कोरोना जांच में आयेगी तेजी, जिला को 4620 भीटीएम किट आवंटित

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भीटीएम मशीन से होगी 115 लोगों की जांच, जाँच में राहत मिलेगी
किट वितरण सुनिश्चित कराने को कार्यपालक निदेशक ने दिए हैं निर्देश
लखीसराय-
कोविड-19 की बढ़ती रफ्तार को काम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से सजग हैं। मसलन हर हाल में कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण को रोकने का मकसद है। इसके लिए सरकार से लेकर स्वास्थ विभाग पूरी जिम्मेदारी के साथ  दिन-रात एक कर अपने कार्य में  जुटे हुए हैं। एवं हर रोज नई-नई रूप रेखा तैयार कर रहे हैं। इसी कड़ी में इस बार सरकार एवं विभाग द्वारा कोरोना जाँच में तेजी लाने के उद्देश्य से लोकल लेवल पर कोरोना टेस्ट की योजना तैयार की गई है। एवं मरीजों का सैंपल जाँच में किसी प्रकार की बाधाएं नहीं हो, इसके लिए सरकार द्वारा भीटीएम राज्य स्वास्थ समिति को उपलब्ध कराया है। जो राज्य के सभी अस्पतालों(जहाँ पूर्व से पर्याप्त संख्या में उपलब्ध है को छोड़कर) मेडिकल काॅलेज के बीच वितरित किया जाएगा। जिसमें लखीसराय में संचालित विभिन्न अस्पतालों में जाँच की सुविधाऐ चालू कराने के लिए 4620 भीटीएम किट आवंटित हुआ है। इसे सुनिश्चित कराने को लेकर राज्य स्वास्थ समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने बीएमएसआईसीएल के प्रबंध निदेशक समेत सभी सिविलसर्जन व अस्पताल अधीक्षक को पत्र भेजा है।जिसमें शीघ्र सभी जगहों पर नियमानुसार एवं सरकार के गाइलाइन के अनुसार वितरित करने को कहा गया है ताकि सैंपल संग्रह में किसी तरह की  परेशानियाँ उत्पन्न नहीं हो।
जिला सिविल सर्जन डॉ आत्मनन्द राय  ने बताया कि भीटीएम का पूरा नाम वायरल ट्रांसपोर्ट मीडियम  होता है।  इस जांच में नाक और मुँह के अंदर जो टॉन्सिल होता है उस जगह से स्वेब लेकर किया जाता है । संक्रमित की जांच में तेजी लाने के लिए हर रोज इस गतिविधि के द्वारा 115 मरीजों  की जाँच की जाएगी । ये जाँच योग्य चिकित्सकों के नेतृत्व में लैब टेक्नीशियन के द्वारा किया जाएगा. साथ ही जाँच में आये मरीजों को जागरूक भी करेंगे। उन्होने बताया की इस सुविधा से मरीजों की जाँच में राहत मिलेगी। अब मरीजों को जाँच के लिए अस्पतालों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। प्राथमिकता के आधार पर किट से जाँच की जाएगी. भीटीएम किट खपत का प्रतिदिन राज्य स्वास्थ समिति को देना होगा रिपोर्ट देने का भी निर्देश है.
कोरोना टेस्ट के लिए सैंपल संग्रह की बढ़ेगी रफ्तार:
पत्र में यह भी कहा गया है राज्य के सभी अस्पतालों में एक दिन में जो भी वीटीएम की खपत है।उसका सामुहिक रूप से प्रतिदिन राज्य स्वास्थ समिति को रिपोर्ट उपलब्ध कराना है। ताकि पुनः ससमय भीटीएम उपलब्ध कराई जा सके। भीटीएम के अभाव में अब कोरोना टेस्ट को लेकर सैंपल संग्रह के कार्य में बाँधाऐ उत्पन्न नहीं होगी। इसको लेकर सरकार ने सभी अस्पतालों एवं मेडिकल काॅलेजों को पर्याप्त मात्रा भीटीएम किट उपलब्ध कराया है।दरअसल आए दिन भीटीएम के अभाव सैंपल संग्रह का कार्य बाधित हो जाता था।इस कारण मरीजों को भारी परेशानियाँ का सामना करना पड़ता था। एवं कई मरीज अस्पतालों का चक्कर लगाते-लगाते थककर जाँच कराना ही छोड़ देते थे।किन्तु अब मरीजों को उक्त समस्या से  नहीं जूझना पड़ेगा।सरकार ने भी उक्त समस्याऐ को देखते हुए यह प्लान तैयार की है।इससे सैंपल संग्रह की रफ्तार तेज होगी।एवं लोगों को अस्पतालों की दौर नहीं लगानी पड़ेगी। ना ही किसी प्रकार की परेशानी होगी।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर नवजात को बीमारियों से रखें दूर

