देश में दो हफ्ते के लिए बढ़ा लॉकडाउन, 17 मई तक बंद रहेंगी रेल, मेट्रो और विमान सेवा

कोरोना संकट पर नियंत्रण के बीच देश में लॉकडाउन को 2 हफ्ते बढ़ा दिया गया है
केंद्र सरकार ने कहा है कि 4 मई से कम प्रभावित इलाकों में पाबंदियों में ढील दी जाएगी

 

सरकार ने कहा कि ग्रीन जोन में आने वाले 307 जिलों में ज्यादातर जरूरी गतिविधियों की अनुमति होगी
लॉकडाउन की अवधि फिर से दो हफ्ते के लिए बढ़ा दी गई है। देशभर को रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोनों में बांटा जा रहा है। ग्रीन जोन में सभी बड़ी आर्थिक गतिविधियों की छूट दे दी गई है। ताजा आदेश के मुताबिक, ग्रीन जोनों में बसें चल सकेंगी, लेकिन बसों की क्षमता 50% से ज्यादा नहीं होगी। यानी, अगर किसी बस में 50 सीटें हैं तो उसमें 25 से ज्यादा यात्री नहीं चढ़ेंगे। इसी तरह, डीपो में भी 50% से ज्यादा कर्मचारी काम नहीं करेंगे।

कितने जोन

ध्यान रहे कि पूरे देश को 733 जोनों में बांटा गया है। इनमें 130 रेड जोन, 284 ऑरेंज जोन जबकि 319 ग्रीन जोन घोषित किए गए हैं। ग्रीन जोन के जिलों में नाई की दुकानें, सैलून समेत अन्य जरूरी सेवाओं और वस्तुएं मुहैया कराने वाले संस्थान भी 4 मई से खुल जाएंगे। सिनेमा हॉल, मॉल, जिम, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स आदि बंद रहेंगे।

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ऑरेंज जोन में बसें नहीं, कैब की अनुमति

वहीं, ऑरेंज जोन में बसों के परिचालन की छूट नहीं होगी, लेकिन कैब की अनुमति होगी। कैब में ड्राइवर के साथ एक ही पैसेंजर हो सकता है। ऑरेंज जोन में इंडस्ट्रियल ऐक्टिविटीज शुरू होगी और कॉम्प्लेक्स भी खुलेंगे। रेड जोन में नई की दुकानें, सैलून आदि बंद रहेंगे। विस्तृत जानकारी गृह मंत्रालय की तरफ से दी जाएगी।

ग्रीन जोन – 307 जिले

देश में कुल 739 जिले हैं, जिनमें से 307 अब भी कोरोना से अछूते हैं यानी 40 प्रतिशत से भी ज्यादा। ये 319 जिले ग्रीन जोन्स हैं। 3 मई के बाद इन जिलों में फैक्ट्रियों, दुकानों, छोटे-मोटे उद्योगों समेत ट्रांसपोर्ट और अन्य सेवाओं को भी शर्तों के साथ पूरी तरह खोलने की अनुमति दे दी गई है। गौरतलब है कि जिन जिलों में पिछले 21 दिनों से कोरोना वायरस के संक्रमण का एक भी मामला नहीं आता है, उन्हें ग्रीन जोन घोषित कर दिया जाता है। पहले यह मियाद 28 दिनों की थी जिसे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने घटाकर 21 दिन कर दी।

ऑरेंज जोन- 284 जिले

ऑरेंज जोन में उन जिलों को शामिल किया गया है जहां कोरोना मरीजों की संख्या कम है और वहां संक्रमण फैलने का खतरा भी कम है। चूंकि यहां कोविड-19 मरीज हैं, इसलिए इन्हें ग्रीन जोन में नहीं रखा जा सकता है और खतरा ज्यादा नहीं होने के कारण इन्हें रेड जोन में भी नहीं रखा गया है। यानी, इन्हें बीच के ऑरेंज जोन में रखा गया है जिन्हें नॉन-हॉटस्पॉट डिस्ट्रक्टि्स भी कहा जाता है। इस कैटिगरी में अभी 284 जिले हैं।

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रेड जोन –129 जिले, पूरी दिल्ली

देश में 130 जिले रेड जोन्स में हैं यानी वहां कोरोना वायरस के हॉटस्पॉट्स हैं। पूरी दिल्ली रेड जोन में है। मुंबई, अहमदाबाद, सूरत जैसे बड़े औद्योगिक केंद्र भी रेड जोन्स में हैं, जहां रियायतों की गुंजाइश न के बराबर है।

रामायण ने ‘दूसरी पारी’ में बनाया वर्ल्‍ड रिकॉर्ड, सबसे ज्‍यादा देखा जाने वाला शो बना

रामानंद सागर की रामायण दूरदर्शन पर दोबारा टेलीकास्ट की जा रही है। लॉकडाउन के बीच लोगों के लिए इस पौराणिक शो से बड़ा एंटरटेनमेंट शो दूसरा नहीं है। इसलिए इतने सालों बाद आज भी लोग रामायण देखने के लिए अपने परिवार के साथ टीवी से चिपके रहते हैं। लोग राम-सीता की कहानी देख खुश हैं। अब इस सीरियल ने एक और नया रिकॉर्ड बनाया है। डीडी इंडिया की तरफ से ट्वीट कर बताया गया है कि 16 अप्रैल को रामायण सबसे ज्यादा देखे जाने वाला टीवी सीरियल बना है। इस सीरियल को 7।7 करोड़ व्यूवर्स ने देखा है जो अपने आप में बहुत बड़ा रिकॉर्ड है।

