नाटापन को मात देने में मुंगेर बिहार में पांचवें स्थान पर

0

– राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- 5 2019 – 20 के आंकड़ों से हुआ ख़ुलासा
– पोषण के अन्य सूचकांकों में भी हुआ सुधार

मुंगेर-

बिहार के बच्चों को नाटापन के जाल से निकलने में सफलता मिली है। आंकड़ों में मुंगेर जिला पूरे बिहार में पांचवें स्थान पर है जबकि शिवहर पहले पायदान पर है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- 5 के आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच सालों में बिहार में नाटापन ( उम्र के हिसाब से लम्बाई का कम होना) में 5.4% की कमी आई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- 4 ( वर्ष 2015-16) के अनुसार में बिहार में 48.3% बच्चे नाटापन से ग्रसित थे, जो अब राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- 5 (वर्ष 2019- 20) के अनुसार घटकर 42.9% रह गया है।
नाटापन में आई कमी सुपोषित मुंगेर की राह आसान करने में प्रमुख भूमिका अदा करेगी-
जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी और पोषण -पुनर्वास केंद्र मुंगेर के नोडल अधिकारी विकास कुमार ने बताया, बच्चों में नाटापन होने के बाद इसे पुनः सुधार करने की गुंजाइश कम हो जाती है एवं यह बच्चों में कुपोषण की सबसे बड़ी वजह भी बनती है। इस लिहाज से नाटापन में आई कमी सुपोषित मुंगेर की राह आसान करने में प्रमुख भूमिका अदा करेगी। अपर्याप्त पोषण एवं नियमित संक्रमण जैसे अन्य कारकों के कारण होने वाला नाटापन बच्चों में शारीरिक एवं बौद्धिक विकास को अवरुद्ध करता है जो स्वस्थ भारत के सपने के साकार करने में सबसे बड़ा बाधक भी है।
उन्होंने बताया पिछले पांच वर्षों में नाटापन में कमी की बात करें तो मुंगेर जिला बिहार में पांचवें स्थान पर है। मुंगेर में नाटापन 11.1 % कम होकर 35.5 % हो गया।

‘बाल कुपोषण मुक्त बिहार’ अभियान बना सूत्रधार :
पोषण एवं पुनर्वास केंद्र मुंगेर की फीडिंग डेमोंस्ट्रेटर रचना भारती ने बताया राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- 5 के अनुसार पिछले पांच सालों में बिहार में नाटापन में कमी आयी है। यद्यपि, इस सुधार में पोषण एवं स्वास्थ्य के कुछ विशेष सूचकांकों में आई कमी का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण – 5 के अनुसार जिले में पिछले पांच सालों में बिहार में 6 माह तक केवल स्तनपान, संस्थागत प्रसव, महिला सशक्तीकरण, संपूरक आहार ( 6 माह के बाद स्तनपान के साथ ठोस आहार की शुरुआत), कुल प्रजनन दर में कमी, 4 प्रसव पूर्व जाँच एवं टीकाकरण जैसे सूचकांकों में सुधार हुआ है। ये सूचकांक कहीं न कहीं नाटापन में कमी लाने में सहायक भी साबित हुए हैं। लेकिन वर्ष 2014 में शुरू की गई ‘बाल कुपोषण मुक्त बिहार’ अभियान नाटापन पर अधिक केन्द्रित था। इस तरह अभियान के तहत किए गए सार्थक एवं सामूहिक प्रयास नाटापन में कमी लाने में सूत्रधार बना। वहीं मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, समेकित बाल विकास सेवा सुदृढ़ीकरण एवं पोषण सुधार योजना (आईएसएसएनपी), पोषण अभियान एवं ओडीएफ़ जैसे कार्यक्रमों का बेहतर क्रियान्वयन भी नाटापन में सुधार लाने में सकारात्मक प्रभाव डाला है।

नाटापन के गंभीर दूरगामी परिणाम :
उन्होने बताया उम्र के हिसाब से लंबाई कम होना ही नाटापन कहलाता है। गर्भावस्था से लेकर शिशु के 2 वर्ष तक की अवधि यानी 1000 दिन बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास की आधारशिला तैयार करती है। इस दौरान माता एवं शिशु का स्वास्थ्य एवं पोषण काफी मायने रखता है। इस अवधि में माता एवं शिशु का खराब पोषण एवं नियमित अंतराल पर संक्रमण नाटापन की सम्भावना को बढ़ा देता है। नाटापन होने से बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक विकास अवरुद्ध होता है| साथ ही नाटापन से ग्रसित बच्चे सामान्य बच्चों की तुलना में अधिक बीमार पड़ते हैं। उनका आई-क्यू स्तर कम जाता है एवं भविष्य में आम बच्चों की तुलना में वह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पिछड़ भी जाते हैं।

