प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर नियमित टीकाकरण का हुआ आयोजन

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– महिलाओं को स्वच्छता के बारे में भी किया गया जागरूक
– टीकाकरण के दौरान सामाजिक दूरी का रखा गया ख्याल
– रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर विशेष बल
लखीसराय 15 जुलाई :कोरोना संकटकाल में भी बच्चों व गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग और आईसीडीएस की ओर से कई कार्यक्रम चलाये जा रहें है। इसी क्रम में जिले में बुधवार को नियमित टीकाकरण का आयोजन सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ अतरिक्त केंद्रो पर किया गया।  ये आयोजन कंटेनमेंट जोन को छोड़कर सभी केंद्रो पर किया गया । साथ ही आंगनवाड़ी केंद्रों पर आई हुयी गर्भवती तथा धात्री महिलाओं को कोरोना के विषय में जागरूक करते हुए उन्हें सोशल डिस्टेन्सिंग एवं हाथ की धुलाई के बारे में भी बताया गया। कार्यक्रम में इस बात का भी ध्यान रखा गया की किसी भी तरह की लापरवाही न हो।
नियमित टीकाकरण  तथा स्वच्छता के महत्व को लेकर किया गया जागरूक:  जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया नियमित टीकाकरण का आयोजन जिले  के कंटेनमेंट क्षेत्र को छोड़कर सभी आगनवाड़ी एवं अतिरिक्त केन्द्रों पर किया गया। उन्होंने बताया लखीसराय अर्बन पीएचसी में 11 बच्चे और  52  गर्भवती महिलाओं को   एवं  ग्रामीण क्षेत्र  में  267 गर्भवती महिला  एवं  67  बच्चों को  टीके लगाए गए. वही बड़हीया पीएचसी के अन्तर्गत 95 बच्चे एवं 32 गर्भवती महिला को प्रतिरक्षीत किए गए । टीकाकरण कार्य में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने गर्भवती माताओं को कोरोना संक्रमण से बचाव व टीकाकरण की जरूरत तथा महत्व के बारे में लोगों को जागरूक किया। साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ अतिरिक्त केंद्रो पर भी आशा व अन्य मोबिलाइजरों द्वारा लाभार्थी अथवा उसके अभिभावकों में भी बुखार, सर्दी-खांसी के लक्षण की भी जांच की। इसके साथ ही व्यक्तिगत दूरी, मुंह को ढककर रखने व नियमित 40 सेकेंड तक हाथ धोने आदि की भी जानकारी दी गयी।
जानिए क्या है टीकाकरण; डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया टीका एक जीवन रक्षक है जो बच्चे का रक्षा कवच बनकर उसके जीवन की सुरक्षा करता है। टीका बच्चे के शरीर को संक्रामक रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है ताकि नवजात शिशु को कोई भी संक्रामक रोग छू भी न सकें। बच्चों को टीका लगवाने की यह क्रिया वैक्सीनेशन कहलाती है। संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिये यह प्रक्रिया सबसे सस्ती और सबसे प्रभावी है।
1. प्राथमिक टीकाकरण
नवजात शिशु संक्रामक रोगों से बचा रहें और उसके शरीर में रोगों से लड़ने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत हो इसके लिए नवजात शिशु के जन्म के समय से ही प्राथमिक टीकाकरण किया जाता है। समय समय पर दिए जाने वाले टीके बच्चे को कई जान लेवा बीमारियों से बचाते है इसलिए समय पर बच्चों को टीका अवश्य लगवाएं।
2. बूस्टर टीकाकरण
बूस्टर खुराकें प्राथमिक टीकाकरण के प्रभाव को बढ़ाने के लिए दी जाती हैं। ताकि जिन शिशुओं में पहले टीके के बाद प्रतिरक्षण क्षमता विकसित नही हुई हो, उन्हें बूस्टर ख़ुराक़ देकर रोगों से लड़ने की क्षमता विकसित की जाए ताकि शिशु हमेशा रोगों से बचा रहें।
3. सार्वजनिक टीकाकरण
जब किसी जगह किसी विशेष बीमारी का भयावह रूप बच्चों पर दिखने लगता है तो उस बीमारी से सभी बच्चों की रक्षा के लिए और उस बीमारी को जड़ से ख़तम करने के लिए सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जाता है। जैसे पल्स पोलियों अभियान सरकार के द्वारा पोलियो को जड़ से ख़तम करने के लिए चलाया गया और जनता के सहयोग से यह अभियान सफल रहा जिससे आज भारत पोलियो मुक्त बन चुका है।
नियमित टीकाकरण कई तरह की बीमारियों से करता है बचाव: डॉ भारती ने बतायाशिशुओं व गर्भवती महिलाओं के रूटीन इम्यूनाइजेशन, उन्हें कई तरह की बीमारियों से बचाता है।  साथ ही टीकाकरण से बच्चों के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जाता है ताकि उनके रोग से लड़ने की क्षमता विकसित हो सके।  बीमारियां जैसे खसरा, टिटनेस, पोलियो, क्षय रोग, गलाघोंटू, काली खांसी व हेपेटाइटिस बी आदि बीमारियों से यह बच्चों की सुरक्षा करता है।

