बिहार के छह जिलों में सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन कार्यक्रम का प्रधानमंत्री आज वर्चुअली करेंगे उद्घाटन

0

– सिकल सेल बीमारी से बिहार भी आंशिक रूप से प्रभावित
– 2047 तक उन्मूलन का है लक्ष्य

पटना-

भारत के 17 राज्यों में एक साथ वर्चुअल माध्यम से शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नेशनल सिकल सेल डिजीज मिशन 2047 की शुरूआत मध्यप्रदेश के साहडोल से करेंगे। जिन राज्यों मे नेशनल सिकल सेल डिजीज मिशन की शुरुआत होगी उसमें बिहार के छह जिले ( पश्चिम चंपारण, पूर्णिया, बांका, सिवान, जमुई व कटिहार) शामिल है। 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में कुल आदिवासी/ जनजातियों की संख्या करीब 13 लाख, 36 हजार पांच सौ 73 है। इस मिशन के अलावा प्रधानमंत्री नेशनल सिकल सेल डिजीज के नेशनल पोर्टल व हेल्थ वर्कर के लिए ट्रेनिंग मटेरियल का भी लोकार्पण करेंगे। ब्लड सेल के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ एनके गुप्ता ने बताया कि सिकल सेल रोग एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है। यह आनुवांशिक बीमारी है, जिसमें व्यक्ति के रक्त कणों के आकार विकृत होकर हसुएं जैसा हो जाता है। यह बीमारी सामान्य रूप से आदिवासी /जनजाति में पाई जाती है। यह रोग हमारी जनजातियों के भविष्य और अस्तित्व के सामने बहुत बड़ा खतरा है। इसलिए इसे रोकने के लिए वित्त वर्ष 2023-24 के केंद्रीय बजट में, राष्ट्रीय अभियान सिकल सेल एनीमिया एलिमिनेशन मिशन 2047 शुरू करने की घोषणा की गयी। यह योजना देश के 17 राज्यों में चलाया जाएगा। इसमें 13 राज्य में इसके अधिक प्रसार वाले क्षेत्र में आते हैं वहीं बिहार सहित असम, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश में इसका आंशिक प्रसार देखा गया है।
2047 है उन्मूलन वर्ष
भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने जनजातीय मंत्रालय और राज्यों के साथ मिलकर अगले 2-3 साल में देश के 17 राज्यों के लगभग 165 जिलों में बस रही 0-40 साल से आयु वाली 7 करोड़ जनसख्ंया को 3 साल में स्क्रीनिंग कर अमृतकाल में 2047 तक सिकल सेल बीमारी को खत्म करने की योजना बनाई है। स्क्रीनिंग के बाद सभी को उनकी स्थानीय भाषा में स्मार्ट कार्ड दिया जाएगा, जिससे शादी करने वाले लड़का और लड़की को आसानी से पता चल सकेगा कि शादी के बाद होने वाले बच्चों में सिकल सेल से ग्रस्त होने की संभावना कितनी है,ताकि उचित निर्णय लिया जा सके।
इस पूरे कार्यक्रम को चलाने के लिए, जनभागीदारी को सुनिश्चित करने और बड़े पैमाने पर जागरूकता लाने के लिए अलग अलग स्तर पर मॉनिटरिंग मेकेनिज्म बनाया जाएगा। स्क्रीनिंग में बीमार पाए जाने वाले लोगों को नियमित रूप से टेस्टिंग हो, उपचार और दवाई मिले, अन्य रोगों की वैक्सीन लगे, डाइट सपोर्ट मिले और समय – समय पर काउंसिलिंग की सुविधा मिलती रहे, वह भी सुनिश्चित किया जाएगा।
वृहत कार्ययोजना पर किया जा रहा काम
सिकल सेल रोग से पीड़ित व्यक्ति को बहुत सारी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं, जिनमें शरीर में दर्द रहना, कमजोरी रहना और खून की कमी जैसे कारणों से मरीज का पूरा जीवन बीमारी के बीच काटता हैं। सिकल सेल एनिमिया रोग को खत्म करने के लिए दो पहल पर कार्य किया जा रहा है। जिसमें पहला है – इस रोग की रोकथाम, ताकि आगे नए मरीज पैदा न हो और जो मरीज है उसके उपचार प्रबंधन और अच्छे स्वास्थ्य सुविधा कैसे उपलब्ध हो उसके लिए वृहत कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

बिहार के छह जिलों में सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन कार्यक्रम का प्रधानमंत्री आज वर्चुअली करेंगे उद्घाटन

0

– सिकल सेल बीमारी से बिहार भी आंशिक रूप से प्रभावित
– 2047 तक उन्मूलन का है लक्ष्य