घर के पुरुष भी सुनिश्चित करें अपनी सहभागिता :
घर-घर सुपोषण की अलख जगाने की दिशा में आईसीडीएस एवं स्वास्थ्य विभाग के साथ कई अन्य सहयोगी संस्था भी निरंतर कार्य कर रही है। लेकिन सरकारी प्रयासों के इतर इसको लेकर सामुदायिक जागरूकता एवं सहभागिता भी महत्वपूर्ण है। ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य एवं पोषण को लेकर माताओं की सक्रियता अधिक है। अभी भी पुरुष अपने बच्चे के पोषण को लेकर गंभीर नहीं है। गर्भवती महिला का स्वास्थ्य एवं पोषण, बच्चों का स्तनपान एवं संपूरक आहार जैसे बुनियादी फैसलों में पुरुषों की सहभागिता होने से कुपोषण के दंश से बच्चों को बचाया जा सकता है।

सूर्यगढ़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र में 6250 को लगाई गई कोरोना वैक्सीन

0

– सूर्यगढ़ा सीएचसी क्षेत्र के पांच सेशन साइट पर लोगों को लगाई जा रही है कोरोना वैक्सीन

लखीसराय, 05 अप्रैल –

जिले के सूर्यगढ़ा सामुदायिक स्वास्थ्य क्षेत्र के सभी पांच सेशन साइट पर 2 मार्च से लेकर 05 अप्रैल तक 6250 लोगों को कोरोना की वैक्सीन लगाई गई। सोमवार को सूर्यगढ़ा सीएचसी पर 71 वर्षीय बटनी ने कोरोना वैक्सीन की पहली डोज ली। कोरोना वैक्सीन लेने के बाद उन्होंने बताया मैंने आज कोरोना संक्रमण से बचने के लिए वैक्सीन की पहली डोज ले ली है। मुझे पूरा भरोसा है वैक्सीन की दूसरी डोज लेने के बाद मेरा शरीर कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने में पूरी तरह से सक्षम हो जाएगा। इनके साथ ही सोमवार को कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज लेने वाले 60 वर्षीय शैलेन्द्र सिंह ने बताया वैक्सीन की दोनों डोज लेने के दौरान मैंने किसी तरह की परेशानी महसूस नहीं की और न ही वैक्सीन का कोई साइड इफेक्ट ही महसूस किया है। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने लोगों से भयमुक्त होकर वैक्सीनेशन के लिए आगे आने की अपील की।

सूर्यगढ़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. धीरेंद्र कुमार ने बताया कोरोना वायरस के बढ़ते दूसरी लहर के बीच सीएचसी क्षेत्र के सभी सेशन साइट पर जोर- शोर से कोरोना वैक्सीनेशन के चौथे चरण में 45 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों का वैक्सीनेशन किया जा रहा है। आम लोगों से अपील करते हुए उन्होने सभी लोगों से किसी भी प्रकार की भ्रंतियों पर ध्यान नहीं देते हुए भय मुक्त होकर वैक्सीन लगवाने की बात कही। इसके साथ ही उन्होंने सभी लोगों से पूरी सावधानी के साथ कोरोना गाइडलाइन का पालन करने की अपील की।

सूर्यगढ़ा सीएचसी के ब्लॉक हेल्थ मैनजर अनिल कुमार ने बताया सूर्यगढ़ा सीएचसी के अलावा कजरा एपीएचसी, अभयपुर एपीएचसी, धुसैठ एपीएचसी के अलावा खावा एचएससी पर प्रतिदिन लाभुकों को कोरोना की वैक्सीन लगाई जा रही है। 2 मार्च से लेकर 5 अप्रैल तक सीएचसी क्षेत्र के कुल 6250 लोगों को कोरोना की वैक्सीन लगाई जा चुकी है। आम लोगों से अपील करते हुए उन्होंने कहा, कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लेने वालों के अलावा सभी लोग कोरोना की दूसरी लहर के बीच केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए कोरोना गाइड लाइन का अक्षरशः पालन करें। सभी अनिवार्य रूप से मास्क लगाएं ताकि ड्रॉपलेटस के जरिये फैलने वाले कोरोना संक्रमण को काफी हद तक रोका जा सके। इसके साथ ही सभी लोग शारीरिक दूरी के नियम के तहत एक दूसरे से कम से कम दो गज या छह फीट की दूरी बरतें। सभी लोग अपने – अपने घरों से निकलने पर एक निश्चित अंतराल पर हाथों की साफ- सफाई के लिए साबून या हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।

