कोविड मेगा ड्राइव • जिले के विभिन्न प्रखंडों में विशेष कोविड वैक्सीनेशन शिविर आयोजित कर छूटे लाभार्थियों को दी गई वैक्सीन 

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_ कोविड महाअभियान के तहत 9000 लोगों को टीका देने का लक्ष्य निर्धारित
– सभी लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर लगाया गया सुरक्षा का टीका
लखीसराय, 14 जुलाई-
जिले में शत-प्रतिशत लोगों का कोविड टीकाकरण  जल्द से जल्द सुनिश्चित करने को लेकर लगातार वैक्सीनेशन अभियान  के तहत शिविर आयोजित कर लोगों को वैक्सीन दी जा रही है। साथ ही हर जरूरी निर्णय भी  लिए जा रहे  और हर आवश्यक पहल भी की जा रही है। वहीं, गुरुवार  को जिले भर में कोविड   टीकाकरण महाअभियान  चलाया गया। जिसके माध्यम से जिले के सभी प्रखंडों में विशेष कोविड टीकाकरण  शिविर आयोजित कर टीका से वंचित लोगों को टीकाकृत किया गया। साथ ही सेकेंड और प्रीकाॅशनरी डोज लेने की निर्धारित समयावधि पूरी  करने वाले लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर सुविधाजनक तरीके से टीका दिया  गया ।
– सभी लाभार्थियों को प्राथमिकता के तौर पर लगाया सुरक्षा का टीका :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र कुमार चौधरी ने बताया, जिले के सभी प्रखंडों में विशेष टीकाकरण  शिविर का आयोजन किया गया  । सभी सेशन साइटों पर सभी लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर टीकाकृत किया गया। साथ  ही अन्य लाभार्थियों को भी प्रेरित करने के लिए जागरूक  किया गया। ताकि जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लाभार्थियों का टीकाकरण सुनिश्चित हो सके और सामुदायिक स्तर पर लोग इस घातक महामारी से सुरक्षित हो सकें ।  इस विशेष अभियान के  सफल संचालन के लिए सभी सेशन साइटों पर पर्याप्त संख्या में कर्मियों की तैनाती एवं वैक्सीन वाइल की व्यवस्था सुनिश्चित की गई । ताकि एक भी व्यक्ति को वैक्सीन के अभाव में लौटना नहीं पड़े। वहीं, उन्होंने बताया, जिले में चल रहे टीकाकरण अभियान को और तेज गति देने के लिए वैक्सीनेशन टीम को आवश्यक निर्देश  भी दिए गए।
– जरूरतमंदों के घरों तक पहुँची वैक्सीनेशन टीम :
डीआईओ सह एसीएमओ डाॅ अशोक कुमार भारती ने बताया जिले  में आज कोविड महाअभियान के तहत 9000 लोगों को  टीकाकृत करने का लक्ष्य  निर्धारित किया गया  । जिले के सभी प्रखंडों में चयनित जगहों पर इस महाअभियान का आयोजन किया गया है । इस तरह के  महाअभियान के आयोजन का यही मकसद होता है  की जो लाभार्थी  समय पर किसी कारण कोविड का टिका नहीं लिए हैं उन्हें टिकाकृत  किया जा सके । साथ ही कोई भी लाभार्थी  कोविड के टीका  से वंचित ना रहे  और जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का टीकाकरण सुनिश्चित हो सके तथा सामुदायिक स्तर पर लोगों को  इस घातक महामारी के खतरे से सुरक्षित किया जा सके ।

कोविड मेगा ड्राइव • जिले के सभी प्रखंडों में चला विशेष कोविड वैक्सीनेशन महाअभियान 

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– चयनित और चिह्नित स्थलों पर शिविर आयोजित कर योग्य लाभार्थियों को किया गया टीकाकृत
– कोविड संक्रमण के खतरे से दूर रहने के जरूर लगाएं टीका और रहें सुरक्षित
खगड़िया, 14 जुलाई-
गुरुवार को जिले में एकबार फिर से कोविड मेगा वैक्सीनेशन ड्राइव चलाया गया। जिसके तहत जिले के सभी प्रखंडों में चयनित और चिह्नित  जगहों पर विशेष वैक्सीनेशन शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें पहला, दूसरा एवं प्रीकाॅशनरी (तीसरा) डोज के सभी लाभार्थियों को टीकाकृत किया गया। साथ ही किशोर-किशोरियों के टीकाकरण पर भी बल दिया गया। इसके अलावा जो लाभार्थी सेशन साइट तक आने में असमर्थ थे, उन्हें घर-घर दस्तक वैक्सीनेशन अभियान के तहत वैक्सीनेशन टीम द्वारा उनके घर जाकर सुरक्षा का टीका लगाया गया। ताकि जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लाभार्थियों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके और सामुदायिक स्तर पर लोग खुद को इस घातक महामारी से सुरक्षित महसूस कर सकें । इधर, महाअभियान के  सफल संचालन के लिए सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान, आरपीएम रूप नारायण, डीपीएम (हेल्थ) पवन कुमार, केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद, परबत्ता सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ राजीव रंजन, पिरामल स्वास्थ्य के डीपीएल प्रफुल्ल झा समेत अन्य पदाधिकारी और जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में भ्रमण कर सेशन साइट का निरीक्षण करते दिखे।
– कोविड संक्रमण के खतरे से बचाव को जल्द से जल्द कराएं वैक्सीनेशन :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, एकबार फिर से प्रदेश के विभिन्न जिलों में संक्रमण की शिकायत सामने आने लगी है। इसलिए, इस घातक महामारी से बचाव के लिए हर व्यक्ति को जल्द से जल्द वैक्सीनेशन कराने की जरूरत है। क्योंकि, इस महामारी से बचाव के लिए वैक्सीन ही सबसे बेहतर और कारगर विकल्प है। इसके अलावा सावधानी और सतर्कता  रखने की भी जरूरत है। इसलिए, मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि जो लोग पहला डोज लेने के बाद दूसरा या दूसरा लेने के बाद प्रीकाॅशनरी (तीसरा) डोज लेने की समयावधि पूरी  कर चुके हैं, वह निश्चित रूप से अपने नजदीकी स्वास्थ्य संस्थानों में जाकर जल्द से जल्द वैक्सीन लें । जो लोग अबतक किसी भी कारण वश वैक्सीनेशन नहीं करा पाए हैं, वह भी जल्द से जल्द वैक्सीनेशन कराएं और खुद के साथ-साथ अपने परिवार और समाज को भी इस घातक महामारी से सुरक्षित करें।
– जिले में लगातार हो रहा है कोविड वैक्सीनेशन :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, कोविड वैक्सीनेशन अभियान को गति देने के लिए जिले में लगातार महाअभियान का आयोजन किया जा रहा है। इसके अलावा जिले के सभी स्वास्थ्य स्थानों में भी लगातार नियमित तौर पर वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। ताकि लाभार्थियों को वैक्सीनेशन कराने में किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लाभार्थियों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके। वहीं, उन्होंने बताया, इसके अलावा एएनएम, आशा कार्यकर्ता समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा एक-एक लाभार्थियों को चिह्नित  कर वैक्सीनेशन के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है।

राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम 2025- टीबी के लक्षणों के प्रति रहें सावधान 

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– हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से जिला अस्पताल तक उपलब्ध है टीबी की निःशुल्क जांच और उपचार की समुचित व्यवस्था
– सही समय पर सही जांच और समुचित उपचार के बाद पूरी तरह ठीक हो सकते है टीबी के मरीज
–  निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी के उपचार के दौरान मरीजों को प्रत्येक महीने मिलती है 500 रुपए की सहायता राशि
मुंगेर, 14 जुलाई-
राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम 2025 की  सफलता के लिए टीबी के लक्षणों के प्रति रहें सावधान । उक्त बात  जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला कार्यक्रम प्रबंधक  नसीम रजि ने कही। उन्होंने बताया कि टीबी एक संक्रामक बीमारी है जो माइक्रोबैक्टरियम ट्यूबरक्लोसिस नामक जीवाणु (बैक्टरिया) से होती है। अन्य संक्रामक बीमारी जैसे हैजा, चेचक, प्लेग, इंफ्ल्यून्ज़ा, मलेरिया, एड्स इत्यादि की  तुलना में टीबी से मरने वालों की संख्या सबसे अधिक है। विश्व की  लगभग एक चौथाई आबादी टीबी से संक्रमित है। रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होने के कारण 90 प्रतिशत से अधिक लोगों में टीबी का कोई लक्षण प्रकट नहीं होता है।  इसलिए इसे लेटेंट टीबी इन्फेक्शन के नाम से जाना जाता है।  वहीं रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण टीबी के जीवाणु स्वांस के माध्यम से फेफड़ों में पहुंचकर 80 से 90 प्रतिशत तक अपनी संख्या बढाकर पल्मोनरी टीबी पैदा करते हैं। इसके साथ ही फेफड़ों के अलावा अन्य किसी भी अंग जैसे लिम्फनोड, पलूरा, रीढ़ की  हड्डी एवं अन्य जोड़, आंत सहित अन्य अंगों में होने वाले टीबी को एक्सट्रा पल्मोनरी टीबी कहा जाता है।
उन्होंने बताया कि पल्मोनरी टीबी की  स्थिति में फेफड़ों की टीबी होती है। इसमें दो सप्ताह तक खांसी, बुखार, सीने में दर्द, वजन में कमी, रात में पसीना आना, कमजोरी थकान भूख लगने  के लक्षण देखने को मिलते हैं। टीबी के एक या अधिक या लक्षण  युक्त वयस्कों एवं बच्चों को संभावित टीबी केस (प्रीसमटिव टीबी माना जाता है।
डिस्ट्रिक्ट टीबी/एचआईवी कोऑर्डिनेटर शैलेन्दु कुमार ने बताया कि टीबी की  जांच के कई तरीके हैं ।
– स्पुटम  माइक्रोस्कोपी : इसमें स्पुटम कंटेनर में व्यक्ति (संभावित रोगी ) के दो नमूने संग्रहित किये जाते हैं। पहला जब व्यक्ति लैब में आता है तब एवं अगले दिन सुबह का सैम्पल । दोनों सैम्पल की  जांच करके रिपोर्ट उसी दिन या अगले दिन मिल जाती है।
– एक्स रे : नेगेटिव स्पुटम रोगियों एवं बच्चों की एक्स रे के द्वारा जांच की जाती है।
– सिबिनेट/ ट्रूनेट – इन आधुनिक मशीनों के द्वारा मात्र दो घन्टे में टीबी का पता चल जाता है। इसके अलावा रिफम्प्सिन रेजिस्टेंस का भी पता चल जाता है।
– लाइन प्रोब ऐसे ( एलपीए) : फाल्कन ट्यूब में एकत्रित सैम्पल को शीत श्रृंखला के अंदर जांच के लिए एलपीए लैब भेजा जाता है।
– फॉलोअप जांच : टीबी मरीजों को उपचार से मिल रहे लाभ को जानने के लिए मुख्य रूप से दो बार जांच कराना आवश्यक है। पहली जांच उपचार शुरू होने के दो महीने बाद और दूसरी उपचार शुरू होने के छह महीने के बाद ।
 टीबी के उपचार के दौरान मॉनिटरिंग :
शैलेन्दु कुमार ने बताया कि टीबी का उपचार लंबा होता  एवम बिना सपोर्ट के कई रोगी  बीच में ही दवा छोड़ देते हैं है। आधे-अधूरे उपचार से टीबी की  दवाइयां बेअसर हो जाती  और मरीज के  अंदर दवा के प्रति रजिस्टेंस पैदा हो जाता है। राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की  सफलता के लिए नियमित और पूरा इलाज सुनिश्चित कराने के लिए समुदाय के प्रशिक्षित ट्रीटमेंट सपोर्टर के सामने दवा सेवन की प्रकिया है। प्रत्येक रोगी के लिए ट्रीटमेंट कार्ड और पहचान पत्र भरे जाने की  व्यवस्था  । पहचान पत्र रोगी के पास और ट्रीटमेंट कार्ड आशा या अन्य ट्रीटमेंट सपोर्टर के पास होता है।
निक्षय पोषण योजना और डायरेक्ट बेनिफिसरी ट्रांसफर  : टीबी के मरीजों को निक्षय पोषण योजना के लाभ के लिए रोगी के बैंक अकाउंट का पूरा डिटेल निक्षय पोर्टल पर अपलोड करवाना आवश्यक है। पूरे उपचार के दौरान टीबी रोगी को 500 रुपये प्रति माह की  दर से निक्षय पोषण योजना की  राशि सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। इसके साथ ही ट्रीटमेंट सपोर्टर को 1000 रुपये प्रति सफल उपचार के बाद (ड्रग सेंसेटिव टीबी एवं एच. मोनों सेंसेटिव टीबी के लिए) सीधे उनके खाते में जमा किये जाते हैं। इसके अलावा ड्रग रेसिटेन्ट टीबी रीजन के लिए 2000 गहन पक्ष के बाद तथा 3000 निरन्तर पक्ष के बाद ट्रीटमेंट सपोर्टर के खाते में जमा किये जाते हैं। इसके अलावा संभावित टीबी रोगी की जांच में टीबी कि पुष्टि होने पर प्रथम सूचक को 500 रुपए का भगतान किया जाता है।
5 वर्ष से कम उम्र के ऐसे बच्चे जो टीबी रोगियों के सम्पर्क में रहते तथा जिनमें टीबी का कोई लक्षण नहीं हो ऐसे बच्चों को टीबी से बचाने के लिए (आइसोनियाजिक, प्रोफाइलेक्ट्रिक थेरेपी) आइसोनियाजिक 10 मिली ग्राम प्रति किलोग्राम वजन के हिसाब से 6 महीने तक खिलाया जाता है।

