750 लोगों को पड़े टीके, 334 लोगों की जांच

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कोरोना के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग का अभियान जारी

टीकाकरण को लेकर क्षेत्र में जागरूकता अभियान जारी

बांका-

कोरोना के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग का अभियान जारी है। शुक्रवार को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के तहत 750 लोगों को कोरोना के टीके दिए गए तो 334 लोगों की जांच की गई। टीका देने के बाद सभी लाभुकों को 30 मिनट तक निगरानी में रखा गया। किसी तरह की समस्या नहीं होने पर सभी को घर जाने दिया गया। साथ ही सभी लोगों को समय पर आकर टीका का दूसरा डोज लेने के लिए कहा गया। इसके अलावा सभी को सतर्कता के साथ रहने के लिए कहा गया।

शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी ने कहा कि शुक्रवार को भी गांधी चौक स्थित 12 घंटे के टीकाकरण केंद्र पर काफी संख्या में लाभुक कोरोना का टीका लेने के लिए पहुंचे। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के तहत शुक्रवार को 750 लोगों को टीके दिए गए। अच्छी बात यह रही कि युवाओं के साथ अधिक उम्र के लोग और दूसरी डोज लेने वाले भी अच्छी खासी संख्या में टीका लेने के लिए केंद्र पर पहुंचे। टीका को लेकर जागरूकता अभियान भी जारी है।

जांच में कोई भी संक्रमित नहीं मिला: डॉ. चौधरी ने कहा कि शुक्रवार को 222 लोगों की एंटीजन किट से जांच की गई। इनमें से कोई भी व्यक्ति संक्रमित नहीं मिला। वहीं आरटीपीसीआर मशीन से जांच के लिए 112 लोगों के सैंपल लिए गए। जांच के बाद सभी लोगों को मास्क लगाने और सामाजिक दूरी का पालन करते हुए एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी का पालन करने के लिए कहा गया। बार-बार हाथ की धुलाई करने की सलाह भी दी गई। सभी को कहा गया कि बाहर से आने पर 20 सेकेंड तक हाथ की धुलाई अवश्य करें।

टीका लेने के बाद भी गाइडलाइन का पालन जरूरी: डॉ. चौधरी ने कहा कि जिनलोगों ने कोरोना का टीका ले लिया है उन्हें भी कोरोना के खत्म होने तक गाइडलाइन का पालन करना है। जब तक कोरोना खत्म नहीं हो जाता है, तब तक पूरी सतर्कता के साथ रहना जरूरी है। कोरोना को खत्म होने के लिए सभी लोगों को टीका लेना जरूरी है। जिनलोगों ने टीका नहीं लिया है, उन्हें तो सतर्क रहना ही होगा। जिन्होंने टीका ले लिया है, वह भी गाइडलाइन का पालन करें। घर से बेवजह निकलने से परहेज करें।

1050 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी की नियुक्ति शीघ्रः मंगल पांडेय

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‘सर्टिफिकेट इन कम्युनिटी हेल्थ’ कोर्स में नामांकन प्रक्रिया पूरी
छह माह की ट्रेनिंग के बाद हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में होगी तैनाती

पटना। स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने कहा कि प्रदेश के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में चिकित्सकीय व्यवस्था को बेहतर बनाने को लेकर लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। सेंटर पर डॉक्टर, नर्स और चिकित्साकर्मी की नियुक्ति और अन्य संसाधन सुदृढ़ किये जा रहे हैं। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के लिए 1050 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी की (सीएचओ) नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
श्री पांडेय ने बताया कि 25 स्वास्थ्य संस्थानों से सर्टिफिकेट इन कम्यूनिटी हेल्थ कोर्स के लिए 1050 अभ्यर्थियों का नामांकन लिया गया है। सर्टिफिकेट कोर्स में सफलता प्राप्त अभ्यर्थी सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के तौर पर पदस्थापित होंगे। इससे पहले भी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर 1083 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी पदस्थापित किये जा चुके हैं। श्री पांडेय ने बताया कि सेंटर पर कालाजार, मलेरिया, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, ईएनटी समेत बारह तरह की बीमारियों का इलाज किया जाता है। गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं, बच्चों व किशोरों के स्वास्थ्य की देखभाल भी की जाती है। राज्य में अतिरिक्त् प्राथमिक चिकित्सा केंद्र (एपीएचसी) व स्वास्थ्य उपकेंद्र (हेल्थ सब सेंटर) को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में परिवर्तित किया जा रहा है। राज्य में वर्तमान में 2285 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर क्रियाशील हैं।
श्री पांडेय ने बताया कि राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर बनाने के साथ-साथ संसाधनों की उपलब्धता को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग का सतत प्रयास जारी है। केंद्र सरकार से मिल रहे सहयोग के अलावे राज्य सरकार भी अपने स्तर से स्वास्थ्य संस्थानों में इंफ्रास्ट्रचर की व्यवस्था करा रही है। मानव बलों की बढ़ोतरी को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग आवश्यक कार्रवाई कर रही है। मेडिकल कॉलेज सह अस्पतालों से लेकर पीएचसी तक डॉक्टर्स, नर्सेस और पैरा मेडिकल स्टॉफ सहित अन्य कर्मियों की संख्या बढ़ाई जा रही है।

