आइसोलेशन सेंटर की बेहतर साफ सफाई रखने के निर्देश

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• स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने सफाई को लेकर भेजा पत्र
• आइसोलेशन सेंटर के प्रभारी करेंगे सफाई कार्यों की निगरानी
लखीसराय –
कोविड-19 के मद्देनजर जिला में विभिन्न आइसोलेशन सेंटर में साफ सफाई के बहेतर व्यवस्था को लेकर सफाईकर्मियों को उचित मात्रा व संख्या में सफाई सामग्री मुहैया करायी जायेगी. इस संबंध में राज्य के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव  उदय सिंह कुमावत ने जिलाधिकारी व सिविल सर्जन को पत्र के माध्यम से आवश्यक निर्देश दिये हैं. पत्र में कहा गया है कि  आइसोलेशन या क्वारेंटाइन सेंटर की साफ-सफाई आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से नियमित रूप से हो. सफाई का विशेष ध्यान रख कर कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने की दिशा में पर्याप्त  संख्या में बिहार श्रम संसाधन विभाग के माध्यम से श्रमिकों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये. वहीं सफाई कर्मचारियों का व्यय सीएस द्वारा बिहार वित्त नियमावली के माध्यम से किये जाने की बाबात की कहा गया है. जबकि सफाई कार्य की निगरानी आइसोलेशन सेंटर के प्रभारी करेंगे.  इनके द्वारा सत्यापन के आधार पर ही आउटसोर्स कंपनी के कर्मियों का भुगतान किया जायेगा.
सिविल सर्जन डॉ आत्मानंद राय ने बताया के निर्देश के आलोक में इस दिशा में कार्य प्रारंभ किया गया है. सभी आइसोलेशन सेंटर में सफाई व्यवस्था चुस्त दुरुस्त होगी. सफाई सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करायी गयी है और आइसोलेशन प्रभारी को सफाई के संंबंध में आवश्यक मॉनिटरिंग के आदेश भी दिये गये हैं.
सफाई के लिए उपलब्ध करायी जायेगी सामग्री:
साफ-सफाई के चयन होने वालों श्रमिकों को साफ-सफाई के लिए पर्याप्त समाग्री विभाग द्वारा उपब्ध करायी जायेगी. इन सामग्रियों में झाड़ू,पोछा, वाइपर, बाल्टी, डस्टर, एक प्रतिशत सोडियम हाईपोल्कोक्लोराइड, ब्लीचिंग पाउडर, फिनाइल लिक्विड, फिनाइल गोली, हारपिक आदि शामिल हैं. स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला में लोगों को भी व्यक्तिगत व अपने आसपास साफ सफाई रखने के लिए अपील की गयी है. अपील कर इसकी जानकारी दी जा रही है कि  कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए साफ सफाई महत्वपूर्ण है और दूसरी संक्रामक बीमारियों की भी रोकथाम में ये जरूरी है.
नियमित रूप से सैनिटाइजेशन पर भी है जोर:
निर्देश के मुताबिक साफ सफाई के साथ नियमित तौर पर आइसोलेशन सेंटर के सैनिटाइजेशन को भी ध्यान में रखा जाना है. वहीं यहां रह रहे लोगों से जहां तहां नहीं थूकने को लेकर जानकारी दी जानी है. आइसोलेशन सेंटर से बाहर सार्वजनिक स्थलों पर लोगों से बेजगह नहीं थूकने को लेकर जागरूक करने के साथ साथ गुटखा, पान, खैनी आदि खाकर थूकने पर लगने वाले दंड के प्रावधान के बारे में भी बताया गया है.