 

Lock Down के कारण विभिन्न हिस्सों में फंसे नागरिकों को रेलवे द्वारा भेजे जाने की अनुमति

कोरोना महामारी के कारण देश में लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से अलग-अलग राज्‍यों में फंसे लोगों के लिए बड़ी खबर है। केंद्र सरकार ने उनके लिए 6 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने की अनुमति दे दी है। शुक्रवार को प्रधानमंत्री आवास पर हुई बैठक में इस बारे में फैसला हुआ। इस मीटिंग में पीएम नरेंद्र मोदी के अलावा, गृह मंत्री अमित शाह, रेल मंत्री पीयूष गोयल, चीफ ऑफ डिफेंस स्‍टाफ जनरल बिपिन रावत, कैबिनेट सचिव राजीव गौबा और पीएम के प्रधान सचिव पीके मिश्रा शामिल रहे।

मीटिंग के बाद रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर कहा कि लॉकडाउन के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे नागरिकों को रेलवे द्वारा भेजे जाने की अनुमति देने के लिये पीएम नरेंद्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह का धन्यवाद। रेलवे ‘श्रमिक स्पेशल ट्रेन’ चला कर घर से दूर हुए लोगों को उनकी मंजिल तक पहुंचाना सुनिश्चित करेगी।

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गृह मंत्रालय ने आदेश जारी कर उन लोगों की आवाजाही की अनुमति रेल द्वारा दी है, जो लॉकडाउन की वजह से फंसे हुए हैं. जैसे स्टूडेंट्स, माइग्रेंट लेबर्स, श्रद्धालु, टूरिस्ट और अन्य. इसके लिए राज्य सरकारें और रेलवे बोर्ड उचित व्यवस्था करेंगे और सभी हेल्थ प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करेंगे.

आदेश के मुताबिक, उन लोगों को ही यात्रा की इजाजत होगी, जिनमें किसी भी तरह के कोरोना के लक्षण नहीं दिखेंगे. लोगों को स्टेशन तक लाने के लिए राज्य सरकारों को बसों को इंतजाम करना होगा, जो सैनेटाइज होगीं. मास्क पहनना अनिवार्य होगा. सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा. एकसाथ लोगों को स्टेशन आने की अनुमति नहीं है. बैच में लोगों को स्टेशन तक लाया जाएगा.

ट्रेन से यात्रा करने वाले लोगों के खाने-पीने की व्यवस्था राज्यों को करनी होगी. अगर ट्रेन लंबे रूट की है तो यात्रियों के खाने का बंदोबस्त रेलवे करेगा. अपने गंतव्य पर पहुंचने के बाद लोगों की स्क्रीनिंग होगी. जरूरत पड़ी, तो उन्हें क्वारंटीन किया जाएगा.

रेलवे ने कहा है कि गृह मंत्रालय के आदेश के बाद लेबर डे के दिन से श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला किया है. पीटीआई की खबर के मुताबिक रेलवने से छह स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की है.

1. लिंगमपल्ली से हटिया
2. अलुवा से भुवनेश्वर
3. नासिक से लखनऊ
4. नासिक से भोपाल
5. जयपुर से पटना
6. कोटा से हटिया

काउंटर से लिए टिकट के रिफंड नियमों में यह मिली राहत

रेलवे टिकट रिफंड को लेकर नियमों में बदलाव कर पैसेंजर्स को राहत दी है। नियमों में यह राहत प्रदान की गई है –

  • यदि रेलवे द्वारा रद्द की गई है ट्रेन : यात्रा की तारीख से 3 महीने तक टिकट जमा करने पर रिफंड लिया जा सकता है। पहले के नियम में यात्रा के दिन को छोड़कर 3 दिनों में रिफंड लेने के नियम को बदला गया है।
  • यदि ट्रेन रद्द नहीं हुई, लेकिन पैंसेंजर, यात्रा नहीं करना चाहता : टीडीआर यानी टिकट जमा रसीद स्टेशन पर भरकर देनी होगी, इसे यात्रा की तारीख से 3 महीने के भीतर दे सकते हैं। पहले इसमें भी 3 दिनों का नियम था
  • टीडीआर को 2 माह के भीतर सीसीओ / सीसीएम दावा कार्यालय में प्रस्तुत किया जा सकता है। पहले 10 दिनों में करना होता था। जो यात्री 139 के माध्यम से टिकट रद्द करना चाहते हैं, उन्हें यात्रा की तारीख से 3 महीने के भीतर काउंटर पर रिफंड मिल सकता है।

 

32 साल की हो गईं अनुष्का शर्मा , अपने पिता की इस सलाह को आज भी याद रखती हैं

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अनुष्का ने निर्माता के रूप में अपनी पहली वेब श्रृंखला की घोषणा की – ‘पाताल लोक’ – जिसे 15 मई को ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज़ किया जाएगा।

अनुष्का शर्मा ने शुक्रवार को अपने 32 वें जन्मदिन में प्रवेश किया, अनुष्का ने इस बात को बताया कि वह खुद पर कैसे विश्वास करती हैं, और अपने पिता की बातों को याद करते हुए उन्हें जीवन में सफलता मिली।