अब कोविड टीके के दूसरे डोज से वंचित लाभुकों को आएगा फोन

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• टेलीफोन कॉल द्वारा लाभुकों को दूसरा डोज लेने के लिए किया जायेगा प्रेरित
• ए.एन.कॉलेज पटना की एन.एस.एस. इकाई तथा केयर इंडिया के बीच मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर हुआ हस्ताक्षर
• नुक्कड़ नाटक तथा पेंटिंग प्रतियोगिता का किया गया आयोजन
पटना/ 24 सितंबर- कोरोना टीके का दोनों डोज जनमानस को लगे और वह संक्रमण से सुरक्षित रह सकें इसके लिए सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग प्रयासरत है. ज्यादा से ज्यादा लाभुकों को टीकाकृत करने के उद्देश्य से समय -समय पर कोविड टीकाकरण महाअभियान चलाया जा रहा है. दूसरे डोज से वंचित लोगों को टीका लगवाकर उन्हें पूर्ण रूप से टीकाकृत करने के लिए सरकार संकल्पित है. इसी क्रम में शुक्रवार को ए.एन.कॉलेज पटना में एन.एस.एस. दिवस के अवसर पर महाविद्यालय की एन.एस.एस.( राष्ट्रीय सेवा योजना ) इकाई तथा केयर इंडिया के बीच मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर हस्ताक्षर किया गया। इस मेमोरेंडम आफ अंडरस्टैंडिंग के अनुसार ए.एन. कॉलेज की एन.एस.एस. इकाई तथा केयर इंडिया के स्वयंसेवक कोरोना के बचाव तथा टीकाकरण के महत्व पर पटना के विभिन्न स्थानों पर नुक्कड़ नाटक आयोजन तथा अन्य माध्यमों के द्वारा लोगों को जागरूक करेंगे।

ए.एन.कॉलेज पटना की एन.एस.एस. इकाई तथा केयर इंडिया के बीच मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर हुआ हस्ताक्षर:

मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रोफेसर एस.पी. शाही, एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ रत्ना अमृत, डॉ अभिषेक दत्त तथा केयर इंडिया की ओर से सुनील बाबू, निदेशक, कोविड केअर टास्क फोर्स, केयर इंडिया तथा सुमित कुमार, सीनियर स्ट्रेटेजिक प्रोग्राम मैनेजर ने हस्ताक्षर किये। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ए.एन.कॉलेज पटना के प्राचार्य प्रोफेसर एस.पी.साही ने कहा राष्ट्रीय सेवा योजना छात्रों के व्यक्तित्व विकास में अहम् भूमिका निभा रहा है और उन्हें कोविड टीकाकरण अभियान से जोड़कर ज्यादा से ज्यादा लोगों को टीकाकृत करने में सहायता मिलेगी.

“ हेल्लो वारियर्स ” पहल की हुई शुरुआत:
छात्रों को संबोधित करते हुए केयर इंडिया, पटना के टीम लीडर मानसून मोहंती ने बताया हर छात्र दिन भर में दुसरे डोज से वंचित 10 से 15 लाभुकों को फोन कॉल द्वारा टीके का दूसरा डोज लेने के लिए प्रेरित करेगा. इसके लिए हर छात्र को एक मिनट का समय मिलेगा. मानसून मोहंती ने बताया इससे किसी भी कारण से दूसरे डोज से वंचित लाभुकों को दूसरा डोज लेने की प्रेरणा मिलेगी.

नुक्कड़ नाटक तथा पेंटिंग प्रतियोगिता का किया गया आयोजन:
कोरोना जागरूकता पर पेंटिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। जिसमें कॉलेज की छात्रा स्वेता कुमारी को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ और उन्हें शील्ड देकर पुरस्कृत किया गया. कोरोनावायरस से बचाव तथा टीकाकरण के महत्व पर महाविद्यालय एन.एस.एस. के स्वयंसेवकों तथा केयर इंडिया के स्वयंसेवकों के द्वारा नुक्कड़ नाटक का भी आयोजन किया गया जिसका संचालन डॉ रत्ना अमृत ने किया.
धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अभिषेक दत्त ने किया।इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के आइक्यूएसी समन्वयक डॉ अरुण कुमार, प्रो. कलानाथ मिश्र,प्रो.तृप्ति गंगवार,डॉ. विद्या भूषण,यशश्वी सिंह,विभिन्न विभागों के विद्यार्थी तथा एन. एस. एस. के स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