बांका-

भारत के 17 राज्यों में एक साथ वर्चुअल माध्यम से शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नेशनल सिकल सेल डिजीज मिशन 2047 की शुरूआत मध्यप्रदेश के साहडोल से करेंगे। जिन राज्यों मे नेशनल सिकल सेल डिजीज मिशन की शुरुआत होगी उसमें बिहार के छह जिले ( बांका ,पश्चिम चंपारण, पूर्णिया, , सिवान, जमुई व कटिहार) शामिल है। 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में कुल आदिवासी/ जनजातियों की संख्या करीब 13 लाख, 36 हजार पांच सौ 73 है। इस मिशन के अलावा प्रधानमंत्री नेशनल सिकल सेल डिजीज के नेशनल पोर्टल व हेल्थ वर्कर के लिए ट्रेनिंग मटेरियल का भी लोकार्पण करेंगे। ब्लड सेल के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ एनके गुप्ता ने बताया कि सिकल सेल रोग एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है। यह आनुवांशिक बीमारी है, जिसमें व्यक्ति के रक्त कणों के आकार विकृत होकर हसुएं जैसा हो जाता है। यह बीमारी सामान्य रूप से आदिवासी /जनजाति में पाई जाती है। यह रोग हमारी जनजातियों के भविष्य और अस्तित्व के सामने बहुत बड़ा खतरा है। इसलिए इसे रोकने के लिए वित्त वर्ष 2023-24 के केंद्रीय बजट में, राष्ट्रीय अभियान सिकल सेल एनीमिया एलिमिनेशन मिशन 2047 शुरू करने की घोषणा की गयी। यह योजना देश के 17 राज्यों में चलाया जाएगा। इसमें 13 राज्य में इसके अधिक प्रसार वाले क्षेत्र में आते हैं वहीं बिहार सहित असम, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश में इसका आंशिक प्रसार देखा गया है।
2047 है उन्मूलन वर्ष
भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने जनजातीय मंत्रालय और राज्यों के साथ मिलकर अगले 2-3 साल में देश के 17 राज्यों के लगभग 165 जिलों में बस रही 0-40 साल से आयु वाली 7 करोड़ जनसख्ंया को 3 साल में स्क्रीनिंग कर अमृतकाल में 2047 तक सिकल सेल बीमारी को खत्म करने की योजना बनाई है। स्क्रीनिंग के बाद सभी को उनकी स्थानीय भाषा में स्मार्ट कार्ड दिया जाएगा, जिससे शादी करने वाले लड़का और लड़की को आसानी से पता चल सकेगा कि शादी के बाद होने वाले बच्चों में सिकल सेल से ग्रस्त होने की संभावना कितनी है,ताकि उचित निर्णय लिया जा सके।
इस पूरे कार्यक्रम को चलाने के लिए, जनभागीदारी को सुनिश्चित करने और बड़े पैमाने पर जागरूकता लाने के लिए अलग अलग स्तर पर मॉनिटरिंग मेकेनिज्म बनाया जाएगा। स्क्रीनिंग में बीमार पाए जाने वाले लोगों को नियमित रूप से टेस्टिंग हो, उपचार और दवाई मिले, अन्य रोगों की वैक्सीन लगे, डाइट सपोर्ट मिले और समय – समय पर काउंसिलिंग की सुविधा मिलती रहे, वह भी सुनिश्चित किया जाएगा।
वृहत कार्ययोजना पर किया जा रहा काम
सिकल सेल रोग से पीड़ित व्यक्ति को बहुत सारी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं, जिनमें शरीर में दर्द रहना, कमजोरी रहना और खून की कमी जैसे कारणों से मरीज का पूरा जीवन बीमारी के बीच काटता हैं। सिकल सेल एनिमिया रोग को खत्म करने के लिए दो पहल पर कार्य किया जा रहा है। जिसमें पहला है – इस रोग की रोकथाम, ताकि आगे नए मरीज पैदा न हो और जो मरीज है उसके उपचार प्रबंधन और अच्छे स्वास्थ्य सुविधा कैसे उपलब्ध हो उसके लिए वृहत कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

नीतीश कुमार 20 लाख करोड़ के भ्रष्टाचार करने वाली पार्टियों के साथ बैठकर सत्ता हथियाने का प्रयास कर रहे हैं: शाह

0

पटना-

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार यानि पलटू बाबू‘ की आलोचना करते हुए कहा कि, ‘20 लाख करोड़ रुपये के घोटालों के लिए जिम्मेदार20 भ्रष्ट राजनीतिक दलों के समर्थन से प्रधानमंत्री बनने का नीतीश कुमार का सपना चकनाचूर हो जाएगा।

