टीबी मरीजों की समस्याओं का किया गया समाधान

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-जिला यक्ष्मा केंद्र टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की हुई बैठक
-पौष्टक भोजन और साफ-सफाई रखने का भी दिया निर्देश
भागलपुर-
जिला यक्ष्मा केंद्र के सभाकक्ष में शुक्रवार को टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में 10 मरीज, 11देखभाल करने वाले, एक टीबी चैंपियन के साथ-साथ टीबी विभाग के अधिकारी और कर्मियों के अलावा कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) के सदस्य मौजूद रहे। इस दौरान मरीजों को होने वाली परेशानियों को सुना गया और उनके निवारण को लेकर सलाह दी गई। जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. दीनानाथ और केएचपीटी के सुमित कुमार ने मरीजों को सलाह के साथ-साथ पौष्टिक भोजन, साफ-सफाई और दवाई का पूरा कोर्स करने की सलाह दी। इसके बाद अभिषेक कुमार (डीपीसी ) ने समाज में यक्ष्मा को जो कलंक के रूप में माना जाता है, उसको मिटाने के विषय के बारे में बताया। मरीजों से पूछा गया कि किनका कोर्स पूरा हो गया है। इसके बाद उस मरीज से आपबीती पूछी गयी।
बैठक के दौरान डॉ. दीनानाथ ने बताया कि किसी व्यक्ति को लगातार दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक खांसी, बलगम के साथ खून का आना, शाम को बुखार आना या वजन कम होना की शिकायत हो तो उसे तुरंत नजदीक के सरकारी अस्पताल में ले जाकर जांच कराने की सलाह दें। ये टीबी के लक्षण हो सकते हैं। साथ ही उन्हें यह भी बताएं कि सरकारी अस्पताल में टीबी की जांच और इलाज पूरी तरह मुफ्त है। लोगों को जागरूक कर ही टीबी बीमारी को समाज से मुक्त कर सकते हैं। वहीं, उन्होंने बताया कि टीबी के अधिकतर मामले घनी आबादी वाले इलाके में पाए जाते हैं। वहां पर गरीबी रहती है। लोगों को सही आहार नहीं मिल पाता और वह टीबी की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए हमलोग घनी आबादी वाले इलाके में लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं। लोगों को बचाव की जानकारी दे रहे हैं और साथ में सही पोषण लेने के लिए भी जागरूक कर रहे हैं।
बीच में दवा नहीं छोड़ें — केएचपीटी की जिला टीम लीडर आरती झा ने बताया कि टीबी की दवा आमतौर पर छह महीने तक चलती है। कुछ पहले भी ठीक हो जाते और कुछ लोगों को थोड़ा अधिक समय भी लगता है। इसलिए जब तक टीबी की बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं हो जाए, तब तक दवा का सेवन छोड़ना नहीं चाहिए। बीच में दवा छोड़ने से एमडीआर टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर कोई एमडीआर टीबी की चपेट में आ जाता है तो उसे ठीक होने में डेढ़ से दो साल लग जाते हैं। इसलिए टीबी की दवा बीच में नहीं छोड़ें। जब तक आप पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते हैं तब तक दवा खाते रहें।
भोजन के लिए मरीजों के मिलते हैं पैसेः बैठक के दौरान बताया कि टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार गंभीर है। इसीलिए टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की सुविधा मुफ्त है। साथ ही पौष्टिक भोजन करने के लिए टीबी मरीज को पांच सौ रुपये महीने छह महीने तक मिलता भी है। इसलिए अगर कोई आर्थिक तौर पर कमजोर भी है और उसमें टीबी के लक्षण दिखे तो उसे घबराना नहीं चाहिए। नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करानी चाहिए। दो सप्ताह तक लगातार खांसी होना या खांसी में खून निकलने जैसे लक्षण दिखे तो तत्काल सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।