बांका मंडल कारा के कैदियों को दी गई डीईसी और अल्बेंडजोल की दवा

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-कारा अधीक्षक समेत सभी कर्मियों को भी दी गई दवा
-दवा देने के दौरान फाइलेरिया के तीन मरीज भी मिले
बांका, 24 सितंबर।
फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर जिले में एमडीए (मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) अभियान चल रहा है। इस अभियान के तहत जिले के 24 लाख से भी अधिक की आबादी को डीईसी और अल्बेंडाजोल की दवा दी जाएगी। इसी के तहत बांका मंडल कारा के कारा अधीक्षक, कैदियों और सभी कर्मियों को दवा दी गई। मंडल कारा में कुल 1311 लाभुकों को फाइलेरिया से बचाव की दवा दी गई। इस दौरान पर्यवेक्षण वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी आऱिफ इकबाल, केयर इंडिया के डीटीओ ऑन राकेश कुमार और आंगनबाड़ी सेविका और पीसीआई के सदस्य भी मौजूद थे। आरिफ इकबाल में बताया कि मंडल कारा में फाइलेरिया के तीन मरीज भी मिले। सभी मरीजों के साथ अन्य लोगों को फाइलेरिया से बचाव के तरीके बताए गए। साथ ही तीनों मरीजों को सदर अस्पताल से दवा भिजवाने का आश्वासन दिया गया। उन्होंने बताया कि हमलोग जल्द ही मंडल कारा के मरीजों को दवा भिजवा देंगे।
आशा कार्यकर्ता जा रहीं घर- घर: मालूम हो कि आशा कार्यकर्ताओं की टीम 14 दिनों तक क्षेत्र में लोगों को अपने सामने दवा खिला रही हैं। अभियान के पहले सात दिन में एक आशा के क्षेत्र में पहले छह दिन घर-घर जाकर लोगों को दवा खिलाने के बाद सातवें दिन छूटे हुए घरों में जाकर लोगों को दवा खिलायी जाएगी। आठवें से 13वें दिन तक दूसरे आशा के क्षेत्र में लोगों को घर-घर जाकर दवा खिलाई जाएगी और 14वें दिन फिर छूटे हुए लोगों को दवा खिलायी जाएगी। दवा खिलाने के बाद आशा कार्यकर्ता रजिस्टर में लाभुकों का नाम भी दर्ज करेंगी। साथ ही अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग को केयर इंडिया और पीसीआई सहयोग भी कर रहा है। अभियान का पहला चरण समाप्त हो गया है और दूसरा चरण एक अक्टूबर से शुरू होगा। पहला चरण 20 से 23 सितंबर तक चलाया गया।
गर्भवती महिलाओं और दो वर्ष के कम उम्र के बच्चों को नहीं खिलाई जा रही कोई गोलीः जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ वीके यादव ने बताया कि अभियान के दौरान आशा कार्यकर्ता लोगों को अपने सामने ही डीईसी और अल्बेंडाजोल की गोली खिला रही हैं। दो से पांच वर्ष के बच्चों को डीईसी और अल्बेंडाजोल की एक गोली, छह से 14 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की दो और अल्बेंडाजोल की एक गोली और 15 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को डीईसी की तीन और अल्बेंडाजोल की एक गोली खिलाई जा रही है। अल्बेंडाजोल की गोली लोगों को चबाकर खाने की सलाह दी जा रही है। दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कोई दवा नहीं खिलायी जा रही है। साथ ही गंभीर रूप से बीमार लोगों को भी दवा नहीं खिलाई जा रही है। दवा सेवन के बाद किसी तरह के सामान्य साइड इफ़ेक्ट से घबराने की जरूरत नहीं है। अमूमन जिनके अंदर फाइलेरिया के परजीवी होते हैं, उनमें ही साइड इफ़ेक्ट देखने को मिलते हैं। साइड इफ़ेक्ट सामान्य होते हैं जो प्राथमिक उपचार से ठीक भी हो जाते हैं।

