Bihar news: आजकल देश में खुदखुशी करने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा हैं आय दिन नए- नए आत्महत्या के मामले सामने आ रहें हैं जिसे सुन कर हमरे रोंगटे खड़े हो जा रहें हैं। हालाँकि आर्थिक तंगी मुख्य रूप से आत्महत्या का कारण बन रहा हैं। जनता के ऊपर महंगाई का मार और घर का खर्च ऐसे तमाम जिम्मेदारियों से मुक्त होने के लिए लोगो को आत्महत्या करने का रास्ता अपनाना पड़ रहा हैं.
एक ही परिवार के पांच सदस्यों ने खुदकुशी कर ली
अब ऐसे में फिर एक ख़बर ऐसी आई जिसे सुन कर हैरानी बढ़ गई हैं लेकिन यह हैरान कर देने वाली ख़बर बिहार के सुपौल जिले से आई हैं। दरअसल, यहां रहने वाले एक ही परिवार के पांच सदस्यों ने संदिग्ध हालात में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। पुलिस का कहना है कि घटना शुक्रवार देर रात हुई। जानकारी के मुताबिक 50 वर्षीय मिश्री लाल साह के घर से पड़ोसियों को बहुत तेज गंध आ रही थी और कई दिनों से इनके परिवार के कोई सदस्य घर के बहार भी नहीं दिखाई दे रहें थे।
पुलिस मामले की जांच में जुटी
कमरे से बदबू आने पर परिजनों ने कमरे का दरवाजा खटखटाया। लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। फिर आस-पास के लोगों के साथ मिल उन्होंने दरवाजा खुलवाने की कोशिश की। हालांकि रिस्पॉन्स नहीं आने पर पुलिस को फोन किया गया। जिसके बाद पुलिस के आने पर कमरे का गेट तोड़ा गया। अंदर का हाल देखकर हर कोई सन्न रह गया। वहीं, इस बात की सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक की टीम ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल की जांच की। गांव वालों की माने तो परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले शनिवार तक इस परिवार के लोगों को देखा गया था, लेकिन उसके बाद से लोगों ने घर के किसी सदस्य को नहीं देखा। मिश्री लाल के एक पड़ोसी ने बताया कि आर्थिक तंगी की वजह से गुजर बसर करने के लिए मिश्री लाल ने अपनी पुश्तैनी जमीन बेच दी थी। इनका परिवार कई सालों से परेशान था और धीरे-धीरे गांव के लोगों से दूरी भी बना लिया था।
आर्थिक तंगी मानी जा रही वजह
पांच लोगों की एक साथ आत्महत्या की खबर से इलाके में दहशत का माहौल है। पड़ोसियों ने आशंका जताई है कि आर्थिक तंगी से परेशान चल रहे परिवार ने आत्महत्या कर ली है। हालांकि, जांच के बाद ही सही खुलासा हो सकेगा।
New delhi: प्रत्येक व्यक्ति को बैंक से जुड़ी ख़बरे जानना और पढ़ना आवश्यक होता हैं कोई भी कारोबारी सबसे पहले बैंक से जुड़ी जानकारी एकत्रित करना जरुरी समझता हैं या फिर हम आदमी की बात करें तो हर किसी का बैंक खातों से जुड़ी काम आय दिन होते रहते हैं तो यदि आपको बैंक से कोई भी जरुरी काम होतो सावधान हो जाएं यह जानना आपके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अगले चार दिनों तक बैंक बंद रहेंगे यदि आपकी कोई काम बैंक से जुड़ी होतो चार दिनों तक आप नहीं कर सकते हैं।
बैंकिंग कार्य शेष है तो उसे आज ही पूरा कर लें
13 मार्च यानी कल से से लगातार चार दिन बैंक बंद रहेंगे। 13 मार्च को माह का दूसरा शनिवार है और 14 मार्च को रविवार है, इसलिए इन दिनों सभी राज्यों में बैंक बंद रहेंगे। इसके बाद 15 और 16 मार्च 2021 को देश के सरकारी और ग्रामीण बैंकों की हड़ताल है। इसलिए अगर आपका कोई बैंकिंग कार्य शेष है तो उसे आज ही पूरा कर लें।
महाशिवरात्रि के अवसर पर इन जगहों पर बैंक रहें बंद
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की वेबसाइट के अनुसार, आज 11 मार्च को महाशिवरात्रि के अवसर पर भी अगरतला, आईजॉल, इंफाल, कोलकाता, गैंगटॉक, गुवाहाटी, चेन्नई, नई दिल्ली, पटना, पणजी और शिलांग के अतिरिक्त सभी राज्यों में बैंक बंद थे। इससे जुड़ी अन्य जानकारी आपको भारतीय रिजर्व बैंक ( आरबीआई ) की वेबसाइट पर मिल जाएगी।
जानिए किस लिए की गई हड़ताल की घोषणा
बैंकों के निजीकरण के विरोध में बैंक यूनियनों ने 15 और 16 मार्च को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। फोरम ने सरकारी क्षेत्र के दो बैंकों के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में यह हड़ताल बुलाई है। इस साल बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण का ऐलान किया था। केंद्र सरकार साल 2019 में पहले ही एलआईसी में आईडीबीआई बैंक का अधिकांश हिस्सा बेच चुकी है। इसके साथ ही पिछले चार सालों में 14 सार्वजनिक बैंकों का विलय हुआ है।
नौ बड़े यूनियन शामिल हुआ यूएफबीयू में