घर पर खान-पान का रखें ख्याल

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• ऐसा नहीं करने से दूसरी बीमारी की चपेट में आ सकते हैं
• पौष्टिक भोजन को ही दे प्राथमिकता,  शरीर रहेगा स्वस्थ
 भागलपुर-
कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए फिर से लॉकडाउन लगाना पड़ा है. लोग घरों में कैद है. चाह कर भी बाहर नहीं निकल पा रहे हैं. इस वजह से लोगों की कई दैनिक दिनचर्या प्रभावित हुयी है. ऐसी परिस्थिति में लोगों को घर में काफी संभल कर रहना चाहिए. खासकर भोजन में काफी सतर्कता बरतनी चाहिए नहीं तो कोरोना से तो बच जाएंगे, लेकिन दूसरी बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं. तेल मसाले युक्त भोजन करने से ब्लडप्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं. इससे बचने के लिए खानपान में सतर्कता बरतनी जरूरी है. साथ ही घर पर कुछ समय के लिए योग या फिर व्यायाम करना जरूरी है.
नारायणपुर पीएचसी प्रभारी डॉ विजेंद्र कुमार विद्यार्थी कहते हैं कि घर पर रहने के दौरान भोजन पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता है. इस समय लोग घरों से बाहर नहीं निकल पाते हैं. साथ ही घर में रहने के कारण शारीरिक गतिविधियां कम होती है. वसा युक्त आहार सेवन से मोटापा एवं कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्या बढ़ सकती है, जो एक साथ कई बीमारियों को न्योता दे सकता है.कहीं ऐसा ना हो जाए कोरोना से बचने के कारण कोई दूसरी बीमारियों की चपेट में आ जाए. इसलिए घर पर पौष्टिक भोजन का सेवन करना स्वास्थ्यवर्धक है.
मसालेदार खाने से करें परहेज:
अक्सर देखा जाता है कि लोग जब घरों में रहते हैं तो अधिक स्वादिष्ठ भोजन करना चाहते हैं, जिसमें तेल और मसाले युक्त सामग्री ज्यादा होती हैं. इसे खाने में कोई बुराई नहीं है लेकिन लेकिन जितना कैलोरी शरीर में प्रवेश करता है, उसे बर्न करने की भी जरूरत होती है. इसके लिए शारीरिक श्रम करना पड़ता है. इस समय कोई घर से बाहर नहीं निकल पा रहा है. इस वजह से अगर संभव हो तो कम से कम तेल मसाले युक्त भोजन करें.
सादा भोजन ही करें:
घर में रहते हुए पौष्टिक भोजन ही करें. दाल और हरी सब्जियों का जितना हो सके सेवन करें. हरी सब्जियां खाने से पर्याप्त कैलोरी मिलती है. इससे शरीर की जरूरत भी पूरी हो जाती है और दूसरी बीमारी होने का भी खतरा कम हो जाता है. दाल और हरी सब्जियों का अधिक सेवन करने से पेट से संबंधित भी कोई बीमारी नहीं होती है. लॉकडाउन में हरी सब्जी सबसे उपयुक्त भोजन है, इसलिए इसका अधिक से अधिक सेवन करें.
गर्म भोजन ही करें:
बारिश का मौसम चल रहा है इस वजह से भोजन का ध्यान रखना जरूरी है. इस समय गर्म खाना को ही प्राथमिकता दें. ठंडा भोजन करने से वायरल या सर्दी जुकाम हो सकता है. साथ ही फ्रिज का पानी पीने से परहेज करें. अभी के मौसम में नार्मल पानी ही पीएं. मौसम उतार-चढ़ाव वाला है. इस वजह से कोई खतरा मोल नहीं ले. कभी बारिश पड़ने से ठंड का एहसास होता है तो कभी धूप खिलने से गर्मी और उमस पड़ने लगता है.इस वजह से इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
गर्म पानी और नींबू का सेवन करें:
सुबह-सुबह गर्म पानी पीने से शरीर में मौजूद तैलीय पदार्थ खत्म हो जाता है. इसलिए सुबह-सुबह गर्म पानी अवश्य पीएं. साथ ही दिन में चार से पांच बार नींबू पानी को मिलाकर पी लें. इससे शरीर में तैलीय पदार्थ जमा नहीं हो सकेगा, जिससे कोलेस्ट्रॉल हाइपरटेंशन और शुगर जैसी बीमारियों पर नियंत्रण रहेगा.
घर पर योग और व्यायाम करें:
शरीर में शारीरिक श्रम करने से तेल मसाले युक्त भोजन का प्रभाव कम हो जाता है. उससे मिलने वाली कैलोरी जल जाता है. इससे किसी भी तरह का साइड इफेक्ट नहीं होता है. इसलिए कोशिश करें घर में कम से कम आधा घंटा जरूर योग करें. योग नहीं तो शारीरिक कसरत करें. इससे आपका शरीर स्वस्थ रहेगा.