केंद्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 9 साल पूरे होने पर भाजपा के चुनावी रणनीतिकार बिहार के लखीसराय जिले में एक विशाल रैली को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बिहार के लोगों से केंद्र में प्रधानमंत्री मोदी के तीसरे कार्यकाल को सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक रूप से भाजपा के पक्ष में मतदान करने का आग्रह किया। 2024 के चुनावी तैयारियों के लिए नीतीश कुमार की मेजबानी में पिछले हफ्ते पटना में 20 विपक्षी दलों का महाजुटान हुआ था। यह साबित करता है किकिसी भी एक पार्टी में इतना दम नहीं कि मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को हरा सके। यह सच है कि अलग-अलग विचारधारा वाली 20 से अधिक पार्टियाँ एक साथ आने को सहमत हुईंलेकिन देश की जनता जानती है कि ये पार्टियाँ 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक के घोटालों के लिए जिम्मेदार हैं।

गिरगिट की तरह बार-बार रंग बदलने वाले नीतीश कुमार पर बिहार की जनता का भरोसा खत्म हो चुका है। इंदिरा गांधी के खिलाफ राजनीति शुरू करने वाले और लालू के चारा घोटाला का विरोध कर चमकने वाले नीतीश कुमार सत्ता की लालच में वापस राजद और कांग्रेस घर में बैठ गए हैं। बिहार की बागडोर ऐसे नेता के हाथों में हैजो कभी भाजपा के साथ मिलकर बिहार के मुख्यमंत्री बन जाते हैं तो कभी कांग्रेस और राजद के साथ मिलकर देश का प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं। यह तो तय है कि वह प्रधानमंत्री नहीं बन सकतेलेकिन बिहार की राजनीति में बने रहने के लिए इस उम्र में सिर्फ लालू यादव की आँखों में धूल झोंक कर उन्हें मूर्ख बना रहे हैं। यही वजह है कि उन्होंने भाजपा के सभी प्रतिद्वंद्वियों को एकजुट कर लिया है। एक सवाल तो नीतीश कुमार से भी किया जा सकता है किइतने वर्षों से बिहार के मुख्यमंत्री पद पर हैंलेकिन राज्य में विकास के बदले गुंडाराज क्यों कायम हो गया हैबालूहथियार और शराब माफिया ने फिर से सिर क्यों उठा लिया है।

शाह ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा और पिछले 20 साल से अपने पूर्व सांसद राहुल गांधी को लॉन्च करने के लिए उसका मजाक उड़ाया।। उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस एक अजीब पार्टी है। राजनीति में किसी नेता को लॉन्च करना अनसुनी बात है। भाजपा एक ऐसी पार्टी हैजहाँ किसी नेता को लॉन्च नहीं किया जाताबल्कि जनता उसे लॉन्च करती है। लेकिन कांग्रेस 20 साल से राहुल बाबा को लॉन्च कर रही है और बार-बार उन्हें असफलता का स्वाद चखना पड़ता है।

देश की जनता जानती है कि पिछले 9 साल में मोदी जी के नेतृत्व और अमित शाह के मार्गदर्शन में ढ़ेरों कार्य हुए हैं। आज देश अमृतकाल में प्रवेश कर चुका है। एक नए भारत का निर्माण हो रहा है और दुनिया में भारत को नई पहचान मिल रही है। हालिया विदेश यात्राओं में मोदी जी को जो सम्मान मिला है वह पूरे देश का सम्मान है।

*सीए डॉ. शंकर घनश्यामदास अंदानी को 3 अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों से मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त हुई