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बचपन से ही इसका ध्यान रखने पर आगे भी मिलता है फायदा
शुरूआती स्तनपान से शिशु के रोग प्रतिरोधक क्षमता का होता है विकास
 भागलपुर, 27 जुलाई
किसी भी मां के लिए नवजात की देखभाल बहुत महत्वपूर्ण होता है। थोड़ी सी चूक होने पर बच्चे के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है और वह बार-बार बीमार पड़ने लगता है। इससे बच्चे कमजोर हो जाते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना। बच्चे स्वस्थ रहें, इसलिए मां को उसकी देखभाल सावधानी से करना चाहिए। इसके लिए उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करना बेहत जरूरी है।
नारायणपुर पीएचसी के प्रभारी डॉ विजयेंद्र कुमार विद्यार्थी कहते हैं किसी भी व्यक्ति के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होना बहुत जरूरी है। अगर इसका ध्यान बचपन से ही रखा जाए तो आगे भी इसका फायदा मिलता है। जल्दी वह बीमार नहीं पड़ता है। डॉ. विद्यार्थी कहते हैं बच्चे इन्फेक्शन की चपेट में जल्द आ जाते हैं। ऐसे में रोग प्रतिरोधक क्षमता के कमजोर होने पर बीमारियों का असर जल्दी होता है। इस वजह से शरीर कमजोर हो जाता है। साथ ही बच्चों को बहुत सी बीमारियां बदलते मौसम के कारण भी होती है, लेकिन रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होने पर बदलते मौसम और संक्रामण वाली बीमारियों से बचा जा सकता है।
जन्म से एक घंटे के भीतर स्तनपान जरुरी
डॉ. विद्यार्थी ने बताया जन्म के 1 घंटे के भीतर बच्चे को माँ का पहला पीला गाढ़ा दूध अवश्य पिलाएँ, जिसे क्लोसट्रूम भी कहते हैं। इसके सेवन करने से शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। कुछ लोग इसे गंदा या बेकार दूध समझकर शिशु को पिलाने से मना करते हैं। जबकि ऐसा करना बिल्कुल गलत है।
बाहरी नहीं, 6 माह तक मां का ही दूध पिलाएं
डॉ. विद्यार्थी ने बताया  6 माह  तक के बच्चे को  केवल मां के दूध ही पिलाना चाहिए। इसमे सभी पोषक तत्व मिलते हैं। मां के दूध का सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। साथ ही 6 माह के पूरे होने के बाद बच्चे को 2 साल तक  ऊपरी आहार के साथ मां का ही दूध पिलाएं। मां के दूध से बच्चों में अलग-अलग रोगों से लड़ने की क्षमता विकसित होती है।
हाथ धोकर बच्चे को लें गोद
डॉ. विद्यार्थी ने बताया बच्चे को बीमारियों से बचाने और उसके रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए सबसे जरूरी है कि उसे किसी भी तरह के संक्रमण की चपेट में नहीं आने दें। इसलिए साफ सफाई का ध्यान रखें , जरूरी है कि बच्चे को हाथ धोकर लें गोद। बच्चे के होठों या गालों को न चूमें। किसी का जूठा ना खिलाएं। कपड़े और खिलौने को साफ जगह पर रखें।
नींद की कमी नहीं होने दें
डॉ. विद्यार्थी ने बताया स्वस्थ रहने के लिए नींद किसी भी व्यक्ति के लिए जरूरी है। यदि बच्चे की नींद पूरी न हो तो वह जल्द ही बीमारियों की चपेट में आने लगता है।  इसलिए जरूरी है कि बच्चे की नींद पूरी हो। उन्होंने बताया नवजात को एक दिन में 18 घंटे तो छोटे बच्चों को 12 से 13 घंटे नींद की आवश्यकता होती है।
घर में किसी को नहीं करने दें धूम्रपान
डॉ.विद्यार्थी ने बताया घर में बच्चे के आसपास किसी को धूम्रपान नहीं करने दें। अगर कोई धूम्रपान का सेवन घर में करता है तो इसका असर बच्चों पर भी पड़ता है। धूम्रपान जितना खतरनाक उस व्यक्ति के लिए है जो इसे कर रहा है, उतना ही खतरनाक उसके आसपास रहने वाले लोगों के लिए भी। सिगरेट का धुआं शरीर में कोशिकाओं को कमज़ोर कर देता है। इसके अलावा सिगरेट-बीड़ी में कई ऐसे जहरीले पदार्थ होते हैं जो बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करते हैं।
सम्पूर्ण  टीकाकरण कराएं
डॉ. विद्यार्थी ने बताया  सम्पूर्ण  टीकाकरण उन्हें कई तरह की बीमारियों से बचाता है। टीकाकरण से बच्चों के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जाता है ताकि उनके रोग से लड़ने की क्षमता विकसित हो सके। इसलिए बच्चे के स्वस्थ्य जीवन के लिए टीकाकरण जरूर कराएं।

200 से अधिक लोगों के लिए गए सैंपल

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संविदाकर्मियों के काम पर लौटने के बाद सैंपलिंग का काम शुरू