प्रखंड परियोजना प्रबंधक बलदेव कुमार ने जीविका ग्रामीण बाजार का किया उद्घाटन

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खरीफ प्रखंड के खऱीक बाजार पंचायत में जीविका ग्रामीण बाजार का विधिवत् उद्घाटन जीविका के प्रखंड परियोजना प्रबंधक बलदेव कुमार तथा जीविका ग्रामीण बाजार की सचिव संजू देवी के द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस जीविका ग्रामीण बाजार का मुख्य उद्देश्य गांव की गरीब जीविका दीदी जो छोटा मोटा किराना की दुकान चला रही है उन्हें बाजार से सस्ते दामों पर सामग्री उपलब्ध करवाना है। इस मौके पर जीविका कार्यालय खटी के सभी कर्मी माधव मोहन, लक्ष्मी कुमारी तथा सरोज राम के साथ-साथ अन्य कैडर भी उपस्थित थे।

भारतीय किसान संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का मनोनयन

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देश के जाने-माने औधोगिक सलाहकार तथा भारतीय मानवाधिकार परिषद के राष्ट्रीय सचिव श्री चिरंजीत कुमार शर्मा को भारतीय किसान संगठन ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद से नवाजा है, श्री चिरंजीत कुमार शर्मा उत्तर प्रदेश के जाने-माने राजनीतिक एवं व्यापारिक परिवार से सम्बंधित होने के साथ-साथ उतर प्रदेश के बड़े किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं।

श्री चिरंजीत शर्मा एक जाने माने कवि के साथ उम्दा इंसान भी हैं और भ्रष्टाचार को समाप्त करने के साथ-साथ ब्लाइंड और ओल्ड एज होम के लिए काफी कार्य करते हैं। किसान संगठन में इनके आने से किसानों की समस्या को राष्ट्रीय स्तर पर सरकार को घेरने में एक मजबूत आधार माना जा रहा है।

सही प्रबंधन बचाएगा डायरिया के प्रकोप से

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करोना काल में रखें अपना और बच्चों का ख्याल
निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) की स्थिति साबित हो सकती है जानलेवा
लखीसराय –
हम ही नहीं बल्कि पूरा स्वास्थ्य विभाग अभी कोरोना संक्रमण के दंस को झेल रहा है। इस  संक्रमण ने सारी व्यवस्थाएँ को ही बदल डाली है .इस समय अगर हम घर पे रहकर ही अपना एवं परिवार के पोषण का कुछ ख्याल रखें तो हमे अस्पताल जाने से राहत मिल सकती है. क्योंकि बदलते मौसम में डायरिया होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है। डायरिया के कारण अत्यधिक निर्जलीकरण(डिहाइड्रेशन)होने से समस्याएँ बढ़ जाती है एवं कुशल प्रबंधन के अभाव में यह जानलेवा भी हो जाता है। शिशु मृत्यु दर के कारणों में डायरिया भी एक प्रमुख कारण है। इसके लिए डायरिया के लक्षणों के प्रति सतर्कता एवं सही समय पर उचित प्रबंधन कर बच्चों को डायरिया जैसे गंभीर रोग से आसानी से सुरक्षित किया जा सकता है।
नियमित स्तनपान से शिशु का डायरिया से होता है बचाव: जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया  शिशुओं को डायरिया से बचाने के लिए नियमित स्तनपान पर अधिक जोर देने की जरूरत है। 6 माह तक सिर्फ स्तनपान कराने से शिशु का डायरिया एवं निमोनिया जैसे गंभीर रोगों से बचाव होता है। गंभीर स्थिति में अविलम्ब मरीज को डॉक्टर के पास ले जाएँ तथा उचित उपचार कराएँ। उन्होंने बताया नीम हकीम द्वारा बताये गए उपायों से बचना चाहिए तथा ऐसी स्थिति में चिकित्सीय सलाह लेनी चाहिए। और भोजन बनाने और खाने समय साफ़ सफाई रखने के अलावा शुद्ध जल का सेवन अनिवार्य है। साथ ही ओआरएस एवं जिंक घोल निर्जलीकरण से वचाव करता है। हमेशा ओआरस एवं जिंक की गोली रखें .
शरीर में पानी की नहीं होने दें कमी: जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी कहते हैं बारिश के मौसम में डायरिया का खतरा सबसे अधिक रहता है। दस्त के कारण पानी के साथ जरूरी एल्क्ट्रोलाइट्स (सोडियम, पोटैशियम,क्लोराइड एवं बाईकार्बोनेट) का तेजी से ह्रास होता है। बच्चों में इसकी कमी को दूरर करने के लिए ओरल रीहाइड्रेशन सलूलन (ओआरएस) एवं जिंक घोल दिया जाता है।  विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार बच्चों में 24 घंटे के दौरान तीन या उससे अधिकबार पानी जैसा दस्त आना डायरिया है। शरीर में पानी की कमी से यह बीमारी होती है। इसलिए बच्चों को इससे बचाने के लिए सजग रहना चाहिए। इस बात का ध्यान देते रहना चाहिए कि बच्चों में पानी की कमी नहीं हो। यदि संभव हो तो ओआरएस का घोल नियमित तौर पर बच्चे को देना चाहिए।
जागरूकता से बचाव संभव : जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया जागरूकता से डायरिया की रोकथाम की जा सकती है। अक्सर यह बीमारी बरसात के समय या फिर अत्यधिक गंदगी से होती है। डायरिया के चलते पेट के निचले हिस्से में दर्द, पेट में मरोड़, उल्टी आना, बुखार और शरीर में कमजोरी हो जाती है। इसके लिए लोगों को खाने से पूर्व हाथ जरुर साफ़ करना चाहिए एवं ताजा खाने का ही सेवन करना चाहिए। साथ ही साफ़ पानी एवं ताजे फ़ल एवं सब्जी का सेवन डायरिया से बचाव करने में सहायक होते हैं।
डायरिया से वचाव के घरेलू उपाय :
एक गिलास पानी में दो चम्मच चीनी के साथ एक चम्मच नमक और नींबू का रस मिलाकर पिलाऐ, तुरंत आराम मिल जाएगा।
नारियल पानी:-डायरिया की समस्या में नारियल का पानी बहुत फायदेमंद होता है।नारियल पानी में मौजूद पोशक तत्व शरीर की कमजोरी को भी दूर करता है।
पानी में सौंफ का चूर्ण मिलकर बच्चों को पिलाने से दस्त की समस्या दूर होती है।
अनार के छिलके को सूखाकर अच्छे से पीस लें। इसके बाद इस चूर्ण को शहद में मिलाकर बच्चे को दिन में तीन से चार बार दें।
डायरिया में होने वाले डिहाइड्रेशन से बचने के लिए ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ लें। अगर उलटियां भी हो रही हैं तो एकबार में अधिक पानी पीने के बजाय थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पिलाते रहें।
इस दौरान बच्चे को आराम और पर्याप्त नींद लेने से भी राहत मिलेगी।
मसालेदार खाने से परहेज रखें।

