कोविड संभावित या संक्रमित माताएं शिशु को अवश्य करायें स्तनपान

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– स्वास्थ्य एव परिवार कल्याण  मंत्रालय ने जारी किया जरूरी गाइडलाइन
– डिब्बे वाले दूध नहीं पिलाने की दी सलाह, शिशु हो सकता है बीमार
मुंगेर, 21जनवरी 2022 : स्तनपान नवजात के जीवन को बेहतर बनाता है और जीवनभर उसके अच्छे स्वास्थ्य और सही शारीरिक व मानसिक विकास में मदद करता है। कोविड 19 के दौरान स्तनपान कराने को लेकर माता- पिता तथा परिजनों के मन में कई तरह के सवाल भी उठते हैं। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्तनपान को लेकर एक गाइडलाइन जारी कर बताया ​है कि कोविड संक्रमण काल में शिशु को माताएं नियमित रूप से स्तनपान करायें तथा स्वास्थ्यक​र्मी स्तनपान से संबंधित आवश्यक जानकारी तथा परामर्श मुहैया करायें जिससे मां को सफलतापूर्वक स्तनपान करवाने के लिए मदद मिल सके।
कोविड संक्रमित मां के दूध से नहीं फैलता संक्रमण :
मुंगेर के सिविल सर्जन डॉ. हरेन्द्र आलोक ने बताया कि गाइडलाइन  के अनुसार कोविड 19 से संक्रमित मां या वह मां जिनमें कोविड 19 की संभावना है, के दूध में कोविड संक्रमण पैदा करने वाले वायरस मौजूद नहीं होते हैं इसलिए कोविड 19 संक्रमित मां के दूध से संक्रमण नहीं फैलता है। कोविड संक्रमित माताएं या संक्रमण की संभावित माताओं को जन्म के एक घंटे के भीतर नवजात को स्तनपान कराना चाहिए । इससे शिशु को आवश्यक मात्रा में कोलोस्ट्रम मिलता है जो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इसके साथ ही त्वचा से त्वचा को संपर्क में रखें ताकि सर्दियों के इस मौसम में शिशु को आवश्यक गर्मी मिल सके । कोविड संक्रमित माताएं एहतियाती कदम के साथ शिशु को स्तनपान करायें । इसके साथ ही स्तनपान के समय मां मास्क अवश्य पहनें और श्वसन संबंधी स्वच्छता का कड़ाई से पालन करें।
मां नियमित रूप से हाथों को साबुन और पानी से धोयें :
उन्होंने बताया कि कोविड संक्रमण की संभावना होने या संक्रमित होने की स्थिति में मां बच्चे को छूने से पहले नियमित रूप से साबून और पानी से हाथों को अच्छी तरह धोंये या एल्कोहल आधारित सेनिटाइजर का इस्तेमाल करें । माताएं नियमित रूप से मास्क का इस्तेमाल करें और मास्क के गीला होते ही बदल दें। गंदे मास्क का इस्तेमाल नहीं करें। कपड़े के मास्क को इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह धोकर धूप में सूखा लें तथा खांसते या छींकते समय साफ रूमाल या टिश्यू पेपर का उपयोग करें तथा इसे उपयोग करने के बाद बंद ढक्कन वाले कूड़ेदान में डालें और हाथों को अच्छी तरह साफ करें ।
डिब्बे वाले दूध नुकसानदेह, शिशु हो सकता है बीमार :
उन्होंने बताया कि मंत्रालय ने  सलाह दी है कि शिशु को डिब्बे वाला दूध नहीं पिलाया जाए क्योंकि डिब्बे वाला दूध देने से शिशु में गंभीर बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है। साफ- सफाई का अभाव, साफ पानी की कमी, डिब्बे के दूध का सही नहीं होना इस खतरे को और बढ़ावा देता है। कोविड संक्रमित माताएं शिशु को स्तनपान ही करायें।  स्तनपान नहीं कराने से मां का अपना दूध कम बनने लगेगा।  स्तनपान कराते समय बच्चे को सही तरीके से पकड़ें ओर स्तन से लगायें ताकि बच्चा आसानी से दूध पी सके ।
मां का निकाला दूध भी है शिशु के लिए असरदार :
एनआरसी मुंगेर के नोडल अधिकारी सह डीपीसी विकास कुमार ने बताया कि यदि कोई मां कोविड पॉजिटिव हो जाती है और शिशु को स्तनपान कराने में सक्षम महसूस नहीं कर रही है तो मां के ठीक होने के तुरंत बाद शिशु को स्तनपान कराना प्रारंभ कर देना चाहिए । ऐसी स्थिति में मां का निकला हुआ दूध पिलाया जाना चाहिए। मां और मां की मदद करने वाला कोई भी व्यक्ति मां का दूध निकालने से पहले अपने हाथों को अच्छी तरह साफ करे और दूध को अच्छी तरह साफ कटोरी में निकालें। शिशु को वही लोग दूध पिलायें जो बीमार नहीं हों । मां का दूध निरंतर बनता रहे इसलिए मां का दूध निकालना बहुत जरूरी है। यदि मां का दूध निकालने में असमर्थ हैं तो डोनर ह्यमून मिल्क दिया जा सकता है।  यदि दोनों की संभावना नही हो तो स्थानीय पशु दूध जैसे कि ताजा उबला दूध या पहले से पैक्ड दूध या पॉश्चयूकृत टोंड दूध या गाय का दूध प्रयोग में लाया जा सकता है । पुश दूध का इस्तेमाल चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही करें।
स्तनपान करा रही मां करायें कोविड टीकाकरण :
उन्होंने बताया कि मंत्रालय ने स्तनपान कराने वाली माताओं के कोविड टीकाकरण की सिफारिश करते हुए कहा है कि यह उनके लिए सुरक्षित और असरदार है। ऐसी माताओं को टीकाकरण के ​लिए परामर्श दी जानी चाहिए। कोविड टीकाकरण के बाद भी माताओं में दूध का बनना सामान्य रूप से होता है। इससे दूध पैदा करने की क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