कोरोना मरीजों के संपर्कियों को फोनकर घर से सैंपल देने बुलाया

बांका-

संविदाकर्मियों के हड़ताल के बाद काम पर लौट आने से शुक्रवार को सैंपलिंग के काम में तेजी आई। शाम पांच बजे तक 200 से अधिक लोगों के सैंपल लिए जा चुके थे। सिविल सर्जन सुधीर महतो ने बताया कि सिर्फ अमरपुर में ही 90 से अधिक लोगों के सैंपल लिए गए। शहरी क्षेत्र में भी 100 से ज्यादा लोगों के सैंपल लिए गए।

खास बात यह रही कि कोई भी व्यक्ति जो अपनी जांच करवाना चाह रहा था, वह वहां जाकर रजिस्ट्रेशन करवाकर अपना सैंपल दे सकता था। शहरी पीएचसी के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने कहा कि शहरी क्षेत्र में 100 लोगों के सैंपल लेने की बात कही जा रही थी। जिसे आसानी से हासिल कर लिया गया। मेडिकल टीम के सदस्य कंटेनमेंट जोन या फिर मरीजों के संपर्कियों को फोनकर सैंपलिंग के लिए बुला रहे थे। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरी मुस्तैदी से तैनात थी।

आधे घंटे में आ रहा परिणाम

पीएचसी प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने कहा कि एंटीजन किट से सैंपल लेने के बाद 15 से 20 मिनट में मरीजों की रिपोर्ट आ जा रही है। पता चल जा रहा है कि कौन निगेटिव हैं और कौन पॉजिटिव। किसी भी मरीज की रिपोर्ट की जानकारी अधिकतम आधे घंटे में मिल जा रही है।

सामाजिक दूरी का रखा जा रहा था ख्याल

पिछले कुछ दिनों से देखा जा रहा था कि सैंपल देने के लिए बड़ी संख्या में लोग अस्पताल में आ जाते थे, इस वजह से सामाजिक दूरी का पालन कराने में थोड़ी परेशानी होती थी। लेकिन शुक्रवार को इसका ख्याल रखा गया। जहां पर सैंपल लिया जा रहा था, वहां स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात थी और लोगों से सामाजिक दूरी का पालन करवा रही थी।

स्वास्थ्यकर्मी बरत रहे थे सतर्कता

अस्पतालों में सैंपलिंग के दौरान स्वास्थ्यकर्मी पूरी तरह से सतर्कता बरत रहे थे। हर कोई मास्क और ग्लब्स पहने हुए थे तो सैंपल देने वालों में से अगर किसी ने मास्क नहीं पहना था तो उसे भी मास्क उपलब्ध कराया जा रहा था। सैंपल लेने के दौरान कोरोना से बचाव के हर तरीके को स्वास्थ्यकर्मी आजमा रहे थे।

राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने जारी किया है निर्देश

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मिलेंगी  चार वेंटिलेटर मशीन जिला अस्पताल को कोविड 19 के लिए

-बीएमएसआईसीएल के माध्यम से उपलब्ध कराया जायेगा वेंटिलेटर मशीन

लखीसराय –

कोविड-19 की रोकथाम को लेकर सरकार गंभीर है. लोगों को अस्पताल में बेहतर से बेहतर सुविधा मिले, इसको लेकर नई-नई योजना बना रही है. इसी कड़ी में कोराना संक्रमण में हो रही बेहताशा वृद्धि के कारण मरीजों को सहायता मुहैया कराने के मद्देनजर राज्य के सभी अस्पतालों एवं मेडिकल काॅलेज में प्रर्याप्त वेंटीलेटर लगाने का निर्णय लिया गया है. इससे कोरोना मरीजों को अस्पताल में इलाज के दौरान परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा. राज्य स्वास्थ समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने इसको लेकर पत्र जारी किया है एवं इस व्यवसाय को सुनिश्चित कराने की बीएमएसआईसीएल के निदेशक को जिम्मेदारी सौंपी है। पत्र के मुताबिक भारत सरकार से प्राप्त 264 वेंटिलेटर्स को आवश्यकता अनुसार राज्य के सभी अस्पतालों एवं मेडिकल काॅलेज में वितरण कराने को कहा गया है। इनमें जिला को 4 वेंटीलेटेर मशीनों की आपूर्ति करना है।

जिला सिविल सर्जन  डॉ आत्मनन्द राय  ने बताया कि वेंटिलेटर साँस संबंधित मरीजों के लिए बेहद जरूरी है। इसके सहारे गंभीर से गंभीर साँस से संबंधित मरीजों को बचाया जा सकता है। इस संबंध में बीएमएसआईसीएल से जल्द समन्वय स्थापित कर जिला अस्पताल में वेंटिलेटर मशीनों को लगाये जाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जायेगी. कोरोना के संक्रमितों के लिए यह काफी उपयोगी सिद्ध हो सकेगा.

