खोज की थी। हम सभी जानते हैं कि टीबी एक गंभीर संक्रामक बीमारी है| बावजूद इसके यह काफी दुःखद है कि अभी तक टीबी के संक्रमण को रोक पाने में हमलोग पूरी तरह से सफल नहीं हो पाए हैं। इसके लिए वैश्विक स्तर पर सतत विकास (सस्टेनेबल डेवलपमेन्ट) हो इसको हमलोग एसटीजी भी बोलते हैं के तहत टीबी के उन्मूलन के लिए वैश्विक स्तर पर एक मिशन बनाया गया और इसके तहत यह लक्ष्य निर्धारित किया गया कि 2015 से 2030 तक टीबी मरीजों की संख्या को 80 प्रतिशत और टीबी बीमारी को 90 प्रतिशत तक समाप्त कर दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने इसी लक्ष्य को 2025 तक पूरा करने का लिया संकल्प :
जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी लक्ष्य को सन 2025 तक प्राप्त करने के लिए संकल्प लिया है । प्रधानमंत्री के इस संकल्प को पूरा करने में देश स्तर पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन सहयोग कर रहा है। इसको ले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा देश भर में राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम ( एनटीईपी) चलाया जा रहा है। इसी कार्यक्रम के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए मार्च के महीने में देश भर में ‘ देश जीतेगा, टीबी हारेगा’ अभियान चलाया जा रहा है। । राज्य भर में केयर इंडिया के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ ही पूरा महकमा अभियान में लगा हुआ है। हमलोगों ने मार्च के महीने में टीबी के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए जिले के सभी प्रखण्डों में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, धार्मिक संस्थानों के प्रमुख के साथ टीबी सरवाइवर, टीबी पेशेंट सपोर्टर के साथ टीबी पेशेंट सपोर्ट ग्रुप मीटिंग आयोजित की जा रही है। इसके लिए जिले के सभी प्रखण्डों के लिए प्रतिदिन का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। इस मीटिंग के आयोजन का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर टीबी पेशेंट को चिह्नित करने में इन लोगों का सहयोग लिया जा सके और इनके सहयोग से टीबी मरीजों को इलाज और जांच के लिए सरकारी और निजी संस्थानों में लाया जा सके। उन्होंने बताया कि सरकारी के साथ ही निजी स्वास्थ्य संस्थानों में भी टीबी मरीजों की जांच और इलाज की सुविधा निः शुल्क उपलब्ध है। निजी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रमुखों से अपील करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि आप सभी भी टीबी मरीजों को चिह्नित कर हम लोगों के सामने लायें ताकि सही समय पर उनकी जांच और इलाज हो सके।

दो सप्ताह से अधिक खांसी, बलगम में खून आना सहित अन्य लक्षण दिखने पर तत्काल कराएं जांच : आम लोगों से अपील करते हुए उन्होंने कहा दो सप्ताह से अधिक दिनों से खांसी, बलगम में खून आना, भूख नहीं लगना, बुखार का रहना या शाम में बुखार आने की स्थिति में अपने नजदीकी सरकारी और निजी कहीं भी अपने बलगम की जांच करवाएं और जांच में टीबी के लक्षण पाए जाने के बाद वहीं से टीबी की दवाएं लेकर सेवन भी शुरू कर दें क्योंकि सरकारी और निजी सभी स्थानों पर टीबी की जांच और इलाज के साथ दवाइयां निःशुल्क मिलती हैं । उन्होने बताया कि ड्रग इंस्पेक्टर और केमिस्ट के साथ भी बैठक हो रही है कि जो लोग जानकारी के अभाव में कहीं से भी कुछ भी दवा लेकर खा लेते हैं तो उनके शरीर में एंटी ड्रग रेजिस्टेंट पैदा हो जाता है और उनके ऊपर टीबी की दवा काम नहीं करती है। ऐसे टीबी मरीज को एंटी ड्रग रेजिस्टेंट मरीज कहा जाता है। ऐसे मरीज के लिए भी दवाओं की व्यवस्था है। उन्होंने बताया ज्यादातर टीबी मरीजों में कुपोषण की स्थिति होती है| इसलिए ऐसे मरीजों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए खाने-पीने में पोषक आहार लेने के लिए निक्षय योजना के तहत प्रत्येक मरीज को प्रति महीने पांच सौ रुपये अनुदान राशि सीधे उनके अकाउंट में क्रेडिट किया जाता है।