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15 साल की उम्र में एक मॉडल के रूप में शुरुआत की, उसके पास आज कुछ सुपर हिट फिल्में हैं, जिनमें ‘पीके’, ’सुल्तान’ और बहुत कुछ शामिल है।
“दृढ़ता मेरे लिए स्वाभाविक रूप से आती है। अनुष्का ने कहा, यह ऐसा कुछ नहीं है जिसके लिए आपको खुद पर मेहनत करनी पड़े, यह आपको आगे बढ़ाता है।

भारतीय कप्तान विराट कोहली से विवाहित, अनुष्का शर्मा बॉलीवुड की सबसे कम उम्र की महिला निर्माता हैं जिन्होंने 25 साल की उम्र में क्लीन स्लेट फिल्म्स की शुरुआत की थी।

अनुष्का अपने पिता कर्नल अजय कुमार शर्मा को अपना सबसे बड़ा शिक्षक मानती हैं

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अपने पिता से सबक के बारे में बोलते हुए बताया की उनकी बातें मुझ पर एक स्थायी छाप छोड़ी गई, “जिस चीज के बारे में उन्होंने मुझे बताया वह यह था कि आप किस स्थिति में हैं, चाहे कितनी भी बुरी स्थिति हो, हमेशा सही काम करें और भगवान से प्रार्थना करें कि आप जानते हैं कि उस समय क्या करना सही है।

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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव की कुर्सी से टला खतरा! 21 मई को होगा MLC चुनाव, अधिसूचना जारी

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चुनाव आयोग ने राज्य में विधान परिषद चुनाव कराने का फैसला ले लिया है. आयोग की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है. इसके मुताबिक, राज्य की 9 सीटों पर अब 21 मई को चुनाव होगा.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की कुर्सी पर मंडरा रहा संकट खत्म होता दिख रहा है. चुनाव आयोग ने राज्य में विधान परिषद चुनाव कराने का फैसला ले लिया है. आयोग की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है. इसके मुताबिक, राज्य की 9 सीटों पर अब 21 मई को चुनाव होगा.

दरअसल, राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया था कि जल्द से जल्द महाराष्ट्र विधान परिषद की 9 खाली सीटों पर चुनाव कराया जाए. राज्यपाल ने कहा था कि राज्य में मौजूदा संकट को खत्म को देखते हुए विधान परिषद की सीटों पर चुनाव का ऐलान हो, जो 24 अप्रैल से खाली हैं. अब आयोग ने चुनाव कराने का ऐलान कर दिया है.


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राज्यपाल ने क्या कहा था

राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कहा था कि केंद्र सरकार ने देश में लॉकडाउन के बीच कई छूट और उपायों का एलान किया है. ऐसे में विधान परिषद के चुनाव कुछ दिशानिर्देशों के साथ हो सकते हैं, जिसके बाद उद्धव ठाकरे ने राहत की सांस ली है.

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उद्धव ठाकरे को एमएलसी नामित करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने कैबिनेट से दो बार प्रस्ताव पास कर भेजा था. इस पर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी लंबे समय तक चुप थे, जिसके बाद उद्धव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन कर मदद की गुहार लगाई थी, जिसके बाद अब महाराष्ट्र में सियासी संकट खत्म होता दिख रहा है.

क्यों जरूरी है चुनाव

उद्धव ठाकरे ने 28 नवंबर 2019 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और अभी वह विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं. संविधान के तहत उन्हें सीएम बनने के 6 महीने के अंदर यानी 27 मई 2020 तक किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी है. उद्धव ठाकरे बिना चुनाव लड़े ही सीधे सीएम बने हैं, ऐसे में उन पर यह नियम लागू होता है.

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जानें अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के दिन क्यों मनाया जाता है महाराष्ट्र स्थापना दिवस

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भारत देश जब स्वतंत्र हुआ था उस वक्त हमारे देश का नक्शा एक दम अलग हुआ करता था और भारत के कई सारे राज्य एक ही हुआ करते थे. लेकिन धीरे-धीरे इन राज्यों को भाषा और क्षेत्र के आधार पर बांटा जाने लगा और इस तरह से भारत के कई नए राज्यों का निर्माण किया गया. इस वक्त हमारे देश भारत में कुल 29 राज्य हैं, जिनकी अपनी अलग-अलग भाषा और वेशभूषाएं हैं. वहीं भारत के लगभग सारे राज्य हर साल अपने राज्य का स्थापना दिवस भी मनाते हैं और इसी तरह महाराष्ट्र में भी हर साल मई के महीने में स्थापना दिवस मनाया जाता है.

uddhav thakrey on maharashtra day
महाराष्ट्र दिवस के मौके पर राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने राज्यपाल कोश्यारी से मुलाकात की। इस मौके पर राज्य के लोगों को पीएम मोदी समेते अन्य नेताओं ने बधाई दी।

 महाराष्ट्र दिवस के मौके पर राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने आज राजभवन में शिष्टाचार दौरा किया और राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से करीब 20 मिनट तक मुलाकात की। इस मौके पर लोगों को शुभकामना देने के लिए कई राजनीतिक नेताओं ने ट्वीट किया। पीएम मोदी ने मराठी में ट्वीट करके कहा, ‘महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर महाराष्ट्र के भाइयों और बहनों को मेरी शुभकामनाएं। भारत देश के विकास में महाराष्ट्र के महत्वपूर्ण योगदान पर गर्व है। मैं आने वाले वर्षों में राज्य की प्रगति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करता हूं। जय महाराष्ट्र!’