फर्जी कोविड टेस्ट, 3 स्वास्थ्यकर्मी सस्पेंड

0

गुजरात: कोरोना का बढ़ता मामला बेहद भयावह होता जा रहा हैं आने वाले दिनों में कोरोना का मामला और अधिक प्रचंड होने वाला हैं जहां कोरोना के बढ़ते मामलों से देश दहला हुआ हैं तो वही गुजरात के राजकोट से एक ऐसा मामला सामने आया जिसे सुनने के बाद आप भी सन्न रह जाएंगे. गुजरात के राजकोट से चौंकाने वाला मामला ये सामना आया हैं कि यहां कोरोना टेस्ट का टारगेट पूरा करने के लिए खाली टेस्ट किट ही लैब में भेजी जा रही थीं ताकि रिपोर्ट नेगेटिव आए. इसके लिए सैंपलों पर नाम और मोबाइल नंबर भी फर्जी लिखे जाते थे. 3 स्वास्थ्यकर्मियों को इस मामले का खुलासा होने पर सस्पेंड कर दिया गया है.

4 अप्रैल को गुजराती अखबार में छपी खबर

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने राजकोट के जिलाधिकारी और जिला विकास अधिकारी से जांच करने को कहा है. जिम्मेवार लोगों के खिलाफ एक्शन लेने के लिए भी कहा गया है. जिन अधिकारियों को निलंबित किया गया है, उनमें राजकोट जिले के खोड़ापीपर प्राइमरी हेल्थ सेंटर (PHC) के मेडिकल ऑफिसर, एक लैब टेक्नीशियन और PHC के तहत चलने वाले धनवंतरी रथ के मेडिकल ऑफिसर शामिल हैं. 4 अप्रैल को एक गुजराती अखबार में छपी खबर में दावा किया गया कि खोड़ापीपर स्वास्थ्य केंद्र ने RT-PCR टेस्ट के लिए पिछले कुछ महीने में 1300 सैंपल्स भेजे थे. लेकिन हकीकत में कोई सैंपल लिया ही नहीं गया था.

नाम और नंबर फर्जी लिखे जाते

बता दें कि RT-PCR टेस्ट के लिए एक खास तरह की किट होती है. इसमें केमिकल से भरी ट्यूब होती है. इस ट्यूब में उन स्वैब्स (सैंपल्स) को रखा जाता है, जो नाक या मुंह से लिए जाते हैं. इन ट्यूब्स पर मरीज का नाम और मोबाइल नंबर आदि लिखकर लैब को भेज दिया जाता है. यहीं पर हेराफेरी की गई. जो किट टेस्ट के लिए भेजी गईं, वो खाली थीं. यानी उसमें कोई स्वैब था ही नहीं. किट पर लिखे नाम और नंबर भी फर्जी थे. इस तरह हर रिपोर्ट जांच में नेगेटिव ही आती थी.

कोविड-19 टेस्ट के लिए नई टीम भेजी जाएगी

इस रिपोर्ट में दावा किया गया कि सैंपल्स पर मरीज के नंबर की जगह स्वास्थ्यकर्मी के मोबाइल नंबर ही लिख दिए गए थे ताकि लैब का मैसेज सीधे उनके पास ही जाए. कॉन्ट्रेक्ट ट्रेसिंग के टारगेट को पूरा करने के लिए इस धांधली को अंजाम दिया गया. इस तरह ना तो ट्रेसिंग हो पाई, 1300 किट भी बेकार हो गईं. राजकोट की जिलाधिकारी ने कहा कि इन लोगों को निलंबित कर दिया गया है. राजकोट ग्रामीण क्षेत्र के SDM ने 4 अप्रैल को जांच की थी, जिसके आधार पर ये फैसला किया गया. इसके अलावा खोड़ापीपर PHC के अंतर्गत आने वाले 13 गांवों में कोविड-19 टेस्ट के लिए नई टीम भेजी जा रही है.

परमबीर सिंह ने सौ करोड़ वसूली का लगाया था आरोप, देशमुख ने सौंपा इस्तीफा

0

मुंबई: विस्फोटक वाली कार मुकेश अंबानी के घर के बाहर से मिलने के बाद से शुरू हुआ मामला 100 करोड़ रुपए की वसूली तक पहुंचा और अब मुख्यमंत्री अनिल देशमुख उद्धव ठाकरे को अपना इस्तीफा सौंप दिए हैं। सौ करोड़ वसूली मामले पर बॉम्बे हाईकोर्ट की सीबीआई जांच के आदेश के तीन घंटे के भीतर ही महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने इस्तीफा दे दिया है।अनिल देशमुख का इस्तीफा