यूएफबीयू के सदस्यों में ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉयज एसोसिशन (एआईबीईए), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन (एआईबीओसी), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ बैंक एम्प्लॉयज (एनसीबीई), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (एआईबीओए) और बैंक एम्प्लॉयज कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीईएफआई) शामिल हैं। इसके अलावा इंडियन नेशनल बैंक एम्प्लॉयज फेडरेशन (आईएनबीईएफ), इंडियन नेशनल बैंक ऑफिसर्स कांग्रेस (आईएनबीओसी), नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स (एनओबीडब्ल्यू) और नेशनल आर्गनाइजेशन ऑफ बैंक ऑफिसर्स (एनओबीओ) शामिल हैं।
New delhi: पिछले कई महीनों से कोरोन वायरस की बढ़ती हुई रफ़्तार पर पूर्ण रूप से तो नहीं लेकिन काफी हद तक कोरोना के मामले बेहद कम आ रहें थे लेकिन अब देखते ही देखते देश में एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पैर पसर रहा हैं कोरोना का यह बढ़ता मामला बेहद चिंताजनक हैं और इसे पहले फैले कोरोना वायरस के मामलों से कोरोना का यह फेज़ और अधिक शक्तिशाली होने वाला हैं ऐसा विशेषज्ञों का अनुमान हैं।
फिर एक बार लौटा कोरोना वायरस, इसबार और अधिक शक्तिशाली
देश में कोरोना के मामले लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं। पिछले 24 घंटों के दौरान इस साल कोरोना के सार्वधिक 22,854 मामले सामने आए है । पिछले कुछ दोनों से पंजाब और महाराष्ट्र में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर के लिए भी स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि गुरुवार को राजधानी में 409 नए केस सामने आए हैं। लगभग दो महीनों में एक दिन में आए सबसे ज्यादा मामले हैं।
विशेषज्ञों ने बढ़ते कोरोना के मामलो पर जताया चिंता
इन बढ़ते मामलों ने जानकारों के मन में सवाल पैदा कर दिया है क्या देश में कोरोना की दूसरी लहर शुरू हो चुकी है। इस तरह कोरोना के बढ़ते मामलों से कई सवाल सामने आकर खड़े हो रहे हैं। पहले मामले में तेजी हल्की गति से हो रही थी। मामलों में तेजी एक ऐसे समय में हो रही है, जब कई आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों पर प्रतिबंधों में ढील दी गई। यहां चिंता करने वाली बात यह है कि पश्चिमी देशों में कोरोना वायरस की कई लहरें देखी गईं लेकिन दूसरी लहर, पहली लहर से ज्यादा खतरनाक रही।
पंजाब बना कोरोना का केंद्र
किसान आंदोलन का केंद्र रहे पंजाब में 27 जनवरी वाले हफ्ते के अंत तक कोरोना के 181 दैनिक मामले आते थे। लेकिन फरवरी के पहले हफ्ते से मामले धीरे-धीरे बढ़ते रहे, जिसके बाद अचानक से मामलों का सात दिवसीय औसत बढ़ गया। सकारात्मकता दर का बढ़ना इसलिए चिंता की बात है क्योंकि जानकारों का मानना है कि ये दर मामलों में बढ़ोतरी को बताती है। ये दर्शाता है कि सामान्य लोगों में सिर्फ मामले बढ़ नहीं रहे हैं बल्कि तेज गति से फैल भी रहे हैं।
New delhi: सिनेमा जगत के कई ऐसे सितारें हैं जो फ़िल्मी दुनिया के इंडस्ट्री में अपना परफॉर्मेंस बेहतरीन करने के वजह से तो मशहूर हैं ही साथ ही अपना नेक और दरिया दिल के कारण आज दुनिया भर के करोड़ो लोगो के दिलों में अपना घर बना चुके हैं। तो वही कई ऐसे भी अभिनेता हैं जिनकी पाँव जमीन भी नहीं पड़ती वह अपनी पैर गाड़ी से नीचे रखने पर भी कतराते हैं तो वही कई सितारे हैं जो ख़ुद आगे बढ़ कर जरूरतमंदों का सहारा बनते हैं। उन्ही में शामिल एक नाम हैं सोनू सूद।
सामाजिक सेवा में उतरे सोनू सूद
सीधे शब्दों में यूँ कहें की भगवन के रूप में इस धरती पर एक मसीहा बन कर उतरें हैं सोनू सूद। सोनू सूद पिछले कुछ समय से सामाजिक सेवा में उतरते नजर आ रहे हैं। सोनू सूद कोरोना कल से ही बड़े ही शिद्दत से लोगों की मद्दद करने में लगे हुए हैं। इस अभिनेता का गुणगान हर एक जरूरतमंद के जुबान पर हैं। बता दें कि अभिनेता सोनू सूद कोरोना काल के समय लगे लॉकडाउन से काफी सक्रिय हैं। इस दौरान असहाय लोगों को होने वाली परेशानियों के बीच सोनू ने उनकी मदद की थी। फिर चाहे वो बसें मंगवाकर प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजवाना हो या फिर राशन-पानी की व्यवस्था करनी हो।
जरूरतमंदों के मसीहा कहलाने वाले बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद
सोनू सभी मुश्किल परिस्तिथियों में उनके लिए आगे आए थे। इसके अलावा अन्य जगहों से आने वाली मदद की गुहार पर भी उन्होंने ध्यान दिया। तब से अब तक वह लगातार ऐसे लोगों की सहायता करते आ रहे हैं। इस समय जरूरतमंदों के मसीहा कहलाने वाले बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद आजकल काफी चर्चा में हैं। वह कभी किसी की मदद कर तो कभी सोशल मीडिया पर अपने विचार साझा कर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। हालांकि महाशिवरात्रि पर कुछ लोगों ने उन्हें ट्रोल भी किया था।
सोनू सूद-‘ईश्वर चित्र में नहीं चरित्र में बसता है, अपनी आत्मा को मंदिर बनाओ !!