जिले में सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा आज से शुरू, 30 जुलाई तक चलेगा

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-आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर परिवार के सदस्यों को ओआरएस के इस्तेमाल की देंगी जानकारी
-जिले के पांच लाख 17 हजार एक सौ सात घरों में ओआरएस पैकेट वितरण का रखा गया है लक्ष्य
भागलपुर, 14 जुलाई-
जिले में आज से सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा का आगाज हो रहा है, जो 30 जुलाई तक चलेगा। भागलपुर में अभियान के दौरान पांच लाख 17 हजार एक सौ सात घरों में आशा कार्य़कर्ताओं द्वारा प्रति बच्चा ओआरएस के एक-एक पैकेट वितरण का लक्ष्य रखा गया है। इसे लेकर सारी तैयारी पूरी कर ली गई है। शहरी क्षेत्र समेत जिले के सभी प्रखंडों में आज से ओआरएस घोल वितरण का काम शुरू कर दिया जाएगा। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी को इस अभियान के लिए नोडल पदाधिकारी बनाया गया है।
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार चौधरी ने बताया कि शिशु मृत्यु का एक बड़ा कारण दस्त होना है। इसे देखते हुए जिले में 15 से 30 जुलाई तक सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा का आयोजन किया जायेगा। साथ ही दस्त के कारण शिशु-मृत्यु और इसकी रोकथाम के बारे में आमलोगों को इसकी जानकारी दी जायेगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत दस्त से होने वाले शिशु मृत्यु दर को शून्य तक लाने के लिए सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़े का आयोजन किया जा रहा है। पखवाड़े के दौरान कोरोना की गाइडलाइन का पालन किया जाएगा। आशा कार्यकर्ता ओआरएस के पैकेट वितरण और इसके इस्तेमाल की जानकारी के दौरान गाइडलाइन का पूरी तरह से पालन करेंगी।
पांच वर्ष के उम्र तक के बच्चे को किया गया है लक्षित: जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया कि दस्त नियंत्रण पखवाड़ा के दौरान जिले के सभी पांच वर्ष तक के बच्चों को लक्षित किया गया है। अभियान के तहत स्वास्थ्य उपकेंद्र, अतिसंवेदनशील क्षेत्र, शहरी झुग्गी-झोपड़ी, निर्माण कार्य में लगे मजदूरों के परिवार, ईंट-भट्ठे के निर्माण वाला क्षेत्र, अनाथालय और ऐसे चिह्नित क्षेत्र जहां दो तीन वर्ष पूर्व तक दस्त के मामले अधिक संख्या में पाये गये हों, छोटे गांव व टोले जहां साफ सफाई और पानी की आपूर्ति एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी हो, ऐसी जगहों को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में रखा गया है। जिला प्रतिरक्षण कार्यालय से अभियान की 15 दिनों तक लगातार निगरानी की जाएगी।
आशा कार्यकर्ताओं के पास है सूचीः सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा का क्रियान्वयन सही तरीके से हो, इसे लेकर आशा कार्यकर्ताओं ने क्षेत्र के पांच वर्ष तक के बच्चे वाले घरों की सूची बना ली है। अभियान के दौरान पांच वर्ष से कम उम्र वाले बच्चों के घरों में प्रति बच्चा एक-एक ओआरएस पैकेट का वितरण करना है। आशा कार्यकर्ता परिवार के सदस्यों को ओआरएस के घोल बनाने और इसके उपयोग की विधि और इसके लाभ के बारे में भी बताएंगी। परिवार के सदस्यों को साफ-सफाई और हाथ धोने के तरीकों की जानकारी भी देंगी। परिवार के सदस्य को दस्त होने के दौरान बच्चे को जिंक का उपयोग करने की जानकारी दी जाएगी। जिंक का प्रयोग करने से दस्त की तीव्रता में कमी आ जाती है। दस्त ठीक नहीं होने पर गंभीर स्थिति में बच्चे को नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाने की सलाह परिवार के सदस्यों को दी जाएगी। पखवाड़ा के दौरान दस्त के कारण हुई मृत्यु की रिपोर्ट प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को देनी है। दस्त से ग्रसित अति गंभीर कुपोषित बच्चों को रेफर करना है और घर पर पीने के पानी को शुद्ध करने के लिए क्लोरीन गोली के उपयोग को भी बढ़ावा देना है।