दिलीप पाटिल संभाल सकते हैं गृहमंत्रालय का प्रभार

पार्टी सुप्रीमो शरद पवार से बात करने के बाद अनिल देशमुख ने अपना इस्तीफा सौंपा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दिलीप पाटिल महाराष्ट्र के अगले गृहमंत्री हो सकते हैं। हालांकि अभी इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। अटकलें लगाई जा रही है कि गृहमंत्री दिलीप पाटिल को गृहमंत्रालय का प्रभार सौंपा जा सकता है।

देशमुख पर लगे आरोप बेबुनियाद- मलिक

अनिल देशमुख ने मुख्यमंत्री को लिखी इस्तीफे की चिट्ठी को ट्वीट की । वहीं महाराष्ट्र कैबिनेट के मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि अनिल देशमुख पर लगाए गए सभी आरोप निराधार और बेबुनियाद है। मलिक ने बताया कि देशमुख ने खुद ही इस पद से इस्तीफा दिया है। देशमुख ने कहा कि वह जांच चलने तक पद पर नहीं रहेंगे।

शरद पवार से मुलाकात कर सौंपे चिठ्ठी

देशमुख ने इस इस्तीफे के पीछे कोर्ट के उस आदेश को कारण बताया है जिसमें सीबीआई जांच के आदेश दिए गए हैं. अनिल देशमुख ने अपनी पार्टी एनसीपी के सुप्रीमो शरद पवार से मुलाकात की और इसके बाद उन्होंने सीएम उद्धव ठाकरे को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. अब चीफ मिनिस्टर का इसे स्वीकार करना औपचारिकता भर है.

भारत के महामहिम उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू द्वारा लेखकः अच्युत सामंत द्वारा अंग्रेजी में लिखित पुस्तक -नीलिमारानीःमाई मदर,माई हीरो भुवनेश्वर राजभवन में लोकार्पित

0

 

-हमें अपनी मां,मातृभूमि तथा मातृभाषा को कभी नहीं भूलना चाहिए-एम. वेंकैया नायडू, उपराष्ट्रपति

भुवनेश्वर-

भुवनेश्वर राजभवन में आयोजित पुस्तक लोकार्पण समारोह के सम्मानित अतिथि ओडिशा के मान्यवर राज्यपाल प्रोफेसर गणेशीलाल की गरिमामयी उपस्थिति में लेखकः अच्युत सामंत द्वारा अंग्रेजी में लिखित पुस्तक -नीलिमारानीःमाई मदर,माई हीरो का लोकार्पण मुख्यअतिथि भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू द्वारा हुआ। वैश्विक महामारी कोरोना से बचाव को ध्यान में रखकर यह आयोजन भुवनेश्वर राजभवन में रखा गया था। अपने संबोधन में मुख्यअतिथि उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने बताया कि उन्होंने अनेक आत्मकथाएं पढीं हैं लेकिन अपनी मां की आत्मकथा वे पहली बार लेखक प्रोफेसर अच्युत सामंत का देख रहे हैं। लोकार्पित पुस्तक नारीजाति के लिए प्रेरणा है। हमें अपनी मां,मातृभूमि तथा मातृभाषा को कभी नहीं भूलना चाहिए। सम्मानित अतिथि ओडिशा के मान्यवर राज्यपाल प्रोफेसर गणेशीलाल ने अपने संबोधन में यह कहा कि हमें केवल मानवता की सेवा ही नहीं करनी चाहिए अपितु मानवता की पूजा भी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि डा सामंत की अंग्रेजी में लिखी पुस्तक नीलिमारानीःमाई मदर,माई हीरो को आद्योपांत पढकर मुझे ठक्कर बापा की याद आती है।लेखकः अच्युत सामंत ने मुख्यअतिथि उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू तथा सम्मानित अतिथि ओडिशा के मान्यवर राज्यपाल प्रोफेसर गणेशीलाल के प्रति हृदय से आभारी हैं जिन्होंने उनकी पुस्तक को आज लोकार्पितकर उनको प्रोत्साहित किया है। उन्होंने पुस्तक प्रकाशन के पीछे प्रेरणा को स्पष्ट करते हुए यह बताया कि संतान चाहे अमीर हो अथवा गरीब,प्रत्येक संतान के जीवन में उसकी अपनी मां का विशेष महत्त्व होता है।