अब उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट से एक बार फिर एक वैचारिक पोस्ट साझा किया है, जिसके जरिए वो फैंस को खास संदेश दे रहे हैं। यूजर्स इसपर खूब प्रतिक्रिया दे रहे हैं और उनकी तारीफ भी कर रहे हैं। कई फिल्मों में अपने शानदार अभिनय का लोहा मनवाने वाले बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद अब मानवता का संदेश दे रहे हैं। उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर अपने विचार साझा कर लिखा ‘ईश्वर चित्र में नहीं चरित्र में बसता है, अपनी आत्मा को मंदिर बनाओ !! हर हर महादेव।’ सोनू सूद के इस ट्वीट पर तमाम तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। इनमें ज्यादातर लोग उनकी प्रशंसा में ट्वीट कर रहे हैं। उनके फैंस खूब प्यार दे रहे हैं। वहीं कुछ मजेदार कमेंट भी देखने को मिले, जिसमें लव मैरिज करवाने के लिए सोनू से मदद मांगी गई।
सोनू सूद से फैंस करते हैं सोशल मिडिया वार्तालाप
सोनू सूद एक ऐसे अभिनेता हैं जिनसे उनके फैंस सोशल मिडिया के जरिए बात-चीत करते हैं और उनसे जुड़े हुए हैं, समय-समय पर वह सभी उनसे मदद मांगते हैं और सोनू सूद आगे आकर उनकी मदद भी करते हैं। हालांकि कुछ लोगों का यह भी मानना है कि सोनू अपनी राजनीतिक पृष्ठभूमि तैयार करने की योजना बना रहे हैं। इसलिए वह अभी से व्यापक तौर पर लोगों पर पकड़ बनाकर अपनी जमीन तैयार कर रहे हैं, लेकिन यह कितना सही है ये तो सिर्फ सोनू ही जानते हैं।
New delhi: पश्चिम बंगाल में एक के बाद नया सियासी ड्रामा देखने को मिल पर हैं। ख़ास कर बंगाल की दीदी सत्ता पर काबिज़ होने के लिए आय दिन अपना ट्रंप खोल रहीं हैं ऐसे में एक बार उन्होंने जनता का सहानभूति के लिए ऐसा गेम खेला हैं जिसके बाद पश्चिम बंगाल की राजनीती में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता हैं। नंदीग्राम के बिरुलिया गांव में चुनाव प्रचार के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ऊपर हमला हुआ इस हमले के दौरान ममता घायल हो गई। ममता बनर्जी ने अपने घायल होने के पीछे भाजपा का बड़ा साजिश बताया हैं उन्होंने आरोप लगाया हैं की साजिश के तहत उन्हें चोट पहुंचाई गई हैं।
बंगाल की दीदी ने रची साजिश
हालाँकि ममता के इस आरोप ने पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल को औऱ गर्म कर दिया है। इस हमले को जहां विपक्ष ममता के द्वारा किया गया नाटक बता रहा है तो वहीं ममता को समर्थकों की पूरी सहानुभूति भी मिल रही है। आपको बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ हैं जब चुनाव का माहौल हो और ममता घायल हुई हो। ममता का हमलों से नाता बेहद पुराना है। इसे पहले भी ममता बनर्जी के ऊपर तीन बार हमला हो चुका हैं और उन तीन हमलों के बाद ममता बनर्जी गलियों की राजनीति से सत्ता के शीर्ष पर आ खड़ी हो गई हैं और टीएमसी पार्टी का प्रमुख गई।
तीन साजिश और पश्चिम बंगाल का कमान ममता के हाथ
ममता ने 1980 और 1990 के दशक में युवा कांग्रेस नेता के रूप में सत्तारूढ़ मार्क्सवादियों के खिलाफ सड़क से परिवर्तन की लड़ाई शुरू की फिर पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य की औद्योगिक नीतियों के खिलाफ उनके संघर्ष ने उन्हें तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख के रूप में खड़ा कर दिया। इस दौरान भी उन्होंने विरोधियों पर ‘शारीरिक हमले’ का आरोप लगाया था। इन्हीं हमलों से उनके राजनीति करियर को बल मिला और वह बंंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो बनीं।