सरकारी अस्पताल में इलाज कराकर छात्र सुमित ने दी टीबी को मात

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-पहले निजी अस्पतालों का चक्कर काटते थे, लेकिन नहीं हुआ था सुधार
-पड़ोसी की सलाह पर जिला यक्ष्मा केंद्र गए और वहां से ठीक होकर लौटे
बांका, 14 जुलाई-
जिले के बौंसी प्रखंड के बभनगामा गांव के रहने वाले छात्र सुमित कुमार भागलपुर में रहकर पढ़ाई करते थे। अचानक सुमित की तबियत खराब रहने लगी। वह टीबी की चपेट में आ गया था। पहले तो बौंसी के एक निजी चिकित्सक को दिखाया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद वह इलाज कराने के लिए भागलपुर आया। भागलपुर में भी काफी समय तक इलाज करवाया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। थक-हारकर वह गांव में निराश रहने लगा। इसी दौरान उसे पड़ोस के रहने वाले एक व्यक्ति ने जिला यक्ष्मा केंद्र में डीपीएस गणेश झा से मिलने कहा। पड़ोसी की सलाह के बाद वह गणेश झा से मिलने गया। गणेश झा ने उसकी जांच करवाई, जिसमें उसके टीबी होने की पुष्टि हुई। इसके बाद उसका इलाज शुरू हुआ। कुछ समय तक इलाज चलने के बाद वह स्वस्थ हो गया।
सुमित कहते हैं कि मैं तो काफी चिंतित रहने लगा था। बौंसी और भागलपुर के बड़े-बड़े डॉक्टर मेरा इलाज नहीं कर पा रहे थे। मेरी तबीयत में कोई सुधार नहीं हो पा रहा था। इसके बाद मेरे पास कोई चारा भी नहीं बचा था। मैं गांव में चिंतित रहने लगा था। लेकिन इसी दौरान एक पड़ोसी ने मेरा मार्गदर्शन किया। मुझे डीपीएस गणेश झा जी मिलने की सलाह दी। मैं उनसे मिला। मुलाकात के दौरान ही उन्होंने मुझे आश्वस्त कर दिया था कि मैं जल्द ठीक हो जाउंगा। इसके बाद मेरा इलाज शुरू हुआ और दवा का नियमित तौर पर सेवन करते रहने से मैं ठीक हो गया। इस दौरान जांच और इलाज से लेकर दवा तक का एक भी रुपये मेरे से नहीं लिया गया। साथ ही जब तक इलाज चला, मुझे पांच सौ रुपये प्रतिमाह पौष्टिक आहार का सेवन करने के लिए भी मिला। ठीक होने के बाद भी अगर मुझे कोई परेशानी होती है तो मैं डीपीएस गणेश झा जी से मिलता हूं।
लोगों को नजरिया बदलने की जरूरतः सुमित कहते हैं कि सरकारी अस्पतालों के प्रति लोगों को नजरिया बदलने की जरूरत है। पहले मैं भी सोचता था कि जब निजी अस्पताल में इलाज कराने से मैं ठीक नहीं हो सका तो सरकारी अस्पताल में मेरा क्या इलाज होगा। लेकिन सरकारी अस्पताल में ही इलाज कराने के बाद मैं ठीक हो सका। जिला ड्रग इंचार्ज राजदेव राय कहते हैं कि जिला यक्ष्मा केंद्र समेत जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में टीबी के इलाज की बेहतर व्यवस्था है। यहां से इलाज कराकर जिले के काफी मरीज ठीक हो रहे हैं। इसलिए अगर किसी को टीबी के लक्षण दिखाई दे तो बेहिचक इलाज के लिए जिला यक्ष्मा केंद्र पहुंचे। यहां पर आपको जांच और इलाज के लिए कोई पैसा तो नहीं ही लगेगा। साथ ही दवा भी मुफ्त में मिलेगी। राशि भी मिलती है। और जो सबसे बड़ी बात है यहां पर लोगों की काउंसिलिंग भी बेहतर तरीके से की जाती है, जो कि टीबी के इलाज के दौरान बहुत मददगार साबित होती है।