कोरोना मरीज का तिरस्कार नहीं करें, उसके साथ सहानुभूति रखें

0
जिले के पहले कोरोना मरीज विजय चिरानिया की लोगों से अपील
एक साल पहले लंदन से आने के दौरान हो गए थे संक्रमित
भागलपुर-
जिले में कोरोना के मरीज फिर से बढ़ने लगे हैं. स्वास्थ्य विभाग इसकी रोकथाम को लेकर सतर्क है. जिले में जगह पर जांच चल रही है. चौक चौराहों पर एंबुलेंस लगाकर लोगों की कोरोना जांच कराई जा रही है. इस वजह से कुछ लोग डरे हुए भी हैं. ऐसे में कोरोना से उबर चुके मरीजों की सलाह महत्वपूर्ण हो सकती है. जिले के नवगछिया के रहने वाले पहले कोरोना मरीज  विजय चिरानिया कहते हैं कि एक साल पहले जब  वह  संक्रमित  हुए थे तो आसपास के लोगों ने  उनसे  दूरी बना ली थी. यहां तक कि लोग फोन भी नहीं उठाते थे. ऐसा नहीं करना चाहिए. उनका कहना है ऐसे मौकों पर लोगों को कोरोना मरीज के प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए, ना कि उसका तिरस्कार करना चाहिए. ऐसा करने से मरीज को संबल मिलता है और वह जल्द ठीक हो जाता है.
फोन पर बात करने से नहीं होता है कोरोना: चिरानिया कहते हैं कि जिस तरह से समाज के लोग कोरोना के मरीजों से दूरी बना लेते हैं  वह ठीक नहीं है. यह बात सही है कि कोरोना  एक संक्रामक बीमारी है और इससे बचने के उपाय किया जाना चाहिए, लेकिन अगर आप फोन से बात करेंगे तो कोरोना नहीं हो जाएगा या फिर उस मोहल्ले से भी गुजरेंगे तो आप संक्रमित नहीं होंगे. ऐसा नहीं करना चाहिए कि अगर किसी को कोरोना  हो जाए तो उससे बात करनी भी छोड़ देनी चाहिए. फोन कर उसका हाल चाल लेना चाहिए.  ऐसा करने से मरीजों को हौसला मिलेगा.
कोरोना की गाइडलाइन का करें पालन: विजय चिरानिया कहते हैं कोरोना पर लगाम लगाने के लिए सबसे जरूरी है इसकी गाइडलाइन का पालन करना. लोग मास्क पहने, सामाजिक दूरी का पालन करे और घर पर योग करने की कोशिश करे. योगासन से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और कोरोना की चपेट में आने से इससे बच सकते हैं.
परिवार का सहयोग जरूरी: विजय चिरानिया कहते हैं कि ऐसे घड़ी में जब सभी कोई साथ छोड़ देता है तो लोग परिवार की ओर आखिरी उम्मीद से देखते हैं. ऐसी परिस्थिति में परिवार के लोगों को सावधानी बरतते हुए कोरोना मरीज की देखभाल करनी चाहिए. मेरे परिवार वालों ने मेरे लिए काफी दुआ की थी. फोन पर समय-समय पर हालचाल पूछते रहते थे. इससे मुझे संबल मिलता था. . इसलिए अगर किसी के घर में कोई संक्रमित हो जाए तो उसे मरीज के प्रति सहयोगात्मक रवैया रखना चाहिए.
स्वास्थ्यकर्मियों का रवैया सहयोगात्मक: विजय चिरानिया कहते हैं कि जब वह संक्रमित  हुए थे  तो मायागंज अस्पताल में  उनका  इलाज चला था. वहां के डॉक्टरों का रवैया काफी सहयोगात्मक था. स्वास्थ्यकर्मी समय- समय पर आकर हालचाल पूछते थे और भोजन पानी भी समय पर मिल जाता था. इससे  उन्हें  कोरोना से जल्द उबरने में मदद मिली. मायागंज अस्पताल के डॉक्टरों का व्यवहार एक तरह से मेरे लिए संजीवनी बना.