महाराष्ट्र दिवस साल में कब मनाया जाता है (Maharashtra Day Date in hindi)

हर साल 1 मई के दिन महाराष्ट्र के लोग अपने राज्य में महाराष्ट्र दिवस मनाते हैं. इस दिन साल 1960 में महाराष्ट्र राज्य की स्थापना की गई थी और इस राज्य को भारत देश के एक राज्य के रूप में पहचान मिली थी. जिसके बाद से महाराष्ट्र सरकार द्वारा हर साल महाराष्ट्र दिवस मनाया जाने लगा. इस दिन इस राज्य की सरकार द्वारा राज्य के स्कूलों, विश्वविद्यालयों, और सरकार दफ्तरों में छुट्टी दी जाती है. वहीं इस साल ये राज्य अपना 49 वां राज्य स्थापना दिवस मनाने जा रहा है.

महाराष्ट्र राज्य अलग एक राज्य कैसे बना ? (Hiostory of Maharashtra)

जब भारत को आजादी मिली थी उस वक्त अधिकांश प्रांतीय राज्यों (Provincial states) को बॉम्बे प्रांत में जोड़ दिया गया था. उस वक्त बॉम्बे प्रांत में गुजराती भाषा और मराठी भाषा बोलने वाले लोग रहते थे. वहीं इसी भाषा के आधार पर अलग राज्य बनाने की मांग उठने लगी. गुजराती भाषा वाले लोग अपना एक अलग राज्य चाहते थे. वहीं मराठी भाषा बोलने वाले लोग खुद के लिए अलग राज्य बनाने की मांग कर रहे थे. इस दौरान देश में कई आंदोलन भी किए गए और इन्हीं आंदोलनों के परिणामस्वरूप, बॉम्बे पुनर्गठन अधिनियम, 1960 के तहत साल 1960 में महाराष्ट्र राज्य और गुजरात राज्य का गठन किया गया था. यानी महाराष्ट्र राज्य और गुजरात राज्य पहले एक ही राज्य के रूप में जाने जाते थे.


दरअसल “राज्यों के पुनर्गठन अधिनियम” 1956 के तहत कई राज्यों का गठन किया गया था. इस अधिनियम के आधार पर कन्नड़ भाषा बोलने वाले लोगों को मैसूर राज्य यानी कर्नाटक राज्य दिए गए था. तेलुगु भाषा के लोगों को आंध्र प्रदेश राज्य मिल गया था. वहीं मलयालम भाषा के लोगों को केरल और तमिल भाषा वाले लोगों को तमिलनाडु राज्य मिल गया था. लेकिन मराठी और गुजराती लोगों को अपना अलग राज्य नहीं मिला था. जिसके बाद से इन लोगों ने अपने लिए अलग राज्य की मांग को लेकर कई आंदोलन शुरू कर दिए.

साल 1960 में जहां एक तरफ गुजरात राज्य को बनाने के लिए महा गुजरात आंदोलन चलाया गया था. वहीं संयुक्त महाराष्ट्र समिति का गठन महाराष्ट्र राज्य की मांग को लेकर हुआ था. वहीं 1 मई 1960 में भारत की मौजूदा सरकार ने बॉम्बे राज्य को दो राज्यों में बांटा दिया. मराठी बोलने वाली आबादी के लिए महाराष्ट्र राज्य का गठन किया गया और गुजराती बोलने वाली आबादी के लिए गुजरात राज्य का. लेकिन इसी बीच बॉम्बे को लेकर इन दोनों राज्यों के बीच लड़ाई शुरू हो गई, जो मुंबई एक बहुत अच्छा दर्शनीय स्थल है. जहां पर महाराष्ट्र राज्य वाले लोग चाहते थे कि बॉम्बे उनके राज्य का हिस्सा हो, क्योंकि वहां पर ज्यादातर लोगों द्वारा मराठी बोली जाती थी. वहीं गुजराती लोगों का कहना था कि बॉम्बे की तरक्की में उनका ज्यादा हाथ है. इसलिए ये उनके राज्य का हिस्सा होना चाहिए. लेकिन अंत में बॉम्बे को महाराष्ट्र राज्य का हिस्सा बना दिया गया.

वहीं जब भारत सरकार ने गोवा राज्य को पुर्तगाली से स्वत्रंत करवाया था, तो महाराष्ट्र राज्य इसे अपने राज्य का हिस्सा बनाना चाहता था. लेकिन गोवा के लोगों ने अपने लिए अलग राज्य की मांग रखी और इस तरह से गोवा महाराष्ट्र राज्य में शामिल नहीं हो सका. गोवा में बहुत ही अच्छे व सुन्दर घुमने के स्थान भी है.

कैसे मनाते हैं महाराष्ट्र दिवस (How to celebrate Maharashtra Day)

महाराष्ट्र दिवस के दिन को खास बनाने के लिए यहां की राज्य सरकार द्वारा कई तरह के समारोह आयोजित किए जाते हैं. इस दिन को विशेष बनाने के लिए राज्य सरकार कई जगहों पर कार्यक्रमों का आयोजन करती है, जिसमें मराठी संस्कृति की झलक देखने को मिलती है. इसके अलावा इस दिन राज्य सरकार द्वारा एक परेड भी निकाली जाती है. हर साल इस परेड का आयोजन शिवाजी पार्क में किया जाता है. इतना ही नहीं शिवाजी पार्क में इस दिन राज्य के राज्यपाल द्वारा हर साल भाषण भी दिया जाता है.