अभियान चलाकर किशोरों को लगाया गया कोरोना का टीका

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-20 स्कूलों में केंद्र बनाकर किशोरों को लगाया गया कोरोना का टीका
-जिले के 520 केंद्रों पर सभी वर्ग के लोगों को लगाया गया कोरोना टीका
भागलपुर, 21 जनवरी-
15 से 18 साल के किशोरों को कोरोना का टीका लगाने के लिए शुक्रवार को जिले में महाअभियान चलाया गया। शुक्रवार को जिले में 520 टीकाकरण केंद्र बनाए गए थे। जहां पर स्वास्थ्यकर्मियों, फ्रंटलाइन वर्करों और बीमारों व बुजुर्गों को प्रीकॉशन डोज, जबकि बुजुर्गों, बीमारों को कोरोना का पहला और दूसरा टीका दिया गया। जबकि किशोरों को पहला टीका दिया गया। शहर में किशोरों को कोरोना का टीका लगाने के लिए 20 स्कूलों में भी केंद्र बनाया गया था। इसे लेकर सभी केंद्रों पर पर्याप्त संख्या में टीका उपलब्ध करवा दिया गया था।
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार चौधरी ने बताया कि टीकाकरण अभियान लगातार चलाया जा रहा है। पहली और दूसरी के साथ-साथ स्वास्थ्यकर्मियों, फ्रंटलाइन वर्करों और बीमारों व बुजुर्गों को प्रीकॉशन डोज भी दी जा रही है। साथ ही दूसरी डोज से वंचित लोगों को लगातार मोबाइल पर फोनकर टीका लेने के लिए बुलाया जा रहा है। अब तक जिन लोगों ने पहली डोज नहीं ली है, उन्हें भी टीका लेने के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है। जल्द से जल्द जिले के सभी लोगों का टीकाकरण हो जाए, इसे लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
कल भी चलेगा अभियानः किशोरों को टीका देने के लिए रविवार को भी महाअभियान चलाया जाएगा। उस दिन में स्कूलों में अतिरिक्त केंद्र बनाकर किशोरों को कोरोना का टीका दिया जाएगा। इसके साथ-साथ अन्य लोगों को भी पहली, दूसरी और प्रीकॉशन डोज दी जाएगी। इससे पहले 19 जनवरी को भी टीकाकरण को लेकर अभियान चलाया गया था, जिसमें काफी संख्या में लोगों ने कोरोना का टीका लिया था। जिले में सभी लोगों के टीकाकरण को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। अब तक छूटे हुए लोगों को चिह्नित कर कोरोना का टीका दिया जा रहा है।
तीसरी लहर से बचने के लिए गाइडलाइन का पालन जरूरीः कोरोना की तीसरी लहर से बचने के लिए गाइडलाइन का पालन जरूरी है। घर से बाहर जाते वक्त मास्क लगाएं औऱ सामाजिक दूरी का पालन करें। भीड़भाड़ में जाने से परहेज करें और एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी का पालन करें। बेवजह घरों से बाहर नहीं निकले। बाहर से घर आने पर सेनिटाइजर का इस्तेमाल करें और 20 सेकेंड तक हाथ की धुलाई अवश्य करें। ऐसा करते रहने से आप कोरोना से बचे रहेंगे औऱ आपके घर-परिवार के लोग भी इसकी चपेट में नहीं आएंगे।