सही पोषण लेकर टीबी से करें अपना बचावः सिविल सर्जन

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-2025 तक टीबी को खत्म करने को लेकर चल रहा अभियान
-सरकारी अस्पतालों में जांच से लेकर दवा की है मुफ्त व्यवस्था
भागलपुर, 24 सितंबर।
टीबी मुक्त बिहार बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयासरत है। इस काम में ,बिहार सरकार को केयर इंडिया और कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी)का भी साथ मिल रहा है। 2025 तक जिले को टीबी से मुक्त करने के लिए बिहार के अलग-अलग जिलों में जनआंदोलन कार्यक्रम किए जा रहे हैं। इसे लेकर जागरूकता कार्य़क्रम, निःशुल्क जांच शिविर और एक्टिव केस फाइंडिंग के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का काम किया जा रहा है। सरकार के टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत सभी टीबी मरीजों को बेहतर और नियमित उपचार प्रदान किया जा रहा है।
सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने बताया कि जिले को 2025 तक टीबी से मुक्त बनाने के लिए हमलोग प्रयासरत हैं। इसे लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को टीबी से बचने के लिए सलाह दी जा रही है। लोग उस पर अमल करें। उन्होंने कहा कि टीबी से बचाव के लिए सही पोषण भी जरूरी है। अगर सही पोषण नहीं मिलेगा तो लोग कुपोषण के शिकार हो जाएंगे और उस पर टीबी की चपेट में आने का खतरा रहता है। इसलिए लोगों को संतुलित आहार लेना चाहिए। आहार में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा और मिनरल्स की मात्रा जरूर होनी चाहिए।
घनी आबादी वाले इलाके मे जागरूकता अभियान:डॉ. शर्मा ने कहा कि टीबी के अधिकतर मामले घनी आबादी वाले इलाके में पाए जाते हैं। वहां पर गरीबी रहती है। लोगों को सही आहार नहीं मिल पाता है और वह टीबी की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए हमलोग घनी आबादी वाले इलाके में लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं। लोगों को बचाव की जानकारी दे रहे हैं और साथ में सही पोषण लेने के लिए भी जागरूक कर रहे हैं।
सरकारी अस्पतालों में टीबी के इलाज की मुफ्त व्यवस्थाः दरअसल, टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार गंभीर है। इसी के तहत टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की सुविधा मुफ्त है। साथ ही पौष्टिक भोजन करने के लिए टीबी मरीज को पांच सौ रुपये महीने छह महीने तक मिलता भी है। इसलिए अगर कोई आर्थिक तौर पर कमजोर भी है और उसमें टीबी के लक्षण दिखे तो उसे घबराना नहीं चाहिए। नजदीकि सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करानी चाहिए। दो सप्ताह तक लगातार खांसी होना या खांसी में खून निकलने जैसे लक्षण दिखे तो तत्काल सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।
बीच में दवा नहीं छोड़ेः टीबी की दवा आमतौर पर छह महीने तक चलती है। कुछ पहले भी ठीक हो जाते हैं और कुछ लोगों को थोड़ा अधिक समय भी लगता है। इसलिए जब तक टीबी की बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं हो जाए, तब तक दवा का सेवन छोड़ना नहीं चाहिए। बीच में दवा छोड़ने से एमडीआर टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर कोई एमडीआर टीबी की चपेट में आ जाता है तो उसे ठीक होने में डेढ़ से दो साल लग जाते हैं। इसलिए टीबी की दवा बीच में नहीं छोड़ें। जब तक आप पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते हैं तब तक दवा खाते रहें।
टीबी के लक्षण
1. दो हफ़्ते या अधिक खांसी आना- पहले सूखी खांसी तथा बाद में बलगम के साथ खून का आना।
2. रात में पसीना आना-चाहे मौसम ठंडे का क्यों न हो।
3. लगातार बुखार रहना
4.थकावट होना
5.वजन घटना
6.सांस लेने में परेशानी होना

बचाव के तरीके-
1. जांच के बाद टी.बी.रोग की पुष्टि होने पर दवा का पूरा कोर्स लें।
2.मास्क पहनें तथा खांसने या छींकने पर मुंह को पेपर नैपकीन से कवर करें।
3.मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूकें।
4.मरीज हवादार और अच्छी रौशनी वाले कमरे में रहें। एसी से परहेज करें।
5.पौष्टिक खाना खाएं।योगाभ्यास करें।
6.बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तम्बाकू, शराब आदि से परहेज करें।
7. भीड़भाड़ वाली गंदी जगहों पर जानें से बचें।

जिले में कल से शुरू होगा पल्स पोलियो अभियान

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-3 लाख 80 हजार बच्चों को दवा पिलाने का है लक्ष्य
-आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर बच्चों को पिलाएंगी दवा

