मधुमेह पीड़ित गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति सतर्क और सावधान रहना बेहद जरूरी 

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– गर्भावस्था के दौरान उचित प्रबंधन से सामान्य और सुरक्षित प्रसव को मिलेगा बढ़ावा
– स्वास्थ्य के प्रति नहीं करें लापरवाही, रहें सावधान और सतर्क
लखीसराय-
जिस तरह लोगों की जीवनशैली में बदलाव और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही बढ़ रही है, उसी तरह स्वास्थ्य से संबंधित परेशानी भी आम हो रही । मधुमेह भी एक एक ऐसी परेशानी है, जो बदलते जीवनशैली और परिवेश के कारण आम हो गई है। जिससे किसी भी आयु वर्ग के  लोग पीड़ित हो सकते हैं। जिसका प्रमाण यह है कि दिनों-दिन लगातार ऐसे पीड़ित लोगों की संख्या में वृद्धि हो रही  और अस्पतालों में इलाज कराने वाले ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में हर व्यक्ति को इससे बचाव के लिए सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। खासकर मधुमेह से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को तो और सतर्क व सावधान रहने की जरूरत है। दरअसल, गर्भावस्था के दौरान ऐसी पीड़ित महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने से ही सुरक्षित और सामान्य प्रसव संभव है। इसको लेकर सरकार द्वारा भी हर जरूरी प्रयास किया जा रहा  और स्थानीय स्तर पर भी समुचित जाँच और उचित प्रबंधन की व्यवस्था की गई है। इसलिए, ऐसे पीड़ित गर्भवती को गर्भावस्था के दौरान समय-समय पर अपने नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में जाँच जरूर करानी  चाहिए।
– गर्भावस्था के दौरान मधुमेह से पीड़ित गर्भवती को समय-समय पर जाँच कराना बेहद जरूरी :
लखीसराय सदर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ धीरेन्द्र कुमार  ने बताया, गर्भावस्था के दौरान मधुमेह से पीड़ित महिलाओं का समय-समय पर जाँच और आवश्यक उपचार जरूरी है। अन्यथा थोड़ी-सी लापरवाही से बड़ी परेशानी हो सकती है। दरअसल, मधुमेह के प्रति लापरवाही करने से ना केवल गर्भवती को ही अनावश्यक परेशानियाँ का सामना पड़ सकता
बल्कि, गर्भस्थ शिशु का विकास भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए, सभी गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान मधुमेह की जाँच जरूर करानी  चाहिए। ताकि समय पर परेशानी का पता चल सके और ससमय ही जरूरी इलाज  सुनिश्चित हो सके। सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रत्येक महीने के 9 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत  गर्भवती महिलाओं के लिए मधुमेह एवं  सभी तरह के  जाँच की मुफ्त सुविधा उपलब्ध रहती है।
– गर्भपात की  भी रहती है संभावना :
यदि समय से उपचार नहीं हो पता  तब आगे चलकर प्रसूता एवं गर्भस्थ शिशु  में विभिन्न जटिलताएं हो सकती है । साथ हीं  जच्चा-बच्चा टाइप-2 मधुमेह से पीड़ित हो सकते हैं। इससे गर्भवती में इन्फेक्शन, प्रसव अवधि में बढ़ोतरी, जटिलतापूर्ण प्रसव, सिजेरियन प्रसव, प्रसव के बाद गर्भाशय का सिकुड़ नहीं पाना एवं प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव  जैसी तमाम जटिल समस्या उत्पन्न हो सकती हैं। जिससे प्रसूता की जान पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। गर्भावस्था जनित मधुमेह से गर्भस्थ शिशु को भी समस्या हो सकती है। इससे गर्भस्थ शिशु की मृत्यु, मृत शिशु का जन्म, बर्थ डिफेक्ट, बर्थ इन्जरी एवं नवजात शिशु में ग्लूकोज की कमी के साथ पहले तीन महीने में अचानक गर्भपात की संभावना भी हो सकती है।
– गर्भवस्था में मधुमेह का उपचार :
इसके उपचार के लिए सरकार द्वारा तीन व्यवस्थाएं की गयी हैं । पहला भोजन एवं पोषण संबंधित, दूसरा दवाई द्वारा एवं तीसरा इन्सुलिन इंजेक्शन के द्वारा। गर्भावस्था में मधुमेह से पीड़ित महिला को पोषण संबंधी जानकारी दी जानी अति आवश्यक है। जिससे वह समझ सके  कि  गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए पोषण युक्त आहार क्या है। उपयुक्त वजन में बढ़ोत्तरी कितनी होनी चाहिए एवं खून में सामान्य ग्लूकोज स्तर को प्राप्त करने एवं बनाये रखने के लिए कितना और कौन सा भोजन लेना है। जिन मधुमेह पॉजिटिव महिलाओं का मधुमेह पोषण संबंधित उपचार से नियंत्रित नहीं होता है, उन्हें दवा दी जाती। साथ ही जब दवा सेवन के बाद भी मधुमेह अनियंत्रित होता है तब चिकित्सक द्वारा इंजेक्शन द्वारा इन्सुलिन की  डोज दी  जाती  है।

सीए डॉ. शंकर घनशामदास अंदानी को अमेरिका इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से मानद डॉक्टरेट की उपाधि मिली

