गर्भवती महिलाओं और बच्चों को विभिन्न बीमारियों से बचाने के लिए नियमित टीकाकरण है आवश्यक 

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-नियमित टीकाकरण से मजबूत होती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
– नियमित टीकाकरण नहीं कराने से बच्चों के बीमार होने का खतरा अधिक
मुंगेर, 12 जुलाई-
गर्भस्थ शिशु की अच्छी सेहत के लिए गर्भवती महिलाओं और बच्चों का नियमित टीकाकरण बहुत ही जरूरी है। जिन गर्भवती महिलाओं और उनके बच्चों को नियमित टीकाकरण की सभी खुराक लग जाती  तो उस बच्चे की रोग – प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो जाती है। इसकी वजह से वो जल्दी किसी भी प्रकार की  बीमारी की चपेट में नहीं आता है। यदि वो किसी बीमारी की चपेट में आ भी जाता  तो वह उससे जल्द ही उबर भी जाता है। बावजूद इसके जिन गर्भवती महिलाओं और बच्चों का नियमित टीकाकरण नहीं हो पाता  तो उन बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता उतनी मजबूत नहीं होती  और वो किसी भी बीमारी की चपेट में जल्द ही आ जाता है। इसके अलावा इससे उबरने में भी उसे काफी परेशानी होती है। इन्हीं सभी कारणों से बच्चों का नियमित टीकाकरण अवश्य  करवाना चाहिए।
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. राजेश कुमार रौशन ने बताया कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों को गंभीर बीमारी से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण बेहद जरूरी है। इससे न केवल गंभीर बीमारी से बचाव होता है, बल्कि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को भी बढ़ावा मिलता है। इसके साथ ही बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास भी बेहतर तरीके से होता है। इन्ही सभी कारणों से जिला के सभी लाभार्थियों से अपील है कि जो गर्भवती महिलाएं एवं बच्चे अभी तक नियमित टीकाकरण नहीं करवा पाएं हैं वो अपने नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्रों या फिर अस्पतालों पर जाकर निश्चित रूप से टीकाकरण कराएं। नियमित टीकाकरण पर जोर देते हुए डॉ. रौशन ने कहा कि नियमित टीकाकरण एक स्वस्थ राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कायर्क्रम है जो गर्भवती महिलाओं से आरंभ होकर शिशु के पांच साल तक होने तक नियमित रूप से दिये जाते हैं। ये टीके शिशुओं को कई प्रकार की जानलेवा बीमारियों से बचाते हैं। शिशुओं को दिया जाने वाला टीका शिशुओं के शरीर में जानलेवा संबंधित बीमारियों से बचने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को विकसित और मजबूती प्रदान करते हैं। इस प्रकार कई तरह की  जानलेवा बीमारियों से शिशुओं को बचने के खास टीके विकसित किये गये हैं, जिनका टीकाकरण करवाना आवश्यक है।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर होता है नियमित टीकाकरणः
उन्होंने बताया कि नियमित टीकाकरण का आयोजन जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर हर सप्ताह बुधवार और शुक्रवार को होता है। जरूरत पड़ने पर अन्य दिन भी टीकाकरण किया जाता है। इसके माध्यम से दो वर्ष तक के बच्चों को टीके लगाए जाते हैं। नियमित टीकाकरण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारियों से बचाव करता है। इसके साथ ही प्रसव के दौरान जटिलताओं से सामना करने की भी संभावना नहीं के बराबर रहती है। गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण होने से संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिलता है।
ये हैं जरूरी टीके:
जन्म होते ही – ओरल पोलियो, हेपेटाइटिस बी, बीसीजी
डेढ़ महीने बाद – ओरल पोलियो-1, पेंटावेलेंट-1, एफआईपीवी-1, पीसीवी-1, रोटा-1
ढाई महीने बाद – ओरल पोलियो-2, पेंटावेलेंट-2, रोटा-2
साढ़े तीन महीने बाद – ओरल पोलियो-3, पेंटावेलेंट-3, एफआईपीवी-2, रोटा-3, पीसीवी-2
नौ से 12 माह में – मीजल्स-रुबेला 1, जेई 1, पीसीवी-बूस्टर, विटामिन ए
16 से 24 माह में:
मीजल्स-रुबेला 2, जेई 2, बूस्टर डीपीटी, पोलियो बूस्टर, जेई 2
ये भी हैं जरूरी:
5 से 6 साल में – डीपीटी बूस्टर 2
10 साल में – टेटनेस
15 साल में – टेटनेस
गर्भवती महिला को – टेटनेस 1 या टेटनेस बूस्टर ।

बदलते मौसम में मौसमी बीमारियों के साथ डायरिया की भी बढ़ी संभावना, रहें सतर्क और सावधान 

