वरिष्ठ प्रत्रकार, समाजसेवी और BJP कार्यकर्ता गिरीश बलूनी को ‘COSAMB’ में मिली बड़ी जिम्मेदारी 

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नई दिल्ली:
वरिष्ठ प्रत्रकार, समाजसेवी और BJP कार्यकर्ता गिरीश चन्द्र बलूनी को National Council of State Agricultural Marketing Board में बड़ी जिम्मेदारी मिली है. उन्हें ‘COSAMB’ में बतौर सलाहकार मनोनित किया गया है. गिरीश चन्द्र बलूनी को ये सम्मान मिलने पर दिल्ली स्थित उत्तराखंड सदन में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. जहां गिरीश चन्द्र बलूनी काफी संख्या में लोगों ने पहुंच कर  ढोल दमाऊ से उनका जोरदार स्वागत किया. इस दौरान उत्तराखंड समाज सहित कई संगठनों को लोग मौजूद रहे. कार्यक्रम की अध्यक्षता ओम सेक्योरिटीज सर्विसेज प्रा.लि. के चेयरमैन कैप्टेन बीएस राणा और इडिया एवम् प्रसिद्ध व्यवसायी उत्तराखंड समाज के अग्रणी समाजसेवी चन्द्रशेखर जीना ने की. वहीं इस दौरान गिरीश चन्द्र बलूनी ने BJP के शिर्ष नेतृत्व और उतराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी का आभार वयक्त किया.

मायागंज अस्पताल के थैलेसीमिया डे केयर सेंटर में मरीजों के लिए एक और सुविधा शुरू

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-थैलेसीमिया डे केयर सेंटर में मरीज के परिजन पहले सूचना देंगे तो उनके लिए खून की व्यवस्था रहेगी
-इससे मरीजों और परिजनों के समय की बचत होगी, दूर-दराज के मरीजों को इससे ज्यादा राहत मिलेगी
भागलपुर, 13 फरवरी-
मायागंज अस्पताल के थैलेसीमिया डे केयर सेंटर में मरीजों के लिए लगातार सुविधाएं बढ़ रही हैं। इसी के तहत थैलेसीमिया डे केयर सेंटर में नई व्यवस्था शुरू की गई है। इससे मरीजों और परिजनों को समय की बचत होगी। खासकर वैसे मरीजों के परिजनों को ज्यादा राहत पहुंचेगी, जो दूर-दराज से यहां पर इलाज के लिए आते हैं। दरअसल, मायागंज अस्पताल स्थित थैलेसीमिया डे केयर सेंटर के नोडल प्रभारी डॉ. अंकुर प्रियदर्शी के निर्देश के बाद नई व्यवस्था शुरू हुई है। इसके तहत मरीज के परिजन एक दिन पहले ही आने की सूचना दे सकते हैं। इससे यह होगा कि उस मरीज के लिए खून की व्यवस्था पहले से कर दी जाएगी। जब मरीज आएंगे तो उनका इलाज शुरू कर दिया जाएगा और इलाज होते ही मरीज घर जा सकेंगे। अभी मरीज आते हैं और नंबर लगाते  फिर इलाज होता है। इससे देरी होती है। जिले के या फिर नजदीक के मरीजों को इससे ज्यादा परेशानी नहीं होती है, लेकिन जो दूर-दराज से इलाज के लिए आते  उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई लोगों को तो एक दिन भागलपुर में रुकना भी पड़ता है। इससे अब राहत मिलेगी। इसके लिए मरीजों या परिजनों को 9262999032 या फिर 9264490423 पर व्हाट्सअप या फिर कॉल करना पड़ेगा। इसके साथ-साथ मरीजों को जितना भी खून की आवश्यकता होगी, उसकी व्यवस्था यहां पर की जाएगी। उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी।
दरअसल, मायागंज अस्पताल पूर्वी बिहार का सबसे बड़ा अस्पताल माना जाता है। यहां पर लगभग 15 जिले के लोग इलाज के लिए आते हैं। बिहार के मरीज तो आते ही हैं, साथ में पड़ोसी राज्य झारखंड के मरीज भी यहां पर इलाज कराने के लिए आते हैं। झारखंड के गोड्डा, साहेबगंज, दुमका जिलों और बिहार के ही कोसी-सीमांचल और दूर से इलाज के लिए आने वाले मरीजों को इससे काफी फायदा पहुंचेगा। मायागंज अस्पताल स्थित थैलेसीमिया डे केयर सेंटर और मायागंज अस्पताल स्थित ब्लड बैंक के जरिये मरीजों के इलाज को लगातार सुविधाजनक बनाया जा रहा है।
मरीज के परिजन इस सुविधा का फायदा उठाएंगेः मायागंज अस्पताल स्थित थैलेसीमिया डे केयर सेंटर के नोडल पदाधिकारी डॉ. अंकुर प्रियदर्शी ने कहा कि ऐसा देखा जा रहा था कि दूर-दराज से इलाज कराने के लिए आने वाले थैलेसीमिया के मरीजों और परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। उन्हीं की परेशानी को दूर करने के लिए इस तरह की सुविधा शुरू की गई है। दरअसल, मरीज के परिजन को पहले से पता होता है कि कब खून चढ़ना है। ऐसे में वे किस दिन आ रहे हैं, अगर एक दिन पहले इसकी सूचना दे देंगे तो उन्हें इससे राहत मिलेगी। मुझे है उम्मीद है कि लोग इस सुविधा का फायदा उठाएंगे।
लगभग 100 मरीजों को हुआ इलाजः मालूम हो कि मायागंज अस्पताल स्थित थैलेसीमिया डे केयर सेंटर का उद्घाटन चार जनवरी को उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी यादव ने किया था। इसकी संचालन की व्यवस्था केयर इंडिया की ओर से की गई है। नर्स से लेकर डाटा ऑपरेटर तक की व्यवस्था केयर इंडिया की तरफ से की गई है। दो नर्स, एक लैब टेक्नीशियन, एक डाटा ऑपरेटर और एक हाउस कीपिंग स्टाफ केयर इंडिया की ओऱ से प्रोवाइड कराया गया है। थैलेसीमिया डे केयर सेंटर में इलाज के लिए आने वाले बच्चों के लिए मनोरंजन की भी व्यवस्था की गई है। इसके तहत एक प्ले जोन भी बनाया गया है। जहां पर कि इलाज से पहले का समय बच्चे व्यतीत कर सकते हैं। अब तक लगभग 100 मरीज यहां पर इलाज करा चुके हैं।