गर्भावस्था के दौरान फल और हरी सब्जियों का भरपूर करें सेवन

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• कोरोना के संक्रमण के डर से इसके इस्तेमाल से नहीं करें परहेज
• हरी सब्जी और फल को बाजार से लाने के बाद गर्म पानी से धोकर करें इस्तेमाल
  भागलपुर-
कोरोना काल में में लोग हर तरह से सावधानी बरत रहे हैं. भोजन भी बहुत सोच समझ कर रहे हैं. फल और हरी सब्जियों को खाने से लोग  परहेज कर रहे हैं. दरअसल लोगों को ऐसा लग रहा है कि कहीं इसके जरिए वह कोरोना से संक्रमित न हो जाए. ऐसा करना ठीक नहीं है. खासकर गर्भवती महिलाओं को तो बिल्कुल भी ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि  ऐसा करने से उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा. साथ ही उनके गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी इसका विपरीत असर पड़ सकता है. इसलिए फल और हरी सब्जियों को खाने से परहेज नहीं करें, बल्कि खाने  से पहले कुछ सावधानियों को बरतें.
फलों एवं सब्जियों की करें अच्छी से सफाई:
हरी सब्जियों को लाने के बाद गर्म पानी में उसे धो दें या फिर चार-पांच घंटे तक धूप में उस को रख दे. इसी तरह फल को भी खरीद कर लाने पर उसे गर्म पानी में धो दें. इससे उसके जरिए कोरोना वायरस के शरीर के अंदर प्रवेश करने का खतरा कम हो जाएगा. नारायणपुर पीएचसी के प्रभारी डॉ विजेंद्र कुमार विद्यार्थी  कहते हैं गर्भावस्था में महिलाओं को खानपान में विशेष तौर पर ध्यान देना चाहिए. प्रोटीन, आयरन और फोलिक एसिड का भरपूर सेवन करना चाहिए. इससे माता स्वस्थ रहेंगी और पेट में पल रहा बच्चा भी. जहां तक कोरोना की बात है तो यह कब तक रहेगा कहना मुश्किल है. ऐसे में फल और सब्जियों को छोड़ना ठीक नहीं रहेगा. इसे लेकर कुछ सावधानी बरतनी होगी. जैसे कि बाहर से फल और हरी सब्जी को लाने के बाद उसे गर्म पानी में धो ले और उसका इस्तेमाल 4 से 5 घंटे बाद करें. ऐसा करने से कोरोना होने का खतरा नहीं रहेगा.
दूध और उस से बने सामान का भरपूर इस्तेमाल करें:
गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक भोजन में मां और बच्चे दोनों के लिए दूध और उससे बने उत्पाद जरूरी है. गर्भावस्था के दौरान शिशु के विकास के लिए प्रोटीन और कैल्शियम की ज्यादा जरूरत होती है. गर्भवती महिला के शरीर के लिए 1,300 एमजी कैल्शियम आवश्यक होता है. खानपान में दूध, दही आदि को शामिल करें. दूध, दही, पनीर, मक्खन जैसी चीजें आप अपने भोजन में इस्तेमाल कर सकती है.
हरी और पत्तेदार सब्जियों का भरपूर करें इस्तेमाल:
डॉक्टर विद्यार्थी ने बताया गर्भवती महिलाओं को एक दिन में 27 मिलीग्राम आयरन की जरूरत होती है. गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे-पालक, पत्तागोभी, ब्रोकली को एक संतुलित मात्रा में डायट में शामिल करें. ऐसा करना मां और बच्चे दोनों के लिए लाभदायक है.
 साबुत अनाज का करें इस्तेमाल:
 गर्भावस्था के दौरान साबुत अनाजों का सेवन फायदेमंद होता है. गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक भोजन में साबुत अनाज में भरपूर कैलोरी मिलती है जो गर्भ में शिशु के विकास में मदद करती है.
 अंडे का करें सेवन:
गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक भोजन में गर्भवती महिला को अंडे को शामिल करना चाहिए लेकिन, कच्चे अंडे का सेवन न करें. गर्भावस्था के दौरान उबले अंडे का सेवन शरीर को प्रोटीन, कोलीन, बायोटीन, कोलेस्ट्रोल, विटामिन-डी और एंटी-ऑक्सिडेंट जैसे तत्व प्रदान करता है. इसके अलावा एक बड़े अंडे में 77 कैलोरी ऊर्जा होती है. इसलिए अंडे को गर्भवती महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक भोजन में अंडा बच्चे की सेहत के लिए फायदेमंद होता है

