मधुमेह पीड़ित गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति सतर्क और सावधान रहना बेहद जरूरी
सीए डॉ. शंकर घनशामदास अंदानी को अमेरिका इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से मानद डॉक्टरेट की उपाधि मिली
खम्मम से जनता की अदालत में दस्तक दे चुके राहुल जेल नहीं, सुप्रीम कोर्ट जाएंगे
संयुक्त राष्ट्र ने भी माना मोदी-शाह की जोड़ी का लोहा, भारत को मिली नई पहचान
कश्मीर में बच्चों की सुरक्षा की दिशा में हो रहे बेहतर काम से दागी देशों की सूची से बाहर हुआ भारत
बीते 9 वर्षों से मोदी-शाह की जोड़ी भारत को वैश्विक फ़लक पर नई पहचान दिलाने के लिए दिन-रात जुटे हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सफल रणनीतियों का ही नतीजा है कि 12 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद पहली बार संयुक्त राष्ट्र की ‘चिल्ड्रन एंड आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट रिपोर्ट’ से भारत का नाम हटा है। संयुक्त राष्ट्र ने माना कि भारत सरकार ने ‘बच्चों की बेहतर सुरक्षा’ के लिए, खासतौर से जम्मू और कश्मीर में बेहतर कदम उठाए हैं।
एक दौर था जब भारत का नाम बुर्किना फासो, कैमरून, लेक चाड बेसिन, नाइजीरिया, पाकिस्तान और फिलीपींस जैसे देशों के साथ ‘अपमानित सूची’ में रखा जाता था। लेकिन मोदी-शाह की जोड़ी ने इस असंभव को भी संभव कर दिखाया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ‘बच्चे और सशस्त्र संघर्ष रिपोर्ट’ के हालिया एडिशन से भारत का नाम निकाल दिया है। बाल अधिकारों के उल्लंघन पर बनने वाली इस रिपोर्ट में पहले जम्मू-कश्मीर का जिक्र ‘संघर्ष का क्षेत्र’ के रूप में होता था। यह सालाना रिपोर्ट मंगलवार को जारी की गई। इसमें विभिन्न देशों में सशस्त्र संघर्षों के बच्चों पर असर और उनके अधिकारों के उल्लंघन की रिपोर्ट पेश की जाती है। इसके पूर्व जम्मू-कश्मीर में बच्चों की सुरक्षा और सशस्त्र संघर्ष के चलते संयुक्त राष्ट्र ने भारत को ‘दागी और अपमानित देशों’ की सूची में रखा हुआ था। धारा 370 और 35A रद्द होने का ही नतीजा है कि 2010 के बाद पहली बार संयुक्त राष्ट्र की दागी लिस्ट से बाहर हुआ जम्मू-कश्मीर आज सुरक्षित और शांत तरीके से प्रगति की राह पर अग्रसर है।
पिछले 9 वर्षों में मोदी-शाह की जोड़ी ने एक के बाद एक मास्टर स्ट्रोक लगाई है, नतीजतन जम्मू कश्मीर को मुख्यधारा में लाने की उनकी कोशिश सफल होती दिख रही है। धारा 370 को रद्द कर जमू-कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाने वाले कर्मठ नेता अमित शाह ने जब संसद में इसका प्रस्ताव रखा तो तमाम विपक्षी पार्टियों ने इसका विरोध किया। विपक्षियों का कहना था कि ‘धारा 370 के हटने से कश्मीर में खून की नदियाँ बह जाएंगी।’ लेकिन भारतीय राजनीति के चाणक्य शाह की नीतियों का यह असर रहा कि किसी ने एक कंकड़ तक उठाने की हिम्मत नहीं की।
धारा 370 को रद्द करने के बाद ही जम्मू-कश्मीर में किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम 2015 के तहत बाल कल्याण समिति और किशोर न्याय बोर्ड जैसी सभी न्यायिक सेवा देने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर को स्थापित करना संभव हो पाया। संयुक्त राष्ट्र द्वारा सुझाए गए कई उपाय पहले ही लागू किए जा चुके हैं। बाल संरक्षण को लेकर सशस्त्र तथा सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बच्चों पर घातक तथा अन्य बल प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ‘पैलेट गन’ का इस्तेमाल बंद कर दिया गया है और यह भी तय किया गया है कि कोई रास्ता न रह जाने पर ही कम-से-कम अवधि के लिए बच्चों को हिरासत में लिया जाएगा।
अमित शाह की चाणक्य नीतियों का ही नतीजा है कि धारा 370 और 35A के हटने से अब भारत की दुनिया में एक अलग ही पहचान बन गई है। संयुक्त राष्ट्र की ‘बच्चे और सशस्त्र संघर्ष रिपोर्ट’ की अपमानित सूची से बाहर निकलना भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। भारत आज अमृतकाल में प्रवेश कर चुका है।
क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देगा मिथिला इनक्यूबेशन सेंटर : समीर कुमार महासेठ
उद्योग मंत्री श्री समीर कुमार महासेठ ने कहा, मिथिला इनक्यूबेशन सेंटर बनेगा मील का पत्थर
दरभंगा में उद्योग मंत्री ने किया मिथिला इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन
दरभंगा-
बिहार के उद्योग मंत्री श्री समीर कुमार महासेठ ने दरभंगा इंजिनियंरिंग कॉलेज में मिथिला इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया। उद्योग मंत्री ने कहा कि यह सेंटर मिथिला क्षेत्र में नवाचार, उद्यमिता को बढ़ावा देने एवं नए उद्यमियों के सृजन में अहम भूमिका निभायेगा। मिथिला का विकास उद्योग एवं उद्यमिता के क्षेत्र में तेजी से हो पाएगा। साथ ही उन्होंने अपनी ओर से हरसंभव मदद देने का आश्वासन दिया।
इससे पूर्व बिहार सरकार के उद्योग मंत्री श्री समीर कुमार महासेठ ने दीप प्रज्ज्वलित करके मिथिला इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया। मंगलवार 4 जुलाई को दरभंगा के लिए यह एक ऐतिहासिक घटना थी, जिसका सकारात्मक असर आने वाले दिनों में दिखेगा। अपने संबोधन में उद्योग मंत्री ने इस इनक्यूबेशन सेंटर के स्थापना के लिए प्रयासरत दरभंगा इंजिनियंरिंग कॉलेज, दरभंगा के प्राचार्य, डॉ संदीप तिवारी, श्री नवीन झा, हावर्ड विश्वविद्यालय, डॉ सविता झा, संस्थापक मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल और श्री अरविन्द झा, साफ्टवेयर इंजीनियर और संस्थापक, मिथिला एंजेल नेटवर्क के पहल और मिथिला को आर्थिक स्वाबलंबी बनाने की काफी प्रशंसा की।
इस मौके पर दरभंगा इंजिनियंरिंग कॉलेज, दरभंगा के प्राचार्य, डॉ संदीप तिवारी ने माननीय मंत्री एवं विशिष्ट अतिथियों का स्वागत मखाना मिथिला पाग एवं चादर से किया। मंत्री श्री सुमित कुमार सिंह, विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग बिहार सरकार के पिताजी स्वं नरेन्द्र सिंह जो कि पूर्व में कृषि मंत्री थे और उनका बिहार के समाज के लिए बड़ा योगदान था, के नाम पर इस सभागार का नाम नरेंद्र सिंह सभागार रखा। साथ ही उन्होंने सभी लोगों से आग्रह किया कि आगे भी सभी लोगों का सहयोग यदि मिलता रहा तो वह दिन दूर नहीं कि मिथिला के लोगों को रोजगार स्थानीय बाजार में ही उपलब्ध हो सकेगा। इसके साथ ही सी0आई0एम0पी0, पटना एवं डी0सी0ई0, दरभंगा के बीच एक समझौता ज्ञापन एम0ओ0यू0 पर हस्ताक्षर किया गया।
कार्यक्रम के दौरान राज्य सरकार के उद्योग मंत्री द्वारा कुछ लोगों को अपने क्षेत्र में उत्कृष्ठ योगदान के लिए लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। ऐसे लोगों में श्री संजय सैनी (कृषि के क्षेत्र में) श्री रोहित आनन्द एवं साकेत आनन्द को (रोबोटिक्स के क्षेत्र में) एवं श्री रौशन आरा को (पारम्परिक चूड़ी, लाह उद्योग) इस मौके पे प्रो0 डॉली सिन्हा, प्रति उप कुलपति, एल0एन0एम0यू0, दरभंगा, प्रो0 राणा सिंह (सी0आई0एम0पी0, पटना के निदेशक) एवं श्री कुमोद, (सी0ई0ओ0, बीहब के अलावा संस्थान के श्री विनायक झा, श्री अंकित कुमार, श्री ईंशात कुमार, श्री रवि रंजन कुमार, श्री प्रफुल कुमार, डा0 पूजा कुमारी एवं अन्य सभी शिक्षणगण एवं छात्रगण उपस्थित थे। मिथिला एंजेल नेटवर्क और सीएसटीस के द्वारा मिटृ को साठ हजार का योगदान मंत्री े हाथों से सौंपा गया। दरभंगा इंजीनियरिंग कॉलेज में मिथिला के उद्योगों का स्टाल एवं प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें लाह, मिथिला पेंटिंग, सत्तू, रोबोटिक रोजा टेक रोबोट, आयुर्वेद, सिक्की कला, घरेलू उद्योग के सामान थे। उद्घाटन के मौके पर महिला उद्यमियों, स्टार्ट अप, किसान मेला और शिक्षकों की ट्रेनिंग संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए गए।
जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा की सफलता को ले निकला सारथी रथ
जच्चा बच्चा की सुरक्षा के लिए संस्थागत प्रसव को दें प्राथमिकता: डॉ सिन्हा
-जननी सुरक्षा कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं को मिल रही मदद
लखीसराय-
हम सब अभी जिस माहौल मे जी रहे हैं उसमें हम सबको स्वास्थ्य मुद्दों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर संस्थागत प्रसव और सुरक्षित मातृत्व जैसे मामलों की अनदेखी नहीं की जा सकती है। संस्थागत प्रसव के माध्यम से सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से हरसंभव आवश्यक जानकारियां व सुविधाएं मुहैया करायी जा रही हैं।
संस्थातगत प्रसव संबंधी सुविधाओं के विषय में जिला के सिविल सर्जन डॉ . बीपी सिन्हा का कहना है कि सुरक्षित प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना जरूरी है। क्योंकि संस्थागत प्रसव की मदद से ही अस्पताल में प्रशिक्षित और सक्षम स्वास्थ्य कर्मी की देख –रेख में गर्भवती महिला का सुरक्षित प्रसव कराया जा सकता है। साथ ही किसी भी आपात स्थिति जैसे रक्त की अल्पता या एस्पेक्सिया जैसी समस्याओं से निपटा जा सकता है। अस्पतालों में मातृ एवं शिशु सुरक्षा के लिए सारी सुविधाएं हमेशा उपलब्ध रहती हैं। साथ ही संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए जननी सुरक्षा योजना का भी लाभ गर्भवती महिलाओं को पहुंचाया जा रहा है।
मातृ शिशु मृत्यु दर में कमी के लिए संस्थागत प्रसव जरूरी:
प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं को रोकने के लिए संस्थागत प्रसव बहुत जरूरी है। खासकर ग्रामीण इलाकों की गर्भवती महिलाओं के लिए गृह प्रसव की जगह संस्थागत प्रसव पर अभी और बल देने की जरूरत है। इसके लिए आशाओं के द्वारा उन्हें इसके फायदों के बारे में भी उचित जानकारी प्रदान की जा रही है। संस्थागत प्रसव के द्वारा मातृ एवं शिशु मृत्यु में कमी लाई जा सकती है।