कोरोना मरीज का तिरस्कार नहीं करें, उसके साथ सहानुभूति रखें

0
जिले के पहले कोरोना मरीज विजय चिरानिया की लोगों से अपील
एक साल पहले लंदन से आने के दौरान हो गए थे संक्रमित
भागलपुर-
जिले में कोरोना के मरीज फिर से बढ़ने लगे हैं. स्वास्थ्य विभाग इसकी रोकथाम को लेकर सतर्क है. जिले में जगह पर जांच चल रही है. चौक चौराहों पर एंबुलेंस लगाकर लोगों की कोरोना जांच कराई जा रही है. इस वजह से कुछ लोग डरे हुए भी हैं. ऐसे में कोरोना से उबर चुके मरीजों की सलाह महत्वपूर्ण हो सकती है. जिले के नवगछिया के रहने वाले पहले कोरोना मरीज  विजय चिरानिया कहते हैं कि एक साल पहले जब  वह  संक्रमित  हुए थे तो आसपास के लोगों ने  उनसे  दूरी बना ली थी. यहां तक कि लोग फोन भी नहीं उठाते थे. ऐसा नहीं करना चाहिए. उनका कहना है ऐसे मौकों पर लोगों को कोरोना मरीज के प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए, ना कि उसका तिरस्कार करना चाहिए. ऐसा करने से मरीज को संबल मिलता है और वह जल्द ठीक हो जाता है.
फोन पर बात करने से नहीं होता है कोरोना: चिरानिया कहते हैं कि जिस तरह से समाज के लोग कोरोना के मरीजों से दूरी बना लेते हैं  वह ठीक नहीं है. यह बात सही है कि कोरोना  एक संक्रामक बीमारी है और इससे बचने के उपाय किया जाना चाहिए, लेकिन अगर आप फोन से बात करेंगे तो कोरोना नहीं हो जाएगा या फिर उस मोहल्ले से भी गुजरेंगे तो आप संक्रमित नहीं होंगे. ऐसा नहीं करना चाहिए कि अगर किसी को कोरोना  हो जाए तो उससे बात करनी भी छोड़ देनी चाहिए. फोन कर उसका हाल चाल लेना चाहिए.  ऐसा करने से मरीजों को हौसला मिलेगा.
कोरोना की गाइडलाइन का करें पालन: विजय चिरानिया कहते हैं कोरोना पर लगाम लगाने के लिए सबसे जरूरी है इसकी गाइडलाइन का पालन करना. लोग मास्क पहने, सामाजिक दूरी का पालन करे और घर पर योग करने की कोशिश करे. योगासन से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और कोरोना की चपेट में आने से इससे बच सकते हैं.
परिवार का सहयोग जरूरी: विजय चिरानिया कहते हैं कि ऐसे घड़ी में जब सभी कोई साथ छोड़ देता है तो लोग परिवार की ओर आखिरी उम्मीद से देखते हैं. ऐसी परिस्थिति में परिवार के लोगों को सावधानी बरतते हुए कोरोना मरीज की देखभाल करनी चाहिए. मेरे परिवार वालों ने मेरे लिए काफी दुआ की थी. फोन पर समय-समय पर हालचाल पूछते रहते थे. इससे मुझे संबल मिलता था. . इसलिए अगर किसी के घर में कोई संक्रमित हो जाए तो उसे मरीज के प्रति सहयोगात्मक रवैया रखना चाहिए.
स्वास्थ्यकर्मियों का रवैया सहयोगात्मक: विजय चिरानिया कहते हैं कि जब वह संक्रमित  हुए थे  तो मायागंज अस्पताल में  उनका  इलाज चला था. वहां के डॉक्टरों का रवैया काफी सहयोगात्मक था. स्वास्थ्यकर्मी समय- समय पर आकर हालचाल पूछते थे और भोजन पानी भी समय पर मिल जाता था. इससे  उन्हें  कोरोना से जल्द उबरने में मदद मिली. मायागंज अस्पताल के डॉक्टरों का व्यवहार एक तरह से मेरे लिए संजीवनी बना.

बच्चे को कराएं स्तनपान, बनी रहेगी मुस्कान

0
छ्ह माह तक दें केवल माँ का दूध, निमोनिया-डायरिया न आएगा पास
जन्म के पहले घंटे के भीतर का स्तनपान, बनेगा जीवन का वरदान
लखीसराय-
कोरोना संक्रमण के दौर में हम सबको बच्चों  का ख्याल रखना बहुत ही आवयशक है । क्योंकि  बच्चे के सम्पूर्ण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए माँ का दूध (स्तनपान) बहुत ही जरूरी होता है। माँ के दूध में शिशु की आवश्यकतानुसार पानी होता है, इसलिए छ्ह माह तक के बच्चे को ऊपर से पानी देने की भी जरूरत नहीं होती है। इसलिए बच्चे की मुस्कान बनाए रखने के लिए छ्ह माह तक केवल माँ का दूध पिलाना  चाहिए। इसके अलावा स्तनपान बच्चे में भावनात्मक लगाव पैदा करने के साथ ही सुरक्षा का बोध भी कराता है।
शुरूआती स्तनपान जरूरी :
जिला सिविल सर्जन डॉ देवेन्द्र चौधरी ने , माँ के दूध की महत्ता को समझते हुए कहा स्वास्थ्यकर्मियों का भी पूरा ज़ोर रहता है कि लेबर रूम में चिकित्सा अधिकारी और स्टाफ नर्स द्वारा जन्म के तुरंत बाद बच्चे को माँ की छाती पर रखकर स्तानपान की शुरुआत करायी जाए। नवजात को माँ का पहला दूध मिलने के बाद ही उसे लेबर रूम में शिफ्ट किया जाता है। इसके अलावा माँ को स्तनपान की पोजीशन, बच्चे का स्तन से जुड़ाव और माँ के दूध निकालने की विधि को समझाने में भी नर्स द्वारा पूरा सहयोग किया जाता है ताकि कोई भी बच्चा अमृत समान माँ के दूध से वंचित न रह जाये। यदि बच्चे को जन्म के पहले घंटे के अंदर माँ का पहला पीला गाढ़ा दूध पिलाया जाये तो ऐसे बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।
6 माह तक केवल स्तनपान कराने से दस्त और निमोनिया से होता है बचाव: डॉ. चौधरी  ने बताया, बच्चे को छ्ह माह तक लगातार केवल माँ का दूध दिया जाना चाहिए और उसके साथ किसी अन्य पदार्थ जैसे पानी, घुट्टी, शहद, गाय अथवा भैंस का दूध नहीं देना चाहिए, क्योंकि वह बच्चे के सम्पूर्ण मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए सम्पूर्ण आहार के रूप में  काम करता है। बच्चे को हर डेढ़ से दो घंटे में भूख लगती है। इसलिए बच्चे को जितना अधिक बार संभव हो सके माँ का दूध पिलाते रहना चाहिए। माँ का शुरुआती दूध थोड़ा कम होता है लेकिन वह बच्चे के लिए पूर्ण होता है। अधिकतर महिलाएं यह सोचती हैं कि उनका दूध बच्चे के लिए पूरा नहीं पड़ रहा है और वह बाहरी दूध देना शुरू कर देती हैं जो कि एक भ्रांति के सिवाय और कुछ नहीं है। माँ के दूध में भरपूर पानी और पोषक तत्व होते हैं इसलिए बच्चे को बाहर का कुछ भी नहीं देना चाहिए। बाहर की चीज खिलाने से बच्चे में संक्रमण का खतरा बना रहता है। उन्होंने बताया छ्ह माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने से दस्त और निमोनिया के खतरे से भी बचाव होता है। साथ ही स्तनपान माँ को स्तन कैंसर से भी बचाता है।

