पंजाबी बाग अग्निकांड पीडि़तों के बीच अक्षय पात्र फाउंडेशन लगातार वितरित कर रही खाना

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नई दिल्ली-
राजधानी दिल्ली के पंजाबी इलाके के झुग्गियों में पिछले दिनों आग लगने से लोगों का सबकुछ तबाह हो गया। खाने तक को लोग तरसने लगे। ऐसे में अक्षय पात्र नामक संस्था सामने आई। आग लगने से लेकर समाचार लिखे जाने तक संस्था लगातार पीडि़तों के बीच खाना वितरित कर रही है।
अक्षय पात्र फाउंडेशन के राष्टï्रीय अध्यक्ष भरतअर्ष दास ने बताया कि रोजाना सैकड़ों लोगों के बीच संस्था खाना वितरित कर अपने सामाजिक दायित्वों का निवर्हन कर रही है। उन्होंने बताया कि संकट की घड़ी में अक्षय पात्र फाउंडेशन हमेशा आगे आ कर अपने सामाजिक और धार्मिक दायित्वों का निवर्हन करती       रही है।
संस्था के किचन हेड मुकेश कक्कड़ ने बताया कि हमारे वॉलंटियर लगातार पीडि़तों के बीच में जाकर उन्हें खाना परोस रहे हंै। अभी तक हजारों(थाली) लोगों को संस्था खाना परोस चुकी है। पीडि़त परिवार के खाने का बेहतर प्रबंध जबतक नहीं होता तबतक खाना वितरित करने का क्रम जारी रहेगा। बता दें, अभी हाल ही में जोशीमठ पीडि़तों के बीच गोविंद दत्ता दास के नेतृत्व में संस्था ने लगभग १००० राशन किट का वितरण किया था।
गौरतलब है कि  अक्षय पात्र फाउंडेशन देश के 14 राज्यों में 20 लाख से अधिक स्कूली बच्चों को हर रोज खाना परोसती है। इस संस्था की तरफ से पहली थाली..अटल बिहारी वाजपेयी की तरफ से परोसी गई थी।
अक्षय पात्र फाउंडेशन का इतिहास एक करुण कथा के साथ आरम्भ होता है -कलकत्ता के समीप, मायापुर नाम के गाँव में एक दिन परम पूज्यनीय ए. सी. भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद ने खिडक़ी से बाहर देखते हुए बच्चों के एक समूह को फेंके हुए भोजन के लिए आवारा कुत्तों के साथ लड़ते देखा। इस छोटी सी किन्तु दिल तोड़ देने वाली घटना से एक निश्चय उत्पन्न हुआ कि हमारे केन्द्र के दस मील के दायरे के अन्दर कोई भी भूखा नहीं रहेगा। उनके इस प्रेरणादायक संकल्प से अक्षय पात्र फ़ाउंडेशन को बनाने में मदद मिली जो वो आज है।
अक्षय पात्र फाउण्डेशन की शुरुआत जून 2000 में श्री मधु पंडित दास द्वारा की गयी थी। तब यह संस्था केवल बंगलुरु और कर्नाटक के पांच सरकारी विद्यालयों के 1,500 बच्चों के लिए मध्याह्न – भोजन के तहत पौष्टिक खाना मुहैया कराती थी। अपने शुरूआती दिनों में बच्चों को पौष्टिक खाना उपलब्ध कराना संस्था के लिए आसान नहीं था लेकिन कहते है न जहाँ चाह वहां राह खुद ब खुद मिल जाती है।
आज भारत सरकार एवं कई राज्य सरकारों के साथ साझेदारी और साथ ही कई समाज-सेवी दाताओं की उदारता के साथ यह संगठन विश्व के सबसे बड़े मध्याह्न-भोजन कार्यक्रमों में से एक का संचालन करता है। अक्षयपात्र फाउंडेशन अब तक देश भर में 66 किचन तैयार कर चुका है। सरकारी विद्यालयों के लगभग 20 लाख से अधिक बच्चों को रोजाना ताजा पका, स्वास्थ्यकर भोजन वितरित करता है। देश के अलग-अलग राज्यों में भोजन परोसने के अलावा संस्था के राजधानी दिल्ली में चार किचन संचालित होते हैं, जो करीब एक लाख बच्चों सहित पूरे दिल्ली के सभी नाइट शेल्टरों में भोजन सप्लाई करती है। कोरोना काल में फाउंडेशन ने बेहतर कार्य किया। अक्षय पात्र में फुली ऑटोमेटिक मशीनों के जरिए खाना तैयार किया जाता है और उन्हें बहुत हाइजीनिक व्यवस्था के तहत बच्चों तक पहुंचाया जाता है। 2025 तक प्रतिदिन 30 लाख छात्रों तक शुद्ध एवं पौष्टिक मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने का लक्ष्य संस्था का है।

बॉलीवुड स्टॉर आयुष्मान खुराना यूनिसेफ इंडिया के नेशनल एम्बेसडर (राष्ट्रीय दूत) नियुक्त किए गए