तेज धूप और उमस के प्रभाव से बचाव के लिए रहें सावधान 

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– बदलते मौसम में नवजातों का रखें विशेष ख्याल और अनावश्यक परेशानियाँ से रहें दूर
– थोड़ी सी लापरवाही बन सकती है बड़ी मुसीबत, इसलिए स्वास्थ्य के प्रति रहें सजग
खगड़िया, 13 जुलाई।
लगातार तापमान में वृद्धि  व  आग उगलती धूप ने  लोगों की परेशानी  दुगुनी कर दी है। इससे  लू, डिहाइड्रेशन समेत अन्य मौसमी बीमारियों की  संभावना बढ़ गई है। पिछले कई दिनों से तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। जिसके कारण  मौसम में बदलाव हो रहा है। ऐसे में इन परेशानियों  के प्रभाव से दूर रहने के लिए सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। ताकि मौसमी बीमारियों से दूर रह सकें। अन्यथा थोड़ी सी लापरवाही बड़ी मुसीबत बन सकती है। इन बदलते मौसम में खासकर नवजातों व बुजुर्गों के स्वास्थ्य के प्रति विशेष ख्याल रखने की जरूरत है। क्योंकि, युवाओं के सापेक्ष नवजात और बुजुर्गों की  रोग-प्रतिरोधक  क्षमता कमजोर होती है। इसलिए, नवजात और बुजुर्गों के  खान-पान समेत अन्य दिनचर्या का ख्याल रखने की जरूरत है।
– पौष्टिक आहार का करें सेवन, मौसमी बीमारियों से रहेंगे दूर :
खगड़िया सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डाॅ योगेन्द्र सिंह प्रायसी ने बताया, इस बदलते मौसम में  लोगों को सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि, थोड़ी सी लापरवाही भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती  है। मौसमी बीमारी से बचाव के लिए पौष्टिक और प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करना चाहिए। साथ ही इस  मौसम में नवजातों व बुजुर्गों का भी विशेष ख्याल रखने की जरूरत है।  साथ हीं  साफ-सफाई का भी विशेष ख्याल रखें। दरअसल, साफ-सफाई हमें ना सिर्फ मौसमी बीमारियों से बचाता बल्कि, हर संक्रामक बीमारी से दूर रखता  और स्वस्थ शरीर निर्माण में भी सहयोग करता है।
– बच्चों को धूप में अनावश्यक नहीं निकलने दें बाहर :
 तापमान में हो रही वृद्धि के कारण मौसमी बीमारियों की  संभावना बढ़ गई है। ऐसे में हर आयु वर्ग के लोगों को खाली पेट और अनावश्यक घरों से बाहर निकलने से परहेज करना चाहिए। अगर निकलते भी हैं तो निश्चित तौर पर खाना खाकर और निकलने के पूर्व नींबू-पानी जरूर ले लें। यह आग उगलती धूप के प्रभाव से बचाव के लिए काफी हद तक कारगर होगा। साथ ही खासकर बच्चों को अनावश्यक घर से बाहर नहीं निकलने दें और बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें।
– नियमित रूप से करें व्यायाम :
बदलते मौसम में स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए व्यायाम पर भी बल दें और नियमित रूप से व्यायाम करें। साथ ही समय पर खाना खाएं। किसी प्रकार की स्वास्थ्य पीड़ा होने पर तुरंत चिकित्सकों से आवश्यक जाँच करानी चाहिए।
– रहन-सहन में भी करें   सकारात्मक बदलाव :
मौसमी व संक्रामक बीमारी से दूर रहने के लिए पूर्व की भाँति रहन-सहन में भी सकारात्मक  बदलाव करें। इसके लिए शौचालय समेत घर के अन्य जगहों की नियमित साफ-सफाई करें। आवश्यकतानुसार ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराएं। घर के आसपास जलजमाव नहीं होने दें। कूड़ेदान का उपयोग करें।
– इन बातों का रखें ख्याल :
– खाली पेट धूप में नहीं निकलें।
– अधिक देर भूखा नहीं रहें और समय पर खाना खाएं।
– पानी साथ लेकर घर से निकलें।
– अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलें।