जॉन्डिस  के असर को कम करता है नियमित स्तनपान व अनुपूरक आहार

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• दो हफ्ते से अधिक समय तक पीलिया रहना नवजात के लिए खतरनाक
• खून में बढ़ जाती है बिलीरूबिन  की मात्रा, लिवर  को करता है प्रभावित
लखीसराय, 21 जुलाई-
  जॉन्डिस  के असर को कम करता है नियमित स्तनपान व अनुपूरक आहार। दो हफ्ते से अधिक समय तक पीलिया रहना नवजात के लिए खतरनाक।  सेंटर फॉर डिजिज एंड कंट्रोल के मुताबिक 60 फीसदी समय से जन्म लेने वाले नवजात और 80 फीसदी प्रीमैच्योर नवजात शिशुओं के जीवन के पहले एक सप्ताह के दौरान उन्हें जॉन्डिस  या पीलिया होता है। . नवजात में पीलिया उनके खून में बिलीरूबिन के  स्तर बढ़ने के कारण होता है। . वयस्कों की तुलना में नवजात शिशुओं में बिलीरूबिन उत्पादन की दर अधिक होती है। . चूंकि नवजात शिशुओं का लिवर  अपरिपक्व होता है इसलिए बिलीरूबिन का मेटाबॉलिज्म धीमा होता है। . अधिकांश नवजात शिशुओं में पीलिया को फिजियोलॉजिक पीलिया कहा जाता है जो हानिकारक नहीं होता।  लेकिन कभी-कभी बिलीरूबिन की मात्रा अधिक होने पर नवजात के लिए यह गंभीर हो जाता है.।  पीलिया के किसी भी लक्षण दिखने पर डॉक्टरी परामर्श जरूरी है। .
नियमित स्तनपान व अनुपूरक आहार है जरूरी:
सिविल सर्जन डॉ देवेन्द्र कुमार चौधरी  ने बताया पीलिया या जॉन्डिस  लिवर में संक्रमण के कारण होता है.।  शिशु और मां के ब्लड ग्रुप के अलग-अलग होने की वजह भी जॉन्डिस  होने के कारणों में से एक है.।  प्री मैच्योर नवजात यानी 37 सप्ताह से पूर्व जन्म लेने वाले बच्चों में जॉन्डिस  का इलाज फोटोथेरेपी व आवश्यक दवाइयों की मदद से किया जाता है ।  उन्होंने बताया नवजात को नियमित स्तनपान कराने से उसके खून से बिलीरूबिन खत्म करने में मदद मिलती है।  जॉन्डिस के कारण बच्चों को नींद अधिक आती है। . इसलिए उन्हें नियमित समय अंतराल  पर उठा कर स्तनपान कराया जाना चाहिए। . सुबह सूरज की रौशनी में रोजाना नवजात को कम से कम एक घंटे तक धूप में रखना फायदेमंद होता है। . यदि बच्चा छह माह से ऊपर  है और पीलिया ग्रस्त है तो नियमित स्तनपान के साथ ठोस पौष्टिक आहार और उबाला हुआ पानी दिया जाना चाहिए.।  पूरक आहार में आसानी से पचने वाले खाने जैसे दलिया या खिचड़ी शामिल करें.।  बच्चों को साफ सुथरा रखना जरूरी है। . डायपर को समय समय पर बदलें और डायपर बदलने से पहले अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोयें.।
नवजात शिशुओं में पीलिया के लक्षण:
• शरीर की त्वचा का पीला पड़ना
• आंखों के सफेद भाग में पीलापन
• सही से स्तनपान नहीं कर पाना
• मांसपेशियों की कसवाट में बदलाव
• नवजात का बहुत अधिक रोना
• पेशाब गहरा व पीला रंग का होना
• अच्छी तरह से नींद नहीं आना
• बुखार रहना व उल्टी होना
स्तनपान कराने वाली महिलाएं रखें ध्यान:
स्तनपान करोन वाली माताओं को पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए। . अपने भोजन में टमाटर आदि शामिल करें। . टमाटर में मौजूद लाइकोपीन नामक तत्व खून के लिए अच्छा माना जाता है.।  बिलीरूबिन का स्तर सही करने के लिए शिशु को आवश्यक तत्व स्तनपान के माध्यम से मिल जाता है। . इसके अलावा स्तनपान कराने वाली महिलाएं हर्बल सप्लीमेन्ट  आहार लें.।  मां के शरीर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट स्तनपान के जरिये शिशु तक पहुंचता  और नवजात के शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है.।  यदि मां में भी जॉन्डिस  के लक्षण हैं तो स्तनपान से पूर्व डॉक्टरी सलाह लें।

कोविड के खतरे से बचाव के लिए वैक्सीन की पूरी डोज बेहद जरूरी, समयावधि पूरी होने पर जरूर कराएं टीकाकरण 