पहला हमला: 16 अगस्त, 1990 में
जब ममता बनर्जी 16 अगस्त, 1990 को दक्षिण कोलकाता के हाजरा में एक युवा कांग्रेस आंदोलन का नेतृत्व करने वाली थीं, उस समय बंगाल में माकपा के युवा कार्यकर्ता लालू आलम द्वारा उन पर हमले की खबर से हड़कंप मच गया था। उस समय ममता के सिर पर पट्टी बंधी हुई तस्वीर अखबारों में आई थी, और खबर बनी थी कि इस तरह के हमले से ममता को अपंग करने या उनकी हत्या करने की साजिश रची गई है। इस खबर और ममता की तस्वीर ने उस समय अखबारों की बिक्री में तेजी ला दी थी। इसके बाद 1984 में जादवपुर लोकसभा चुनाव में सीपीआई (एम) के दिग्गज नेता सोमनाथ चटर्जी को हराकर ममता बनर्जी पहली बार राष्ट्रीय राजनीति में आईं। और राजीव गांधी की युवा नेताओं की टीम के सदस्य के रूप में राष्ट्रीय राजनीति की शुरुआत की।
दूसरा हमला: अक्तूबर 1998 में
ममता बनर्जी पर फिर एक बार हमले की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई। उस वक्त कोलकाता की एक अदालत के एक आदेश पर दक्षिण कोलकाता के गोलपार्क में बेदी भवन की जमीन पर बसे लगभग 70 परिवारों को बाहर निकालने के जब एक विशाल पुलिस बल वहां पहुंचा था, तो वहां उन्होंने बनर्जी और उनके समर्थकों को पाया। ममता ने पुलिस से कहा कि अदालत का जो आदेश है उसके बारे में वह वहां बसे लोगों को बताएं, इस पर पुलिस से उनकी झड़प हो गई।इसके बाद ममता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान उन्हें किसी ने दांत से काटा और उनकी साड़ी फाड़ दी। इस आरोप के ठीक एक घंटे के भीतर, बंगाल के दूरदराज के हिस्सों में लोगों ने अफवाहें सुनीं कि ममता पुलिस के साथ झड़प में मारी गईं। इसके बाद रेलवे ट्रैक और राष्ट्रीय राजमार्ग घंटों तक अवरुद्ध रहे। कई जगहों पर तोड़फोड़ हुई, भाजपा कार्यकर्ता, जो उस समय टीएमसी के सहयोगी थे, उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया।
तीसरा हमला 30 नवंबर 2006 में
तीसरी घटना कुछ ऐसी हुई जो बंगाल विधानसभा पर एक दाग छोड़ गई, 30 नवंबर 2006 को हुई। बनर्जी, तब सांसद थीं और उन्होंने लेफ्ट फ्रंट सरकार द्वारा किसानों के 990 एकड़ खेत को टाटा मोटर्स को सौंपने के फैसले के विरोध में कोलकाता से हुगली जिले के सिंगूर तक पैदल मार्च निकाला था। इस दौरान राजमार्ग पर जब पुलिस द्वारा कथित तौर से उन्हें रोका गया था, तो वह कोलकाता लौट आई थीं और सीधे विधानसभा भवन के लिए रवाना हुई थीं।
बनर्जी ने टीएमसी विधायकों के सामने आरोप लगाया था कि उनके साथ कुछ पुलिसकर्मियों ने मारपीट की। इसके बाद टीएमसी विधायकों ने विधानसभा में तोड़फोड़ की थी। टीएमसी कार्यकर्ताओं ने यातायात को अवरुद्ध और दुकानों को बंद करवा दिया। उसके बाद उनकी पार्टी ने 12 घंटे तक बंगाल बंद का आह्वान किया था।
New delhi: रमेश पोखरियाल निशांक कि बेटी आरुषी निशांक अपना कदम फिल्मी दुनिया की तरफ बढ़ा रहीं हैं. आरुषी निशांक अपने खूबसूरती को लेकर सुर्खियों में हमेशा बनी रहती हैं रमेश पोखरियाल निशंक की बेटी आरुषि निशंक फिल्मी करियर शुरू करने जा रही हैं इसकी घोषणा आरुषी ने अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर की. आरुषी जिस फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू करने वाली हैं वह फिल्म नेवी की छह जांबाज महिला अफसरों की कहानी पर आधारित हैं.
