बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर अन्नप्राशन संस्कार

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– पूर्वी गिद्धा आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 51 पर आईसीडीएस डीपीओ ने खुद कराया बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार
– पोषण पखवाडा के तहत 16 से 31 मार्च तक जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर आयोजित किए जा रहे हैं विभिन्न कार्यक्रम

लखीसराय-

छह महीने कि उम्र पूरी करने वाले छोटे- छोटे बच्चों को मां के स्तनपान के साथ ही अनुपूरक आहार के रूप में हल्का भोजन के तौर पर दलिया, खिचड़ी, सूजी का हलवा सहित अन्य पोषक तत्व दिया जाना आवश्यक है| ताकि बच्चा कुपोषण का शिकार न हो जाय। इसीलिए प्रत्येक महीने की 19 तारीख को जिले के सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर इन बच्चों को अनुपूरक आहार की शुरुआत कराने के लिए अन्नप्राशन संस्कार आयोजित किए जाते हैं । इसी के तहत शुक्रवार को जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर इन बच्चों के लिए अन्नप्राशन संस्कार का आयोजन किया गया।

आईसीडीएस डीपीओ ने हलसी के दो आंगनबाड़ी केंद्र पर बच्चों को अन्नप्राशन करा की अभियान कि शुरुआत :
समेकित बाल विकास सेवाएं ( आईसीडीएस ) लखीसराय की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) कुमारी अनुपमा ने शुक्रवार को जिले के हलसी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) अंतर्गत पूर्वी गिद्धा आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 51 और 55 पर छह वर्ष से अधिक उम्र के तीन बच्चे को अन्नप्राशन करवा कर अन्नप्राशन संस्कार कार्यक्रम की शुरुआत की। आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 51 पर आइसीडीएस डीपीओ कुमारी अनुपमा ने राजेश राम और पूनम कुमारी के पुत्र रियांशु कुमार का अन्नप्राशन करवाया । इस अवसर पर। आंगनबाड़ी सेविका राजु कुमारी, सहायिका अनीता कुमारी के अलावे हलसी प्रखंड की सीडीपीओ इंदू कुमारी भी उपस्थित थीं। इसी प्रकार से आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 55 पर लखीसराय डीपीओ ने फंटूश कुमार और उषा देवी की बेटी निशा भारती और सतीश महतो और सुनीता देवी के पुत्र शुभम कुमार को अन्नप्राशन कराया। इस अवसर पर आंगनबाड़ी सेविका भविता कुमारी और सहायिका श्यामा देवी के अलावे सीडीपीओ इंदू कुमारी भी उपस्थित थी। इस अवसर पर छोटे- छोटे बच्चों की धातृ माताओं को सम्बोधित करते हुए डीपीओ कुमारी अनुपमा ने बताया कि नवजात शिशु के जन्म से लेकर कम से कम छह महीने तक धातृ माताओं को सिर्फ और सिर्फ अपना स्तनपान ही कराना चाहिए। इस दौरन बच्चे को अलग से पानी देने की भी कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि मां के दूध में ही 80 प्रतिशत तक पानी मौजूद रहता है। इसके साथ ही छह महीने तक शिशु के सम्पूर्ण विकास के लिए सभी आवश्यक तत्व मां के दूध में ही मौजूद रहता है। बताया कि छह महीने के बाद शिशु को मां के स्तनपान के साथ ही अन्य पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए अनुपूरक आहार की आवश्यकता होती है। इसके लिए सभी धातृ माताओं को अपने स्तनपान के साथ ही शिशु को अनुपूरक आहार के रूप में हल्का खाना जैसे दलिया, खिचड़ी, खीर, सूजी का हलवा सहित अन्य खाद्य पदार्थ खिलाना चाहिए। इन बच्चों को स्तनपान के साथ ही अनुपूरक आहार की शुरुआत कराने के उद्देश्य से ही प्रत्येक महीने के 19 तारीख को सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर अन्नप्राशन संस्कार का आयोजन किया जाता है।

जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों सहित अन्य स्थानों पर आयोजित किए जा रहे हैं विभिन्न कार्यक्रम :
उन्होंने बताया कि जिले भर में अभी पोषण पखवाड़े के तहत 16 से 31 मार्च तक सभी आंगनबाड़ी केंद्रों और अन्य स्थानों पर कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके तहत गृह भृमण के दौरान लोगों से मिलकर उन्हें पोषण के पांच सूत्र जैसे पहले हजार दिन एनीमिया, डायरिया से बचाव, स्वच्छता, हाथों की सफाई और पौष्टिक आहार के बारे में गर्भवती और धातृ महिलाओं को उचित सलाह देकर जागरूक किया जा रहा है। इसके साथ ही सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर 16 से 31 मार्च तक प्रत्येक लाभार्थी गर्भवती महिलाओं और 3 से 6 वर्ष तक बच्चों का वजन लेने के साथ ही उचित सलाह दी जाती है। इसके अलावा सभी आगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों, महिलाओं एवं समुदाय में रहने वाले लोगों को सामान्य योगाभ्यास के लिए जागरूक करने के साथ ही सभी विद्यालयों में किशोर- किशोरियों के साथ पोषण चर्चा की जा रही है।

उन्होंने बताया कि घर- घर आंगनबाड़ी ( फंडामेंटल लर्निंग एंड न्यूमेरेसी लिटरेसी) कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर माताओं/ पालन कर्ताओं को नई पहल पाठ्यक्रम के तहत 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए बच्चों में सीखने के आधारभूत, भाषाई कौशल एवं संख्यात्मक योग्यता को बढ़ावा देने के लिए 16 से 20 मार्च तक गतिविधियों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

