अमडवा और व्हाइट ओक के एजुकेशन सम्मिट में डिस्ट्रिब्यूटरों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया

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नईदिल्ली-
आल म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर वेलफेयर एसोसिएशन अमडवा ने एक दिवसीय एजुकेशन सम्मिट 22 का आयोजन नई दिल्ली के पार्क होटल में किया। इस खास आयोजन में देश भर के डिस्ट्रीब्यूटर व फाइनेसियल एडवायजर ने बढचढ़्कर हिस्सा लिया। यह आयोजन अमडवा ओर व्हाइट ओक व्हाइटओक केपिटल म्यूचुअल फंड के एसोसिएशन से किया गया। इस कार्यक्रम का थीम था द आर्ट एंड साइंस ऑफ इनवेस्टिंग। अमडवा के इस एजुकेशन सम्मिट में चार सेशन रखे गए थे जिसमें मोटिवेशन सेशन सहित टेक्निकल सेशन, पैनेल डिस्कसन व एक्सपर्ट सेशन रखा गया था। जिसमें म्यूचुअल फंड के डिस्ट्रीब्यूटरों की समस्या सहित निवेश के हर पहलू पर खास चर्चा की गई।
अमडवा के इस एजुकेशन सम्मिट में मोडिवेशन गुरु सुमित मनचंदा ने अपने सेशन में कई तरह के उदाहरण दिए जिससे डिस्ट्रीब्यूटर में उत्साह दिखा।
अमडवा के इस एजुकेशन सम्मिट में बाजार के बदलाव ओर उसके डायनेमिक्स पर विशेष रूप से चर्चा की गई। बाजार के डायनेमिक्स पर आलमाउंड सेलेक्ट के मैनेजिंग पार्टनर हेना नागपाल ने डिस्ट्रीव्यूटरों को खास जानकारी दी। जिसे काफी सराहा गया।
द आर्ट एंड साइंस ऑफ इंस्वेस्टिंग पर खास अपने प्रेजेंटेशन केफिनटेक ने भी दिए ओर कई तरह के फंडों पर चर्चा की। केफिनटेक की मुस्कान ने जहां पेंशन प्लान पर सारे प्रश्नों का जवाब दिया वहीं डिस्ट्रीब्यूटरों को नेशनल पेंशन स्कीम के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
अमडवा के इस एजुकेशन सम्मिट के खचाखचे भरे हॉल में डिस्ट्रिब्यूटरों को अपने प्रोफेशन को ओर अद्यतन बनाए जाने पर पीआरपी प्रोफेशनल्स व सीईओ व एक्ज्यूटिव डायरेक्टर प्रखर पांडे ने विशेष जोर दिया। उन्होंने आज के समय में डिस्ट्रिब्यूटर के महत्ता पर चर्चा की.
इस खास आयोजन का मुख्य सहयोग कर्ता व्हाइटओक केपिटल म्यूचुअल फंड के सीईओ आशीष पी सोमैया ने जहां बाजार की मजबूती पर खास चर्चा की। एवं डिस्ट्रीब्यूटरों को अपने मन से भय निकालने पर भी जोर दिया। देश की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है इसलिए निवेशकों के लिए अवसर हैं। आशीष पी सोमैया ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत है ऐसे समय में व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड से डिस्ट्रिब्यूटर जुड़ें एवं निर्भिक होकर निवेश भी करें।
अमडवा के इस एजुकेशन सम्मिट में एक सेशन पैनेल डिस्कसन का रखा गया जिसमें डिस्ट्रिब्यूटर के प्रश्नों का जवाब दिया गया। इस डिस्कसन में जीएसटी व टैक्सेसन पर सारे प्रश्नों का जवाब मुकेश गुप्ता व लवली मेहरा ने दिया तो इक्विटी के बारे में संजीव गर्ग एवं राजेश बंसल ने डिस्ट्रिब्यूटरों को रोड मैप बताया।
गौरतलब है कि अमडवा यानी आल म्यूचुअल फंड डिस्ट्रिब्यूटर वेलफेयर एसोशिएसन समय समय पर ऐसे आयोजन करता रहता है जिससे डिस्ट्रिब्यूटर की समस्या से निजात मिल सके। और अगर उनकी कोई क्वयोरी हो तो उसका भी निदान हो।

