कोरोना जांच में आयेगी तेजी, जिला को 4620 भीटीएम किट आवंटित
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर नवजात को बीमारियों से रखें दूर
200 से अधिक लोगों के लिए गए सैंपल
संविदाकर्मियों के काम पर लौटने के बाद सैंपलिंग का काम शुरू
कोरोना मरीजों के संपर्कियों को फोनकर घर से सैंपल देने बुलाया
बांका-
संविदाकर्मियों के हड़ताल के बाद काम पर लौट आने से शुक्रवार को सैंपलिंग के काम में तेजी आई। शाम पांच बजे तक 200 से अधिक लोगों के सैंपल लिए जा चुके थे। सिविल सर्जन सुधीर महतो ने बताया कि सिर्फ अमरपुर में ही 90 से अधिक लोगों के सैंपल लिए गए। शहरी क्षेत्र में भी 100 से ज्यादा लोगों के सैंपल लिए गए।
खास बात यह रही कि कोई भी व्यक्ति जो अपनी जांच करवाना चाह रहा था, वह वहां जाकर रजिस्ट्रेशन करवाकर अपना सैंपल दे सकता था। शहरी पीएचसी के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने कहा कि शहरी क्षेत्र में 100 लोगों के सैंपल लेने की बात कही जा रही थी। जिसे आसानी से हासिल कर लिया गया। मेडिकल टीम के सदस्य कंटेनमेंट जोन या फिर मरीजों के संपर्कियों को फोनकर सैंपलिंग के लिए बुला रहे थे। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरी मुस्तैदी से तैनात थी।
आधे घंटे में आ रहा परिणाम
पीएचसी प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने कहा कि एंटीजन किट से सैंपल लेने के बाद 15 से 20 मिनट में मरीजों की रिपोर्ट आ जा रही है। पता चल जा रहा है कि कौन निगेटिव हैं और कौन पॉजिटिव। किसी भी मरीज की रिपोर्ट की जानकारी अधिकतम आधे घंटे में मिल जा रही है।
सामाजिक दूरी का रखा जा रहा था ख्याल
पिछले कुछ दिनों से देखा जा रहा था कि सैंपल देने के लिए बड़ी संख्या में लोग अस्पताल में आ जाते थे, इस वजह से सामाजिक दूरी का पालन कराने में थोड़ी परेशानी होती थी। लेकिन शुक्रवार को इसका ख्याल रखा गया। जहां पर सैंपल लिया जा रहा था, वहां स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात थी और लोगों से सामाजिक दूरी का पालन करवा रही थी।
स्वास्थ्यकर्मी बरत रहे थे सतर्कता
अस्पतालों में सैंपलिंग के दौरान स्वास्थ्यकर्मी पूरी तरह से सतर्कता बरत रहे थे। हर कोई मास्क और ग्लब्स पहने हुए थे तो सैंपल देने वालों में से अगर किसी ने मास्क नहीं पहना था तो उसे भी मास्क उपलब्ध कराया जा रहा था। सैंपल लेने के दौरान कोरोना से बचाव के हर तरीके को स्वास्थ्यकर्मी आजमा रहे थे।
राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने जारी किया है निर्देश
मिलेंगी चार वेंटिलेटर मशीन जिला अस्पताल को कोविड 19 के लिए
-बीएमएसआईसीएल के माध्यम से उपलब्ध कराया जायेगा वेंटिलेटर मशीन
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लखीसराय –
कोविड-19 की रोकथाम को लेकर सरकार गंभीर है. लोगों को अस्पताल में बेहतर से बेहतर सुविधा मिले, इसको लेकर नई-नई योजना बना रही है. इसी कड़ी में कोराना संक्रमण में हो रही बेहताशा वृद्धि के कारण मरीजों को सहायता मुहैया कराने के मद्देनजर राज्य के सभी अस्पतालों एवं मेडिकल काॅलेज में प्रर्याप्त वेंटीलेटर लगाने का निर्णय लिया गया है. इससे कोरोना मरीजों को अस्पताल में इलाज के दौरान परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा. राज्य स्वास्थ समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने इसको लेकर पत्र जारी किया है एवं इस व्यवसाय को सुनिश्चित कराने की बीएमएसआईसीएल के निदेशक को जिम्मेदारी सौंपी है। पत्र के मुताबिक भारत सरकार से प्राप्त 264 वेंटिलेटर्स को आवश्यकता अनुसार राज्य के सभी अस्पतालों एवं मेडिकल काॅलेज में वितरण कराने को कहा गया है। इनमें जिला को 4 वेंटीलेटेर मशीनों की आपूर्ति करना है।
जिला सिविल सर्जन डॉ आत्मनन्द राय ने बताया कि वेंटिलेटर साँस संबंधित मरीजों के लिए बेहद जरूरी है। इसके सहारे गंभीर से गंभीर साँस से संबंधित मरीजों को बचाया जा सकता है। इस संबंध में बीएमएसआईसीएल से जल्द समन्वय स्थापित कर जिला अस्पताल में वेंटिलेटर मशीनों को लगाये जाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जायेगी. कोरोना के संक्रमितों के लिए यह काफी उपयोगी सिद्ध हो सकेगा.