कोविड-19 संक्रमण को पूरी तरह जड़ से मिटाने के लिए जारी रखें गाइडलाइन, बारी आने पर कराएं वैक्सीनेशन

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– वैक्सीन ले चुके व्यक्ति को भी सतर्क और सावधान रहने की है जरूरत,

खगड़िया-
कोविड-19 से स्थाई निजात के लिए वैक्सीन आ चुकी है| इस वैश्विक महामारी को जड़ से मिटाने के लिए लोग पूरी उत्साह के साथ वैक्सीन ले भी रहे हैं। किन्तु, इसके साथ-साथ इस वैश्विक महामारी के संक्रमण को जड़ से मिटाने के लिए जारी गाइडलाइन के पालन को भी जारी रखना जरूरी है। क्योंकि, वैक्सीन आने बाद एवं लोगों की सतर्कता के कारण कोविड-19 का प्रभाव जरूर कम हुआ। किन्तु, अभी इसका दौर खत्म नहीं हुआ है। इसलिए, ऐसी स्थिति में आपकी लापरवाही भविष्य के लिए ठीक नहीं है| क्योंकि, देश के विभिन्न प्रदेशों के हालात की जो खबरें आ रही है, वह चिंताजनक है। जिसके कारण स्थानीय स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में है और संक्रमण पर रोकथाम के लिए हर आवश्यक कदम उठा रहा है। इसलिए, हमें अभी और सावधान व सतर्क रहने की जरूरत है। प्रभाव कम होने के कारण लोग यह सोचने लगे हैं कि कोविड-19 खत्म हो चुका है। किन्तु, आपकी यह सोच ना ही आपके लिए और ना ही आपके परिवार व समाज के लिए ठीक है।

– वैक्सीन के साथ-साथ सावधानी भी जरूरी :-
जिला सिविल सर्जन डॉ अजय कुमार सिंह ने बताया कि कोविड-19 संक्रमण को जड़ से मिटाने के लिए वैक्सीन के साथ-साथ सावधान रहना भी जरूरी है। क्योंकि, लापरवाही के कारण देश के विभिन्न प्रदेशों की स्थिति ठीक नहीं है। इसलिए, इससे बचाव एवं स्थाई निजात के लिए वैक्सीन तो जरूरी है ही। इसके साथ-साथ लोगों को बचाव से संबंधित जारी गाइडलाइन का पालन करना भी जरूरी है।

– कोविड-19 संक्रमण वायरस को पूरी तरह जड़ से मिटाने के लिए वैक्सीन का पूरा डोज जरूरी :-
कोविड-19 को जड़ से मिटाने के लिए हर व्यक्ति को वैक्सीन का पूरा डोज लेना जरूरी है। क्योंकि, अभी कोविड-19 का दौर खत्म नहीं हुआ है। इसलिए, वैक्सीन की पूरी डोज के साथ-साथ अभी लोगों को सतर्क और सावधान रहने की भी जरूरत है। इसलिए, बारी आने पर निश्चित रूप से निर्भीक होकर उत्साह के साथ वैक्सीनेशन कराएं और बचाव के लिए एहतियात जारी रखें।

– वैक्सीन का दूसरा डोज जरूर लगवाएं :-
कोविड-19 संक्रमण वायरस को पूरी तरह जड़ से मिटाने के लिए वैक्सीन का दूसरा डोज जरूर लगवाएं। हालाँकि, हमारा राज्य वैक्सीन का पहला डोज लेने में देश के अन्य राज्यों के सापेक्ष सबसे अव्वल है। किन्तु, स्वास्थ्य विभाग की मानें तो बिना दूसरा डोज यानी वैक्सीन पूरी डोज लिए बेकार है। इसे सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग भी वैक्सीनेशन अभियान की गति को देने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। ताकि इस वैश्विक महामारी को जड़ से मिटाया जा सके ।

– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन हमेशा करें :-
कोविड-19 संक्रमण को पूरी तरह जड़ से मिटाने के लिए आप निश्चित रूप से घर से बाहर निकलने पर मास्क का उपयोग करें एवं शारीरिक दूरी का पालन करें। खासकर भीड़-भाड़ वाले जगहों पर जैसे किसी समारोह या फिर किसी अन्य आयोजन में शिरकत के दौरान तो निश्चित रूप से करें। इससे ना सिर्फ आप कोविड-19 संक्रमण से दूर रहेंगे, बल्कि अन्य संक्रामक बीमारी से भी दूर रहेंगे और यह खुद के साथ-साथ समाजहित में अच्छा कदम होगा।

– वैक्सीन लें चुके व्यक्ति को भी सतर्क और सावधान रहने की जरूरत :-
वैक्सीन ले चुके व्यक्ति को कोविड-19 संक्रमण को जड़ से मिटाने के लिए सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि, अभी कोविड-19 का दौर खत्म नहीं हुआ। इसलिए, वैक्सीन लेने के बाद भी बचाव के लिए जारी गाइडलाइन का पालन करते रहें। ताकि खुद के साथ-साथ पूरा समाज भी सुरक्षित रहें।