आंगनबाड़ी केंद्रों पर अन्नप्राशन कार्यक्रम का आयोजन, उचित पोषण की दी गई जानकारी 

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– छः माह की उम्र पार करने वाले बच्चों का कराया गया अन्नप्राशन, पौष्टिक आहार के महत्व की दी गई जानकारी
– कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर लोगों को किया गया जागरूक, दी गई आवश्यक जानकारी
खगड़िया, 19 जुलाई
मंगलवार को जिले के सभी प्रखंडों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर उत्साह के साथ अन्नप्राशन कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस दौरान जिले की सभी सेविका-सहायिका अपने-अपने आंगनबाड़ी  केंद्रों पर छः माह की उम्र पार करने वाले बच्चों को पहली बार अन्नप्राशन कराया और बच्चे की माँ को बच्चे के 6 माह के बाद ऊपरी आहार की विशेषता बताते हुए अन्नप्राशन के महत्व की विस्तार से जानकारी दी। ताकि बच्चे के स्वस्थ शरीर का निर्माण हो सके। वहीं, बच्चों के सर्वांगीण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए उचित पोषण की जानकारी दी गई और कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर जागरूक किया गया। जिसमें बताया गया कि कुपोषण को मिटाने के लिए उचित पोषण बेहद जरूरी है। इसलिए, सरकार द्वारा इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन कर उचित पोषण के लिए जागरूक किया जा रहा है। दरअसल, कुपोषण मुक्त समाज निर्माण की दिशा में सरकार पूरी तरह सजग और कटिबद्ध है।
– अन्नप्राशन के साथ दो वर्षों तक स्तनपान भी जरूरी :
आईसीडीएस की  जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सुनीता कुमारी ने बताया, इस दौरान मौजूद बच्चों की माँ को बच्चे के  स्वस्थ शरीर निर्माण को लेकर आवश्यक जानकारियाँ दी गई। जिसमें बताया गया कि बच्चों को अन्नप्राशन के साथ कम से कम दो वर्षों तक स्तनपान भी कराएं और छः माह तक सिर्फ स्तनपान ही कराएं। तभी बच्चे का स्वस्थ शरीर निर्माण संभव है। इसके अलावा 6 माह से ऊपर के बच्चों के अभिभावकों को बच्चों के लिए पूरक आहार की जरूरत के विषय में जानकारी दी गयी। 6 माह से 9 माह के शिशु को दिन भर में 200 ग्राम सुपाच्य मसला हुआ खाना, 9 से 12 माह में 300 ग्राम मसला हुआ ठोस खाना, 12 से 24 माह में 500 ग्राम तक खाना खिलाने की सलाह दी गयी। इसके अलावा अभिभावकों को बच्चों के दैनिक आहार में हरी पत्तीदार सब्जी और पीले नारंगी फल को शामिल करने की बात बताई गयी। चावल, रोटी, दाल, हरी सब्जी, अंडा एवं अन्य खाद्य पदार्थों की पोषक तत्वों के विषय में चर्चा कर अभिभावकों को इसके विषय में जागरूक किया गया।
– पौष्टिक आहार की महत्ता की भी दी गई जानकारी :
आईसीडीएस के जिला समन्वयक अंबुज ने बताया, शिशु के जन्म के एक घंटे के भीतर माँ का गाढ़ा-पीला दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। अगले छह माह तक केवल मां का दूध बच्चे को कई गंभीर रोगों से सुरक्षित रखता है। 6 माह के बाद बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास काफी तेजी से होता है। इस दौरान स्तनपान के साथ ऊपरी आहार की काफी जरूरत होती है। घर का बना मसला व गाढ़ा भोजन ऊपरी आहार की शुरुआत के लिए जरूरी होता है।
– अन्नप्राशन के साथ परिवार नियोजन को लेकर भी किया गया जागरूक :
पिरामल स्वास्थ्य के डीपीएल प्रफूल्ल झा ने बताया, अन्नप्राशन के साथ जिले में चल रहे परिवार नियोजन पखवाड़े की सफलता को लेकर भी जागरूक किया गया। जिसमें परिवार नियोजन को अपनाने से होने वाले फायदे, गुणवत्तापूर्ण जिंदगी जीने के लिए परिवार नियोजन को अपनाने की कितना जरूरत है समेत अन्य जानकारियाँ दी गई। इसके अलावा कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
 – इन बातों का रखें ख्याल : –
– 6 माह बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार शिशु को दें।
– स्तनपान के अतिरिक्त दिन में 5 से 6 बार शिशु को सुपाच्य खाना दें।
– शिशु को माल्टिंग आहार (अंकुरित साबुत अ नाज या दाल को सुखाने के बाद पीसकर) दें।
– माल्टिंग से तैयार आहार से शिशुओं को अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
– शिशु यदि अनुपूरक आहार नहीं खाए तब भी थोड़ा-थोड़ा करके कई बार खिलाएं।