वेंटिलेटर है क्या:
बहुत सरल भाषा में कहें तो यह एक मशीन है जो ऐसे मरीजों की जिंदगी बचाती है जिन्हें सांस लेने में तकलीफ है या खुद सांस नहीं ले पा रहे हैं।यदि बीमारी की वजह से फेफड़े अपना काम नहीं कर पाते हैं तो वेंटिलेटर सांस लेने की प्रक्रिया को संभालते हैं। इस बीच डॉक्टर इलाज के जरिए फेफड़ों को दोबारा काम करने लायक बनाते हैं।
कितने तरह के होते हैं वेंटिलेटर:
वेंटिलेटर मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं। पहला मेकेनिकल वेंटिलेशन और दूसरा नॉन इनवेसिव वेंटिलेशन।मेकेनिकल वेंटिलेटर के ट्यूब को मरीज के सांस नली से जोड़ दिया जाता है।जो फेफड़े तक ऑक्सीजन ले जाता है।वेंटिलेटर मरीज के शरीर से कार्बन डाइ ऑक्साइड को बाहर खींचता है और ऑक्सीजन को अंदर भेजता है। दूसरे प्रकार के वेंटिलेटर को सांस नली से नहीं जोड़ा जाता है, बल्कि मुंह और नाक को कवर करते हुए एक मास्क लागाया जाता है जिसके जरिए इस प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है।
कोरोना मरीजों के लिए क्यों जरूरी है वेंटिलेटर:
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक,कोविड-19 से संक्रमित 80% मरीज अस्पताल गए बिना ठीक हो जाते हैं।लेकिन छह में से एक मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है और उसे सांस लेने में कठिनाई होने लगती है।ऐसे मरीजों में वायरस फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है।फेफड़ों में पानी भर जाता है।जिससे सांस लेना बहुत मुश्किल हो जाता है। शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है।इसलिए वेंटिलेटर्स की आवश्यकता होती है।इसके जआरिए मरीज के शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा को समान्य बनाया जाता है।
मास्क और ग्लव्स पहनने के साथ अन्य सावधानियां भी जरूरी
सामाजिक दूरी का रखें ख्याल, दो मीटर की दूरी बनाएं रखें
घर से कम-से-कम निकलें, बेहद जरूरी पड़ने पर ही बाहर जाएं
भागलपुर-
कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं। प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करने के लिए घर में तुलसी पत्ता का काढ़ा बनाकर पी रहे हैं तो कोई गिलोई खा रहा है, लेकिन लोग सबसे ज्यादा मास्क और ग्लब्स पहन रहे हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि क्या मास्क और ग्लब्स पहनने से कोरोना के संक्रमण से पूरी तरह सुरक्षित हो जाएंगे। जवाब है नहीं, लेकिन इसे पहनना जरूर चाहिए। साथ ही अन्य सावधानियां भी बरतनी चाहिए। जैसे- सामाजिक दूरी का पालन करें। एक- दूसरे के बीच दो मीटर की दूरी रखें। घर से कम-से-कम निकलें। बहुत जरूरत पड़ने पर ही घर से बाहर जाएं।
निजी चिकित्सक डॉ विनय कुमार झा कहते हैं कि मास्क पहन लेने के बाद यह मान लेना कि कोरोना के संक्रमण के खतरे से बाहर आ गए हैं, सही नहीं रहेगा। हां, अगर पास में कोई संक्रमित व्यक्ति छींक देता है तो उस स्थिति में इस मास्क से जरूर हिफाजत होगी। साथ में यह भी ध्यान देने वाली बात है कि अब कोरोना के जितने मामले आ रहे हैं, उनमें से बहुत से मामले ऐसे हैं जिसमें संक्रमित लोगों में कोई लक्षण नज़र नहीं रहता है, लेकिन टेस्ट करने पर पॉज़ीटिव पाए गए। ऐसे में अगर आप मास्क का इस्तेमाल करते हैं तो कोई बुराई नहीं है।
साबुन से हाथ धोना ज्यादा कारगर:
डॉ. झा कहते हैं, जहां तक ग्लब्स की बात है तो इस बात की कोई गांरटी नहीं है कि अगर आप ग्लव्स का इस्तेमाल करते हैं तो आप कोरोना वायरस से बच जाएंगे। लेकिन इसका दूसरा पहलू यह भी है कि खाली हाथ से चेहरा छूना ख़तरनाक हो सकता है। रोजाना साबुन से हाथ धोते रहना ग्लव्स की तुलना में ज्यादा सुरक्षित है।
ऐसे लक्षण नजर आए तो हो जाएं सावधान:
कोरोना संक्रमण का प्रमुख लक्षण बुखार और सूखी खांसी आना है। अगर आपको ये दोनों लक्षण नजर आ रहे हैं तो सावधान होने की जरूरत है। इसके अलावा गले में खराश, सिर दर्द, डायरिया जैसे लक्षण भी कुछ मामलों में पाए गए हैं। कुछ मामलों में लोगों ने शिकायत की है कि उनके मुंह का स्वाद भी चला गया है। कुछ ने गंध ना महसूस होने की भी शिकायत की है।
लक्षण नहीं दिखे तो भी रहें सतर्क
कई मामलों में मरीजो में, कोरोना संक्रमण का कोई लक्षण नहीं देखा गया है। अगर आपको अपने में ऐसे लक्षण नजर आ रहे हैं तो घर में रहें। अगर लक्षण बेहद कम भी हैं तो भी पूरी तरह ठीक होने तक घर पर ही बने रहें। कोरोना के ज्यादातर मामलों में संक्रमण के लक्षण बेहद कम ही होते हैं। ऐसे में दूसरों के संपर्क में आने से बचें।
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इन बातों का रखें ख्याल:
सार्वजानिक स्थानों पर लोगों से छह फीट की दूरी बनायें
घर में बने उपयोग किये जाने वाले मास्क का प्रयोग करें
अपनी आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें
हाथों की नियमित रूप से साबुन एवं पानी से अच्छी तरफ साफ करें
तंबाकू, खैनी आदि का प्रयोग नहीं करें, न ही सार्वजानिक स्थानों पर थूकें
अक्सर इस्तेमाल की जाने वाली सतहों की नियमित सफाई करें