तारिणी’ से बॉलिवुड डेब्यू करेंगी आरुषी
‘तारिणी’ दुनिया के समुद्री सफर पर निकलीं नेवी की छह जांबाज महिला अफसरों की कहानी पर अधारित यह फिल्म जल्द ही पर्दें पर रिलिज़ किया जाएगा और तारिणी फिल्म से बॉलीवुड में एंट्री करेंगी रमेश पोखरियाल निशांक कि बेटी आरुषी निशांक. बता दें छह जांबाज महिला अफसरों को इस अभियान को पूरा करने में लगभग 254 दिनों का समय लगा था. तारिणी फिल्म बनाने की घोषणा के बाद से लोगों की बेचैनी बढ़ रहीं थी कि आखिर इस फिल्म की पूरी कहानी क्या हैं?
उत्तराखंड की वादियों को पर्दों पर समेटेने आ रहीं आरुषी
उत्तराखंड के कोटद्वार में 17 सितंबर 1986 को आरुषी का जन्म हुआ. साल 2018 में आरुषि ने इससे पहले एक क्षेत्रीय फिल्म ‘मेजर निराला’ भी प्रड्यूस की थी. यह फिल्म उनके पिता रमेश पोखरियाल के उपन्यास पर आधारित है. आरुषी ने कैम्ब्रिज अस्सेसमेंट इंटरनेशनल एजुकेशन से पोस्ट ग्रेजुएशन में डिप्लोमा किया है. साल 2017 में आरुषी को ‘प्राइड ऑफ उत्तराखंड’ सम्मान भी मिला.
बिरजू महाराज से सीखा है डांस
बचपन से ही आरुषी को नृत्य का शौक रहा है। उन्होंने बिरजू महाराज से क्लासिकल डांस की ट्रेनिंग ली है। आरुषी कोरियोग्राफी भी करती हैं। उन्होंने ‘गंगा अवतरण’ पर एक डांस कोरियोग्राफ भी किया है। वह फिलहाल हिमालयन आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज ऐंड हॉस्पिटल, देहरादून की चेयरमैन हैं।
-सही पोषण तो देश रौशन’ को अपना मूलमंत्र बनाया है
– तारापुर अनुमंडल के रणगांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 51 पर तीन दशक से सही पोषण के लिए लोगों को जागरूक कर रही है आंगनबाड़ी सेविका कुंदन बाला
– अपने आंगनबाड़ी क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं, प्रसूति महिलाओं और धातृ महिलाओं को सही पोषण के लिए प्रेरित करती हैं सेविका
मुंगेर-
आंगनबाड़ी सेविका कुन्दन बाला ‘सही पोषण तो देश रौशन’ को अपना मूलमंत्र बनाकर लोगों को सही पोषण लेने के लिए जागरूक कर रही हैं । जिले के तारापुर अनुमंडल क्षेत्र अंतर्गत रणगांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 51 पर पिछले तीन दशक से वह काम कर रही है |
पूरी मेडिकल हिस्ट्री नोट करने के बाद बीपी, हीमोग्लोबिन, एचआईवी सहित अन्य आवश्यक जांच करवाती-
उन्होंने बताया कि वो तारापुर के रण गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 51 क्षेत्र में किसी महिला के गर्भवती होने की सूचना मिलने के बाद सबसे पहले महिला का नाम, पता के साथ उसकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री नोट करने के बाद बीपी, हीमोग्लोबिन, एचआईवी सहित अन्य आवश्यक जांच करवाती हैं । इसके साथ ही गर्भवती महिला में खून की कमी होने की स्थिति में आयरन और कैल्सियम की गोली खाने के साथ आहार के रूप में हरी साग- सब्जी, फल, प्रोटीन युक्त अनाज के साथ ही मांस- मछ्ली और अंडा खाने की सलाह देती हैं। इसके साथ प्रसव से पूर्व स्थानीय अस्पताल में चार बार एएनसी जांच करवाने की सलाह देती हैं। वह गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित संस्थागत प्रसव के लिए नजदीकी अस्पताल में प्रसव कराने , प्रसव के बाद प्रसूति महिला को बच्चे के जन्म के एक घंटा के अंदर गाढ़ा पीला दूध ‘कोलेस्ट्रम’ पिलाने, कम से कम छह महीने तक सिर्फ और सिर्फ स्तनपान कराने की सलाह देती हैं । इसके साथ ही बच्चे के छह महीने के होने के बाद अन्नप्राशन संस्कार के जरिये माताओं को स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार के रूप में कैलोरी की पूर्ति के लिए सूजी का हलवा, सेब का मिक्स किया हुआ आहार देने की सलाह देती हैं ।