बांका, 24 सितंबर-

जिले में रविवार से पल्स पोलिया अभियान शुरू हो रहा है। पांच दिनों तक चलने वाला अभियान 30 सितंबर को खत्म होगा। इसे लेकर सारी तैयारी कर ली गई हैं। अभियान के तहत एएनएम, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविका और प्रेरक घर-घर जाकर पांच वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की दवा पिलाएंगी। शहरी क्षेत्र में एएनएम और आंगनबाड़ी सेविका दवा पिलाने का काम करेंगी तो ग्रामीण क्षेत्रों में आशा कार्य़कर्ता, आंगनबाड़ी सेविका और प्रेरक बच्चों को दवा पिलाएंगी। इस बार जिले के तीन लाख 80 हजार बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसे लेकर दवा पिलाने वाली एएनएम, आशा, सेविका और प्रेरक का उन्मुखीकरण किया गया है।
कोरोना गाइडलाइन का किया जाएगा पालनः दवा पिलाने के दौरान स्वास्थ्यकर्मी कोरोना की गाइडलाइन का पालन करेंगी। स्वास्थ्यकर्मी बच्चों को स्पर्श नहीं करेंगी। छोटा बच्चा परिजन के गोद में रहेंगे और जो बड़ा है उसे दूर से ही दवा पिलाई जाएगी। साथ ही सभी लोग मास्क पहने रहेंगे और सामाजिक दूरी का पालन करेंगे। स्वास्थ्यकर्मियों के साथ-साथ बच्चों के परिजनों को भी अनिवार्य तौर पर मास्क पहनना होगा। इसका पालन हर हाल में करने के लिए कहा गया है। पोलियो अभियान के दौरान कोरोना को लेकर पूरी सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
शहरी क्षेत्र में 8 हजार बच्चों को पिलाई जाएगी दवाः बांका सदर प्रखंड में इस बार 8 हजार बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य रखा गया है। शहरी क्षेत्र में एएनएम और आंगनबाड़ी सेविका दवा पिलाने का काम करेंगीं। इसे लेकर शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इनलोगों का उन्मुखीकरण किया गया है। उन्मुखीकरण के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों को दवा पिलाने के तरीके बता दिए गए हैं। दवा पिलाने के दौरान सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। साथ ही कोरोना गाइडलाइन का पालन भी सख्ती से करने के लिए कहा गया है।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने कहा कि पोलियो उन्मूलन को लेकर रविवार से शुरू हो रहा अभियान गुरुवार तक चलेगा। इसे लेकर सारी तैयारी कर ली गई है। उम्मीद है कि हमलोग लक्ष्य को हासिल कर लेंगे। साथ ही कोई भी बच्चा छूटे नहीं, इसका विशेष तौर पर ख्याल ऱखा जाएगा। उन्मुखीकरण के दौरान एएनएम और आंगनबाड़ी सेविका को साफतौर पर इस बात का ध्यान रखने के लिए कहा गया है।

पोषणयोद्धा बन सेविका दीदी रंजू लायी दर्ज़नों बच्चों के जीवन में सुधार

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– पोषण अभियान को सार्थक करने को निरंतर प्रयासरत हैं गिद्धौर की आंगनबाड़ी सेविका
– वृद्धि आकलन पर माताओं से करती हैं तुलनात्मक चर्चा

जमुई, 23 सितम्बर | ये कहावत सिद्ध है कि स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का वास होता और इसकी बुनियाद जन्म से पांच वर्ष तक में ही पड़ जाती है | इस बात को लोगो को समझाने के प्रयास मे जुटी हैं जिले के गिद्धौर प्रखंड स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-33, की आंगनबाड़ी सेविका रंजू कुमारी | वो विगत 30 वर्षों से उक्त केंद्र पर सेवारत हैं | उन्होने मैट्रिक तक पढ़ाई की और आंगनबाड़ी से जुड़ गईं | अपने प्रारंभिक प्रशिक्षण में समेकित बाल विकास परियोजना के तहत छः सेवाओं में पोषण की महत्ता को बखूबी समझ लिया था | इसमें शिशु को माता द्वारा छः महीने तक केवल स्तनपान, व्यक्तिगत स्वच्छता और पूरक पोषाहार के महत्व को अपने कार्यक्षेत्र की लक्षित समूह वर्ग में समझाने का प्रयत्न करती रही। इसे लागू करने की प्रतिदिन हर संभव कोशिशों ने दर्ज़नों बच्चों को कुपोषण से बचाने में सफलता दिलायी है |
रंजू कुमारी अपने अनुभवों को जोड़कर बताती हैं कि केवल स्तनपान और इसे पिलाने के सही तरीके से किसी भी शिशु के शुरुआती एक सौ अस्सी दिन प्रारंभिक तौर पर पोषण की नींव ही है | इसके महत्व को मैंने स्वयं भी अपनाया और पोषक क्षेत्र की धात्री माताओं को भी अपनाने के लिए प्रेरित किया | परिणामतः मेरे क्षेत्र में एक दर्ज़न से अधिक बच्चों में से कोई भी कभी कुपोषण की श्रेणी में नहीं गया | मैं गृहभ्रमण की कार्ययोजना में इसे अहम् मुद्दे तौर पर शामिल करती हूँ | इसके साथ ही केंद्र पर बच्चों को हाथ को साबुन से धोने और व्यक्तिगत स्वच्छता को अनिवार्य रूप से बताती हूँ |