कोरोना संकट के दौरान बच्चों के संतुलित आहार का रखें ध्यान: डॉ देवेंद्र

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• संतुलित आहार बच्चों के शारीरिक मानसिक विकास के लिए महत्वपूर्ण
• बड़े बच्चों को प्रत्येक दो घंटे पर पानी पीने की दिलायें आदत
लखीसराय, 20 जुलाई: कोविड 19 संकटकाल के दौरान जनजीवन प्रभावित हुआ है. कोरोनावायरस संक्रमण के कारण लोग घरों में सिमटे हैं. लॉकडाउन के कारण बच्चे भी अपने घरों में ही बंद हैं. ऐसे में उनका भी स्वास्थ्य प्रभावित हुआ है. इस हालात में स्वयं के सेहत के साथ बच्चों के सेहत का पूरा ध्यान रखना जरूरी है. बच्चे किसी भी उम्र के हों, उनके आहार का मुख्य रूप से ध्यान रखना जरूरी है. वैसे पौष्टिक आहार जिनसे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती हैं उन्हें नियमित तौर पर दिये जाने चाहिए. संतुलित आहार से बच्चों विटामिन और मिनरल्स मिलते हैं और ये उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए आवयश्क है.
अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ देवेन्द्र चौधरी ने बताया बच्चों के आहार के सतर्कता जरूरी है. बालवस्था में प्रतिरोधक क्षमता का विकास तेजी से होता है. इसलिए जरूरी है कि उनके भोजन में दूध, अनाज के साथ भरपूर मात्रा में पानी व समय समय पर विभिन्न मौसमी फलों को जरूर शामिल करें.
शारीरिक विकास के लिए प्रोटीन व कैल्श्यिम जरूरी:
डॉ. चौधरी ने बताया बच्चे के शारीरिक विकास के लिए कैलोरी बहुत जरूरी है. अधिक कैलोरी के लिए दूध और साबुत अनाज अधिक देने पर ध्यान दें. बच्चों को कॉर्नफ्लैक्स व ओट्स दे सकते हैं. वहीं प्रोटीन की कमी से शारीरिक व मानसिक विकास सही तरीके से नहीं हो पाता है और मस्तिष्क संबंधी भी कई तरह के विकार पैदा हो जाते हैं. इसके अलावा मांसपेशियों और हड्डियों की मजबूती के लिए भी प्रोटीन व कैलिश्यम बहुत जरूरी है. प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनाने के लिए बच्चों को पूरी मात्रा में विटामिन और मिनरल दें. भोजन में  दूध, ताज़ा दही, दाल, चावल, मौसमी फल, हरी पत्तेदार सब्जियाँ और अंडे आदि शामिल करें साथ ही उन्हें प्रत्येक दो घंटे पर पानी पीने के लिए कहें.
बच्चों के खानपान से जुड़ी इन बातों का जरूरी रखें ध्यान:
• जन्म के शुरुआती 1 घण्टे में नवजात को कराएं स्तनपान
• 6 माह तक सिर्फ शिशु को कराएं स्तनपान (ऊपर से कुछ भी न दें। पानी भी नहीं).
• स्तनपान को कम से कम 2 साल तक जारी रखें.
• 6 माह पूर्ण होने के बाद बच्चे को स्तनपान के साथ संपूरक आहार देना शुरू करें.
• प्रतिदिन बच्चे को घर का बना  आहार खिलाएं. इस बात का ध्यान रखें कि इनमें पौष्टिक तत्व भरपूर मात्रा में शामिल हों.
• बच्चे को प्यार से समझाएं. उसे खेल-खेल में खाना खिलाएं.
• कलरफुल चीजें बच्चे को बहुत पसंद होती हैं। यह बात आपके लिए फायदेमंद हो सकती है. उन्हें सलाद, फल और सब्जियां काट कर दें.
॰       खाना खाने से पहले बच्चों को हाथ धोने की आदत डालें.
• बच्चो को खेलने दें, वह जितना ज्यादा थकेंगे उन्हें उतनी ही भूख लगनी शुरू हो जाएगी. वह खुद खाना मागेगा.
• बच्चे को पौष्टिक खाना खाने की आदत डालें और बाहरी खाना से बचाएं