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– जिले में लगातार चल रहा है विशेष वैक्सीनेशन अभियान, योग्य लाभार्थियों को लगाए जा रहे हैं सुरक्षा के टीके
– जिले में 201 सेशन साइटों पर विशेष वैक्सीनेशन शिविर का आयोजन, लाभार्थियों की अच्छी दिखी उपस्थिति
खगड़िया, 21 जुलाई-
कोविड संक्रमण की लगातार मिल रही शिकायत को देखते हुए सुरक्षा के मद्देनजर एकबार जिले फिर से कोविड वैक्सीनेशन की रफ्तार तेज कर दी गई है। जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लाभार्थियों को टीकाकृत करने को लेकर जिले भर में सरकार के निर्देशानुसार लगातार टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में गुरूवार को पुनः जिले के सभी प्रखंडों में मेगा कोविड टीकाकरण अभियान चलाया गया। जिसके तहत जिले के सभी प्रखंडों में चयनित और चिह्नित  जगहों पर विशेष शिविर का आयोजन कर योग्य लाभार्थियों को सुविधाजनक तरीके से सुरक्षा का टीका लगाया गया। ताकि जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लाभार्थियों का टीकाकरण सुनिश्चित हो सके और सामुदायिक स्तर पर लोग इस घातक महामारी से सुरक्षित हो सकें । वहीं, महाअभियान के  सफल संचालन के लिए सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान, डीपीएम (हेल्थ) पवन कुमार, परबत्ता सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ राजीव रंजन, केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद, पिरामल फाउंडेशन के डीपीएल प्रफूल्ल झा समेत अन्य पदाधिकारी और यूनिसेफ, डब्ल्यूएचओ सहित अन्य सहयोगी स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि शिविर स्थलों का भ्रमण कर टीकाकरण टीम को आवश्यक और जरूरी निर्देश देते दिखे।
– हर घर दस्तक वैक्सीनेशन अभियान के तहत भी किया जा रहा है टीकाकरण :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, जिले भर में सरकार के निर्देशानुसार लगातार कोविड मेगा ड्राइव तो चलाया ही जा रहा है। इसके अलावा हर घर दस्तक वैक्सीनेशन अभियान के तहत टीकाकरण टीम घर-घर दस्तक दे रही है और एक-एक लाभार्थियों को चिह्नित  कर टीकाकृत कर रही है। साथ ही कोविड संक्रमण से बचाव के लिए जागरूक भी कर रही है।
– संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीन की पूरी डोज जरूरी :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, कोविड संक्रमण के  खतरे और प्रभाव से बचाव के लिए वैक्सीन की पूरी डोज जरूरी है। इसलिए, मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि जो लोग पहला या दूसरा डोज लेने के बाद अगला डोज लेने की समयावधि पूरी  कर चुके हैं, वह निश्चित रूप से निर्धारित समय पर अगले डोज का टीका लगाएं और इस घातक महामारी से खुद को सुरक्षित करें। वहीं, जो व्यक्ति अबतक किसी भी कारण वश वैक्सीन नहीं ले पाएं, वह भी जल्द से जल्द टीका लगवाकर खुद को सुरक्षित करें। वहीं, उन्होंने बताया, एक भी व्यक्ति को टीकाकरण कराने में किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो, इसके लिए जिले में लगातार वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है।  उन्होंने बताया, जिले में कुल 201 सेशन साइटों पर विशेष वैक्सीनेशन शिविर का आयोजन कर लाभार्थियों को टीकाकृत किया गया।

परिवार नियोजन के साधनों को अपनाकर रखें छोटा परिवार 

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-जिले में चल रहा जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा
-परिवार नियोजन को लेकर किया जा रहा जागरूक
भागलपुर, 21 जुलाई-
जिले में अभी परिवार नियोजन पखवाड़ा चल रहा है। जनसंख्या दिवस 11  जुलाई के दिन शुरू हुआ यह पखवाड़ा 31 जुलाई तक चलेगा। इसके तहत लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक किया जा रहा है। साथ ही परिवार नियोजन साधन को अपनाने के लिए अस्थायी सामग्री की जानकारी लोगों को दी जा रही  और इसका वितरण भी किया जा रहा है। लोगों को इस अभियान में भाग लेने के जरूरत है और परिवार नियोजन के साधनों का इस्तेमाल कर छोटा परिवार और खुशहाल जीवन जीने की ओर  बढ़ने की जरूरत है।
सिविल सर्जन डॉ. उमेश शर्मा ने कहा कि जिले में जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा के तहत लोगों को परिवार नियोजन की जानकारी दी जा रही है। जिले के लोग भी इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं। आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को जानकारी दे रही हैं तो एएनएम के जरिये लोगों की काउंसिलिंग की जा रही है। इसके साथ ही लोगों को बंध्याकरण, अस्थायी सामग्री के इस्तेमाल के प्रति जो भ्रम है उसे भी दूर किया जा रहा है।
अस्थायी सामग्री के इस्तेमाल से नहीं होता नुकसानः बहुत सारे लोगों के मन में परिवार नियोजन के अस्थायी सामग्री के इस्तेमाल को लेकर भ्रम रहता है। लेकिन लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। सिविल सर्जन कहते हैं  कि अस्थायी सामग्री के तौर पर लोग कंडोम, कॉपर-टी, अंतरा का इस्तेमाल करने से डरें नहीं, इससे कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। इन साधनों का इस्तेमाल कर आप सही तरीके से परिवार नियोजन कर सकते हैं। अगर आपके मन में किसी तरह भ्रम है तो नजदीकी  सरकारी अस्पताल में जाएं, वहां आपके भ्रम को दूर कर दिया जाएगा।
पहला बच्चा 20 साल के बाद हीः सिविल सर्जन ने कहा कि अभियान के दौरान स्वास्थ्यकर्मी लोगों को बता रहे हैं कि पहला बच्चा महिलाओं को 20 साल के बाद ही जनना चाहिए। साथ ही दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल जरूर रखना चाहिए। दो बच्चों के बीच तीन साल का अंतराल रखने से उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे वह बीमारियों की चपेट में आने से बचा रहता है। अगर आ भी जाता है तो वह उससे जल्दी उबर जाता है। इसके अलावा दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल रखने से जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ रहता है।
दो बच्चे के बाद कराएं बंध्याकरणः सिविल सर्जन ने कहा कि अभियान के दौरान लोगों के बीच दो बच्चे के बाद बंध्याकरण की सलाह दी जा रही है। अभियान के दौरान जिनके दो से ज्यादा बच्चे हैं उन्हें तो तत्काल बंध्याकरण की सलाह दी जाती है, लेकिन जिनके दो बच्चे हो गए हैं उन्हें भी जल्द ही बंध्याकरण कराने को कहा जाता है। इसके लिए छोटा परिवार होने के फायदे के बारे में बताया जाता है। लोगों को समझाया जाता है कि छोटा परिवार होने से न सिर्फ स्वास्थ्य, बल्कि आर्थिक तौर पर भी आजादी मिलती है।