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– पोषक तत्व का करें उपयोग, डायरिया के प्रकोप से रहेंगे दूर
– गर्म और ताजा खाना का करें सेवन, साफ-सफाई का रखें विशेष ख्याल
खगड़िया, 12 जुलाई-
 मौसम में हो रहे  लगातार बदलाव के साथ   जहाँ सर्दी-खाँसी, जुखाम समेत अन्य मौसमी बीमारी आम हो गई है वहीं, इसके साथ डायरिया की भी संभावना बढ़ गई है। ऐसे में हमें विशेष सावधान और सतर्क रहने की जरूरत है। डायरिया से बचाव को लिए लोगों को स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना चाहिए। दरअसल, बदलते मौसम में डायरिया के प्रकोप में आने की  प्रबल संभावना हो जाती है। जिसके दायरे में कोई भी यानी सभी आयु वर्ग के लोग आ सकता है। डायरिया के कारण अत्यधिक निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) होने से समस्याएँ बढ़ जाती  और उचित प्रबंधन के अभाव में यह जानलेवा भी हो जाता है। इसके लिए डायरिया के लक्षणों के प्रति सतर्कता एवं सही समय पर उचित प्रबंधन कर डायरिया जैसे गंभीर रोग से आसानी से सुरक्षित किया जा सकता है।
– बदलते मौसम में सिर्फ मौसमी बीमारियाँ का ही नहीं, बल्कि डायरिया की भी रहती है आशंका :
परबत्ता सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ राजीव रंजन ने बताया, बदलते मौसम में   मौसमी बीमारियों के साथ  डायरिया व अन्य बीमारियों की भी संभावना बढ़ जाती है। इसलिए, लोगों को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की जरूरत है और खानपान का विशेष ख्याल रखना चाहिए। पौष्टिक आहार के  सेवन पर बल देना चाहिए। क्योंकि, पोषण युक्त खाना संक्रामक और मौसमी बीमारियों से बचाव में काफी हद तक सहयोग करता है।
– जाने  क्या है डायरिया और लक्षण :
टट्टी (पैखाना) की अवस्था बदलाव या सामान्य से ज्यादा बार, ज्यादा पतला या पानी जैसी होने वाली टट्टी ही डायरिया (दस्त) का पहला लक्षण है। इसके अलावा बच्चा बेचैन व चिड़चिड़ा है, अथवा सुस्त या बेहोश है। बच्चे की ऑखें डाउन हो रही है। बच्चे को बहुत ज्यादा प्यास लगना अथवा पानी नहीं पी पाना। चिकोटी काटने पर पेट के बगल की त्वचा खींचने पर धीरे-धीरे पूर्वावस्था में आना अर्थात त्वचा के लचीलेपन में कमी आना आदि डायरिया का ही कारण और लक्षण है।
– डायरिया होने पर 14 दिनों तक जिंक का करें सेवन :
डायरिया होने पर लगातार 14 दिनों तक जिंक का सेवन करें। 02 माह से 06 माह तक के बच्चों को जिंक का 1/2 गोली 10 मिग्रा पानी में घोलकर या माँ के दूध के साथ घोलकर चम्मच से पिलाएं। 06 माह से 05 साल के बच्चों को एक गोली साफ पानी के माँ के दूध में घोलकर पिलाएं। जबकि, दो माह से कम आयु के बच्चों को 05 चम्मच ओआरएस प्रत्येक दस्त के बाद पिलाएं। 02 माह से 02 वर्ष तक बच्चे को 1/4 ग्लास से 1/2 ग्लास प्रत्येक दस्त के बाद पिलाएं। 02 से 05 वर्ष तक के बच्चों को 1/2 से ग्लास प्रत्येक दस्त के बाद पिलाएं।
– जिंक सेवन के ये हैं विशेष लाभ :
जिंक सेवन से दस्त और तीव्रता दोनों कम होता है। तीन महीने तक दस्त का खतरा नहीं के बराबर रहता है। रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। जबकि, ओआरएस से शरीर में पानी की कमी नहीं होती है एवं दस्त के खतरे से बचाव करता है।
– साफ-सफाई का रखें विशेष ख्याल :
डायरिया से बचाव को लेकर साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखने की जरूरत है। दरअसल, साफ-सफाई हमें ना सिर्फ किसी एक बीमारी बल्कि अनेकों बीमारी (खासकर संक्रामक)   से दूर रखती है। इसके लिए खाने से पहले हाथों की नियमित तौर पर अच्छी तरह सफाई करें। घर के आसपास गंदगी और जलजमाव नहीं होने दें।
– गर्म व ताजा खाना का करें सेवन :
डायरिया से बचाव को लेकर गर्म व ताजा खाना खाएँ और बासी खाना से दूर रहे हैं। फ्रिज में रखें खाना खाने से परहेज करें। इसके अलावा समय पर खाना खाएं और अधिक देर तक भूखा नहीं रहें।