– बाहर से आने वाले हर लोग कराएं कोविड-19 जाँच और खुद के साथ अपने परिवार और समाज को भी रखें सुरक्षित :-
होली के अवसर पर बाहर रहने वाले व्यापक पैमाने पर लोग अपने घर आएँगे। ऐसे लोगों के लिए घर सुरक्षित पहुँचे यह महत्वपूर्ण है। इसलिए, बाहर से आने वाले सभी लोग घर जाने के पूर्व अपने नजदीकी जाँच सेंटर पर कोविड-19 का जाँच कराकर ही घर जाएँ। क्योंकि, ऐसा करने से आपके साथ-साथ आपका पूरा परिवार और समाज भी सुरक्षित रहेगा। इसलिए, आप खुद के साथ-साथ अपना परिवार और समाज के लिए निश्चित रूप से जाँच कराएं।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– बाहर से आने पर निश्चित रूप से कोविड-19 जाँच कराएं।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– घर से निकलने पर निश्चित रूप से मास्क का उपयोग करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– बासी और बाहरी खाना खाने से परहेज करें।

कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर पोषण वाटिका को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रहे जिला समन्वयक

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– जिले के सभी ऑगनबाड़ी केंद्रों में पोषण वाटिका की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए हैं प्रयासरत
– कुपोषण मुक्त समाज निर्माण के लिए उचित पोषण है बेहद जरूरी

खगड़िया-

कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर सरकार पूरी तरह सजग और कटिबद्ध है। साथ ही तरह-तरह के गतिविधियों का आयोजन कर लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। इसी कड़ी को गति देते हुए समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पोषण का संदेश पहुँचाने में आईसीडीएस भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। वहीं, कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर आईसीडीएस के एनएनएम के जिला समन्वयक अंबुज कुमार पोषण वाटिका थीम को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। जिले के सभी ऑगनबाड़ी केंद्र परिसर में पोषण वाटिका की सुविधा उपलब्ध हो, इसके लिए वह लगातार प्रयासरत हैं और उनके प्रयास का सकारात्मक प्रभाव भी दिख रहा है। उनका मानना है कि कुपोषण को मिटाने के लिए उचित पोषण सबसे बेहतर और आसान उपाय है। यह तभी संभव है जब लोगों को सही पोषण की जानकारी मिलेगी। जिसे गति देने के लिए वह दिन-रात जुटे हुए हैं। ताकि ऑगनबाड़ी में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चों को उचित पोषण मिल सके और बच्चे कुपोषण से दूर रह सकें।

– पोषण वाटिका थीम को बढ़ावा देने को सेविकाओं को कर रहे हैं जागरूक :-
आईसीडीएस के एनएनएम के जिला समन्वयक अंबुज कुमार ने बताया कि पोषण वाटिका थीम को बढ़ावा देने के लिए जिले की सभी सेविकाओं को लगातार जागरूक किया जा रहा है। सेविकाओं को पोषण वाटिका की महत्ता, होने वाले फायदे आदि की जानकारी दी जा रही है। बताया कि जिले के सभी ऑगनबाड़ी केंद्र पोषण वाटिका की सुविधा से लैस हों , इसके लिए मैं खुद भी लगातार केंद्र विजिट कर सेविकाओं को जागरूक करता हूँ। ताकि ऑंगनबाड़ी केंद्र पर पढ़ने वाले बच्चों को उचित पोषण के लिए हरी साग-सब्जी एवं अन्य पौष्टिक आहार मिल सके । इससे ना सिर्फ बच्चे कुपोषण से दूर रहेंगे, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी जागरूकता आएगी और लोग उचित पोषण की महत्ता को समझ सकेंगे।

– सेविका के साथ-साथ आमलोगों को भी करते हैं जागरूक, देते हैं उचित पोषण की जानकारी :-
जिला समन्वयक अंबुज कुमार ने बताया कि वह केंद्र भ्रमण के दौरान सेविका के साथ-साथ संबंधित ऑगनबाड़ी केंद्र के पोषक क्षेत्र के लोगों को भी पोषण का संदेश देकर उचित पोषण की जानकारी देते है । खासकर महिलाओं को प्राथमिकता के तौर पर वह कुपोषण मुक्त समाज निर्माण के लिए जागरूक करते हैं । इसका सकारात्मक प्रभाव यह है कि ग्रामीण स्तर के लोगों में उचित पोषण के प्रति काफी जागरूकता आई है और जब भी पोषण से संबंधित किसी प्रकार के कार्यक्रम का आयोजन होता है तो उसमें बड़ी संख्या में आमलोग भी उत्साह के साथ भाग लेते और पोषण की महत्ता को समझते और उनका पालन भी करने लगे हैं।

अंबुज कुमार ने बताया कि इस दौरान पोषण वाटिका थीम पर बल देते हुए इसके तरीके की भी जानकारी देता हूँ । यह बताया जाता है कि पोषण वाटिका में वह साग-सब्जी को ही लगाने को प्राथमिकता दें। जिससे हमारे शरीर को उचित पौष्टिक आहार मिल सके । ताकि हम कुपोषण से दूर रह सकें।

– गर्भवती एवं धातृ महिलाओं को भी देते हैं पोषण की जानकारी :-
जिला समन्वयक अंबुज कुमार ने बताया कि कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर वह गर्भवती और धातृ महिलाओं को उचित पोषण की जानकारी देते हैं । जिसमें समय पर खाना खाने, गर्भावस्था के दौरान समय-समय पर चिकित्सकों से जाँच कराने, उचित खानपान, पौष्टिक आहार का सेवन करने आदि की जानकारी दी जाती है । साथ ही सेविका को भी गृह भ्रमण कर घर-घर जाकर खासकर गर्भवती एवं धातृ महिलाओं को उचित पोषण की जानकारी, गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियाँ आदि का संदेश देने के लिए प्रेरित करता हूँ। क्योंकि, कुपोषण मुक्त समाज का निर्माण सभी के सहयोग से ही संभव है।

– कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण के लिए उचित पोषण जरूरी :-
जिला समन्वयक कुमार ने कहा कि कुपोषण मुक्त समाज का निर्माण के लिए उचित पोषण बेहद जरूरी है। यह तभी होगा जब लोगों को सही पोषण की जानकारी होगी। इसके लिए तमाम गतिविधियाँ का आयोजन कर लोगों को उचित और संतुलित पोषण की जानकारी दी जा रही है। लोगों को पोषण मिटाने के लिए रहन-सहन, खानपान समेत अन्य दिनचर्या में होने वाले बदलाव की जानकारी दी जा रही है। जैसे कि, बच्चों के जन्म के बाद छः माह तक सिर्फ माँ का दूध, छः माह के बाद कम से कम दो वर्षों तक माँ के दूध के साथ-साथ संतुलित और पौष्टिक आहार देने की जानकारी दी जा रही है। लोगों को पोषण के महत्व की जानकारी देने के दौरान पोषण के पाँच सूत्र पर बल दिए जाते हैं। जिसमें बच्चों को जन्म के बाद पहले सुनहरे 1000 दिन, पौष्टिक आहार, एनीमिया प्रबंधन, डायरिया रोकथाम एवं स्वच्छता को शामिल किया गया है। ताकि समाज का प्रत्येक वर्ग पोषण की जरूरत को समझ सके।

2 हफ्ते से अधिक खांसी हो तो टीबी जांच कराएं

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नाथनगर रेफरल अस्पताल में विश्व यक्ष्मा दिवस का शुभारंभ

कार्यक्रम के दौरान टीबी सर्वाइवर ने भी अपना अनुभव किया साझा

भागलपुर-

नाथनगर रेफरल अस्पताल में शुक्रवार को विश्व यक्ष्मा दिवस का शुभारंभ हुआ. इस दौरान स्वास्थ्यकर्मी, केयर इंडिया व वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर के प्रतिनिधि और आशा कार्यकर्ता शामिल थी. कार्यक्रम में क्षेत्र के टीबी सर्वाइवर को भी बुलाया गया था. इस दौरान टीबी से बचाव के उपाय बताए गए और इसके लक्षण के बारे में जानकारी दी गई. नाथनगर रेफरल अस्पताल की प्रभारी डॉ अंजना कुमारी ने बताया कि अगर 2 हफ्ते से अधिक खांसी हो और बलगम में खून आए तो टीबी जांच करा लेनी चाहिए. साथ ही अगर वजन कम होने लगे और शाम के वक्त पसीना आने के साथ बुखार हो तो यह टीबा के लक्षण हैं. कुछ मामले बिना लक्षण वाले भी होते हैं. इसलिए अगर किसी तरह का संदेह हो और लक्षण दिखे तो तत्काल जांच करा लें.

टीबी का इलाज संभव है:
मीटिंग के दौरान एसटीएस कृति भारती ने बताया कि टीबी लाइलाज बीमारी नहीं है. इसका इलाज संभव है. वह भी बिल्कुल मुफ्त. अगर किसी को टीबी का लक्षण लगे तो निसंकोच होकर सरकारी अस्पताल पहुंचे. अगर जांच में पुष्टि हो जाती है तो आपको निःशुल्क दवा मिलेगी. 6 महीने तक दवा का सेवन करने के बाद दोबारा जांच करा लें. जांच में अगर रिपोर्ट निगेटिव आती है तो समझिए आप पूरी तरह से टीबा मुक्त हो गए.

बीच में नहीं छोड़ें दवा:
कार्यक्रम के दौरान केयर इंडिया की ब्लॉक मैनेजर मनीषा ने बताया कि टीबी के मरीज बीच में दवा नहीं छोड़ें. जब तक आप टीबी से पूरी तरह मुक्त नहीं हो जाते हैं तब तक ऐसी भूल नहीं करें. बीच में दवा छोड़ने से आप एमडीआर टीबी की चपेट में आ सकते हैं. जिसका इलाज थोड़ा जटिल हो जाता है और ठीक होने में भी समय लगता है.

आशा कार्यकर्ताओं को मिला लक्ष्य:
मीटिंग में मौजूद आशा कार्यकर्ताओं को विश्व टीबी दिवस के अवसर पर 24 मार्च को क्षेत्र के 2 हफ्ते से अधिक समय तक हंसने वाले के बलगम की जांच के लिए लाने को कहा गया. आशा कार्यकर्ता अपने क्षेत्र में ऐसे लोगों को ढूंढेंगी. ऐसे लोगों को 24 तारीख को रेफरल अस्पताल लाएंगी और जांच भी कराएंगी. इस दौरान टीबी सर्वाइवर ने भी अपना अनुभव साझा किया. कार्यक्रम में संजीव, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक अपर्णा और विशाल भी मौजूद थे.