अक्षय पात्र फाउंडेशन 1000 जरुरतमंदों के बीच बांटेगा राशन किट

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जोशीमठ-
सोमवार को जोशीमठ के सिंह धार क्षेत्र में अक्षय पात्र फाउंडेशन द्वारा 1000 परिवारों के बीच राशन किट का वितरण किया जाएगा। राशन वितरण एसडीएम कुमकुम जोशी, पार्षद नितिन व्यास एवं अक्षय पात्र फाउंडेशन के प्रतिनिधि गोविंद दत्ता दास की उपस्थिति में किया जाएगा। अक्षय पात्र फाउंडेशन के उत्तराखण्ड एवं मध्य प्रदेश के जनसंपर्क प्रबंधक वीरेंद्र सिंह शेखावत बताया कि अक्षय पात्र आपदा के समय सरकार के साथ हमेशा से कदम से कदम मिलाकर पीडि़तों की सेवा में ही नारायण की सेवा मानती है। इसी क्रम में जोशीमठ में हमारी संस्था 1000 परिवारों को राशन किट का वितरण करेगी। इस मौके पर एसडीएम कुमकुम जोशी जी, पार्षद नितिन व्यास जी की उपस्थिति हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि राशन किट में आटा, चावल, चना दाल, देशी चना, सोयाबीन तेल, ट्रेटा पैक दूध, गरम मशाला, मिर्च पाउडर, आयोडिन नमक, हल्दी पाउडर, ग्लुकोज बिस्कुट आदि उपलब्ध है।
गौरतलब है कि अक्षय पात्र फाउंडेशन देश के 1४ राज्यों में २० लाख से अधिक स्कूली बच्चों को हर रोज खाना परोसती है। इस संस्था की तरफ से पहली थाली..अटल बिहारी वाजपेयी की तरफ से परोसी गई थी। अक्षय पात्र फाउंडेशन का इतिहास एक करुण कथा के साथ आरम्भ होता है -कलकत्ता के समीप, मायापुर नाम के गाँव में एक दिन परम पूज्यनीय ए. सी. भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद ने खिड़की से बाहर देखते हुए बच्चों के एक समूह को फेंके हुए भोजन के लिए आवारा कुत्तों के साथ लड़ते देखा। इस छोटी सी किन्तु दिल तोड़ देने वाली घटना से एक निश्चय उत्पन्न हुआ कि हमारे केन्द्र के दस मील के दायरे के अन्दर कोई भी भूखा नहीं रहेगा। उनके इस प्रेरणादायक संकल्प से अक्षय पात्र फ़ाउंडेशन को बनाने में मदद मिली जो वो आज है।
अक्षय पात्र फाउण्डेशन की शुरुआत जून 2000 में मधु पंडित दास द्वारा की गयी थी। तब यह संस्था केवल बंगलुरु और कर्नाटक के पांच सरकारी विद्यालयों के 1,500 बच्चों के लिए मध्याह्न – भोजन के तहत पौष्टिक खाना मुहैया कराती थी। अपने शुरूआती दिनों में बच्चों को पौष्टिक खाना उपलब्ध कराना संस्था के लिए आसान नहीं था लेकिन कहते है न जहाँ चाह वहां राह खुद ब खुद मिल जाती है। आज भारत सरकार एवं कई राज्य सरकारों के साथ साझेदारी और साथ ही कई समाज-सेवी दाताओं की उदारता के साथ यह संगठन विश्व के सबसे बड़े मध्याह्न-भोजन कार्यक्रमों में से एक का संचालन करता है।
अक्षयपात्र फाउंडेशन अब तक देश भर में 66 रसोइयां तैयार कर चुका है। सरकारी विद्यालयों के लगभग 20 लाख से अधिक बच्चों को रोजाना ताजा पका, स्वास्थ्यकर भोजन वितरित करता है। देश के अलग-अलग राज्यों में भोजन परोसने के अलावा संस्था के राजधानी दिल्ली में चार किचन संचालित होते हैं, जो करीब एक लाख बच्चों सहित पूरे दिल्ली के सभी नाइट शेल्टरों में भोजन सप्लाई करती है। कोरोना काल में फाउंडेशन ने बेहतर कार्य किया। अक्षय पात्र फाउंडेशन के नेशनल प्रेसीडेंट आपरेशन एंड प्रोजेक्ट्स भारतअर्शभ दास बताते हैं कि अक्षय पात्र में फुली ऑटोमेटिक मशीनों के जरिए खाना तैयार किया जाता है और उन्हें बहुत हाइजीनिक व्यवस्था के तहत बच्चों तक पहुंचाया जाता है। 2025 तक प्रतिदिन 30 लाख छात्रों तक शुद्ध एवं पौष्टिक मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने का लक्ष्य संस्था का है।

