पोषण पखवाड़ा में 16 से 31 मार्च तक आंगनबाड़ी से लेकर जिलास्तर पर आयोजित किए जा रहे विभिन्न कार्यक्रम

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– विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्र, प्रखण्ड कार्यालय और जिलास्तर पर आयोजित किए जाने हैं पोषण जागरुकता से सबंधित कई कार्यक्रम
– जिला मुख्यालय पर 20 से 24 मार्च के बीच आयोजित की जाएगी डीसीएपी की बैठक
– राज्य स्तर पर पटना में 16 से 26 मार्च एससीएपी बैठक और 20 से 31 मार्च तक होगा राज्यस्तरीय पोषण सेमिनार
लखीसराय, 18 मार्च | पोषण पखवाड़ा के अंतर्गत 16 से 31 मार्च तक आंगनबाड़ी स्तर से लेकर राज्य स्तर विभिन्न तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके तहत जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर 16 से 31 मार्च के दौरान जिले को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए कार्यक्रमों का एक विस्तृत कैलेंडर जारी किया गया है। इसके तहत आंगनबाड़ी केंद्रों के अलावा प्राथमिक विद्यालय स्तर पर, प्रखण्ड स्तर पर और अंततः जिला और राज्य स्तर पर कुपोषण के प्रति जागरूकता को ले कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं।
विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का एक विस्तृत कैलेंडर जारी
लखीसराय में आईसीडीएस की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा ने बताया कि पोषण पखवाड़ा के तहत 16 से 31 मार्च तक आयोजित किए जाने वाले विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का एक विस्तृत कैलेंडर जारी किया गया है। इसके अनुसार जिले के सभी आंगनबाड़ी केन्दों पर 16 से 20 मार्च तक पोषण युक्त औषधीय पौधों के माध्यम से खाद्य वानिकी कार्यक्रम के तहत पोषण सम्बंधी चुनोतियों का समाधान करने के उद्देश्य से लोगों को जागरूक करते हुए औषधीय पौधों के रूप में बेल, जामुन,आंवला,पपीता,खजूर, अमरूद और सहजन का पौधा लगाया जा रहा है। इसके साथ ही 16 से 21 मार्च तक पोषण पंचायत का आयोजन कर पंचायत प्रतिनिधियों के सहयोग से बच्चों में व्याप्त कुपोषण से बचाव व इससे होने वाली बीमारियों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि घर- घर आंगनबाड़ी केंद्र (फंडामेंटल लर्निंग एंड न्यूमेरेसी लिटरेसी ) कार्यक्रम के अंतर्गत 16 से 20 मार्च तक माताओं और पालन कर्ताओं को नई पहल कार्यक्रम के तहत 3 से 6 साल के बच्चों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने के लिए केंद्र पर विभिन्न गतिविधियों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

आंगनबाड़ी केंद्रों पर अभिभावकों की बैठक, योगाभ्यास, पोषण दिवस सहित आयोजित किए जा रहे हैं अन्य कार्यक्रम :
उन्होंने बताया कि जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर 16 से 20 मार्च तक 6 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के प्राथमिक विद्यालयों में प्रवेश कराने के लिए अभिभावकों के साथ बैठक आयोजित करने के साथ ही स्वस्थ जीवन जीने के लिए सामान्य योगाभ्यास औऱ ग्राम स्वास्थ्य , स्वच्छता के लिए 17, 19, 24, 26 और 31 मार्च को पोषण दिवस (वीएचएसएन डी) का आयोजन कर गर्भवती महिलाओं के वजन की जांच कर वजन में वृद्धि के लिए आवश्यक परामर्श दिया जाना है।
पौष्टिक आहार के बारे में जागरूक किया जा रहा-
आइसीडीएस डीपीओ कुमारी अनुपमा ने बताया कि 16 से 31 मार्च तक गृह भ्रमण के दौरान गर्भवती और धातृ महिलाओं को पोषण के पांच सूत्र ( पहले एक हज़ार दिन एनीमिया, डायरिया से बचाव, स्वच्छता, हाथों कि सफाई और पौष्टिक आहार के बारे में जागरूक किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रत्येक लाभार्थी गर्भवती महिला और 6 वर्ष तक के बच्चों का वजन लेने के साथ ही आवश्यक परामर्श दिया जाना है। बताया कि 21 से 31 मार्च तक छोटे- छोटे समूह में यक्ष्मा ( टीबी) पर समुदाय आधारित जागरूकता चौपाल का आयोजन किया जाना है। इसके साथ ही 29 – 31 मार्च तक होली मिलन समारोह में पोषण के पांच सूत्र की चर्चा, सभी विद्यालयों में किशोर- किशोरियों के साथ पोषण पर चर्चा, सभी प्रखंड मुख्यालय पर बीसीएपी की बैठक, प्रखंड और जिला मुख्यालय पर पोषण परामर्श केंद्र की स्थापना, प्रखंड के पोषक क्षेत्र में ई. रिक्शा, ऑटो रिक्शा और रिक्शा के माध्यम से 16 से 31 मार्च तक पोषक संदेशों का प्रचार- प्रसार, सम्पूर्ण पोषक क्षेत्र में जिला परियोजना स्तर के पदाधिकारियों के द्वारा सघन अनुश्रवण के साथ ही जिला मुख्यालय में 20- 24 मार्च को डीसीएपी की बैठक आयोजित की जाएगी। पूरे राज्य में निदेशालय के द्वारा टीवी, रेडियो, न्यूज़ पेपर, शोशल मास मीडिया के माध्यम से विज्ञापन के जरिये प्रचार- प्रसार किया जाएगा। इसके साथ ही राज्य स्तर पर 16 से 26 मार्च तक एससीएपी की बैठक और 20 – 31 मार्च तक कुपोषण रोकथाम और पोषण विविधता विषय पर राज्यस्तरीय पोषण सेमिनार का आयोजन किया जाना है।

कोविड-19 संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी है सतर्कता

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– कोविड-19 से बचाव के लिए जारी रखें एहतियात, बारी आने पर बेहिचक कराएं वैक्सीनेशन