काउंसिलिंग कर अंतरा और छाया का किया गया वितरण

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-अस्पतालों में परिवार नियोजन को लेकर लोगों की काउसिलिंग
-परिवार नियोजन के अस्थाई संसाधनों का किया गया वितरण
बांका, 21 जनवरी।
हर महीने की 21 तारीख को अब परिवार नियोजन दिवस मनाया जा रहा है। शुक्रवार को जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में परिवार नियोजन दिवस मनाया गया। इसे लेकर सभी अस्पतालों में लोगों को परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री दी गई। सदर अस्पताल में परिवार नियोजन को लेकर सामग्री के वितरण के मौके पर एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी भी मौजूद थे। अस्पताल आने वाले लोगों को परिवार नियोजन से संबंधित अस्थाई सामग्री का वितरण किया जा रहा था। लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक किया जा रहा था और इससे होने वाले फायदे के बारे में बताया जा रहा था। इस मौके पर डीपीएम प्रभात कुमार राजू, डॉ राजकुमार चौधरी, अस्पताल मैनेजर अमरेश कुमार, केयर इंडिया के डीटीएल तौसीफ कमर और कन्हैया कुमार समेत कई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे।
एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी ने बताया कि अब हर महीने परिवार नियोजन दिवस का आयोजन हो रहा है। इससे परिवार नियोजन के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। परिवार नियोजन दिवस के मौके पर कई तरह के आयोजन किए जा रहे हैं, जिससे लोग परिवार नियोजन के प्रति जागरूक हो रहे हैं। परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री के वितरण के साथ-साथ लोगों की काउंसिलिंग की गई। लोगों को परिवार नियोजन से होने वाले फायदे के बारे में भी बताया गया। उन्होंने बताया कि सबसे महत्वपूर्ण है लोगों को परिवार नियोजन के प्रति अस्थाई संसाधनों पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित करना। लोगों में इसके प्रति थोड़ा भ्रम रहता है। उसे दूर करने की जरूरत है। लोगों में यह सोच विकसित करनी पड़ेगी कि कंडोम, अंतरा जैसे अस्थायी संसाधनों के इस्तेमाल से किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है। ऐसा परिवार नियोजन दिवस के अवसर पर किया जा रहा है।
दो बच्चों के बीच 3 साल का अंतराल जरूरीः डॉ चौधरी ने बताया कि काउसिलिंग के दौरान लोगों को बताया कि दो बच्चों के बीच तीन साल का अंतराल जरूरी है। अगर दो बच्चों के बीच तीन साल का अंतराल रहता है तो जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ रहता है। इससे बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित रहने से बच्चा भविष्य में होने वाली किसी भी तरह की बीमारी से सुरक्षित रहता है। इन सब बातों को लोगों को समझाया गया।
पहला बच्चा 20 साल के बादः डॉ चौधरी ने बताया कि परिवार नियोजन दिवस पर योग्य दंपतियों की काउंसिलिंग पर फोकस किया जा रहा है। एक बच्चे वाले दंपति को दूसरा बच्चा के लिए तीन साल का गैप रखना, 20 साल के बाद ही पहला बच्चा और अगर दो बच्चे हो गए हैं तो दंपति को बंध्याकरण के लिए मार्गदर्शन करने पर फोकस किया जा रहा है। ऐसा करने से होने वाले फायदे के बारे में भी दंपति को समझाया गया। काउंसिलिंग वाले काउंटर पर कई योग्य दंपतियों की काफंसिलिंग की गई। जरूरत पड़ने पर वहां पर डॉक्टर भी जाकर दंपति को समझाने का काम करते देखे गए।

कोरोना की तीसरी लहर को लेकर 23 जनवरी से शुरू  होने वाला पल्स पोलियो राष्ट्रीय अभियान स्थगित 

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– 27 फरवरी से कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए शुरू होगा अभियान
– महाशिवरात्रि के सार्वजनिक अवकाश को देखते हुए 1-2 दिन विस्तारित हो सकता  है अभियान
मुंगेर, 20 जनवरी-
कोरोना  की तीसरी लहर व तेजी से बढ़ रहे संक्रमितों की संख्या को देखते हुए 23 जनवरी से जिला में शुरू होने वाले पल्स पोलियो राष्ट्रीय अभियान स्थगित कर दिया गया है। अब आगामी 27 फरवरी से कोरोना प्रोटोकॉल का अच्छी तरह से पालन करते हुए जिला भर में पल्स पोलियो राष्ट्रीय अभियान संचालित किया जाएगा ।
मुंगेर के जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. राजेश कुमार रौशन ने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के अध्यक्ष सह जिलाधिकारी नवीन कुमार, सचिव सह सिविल सर्जन हरेन्द्र आलोक सिहित अन्य अधिकारियों को 23 जनवरी से जिला में शुरू होने वाले पल्स पोलियो राष्ट्रीय अभियान को जिला में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्थगित करते हुए पुनः 27 फरवरी  से कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए संचालित करने से संबंधित पत्र जारी किया है। इसके साथ ही आगामी 1 मार्च को महाशिवरात्रि के अवसर पर होने वाले सार्वजनिक अवकाश को देखते हुए इसे 1-2 दिन विस्तारित करने का भी निर्देश दिया गया है।
उन्होंने बताया कि इससे पूर्व भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के इम्युनाइज़ेशन डिवीजन के ज्वाइंट कमिश्नर डॉ. वीणा धवन के द्वारा भी इससे संबंधित एक पत्र जारी किया गया है। इस पत्र में यह बताया गया है कि देश में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर से उत्पन्न  स्थिति और विभिन्न राज्यों से मिले अनुरोध को देखते हुए पल्स पोलियो राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान को 23 जनवरी से रिशिड्यूल करते हुए 27 फरवरी तय किया गया है।  इस पत्र के माध्यम से 27 फरवरी से संचालित होने वाले पल्स पोलियो राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान को कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करते हुए मैक्सिमम कवरेज सुनिश्चित कराना है। ताकि जिला के पोलियो फ्री स्टेटस को कायम रखा जा सके।