वेंटिलेटर है क्या:

बहुत सरल भाषा में कहें तो यह एक मशीन है जो ऐसे मरीजों की जिंदगी बचाती है जिन्हें सांस लेने में तकलीफ है या खुद सांस नहीं ले पा रहे हैं।यदि बीमारी की वजह से फेफड़े अपना काम नहीं कर पाते हैं तो वेंटिलेटर सांस लेने की प्रक्रिया को संभालते हैं। इस बीच डॉक्टर इलाज के जरिए फेफड़ों को दोबारा काम करने लायक बनाते हैं।

कितने तरह के होते हैं वेंटिलेटर:

वेंटिलेटर मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं। पहला मेकेनिकल वेंटिलेशन और दूसरा नॉन इनवेसिव वेंटिलेशन।मेकेनिकल वेंटिलेटर के ट्यूब को मरीज के सांस नली से जोड़ दिया जाता है।जो फेफड़े तक ऑक्सीजन ले जाता है।वेंटिलेटर मरीज के शरीर से कार्बन डाइ ऑक्साइड को बाहर खींचता है और ऑक्सीजन को अंदर भेजता है। दूसरे प्रकार के वेंटिलेटर को सांस नली से नहीं जोड़ा जाता है, बल्कि मुंह और नाक को कवर करते हुए एक मास्क लागाया जाता है जिसके जरिए इस प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है।

कोरोना मरीजों के लिए क्यों जरूरी है वेंटिलेटर:

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक,कोविड-19 से संक्रमित 80% मरीज अस्पताल गए बिना ठीक हो जाते हैं।लेकिन छह में से एक मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है और उसे सांस लेने में कठिनाई होने लगती है।ऐसे मरीजों में वायरस फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है।फेफड़ों में पानी भर जाता है।जिससे सांस लेना बहुत मुश्किल हो जाता है। शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है।इसलिए वेंटिलेटर्स की आवश्यकता होती है।इसके जआरिए मरीज के शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा को समान्य बनाया जाता है।

मास्क और ग्लव्स पहनने के साथ अन्य सावधानियां भी जरूरी

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सामाजिक दूरी का रखें ख्याल, दो मीटर की दूरी बनाएं रखें

घर से कम-से-कम निकलें, बेहद जरूरी पड़ने पर ही बाहर जाएं

भागलपुर-

कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं। प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करने के लिए घर में तुलसी पत्ता का काढ़ा बनाकर पी रहे हैं तो कोई गिलोई खा रहा है, लेकिन लोग सबसे ज्यादा मास्क और ग्लब्स पहन रहे हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि क्या मास्क और ग्लब्स पहनने से कोरोना के संक्रमण से पूरी तरह सुरक्षित हो जाएंगे। जवाब है नहीं, लेकिन इसे पहनना जरूर चाहिए। साथ ही अन्य सावधानियां भी बरतनी चाहिए। जैसे- सामाजिक दूरी का पालन करें। एक- दूसरे के बीच दो मीटर की दूरी रखें। घर से कम-से-कम निकलें। बहुत जरूरत पड़ने पर ही घर से बाहर जाएं।

निजी चिकित्सक डॉ विनय कुमार झा  कहते हैं कि मास्क पहन लेने के बाद यह मान लेना कि कोरोना के संक्रमण के खतरे से बाहर आ गए हैं, सही नहीं रहेगा। हां, अगर पास में कोई संक्रमित व्यक्ति छींक देता है तो उस स्थिति में इस मास्क से जरूर हिफाजत होगी। साथ में यह भी ध्यान देने वाली बात है कि अब कोरोना के जितने मामले आ रहे हैं, उनमें से बहुत से मामले ऐसे हैं जिसमें संक्रमित लोगों में कोई लक्षण नज़र नहीं रहता है, लेकिन टेस्ट करने पर पॉज़ीटिव पाए गए। ऐसे में अगर आप मास्क का इस्तेमाल करते हैं तो कोई बुराई नहीं है।

साबुन से हाथ धोना ज्यादा कारगर:

डॉ. झा कहते हैं,  जहां तक ग्लब्स की बात है तो इस बात की कोई गांरटी नहीं है कि अगर आप ग्लव्स का इस्तेमाल करते हैं तो आप कोरोना वायरस से बच जाएंगे। लेकिन इसका दूसरा पहलू यह भी है कि खाली हाथ से चेहरा छूना ख़तरनाक हो सकता है। रोजाना साबुन से हाथ धोते रहना ग्लव्स की तुलना में ज्यादा सुरक्षित है।

ऐसे लक्षण नजर आए तो हो जाएं सावधान:

कोरोना संक्रमण का प्रमुख लक्षण बुखार और सूखी खांसी आना है। अगर आपको ये दोनों लक्षण नजर आ रहे हैं तो सावधान होने की जरूरत है। इसके अलावा गले में खराश, सिर दर्द, डायरिया जैसे लक्षण भी कुछ मामलों में पाए गए हैं। कुछ मामलों में लोगों ने शिकायत की है कि उनके मुंह का स्वाद भी चला गया है। कुछ ने गंध ना महसूस होने की भी शिकायत की है।