कोरोना का टीका जब तक सभी लोगों को नहीं लग जाता, तब तक करें गाइडलाइन का पालन

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-कोरोना के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग लगातार चला रहा अभियान

बांका, 19 मार्च
कोरोना को लेकर स्वास्थ्य विभाग लगातार अभियान चला रहा है. एक तरफ टीकाकरण चल रहा है तो दूसरी तरफ जिले में कोरोना की जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है. अस्पतालों से लेकर बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन तक कोरोना की जांच हो रही है. यहां तक कि पंचायतों में भी अब कोरोना जांच की व्यवस्था की गई है. ऐसे में आमलोगों को थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है. दरअसल पिछले कुछ महीनों में कोरोना मरीजों की संख्या लगातार कम होती जा रही थी. इस वजह से लोग थोड़ा बेपरवाह हो गए थे, लेकिन अभी ऐसा नहीं करना चाहिये. ऊपर से अभी होली को लेकर महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों से बड़ी संख्या में लोग अपने घर आ रहे हैं. उन राज्यों में कोरोना के मामले बढ़ने लगे हैं. इसलिए जब तक कोरोना की चेन पूरी तरह से नहीं टूट जाए, तब तक लोगों को सतर्क रहना चाहिए.
कोरोना की गाइडलाइन का पालन करना चाहिए.
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि कोरोना का टीका जब तक सभी लोगों को नहीं लग जाता है, तब तक कोरोना की गाइडलाइन का पालन करना चाहिए. कोरोना एक संक्रामक बीमारी है. यह एक-दूसरे से फैलता है. इस वजह से जब तक सामने वाले को भी टीका नहीं लग जाए, तब तक संक्रमण की संभावना बनी रहती है. इसलिए जब तक सभी लोगों को टीका नहीं लग जाता है तब तक सावधानी बरतें.

बाहर निकलने से पहले मास्क जरूर लगाएं:
डॉ. चौधरी कहते हैं कि घर से बाहर निकलते वक्त जरूरी तौर पर मास्क लगाएं. कोरोना का संक्रमण नाक और मुंह के जरिए अधिक होने की संभावना रहती है. मास्क पहनने से नाक और मुंह दोनों ढका रहता है. इसलिए मास्क जरूरी तौर पर पहने. साथ ही मास्क को सही तरीके से भी पहनना जरूरी है. बहुत सारे लोग मास्क को ठीक तरीके से नहीं पहनते हैं. ऐसा करना सही नहीं है. मास्क से नाक और मुंह को पूरी तरह से ढककर रखें.

भीड़भाड़ से बचें: डॉ चौधरी कहते हैं कि कोरोना से बचाव के लिए सामाजिक दूरी का पालन करना भी जरूरी है. इसके लिए सबसे पहली शर्त यह है कि भीड़ में जाने से बचें. अगर आप 2 गज दूरी का पालन करेंगे तो संक्रमण की संभावना कम रहेगी. कोरोना का वायरस 2 गज दूरी तक जाता है. अगर आप इतनी दूरी बनाकर रहेंगे तो संक्रमण से बचाव होगा .

टीका लेने के लिए आगे आएं: अभी कोरोना टीकाकरण का तीसरा चरण चल रहा है. इसमें 45 से 59 साल के बीमारों को और 60 साल से ऊपर के बुजुर्गों को टीका दिया जा रहा है. इसके अलावा पहले और दूसरे चरण के छूटे हुए स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्करों को भी टीका दिया जा रहा है. टीका का पहला डोज लेने के बाद 28 दिन पूरा हो जाने के बाद बूस्टर डोज भी दिया जा रहा है. जो भी लाभुक इस दायरे में आते हैं, वह टीका लेने के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाएं. वहां पर टीकाकरण की व्यवस्था है. अब तो रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी आसान हो गई है. इसलिए टीका लेने में कोई दिक्कत नहीं आएगी. तीन चरण जब पूरा हो जाएगा, इसके बाद आमलोगों के टीकाकरण की भी बारी आएगी. सभी लोगों का टीका हो जाने के बाद हमलोग कोरोना को हराकर रहेंगे

बायो-मेडिकल वेस्ट का उचित प्रबंधन जरूरी, राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ समापन

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• चार दिवसीय राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में 38 जिलों के प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
• बायो-मेडिकल वेस्ट के उचित प्रबंधन नहीं होने से पर्यावरण को पहुँचता है नुकसान

पटना/ 19,मार्च: बायो-मेडिकल वेस्ट यानी जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन का उचित प्रबंधन बेहद जरूरी होता है. इसको लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति की ओर से राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान में चल रहे जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन विषय पर चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का समापन शुक्रवार को हुआ। मंगलवार से शुरूआत हुए चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में बिहार के प्रत्येक जिलों से चार प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिसमें प्रत्येक जिले के डिस्ट्रिक्ट क्वालिटी कंसलटेंट, जिला योजना समन्वयक एवं दो प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक शामिल हुए।

बायो-मेडिकल वेस्ट का उचित प्रबंधन पर्यावरण को रखता है स्वच्छ:
प्रशिक्षण के दौरान इन प्रतिभागियों को जैव चिकित्सा अपशिष्ट से होने वाले संभावित खतरों एवं उसके उचित प्रबंधन जैसे- अपशिष्टों का सेग्रिगेशन, कलेक्शन भंडारण एवं परिवहन आदि की जानकारी दी गई। राज्य स्वास्थ्य समिति के सहायक निदेशक, बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, पीयूष कुमार चंदन ने बताया कि बायो-मेडिकल वेस्ट का उचित प्रबंधन जरूरी है, इसके सही तरीके से निपटान नही होने से पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है। अगर इसका उचित प्रबंधन ना हो तो मनुष्य के साथ साथ पशु- पक्षीयों के को भी इससे खतरा है । इसलिए जैव चिकित्सा अपशिष्टों को उनके कलर-कोडिंग के अनुसार ही सेग्रिगेशन किया जाना चाहिए। इसके लिए प्रशिक्षण ही एक मुख्य माध्यम है, जिससे स्वास्थ्यकर्मियों का अवगत होना जरूरी है। वहीं प्रशिक्षण के दौरान राज्य स्वास्थ्य समिति के मैटर्नल हेल्थ की राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. सरिता, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के जी. के मंडल, केअर इंडिया से डॉ. गुरिंदर ने भी प्रतिभागियों को विषय पर विस्तृत जानकारी दी।

‘फटी जिन्स’ विवाद में घिरी कंगना रनौत?