संस्थागत प्रसव के लिए दी जा रही आर्थिक सहायता:
जननी सुरक्षा योजना के तहत ग्रामीण एवं शहरी दोनों प्रकार की गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने पर अलग-अलग प्रोत्साहन राशि सरकार द्वारा प्रदान की जाती है। जिसमें ग्रामीण इलाके की गर्भवती महिलाओं को 1400 रुपए एवं शहरी क्षेत्र की महिलाओं को 1000 रुपए दिए जाते हैं। साथ ही इस योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए सरकारी अस्पतालों पर संदर्भित करने के लिए आशाओं को भी प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है। जिसमें प्रति प्रसव ग्रामीण क्षेत्रों में 600 रुपये एवं शहरी क्षेत्रों के लिए प्रति प्रसव 400 रूपए आशाओं को दिए जाते हैं। इस योजना के तहत संस्थागत प्रसव पर आम लोगों के बीच जागरूकता बढ़ रही है।
योजना से गर्भवती को लाभ: इस योजना के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं को प्रोत्साहन राशि के साथ उनके बेहतर प्रसव प्रबंधन का भी ख्याल रखा जाता है। जिसमें निम्नलिखित सुविधाएं शामिल है:
सामान्य एवं सिजेरियन प्रसव की निःशुल्क व्यवस्था
निःशुल्क दवा की व्यवस्था
गर्भवती को उनके घर से लाने एवं प्रसव के बाद अस्पताल से एम्बुलेंस द्वारा घर पहुँचाने की निःशुल्क व्यवस्था
प्रशिक्षित चिकित्सक एवं नर्स के द्वारा निःशुल्क प्रसव प्रबंधन
नवजात शिशुओं में बेहतर प्रतिरक्षण हेतु शिशु जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान सुनश्चित कराने की व्यवस्था ।
दस्त से बचाव के लिए अब 15 जुलाई तक खिलाई जाएगी जिंक की गोली
बरसात के मौसम में बरतें सावधानी
राहुल, प्रियंका की घेराबंदी, ग्रुप 23 ने किया मुमताज पटेल को आगे
-रितेश सिन्हा, वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक
मरहूम कांग्रेसी दिग्गज अहमद पटेल की बेटी मुमताज पटेल इन दिनों सुर्खियों में हैं। जी-23 के नेता मुमताज को लेकर खासे सक्रिय हैं। मुमताज को राहुल-प्रियंका के साथ कांग्रेस कार्यसमिति में सदस्य व राष्ट्रीय महासचिव बनाने का कांग्रेस में खासा दवाब बनाया जा रहा है। पिछले दिनों दिल्ली मुख्यालय में छत्तीसगढ़ के नेताओं की मीटिंग के बाद अहमद ग्रुप जी-23 खासा सक्रिय दिखाई दिया। अहमद पटेल की बेटी मुमताज पटेल की एआईसीसी मुख्यालय में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, संगठन सचिव केसी वेणुगोपाल से मीटिंग करवाई गई। छत्तीसगढ़ की प्रभारी महासचिव कुमारी शैलजा, मुकुल वासनिक और एआईसीसी में कर्मचारियों के कर्ताधर्ता यतिंद्र शर्मा पूरा मोर्चा संभाले हुए थे। खड़गे, राहुल और वेणुगोपाल से मिलने के लिए एआईसीसी मुख्यालय में पहुंचकर उन्होंने अपना साफ संदेश देने की कोशिश की।