लक्षण नहीं दिखे तो भी रहें सतर्क

कई मामलों में मरीजो में, कोरोना संक्रमण का कोई लक्षण नहीं देखा गया है। अगर आपको अपने में ऐसे लक्षण नजर आ रहे हैं तो घर में रहें। अगर लक्षण बेहद कम भी हैं तो भी पूरी तरह ठीक होने तक घर पर ही बने रहें। कोरोना के ज्यादातर मामलों में संक्रमण के लक्षण बेहद कम ही होते हैं। ऐसे में दूसरों के संपर्क में आने से बचें।

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इन बातों का रखें ख्याल:

सार्वजानिक स्थानों पर लोगों से छह फीट की दूरी बनायें

घर में बने उपयोग किये जाने वाले मास्क का प्रयोग करें

अपनी आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें

हाथों की नियमित रूप से साबुन एवं पानी से अच्छी तरफ साफ करें

तंबाकू, खैनी आदि का प्रयोग नहीं करें, न ही सार्वजानिक स्थानों पर थूकें

अक्सर इस्तेमाल की जाने वाली सतहों की नियमित सफाई करें

कोरोना मरीजों के लिए जेएलएनएमसीएच बना संजीवनी

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घर परिवार के लोगों की परवाह किए डॉक्टर निभा रहे अपना धर्म
बिना छुट्टी के ही दिन रात कोरोना मरीजों का कर रहे हैं इलाज
भागलपुर-
मायागंज स्थित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल (जेएलएनएमसीएच )कोरोना मरीजों के लिए संजीवनी बन गया है। पूर्वी बिहार के सबसे बड़े अस्पताल में कोरोना मरीजों के इलाज में डॉक्टर दिन-रात लगे हुए हैं।
 अस्पताल के दो दर्जन से अधिक डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी अबतक कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। यहां तक कि अस्पताल के अधीक्षक भी कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। इसके बावजूद यहां के डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी अपना कर्तव्य निभाने में पीछे नहीं हट रहे हैं। अस्पताल स्थित आइसोलेशन वार्ड के प्रभारी डॉ. हेमशंकर शर्मा कहते हैं कि कोरोना के शुरुआती दौर से ही हमलगो काफी सजग होकर काम रहे हैं। पूर्वी बिहार का सबसे बड़ा अस्पताल होने के नाते यहां पर काफी जिलों से मरीज इलाज के लिए आते हैं। इसलिए हमलोग शुरुआत से ही सजग थे। सबसे पहले यहां पर 100 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया। बाद में पूरा अस्पताल को ही कोरोना अस्पताल घोषित कर दिया गया। इस अस्पताल का रिकवरी रेट भी बहुत अच्छा है। कभी-कभार परिजन यहां पर मनमानी करते लगते हैं, जिसपर हमलोग लगाम लगाने की कोशिश करते हैं। मरीज का इलाज सावधानीपूर्वक किया जाता है।परिजन के अनुसार नहीं।
सामान्य मरीजों का भी हो रहा इलाज
कोरोना के साथ अब यहां पर सामान्य मरीजों का भी इलाज रहा है। इसके लिए आईसीयू में बेड़ भी बढ़ाए गए। शुरुआत में शासन के स्तर से सिर्फ कोरोना मरीजों का ही इलाज हो रहा था। दोबारा जब आदेश मिला तो यहां पर सामान्य मरीजों का इलाज भी फिर से शुरू हो गया। सीनियर डॉक्टर के साथ जूनियर भी अपनी भूमिका बढ़-चढ़कर निभा रहे हैं।
झारखंड समेत 15 जिलों से आते हैं मरीज
जेएलएनएमसीएच में भागलपुर और आस-पास जिलों समेत कोशी और  सीमांचल से भी मरीज यहां पर आते हैं। साथ ही झारखंड के गोड्डा, साहेबगंज से भी बड़ी संख्या में भी मरीज यहां इलाज कराने के लिए आते हैं। पास के किसी जिले में इतनी सुविधाओं वाला सरकारी या निजी अस्पताल नहीं है, इस वजह से भी यहां पर इलाज कराने के लिए आने वाले मरीजों की भीड़ बढ़ती है। यही कारण है कि अस्पताल प्रशासन को व्यवस्था को दुरस्त रखना पड़ता है, ताकि मरीजों को उत्तम सुविधाएं मिले और वे स्वस्थ हों।
अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है जेएलएनएमसीएच
यहां पर मरीजों की भीड़ बढ़ने का एक यह भी कारण है कि यहां जांच और इलाज की अत्याधुनिक सुविधाएं  उपलब्ध हैं। कई आधुनिक फीचर के साथ उपकरण लगाए गए हैं। अस्पताल लेटेस्ट उपकरणों से लैस है। यहां पर लगभग हर तरह की जांच मरीजों को कम कीमत पर उपलब्ध हो जाती है। विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं अन्य स्टाफ के जरिए तथा विभिन्न प्रकार के उपकरणों की सहायता से रोगियों का इलाज किया जाता है। इस अस्पताल में मरीज को बचान के लिए हर संभव साजो सामान उपलब्ध है जिससे मरीजों को काफी लाभ हो रहा हैं। वहीं अस्पताल को कीटाणुरहित के लिए हर तरह की तैयारी की गई है जिससे मरीजों को कोई असुविधा नहीं होती है। जेएलएनएमलीएच जैसी सुविधाओं वाला आस-पास अस्पताल नहीं है।