वृद्धि आकलन पर तुलनात्मक चर्चा की सार्थक पहल :
इसी गाँव की 23 वर्षीय रिंकी देवी (जिनका पहला संतान तीन वर्ष का है और सातवें माह की गर्भवती हैं) कहती हैं मैंने सेविका दीदी के खानपान की सलाह को पूरी तरह तो अपनाया ही है वहीं शिशु जन्म के छः माह तक केवल स्तनपान अपने संतान को कराया है | जब-जब मासिक तौर पर केंद्र के बच्चों के वृद्धि आकलन के लिए कार्ड भरा जाता है जिसमें मेरे बच्चे की हमेशा हरी लाइन रहने की वजह से मुझे शाबाशी तो मिलती ही रही है वहीं मेरा उदाहरण देकर सभी मौजूद माताओं को समझाने का कार्य करती हैं | ये मैं जरूर कहूँगी कि इनके बताये बातों से मेरे बच्चे कमजोरी के कारण डाक्टरी इलाज से बचे रहे | इसमें रंजू दीदी की भूमिका ही रही वर्ना रुढ़िवादी विचारों वाली महिला की तरह मैं भी परेशान रहती और गरीबी और भगवान को कोसती रहती |
इनके कार्यों की सराहना करते हुए महिला पर्यवेक्षिका प्रीति कुमारी कहती हैं कि रंजू कुमारी के प्रयासों से हमारे क्षेत्र के शिशुओं और माताओं की बेहतर स्वास्थ्य की स्थिति रहती है | इन्होने प्रशिक्षण में बताये गए तथ्यों को सुचारू तौर पर लागू किया है |

लखीसराय के अमहरा, कचियाना और पत्तेनर गांव में स्वस्थ्य जीविका दीदी अभियान, निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन

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– पॉपुलेशन बेस्ड मास स्क्रीनिंग फ़ॉर एनसीडी के तहत जिलाभर के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में किया जाना है इस अभियान का संचालन
– अभियान के सफल संचालन को ले राज्य स्वास्थ्य समिति और अपर उपाधीक्षक सह सहायक अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, गैर संचारी रोग कार्यालय से जारी की गई चिट्ठी

लखीसराय , 23 सितंबर। लखीसराय में एनपीसीडीसीएस कार्यक्रम के अंतर्गत पॉपुलेशन बेस्ड मास स्क्रीनिंग फ़ॉर एनसीडी’एस के सफल क्रियान्वयन व इसे त्वरित गति प्रदान करने के उद्देश्य से जिला के लखीसराय सदर पीएचसी क्षेत्र अंतर्गत अमहरा, कचियाना और पत्तेनर गांव में गुरुवार को ” स्वस्थ जीविका दीदी” अभियान के तहत जीविका दीदी के परिवार की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच के साथ-साथ कोरोना टीकाकरण और नियमित टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इसके साथ-साथ जीविका दीदी के परिवार वालों को ऑनलाइन टेलीमेडिसिन की भी सुविधा उपलब्ध करवाई गई। इस अभियान को पूरे जिला के सभी सीएचसी, पीएचसी, एपीएचसी और यूपीएचसी पर चलाया जाना है। इस अभियान के सफल संचालन के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति और अपर उपाधीक्षक सह सहायक अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, गैर संचारी रोग लखीसराय के कार्यालय से एक चिट्ठी जारी की गई है। मालूम हो कि 2021-22 में पॉपुलेशन बेस्ड मास स्क्रीनिंग विथ एनसीडी’एस के तहत 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की स्क्रीनिंग की रफ्तार शून्य है।

जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. सुरेश शरण ने बताया कि “स्वस्थ जीविका दीदी” अभियान के तहत जिला के सभी शहरी और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के साथ -साथ स्वास्थ्य उपकेंद्र के कार्यक्षेत्र में संकुल क्षेत्र संघ (क्लस्टर फेडरेशन) कार्यालय पर कैम्प के माध्यम से जीविका दीदी एवं स्वयं सहायता समूह की प्रत्येक सदस्य एवं उसके सभी परिवार जनों का फैमिली फोल्डर बनाया जाना है। इसके साथ ही उस परिवार में 30 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों का सीबीएसी फॉर्म स्थानीय आशा कार्यकर्ता के द्वारा भरा जाना है। आशा कार्यकर्ता द्वारा पूर्ण रूपेण भरे गए फैमिली फोल्डर और सीबीएसी फॉर्म के प्रपत्रों के आधार पर 10 रुपये प्रति सीबीएसी प्रपत्र की दर से आशा को प्रोत्साहन राशि का भुगतान राज्यस्तर पर अश्विन पोर्टल के माध्यम से किया जाना है।