खगड़िया, 18 मार्च | कोविड-19 संक्रमण के मामले जिला में बेहद कम हैं । वायरस को खत्म करने के लिए जिले में तकरीबन पिछले दो माह से लगातार वैक्सीनेशन अभियान भी चल रहा है। जिससे जिले में संक्रमण का चेन काफी हद तक टूटा भी है। किन्तु, अभी टला नहीं है। इसलिए, ऐसे में हमें कोविड-19 संक्रमण के दायरे से दूर रहने के लिए और सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि, देश के विभिन्न प्रदेशों से एकबार फिर से संक्रमण की खबरें आ रही हैं । इसलिए, विभिन्न प्रदेशों के हालात को देखते हुए हमें सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। वहीं, विभिन्न प्रदेशों के हालात को देखते हुए स्थानीय स्वास्थ्य विभाग भी पूरी तरह अलर्ट मोड में है| संक्रमण बढ़े नहीं, इसके मद्देनजर हर आवश्यक तैयारी शुरू कर दी गई है । दरअसल, होली में बड़ी संख्या में देश के विभिन्न प्रदेशों में रहकर काम करने वाले कामगार लोगों के घर आने की संभावना है। जिससे संक्रमण को भी नकारा नहीं जा सकता है। इसके मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग ने कोविड-19 जाँच की गति तेज कर दी है।

– बाहर से आने वाले हर व्यक्ति कराएं कोविड-19 जाँच
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया कि होली के अवसर पर बाहर रहने वाले व्यापक पैमाने पर लोग अपने घर आएँगे। ऐसे लोगों के लिए घर सुरक्षित पहुँचे यह महत्वपूर्ण है। इसलिए, मैं बाहर से आने वाले सभी लोगों से अपील करता हूँ कि घर जाने के पूर्व अपने नजदीकी जाँच सेंटर पर कोविड-19 की जाँच कराकर ही घर जाएँ। क्योंकि, ऐसे करने से आपके साथ-साथ आपका पूरा परिवार और समाज भी सुरक्षित रहेगा। इसलिए, आप खुद के साथ-साथ अपना परिवार और समाज के लिए निश्चित रूप से जाँच कराएं।

– जिले के सभी पीएचसी में की गई मुफ्त जाँच की व्यापक व्यवस्था :-
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया कि लोगों को कोविड-19 जाँच कराने में किसी प्रकार की परेशानियाँ का सामना नहीं करना पड़े इसके लिहाज से जिले के सभी पीएचसी में प्रखंड स्तर मुफ्त कोविड-19 जाँच की व्यापक व्यवस्था की गई है। ताकि लोग अपने नजदीकी अस्पताल में जाकर आसानी के साथ अपनी जाँच करवा सकें।

– आपकी इम्युनिटी बढ़े, इसके लिए जरूरी है वैक्सीन :-
आपकी इम्युनिटी बढ़े और संक्रमण का ताकत कम हो इसके लिए वैक्सीनेशन कराना बेहद जरूरी है। क्योंकि, कोविड-19 से स्थाई निजात के लिए वैक्सीन की पूरी डोज के साथ-साथ सतर्कता भी जरूरी है। इसलिए, बारी आने पर निश्चित रूप से से वैक्सीनेशन कराएं और वैक्सीन लेने के बाद भी कोविड-19 को पूरी तरह जड़ से मिटाने के लिए एहतियात भी जारी रखें। वहीं, वर्तमान में जिले के सभी स्वास्थ्य स्थानों में पूरे जोर-शोर के साथ वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। जहाँ 60 वर्ष एवं इससे अधिक उम्र वाले वृद्धों के साथ 45 से 59 आयु वर्ग के बीमार लोगों को वैक्सीन दी जा रही है।

– कोविड-19 संक्रमण वायरस को जड़ से मिटाने के लिए सामाजिक सहयोग भी जरूरी :-
कोविड-19 संक्रमण को पूरी तरह जड़ से मिटाने के लिए सामाजिक सहयोग भी बेहद जरूरी है। इसके लिए समाज के हर तबके के लोगों को बाहर से आने वाले लोगों को कोविड-19 जाँच कराने के लिए प्रेरित एवं वैक्सीन के प्रति योग्य लोगों को वैक्सीनेशन के लिए जागरूक करने की जरूरत है। इसलिए, ऐसा कर अपनी जिम्मेदार नागरिक का फर्ज पूरा करें।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– बाहर से आने पर निश्चित रूप से कोविड-19 जाँच कराएं।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– घर से निकलने पर निश्चित रूप से मास्क का उपयोग करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– बासी और बाहरी खाना खाने से परहेज करें।

एनीमिया के खिलाफ किशोरियों की ढाल बनी सविता

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मासिक धर्म जागरूकता के साथ दे रही पोषण का संदेश
भभूआ / 18 मार्च
लगन सच्ची और सोच सकारात्मक हो तो कोई भी समस्या आड़े नहीं आती है। कुछ समय पहले तक किशोरियों में रक्ताल्पता की समस्या से जूझ रहा दतियांव-1 पोषक क्षेत्र आज नई इबारत लिख रहा है। आज यहाँ की किशोरियाँ एनीमिया से सम्पूर्ण रूप से मुक्त होने की कगार पर हैं जिसका पूरा श्रेय यहाँ की आंगनवाड़ी केंद्र संख्या- 54की सेविका सविता देवी को जाता है। साप्ताहिक आयरन फॉलिक एसिड अनुपूरण कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर सफल बना कर सविता ने ना सिर्फ अपने पोषक क्षेत्र को किशोरी एनीमिया से मुक्ति दिलाई है, बल्कि माहवारी स्वच्छता पर भी उन्हें जागरूक किया है।
कोरोनासंकट भी नहीं रोक पायी नीली गोलियों की आपूर्ति :
सविता के पोषक क्षेत्र की ग्यारहवीं की छात्रा 17 वर्षीय नेहा प्रिया के अनुसार, 8-9 महीने पहले उम्र के तुलना में उनका वजन काफी कम था। उनका माहवारी चक्र भी अनियमित था और वो काफी सुस्त और कमजोर थीं। लेकिन आंगनवाड़ी केंद्र द्वारा हर बुधवार को आयरन की नीली गोलियों और पोषण संबंधी जानकारी से उनके स्वास्थ्य में काफी सुधार आया है। लॉक डाउन के दौरान भी सविता दीदी ने बिना नागा हर वुधवार को घर- घर जाकर आयरन की गोली पहुँचती रही हैं। कोरोना के आशंका से जब सभी अपने अपने घरों में बंद होते थे उस वक्त भी वह मुझे और मेरे हमउम्र अन्य किशोरियों तथा महिलाओं को पोषण की जरूरत के बारे जानकारी देती रही हैं। इसके अलावा भी समय समय पर होने वाले किशोरी बैठक के जरिये मासिक धर्म चक्र और इस दौरान स्वच्छता रखने की आवश्यकता की जानकारी दी जाती है।
केंद्र में जगह कम तो घर में बनाया पोषण वाटिका :
2002 से बतौर सेविका कार्यरत सविता बताती हैं की उनके क्षेत्र के प्रत्येक बच्चे के पोषण की ज़िम्मेदारी सबसे पहले उनकी है। वो हमेशा प्रयासरत रहती हैं की उनके पोषण में कोई कमी ना रहे। जब उन्हें लगा की आंगनवाड़ी केंद्र में जगह कम होने से पोषण वाटिका लगवाने के लिए यह पर्याप्त नहीं है तो उन्होने अपने घर के बगीचे को पोषण वाटिका में तब्दील कर दिया। जिससे उनके केंद्र के बच्चों के पोषाहार के लिए जरूरी साग- सब्जियों की आपूर्ति में किसी भी तरह की कोई कमी नहीं आए। आज भले ही उनके केंद्र में 40 बच्चों के लिए पोषाहार उपलव्ध है किन्तु वो 79 बच्चों को केंद्र द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं से लाभान्वित करवा रही हैं।
आनंदी प्रोजेक्ट के साथ अन्य आंगनवाड़ी गतिविधियों का भी सफल संचालन :
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (आईसीडीएस )सविता कुमारी ने बताया की जिले की किशोरियों को एनीमिया मुक्त करने और सेहत में सुधार के लिए सरकार द्वारा पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चलने वाले आनंदी प्रोजेक्ट के सफल संचालन में सेविका सविता की काफी महत्वपूर्ण भूमिका है।वह एक कुशल कार्यकर्ता है। कोरोनाकाल में भी उन्होने आंगनवाड़ी केंद्र द्वारा परिचालित अन्य कार्यक्रमों जैसे गोद भराई , अन्नप्रासन, हैंड वासिंग , टेक होम रासन वितरण जैसे सभी योजनाओं को घर घर जाकर करवाना सुनिश्चित किया है। केंद्र के बच्चों के लिए भी उनका रवैया काफी संवेदनशील रहता है।

नारायणपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का डीएम ने लिया जायजा

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स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था से संतुष्ट दिखे डीएम सुब्रत कुमार सेन
डीएम के साथ नारायणपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी भी थे मौजूद
स्वास्थ्य केंद्र में 120 लाभुकों ने कोरोना का टीका लिया

भागलपुर, 18 मार्च
डीएम सुब्रत कुमार सेन ने गुरुवार को नारायणपुर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का जायजा लिया. उनके साथ एसडीओ, नारायणपुर प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं अन्य अधिकारी भी मौजूद थे. डीएम ने जायजा लेने के दौरान अस्पताल के ओपीडी को देखा. वहां पर मरीजों के इलाज को लेकर किए गए इंतजाम से वह संतुष्ट दिखे.

इसके बाद उन्होंने अस्पताल के दवा स्टोर और टीकाकरण केंद्र का भी जायजा लिया. दवा स्टोर पर लगभग सभी तरह की दवा मौजूद थी. जो दवा मौजूद नहीं थी, उसे डीएम ने तत्काल मंगाने को कहा. इसके बाद अस्पताल में चल रहे कोरोना टीकाकरण को भी देखा. टीका लेने वाले लाभुकों की संख्या को देखकर भी डीएम ने संतुष्टि जाहिर की. मालूम हो कि गुरुवार को नारायणपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 120 लाभुकों ने कोरोना का टीका लिया.

सभी कुछ ठीक तरीके से चल रहा था: अस्पताल प्रभारी डॉ विनोद कुमार ने बताया कि डीएम व अन्य अधिकारियों ने अस्पताल की व्यवस्था को देखा. अस्पताल के ओपीडी में वह गए. मरीजों के इलाज की व्यवस्था को देखा. कुल मिलाकर अस्पताल की व्यवस्था से वह संतुष्ट नजर आए. अस्पताल में सभी कुछ ठीक तरीके से चल रहा था. डीएम ने व्यवस्था को और बेहतर करने को कहा. मौके पर डॉ कुमार दीपक, हेल्थ मैनेजर शंकर पासवान, रोशन कुमार, अनिमेष झा, ब्रजेश कुमार, आरती, सौरभ कुमार, मानस, सुशांत बिनीता और दीपशिखा मौजूद थी.

150 लोगों की प्रतिदिन कोरोना जांच का मिला है लक्ष्य: डॉ विनोद कुमार ने कहा कि कोरोना जांच को लेकर फिर से सक्रियता बढ़ा दी गई है. अभी प्रतिदिन 150 लोगों की कोरोना जांच का लक्ष्य मिला हुआ है. गुरुवार को 131 लोगों की कोरोना जांच हुई. यहां आने वाले लोगों के सैंपल लेकर मायागंज अस्पताल भेज दिया जाता है. वहां स्थित लैब में सैंपल की जांच होती है. इसके बाद रिपोर्ट आती है.
कोरोना काल में इन उचित व्यवहारों का करें पालन,-
– एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
– सार्वजनिक जगहों पर हमेशा फेस कवर या मास्क पहनें।
– अपने हाथ को साबुन व पानी से लगातार धोएं।
– आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें।
– छींकते या खांसते वक्त मुंह को रूमाल से ढकें।

शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कोरोना जांच में आई तेजी

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अस्पताल में 80 लोगों की प्रतिदिन हो रही है कोरोना जांच

बांका, 18 मार्च
कोरोना को खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार कदम उठा रहा है. जिले में पहले जांच फिर इलाज और अभी टीकाकरण का दौर चल रहा है. इसके साथ ही अभी होली आने ही वाला है. बड़ी संख्या में लोग बाहर से अपने घर आएंगे. पिछले दिनों महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में कोरोना के मामले फिर से बढ़ने लगे हैं. इन राज्यों से भी लोग अपने घर आएंगे. ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने एहतियातन कोरोना जांच में तेजी लाने का फैसला किया है. शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि हमलोग कोरोना के खिलाफ लगातार अभियान चला रहे हैं. स्वास्थ्य केंद्र आने वाले लोगों की जांच कर रहे हैं. अभी बाहर से काफी संख्या में लोग आएंगे. इस वजह से उनसे अन्य लोगों में कोरोना नहीं फैले, इसे लेकर हमलोगों ने जांच में और तेजी लाने का फैसला किया है.