धूमधाम से मनाया गया विधायक अभय वर्मा का जन्मदिन

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एडवोकेट मांगे राम नागर के नेतृत्व में लक्ष्मीनगर विधानसभा के लोकप्रिय विधायक अभय वर्मा का जन्मदिन धूम-धाम से मनाया गया और साथ में  पूर्व मंत्री युवा मोर्चा व दिल्ली प्रदेश के पदाधिकारी आशिष पाण्डेय का भी जन्मदिन मनाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा के कार्यकर्ता व गणमान्य उपस्थित रहे। विधायक अभय वर्मा ने अपने सम्बोधन में कहा की जनता भगवान् स्वरुप होती है और मैं आप सबका आभारी हूँ की आपने हमें ये मौका दिया है की मैं लक्ष्मी नगर विधानसभा के निवासियों के सहयोग से आपके सुख दुःख का सहभागी बन सकूँ और आपको आये दिन हो रहें समस्याओं में आपके साथ खड़ा रह सकू।

आज प्रातः काल से कई जगह भारी ठण्ड में कहीं कम्बल वितरण करवाकर तो कही झुग्गी झोपडी में बच्चों के साथ केक काटकर और बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त करके जन्मदिन मनाने का सौभाग्य मुझे इससे बेहतर शायद हीं कहीं मिल पाता। तत्पश्चात अभय वर्मा ने सभी कार्यकर्ताओं व प्रमुख क्षेत्र वासियों को पुष्प गुछ देकर धन्यवाद किया। जन्मदिन कार्यक्रम में शामिल होने वालों में क्षेत्र के प्रमुख व्यक्ती भाजपा पांडव नगर मंडल के उपाध्यक्ष रविन्द्र शर्मा पांडव नगर मंडल के महामंत्री अरुण शुक्ला, सुदेश शर्मा,  प्रवीण शर्मा, देवराज खटाना भाजपा व्यपार प्रकोष्ठ के अध्यक्ष संजय शर्मा, कैलाश तवंर, भाई कमल, विक्रम भाई पत्रकार श्री जगमोहन भाई, युवा नेता हंसराज भारद्वाज जी, मार्किट एसोसिएशन के प्रधान देवराज मैदान और अन्य  गणमान्य उपस्थित रहें। लोगों ने उनके जन्मदिन के शुभअवसर पर उनके स्वस्थ, दीर्घायु व कामयाब जीवन की मंगलकामना की।

मंदिर पुनरुत्थान अभियान, रोटरी क्लब दिल्ली कैपिटल, गंधर्व वेलनेस और ईबीजी समूह के तत्वाधान में तीज महोत्सव का आयोजन