0
यूरो एशियन यूनिवर्सिटी, सेंट्रल क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी और इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट एंड रिसर्च टेक्नोलॉजी ने टैक्सेशन, अकाउंटेंसी, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, परोपकार और उद्यमिता के क्षेत्र में असाधारण योगदान को मान्यता देते हुए सीए डॉ. शंकर घनश्यामदास अंदानी को मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट और सामाजिक कार्यकर्ता सीए डॉ. शंकर घनश्यामदास अंदानी के नाम आज 42 विश्व रिकॉर्ड हैं और उन्हें अपने सामाजिक कार्यों के लिए अब तक 1696 अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
इस विषय पर फेम फाइंडर्स ने पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. शंकर घनश्यामदास अंदानी से बात की। डॉ. अंदानी एक चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म साई एंड कंपनी चलाते हैं। जिसका कार्यालय महाराष्ट्र के अहमदनगर में स्थित है। 2006 में, जब वे प्रैक्टिस कर ही रहे थे, तब उन्होंने सीए की परीक्षा पास की। चार्टर्ड अकाउंटेंट में शामिल होने से पहले, उन्होंने कराधान में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में सहायक प्रोफेसर के रूप में काम किया।
अंतर्राष्ट्रीय कराधान में कराधान का गहन ज्ञान प्राप्त करने के लिए, उन्हें श्री साईं बाबा ट्रस्ट, शिरडी- (भारत में नंबर 2 चैरिटेबल ट्रस्ट) के लिए आयकर और जीएसटी सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया था, जो वह पिछले 15 वर्षों से कर रहे हैं। रहा
कलेक्टर कार्यालय, जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय और नगर निगम ने साईं एंड कंपनी को उनके समर्पण और कड़ी मेहनत के कारण उनके पहले वर्ष से किए गए उत्कृष्ट कार्यों की मान्यता देते हुए महत्वपूर्ण कार्य सौंपे हैं।
डॉ. अंदानी पिछले 16 वर्षों से अभ्यास कर रहे हैं और उनके पास व्यापक कार्य अनुभव है।डॉ. अंदानी की सामाजिक कार्यों में रुचि के कारण वह पिछले 15 वर्षों से हर साल 200 से अधिक ट्रस्टों, गैर सरकारी संगठनों, मंदिरों और मस्जिदों, चर्चों के लिए मुफ्त कर और लेखा परामर्श कार्य कर रहे हैं।
भारतीय रिज़र्व बैंक हर साल सीए फर्मों को उनके अभ्यास कार्य और अनुभव के अनुसार 1 से 4 श्रेणियों में वर्गीकृत करता है। इस वर्गीकरण के अनुसार ‘साई एंड कंपनी’ आरबीआई के पैनल में शामिल “श्रेणी 1” सीए है। दृढ़ है. राज्य स्तरीय निगम विभाग में, जो सहकारी बैंकों, क्रेडिट समितियों और अन्य सहकारी दूध और आवास समितियों को नियंत्रित करता है, वह सरकारी कार्यालय सीए फर्मों को उनके अभ्यास कार्य और अनुभव के अनुसार ‘ए से ‘डी’ श्रेणियों में वर्गीकृत करता है और इन इस वर्गीकरण में (डॉ.) शंकर घनश्‍यामदास अंदानी की फर्म ‘साई एंड कंपनी’ ने “श्रेणी ए-1” सीए को सूचीबद्ध किया है।

बच्चों के संतुलित पोषण से बौनेपन में आयेगी कमी

0

-छह माह के बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार है जरूरी

लखीसराय / 29 जून –

बेहतर मातृ एवं शिशु पोषण हमेशा से ही एक चुनौती रही है। मातृ एवं शिशुओं को कुपोषण के दंश से बचाने के लिए पोषण पर ध्यान देना उतना ही जरूरी है जितना एक शरीर के लिए शुद्ध हवा।
सिविल सर्जन डॉ बीपी सिन्हा बताते हैं सही और संतुलित पोषण न मिलने से बच्चे बौनेपन के शिकार हो जाते हैं। इसलिए प्रसव के एक घन्टे के भीतर ही शिशु को स्तनपान जरूर कराना चाहिए। इससे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। जबकि शिशु जन्म के 6 महीने तक बच्चे को केवल स्तनपान ही कराना चाहिए। इस दौरान ऊपर से पानी भी शिशु को नहीं देना चाहिए।
छह माह के बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार है जरूरी : डॉ. सिन्हा ने बताया कि 6 माह के बाद बच्चों में शारीरिक एवं मानसिक विकास तेजी से शुरू हो जाता है। इसलिए 6 माह के बाद सिर्फ स्तनपान से जरूरी पोषक तत्व बच्चे को नहीं मिल पाता है। इसलिए छ्ह माह के उपरान्त अर्धठोस आहiर जैसे खिचड़ी, गाढ़ा दलिया, पका हुआ केला एवं मूंग का दाल दिन में तीन से चार बार जरूर देना चाहिए। दो साल तक अनुपूरक आहार के साथ माँ का दूध भी पिलाते रहना चाहिए। ताकि शिशु का पूर्ण शारीरिक एवं मानसिक विकास हो पाए। उन्होंने बताया कि उम्र के हिसाब से ऊँचाई में वांछित बढ़ोतरी नहीं होने से शिशु बौनेपन का शिकार हो जाता है। इसे रोकने के लिए शिशु को स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार जरूर देना चाहिए।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सूर्यगढ़ा के प्रभारी डॉ वाई .के दिवाकर ने बताया पहले 1000 दिन नवजात के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है। जो कि महिला के गर्भधारण करने से प्रारम्भ हो जाते हैं। आरंभिक अवस्था में उचित पोषण नहीं मिलने से बच्चों का शारीरिक एवं बौद्धिक विकास अवरुद्ध हो सकता है। जिसकी भरपाई बाद में नहीं हो पाती है। शिशु जन्म के बाद पहले वर्ष का पोषण बच्चों के मस्तिष्क और शरीर के स्वस्थ विकास और प्रतिरोधकता बढ़ाने में बुनियादी भूमिका निभाता है। शुरुआत के 1000 दिनों में बेहतर पोषण सुनश्चित होने से मोटापा और जटिल रोगों से भी बचा जा सकता है।
डॉ दिवाकर ने बताया गर्भावस्था के दौरान महिला को प्रतिदिन के भोजन के साथ आयरन और फॉलिक एसिड एवं कैल्सियम की गोली लेना भी जरूरी है। एक गर्भवती महिला को अधिक से अधिक आहार सेवन में विविधता लानी चहिए। गर्भावस्था में बेहतर पोषण शिशु को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है। गर्भावस्था के दौरान आयरन और फॉलिक एसिड के सेवन से महिला एनीमिया से सुरक्षित रहती एवं इससे प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव से होने वाली जटिलताओं से भी बचा जा सकता है। वहीँ कैल्सियम का सेवन भी गर्भवती महिलाओं के लिए काफ़ी जरूरी है। इससे गर्भस्थ शिशु के हड्डी का विकास पूर्ण रूप से हो पाता एवं जन्म के बाद हड्डी संबंधित रोगों से शिशु का बचाव भी होता है।