कोविड संभावित या संक्रमित माताएं शिशु को अवश्य करायें स्तनपान

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स्वास्थ्य एव परिवार कल्याण  मंत्रालय ने जारी किया जरूरी गाइडलाइन
डिब्बे वाले दूध नहीं पिलाने की दी सलाह, शिशु हो सकता है बीमार
, लखीसराय 20 जनवरी:
स्तनपान नवजात के जीवन को बेहतर बनाता है और जीवनभर उसके अच्छे स्वास्थ्य और सही शारीरिक व मानसिक विकास में मदद करता है. कोविड 19 के दौरान स्तनपान कराने को लेकर माता पिता तथा परिजनों के मन में कई तरह के सवाल भी उठते हैं. भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्तनपान को लेकर एक गाइडलाइन जारी कर बताया ​है कि कोविड संक्रमण काल में शिशु को माताएं नियमित रूप से स्तनपान करायें तथा स्वास्थ्यक​र्मी स्तनपान से संबंधित आवश्यक जानकारी तथा परामर्श मुहैया करायें जिससे मां को सफलतापूर्वक स्तनपान करवाने के लिए मदद मिल सके.
कोविड संक्रमित मां के दूध से नहीं फैलता संक्रमण:
गाइडलाइन में कहा गया है कि कोविड 19 से संक्रमित मां या वह मां जिनमें कोविड 19 की संभावना है, के दूध में कोविड संक्रमण पैदा करने वाले वायरस मौजूद नहीं होते हैं. इसलिए कोविड 19 संक्रमित मां के दूध से संक्रमण नहीं फैलता है. कोविड संक्रमित माताएं या संक्रमण की संभावित माताओं को जन्म के एक घंटे के भीतर नवजात को स्तनपान कराना चाहिए. इससे शिशु को आवश्यक मात्रा में कोलोस्ट्रम मिलता है जो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है. साथ ही त्वचा से त्वचा संपर्क में रखें ताकि शिशु को आवश्यक गर्मी मिल सके. कोविड संक्रमित माताएं स्तनपान एहतियाती कदम के साथ शिशु को स्तनपान करायें. स्तनपान के समय मास्क पहनें तथा श्वसन संबंधी स्वच्छता का कड़ाई से पालन करें.
मां नियमित रूप से हाथों को साबुन पानी से धोयें:
कोविड संक्रमण की संभावना होने या संक्रमित होने की स्थिति में मां बच्चे को छूने से पहले नियमित रूप से साबुन पानी से हाथों को अच्छी तरह धोंये या एल्कोहल आधारित सेनिटाइजर का इस्तेमाल करें. नियमित रूप्मा से मास्क का इस्तेमाल करें. मास्क के गीला होते ही बदल दें. गंदे मास्क का इस्तेमाल नहीं करें. कपड़े के मास्क को इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह धोकर धूप में सूखायें. खांसते या छींकते समय साफ रूमाल या टिश्यू पेपर का उपयोग करें तथा इसे बंद ढक्कन वाले कूड़ेदान में डालें. हाथों को अच्छी तरह साफ करें.
डिब्बे वाले दूध नुकसानदेह, शिशु हो सकता है बीमार:
मंत्रालय ने सलाह दी है कि शिशु को डिब्बे वाला दूध नहीं पिलाया जाये.  डिब्बे वाला दूध देने से गंभीर बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है. साफ सफाई का आभाव, साफ पानी की कमी, डिब्बे के दूध का सही नहीं होना इस खतरे को और बढ़ावा देता है. कोविड संक्रमित माताएं शिशु को स्तनपान ही करायें. स्तनपान नहीं कराने से मां का अपना दूध कम बनने लगेगा. स्तनपान कराते समय बच्चे को सही तरीके से पकड़ें ओर स्तन से लगायें ताकि बच्चा आसानी से दूध पी सके.
मां का निकाला दूध भी है शिशु के लिए असरदार:
यदि कोई मां कोविड पॉजिटिव हो जाती है और शिशु को स्तनपान कराने में सक्षम महसूस नहीं कर रही हे तो मां के ठीक होने के तुरंत बाद शिशु को स्तनपान कराना प्रारंभ कर देना चाहिए. ऐसी स्थिति में मां का निकला हुआ दूध पिलाया जाना चाहिए. मां और मां की मदद करने वाला कोई भी व्यक्ति मां का दूध निकालने से पहले अपने हाथों को अच्छी तरह धोये. दूध को अच्छी तरह साफ कटोरी में निकालें. शिशु को वही लोग दूध पिलायें जो बीमार नहीं हों. मां का दूध निरंतर बनता रहे इसलिए मां का दूध निकालना बहुत जरूरी है. यदि मां का दूध निकालने में असमर्थ हैं तो डोनर ह्यमून मिल्क दिया जा सकता है. यदि दोनों की संभावना नही हो तो स्थानीय पशु दूध जैसे कि ताजा उबला दूध या पहले से पैक्ड दूध या पॉश्चयूकृत टोंड दूध या गाय का दूध प्रयोग में लाया जा सकता है. पुश दूध का इस्तेमाल चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही करें.
स्तनपान करा रही मां करायें कोविड टीकाकरण:
मंत्रालय ने स्तनपान कराने वाली माताओं के कोविड टीकाकरण की सिफारिश की है और कहा है कि यह उनके लिए सुरक्षित और असरदार है. ऐसी माताओं को टीकाकरण के ​लिए परामर्श दी जानी चाहिए. कोविड टीकाकरण के बाद भी माताओं में दूध का बनना सामान्य रूप से होता है. इससे दूध पैदा करने की क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है