टीबी होने पर शुरुआत में ही चले जाएं सरकारी अस्पताल

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-जांच से लेकर इलाज और दवा तक की है मुफ्त व्यवस्था
-शुरुआत में इलाज होने पर जल्द टीबी से ठीक भी हो जाएंगे
बांका-
बाराहाट प्रखंड की मखनपुर पंचायत के नारायणपुर गांव के रहने वाले विकास यादव 2019 की शुरुआत में बीमार रहने लगे। वह खांसी से परेशान थे। पहले वह निजी अस्पताल गए, लेकिन वहां के इलाज से वह स्वस्थ नहीं हो पाए। इसके बाद भागलपुर स्थित मायागंज अस्पताल में इलाज कराने के लिए चले गए। वहां पर उन्हें 26 दिनों तक भर्ती रहना पड़ा। आखिरकार वहां उन्हें सलाह मिली कि आप अपने जिला स्थित यक्ष्मा केंद्र जाइए और वहां पर डीपीएस गणेश झा से मिलिए। इसके बाद विकास यादव, गणेश झा से मिले। फिर विकास यादव की जांच हुई और नए सिरे से इलाज शुरू हुआ। 24 महीने तक दवा का नियमित सेवन किया तो विकास यादव ने टीबी को मात दी। कहने का मतलब यह है कि अगर आपको टीबी के लक्षण दिखाई पड़े तो आप बजाय इधर-उधर भटकने के  अपने नजदीकी  सरकारी अस्पताल जाएं। वहां पर जांच, इलाज और दवा तक की मुफ्त व्यवस्था है। साथ ही अपने अंदर से इस बात को बाहर निकाल फेंकिए कि सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज नहीं होता है। कई मामलों में देखा गया है कि निजी अस्पताल वाले भी सरकारी अस्पताल ही इलाज के लिए मरीजों को भेजते हैं। यहां पर आपको पैसे की भी बचत होती है और भरोसे वाला इलाज मिलता है।
निजी अस्पताल जाकर गलती कीः विकास यादव कहते हैं कि शुरुआत में मेरे से गलती जरूर हुई। मैं इलाज के लिए निजी अस्पताल चला गया। वहां पर सिर्फ पैसे की बर्बादी हुई। मेरे स्वास्थ्य में कोई खास सुधार नहीं हुआ। इसके बाद में क्षेत्र के सबसे बड़े अस्पताल मायागंज चला गया। वहां पर मेरा इलाज शुरू हुआ, लेकिन वहां से भी मुझे जिला यक्ष्मा केंद्र जाने के लिए कहा गया। जिला यक्ष्मा केंद्र आया तो यहां पर मेरी मुलाकात डीपीएस गणेश झा जी से हुई। उन्होंने मेरा सही मार्गदर्शन किया और इसके बाद इलाज शुरू हो सका। अब जाकर मैं स्वस्थ हूं। अगर कोई परेशानी होती है तो मैं गणेश झा जी संपर्क करता हूं। वह मेरा सही मार्गदर्शन करते हैं। अब तो मैं अन्य लोगों को भी इलाज के लिए सरकारी अस्पताल जाने की ही सलाह देता हूं। साथ ही टीबी को लेकर लोगों को जागरूक करने का भी काम करता हूं।
सरकारी अस्पतालों में होता है टीबी का बेहतर इलाजः जिला ड्रग इंचार्ज राजदेव राय कहते हैं कि लोगों को यह भ्रम तोड़ना होगा कि निजी अस्पताल में बेहतर इलाज होता है। जिला यक्ष्मा केंद्र में कई ऐसे मरीज आए, जो पहले निजी अस्पताल में इलाज कराकर थक गए थे, लेकिन वह ठीक नहीं हो पाए थे। जब जिला यक्ष्मा केंद्र में उनलोगों का इलाज हुआ तो वे लोग स्वस्थ होकर गए। सबसे अच्छी बात यह है कि सरकारी अस्पतालों में जो लोग टीबी का इलाज कराते हैं, उनकी लगातार निगरानी भी की जाती है। जब तक दवा चलती है, उन्हें पोषण के लिए राशि भी मिलती है। इसलिए अगर किसी को टीबी के लक्षण दिखाई दे तो वह सीधा सरकारी अस्पताल का ही दरवाजा खटखटाएं।