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नई दिल्ली, 18 फरवरी 2023:
यूनिसेफ इंडिया ने प्रसिद्व बॉलीवुड स्टार, आयुष्मान खुराना को राष्ट्रीय दूत के तौर पर नियुक्त करने की घोषणा की। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म स्टार ने हर बच्चे के जीवित रहने, फलने-फूलने, सुरक्षित रहने के अधिकारों को सुनिश्चित करने के साथ-साथ उनके फैसलों में उनकी आवाज को बढ़ावा देने के लिए यूनिसेफ के साथ हाथ मिलाया है।
सम्मान समारोह में बोलते हुए, आयुष्मान खुराना ने कहा, ‘यूनिसेफ इंडिया के साथ एक राष्ट्रीय दूत के तौर पर बाल अधिकारों की वकालत को आगे बढ़ाना वास्तव में मेरे लिए सम्मान का विषय है।  भारत में बच्चे व किशोर जिन मुददों का सामना कर रहे हैं, उनके प्रति मैं जुनूनी हूं। यूनिसेफ के सेलिब्रिटी एडवोकेट होने के नाते, मैंने बच्चों के साथ संवाद किया है और इंटरनेट सुरक्षा, अभद्र भाषा, तस्वीरों व धमकियों से इंटरनेट पर तंग करना, मानसिक स्वास्थ्य, और लैंगिक समानता पर बात की। यूनिसेफ के साथ इस नई भूमिका में, मैं बाल अधिकारों के लिए दृढ़ आवाज बनाए रखूगां, विशेषतौर पर सबसे अधिक संवेदनशील बच्चों के लिए, वो मुददे जो उन्हें सबसे अधिक प्रभावित करते हैं, उनके समाधान के समर्थन के लिए।
बाल अधिकारों के लिए राष्ट्रीय दूत के तौर पर आयुष्मान खुराना का स्वागत करते हुए, यूनिसेफ इंडिया की प्रतिनिधित्व सिंथिया मेककेफरी ने कहा, ‘मैं आयुष्मान खुराना का यूनिसेफ इंडिया के राष्ट्रीय दूत के तौर पर स्वागत कर प्रसन्न हूँ। बीते दो सालों में यूनिसेफ के सेलिब्रिटी एडवोकेट के नाते आयुष्मान की दृढ़ प्रतिबद्वता ने बाल अधिकारों के संरक्षण के कार्य को बढ़ाने व गति देने में मदद की है। वह भारत के बड़े फिल्मी सितारों में से एक है, और हम रोमांचित हैं कि वे वह अपनी ताकतवर आवाज का प्रयोग बच्चों के साथ खड़े रहने के लिए कर रहे हैं और अहितकारी सामाजिक मानकों और लैंगिक पूर्वाग्रहों को चुनौती दे रहे हैं। और यह वह आवाज है जो यूनिसेफ के कार्यों व संस्कृति में उसकी संवेदनशीलता व ज़ज्बे से मेल खाती है। हम उनके साथ अपने वक्त के सबसे अहम बाल अधिकारों के मुददों पर काम करने की आशा करते हैं-हिंसा का खात्मा, मानसिक तंदुरस्ती और लैंगिक समानता-और प्रत्येक बच्चे के लिए बेहतर भविष्य।’
सितंबर 2020 में आयुष्मान खुराना यूनिसेफ इंडिया के सेलिब्रिटी एडवोकेट बच्चों के प्रति हिंसा को खत्म करने व व्यापक बाल अधिकार एजेंडा का समर्थन करने के लिए नियुक्त किए गए थे। उनकी विश्व बाल दिवस पर सक्रिय भागीदारी , अपनी आवाज को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस, बाल श्रम निषेध दिवस और सुरक्षित इंटरनेट दिवस के साथ जोड़ा और उन्हें प्रभावित कर उन्होंने बाल लक्ष्यों को बड़ा किया और व्यापक जनता का ध्यान प्राप्त किया। हाल ही में उन्होंने विश्व बाल दिवस 2022 के अवसर पर यूनिसेफ दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय दूत सचिन तेंदुलकर के साथ, और भारत भर से शिरकत करने वाले लड़कियों व लड़कों के साथ लैंगिक समावेशी खेलों के जरिए समावेशी व गैर भेदभाव पर ध्यान केंद्रित किया था।