कोरोना से बचने के लिए टीकाकरण है बेहद जरूरी, समय पर लें अपने सभी  डोज : डीआईओ

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– अब  दूसरी डोज लेने के छह महीने बाद ही लगा सकते हैं टीके की प्रीकॉशनरी डोज
– जिला भर में 31 जुलाई तक चलाया जा रहा है हर घर दस्तक अभियान
– श्रावणी मेला में कावंरिया पथ पर शिविर आयोजित कर कांवरियों को किया जा रहा है टीकाकृत
मुंगेर, 19 जुलाई-
जिला सहित पूरे राज्य में  कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने टीकाकरण अभियान फिर से तेज कर दिया है। इसी  क्रम में जिला भर में 31 जुलाई तक हर घर दस्तक अभियान चलाकर लोगों को कोरोना की  वैक्सीन दी जा रही है। इसके तहत जिला के सरकारी अस्पतालों के अलावा पंचायतों में भी रोस्टरवार शिविर लगाकर लोगों को कोरोना का टीका दिया जा रहा है। इसके साथ ही श्रावणी मेला में राज्य और राज्य के बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को कावंरिया पथ पर जगह -जगह शिविर लगाकर  कोरोना की वैक्सीन दी जा रही है।  ताकि दो साल के बाद लगने वाले श्रावणी मेला को कोरोना संक्रमण से मुक्त रखा जा सके। इसके अलावा अधिक से अधिक लोगों को टीकाकृत करने के लिए समय समय पर स्पेशल ड्राइव भी चलाया जा रहा है ताकि लोगों को कोरोना के संभावित प्रसार के प्रभाव से बचाया जा सके।
जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला कार्यक्रम प्रबंधक नसीम रजि ने बताया कि हर घर दस्तक अभियान के तहत जिला के सभी प्रखंडों में फ्रंट लाइन वर्कर्स को ड्यू लिस्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। ड्यू लिस्ट के अनुसार ही 12 से 14, 15 से 18, 18 से 59 तथा 60 व उससे अधिक उम्र के सभी लाभार्थियों को फर्स्ट डोज, सेकेंड डोज और प्रीकॉशनरी डोज की ड्यू लिस्ट तैयार करते हुए उनको टीकाकृत किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पहले प्रीकॉशनरी डोज लेने की अवधि सेकेंड डोज़ लेने के बाद 9 माह निर्धारित की गई थी। लेकिन अब इसमें बदलाव किया गया है। इसके अनुसार अब 18 से 59 वर्ष आयु- वर्ग के वैसे लाभार्थी जिन्हें कोरोना टीका की  दूसरी  डोज लिए छह महीने या 26 सप्ताह की अवधि पूरी हो चुकी है, वे कोविड टीके की प्रीकॉशनरी डोज ले सकते हैं।
टीका लेने में नहीं बरतें कोई भी कोताही  :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी राजेश कुमार रौशन ने बताया कि कोरोना वायरस का संक्रमण अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। संक्रमण की संभावित लहर को देखते हुए लोग टीका लेने में कोई भी कोताही न बरतें। जिन्होंने अभी तक कोरोना टीका नहीं लिया है वो सबसे पहले टीके की पहली डोज लें। पहली डोज ले चुके लोग समय पर दूसरी डोज लें और दूसरी डोज ले चुके लोग निर्धारित समय प्रीकॉशनरी डोज अवश्य लें ताकि, जिला को कोरोना के प्रभाव से सुरक्षित रखा जा सके।
उन्होंने बताया कि आशा व एएनएम को अपने क्षेत्र में टीका की निर्धारित डोज से वंचित लोगों को चिह्नित करते हुए विशेष अभियान के तहत उनका टीकाकरण सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है ताकि 31 जुलाई तक टीका से वंचित सभी लाभार्थियों को उनके ड्यू लिस्ट के अनुसार टीकाकृत किया जा सके।

टीबी मरीजों को नियमित दवा का सेवन करने की मिली सलाह

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-कहलगांव एनटीपीसी अस्पताल में टीबी केयर और सपोर्ट ग्रुप की बैठक
-टीबी के मरीजों और देखभाल करने वालों को दी गई महत्वपूर्ण जानकारी
भागलपुर, 19 जुलाई-
कहलगांव स्थित एनटीपी अस्पताल में टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की बैठक हुई। बैठक का आयोजन कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) ने अस्पताल प्रबंधन के सहयोग से किया, जिसमें 12 मरीज और 8 देखभाल करने वाले और एक टीबी चैंपियन सम्मिलित हुए। इस दौरान टीबी मरीजों को सही समय और नियमित दवाई का सेवन करने की सलाह दी गई। दवाई सेवन के दौरान होने वाली परेशानी, निक्षय पोषण के तहत मिलने वाली राशि और पौष्टिक भोजन करने के लिए भी मरीजों को बताया गया। बैठक में चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुष्मिता सिंह, एलटी राकेश कुमार और केएचपीटी से धीरज कुमार मिश्रा सम्मलित हुए।
डॉ. सुष्मिता सिंह ने बैठक के दौरान बताया कि किसी व्यक्ति को लगातार दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक खांसी, बलगम के साथ खून का आना, शाम को बुखार आना या वजन कम होना की शिकायत हो तो उसे तुरंत नजदीक के सरकारी अस्पताल में ले जाकर जांच कराने की सलाह दें। ये टीबी के लक्षण हैं। साथ ही उन्हें यह भी बताएं कि सरकारी अस्पताल में टीबी की जांच और इलाज पूरी तरह मुफ्त है। लोगों को जागरूक कर ही टीबी बीमारी को समाज से मुक्त कर सकते हैं। टीबी के अधिकतर मामले घनी आबादी वाले इलाके में पाए जाते हैं। वहां पर गरीबी रहती है। लोगों को सही आहार नहीं मिल पाता और वह टीबी की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए हमलोग घनी आबादी वाले इलाके में लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं। लोगों को बचाव की जानकारी दे रहे  और साथ में सही पोषण लेने के लिए भी जागरूक कर रहे हैं।
बीच में दवा नहीं छोड़ेः डॉ. सुष्मिता सिंह ने बताया कि टीबी की दवा आमतौर पर छह महीने तक चलती है। कुछ पहले भी ठीक हो जाते और कुछ लोगों को थोड़ा अधिक समय भी लगता है। इसलिए जब तक टीबी की बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं हो जाए, तब तक दवा का सेवन छोड़ना नहीं चाहिए। बीच में दवा छोड़ने से एमडीआर टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर कोई एमडीआर टीबी की चपेट में आ जाता  तो उसे ठीक होने में डेढ़ से दो साल लग जाते हैं। इसलिए टीबी की दवा बीच में नहीं छोड़ें। जब तक आप पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते हैं तब तक दवा खाते रहें।
पौष्टिक भोजन के लिए मरीजों को मिलते हैं पैसेः दरअसल, टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार गंभीर है। इसीलिए टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की सुविधा मुफ्त है। साथ ही पौष्टिक भोजन करने के लिए टीबी मरीज को पांच सौ रुपये महीने छह महीने तक मिलता भी है। इसलिए अगर कोई आर्थिक तौर पर कमजोर भी है और उसमें टीबी के लक्षण दिखे तो उसे घबराना नहीं चाहिए। नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करानी चाहिए। दो सप्ताह तक लगातार खांसी होना या खांसी में खून निकलने जैसे लक्षण दिखे तो तत्काल सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।