बारिश के मौसम में नवजात की देखभाल को मां रहें सजग

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-मच्छर और दूषित पानी से बच्चे को बचाकर रखें
-खिड़की-दरवाजे रखें बंद, मशहरी का इस्तेमाल करें
बांका, 15 जुलाई:
बच्चों की देखभाल करना किसी चुनौती से कम नहीं है। बारिश के मौसम में तो चुनौतियां और भी बढ़ जाती हैं। ऐसे मौसम में खासकर मां की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। इस मौसम में एक साथ कई तरह के संक्रमण का खतरा बच्चों में रहता है। इस वजह से शिशुओं का इस मौसम में खास ख्‍यान रखना पड़ता है।
 बांका शहरी पीएचसी के प्रभारी डॉक्टर सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि बच्‍चों की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। इस वजह से वह बीमारियों का मजबूती से मुकाबला नहीं कर पाते हैं। इस मौसम में मच्छर और दूषित पानी से बच्चों को विशेष तौर पर बचाने की जरूरत है। मच्‍छर के काटने पर शिशु को बहुत तेज दर्द होता है और उसकी त्‍वचा पर लाल निशान या सूजन भी हो सकती है। इसलिए बच्चों को हमेशा मशहरी के अंदर रखें।
 खिड़की-दरवाजे बंद रखें, ताकि मच्‍छर अंदर न आ सकें।
अरामदायक कपड़े पहनाएं:
बारिश के मौसम में बच्चे को आरामदायक कपड़े पहनाएं। इससे उमस भरे मौसम में बच्चे को राहत मिलेगी। बारिश के मौसम में शिशुओं की साफ सफाई का ख्याल रखा जाना बहुत जरूरी है। नमी के कारण शिशु की नाजुक त्वचा के संक्रमित होने की आशंका ज्यादा रहती है। बच्चे को गुनगुने पानी से नहलाना चाहिए। साथ ही साफ तौलिये से अच्छी तरह पोछना चाहिए। बच्चे के पास जाते वक्त कपड़े और हाथ को साफ रखें। इससे संक्रमण होने का खतरा कम हो जाता है।
शरीर में पानी की नहीं होने दें कमी:
डॉ. चौधरी कहते हैं बारिश के मौसम में डायरिया का खतरा सबसे अधिक रहता है। शरीर में पानी की कमी से यह बीमारी होती है। डायरिया से छुटकारा मिलने के बाद भी एक सप्ताह तक डॉक्टर की निगरानी में रहना पड़ता है। इसलिए बच्चों को इससे बचाने के लिए सजग रहना चाहिए। इस बात का ध्यान देते रहना चाहिए कि बच्चों में पानी की कमी नहीं हो। यदि संभव हो तो ओआरएस का घोल नियमित तौर पर बच्चे को देना चाहिए।
घर के आसपास गंदगी नहीं होने दें:
बारिश के मौसम में घर को साफ रखना बहुत जरूरी होता है। घर साफ रहने से मच्छर का प्रकोप कम होता है। मच्छर का प्रकोप कम होने से बहुत राहत मिलती है। इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है घर में पानी नहीं जमने दें। घर का कोई भी हिस्सा भींगा नहीं रहने दें। इससे घर भी साफ रहेगा और मच्छर का प्रकोप भी कम होगा।
स्वच्छ पानी ही पीएं:
साफ पानी नहीं पीने से इस मौसम में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। साफ पानी नहीं पीने से डायरिया और पेट से संबंधित दूसरी बीमारी होने का खतरा रहता है। इसलिए साफ पानी पीना बेहद जरूरी है। अगर संभव हो तो खुद भी उबालकर पानी पीएं और बच्चों को भी पिलाएं।