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नईदिल्ली-

मंदिर पुनरुत्थान अभियान, रोटरी क्लब दिल्ली कैपिटल, गंधर्व वेलनेस और ईबीजी समूह के तत्वाधान में तीज महोत्सव का आयोजन किया गया। जिसमें मेंहदी लगाने का विशेष व्यवस्था की गई। इस खास आयोजन में महिलाओं ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। महिलाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। महिलाओं का कहना है कि जिस प्रकार से यह आयोजन किया गया है इससे आसपास की महिलाओं ने भी इस संस्था से जुड़ने की इच्छा व्यक्त की है।

इस खास मौके पर यह घोषणा की गई अगर किसी के परिवार में मांगलिक कार्य हो और मेंहदी लगाने एवं कोई भी मांगलिक कार्यक्रम हो तो गंधर्व वेलनेस, मंदिर पुनरुत्थान अभियान, ईबीजी से संपर्क अवश्य करें। गंधर्व वेलनेस स्टुडियों की मेंहदी लगाने की विशिष्टता हासिल है। वेलनेस स्टुडियों की विशिष्टता का लाभ महिलाएं ले रही हैं। इनके पास मेंहदी लगाने की विशेष टीम में जो आपके अनुसार सभी कार्यों को पूरा करेंगी।

समाज के लोगों को प्रोत्साहन आपके द्वारा किए जाने की आवश्यकता है। जिसमें आपका सहयोग अपेक्षित  है।

आप इस नंबर से संपर्क कर लाभ उठाएं – 9810521519

टीबी के लक्षण दिखे तो जाएं नजदीकी सरकारी अस्पताल

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-बड़े निजी अस्पताल या फिर दूसरे शहर में जाने की जरूरत नहीं
-सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच से लेकर इलाज तक है मुफ्त
बांका-
सरकार 2025 तक टीबी उन्मूलन को लेकर संकल्पित है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग लगातार अभियान भी चला रहा है। जिले के सभी सरकारों अस्पतालों में इसके इलाज से लेकर जांच तक की मुफ्त व्यवस्था है। साथ में दवा भी दी जाती  और जब तक दवा चलती है टीबी के मरीज को पौष्टिक भोजन के लिए पांच सौ रुपये प्रतिमाह सहायता राशि भी दी जाती है। इसके बावजूद देखा जा रहा है कि कुछ लोग इलाज कराने के लिए बड़े निजी अस्पताल या फिर बड़े शहर की ओर जाते हैं। फिर वहां से निराश होकर जिले के सरकारी अस्पतालों का चक्कर काटना पड़ता है। ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं है। जैसे ही टीबी के बारे में पता चले तो पहले नजदीकी  सरकारी अस्पताल ही जाएं।
धोरैया प्रखंड के रहने वाले ब्रह्मदेव मंडल 2018 में टीबी की चपेट में आए। इसके बाद वह पहले निजी अस्पताल गए फिर भागलपुर के मायागंज अस्पताल। आखिरकार वह नवंबर 2020 में जिला यक्ष्मा केंद्र बांका आए, जहां उनकी मुलाकात डीपीएस गणेश झा से हुई। गणेश झा ने जब उनकी जांच करवाई तो वह एमडीआर टीबी का मरीज निकला। दरअसल, नियमित तौर पर दवा का सेवन नहीं करने से लोग एमडीआप टीबी की चपेट में आ जाते हैं। ब्रह्मदेव मंडल का इलाज काफी लंबा चला औऱ वह नियमित दवा का सेवन नहीं कर पाए। इस वजह से वह एमडीआर टीबी की चपेट में आ गए। यदि सरकारी अस्पताल में ब्रह्मदेव मंडल का इलाज चलता तो ज्यादा दिनों तक दवा नहीं चलती और शायद वह एमडीआर टीबी की चपेट में भी नहीं आता।
पहले ही सरकारी अस्पताल जाना चाहिए था- ब्रह्मदेव मंडल कहते हैं कि पहले मुझे लगा कि निजी अस्पताल में बेहतर इलाज होता होगा, यह सोचकर मैं निजी अस्पताल गया। वहां जब ठीक नहीं हुआ तो इसके बाद मैं भागलपुर स्थित मायागंज अस्पताल गया। लेकिन मुझे अंत में जिला यक्ष्मा केंद्र आना पड़ा, जहां डीपीएस गणेश झा जी से मुलाकात के बाद मेरा इलाज शुरू हुआ औऱ अब मैं स्वस्थ हूं। इलाज के दौरान जांच और दवा के मुझसे कोई पैसे नहीं लिए गए। साथ में जब तक इलाज चला, मुझे प्रतिमाह पौष्टिक भोजन के लिए राशि भी मिली। अब जाकर मैं महसूस करता हूं कि जिस समय मुझे पता चला था, अगर उसी समय चला जाता तो मैं थोड़ा जल्द ठीक हो जाता।
टीबी की दवा बीच में नहीं छोड़ें- जिला ड्रग इंचार्ज राजदेव राय कहते हैं कि टीबी के लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलता रहता है, जिसमें यह तो बताया ही जाता है कि टीबी का इलाज बिल्कुल मुफ्त में होता है। साथ में यह भी बताया जाता है कि नियमित तौर पर दवा का सेवन करें। नहीं तो एमडीआर टीबी की चपेट में आ जाएंगे। इसलिए लोगों से यही अपील है कि टीबी के इलाज के दौरान बीच में दवा नहीं छोड़ें और शुरुआत में ही सरकारी अस्पताल आ जाएं।