बच्चे को कराएं स्तनपान, बनी रहेगी मुस्कान

0
छ्ह माह तक दें केवल माँ का दूध, निमोनिया-डायरिया न आएगा पास
जन्म के पहले घंटे के भीतर का स्तनपान, बनेगा जीवन का वरदान
लखीसराय-
कोरोना संक्रमण के दौर में हम सबको बच्चों  का ख्याल रखना बहुत ही आवयशक है । क्योंकि  बच्चे के सम्पूर्ण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए माँ का दूध (स्तनपान) बहुत ही जरूरी होता है। माँ के दूध में शिशु की आवश्यकतानुसार पानी होता है, इसलिए छ्ह माह तक के बच्चे को ऊपर से पानी देने की भी जरूरत नहीं होती है। इसलिए बच्चे की मुस्कान बनाए रखने के लिए छ्ह माह तक केवल माँ का दूध पिलाना  चाहिए। इसके अलावा स्तनपान बच्चे में भावनात्मक लगाव पैदा करने के साथ ही सुरक्षा का बोध भी कराता है।
शुरूआती स्तनपान जरूरी :
जिला सिविल सर्जन डॉ देवेन्द्र चौधरी ने , माँ के दूध की महत्ता को समझते हुए कहा स्वास्थ्यकर्मियों का भी पूरा ज़ोर रहता है कि लेबर रूम में चिकित्सा अधिकारी और स्टाफ नर्स द्वारा जन्म के तुरंत बाद बच्चे को माँ की छाती पर रखकर स्तानपान की शुरुआत करायी जाए। नवजात को माँ का पहला दूध मिलने के बाद ही उसे लेबर रूम में शिफ्ट किया जाता है। इसके अलावा माँ को स्तनपान की पोजीशन, बच्चे का स्तन से जुड़ाव और माँ के दूध निकालने की विधि को समझाने में भी नर्स द्वारा पूरा सहयोग किया जाता है ताकि कोई भी बच्चा अमृत समान माँ के दूध से वंचित न रह जाये। यदि बच्चे को जन्म के पहले घंटे के अंदर माँ का पहला पीला गाढ़ा दूध पिलाया जाये तो ऐसे बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।
6 माह तक केवल स्तनपान कराने से दस्त और निमोनिया से होता है बचाव: डॉ. चौधरी  ने बताया, बच्चे को छ्ह माह तक लगातार केवल माँ का दूध दिया जाना चाहिए और उसके साथ किसी अन्य पदार्थ जैसे पानी, घुट्टी, शहद, गाय अथवा भैंस का दूध नहीं देना चाहिए, क्योंकि वह बच्चे के सम्पूर्ण मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए सम्पूर्ण आहार के रूप में  काम करता है। बच्चे को हर डेढ़ से दो घंटे में भूख लगती है। इसलिए बच्चे को जितना अधिक बार संभव हो सके माँ का दूध पिलाते रहना चाहिए। माँ का शुरुआती दूध थोड़ा कम होता है लेकिन वह बच्चे के लिए पूर्ण होता है। अधिकतर महिलाएं यह सोचती हैं कि उनका दूध बच्चे के लिए पूरा नहीं पड़ रहा है और वह बाहरी दूध देना शुरू कर देती हैं जो कि एक भ्रांति के सिवाय और कुछ नहीं है। माँ के दूध में भरपूर पानी और पोषक तत्व होते हैं इसलिए बच्चे को बाहर का कुछ भी नहीं देना चाहिए। बाहर की चीज खिलाने से बच्चे में संक्रमण का खतरा बना रहता है। उन्होंने बताया छ्ह माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने से दस्त और निमोनिया के खतरे से भी बचाव होता है। साथ ही स्तनपान माँ को स्तन कैंसर से भी बचाता है।