एमडीए कार्यक्रम के कुशल क्रियान्वयन का हुआ राज्य स्तरीय पर्यवेक्षण

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– 7 जुलाई से जिले में चलाया जा रहा एमडीए राउंड
– घर-घर जाकर निःशुल्क लोगों को खिलाई जा रही फाईलेरिया से बचाव की दवा
लखीसराय:
बुधवार को फाईलेरिया के राज्य सलाहकार डॉ. अनुज सिंह रावत ने जिले में 7 जुलाई से चल रहे सर्व जन दवा सेवन (एमडीए ) कार्यक्रम का पर्यवेक्षण किया। ज्ञातव्य हो कि नाववियुक्त  अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी- फाईलेरिया डॉ. परमेश्वर प्रसाद एमडीए राउंड के सफल संचालन को लेकर काफ़ी सजग है। साथ ही उन्होंने डॉ.अनुज सिंह रावत को राज्य प्रतिनिधि के तौर पर एमडीए राउंड की मॉनिटरिंग एवं सुपरविजन हेतु नामित किया है।
डॉ. अनुज ने जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. अश्विनी कुमार एवं भीबीडीसीओ  के साथ बैठक कर एमडीए कार्यक्रम का जायजा लिया। साथ ही उन्हें कार्यक्रम की सफलतापूर्वक शुरुआत एवं सफल क्रियान्वयन के लिए शुभकामनाएं दी।
शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों का किया भ्रमण:
डॉ. अनुज, डॉ. अश्विनी कुमार, सीफार के सहायक राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी रंजीत कुमार एवं केअर इंडीया के डीपीओ ने सदर प्रखंड एवं सूरजगढ़ा प्रखंड के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने फाईलेरिया दवा खिलाने वाले ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर( आशा) का मौके पर निरीक्षण किया एवं जरूरी दस्तावेजों के संबंध में पूछताछ की। वहीं, कुछ घरों का भ्रमण कर लोगों द्वारा की जा रही दवा सेवन की स्थिति को जाना एवं एमडीए के फ़ायदों से लोगों को अवगत भी कराया।  साथ ही फाईलेरिया के दुष्परिणामों की जानकारी देकर दवा सेवन का आग्रह किया।
शत-प्रतिशत दवा सेवन सुनिश्चित कराना उद्देश्य:
डॉ. अनुज ने कहा कि यह खुशी का विषय है कि सिविल सर्जन एवं जिला भीबीडी पदाधिकारी एवं सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से एमडीए राउंड का जिले में सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है। डॉ. रावत ने बताया कि इस औचक निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य कार्यक्रम की प्रभावशीलता को जानना एवं शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में शत-प्रतिशत दवा सेवन के लिए लोगों को प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि यद्यपि आम लोगों में भी दवा सेवन के प्रति जागरूकता बढ़ी है।
फाईलेरिया की दवा पूर्णता सुरक्षित:
डॉ. अनुज ने कहा कि फाईलेरिया के अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी  डॉ. परमेश्वर प्रसाद स्वयं पूरे कार्यक्रम की निगरानी कर रहे हैं। विभाग द्वारा एमडीए राउंड में शत-प्रतिशत दवा सेवन सुनिश्चित कराने पर बल दिया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि फाईलेरिया की दवा पूरी तरह सुरक्षित है। दो साल से ऊपर के सभी लोग दवा सेवन कर सकते हैं। गर्भवती महिलाएं, 2 साल से नीचे के बच्चे एवं गंभीर रोगियों को दवा नहीं खानी है। दवा खाली पेट न खाएं।

रैली निकालकर परिवार नियोजन के प्रति किया जागरूक

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-सदर अस्पताल में जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा को लेकर हुए कई कार्यक्रम
-परिवार नियोजन मेला, नाटक समेत तमाम कार्यक्रम से किया गया जागरूक
भागलपुर, 13 जुलाई-
जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा को लेकर बुधवार को सदर अस्पताल में कई कार्यक्रम हुए। सबसे पहले सदर अस्पताल से एएनएम स्कूल की छात्राओं और आशा कार्य़कर्ताओं ने रैली निकाली, जो बड़ी पोस्ट ऑफिस, घंटाघर होते हुए वापस सदर अस्पताल में आकर खत्म हुई। रैली के दौरान छात्राओं और आशा कार्यकर्ताओं ने परिवार नियोजन से संबंधित नारे लगाए। राह चलते लोगों को भी परिवार नियोजन के प्रति जागरूक किया गया। इसके बाद सदर अस्पताल में एएनएम स्कूल की छात्राओं ने नाटक के जरिये परिवार नियोजन का संदेश दिया। साथ ही अस्पताल में लगे मेले में लोगों की काउंसिलिंग से लेकर परिवार नियोजन को लेकर अस्थायी सामग्री का वितरण किया गया।
मौके पर मौजूद सिविल सर्जन डॉ. उमेश शर्मा ने बताया कि जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा का आगाज जिले में 11 जुलाई को ही हो गया है, जो कि 31 जुलाई तक चलेगा। उसी सिलसिले में बुधवार को सदर अस्पताल में कई कार्यक्रम हुए। इस दौरान लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक किया गया। परिवार नियोजन में अस्थायी सामग्री के इस्तेमाल के लोगों को फायदे बताए गए। साथ ही अगर किसी के मन में अस्थायी सामग्री के इस्तेमाल को लेकर डर या आशंका थी तो उसे दूर किया जाएगा। कंडोम, कॉपर-टी, अंतरा जैसे परिवार नियोजन की अस्थायी सामग्री के इस्तेमाल से किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है। इसलिए लोगों से मेरी अपील है कि इन संसाधनों का इस्तेमाल करें और परिवार नियोजन अपनाएं।
दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल जरूरीः एसीएमओ डॉ. अंजना ने कहा कि जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा के तहत लोगों को बताया जा रहा है कि पहला बच्चा 20 साल के बाद ही पैदा करें। फिर दूसरे बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल जरूर रखें। इससे जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ रहेगा। साथ ही बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होगी। इससे बच्चा किसी भी गंभीर बीमारी की चपेट में आने से बचा रहेगा। अगर आ भी गया तो वह उससे आसानी से उबर जाएगा। इसके अलावा जिनके दो बच्चे हो गए हैं, उन्हें बंध्याकरण के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। छोटा परिवार न सिर्फ स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर होता है, बल्कि इससे लोगों को आर्थिक आजादी भी मिलती है।
31 तक होते रहेंगे कार्यक्रमः डीपीएम फैजान आलम अशर्फी ने कहा कि 31 जुलाई तक जिले के सभी अस्पतालों में परिवार नियोजन को लेकर कार्यक्रम होते रहेंगे। साथ ही आशा कार्यकर्ताओं के जरिये परिवार नियोजन की अस्थायी सामग्री का वितरण किया जाता रहेगा। एएनएम के जरिये लोगों की काउंसिलिंग भी होती रहेगी। डीसीएम जफरूल इस्लाम ने बताया कि परिवार नियोजन को लेकर जिले में लगातार कार्यक्रम होते रहते हैं। अभी जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा चल रहा है तो इस दौरान परिवार नियोजन अभियान को तेज किया गया है। ऑपरेशन से लेकर अस्थायी सामग्री के वितरण में तेजी लाई जा रही है, ताकि जिले के अधिक-से-अधिक लोग सरकारी सुविधाओं का लाभ ले सकें। मौके पर सदर अस्पताल के मैनेजर जावेद मंजूर करीमी और केयर इंडिया के आलोक कुमार, मनीषा और विजय भी मौजूद रहे।