एचआईवी पॉजिटिव लोगों को टीबी से ग्रसित होने की संभावना अधिक

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• एचआईवी पॉजिटिव लोगों की कमजोर प्रतिरोधक क्षमता इसकी बड़ी वजह
• टीबी से ग्रसित मरीजों को हो सकती हैं कई स्वास्थ्य समस्याएँ
पटना, 12 जुलाई
 एचआईवी पॉजिटिव यानि एड्स से ग्रसित लोगों को हमारे समाज में अछूत  समझा जाता है. सामाजिक तिरस्कार के भय से कई एचआईवी पॉजिटिव मरीज अपनी बीमारी को लेकर चिकित्सकों से संपर्क करने से कतराते हैं और रोग के प्रबंधन से वंचित रह जाते हैं. ऐसे मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अत्यधिक कमजोर होती और मेयो क्लिनिक की रिपोर्ट के अनुसार एचआईवी पॉजिटिव लोगों को टीबी से ग्रसित होने की संभावना आम लोगों की अपेक्षा कई गुना अधिक होती है. रिपोर्ट में बताया गया है कि एचआईवी पॉजिटिव लोगों को नियमित अंतराल पर अपनी जांच करानी चाहिए जिससे उन्हें पता चल सके कि उन्हें टीबी का संक्रमण है अथवा नहीं.
कमजोर प्रतिरोधक क्षमता इसकी बड़ी वजह:
मेयो क्लिनिक की रिपोर्ट की रिपोर्ट में बताया गया है कि अस्सी के दशक से पूरे विश्व में एचआईवी पॉजिटिव मरीजों में टीबी संक्रमण तेजी से बढ़ा है. इसकी प्रमुख वजह मरीजों की कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है जिससे उनका शरीर कई तरह के संक्रामक रोगों से लड़ने में असक्षम होता है. रिपोर्ट के अनुसार एचआईवी पॉजिटिव लोगों को आगे आकर  अपनी पूरी जांच करानी चाहिए ताकि क्षय रोग के संक्रमण की पुष्टि की जा सके.
टीबी से ग्रसित मरीजों को हो सकती हैं कई स्वास्थ्य समस्याएँ:
सेंटर फॉर डिजिज कंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार टीबी संक्रमण शरीर के कई अंगों को अपनी  चपेट में लेकर बुरी तरह से प्रभावित करता है. रीढ़ की हड्डी में दर्द और शरीर में जकड़न अनुभव करना, शरीर के जोड़ों में असहनीय दर्द का रहना और लिवर  और किडनी की क्षमता प्रभावित होना गंभीर टीबी संक्रमण के कारण नजर आने वाले प्रमुख लक्षण हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि मष्तिष्क की कोशिकाओं का फूलना जो  आगे चलकर मष्तिष्क के टीबी में परिवर्तित होता है भी संक्रमण का लक्षण है. कुछ मामलों में टीबी संक्रमण ह्रदय को भी प्रभावित करता है. एचआईवी पॉजिटिव मरीजों में प्रतिरोधक क्षमता की कमी के कारण उनमे ये लक्षण जल्दी दिखाई देते हैं और मरीजों के लिए घातक सिद्ध हो सकते हैं.
दवा का पूरा कोर्स खाना जरूरी:
जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. कुमारी गायत्री सिंह ने बताया कि टीबी का संक्रमण किसी को भी हो उसके उपचार के लिए दवा का पूरा कोर्स खाना जरूरी होता है. सरकारी अस्पताल और डॉट्स केंद्रों में इसका नि:शुल्क इलाज होता है. टीबी की दवा का अनियमित सेवन करना, बिना चिकित्सीय परामर्श के दुकानों से टीबी की दवा लेना एवं टीबी की दवा खाने से पहले ड्रग सेंसटिविटी जांच नहीं होने से भी एमडीआर टीबी होने की का संभावना बढ़ जाती है. सीबीनेट जैसी नई मशीन की सहायता से टीबी की जांच नि:शुल्क की जा रही है. टीबी पीड़ितों के बेहतर पोषण के लिए सरकार 500 रुपये की सहायता राशि भी दे रही है.

कालाजार से मुक्ति के लिए पहले चरण का छिड़काव का काम पूरा

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-अमरपुर के गदाल और धोरैया के काठबनगांव में सिंथेटिक पायराथायराइड का किया गया छिड़काव
-जिले के कुल आठ( अन्य छह प्रभावित) गांवों में अगस्त- अक्टूबर महीने में द्वितीय चक्र के छिड़काव का भेजा गया प्रस्ताव
बांका, 12 जुलाई-
जिले को कालाजार से मुक्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयासरत है। इसी सिलसिले में कालाजार से प्रभावित गांवों में सिंथेटिक पायराथायराइड का छिड़काव कराया गया। अभी पहले चरण के तहत अमरपुर प्रखंड के गदाल और धोरैया प्रखंड के काठबनगांव गांव में सिंथेटिक पायराथायराइड के छिड़काव का काम पूरा किया गया है। अगस्त-अक्टूबर महीने में जिले के इन दो गांव समेत कुल आठ कालाजार प्रभावित गांवों में सिंथेटिक पायराथायराइड के छिड़काव का प्रस्ताव है।
वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी आरिफ इकबाल ने बताया कि पहले चरण में उन दो गांवों में सिंथेटिक पायराथायराइड का छिड़काव किया गया जहां पर कि 2021 और 22 में कालाजार के मरीज मिले थे। जिले के प्रभावित इन दो गांव समेत अन्य छह गांवों में अगस्त-अक्टूबर में सिंथेटिक पायराथायराइड के छिड़काव को लेकर माइक्रो एक्शन प्लान बनाकर राज्य को प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद अगस्त-अक्टूबर में छिड़काव कराया जाएगा। मालूम हो कि अमरपुर प्रखंड के गदाल गांव में 2021 में कालाजार का मरीज मिला था, जो कि अब पूरी तरह से स्वस्थ है। इसी तरह धोरैया के काठबनगांव गांव में 2022 में कालाजार का मरीज मिला। वह भी अब ठीक है। दोनों मरीज के इलाज के साथ दवा का भी प्रबंध स्वास्थ्य विभाग की ओर से मुफ्त में किया गया। साथ ही विभाग की ओर से दोनों ही मरीजों को प्रति मरीज़ ₹7100 की सहायता राशि भी दी गई।
घर के पास जलजमाव नहीं होने दें: जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. बीरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि कालाजार उन्मूलन को लेकर दवा का छिड़काव किया जा रहा है, लेकिन लोगों को भी बीमारी से बचाव के लिए घर के आसपास जलजमाव नहीं होने देना चाहिए। यदि जलजमाव की स्थिति है तो उसमें केरोसिन तेल डालना चाहिए। घरों के आस पास साफ सफाई रखनी चाहिए। सोते समय मच्छरदानी लगाएं। साथ ही बच्चों को पूरा कपड़ा पहनायें व शरीर पर मच्छर रोधी क्रीम लगाएं। कालाजार के खतरे को देखते हुए अपने घरों की भीतरी दीवारों और बथानों में कीटनाशक का छिड़काव कराने व आसपास के हिस्से को सूखा व स्वच्छ रखने की अपील की गई।
कालाजार की ऐसे करें पहचान: डॉ. बीरेंद्र ने बताया कालाजार एक वेक्टर जनित रोग है। कालाजार के इलाज में लापरवाही से मरीज की जान भी जा सकती है। यह बीमारी लिश्मैनिया डोनोवानी परजीवी के कारण होता है। यदि व्यक्ति को दो सप्ताह से बुखार और तिल्ली और जिगर बढ़ गया हो तो यह कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। साथ ही मरीज.को भूख न लगने, कमजोरी और वजन में कमी की शिकायत होती है। यदि इलाज में देरी होता है तो हाथ, पैर व पेट की त्वचा काली हो जाती है। बाल व त्वचा के परत भी सूखकर झड़ते हैं। उन्होंने बताया कि कालाजार के संभावित लक्षण दिखने पर क्षेत्र की आशा से तुरंत संपर्क करना चाहिए और रोगी को किसी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाना चाहिए।