वहीं हर साल राज्य के मुख्यमंत्री ‘हुतात्मा चौक’ में जाकर उन लोगों श्रद्धांजलि देते हैं, जिन्होंने इस राज्य की स्थापना के लिए अपना योगदान दिया है. दरअसल ये चौक उन लोगों की याद में बनाया गया है, जो महाराष्ट्र राज्य बनाने के आंदोलन के वक्त शहीद हो गए थे. वहीं इसके अलावा इस दिन इस राज्य में शराब नहीं बेची जाती है.

स्कूलों में भी किए जाते हैं विशेष आयोजन (Celebration In Schools)

स्कूली छात्रों को इस दिन का महत्व समझाने के लिए कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. इतना ही नहीं बच्चे इस दिन कई तरह के नृत्य और गाने भी प्रस्तुत करते हैं. वहीं राज्य के स्कूलों के अलावा कॉलेजों और सरकारी दफ्तरों में भी कई तरह के समारोह का आयोजन किया जाता है. हालांकि इस दिन राज्य सरकार द्वारा छुट्टी दी जाती है. इसलिए इन सब कार्यक्रमों को एक दिन पहले ही कर लिया जाता है.

महाराष्ट्र राज्य की महत्वपूर्ण बातें (Interesting Facts About Maharashtra) –

देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य

महाराष्ट्र राज्य का भौगोलिक क्षेत्र 307,713 किलोमीटर तक फैला हुआ है. भारत के राज्यों में क्षेत्रफल के आधार पर इस राज्य का तीसरा नंबर हैं. इस राज्य से पहले भारत के राजस्थान और मध्य प्रदेश राज्य क्षेत्र के आधार पर सबसे बड़े राज्य है.

महाराष्ट्र राज्य के पड़ोसी राज्य

महाराष्ट्र राज्य का दक्षिण हिस्सा कर्नाटक राज्य से लगता है. वहीं इस राज्य का दक्षिण पूर्व हिस्सा आंध्र प्रदेश और गोवा राज्य की सीमाओं से लगा हुआ है. इसके अलावा महाराष्ट्र राज्य की उत्तरी भाग की सीमा मध्य प्रदेश राज्य से जुड़ी हुई है और राज्य के पश्चिम में अरब सागर है.

महाराष्ट्र विधान सभा

भारत की राजनीति में इस राज्य की अहम भूमिका हैं. इस राज्य में कुल 228 विधानसभा सीटें हैं. वहीं लोकसभा की 543 सीटों में से 48 सीटें इस राज्य की हैं और राज्य सभा में इस राज्य की 19 सीटें हैं.

महाराष्ट्र राज्य की जानकारी-

राज्य का नाम महाराष्ट्र
राजधानी सर्दियों के समय नागपुर और
गर्मियों के समय मुंबई

राज्य भाषा मराठी भाषा
राज्य का गठन 1 मई, साल 1960
राज्य भाषा मराठी भाषा
कुल क्षेत्र 307,713 कि.मी
कुल जिले 36 जिले मौजूद हैं

7 राज्य बोले घर वापसी के लिए ट्रेनें चाहिए, केंद्र ने सिर्फ बसों को दी मंजूरी

कई राज्यों की सीमाओं पर रोके गए हैं लाखों मजदूर

लाॅकडाउन के बीच 37 दिन से देश के विभिन्न हिस्साें में फंसे मजदूराें, छात्राें अाैर अन्य लाेगाें की वापसी के लिए राज्यों ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि, राजस्थान, पंजाब, तेलंगाना, केरल, कर्नाटक, बिहार अाैर झारखंड ने विशेष ट्रेन चलाने की मांग की है। इन राज्याें की दलील है कि लाखाें लाेगाें काे बसाें से इधर-उधर भेजने की प्रक्रिया पूरी हाेने में महीनाें लग जाएंगे। हालांकि, इस मांग पर गृह मंत्रालय ने गुरुवार काे एक बार फिर स्पष्ट किया िक अभी लाेगाें के समूहाें काे सिर्फ बसाें के जरिये ही राज्याें के बीच अावाजाही की छूट दी गई है।

Image may contain: one or more people, people sitting and indoor
उत्तरप्रदेश सरकार ने दूसरे राज्यों से मजदूराें काे लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सबसे पहले मध्यप्रदेश से लाेगाें काे निकाला जाएगा। इसी बीच, साइकिल पर महाराष्ट्र के भिवंडी से यूपी के गाेरखपुर के लिए निकले 50 साल के मजदूर की गुरुवार को मध्यप्रदेश की सीमा पर मौत हो गई। गुजरात सरकार ने फंसे हुए लाेगाें काे अावाजाही की सुविधा देने के लिए पाेर्टल लाॅन्च कर 16 अफसराें की ड्यूटी लगाई है। अावाजाही के बीच त्रिपुरा के सीएम बिप्लब कुमार देब ने गुरुवार काे कहा कि अभी लाॅकडाउन जारी रहे। सभी पाबंदियां वैक्सीन बनने के बाद ही हटाएंगे।