जांच को लेकर मिला है लक्ष्य:
डॉ चौधरी ने बताया कि कोरोना जांच को लेकर शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को लक्ष्य मिला है. प्रतिदिन 40 लोगों की एंटीजन किट से और 40 लोगों की आरटीपीसीआर मशीन से जांच करनी है. जांच को लेकर लैब टेक्नीशियन को तैनात कर दिया गया है. प्रतिदिन यहां पर दोनों तरीके से 40- 40 लोगों की कोरोना जांच हो रही है.

बाहर से आने वाले जरूर अपनी जांच करवाएं:
डॉ चौधरी ने बताया कि जो लोग भी बाहर से होली के मौके पर अपने घर आ रहे हैं, वह अपनी जांच जरूरी तौर पर करवा लें. अगर वह जांच के लिए नहीं आ रहे हैं तो परिवारवालों की जिम्मेदारी बनती है कि वह घर में बाहर से आने वालों की कोरोना जांच करा लें. ऐसा करने से बाहर से आने वाले लोगों से स्थानीय लोगों में कोरोना का संक्रमण नहीं होगा.

हर हाल में कोरोना की गाइडलाइन का करें पालन:
डॉ चौधरी ने बताया कि कोरोना की गाइडलाइन का हर हाल में पालन करें. हमलोग पहले से ही लोगों से अपील करते आ रहे हैं कि जब तक करोना पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाए, तब तक इसकी गाइडलाइन का पालन अनिवार्य तौर पर करें. घर से बाहर निकलते वक्त मास्क पहने. भीड़भाड़ में जाने से बचें और सामाजिक दूरी का पालन करें. बाहर से आने पर हाथ की धुलाई अवश्य करें.

कोरोना काल में इन उचित व्यवहारों का करें पालन,-
– एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
– सार्वजनिक जगहों पर हमेशा फेस कवर या मास्क पहनें।
– अपने हाथ को साबुन व पानी से लगातार धोएं।
– आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें।
– छींकते या खांसते वक्त मुंह को रूमाल से ढकें।

पोषण पंचायत की मदद से कुपोषण दूर करने की कवायद, लगाये जायेंगे पोषणयुक्त पौधे

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• 16 से 31 मार्च तक मनेगा पोषण पखवाड़ा
• पोषण माह के दौरान विभिन्न गतिविधियां आयोजित करने के दिए गए निर्देश
• जनआंदोलन डैशबोर्ड पर प्रतिदिन प्रतिवेदन को किया जाना है अपलोड
• आइसीडीएस के निदेशक ने पत्र जारी कर दिये आवश्यक निर्देश

पटना-

राज्य में 16 से 31 मार्च तक पोषण पखवाड़ा मनाया जाएगा. इस दौरान सामुदायिक स्तर पर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन भी होगा. इसको लेकर आईसीडीएस के निदेशक आलोक कुमार ने सभी जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों को पत्र लिखकर इन गतिविधियों के ससमय आयोजन का निर्देश दिया है. इसके लिए जिला, परियोजना एवं आंगनबाड़ी केंद्र स्तर पर आयोजित होने वाली गतिविधियों का कैलेंडर भी सभी जिले को उपलब्ध कराया गया है. गतिविधि कैलेंडर के अनुसार गतिविधियों का सफलतापूर्वक आयोजन कराते हुए जनआंदोलन डैशबोर्ड पर प्रतिदिन प्रतिवेदन को पोषण अभियान के पोर्टल पर अपलोड भी किया जाना है.

दुबलापन एवं एनीमिया सबसे बड़ी चुनौती:
आईसीडीएस के निदेशक आलोक कुमार ने बताया कि पोषण पखवाड़े को प्रभावी एवं सार्थक बनाने के लिए सभी जिले को निर्देश दिए गए हैं. बच्चों में दुबलापन तथा महिलाओं एवं बच्चों में एनीमिया हमारे लिए चुनौती है. इसमें सुधार लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. पोषण पखवाड़ा एक बेहतर अवसर है जब हम सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को पोषण पर जागरूक कर सकते हैं.

औषधीय पौधों को मिलेगा बढ़ावा:
आईसीडीएस की सहायक निदेशक श्वेता सहाय ने बताया कि 16 मार्च से 20 मार्च तक आकांक्षी जिले के लिए खाद्य वानिकी पोषण युक्त पौधों के माध्यम से पोषण संबंधी चुनौतियों के समाधान करने पर विशेष बल दिया जाएगा. इसके लिए पोषण पंचायत के माध्यम से आकांक्षी जिले में स्थानीय, ग्राम पंचायत स्तर पर राष्ट्रीय औषधीय पौध बोर्ड, आयुष मंत्रालय के सहयेग से पोषणयुक्त औषधीय पौधे लगाने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा. इस दौरान प्रत्येक केंद्र पर बेल, जामुन, आंवला, पपीता, खजूर, अमरूद, सहजन, अनार आदि में से कम से कम 4 पौधों को लगाया जाना है.

पोषण पंचायत का करना है आयोजन:
जारी पत्र के अनुसार 16 मार्च से 21 मार्च तक की अवधि में आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण पंचायत का आयोजन कर पंचायती राज के प्रतिनिधियों के सहयोग से बच्चों में व्याप्त कुपोषण से बचाव व कुपोषण से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के बारे में जागरूक करने , कुपोषित एंव अतिकुपोषित बच्चों की पहचान करने और कुपोषण वाटिका के तहत पोषणयुक्त पौधे लगाने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा.
इस दौरान माताओं व पालनकर्ता को नई पहल पाठ्यक्रम एवं कोविड 19 के दौरान भेजे गये कैलेंडर के सहयोग से 3 से 6 साल के बच्चों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने के लिए बच्चों के सीखने के आधारभूत भाषाई कौशल एवं संख्यात्मक योग्यता को बढ़ावा देने के लिए गतिविधियों का केंद्र पर प्रदर्शन भी किया जाएगा.

विद्यालयों में बच्चों का कराना है नामांकन:
प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों के सहयोग से आंगनबाड़ी केंद्र में नामांकित वैसे बच्चे जिन्होंने 6 साल पूरे कर लिये और जिनका नामांकन प्राथमिक विद्यालय में होना है एवं पोषक क्षेत्र के अन्य 6 साल पूर्ण कर लिए बच्चे के अभिभावकों के साथ बैठकर पोषण के महत्व, बच्चों के सर्वांगीण विकास में पोषण की भूमिका, बच्चों के विद्यालय में नामांकन कराने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही उससे संबधित जानकारी प्रदान कर विद्यालय में नामांकन कराने में सहयोग प्रदान करने की बात कही गयी है. 16 से 31 मार्च के मध्य आंगनबाड़ी केंद्र एवं पोषक क्षेत्र में प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र जहां पौधे लगाने के लिए स्थान की उपलब्धता हो एवं जहां जगह हो वहां कुछ प्रमुख पौधे जैसे सहजन, पपीता, अमरूद, नींबू का पौधरोपण किया जाना है. वहीं अंतिम सप्ताह में स्वस्थ्य जीवन जीने के लिए सामान्य योगा अभ्यास को लेकर जागरूक कराया जाना है.

गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यान:
पखवाड़े के दौरान ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस के आयोजन पर ध्यान दिया जाएगा .इसके लिए गर्भवती महिलाओं का वजन कर रिकॉर्ड किए जाएंगे व जिन गर्भवती महिलाओं के वजन में अपेक्षित इजाफा न हो रहा हो, उन्हें इस दिवस में आवश्यक सेवाओं और परामर्श के लिए आने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.
इस दौरान गृह भेंट कर पोषण के पांच सूत्र प्रथम 1000 दिन, एनीमिया व डायरिया से बचाव, स्वच्छता, हाथों की सफाई व पौष्टिक आहार आदि के बारे में गर्भवती महिलाओं धात्री महिलाओं को जागरूक करना व उचित सलाह देने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही प्रसव पूर्व व प्रसव पश्चात देखभाल, जन्म से 3 वर्ष तक के बच्चों के उपरी आहार एवं स्तनपान एवं परामर्श, व्यक्तिगत स्वच्छता, हाथों की सफाई, खानपान, आहार विविधता, विभिन्न खाद्य समूहों पर परामर्श देने की बात कही गयी है.

टीबी के प्रति जागरूकता के लिए चौपाल:
पखवाड़े के दौरान प्रत्येक लाभार्थी का वजन लेकर आवश्यक परामर्श देने, समुदाय आधारित गतिविधि के तहत बच्चो में टीबी पर जनजागरूकता के लिए चौपाल लगाने, होली के दौरान पोषण मिलन का समारोह का आयोजन सहित किशोर एवं किशोरियों के साथ बैठक कर पोषण पर चर्चा करने को भी शामिल किया गया है.

पोषण परामर्श केंद्र की करनी है स्थापना:
जिला व परियोजना स्तर पर पोषण परामर्श केंद्र की स्थापना एवं संचालन के लिए सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या परियोजना, प्रखंड कार्यालय परिसर, सभी जिला अस्पताल व जिला समहरणालय कार्यालय परिसर में जिला प्रोग्राम पदाधिकारी की देखरेख में पोषण परामर्श केंद्रों की स्थापना और पोषण परामर्श का संचालन किया जाना है

कोवैक्सीन और कोविशील्ड दोनों टीके रहेंगे जारी

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-कार्यपालक निदेशक ने संदेह को किया दूर
– कई समाचार पत्रों ने बिहार में सिर्फ़ कोवैक्सीन टीके के इस्तेमाल की कही थी बात

पटना-

विगत दिनों कई समाचार पत्रों में यह ख़बर आयी थी कि बिहार सरकार ने यह निर्णय लिया है कि राज्य में सिर्फ़ कोवैक्सीन टीके लगाए जाएंगे। इस ख़बर पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने इस ख़बर को गलत बताया है।

दोनों टीकों की भारत सरकार द्वारा की जा रही सप्लाई:

राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने बताया कि कोवैक्सीन एवं कोविशील्ड दोनों टीके की सप्लाई भारत सरकार द्वारा की जा रही है। यह कहना बिल्कुल तथ्यात्मक नहीं होगा कि बिहार सरकार ने सिर्फ़ कोवैक्सीन टीका इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है। ऐसी बातों से लोगों के मन में संदेह पैदा हो सकता है।

दोनों टीके हैं प्रभावी:

कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने बताया कि दोनों टीके कोरोना के ख़िलाफ़ समान रूप से प्रभावी हैं। लोगों को डरने की कोई जरूरत नहीं है। साथ ही बिहार में दोनों टीके समान रूप से इस्तेमाल भी किए जा रहे हैं।

होली में बाहर से आने वाले लोगों पर स्वास्थ्य विभाग की रहेगी नजर, होगा कोविड-19 की होगी जाँच

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– जिले के सभी स्वास्थ्य स्थानों में उपलब्ध रहेगी रैपिड ऐंटीजन व आरटीपीसीआर जाँच की व्यवस्था
– बाहर से आने वाले लोगों को कोविड-19 जाँच कराने के लिए किया गया जागरूक
खगड़िया, 17 मार्च, 2021
इस माह होने वाली रंगो व उमंगो का के त्योहार होली को लेकर स्वास्थ्य विभाग अभी से सजग है। देश के विभिन्न प्रदेशों में कोविड-19 संक्रमण वायरस में हो रही वृद्धि को देखते हुए विभाग ने कोविड-19 जाँच की गति तेज करने का निर्देश जारी किए हैं। किया है.  दरअसल, होली के अवसर पर देश के विभिन्न प्रदेशों में रहकर काम करने वाले बड़ी संख्या में कामगार लोगों को घर अपने घर आने की संभावना है। जिसके संभावित इसके  मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग ने बाहर से आने वाले शत-प्रतिशत लोगों की कोविड-19 जाँच कराने के लिए अभी से आवश्यक तैयारी शुरू कर दी है। ताकि त्योहार के दौरान किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं नहीं करना  पड़े। इसके मद्देनजर इसको लेकर स्वास्थ्य  विभाग द्वारा प्रखंड स्तर पर रैपिड ऐंटीजन व आरटीपीसीआर जाँच की व्यवस्था की है। ताकि लोगों को जाँच कराने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े और जाँच की गति में तेजी आ सकें। सके.
– प्रदेश से आने वाले लोगों पर रहेगी नजर, कोविड-19 जाँच कराने के लिए किया जाएगा जागरूक :-
जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ अजय कुमार सिंह ने बताया कि देश के विभिन्न प्रदेशों में कोविड-19 संक्रमण वायरस में वृद्धि की खबर आ रही है। जिसके कारण सुरक्षा के मद्देनजर अभी से तैयारी शुरू कर दी गई है। दरअसल, होली में  बाहर से बड़ी संख्या में लोगों को आने से संक्रमण बढ़ने की संभावना है। इसलिए, बाहर से आने वाले लोगों पर नजर रहेगी और उन्हें उनकी  कोविड-19 की जाँच भी की जाएगी. कराने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा जागरूक की जाएगी। ताकि शत-प्रतिशत लोगों का जाँच हो सकें। लोगों को जाँच कराने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो, इसके मद्देनजर प्रखंड स्तर पर रैपिड ऐंटीजन व आरटीपीसीआर जाँच की व्यवस्था की गई है। ताकि लोग अपने सुविधानुसार अपने नजदीकी जाँच सेंटर पर जाँच करवा सकें। साथ ही इसे सुनिश्चित करने को  के लिए लेकर जिले के सभी पीएचसी प्रभारी समेत अन्य जिम्मदारों सहित अन्य संबंधित स्वास्थ्य कर्मियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
– कोविड-19 से स्थाई निजात के लिए वैक्सीन की पूरी डोज के साथ सतर्कता भी जरूरी :-
जिले जिला  प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया कि बड़ी संख्या में बाहरी लोगों को आने से संक्रमण बढ़ने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है। ऐसे में कोविड-19 संक्रमण वायरस से बचाव एवं स्थाई निजात के लिए वैक्सीन की पूरी डोज और सतर्कता जरूरी है। क्योंकि, ये यह  सच है कि देश के विभिन्न प्रदेशों में संक्रमण में वृद्धि हो रही है। किन्तु, इससे बचाव का एकमात्र उपाय है सतर्कता. और वैक्सीन ही है। कोविड-19 वैक्सीन की शुरुआत  जो पूरे समाज के लिए राहत की खबर है। इसलिए, वैक्सीन पर साकारात्मक भरोसा कर निश्चित रूप से बारी आने पर वैक्सीनेशन कराएं और सतर्कता जारी रखें। ताकि खुद के साथ-साथ पूरा समाज भी सुरक्षित रहे। लेकिन वैक्सीन के साथ जरुरी सतर्कता जरुरी है. उन्होंने लोगों से अपील करते हुआ कहा घर से निकलते समय मास्क का प्रयोग अनिवार्य रूप से करें. कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को नियंत्रित करने का यह एक सशक्त तरीका है.
– प्रत्येक जाँच सेंटर प्रतिदिन 100 रैपिड ऐंटीजन व 50 आरटीपीसीआर किट से होगी जाँच :-
कोविड-19 जाँच की रफ्तार को गति देने के लिए प्रत्येक जाँच सेंटर पर प्रतिदिन होने वाली जाँच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसमें प्रतिदिन 100 लोगों को रैपिड ऐंटीजन व 50 लोगों का आरटीपीसीआर जाँच करने का निर्देश दिया गया। ताकि जाँच की गति को रफ्तार मिल सकें और अधिकाधिक लोगों की जाँच हो सकें।
– जिले में पूरे जोर-शोर के साथ चल रहा है वैक्सीनेशन अभियान :-
कोविड-19 संक्रमण वायरस को पूरी तरह जड़ से मिटाने के लिए जिले में पूरे जोर-शोर के साथ वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। यह अभियान जिले के सभी वैक्सीनेशन सेंटरों पर चल रहा है। जहाँ लोग उत्साह के साथ वैक्सीनेशन कराने आ भी रहें हैं। किन्तु, वैक्सीनेशन अभियान को और तेज देने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह कटिबद्ध है।
– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– वैक्सीनेशन के साथ एहतियात भी जारी रखें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं।
– अफवाहों से रहें दूर रहें और वैक्सीन पर भरोसा करें।
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– बाहरी लोगों से बातचीत के दौरान आवश्यक दूरी व अन्य गाइडलाइन का ख्याल रखें।
– बासी और बाहरी खाना खाने से परहेज करें और गर्म व ताजा खाना का सेवन करें।

ई. संजीवनी टेलीमेडीसिन हब से जुड़े संग्रामपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर हसन सबा ऑनलाइन वीडियो कॉन्फेंसिग के माध्यम से जिले में सबसे अधिक मरीजों का कर रहे हैं ईलाज 

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– जिला स्वास्थ्यय समिति मुंगेर द्वारा जारी किए गए 15 मार्च तक के टेलीमेडिसिन अपडेट डाटा के अनुसार डॉ. हसन सबा ने जिले में सबसे अधिक 287 मरीजों का ईलाज किया किया है ईलाज
– जिले में 22 फरवरी से तीन प्रखण्डों के कुल 45 स्वास्थ्यय उपकेंद्रों पर शुरू कि गई थी ई. संजीवनी टेलीमेडिसिन सर्विस के तहत ग्रामीणों का ईलाज
मुंगेर, 17 मार्च 2021 : ई. संजीवनी टेलीमेडिसिन हब से जुड़े जिले के संग्रामपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर हसन सबा ने ऑनलाइन वीडियो कॉन्फेंसिग के माध्यम से जिले में सबसे अधिक मरीजों का ईलाज कर रहे हैं। इसकी पुष्टि जिला स्वास्थ्यय समिति मुंगेर के द्वारा जारी किए गए 15 मार्च तक के टेलीमेडिसिन अपडेट से हुई है। मालूम हो कि 22 फरवरी से जिले के तीन प्रखंडो में ई.संजीवनी टेलीमेडिसिन की सुविधा शुरू हुयी थी, जिसमें   सदर प्रखंड के 21, जमालपुर के 13 और बरियारपुर प्रखंड के कुल 45 स्वास्थ्यय उपकेंद्रों पर ई.संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवाओं के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ऑनलाइन चिकित्सकीय परामर्श के ही ईलाज के लिए प्रिस्क्रीप्शन का की  सॉफ्ट कॉपी और जहां पीओएस कि सुविधा उपलब्ध है वहां हार्ड कॉपी निकालने की सुविधा की शुरुआत हुई थी। इसके तहत सभी स्वास्थ्यय उपकेन्द्रों पर कार्ररत एएनएम इलाज के लिए आने वाले किसी भी बीमारी से ग्रसित रोगियों का नाम, पता और उसकी उनकी  परेशानी अपने पास मौजूद 4 जी सेवा से युक्त अनमोल टैब पर रजिस्टर्ड करने के बाद ई. संजीवनी टेली मेडिसिन हब से जुड़े जिले सात चिकित्सकों में से किसी से भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मरीज और डॉक्टर को एक दूसरे के सामने ले आती हैं. और मरीज ऑनलाइन ही डॉक्टर से परामर्श लेने के ही ईलाज से जुड़े डॉक्टर का के  प्रिस्क्रीप्शन का की  सॉफ्ट कॉपी या हार्ड कॉपी का प्रिंट निकाल सकता है सकते हैं।
संग्रामपुर प्राथमिक स्वास्थ्यय केंद्र के टेलीमेडिसिन हब से जुड़े डॉ. हसन सबा ने  जिले में सबसे अधिक कुल 287 मरीजों का ऑनलाइन ईलाज किया है। इसी तरह हवेली खड़गपुर प्राथमिक स्वास्थ्यय केंद्र के टेलीमेडिसिन हब से जुड़े डॉ. अंकित कुमार ने कुल 72 मरीजों का ऑनलाइन ईलाज किया है। इसके साथ ही अनुमंडल अस्पताल तारापुर के टेलीमेडिसिन हब से जुड़े डॉ. अनुतोष कुमार ने अभी तक कुल 18 मरीजों का ऑनलाइन ईलाज किया है। इन्हें हाल में ही टेलीमेडिसिन हब से जोड़ा गया है।
जिला स्वास्थ्यय समिति से प्राप्त 15 मार्च तक के टेलीमेडिसिन अपडेट के अनुसार बरियारपुर प्राथमिक स्वस्थ्यय केंद्र के टेलीमेडिसिन हब से जुड़े डॉक्टर अनिल कुमार सिन्हा ने कुल 89 मरीजों का ऑनलाइन ईलाज किया है। यहां कुल 11 स्वास्थ्यय उपकेंद्र कार्ररत हैं जिसमें से 10 स्वास्थ्यय उपकेन्द्र एक्टिव हैं जबकि एक मात्र हरिणमार स्वास्थ्यय उपकेन्द्र अभी तक एक्टिव नहीं हो पाया है। इसी तरह जमालपुर प्राथमिक स्वास्थ्यय उपकेंद्र के टेलीमेडिसिन हब से जुड़े डॉक्टर संजय कुमार सुमन ने कुल 30 मरीजों का ऑनलाइन इलाज किया है। यहां कुल 13 हेल्थ सब सेंटर कार्यरत हैं जिसमें से 12 हेल्थ सब सेंटर एक्टिव जबकि एक मात्र रामनगर  मोर्चा हेल्थ सब सेंटर एक्टिव नहीं है। मुंगेर सदर प्राथमिक स्वास्थ्यय केंद्र और सदर अस्पताल के टेली मेडिसिन से जुड़े डॉ. रौशन और डॉ. असीम ने अभी तक एक भी मरीज का ऑनलाइन ईलाज नहीं किया है। यहां कुल 21 हेल्थ सब सेंटर कार्यरत है जिसमें से 18 हेल्थ सब सेंटर एक्टिव और तीन कुतुलपुर, शंकरपुर और नयाटोला बहाचौर हेल्थ सब सेंटर अब भी एक्टिव नहीं हुआ है। इससे अलग संग्रामपुर प्राथमिक स्वास्थ्यय केंद्र के टेलीमेडिसिन हब से जुड़े डॉ. हसन सबा ने  जिले में सबसे अधिक कुल 287 मरीजों का ऑनलाइन ईलाज किया है। इसी तरह हवेली खड़गपुर प्राथमिक स्वास्थ्यय केंद्र के टेलीमेडिसिन हब से जुड़े डॉ. अंकित कुमार ने कुल 72 मरीजों का ऑनलाइन ईलाज किया है। इसके साथ ही अनुमंडल अस्पताल तारापुर के टेलीमेडिसिन हब से जुड़े डॉ. अनुतोष कुमार ने अभी तक कुल 18 मरीजों का ऑनलाइन ईलाज किया है। इन्हें हाल में ही टेलीमेडिसिन हब से जोड़ा गया है। मालूम हो कि संग्रामपुर, हवेली खड़गपुर और तारापुर के स्वास्थ्यय उपकेंद्रों पर अभी टेलीमेडिसिन सेवाओं के तहत ईलाज शुरू नहीं हुआ है।
जिला स्वास्थ्यय समिति मुंगेर के जिला कार्यक्रम समन्वयक विकास कुमार ने बताया कि संग्रामपुर पीएचसी के टेलीमेडिसिन हब से जुड़े डॉक्टर हसन सबा लगातार अच्छा काम कर रहे हैं। वो वह  अभी तक कुल 300 से अधिक मरीजों का ऑनलाइन ईलाज कर चुके हैं। वो वह  सप्ताह के तीनों दिन सोमवार, गुरुवार और शनिवार को निर्धारित समय 09 से 02 बजे तक लगातार वीडियो कॉन्फेंसिग के माध्यम से मरीजों को चिकित्सकीय सलाह देते हुए ईलाज कर रहे हैं। उनके पास जिले के विभिन्न प्रखंडो जैसे सदर ब्लॉक, बरियापुर, जमालपुर सहित अन्य से ईलाज के लिए ऑनलाइन कॉल आता है।
उन्होंने बताया कि राज्य स्वास्थ्यय समिति पटना से जिले के सिविल सर्जन और डीपीएम को संबोधित करते हुए कुछ निर्देश आये हैं जिसके अनुसार जिसमें  यह कहा गया है कि गुरुवार को टेली कंसल्टेशन डे है और अभी तक हम लोग 4000 हजार अंक के आंकड़ें को पाप्त नहीं कर पाए हैं. इसके लिए आवश्यक है प्रत्येक हेल्थ सब सेंटर पर कम से कम 5 कॉन्सल्टेशन अनिवार्य रूप से हो।    क्योंकि यही वह समय है जब कॉन्सल्टेशन नंबर को बढ़ाया जा सकता है। राज्य स्वास्थ्यय समिति से प्राप्त निर्देशों के अनुसार पिछले दो सेशन के दौरान ऑफिसियल लापरवाही के साथ ही इनएक्टिव लोगों के विरुद्ध शो कॉज जारी करने और उस पर करवाई करने के साथ ही उसकी सूची जारी करना  करनी है। इसके साथ ही बुधवार की शाम विभिन्न पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और प्रखंड स्वास्थ्यय प्रबंधक के साथ गुरुवार के सेशन के लिए परिचर्चा करने और इससे संबंधित फ़ोटो ग्रुप में शेयर करना है। इसके अलावे जिले में आशा कार्यकर्ता और प्रखंड सामुदायिक समन्वयक कि बड़ी संख्या होने का फायदा उठाते हुए गर्भवती और एनीमिक महिलाओं को हेल्थ सब सेंटर पर लाया जा सकता है जहां ताकि उनका एएनसी जांच के साथ ही टेली कॉन्सल्टेशन भी किया जा सके। इसके लिए कम से कम 10 महिलाओं को हेल्थ सब सेंट्रर लाने का लक्ष्य निर्धारित किया जाय होंगे। इसके साथ ही शनिवार के सेशन की तैयारी की प्लानिंग भी गुरुवार को ही कर ले कि उस दिन  प्रत्येक हेल्थ सब सेंटर पर कम से कम 10 लोगों का टेली काउन्सलिंग की जा सके।  उन्होंने बताया जिला टीम यह सुनिश्चित कर लें करेंगे कि शनिवार को सभी टेलीमेडिसिन हब एक्टिव हो हों  और वहां डॉक्टर उपलब्ध हो।हों.
उंन्होने बताया कि राज्य स्वास्थ्यय समिति से प्राप्त निर्देशों के अनुसार ई. संजीवनी टेलीमेडिसिन सर्विस में बहुत अच्छा काम करने वाले टॉप 5 जिलों को सम्मानित किया जाएगा जबकि बहुत बुरा आशानुरूप कार्य नहीं  करने वाले भी टॉप 5 जिलों से शो कॉज पूछा जाएगा।

घर-घर जाकर धातृ महिलाओं को स्तनपान और सुपोषण का महत्व समझा रही है महिला पर्यवेक्षिका अन्नू कुमारी

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– क्षेत्र भ्रमण के दौरान नवविवाहित स्त्री और गर्भवती महिलाओं को खानपान में पोषक तत्वों से युक्त भोजन करने की देती है सलाह
– बड़हिया नगर पंचायत के जैतपुर आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 42 पर शारीरिक रूप से कमजोर नवजात बच्ची को चिह्नित कर सदर अस्पताल स्थित एसएनसीयू में कराया भर्ती

लखीसराय, 17 मार्च | जिले के बड़हिया नगर पंचायत क्षेत्र की महिला पर्यवेक्षिका अन्नू कुमारी लगातार अपने क्षेत्र में भ्रमण कर नवविवाहित महिला और गर्भवती महिलाओं को अपने शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए पोषक तत्वों से युक्त भोजन जैसे हरी साग- सब्जी, दाल, मौसमी फल, दूध, मांस- मछली और अंडा खाने की सलाह देती है। वो इन महिलाओं को समझाती है कि पोषक तत्वों से युक्त भोजन लेने से उनमें खून की कमी या एनीमिया नहीं होगी और खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा भी पर्याप्त रहेगी| ताकि आने वाले दिनों में उन्हें किसी प्रकार की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े। इसके साथ ही वो घर- घर जाकर धातृ महिलाओं से मिलकर उन्हें अपने अपने बच्चे को कम से कम छह महीने तक स्तनपान कराने और उसके बाद ही स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार के रूप में हल्का खाना खिलाने के लिए प्रेरित करती हैं। इन माताओं को अपने शरीर को भी पूरी तरह से स्वस्थ्य रखने के लिए पोषक तत्वों से युक्त खाना खाने के लिए जागरूक करती हैं ताकि वो और उनके बच्चे में कुपोषण कि कोई शिकायत न हो।
कुपोषण से बचने के लिए पौष्टिक आहार लेने के लिए समझाती हैं
महिला पर्यवेक्षिका अन्नू कुमारी ने बताया कि घर- घर जाकर महिलाओं को स्तनपान और कुपोषण से बचने के लिए पौष्टिक आहार लेने के लिए समझाने के दौरान उन्हें कुछ परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है| कुछ महिलाएं समझती हैं और कुछ सुनकर भी ध्यान नहीं देती हैं । बावजूद इसके वो बार- बार इन महिलाओं के घर जाकर उन्हें इन सब के प्रति जागरूक करने के लिए लगातार काम कर रही हैं बताया कि महिलाओं से अपने आसपास की महिलाओं को स्तनपान और पोषक आहार के बारे में बताने की भी अपील करती हैं ताकि कोई भी महिला और उसका बच्चा कुपोषण का शिकार न हो जाये।
कुपोषण की शिकार नवजात बच्ची को बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल के एसएनसीयू में कराया भर्ती :
महिला पर्यवेक्षिका अन्नू कुमारी ने बताया कि बड़हिया नगर पंचायत के अनुसूचित जाति सामुदायिक भवन स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 42 पर भ्रमण के दौरान मैंने देखा कि पिंटू पासवान और सोनी देवी की 0 से 01 दिन की नवजात बच्ची जिसका वजन मात्र 1किलो 700 ग्राम था गंभीर रूप से कुपोषण की शिकार थी। उसकी मां भी शारीरिक रूप से बहुत कमजोर थी। मैने बच्ची की माँ- बाप को बच्ची को बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल लखीसराय स्थित स्पेशल न्यूबोर्न केयर यूनिट में भर्ती कराने की सलाह दी और साथ लेकर एसएनसीयू में भर्ती करवाये । यहां 14 दिनों तक इलाज होने के बाद बच्ची स्वस्थ्य हुई और उसका वजन भी 2 किलो से ऊपर हो गया। इसके बाद मैने बच्ची की मां को भी खुद को स्वस्थ्य रखने के लिए भोजन में पोषक तत्वों से युक्त आहार लेने की सलाह दी| ताकि वो और उसकी बच्ची दोनों स्वस्थ्य और कुपोषण से मुक्त रह सके।

बड़हिया नगर पंचायत के आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 89 पर कुपोषण की शिकार डेढ़ साल की बच्ची को चिह्नित कर एनआरसी में कराया भर्ती :
उन्होंने ताया कि नगर पंचायत बड़हिया के वार्ड 13 स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 89 पर भ्रमण के दौरान अरविंद शाव और जुली कुमारी की डेढ़ वर्षीय बच्ची सोनम कुमारी कुपोषण की शिकार दिखी । फिर मैंने बच्ची के मां- बाप से बातकर उसे कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए सदर अस्पताल लखीसराय स्थित पोषण एवं पुनर्वास केंद्र ( एनआरसी) में भर्ती कराने की सलाह दी | साथ ही उसे अपने साथ लेकर एनआरसी में भर्ती करवाया। वहां कुछ दिनों तक नियमित खानपान और इलाज के बाद बच्ची कुपोषण की समस्या से मुक्त हुई और उसके वज़न में भी सुधार हुआ।