टीबी मरीजों की खोज में धर्मगुरुओं का लिया जाएगा सहारा

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-सावन में प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों के पास धर्मगुरुओं से कराई जाएगी अपील
-केएचपीटी ने स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर इस मुद्दे पर बनाई रणनीति
भागलपुर, 12 जुलाई-
2025 तक जिले को टीबी से मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग प्रतिबद्ध है। इसे लेकर लगातार अभियान चल रहा है। जिले में अब इस सिलसिले में एक नई पहल होने जा रही है। कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएसपीटी) स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर टीबी मरीजों की खोज के लिए धर्मगुरुओं का सहारा लेने जा रहा है। इसे लेकर मंगलवार को डीआरयू में एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में बताया गया कि 14 जुलाई से सावन महीना शुरू हो रहा है। इस महीने में शिवालयों में पूजा-अर्चना के लिए काफी संख्या में लोग आते हैं। इसी बात को ध्यान में रखकर केएचपीटी ने जिले के प्रमुख शिवालयों और धार्मिक स्थलों की एक सूची बनाई है। उन जगहों पर जाकर स्थानीय धर्मगुरु, जिनकी  समाज पर अच्छी पकड़ हो उनसे टीबी को लेकर अपील करवाई जाएगी। उनके जरिये लोगों से टीबी के बचाव को लेकर सतर्कता बरतने की अपील करवाई जाएगी। धर्मगुरु टीबी के लक्षण और सरकारी अस्पतालों में इसके मुफ्त जांच, इलाज औऱ दवा के साथ टीबी मरीजों को मिलने वाली सहायता राशि के बारे में लोगों को जानकारी देंगे। चूकि धर्मगुरुओं की समाज पर बेहतर पकड़ होती है, इसलिए इस अभियान से व्यापक तौर पर मदद मिलने की उम्मीद है, जिससे बड़ी संख्या में टीबी के नए मरीज मिलने का अनुमान है। टीबी के मरीज अगर मिल जाएंगे तो वह दवा लेने के बाद स्वस्थ भी होंगे। इससे 2025 तक जिले को टीबी से मुक्त करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
टीबी से मुक्त होने में एक कदम आगे बढ़ेगा जिलाः केएचपीटी की जिला टीम लीडर आरती झा कहती हैं कि हमलोग जिले में टीबी को लेकर लगातार अभियान चला रहे हैं। पिछले एक साल में अभियान के तहत काफी नए मरीज मिले हैं और ठीक भी हुए हैं। इसके अलावा टीबी मरीजों की आर्थिक से लेकर सामाजिक और मानसिक मदद भी हमलोगों ने की है। धर्मगुरुओं के जरिये टीबी मरीजों की खोज और इलाज को लेकर नई पहल करने जा रहे हैं। उम्मीद है कि इसमें हमलोगों को सफलता मिलेगी और जिला टीबी से मुक्त होने में एक कदम और आगे बढ़ेगा।
जांच से लेकर दवा तक की मुफ्त व्यवस्थाः जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. दीनानाथ कहते हैं कि केएचपीटी की यह पहल सराहनीय है। स्वास्थ्य विभाग टीबी मरीजों को तेजी से स्वस्थ होने में लगातार प्रयासरत है। जागरूकता अभियान से लेकर स्क्रीनिंग का काम जिले में चलता ही रहता है। अब धर्मगुरुओं की मदद लेने से टीबी के खिलाफ अभियान तेज होगा। उन्होंने कहा कि टीबी के लक्षणों और इसके बचाव के बारे में जागरूकता बढ़ती जा रही है। लोगों में अब यह समझ पैदा हो रही है कि लागातार दो हफ्ते से अधिक समय तक खांसी होना, बलगम के साथ खून आना, वजन कम होना और शाम के वक्त पसीना आना और बुखार होना, ये सब टीबी के लक्षण हैं। अगर किन्ही में ये लक्षण दिखाई दे तो तत्काल सरकारी अस्पताल में आकर जांच करवाएं। यहां पर टीबी की जांच, इलाज से लेकर दवा तक की मुफ्त व्यवस्था है। साथ ही जब तक इलाज चलेगा, तब तक सहायता राशि भी दी जाएगी।