सीए डॉ. शंकर घनश्यामदास अंदानी को एग्रोकेयर कृषिमंच नासिक द्वारा लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड मिलेगा

0

एग्रोकेयर कृषिमंच संस्था नासिक द्वारा 2 जुलाई 2023 को होटल पंचवड़ प्राइड, नासिक में कई राष्ट्रीय गणमान्य व्यक्तियों द्वारा कृषि प्रेरणा पुरस्कार का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में सीए (डॉ.) शंकर घनश्‍यामदास अंदानी को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा.

चार्टर्ड अकाउंटेंट और सामाजिक कार्यकर्ता सीए डॉ. शंकर घनश्यामदास अंदानी के नाम आज 42 विश्व रिकॉर्ड हैं और उन्हें अपने सामाजिक कार्यों के लिए अब तक 1696 अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
इस विषय पर फेम फाइंडर्स ने पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. शंकर घनश्यामदास अंदानी से बात की। डॉ. अंदानी एक चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म साई एंड कंपनी चलाते हैं। जिसका कार्यालय महाराष्ट्र के अहमदनगर में स्थित है। 2006 में, जब वे प्रैक्टिस कर ही रहे थे, तब उन्होंने सीए की परीक्षा पास की। चार्टर्ड अकाउंटेंट में शामिल होने से पहले, उन्होंने कराधान में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में सहायक प्रोफेसर के रूप में काम किया।

अंतर्राष्ट्रीय कराधान में कराधान का गहन ज्ञान प्राप्त करने के लिए, उन्हें श्री साईं बाबा ट्रस्ट, शिरडी- (भारत में नंबर 2 चैरिटेबल ट्रस्ट) के लिए आयकर और जीएसटी सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया था, जो वह पिछले 15 वर्षों से कर रहे हैं। रहा

कलेक्टर कार्यालय, जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय और नगर निगम ने साईं एंड कंपनी को उनके समर्पण और कड़ी मेहनत के कारण उनके पहले वर्ष से किए गए उत्कृष्ट कार्यों की मान्यता देते हुए महत्वपूर्ण कार्य सौंपे हैं।

डॉ. अंदानी पिछले 16 वर्षों से अभ्यास कर रहे हैं और उनके पास व्यापक कार्य अनुभव है।डॉ. अंदानी की सामाजिक कार्यों में रुचि के कारण वह पिछले 15 वर्षों से हर साल 200 से अधिक ट्रस्टों, गैर सरकारी संगठनों, मंदिरों और मस्जिदों, चर्चों के लिए मुफ्त कर और लेखा परामर्श कार्य कर रहे हैं।

भारतीय रिज़र्व बैंक हर साल सीए फर्मों को उनके अभ्यास कार्य और अनुभव के अनुसार 1 से 4 श्रेणियों में वर्गीकृत करता है। इस वर्गीकरण के अनुसार ‘साई एंड कंपनी’ आरबीआई के पैनल में शामिल “श्रेणी 1” सीए है। दृढ़ है. राज्य स्तरीय निगम विभाग में, जो सहकारी बैंकों, क्रेडिट समितियों और अन्य सहकारी दूध और आवास समितियों को नियंत्रित करता है, वह सरकारी कार्यालय सीए फर्मों को उनके अभ्यास कार्य और अनुभव के अनुसार ‘ए से ‘डी’ श्रेणियों में वर्गीकृत करता है और इन इस वर्गीकरण में (डॉ.) शंकर घनश्‍यामदास अंदानी की फर्म ‘साई एंड कंपनी’ ने “श्रेणी ए-1” सीए को सूचीबद्ध किया है।