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New delhi: हम 21वीं सदी में अपना कदम रख चुके हैं और ऐसे जब कोई नेता खासकर जब कोई मुख्यमंत्री महिलाओं की कपड़ों को लेकर कोई आपत्तीजनक टिप्पणी करें तो यह बेहद शर्मनाक या यूं कहें की डस्टबीन वाली बात होगी. फटी जिन्स पहने वाली महिला संस्कार क्या देगी, उतराखण्ड के नये-नवेले मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के इस वयान के बाद अब सोशल मीडिया से लेकर पर हर तरफ बेहद ट्रेंड कर रहा हैं. मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के इस वयान के बाद लोगों का गुस्सा फुट कर सामने आ रहा हैं इसी बीच अपने बेबाक अंदाज को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहने वाली एक्ट्रेस कंगना रनौत फिर से एक बार अपने विचार को लेकर सुर्खियां बटोर रहीं हैं.

कंगना ने फटी जिंस में सोशल मीडिया पर शेयर की अपनी तस्वीर

कंगना रनौत  बाकी लोगों की तरह मुख्यमंत्री रावत की आलोचना नहीं की, बल्कि बात को घुमाकर कुछ अलग ही अंदाज में पेश किया है.  कंगना रनौत ने ट्विटर पर अपनी एक फोटो शेयर की, जिसमें वह रिप्ड जींस पहने हुई हैं. इसके साथ ही उन्होंने युवाओं को फैशन टिप्स भी दिए हैं. कंगना ने ट्वीट कर कहा, ‘अगर आप रिप्ड जींस पहनना चाहते हैं, तो सुनिश्चित करें कि इसमें कूलनेस उतनी ही हो, जितनी इन तस्वीरों में है. इससे आपका स्टाइल झलके न कि ऐसा लगे कि आप एक बेघर भिखारी हैं और उन्हें अपने माता-पिता से पैसा नहीं मिलता है. हालांकि, आजकल ज्यादातर युवा इन दिनों ऐसे ही दिखते हैं.

फटी जिन्स पहने वाली महिला संस्कार क्या देगी

मुख्यमंत्री रावत ने हाल ही में रिप्ड जींस पहनने वाली महिलाओं पर टिप्पणी की थी, जिसके बाद यह मसला ट्विटर पर ट्रेंड होने लगा था. उन्होंने यह टिप्पणी अपनी एक महिला सह-यात्री को लेकर की थी, जो फ्लाइट में उनके बगल में बैठी थीं और एक एनजीओ चलाती हैं. उनके कपड़ों के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया था कि ऐसी महिला किस तरह के ‘संस्कार’ (मूल्य) देगी, जो ऐसी फटी हुई जींस पहनकर अपने घुटने दिखा रही हों. इस बहस में एक्ट्रेस कंगना रनौत भी शामिल हो गई हैं. एक ओर जहां सभी लोग मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की आलोचना कर रहे हैं, वहीं कंगना ने अलग ही रिएक्शन दिया है.

कोरोना का ख़तरा और ख़तरनाक, क्या इन राज्यों में भी लगेगा लॉकडाउन

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New delhi: देश में कोरोना वायरस का रफ्तार दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा हैं कोरोना का यह बढ़ता रफ्तार चिंता का विषय हो गया हैं. जहां एक तरफ देश फिर से पटरी पर लौट रहा था कि वहीं कोरोना का इस तरह से बढ़ना बेहद चिंताजनक हैं. कई राज्यों में लॉकडाउन का ऐलान कर दिया गया हैं और कई राज्यों में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए नाईट कॉर्फू का ऐलान किया गया हैं.देश में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं (फोटो-PTI)

स्वास्थ्यकर्मियों,डॉक्टरों की छुट्टी रद्द किया गया 

महाराष्ट्र समेत देश के कई राज्यों में कोरोना संक्रमण की स्थिति चिंताजनक हो गई है। पाबंदियां बढ़ाने के बावजूद लगातार मामले बढ़ रहे हैं और रिकवरी रेट में गिरावट देखने को मिल रही है। पिछले 24 घंटों के दौरान 110 दिनों में सबसे ज्यादा मामले सामने आए है। इस दौरान लगभग 40 हजार मामले सामने आए हैं और 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। इस बीच बिहार सरकार ने कोरोना स्थिति को देखते हुए सभी डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और पैरामेडिकल कर्मचारियों की छुट्टी 5 अप्रैल तक रद्द कर दिया है।

महाराष्ट्र में गुरुवार को रिकॉर्ड 25 हजार 833 मामले सामने आए

महाराष्ट्र में गुरुवार को रिकॉर्ड 25 हजार 833 मामले सामने आए। बढ़ते मामलों के कारण गुजरात में पड़ोसी राज्यों राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से लगती सीमाओं को सील कर दिया गया है। वहीं पंजाब में नौ जिलों में नाइट कर्फ्यू रात नौ बजे से सुबह पांच बजे तक लागू रहेगा। दिल्ली में मामले तेजी से बढ़ रहे हैं  कोरोना संक्रमण से देश का सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र में गुरुवार को रिकॉर्ड 25 हजार 833 मामले सामने आए। देश में कोरोना महामारी के आने के बाद से अब तक का यह सबसे बड़ा आंकड़ा है।

सीमाओं को सील किया गया

एक दिन में इतने मामले किसी राज्य में सामने नहीं हैं। इससे पहले पिछले साल  11 सितंबर को राज्य में 24,886 मामलों की पुष्टि हुई थी।  गुजरात में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने आठ बडे़ शहरों में 10 अप्रैल तक स्कूल-कालेज और विश्वविद्यालय बंद कर दिए हैं। विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं भी रद कर दी गई हैं। केवल 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं आयोजित होंगी। इसके अलावा अहमदाबाद व सूरत में सार्वजनिक बस सेवा, गार्डन, जिम, जू आदि को बंद किया गया है और नाइट कर्फ्यू की अवधि बढ़ा दी गई है। मुख्यमंत्री ने लाकडाउन लागू करने से इन्कार किया है, लेकिन पड़ोसी राज्यों राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से लगती सीमाओं को सील कर दिया गया है।

ममता vs ‘श्री राम’ अब किसकी होगी नैया पार?