विश्व जनसंख्या दिवस • जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में परिवार नियोजन की सुविधा शुरू

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– सदर अस्पताल परिसर में निजी स्कूल के बच्चों द्वारा नुक्कड़ नाटक के माध्यम परिवार नियोजन का दिया गया संदेश
– सिविल सर्जन ने पखवाड़े का विधिवत किया उदघाटन, 31 जुलाई तक चलेगा पखवाड़ा
बेगूसराय-
विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर सोमवार से जिले भर में जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा के तहत परिवार नियोजन की सुविधा शुरू हो गई, जिसका समापन 31 जुलाई को होगा। इस दौरान जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित तौर पर परिवार नियोजन शिविर का आयोजन कर योग्य लाभार्थियों को महिला बंध्याकरण और पुरूष नसबंदी की सुविधा प्रदान की जाएगी। उक्त पखवाड़े का सिविल सर्जन डाॅ प्रमोद कुमार सिंह ने सदर अस्पताल एवं शहरी पीएचसी उलाव परिसर उद्घाटन  किया। इसके बाद जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में पखवाड़े का शुभारंभ हुआ। जहाँ संबंधित स्वास्थ्य संस्थान के पीएचसी प्रभारी ने पखवाड़े का उदघाटन किया। इस अवसर पर जागरूकता रैली, नुक्कड़ नाटक समेत अन्य गतिविधियों का आयोजन कर परिवार नियोजन का संदेश दिया गया और योग्य व इच्छुक लाभार्थियों को परिवार नियोजन के साधन को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। वहीं, सदर अस्पताल परिसर में एक निजी स्कूल के बच्चों द्वारा नुक्कड़ नाटक का प्रस्तुतिकरण कर छोटा और खुशहाल परिवार के लिए परिवार नियोजन कितना जरूरी है समेत अन्य संदेश देकर लोगों को प्रेरित किया गया। इस अवसर पर जिला गैर-संचारी रोग पदाधिकारी डॉ संजय कुमार सिंह, प्रशासी पदाधिकारी डॉ बीके शर्मा, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ गोपाल मिश्रा, डीपीएम शैलेश चन्द्र, केयर इंडिया के डीटीएल गुंजन गौरव, डॉ रतीश रमन, संतोष संत, डीसीएम कुणाल कुमार, डॉ रजत आर्यन आदि मौजूद थे।
– परिवार नियोजन योजना को अपनाने के लिए घर के पुरुषों की सहभागिता जरूरी :
इस अवसर पर सिविल सर्जन डाॅ प्रमोद कुमार सिंह ने कहा, परिवार नियोजन के साधन को अपनाने में इच्छुक महिलाएं भी अक्सर पुरूषवादी सोच का शिकार हो जाती हैं। जिसके कारण वह इन साधन को अपनाने से वंचित रह जाती हैं। इसलिए, इस योजना को अपनाने के लिए खासकर घर के पुरुष सदस्यों की सहभागिता बेहद जरूरी है ।  जब पुरूष सहभागिता बढ़ेगी तो इच्छुक महिलाओं को इस योजना को अपनाने से कोई नहीं रोक सकता है। मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि परिवार नियोजन पूरी तरह सुरक्षित है। इसलिए, आपलोग पुराने ख्यालात एवं मन में पल रहे अवधारणा से बाहर आकर अपने घर की महिलाओं को कम से कम इसे अपनाने के लिए प्रेरित करें। इसे अपनाने से ही खुशहाल, शिक्षित और छोटा परिवार का निर्माण संभव है।
– योग्य दंम्पत्तियों को चिह्नित कर घर-घर जाकर किया जा रहा है जागरूक :
डीपीएम शैलेश चंद्र ने बताया, जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा की सफलता को लेकर  संबंधित क्षेत्र की एएनएम, आशा, ऑगनबाड़ी सेविका समेत स्वास्थ्य टीम में शामिल अन्य कर्मियों द्वारा योग्य दंम्पत्तियों को चिह्नित कर घर-घर जाकर जागरूक किया जा रहा है। साथ ही इस मुहिम को सफल बनाने के लिए परिवार नियोजन की सुविधा अपनाने से होने वाले फायदे की योग्य लाभार्थियों एवं उनके परिजनों को विस्तृत जानकारी दी जा रही है। ताकि लोग पुरानी प्रथा से बाहर आकर इस मुहिम को सफल बनाने के लिए बेहिचक आगे आएं और लोगों के मन में किसी प्रकार की भ्रम या अफवाह उत्पन्न नहीं हो।
– स्थाई और अस्थाई उपायों की भी जानकारी दी जा रही है जानकारी :
 इच्छुक और योग्य लाभार्थी को स्थाई और अस्थाई दोनों उपायों की जानकारी दी जा रही है। ताकि अगर कोई महिला परिवार नियोजन ऑपरेशन को अपनाने के लिए तैयार है। किन्तु, उनका शरीर ऑपरेशन के लिए सक्षम नहीं है तो ऐसी महिला अस्थाई उपायों को अपना सकती है। उन्होंने बताया, अस्थाई उपाय भी पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी है। इसलिए, ऐसी महिला कंडोम, काॅपर-टी, अंतरा, छाया समेत अन्य वैकल्पिक व्यवस्था को अस्थाई उपायों के रूप अपना सकती हैं।

परिवार नियोजन के प्रति लोगों को प्रेरित करके हर कोई बन सकता है उत्प्रेरक, तत्काल मिलती है प्रोत्साहन राशि : सिविल सर्जन 