फाइलेरिया उन्मूलन • जिले में 61 % लोगों ने खाई डीईसी और अल्बेंडाजोल की दवाई 

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– जिले में 07 जुलाई से चल रहा है फाइलेरिया उन्मूलन अभियान, घर-घर जाकर खिलाई जा रही है दवा
-फाइलेरिया से बचाव के लिए दवाई का सेवन जरूरी, सभी लोग बेहिचक खाएं दवा
लखीसराय-
जिले में 07 जुलाई से लगातार फाइलेरिया उन्मूलन अभियान चल रहा है। जिसके तहत अबतक निर्धारित लक्ष्य के खिलाफ कुल 61 % योग्य लाभार्थियों को अल्बेंडाजोल और डीईसी की दवा का सेवन कराया जा चुका है। जबकि, शत-प्रतिशत लाभार्थियों के  दवाई सेवन करने के अभियान को तेज कर दिया  गया  है। हर हाल में शत-प्रतिशत लाभार्थियों को दवाई का सेवन सुनिश्चित कराने को लेकर स्वास्थ्य टीम एक-एक घर पहुँच रही है । साथ हीं  एक-एक व्यक्ति को प्रेरित कर दवाई का सेवन कराने में जुटी है । ताकि एक भी योग्य लाभार्थी दवाई के  सेवन से वंचित नहीं रहें  और शत-प्रतिशत लाभार्थियों को दवाई का सेवन कराया जा सके। इसलिए, जो भी अबतक किसी भी कारण – वश दवाई का सेवन नहीं कर पाएं हैं, वह निश्चित तौर पर बेहिचक दवाई का सेवन करें। दोनों दवा फाइलेरिया से बचाव के लिए बेहद जरूरी और काफी कारगर है। दवाई के सेवन से किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं है।
– एमडीए अभियान का समापन आज , लक्ष्य पूरा नहीं होने पर चलेगा दिन दिवसीय माॅप-अप राउंड :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने बताया, जिले में चल रहे एमडीए अभियान का गुरूवार को समापन हो जाएगा । अगर गुरुवार तक निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं हो सका तो तीन दिवसीय माॅप-अप राउंड चलाया जाएगा। जिसमे छूटे  हुए  लोगों को दवा खिलानी है ,ताकि हर हाल में निर्धारित लक्ष्य पूरा हो एवं अभियान का सफल संचालन सुनिश्चित हो सके।
– फाइलेरिया से बचाव के लिए दवाई का सेवन बेहद जरूरी :
वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी गौतम प्रसाद ने बताया, फाइलेरिया से बचाव के लिए अल्बेंडाजोल और डीईसी की दवा का सेवन बेहद जरूरी है। इसलिए, मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि जो भी व्यक्ति अबतक किसी भी कारण वश दवाई का सेवन नहीं कर पाए  हैं तो वह निश्चित रूप से  दवाई का सेवन करें। वहीं, उन्होंने बताया,
एमडीए अभियान तहत गृह भेंट की तर्ज पर आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को खुद के सामनेअल्बेंडाजोल एवं डीईसी की दवाएं खिला रहीं हैं। ताकि एक भी व्यक्ति दवाई खाने से वंचित नहीं रहे और अभियान सफल हो सके। वहीं, उन्होंने बताया, 2 से 5 साल तक के बच्चों को 100 मिलीग्राम की डीईसी एवं 400 मिलीग्राम की अल्बेंडाजोल की एक-एक गोली, 6 से 14 साल तक के किशोरों को डीईसी की दो एवं अल्बेंडाजोल  की एक गोली एवं 15 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को डीईसी की तीन गोलियां एवं अल्बेंडाजोल  की एक गोली खिलायी जानी है।
– गर्भवती महिलाओं एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के अलावा दो वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों को नहीं खिलाई जा रही है दवा :
अभियान के दौरान घर-घर जाकर लोगों को अल्बेंडाजोल  और डीईसी की दवाएं पात्र व्यक्तियों को खिलाई जा रही हैं । उक्त दवा गर्भवती महिलाओं एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के अलावा दो वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों को छोड़कर शेष सभी लोगों को स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा खिलाई जा रही है। साथ ही इस बीमारी से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी देते हुए जागरूक किया  जा रहा  है। ताकि उक्त अभियान का सफलतापूर्वक समापन एवं बीमारी पर रोकथाम संभव हो सके। इस बीमारी से बचाव के लिए दवाई के साथ-साथ एहतियात भी जरूरी है। इसलिए, अभियान के दौरान योग्य व्यक्तियों को दवाई तो खिलाई ही जा रही है। इसके अलावा इस बीमारी से बचाव के लिए लोगों को आवश्यक जानकारी भी दी जा रही । जैसे कि, घर के आस-पास गंदगी जमा नहीं होने दें एवं घरों में सोने से पहले मच्छरदानी का उपयोग करें। साथ ही अन्य लोगों को दवा सेवन के प्रति जागरूक भी करें, ताकि फाइलेरिया जैसी बीमारी जड़ से समाप्त हो सके। इस बीमारी को पूरी तरह से मिटाने के लिए जागरूकता भी बेहद जरूरी है।
– साइड इफेक्ट से घबराएं नहीं :
दवा सेवन के बाद किसी तरह के सामान्य साइड इफेक्ट से घबराने की जरूरत नहीं है। अमूमन जिनके अंदर फाइलेरिया के परजीवी होते हैं, उनमें ही साइड इफेक्ट देखने को मिलते हैं। साइड इफेक्ट सामान्य होते हैं, जो प्राथमिक उपचार से ठीक हो जाते हैं।
– फाइलेरिया क्या है ?
– फाइलेरिया मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है।
– किसी भी उम्र के व्यक्ति फाइलेरिया से संक्रमित हो सकता है।
– फाइलेरिया के लक्षण हाथ और पैर में सूजन (हाँथीपाँव) व हाईड्रोसील (अण्डकोष में सूजन) है।
– किसी भी व्यक्ति को संक्रमण के पश्चात बीमारी होने में 05 से 15 वर्ष लग सकते…।