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित “स्वस्थ्य जीविका दीदी” अभियान का प्रारम्भ उन अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (एपीएचसी) शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (यूपीएचसी) और स्वास्थ्य उपकेंद्रों (एचएससी) पर किया जा रहा है जिन्हें हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में विकसित किया जा चुका है।

उन्होने बताया कि जीविका के अधीन सभी जिलों में कार्यरत संकुल क्षेत्र संघ ( क्लस्टर फेडरेशन) में आयोजित कैम्प में प्रत्येक सोमवार, गुरुवार और शनिवार को संबंधित यूपीएचसी, एपीएचसी और एचएससी पर कार्यरत आशा, एएनएम, स्टाफ नर्स, सीएचओ, चिकित्सा पदाधिकारी एवं डाटा एंट्री ऑपरेटर के साथ अन्य कर्मियों की एक टीम के द्वारा सभी आवश्यक उपकरण और सामग्रियों के साथ उपस्थित होकर इस अभियान के तहत सभी जीविका दीदी एवं स्वयं सहायता समूह की सभी सदस्य के साथ -साथ उसके परिवार के सभी सदस्यों का स्वास्थ्य प्रपत्र भरा जाना है। इसके साथ ही उनके परिवार में 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के सीबीए सी फॉर्म पूर्ण रूपेण भरकर सबंधित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को उपलब्ध कराएंगे।

उन्होंने बताया कि सीबीएसी फॉर्म और फैमिली फोल्डर में अंकित सूचनाओं के डिजिटलाइजेशन के लिए जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी एवं प्रखण्ड अनुश्रवण एवं मूल्यांकन सहायक के द्वारा संयुक्त रूप से इन स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यरत डाटा इंट्री ऑपरेटर का एनसीडी एप पर प्रशिक्षण कराया जाएगा। इस प्रशिक्षण में टाटा ट्रस्ट के द्वारा तकनीकी सहयोग प्रदान किया जाएगा।

कोरोना वैक्सीन के फर्स्ट डोज़ सेचुरेशन को जिला के सभी प्रखंडों में हो रहा है सर्वें

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– सभी पीएचसी क्षेत्र में आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर कोरोना वैक्सीनेशन के बारे में जुटा रही जानकारी

– सर्वे के बाद प्राप्त डाटा के अनुसार फिक्सड सेशन साइट के माध्यम से बचे हुए लोगों का कराया जाएगा टीकाकरण
-सर्वे मे केयर इण्डिया कर रहा सहयोग
मुंगेर, 23 सितंबर। कोरोना वैक्सीन के फर्स्ट डोज़ सेचुरेशन के लिए केयर इंडिया के सहयोग से जिला के सभी प्रखंडों में सर्वें का काम हो रहा है। इस सर्वे को करने का मुख्य उद्देश्य यह कि सर्वे के माध्यम से यह पता किया जा सके कि मुंगेर जिला में अभी कितने लोग हैं जिन्होंने कोरोना वैक्सीन की एक भी खुराक नहीं ली है। इसके बाद फिक्स्ड सेशन साइट बनाकर तथा अलग-अलग वैक्सीनेशन टीम के माध्यम से बचे हुए लोगों का वैक्सीनेशन कराया जाएगा ताकि जल्द जिला में कोरोना वैक्सीन के फर्स्ट डोज का 100 परसेंट अचीवमेंट प्राप्त किया जा सके।

केयर इंडिया मुंगेर के डीटीओ ऑन तबरेज आलम ने बताया कि मुंगेर के बरियारपुर प्रखण्ड के साथ- साथ सभी प्रखंड़ों में केयर इंडिया की प्रखण्ड स्तर पर काम कर रही टीम और आशा कार्यकर्ता के द्वारा घर – घर जाकर एक निर्धारित फॉर्मेट के अनुसार लोगों से उनके परिवार में कितने लोगों ने कोरोना का टीका नहीं लिया है या टीका का सिर्फ पहली खुराक ली है या फिर टीका की दोनों खुराक ले ली है सम्बंधित जानकारी सर्वे के माध्यम से इकट्ठा कर रहे हैं । इस सर्वे से यह जानकारी प्राप्त हो सकेगी कि मुंगेर में अभी भी कितने लोग कोरोना वैक्सीन की कोई भी डोज लेने से वंचित हैं। इसके बाद फिक्स्ड सेशन साइट और अलग-अलग वैक्सीनेशन टीम के द्वारा बचे हुए सभी लोगों को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज लगाकर जिला में वैक्सीन की पहली डोज के सेचुरेशन के साथ- साथ 100 परसेंट अचीवमेंट प्राप्त किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि सर्वे कर्ता के रूप में आशा के साथ – साथ अन्य सभी लोग एक फॉर्मेट के अनुसार जानकारी इकट्ठा करेगी। जिसमें वो सबसे पहले प्रखण्ड का नाम, सर्वेकर्ता का नाम, सर्वे की तिथि, पंचायत का नाम, वार्ड संख्या, आंगनबाड़ी केंद्र संख्या, घर के मुखिया का नाम, परिवार में सदस्यों की कुल संख्या, 10 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की कुल संख्या, कोविड वैक्सीन कितनों ने ली है, कितने लोगों ने वैक्सीन नहीं ली है और कितने लोगों ने वैक्सीन की दोनों खुराक ले ली है संबंधित जानकारी प्राप्त कर अंकित करेगी। इसके साथ ही सर्वे फॉर्मेट के अगले हिस्से में लाभार्थी द्वारा कोरोना का टीका नहीं लेने का पूरा विवरण दर्ज करेगी। इसके अनुसार लाभार्थी का नाम, लाभार्थी के पिता या पति का नाम, जन्म का साल, पहचान पत्र का प्रकार, पहचान पत्र का पूर्ण विवरण, मोबाइल नंबर, टीका न लेने का कारण और अभियुक्ति दर्ज करेगी।