कोरोना मरीज तेजी से हो रहे स्वस्थ

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तीसरी लहर में स्वास्थ्य विभाग की तैयारी बेहतर
जांच से लेकर इलाज तक की है बेहतर व्यवस्था
बांका, 20 जनवरी
कोरोना की तीसरी लहर में स्वास्थ्य विभाग की बेहतर तैयारी है। जांच से लेकर इलाज तक की बेहतर व्यवस्था होने का ही परिणाम है कि तेजी से कोरोना मरीज स्वस्थ भी हो रहे हैं। अभी तक जिले में लगभग साढ़े चार सौ मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। अब लोगों को भी थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है। जांच और इलाज की तो बेहतर व्यवस्था है ही, लेकिन सतर्कता बरतने से जांच और इलाज की नौबत ही नहीं आएगी।
सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार महतो कहते हैं कि जिले में कोरोना की जांच से लेकर इलाज तक की बेहतर व्यवस्था है। टीकाकरण अभियान भी अभी बेहतर तरीके से चल रहा है। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक का टीकाकरण हो रहा है। कोरोना से निपटने के लिए हर तरह के इंतजाम किए गए हैं, लेकिन आमलोगों को भी थोड़ा सजग रहना चाहिए। घर में किसी के बीमार पड़ने पर उसे तत्काल सरकारी अस्पताल लेकर जाना चाहिए। वहां पर डॉक्टर के मुताबिक उसका इलाज करवाएं। अगर डॉक्टर कोरोना कोरोना जांच के लिए कहते हैं तो जांच करवाएं। किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करें।
पांच हजार लोगों की हो रही है प्रतिदिन जांचः अभी कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए जिले में प्रतिदिन पांच हजार से अधिक लोगों की जांच होती है। संक्रमण दर एक प्रतिशत के आसपास है। सभी सरकारी अस्पतालों में जांच की व्यवस्था मौजूद है। एंटीजन किट से लेकर आरटीपीसीआर पद्धति से लोगों की कोरोना जांच हो रही है। इतनी अधिक संख्या में जांच होने से कोरोना का संक्रमण दर पर नियंत्रण रहता है। एक से दूसरे व्यक्ति में उतना तेजी से नहीं जा पाता है। इसलिए जांच की गति को लगातार पांच हजार के आसापास बरकरार रखा गया है।
होम आइसोलेशन में भी मरीजों का रखा जा रहा ख्यालः अभी जो भी लोग संक्रमित हो रहे हैं, अधिकतर लोगों का इलाज होम आइसोलेशन में हो रहा है। होम आइसोलेशन में मरीजों पर हिट एप से नजर रखी जा रही है। मरीजों की किसी भी तरह की जरूरतों को तत्काल पूरा किया जा रहा है। यही कारण है कि कोरोना के मरीज जल्द ठीक भी हो जा रहे हैं। ठीक होने के बाद भी मरीज को सतर्कता बरतने के लिए कहा जा रहा है। किसी भी परिस्थिति में लापरवाही नहीं बरतना है।
कोरोना गाइडलाइन का करें पालनः शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि अभी सबसे महत्वपर्ण है कोरोना की गाइडलाइन का पालन करना। घर से बाहर जाते वक्त मास्क लगाएं। सामाजिक दूरी का पालन करते हुए एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी बनाए रखें। भीड़भाड़ से बचें। बाहर से घर आने पर 20 सेकेंड तक हाथ की धुलाई अवश्य करें। अनावश्यक घर से बाहर नहीं निकलें। ऐसा करते रहने से आप भी कोरोना से बचे रहेंगे और आपके घर परिवार के सदस्यों के साथ-साथ आपके जानने वाले भी इसकी चपेट में नहीं आएंगे।