टीबी के लक्षण, बचाव और इलाज की दी गई जानकारी

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–स्वास्थ्य विभाग और केएचपीटी ने टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की बैठक आयोजित की
–टीबी मरीजों से सेहत की जानकारी ली, क्षेत्र के लोगों को जागरूक करने की अपील की
भागलपुर, 17 फरवरी-
जगदीशपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग और कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) की ओर से टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की एक बैठक आयोजित  की गई। बैठक में टीबी के सात मरीज और सात देखभाल करने वाले मौजूद थे। साथ ही सीएचसी प्रभारी, डॉक्टर, एसटीएस, एलटी और केएचपीटी के सीसी मौजूद थे। केएचपीटी के सीसी शानू प्रताप सिंह ने सभी टीबी मरीजों के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली और फिर सरकार द्वारा टीबी को खत्म करने के अभियान के बारे में बताया। टीबी कैसे कैसे फैलता है, उससे बचाव कैसे किया जाय, सही समय पर इलाज और नियमित दवाई लेने से टीबी को कैसे खत्म कर सकते हैं, इसकी जानकारी दी  गई। सभी को बताया गया कि आसपास के लोगों के बीच भी इन बातों को रखें और कोई टीबी के लक्षण वाले लोग दिखें  तो उन्हें जल्द से जल्द अस्पताल भेजकर जांच कराएं। जांच में अगर टीबी की पुष्टि हो जाती है तो तत्काल इलाज शुरू कर दें।
टीबी मरीज नियमित तौर पर दवा खाएं- जगदीशपुर के प्रभारी और डॉक्टर ने भी मरीजों से उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछताछ की और दवा खाने से कोई दुष्परिणाम हो रहा है तो उसके बारे में जानकारी ली। उन्हें सलाह देते हुए यह बताया कि दवा को बीच में बंद नहीं करना है और नियमित दवा लेनी है। इसके बाद एसटीएस ने भी लोगों को सलाह देते हुए उनके खाते में पैसे आ रहे हैं या नहीं, इनकी जानकारी ली और भरोसा देते हुए कहा कि आप सभी के खाते में पैसे जा रहे हैं। आप अब जरूर एक बार चेक करें। अगर नहीं आ रहा हो तो आप आकर मिलें पर बीच में  दवा बंद नहीं करनी है और दवा लगातार खाएं।
सरकारी अस्पताल में टीबी की जांच और इलाज मुफ्तः उधर, सबौर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में भी शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग और केएचपीटी के सहयोग से टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की बैठक आयोजित की गई। यहां पर 11 टीबी के मरीज और नौ लोग उनकी देखभाल करने वाले थे। यहां पर अस्पताल प्रभारी डॉ. शुभ्रा वर्मा ने सभी मरीजों से सेहत की जानकारी ली और उन्हें नियमित तौर पर दवा लेने की सलाह दी। उन्होंने वहां पर मौजूद लोगों को टीबी के लक्षण, बचाव और इलाज की जानकारी दी। साथ ही कहा कि इन बातों के जाकर लोगों में शेयर करें। अगर किसी में टीबी के लक्षण दिखाई पड़े तो उसे सरकारी अस्पताल जांच के लिए लाएं। जांच में अगर टीबी की पुष्टि होती है तो उसका तत्काल इलाज शुरू करवाएं। सरकारी अस्पताल में टीबी का मुफ्त इलाज होता है। साथ में दवा भी मुफ्त मिलती है और इलाज होने तक निक्षय पोषण योजना के तहत पांच सौ रुपये प्रतिमाह राशि भी दी जाती है।

बच्चों का कराएं बीसीजी का टीकाकरण और टीबी के खतरे से रखें दूर 

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– बचाव के लिए टीकाकरण के साथ सतर्कता भी जरूरी, इसलिए रहें सावधान
– लगातार खाँसी रहने पर तुरंत कराएं जाँच, सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध है समुचित जाँच व इलाज की व्यवस्था
लखीसराय , 17 फरवरी –
मौसम में  बदलाव होने के कारण सर्दी-खांसी और बुखार समेत अन्य मौसमी बीमारियों का दौर शुरू हो गया है।  लोग इन  मौसमी बीमारियों की  चपेट में आने लगे हैं। इसलिए, स्वास्थ्य के प्रति हर व्यक्ति  को विशेष सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। खासकर छोटे-छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की उचित  देखभाल बेहद जरूरी है। दरअसल, छोटे-छोटे बच्चे में भी टीबी बीमारी की  चपेट में आने की  प्रबल संभावना रहती है। इसलिए, इससे बचाव के लिए  बच्चों को बीसीजी की  वैक्सीन जरूरी है। क्योंकि, कुपोषित और एनीमिया पीड़ित बच्चों में टीबी  होने का विशेष खतरा रहता है। इसलिए, ऐसे बच्चे की  उचित देखभाल बेहद जरूरी है।
– टीबी भी है संक्रामक बीमारी :
जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ . श्रीनिवास शर्मा ने बताया, टीबी एक संक्रामक बीमारी है और इससे  बच्चों को भी अधिक खतरा रहता । इसलिए, इससे बचाव के लिए बच्चों के प्रति भी विशेष सजग रहने की जरूरत है।  इससे बचाव के लिए हर व्यक्ति  को अपने बच्चे को निश्चित रूप से बीसीजी की  वैक्सीन लगवानी  चाहिए। यह बचाव के लिए सबसे बेहतर और आसान उपाय है। वहीं, उन्होंने बताया, यह बीमारी
मायकोबैटोरियम
 ट्यूबरक्लोसिस नामक बैक्टेरिया के कारण होता है। इस बीमारी का सबसे अधिक प्रभाव फेफड़ों पर पड़ता है। क्योंकि, हवा के जरिये यह बीमारी एक से दूसरे इंसान के अंदर फैलती  है। टीबी के मरीज के खांसने और छींकने के दौरान मुंह, नाक से निकलने वाली बारीक बूंदें से फैलती है। फेफड़ों के अलावा  कोई दूसरा टीबी इतना संक्रामक नहीं होता है।
– टीबी पीड़ित बच्चे के संपर्क से सामान्य बच्चे को बचाएँ :
टीबी पीड़ित बच्चे के संपर्क से सामान्य बच्चे को दूर रखें। यदि घर से बाहर जाने की आवश्यकता हो तो बच्चे को मास्क पहनाकर ही भेजें। क्योंकि, टीबी संक्रामक बीमारी होती है। इसलिए, बच्चों को श्वसन संबंधित स्वच्छता रखने के लिए प्रेरित करें। उन्हें पौष्टिक आहार दें। खानपान में विटामिन – सी वाले भोज्य पदार्थ दें। टीबी पीड़ित बच्चों के लिए अच्छी नींद जरूरी है।
– लक्षण महसूस होते ही कराएं  जाँच :
लक्षण महसूस होते ही ऐसे मरीजों को बिना देर किए अपनी जाँच करवानी चाहिए। जिला सदर अस्पताल, सभी पीएचसी तथा जिले के अन्य सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जाँच से लेकर समुचित इलाज एवं दवाई की मुफ्त सुविधा उपलब्ध है। इतना ही नहीं, बल्कि टीबी पीड़ित मरीजों को उचित पोषण आहार के लिए सहायता राशि भी दी जाती है।
– बचाव के उपाय :
1- 2 हफ्ते से ज्यादा खांसी होने पर डॉक्टर को दिखाएं। दवा का पूरा कोर्स लें। डॉक्टर से बिना पूछे दवा बंद न करें ।
– मास्क पहनें या हर बार खांसने या छींकने से पहले मुंह को पेपर नैपकिन से कवर करें।
– मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूकें और उसमें फिनाइल डालकर अच्छी तरह बंद कर डस्टबिन में डाल दें। यहां-वहां नहीं थूकें।
– पौष्टिक खाना खाएं, व्यायाम व योग करें ।
– बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तंबाकू, शराब आदि से परहेज करें।
– भीड़-भाड़ वाली और गंदी जगहों पर जाने से बचें।
– ये हैं टीबी के लक्षण :
– भूख न लगना, कम लगना तथा वजन अचानक कम हो जाना।
– बेचैनी एवं सुस्ती रहना, सीने में दर्द का एहसास होना, थकावट व रात में पसीना आना।
– हलका बुखार रहना।
– खांसी एवं खांसी में बलगम तथा बलगम में खून आना। कभी-कभी जोर से अचानक खांसी में खून आ जाना।
– गर्दन की लिम्फ ग्रंथियों में सूजन आ जाना तथा वहीं फोड़ा होना।
– गहरी सांस लेने में सीने में दर्द होना, कमर की हड्डी पर सूजन, घुटने में दर्द, घुटने मोड़ने में परेशानी आदि।
– महिलाओं को बुखार के साथ गर्दन जकड़ना, आंखें ऊपर को चढ़ना या बेहोशी आना ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस के लक्षण हैं।
– पेट की टीबी में पेट दर्द, अतिसार या दस्त, पेट फूलना आदि होते हैं।
– टीबी न्यूमोनिया के लक्षण में तेज बुखार, खांसी व छाती में दर्द होता है

सेंट्रल जेल के कैदियों को खिलाई गई डीईसी और अल्बेंडाजोल की दवा

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–फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर जिले में चल रहा है एमडीए अभियान
–10 फरवरी को शुरू हुआ अभियान अगले 14 दिनों तक चलेगा
भागलपुर, 17 फरवरी-
जिले में 10 फरवरी को शुरू हुआ एमडीए अभियान जारी है। 14 दिनों तक चलने वाले अभियान के तहत शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम सेंट्रल जेल पहुंची। स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ केयर इंडिया और पीसीआई के सदस्य भी मौजूद थे। इस दौरान सेंट्रल जेल के बंदियों और वहां पर तैनात पुलिसवालों को डीईसी और अल्बेंडाजोल की दवा खिलाई गई। केयर इंडिया के डीपीओ मानस नायक ने बताया कि कोई भी व्यक्ति अभियान के दौरान छूट नहीं जाए, इसका ख्याल रखा जा रहा है। इसके तहत जेल, सरकारी दफ्तर, मस्जिद इत्यादि जगहों पर भी स्वास्थ्यकर्मी जाकर दवा खिला रहे हैं। शुक्रवार को सेंट्रल जेल जाकर वहां पर बंदियों और कैदियों को डीईसी और अल्बेंडाजोल की दवा खिलाई गई। इसके अलावा कुछ दिन पहले डीएम आवास पर जाकर डीएम समेत वहां पर तैनात कर्मियों को भी दवा खिलाई गई। चंपानकर में यतीमखाना और अखाड़ा मस्जिद में जाकर लोगों को दवा खिलाई गई।
डॉ. दीनानाथ ने बताया कि जिले में अभी फाइलेरिया को लेकर एमडीए अभियान चल रहा है। इसके तहत दो वर्ष अधिक उम्र के लोगों को अल्बेंडाजोल और डीईसी की गोली खिलाई जा रही है। जिले में 31 लाख 40 हजार लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान दो से पांच साल तक के लोगों को अल्बेंडाजोल की एक और डीईसी की एक गोली खिलाई जा रही है। छह से 14 साल तक के लोगों को अल्बेंडाजोल की एक और डीईसी की दो गोली खिलाई जा रही है। 15 साल या इससे ऊपर के लोगों को अल्बेंडाजोल की एक और डीईसी की तीन गोली खिलाई जा रही है। इसके अलावा दो साल से कम उम्र के बच्चे, गंभीर रूप से बीमार और गर्भवती महिलाओं को दवा नहीं खिलाई जा रही है। साथ ही दवा भूखे पेट नहीं खिलाई जायेगी। इसके अलावा सामने ही दवा खिलाने का निर्देश स्वास्थकर्मियों को दिया गया है। अभियान के दौरान इन बातों का ध्यान रखा जाना है।
क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है फाइलेरिया: डॉ. दीनानाथ ने बताया कि फाइलेरिया एक गंभीर बीमारी है, जो क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। इसका प्रकोप बढ़ जाने के बाद कोई पर्याप्त इलाज संभव नहीं है। लेकिन, इसे शुरुआती दौर में ही पहचान करते हुए रोका जा सकता है। इसके लिए संक्रमित व्यक्ति को फाइलेरिया ग्रसित अंगों को पूरी तरह साफ सफाई करनी चाहिए।

प्रशिक्षण में मिली जानकारी पर क्षेत्र में जाकर अमल करें, टीबी मरीजों को खोजें- डॉ. अंजुम

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–पुराना सदर अस्पताल स्थित फार्मेसी कॉलेज में तीन दिवसीय प्रशिक्षण का समापन
–जिले के नवनियुक्त एएनएम को टीबी की जांच, इलाज और लक्षण की मिली जानकारी
बांका, 17 फरवरी-
पुराना सदर अस्पताल स्थित फार्मेसी कॉलेज में जिले के नवनियुक्त एएनएम के तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का शुक्रवार को समापन हो गया। अंतिम दिन बांका सदर, बेलहर और शंभूगंज प्रखंड की नवनियुक्त 40 एएनएम को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण सत्र का आयोजन जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. सोहेल अंजुम की अध्यक्षता में किया गया। प्रशिक्षण देने का काम जिला ड्रग इंचार्ज और मास्टर ट्रेनर राजदेव राय, डीपीएस गणेश झा, एसटीएस शिवरंजन कुमार, सुनील कुमार और अभिनंदन प्रसाद ने किया। आखिरी दिन भी नवनियुक्त एएनएम को टीबी के लक्षण, जांच और इलाज की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बताया गया कि अगर किसी को दो सप्ताह या इससे अधिक समय से खांसी हो, छाती में दर्द हो, कफ में खून आए, कमजोरी व थका हुआ महसूस करें , वजन तेजी से कम हो, भूख नहीं लगे, ठंड लगे, बुखार रहे और रात को पसीना आए तो उसकी नजदीकी  सरकारी अस्पताल में जांच कराएं। ये लक्षण टीबी के हैं। जांच में अगर टीबी की पुष्टि हो जाती है तो तत्काल उसका इलाज शुरू करवाएं। सरकारी अस्पताल में टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की मुफ्त व्यवस्था है। इतना ही नहीं, दवा भी मुफ्त में दी जाती  और जब तक इलाज चलता है, तब तक उसे निक्षय पोषण योजना के तहत पांच सौ रुपये प्रतिमाह पौष्टिक आहार के लिए राशि दी जाती है।
जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. सोहेल अंजुम ने आखिरी दिन प्रशिक्षण के दौरान एएनएम को बताया कि आपने जो बातें यहां पर सीखीं, उस पर क्षेत्र में जाकर अमल करें। जिला को 2025 तक टीबी से मुक्त बनाना है, इसलिए टीबी मरीजों की खोज को लेकर अभियान को तेज करें। क्षेत्र में अगर टीबी के लक्षण वाले कोई व्यक्ति मिलता है तो उसको नजदीकी  सरकारी अस्पताल लेकर जाएं। वहां पर जांच कराएं। जांच में अगर टीबी की पुष्टि होती है तो उसका तत्काल इलाज शुरू करवाएं। जब तक वह मरीज ठीक नहीं हो जाए, तब तक उस पर निगरानी रखें। साथ ही उसे सरकारी सहायता उपलब्ध कराने में मदद करें। ऐसा करने से जिले से टीबी को जड़ से खत्म करने में मदद मिलेगी।
इलाज जल्द शुरू होने से मरीज जल्द होता है ठीक: डॉ. सोहेल अंजुम ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच और इलाज मुफ्त में होता  है। साथ में दवा भी मुफ्त में दी  जाती  है। इसके अलावा जब तक मरीजों का इलाज चलता तब तक उसे पांच सौ रुपये प्रति माह की राशि पौष्टिक आहार के लिए दी जाती है। मेरी लोगों से यही अपील है कि अगर किसी में टीबी के लक्षण दिखाई दे तो उसे जांच के लिए नजदीकी  सरकारी स्वास्थ्य केंद्र इलाज के लिए ले जाएं। वहां पर अगर जांच में पुष्टि होती है तो तत्काल उसका इलाज शुरू करें। जितना जल्द टीबी का इलाज शुरू होगा,उतना ही जल्द मरीज स्वस्थ होंगे।

राष्ट्रहित चिंतक मंच के वार्षिक समारोह को 19 मार्च 2023 को मनाने का निर्णय

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राष्ट्रहित चिंतक मंच के केंद्रीय कार्यालय में बैठक हुई। जिसमें प्रनीत श्रीवास्तव जी की अध्यक्षता मे सभापति संजय भाई जी ने सभा का संचालन करते हुए, आमंत्रित सभी सक्रिय कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया। इस बैठक में राष्ट्रहित चिंतक मंच के वार्षिक समारोह को 19 मार्च 2023 को मनाने का निर्णय लिया गया। इस कार्यक्रम में अपने देश के अमर स्वतंत्रता संग्राम  शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। साथ ही समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े  वरिष्ठ समाजसेवकों को सम्मानित करने एवं युवा शक्ति को प्रोत्साहित एवं सम्मानित करने का भी विचार रखा गया। इस वार्षिक समारोह को गौरवपूर्ण सफल बनाने के लिए अपनी भूमिका और सहयोग देने की कामना के साथ समारोह में होने वाले अन्य संस्कृतिक और सामाजिक कार्यों पर विचार विमर्श किया गया। सभी साथियों ने अपने अपने अनुभव और समझदारी से विचार को रखा। इस बैठक में संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूर्यकांत शुभचिंतक जी एवं राष्ट्रहित चिंतक विपक्ष पार्टी के सचिव अमल शर्मा जी के साथ साथ सर्वश्री राज कुमार धनवारिया, जितेंद्र कुशवाहा, घनश्याम निरंकारी, विष्णु दास, राजेश, श्रीमती रूपम जी , चंद्र भूषण शर्मा जी आदि भी मौजूद रहे। सभी का हम हार्दिक धन्यवाद करते हैं । इन सभी की सफलता की कामना करते हुए सभी को धन्यवाद ज्ञापन करता हूं।

हाथीपांव  से खुद को सुरक्षित रखना है तो एमडीए राउंड में  स्वास्थ्य  कर्मियों के सामने खाएं फाइलेरिया की  दवा : डॉ अरविंद कुमार सिंह 

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– 10 फरवरी से  जिला भर के सभी प्रखंडों में आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के द्वारा घर – घर जाकर लोगों को खिलाई जा रही है फाइलेरिया की  दवा
– एमडीए राउंड के दौरान लोगों के बीच ड्रग डिस्ट्रीब्यूशन की जगह ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन पर फोकस करें स्वास्थ्य कर्मी
मुंगेर, 16 फरवरी-
  हाथीपांव जैसी दिव्यांगता से  खुद को सुरक्षित रखना है  तो एमडीए राउंड के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों के सामने ही खाएं फाइलेरिया की  दवा । उक्त बात  गुरुवार को जिलावासियों से स्वास्थ्य कर्मियों के सामने ही फाइलेरिया की  दवा के रूप में अल्बेंडाजोल और डीईसी की  टेबलेट्स खाने की  अपील करते हुए जिला के वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ  अरविंद कुमार सिंह ने कही। उन्होंने बताया कि मानसिक रोग के बाद दुनिया  भर में फाइलेरिया दिव्यांगता का सबसे बड़ा कारण है। विश्व भर के फाइलेरिया प्रभावित रोगियों के  लगभग 40% रोगी भारत में हैं।  मुंगेर में लिम्फेटिक फैलेरियसिस (हाथी पांव) के कुल 5120 केस हैं।
उन्होंने बताया कि विगत 10 फरवरी से लगातार घर घर जाकर आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सेविका – सहायिका द्वारा  लोगों को फाइलेरिया की  दवा के रूप में  एक टेबलेट्स अल्बेंडाजोल और उम्र के अनुसार जैसे 2 से 6 वर्ष के बच्चे को डीईसी एक टैबलेट, 6 से 14 साल के बच्चे को डीईसी की  दो टेबलेट्स और 14 से अधिक उम्र के सभी लोगों को डीईसी की  तीन टेबलेट्स खिलाई जा रही है। इस दौरान 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, एक सप्ताह के अंदर मां बनने वाली माताओं और गंभीर रूप से बीमार लोगों को फाइलेरिया की  दवा नहीं खानी है। इस दौरान यह विशेष रूप से ध्यान देने की  आवश्यकता है कि कोई भी खाली पेट दवा का सेवन नहीं करें।  ,कुछ खाने के बाद ही फाइलेरिया की  दवा खाएं ।
एमडीए राउंड के दौरान लोगों के बीच ड्रग डिस्ट्रीब्यूशन की जगह ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन पर फोकस करें स्वास्थ्य कर्मी  :
एमडीए राउंड को सफल बनाने में जुटे स्वास्थ्य कर्मियों से अपील करते हुए उन्होंने बताया कि हमलोगों का कार्यक्रम मास ड्रग डिस्ट्रीब्यूशन (एमडीडी) नहीं हैं बल्कि मास ड्रग एडमिस्ट्रेशन (एमडीए) है।  इसलिए आप लोग घरों में फाइलेरिया की  दवा छोड़कर नहीं आएं बल्कि अपने सामने लोगों को फाइलेरिया की  दवा खिलवाएं।  क्योंकि  कई लोग दवा तो जरूर लेते हैं लेकिन बाद में उसे खाते नहीं। इसकी वजह से ऐसे लोगों के फाइलेरिया बीमारी से संक्रमित होने की  संभावना ज्यादा रहती है।
एमडीए अभियान के दौरान लगातार पांच वर्षों तक फाइलेरिया की  दवा का सेवन करने से उस व्यक्ति को फाइलेरिया से संक्रमित होने की  संभावना नहीं रहती है। इस बीमारी में ऐसा देखा गया है कि मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने के बाद फाइलेरिया के लक्षण दिखने में 5 से 15 साल तक भी समय लग जाता है। इसलिए सभी लोग स्वास्थ्य कर्मियों के सामने ही फाइलेरिया की  दवा खाकर 10 फरवरी से 14 दिनों तक चलने वाले एमडीए अभियान को सफल बनाएं और  स्वास्थ्य विभाग, केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा देश को फाइलेरिया मुक्त बनाने के अभियान में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें ।

दो सप्ताह तक लगातार खांसी हो तो टीबी जांच कराएं

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-जांच में टीबी की पुष्टि होने पर तत्काल इलाज शुरू करवाएं
-जिले के चार प्रखंडों की नवनियुक्त एएनएम को मिला प्रशिक्षण
बांका, 16 फरवरी-
पुराना सदर अस्पताल के फार्मेसी कॉलेज में गुरुवार को चार और प्रखंडों की एएनएम को टीबी के बारे में प्रशिक्षण दिया गया। रजौन, धोरैया, शंभूगंज और बाराहाट प्रखंड की 60 नवनियुक्त एएनएम को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण सत्र का आयोजन जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. सोहेल अंजुम की अध्यक्षता में किया गया। प्रशिक्षण देने का काम जिला ड्रग इंचार्ज और मास्टर ट्रेनर राजदेव राय, डीपीएस गणेश झा, एसटीएस शिवरंजन कुमार, सुनील कुमार और एसटीएलएस संजय कुमार सिंह ने किया। इस दौरान एएनएम को बताया गया कि अगर किसी को दो सप्ताह या इससे अधिक समय से खांसी हो, छाती में दर्द हो, कफ में खून आए, कमजोरी व थका हुआ महसूस करे, वजन तेजी से कम हो, भूख नहीं लगे, ठंड लगे, बुखार रहे और रात को पसीना आए तो उसकी नजदीकि सरकारी अस्पताल में जांच कराएं। ये लक्षण टीबी के हैं। जांच में अगर टीबी की पुष्टि हो जाती है तो तत्काल उसका इलाज शुरू करवाएं। सरकारी अस्पताल में टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की मुफ्त व्यवस्था है। इतना ही नहीं, दवा भी मुफ्त में दी जाती है और जब तक इलाज चलता है, तब तक उसे निक्षय पोषण योजना के तहत पांच सौ रुपये प्रतिमाह पौष्टिक आहार के लिए राशि दी जाती है।
जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. सोहेल अंजुम ने बताया कि टीबी मरीजों की खोज लगातार हो रही है। टीबी के मरीज मिलने पर उसका तत्काल इलाज शुरू कर दिया जाता है। ठीक होने तक उसकी निगरानी होती है। जिले को 2025 तक टीबी मुक्त बनाना है, इसी को लेकर जिले की नवनियुक्त एएनएम को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पहले दिन मंगलवार को चार प्रखंड की एएनएम को प्रशिक्षण दिया गया था। गुरुवार को भी चार प्रखंड की एएनएम को प्रशिक्षण दिया गया। अब जिस प्रखंड की एएनएम बची हैं, उन्हें शुक्रवार को प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये लोग जब पूरी तरह से प्रशिक्षित हो जाएंगी तो जिले में टीबी को लेकर अभियान और तेज होगा।
टीबी को लेकर धारणाओं से बचें- डॉ. सोहेल अंजुम ने बताया कि टीबी संक्रमण को लेकर समाज में कुछ धारणाएं भी हैं। इन धारणाओं की वजह से लोग टीबी ग्रसित लोगों की उपेक्षा करने लगते हैं। टीबी ग्रसित लोगों के प्रति इस तरह की उपेक्षा किया जाना उसके इलाज में भी असुविधा ही पैदा करती है। आमलोगों को यह ध्यान रखना चाहिए कि वे टीबी संक्रमण होने के सही कारणों की जानकारी लें। सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच और इलाज की व्यवस्था बिल्कुल मुफ्त है। अगर कोई मरीज मिले तो उसे सरकारी अस्पताल इलाक के लिए ले जाएं।
फेफड़ों व अन्य अंगों को भी प्रभावित करता है टीबी : डॉ. अंजुम ने बताया कि जब एक व्यक्ति सांस लेता है तो बैक्टीरिया फेफड़ों में जाकर बैठ जाता है और वहीं बढ़ने लगता है। इस तरह से वो रक्त की मदद से शरीर के दूसरे अंगों यथा किडनी, स्पाइन व ब्रेन तक पहुंच जाता है। आमतौर पर ये टीबी फैलने वाले नहीं होते हैं। वहीं फेफड़ों व गले का टीबी संक्रामक होता है जो दूसरों को भी संक्रमित कर देता है।