कोरोना की चौथी लहर से बचना है तो जल्द लगवाएं प्रीकॉशन डोज

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-कोरोना के सभी टीके लगवाने के बाद चपेट में आने से बचे रहेंगे
-अगर आ भी गए तो आसानी से उबर जाएंगे, नहीं होगी परेशानी
बांका, 13 जुलाई-
कोरोना के मामले एक बार फिर से मिलने लगे हैं। पिछले कुछ दिनों से लगातार मिल रहे मामलों को देखकर इसे चौथी लहर की आहट जरूर कह सकते हैं। ऐसे में इससे बचने के उपाय पर फिर से ध्यान देने की जरूरत है। ये बात सही है कि जिले के अधिकतर लोगों ने कोरोना के टीके ले लिए हैं और टीका लेने वालों पर कोरोना का ज्यादा असर नहीं पड़ता है, लेकिन ऐसे भी कई लोग हैं जिन्होंने अभी तक कोरोना टीके की प्रीकॉशन यानी तीसरी डोज नहीं ली है। ऐसे लोग जल्द से जल्द प्रीकॉशन डोज ले लें। कोरोना से बचने के लिए टीकाकरण जरूरी है। टीकाकरण मतबल तीनों ही डोज, इसलिए जो लोग प्रीकॉशन डोज के दायरे में आते हैं वे लापरवाही नहीं करें और अपने नजदीकी  सरकारी अस्पतालों में जाकर टीका ले लें।
एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी कहते हैं कि कोरोना से बचाव में सावधानी सबसे कारगर हथियार है। सावधानी का सबसे पहला हथियार पूर्ण टीकाकरण है। यानी कि कोरोना टीके की तीनों डोज ले लेना। जिले में काफी संख्या में लोगों ने कोरोना का टीका लिया है, लेकिन जिनलोगों ने नहीं लिया है, वे लोग जल्द से जल्द ले लें। साथ ही जिसका प्रीकॉशन डोज का समय पूरा हो गया है, वे भी ले लें। कोरोना के सभी टीके ले लेने के बाद चपेट में आने का खतरा कम से कम रहेगा। अगर आ भी गए तो आप उससे जल्द उबर जाएंगे।
जिनलोगों ने कोई भी टीका नहीं लिया है, वे नहीं करें देरीः डॉ. अभय प्रकाश चौधरी ने कहा कि जिले के कुछ लोग ऐसे भी जिन्होंने अभी तक कोरोना टीके की कोई डोज नहीं ली है। हालांकि ऐसे लोगों की संख्या काफी कम है। लेकिन जो भी थोड़े लोग हैं, वे जल्द से जल्द अपना टीकाकरण करवाएं और जैसे-जैसे समय पूरा होता जाए दूसरा और तीसरा टीका भी लगवा लें। कोरोना टीके की पहली, दूसरी और तीसरी डोज में से कोई भी बची हो तो उसे जल्द से जल्द लगवा लें।
बीमार होने पर डॉक्टर को जरूर दिखाएं- डॉ. चौधरी कहते हैं कि अब जब जिले में कोरोना के मामले फिर से मिलने लगे हैं तो सर्दी-खांसी या अन्य तरह के लक्षण मिलने पर डॉक्टर को जरूर दिखलाएं। खुद डॉक्टर नहीं बनें। डॉक्टर को दिखाने के बाद उनकी सलाह के मुताबिक अपना इलाज जारी रखें। न कि अपने मन के मुताबिक इलाज करें। इसके अलावा भीड़भाड़ में जाते वक्त मास्क जरूर लगाएं। घर से बाहर जाने पर सामाजिक दूरी का पालन करें। बाहर से घर आने पर 20 सेकेंड तक हाथ धोने की कोशिश करें। इन बातों पर अमल करते रहने से आप कोरोना से बचे रहेंगे। साथ ही आपके जान-पहचान या घर परिवार के लोग कोरोना की चपेट में आने से बचे रहेंगे। कोरोना से बचाव में सावधानी बहुत ही जरूरी है।