कोविड संभावित या संक्रमित माताएं शिशु को अवश्य करायें स्तनपान

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स्वास्थ्य एव परिवार कल्याण मंत्रालय ने जारी किया जरूरी गाइडलाइन
डिब्बे वाले दूध नहीं पिलाने की दी सलाह, शिशु हो सकता है बीमार
पटना, 20 जनवरी:
स्तनपान नवजात के जीवन को बेहतर बनाता है और जीवनभर उसके अच्छे स्वास्थ्य और सही शारीरिक व मानसिक विकास में मदद करता है. कोविड 19 के दौरान स्तनपान कराने को लेकर माता पिता तथा परिजनों के मन में कई तरह के सवाल भी उठते हैं. भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्तनपान को लेकर एक गाइडलाइन जारी कर बताया ​है कि कोविड संक्रमण काल में शिशु को माताएं नियमित रूप से स्तनपान करायें तथा स्वास्थ्यक​र्मी स्तनपान से संबंधित आवश्यक जानकारी तथा परामर्श मुहैया करायें जिससे मां को सफलतापूर्वक स्तनपान करवाने के लिए मदद मिल सके.
कोविड संक्रमित मां के दूध से नहीं फैलता संक्रमण:
गाइडलाइन में कहा गया है कि कोविड 19 से संक्रमित मां या वह मां जिनमें कोविड 19 की संभावना है, के दूध में कोविड संक्रमण पैदा करने वाले वायरस मौजूद नहीं होते हैं. इसलिए कोविड 19 संक्रमित मां के दूध से संक्रमण नहीं फैलता है. कोविड संक्रमित माताएं या संक्रमण की संभावित माताओं को जन्म के एक घंटे के भीतर नवजात को स्तनपान कराना चाहिए. इससे शिशु को आवश्यक मात्रा में कोलोस्ट्रम मिलता है जो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है. साथ ही त्वचा से त्वचा संपर्क में रखें ताकि शिशु को आवश्यक गर्मी मिल सके. कोविड संक्रमित माताएं स्तनपान एहतियाती कदम के साथ शिशु को स्तनपान करायें. स्तनपान के समय मास्क पहनें तथा श्वसन संबंधी स्वच्छता का कड़ाई से पालन करें.
मां नियमित रूप से हाथों को साबुन पानी से धोयें:
कोविड संक्रमण की संभावना होने या संक्रमित होने की स्थिति में मां बच्चे को छूने से पहले नियमित रूप से साबुन पानी से हाथों को अच्छी तरह धोंये या एल्कोहल आधारित सेनिटाइजर का इस्तेमाल करें. नियमित रूप्मा से मास्क का इस्तेमाल करें. मास्क के गीला होते ही बदल दें. गंदे मास्क का इस्तेमाल नहीं करें. कपड़े के मास्क को इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह धोकर धूप में सूखायें. खांसते या छींकते समय साफ रूमाल या टिश्यू पेपर का उपयोग करें तथा इसे बंद ढक्कन वाले कूड़ेदान में डालें. हाथों को अच्छी तरह साफ करें.
डिब्बे वाले दूध नुकसानदेह, शिशु हो सकता है बीमार:
मंत्रालय ने सलाह दी है कि शिशु को डिब्बे वाला दूध नहीं पिलाया जाये.  डिब्बे वाला दूध देने से गंभीर बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है. साफ सफाई का आभाव, साफ पानी की कमी, डिब्बे के दूध का सही नहीं होना इस खतरे को और बढ़ावा देता है. कोविड संक्रमित माताएं शिशु को स्तनपान ही करायें. स्तनपान नहीं कराने से मां का अपना दूध कम बनने लगेगा. स्तनपान कराते समय बच्चे को सही तरीके से पकड़ें ओर स्तन से लगायें ताकि बच्चा आसानी से दूध पी सके.
मां का निकाला दूध भी है शिशु के लिए असरदार:
यदि कोई मां कोविड पॉजिटिव हो जाती है और शिशु को स्तनपान कराने में सक्षम महसूस नहीं कर रही हे तो मां के ठीक होने के तुरंत बाद शिशु को स्तनपान कराना प्रारंभ कर देना चाहिए. ऐसी स्थिति में मां का निकला हुआ दूध पिलाया जाना चाहिए. मां और मां की मदद करने वाला कोई भी व्यक्ति मां का दूध निकालने से पहले अपने हाथों को अच्छी तरह धोये. दूध को अच्छी तरह साफ कटोरी में निकालें. शिशु को वही लोग दूध पिलायें जो बीमार नहीं हों. मां का दूध निरंतर बनता रहे इसलिए मां का दूध निकालना बहुत जरूरी है. यदि मां का दूध निकालने में असमर्थ हैं तो डोनर ह्यमून मिल्क दिया जा सकता है. यदि दोनों की संभावना नही हो तो स्थानीय पशु दूध जैसे कि ताजा उबला दूध या पहले से पैक्ड दूध या पॉश्चयूकृत टोंड दूध या गाय का दूध प्रयोग में लाया जा सकता है. पुश दूध का इस्तेमाल चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही करें.
स्तनपान करा रही मां करायें कोविड टीकाकरण:
मंत्रालय ने स्तनपान कराने वाली माताओं के कोविड टीकाकरण की सिफारिश की है और कहा है कि यह उनके लिए सुरक्षित और असरदार है. ऐसी माताओं को टीकाकरण के ​लिए परामर्श दी जानी चाहिए. कोविड टीकाकरण के बाद भी माताओं में दूध का बनना सामान्य रूप से होता है. इससे दूध पैदा करने की क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है