घबराऐ नहीं, कोरोना काल में भी जारी है अस्पतालों में इमरजेंसी सेवा

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घरों पर प्रसव खतरनाक, कोविड 19 प्रोटोकाल का पालन कर अस्पतालों में कराया जा रहा है सुरक्षित प्रसव
जमुई  – कोरोना संक्रमण  तेजी के साथ शहर से लेकर गाँव की गलियों  फैल रहा है। ऐसे में खासकर गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव को लेकर चिंताऐ काफी बढ़ गई है।  उनके जेहन में खासकर संस्थागत प्रसव को लेकर तरह-तरह की सवाल उठने लगे हैं। इस कारण गर्भवती महिलाएँ संस्थागत प्रसव के सरकारी या निजी स्वास्थ संस्थान छोड़  घर पर प्रसव कराने की भी सोच रहीं हैं. किन्तु इस कोरोना काल में सुरक्षित प्रसव के लिए घबराने या डरने की जरूरत नहीं है। बल्कि एहतियात बरतने की जरूरत है। दरअसल कोरोना काल में भी राज्य के सभी अस्पतालों में पुरी सतर्कता के साथ इमरजेंसी सेवाऐ जारी है। ताकि लोगों को किसी प्रकार का परेशानियाँ नहीं हो. इसको लेकर प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान व जननी सुरक्षा योजना की जानकारी आशा और आँगनबाड़ी सेविकाओं के माध्यम से चिन्हित गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को दी जा रही है। खासकर लोगों को संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया गया है। लोगों में यह भ्रांति आयी  है कि घर पर प्रसव कराना आसान और कम खर्च वाला है। लेकिन यह बिल्कुल खतरनाक है. घर पर प्रसव के दौरान आपातकालीन सुविधाएं नहीं रहने से मां और नवजात दोनों की जान का खतरा होता है। साथ ही लोगों को यह भी बताया जा रहा है कि जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकारी अस्पतालों मे प्रसव कराने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों की  प्रसूता को 1400 रुपये एवं शहरी प्रसूता को 1000 रुपये की आर्थिक मदद मिलती है। कोरोना से बचाव के लिए अस्पताल में शारीरिक दूरी का पालन करने,मास्क का इस्तेमाल करने,गर्भवती महिलाओं की व्यक्तिगत साफ-सफाई रखने सहित उनके परिजनों को अस्पताल में अनावश्यक भीड़ नहीं लगाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
इस संबन्ध में सीएस  डॉ विजेंद्र कुमार स्तायर्थी ने बताया कि जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में प्रसव से संबंधित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध है। यहाँ प्रसूति विशेषज्ञ व प्रशिक्षित नर्स द्वारा प्रसव कराया जाता है। सदर अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन की सुविधा भी उपलब्ध है। प्रसव के दौरान कोरोना से संबंधित जरूरी गाइड लाइन का भी पालन किया जा रहा है।
जागरूकता से ही संस्थागत प्रसव संभव:
उन्होंने बताया जागरूकता से संस्थागत प्रसव को बढ़ाया जाना संभव है। लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार हेल्थ अफसरों एवं वर्करों को आवश्यक गाइलाइन दी जा रही है, ताकि संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता मिल सके। और इसके लिए स्वास्थ विभाग की टीम पुरी मुस्तैदी के साथ काम कर रही है।
गर्भवती महिलाएं रखें इन बातों का रखें ध्यान:
अपने क्षेत्र की आशा और एएनएम के संपर्क में रहें। प्रसव की संभावित तिथि को लेकर सजग रहें और परिजनों को भी जानकारी दें।
102 एम्बुलेंस का नम्बर अपने पास रखें व प्रसव के समय बच्चे एवं किसी बीमार व्यक्ति के साथ अस्पताल न जायें।