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– सदर अस्पताल  में सिविल सर्जन, एसीएमओ, डीपीएम, अस्पताल उपाधीक्षक ने किया जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा का उद्घाटन
–  परिवार नियोजन के प्रति लोगों जागरूक करने को लेकर एएनएम स्कूल की छात्राओं ने निकाली प्रभात फेरी
मुंगेर-
  परिवार नियोजन के प्रति लोगों को प्रेरित करके  हर कोई बन सकता है उत्प्रेरक, तत्काल मिलती है प्रोत्साहन राशि । उक्त बातें सोमवार को विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर  जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा का  उदघाटन करते जिला के सिविल सर्जन डॉ. पीएम सहाय ने कही। इस अवसर पर जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (एसीएमओ) डॉ. आनंद शंकर शरण सिंह, जिला कार्यक्रम प्रबंधक नसीम रजि, क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक रूप नारायण शर्मा, अस्पताल उपाधीक्षक राम प्रवेश प्रसाद, जिला सामुदायिक उत्प्रेरक निखिल राज, अस्पताल प्रबन्धक मनीष कुमार, सदर अस्पताल में परिवार नियोजन के परामर्श दाता योगेश कुमार और केयर इंडिया की डीटीओ ऑफ डॉ. नीलू सहित कई पदाधिकारी और एएनएम स्कूल की छात्राएं उपस्थित थीं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन ने कहा कि आज से 31 जुलाई तक चलने वाला जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा परिवार नियोजन के लिए लोगों को जागरूक करने का एक अभियान है ताकि लोग परिवार नियोजन  के लिए आगे आएं और उनके परिवार का सर्वांगीण विकास संभव हो सके। उन्होंने बताया कि परिवार नियोजन के लिए सभी लोगों को उत्प्रेरक की  भूमिका अदा करते हुए अपने परिवार और समाज में लोगों को परिवार नियोजन के लिए स्थायी और अस्थाई साधनों का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। इसके लिए राज्य सरकार के द्वारा उत्प्रेरक को तत्काल प्रोत्साहन राशि के भुगतान की   व्यवस्था की गई है।
कार्यक्रम में उपस्थित एएनएम स्कूल की छात्राओं को संबोधित करते हुए जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबन्धक नसीम रजि ने बताया कि आप लोग परिवार नियोजन के लिए लोगों की  काउंसलिंग कीजिये इससे आप लोगों की  कैपेसिटी बिल्ड होगी। आज के समय में सबसे अधिक अधिक ताकतवर वही है जिनकी  बातों में प्रभाव हो। आप लोगों के द्वारा काउंसलिंग करने से यदि कोई व्यक्ति  परिवार नियोजन के स्थायी या साधन अपनाने के लिए तैयार हो जाता है तो ये आप लोगों के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। उन्होंने  बताया कि आप लोग भी उत्प्रेरक की भूमिका अदा कर सकती हैं।
जिला स्वास्थ्य समिति के जिला सामुदायिक समन्वयक (डीसीएम) निखिल राज ने बताया कि परिवार नियोजन का साधन अपनाने वाले लाभार्थी और उनके उत्प्रेरक दोनों को राज्य सरकार के द्वारा निर्धारित प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
                   लाभार्थी – उत्प्रेरक
पुरुष नसबंदी – 3000 – 400
महिला बंध्याकरण -2000- 300
प्रसव पश्चात कॉपर टी – 300 – 150
गर्भपात उपरांत कॉपर टी – 300 – 150
गर्भ निरोधक सुई ( अंतरा ) – 100- 100
इससे पूर्व परिवार नियोजन के प्रति लोगों में जागरूकता को लेकर एएनएम स्कूल की  छात्राओं के द्वारा सदर अस्पताल परिसर से प्रभात फेरी निकली गई जो सदर अस्पताल से निकलकर 1 नंबर ट्रैफिक चौक होते हुए पुनः सदर अस्पताल पहुंची।