शहरी पीएचसी में सुचारू तरीके से चल रहा टीकाकरण

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अस्पताल की बेहतर व्यवस्था को देखकर लोगों खत्म हो रही झिझक
दिन-प्रतिदिन यहां टीकाकरण के लिए आने वालों की बढ़ रही संख्या
बांका, 14 जुलाई:
शहरी पीएचसी में टीकाकरण का सुचारू तरीके से चल रहा है। अस्पताल की बेहतर व्यवस्था को देखकर अब लोगों की झिझक खत्म होने लगी है और पहले की ही तरह पीएचसी में लोग टीकाकरण के लिए आ रहे हैं।
 शहरी पीएचसी प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया कोरोना को लेकर कुछ दिनों के लिए स्वास्थ्य सेवा रोक दी गई थी, लेकिन निर्देश मिलने के बाद से टीकाकरण को फिर से बहाल कर दिया गया है। शुरुआत में लोगों में कुछ हिचकिचाहट जरूर थी, लेकिन अस्पताल में व्यवस्था को सुचारू तरीके से देखने के बाद लोग पहले की तरह यहां पर आने लगे हैं। लोगों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए अभी यहां पर बेहतर तरीके से टीकाकरण का काम चल रहा है। चार डॉक्टरों की टीम मरीजों के इलाज में लगे हुए हैं। साथ ही अस्पताल में मौजूद स्वास्थ्यकर्मी उनकी हर तरह से मदद कर रहे हैं।
मरीजों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर ध्यान: शहरी पीएचसी में तैनात डॉक्टर लोगों में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए टीकाकरण पर जो रहे हैं। डॉ. चौधरी ने बताया कि पीएचसी में आने वाले लोगों को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। टीकाकरण के दौरान सरकार की गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है। अस्पताल की नर्स व एएनएम पूरी तरह से टीकाकरण के काम में लगे हुए हैं। अस्पताल में मौजूद स्वास्थ्यकर्मी पूरी सावधानी बरत रहे हैं।
सामाजिक दूरी का रखा जा रहा ख्याल: अस्पताल में टीकाकरण के लिए आने वाले लोगों व उनके परिजनों से सामाजिक दूरी का पालन करवाया जा रहा है। दो लोगों के बीच दो मीटर की दूरी हो, इसका ख्याल रखा जा रहा है। बाहर से आने वाले लोगों को देखने से पहले विशेष सतर्कता बरती जा रही है। यहां आने वाले मरीजों को मास्क और सेनिटाइजर भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी पूरी तरह  मास्क और ग्लब्स पहनकर अपने काम में लगे हुए हैं।
सभी लोगों की हो रही थर्मल स्कैनिंग: अस्पताल में आने वाले सभी व्यक्ति, चाहे मरीज हो या फिर उसके परिजन उसकी थर्मल स्कैनिंग की जा रही है। शरीर के तापमान को मापने के बाद ही इलाज किया जा रहा है। इस दौरान अगर कोई संदिग्ध मरीज दिखता है तो उसे सैंपलिंग के लिए भेज दिया जाता है। स्वास्थ्यकर्मी पूरी मुस्तैदी से अपने मोर्चे पर डटे हुए हैं।

होम आइसोलेशन में है तो नियमों का करें पालन, तभी कोरोना से होगा बचाव

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संक्रमित मरीज होम आइसोलेशन के दौरान कर रहे नियमों को नजरअंदाज
मुंगेर,14 जुलाई: कोविड-19 संक्रमण से बचाव के नियमों का पालन करने के लिए लोगों से स्वास्थ्य विभाग की अपील की जा रही है. भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचने, घर से बाहर निकलने पर मास्क लगाने, हाथों की नियमित 40 सेकेंड तक सफाई व ऐसे ही अन्य नियमों के जानकारी देते हुए इनके पालन को स्वास्थ्य विभाग सुनिश्चित कराने में लगा है. वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा सामान्य स्थिति वाले संक्रमित मरीजों को होम आइसोलेशन करने का निर्देश भी जारी किया गया. हालाँकि इसके लिए कई आवश्यक गाइलाइन भी जारी की गई. इन गाइडलाइन का होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों को अक्षरत: सौ फीसदी पालन करना अनिवार्य होगा. किन्तु जानकारी के अभाव में ऐसे मरीज सामान्य लोगों की तरह रोजमर्रा की जिंदगी बिताते हुए दिख रहे हैं. एक ऐसा ही ताजा मामला जमालपुर का सामने आया है, जहाँ एक युवती के पॉजिटिव रिपोर्ट आने बाद उसके परिजन उसे क्वींस हाॅस्टल जमालपुर आइसोलेशन सेंटर लेकर पहुँचे.
यहां मौजूद अधिकारियों ने सरकार के गाइलाइन के मुताबिक उन्हें होम आइसोलेशन में रहने की बात कहकर वापस कर दिया. इसके बाद पॉजिटिव युवती अपने परिवार के साथ किराऐ के मकान में रहने लगी. इस मकान के एक ही ऑगन में 10-12 परिवार के सदस्य रहते हैं. इस कारण आसपास के लोगों ने विरोध शुरू कर दिया. विरोध के बाद परिवार वालों ने उक्त युवती को पास के ही एक झोपड़ीनुमा आवास में रहने के लिए भेज दिया. शैचालय व पेयजल की व्यवस्था नहीं होने के कारण काफी परेशानी बढ़ गयी. संसाधन एवं जानकारी के अभाव में संक्रमित मरीज होम आइसोलेशन के नियमों एवं शर्तों का पालन नहीं कर पा रहे हैं. इस संबंध में पूछने पर सीएस ने बताया कि उक्त युवती जानकारी एवं संसाधन के अभाव में इस नियमों व शर्तो का पालन नहीं कर पाई थी. युवती को हरसंभव स्वास्थ्य व प्रशासनिक मदद की जाएगी. एवं उक्त  लड़की को आइसोलेशन केंद्र में रखकर ईलाज किया जा रहा है ।
क्या है होम आइसोलेशन के नियम एवं शर्त:
संक्रमित मरीजों को होम आइसोलेट होने के पूर्व लोकल पीएचसी में एक शपथ-पत्र भर कर देना होगा. इसके बाद सरकार के आदेशानुसार अलग शौचालय,बाथरूम, आवास समेत ट्रिपल लेयर वाला मास्क, एवं सामान्य लोगों से पुरी तरह अलगाव होकर रहना पड़ेगा और नियमित रूप से लगातार साबुन,सेनेटाइज का उपयोग करना होगा. साथ ही चिकित्सीय परामर्श का हरसंभव पालन करना होगा