होम आइसोलेशन में घबराने की जरूरत नहीं, रहें सतर्क

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14 दिन के बाद पूरी तरह से हो जाएंगे स्वस्थ
घर के लोगों से संपर्क में आने की कोशिश से बचें
भागलपुर
कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ता ही जा रहा है। अस्पतालों में बेड भरते जा रहे हैं। ऐसे में अब स्वास्थ्य विभाग ने होम आइसोलेशन में इलाज की व्यवस्था किया है। होम आइसोलेशन में भेजते वक्त एक कीट मरीज को उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसमें दवा और मास्क के साथ जरूरी सामान उपलब्ध कराया जा रहा है। ऐसे में अगर आपका कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया है तो घबराने की जरूरत नहीं है। कोरोना के हल्के लक्षण वाले मरीज 14 दिन तक होम आइसोलेशन में रहकर बिल्कुल ठीक हो सकते हैं। हां, होम आइसोलेशन के दौरान डॉक्टर के निर्देशों का सख्ती से पालन करना चाहिए।
नारायणपुर पीएचसी के प्रभारी डॉ. बिजयेंद्र कुमार विद्यार्थी कहते हैं होम आइसोलेशन के दौरान घर में कोरोना मरीज के लिए अलग हवादार कमरा और टॉयलेट होना अनिवार्य है। अगर ऐसा नहीं हैं, तो आप इसकी जानकारी अपने डॉक्टर को जरूर दें, ताकि अस्पताल में कोविड केयर सेंटर में आपके लिए व्यवस्था की जा सके। कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति की देखभाल के लिए एक व्यक्ति का होना बेहद जरूरी है। अगर परिवार का कोई सदस्य या बुजुर्ग जिनकी उम्र 55 साल से ज्यादा है या घर में कोई गर्भवती महिला या फिर गंभीर बीमारी से जूझ रहा कोई मरीज है, तो कोरोना मरीज के ठीक होने तक उनको किसी रिश्तेदार के घर ठहराने की व्यवस्था करें।
हमेशा मास्क का इश्तेमाल करें
होम आइसोलेशन में रहने के दौरान हमेशा मास्क का इस्तेमाल करें और 8 घंटे उपयोग के बाद उसे फेंक दें। अगर मास्क गीला या गंदा हो जाता है, तो उसको तुरंत बदल दें। ऐसा करने से आप तो सुरक्षित रहेगे ही। घर के अन्य सदस्य भी सुरक्षित रहेंगे। इसलिए घर पर रहते वक्त मास्क का इश्तेमाल हर हाल में करें।
एक ही कमरे में रहें
होम आइसोलेशन के दौरान अपने कमरे में ही रहें और घर के दूसरे कमरों में न जाएं। साथ ही दरवाजे, टेबल जैसी चीजों को छूने से बचें, जिससे घर के अन्य सदस्यों के कोरोना की चपेट में आने का खतरा न रहे। कोरोना मरीज अपने कमरे की खिड़कियां हमेशा खुली

कोविड और कुपोषण के खिलाफ लड़ रही लड़ाई, आगनवाड़ी सेविका कांति दे रही लोगों को जानकारी

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गर्भवती महिलाओं के पोषण व नवजात के स्तनपान के लिए हर घर जा कर कर रहीं जागरूक
लखीसराय-
जिले में कोविड 19 अपना जाल हर रोज फैलाता जा रहा है. इस माहौल में लोग अपनी सुरक्षा के प्रति चितिंत हैं. जबकि हलसी प्रखंड के शिवसोना  आंगनबाड़ी की आंगनबाड़ी सेविका कांति  रोजाना अपने क्षेत्र के लोगों के घर जाकर कोविड 19 से बचाव के तरीकों के प्रति जागरूक करती हैं. इस रोग के संक्रमण से बचाव के साथ वह रोग से जुड़ी अफवालों की भी जानकारी देती हैं. गर्भवती महिलाओं को उनके पोषण और धात्री महिलाओं को शिशु को अधिकाधिक स्तनपान के प्रति जागरूक कर उन्हें कोरोना से लड़ने के लिए मानसिक शक्ति प्रदान करती हैं. कांति की यह लड़ाई कोविड और कुपोषण के खिलाफ है.
गांव में सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखने की दे रही जानकारी:
कांति  बताती है वह अपने क्षेत्र में लोगों को यह बताती है कि कोविड-19 से बचने के लिए जब बाहर निकले तो हमेशा मास्क का उपयोग करें. गांव में सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखें और नियमित हाथों को साबुन से धोंये. हालांकि इसकी जानकारी देने पर कभी ऐसे लोग भी मिलते हैं, जो इस बीमारी को गंभीरता को नहीं समझते. लेकिन वह उन्हें संक्रमण के बारे में विस्तार से जानकारी देकर संक्रमण से बचने और अपने परिवार को बचाने की अपील करती हैं. उनकी बातों को समझ अब कई लोग गंभीरता से संक्रमण से बचाव के नियमों का पालन कर रहे हैं. वह कहती हैं इस कारण उसे कई बार लोगों के नाराजगी  भी झेलना पड़ा, लेकिन उनकी नाराजगी ने स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कामों के प्रति और अधिक कर्तव्यबोध का एहसास हुआ. अब वह पहले से अधिक मजबूती के साथ काम कर रही हैं.
आइसीडीए की जिला कार्यक्रम प्रबंधक कुमारी अनुपमा बताती है कोविड से बचाव के प्रति जिन सेविकाओं को तैनात किया गया था उसमें कांति कुमारी का भी नाम शामिल है. वह अपने दायित्व के प्रति हमेशा सजग रहती रहती हैं.
स्तनपान के फायदों के बारे में देती हैं जानकारी:
कोविड 19 संक्रमण के साथ साथ वे महिलाओं में स्तनपान के फायदों की जानकारी देती हैं. इससे महिलाओं शिशु के अधिकाधिक स्तनपान के प्रति जागरूक हुए हैं. वह स्तनपान कराने के तरीकों की जानकारी के साथ शिशु के रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उपायों के बारे में बताती हैं.  कांति  बताती है वह अपने क्षेत्र के 212 घरों के 1200 परिवार को कोविड -19 संकर्मण के प्रति लोगों को जागरूक कर चुकी है. इस दौरान वह घर की महिलाओं को उनके नवजात के लिए स्तनपान कितना जरूरी है ये भी समझाती है. किसी नवजात के लिए उसके 6 महीने तक सिर्फ स्तनपान अमृत है समान की बात बताकर उन्हे स्तनपान के प्रति जागरूक करना जरूरी है, ताकि शिशु हमेशा स्वस्थ्य रह सके. इसके साथ ही लोगों को अपने एवं आसपास सफाई का ध्यान रखने के लिए कहती हैं

कटोरिया रेफरल अस्पताल में परिवार नियोजन के लिए की गई है बेहतर व्यवस्था

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• अब तक सात महिलाओं की हुयी सफल नसबंदी
• जनसँख्या स्थिरता पखवाड़ा में परिवार नियोजन पर दिया जा रहा ध्यान
• एक पुरुष का भी अस्पताल में किया गया है नसबंदी
बांका-:
कोरोना के बीच अन्य स्वास्थ्य सेवाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है. कटोरिया रेफरल अस्पताल में ओपीडी सेवा का संचालन बेहतर तरीके से चल रहा है. अस्पताल की बेहतर व्यवस्था को देखकर काफी संख्या में मरीज इलाज करवाने के लिए आ रहे हैं. पिछले कुछ दिनों में में अस्पताल में 7 महिलाओं ने परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत नसबंदी भी करायी है. एक पुरुष ने भी अपनी नसबंदी कटोरिया रेफरल अस्पताल में करायी. इलाके में परिवार नियोजन कार्यक्रम को गति देने के लिए अस्पताल में तैनात डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मियों की टीम लगातार प्रयास कर रही है.
जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा के तहत परिवार नियोजन पर बल:
अस्पताल प्रभारी डॉ. विनोद कुमार ने बताया कोरोना को लेकर कुछ दिनों के लिए स्वास्थ्य सेवा रोक दी गई थी,लेकिन निर्देश मिलने के बाद से ओपीडी सेवा को फिर से बहाल कर दी गयी है. अभी जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा चल रहा है, जो 11 जुलाई से शुरू होकर 31 जुलाई तक चलेगा.  इसलिए अभी परिवार नियोजन कार्यक्रम पर जोर दिया जा रहा है. वहीं ओपीडी में सभी तरह के मरीजों का इलाज चल रहा है. डॉक्टरों की टीम मरीजों के इलाज में लगे हुए हैं. साथ ही अस्पताल में मौजूद स्वास्थ्यकर्मी उनकी हर तरह से देखभाल कर रहे हैं.
गर्भवती महिलाओं व शिशुओं को लेकर बरती जा रही सतर्कता:
डॉ. विनोद कुमार ने बताया अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं के इलाज को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है. उनके इलाज को लेकर सरकार की गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है. अस्पताल की नर्स व एएनएम पूरी तरह से सुरक्षित होकर गर्भवती महिलाओं की जांच करते हैं. डॉक्टर भी सावधानीपूर्वक इनका इलाज करते हैं.
सामाजिक दूरी का रखा जा रहा ख्याल:
अस्पताल में आने वाले मरीजों व उनके परिजनों से सामाजिक दूरी का पालन करवाया जा रहा है. दो लोगों के बीच दो मीटर की दूरी हो, इसका ख्याल रखा जा रहा है. बाहर से आने वाले मरीजों को देखने से पहले विशेष सतर्कता बरती जा रही है. यहां आने वाले मरीजों को मास्क और सेनिटाइजर भी उपलब्ध करवाया जा रहा है. डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी पूरी तरह मास्क और ग्लब्स पहनकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं.
सभी लोगों की हो रही थर्मल स्कैनिंग:
अस्पताल में आने वाले सभी व्यक्ति, चाहे मरीज हो या फिर उसके परिजन उसकी थर्मल स्कैनिंग की जा रही है. शरीर के तापमान को नापने के बाद  ही इलाज किया जा रहा है. इस दौरान अगर कोई संदिग्ध मरीज दिखता है तो उसे सैंपलिंग के लिए भेज दिया जाता है. स्वास्थ्यकर्मी पूरी मुस्तैदी से अपने मोर्चे पर डटे हुए हैं