खड़गे ने एआईसीसी में बतौर अध्यक्ष आठ महीने पूरे कर लिए हैं। इस पूरी अवधि में कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में प्रचंड जीत हासिल की और सरकार का गठन भी हो गया। मगर सीडब्ल्यूसी का अब तक गठन न होने के कारण कांग्रेस में असंतोष दिखाई दे रहा है, जबकि इसके गठन को लेकर अब कोई बाधा नहीं बची है। पार्टी द्वारा पारित प्रस्ताव के अनुसार खड़गे जिसे चाहें उसे नामांकित करने के लिए अधिकृत हैं। खड़गे को आधिकारिक तौर पर 26 अक्टूबर 2022 को कांग्रेस अध्यक्ष चुन लिया गया था लेकिन एआईसीसी अधिवेशन फरवरी 2023 के कारण इसको टालने के पर्याप्त कारण थे। राहुल गांधी की अगुवाई में भारत जोड़ो यात्रा अपने पूरे शबाब पर थी। कांग्रेस ने अधिवेशन के लिए संसद के शीतकालीन और बजट सत्र समाप्त होने तक का इंतजार किया। फरवरी में ही कांग्रेस की संचालन समिति ने अपनी बैठक में निर्णय लिया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को चुनाव की बजाए सीडब्ल्यूसी को नामित करने का अधिकार दे दिया। अब खड़गे अहमद के वफादारों को दरकिनार करने के लिए भारी दवाब में है। यही एक बड़ी वजह सामने उभर कर आई है कि वे अपने पुराने बॉस के चहेतों को अनदेखा कर राहुल के दवाब में वर्किंग कमिटी का गठन कैसे कर पाएं, इस पूरे सियासी खेल में खड़गे बुरी तरह से उलझ चुके हैं।
खड़गे की परेशानी यह है कि कांग्रेसी दिग्गज तारिक अनवर, सलमान खुर्शीद, नासिर अहमद के अलावा कांग्रेस में अल्पसंख्यकों में बड़ा चेहरा बनकर उभरे इमरान प्रतापगढ़ी कांग्रेस वर्किंग कमिटी के लिए प्रबल दावेदार हैं। उनके सामने मुमताज पटेल को लाना और राहुल-प्रियंका के समक्ष खड़ा करना खड़गे के लिए एक बड़ी चुनौती है। यह उनके राजनीतिक अस्तित्व को लेकर भी बड़ा सवाल है। एक तरफ तो ग्रुप 23 का खेमा राहुल और प्रियंका को चुनाव प्रचार में उलझाए रखना चाहता है, वहीं एआईसीसी में मुमताज पटेल को बैठाकर कांग्रेस में अपनी मजबूत पकड़ भी बनाए रखना चाहता है। 2024 के लोकसभा चुनाव के पहले मुमताज को इन दोनों स्थापित नेताओं के बीच में खड़ा कर अहमद के रूतबे को बरकरार रखने की कोशिशों में यह पूरा ग्रुप जुटा हुआ है। मुमताज गुजरात के भरूच जिले की राजनीति में खासी सक्रिय हो चुकी हैं, लेकिन चुनाव जीतेंगी इसमें उनको खुद संदेह है। गुजरात विधानसभा चुनाव की पूरी तैयारी करने के बाद उन्होंने हार के डर से पैर पीछे खींच लिए थे। कर्नाटक में सरकार बनने के बाद बदले माहौल में एक बार फिर से लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपनी राजनीतिक विरासत के नाम लेकर अपनी राजनीतिक हैसियत बढ़ाना चाहती हैं। उनके पिता दिवंगत अहमद पटेल भरूच से लोकसभा चुनाव का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। राजपूत बाहुल्य ये सीट 1952 से कांग्रेस का परंपरागत सीट रही है।
संजय गांधी के जमाने में उनके खासमखास अकबर अहमद डंपी और रजिया सुल्ताना की पहल पर अहमद पटेल को 1977 में गुजरात के भरूच और बिहार के कटिहार लोकसभा सीट से तारिक अनवर को चुनाव लड़ने को कहा गया था। अहमद हवा में चुनाव जीतते रहे। 1977, 1980 और 1985 में कांग्रेस की लहर में उनको जीत हासिल हुई। 1989 के उपरांत लाख कोशिशों के बाद भी अहमद पटेल अपनी परंपरागत सीट जीतने में असफल रहे और मृत्युपर्यंत कांग्रेस पार्टी से राज्यसभा सदस्य बने रहे। अहमद को कांग्रेसियों की निबटाने की राजनीति की वजह से भरूच भाजपा का गढ़ बन गया। 1998 से भाजपा के मनसुखभाई वसावा यहां से जीतते आ रहे हैं। मगर अहमद के करीबी नेता मुमताज पटेल को भरूच से चुनाव लड़ने का मशविरा दे रहे हैं। मुमताज इसी कड़ी में एनएच 48 पर फ्लाईओवर की मांग को लेकर केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर चुकी हैं। यह पहली बार था जब वह राजनीतिक तौर पर नरेंद्र मोदी सरकार के किसी मंत्री से मिली थीं।
यूं तो पुत्र फैसल पटेल भी राजनीति में आना चाहते थे, मगर राहुल गांधी के खिलाफ खड़ी आम आदमी पार्टी के घर पर हाजिरी देने लगे। वहीं मुमताज पटेल कांग्रेस पार्टी की रायपुर अधिवेशन में शामिल हुईं, बिना किसी पद के पार्टी के बड़े दिग्गजों के साथ एक सत्र के लिए मंच भी साझा किया। उनके सियासी रसूख के आगे खड़गे भी नतमस्तक होकर खड़े हैं। रायपुर अधिवेशन में पारित प्रस्ताव के अंतर्गत खड़गे मुमताज को कांग्रेस वर्किंग कमिटी फिट करना चाहते हैं जिन्होंने कहा था कि 50 प्रतिशत में महिला, युवा और अल्पसंख्यक तीनों कैटगरी में फिट बैठती हैं। खड़गे मुमताज को गुजरात की राजनीति में कोई असुविधा न हो, इसके लिए उन्होंने अहमद पटेल के करीबी और राज्यसभा सांसद शक्ति सिंह गोहिल को पहले ही गुजरात पीसीसी अध्यक्ष बना चुके हैं। वे गु्रप 23 के सभी सदस्यों को कांग्रेस में महत्वपूर्ण पदों पर एडजस्ट करना चाहते हैं ताकि गांधी परिवार पर दवाब दे सकें। इसमें उनके सहयोगी मुकुल वासनिक, कुमारी शैलजा, मधुसुदन मिस्त्री, आनंद शर्मा, मोहन प्रकाश, मणिक राव ठाकरे और अविनाश पांडे पूरा सहयोग दे रहे हैं। इन सबके कार्डिनेटर बने एआईसीसी में यतिन्द्र शर्मा अपने पूर्व आका अहमद पटेल की कमान संभाले हुए हैं।
खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाली मुमताज की अब राजनीतिक महत्वाकांक्षा बढ़ चुकी है। अहमद पटेल के निधन के बाद मुमताज ने उनकी राजनीतिक उत्तराधिकारी बनने से इंकार किया था, तब उनका पूरा परिवार बेटे फैसल पटेल के पीछे खड़ा था, लेकिन वो आरोप लगाने से भी नहीं चुके कि कांग्रेस उन्हें तरजीह नहीं दे रही और केजरीवाल का दामन पकड़ अपना राजनीतिक सफर तय करने की नाकामयाब कोशिश भी की। मुमताज पटेल के कारोबारी पति इरफान सिद्दीकी का घर और ऑफिस पर ईडी के निशाने पर है। गुजरात के फार्मास्युटिकल फर्म और स्टर्लिंग बायोटेक धोखाधड़ी मामले को लेकर इरफान के खिलाफ ये कार्रवाई हुई थी। स्टर्लिंग बायोटेक के प्रमोटरों नितिन संदेसरा, चेतन संदेसरा और दीप्ति संदेसरा पर बैंकों से 14,500 करोड़ रुपए के फ़र्जीवाड़ा का आरोप लगे थे। सीबीआई ने स्टर्लिंग बायोटेक और इसके प्रमोटरों के ख़लिफ़ बैंको से 5,383 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था। खुद को राजनीति में लाने का मकसद पति पर लगे घोटाले और फर्जीवाड़े के आरोप का राजनीतिक लाभ उठाना भी है, वहीं राहुल से मिलने में नाकामयाब और हाशिए पर खड़ा ग्रुप 23 इसे राहुल-प्रियंका की लड़ाई में ढाल बनाकर अपना राजनीतिक कामयाब बनाना चाहता है। यही वजह है कि खड़गे की आड़ में यह समूह खुद को एआईसीसी में महत्वपूर्ण पदों पर काबिज बनाए रखना चाहता है। देखना है कि इस दिलचस्प सियासी दांव-पेंच में कौन किस पर भारी पड़ता है।