खगड़िया जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर सामाजिक अंकेक्षण का आयोजन 

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– आईसीडीएस डीपीओ के निर्देश पर सामाजिक अंकेक्षण का आयोजन
– आंगनबाड़ी स्तर पर सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की दी गई जानकारी
खगड़िया-
बुधवार को जिले के सभी आंगनबाड़ी  केंद्रों पर सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिटिंग) का आयोजन हुआ। पोषक क्षेत्र के लोगों को सरकार द्वारा आंगनबाड़ी से संबंधित चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी देने एवं केंद्र का संचालन सुदृढ़ बनाने को लेकर सामाजिक अंकेक्षण  का आयोजन किया गया है । जिसमें सभी केंद्रों पर पोषक क्षेत्र की  बड़ी संख्या में लाभार्थी शामिल हुए। जिसे आंगनबाड़ी  सेविका एवं आईसीडीएस के अफसरों द्वारा आंगनबाड़ी  स्तर पर चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं एवं बच्चों के लिए केंद्र पर उपलब्ध सुविधा की विस्तृत जानकारी दी गई। वहीं, इसके अलावा सभी आंगनबाड़ी  केंद्रों के मुख्य द्वार पर निदेशालय द्वारा दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित विज्ञापन की  प्रति भी लगायी  गयी । ताकि सामुदायिक स्तर पर लोगों को पारदर्शिता के साथ सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी मिल सके और सामाजिक अंकेक्षण का उद्देश्य सफल हो सके।
– सफलतापूर्वक सम्पन्न  हुआ सामाजिक अंकेक्षण :
आईसीडीएस के जिला समन्वयक (डीसी) अंबुज कुमार ने बताया, सामाजिक अंकेक्षण का  सफलतापूर्वक समापन हुआ।सभी केंद्रों पर लोगों की अच्छी उपस्थिति देखी गई एवं लोगों आंगनबाड़ी केंद्रों पर पढ़ने वाले बच्चों को मिलने वाले  लाभ समेत सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही योजना का लाभ लेने के लिए भी लोगों को जागरूक किया गया एवं अन्य आवश्यक जानकारी दी गई।
– वार्ड सदस्य की अध्यक्षता में आयोजित हुआ  सामाजिक अंकेक्षण, दी गई योजनाओं की जानकारी :
बुधवार को जिले के सभी आंगनबाड़ी  केंद्रों पर संबंधित आंगनबाड़ी केंद्र के वार्ड सदस्य की अध्यक्षता में सामाजिक अंकेक्षण हुआ । जबकि, पंचायत के विकास मित्र, पंचायत सचिव एवं संबंधित केंद्र के  दो चयनित लाभार्थी सदस्य के रूप में शामिल हुए। इसके अलावा पोषक क्षेत्र के सभी लाभार्थी भी शामिल हुए। जिसके बाद मौजूद सभी लोगों को संबंधित पदाधिकारियों द्वारा आंगनबाड़ी  स्तर पर चल रही सरकारी योजनाओं की विस्तार पूर्वक जानकारी दी जाएगी। वहीं, संबंधित क्षेत्र की महिला पर्यवेक्षिका केंद्रों का भ्रमण कर माँनिटरिंग करती  दिखी ।
– इन बिंदुओं पर हुई चर्चा :
सामाजिक अंकेक्षण के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों के  सफल क्रियान्वयन की मौजूद लोगों को विस्तार से जानकारी दी गई। जिसमें आंगन बाड़ी केंद्रों के संचालन की नियमितता, बच्चों की उपस्थिति, एक माह में कम से कम 25 दिनों तक सभी लाभार्थियों को पूरक आहार एवं आवश्यक दवाइयों की आपूर्ति की समीक्षा, बच्चों के टीकाकरण, पोषण की स्थिति, वजन, ग्रोथ चार्ट की उपलब्धता, कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों की संख्या व उनके पोषण स्तर में सुधार के लिए उठाये गये कदम आदि पर चर्चा की गई। इसके अलावा केंद्र संचालन से संबंधित सभी कार्यों पर विस्तार से चर्चा की जाती है।

सबौर पीएचसी में टीबी मरीजों के स्वास्थ्य अवलोकन को लेकर केयर एण्ड सपोर्ट ग्रुप की बैठक 