बघेल सरकार वादाखिलाफी करने वाली सरकार है: अमित शाह

0

नईदिल्ली-

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के दुर्ग में जय श्रीराम के उद्घोष के साथ एक जनसभा को संबोधित किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार के 9 साल की उपलब्धियों को गिनाते हुए शाह ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर सीधा निशाना साधा और कहा, ‘शराबबंदी की घोषणा कर होम डिलीवरी देने का काम करने वाली प्रदेश की बघेल सरकार वादाखिलाफी करने वाली सरकार है। रेडी टू ईट बनाने वाली 22 हजार महिलाओं की नौकरी चली गई। प्रदेश के ऊपर एक लाख करोड़ रुपये का कर्जा चढ़ गया। तेंदूपत्ता का 500 करोड़ रुपये गरीब आदिवासियों का बकाया है। एक लाख नौकरी की बात कही, लेकिन नहीं दी।’
इतिहास गवाह है कि कांग्रेस के शासन में वामपंथी उग्रवाद चरम पर था। लेकिन आज वामपंथी उग्रवाद को नियंत्रित किया जा चुका है। साथ ही, जिस राम मंदिर मुद्दे और धारा 370 को कांग्रेस ने अपने जमाने में फलने-फूलने का मौका दिया तथा आजादी के 70 साल बाद तक सहेज कर रखा, उन सभी मुद्दों को हल करने का काम पिछले 9 साल में मोदी जी के नेतृत्व एवं शाह के कुशल मार्गदर्शन में ही संभव हो पाया है। एयर स्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए आतंकवाद का सफाया किस तरह किया गया, यह किसी से छुपा नहीं है। जम्मू-कश्मीर आज शांति और विकास के पथ पर अग्रसर है, वहीं 2024 में प्रभु श्री राम का भव्य मंदिर तैयार हो जाएगा और श्रद्धालु रामलला का दर्शन कर सकेंगे।
भाजपा के दिग्गज नेता शाह ने आँकड़ों का उदाहरण देते हुए कहा कि, ‘सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह ने 10 साल शासन किया। इस दौरान 12 लाख करोड़ का घोटाला किया। छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल सरकार भी घोटाले-पर-घोटाले कर रही है। शराब घोटाला 2000 करोड़, परिहन कोयला घोटाला 500 करोड़, गौठान घोटाला 1300 करोड़, पब्लिक सर्विस कमीशन घोटाला के साथ-साथ कारोना सेस लगाया, पर खर्च नहीं किया। आदिवासी बच्चे इलाज के अभाव में मारे गए। संरक्षित जनजाति के सैकड़ों लोग कुपोषण का शिकार बने। एक हजार किसानों ने आत्महत्या की। प्रदेश में 5000 से ज्यादा दुष्कर्म हुए। यह सरकार हर मोर्चे पर असफल रही है।
अंत में, शाह ने भरोसा जताया कि 2014 के लोकसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ की जनता ने 11 में से 10 सीटें और 2019 में 11 सीटें देने का काम किया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी छत्तीसगढ़ की जनता एक बार फिर से मोदी जी को प्रधानमंत्री बनाने में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

 

नाईट ब्लड सर्वे का उत्सव में तब्दील होना फाइलेरिया उन्मूलन की राह करेगा आसान

0

• राज्य के 14 जिलों में प्रखंड स्तर पर किया जा रहा नाईट ब्लड सर्वे
• फाइलेरिया के अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी ने टीम के साथ रात्रि में किया दौरा
• राज्य स्तरीय नेतृत्व नाईट ब्लड सर्वे को सफ़ल बनाने में जुटा
• देश में लगभग 65 करोड़ आबादी फाइलेरिया संक्रमण के ख़तरे में