कोरोना काल में रखें अपने बच्चों का खास ख्याल

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o जिले के पोषण पुर्नवास केंद्र में चल रहा है 14 बच्चों का ईलाज
o कुपोषित बच्चों के लिए संजीवनी है पोषण पुर्नवास केंद्र
o कुपोषित बच्चों के विशेष खानपान व देखभाल की होती हैं सुविधाएं
लखीसराय, 14जुलाई : कोरोना के इस काल में हमें अपने बच्चों के स्वास्थ्य का  ध्यान रखना हम सब के लिए जरूरी है क्योंकि अगर हम किसी तरह की लापरवाही करते हैं तो बच्चा कुपोषण का शिकार हो सकता है । कुपोषण को खत्म करने के लिए सरकार भी गंभीर है. कुपोषण की इस स्थिति से निबटने के लिए पोषण पुर्नवास केंद्र स्थापित किये गये हैं. पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चे को 14 दिनों के लिए रखा जाता है. डाक्टर की सलाह के मुताबिक उनका खानपान का विशेष ख्याल रखा जाता है. यहां रखा गया कोई बच्चा 14 दिनों में कुपोषण से मुक्त नहीं हो पाता है तो वैसे बच्चों को एक माह तक यहां रख कर विशेष देखभाल की जाती है. भर्ती हुए बच्चे के वजन में न्यूनतम 15 प्रतिशत की वृद्धि के बाद ही यहाँ से डिस्चार्ज किया जाता है. पोषण पुर्नवास केंद्र में मिलने वाली सभी सुविधाएं निशुल्क होती है।
जिला सिविल सर्जन डॉ आत्मनन्द राय ने बताया जिले के पोषण पुर्नवास केंद्र में 14 बच्चों का अभी ईलाज चल रहा है । पोषण पुर्नवास केंद्र में  स्वास्थ्यकर्मी  मास्क एवं दस्ताने का हमेशा प्रयोग करते हैं । कोरोना के प्रभाव को देखते हुए इस संक्रमण से बचने के लिए महत्वपूर्ण कड़ी सोशल- डिसेंसिंग का भी पालन  ईलाज किया जा रहा है ताकि बच्चे पूर्ण रूप से इस संकर्मण से बचे रहे एवं स्वस्थ्य हो कर अपने घर जाएँ ।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 4 की रिपोर्ट के मुताबिक 5 वर्ष से कम आयु के सौ बच्चों में से 50.6 प्रतिशत  बच्चों की लंबाई उनकी आयु के हिसाब से कम है यानी वे नाटापन से ग्रसित हैं. वहीं 5 वर्ष से कम आयु के 20 फीसदी बच्चों का वजन उनकी आयु के हिसाब से कम है और वे दुबलापन से ग्रसित हैं. इसी आयु वर्ग के  47.3 फीसदी बच्चे कम वजन वाले हैं और 7.1 प्रतिशत बच्चों का वजन उनकी आयु के हिसाब से बहुत अधिक कम है।
ये हैं पोषण पुर्नवास केंद्र में भर्ती के मानक:
बच्चे को एनआरसी में भर्ती करने के लिए कुछ मानक निर्धारित हैं. इनमें बच्चों के विशेष जांच के तहत उनका वजन व बांह आदि का माप किया जाता है. 6 माह से अधिक एवं 59 माह तक के ऐसे बच्चे जिनकी बांई भुजा 11.5 सेमी हो और उम्र के हिसाब से लंबाई व वजन न बढ़ता हो वह कुपोषित है. उसे ही पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती किया जाता है. इसके साथ ही दोनों पैरों में पिटिंग एडीमा हो तो ऐसे बच्चों को भी यहां पर भर्ती किया जाता है.।
जानें पोषण पुनर्वास केंद्र पर मिलने वाली सेवाएं:
• रेफर किये गये बच्चों की पुन:जांच करना
• उनमें कुपोषण या अतिकुपोषण की पहचान करना
• बच्चे के पोषण का पूरा पूरा ख़्याल रखना
• बच्चों के पोषण पर अभिभावकों को उचित सलाह देना
• भर्ती हुए कुपोषित बच्चों की 24 घंटे पूरी देखभाल
• डिस्चार्ज के बाद हर 15 दिन में 2 माह तक फॉलोअप

मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति भी रहें सतर्क

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• लापरवाही बरतने पर कोई भी व्यक्ति आ सकता है चपेट में
• कोरोना से हर तरह के लोगों को बचने की जरूरत
भागलपुर, 14 जुलाई:
कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ता ही जा रहा है. इससे बचने को लेकर तरह-तरह के भ्रम भी समाज में है. कोई कहता है कि लहसून खाने से कोरोना नहीं होता है तो कोई कहता है तील के तेल के मालिश करने से नहीं होता है, तो कोई अल्कोहल के सेवन से कोरोना से बचने की बात कर रहे हैं. लेकिन सच्चाई यह है कि किसी को भी कोरोना हो सकता है. यहां तक कि मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति  भी इसकी चपेट में आ सकते हैं.
नारायणपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. विजय शंकर विद्यार्थी ने बतया कोरोना को लेकर किसी तरह का भ्रम नहीं पालना चाहिए. इसकी चपेट में कोई भी आ सकता है. कोरोना से बचने का एकमात्र तरीका है सावधानी. आप अपने परिजनों, रिश्तेदारों और मित्रों को जीवनशैली से जुड़ी सावधानियों के बारे में बताएं. पड़ोसियों के साथ मिलकर कोरोना से जुड़ी आपातकालीन स्थिति की योजना बनाएं. कोरोना से संक्रमण या बीमारी की स्थिति में संपर्क करने वाले लोगों की सूची बनाएं और साथ के लोगों के साथ साझा करें. अगले कुछ समय तक बीमार लोगों से मिलने से परहेज करें. यदि आप खुद बीमार हैं तो डॉक्टर से मिलने के अलावा बाहर निकलने या अन्य जगहों पर जाने से बचें. सर्दी-खांसी और जुकाम होने पर टिश्यू का इस्तेमाल करें, परिजनों के साथ भी कम बैठने की कोशिश करें.
घर की सफाई पर दे ध्यान: आपके घर पर जिन चीजों का इस्तेमाल रोज हो रहा है और हर व्यक्ति उसका उपयोग करता है, उनकी रोज सफाई करें. कुर्सी, मेज, स्विच, दरवाजे और हैंडल को घर के सभी लोग इस्तेमाल करते हैं, इन्हें रोज साफ करें.
एक दूसरे से दूरी बना कर रहे: जिस प्रकार से तेजी से कोरोना फैल रहा है ऐसे में बीमार पड़ने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें. एक दूसरे से दूरी बनाकर रखें. अपनी आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें. बुखार-खांसी और सांस लेने में तकलीफ हो तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें. बीमार पड़ने पर खुद डॉक्टर नहीं बनें. किसी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है. डॉक्टर आपका पूरा विश्लेषण कर आपको सलाह देते हैं, इसलिए उनकी सलाह को नजरअंदाज नहीं करें.
मास्क और सेनिटाइजर का करें इस्तेमाल: डॉ विद्यार्थी कहते हैं अगर आपका कोई करीबी अस्पताल में भर्ती है और आपको उसके पास रहना है तो खुद को अच्छी तरह से ढक लें. मास्क लगाएं और सेनिटाइजर से लगातार हाथ साफ करते रहें. अस्पताल के स्टाफ का निर्देश मानें और मरीज से पांच फीट की दूरी से मिलें.
इन बातों का रखें ख्याल:
• सार्वजानिक स्थानों पर लोगों से छह फीट की दूरी बनायें
• घर में बने उपयोग किये जाने वाले मास्क का प्रयोग करें
• अपनी आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें
• हाथों की नियमित रूप से साबुन एवं पानी से अच्छी तरफ साफ करें
• तंबाकू, खैनी आदि का प्रयोग नहीं करें, न ही सार्वजानिक स्थानों पर थूकें
• अक्सर इस्तेमाल की जाने वाली सतहों की नियमित सफाई करें

कोरोना काल में फरिश्ते की तरह काम कर रही हैं एएनएम अंजू कुमारी

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घर-घर जाकर लोगों की कर रही स्क्रीनिंग
क्षेत्र के लोगों को सफाई के प्रति कर रही जागरूक
बांका, 13 जुलाई
कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है. स्वास्थ्यकर्मियों के ही मेहनत का नतीजा है कि लोग कोरोना के प्रति जागरूक हो रहे हैं और संक्रमित होने से बच रहे हैं. बांका  शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की एएनएम अंजू कुमारी इस परिस्थिति में जिस तरह से काम कर रही हैं वह किसी मिसाल से कम नहीं है. शहरी क्षेत्र के घर घर में जाकर लोगों को जागरूक कर रही अंजू कुमारी लोगों के लिए उम्मीद की तरह है। वह घर घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग कर  रही हैं. साथ में घर के सदस्यों को  स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने को भी कह रही हैं. लोगों को घर से निकलते वक्त मास्क पहनने की सलाह भी दे रही हैं.
चुनौतियों को दे रही मात: एएनएम अंजू कुमारी बताती हैं, शहरी क्षेत्र के लोग तो स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहते हैं लेकिन शहर में बाहर से आने वाले लोग उतना जागरूक नहीं रहते हैं. शहरी क्षेत्र के लोगों को समझाना थोड़ा आसान है परंतु बाहर से आए लोगों को समझाना थोड़ा चुनौतीपूर्ण काम जरूर है. एएनएम अंजू कुमारी समय से ड्यूटी पर पहुंचकर अपने काम में लग जाती हैं। संक्रमण से बचने के लिए महिलाओं को सफाई के प्रति विशेष ध्यान रहने की सलाह  देती हूं ताकि घरेलू कार्य में सफाई का ध्यान रख सके. शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आए हुए मरीजों की बेहतर देखभाल करती हैं ।
कर्तव्य के प्रति बेहद ईमानदार है अंजू: पीएचसी प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी एएनएम अंजू कुमारी के बारे में बताते हुए कहते हैं कि वह बहुत ईमानदारी से अपना काम कर रही हैं. प्रतिदिन समय से ड्यूटी पर आती हैं और अपने काम में लग जाती हैं. अंजू कुमारी ने अब तक हजारों लोगों की स्क्रीनिंग की है और सैकड़ों लोगों की सैंपलिंग भी करवाई है. दूसरे स्वास्थ्यकर्मियों को उनसे सीख लेनी चाहिए. कोरोना काल में स्वास्थ्य सेवा में दिन रात लगे रहना आसान नहीं है. इस विपरीत परिस्थिति में अंजू कुमारी बांका के लिए एक फरिश्ता बनकर लोगों की सेवा में लगी है. अंजू कुमारी असाधारण तरीके से बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए समर्पित दिख रही हैं। वह गर्व से कहती है कि बांका उनका घर है. यहां के लोगों की सेवा करना कर्तव्य  और ड्यूटी  है। वह बताती हैं कि कोरोना काल में कुछ दिन काम करने के बाद उन्हें एहसास  हो गया था कि अभी अगर  ज्यादा मजबूती से काम नहीं किया तो आगे और भी चुनौती बढ़ने वाली है. इसलिए शुरुआत से ही वह पूरी लगन के साथ काम कर रही हैं। उन्हें उम्मीद है एक दिन हम सभी मिलकर कोरोना मत दे देंगे.
 घर के सदस्यों का मिल रहा साथ:
अंजू कुमारी के दो बच्चे हैं. वह कहती है घर की जिम्मेदारी के साथ ड्यूटी करना आसान नहीं है लेकिन जब घर के सदस्य साथ दे तो चुनौती कम हो जाती है. पति हमारा हमेशा हौसला बढ़ाते हैं जबकि बच्चे भी सहयोग करते हैं. वह जानते हैं मुझे ड्यूटी पर जाना है तो घर का काम खुद से कर लेते हैं.इस तरह से मुझे सहयोग मिल जाता है और मेरे लिए काम करना आसान हो जाता है. अंजू कुमारी कहती हैं कि अगर घर के सदस्य ऐसा नहीं करते तो वह अपने काम को अच्छे से नहीं कर पाती.