मुंगेर को टीबी मुक्त जिला बनाने को अप्रैल – मई  महीने में होंगे कई कार्यक्रम

0
– हेल्थ एन्ड वेलनेस सेंटर और कारखानों, वर्क शॉप में लगाए जाएंगे स्पेशल टीबी स्क्रीनिंग कैम्प
– प्रत्येक महीने के दूसरे सोमवार को मनाया जाता है निक्षय दिवस
मुंगेर –
प्रधान मंत्री के संकल्प 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने को ले देश भर में राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) कार्यक्रम चल रहा है। इसी कार्यकम को जनांदोलन का रूप देने के लिए देश भर में फरवरी के महीने से ही कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं । इस संबंध में सेंट्रल टीबी सेंटर ने स्टेट टीबी सेंटर को और स्टेट टीबी सेंटर ने डिस्ट्रिक्ट टीबी सेंटर को एक पत्र जारी किया है। जिसके के तहत जिले भर के सभी आयुष्मान भारत हेल्थ एन्ड वेलनेस सेंटर पर अप्रैल के महीने में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं। इसके साथ ही मई के महीने में वर्क प्लेस को टीबी फ्री बनाने के लिए फैक्ट्री/ वर्क शॉप और मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स पर स्पेशल टीबी स्क्रीनिंग कैम्प का आयोजन किया जाना है।
हेल्थ एन्ड वेलनेस सेंटर पर समुदाय की  भागीदारी बढ़ाने को ले कई कार्यक्रम आयोजित होंगे –
डिस्ट्रिक्ट टीबी सेंटर के डिस्ट्रिक्ट टीबी/ एचआईवी शलेन्दु कुमार ने बताया अप्रैल के महीने में जिले के सभी आयुष्मान भारत हेल्थ एन्ड वेलनेस सेंटर पर समुदाय भागीदारी बढ़ाने को ले कई कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं। यहां प्रत्येक महीने के दूसरे सोमवार को मनाये जाने वाले निक्षय दिवस पर सुनिश्चित किया जाना है कि टीबी मरीजों को निक्षय योजना के तहत प्रति महीने पोषण के लिए 500 रुपये मिल रहे या नहीं।
टीबी के लक्षण- पहचान के प्रति समुदाय के सदस्यों का किया जाना है उन्मुखीकरण :
उन्होंने बताया सभी आयुष्मान भारत हेल्थ एन्ड वेलनेस सेंटर पर कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर के द्वारा कम्युनिटी मेंबर को टीबी लक्षणों की पहचान, ट्रीटमेंट सपोर्ट केयर, पोषण, सेवाएं, संक्रमण नियंत्रण, ट्रीटमेंट के प्रति उन्मुखीकरण किया जाएगा। इसके साथ ही यहां टीबी चैंपियन भी अपने अनुभवों को शेयर करेंगे। उन्होंने बताया जिले के सभी एन्ड वेलनेस सेंटर पर ऑडियो- शोर्ट वीडियो को चलाया जाएगा| साथ ही आईईसी मैटेरियल का प्रदर्शन और फ्लायर्स का वितरण भी किया जायेगा।
मई में टीबी मुक्त बनाने को ले फैक्ट्री/ वर्कशॉप पर लगाया जाएगा स्पेशल टीबी स्क्रीनिंग कैम्प :
डिस्ट्रिक्ट टीबी कोर्डिनेटर ने बताया मई के महीने में जिले के सभी फैक्ट्री, वर्क शॉप और मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट को टीबी मुक्त बनाने के लिए वहां काम कर रहे मजदूरों सहित अन्य लोगों के लिए निःशुल्क स्पेशल टीबी स्क्रीनिंग कैम्प लगाया जाएगा। इसके साथ ही यहां आईईसी मैटेरियल के प्रदर्शन के साथ ही उसका वितरण भी किया जाएगा।