बिहार के डिप्टी सीएम सुशील मोदी भी बोले- बसों से लाने में महीनों लगेंगे

sushil kumar, Bihar Deputy Chief minister

{पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा- राज्य में 10 लाख से ज्यादा प्रवासी हैं। इनमें 70% बिहार के हैं। बसाें से इतने लाेगाें काे नहीं भेज सकते। पर्याप्त स्क्रीनिंग के साथ सुरक्षित तरीके से सिर्फ ट्रेनाें में ही भेजना संभव है।
{तेलंगाना के मंत्री टी. श्रीनिवास यादव ने कहा कि राज्य में 15 लाख प्रवासी हैं। इनमें से ज्यादातर लाेग बिहार, झारखंड अाैर छत्तीसगढ़ के हैं। अगर इन्हें बसाें से रवाना करेंगे ताे अपने राज्य पहुंचने में तीन से पांच दिन लगेंगे। इतने लंबे सफर पर बसाें में भेजना उचित नहीं है।
{बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील माेदी ने कहा कि प्रदेश में लाैटने वालाें की संख्या 27 लाख से ज्यादा है। बसाें पर ही निर्भर रहे ताे सबकाे लाने में महीनाें लगेंगे। नाॅन स्टाॅप ट्रेनें चलानी चाहिए।
{केरल के सीएम पिनराई विजयन ने कहा कि राज्य में 3.60 लाख प्रवासी मजदूर हैं। बस में भेजने से संक्रमण फैलने का खतरा बना रहेगा।


{तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलानीसामी ने कहा- केंद्र की स्पष्ट गाइडलाइंस का इंतजार है। वहीं, कर्नाटक सरकार ने कहा कि भेजी जाने वाली बसाें का खर्च लाेगाें काे ही भरना हाेगा।

केंद्र का निर्देश

ट्रकाें के लिए अलग पास की जरूरत नहीं

गृह मंत्रालय ने गुरुवार काे स्पष्ट किया कि लाॅकडाउन के दाैरान एक राज्य से दूसरे में जाने के लिए ट्रकाें काे अलग से पास की जरूरत नहीं है। हालांकि, यह छूट सिर्फ सामान ले जा रहे या डिलीवरी देकर लाैटने वाले ट्रकाें पर लागू रहेगी।
महाराष्ट्र से यूपी, बिहार अाैर राजस्थान लाैट रहे मजदूरों को मध्य प्रदेश की महाराष्ट्र सीमा पर सेंधवा के पास बिजासन घाट पर रोक लिया गया। गुरुवार सुबह यहां एक हजार से अधिक मजदूर जमा हो गए थे। मजदूरों ने 2 घंटे तक हाईवे जाम कर हंगामा किया। इसी बीच जिला प्रशासन ने इन लाेगाें की स्क्रीनिंग शुरू करवाई। कलेक्टर अाैर एसपी के सीमा पर पहुंचने के बाद उनकी घर रवानगी की गई।

मध्यप्रदेश की सीमा पर राेके जाने पर मजदूरों का हंगामा

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फैक्ट चेक: ऋषि कपूर के इस वायरल वीडियो को उनके निधन से पहले वाली रात को शूट नहीं किया गया था

ऋषि कपूर की मौत के कुछ घंटों बाद, उनके बगल में गाने वाले एक व्यक्ति का वीडियो सोशल मीडिया पर घूमने लगा।

#ऋषि_कपूर ने जिंदगी को जिया है कपूर खानदान में होने की वजह और अपनी काबिलियत के बल पर उन्हें वक़्त से पहले कामयाबी और शोहरत मिली और अपनी बेहतरीन अदाकारी से उन्होंने सबका भरपूर मनोरंजन किया । अपनी बेबाकी से हर मुद्दे पर राय दिया करते थे और एक खुशनुमा #जिंदादिल इंसान को आखरी सलाम और ये वीडियो 1 या 2 फरवरी को शूट किया गया था जब कपूर को दिल्ली के साकेत के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वीडियो में दिखने वाला लड़का धीरज अस्पताल में एक वार्ड बॉय है। वह उत्तराखंड के रानीखेत से हैं और वर्तमान में दिल्ली के महरौली इलाके में रहते हैं।#rishikapoor #Rishikapoor #Ranbeerkapoor

Posted by Amit Kumar Gaur on Thursday, April 30, 2020

वीडियो में, अभिनेता को अस्पताल के बिस्तर पर लेटा हुआ देखा जाता है, क्योंकि कपूर की हिट फिल्म “दीवाना” के “तेर दर्द से दिल आबाद रहा ” गाता है।
दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर का गुरुवार सुबह 67 साल की उम्र में कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद निधन हो गया, जिससे उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई। उनकी मौत के कुछ घंटों बाद, कपूर के बगल में गाने वाले एक व्यक्ति का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा।

वीडियो में, अभिनेता को अस्पताल के बिस्तर पर लेटा हुआ देखा जाता है, क्योंकि कपूर की हिट फिल्म “दीवाना” के “तेर दर्द से दिल आबाद रहा ” गाता है। ऋषि कपूर उसके बाद उस वार्ड बॉय को आशीर्वाद देते हैं । नेटिज़न्स ने दावा करना शुरू कर दिया कि मुंबई के अस्पताल से अभिनेता का यह आखिरी वीडियो था जो उनकी निधन से एक रात पहले ही शूट किया गया है ।

इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया है कि वायरल वीडियो लगभग तीन महीने पुराना है। वीडियो फरवरी के पहले सप्ताह में शूट किया गया था जब कपूर को दिल्ली के साकेत के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

कई प्रमुख मीडिया हाउस जैसे “द टाइम्स ऑफ इंडिया“, “अमर उजाला” और “आजतक” ने भी शुरुआत में इसे अभिनेता के अंतिम वीडियो के रूप में रिपोर्ट किया था। उनमें से अधिकांश ने बाद में कहानी को सही किया।

करीब से देखने पर, हमने पाया कि वीडियो में गाता हुआ आदमी ऊनी स्वेटर पहने हुए है। चूंकि मुंबई में तापमान पहले ही 30 डिग्री को पार कर चुका है, इसलिए यह केवल एक पुराना वीडियो हो सकता है।

इसे लीड के रूप में लेते हुए, हमने वायरल वीडियो में से एक फ्रेम पर एक रिवर्स सर्च चलाया और पाया कि इसे “DHEERAJ KUMAR SANU” द्वारा YouTube पर 3 फरवरी, 2020 को अपलोड किया गया था। इस व्यक्ति ने “बॉबी” के साथ एक सेल्फी भी साझा की थी “4 फरवरी को फेसबुक पर एक ही कपड़े में अभिनेता। वह खुद वायरल वीडियो में गाते हुए देखा जा सकता है।

इंडिया टुडे ने धीरज से संपर्क किया, जिन्होंने पुष्टि की कि उन्होंने 1 या 2 फरवरी को वीडियो शूट किया था (अस्थायी रूप से) जब कपूर को साकेत के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। धीरज अस्पताल में एक वार्ड बॉय है। वह उत्तराखंड के रानीखेत से हैं और वर्तमान में दिल्ली के महरौली इलाके में रहते हैं।

मैक्स अस्पताल ने इंडिया टुडे को भी पुष्टि की है कि कपूर को फरवरी के पहले सप्ताह में वहां भर्ती कराया गया था। हमने 2 फरवरी को प्रकाशित कुछ मीडिया रिपोर्टों को यह भी कहा कि एक संक्रमण के कारण अभिनेता अस्पताल में भर्ती थे।

इसलिए, यह स्पष्ट है कि अभिनेता के मरने से एक रात पहले मुंबई के रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में वायरल वीडियो को शूट नहीं किया गया था। इसकी शूटिंग फरवरी के पहले सप्ताह में हुई थी जब उन्हें दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। साथ ही, वीडियो में गा रहा व्यक्ति दावा किए गए डॉक्टर नहीं है, बल्कि एक वार्ड बॉय है।

News Courtesy: www.indiatoday.in

अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस कब और क्यों मनाते हैं, जानिये

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अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस को मई दिवस के नाम से जाना जाता है, इसकी शुरुआत 1886 में शिकागो में उस समय शुरू हुई थी, जब मजदूर मांग कर रहे थे कि काम की अवधि आठ घंटे हो और सप्ताह में एक दिन की छुट्टी हो। हड़ताल के दौरान एक व्यक्ति ने बम फोड़ दिया और प्रदर्शनस्थल पर अफरातफरी मच गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने मजदूरों पर गोलियां चलाई। गोलीबारी में कुछ मजदूरों की मौत हो गई, साथ ही कुछ पुलिस अफसर भी मारे गए। इस मामले में एक ट्रायल चला, जांच के अंत में चार अराजकतावादियों को सरेआम फांसी दे दी गई। हेमार्केट घटना, दुनिया भर के लोगों को क्रोधित करने का कारण बनी। बाद के वर्षों में, हेमार्केट शहीदों की स्मृति को विभिन्न मई दिवस नौकरी संबंधी कार्रवाई और प्रदर्शनों के साथ याद किया गया।

international labour day

इसके बाद 1889 में पेरिस में अंतरराष्ट्रीय महासभा की द्वितीय बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया कि 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाए, तब से ही दुनिया के 80 देशों में मई दिवस को राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाया जाने लगा।

भारत में इसे सबसे पहले 1 मई 1923 को मनाया गया था। जब लेबर किसान पार्टी ऑफ हिन्दुस्तान ने चेन्नई में इसकी शुरुआत की थी। इसका मुख्य उद्देश्य मजदूरों को सम्मान और हक दिलाना है। इस मौके पर फैज अहमद ‘फैज’ की रचना को याद किया जाता हैं, जिसमें उन्होंने मजदूरों के हक की बात की है।

इस दिन दुनियाभर में मजदूर संघ संगोष्ठी आयोजित की जाती है, जिसमें मजदूरों की आवाज को बुलंद किया जाता है। उनके हक और सम्मान का अवलोकन किया जाता है।

1st May, Labour Day Quotes:

1- कार्य का आनंद लेने वाले ही उसे सही तरीके से कर सकते हैं – अरस्तू

2- कभी किसी को कुछ नहीं मिलता, जब तक कि वह उसकी कीमत के हिसाब से कठिन परिश्रम नहीं करता – बूकर टी वॉशिंगटन

3- किसी काम को करना बड़ी बात नहीं है, लेकिन जिस काम से हमें खुशी मिलती है वह चमत्कार से कम नहीं है – मदर टेरेसा