कोरोना आपदा के बीच निडरता से पूनम कर रहीं हैं स्क्रीनिंग का काम

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लोगों को अफवाहों से दूर रहने व भेदभाव नहीं करने की दे रहीं सलाह
लखीसराय: 13 जुलाई: आज जब कोविड -19  विकट परिस्थिति बनती जा रही है वो किसी  चुनौती से कम नहीं है. और ऐसी चुनौती को अपने कार्य में तब्दील कर समाज को हर तरह से जागरूक करने की बीड़ा जिले के  लखीसराय पीएचसी की एएनएम पूनम कुमारी ने उठा रखा है.  वह बिना भयभीत हुए अपने क्षेत्र में घूम कर लोगों को कोरोना संक्रमण के लक्षण तथा इससे बचाव की जानकारी दे रही हैं. इसके साथ गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व प्रबंधन और नवजात शिशुओं के लिए उनके सही पोषण की जानकारी तथा गर्भनिरोधक साधन भी उपलब्ध करा रही हैं.
स्क्रीनिंग के लिए लोगों को समझाने का किया काम:
पूनम बताती हैं कि इस कोरोना के माहौल में लोगों को समझाना मुश्किल तो होता है पर वह इसे अपना कर्तव्य समझकर कर करती है. पूनम आगे बताती है उन्हने अपने कार्य-क्षेत्र महीसोना ग्राम में एक कोरोना संकर्मित के होने की खबर मिली तो उसके संपर्क में आनेवाले लोगों की सूची तैयार कर जब उन्हे जाँच हेतू सदर जाने की बात बताई तो वे लोग जांच के लिए तैयार नहीं हो रहे थे. उन लोगों का कहना था कि वो संकर्मित के संपर्क में नहीं आए है तो उनका जाँच क्यों जरूरी है. साथ ही उन्हे ये लग रहा था की की जाँच के बाद लोगों का  व्यवहार न बदल जाये. लेकिन जब ऐसे लोगों को वहाँ के मुखिया, बीडीओ और समाज के कुछ लोगों द्वारा पूरी तरह आश्वस्त किया गया कि ऐसा कुछ भी उनके साथ नहीं होगा, और यह जांच उनकी व उनके परिवार की सुरक्षा के लिए स्क्रीनिंग किया जाना जरूरी है तो वे अपने –अपने जाँच के लिए राजी हो गये.
अफवाहों व भेदभाव दूर कर लोगों को कर रही जागरूक:
पूनम ने बताया बहुत लोग कोरोना से जुड़े अफवाह के शिकार हैं.लोगों को यह भ्रम है कि टीकाकरण से संक्रमण फैलता है. कई लोग मानते हैं कि गर्म पानी पीने से इस बीमारी से बचा जा सकता है. लेकिन इस तरह की अफवाह दूर करने के लिए वह लोगों से चर्चा कर इसकी सही जानकारी देती हैं.
वह लोगों को बताती हैं कि कोरोना संदिग्ध या संक्रमित से शारीरिक दूरी रखा जानी चाहिए. उसके साथ मानसिक या सामाजिक भेदभाव सही नहीं है.