तारापुर के रणगांव निवासी अंबुज पांडा और उनकी पत्नी रीमा देवी ने बताया कि आंगनबाड़ी सेविका कुंदन बाला मेरे दोनों बच्चों के जन्म के दौरान और उसके बाद भी लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं । उनकी सलाह को मानने की वजह से ही मेरा छोटा सा परिवार सुखी और स्वस्थ्य है। रीमा देवी ने बताया कि सन 2014 में मैने पहली बार गर्भधारण किया था तब आंगनबाड़ी सेविका ने अपनी देखरेख में मेरा रजिस्ट्रेशन कराने के साथ ही अन्य आवश्यक जांच और अनुमंडल अस्पताल तारापुर में चार बार एएनसी जांच करवायी थी इसके साथ ही उन्होंने गर्भवस्था के दौरान आयरन- कैल्सियम की गोली खाने के साथ ही खाने में हरी पत्ती दार सब्जी, दाल , फल, मौसमी फल और मांस- मछली और अंडा खाने की सलाह दी। उनके द्वारा बताए गए सभी महत्वपूर्ण सलाह को उसी रूप में मानने का परिणाम हुआ कि मेरा बच्चा जो लड़का है बिल्कुल स्वस्थ पैदा हुआ। इसके बाद उन्होंने नवजात बच्चे को जन्म के एक घंटे के अंदर अपना दूध पिलाने के साथ ही अगले छह महीने तक सिर्फ और सिर्फ अपना स्तनपान कराने की सलाह दी। इसके बाद छह महीने की अवधि पूरा होने के बाद उन्होंने स्तनपान के साथ बच्चे को अनुपूरक आहार के रूप में हल्का सुपाच्य कैलोरी युक्त खाना खिलाने की सलाह दी। सलाह पर अमल का ही परिणाम है कि मेरा बेटा और मैं बिल्कुल स्वस्थ्य हूँ। बताया कि पहले बच्चे के जन्म के बाद ही सेविका दीदी ने मुझे अपने परिवार को सुखी सम्पन्न बनाने के लिए और दो बच्चों में सही अन्तर रखने के लिए परिवार नियोजन के अस्थाई साधन अपनाने की सलाह दी । सलाह मानने के कारण ही लगभग पांच वर्ष के बाद मैंने अपने दूसरे बच्चे के रूप में अनुमंडल अस्पताल तारापुर में 2 अक्टूबर 2019 को वैष्णवी को जन्म दिया है। अपने दूसरे बच्चे के जन्म के दौरान भी मैने सेविका दीदी की सलाह के अनुसार सभी सावधानी और निर्देशों का पालन किया। इसका परिणाम यह हुआ कि मैंने बिल्कुल स्वस्थ बेटी को जन्म दिया । जन्म के वक्त मेरी बेटी का वजन 3 किलो था। इसके बाद मैंने सेविका दीदी की सलाह के अनुसार छह महीने तक सिर्फ और सिर्फ अपना दूध पिलाया और उसके बाद अपने दूध के साथ अनुपूरक आहार भी देना शुरू कर दिया। इसके बाद महसूस किया कि मेरी बच्ची का वजन उसके उम्र के अनुसार नहीं बढ़ पा रहा है तो मैंने इस सम्बंध में सेविका दीदी से सलाह ली तो उन्होंने बच्ची को सही देखभाल के लिए मुंगेर स्थित पोषण और पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने की सलाह दी। इसके बाद सेविका दीदी ने अपने साथ लेकर मेरी बच्ची को 19 जनवरी को पोषण पुनर्वास केंद्र मुंगेर में भर्ती करवाई| उस समय मेरी बच्ची का वजन 7.100 किलोग्राम था। वहां 18 दिन रखने के बाद 05 फरवरी को डिस्चार्ज कर दिया गया। डिस्चार्ज के वक्त मेरी बच्ची का वजन 7.925 किलोग्राम था।
पोषण एवं पुनर्वास केंद्र मुंगेर की फीडिंग डिमांस्ट्रेटर रचना भारती ने बताया कि ‘सही पोषण तो देश रोशन’ के लिए आवश्यक है कि गर्भधारण के साथ ही गर्भवती महिला के पोषण पर ध्यान देने की अवश्यकता है ताकि महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे को भी सही पोषण मिल सके। ताया कि बच्चे के जन्म के एक घंटा के अंदर बच्चे को मां का गाढ़ा पीला दूध कोलेस्ट्रम अवश्य पिलाना चाहिए और जन्म के छह महीने तक बच्चे को सिर्फ और सिर्फ स्तनपान ही कराना चाहिए। उन्होंने बताया कि मां के दूध में 80 प्रतिशत पानी के अलावे सभी आवश्यक तत्व मौजूद रहते हैं जो छह महीने के शिशु के लिए आवश्यक होता है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि छह महीने के बाद बच्चे को मां के स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार के रूप में पाउडर के रूप में कैलोरी से युक्त सही मात्रा में गुनवतापूर्ण आहार देना आवश्यक है।