कोरोना के मुकाबले नियमित टीकाकरण ज्यादा चुनौतीपूर्ण 

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-नियमित टीकाकरण के लिए गुजरना पड़ता है एक लंबी प्रक्रिया से
-कोरोना का टीका अभियान चलाकर टारगेट किया जा सकता है पूरा
भागलपुर-
पिछले दो साल से कोरोना का शोर चल रहा है। इससे बचाव को लेकर लोग तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं। अच्छी बात यह है कि कोरोना से बचाव को लेकर टीका भी आ गया है। जो लाभार्थी (उम्र 18+) कोरोना टीके की तीनों डोज और (उम्र 12-17) के लाभार्थी दोनों डोज ले चुके हैं, वे काफी हद तक सुरक्षित भी हैं। अगर उन्हें कोरोना हो भी गया तो वे आसानी से इससे उबर जाएंगे। साथ ही अस्पताल में भर्ती होने की नौबत भी कम ही आएगी। इसके साथ-साथ नियमित टीकाकरण और ज्यादा महत्वपूर्ण है। नियमित टीकाकरण हो जाने से बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो जाती  और तमाम बीमारियों से उसका बचाव होता है। तुलनात्मक तौर पर देखें तो नियमित और कोरोना टीकाकरण में बहुत अंतर है। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार चौधरी कहते हैं कि कोरोना टीकाकरण एकबारगी में अभियान चला कर किया जा सकता है, लेकिन नियमित टीकाकरण के लिए एक प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है। इस नियमित प्रक्रिया का पालन  करने के लिए बच्चे के परिजन से लेकर स्वास्थ्यकर्मियों तक को सजग रहना होता है। तब जाकर यह प्रक्रिया पूरी होती है।
यह प्रकिया महिला के गर्भधारण के साथ ही हो जाती है शुरूः बच्चे के बेहतर स्वस्थ्य को लेकर जैसे ही माता के गर्भधारण का पता चलता है, इसके तुरंत बाद माता का टीकाकरण शुरू हो जाता है। डॉ. मनोज चौधरी कहते हैं कि जैसे ही पता चलता है कि महिला गर्भवती है तो उसे टीडी टीका की पहली खुराक दी जाती है। इसके एक महीने के बाद टीडी टीका की दूसरी खुराक का टीका दी जानी चाहिए। अगर महिला टीडी प्रथम और द्वितीय खुराक लेने के तीन साल के अंदर गर्भवती हुई हो तो उसे टीडी की एक बूस्टर डोज दी जाती है।
बच्चे का टीकाकरण जन्म लेने के साथ ही हो जाता है शुरूः डॉ. चौधरी कहते हैं कि जैसे ही बच्चा जन्म लेता है उसे तत्काल जीरो/बर्थ डोज के अंतर्गत, सबसे पहले हेपेटाइटिस बी का टीका दिया जाता है। यदि माता को   हेपेटाइटिस बी है तो बच्चे में हेपेटाइटिस बी न हो, इसलिए जन्म के तुरंत बाद हेपेटाइटिस बी का टीका दिया जाना चाहिए। साथ ही बीसीजी और पोलियो की बर्थ डोज की खुराक दी जानी चाहिए। शुरू में बच्चे की सुरक्षा कवच मां के दूध से प्राप्त होता है, लेकिन डेढ़ माह के बाद सुरक्षा कवच धीरे-धीरे कम होने लगती है। इसलिए टीकाकरण डेढ़, ढाई और साढ़े तीन माह में किया जाता है। बच्चा जब डेढ़ माह का हो जाता है तो उसे रोटा- 1, पोलियो-1, एफआईपीवी-1, पीसीवी-1 और पेंटावेलेंट-1 दिया जाता है। बच्चा जब ढाई माह का हो जाता है तो उसे पोलियो-2, रोटा-2 और पेंटावेलेंट-2 की खुराक दी जाती है। डॉ. चौधरी कहते हैं कि बच्चा जब साढ़े तीन माह का हो जाता है तो उसे पोलियो-3, रोटा-3, एफआईपीवी-3, पीसीवी-2 और पेंटावेलेट-3 की खुराक दी जाती है। इसके बाद जब बच्चा नौ महीने का हो जाता है तो पीसीवी की बूस्टर डोज, खसरा एवं रूबेला और जेई का प्रथम टीका दिया जाता है। बच्चे के टीकाकरण की ये पूरी प्रक्रिया एक साल के अंदर पूरी हो जाती है तो इसको पूर्ण टीकाकरण कहते हैं। इसके अंतर्गत आशा कार्यकर्ता को मानदेय भी प्राप्त होता है। इसके अलावा बच्चे को विटामिन ए नौ महीने से लेकर पांच वर्ष तक दिया जाता है।

गर्भवती महिला में डेंगू के संक्रमण से होती है गर्भपात की संभावना 

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• भ्रूण को करता है प्रभावित, समय से पूर्व बच्चे का हो सकता है जन्म
• रोगी के खून में हो जाती है प्लेट्लेट्स की कमी, जा सकती है जान
• मच्छर जनित रोगों में मलेरिया भी घातक, आता है तेज बुखार
लखीसराय –
बरसात के मौसम में मच्छर जनित रोग होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है।  .  इस मौसम में डेंगू, मलेरिया, कालाजार, चिकनगुनिया व जापानी बुखार जैसी मच्छर जनित रोग होता है।  .  इसके  बारे में  जनजागरूकता होना अति आवयश्क है। . इन बीमारियों की रोकथाम के लिए जिले के सभी अस्पतालों में आवश्यक  सुविधा  उपलब्ध है । .अगर किसी को इस तरह की बीमारी हो जाती है तो अपने नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में जा कर अपना इलाज  करवाएँ ।  .
आसपास की सफाई रख मच्छरों को पनपने से रोकें:
सिविल सर्जन डॉ देवेन्द्र कुमार चौधरी  ने बताया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से रोग के लक्षणों की जानकारी लोगों को होना बहुत ही जरूरी  है। . उन्होंने कहा कि  मच्छर जनित रोगों को लेकर बहुत अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है.।  अपने घर व आसपास की सफाई रखें। . तेज बुखार की स्थिति को  नजरअंदाज नहीं करें। . मच्छर जनित रोग जैसे मलेरिया व डेंगू आदि में ठंड के साथ तेज बुखार आने के साथ मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द भी रहता है। . डेंगू के कारण खून में मौजूद प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से कम होने लगती है। . शरीर पर चकते या दाने उभर आते हैं। . उन्होंने बताया मच्छरों से बचने के लिए रात में सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल अवश्य करें। . अपने आसपास पनपने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए प्राथमिक स्तर पर घरेलू उपाय भी अपनायें। . गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं की विशेष सुरक्षा व ध्यान रखने की जरूरत पर बल दिया है। .
गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक है डेंगू व मलेरिया:
सेंटर फॉर डिजिज़ कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के मुताबिक गर्भवती महिलाओं में डेंगू व मलेरिया होना जच्चा बच्चा दोनों के लिए खतरनाक है। . मलेरिया परजीवी या डेंगू वायरस गर्भवती महिला के भ्रूण तक पहुंच कर उसे गंभीर रूप से प्रभावित करता है.।  इसके कारण गर्भपात, समय से पूर्व शिशु का जन्म, जन्म के समय कम वजन, जन्मजात संक्रमण या प्रसव के दौरान जच्चा बच्चा की मौत भी हो सकती है। . गर्भवती महिलाओं की  कमजोर इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता होने के कारण मच्छर जनित रोगों के होने वाले प्रभाव सामान्य महिलाओं की तुलना में तीन गुना अधिक होता है। . सीडीसी ने गर्भवती महिलाओं को सलाह दी है कि वे मच्छरों के प्रकोप वाली जगहों पर जाने से बचें। . अपने रहने वाली जगहों को साफ सुथरा रखें। . रोग के लक्षण मिलने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। . गर्भवस्था के दौरान गर्भवती महिलाएं पूरी बाजू और पैरों को ढकने  वाले कपड़े पहनें व शरीर पर  क्रीम का इस्तेमाल करें.।
इन जरूरी बातों का भी रखें ध्यान:
• कई बार लोग मच्छरदानी न लगाकर गर्भवती महिलाओं या नवजात शिशु के रहने वाले कमरे में धुआँ , मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती आदि का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन इससे सांस में काफी मात्रा में कार्बन जाता है। धुआँ  करना  सांस के लिए खतरनाक है। .
• मच्छर अंधेरी व नमी वाली जगहों पर अधिक होते हैं। . मच्छरों के प्रजनन रोकने के लिए कीटनाशक का इस्तेमाल किया जा सकता है.।  कमरों में कीटनाशक का छिड़काव कर कमरे को बंद कर बाहर निकल जाएँ ।  घर में कूलर आदि का पानी बदल दें। . कमरे को अधिक से अधिक सूखा रखें.।

सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा • ओआरएस पैकेट  वितरण के साथ-साथ परिवार नियोजन की भी दी जा रही है जानकारी

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– जिले के सभी प्रखंडों में चल रहा है सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा, बचाव की भी दी जा रही है जानकारी
– स्वास्थ्य संस्थानों के साथ-साथ घर-घर जाकर भी पैकेट का किया जा रहा है वितरण
खगड़िया-
डायरिया से बचाव को लेकर जिला में  15 से 30 जुलाई तक  सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा चल रहा है ।  पखवाड़े की सफलता को लेकर जहाँ घर-घर जाकर स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा ओआरएस पैकेट का वितरण किया जा रहा वहीं, जिले में सभी स्वास्थ्य संस्थानों  में स्टाॅल लगाए गए हैं। जहाँ ओआरएस पैकेट के  वितरण के साथ-साथ स्टाॅल पर आने वाले लोगों को परिवार नियोजन का भी संदेश दिया जा रहा है। साथ ही योग्य, इच्छुक और सक्षम लाभार्थियों को परिवार नियोजन के साधन को अपनाने के लिए भी जागरूक व  प्रेरित किया जा रहा है। ताकि अधिकाधिक लोग लाभान्वित हों और दोनों पखवाड़ा का सफल संचालन सुनिश्चित हो सके।
– स्टाॅल पर  है परिवार नियोजन के अस्थाई साधन की व्यवस्था :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा सह परिवार नियोजन पखवाड़ा की सफलता को सभी स्वास्थ्य संस्थानों में लगाए गए स्टाॅल पर परिवार नियोजन के अस्थाई साधन की व्यवस्था उपलब्ध है। इसलिए, जो लाभार्थी अस्थाई साधन अपनाना चाहते हैं, वह छाया, अंतरा, काॅपर-टी, कंडोम की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा सभी स्टाॅल पर ओआरएस पैकेट की  पर्याप्त व्यवस्था की गई है। , स्टाॅल पर आने वाले लाभार्थियों के बीच उसका वितरण किया जा रहा है।
– डायरिया से संक्रमित बच्चे के बीच ओआरएस पैकेट के साथ-साथ जिंक टैबलेट का भी किया जा रहा है वितरण :
पखवाड़े के दौरान डायरिया से संक्रमित बच्चे मिलने पर, वैसे बच्चे के बीच ओआरएस पैकेट के साथ-साथ जिंक टैबलेट/सीरप का भी वितरण किया जा रहा है। साथ ही सामुदायिक स्तर पर लोगों को डायरिया से बचाव के लिए जागरूक भी किया जा रहा  और डायरिया के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की भी विस्तृत जानकारी दी जा रही है। लोगों को बताया जा रहा है कि डायरिया होने पर क्या करें। , इससे बचाव का क्या उपाय है,।  साफ-सफाई  रखने समेत अन्य आवश्यक जानकारी दी जा रही है। ताकि शुरु आती दौर में ही संबंधित व्यक्ति बीमारी की पहचान कर सके और समय पर इलाज शुरू हो सके।
– डायरिया होने पर 14 दिनों तक जिंक का करें सेवन :
डायरिया होने पर लगातार 14 दिनों तक जिंक का सेवन करें। 02 माह से 06 माह तक के बच्चों को जिंक की  1/2 गोली 10 मिग्रा पानी में घोलकर या माँ के दूध के साथ घोलकर चम्मच से पिलाएं। 06 माह से 05 साल के बच्चों को एक गोली साफ पानी या माँ के दूध में घोलकर पिलाएं। जबकि, दो माह से कम आयु के बच्चों को 05 चम्मच ओआरएस प्रत्येक दस्त के बाद पिलाएं। 02 माह से 02 वर्ष तक बच्चे को 1/4 ग्लास से 1/2 ग्लास प्रत्येक दस्त के बाद पिलाएं। 02 से 05 वर्ष तक के बच्चों को 1/2 से ग्लास प्रत्येक दस्त के बाद पिलाएं।
– जानें क्या है डायरिया और इसके लक्षण :
टट्टी की  अवस्था में बदलाव या सामान्य से ज्यादा बार, ज्यादा पतला या पानी जैसी होने वाली टट्टी ही डायरिया (दस्त) का पहला का लक्षण है। इसके अलावा बच्चा बेचैन व चिड़चिड़ा है, अथवा सुस्त या बेहोश है। बच्चे की ऑखें डाउन हो रही है। बच्चे को बहुत ज्यादा प्यास लगना अथवा पानी ना पी पाना आदि डायरिया का ही कारण और लक्षण है।
– जिंक सेवन के ये हैं विशेष लाभ :
जिंक सेवन से दस्त और तीव्रता दोनों कम होती  है। तीन महीने तक दस्त का खतरा नहीं के बराबर रहता है। रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। जबकि, ओआरएस से शरीर में पानी की कमी नहीं होती है एवं दस्त के खतरे से बचाव करता है।