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– टीबी मरीज में भी बैठक में हुए शामिल, स्वास्थ्य अवलोकन के बाद दी गई आवश्यक चिकित्सा परामर्श
– टीबी अब लाइलाज नहीं, पर समय पर जाँच और इलाज जरूरी
भागलपुर-
बुधवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) सबौर में टीबी मरीजों के स्वास्थ्य अवलोकन को लेकर केयर एण्ड सपोर्ट ग्रुप मीटिंग का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ शुभ्रा वर्मा ने की। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों और 10 टीबी मरीजों ने भी भाग लिया। वहीं, बैठक के दौरान मौजूद सभी मरीजों का बारी-बारी से स्वास्थ्य अवलोकन किया गया और आवश्यक चिकित्सा परामर्श दिया गया। साथ
ही किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सकों से जाँच कराने को कहा गया। इस मौके पर आरती झा, कृष्णा समेत पीएचसी के अन्य चिकित्सक, पदाधिकारी और कर्मी मौजूद थे।
इस दौरान डाॅ शुभ्रा वर्मा ने बताया कि किसी व्यक्ति को लगातार दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक खांसी, बलगम के साथ खून का आना, शाम को बुखार आना या वजन कम होने की शिकायत हो तो उसे तुरंत नजदीक के सरकारी अस्पताल में ले जाकर जांच कराने की सलाह दें। ये टीबी के लक्षण हो सकते हैं। साथ ही उन्हें यह भी बताएं कि सरकारी अस्पताल में टीबी की जांच और इलाज पूरी तरह मुफ्त है। लोगों को जागरूक कर ही टीबी बीमारी को समाज से मुक्त कर सकते हैं। वहीं, उन्होंने बताया कि टीबी के अधिकतर मामले घनी आबादी वाले इलाके में पाए जाते हैं। वहां पर गरीबी रहती है। लोगों को सही आहार नहीं मिल पाता और वह टीबी की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए हमलोग घनी आबादी वाले इलाके में लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं। लोगों को बचाव की जानकारी दे रहे हैं और साथ में सही पोषण लेने के लिए भी जागरूक कर रहे हैं।
बीच में दवा नहीं छोड़ेः आरती झा ने बताया कि टीबी की दवा आमतौर पर छह महीने तक चलती है। कुछ पहले भी ठीक हो जाते और कुछ लोगों को थोड़ा अधिक समय भी लगता है। इसलिए जब तक टीबी की बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं हो जाए, तब तक दवा का सेवन छोड़ना नहीं चाहिए। बीच में दवा छोड़ने से एमडीआर टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर कोई एमडीआर टीबी की चपेट में आ जाता है तो उसे ठीक होने में डेढ़ से दो साल लग जाते हैं। इसलिए टीबी की दवा बीच में नहीं छोड़ें। जब तक आप पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते हैं तब तक दवा खाते रहें।
भोजन के लिए मरीजों के मिलते हैं पैसेः कृष्णा ने बताया कि टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार गंभीर है। इसीलिए टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की सुविधा मुफ्त है। साथ ही पौष्टिक भोजन करने के लिए टीबी मरीज को पांच सौ रुपये महीने छह महीने तक मिलता भी है। इसलिए अगर कोई आर्थिक तौर पर कमजोर भी है और उसमें टीबी के लक्षण दिखे तो उसे घबराना नहीं चाहिए। नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करानी चाहिए। दो सप्ताह तक लगातार खांसी होना या खांसी में खून निकलने जैसे लक्षण दिखे तो तत्काल सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।