दिल्ली-
अंतराष्ट्रीय महिला दिवस 2021 की संध्या पर ईबीएस इंडिया इंक द्वारा स्वावलम्बिका सम्मान 2021 समारोह दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित किया गया। स्वावलम्बिका सम्मान 2021 को ईबीएस इंडिया इंक द्वारा पहली बार आयोजित किया गया जिसमे देश के विभिन्न राज्यों से प्रतिष्ठित महिलाओं ने हिस्सा लिया। इस समारोह में 600 से भी ज्यादा महिलाओं ने आवेदन किया जिसमे सर्वश्रेष्ठ 35 महिलाओं को उनके छेत्र में बेहतरीन कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।
ईबीएस इंडिया इंक की संस्थापक छवि हेमंत ने स्वावलम्बिका सम्मान 2021 का आयोजन किया। छवि हेमंत महिलाओं के उत्थान वा मानसिक स्वास्थ्य पर निरंतर कार्य कर रही हैं।
इस आयोजन में मुख्य अतिथि दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष श्री रामनिवास गोयल जी, विशिष्ठ अतिथि आईपीएस डॉ संजीब पटजोशी, विशिष्ठ अतिथि आईपीएस डॉ वीरेन्द्र मिश्रा, अतिथि सीए श्री दीन दयाल अग्रवाल, अतिथि श्री अरविंद अग्रवाल, जूरी डॉ जितेन्द्र नागपाल, श्रीमती छवि हेमंत, श्री हेमंत डीपी, श्रीमती प्राची निकोल्सन, लक्ष्या निकोल्सन, रीना मेहरा, श्री मनोज जोशी ने संयुक्त रूप में महिलाओं को सम्मानित किया।
सम्मानित महिलाओं में निर्भया कांड में मुख्य वकील रहीं सीमा समृद्धि कुशवाहा, पद्मश्री देवयानी कुमारी, फिल्म डायरेक्टर प्रीति सिंह, श्वेता पाठक, नीलिमा कामदार, भावना चौधरी, निवेदिता लूणिआ, लिज़ा वर्मा, पूजा दीवान, कविता पारवानी, रेणुका धर, अर्चना गुप्ता, चांदना राउल, भारती दुग्गड़, मृदुला टंडन, रचना बत्रा, सरिता शर्मा, वर्षा मालिक, प्रीतिका कालरा, माला शंकर, दास, समीरा जालान तथा अन्य श्रेष्ठ महिलाओं को सम्मानित किया।
शाहकुंड प्रखंड के दीनदयालपुर के भट्टा गांव के मांझी टोला में कर रही काम
कालाजार उन्मूलन में स्वास्थ्य विभाग के अभियान में कर रही सहयोग
भागलपुर, 10 मार्च
जिले को कालाजार मुक्त करने में स्वास्थ्य विभाग लगा हुआ है. इसे लेकर अभी सिंथेटिक पायराथायराइड का छिड़काव भी चल रहा है. छिड़कावकर्मी गांव-गांव जाकर इस अभियान में लगे हुए हैं. इससे कालाजार के नए मरीज सामने नहीं आएंगे, लेकिन जिसे कालाजार हो गया है उसका इलाज करना भी बेहद जरूरी है. कालाजार उन्मूलन के लिए दोनों ही चीजें जरूरी हैं. एक तरफ जो पीड़ित हो गया है, उसको स्वस्थ करना. दूसरा छिड़काव कर कालाजार के नए मरीज बनने से रोकना. ऐसे में शाहकुंड प्रखंड के दीनदयालपुर के भट्टा के मांझीटोला की रहने वाली आशा कार्यकर्ता रूबी कुमारी कालाजार के मरीजों को खोजने और उसका इलाज कराने में स्वास्थ्य विभाग को भरपूर सहयोग कर रही हैं. अभी तक रूबी कुमारी ने 8 मरीजों की पहचान करवाई है, जिसका इलाज चल रहा है. इनमें से कई स्वस्थ भी हो चुके हैं.
क्षेत्र में सबसे अधिक कालाजार के मरीज की पहचान की है रूबी ने
रूबी कुमारी कहती हैं कि जब मैं अपने क्षेत्र में घूमती हूं तो लोगों से सभी बीमारी के बारे में बात करती हूं. अगर कोई बीमार है तो उससे लक्षण के बारे में पूछती हूं और अस्पताल ले जाकर उसकी जांच करवाती हूं. हालांकि लोग सार्वजनिक तरीके से बीमारी का इलाज कराना पसंद नहीं करते हैं. इस वजह से कई लोग इलाज कराने में देरी कर देते हैं. मैं ऐसे लोगों को चिह्नित कर और उसे मनाकर इलाज के लिए अस्पताल ले जाती हूं. काम करते- करते इतना अनुभव हो गया है कि किसे कौन सी बीमारी है और किस डॉक्टर के पास ले जाना है, इसे समझ लेती हूं. मैंने अपने क्षेत्र में सबसे अधिक कालाजार के मरीज की पहचान की है.