1670 लोगों ने लिया टीका, 330 की हुई जांच

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-सिविल सर्जन के निर्देश पर चलाया गया महाअभियान
-कोरोना के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग का अभियान जारी
बांका, 23 सितंबर।
कोरोना के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग का अभियान जारी है। इसी सिलसिले में गुरुवार को सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार महतो के निर्देश पर बांका सदर प्रखंड में कोरोना टीकाकरण को लेकर महाअभियान चलाया गया। इसे लेकर सदर प्रखंड में 25 केंद्र बनाए गए थे। सभी केंद्रों पर सुबह सात बजे से ही काफी संख्या में लाभुक टीका लेने के लिए आते दिखे। इस दौरान 1670 लोगों को कोरोना का टीका लगाया गया। टीका देने के बाद सभी लोगों को 30 मिनट तक निगरानी में रखा गया। किसी तरह की कोई समस्या नहीं आने पर सभी लाभुकों को घर जाने दिया गया। साथ ही टीका का पहला डोज लेने वालों को समय पर आकर दूसरा डोज लेने की सख्त हिदायत दी गई। सभी केंद्रों पर पहला और दूसरा, दोनों डोज लेने के लिए लाभुक पहुंचे।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि सिविल सर्जन के निर्देश पर गुरुवार को एक बार फिर से टीकाकरण को लेकर अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान काफी संख्या में लोग टीका लेने के लिए सामने आए। इस दौरान आशा कार्य़कर्ता, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, विकास मित्र और बीएलओ लोगों को टीकाकरण केंद्र तक लाते दिखे। जिनलोगों को पहला डोज ले लिया था, उन्हें बुलाकर दूसरा डोज दिलवाया गया। जिन्होंने टीका का कोई भी डोज नहीं लिया था, उन्हें पहला डोज दिलवाया गया।
टीका का दूसरा डोज अवश्य लेः डॉ. चौधरी ने कहा कि कोरोना टीका का दोनों डोज लेना आवश्यक है। कोई भी व्यक्ति एक डोज लेकर निश्चिंत न हो जाए। जब तक टीका का दोनों डोज नहीं पड़ जाता है, तब तक टीकाकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होगी। इसलिए कोरोना से बचाव को लेकर टीका का दोनों डोज अवश्य लें। समय पूरा होते ही अपने नजदीकी केंद्र पर जाकर टीका का दूसरा डोज लें। सभी दिन टीकाकरण हो रहा है। बीच-बीच में अभियान भी चलाया जा रहा है। इसलिए किसी तरह के संकोच में नहीं रहें और जल्द से जल्द कोरोना टीका का दोनों डोज लें।
330 लोगों की हुई जांचः उधर, टीकाकरण के साथ-साथ कोरोना जांच भी लगातार चल रही है। गुरुवार को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 220 लोगों की एंटीजन किट से जांच की गई। साथ ही 110 लोगों का सैंपल आरटीपीसीआर मशीन से जांच के लिए लिया गया। जांच में कोई भी व्यक्ति संक्रमित नहीं मिला। डॉ. चौधरी ने बताया कि हालांकि जांच में कोई भी व्यक्ति संक्रमित नहीं मिला। फिर भी लोगों को सतर्कता के साथ रहने के लिए कहा गया। घर से बाहर जाते वक्त मास्क लगाने और सामाजिक दूरी का पालन करने के लिए कहा गया। भीड़भाड़ से बचने और एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी बनाए रखने के लिए कहा गया। साथ ही बाहर से घर आने पर 20 सेकेंड तक हाथ की धुलाई हर हाल में करने के लिए कहा गया। ऐसा करते रहने से लोग कोरोना की चपेट में आने से बचे रहेंगे।