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अमेरिका इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ने टैक्सेशन, लेखा, व्यवसाय प्रशासन, परोपकार और उद्यमिता के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान को मान्यता देते हुए सीए डॉ. शंकर घनश्यामदास अंदानी को मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया है।
सीए (डॉ.) शंकर घनश्यामदास अंदानी अहमदनगर महाराष्ट्र के प्रसिद्ध चार्टर्ड अकाउंटेंट और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2022 में कुल 364 सामाजिक ट्रस्टों, गैर सरकारी संगठनों, मंदिरों, मस्जिदों, चर्चों आदि समाजों के लिए मुफ्त कर और लेखा परामर्श कार्य किया है। यह रिकॉर्ड स्थापित करके, वह विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं।
सीए (डॉ.) शंकर घनश्यामदास अंदानी को चार्टर्ड अकाउंटेंसी में 16 साल का अनुभव है और वह पिछले कई सालों से सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर समाज सेवा भी कर रहे हैं। डॉ. अंदानी की सामाजिक कार्यों में रुचि के कारण वे पिछले 15 वर्षों से हर साल 200 से अधिक ट्रस्टों, गैर सरकारी संगठनों, मंदिरों, मस्जिदों, चर्चों आदि के लिए मुफ्त कर और लेखा परामर्श कार्य कर रहे हैं।
आज सीए (डॉ.) शंकर घनश्यामदास अंदानी के नाम 40 से अधिक विश्व रिकॉर्ड हैं और उन्हें सामाजिक कार्यों के लिए 1480 राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। डॉ. अंदानी देश में अर्थशास्त्र के विशेषज्ञ के रूप में काम करते हैं और आर्थिक व्यवस्था की परंपरा को सुनिश्चित करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान है।
किसी भी चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) की देश के आर्थिक विकास में अहम भूमिका होती है। चार्टर्ड अकाउंटेंसी भारत में सबसे प्रतिष्ठित व्यवसायों में से एक है। पिछले 16 वर्षों से डॉ. अंदानी ने कई सामाजिक संस्थाओं और धार्मिक स्थानों जैसे मंदिर, मस्जिद, चर्च आदि का ऑडिट किया, जिनका आम तौर पर कोई खाता नहीं होता था, उन्होंने उनका ऑडिट किया और इन संस्थानों के लिए उचित आयकर का भुगतान कर रहे हैं। उनकी सेवा देश की प्रगति में अहम भूमिका निभा रही है।
पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट और सामाजिक कार्यकर्ता, डॉ. शंकर घनश्यामदास अंदानी साई एंड कंपनी नाम से एक चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म चलाते हैं, जिसका कार्यालय महाराष्ट्र के अहमदनगर में स्थित है। 2006 में, जब वे प्रैक्टिस कर ही रहे थे, तब उन्होंने सीए की परीक्षा पास की। चार्टर्ड अकाउंटेंट में शामिल होने से पहले, उन्होंने कराधान में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में सहायक प्रोफेसर के रूप में काम किया।
डॉ. अंदानी की कड़ी मेहनत और समर्पण के कारण कलेक्टर कार्यालय, जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय और नगर निगम ने साई एंड कंपनी को महत्वपूर्ण कार्य सौंपे हैं। अंतर्राष्ट्रीय कराधान में कराधान का गहन ज्ञान प्राप्त करने के बाद, उन्हें श्री साईं बाबा ट्रस्ट, शिरडी- (भारत में नंबर 2 चैरिटेबल ट्रस्ट) के लिए आयकर और जीएसटी सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया, जो वह पिछले 15 वर्षों से कर रहे हैं।
सीए (डॉ.) शंकर अंदानी को ओएसिस वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा वर्ष 2022 के सर्वश्रेष्ठ सीए का पुरस्कार दिया गया है, उन्हें ग्लोबल स्कॉलर फाउंडेशन से भारतीय सेवा रत्न पुरस्कार भी मिला है। अंदानी को इंटरनेशनल थियोफनी यूनिवर्सिटी, मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और विश्व मानवाधिकार संरक्षण आयोग से डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त हुई है।
ग्लोबल यूथ अचीवमेंट द्वारा मेरा भारत एजुकेशनल ट्रस्ट की ओर से प्राइड ऑफ इंडिया अवार्ड के लिए इंडियन इंटरनेशनल अचीवमेंट अवार्ड 2022
इंडियन इंटरनेशनल अचीवमेंट अवार्ड 2022, मेरा भारत एजुकेशनल ट्रस्ट द्वारा प्राइड ऑफ इंडिया अवार्ड, ग्लोबल यूथ अचीवमेंट द्वारा गौरव श्री सम्मान, भारतीय समाज सेवा ट्रस्ट द्वारा आईएसएसटी आईसीओएन अवार्ड- 2022, हिंदुस्तान रत्न अवार्ड और महात्मा गांधी सेवा रत्न के लिए उन्हें नामांकित किया गया है। पुरस्कार।
डॉ. अंदानी को ग्लैंटर एक्स मीडिया द्वारा 2022 में 100 शक्तिशाली व्यक्तित्वों के लिए चुना गया है। उन्हें इंडियन इंटरनेशनल अचीवमेंट अवार्ड 2022, वाइब्रेंट फाउंडेशन द्वारा यूथ आइकन ऑफ द ईयर, वर्ल्ड चैरिटी वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा इंटरनेशनल सोशल ऑनरेबल अवार्ड से सम्मानित किया गया है। रेड एनो द्वारा ग्लोबल प्रोफेशनल अवार्ड, भारतीय एकता सम्मान अवार्ड, टीपीएल टेक्नो बिजनेस अवार्ड 2022, इंडियन सीएसआर अवार्ड 2022, इंटरनेशनल ग्लोरी अवार्ड 2022, इंडियन आइकन अवार्ड और कई अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

खम्मम से जनता की अदालत में दस्तक दे चुके राहुल जेल नहीं, सुप्रीम कोर्ट जाएंगे

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-रितेश सिन्हा
वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
मोदी सरनेम मामले में कांग्रेसी नेता राहुल गांधी की पुनर्विचार याचिका को गुजरात हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सजा पर रोक लगाने के लिए कोई उचित आधार नहीं है। निचली अदालत का दोषसिद्धि का फैसला उचित, न्यायसंगत और कानूनी रूप से दिया गया है। अपने आदेश में कड़ी टिपण्णी करते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस हेमंत प्रच्छक ने कहा कि याचिकाकर्ता एक अस्तित्वहीन आधार पर राहत की मांग कर रहे हैं। उन्होंने टिपण्णी की कि निचली अदालत के फैसले पर रोक लगाने का कोई नियम नहीं है, ये अपवाद की श्रेणी में आता है। नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि यह विशेष परिस्थितियों के लिए प्रयोग किया  जाना चाहिए। राहुल गांधी के खिलाफ 10 और मामले विचाराधीन हैं।
टीम राहुल के सूत्रों ने बताया कि गुजरात हाईकोर्ट की ओर से निचली अदालत से मिली सजा को बरकरार रखे जाने के बाद राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। हालांकि कांग्रेस प्रवक्ता एवं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी सुप्रीम कोर्ट जाने की बात पर टालमटोल करते हुए कुछ स्पष्ट बातें नहीं कह पाए, मगर जनता की अदालत जाने की बात रखने को प्रमुखता दी। उनका ये रवैया कांग्रसियों को रास नहीं आ रहा है। वहीं कांग्रेस के प्रमुख प्रवक्ता जयराम रमेश राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र के चुनाव संबंधित सवाल पर न केवल पत्रकार वार्ता छोड़कर निकल गए, बल्कि उनकी नाराजगी भी साफ झलक रही थी। गुजरात हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस हेमंत ने कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ पुणे कोर्ट में भी एक शिकायत सावरकर के पोते की ओर से दर्ज कराई गई है जो उनके संज्ञान में है। इस मामले में राहुल गांधी पर कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में सावरकर का अपमान करने का आरोप है। सजा पर रोक न लगाना याचिकाकर्ता के साथ अन्याय नहीं होगा। एक जन प्रतिनिधि को साफ चरित्र का व्यक्ति होना चाहिए।
इन सभी मामलों से बने मुकदमों से बेपरवाह राहुल गांधी पूरा जोर कांग्रेस को मजबूती देने में लगाए हुए हैं। राहुल नित प्रतिदिन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कोषाध्यक्ष पवन बंसल के अलावा अलग-अलग प्रदेश के प्रभारियों, प्रदेश अध्यक्षों एवं अन्य पदाधिकारियों के साथ चुनावी रणनीति को अमली-जामा देने में जुटे हैं। ये मीटिंग कभी वार रूम में हुआ करती थी, लेकिन सूत्रों के हवाले से मीटिंग की सारी खबर और फूटेज खास चैनलों और विपक्षी खेमों तक पहुंचाई जाती थी। 2024 की चुनावी तैयारियों में अब वार रूम सूना है। वार रूम के कर्ता-धर्ता बने हवा-हवाई नेता नए कारोबार में अपनी भूमिका तलाश रहे हैं। अपनी चुनावी तैयारियों में अग्रिम संगठनों की भूमिका को चुस्त-दुरस्त करते राहुल गांधी ने चर्चित और मोदी पर टीका-टिपण्णियों से कांग्रेस के पोस्टर ब्यॉय बने कन्हैया कुमार को पार्टी का छात्र संगठन एनएसयूआई का इंचार्ज बना दिया।
अब तक कांग्रेस के अग्रिम संगठनों पर मुकुल वासनिक का पिछले 30 सालों से कब्जा रहा है। इसे टीम राहुल मुक्त कराने की कोशिशों में जुटी है। इसकी पहली किश्त में कन्हैया की नियुक्ति हुई है। राहुल अपने खिलाफ प्रियंका गांधी के निवास पर पनप रहे छुटभैया नेताओं का कद नापने के फिराक में हैं। इनमें प्रमोद त्यागी, जो अब आचार्य कृष्णन के नाम से अपनी पहचान बनाने में जुटे हैं, मौका पाते ही प्रियंका का नाम लेकर राहुल विरोधी बयान देने से नहीं चूकते। अगली कड़ी में जेएनयू से इंपोर्ट किए संदीप सिंह, तौकिर आलम, नरवाल, धीरज गुर्जर जैसे नेताओं को संगठन से अलग रखने की कवायद पूरी हो सकती है। इन सभी नेताओं ने यूपी कांग्रेस को बसपा से धकियाए गए नेताओं के हाथों में ही सौंप दिया है। राहुल ने 2024 के लोकसभा चुनावों में बिहार और यूपी से विशेष उम्मीदें लगा रखी हैं, लेकिन उससे पहले संगठन को अपने हाथों में लेना चाहते हैं। किसी तर्जुबेकार नेता को प्रदेश प्रभारी बनाकर कांग्रेस को सींचने में लगे हैं।
राहुल का जलवा अब मैदान में दिखने लगा है। तेलांगना प्रदेश कांग्रेस कमिटी द्वारा आयोजित खम्मम में हुई ऐतिहासिक जनसभा में राहुल गांधी ने अपने चुनावी प्रचार की शुरूआत कर पहल कर दी। इसी के जवाब में प्रधानमंत्री मोदी को आनन-फानन में दो दिनों में कई रैलियों को संबोधित करना पड़ा। वंदे भारत की सौगात देकर मोदी अपने आधार को बचाए रखने की कोशिशों में हैं। बसपा और सपा के वोटर बना अल्पसंख्यक समुदाय राम मंदिर बनाम बाबरी मस्जिद मामले में कांग्रेस को पिछले 30 सालों से कांग्रेस को छोड़े हुए था, वो अब मोदी-योगी के हिन्दुत्व एजेंडे लागू करने के बाद कांग्रेस के पीछे लामबंद होने लगा है। अल्पसंख्यक समुदाय ने योगी के खिलाफ पूरी ताकत से सपा को वोट दिया था, मगर अखिलेश सरकार बनाने में नाकाम रहे। वहीं कई बार सरकार बना चुकी बसपा को विधानसभा में जीरों पर ला खड़ा किया। अब वो अल्पसंख्यक समाज मोदी बनाम राहुल की लड़ाई में कांग्रेस के पीछे पूरी ताकत से खड़ा दिख रहा है। भारत जोड़ो यात्रा की सफलता और कर्नाटक में भाजपा का नाटक खत्म करने के बाद राहुल के नेतृत्व में तेलांगना में खम्मम के बाद इस साल के अंत में 5 राज्यों में होने वाले चुनाव के लिए कांग्रेस अब पूरी तरह से तैयार दिख रही है।
मल्लिकार्जुन खड़गे जरूर कांग्रेस अध्यक्ष हैं, मगर कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष के पीछे खड़ी दिख रही है। खड़गे इस बात को बेहतर जानते हैं इसलिए कांग्रेस की सभी बैठकों में जिसमें बतौर अध्यक्ष वो शामिल होते हैं, उसमें वे सुनिश्चित करते हैं कि राहुल से तय करने के बाद और उनकी भागीदारी जरूर हो। 108 दिनों की 1360 किलोमीटर की पदयात्रा के बाद पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ-साथ पूरी पार्टी के हौसले बुलंद दिख रहे हैं। भाजपा अभी कार्यालयों में बैठकें ही कर रही है, जबकि राहुल चुनावी मैदान में उतर चुके हैं। खम्मम की ऐतिहासिक रैली इस बात की गवाही दे रही है। वर्तमान में भाजपा का परचम लगभग पूरे देश में लहरा रहा है।
देश में अब चुनावी माहौल मोदी बनाम राहुल में बदल चुका है। क्षेत्रीय दल अपनी अस्मिता को बचाने के लिए गठबंधन का हिस्सा बनने की कोशिशों में जुटे हैं। डैमेज कंट्रोल में जुटे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा दक्षिण का किला बचाने के लिए केंद्रीय कार्यालय में समीकरण बनाते हुए गुणा-भाग में लगे हैं। वहीं राहुल दक्षिण भारत के 130 लोकसभा सीटों पर नजरें गड़ाए हुए हैं जिसमें 29 सीटें भाजपा के पास है, बाकी अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ कांग्रेस भी इकाई में खड़ी है। उत्तर भारत के साथ-साथ दक्षिण भारत को भी कांग्रेस ने फोकस किया हुआ है। कांग्रेस हर प्रदेश में लोकसभा के अंदर अपनी बड़ी हिस्सेदारी चाहती है जो उसकी लोकसभा में चुनावी रणनीति का एक हिस्सा है।
मणिपुर में लगातार हो रही है हिंसात्मक गतिविधियों के बीच कांग्रेस की ओर से पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मरहम लगाने की पूरी कोशिश की। राहुल गांधी को मणिपुर के हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में जाने से रोका गया, फिर भी उन्होंने वहां दो दिनों तक अलग-अलग राहत शिविरों में जाकर प्रभावित परिवारों से जाकर मुलाकातें की। राहुल ने मणिपुर दौरे के दूसरे दिन अन्य राहत शिविर में पहुंचे, लोगों का हाल-चाल जाना। राहुल के इस दौरे का 2024 के लोकसभा चुनाव पर कितना असर होगा, ये चुनावी मैदान में उम्मीदवारों की घोषणा के बाद ही पता चलेगा, मगर उन्होंने एक राजनीतिक छाप पूर्वोत्तर के राज्यों में छोड़ दी है। देखना है कि गुजरात हाईकोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक हालात क्या बनते हैं, इस पर सबकी नजर बनेगी। मगर इतना तय है कि इन सभी मामलों से राहुल की सकरात्मक छवि जनता के बीच उभर रही है।

संयुक्त राष्ट्र ने भी माना मोदी-शाह की जोड़ी का लोहा, भारत को मिली नई पहचान

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कश्मीर में बच्चों की सुरक्षा की दिशा में हो रहे बेहतर काम से दागी देशों की सूची से बाहर हुआ भारत

 

बीते 9 वर्षों से मोदी-शाह की जोड़ी भारत को वैश्विक फ़लक पर नई पहचान दिलाने के लिए दिन-रात जुटे हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सफल रणनीतियों का ही नतीजा है कि 12 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद पहली बार संयुक्त राष्‍ट्र की ‘चिल्‍ड्रन एंड आर्म्‍ड कॉन्फ्लिक्ट रिपोर्ट’ से भारत का नाम हटा है। संयुक्त राष्ट्र ने माना कि भारत सरकार ने ‘बच्‍चों की बेहतर सुरक्षा’ के लिए, खासतौर से जम्‍मू और कश्‍मीर में बेहतर कदम उठाए हैं।

एक दौर था जब भारत का नाम बुर्किना फासो, कैमरून, लेक चाड बेसिन, नाइजीरिया, पाकिस्तान और फिलीपींस जैसे देशों के साथ ‘अपमानित सूची’ में रखा जाता था। लेकिन मोदी-शाह की जोड़ी ने इस असंभव को भी संभव कर दिखाया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ‘बच्चे और सशस्त्र संघर्ष रिपोर्ट’ के हालिया एडिशन से भारत का नाम निकाल दिया है। बाल अधिकारों के उल्लंघन पर बनने वाली इस रिपोर्ट में पहले जम्मू-कश्मीर का जिक्र ‘संघर्ष का क्षेत्र’ के रूप में होता था। यह सालाना रिपोर्ट मंगलवार को जारी की गई। इसमें विभिन्न देशों में सशस्त्र संघर्षों के बच्चों पर असर और उनके अधिकारों के उल्लंघन की रिपोर्ट पेश की जाती है। इसके पूर्व जम्मू-कश्मीर में बच्चों की सुरक्षा और सशस्त्र संघर्ष के चलते संयुक्त राष्ट्र ने भारत को ‘दागी और अपमानित देशों’ की सूची में रखा हुआ था। धारा 370 और 35A रद्द होने का ही नतीजा है कि 2010 के बाद पहली बार संयुक्त राष्ट्र की दागी लिस्ट से बाहर हुआ जम्मू-कश्मीर आज सुरक्षित और शांत तरीके से प्रगति की राह पर अग्रसर है।

पिछले 9 वर्षों में मोदी-शाह की जोड़ी ने एक के बाद एक मास्टर स्ट्रोक लगाई है, नतीजतन जम्‍मू कश्‍मीर को मुख्यधारा में लाने की उनकी कोशिश सफल होती दिख रही है। धारा 370 को रद्द कर जमू-कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाने वाले कर्मठ नेता अमित शाह ने जब संसद में इसका प्रस्ताव रखा तो तमाम विपक्षी पार्टियों ने इसका विरोध किया। विपक्षियों का कहना था कि ‘धारा 370 के हटने से कश्मीर में खून की नदियाँ बह जाएंगी।’ लेकिन भारतीय राजनीति के चाणक्य शाह की नीतियों का यह असर रहा कि किसी ने एक कंकड़ तक उठाने की हिम्मत नहीं की।

धारा 370 को रद्द करने के बाद ही जम्मू-कश्मीर में किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम 2015 के तहत बाल कल्याण समिति और किशोर न्याय बोर्ड जैसी सभी न्यायिक सेवा देने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर को स्थापित करना संभव हो पाया। संयुक्त राष्ट्र द्वारा सुझाए गए कई उपाय पहले ही लागू किए जा चुके हैं। बाल संरक्षण को लेकर सशस्त्र तथा सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बच्चों पर घातक तथा अन्य बल प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ‘पैलेट गन’ का इस्तेमाल बंद कर दिया गया है और यह भी तय किया गया है कि कोई रास्ता न रह जाने पर ही कम-से-कम अवधि के लिए बच्चों को हिरासत में लिया जाएगा।

अमित शाह की चाणक्य नीतियों का ही नतीजा है कि धारा 370 और 35A के हटने से अब भारत की दुन‍िया में एक अलग ही पहचान बन गई है। संयुक्त राष्ट्र की ‘बच्चे और सशस्त्र संघर्ष रिपोर्ट’ की अपमानित सूची से बाहर निकलना भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। भारत आज अमृतकाल में प्रवेश कर चुका है।

 

 

 

 

 

 

 

क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देगा मिथिला इनक्यूबेशन सेंटर : समीर कुमार महासेठ

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उद्योग मंत्री श्री समीर कुमार महासेठ ने कहा, मिथिला इनक्यूबेशन सेंटर बनेगा मील का पत्थर

दरभंगा में उद्योग मंत्री ने किया मिथिला इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन

दरभंगा-

बिहार के उद्योग मंत्री श्री समीर कुमार महासेठ ने दरभंगा इंजिनियंरिंग कॉलेज में मिथिला इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया। उद्योग मंत्री ने कहा कि यह सेंटर मिथिला क्षेत्र में नवाचार, उद्यमिता को बढ़ावा देने एवं नए उद्यमियों के सृजन में अहम भूमिका निभायेगा। मिथिला का विकास उद्योग एवं उद्यमिता के क्षेत्र में तेजी से हो पाएगा। साथ ही उन्होंने अपनी ओर से हरसंभव मदद देने का आश्वासन दिया।
इससे पूर्व बिहार सरकार के उद्योग मंत्री श्री समीर कुमार महासेठ ने दीप प्रज्ज्वलित करके मिथिला इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया। मंगलवार 4 जुलाई को दरभंगा के लिए यह एक ऐतिहासिक घटना थी, जिसका सकारात्मक असर आने वाले दिनों में दिखेगा। अपने संबोधन में उद्योग मंत्री ने इस इनक्यूबेशन सेंटर के स्थापना के लिए प्रयासरत दरभंगा इंजिनियंरिंग कॉलेज, दरभंगा के प्राचार्य, डॉ संदीप तिवारी, श्री नवीन झा, हावर्ड विश्वविद्यालय, डॉ सविता झा, संस्थापक मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल और श्री अरविन्द झा, साफ्टवेयर इंजीनियर और संस्थापक, मिथिला एंजेल नेटवर्क के पहल और मिथिला को आर्थिक स्वाबलंबी बनाने की काफी प्रशंसा की।
इस मौके पर दरभंगा इंजिनियंरिंग कॉलेज, दरभंगा के प्राचार्य, डॉ संदीप तिवारी ने माननीय मंत्री एवं विशिष्ट अतिथियों का स्वागत मखाना मिथिला पाग एवं चादर से किया। मंत्री श्री सुमित कुमार सिंह, विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग बिहार सरकार के पिताजी स्वं नरेन्द्र सिंह जो कि पूर्व में कृषि मंत्री थे और उनका बिहार के समाज के लिए बड़ा योगदान था, के नाम पर इस सभागार का नाम नरेंद्र सिंह सभागार रखा। साथ ही उन्होंने सभी लोगों से आग्रह किया कि आगे भी सभी लोगों का सहयोग यदि मिलता रहा तो वह दिन दूर नहीं कि मिथिला के लोगों को रोजगार स्थानीय बाजार में ही उपलब्ध हो सकेगा। इसके साथ ही सी0आई0एम0पी0, पटना एवं डी0सी0ई0, दरभंगा के बीच एक समझौता ज्ञापन एम0ओ0यू0 पर हस्ताक्षर किया गया।

कार्यक्रम के दौरान राज्य सरकार के उद्योग मंत्री  द्वारा कुछ लोगों को अपने क्षेत्र में उत्कृष्ठ योगदान के लिए लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। ऐसे लोगों में श्री संजय सैनी (कृषि के क्षेत्र में) श्री रोहित आनन्द एवं साकेत आनन्द को (रोबोटिक्स के क्षेत्र में) एवं श्री रौशन आरा को (पारम्परिक चूड़ी, लाह  उद्योग) इस मौके पे प्रो0 डॉली सिन्हा, प्रति उप कुलपति, एल0एन0एम0यू0, दरभंगा, प्रो0 राणा सिंह (सी0आई0एम0पी0, पटना के निदेशक) एवं श्री कुमोद, (सी0ई0ओ0,  बीहब के अलावा संस्थान के श्री विनायक झा, श्री अंकित कुमार, श्री ईंशात कुमार, श्री रवि रंजन कुमार, श्री प्रफुल कुमार, डा0 पूजा कुमारी एवं अन्य सभी शिक्षणगण एवं छात्रगण उपस्थित थे। मिथिला एंजेल नेटवर्क और सीएसटीस के द्वारा मिटृ को साठ हजार का योगदान मंत्री े हाथों से सौंपा गया। दरभंगा इंजीनियरिंग कॉलेज में मिथिला के उद्योगों का स्टाल एवं प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें लाह, मिथिला पेंटिंग, सत्तू, रोबोटिक रोजा टेक रोबोट, आयुर्वेद, सिक्की कला, घरेलू उद्योग के सामान थे। उद्घाटन के मौके पर महिला उद्यमियों, स्टार्ट अप,  किसान मेला और शिक्षकों की ट्रेनिंग संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए गए।

जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा की सफलता को ले निकला  सारथी रथ

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– प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाई जाएगी परिवार नियोजन की जानकारी
– सिविल सर्जन ने रथ को हरि झंडी दिखा किया रवाना, गाँव-गाँव जाकर लोगों को किया जाएगा जागरूक
– 11 से 31 जुलाई तक जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में चलेगा जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा
लखीसराय-
विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर जिले में 11 जुलाई से   जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा शुरू होगा। परिवार नियोजन पखवाड़े की सफलता को लेकर सामुदायिक स्तर पर लोगों तक पखवाड़े की जानकारी पहुँचाने के लिए सारथी रथ निकाला गया है। जिसे सिविल सर्जन डाॅ बीपी सिन्हा ने हरी झंडी दिखाकर जिले के सभी प्रखंडों में प्रचार-प्रसार के लिए रवाना किया। रथ के माध्यम से जिलेभर में प्रचार-प्रसार कर सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक किया जाएगा और परिवार नियोजन के साधन को अपनाने के लिए 10 जुलाई तक प्रेरित किया जाएगा। इस मौके पर अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह परिवार नियोजन के नोडल पदाधिकारी डाॅ अशोक कुमार भारती, डीसीएम आशुतोष सिंह, पीसीआई के जिला समन्वयक मुकेश कुमार झा समेत जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के स्वास्थ्य प्रबंधक एवं बीसीएम मौजूद थे।
– सारथी रथ के माध्यम से सामुदायिक स्तर पर पहुँचाई जाएगी परिवार नियोजन की जानकारी :
सिविल सर्जन डाॅ बीपी सिन्हा ने बताया, सारथी रथ के माध्यम से सामुदायिक स्तर पर प्रत्येक व्यक्ति तक परिवार नियोजन की जानकारी पहुँचाई जाएगी। रथ द्वारा गाँव से लेकर टोले-मोहल्ले तक जाकर माइकिंग के माध्यम से परिवार नियोजन को अपनाने से होने वाले फायदे समेत सरकारी स्तर उपलब्ध सुविधाओं की लोगों को जानकारी दी जाएगी। जिससे कि प्रचार- प्रसार तेज हो सके और समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक परिवार नियोजन की जानकारी पहुँच सके।
– 11 से 31 जुलाई तक जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में आयोजित होगा परिवार नियोजन शिविर :
अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह परिवार नियोजन के नोडल पदाधिकारी डाॅ अशोक कुमार भारती ने बताया, उक्त पखवाड़ा के दौरान 11 से 31 जुलाई तक जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में परिवार नियोजन शिविर का आयोजन किया जाएगा। जिसमें योग्य और सक्षम इच्छुक लाभार्थियों को महिला बंध्याकरण और पुरुष नसबंदी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। निर्धारित तिथि के अंदर इच्छुक और योग्य लाभार्थी अपने नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में सुविधा का लाभ ले सकते हैं।
– सारथी रथ पर अस्थाई साधन की सुविधाएं रहेगी उपलब्ध :
जिले के सभी प्रखंडों में संचालित सारथी रथ पर परिवार नियोजन के अस्थाई साधन की समुचित सुविधाएं उपलब्ध रहेगी। इसलिए, जो लाभार्थी अस्थाई साधन को अपनाना चाहते हैं, वह अपने स्थानीय आशा कार्यकर्ता के सहयोग प्राप्त कर सारथी रथ के माध्यम से सुविधा का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। अस्थाई साधन के रूप में काॅपर-टी, छाया, अंतरा, कंडोम समेत अन्य सुविधाओं की व्यवस्था रथ पर सुनिश्चित की गई है।
– अस्थाई व स्थाई उपायों की दी जाएगी जानकारी :
सारथी रथ के माध्यम से सामुदायिक स्तर पर लोगों को परिवार नियोजन के दोनों साधन (स्थाई और अस्थाई) की जानकारी दी जाएगी। साथ ही परिवार नियोजन के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाएँ एवं सेवाओं की भी जानकारी दी जाएगी। ताकि लोगों स्वास्थ्य सुरक्षा के मद्देनजर नजर किसी प्रकार की हिचकिचाहट नहीं रहे और लोग उत्साह के साथ इस अभियान को सफल बनाने के लिए आगे आ सकें।
– सास बहू सम्मेलन का आयोजन आरोग्य दिवस पर जुलाई महीने में सभी ऑंगनबाड़ी,  स्वास्थ्य केंद्र व शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर अनिवार्य रूप से किया जाना है।
– विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई 2023 को स्वास्थ्य मेला एवं मीडिया ब्रीफिंग का आयोजन सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र/ प्राथमिक स्वास्थ केंद्र पर किया जाना है।  प्रत्येक प्रखंड पर साइकिल रैली का आयोजन किया जाएगा। ताकि समाज में विश्व जनसंख्या दिवस पर ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक किया जा सके और 11 जुलाई से आयोजित जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा में लाभ प्राप्त हो सके ।
– प्रत्येक माह की भांति 21 जुलाई को परिवार नियोजन दिवस का आयोजन सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र/ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर, एपीएससी और एचएससी पर परिवार नियोजन दिवस का आयोजन किया जाना है।

जच्चा बच्चा की सुरक्षा के लिए संस्थागत प्रसव को दें प्राथमिकता: डॉ सिन्हा

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-जननी सुरक्षा कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं को मिल रही मदद

लखीसराय-

हम सब अभी जिस माहौल मे जी रहे हैं उसमें हम सबको स्वास्थ्य मुद्दों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर संस्थागत प्रसव और सुरक्षित मातृत्व जैसे मामलों की अनदेखी नहीं की जा सकती है। संस्थागत प्रसव के माध्यम से सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से हरसंभव आवश्यक जानकारियां व सुविधाएं मुहैया करायी जा रही हैं।

संस्थातगत प्रसव संबंधी सुविधाओं के विषय में जिला के सिविल सर्जन डॉ . बीपी सिन्हा का कहना है कि सुरक्षित प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना जरूरी है। क्योंकि संस्थागत प्रसव की मदद से ही अस्पताल में प्रशिक्षित और सक्षम स्वास्थ्य कर्मी की देख –रेख में गर्भवती महिला का सुरक्षित प्रसव कराया जा सकता है। साथ ही किसी भी आपात स्थिति जैसे रक्त की अल्पता या एस्पेक्सिया जैसी समस्याओं से निपटा जा सकता है। अस्पतालों में मातृ एवं शिशु सुरक्षा के लिए सारी सुविधाएं हमेशा उपलब्ध रहती हैं। साथ ही संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए जननी सुरक्षा योजना का भी लाभ गर्भवती महिलाओं को पहुंचाया जा रहा है।

मातृ शिशु मृत्यु दर में कमी के लिए संस्थागत प्रसव जरूरी:
प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं को रोकने के लिए संस्थागत प्रसव बहुत जरूरी है। खासकर ग्रामीण इलाकों की गर्भवती महिलाओं के लिए गृह प्रसव की जगह संस्थागत प्रसव पर अभी और बल देने की जरूरत है। इसके लिए आशाओं के द्वारा उन्हें इसके फायदों के बारे में भी उचित जानकारी प्रदान की जा रही है। संस्थागत प्रसव के द्वारा मातृ एवं शिशु मृत्यु में कमी लाई जा सकती है।
संस्थागत प्रसव के लिए दी जा रही आर्थिक सहायता:
जननी सुरक्षा योजना के तहत ग्रामीण एवं शहरी दोनों प्रकार की गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने पर अलग-अलग प्रोत्साहन राशि सरकार द्वारा प्रदान की जाती है। जिसमें ग्रामीण इलाके की गर्भवती महिलाओं को 1400 रुपए एवं शहरी क्षेत्र की महिलाओं को 1000 रुपए दिए जाते हैं। साथ ही इस योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए सरकारी अस्पतालों पर संदर्भित करने के लिए आशाओं को भी प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है। जिसमें प्रति प्रसव ग्रामीण क्षेत्रों में 600 रुपये एवं शहरी क्षेत्रों के लिए प्रति प्रसव 400 रूपए आशाओं को दिए जाते हैं। इस योजना के तहत संस्थागत प्रसव पर आम लोगों के बीच जागरूकता बढ़ रही है।

योजना से गर्भवती को लाभ: इस योजना के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं को प्रोत्साहन राशि के साथ उनके बेहतर प्रसव प्रबंधन का भी ख्याल रखा जाता है। जिसमें निम्नलिखित सुविधाएं शामिल है:
सामान्य एवं सिजेरियन प्रसव की निःशुल्क व्यवस्था
निःशुल्क दवा की व्यवस्था
गर्भवती को उनके घर से लाने एवं प्रसव के बाद अस्पताल से एम्बुलेंस द्वारा घर पहुँचाने की निःशुल्क व्यवस्था
प्रशिक्षित चिकित्सक एवं नर्स के द्वारा निःशुल्क प्रसव प्रबंधन
नवजात शिशुओं में बेहतर प्रतिरक्षण हेतु शिशु जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान सुनश्चित कराने की व्यवस्था ।

दस्त से बचाव के लिए अब 15 जुलाई तक खिलाई जाएगी जिंक की गोली

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–   दो करोड़ 5 लाख से ज्यादा ओआरएस पैकेट वितरण का लक्ष्य
–  करीब एक करोड़ 84 लाख बच्चों को मिलेगा लाभ
–  26 जिलों में बढ़ाई गई दस्त नियंत्रण पखवाड़ा की अवधि
पटना-
प्रदेश में डायरिया के कारण होने वाले शिशु मृत्युदर को शून्य करने के लिए 1 जून से 30 जून तक दो पखवाड़े में दस्त नियंत्रण पखवाड़े का आयोजन किया गया था। राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने प्रदेश के 26 जिलों के सिविल सर्जन को एक पत्र जारी किया है, जिसमें दस्त नियंत्रण पखवाड़े की अवधि में विस्तार करते हुए इसे 15 जुलाई तक जारी रखने का निर्देश दिया है। ताकि शत प्रतिशत लक्ष्य की पूर्ति की जा सके।
डायरिया से बच्चों में होने वाली मौत को रोकना जरूरी:
डब्ल्यूएचओ के अनुसार पांच वर्ष तक के बच्चों में डायरिया मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारक है। पूरे विश्व में करीब अकेले 5 लाख से ज्यादा बच्चों की मौत सिर्फ डायरिया से होती है। वहीं सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के अनुसार विश्व में प्रत्येक 9 बच्चों में से एक बच्चे की मौत डायरिया से ही होती है। साथ ही एचआईवी ग्रस्त बच्चों में डायरिया और जानलेवा हो जाता है। सीडीसी के अनुसार डायरिया ग्रस्त बच्चों में मृत्यु दर एचआईवी के बिना ही 11 गुना ज्यादा होती है। इसके अलावा एक सुखद तथ्य भी डब्ल्यूएचओ और सीडीसी के द्वारा बताया गया है कि डायरिया से बचाव काफी आसान है। रोटावायरस वैक्सीन और सुरक्षित जल, स्तनपान और स्वच्छता के द्वारा इसे काफी कम किया जा सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रत्येक साल पांच वर्ष के उम्र तक के बच्चों के बीच दस्त नियंत्रण पखवाड़ा मनाया जाता है।
इस पखवाड़े के दौरान जीरो से पांच साल तक के बच्चों में ओआरएस पैकेट व जिंक के सिरप या टेबलेट का वितरण कर उनके इस्तेमाल के तरीकों को बताया जाएगा। पूरे प्रदेश में दस्त नियंत्रण पखवाड़े से लाभांवित होने वाले बच्चों की संख्या करीब 1 करोड़ 84 लाख से ज्यादा है। वहीं इनमें 2 करोड़ 5 लाख 56 हजार 957 ओआरएस के पैकेट तथा 80 लाख से ज्यादा जिंक के टैबलेट का वितरण का लक्ष्य रखा गया है।
छोटे गांव व बस्तियां भी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में
दस्त नियंत्रण पखवाड़ा के दौरान समस्त पांच वर्ष की उम्र के बच्चों के साथ पांच वर्ष की उम्र वाले वैसे बच्चे जिन्हें पखवाड़े के दौरान दस्त रोग हुआ हो लक्षित लाभार्थी की श्रेणी में आएगें। वहीं जिन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गयी है उनमें शहरी झुग्गी झोपड़ी, कठिन पहुंच वाले क्षेत्र, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र, छोटे गांव, बस्ती के साथ वैसे क्षेत्र जहां पहले के वर्षों में दस्त के मामले ज्यादा आए हो या जहां साफ सफाई व साफ पानी की आपूर्ति एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी हो।
डायरिया में जीवन रक्षक का काम करता है ओआरएस और जिंक
राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि डायरिया के दौरान ओआरएस और जिंक का प्रयोग जीवन रक्षक का कार्य करता है। ऐसी स्थिति में प्रत्येक बच्चे को एक एक पैकेट ओआरएस और जिंक के टैबलेट का वितरण किया जाएगा। वहीं ओआरएस को स्वास्थ्यकर्मी बच्चों के अभिभावक को उसके बनाने की विधि भी समझाएगें।
इन जिलों में दस्त नियंत्रण पखवाड़ा की बढ़ी है अवधि
जिन 26 जिलों में दस्त नियंत्रण पखवाड़ा की अवधि 15 जुलाई तक की गयी है उसमें गोपालगंज, सहरसा, मधुबनी, शिवहर, जहानाबाद, अरवल, शेखपुरा, बेतिया, दरभंगा, कैमूर, वैशाली, नालन्दा, खगड़िया, बांका, भागलपुर, कटिहार, लखीसराय, भोजपुर, बक्सर, पटना, नवादा, गया, रोहतास, औरंगाबाद, जमुई और मुंगेर शामिल है।

बरसात के मौसम में बरतें सावधानी 

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-पोषक तत्वों के सेवन से होगा डायरिया से बचाव
-गर्म खाना व गर्म पानी का करें नियमित सेवन, बढ़ेगी प्रतिरोधक  क्षमता
लखीसराय-
बारिश के इस मौसम में डायरिया का खतरा बढ़ जाता है। डायरिया के कारण अत्यधिक निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) होने से समस्याएँ बढ़ जाती हैं ।  कुशल प्रबंधन के अभाव में यह जानलेवा भी हो जाता है। शिशु मृत्यु दर के कारणों में डायरिया भी एक प्रमुख कारण है। इसके लिए डायरिया  के लक्षणों के प्रति सतर्कता एवं सही समय पर उचित प्रबंधन कर बच्चों को डायरिया जैसे गंभीर रोग से आसानी से सुरक्षित किया जा सकता है। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया दस्त में खून आना जैसे लक्षणों  के आधार पर डायरिया की पहचान आसानी से की जा सकती है। ओआरएस एवं जिंक घोल निर्जलीकरण से  बचाव करता है। लगातार दस्त होने से बच्चों में निर्जलीकरण की समस्या बढ़ जाती है। दस्त के कारण पानी के साथ जरूरी एल्क्ट्रोलाइट्स(सोडियम, पोटैशियम,क्लोराइड एवं बाईकार्बोनेट)का तेजी से ह्रास होता है।बच्चों में इसकी कमी को दूर  करने के लिए ओरल रीहाइड्रेशन स्ल्यूशन(ओआरएस) एवं जिंक घोल दिया जाता है। इससे डायरिया के साथ डिहाइड्रेशन से  बचाव भी होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार बच्चों में 24 घंटे के दौरान तीन या उससे अधिक बार पानी जैसा दस्त आना डायरिया है।  यदि तीन या इससे अधिक बार पतले दस्त की जगह सामान्य दस्त हो तो उसे डायरिया नहीं  समझा जाता।
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया कि  गर्मी के बाद आने वाला  बरसात का मौसम अपने साथ कई बीमारियों को भी लेकर आता है। उनमें से ही एक बीमारी डायरिया है। डायरिया यानी दस्त लगना।  इस बीमारी की चपेट में बच्चे के साथ बड़े  लोग भी आ जाते हैं। पानी और नमक की कमी के कारण डायरिया की समस्या होती है। यह बीमारी खाद्य पदार्थों से होने वाली एलर्जी या पानी में पाए जाने वाले प्रोटोजोआ वायरस या बैक्टीरिया से होने वाली प्रतिक्रिया से भी हो सकती है। डायरिया के चलते पेट के निचले हिस्से में दर्द,पेट में मरोड़,उल्टी आना,बुखार और शरीर में कमजोरी हो जाती है।
इससे  बचाव के लिए लोगों को ताजा व गर्म खाना एवं स्वच्छ  पानी का सेवन करना चाहिए। साथ ही हमेशा ओआरएस एवं जिंक की  गोली रखें।  .
इन लक्षणों से डायरिया की  पहचान करें:-
एक से ज्यादा पतला  दस्त होना,पेट में ऐंठन,जी मिचलाना,पेट में दर्द,हल्का सिरदर्द,चक्कर आना,उल्टी होना।
डायरिया से  बचाव के घरेलू उपाय :
एक गिलास पानी में दो चम्मच चीनी के साथ एक चम्मच नमक और नींबू का रस मिलाकर पिलाएं ।  तुरंत आराम मिल जाएगा।
नारियल पानी:-डायरिया की समस्या में नारियल का पानी बहुत फायदेमंद होता है। नारियल पानी में मौजूद पोषक तत्व शरीर की कमजोरी को भी दूर   करता है।
दाल का पानी:-डायरिया के दौरान बच्चों को दाल का पानी,चावल का माढ़,और दही केला खिला सकते हैं।
पानी में सौंफ का चूर्ण मिलकर बच्चों को पिलाने से दस्त की समस्या दूर  होती है।
अनार के छिलके को सूखाकर अच्छे से पीस लें।इसके बाद इस चूर्ण को शहद में मिलाकर बच्चे को दिन में तीन से चार बार दें।
डायरिया में होने वाले डिहाइड्रेशन से बचने के लिए ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ लें। अगर उलटियां भी हो रही हैं तो एकबार में अधिक पानी पीने के बजाय थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पिलाते रहें। इस दौरान बच्चे को आराम और पर्याप्त नींद लेने से भी राहत मिलेगी। मसालेदार खाने से परहेज रखें।

राहुल, प्रियंका की घेराबंदी, ग्रुप 23 ने किया मुमताज पटेल को आगे

-रितेश सिन्हा, वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक

मरहूम कांग्रेसी दिग्गज अहमद पटेल की बेटी मुमताज पटेल इन दिनों सुर्खियों में हैं। जी-23 के नेता मुमताज को लेकर खासे सक्रिय हैं। मुमताज को राहुल-प्रियंका के साथ कांग्रेस कार्यसमिति में सदस्य व राष्ट्रीय महासचिव बनाने का कांग्रेस में खासा दवाब बनाया जा रहा है। पिछले दिनों दिल्ली मुख्यालय में छत्तीसगढ़ के नेताओं की मीटिंग के बाद अहमद ग्रुप जी-23 खासा सक्रिय दिखाई दिया। अहमद पटेल की बेटी मुमताज पटेल की एआईसीसी मुख्यालय में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, संगठन सचिव केसी वेणुगोपाल से मीटिंग करवाई गई। छत्तीसगढ़ की प्रभारी महासचिव कुमारी शैलजा, मुकुल वासनिक और एआईसीसी में कर्मचारियों के कर्ताधर्ता यतिंद्र शर्मा पूरा मोर्चा संभाले हुए थे। खड़गे, राहुल और वेणुगोपाल से मिलने के लिए एआईसीसी मुख्यालय में पहुंचकर उन्होंने अपना साफ संदेश देने की कोशिश की।
खड़गे ने एआईसीसी में बतौर अध्यक्ष आठ महीने पूरे कर लिए हैं। इस पूरी अवधि में कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में प्रचंड जीत हासिल की और सरकार का गठन भी हो गया। मगर सीडब्ल्यूसी का अब तक गठन न होने के कारण कांग्रेस में असंतोष दिखाई दे रहा है, जबकि इसके गठन को लेकर अब कोई बाधा नहीं बची है। पार्टी द्वारा पारित प्रस्ताव के अनुसार खड़गे जिसे चाहें उसे नामांकित करने के लिए अधिकृत हैं। खड़गे को आधिकारिक तौर पर 26 अक्टूबर 2022 को कांग्रेस अध्यक्ष चुन लिया गया था लेकिन एआईसीसी अधिवेशन फरवरी 2023 के कारण इसको टालने के पर्याप्त कारण थे। राहुल गांधी की अगुवाई में भारत जोड़ो यात्रा अपने पूरे शबाब पर थी। कांग्रेस ने अधिवेशन के लिए संसद के शीतकालीन और बजट सत्र समाप्त होने तक का इंतजार किया। फरवरी में ही कांग्रेस की संचालन समिति ने अपनी बैठक में निर्णय लिया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को चुनाव की बजाए सीडब्ल्यूसी को नामित करने का अधिकार दे दिया। अब खड़गे अहमद के वफादारों को दरकिनार करने के लिए भारी दवाब में है। यही एक बड़ी वजह सामने उभर कर आई है कि वे अपने पुराने बॉस के चहेतों को अनदेखा कर राहुल के दवाब में वर्किंग कमिटी का गठन कैसे कर पाएं, इस पूरे सियासी खेल में खड़गे बुरी तरह से उलझ चुके हैं।
खड़गे की परेशानी यह है कि कांग्रेसी दिग्गज तारिक अनवर, सलमान खुर्शीद, नासिर अहमद के अलावा कांग्रेस में अल्पसंख्यकों में बड़ा चेहरा बनकर उभरे इमरान प्रतापगढ़ी कांग्रेस वर्किंग कमिटी के लिए प्रबल दावेदार हैं। उनके सामने मुमताज पटेल को लाना और राहुल-प्रियंका के समक्ष खड़ा करना खड़गे के लिए एक बड़ी चुनौती है। यह उनके राजनीतिक अस्तित्व को लेकर भी बड़ा सवाल है। एक तरफ तो ग्रुप 23 का खेमा राहुल और प्रियंका को चुनाव प्रचार में उलझाए रखना चाहता है, वहीं एआईसीसी में मुमताज पटेल को बैठाकर कांग्रेस में अपनी मजबूत पकड़ भी बनाए रखना चाहता है। 2024 के लोकसभा चुनाव के पहले मुमताज को इन दोनों स्थापित नेताओं के बीच में खड़ा कर अहमद के रूतबे को बरकरार रखने की कोशिशों में यह पूरा ग्रुप जुटा हुआ है। मुमताज गुजरात के भरूच जिले की राजनीति में खासी सक्रिय हो चुकी हैं, लेकिन चुनाव जीतेंगी इसमें उनको खुद संदेह है। गुजरात विधानसभा चुनाव की पूरी तैयारी करने के बाद उन्होंने हार के डर से पैर पीछे खींच लिए थे। कर्नाटक में सरकार बनने के बाद बदले माहौल में एक बार फिर से लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपनी राजनीतिक विरासत के नाम लेकर अपनी राजनीतिक हैसियत बढ़ाना चाहती हैं। उनके पिता दिवंगत अहमद पटेल भरूच से लोकसभा चुनाव का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। राजपूत बाहुल्य ये सीट 1952 से कांग्रेस का परंपरागत सीट रही है।
संजय गांधी के जमाने में उनके खासमखास अकबर अहमद डंपी और रजिया सुल्ताना की पहल पर अहमद पटेल को 1977 में गुजरात के भरूच और बिहार के कटिहार लोकसभा सीट से तारिक अनवर को चुनाव लड़ने को कहा गया था। अहमद हवा में चुनाव जीतते रहे। 1977, 1980 और 1985 में कांग्रेस की लहर में उनको जीत हासिल हुई। 1989 के उपरांत लाख कोशिशों के बाद भी अहमद पटेल अपनी परंपरागत सीट जीतने में असफल रहे और मृत्युपर्यंत कांग्रेस पार्टी से राज्यसभा सदस्य बने रहे। अहमद को कांग्रेसियों की निबटाने की राजनीति की वजह से भरूच भाजपा का गढ़ बन गया। 1998 से भाजपा के मनसुखभाई वसावा यहां से जीतते आ रहे हैं। मगर अहमद के करीबी नेता मुमताज पटेल को भरूच से चुनाव लड़ने का मशविरा दे रहे हैं। मुमताज इसी कड़ी में एनएच 48 पर फ्लाईओवर की मांग को लेकर केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर चुकी हैं। यह पहली बार था जब वह राजनीतिक तौर पर नरेंद्र मोदी सरकार के किसी मंत्री से मिली थीं।
यूं तो पुत्र फैसल पटेल भी राजनीति में आना चाहते थे, मगर राहुल गांधी के खिलाफ खड़ी आम आदमी पार्टी के घर पर हाजिरी देने लगे। वहीं मुमताज पटेल कांग्रेस पार्टी की रायपुर अधिवेशन में शामिल हुईं, बिना किसी पद के पार्टी के बड़े दिग्गजों के साथ एक सत्र के लिए मंच भी साझा किया। उनके सियासी रसूख के आगे खड़गे भी नतमस्तक होकर खड़े हैं। रायपुर अधिवेशन में पारित प्रस्ताव के अंतर्गत खड़गे मुमताज को कांग्रेस वर्किंग कमिटी फिट करना चाहते हैं जिन्होंने कहा था कि 50 प्रतिशत में महिला, युवा और अल्पसंख्यक तीनों कैटगरी में फिट बैठती हैं। खड़गे मुमताज को गुजरात की राजनीति में कोई असुविधा न हो, इसके लिए उन्होंने अहमद पटेल के करीबी और राज्यसभा सांसद शक्ति सिंह गोहिल को पहले ही गुजरात पीसीसी अध्यक्ष बना चुके हैं। वे गु्रप 23 के सभी सदस्यों को कांग्रेस में महत्वपूर्ण पदों पर एडजस्ट करना चाहते हैं ताकि गांधी परिवार पर दवाब दे सकें। इसमें उनके सहयोगी मुकुल वासनिक, कुमारी शैलजा, मधुसुदन मिस्त्री, आनंद शर्मा, मोहन प्रकाश, मणिक राव ठाकरे और अविनाश पांडे पूरा सहयोग दे रहे हैं। इन सबके कार्डिनेटर बने एआईसीसी में यतिन्द्र शर्मा अपने पूर्व आका अहमद पटेल की कमान संभाले हुए हैं।
खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाली मुमताज की अब राजनीतिक महत्वाकांक्षा बढ़ चुकी है। अहमद पटेल के निधन के बाद मुमताज ने उनकी राजनीतिक उत्तराधिकारी बनने से इंकार किया था, तब उनका पूरा परिवार बेटे फैसल पटेल के पीछे खड़ा था, लेकिन वो आरोप लगाने से भी नहीं चुके कि कांग्रेस उन्हें तरजीह नहीं दे रही और केजरीवाल का दामन पकड़ अपना राजनीतिक सफर तय करने की नाकामयाब कोशिश भी की। मुमताज पटेल के कारोबारी पति इरफान सिद्दीकी का घर और ऑफिस पर ईडी के निशाने पर है। गुजरात के फार्मास्युटिकल फर्म और स्टर्लिंग बायोटेक धोखाधड़ी मामले को लेकर इरफान के खिलाफ ये कार्रवाई हुई थी। स्टर्लिंग बायोटेक के प्रमोटरों नितिन संदेसरा, चेतन संदेसरा और दीप्ति संदेसरा पर बैंकों से 14,500 करोड़ रुपए के फ़र्जीवाड़ा का आरोप लगे थे। सीबीआई ने स्टर्लिंग बायोटेक और इसके प्रमोटरों के ख़लिफ़ बैंको से 5,383 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था। खुद को राजनीति में लाने का मकसद पति पर लगे घोटाले और फर्जीवाड़े के आरोप का राजनीतिक लाभ उठाना भी है, वहीं राहुल से मिलने में नाकामयाब और हाशिए पर खड़ा ग्रुप 23 इसे राहुल-प्रियंका की लड़ाई में ढाल बनाकर अपना राजनीतिक कामयाब बनाना चाहता है। यही वजह है कि खड़गे की आड़ में यह समूह खुद को एआईसीसी में महत्वपूर्ण पदों पर काबिज बनाए रखना चाहता है। देखना है कि इस दिलचस्प सियासी दांव-पेंच में कौन किस पर भारी पड़ता है।