महाअभियान में 22,200 लोगों ने लिया टीका

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-युवाओं के टीकाकरण के साथ-साथ दूसरी डोज पर भी रहा फोकस

-बड़ी संख्या में स्कूली छात्र छात्राओं को कोरोना का टीका लिया

भागलपुर, 19 जनवरी

कोरोना टीकाकरण को लेकर बुधवार को जिले में महाअभियान चलाया गया। इस महाअभियान में 22,200 लोगों ने कोरोना का टीका लिया। टीकाकरण को लेकर जिले में सैकड़ों केंद्र बनाए गए थे, जहां पर भारी संख्या में लोगों ने आकर कोरोना का टीका लिया। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ मनोज कुमार चौधरी ने बताया कि टीकाकरण को लेकर जिले में सैकड़ों केंद्र बनाए गए थे। किशोरों को टीका देने के लिए स्कूलों में भी व्यवस्था की गई थी। साथ में जिन लोगों ने टीका की पहली खुराक ले ली है और उनका समय पूरा हो गया है, ऐसे लोगों को भी बुला-बुलाकर टीका की दूसरी खुराक दी गई। इसके साथ ही जिन लोगों ने अभी तक एक भी खुराक नहीं ली थी, उन्हें भी कोरोना का टीका लगाया गया। अभियान के दौरान बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने कोरोना का टीका लिया।

फोन कर लाभुकों को बुलाया गया: कोरोना टीका की पहली खुराक लेने वाले ऐसे लोग जिनका कि समय पूरा हो गया है, उन्हें दूसरी खुराक देने के लिए फोन कर बुलाया गया। ऐसे लोगों को पहले ही चिह्नित किया गया और एक सूची बना ली गई है। जिले में अभी दो लाख से अधिक ऐसे लोग हैं जिन्होंने समय पूरा हो जाने पर दूसरी खुराक नहीं ली है। ऐसे लोगों को महाअभियान के तहत बुलाकर टीका दिलवाया गया।

21 और 23 को भी चलेगा महाअभियान: कोरोना टीका को लेकर 21 और 23 जनवरी को भी महाअभियान चलाया जाएगा। इस दौरान में सभी वर्ग के लोगों को टीका दिया जाएगा। 15 से 17 साल के किशोरों और 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को पहली और जिनका समय पूरा हो गया है उन्हें दूसरी खुराक दी जाएगी। इस अभियान में आशा कार्यकर्ता, सरकारी कर्मचारी एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी अपनी भूमिका निभाएंगे।