पटना-

देश से 2027 तक फाइलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को साकार करने में बिहार की भूमिका महत्वपूर्ण साबित होने वाली है. देश को 14 दिनों का एमडीए प्लान मुहैया करा कर बिहार पहले ही फाइलेरिया उन्मूलन की प्रतिबद्धता प्रदर्शित कर चुका है. फाइलेरिया उन्मूलन में नाईट ब्लड सर्वे पहली कड़ी के रूप में जाना जाता है. जिसके तहत रात्रि में 8.30 बजे से 12 बजे तक लोगों के ब्लड सैंपल माइक्रो फाइलेरिया दर का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है. माइक्रो फाइलेरिया दर से यह मालूम होता है कि उक्त क्षेत्र में फाइलेरिया प्रसार न्यूनतम स्तर तक आया है या नहीं. इससे ही एमडीए चलाने की जरूरत भी तय होती है.
राज्य में आगामी 10 अगस्त से 14 जिलों में एमडीए कार्यक्रम चलाया जाना है. इसके पूर्व इन सभी जिलों में प्रखंड स्तर पर नाईट ब्लड सर्वे किया जा रहा है. इसी क्रम में फाइलेरिया के अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. परमेश्वर प्रसाद एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्टेट एनटीडी कोऑर्डिनेटर डॉ. राजेश पांडेय सक्रिय रूप से पटना में नाईट ब्लड सर्वे साईट का पर्यवेक्षण कर इसकी गुणवत्ता को सुनश्चित करने में जुटे है. गुरूवार की रात में डॉ. परमेश्वर प्रसाद एवं डॉ. राजेश पांडेय के साथ सेंटर फॉर एडवोकेसी के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक रणविजय कुमार ने फुलवारी शरीफ़ के गोनपुरा पंचायत स्थित नाईट ब्लड सर्वे साईट का दौरा किया. इस साईट को गुब्बारे से सजा कर इसे एक उत्सव में बदलने की कोशिश की गयी थी. जिसमें फाइलेरिया पेशेंट सपोर्ट नेटवर्क के साथ स्थानीय लोगों एवं स्वास्थ्य कर्मियों ने सहयोग किया.
स्वाथ्यकर्मियों को दिया जरुरी दिशा-निर्देश:
फाइलेरिया के अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. परमेश्वर प्रसाद ने साईट दौरे के दौरान सैंपल कलेक्शन में जुटे लैब टेकनीशियन को सैंपल कलेक्शन करने में तकनीकी बातों का ख्याल रखने की सलाह दी. वहीं, उन्होंने कहा कि नाईट ब्लड सर्वे की सफलता एमडीए कार्यक्रम को प्रभावी रूप से संचालित करने के लिए बेहद जरुरी है. इस लिहाज से नाईट ब्लड सर्वे की गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी उतना ही जरुरी है. उन्होंने इस दौरान एनएनएम, आशा एवं आशा फैसिलिटेटर से भी नाईट ब्लड सर्वे एवं एमडीए को लेकर चर्चा की एवं उन्हें जरुरी दिशा-निदेश भी दिए.
देश में लगभग 65 करोड़ आबादी फाइलेरिया के खतरे में:
इस दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्टेट एनटीडी कोऑर्डिनेटर डॉ. राजेश पांडेय ने साईट पर उपस्थित स्वास्थ्यकर्मियों को जानकारी देते हुए बताया कि देश में लगभग 65 करोड़ की आबादी फाइलेरिया के ख़तरे में हैं. इससे बचाव का एमडीए ही एक मात्र उपाय है. उन्होंने कहा कि फाइलेरिया के परजीवी किसी के भी शरीर में मौजूद रह सकते हैं. शरीर में मौजूद फाइलेरिया परजीवी की पहचान सिर्फ नाईट ब्लड सर्वे के द्वारा ही संभव है. उन्होंने इसके बाद नाईट ब्लड सर्वे की उपयोगिता, गुणवत्ता सुनिश्चित करने की तकनीकी पक्ष सहित एमडीए पर भी स्वास्थ्यकर्मियों को जानकारी दी.
इस दौरान पेशेंट सपोर्ट नेटवर्क से पटेल पंडित, जितेन्द्र एवं रविन्द्र ने डॉ. परमेश्वर एवं डॉ. राजेश के साथ फाइलेरिया उन्मूलन की रणनीति पर चर्चा भी किया

फाइलेरिया उन्मूलन •नाइट ब्लड सर्वे शुरू,सामुदायिक स्तर पर लोगों के रक्त का लिया जा रहा सैंपल

0

– मेडिकल टीम चिह्नित क्षेत्रों में एक-एक व्यक्ति से संपर्क कर ले रही है सैंपल
– 28 जून तक चलेगा कार्यक्रम, सफलता को लेकर एक्शन प्लान तैयार

लखीसराय-

फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर जिले में मंगलवार की देर रात से नाइट ब्लड सर्वे कार्यक्रम (रात्रि रक्तपट्ट संग्रह) का शुभारंभ हो गया। जिसका समापन 28 जून को होगा। इस दौरान गठित मेडिकल टीम द्वारा चिह्नित क्षेत्रों में हर व्यक्ति से संपर्क कर रक्त का सैंपल लिया जाएगा। ताकि संबंधित मरीजों को समुचित जाँच सुनिश्चित हो सके और शुरुआती दौर में ही बीमारी की सही जानकारी मिल सके। इससे ना सिर्फ मरीजों का समसय इलाज शुरू होगा बल्कि, फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को भी गति मिलेगी। इसी उद्देश्य के साथ जिले में नाइट ब्लड सर्वे कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया है। कार्यक्रम की सफलता को लेकर मेडिकल टीम ने पूरी ताकत झोंक दी है । शत-प्रतिशत लोगों की सैम्पलिंग सुनिश्चित कराने को लेकर व्यापक तैयारी की गई है। इस दौरान सर्वे कर रही मेडिकल टीम द्वारा सामुदायिक स्तर पर लोगों को इस कार्यक्रम के उद्देश्य समेत फाइलेरिया से बचाव, इसके कारण, लक्षण और उपचार की भी जानकारी दी जा रही है।

– फाइलेरिया से बचाव के लिए शुरुआती दौर में ही बीमारी की जानकारी जरूरी, जरूर कराएं जाँच –
अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया, फाइलेरिया से बचाव के लिए शुरूकआती दौर में ही बीमारी की सही जानकारी जरूरी है। यह तभी संभव है, जब शुरुआती यानी लक्षण दिखते जाँच करायी जाएगी। इसलिए, मैं तमाम आमजनों से अपील करता हूँ कि निश्चित रूप से जाँच कराएं और फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी के प्रभाव से दूर रहें। उन्होंने बताया, रात के 08 बजे से 12 बजे के बीच इस बीमारी की जाँच करने के लिए सबसे उपयुक्त समय है। दरअसल, इस दौरान कीटाणु सक्रिय होता है। जिसके कारण आसानी के साथ शुरुआती दौर में बीमारी की सही जाँच संभव है। इसी उद्देश्य से नाइट ब्लड सर्वे कार्यक्रम का निर्णय लिया गया।

– स्थानीय जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य कर्मियों का मिल रहा सकारात्मक सहयोग :
नाइट ब्लड सर्वे कार्यक्रम को लीड कर रहे वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी गौतम प्रसाद ने बताया, कार्यक्रम के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं ,सहयोगी संस्था पीसीआई और स्वास्थ्य कर्मियों का भी सकारात्मक सहयोग मिल रहा है। कार्यक्रम के पहले दिन सभी के सहयोग से ब्लड सैम्पलिंग का कार्य अच्छा रहा । निर्धारित समय के अनुसार 08 बजे से ही कार्यक्रम शुरू हुआ और आधी रात 12 बजे तक चला। उन्होंने बताया, इस दौरान आशा कार्यकर्ता समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा अपने-अपने स्तर से भी लोगों को सैम्पलिंग के लिए जागरूक किया जा रहा है।

शेखपुरा जिले में शुरू हुआ कालाजार मरीज खोज अभियान

0

-आशा घर -घर जाकर करेंगी मरीजों की पहचान
-जिले के दो प्रखंडों में चला कालाजार खोजी अभियान

शेखपुरा –

जिले के दो प्रखंडों में कालाजार खोजी अभियान आज से शुरू हुआ है। जो लगातार पाँच दिनों तक चलेगा। इस अभियान में लगभग एक हजार घरों में संभावित मरीजों की पहचान की जाएगी। इन घरों में अगर कालाजार के लक्षण वाले संक्रमित मिलते हैं तो उसका इलाज निःशुल्क सदर अस्पताल में किया जाएगा। उक्त बातें जिला के सिविल -सर्जन डॉ .अशोक कुमार सिंह ने बतायी।
डॉ सिंह ने बताया कि आज से जिले के सदर प्रखंड शेखपुरा के ग्रामीण क्षेत्र के कोसरा के साथ गोसांईमढ़ी गाँव एवं बरबीघा के पिंजरी गाँव में कालाजार के विरुद्घ घर -घर खोजी अभियान आज से शुरू हुआ है। इस अभियान का मकसद है कि इन क्षेत्रों के कालाजार मरीज की खोज कर उनका निःशुल्क इलाज कर पुन: स्वस्थ्य जिन्दगी की राह पर वापस आना।

– सदर अस्पताल में नि:शुल्क इलाज की सुविधा है उपलब्ध :
वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी श्याम सुंदर ने बताया कालाजार मरीजों की जाँच की सुविधा जिले के सभी पीएचसी में नि:शुल्क उपलब्ध है। जबकि, सदर अस्पताल में समुचित इलाज की सुविधा उपलब्ध है। जिसके कारण संक्रमित मरीज मिलने पर उन्हें संबंधित पीएचसी द्वारा सदर अस्पताल रेफर किया जाता है। मरीजों को सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने पर श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में सरकार द्वारा 7100 रुपये की राशि दी जाती है। पीकेडीएल मरीजों को पूर्ण उपचार के बाद सरकार द्वारा 4000 रुपये श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में दिये जाने का प्रावधान है। साथ ही पाॅजिटिव मरीजों का सहयोग करने पर प्रति मरीज 500 रूपये संबंधित आशा कार्यकर्ता को दी जाती है। 15 दिनों से अधिक समय तक बुखार का होना कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। भूख की कमी, पेट का आकार बड़ा होना, शरीर का काला पड़ना कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। वैसे व्यक्ति जिन्हें बुखार नहीं हो लेकिन उनके शरीर की त्वचा पर सफेद दाग व गांठ बनना पीकेडीएल के लक्षण हो सकते हैं।

– कालाजार के लक्षण :
– लगातार रुक-रुक कर या तेजी के साथ दोहरी गति से बुखार आना।
– वजन में लगातार कमी होना।
– दुर्बलता।
– मक्खी के काटे हुए जगह पर घाव होना।
– प्लीहा में नुकसान होता है।