परिवार नियोजन के साधनों का इस्तेमाल कर जीएं खुशहाल जीवन

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-जिले में चल रहा जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा
-परिवार नियोजन को लेकर किया जा रहा जागरूक
बांका, 19 जुलाई-
जिले में अभी परिवार नियोजन पखवाड़ा चल रहा है। जनसंख्या दिवस 11जुलाई के दिन शुरू हुआ यह पखवाड़ा 31 जुलाई तक चलेगा। इसके तहत लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक किया जा रहा है। साथ ही परिवार नियोजन साधन को अपनाने के लिए अस्थायी सामग्री की जानकारी लोगों को दी जा रही  और इसका वितरण भी किया जा रहा है। लोगों को इस अभियान में भाग लेने के जरूरत  औऱ परिवार नियोजन के साधनों का इस्तेमाल कर खुशहाल जीवन जीने की आवश्यकता है।
एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी ने कहा कि जिले में जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा के तहत लोगों को परिवार नियोजन की जानकारी दी जा रही है। जिले के लोग भी इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं। आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को जानकारी दे रही हैं तो एएनएम के जरिये लोगों की काउंसिलिंग की जा रही। इसके साथ ही लोगों को बंध्याकरण, अस्थायी सामग्री के इस्तेमाल के प्रति जो भ्रम है उसे भी दूर किया जा रहा है। लोगों के मन में अस्थायी सामग्री के इस्तेमाल के प्रति जो भ्रम है, उसे भी दूर किया जा रहा है।
अस्थायी सामग्री के इस्तेमाल से नहीं होता नुकसानः बहुत सारे लोगों के मन में परिवार नियोजन के अस्थायी सामग्री के इस्तेमाल को लेकर भ्रम रहता है। लेकिन लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। एसीएमओ डॉ. चौधरी कहते हैं कि अस्थायी सामग्री के तौर पर लोग कंडोम, कॉपर-टी, अंतरा का इस्तेमाल करने से डरें नहीं, इससे कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। इन साधनों का इस्तेमाल कर आप सही तरीके से परिवार नियोजन कर सकते हैं। अगर आपके मन में किसी तरह भ्रम है तो नजदीकी  सरकारी अस्पताल में जाएं, वहां आपके भ्रम को दूर कर दिया जाएगा।
पहला बच्चा 20 साल के बाद हीः एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी ने कहा कि अभियान के दौरान स्वास्थ्यकर्मी लोगों को जागरूक कर रहे हैं कि पहला बच्चा महिलाओं को 20 साल के बाद ही जनना चाहिए। साथ ही दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल जरूर रखना चाहिए। दो बच्चों के बीच तीन साल का अंतराल रखने से उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे वह बीमारियों की चपेट में आने से बचा रहता है। अगर आ भी जाता है तो वह उससे जल्दी उबर जाता है। इसके अलावा दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल रखने से जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ रहता है।
दो बच्चे के बाद कराएं बंध्याकरणः एसीएमओ डॉ. चौधरी ने कहा कि अभियान के दौरान लोगों के बीच दो बच्चे के बाद बंध्याकरण की सलाह दी जा रही है। अभियान के दौरान जिनके दो से ज्यादा बच्चे हैं उन्हें तो तत्काल बंध्याकरण की सलाह दी जाती है, लेकिन जिनके दो बच्चे हो गए हैं उन्हें भी जल्द ही बंध्याकरण कराने को कहा जाता है। इसके लिए छोटा परिवार होने के फायदे के बारे में बताया जाता है। लोगों को समझाया जाता है कि छोटा परिवार होने से न सिर्फ स्वास्थ्य, बल्कि आर्थिक तौर पर भी आजादी मिलती है।

दूसरे और प्रीकाॅशनरी डोज के  कोविड टीकाकरण सुनिश्चित कराने को लेकर जिले में लगातार चल रहा है अभियान 

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– कोविड के खतरे से बचाव के लिए टीका जरूरी, इसलिए जरूर कराएं टीकाकरण
– कोविड के प्रभाव से बचाव के लिए टीकाकरण के साथ – साथ सावधानी और सतर्कता भी जरूरी
खगड़िया-
जिला समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में एकबार फिर से कोविड संक्रमण की शिकायत सामने आने लगी है। हालाँकि, संक्रमण के प्रभाव को खत्म करने के लिए स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरी तरह मुस्तैद है। सुरक्षा के मद्देनजर जिले भर में लगातार नियमित तौर पर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। ताकि जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लाभार्थियों का टीकाकरण सुनिश्चित हो सके और सामुदायिक स्तर एक भी व्यक्ति  टीका से वंचित नहीं रहें । इस अभियान को सार्थक रूप देने के लिए जिले में संचालित सभी स्वास्थ्य संस्थानों में जहाँ लगातार नियमित तौर पर टीकाकरण शिविर का आयोजन कर योग्य लाभार्थियों को टीकाकृत किया जा रहा है। वहीं, हर घर दस्तक टीकाकरण अभियान के तहत टीकाकरण टीम घर-घर जाकर भी लोगों को टीकाकृत कर रही है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ता, एएनएम समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मी टीका से वंचित और पहला डोज  लेने के बाद दूसरा या प्रीकाॅशनरी (तीसरा) डोज का टीका लेने की समयावधि पूरी  करने वाले एक-एक व्यक्ति को चिह्नित  कर उन्हें टीकाकरण के लिए जागरूक भी किया जा रहा है। ताकि दूसरा या प्रीकाॅशनरी डोज लेने की समयावधि पूरी  करने वाले लाभार्थियों का निर्धारित समय पर टीकाकरण सुनिश्चित हो सके और इस घातक महामारी से खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें ।
– कोविड संक्रमण के खतरे से सुरक्षा के मद्देनजर टीकाकरण जरूरी :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, जिला समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों से कोविड संक्रमण की  की खबरें सामने आने लगी हैं । इसलिए, संक्रमण के खतरे से बचाव के लिए टीकाकरण जरूरी है। क्योंकि, इस घातक महामारी से बचाव के लिए सबसे बेहतर और कारगर सुरक्षा टीका ही है। इसलिए, मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि सभी लोग जल्द से जल्द टीकाकरण कराएं और इस घातक महामारी से खुद के साथ-साथ अपने परिवार और समाज को भी सुरक्षित करें। वहीं, उन्होंने बताया, लोगों को टीकाकरण कराने में किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो, इसके मद्देनजर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में लगातार नियमित तौर टीकाकरण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। कोई भी डोज लेने वाले योग्य लाभार्थी अपने नजदीकी टीकाकरण शिविर स्थल पर जाकर टीकाकरण करा सकते हैं।
– परिवार नियोजन पखवाड़ा के दौरान कोविड टीकाकरण के लिए भी किया जा रहा है जागरूक :
पिरामल फाउंडेशन के डीपीएल प्रफूल्ल झा ने बताया, जिले में वर्तमान में परिवार नियोजन पखवाड़ा भी चल रहा है। इसके  सफल संचालन के लिए जिले में लगातार विभिन्न प्रकार की  गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान सामुदायिक स्तर पर लोगों को कोविड टीकाकरण के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। ताकि किसी भी कारण वश से टीकाकरण से वंचित और दूसरा या तीसरा डोज लेने की समयावधि पूरी  करने वाले लाभार्थी निर्धारित समय पर टीकाकरण करा सकें  और शत-प्रतिशत लाभार्थियों का टीकाकरण सुनिश्चित हो सके।

किसी से मिलने और हाथ मिलाने से नहीं फैलता है टीबी का संक्रमण :  डॉ श्रीनिवाश शर्मा

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–  टीबी है एक संक्रामक रोग लेकिन मरीजों की कतई न करें उपेक्षा
 – संक्रमित होने की स्थिति में सही समय पर कराएं सही इलाज
– सभी सरकारी अस्पतालों पर निःशुल्क उपलब्ध है टीबी जांच और समुचित इलाज की सुविधा
लखीसराय-
किसी से मिलने और हाथ मिलाने से नहीं फैलता है टीबी का संक्रमण| इसलिये टीबी मरीजों की उपेक्षा कतई नहीं करें । उससे अपनत्व की भावना रखते हुए उसे टीबी की सही जांच और सही  जगह पर इलाज कराने के लिए प्रेरित करें। उक्त जानकारी लखीसराय के संचारी रोग के नोडल अधिकारी डॉ श्रीनिवास  शर्मा  ने दी । उन्होंने बताया कि किसी भी संक्रामक बीमारियों से  बचाव  के लिए सतर्क रहना जरूरी  है। क्योंकि कोरोना काल के बाद से विशेषकर श्वसन तंत्र को प्रभावित करने वाले संक्रामक रोगों से बचाव करना और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। इसके साथ भीड़भाड़ वाली जगहों पर एहतियात व सुरक्षा के पैमानों को व्यवहार में लाया जाना अभी  भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है । ऐसी ही श्वसन संबंधित संक्रामक बीमारियों में टीबी भी एक महत्वपूर्ण बीमारी है जो फेफड़ों को प्रभावित करता । डॉ. शर्मा  ने  सेंटर फॉर डिजिज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (सीडीसी) के हवाले से बताया कि संक्रमित व्यक्ति के खांसने व बोलने से निकली बूंद में मौजूद टीबी बैक्टीरिया हवा के माध्यम से स्वस्थ्य व्यक्ति तक पहुंचती  है।
मिथ्याओं से बचें ताकि उपेक्षित नहीं हो संक्रमित :
डॉ. श्रीनिवास  शर्मा ने बताया कि सीडीसी के मुताबिक टीबी संक्रमण को ले कुछ मिथ्याएं भी हैं । इन मिथ्याओं की वजह से लोग टीबी ग्रसित लोगों की उपेक्षा करने लगते हैं। टीबी ग्रसित लोगों के प्रति इस तरह से उपेक्षा किया जाना उसके इलाज में भी असुविधा ही पैदा करती है। आमलोगों को यह ध्यान रखना चाहिए कि वे टीबी संक्रमण होने के सही कारणों की जानकारी लें। सीडीसी के अनुसार यह रोग हाथ मिलाने, किसी को खानपान की सामग्री देने या लेने, बिस्तर पबैठने व एक ही शौचालय के इस्तेमाल करने से बिल्कुल भी नहीं फैलता है।
फेफड़ों व अन्य अंगों को भी प्रभावित करता है टीबी :
उन्होंने  बताया कि जब एक व्यक्ति सांस लेता है तो बैक्टीरिया फेफड़ों में जाकर बैठ जाती   और वहीं बढ़ने लगती  है। इस तरह से वो रक्त की मदद से शरीर के दूसरे अंगों यथा किडनी, स्पाइन  व ब्रेन तक पहुंच जाती  है । आमतौर पर ये टीबी फैलने वाले नहीं होते हैं | वहीं फेफड़ों व गले का टीबी संक्रामक होता है जो दूसरों को भी संक्रमित कर देता है।
कमजोर प्रतिरोधक क्षमता  वालों को संक्रमण की संभावना  अधिक :
सीडीसी के मुताबिक ट्रयूबरक्लोसिस दो प्रकार के होते हैं। इनमें एक लेंटेंट टीबी होता है जिसमें टीबी की  बैक्टीरिया शरीर में मौजूद होती  हैं लेकिन उनमें लक्षण स्पष्ट रूप से नहीं दिखते हैं| लेकिन रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर इसका असर उभर कर देखने को मिल सकता है। वहीं कुछ स्पष्ट दिखने वाले लक्षणों से टीबी रोगियों का पता चल पाता है।
ये लक्षण दिखें तो करायें टीबी जांच :
तीन सप्ताह  या इससे अधिक समय से खांसी रहना, छाती में दर्द, कफ में खून आना
कमजोरी व थका हुआ महसूस करना।
वजन का तेजी से कम होना,
भूख नहीं लगना, ठंड लगना, बुखार का रहना,
रात को पसीना आना  इत्यादि।

बांका में 27 लाख से अधिक पड़े कोरोना के टीके

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-पहली डोज 13,61,913 को तो 12,54,543 लोगों को दूसरी डोज
-86238 लोगों ने अब तक ली कोरोना टीके की प्रीकॉशन डोज

बांका-

कोरोना टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग गंभीर है। इसका परिणाम भी अच्छा मिल रहा है। बांका जिले में अब तक 27,02,694 डोज कोरोना के टीके की पड़ चुकी है। इसमें पहली से लेकर दूसरी और प्रीकॉशन डोज भी शामिल हैं । जिले के 13,61,913 लोगों ने कोरोना टीके की पहली डोज ली है तो 12,54,543 लोगों ने टीके की दूसरी डोज ली है। प्रीकॉशन डोज भी अब तक 86,238 लोगों ने ले ली है। टीके की दूसरी और प्रीकॉशन डोज के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही अभी भी जिनलोगों ने पहली डोज नहीं ली है, उनको टीका देने का काम किया जा रहा है।
एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी कहते हैं कि कोरोना से बचाव में टीकाकरण सबसे कारगर उपाय है, इसलिए जिनलोगों ने कोरोना का टीका नहीं लिया है, वे जल्द से जल्द अपना टीकाकरण करवाएं। साथ ही जिनलोगों ने पहली डोज ली और दूसरी डोज नहीं ली है, वे भी जल्द ही अपनी दूसरी खुराक ले लें। इसके अलावा जिनका प्रीकॉशन डोज का समय हो गया है, वे भी नजदीकी टीकाकऱण केंद्रों पर जाकर कोरोना का टीका ले लें। एक या दो टीका ले लेने के बाद दूसरा या तीसरा टीका का जब समय पूरा हो तो देरी नहीं करें। जल्द से जल्द जाकर टीका ले लें और कोरोना को लेकर अपना पूर्ण टीकाकरण करवाएं।
टीका लेने से मिलेगी राहतः डॉ. चौधरी ने कहा कि जिनलोगों ने भी कोरोना टीका की तीनों डोज ले ली है, उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। एक तो जल्द कोरोना की चपेट में नहीं आएंगे, दूसरा अगर कोरोना की चपेट में आ भी गए तो जल्द उबर जाएंगे। इसलिए अगर आपके घर या जान-पहचान में भी कोई ऐसा व्यक्ति हो, जिन्होंने टीका नहीं लिया हो, उन्हें इसके लिए प्रेरित करें। इससे उन्हें भी फायदा होगा और आपको भी उनके जरिये कोरोना होने का खतरा नहीं रहेगा। इसलिए देरी नहीं करें।
चौथी लहर से बचने के लिए सतर्कता जरूरीः डॉ. चौधरी ने कहा कि टीका लेने के साथ-साथ कोरोना की चौथी लहर से बचने के लिए सतर्कता जरूर रखें। घर से बाहर जाते वक्त मास्क जरूर लगाएं। घर से अनावश्यक नहीं निकलें। जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें। बाहर निकलने पर सामाजिक दूरी के तहत दो गज की दूरी का पालन करें। बाहर से घर आने पर 20 सेकेंड तक हाथ की धुलाई अवश्य करें। खांसी-बुखार या कोरोना के कोई अन्य लक्षण महसूस हो तो डॉक्टर से दिखाकर दवा लें। डॉक्टर अगर कोरोना जांच के लिए कहे तो कतराएं नहीं, बल्कि करवाकर सतर्कता बरतें। इन सब बातों का ध्यान रखने से आप कोरोना से बचे रहेंगे। साथ ही आपके जानने वाले भी कोरोना की चपेट में नहीं आएंगे।

फाइलेरिया मरीजों की तैयार की जा रही सूची, मिलेगी सहायता

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सिविल सर्जन ने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को लिखा पत्र
प्रखंड से सूची आ जाने के बाद सहायता के काम में आएगी तेजी
भागलपुर-
फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्य विभाग गंभीर है। इसे लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी सिलसिले में सिविल सर्जन ने जिले के सभी प्रभारी चिकित्सा प्रभारियों को चिट्ठी लिखकर जल्द से जल्द प्रखंडों में मौजूद फाइलेरिया के मरीजों की सूची मांगी है। सूची आ जाने के बाद उसका अध्ययन किया जाएगा। फिर उसमें कौन-से मरीज को क्या सहयता दी जा सकती है। उसका निर्धारण किया जाएगा। अगर किसी के हाइड्रोसिल में फाइलेरिया है तो उसके ऑपरेशन की व्यवस्था की जाएगी। या फिर किसी के पैर फाइलेरिया की वजह से फूल गए हैं तो उसे मेडिकल किट उपलब्ध कराई जाएगी।
सिविल सर्जन डॉ. उमेश शर्मा ने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर हमलोग गंभीर हैं। साल में दो बार  इसे लेकर अभियान भी चलाया जाता है।  एक बार फरवरी और एक बार सितंबर में ।  जिसमें आशा कर्यकर्ताओं की मदद से जिले के लोगों को दवा खिलाई जाती है। इसके अलावा जो लोग फाइलेरिया से पीड़ित हैं उसे भी सहयोग किया जाता है, ताकि उन्हें राहत मिल सके। इसी सिलसिले में जिले के सभी प्रभारी चिकित्सा प्रभारियों को चिट्ठी लिखी गई है। चिट्ठी में सभी को फाइलेरिया के मरीजों की सूची भेजने को कहा गया है। सूची आ जाने के बाद जो मरीज जिस सहायता के लायक होगा, उसे उस तरह की सहायता की जाएगी।
प्रभारी जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. दीनानाथ ने बताया कि फाइलेरिया बीमारी से तो मरीजों को पूरी तरह आजादी नहीं मिलती है, लेकिन बेहतर मोर्बिडिटी प्रबंधन के जरिये थोड़ी राहत जरूर मिलती है। इसी को लेकर मरीजों में किट बांटी  जाएगी । जिलेभर में 500 मरीजों को किट बांटी  जाएगी ।  जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, रेफरल अस्पताल और सदर अस्पताल में यह किट उपलब्ध रहेगी । फाइलेरिया के मरीज इन जगहों पर जाकर यह किट ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि दरअसल, फाइलेरिया के मरीजों की चमड़ी थोड़ी मोटी हो जाती है। जिस जगह पर फाइलेरिया होता है, वहां पर जख्म का खतरा भी रहता है। जख्म होने के बाद मरीजों को ज्यादा परेशानी नहीं हो, इसके लिए किट में मौजूद दवा और सफाई से फाइलेरिया रोगियों को राहत मिलेगी। इस किट में एक छोटा टब, मग, साबुन, एंटीसैप्टिक क्रीम, पट्टी इत्यादि सामान रहेंगे, जिससे फाइलेरिया मरीज होने वाले जख्म को ठीक कर सकते हैं, जिससे उन्हें थोड़ी राहत मिलेगी। इसके अलावा जिनके हाइड्रोसिल में सूजन होगी  , वह ऑपरेशन के जरिये ठीक हो जाएंगे।
क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है फाइलेरियाः डॉ. दीनानाथ कहते हैं कि फाइलेरिया क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। क्यूलेक्स मच्छर घरों के दूषित स्थलों, छतों और आसपास लगे हुए पानी में पाया जाता है। इससे बचाव के लिए लोग घरों के आसपास गंदगी और पानी नहीं जमने दें। घर के आसपास साफ-सफाई रखनी चाहिए। बुखार आना, शरीर में लाल धब्बे या दाग होना, शरीर के किसी भी अंग में सूजन होना इसके लक्षण हैं। ज्यादातर इस बीमारी से ग्रसित लोगों के पांव या हाइड्रोसिल में सूजन हो जाती है। लोग इस बीमारी से सुरक्षित रह सकें, इसके लिए सरकार साल में दो  बार एमडीए अभियान चलाती है। एक बार  फरवरी और एक बार  सितंबर में ।  इससे लोगों को जरूरी दवा उपलब्ध होती , जो इस बीमारी को रोकने में सहायक होती है।