स्वास्थ्यकर्मियों को होटलों में मिलेगी पेड आइसोलेशन की सुविधा, स्वास्थ्य विभाग वहन करेगा खर्च

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• स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने पत्र जारी कर जिला पदाधिकारी व सिविल सर्जन का दिये निर्देश
• होम आइसोलेशेन में अड़चनों को ध्यान में रख हुई पहल, उनकी समुचित देखभाल को प्राथमिकता
लखीसराय , 20 जुलाई: राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोविड 19 की रोकथाम व लोगों की जांच में जुटे फ्रंटलाइन वर्कर्स व चिकित्साकर्मियों को पेड आइसोलेशन की सुविधा प्रदान की जायेगी. इस सुविधा के तहत बिना लक्षणवाले चिकित्साकर्मी स्वयं को आसानी से आइसोलेट कर सकेंगे. ताकि संक्रमण के फैलाव को पूर्णत: रोका जा सके. सरकारी खर्च पर होटलों में आइसोलेशन को लेकर प्रधान सचिव उदय सिंह कुमावत ने इस दिशा में पत्र के माध्यम से दिशा निर्देश जारी किया है.
इन तथ्यों को ध्यान में रख विभाग ने उठाये हैं कदम:
पत्र में कहा गया है कि कोविड 19 के बढ़ते संक्रमण के मद्देनजर इस रोग के चिकित्सकीय प्रबंधन की समुचित व्यवस्था की जा रही है. राज्य के सरकारी अस्पतालों, जिलास्तरीय स्वास्थ्य कार्यालयों में कार्यरत कई चिकित्सक एवं पारा चिकित्साकर्मियों  व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के हाल के दिनों में कोविड 19 से संक्रमित होने की सूचना के उपरांत उनकी समुचित देखभाल किया जाना आवश्यक है. हालांकि कोविड पॉजिटिव अलक्षणात्मक चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मियों को सर्शत होम आइसोलेशन की सुविधा प्रदान की गयी है, लेकिन कई स्वास्थ्यकर्मी किराये के मकान में रहते हैं और उनके संक्रमित होने के फलस्वरूप होम आइसोलेशन में अड़चन आ सकती है. साथ ही उन्हें घर पर सेल्फ आइसोलेशन एवं अन्य पारिवारिक संपर्क को क्वारेंटाइन करने की आवश्यक सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकती है.
स्वास्थ्य विभाग वहन करेगा पेड आइसोलेशन का खर्च:
इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अब चिकित्सक, चिकित्साकर्मियों व फ्रंटलाइन वर्कर्सों के कोविड पॉजिटिव लक्षणात्मक या अलक्षणात्मक होने पर पेड आसोलेशन के रूप में होटल की सुविधा प्रदान की जानी है. साथ ही होम आइसोलेशन में कठिनाई होने पर भी उन्हें यह सुविधा प्रदान की जानी है. स्वास्थ्यकर्मियों के पेड आइसोलेशन में रहने की अवधि में होने वाले व्यय का भुगतान स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर किया जायेगा.
प्रति कमरा अधिकतम 3000 रुपये किये गये हैं निर्धारित:
प्रमंडलीय मुख्यालय के जिलों के होटल के लिये प्रति कमरा भोजन सहित अधिकतम 3000 रुपये एवं अन्य जिला के होटल हेतु प्रति कमरा भोजन सहित अधिकतम 2500 रुपये का निर्धारण किया गया है. संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों के लिए होटल में कमरा आरक्षित होने अर्थात बेड आॅक्यूपाइड होने की तिथि से ही भुगतान किया जायेगा. वहीं पत्र में कोविड पॉजिटिव चिकित्सक एवं चिकित्सा कर्मियों में कोरोना संबंधित किसी भी प्रकार का लक्षण आने पर उसकी गंभीरता को ध्यान में रख कर चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल में उनको भर्ती किये जाने को प्राथमिकता भी देनी है

कोरोना को मात देने वाले भी नहीं रहें लापरवाह, बरतें सावधानी

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मास्क पहन कर ही घर से निकलें, सामाजिक दूरी का भी करें पालन
भागलपुर, 20 जुलाई
जिले में कोरोना का संक्रमण बढ़ता ही जा रहा है. राज्य सरकार को फिर से लॉकडाउन लगाना पड़ा है. ऐसे में लोगों को सतर्क रहना बेहद जरूरी है. जो संक्रमित हो चुके हैं उन्हें तो सतर्कता बरतनी ही चाहिए, जो नहीं हुए हैं, साथ ही जो कोरोना को मात दे चुके हैं, उन्हें भी कोरोना से बचने के लिए पूरी सतर्कता बरतने की जरूरत है.  समाज में इस तरह का भ्रांति हैं कि कोरोना एक बार हो गया है तो दोबारा नहीं होगा. जबकि किसी भी रिसर्च में इस तरह की कोई बात सामने नहीं आई है जिससे यह कहा जा सके कि जिसको एक बार कोरोना हो गया है और वह स्वस्थ हो गया है तो फिर से उसे कोरोना नहीं होगा.
निजी चिकित्सक डॉ. विनय कुमार झा कहते हैं कि दरअसल जो कोरोना को मात दे चुके होते हैं उनका शरीर उस हिसाब से अपनी प्रतिरोधक क्षमता को विकसित कर लेता है. इस वजह से उन्हें तत्काल कोरोना होने का खतरा नहीं रहता है, लेकिन आगे जाकर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता उसी हिसाब से रहेगी यह निश्चित नहीं है. इसलिए जिन लोगों ने कोरोना को मात दे दिया है उन्हें भी जागरूक रहने की जरूरत है. वह सारे एहतियात जो आमलोग कोरोना से बचने के लिए बरत रहे हैं. उन्हें भी अपनाना चाहिए. यह तो बिल्कुल भी नहीं सोचना चाहिए कि हम कोरोना को मात दे चुके हैं और हमें दोबारा नहीं होगा. बल्कि उन्हें सतर्क रहते हुए लोगों को जागरूक करना चाहिए कि कोरोना से बचने के लिए क्या-क्या करना चाहिए. साथ ही नीचे दिए बातों का ध्यान रखना चाहिए.
एक दूसरे से उचित दूरी बनाकर रहे: डॉ. झा बताते हैं जिस प्रकार से तेजी से कोरोना फैल रहा है ऐसे में बीमार पड़ने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें. एक दूसरे से उचित दूरी बनाकर रखें. अपनी आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें. बुखार-खांसी और सांस लेने में तकलीफ हो तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें. बीमार पड़ने पर खुद डॉक्टर नहीं बनें. किसी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है.
बारिश में भीगने से बचें: डॉ. झा बताते हैं फिर से लॉकडाउन लगा दिया गया है. ऊपर से बारिश का मौसम भी चल रहा है. ऐसे में घरों से निकलने से बिल्कुल परहेज करें. ऐसा देखा जा रहा है कि कई लोग बेवजह घरों से निकल रहे हैं और वह बारिश में भीग भी जा रहे हैं इस तरह की हरकत से बचें और अगर बारिश में भीग जाते हैं तो तत्काल कपड़ा को बदल लें. भीगे हुए कपड़े पहनकर ज्यादा देर तक नहीं रहे. ऐसा करने से सर्दी, जुकाम, बुखार हो सकता है.
घर की सफाई पर दें ध्यान: डॉ. झा बताते हैं, अक्सर इस्तेमाल की जाने वाली सतहों की नियमित सफाई करें. आपके घर पर जिन चीजों का इस्तेमाल रोज हो रहा है और हर व्यक्ति उसका उपयोग करता है, उनकी रोज सफाई करें. कुर्सी, मेज, स्विच, दरवाजे और हैंडल को घर के सभी लोग इस्तेमाल करते हैं, इन्हें रोज साफ करें

सदर अस्पताल में ओपीडी सेवा का लाभ लें आमलोग

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जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं करायी जा रही मुहैया
मुंगेर –
सदर अस्पताल में ओपीडी सेवा  प्रत्येक दिन चल रहा है. हालांकि कोरोना काल में ये सेवा थोड़ी बाधित रहती है पर निरंतर रूप से अधिकतर सेवा आमजन को आसानी से उपलब्ध है. दूसरी स्वास्थ्य सेवाओं को बहाल करने साथ साथ कोविड-19 से बचाव एवं जागरूकता के लिए सभी तरीके के जरूरी तैयारी है ताकि संक्रमण का खतरा कम से कम रहे. वहीं लोग अपना इलाज सही समय पर करवा भी सकें.
जिला सिविल सर्जन डॉ के पुरुषोत्तम ने बताया जिला के सदर अस्पताल में ओपीडी सेवा बहाल है. यहाँ हर रोज सभी आवश्यक सेवाएं लोगों को दी जा रही है. डॉक्टर भी समय से मौजूद रहते हैं. सभी चिकित्सकों व पदाधिकारियों को किसी भी आपात स्थिति में निपटने के लिए तैयार करने का निर्देश है. ओपीडी कक्ष एवं उस परिसर को हर रोज सेनेटाइज किया जाता है । यहाँ आने वाले मरीज एवं उनके अभिवाक को ये निर्देश अस्पताल प्रबंधन के तरफ से दिया गया है कि कोई भी  बिना  मास्क के परिसर में प्रवेश ना करें. इस परिसर में आने वाले मरीजों का ईलाज  सोशल –डिस्टेन्सिंग का पालन कर ही  किया जाता है. किसी तरह के भीड़ को भी एकत्रित ना हो पाये इस बात का भी अस्पताल प्रबंधन को ध्यान में रखने का सख्त निर्देश दिया गया है.
फ्रंटलाइन वर्कर्स को सर्तक रहने के लिए कहा गया:
कोरोना संक्रमण के मामलों में इजाफा हुआ है. फ्रंटलाइन वर्कर्स सहित स्वास्थ्यकर्मी के भी संक्रमित होने की संभावना के मद्देनजर सिविल सर्जन ने उन्हें सर्तक रह कर काम करने के लिए कहा है. संक्रमण को लेकर आशा व आंगनबाड़ी सेविकाओं के माध्यम से जागरूकता लाने का काम किया गया है. सिविल सर्जन ने लोगों को लॉकडाउन के दौरान घर में रहने की अपील की है. उन्होंने कहा कि लोग मास्क का इस्तेमाल करें, हाथों को नियमित रूप से धोंये और गंदे हाथों से नाक व मुंह को छूने से बचें. उन्होंने दमा व अन्य संक्रामक रोगों के शिकार लोगों को बहुत अधिक एहतियात बरतने के लिए कहा है. बाहर निकलने पर 2 फीट की शारीरिक दूरी रखें. इस दौरान रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने वाले पौष्टिक आहार लेते रहें. सर्दी जुकाम के साथ हंफनी व बुखार या सांस लेने में तकलीफ आदि लक्षण किसी में यदि दिखता है तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र को इसकी जानकारी जरूर दें