विश्व जनसंख्या दिवस विशेष:-‘आपदा में भी परिवार नियोजन की तैयारी, सक्षम राष्ट्र और परिवार की पूरी जिम्मेदारी’’ है इस वर्ष की थीम

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कोरोना के बीच परिवार नियोजन की नहीं होगी अनदेखी, जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा की होगी शुरुआत
• 11 जुलाई से 31 जुलाई तक जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा

• क्रूड बर्थ रेट एवं सेक्स रेशियो में आयी कमी

लखीसराय,

कोरोना संक्रमण काल में परिवार नियोजन सेवाओं को नियमित करने की कोशिश की जा रही है। प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। ‘‘आपदा में भी परिवार नियोजन की तैयारी, सक्षम राष्ट्र और परिवार की पूरी जिम्मेदारी’’ इस वर्ष के विश्व जनसंख्या दिवस का थीम बनाया गया है।
यद्यपि देश कोरोना संक्रमण के बीच में हैं, लेकिन प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं का प्रावधान न सिर्फ़ अनचाहे गर्भधारण को रोकने के लिए बल्कि मातृ और शिशु स्वास्थ्य कल्याण में भी महत्व रखता है। इसलिए विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर इस प्रतिकूल परिदृश्य में कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार श्री मनोज कुमार ने सभी जिला पदाधिकारी, चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के निदेशक/ अधीकक्षक एवं सभी जिलों के सिविल सर्जन को 11 जुलाई से 31 जुलाई तक विश्व जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा आयोजित करने का निर्देश दिया है।

जनसंख्या स्थिरता पखवाड़े में परामर्श के साथ मिलेगी परिवार नियोजन की सुविधा: जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा अंतर्गत 11 जुलाई से 31 जुलाई तक Service Delivery की सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। इस दौरान गर्भनिरोधक के बास्केट ऑफ चॉइस पर इच्छुक दंपत्तियों को परामर्श दिया जाएगा। इसके लिए सभी स्वास्थ्य संस्थानों में परिवार नियोजन परामर्श केंद्र स्थापित करते हुए परिवार कल्याण परामर्शी, दक्ष स्टाफ नर्स/ एएनएम द्वारा परामर्श दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा ओपीडी, एएनसी सेवा केंद्र, प्रसव कक्ष एवं टीकाकरण केंद्र पर भी कॉन्ट्रासेप्टिव डिस्प्ले ट्रे एवं प्रचार प्रसार सामग्रियों के माध्यम से परामर्शित करते हुए इच्छुक लाभार्थी को परिवार नियोजन सेवा प्राप्त करने में सहयोग देने की बात भी कही गयी है। परिवार नियोजन परामर्श केंद्र पूरे पखवाड़े के दौरान एवं आगे भी अस्थायी रूप से कार्य करेगा। इस दौरान मांग एवं खपत के अनुसार सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक मात्रा में गर्भनिरोधक की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी एवं कंटेंटमेंट जोन के बाहर क्षेत्रों में सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करते हुए गर्भनिरोधक का वितरण किया जाएगा।
क्रूड बर्थ रेट एवं सेक्स रेशियो में आयी कमी: अभी हाल में ही सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे की रिपोर्ट आई है जिसमें बिहार में क्रूड बर्थ रेट एवं सेक्स रेशियो एट बर्थ में कमी दिखी है। वर्ष 2017 में क्रूड बर्थ रेट 26.4 थी, जो वर्ष 2018 में घटकर 26.2 हो गयी। वहीं वर्ष 2017 में सेक्स रेशियो एट बर्थ 900 थी, जो वर्ष 2018 में घटकर 895 हो गयी।
3 लाख से अधिक महिलाओं ने अपनाया साधन: स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष की अप्रैल 2019 माह से लेकर मार्च 2020 तक राज्य में 7.95 लाख से अधिक महिलाओं ने अंतरा और छाया जैसे नवीन गर्भनिरोधक साधन को अपनाया, जिसमें 3.5 लाख महिलाओं ने अंतरा इंजेक्शन एवं 4.4 लाख महिलाओं ने छाया गर्भ-निरोधक गोली का इस्तेमाल किया है। अंतरा इंजेक्शन के तहत कुल चार डोज़ एक साल में दिये जाने का प्रावधान है, जिसमें 169041 महिलाओं ने अंतरा का पहला डोज़, 93562 महिलाओं ने दूसरा डोज़, 54060 महिलाओं ने तीसरा एवं 33606 महिलाओं ने चौथा डोज़ लिया। आम लोगों को अंतरा एवं छाया के संबंध में जागरूक करने के लिए आशा एवं एएनएम स्थानीय स्तर पर सराहनीय कार्य कर रही हैं।
अंतरा एवं छाया से मिशन परिवार विकास के लक्ष्यों में आसानी: सैंपल रेजिस्ट्रेसन सर्वे-2019 के आंकड़ो के अनुसार बिहार की कुल प्रजनन दर 3.2 है। जिसका अर्थ है बिहार में एक महिला अपने प्रजनन काल में 3.2 बच्चों को जन्म देती है। मिशन परिवार विकास के तहत वर्ष 2025 तक बिहार के प्रजनन दर को 2.2 तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसमें नवीन गर्भ-निरोधक साधन अंतरा एवं छाया के इस्तेमाल पर विशेष बल भी दिया जा रहा है।

कोरोना के बीच परिवार नियोजन की नहीं होगी अनदेखी, जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा की होगी शुरुआत