4- अपने आपको उन लोगों के बीच रखो जिनसे आपको खुशी मिलती है – कार्ल मार्क्स

5- समाज में गरीबों के सहयोग के बिना अमीर कभी भी धन संचय नहीं कर सकते – महात्मा गांधी

6- शिक्षा जैसी कोई मजदूरी नहीं, यह अपने आपको एक इनाम देना है – महात्मा गांधी

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खेल जगत को बड़ा झटका, फुटबॉल में देश और क्रिकेट में राज्य का गौरव बढ़ाने वाले चुन्नी गोस्वामी का निधन

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2020 साल हम सब के लिए बहुत ही बुरा गुजर रहा है दुनिया अभी कोरोना वायरस से लड़ ही रही थी की इर्र्फान और ऋषि कपूर के निधन के बाद फुटबॉल में देश और क्रिकेट में राज्य का गौरव बढ़ाने वाले चुन्नी गोस्वामी का  भी आज निधन हो गया .  इस दो दिनों में हमारे 3 lagend इस दुनिया से हमेशा के लिए अलविदा हो गए | दुखो से बॉलीवुड और पूरा भारत सदमे में है .

chunni goswami death
Chuni Goswami, 82, passes away in Kolkata after suffering from prolonged illness | Photo: DD News, Twitter

अखिल भारतीय फुटबॉल फ़ेडरेशन (एआईएफएफ) ने भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान सुबीमल (चुन्नी) गोस्वामी के निधन पर शोक जताया है। गोस्वामी ने गुरुवार को 82 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे।

उनकी कप्तानी में भारत ने 1962 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था और 1964 में एशियन कप में उपविजेता भी रहा था। उन्होंने मोहन बागान के लिए 1956 से 1964 तक 50 मैच खेले थे। एक क्रिकेटर के तौर पर उन्होंने 1962 से 1973 तक अपने राज्य के लिए 46 प्रथम श्रेणी क्रिकेट मैच खेले थे।

chunni goswami cricket ground

महान फुटबॉलर और फर्स्ट क्लास क्रिकेटर भी खेलने वाले चुन्नी गोस्वामी (Chuni Goswami) का दिल का दौरा पड़ने की वजह से गरुवार को कोलकाता में निधन हो गया। गोस्वामी ने भारत के लिए बतौर फुटबॉलर 1956 से 1964 तक 50 मैच खेले।

chunni goswami awards

गोस्वामी 1962 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम के कप्तान थे
क्रिकेटर के तौर पर उन्होंने 1962 और 1973 के बीच 46 प्रथम श्रेणी मैचों में बंगाल का प्रतिनिधित्व कियाchunni goswami

गोस्वामी उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल थे, जिन्होंने अपने राज्य के लिए फुटबॉल और क्रिकेट दोनों में नुमाइंदगी की थी। गोस्वामी 1962 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम के कप्तान थे। बंगाल के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट भी खेले थे। उनकी दोनों खेलों पर जबरदस्त पकड़ थी। परिवार के कहा, ‘उन्हें दिल का दौरा पड़ा और अस्पताल में करीब पांच बजे उनका निधन हो गया।’

वह मधुमेह, प्रोस्ट्रेट और तंत्रिका तंत्र संबंधित बीमारियों से जूझ रहे थे। उन्हें रोज इंसुलिन लेना होता था और लॉकडाउन के कारण उनका मेडिकल सुपरवाइजर भी नियमित रूप से नहीं आ पाता था जिससे उनकी पत्नी बसंती उन्हें दवाई देती थीं। अविभाजित बंगाल के किशोरगंज जिले (मौजूदा बांग्लादेश) में जन्में गोस्वामी का असल नाम सुबीमल था लेकिन उन्हें उनके निकनेम से ही जाना जाता था।

chunni goswami rome olympic

उन्होंने भारत के लिए 1956 से 1964 के बीच में 50 अंतरराष्ट्रीय मैच (जिसमें से 36 अधिकारिक थे) खेले जिनमें रोम ओलिंपिक शामिल था। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 13 गोल दागे। भारतीय फुटबाल टीम के कप्तान के रूप में उन्होंने देश को 1962 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक और इस्राइल में 1964 एशिया कप में रजत पदक दिलाया। यह अब तक का भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। गोस्वामी बंगाल के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट भी खेले थे। क्रिकेटर के तौर पर उन्होंने 1962 और 1973 के बीच 46 प्रथम श्रेणी मैचों में बंगाल का प्रतिनिधित्व किया।

एशिया के सर्वश्रेष्ठ स्ट्राइकर का पुरस्कार

गोस्वामी, पी के बनर्जी और तुलसीदास बलराम भारतीय फुटबॉल के स्वर्णिम दौर की शानदार फॉरवर्ड पंक्ति का हिस्सा थे जब भारत एशिया में फुटबॉल की महाशक्ति था । गोस्वामी ने 1962 में एशिया के सर्वश्रेष्ठ स्ट्राइकर का पुरस्कार जीता था। उन्हें 1963 में अर्जुन पुरस्कार और 1983 में पद्मश्री से नवाजा गया। भारतीय डाक विभाग ने जनवरी में उनके 82वें जन्मदिन पर भारतीय फुटबॉल में उनके योगदान के लिए विशेष डाक टिकट जारी किया।

भारतीय फुटबॉल में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।‘वह भारतीय फुटबाल की स्वर्णिम पीढ़ी का पर्याय बने रहेंगे। चुन्नी दा, आप हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहोगे।