टीबी के मरीज समय पर दवा का करें सेवन

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–किसी दूसरे लोगों में टीबी के लक्षण दिखे तो उसे जांच के लिए सरकारी अस्पताल लेकर जाएं
-केएचपीटी और स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से जिला यक्ष्मा केंद्र में टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की हुई बैठक
भागलपुर-
जिला यक्ष्मा केंद्र में बुधवार को स्वास्थ्य विभाग और कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) के सहयोग से टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की बैठक आयोजित की गई। इसमें 12 टीबी के मरीज, 11  देखभाल करने वाले, सीडीओ डॉ. दीनानाथ, एसटीएस, डीईओ, सीसी (डीटीसी) समेत कई अन्य लोग भी मौजूद थे। मौके पर सीडीओ डॉ. दीनानाथ ने टीबी के सभी मरीज से बात और उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। साथ ही टीबी मरीजों को समय पर दवा खाने और किसी अन्य लोगों में इस तरह के लक्षण दिखते हैं तो उन्हें जांच के लिए सरकारी अस्पताल भेजने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अगर लोगों में टीबी के लक्षण दिखते हैं तो उन्हें डरना नहीं चाहिए, बल्कि जागरूक होकर समय पर इलाज कराना चाहिए। इससे टीबी से वे जल्द उबर जाएंगे और बीमारी का प्रसार भी नहीं हो सकेगा।
टीबी से बचाव के लिए पौष्टिक आहार जरूरीः डॉ. दीनानाथ ने कहा कि टीबी से बचाव के लिए लोगों को पौष्टिक आहार पर जोर देना चाहिए। सरकारी अस्पताल में इलाजरत टीबी के मरीजों में पौष्टिक आहार के लिए निक्षय पोषण योजना के तहत 500 रुपये प्रतिमाह की राशि भी दी जाती है। यह राशि टीबी मरीजों को इलाज होने तक दी जाती है। इसलिए टीबी मरीजों को पौष्टिक आहार के सेवन जरूर करना चाहिए। टीबी होने का बड़ा कारण पौष्टिक आहार का नहीं लेना भी है। इसलिए टीबी के मरीज तो पौष्टिक आहार ले हीं। साथ में दूसरे लोगों को भी पौष्टिक आहार लेने के लिए जागरूक करें।
इलाज जल्द शुरू होने से जल्द होंगे ठीकः जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. दीनानाथ ने कहा कि सरकारी अस्पताल में टीबी मरीजों की जांच और इलाज की व्यवस्था मुफ्त है। इसलिए अगर लोगों को टीबी के लक्षण पता चले तो हिचक नहीं करना चाहिए। तत्काल जांच के लिए सरकारी अस्पताल आना चाहिए। जांच में पुष्टि हो जाने के बाद तत्काल इलाज शुरू किया जाएगा। जल्द इलाज शुरू होने से जल्द ठीक भी हो जाते हैं। इसलिए अगर किसी को लगातार दो हफ्ते तक खांसी आए, बलगम के साथ खून आए, लगातार बुखार रहे या फिर शाम के वक्त ज्यादा पसीना आए तों जांच कराने के लिए तत्काल सरकारी अस्पताल जाएं।

निक्षय मित्र बनकर एमडीआर टीबी मरीज को दी राशन सामग्री के पैकेट

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–पैकेट में टीबी मरीज के लिए एक महीने की राशन सामग्री दी गई
–एनटीईपी टीम के सदस्य बने निक्षय मित्र, आगे भी मदद करेंगे
बांका-
  जिला नेशनल ट्यूबरक्लाउसिस इलिमिनेशन प्रोग्राम (एनटीईपी) टीम के सदस्य ने बुधवार को निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीज को राहत सामग्री दी। इनलोगों ने एमडीआर टीबी के मरीज को पूरे एक महीने की राशन सामग्री दी। एक फूड बास्केट दिया गया, जिसमें चावल, आटा, दाल, अंडा, आलू, सरसो तेल नमक आदि शामिल थे। एनटीईपी टीम के सदस्य डीपीएस गणेश झा, डीईओ अनुज कुमार, एसटीएलएस संजय कुमार सिंह, एसटीएस शिवरंजन कुमार, एएनएम इंदु चौधरी, एफडब्ल्यूए सुनीता देवी और जिला ड्रग इंचार्ज राजदेव राय निक्षय मित्र बने। जिला ड्रग इंचार्ज राजदेव राय ने कहा कि हमलोगों ने जरूरतमंद टीबी मरीजों की मदद की ठानी है। इसी को लेकर हमलोग निक्षय मित्र बने हैं। आगे भी कोई जरूरतमंद टीबी के मरीज आते हैं तो उनकी भी मदद की जाएगी। अन्य लोग भी निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों की मदद कर रहे हैं। समाजसेवी, जनप्रतिनिधि समेत तमाम लोग निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों की मदद कर सकते हैं।
जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. सोहेल अंजुम ने कहा कि निक्षय मित्र योजना से टीबी मरीजों को बहुत बड़ी राहत मिल सकती है। यह अच्छी बात है कि बांका जिले में निक्षय बनने लगे हैं और इसका फायदा भी टीबी मरीजों को होने लगा है। एनटीईपी टीम के सदस्यों ने बहादुरी का काम किया है। इससे दूसरे लोगों को भी निक्षय मित्र बनने की प्रेरणा मिलेगी, जिससे बांका जिला को 2025 तक टीबी से मुक्त बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि टीबी से बचाव के लिए लोगों को पौष्टिक आहार पर जोर देना चाहिए। सरकारी अस्पताल में इलाजरत टीबी के मरीजों में निक्षय पोषण योजना के तहत 500 रुपये प्रतिमाह की राशि भी दी जाती है और अब निक्षय मित्र के जरिये भी मदद मिल रही है। इसलिए टीबी मरीजों को पौष्टिक आहार के सेवन जरूर करना चाहिए।
इलाज जल्द शुरू होने से जल्द होंगे ठीकः जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. सोहेल अंजुम ने कहा कि सरकारी अस्पताल में टीबी मरीजों की जांच और इलाज की व्यवस्था मुफ्त है। इसलिए अगर लोगों को टीबी के लक्षण पता चले तो हिचक नहीं करनी  चाहिए। तत्काल जांच के लिए सरकारी अस्पताल आना चाहिए। जांच में पुष्टि हो जाने के बाद तत्काल इलाज शुरू किया जाएगा। जल्द इलाज शुरू होने से जल्द ठीक भी हो जाते हैं। इसलिए अगर किसी को लगातार दो हफ्ते तक खांसी आए, बलगम के साथ खून आए, लगातार बुखार रहे या फिर शाम के वक्त ज्यादा पसीना आए तों जांच कराने के लिए तत्काल सरकारी अस्पताल जाएं।

अक्षय पात्र फाउंडेशन ने 964 जरुरतमंदों को किया राशन के किट का वितरण

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जोशीमठ-
सोमवार को जोशीमठ के सिंह धार क्षेत्र में अक्षय पात्र फाउंडेशन द्वारा 964 परिवारों में राशन किट वितरण किया गया। राशन वितरण माननीय एसडीएम कुमकुम जोशी, पार्षद श्री नितिन व्यास एवं अक्षय पात्र फाउंडेशन के प्रतिनिधि श्री गोविंद दत्ता दास जी की उपस्थिति में किया गया। अक्षय पात्र फाउंडेशन के उत्तराखण्ड एवं मध्य प्रदेश के जनसंपर्क प्रबंधक वीरेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि अक्षय पात्र आपदा के समय सरकार के साथ हमेशा से कदम से कदम मिलाकर पीडि़तों की सेवा में ही नारायण की सेवा मानती है। इसी क्रम में जोशीमठ में हमारी संस्था ने 964 परिवारों को राशन किट का वितरण किया। इस मौके पर एसडीएम कुमकुम जोशी जी, पार्षद श्री नितिन व्यास जी की उपस्थिति हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि राशन किट में आटा, चावल, चना दाल, देशी चना, सोयाबीन तेल, ट्रेटा पैक दूध, गरम मशाला, मिर्च पाउडर, आयोडिन नमक, हल्दी पाउडर, ग्लुकोज बिस्कुट आदि उपलब्ध है।
गौरतलब है कि अक्षय पात्र फाउंडेशन देश के 14 राज्यों में 20 लाख से अधिक स्कूली बच्चों को हर रोज खाना परोसती है। इस संस्था की तरफ से पहली थाली..अटल बिहारी वाजपेयी की तरफ से परोसी गई थी। अक्षय पात्र फाउंडेशन का इतिहास एक करुण कथा के साथ आरम्भ होता है -कलकत्ता के समीप, मायापुर नाम के गाँव में एक दिन परम पूज्यनीय ए. सी. भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद ने खिड़की से बाहर देखते हुए बच्चों के एक समूह को फेंके हुए भोजन के लिए आवारा कुत्तों के साथ लड़ते देखा। इस छोटी सी किन्तु दिल तोड़ देने वाली घटना से एक निश्चय उत्पन्न हुआ कि हमारे केन्द्र के दस मील के दायरे के अन्दर कोई भी भूखा नहीं रहेगा। उनके इस प्रेरणादायक संकल्प से अक्षय पात्र फ़ाउंडेशन को बनाने में मदद मिली जो वो आज है। अक्षय पात्र फाउण्डेशन की शुरुआत जून 2000 में श्री मधु पंडित दास द्वारा की गयी थी। तब यह संस्था केवल बंगलुरु और कर्नाटक के पांच सरकारी विद्यालयों के 1,500 बच्चों के लिए मध्याह्न – भोजन के तहत पौष्टिक खाना मुहैया कराती थी। अपने शुरूआती दिनों में बच्चों को पौष्टिक खाना उपलब्ध कराना संस्था के लिए आसान नहीं था लेकिन कहते है न जहाँ चाह वहां राह खुद ब खुद मिल जाती है।
आज भारत सरकार एवं कई राज्य सरकारों के साथ साझेदारी और साथ ही कई समाज-सेवी दाताओं की उदारता के साथ यह संगठन विश्व के सबसे बड़े मध्याह्न-भोजन कार्यक्रमों में से एक का संचालन करता है। अक्षयपात्र फाउंडेशन अब तक देश भर में 66 रसोइयां तैयार कर चुका है। सरकारी विद्यालयों के लगभग 20 लाख से अधिक बच्चों को रोजाना ताजा पका, स्वास्थ्यकर भोजन वितरित करता है। देश के अलग-अलग राज्यों में भोजन परोसने के साथ ही संस्था के उत्तराखंड में दो किचन देहरादून और गदरपुर में संचालित होते हैं। किचन का उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया था। इसके अलावा कई और स्थानों पर किचन स्थापित करने को लेकर संस्था प्रयासरत है। कोरोना काल में फाउंडेशन ने बेहतर कार्य किया। अक्षय पात्र फाउंडेशन के नेशनल प्रेसीडेंट आपरेशन एंड प्रोजेक्ट्स भारतअर्शभ दास बताते हैं कि अक्षय पात्र में फुली ऑटोमेटिक मशीनों के जरिए खाना तैयार किया जाता है और उन्हें बहुत हाइजीनिक व्यवस्था के तहत बच्चों तक पहुंचाया जाता है। 2025 तक प्रतिदिन 30 लाख छात्रों तक शुद्ध एवं पौष्टिक मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने का लक्ष्य संस्था का है।

पूरी दुनिया के साथ बिहार में भी ‘उमड़ते सौ करोड़ अभियान’ कार्यक्रम में उठी महिलाओं की गूंज

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• महिला बैंड की धुन पर थिरके लोग
• किशोरियों ने उमड़ते सौ करोड़ अभियान के अंतर्गत कार्यक्रम में कहा –“हिंसा हमें मंजूर नहीं”
• लड़कियों-किशोरियों ने कविता-गानों से दिया समानता का सन्देश
पटना-
‘उमड़ते सौ करोड़ अभियान’ के अन्तर्गत सराय पंचायत के मैदान, मनेर, पटना में सहयोगी संस्था के द्वारा आयोजित कार्यक्रम में किशोर, किशोरियों-महिलाओं ने मिलकर जेंडर हिंसा एवं शोषण के विरुद्ध आवाज बुलंद किया। पहली दफा किशोरियों ने आयोजन में भाग लेते हुए घरेलू हिंसा एवं लिंग आधारित भेदभाव पर अपनी राय रखी। वहीं, कार्यक्रम में महिला बैंड की धुन पर कार्यक्रम में शामिल 1000 से अधिक लोग झूमते एवं थिरकते दिखे।  इस अवसर पर लिंग आधारित हिंसा को समाप्त करने का आह्वान किया गया।
महिलाओं एवं किशोरियों के समक्ष दोहरी चुनौतियाँ
उमड़ते सौ करोड़ अभियान की राज्य समन्वयक एवं सहयोगी की प्रमुख रजनी  ने इस अवसर पर कहा कि आज महिलाएँ, किशोरियाँ कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रही हैं। घर-परिवार के साथ-साथ घर के बाहर कार्यस्थल और सड़क पर विभिन्न प्रकार की हिंसा और असमानता को झेलती हैं। व्यावसायिक (प्रोफेशनल) जिम्मेदारियों में बेहतरी का दबाव भी उनपर बना हुआ है। साथ ही, सामाजिक ताने-बाने के अंदर परिवार को बनाये रखने की जिम्मेदारी भी महिलाओं के कंधे पर है। उन्होंने आगे कहा कि महिला के सम्मानपूर्ण स्थान एवं हिंसा मुक्त समाज हमारी जिम्मेदारी है।
उमड़ते सौ करोड़ एक अंतर्राष्ट्रीय अभियान
रजनी ने इस अभियान के बारे में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए बताया कि उमड़ते सौ करोड़ अभियान एक अन्तराष्ट्रीय अभियान है एवं यह दो सौ से अधिक देशों में लिंग आधारित हिंसा एवं भेदभाव को समाप्त करने हेतु एक सशक्त प्रयास है। साथ ही पर्यावरण संतुलन को बनाये रखना भी इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने इस अभियान के इस वर्ष के सन्देश ‘शांति, प्यार, सौहार्द’ पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किशोरियों-महिलाओं के सम्मान की रक्षा करना सभी का अधिकार एवं कर्तव्य है, गैर-बराबरी एवं हिंसा-शोषण हमें बर्दाश्त नहीं है।
समाज के लिए महिला शोषण, हिंसा एवं लिंग आधारित भेदभाव एक अभिशाप:
सामाजिक एवं महिला अधिकार कार्यकत्री कंचन बाला ने कहा कि समाज के लिए महिला शोषण एवं घरेलू हिंसा किसी अभिशाप से कम नहीं है। वहीं, लिंग आधारित भेदभाव समाज के साथ देश के विकास में सबसे बड़ी बाधक भी है।
सराय पंचायत की मुखिया सुचित्रा सिन्हा ने कहा कि समाज को पुरुष प्रधान मानसिकता से निकलने की जरूरत है। महिलाओं की भूमिका पुरुषों से किसी भी अर्थ में कम नहीं है। घरेलू हिंसा एवं लिंग आधारित भेदभाव के खिलाफ़ परिवार एवं समाज के पुरुषों को भी आगे आना चाहिए।
सराय की सरपंच बबिता देवी ने किशोरियों को घरेलू हिंसा एवं लिंग आधारित भेदभाव पर चुप्पी तोड़ने एवं एकजुट होकर इसके खिलाफ़ आवाज उठाने के लिए उनकी सराहना की। उन्होंने कहा कि सामाजिक एकजुटता से महिला के साथ हो रहे शोषण एवं दुर्व्यवहार पर विराम लगाया जा सकता है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम दिया संदेश
इस मौके पर पंचायत के विभिन्न गांवों से महिला एवं किशोरियों ने अपनी प्रतिभागिता की एवं स्थानीय किशोरियों द्वारा कार्यक्रम प्रस्तुति द्वारा समुदाय को महिला हिंसा को समाप्त करने के प्रति सजग एवं तत्पर रहने के लिए आगाह किया। किशोरियों द्वारा गीत, संगीत, कविता एवं नृत्य कर समान अवसर एवं अधिकार देने की बात कही गई। उन्होंने कहा कि वे किसी से कम नहीं हैं, एवं अवसर मिलने पर उन्होंने अपनी क्षमता और कौशल को दिखाया है। उन्होंने उपस्थित प्रतिभागियों से अपील किया कि बेटी-बेटे में अंतर न करें एवं उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण के साथ समान अवसर और अधिकार उपलब्ध कराएँ।
 इस अवसर पर समाज सेवी एवं महिला अधिकार कार्यकर्ता कंचन बाला, सराय पंचायत की मुखिया सुचित्रा सिन्हा, अंशु देवी, बलुआ की उपमुखिया चंचल देवी, पैनाल पंचायत की सरपंच बबिता देवी, सामाजिक कार्यकर्ता प्रणेश कुमार सिंह, श्री ओम सिन्हा के साथ मनेर, बिहटा, दानापुर प्रखंड के कई वार्ड सदस्य उपस्थित रहीं। सहयोगी से उन्नति, सपना, रौनक, उषा, लाजवंती, प्रियंका, रूबी, बिंदु, निर्मला, रिंकी, धर्मेन्द्र, मनोज, सुरेन्द्र, नितीश उपस्थित रहे।

जीविका दीदी करेंगी परिवार नियोजन अभियान में सहयोग- डॉ. सज्जाद 

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• परिवार नियोजन कार्यक्रम पर बैठक का हुआ आयोजन
• राज्य में 37 सेहत केंद्र है संचालित
• पापुलेशन काउंसिल के तत्वावधान में हुआ बैठक का आयोजन
पटना-
“ परिवार नियोजन अभियान को और सशक्त बनाने में अब जीविका दीदियाँ सरकार का सहयोग करेंगी. जीविका समूह की दीदियों की समुदाय में पहुँच को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है. समूह की कम्युनिटी मोबिलाईजर (सी एम ) एवं कम्युनिटी न्यूट्रीशन रिसोर्स पर्सन (सी एन आर पी ) परिवार नियोजन के साधनों के उपयोगिता का संदेश समुदाय से साझा करेंगी एवं उन्हें इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करेंगी”, उक्त बातें राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, परिवार नियोजन, डॉ. मोहम्मद सज्जाद ने पापुलेशन काउंसिल के तत्वावधान में आयोजित परिवार नियोजन कार्यक्रम पर बैठक में कही. बैठक में केयर इंडिया की टीम की भी अहम् भूमिका रही जिन्होंने परिवार नियोजन के विभिन्न कार्यक्रमों की जमीनी स्तर पर क्रियानव्यन की जानकारी दी. बैठक में विभिन्न सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपनी बात रखी.
राज्य में 37 सेहत केंद्र हैं संचालित:
डॉ. सज्जाद ने बताया कि परिवार नियोजन के अभियान को सफल बनाने में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है. इसे देखते हुए राज्य के विभिन्न महाविद्यालयों में सेहत केंद्र संचालित किये जा रहे हैं. यहाँ युवाओं को सेहत एवं प्रजनन स्वास्थ्य स्वास्थ्य से जुडी जानकारी उपलब्ध करायी जाती है. डॉ. सज्जाद ने बताया कि राज्य में अभी कुल प्रजनन दर 3 प्रतिशत है जो की राष्ट्रीय औसत 2.1 से अधिक है. कुल प्रजनन दर को और नीचे लाने के लिए युवाओं के साथ सभी को एकजुट होकर प्रयास करने की जरुरत है. हर महीने की 21 तारीख को सभी स्वास्थ्य संस्थानों में परिवार नियोजन दिवस मनाया जाता है जहाँ लाभार्थियों का उन्मुखीकरण किया जाता है.
फ्रंट लाइन वर्कर्स की भूमिका अहम्:
बैठक को संबोधित करते हुए केयर इंडिया की परिवार नियोजन कार्यक्रम की राज्य पदाधिकारी डॉ. पद्मा ने बताया कि राज्य में सभी आशा कार्यकर्ताओं का उन्मुखीकरण किया जा रहा है जिससे परिवार नियोजन के साधनों एवं इसके लाभ के संदेश को वह सटीक तरीके से समुदाय से साझा कर सकें. डॉ. पद्मा ने बताया कि परिवार नियोजन साधनों को अपनाने के बारे में समुदाय में फैली भ्रांतियों को दूर करने की जरुरत है और इसमें फ्रंट लाइन वर्कर्स की भूमिका अहम् है.
बैठक के दौरान केयर की टीम की तरफ से बताया गया कि नवीन गर्भनिरोधक “ छाया ” की महिलाएं सहजता से स्वीकार कर इसके उपयोग कर रहीं हैं. इसे दर्शाने के लिए आंकड़ों के साथ एक विडियो भी बैठक में शामिल लोगों को दिखाया गया. बैठक का संचालन पापुलेशन काउंसिल की तरफ दे डॉ. राजीब आचार्या ने किया.

लखीसराय जिले के सभी हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर पर स्वास्थ्य मेला का हुआ आयोजन 

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– मेला के माध्यम से सामुदायिक स्तर पर लोगों को स्वास्थ्य जाँच के साथ दी गई आवश्यक और जरूरी जानकारी
– सभी सेटरों पर दिखी लोगों की अच्छी भीड़, हर जगह थी व्यापक और अच्छी व्यवस्था
लखीसराय-
सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं को बेहतर और मजबूत बनाने के लिए सरकार एवं राज्य स्वास्थ्य समिति पूरी तरह कटिबद्ध है। ताकि सामुदायिक स्तर पर लोगों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके और प्रत्येक व्यक्ति आसानी के साथ स्वास्थ्य सुविधा का लाभ प्राप्त कर सके। इसी कड़ी में हर माह की तरह इस माह भी मंगलवार को जिले में संचालित सभी हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर पर स्वास्थ्य मेला का आयोजन किया गया। जिसमें आए मरीजों की समुचित स्वास्थ्य जाँच के साथ-साथ स्वास्थ्य से संबंधित आवश्यक और जरूरी चिकित्सकीय परामर्श भी दिया गया ई। ताकि स्वस्थ समाज निर्माण को बढ़ावा मिल सके और जरूरतमंद लोग सुविधाजनक तरीके से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ प्राप्त कर सकें ।
– जिले के सभी हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर पर हर माह मेला का होता है आयोजन :
सिविल सर्जन डाॅ बीपी सिन्हा ने बताया, हर माह 14 तारीख को जिले के सभी हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर पर स्वास्थ्य मेला का आयोजन होता है। जिसके माध्यम से सामुदायिक स्तर पर लोगों के  स्वास्थ्य की जाँच की जाती है। इस मेला का मुख्य उद्देश्य  सामुदायिक स्तर पर लोगों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराना है । इसी उद्देश्य से मंगलवार को जिले के सभी हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटरों पर स्वास्थ्य मेला का आयोजन कर लोगों को सुविधाजनक तरीके से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई गई। साथ ही मेले  के माध्यम से सामुदायिक स्तर पर लोगों को सरकार द्वारा जनहित में चलाई जा रही स्वास्थ्य विभाग से संबंधित विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी गई । ताकि सामुदायिक स्तर पर लोगों को स्वास्थ्य से संबंधित योजनाओं की जानकारी मिल सके और लोग सुविधाजनक तरीके से आसानी के साथ स्वास्थ्य सुविधा का लाभ प्राप्त कर सकें ।
– बीपी, हीमोग्लोबिन, मधुमेह समेत अन्य स्वास्थ्य संबंधित परेशानियों की हुई जाँच :
लखीसराय सदर पीएचसी प्रभारी डॉ धीरेंद्र कुमार ने बताया, आयोजित मेला के दौरान चिकित्सकीय टीमों द्वारा मौजूद लोगों की  बीपी, हीमोग्लोबिन, मधुमेह समेत अन्य स्वास्थ्य संबंधित परेशानियों की जाँच की गई। जिसके बाद आवश्यक चिकित्सा परामर्श के साथ दवाई भी दी गई। साथ ही इन परेशानियाँ से दूर रहने के लिए आवश्यक जानकारी भी दी गई। इसके अलावा खासकर मौजूद महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर, ओरल कैंसर समेत अन्य कई गंभीर बीमारियों से भी बचाव के उपाय बताए गए। वहीं, उन्होंने बताया, सभी सेटरों पर लोगों की अच्छी भीड़ देखी गई। मेला में आए लोगों को स्वास्थ्य जाँच कराने में कोई असुविधा नहीं हो, इसके मद्देनजर व्यापक और अच्छी व्यवस्था की गई थी।

मुंगेर जिला भर के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर स्वास्थ्य मेला आयोजित 

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– साइक्लिंग सहित विभिन्न गतिविधियों का हुआ आयोजन
– राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देशानुसार प्रत्येक महीने की 14 तारीख को जिला के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर स्वास्थ्य मेला का किया जाना है आयोजन
– टेली कंसल्टेशन में राज्यभर में तीसरा और स्वास्थ्य संस्थानों को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में परिवर्तित करने में राज्य में दूसरे स्थान पर है मुंगेर
मुंगेर-
मंगलवार को जिला भर के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर स्वास्थ्य मेला आयोजित कर साइक्लिंग  सहित विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर इटहरी, जमालपुर, इंद्ररुख पूर्वी एवं पश्चिम, फरदा, जमालपुर, पहाड़पुर, हवेली खड़गपुर, चडूकी, कहुआ, संग्रामपुर, हरिन्नमार बरियारपुर, पेनसन, असरगंज सहित जिला भर के लगभग सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर स्वास्थ्य मेला का आयोजन किया गया। इस दौरान साइक्लिंग  करवाकर बच्चों एवं युवाओं को फिट एवं तंदुरुस्त रहने के बारे में जानकारी दी गई। इस अवसर पर सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर दी जाने वाली टेली कंसलटेंसी सर्विस, निक्षय पोषण अभियान, जन आरोग्य समिति की  बैठक आयोजित होने और संचारी और गैर संचारी रोगों की  जांच और दवा वितरण के बारे में जानकारी दी गई।
जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के डीपीसी और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के नोडल अधिकारी विकास कुमार ने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के निर्देशानुसार अब प्रत्येक महीने की  14 तारीख को जिला भर के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर स्वास्थ्य मेला का आयोजन किया जाना है। इस बार के स्वास्थ्य मेला का थीम डीवार्मिंग किट्स डिस्ट्रीब्यूशन, कैंसर के प्रति लोगों को जागरूक करने और कैंसर के सामान्य पहचान या लक्षण, उससे बचने के उपाय, समय पर स्क्रीनिंग और उपचार से होने वाली  सुविधाओं के बारे में लोगों में जागरूकता लाना है।
टेली कंसल्टेशन में राज्य भर तीसरा और विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में परिवर्तित करने में राज्य भर में दूसरे स्थान पर है मुंगेर :
मुंगेर के सिविल सर्जन डॉ. पीएम सहाय ने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के द्वारा जारी अद्यतन आंकड़ों के अनुसार  मुंगेर जिला विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में परिवर्तित करने के मामले  में 110% की  सफलता के साथ राज्य भर में दूसरे स्थान पर आया है। मुंगेर में लक्षित 159 स्वास्थ्य संस्थानों से अधिक 175 स्वास्थ्य संस्थानों को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में परिवर्तित किया गया है, जो लक्ष्य का 110% है। यहां 148 हेल्थ सब सेंटर, 21 एपीएचसी और 6 यूपीएचसी को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में परिवर्तित किया जा चुका है। इस मामले में मुजफ्फरपुर  110% सफलता के साथ राज्य भर में पहले स्थान पर आया है। वहां लक्षित 503 से अधिक 555 स्वास्थ्य संस्थानों को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में परिवर्तित किया गया है। इसके अलावा टेली कंसल्टेसी  सर्विसेज के मामले में 24% सफलता के साथ मुंगेर जिला राज्य भर में तीसरे स्थान पर है। इस मामले में गोपालगंज 42% के साथ पहले और वैशाली 37% के साथ दूसरे स्थान पर है।

नियमित टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए गमला एवं पौधों का किया गया अनावरण

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शाहकुंड सीएचसी में जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी व अस्पताल प्रभारी ने किया अनावरण
बच्चों को जानलेवा बीमारी से बचाव की जानकारी गमला व पौधों में दी गई है
भागलपुर-
नियमित टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। इसी सिलसिले में मंगलवार को शाहकुंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार चौधरी और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. जयप्रकाश सिंह ने संयुक्त रूप से फीता काटकर नियमित टीकाकरण की जानकारी से संबंधित गमला एवं पौधों का अनावरण किया।
मौके पर मौजूद प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक कुमार रोहित ने बताया कि टीकाकरण के उपयोग में आने वाले अनुपयोगी वैक्सीन कैरियर का इस्तेमाल गमला के रूप में किया गया है। इस पर बच्चों को जानलेवा बीमारी से बचाव को लेकर दी जाने वाली टीका के संबंध में जानकारी एवं टीका पड़ने का समय भी प्रदर्शित किया गया है। इससे अस्पताल में आने वाले मरीजों और अभिभावकों के द्वारा जनमानस को टीकाकरण के महत्व की जानकारी पहुंचेगी। साथ ही लोग अपने बच्चों का समय पर टीकाकरण भी कराएंगे। मौके पर यूनिसेफ के अमित कुमार, मो. राशिद, केयर इंडिया के डॉ. राजेश कुमार, आलोक कुमार, मो. शम्स तबरेज़, मनीषा कुमारी, अंजनी कुमारी, एएनएम आदि मौजूद थीं।

जिले के नवनियुक्त एएनएम को टीबी को लेकर दिया गया प्रशिक्षण

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–तीन दिवसीय प्रशिक्षण के पहले दिन अमरपुर, बौंसी, चांदन और फुल्लीडुमर के एएनएम को दिया गया प्रशिक्षण
-गुरुवार और शुक्रवार को भी जिले के बचे हुए चार-चार प्रखंडों के नवनियुक्त एएनएम को दिया जाएगा प्रशिक्षण
बांका-
पुराना सदर अस्पताल स्थित फार्मेसी कॉलेज में मंगलवार को जिले के नवनियुक्त एएनएम को टीबी को लेकर प्रशिक्षण दिया गया। तीनदिवसीय प्रशिक्षण के पहले दिन अमरपुर, फुल्लीडुमर, बौंसी और चांदन प्रखंड के एएनएम को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दूसरे और तीसरे दिन भी चार-चार प्रखंडों के एएनएम को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण का आयोजन जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. सोहेल अंजुम की अध्यक्षता में किया गया। मौके पर जिला ड्रग इंचार्ज और मास्टर ट्रेनर राजदेव राय, बांका एसटीएस शिवरंजन कुमार, अमरपुर एसटीएस अभिनंदन प्रसाद और एसटीएस कटोरिया सुनील कुमार भी मौजूद थे। ट्रेनिंग देने का काम तीनों एसटीएस ने किया।
जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. सोहेल अंजुम ने बताया कि जिले में टीबी मरीजों की खोज को तेज किया जाएगा। मरीजों की खोज के बाद उनकी जांच और इलाज की व्यवस्था की जाएगी, ताकि जिला 2025 तक टीबी से मुफ्त हो सके। इसी सिलसिले में नवनियुक्त एएनएम को प्रशिक्षण दिया गया। इसमें उन्हें टीबी की पहचान के तरीके और उसकी जांच व इलाज की व्यवस्था के बारे में बताया गया। गुरुवार और शुक्रवार को भी जिले के अन्य प्रखंडों के नवनियुक्त एएनएम को प्रशिक्षण दिया जाएगा। बुधवार को टीकाकरण होता है, इसलिए उस दिन प्रशिक्षण नहीं रखा गया है।
इलाज जल्द शुरू होने से मरीज जल्द होता है ठीक: डॉ. सोहेल अंजुम ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच और इलाज मुफ्त में होता  है। साथ में दवा भी मुफ्त में दी  जाती  है। इसके अलावा जब तक मरीजों का इलाज चलता  तब तक उसे पांच सौ रुपये प्रति माह की राशि पौष्टिक आहार के लिए दी जाती है। मेरी  लोगों से यही अपील है कि अगर किसी में टीबी के लक्षण दिखाई दे तो उसे जांच के लिए नजदीकी  सरकारी स्वास्थ्य केंद्र इलाज के लिए ले जाएं। वहां पर अगर जांच में पुष्टि होती है तो तत्काल उसका इलाज शुरू करें। जितना जल्द टीबी का इलाज शुरू होगा,उतना ही जल्द मरीज स्वस्थ होंगे।

स्वास्थ्यकर्मी के सामने ही खाएं अल्बेंडाजोल और डीईसी की दवा

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-स्वास्थ्यकर्मी से दवा लेकर उसे बाद में खाने की जिद न करें, भूखे पेट दवा नहीं खाएं
-जिले में चल रहा एमडीए अभियान, अभियान को सफल बनाने में करें अपना सहयोग
बांका, 14 फरवरी-
जिले में फाइलेरिया को लेकर एमडीए अभियान चल रहा है। इसके तहत जिले के 24 लाख लोगों को अल्बेंडाजोल और डीईसी की दवा खिलाए जाने का लक्ष्य है। स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर लोगों को दवा खिला रहे हैं। अभियान के दौरान देखा जा रहा है कि कुछ लोग दवा को सामने नहीं खाने की जिद करते हैं। दवा लेकर रख देते हैं। ऐसा नहीं करें। दवा को स्वास्थ्यकर्मी के सामने ही खाएं। दवा सामने ही खाने से ज्यादा अच्छा रहेगा। यदि कोई समस्या भी होगी तो तत्काल उसका समाधान किया जाएगा। एक और बात जरूरी है कि दवा को भूखे पेट नहीं खाएं। भूखे पेट दवा खाने से परेशानी होने की आशंका रहती है। हालांकि यह परेशानी थोड़ी देर के लिए होती  और कुछ समय बाद यह ठीक हो जाती  है।
प्रभारी जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल कहते हैं कि कोई भी अभियान तभी सफल होता है जब लोग इसमें सहयोग करें। अभी एमडीए अभियान के तहत जिले में अल्बेंडाजोल और डीईसी की दवा खिलाई जा रही है। अभियान के तहत आशा कार्यकर्ता या आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका या फिर वॉलेंटियर लोगों के घर जाते हैं तो लोगों को उनकी बात माननी चाहिए। अगर वे सामने ही दवा खाने को कहते हैं तो इसमें आपकी ही भलाई है। लोगों को यह समझना चाहिए कि कोई भी नियम बनता है तो वह आमलोगों के हित के लिए होता । इसलिए लोगों से मेरी अपील है कि इस अभियान में अपना सहयोग करें।
कोई भी व्यक्ति छूटे नहीं, इसका रखा जा रहा ध्यानः वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी आरिफ इकबाल ने बताया कि जिले में अभियान के तहत आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका और वॉलेंटियर क्षेत्र में जाकर लोगों को गोली खिलाने का काम कर रहे हैं। अभियान के दौरान एक भी व्यक्ति छूट नहीं जाए, इसका विशेष ध्यान रखने के लिए कहा गया है। 10 फरवरी से शुरू हुआ अभियान 14 दिनों तक चलेगा। इसके तहत दो वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को अल्बेंडाजोल और डीईसी की गोली खिलाई जा रही है। अभियान के दौरान दो से पांच साल तक के लोगों को अल्बेंडाजोल की एक और डीईसी की एक गोली खिलाई जा रही है। छह से 14 साल तक के लोगों को अल्बेंडाजोल की एक और डीईसी की दो गोली खिलाई जा रही है। 15 साल या इससे ऊपर के लोगों को अल्बेंडाजोल की एक और डीईसी की तीन गोली खिलाई जा रही है। इसके अलावा दो साल से कम उम्र के बच्चे, गंभीर रूप से बीमार और गर्भवती महिलाओं को दवा नहीं खिलाई जा रही है।
क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है फाइलेरिया: डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल ने बताया कि फाइलेरिया एक गंभीर बीमारी है, जो क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। इसका प्रकोप बढ़ जाने के बाद कोई पर्याप्त इलाज संभव नहीं है। लेकिन, इसे शुरुआती दौर में ही पहचान करते हुए रोका जा सकता है। इसके लिए संक्रमित व्यक्ति को फाइलेरिया ग्रसित अंगों को पूरी तरह साफ सफाई करनी चाहिए।