लोगों से बीमारी का लक्षण पूछकर ले जाती है अस्पताल: रूबी कुमारी से जब यह पूछा गया कि आप कालाजार के मरीज की पहचान कैसे करती हैं तो उन्होंने कहा कि मरीजों से मैं पूछती हूं. जैसे किसी ने बताया कि मुझे बुखार है तो मैं फिर पूछती हूं कितने दिनों से है. अगर वह व्यक्ति बताता है कि 15 दिनों से तो उससे और लक्षण के बारे में भी पूछती हूं. अगर वह व्यक्ति भूख नहीं लगना, पेट बड़ा हो जाना, रंग पर असर पड़ना इत्यादि लक्षणों के बारे में बताता है तो मुझे आशंका हो जाती है कि इसे कालाजार हुआ है. फिर मैं उसे अस्पताल ले जाती हूं और उसका जांच करवाती हूं. अगर जांच में कालाजार की पुष्टि होती है फिर उस व्यक्ति का इलाज शुरू हो जाता है.
15 साल से कर रही है काम: रूबी कुमारी पिछले 15 सालों से अपने क्षेत्र में काम कर रही है. इस दौरान उन्होंने ना सिर्फ कालाजार के मरीजों की पहचान की है, बल्कि प्रसव कराने के मामले में भी बेहतर काम किया है. इस कारण क्षेत्र में रूबी कुमारी की विशेष पहचान है. केयर इंडिया के डीपीओ मानस नायक ने बताया कि रूबी कुमारी बहुत ही बेहतर काम कर रही है. खासकर कालाजार के मरीजों की पहचान को लेकर. उसकी वजह से कालाजार के कई मरीज ठीक हो चुके हैं और कई इलाजरत हैं. अगर सभी लोग इसी लगन से काम करें तो हमलोग बहुत जल्द जिले को कालाजार मुक्त बना पाएंगे.
New delhi: कई सालों से दिल्ली और उसके आस पास में देखा जाता हैं की दिवाली आने के पहले शहर में चारो तरफ धुआँ-धुआँ हो जाता हैं यहाँ रह रहें लोगो को ज्यादातर साँस लेने में दिक्कते आती हैं और साथ ही भयानक प्रदुषण का मार झेलना पड़ता हैं। बाहर आने-जाने में लोगों को बेहद कठिनाइयों का सामना करना पड़ता हैं प्रदुषण के मार को देखते हुए दिल्ली सरकार भी अपना कदम बढाती है ताकि लोगों की परिशानियां कम कर सकें इसके लिए दिल्ली में odd और even नियम लागू किया जाता हैं ताकि प्रदुषण पर क़ाबू पाया जा सकें लेकिन इसके बाद भी प्रदुषण स्तर इतना ज्यादा होता हैं की इस नियम का भी कोई असर नज़र नहीं आता हैं।
पराली जलाने की वजह से प्रदूषण फैलता है
अब सवाल ये खड़ा होता हैं की आखिर इतनी प्रदुषण की मार दिल्ली और उसके आसपास के शहरो को ही क्यों झेलना पड़ता हैं तो कई लोग काफी अलग अलग बात करते हैं कोई कुछ कहता हैं लेकिन एक समस्या ऐसा हैं जिस कारण प्रदुषण ज्यादा फैलता हैं वो कहा जाता हैं पराली जलाने की वजह से प्रदूषण फैलता है। कहा जाता हैं गेहूं की कटाई के बाद किसान बड़े पैमाने पर नरवाई जलाते हैं। पंजाब-हरियाणा की तरह एमपी में किसानों के समाने पराली जलाने की समस्या है।
होशंगाबाद में सुपर सीडर मशीन का ट्रायल किया गया
इससे मुक्ति दिलाने के लिए कृषि मंत्री कमल पटेल ने होशंगाबाद जिले के ग्राम बनाडा में सुपर सीडर मशीन का ट्रायल किया है। उन्होंने कहा कि गेहूं और धान की फसल की नरवाई जलाने की समस्या से मुक्त होने का यहा उपाय है क्योंकि पंजाब और हरियाणा में नरवाई जलाने से दिल्ली में कितना प्रदूषण हुआ है। कृषि मंत्री कमल पटेल ने कहा कि आप सब जानते हैं और इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी मामला चला था, जिसमें मध्यप्रदेश का नाम भी आया है। अब प्रदेश में नरवाई या पराली जलाने की प्रथा बंद हो जाएगी क्योंकि सुपर सीडर मशीन बीज रोपण के साथ पराली को भी नष्ट कर देती है और साथ ही खाद भी एक साथ डालती चलती है। मंत्री ने कहा कि इस मशीन से चूंकि तीन काम बोआई, जुताई के साथ पराली उन्मूलन और खाद डालने का काम एक साथ होगा तो किसान को डीजल की बचत होगी और पर्यावरण का नुकसान भी नहीं होगा। इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा।
ख़त्म होगी प्रदुषण की मार
सरकार की जिम्मेदारी भी है कि प्रदूषण न फैले सरकार नरवाई जलाने की रोकथाम के लिए सख्ती दिखाए यह सब सरकार की जिम्मेदारी हैं लेकिन जिस तरह सरकार ने मशीन के बारे में बताया हैं उसे ये कयास लगाया जा सकता हैं की दिल्लीवाशियों और उसके आस पास के तमाम शहरों को और अधिक पर्युषण का मार नहीं झेलना पड़ेगा और आने वाले समय में जल्दी ही इसका कोई रास्ता निकल जायेगा।