किसी से मिलने, हाथ मिलाने से नहीं फैलता है टीबी का संक्रमण  

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–  टीबी है एक संक्रामक रोग बावजूद इसके मरीजों की कभी नहीं करें उपेक्षा
 – टीबी से संक्रमित होने की  आशंका होने पर सही समय पर कराएं जांच और सही इलाज
– जिला के सभी सरकारी अस्पतालों पर उपलब्ध है निःशुल्क टीबी की जांच और समुचित इलाज की सुविधा
मुंगेर-
किसी से मिलने और हाथ मिलाने से टीबी का संक्रमण नहीं फैलता है।  इसलिए टीबी मरीजों की कभी भी उपेक्षा नहीं करें। उनके साथ  अपनत्व की भावना रखते हुए  टीबी की सही समय पर जांच और सही जगह पर इलाज कराने के लिए उन्हें प्रेरित करें। उक्त बातें मुंगेर जिला के टीबी और एचआईवी रोग समन्वयक शेलेंदु कुमार ने कही। उन्होंने बताया कि श्वसन संबंधित संक्रामक बीमारियों में टीबी भी एक महत्वपूर्ण बीमारी है जो फेफड़ों को प्रभावित करता है। उन्होंने सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (सीडीसी) के हवाले से बताया कि संक्रमित व्यक्ति के खांसने व बोलने से निकली बूंद में मौजूद टीबी बैक्टीरिया हवा के माध्यम से स्वस्थ्य व्यक्ति तक पहुंचती है।
मिथ्याओं से बचें ताकि उपेक्षित नहीं हो संक्रमित :
उन्होंने बताया कि सीडीसी के मुताबिक टीबी संक्रमण को ले कुछ मिथ्याएं भी हैं। इन मिथ्याओं की वजह से लोग टीबी ग्रसित लोगों की उपेक्षा करने लगते हैं। टीबी ग्रसित लोगों के प्रति इस तरह से उपेक्षा किया जाना उसके इलाज में भी असुविधा ही पैदा करती है। आमलोगों को यह ध्यान रखना चाहिए कि वे टीबी संक्रमण होने के सही कारणों की जानकारी लें। सीडीसी के अनुसार यह रोग हाथ मिलाने, किसी को खानपान की सामग्री देने या लेने, बिस्तर पर बैठने व एक ही शौचालय के इस्तेमाल करने से बिल्कुल भी नहीं फैलता है।
फेफड़ों व अन्य अंगों को भी प्रभावित करता है टीबी :
जिला यक्ष्मा केंद्र में कार्यरत जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी ) सुमित सागर ने बताया कि जब एक व्यक्ति सांस लेता है तो बैक्टीरिया फेफड़ों में जाकर बैठ जाता और वहीं बढ़ने लगता है। इस तरह से वो रक्त की मदद से शरीर के दूसरे अंगों यथा किडनी, स्पाइन  व ब्रेन तक भी पहुंच जाता हैं। आमतौर पर ये टीबी फैलने वाले नहीं होते हैं | वहीं फेफड़ों व गले का टीबी संक्रामक होता है जो दूसरों को भी संक्रमित कर देता ।
कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वालों को संक्रमण की संभावना  अधिक :
सीडीसी के मुताबिक टीबी दो प्रकार के होते हैं। इनमें एक लेंटेंट टीबी होता है जिसमें टीबी के बैक्टीरिया शरीर में मौजूद होते हैं लेकिन उनमें लक्षण स्पष्ट रूप से नहीं दिखते | लेकिन रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर इसका असर उभर कर देखने को मिल सकता है। वहीं कुछ स्पष्ट दिखने वाले लक्षणों से टीबी रोगियों का पता चल पाता है।
ये लक्षण दिखें तो करायें टीबी जांच :
उन्होंने बताया कि तीन सप्ताह  या इससे अधिक समय से खांसी रहना, छाती में दर्द, कफ में खून आना, कमजोरी व थका हुआ महसूस करना।
– वजन का तेजी से कम होना,
– भूख नहीं लगना, ठंड लगना, बुखार का रहना, रात को पसीना आना टीबी के लक्षण हो सकते हैं।