लोगों की जागरूकता से हारेगा टीबी और जीतेगा देश: सिविल सर्जन

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टीबी दिवस पर सदर अस्पताल में कार्यक्रम का आयोजन
2025 से पहले बांका को बनाया जाएगा टीबी मुक्त जिला

बांका, 24 मार्च
टीबी उन्मूलन में जागरूकता बहुत जरूरी है. लोग जागरूक होंगे तो टीबी का जल्द इलाज करवाएंगे और वह जल्द स्वस्थ हो जाएंगे. जागरूकता बढ़ने से लोग न सिर्फ अपना इलाज करवाएंगे, बल्कि दूसरे लोगों को भी इलाज के लिए प्रेरित करेंगे. इसलिए अगर लक्षण दिखाई पड़े तो तत्काल जांच कराएं. जांच कराने पर अगर टीबी की पुष्टि हो जाती है तो इलाज शुरू कर दें.
यह बात सिविल सर्जन डॉ सुधीर कुमार महतो ने बुधवार को सदर अस्पताल में टीबी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कही. उन्होंने कहा कि लोगों की जागरूकता से ही टीबी हारेगा और देश जीतेगा. स्वास्थ्य विभाग टीबी उन्मूलन को लेकर प्रतिबद्ध है और सभी के प्रयास से 2025 के पहले जिले को टीबी मुक्त बनाया जाएगा.

मौके पर मौजूद सीडीओ डॉ अभय प्रकाश चौधरी ने कहा टीबी का इलाज संभव है. यह कोई लाइलाज बीमारी नहीं है. सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में टीबी का इलाज होता है और खाने के लिए पैसे भी मिलते हैं. उन्होंने कहा कि टीबी मरीज को ढूंढ कर लाने वाले को पैसे भी दिए जाते हैं, इसलिए टीबी उन्मूलन में अपना योगदान दें. सभी लोग अगर मिलकर प्रयास करेंगे तो जल्द ही टीबी पर काबू पा लिया जाएगा.

डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण: इस दौरान मौके पर मौजूद अस्पताल प्रभारी एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को आने वाले समय में टीबी उन्मूलन को लेकर कैसे काम करना है, इसकी जानकारी भी डॉ. अभय प्रकाश चौधरी ने दी. उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों से टीबी बीमारी को खत्म करने के लिए लग जाने को कहा. साथ ही आमलोगों को भी इसके लिए प्रोत्साहित करने की बात कही.

निकाली गई जागरूकता रैली: इसके पहले सदर अस्पताल समेत जिले के सभी सरकारी अस्पतालों से टीबी उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्यकर्मियों ने जागरूकता रैली निकाली. रैली में सभी लोगों ने टीबी हारेगा, देश जीतेगा के नारे लगाए. साथ ही रैली के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों ने लोगों से टीबी जांच कराकर इलाज कराने की अपील भी की. मौके पर केयर इंडिया के डॉ. तौसीफ कमर, सदर अस्पताल के मैनेजर अमरेश कुमार और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी भी मौजूद थे.
कोरोना काल में इन उचित व्यवहारों का करें पालन,-
– एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का प्रयोग करें
– सार्वजनिक जगहों पर हमेशा फेस कवर या मास्क पहनें।
– अपने हाथ को साबुन व पानी से लगातार धोएं।
– आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें।
– छींकते या खांसते वक्त मुंह को रूमाल से ढकें।