लखीसराय जिले में लगातार जारी है नियमित टीकाकरण

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– जिले के सभी अस्पताल, सामुदायिक एवम् प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों पर लगातार गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और छोटे- छोटे बच्चों का किया जाता है  टीकाकरण
– आरोग्य दिवस के दिन बुधवार एवं  शुक्रवार को जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं का किया जाता है  नियमित टीकाकरण
लखीसराय-
जिले में नियमित टीकाकरण का क्रम लगातार जारी है। सदर अस्पताल लखीसराय के साथ- साथ जिले के रेफरल अस्पताल, सामुदायिक, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के साथ ही जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर नियमित रूप से गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं के साथ ही छोटे- छोटे बच्चों का नियमित टीकाकरण किया जा रहा  है। बुधवार एवं शुक्रवार  को आरोग्य दिवस के दिन जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्र पर  नियमित टीकाकरण किया जाता है ।
– गर्भवती और शिशु के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी :
एसीएमओ सह डीआईओ डाॅ अशोक कुमार भारती ने बताया, सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने एवं शिशु के स्वस्थ्य शरीर निर्माण के लिए समय पर नियमित टीकाकरण जरूरी है। इसलिए, समय पर सभी योग्य लाभार्थियों का टीकाकरण सुनिश्चित कराने को जिले में लगातार अभियान चलाकर टीकाकृत किया जा रहा है। ताकि ससमय पर नियमित टीकाकरण सुनिश्चित हो सके। वहीं, उन्होंने बताया, नियमित टीकाकरण के दौरान शून्य से दो वर्ष तक के बच्चों को बीसीजी, ओपीवी, पेंटावेलेंट, रोटा वैक्सीन, आईपीवी, मिजल्स, विटामिन ए, डीपीटी बूस्टर डोज, मिजल्स बूस्टर डोज और बूस्टर ओपीवी के टीके लगाए जाते  और गर्भवती को टेटनेस-डिप्थीरिया (टीडी) का टीका भी लगाया जाता है। नियमित टीकाकरण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारी से बचाव करता है। साथ ही प्रसव के दौरान जटिलताओं से सामना करने की भी संभावना नहीं के बराबर रहती है।
टेटनस और डिप्थेरिया से बचाव के लिए टीडी वैक्सीन बेहद जरूरी :
टीडी वैक्सीन टेटनस और डिप्थेरिया जैसे गंभीर रोगों से बचाव के लिए के लिए  बेहद जरूरी है। दरअसल, कम उम्र के किशोरों को दोनों रोगों से प्रभावित होने का खतरा अधिक रहता है। जिसके कारण किशोरों को दोनों रोगों से बचाव के लिए सरकार द्वारा यह पहल की गई। इसलिए, उक्त दोनों रोगों से बचाव के लिए सभी लाभार्थियों को टीडी का वैक्सीनेशन निश्चित रूप से कराना चाहिए। ताकि दोनों बीमारियों के खतरे से सभी किशोर सुरक्षित रह सकें।
10 से 16 आयु वर्ग के दायरे  में आने वाले किशोर-किशोरियों को भी टीडी की वैक्सीन
अब नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत जिले के 10 से 16 आयु वर्ग के दायरे में आने वाले सभी किशोर-किशोरियों को टीडी की वैक्सीन दी जाएगी।  जिसमें आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) टीम का भी  सहयोग लिया जा रहा  है। दरअसल, आरबीएसके टीम द्वारा पूर्व से वार्षिक कार्य योजना के तहत स्कूली बच्चों को नियमित अंतराल पर स्वास्थ्य जाँच की जाती है। जिसके कारण इस टीम के माध्यम से कार्य कराना सुविधाजनक होगा और शत-प्रतिशत बच्चों की टीडी टीकाकरण  सुनिश्चित होगा।

बच्चों को विभिन्न प्रकार के गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी

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– प्रत्येक बुधवार और शुक्रवार को ऑगनबाड़ी केंद्रों पर होता है नियमित टीकाकरण
– बच्चों को बीमारी से दूर रखने के लिए जरूर कराएं टीकाकरण और अनावश्यक परेशानियों से रहें दूर

खगड़िया-

बच्चों के लिए नियमित टीकाकरण (आरआई) बहुत जरूरी है। यह शरीर में बीमारियों के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता पैदा करता है। साथ ही एंटीबॉडी बनाकर शरीर को सुरक्षित रखता है। टीकाकरण से बच्चों में जानलेवा बीमारियों का खतरा बहुत अधिक कम हो जाता है। शिशुओं की मौत की एक बड़ी वजह उनका सही तरीके से टीकाकरण नहीं होना है। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, टीकाकरण संक्रमण के बाद या बीमारी के खिलाफ व्यक्ति की रक्षा करता और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाता है। शिशुओं को स्तनपान कराने से भी उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली तेज होती है। टीकाकरण से बच्चों को चेचक, हेपेटाइटिस जैसी अन्य बीमारियों से बचाया जा सकता है। वहीं, उन्होंने बताया, इसलिए, टीकाकरण शिशु के लिए बहुत जरूरी है। बच्चों में होने वाली बीमारियों व संक्रमण का असर तेजी से उनके शरीर पर होता और उनके अंगों को प्रभावित करता है। बीसीजी, हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस बी, डीटीपी, रोटावायरस वैक्सीन , इंफ्लुएंजा व न्यूमोनिया के लिए टीकाकरण किये जाते हैं।

– प्रत्येक बुधवार और शुक्रवार को ऑगनबाड़ी केंद्रों पर होता है नियमित टीकाकरण :
प्रत्येक बुधवार और शुक्रवार को जिले के ऑंगनबाड़ी केंद्रों पर नियमित रूप से नियमित टीकाकरण का आयोजन किया जाता है। जिसके माध्यम से ऑंगनबाड़ी केंद्रों पर शिविर आयोजित कर एएनएम द्वारा संबंधित क्षेत्र की आशा और सेविका के सहयोग से बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया जाता है।

– ये वैक्सीन हैं जरूरी :
बी.सी.जी वैक्सीन : टीबी से फेफड़ों, दिमाग और शरीर के अंग प्रभावित होते हैं। यह रोग पीड़ित व्यक्ति के खांसने या छींकने से फैलती है। बीसीजी टीका के जरिये बच्चे को टीबी की बीमारी से बचाया जा सकता है। बच्चें को बच्चों के जन्म लेने के तुरंत बाद उन्हें बैसिले कैल्मेट गुरिन (बीसीजी) के टीके लगाये जाते हैं। यह बच्चों के भविष्य में क्षयरोग, टीबी मेनिनजाइटिस आदि रोगों के संक्रमण की संभावना को कम करता है।

– हेपेटाइटिस ए : हेपेटाइटिस ए विषाणुजनित रोग है, जो लिवर को प्रभावित करता है। दूषित भोजन, पानी या संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने की वजह से यह रोग फैलता है। बच्चों में यह रोग ज्यादा होता है। बुखार, उल्टी और जांडिस जैसे रोगों से बच्चा प्रभावित होता है। हेपेटाइटिस ए वैक्सीन का पहला टीका बच्चों को जन्म के 1 साल बाद लगाया जाता और दूसरा टीका पहली डोज के 6 महीने बाद लगाया जाता है।