   ईशान तनेजा बेस्ट एजुकेशन एंड कॉरपोरेट एक्सपोजर प्रोग्राम इन इंडिया एंड एबरोड से सम्मानित 

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-युवा उद्यमी ईशान तनेजा यूएएस इंटरनेशनल के एमडी व सीईओ हैं।

 

नईदिल्ली-

एजुकेशन के क्षेत्र में विशिष्ठ कार्य करने वाले युवा उद्यमी यूएएस इंटरनेशनल के एमडी व सीईओ ईशान तनेजा को नईदिल्ली के संगरिला-इरोज होटल में सम्मानित किया गया। इस खास आयोजन में ईशान तनेजा को बेस्ट एजुकेशन एंड कॉरपोरेट एक्सपोजर प्रोग्राम इन इंडिया एवं एबरोड से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान सांसद संगम लाल गुप्ता एवं सांसद रीता बहुगुणा जोशी के हाथों प्रदान किया गया।

इस खास मौके पर सांसद रीता बहुगुणा जोशी ने ईशान तनेजा को बधाई देते हुए कहा कि जिस प्रकार से ईशान तनेजा विगत नौ वर्षों में एजुकेशन के फिल्ड में कार्य किए हैं वह बेहद महत्वपूर्ण हैं।

रीता बहुगुणा ने कहा कि पिछले नौ वर्षों से जिस प्रकार से एजुकेशन के क्षेत्र में यूएएस इंटरनेशनल कार्य कर रहा है यह अद्भूत है। निश्चितरूप से इससे देश के युवा छात्रों व संस्थानों को काफी फायदा हुआ है जिसके लिए इन्हें सम्मानित किया गया।

प्रतापगढ़ से सांसद संगम लाल गुप्ता ने ईशान तनेजा को बधाई देते हुए कहा कि आज एजुकेशन के सेक्टर में व्यावसायिक कुशलता का अलग महत्व है जिसकी पूर्ति ईशान तनेजा की कंपनी लगातार कर रही है। यूएएस इंटरनेशनल ने कई एजुकेशन के संस्थानों के साथ एमओयू भी साइन किए हैं जिसका फायदा जहां संस्थानों को मिल रहा है वहीं युवा छात्रों को भी काफी लाभ हो रहा है।

संगम लाल गुप्ता ने कहा कि आज नई शिक्षा नीति में कई ऐसे प्रावधान है जिसके लिए संस्थान में एक्सपोजर लाने की जरूरत है जिसके लिए यूएएस इंटरनेशनल लगातार कार्य कर रहा है। हम उम्मीद करते हैं यूएएस इंटरनेशनल अवार्ड पाकर और बेहतर कार्य करने की ओर उत्साहित होगा।

अवार्ड मिलने पर खुशी व्यक्त करते हुए ईशान तनेजा कहा कि यह बड़ा सम्मान है। इस तरह के सम्मान मिलने से कार्यों में उत्साह आता है वहीं जिम्मेवारी भी बढ़ जाती है।

ईशान तनेजा ने कहा कि उनके द्वारा शुरू की गई कंपनी से संस्थानों ने सराहा है वही युवा छात्रों को काफी फायदा हुआ है। इसी कारण से ही जूरी सदस्यों ने इस अवार्ड के लिए चुना है। इस खास अवार्ड से सम्मानित करने के लिए आयोजक को बहुत बहुत धन्यवाद। हमारी कोशिश है कि एजुकेशन के स्टेक होल्डर के रूप में ओर बेहतरीन कार्य करे जिससे देश समाज को फायदा हो।

गौरतलब है कि यूएएस ग्रुप ऑफ कंपनी पिछले नौ वर्षों में चार कंपनियों सफलतापूर्वक चला रहा है। जिसमें यूएएस इंटरनेशनल वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी, यूएएस इंटरनेशनल हॉस्टल चेन, यूएएस इंटरनेशनल हॉलिडेज प्रा. लि. है और अभी एलोफ्ट करियर नाम से ऑन लाइन एजुकेशन का नया प्लेटफोर्म तैयार किया गया है जिसको लेकर युवाओं में उत्साह है।