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New delhi: आज से कई वर्ष पहले जब रामानंद सागर ने रामायण कथा को पर्दें पर पेश किया तो उन्हें ज़रा भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि ‘रामायण’ का हर एक एपिसोड घर-घर में बेहद चर्चित हो जाएगा. हाल ही में जब ‘रामायण’ लॉकडउन में दुबारा दूरदर्शन चैनल पर प्रसारित किया गया तो जिस तरह लोगों द्वारा ‘रामायण’ को देखा गया उसे देख कर यह अंदाजा लगाया जा सकता हैं कि आज भी दूरदर्शन पर ‘रामायण’ देखना लोगों को कितना पसंद हैं. सिर्फ ‘रामायण’ ही नहीं ‘रामायण’ में अपने किरदार निभाने वाले सभी व्यक्ति को बेहद पसंद किया जाता हैं.

‘जय श्री राम’ नारा बनेगा बड़ा मुद्दा

रामानंद सागर की ‘रामायण’ में भगवान राम का किरदार निभाकर घर-घर मशहूर हुए अरुण गोविल बीजेपी (BJP) में शामिल हो गए हैं। उन्होंने गुरुवार को पार्टी के कार्यालय में सदस्यता ग्रहण की। पिछले कुछ वक्त से चर्चा थी कि अरुण गोविल हो सकते हैं, जिस पर अब मुहर लग चुकी है। अरुण गोविल की बीजेपी में एंट्री ऐसे समय हुई है, जब पार्टी पश्‍च‍िम बंगाल में ममता बनर्जी के किले को फतह करना चाहती है। यही नहीं, बंगाल के चुनावी माहौल में ‘जय श्री राम’ का नारा भी बड़ा मुद्दा है। ऐसे में टीवी के ‘श्री राम’ का बीजेपी में आना राजनीतिक गलियारों में सांकेतिक रूप से भी अहम हो जाता है।

अरुण गोविल पश्‍च‍िम बंगाल में करेंगे चुनाव प्रचार

बताया जाता है कि अरुण गोविल पश्‍च‍िम बंगाल में पार्टी के लिए चुनाव प्रचार भी करेंगे। अरुण गोविल ने गुरुवार को दिल्‍ली में बीजेपी कार्यालय में पार्टी की सदस्‍यता ली। इस दौरान बीजेपी के राष्‍ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने उनका पार्टी में स्‍वागत किया। सदस्‍यता ग्रहण करने के बाद अरुण गोविल ने कहा, ‘इस समय जो हमारा कर्तव्‍य है वो करना चाहिए। मुझे राजनीति आज से पहले समझ नहीं आती थी। लेकिन मोदी जी ने जब से देश को संभाला है तब से देश की परिभाषा ही बदल गई है। मेरे दिल दिमाग में जो होता है कर देता हूं।’ जल्द ही पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और ऐसे में अरुण गोविल के बीजेपी में शामिल होने का बहुत ही खास माना जा रहा है। बीजेपी में शामिल होने के बाद अरुण गोविल अब पश्चिम बंगाल में पार्टी के लिए प्रचार भी करेंगे।

राजीव गांधी ने दिया था ऑफर

बता दें कि अरुण गोविल को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़वाना चाहते थे, लेकिन तब अरुण गोविल ने ऑफर ठुकरा दिया था। कहा जा रहा है कि बीजेपी की सदस्यता लेने के बाद अरुण गोविल चुनाव भी लड़ सकते हैं। ऐसा होता है बीजेपी के टिकट पर ही ‘रामायण’ में रावण का किरदार निभाने वाले अरविंद त्रिवेदी ने साल 1991 में चुनाव लड़ा था।  ‘रामायण’ की ‘सीता’ यानी दीपिका चिखलिया ने भी बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा। उन्होंने 1991 में गुजरात की बड़ोदा सीट पर चुनाव लड़ा था और जीता भी। जिसके बाद बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले भगवान राम का किरदार निभाकर घर-घर मशहूर हुए अरुण गोविल  अब तीसरे कलाकार होंगे।

बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने को लगातार काम कर रही हैं महिला पर्यवेक्षिका स्मृति कुमारी

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– जिले के बरियारपुर प्रखण्ड के ग्रामीण क्षेत्र में घर- घर जाकर कुपोषण के प्रति लोगों को कर रही हैं जागरूक
– कुपोषण के शिकार बच्चे को चिह्नित कर पोषण और पुनर्वास केंद्र ( एनआरसी) मुंगेर में कराती हैं भर्ती
मुंगेर, 18 मार्च | जिले के बरियारपुर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत बरियारपुर ग्रामीण के हरिणमार, खड़िया- पिपरा, परैया करहरिया दक्षिण क्षेत्र में आईसीडीएस की महिला पर्यवेक्षिका स्मृति कुमारी महिला के गर्भधारण करने से लेकर बच्चे के जन्म और उसके बाद छह वर्षों तक लगातार गर्भवती महिला, धातृ महिला के साथ ही गर्भस्थ शिशु, नवजात शिशु और छोटे- छोटे बच्चों को कुपोषण से मुक्ति के लिए काम कर रही हैं । क्षेत्र भ्रमण के दौरान घर- घर जाकर वह गर्भवती महिलाओं से मिलकर उन्हें पोषक तत्वों से युक्त आहार लेने की सलाह देती हैं | ताकि गर्भवस्था के दौरान उसे खून में हीमोग्लोबिन की कमी या एनीमिया की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। इसके लिए वो गर्भवती महिला के घर पर या आंगनबाड़ी केंद्र पर पोषक तत्वों से युक्त हरी- साग सब्जी, मौसमी फल, प्रोटीन युक्त दाल, आयरन की गोली सहित अन्य पोषक तत्वों से गर्भवती महिला की गोद भराई की रस्म अदायगी के साथ ही दूध, मांस- मछली, अंडा सहित अन्य पोषक खाद्य पदार्थ खाने की सलाह देती हैं। धातृ महिलाओं से मिलकर उन्हें खुद कुपोषण से बचने के लिए पोषक आहार लेने की सलाह देने के साथ कम से कम छह महीने तक बच्चे को सिर्फ और सिर्फ अपना स्तनपान कराने की सलाह देती हैं । वह महिलाओं को बताती हैं कि इस दौरान बच्चे को अलग से पानी भी देने की मनाही होती है| क्योंकि मां के दूध में 80 प्रतिशत तक पानी होता है इसलिए उन्हें अलग से पानी देने कि कोई आवश्यकता नहीं है। धातृ महिलाओं को वह बताती कि छह महीने के बाद ही स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार के तौर पर हल्का खाना जैसे दलिया, खिचड़ी, सूजी का हलवा, खीर सहित अन्य हल्के खाद्य पदार्थ दे सकते हैं। बच्चे को अनुपूरक आहार की शुरुआत कराने के लिए प्रत्येक महीने की 19 तारीख को आंगनबाड़ी केंद्रों और घरों में भी अन्नप्राशन संस्कार का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही धातृ महिलाएं अपने बच्चे को 2 वर्ष तक अपना स्तनपान करवा सकती हैं ।
नवजात शिशु और बच्चे के स्वास्थ्य और पोषण की लगातार मॉनिटरिंग करती-
महिला पर्यवेक्षिका स्मृति कुमारी ने बताया कि वो गर्भस्थ शिशु के साथ ही 0 से लेकर 3 वर्ष तक नवजात शिशु और बच्चे के स्वास्थ्य और पोषण की लगातार मॉनिटरिंग करती हैं | ताकि बच्चा कुपोषण का शिकार होकर बीमार न हो जाय। इसके साथ ही 03 वर्ष से लेकर 06 वर्ष तक जब बच्चा आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ने के लिए आता है तो इस दौरान भी उसके स्वास्थ्य और पोषण की लगातार मॉनिटरिंग की जाती है। इस दौरान नवजात बच्चे के कुपोषित होने पर बेहतर इलाज और देखभाल के लिए जिला मुख्यालय स्थित स्पेशल न्यूबोर्न केयर यूनिट ( एसएनसीयू) और अन्य बच्चे को पोषण एवं पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया जाता है।

क्षेत्र भ्रमण के दौरान एक बच्चा के कुपोषित होने पर कराया था एनआरसी में भर्ती :
महिला पर्यवेक्षिका स्मृति कुमारी ने बताया कि एक बार क्षेत्र भ्रमण के दौरान उन्होंने देखा कि एक दो साल का लड़का चाहत कुमार अपनी उम्र के हिसाब से काफी कम वजन और कुपोषण का शिकार है। दो वर्ष का होने के बावजूद वो वजन के हिसाब से सिर्फ एक वर्ष का लग रहा था| उसका वजन भी सिर्फ 5 से 7 किलो का प्रतीत हो रहा था। इसके बाद मैंने बच्चे के पिता रविंद्र कुमार और माता रेशमी देवी से बातकर बच्चे को कुपोषण से मुक्ति दिलाने और बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल मुंगेर स्थित पोषण और पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) केंद्र में भर्ती कराया । एनआरसी मुंगेर में सही देखभाल और बेहतर इलाज के बाद बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ्य हो गया और उसके वजन में भी उम्र के अनुसार बढ़ोतरी हुई।
कुपोषित बच्चों को सदर अस्पताल मुंगेर स्थित पोषण और पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाता
पोषण और पुनर्वास केंद्र ( एनआरसी) मुंगेर के नोडल अधिकारी विकास कुमार ने बताया कि जिले के सभी प्रखण्डों में काम कर रही आईसीडीएस की महिला पर्यवेक्षिका के द्वारा कुपोषित बच्चों को सदर अस्पताल मुंगेर स्थित पोषण और पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया जाता है। यहां 15 से 20 दिनों तक बच्चे को रखकर उसके पोषण स्तर में सुधार के लिए पोषक तत्वों से युक्त भोजन के साथ ही उपयुक्त दवाइयां भी दी जाती हैं । निर्धारित अवधि तक बच्चे की पूरी तरीके से मॉनिटरिंग की जाती है। इसके बाद बच्चे के स्वास्थ्य और वजन में सकारात्मक सुधार के बाद ही उसे डिस्चार्ज किया जाता है। बताया कि एनआरसी मुंगेर जिले के बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए सदैव क्रियाशील है।