– हेपेटाइटिस बी : हेपेटाइटिस बी रोग से बच्चों के लिवर में जलन और सूजन हो जाती है। नवजात शिशुओं को जन्म के बाद पहली डोज, 4 हफ्ते बाद दूसरी डोज और 8 हफ्ते के बाद हेपेटाइटिस बी की तीसरी डोज दी जाती है।

– डीटीपी : बच्चों को डिपथीरिया, टेटनस, काली खांसी जैसी गंभीर बीमारियों की रोकथाम के लिए डीटीपी का टीकाकरण किया जाता है। बच्चों को जन्म के 6 हफ्ते बाद डीटीपी का पहला टीका लगाया जाता है। 4 हफ्ते बाद दूसरा, बाद में 4 हफ्ते के अंतराल पर तीसरा और चौथा टीका 18 महीने और पांचवा टीका 4 साल के बाद लगवाया जाता है।

– रोटावायरस वैक्सीन : रोटावायरस तीन माह से लेकर दो साल की उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। इस वायरस से संक्रमित बच्चों को बुखार, पेट में दर्द के साथ उल्टी और पतले दस्त होते हैं।

– टायफॉइड वैक्सीन : टायफाइड दूषित भोजन, पानी और पेय पदार्थ के सेवन से होता है। . बच्चों में होने वाली डायरिया बीमारी दूषित भोजन व पानी के कारण ही होता है.। नवजात के लिए मां द्वारा नियमित स्तनपान बच्चों को डायरिया से बचाता है। . बच्चों को टाइफॉइड वैक्सीन का पहला टीका जन्म 9 महीने बाद और दूसरा टीका इसके 15 महीने बाद लगता है।

जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा का आगाज, अस्पतालों में लगे मेले

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-सदर और अमरपुर रेफरल अस्पताल में एसीएमओ ने किया मेले का उद्घाटन
-31 जुलाई तक जिले के लोगों को परिवार नियोजन के प्रति किया जाएगा जागरूक
बांका, 11 जुलाई-
जिले में जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा का आगाज सोमवार को हो गया। इसे लेकर जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में मेले का आयोजन किया गया, जहां पर लोगों को परिवार नियोजन की अस्थायी सामग्री का वितरण किया गया। साथ ही लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक भी किया गया। इस दौरान दंपतियों की काउंसिलिंग भी की गई। यह पखवाड़ा 31 जुलाई तक चलेगा। सदर अस्पताल में मेले का उद्घाटन एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी ने किया। मौके पर अस्पताल मैनेजर अमरेश कुमार, केयर इंडिया के डीटीओ राकेश कुमार और मयूकजी समेत कई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे। अमरपुर रेफरल अस्पताल में भी परिवार नियोजन मेले का उद्घाटन एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी ने ही किया। वहां पर भी लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक किया गया और अस्थायी सामग्री का वितरण किया गया।
उद्घाटन के बाद एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी ने कहा कि जनसंख्य स्थिरीकरण पखवाड़ा 31 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक किया जाएगा। साथ ही परिवार नियोजन में अस्थाई सामग्री के इस्तेमाल के बारे में भी लोगों को बताया जाएगा। अगर किसी के मन में अस्थायी सामग्री के उपयोग से साइड इफेक्ट का भय रहेगा तो उसे भी दूर किया जाएगा। डॉ. चौधरी ने कहा कि परिवार नियोजन में अस्थायी सामग्री बहुत ही कारगर है। कंडोम, कॉपर टी, अंतरा जैसी अस्थायी सामग्री के इस्तेमाल में लोगों को झिझक नहीं करना चाहिए। इससे किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है। साथ ही परिवार नियोजन में भी सहायक होता है। डॉ. चौधरी ने कहा कि पखवाड़ा के दौरान लोगों को बताया जाएगा कि पहला बच्चा 20 साल के बाद और दो बच्चे के बीच तीन का अंतराल रखने के बारे में लोगों को बताया जाएगा। साथ ही जिनलोगों के दो बच्चे हो गए हैं, उन्हें बंध्याकरण के लिए तैयार किया जाएगा।
दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल जरूरीः डॉ. चौधरी ने कहा कि दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल जरूरी है। इससे जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ रहता है। साथ ही बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। इससे बच्चा आगे जाकर बीमारी की चपेट में कम आता है। अगर आ भी गया तो वह उससे जल्द उबर जाता है। उन्होंने बताया कि जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा से पहले दंपति संपर्क पखवाड़ा चलाया गया। 26 जून से 10 जुलाई तक जिले में दंपति संपर्क पखवाड़ा चला। इसके तहत आशा कार्यकर्ता ने क्षेत्र में जाकर लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक किया। साथ ही योग्य दंपति को ढूंढ़ा। लोगों को दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल रखने के लिए आशा कार्यकर्ताओं ने जागरूक करने का काम किया। उन्होंने कहा कि परिवार नियोजन को लेकर जागरूकता का काम लगातार चलता रहता है। लोगों को इसमें दिलचस्पी बढ़ानी चाहिए। परिवार नियोजन से लोग न सिर्फ स्वस्थ पारिवारिक जीवन जीते हैं, बल्कि कई अन्य तरह के फायदे भी होते हैं।