कोरोना टीके की प्रीकॉशन डोज लेने में नहीं करें आनाकानी

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-कोरोना की चपेट में आने से बचना है तो जल्द लें प्रीकॉशन डोज
-तीनों टीका लेने के बाद ही आप कोरोना से पूरी तरह रहेंगे सुरक्षित
बांका-
कोरोना की तीन लहर खत्म हो चुकी है। चौथी लहर की आहट सामने दिखाई दे रही है। पिछले कुछ दिनों से एक बार फिर से कोरोना मरीजों के मिलने का सिलसिला शुरू हो गया है। हालांकि राहत की बात यह है कि इस बार कोरोना के मरीज उतने गंभीर नहीं हो रहे हैं और आसानी से घर बैठे ठीक हो जा रहे । बस केवल डॉक्टर के मुताबिक दवा का सेवन और कुछ जरूरी सावधानी मरीजों को बरतनी पड़ रही है। महत्वपूर्ण बात यह है कि कोरोना की दो लहर बहुत ही खतरनाक साबित हुई थी। दोनों लहर के मुकाबले तीसरी लहर राहत भरी रही थी। इसका प्रमुख कारण था कोरोना का टीकाकरण। तीसरी लहर आते-आते जिले के बहुत सारे लोगों ने कोरोना का टीका ले लिया था। इसका बहुत ही असर पड़ा और तीसरी लहर में बड़ी संख्या में लोग कोरोना की चपेट में आने से बच गए। पिछले कुछ दिनों से कोरोना के लगातार मरीज मिलने के कारण चौथी लहर सामने है। ऐसे में कोरोना टीका की प्रीकॉशन डोज ले लेना बहुत ही जरूरी है। जिस तरह से टीके की पहली दो डोज ले लेने के बाद तीसरी लहर में लोगों का बचाव हुआ, उसी तरह अगर लोग कोरोना टीके की प्रीकॉशन डोज ले लेते हैं तो चौथी लहर से भी बचाव होगा। अगर चपेट में आ गए भी गए तो उससे आसानी से उबर जाएंगे।
सुरक्षित रहने के लिए अवश्य लें प्रीकॉशन डोजः एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी कहते हैं कि कोरोना का टीका बचाव के लिए बहुत ही कारगर  उपाय साबित हुआ है। तीसरी लहर के दौरान इसके बेहतर नतीजे हमलोग देख चुके हैं। अब अगर चौथी लहर की चपेट से बचना है तो कोरोना टीके की प्रीकॉशन डोज अवश्य लें। अभी भी बहुत सारे ऐसे लोग हैं, जिनका समय पूरा हो गया है और वे प्रीकॉशन डोज नहीं लिए हैं। ऐसे लोगों से मेरी अपील है कि जल्द से जल्द प्रीकॉशन डोज  लें और कोरोना की चौथी लहर से खुद के साथ परिवार और जान-पहचान के अन्य सदस्यों को भी बचाएं। गुरुवार को कोरोना टीकाकरण का महाअभियान है,उसके लिए भी लोगो से अपील  है की नजदीक के टीकाकरण केंद्र पर जाकर टीका जरूर ले लें। चूकि कोरोना एक संक्रामक बीमारी है। यह एक से दूसरे लोगों में तेजी से फैलती है। इसलिए अगर आप सुरक्षित रहेंगे तो आपकी  जान-पहचान वाले लोग भी इससे बचे रहेंगे।
अन्य सावधानियां भी जरूरीः डॉ. चौधरी कहते हैं कि कोरोना से बचने के लिए टीकाकरण तो कारगर उपाय है ही, साथ ही अन्य सावधानियां बरतनी भी जरूरी है। जैसे कि मास्क का प्रयोग करें। घर से बाहर जाते वक्त सामाजिक दूरी का अवश्य पालन करें। एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी बनाकर रहें। घर से अनावश्यक नहीं निकलें। जरूरत पड़ने पर ही घरों से निकलें। बाहर से घर आने पर 20 सेकेंड तक हाथ की धुलाई अवश्य करें। बीमार पड़ने की स्थिति में डॉक्टर से दिखाएं और उनके कहे मुताबिक अपना इलाज करवाएं। अगर कोरोना होने की पुष्टि होती है तो डॉक्टर के मुताबिक व्यवहार करें। घर के सदस्यों से दूरी बनाकर रहें। ऐसा करते रहने से आप भी सुरक्षित रहेंगे और आपके घर-परिवार और जान-पहचान के लोग भी सुरक्षित रहेंगे।

फिल्म ‘शमशेरा’ के सितारों की चमक से जगमगाया ‘वेगस मॉल’

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संजय दत्त, रणबीर कपूर, वानी कपूर अपनी फिल्म ‘शमशेरा’ की प्रमोशन के लिए पहुंचे वेगस मॉल

नई दिल्ली-

नई दिल्ली के द्वारका सेक्टर 14 में स्थित वेगस मॉल उस समय चमक उठा जब सबसे बहुप्रतीक्षित हिंदी फिल्मों में से एक ‘शमशेरा’ की स्टारकास्ट संजय दत्त, रणबीर कपूर, वानी कपूर व निर्देशक प्रमोशन के लिये यहां पहुंचे।
अपने पसंदीदा बॉलीवुड सितारे रणबीर कपूर, वानी कपूर और संजय दत्त की एक झलक पाने के लिए दिल्ली-एनसीआर के दूर-दराज के इलाकों से प्रशंसकों की भीड़ यहां उमड़ी।
शमशेरा यशराज फिल्म्स के बैनर तले बनने वाली एक पीरियड एक्शन फिल्म है। निर्देशक करण मल्होत्रा और निर्माता आदित्य चोपड़ा ने 1800 के दशक में फिल्म का विषय निर्धारित किया है, जहां कहानी एक डकैत जनजाति और ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्वतंत्रता के लिए उनकी लड़ाई का अनुसरण करती है। शमशेरा की नाटकीय रिलीज़ 22 जुलाई 2022 के लिए निर्धारित है।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए अभिनेता संजय दत्त ने कहा कि हम अपने आरामदायक जीवन का श्रेय उन महान योद्धाओं को देते हैं जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई लड़ी। यह फिल्म वास्तव में उन असली नायकों को एक श्रद्धांजलि है। श्री दत्त के साथ सहमति जताते हुए, युवा आइकन रणबीर कपूर ने कहा कि यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपनी विरासत को संरक्षित करें और युवा पीढ़ी को इसके मंत्रमुग्ध करने वाले क्षणों से परिचित कराएं। वानी कपूर के फैंस उस वक्त हैरान रह गए जब उन्हें पता चला कि वानी कपूर
ने फिल्म में एक नर्तकी के रूप में अपने चित्रण को सही ठहराने के लिए कथक में पेशेवर प्रशिक्षण लिया था।
इस अवसर पर वेगस मॉल के एसिसटेंट वाइस प्रेसीडेंट श्री रविंदर चौधरी ने कहा कि “वेगस मॉल मनोरंजन और फैशन उद्योग में कार्यक्रमों के लिए जाने-माने स्थान बन रहा है। टीम वेगास शोबिज प्रशंसकों के लिए इस तरह के और अधिक आयोजन करने के लिए तत्पर है और हम अपने आगंतुकों के प्रत्येक अनुभव को पिछले एक से विशिष्ट रूप से अलग बनाने के लिए दृढ़ हैं।