मुंगेर जिला भर में 11 से 31 जुलाई तक चलेगा परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा

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– 15 से 30 जुलाई तक जिला भर में चल रहा है सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा
– राज्यस्तरीय टीम का 15 से 25 जुलाई के दौरान मूल्यांकन करने का है लक्ष्य
मुंगेर-
मुंगेर सहित राज्य के सभी जिलों में मातृ मृत्यु दर एवं प्रजनन दर को कम करने के लिए 11 से 31 जुलाई तक परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा चलाया जा रहा है। वहीं, शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से 15  से 30 जुलाई तक सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा चल  रहा है।
सघन मूल्यांकन के लिए स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जिलावार राज्यस्तरीय टीम गठित
जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक नसीम रजि ने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक र्निदेशक संजय कुमार सिंह के निर्देशानुसार दोनों पखवाड़ों के सघन मूल्यांकन के लिए स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जिलावार राज्य स्तरीय टीम गठित की गई है। कार्यक्रम के  मूल्यांकन के जरिए पखवाड़े की प्रभावशीलता एवं इसके प्रति आम जागरूकता का पता लगाया जाएगा। इसके अलावा जिला के विभिन्न्न स्वास्थ्य संस्थानों के द्वारा पखवाड़े को लेकर की गई तैयारी एवं क्रियान्वयन की उचित जानकारी भी प्राप्त होगी।
हर स्तर पर किया जायेगा मूल्यांकन :
उन्होंने बताया कि दोनों अभियान की 15  से 25 जुलाई तक गठित टीम द्वारा अनुश्रवण एवं मूल्यांकन करने का लक्ष्य है। इंटेंसिफाइड डायरिया कंट्रोल प्रोग्राम (आईडीसीपी) के तहत संचालित सघन दस्त नियंत्रण पखवाडा का जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल, रेफरल अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं एक गांव का मूल्यांकन विभाग द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा।  वहीं 11 से 31 जुलाई तक चल रहे परिवार नियोजन सेवा पखवाडा का सदर अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल, रेफरल अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं गांव स्तर पर किया जाएगा।
घर- घर जाकर किया जायेगा
लाभार्थियों से संपर्क : जिला स्वास्थ्य समिति के जिला सामुदायिक उत्प्रेरक (डीसीएम) निखिल राज ने बताया कि सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा के दौरान आशा कार्यकर्ता अपने पोषक क्षेत्रों में शून्य से लेकर 5 साल तक के बच्चों के बीच ओआरएस पावडर का पाउच, जिंक टैबलेट्स और सिरप का वितरण कर रही हैं  ।  इसके साथ ही परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम घर- घर जाकर नवविवाहित दम्पतियों  सहित अन्य लोगों को परिवार नियोजन के स्थाई और अस्थाई दोनों साधनों को अपनाने के लिए जागरूक कर रही हैं , ताकि अधिक से अधिक दंपत्ति इन साधनों का लाभ उठा सकें ।
उन्होंने बताया कि दोनों पखवाड़ा का एक साथ आयोजन शिशु एवं मातृ मृत्यु दर को कम से कमतर करने में काफ़ी असरदार साबित हो सकते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए ही दोनों पखवाड़े के मूल्यांकन एवं अनुश्रवण पर जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा आम समुदाय के बेहतर स्वास्थ्य के लिए राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के द्वारा कई कार्यक्रम राज्य भर में चलाए जा रहे हैं। विभाग सभी कार्यक्रमों का लाभ समुदाय के सबसे आखिरी व्यक्ति तक पहुँचाने के प्रयास में पूरी तरह से जुटा हुआ है। इस उद्देश्य की प्राप्ति में स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं अभियान का सघन अनुश्रवण एवं मूल्यांकन काफी मददगार साबित होगा ।