योग्य महिलाओं को परिवार नियोजन के साधन  अपनाने के  फायदे की दें जानकारी : बीडीओ 

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– परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा की सफलता को ले खगड़िया सदर पीएचसी में  बैठक
– 29 जनवरी तक चलेगा पखवाड़ा, सफलता को ले तेज हुआ अभियान
खगड़िया, 19 जनवरी
जिले में चल रहे परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा की सफलता को बुधवार को खगड़िया सदर पीएचसी परिसर स्थित मीटिंग हाॅल में एक बैठक आयोजित की गई। जिसकी अध्यक्षता सदर प्रखंड के बीडीओ प्रशांत कुमार एवं संचालन सदर पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ राजीव रंजन ने किया। बैठक में स्वास्थ्य विभाग, केयर इंडिया, आईसीडीएस, जीविका समेत अन्य विभागों के प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी एवं कर्मी शामिल हुए। इस मौके पर बीडीओ ने बैठक में मौजूद सभी पदाधिकारी एवं कर्मी से कहा, एक-एक योग्य महिला से संपर्क कर उन्हें परिवार नियोजन के साधन को अपनाने से होने वाले फायदे की जानकारी दें। इसके बाद उन्हें इस साधन को अपनाने के लिए प्रेरित करें। क्योंकि, सामुदायिक स्तर पर जागरूकता से इस अभियान का सफल संचालन सुनिश्चित होगा। इसलिए सभी विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मी अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करें। ताकि अधिकाधिक लोगों को इस पखवाड़े की जानकारी मिल सके और सभी योग्य लाभार्थी पखवाड़े का सुविधाजनक तरीके से लाभ उठा सके। वहीं, बीडीओ ने यह भी कहा कि इसके लिए एक्सन प्लान तैयार कर अभियान चलाएं। इस मौके पर सदर पीएचसी के चिकित्सक डाॅ कृष्ण कुमार, बीईओ शेखर कुमार, केयर इंडिया के फैमिली प्लानिंग के जिला समन्वयक राजेश पांडेय, प्रखंड प्रबंधक रेणुका कुमारी, आईसीडीएस से एल एल रेखा कुमारी, नविता कुमारी, अंजू कुमारी, प्रीति कुमारी, किरण कुमारी, जीविका से अन्नू कुमारी आदि मौजूद थी।
– परिवार नियोजन के साधन को अपनाने पर मिलने वाली सुविधाओं की भी लाभार्थियों को दे जानकारी :
खगड़िया सदर पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ राजीव रंजन ने कहा, लोगों को जागरूक करने के दौरान उन्हें यह भी बताएं कि परिवार नियोजन के साधन को अपनाने पर क्या-क्या सुविधाएं मिलती हैं। जैसे कि, उन्हें बताएं कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में यह सुविधा ना सिर्फ पूरी तरह मुफ्त है बल्कि, इस साधन के स्थाई तरीके को अपनाने के बाद लाभार्थियों को प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। ऑपरेशन के दौरान अस्पतालों में सुरक्षा के हर मानकों का ख्याल रखा जाता है। कोविड प्रोटोकॉल के पालन के साथ अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। प्रशिक्षित सह योग्य चिकित्सकों एवं एएनएम की मौजूदगी में बंध्याकरण किया जा जाता है। इसी तरह अन्य सुविधाओं का जानकारी से अवगत कराते हुए लाभार्थियों को प्रेरित करें। ताकि सभी योग्य लाभार्थी पुरानी ख्यालातों से बाहर आकर इस साधन को अपनाने के लिए आगे आ सकें।
– 29 जनवरी तक चलेगा परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा :
केयर इंडिया के फैमिली प्लानिंग के जिला समन्वयक राजेश पांडेय ने बताया, 29 जनवरी तक जिले के सभी प्रखंडों में परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा चलेगा। इस दौरान जिले के सभी स्वास्थ्य स्थानों में योग्य और सक्षम इच्छुक महिलाओं का बंध्याकरण किया जाएगा। पखवाड़े की सफलता को लेकर जिले के सभी प्रखंडों में संबंधित क्षेत्र की एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर योग्य लाभार्थी को परिवार नियोजन के साधन को अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। इस दौरान वैकल्पिक उपायों की भी जानकारी दी जा रही है। ताकि अगर कोई महिला परिवार नियोजन ऑपरेशन को अपनाने के लिए इच्छुक है किन्तु, उनका शरीर ऑपरेशन के लिए सक्षम नहीं है तो ऐसी महिला वैकल्पिक व्यवस्था में शामिल कंडोम, काॅपर-टी, छाया, अंतरा समेत अन्य उपायों को अपना सकती है। वैकल्पिक उपाय भी पूरी तरह कारगर और सुरक्षित है।
– गुणवत्तापूर्ण जिंदगी जीने के लिए परिवार नियोजन के साधन को अपनाना बेहद जरूरी :
केयर इंडिया की प्रखंड प्रबंधक रेणुका कुमारी ने बताया, गुणवत्तापूर्ण जिंदगी जीने के लिए हर योग्य महिला को परिवार नियोजन के साधन को अपनाना  बेहद जरूरी है। क्योंकि, शारीरिक और आर्थिक दोनों विकास इसी साधन को अपनाने से संभव है। इस साधन को अपनाने से जहाँ महिलाएं शारीरिक रूप से मजबूत रहेगी वहीं, बच्चे भी स्वस्थ्य और मजबूत होंगे। छोटा और खुशहाल परिवार निर्माण होगा। बच्चे को उचित परवरिश और बेहतर शिक्षा मिलेगी। पूरे परिवार को उचित रहन-सहन का माहौल मिलेगा।