फाइलेरिया उन्मूलन • एमडीए अभियान की सफलता को लेकर समीक्षात्मक बैठक आयोजित  

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– बैठक में एएनएम समेत अन्य कर्मियों को दिए गए जरूरी निर्देश
– सुदुरवर्ती इलाके में तेज हुआ एमडीए अभियान, दवाई के प्रतिकूल प्रभाव से बचाव के लिए टीम तैयार
लखीसराय, 12 जुलाई-
जिले के सुदुरवर्ती इलाके में स्थित लखीसराय सदर पीएचसी के अधीनस्थ संचालित चानन सीएचसी में एमडीए (मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) अभियान को और तेज गति देने के लिए एक समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। यह बैठक लखीसराय पीएचसी के आर आई  नोडल पदाधिकारी डाॅ विजेंद्र कुमार की अध्यक्षता में हुई। जिसमें मौजूद एएनएम समेत अन्य कर्मियों को एमडीए अभियान को और तेज गति देने के लिए जरूरी निर्देश दिए गए। साथ ही अबतक उक्त अभियान के दौरान कितने व्यक्तियों को अल्बेंडाजोल और डीईसी की दवा का सेवन कराया गया समेत अन्य जानकारियाँ ली गई और समीक्षा की गई। साथ ही अभियान को गति देने के लिए जरूरी एक्शन  प्लान भी तैयार किया गया। ताकि हर हाल में निर्धारित समयावधि के अंदर शत-प्रतिशत लोगों को दवाई का सेवन कराया जा सके और अभियान का सफल संचालन सुनिश्चित हो सके।
– दवाई के  प्रतिकूल प्रभाव से बचाव के लिए टीम तैयार :
आर आई के नोडल पदाधिकारी डाॅ विजेंद्र कुमार ने बताया, बैठक के दौरान मौजूद एएनएम समेत अन्य कर्मियों को निर्देश दिया गया कि खुद के सामने ही लाभार्थियों को अल्बेंडाजोल और डीईसी की दवा का सेवन कराएं। दवाई का सेवन कराने के पश्चात अगर किसी भी लाभार्थियों में प्रतिकूल प्रभाव दिखे, अविलंब रैपिड यी रिस्पांस टीम (आरआरटी) को सूचित करें। ताकि संबंधित लाभार्थियों को ससमय उचित चिकित्सा सुविधा प्रदान करायी  जा सके और सभी लाभार्थी सुरक्षित माहौल में दवाई का सेवन कर सकें । इसके लिए रैपिड  रिस्पांस टीम हमेशा तैयार है। ताकि किसी भी स्थिति से ऑन द स्पॉट निपटा जा सके और लाभार्थियों को किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो।
– सुदुरवर्ती इलाके में स्वास्थ्य सुविधा को सुदृढ़ और मजबूत बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग अग्रसर :
लखीसराय पीएचसी के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक निशांत राज ने बताया, चानन एक  से सुदुरवर्ती इलाका है। बाबजूद इसके इस इलाके में स्वास्थ्य सुविधा को सुदृढ़ और मजबूत बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अग्रसर है।  इसे सुनिश्चित करने को लेकर हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। ताकि स्वास्थ्य सुविधा सुदृढ़ और मजबूत हो सके एवं सामुदायिक स्तर  पर लोगों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। वहीं, उन्होंने बताया, वर्तमान में संचालित एमडीए अभियान के तहत घर-घर जाकर योग्य लाभार्थियों को फाइलेरिया से बचाव के लिए अल्बेंडाजोल और डीईसी की दवा का सेवन कराया जा रहा है। साथ ही इस बीमारी से बचाव के लिए लोगों को जागरूक भी किया जा रहा  और बचाव से संबंधित जरूरी जानकारी भी दी जा रही है। वहीं, उन्होंने बताया, 2 से 5 साल तक के बच्चों को डीईसी एवं अल्बेंडाजोल की एक-एक गोली, 6 से 14 साल तक के किशोरों को डीईसी की दो एवं अल्बेंडाजोल  की एक गोली एवं 15 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को डीईसी की तीन गोलियां एवं अल्बेंडाजोल  की एक गोली खिलाई जा रही है। वहीं, उन्होंने बताया, उक्त दवा गर्भवती महिलाओं एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के अलावा दो वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों को छोड़कर शेष सभी लोगों को स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा खिलाई जा रही है।
– साइड इफेक्ट से घबराएं नहीं :
दवा सेवन के बाद किसी तरह के सामान्य साइड इफेक्ट से घबराने की जरूरत नहीं है। अमूमन जिनके अंदर फाइलेरिया के परजीवी होते हैं, उनमें ही साइड इफेक्ट देखने को मिलता  है। साइड इफेक्ट सामान्य ही होते हैं, जो प्राथमिक उपचार से ठीक हो जाता  है।
– फाइलेरिया क्या है ?
– फाइलेरिया मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है।
– किसी भी उम्र के व्यक्ति फाइलेरिया से संक्रमित हो सकता है।
– फाइलेरिया के लक्षण हाथ और पैर में सूजन (हाँथीपाँव) व हाईड्रोसील (अण्डकोष में सूजन) है।
– किसी भी व्यक्ति को संक्रमण के पश्चात बीमारी होने में 05 से 15 वर्ष लग सकते हैं।
– इन बातों का रखें ख्याल :
– भूखे पेट दवा नहीं खिलानी  है।
– किसी के बदले किसी अन्य को दवा ना दें और स्वास्थ्य कर्मी के सामने दवा खाएं।
– गर्भवती महिलाओं को दवा नहीं खिलानी  है।
– 02 वर्ष छोटे बच्चे को दवा नहीं खिलानी  है।
– गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को भी दवा नहीं खिलानी  है।
– फाइलेरिया से बचाव के उपाय :
– सोने के समय मच्छरदानी का निश्चित रूप से प्रयोग करें।
– घर के आसपास गंदा पानी जमा नहीं होने दें।
– अल्बेंडाजोल व डीईसी दवा का निश्चित रूप से सेवन करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।