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• 11 जुलाई से 31 जुलाई तक जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा का आयोजन

• ‘‘आपदा में भी परिवार नियोजन की तैयारी, सक्षम राष्ट्र और परिवार की पूरी जिम्मेदारी’’ होगी इस वर्ष की थीम

• क्रूड बर्थ रेट एवं सेक्स रेशियो में आयी कमी

भागलपुर

कोरोना संक्रमण काल में परिवार नियोजन सेवाओं को नियमित करने की कोशिश की जा रही है। प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। ‘‘आपदा में भी परिवार नियोजन की तैयारी, सक्षम राष्ट्र और परिवार की पूरी जिम्मेदारी’’ इस वर्ष के विश्व जनसंख्या दिवस का थीम बनाया गया है।
यद्यपि देश कोरोना संक्रमण के बीच में हैं, लेकिन प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं का प्रावधान न सिर्फ़ अनचाहे गर्भधारण को रोकने के लिए बल्कि मातृ और शिशु स्वास्थ्य कल्याण में भी महत्व रखता है। इसलिए विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर इस प्रतिकूल परिदृश्य में कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार श्री मनोज कुमार ने सभी जिला पदाधिकारी, चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के निदेशक/ अधीकक्षक एवं सभी जिलों के सिविल सर्जन को 11 जुलाई से 31 जुलाई तक विश्व जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा आयोजित करने का निर्देश दिया है।
जनसंख्या स्थिरता पखवाड़े में परामर्श के साथ मिलेगी परिवार नियोजन की सुविधा: जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा अंतर्गत 11 जुलाई से 31 जुलाई तक Service Delivery की सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। इस दौरान गर्भनिरोधक के बास्केट ऑफ चॉइस पर इच्छुक दंपत्तियों को परामर्श दिया जाएगा। इसके लिए सभी स्वास्थ्य संस्थानों में परिवार नियोजन परामर्श केंद्र स्थापित करते हुए परिवार कल्याण परामर्शी, दक्ष स्टाफ नर्स/ एएनएम द्वारा परामर्श दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा ओपीडी, एएनसी सेवा केंद्र, प्रसव कक्ष एवं टीकाकरण केंद्र पर भी कॉन्ट्रासेप्टिव डिस्प्ले ट्रे एवं प्रचार प्रसार सामग्रियों के माध्यम से परामर्शित करते हुए इच्छुक लाभार्थी को परिवार नियोजन सेवा प्राप्त करने में सहयोग देने की बात भी कही गयी है। परिवार नियोजन परामर्श केंद्र पूरे पखवाड़े के दौरान एवं आगे भी अस्थायी रूप से कार्य करेगा। इस दौरान मांग एवं खपत के अनुसार सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक मात्रा में गर्भनिरोधक की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी एवं कंटेंटमेंट जोन के बाहर क्षेत्रों में सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करते हुए गर्भनिरोधक का वितरण किया जाएगा।
क्रूड बर्थ रेट एवं सेक्स रेशियो में आयी कमी: अभी हाल में ही सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे की रिपोर्ट आई है जिसमें बिहार में क्रूड बर्थ रेट एवं सेक्स रेशियो एट बर्थ में कमी दिखी है। वर्ष 2017 में क्रूड बर्थ रेट 26.4 थी, जो वर्ष 2018 में घटकर 26.2 हो गयी। वहीं वर्ष 2017 में सेक्स रेशियो एट बर्थ 900 थी, जो वर्ष 2018 में घटकर 895 हो गयी।
3 लाख से अधिक महिलाओं ने अपनाया साधन: स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष की अप्रैल 2019 माह से लेकर मार्च 2020 तक राज्य में 7.95 लाख से अधिक महिलाओं ने अंतरा और छाया जैसे नवीन गर्भनिरोधक साधन को अपनाया, जिसमें 3.5 लाख महिलाओं ने अंतरा इंजेक्शन एवं 4.4 लाख महिलाओं ने छाया गर्भ-निरोधक गोली का इस्तेमाल किया है। अंतरा इंजेक्शन के तहत कुल चार डोज़ एक साल में दिये जाने का प्रावधान है, जिसमें 169041 महिलाओं ने अंतरा का पहला डोज़, 93562 महिलाओं ने दूसरा डोज़, 54060 महिलाओं ने तीसरा एवं 33606 महिलाओं ने चौथा डोज़ लिया। आम लोगों को अंतरा एवं छाया के संबंध में जागरूक करने के लिए आशा एवं एएनएम स्थानीय स्तर पर सराहनीय कार्य कर रही हैं।
अंतरा एवं छाया से मिशन परिवार विकास के लक्ष्यों में आसानी: सैंपल रेजिस्ट्रेसन सर्वे-2019 के आंकड़ो के अनुसार बिहार की कुल प्रजनन दर 3.2 है। जिसका अर्थ है बिहार में एक महिला अपने प्रजनन काल में 3.2 बच्चों को जन्म देती है। मिशन परिवार विकास के तहत वर्ष 2025 तक बिहार के प्रजनन दर को 2.2 तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसमें नवीन गर्भ-निरोधक साधन अंतरा एवं छाया के इस्तेमाल पर विशेष बल भी दिया जा रहा है।