बड़ौदा राजस्थान क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक कर्मचारी अधिकारी यूनियन अरेबिया संबद्ध बेफी के द्वारा क्षेत्रिय कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन-आर एस गुप्ता
लखीसराय जिले में शुरू हुआ कालाजार मरीज खोज अभियान
–आशा घर -घर जाकर करेंगी मरोजों की पहचान
-जिले के चार प्रखंडों में चला कालाजार खोजी अभियान
लखीसराय-
जिले के चार प्रखंडों में कालाजार खोजी अभियान आज से शुरू हुआ है। जो आज से लगातार चार दिनों तक चलेगा। इस अभियान में लगभग दो सौ घरों में संभावित मरीजों की पहचान की जाएगी। इन घरों में अगर कालाजार के लक्षण वाले संक्रमित मिलते हैं तो उसका इलाज निःशुल्क सदर अस्पताल में किया जाएगा। उक्त बातें जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ धीरेन्द्र कुमार ने बतायी।
डॉ धीरेन्द्र ने बताया कि आज से जिले के सदर प्रखंड लखीसराय के शहरी शेत्र के वार्ड न . 01एवं वार्ड न . 10 व उसके साथ महिसोना गाँव , सूरजगढ़ा के रामपुर एवं उरेन गाँव , बरहिया के आदर्श लक्ष्मीपुर एवं पिपरिया के रामचंद्रपुर गाँव में कालाजार के विरुद्घ घर -घर खोजी अभियान आज से शुरू हुआ है। इस अभियान का मकसद है कि इन क्षेत्रों के कालाजार मरीज को तलाश कर उनका निःशुल्क इलाज कर पुन: स्वस्थ्य जिन्दगी की राह पर वापस आना।
– सदर अस्पताल में नि:शुल्क इलाज की सुविधा है उपलब्ध :
डीभीबीडी सलाहकार नरेंद्र कुमार ने बताया कालाजार मरीजों की जाँच की सुविधा जिले के सभी पीएचसी में नि:शुल्क उपलब्ध है। जबकि, सदर अस्पताल में समुचित इलाज की सुविधा उपलब्ध है। जिसके कारण संक्रमित मरीज मिलने पर उन्हें संबंधित पीएचसी द्वारा सदर अस्पताल रेफर किया जाता है। मरीजों को सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने पर श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में सरकार द्वारा 7100 रुपये की राशि दी जाती है। पीकेडीएल मरीजों को पूर्ण उपचार के बाद सरकार द्वारा 4000 रुपये श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में दिये जाने का प्रावधान है। साथ ही पाॅजिटिव मरीजों का सहयोग करने पर प्रति मरीज 500 रूपये संबंधित आशा कार्यकर्ता को दी जाती है। 15 दिनों से अधिक समय तक बुखार का होना कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। भूख की कमी, पेट का आकार बड़ा होना, शरीर का काला पड़ना कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। वैसे व्यक्ति जिन्हें बुखार नहीं हो लेकिन उनके शरीर की त्वचा पर सफेद दाग व गांठ बनना पीकेडीएल के लक्षण हो सकते हैं।
– कालाजार के लक्षण :
– लगातार रूक-रूक कर या तेजी के साथ दोहरी गति से बुखार आना।
– वजन में लगातार कमी होना।
– दुर्बलता।
– मक्खी के काटे हुए जगह पर घाव होना।
– प्लीहा में नुकसान होता है।
बीओबी संचालित ग्रामीण बैंक में पिछले तीन साल से सभी सर्वगो में भर्ती नहीं होने पर आंदोलन और तेज किया जायेगा – आर एस गुप्ता,उपाध्यक्ष
पारंपरिक गुल्लक से ‘महिला बचत सम्मान पत्र’ की ओर बढ़ती महिलाएं
बिहार के 14 जिलों में पहली बार होगा प्रखंड स्तरीय नाईट ब्लड सर्वे
-नाईट ब्लड सर्वे के उपरांत ही इन 14 जिलों के प्रखण्डों में 10 अगस्त से चलेगा एम.डी.ए. राउंड
-14 जिलों के लगभग 250 प्रखंडों में होगा नाईट ब्लड सर्वे
-72 देशों में 85.9 करोड़ आबादी फाइलेरिया के ख़तरे में
-राज्य में हाथीपांव के 1,27,201 एवं हाइड्रोसील के 17,486 मामले प्रतिवेदित
पटना-
फाइलेरिया उन्मूलन के उद्देश्य से राज्य के 14 जिलों के लगभग 250 प्रखंडों में पहली बार प्रखंड स्तरीय नाईट ब्लड सर्वे किया जाएगा. जिसमें पटना, नालंदा, भोजपुर, रोहतास, बक्सर, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, नवादा, लखीसराय, समस्तीपुर, मधेपुरा, दरभंगा एवं मधुबनी जिला शामिल है । नाईट ब्लड सर्वे के संपन्न होने के बाद ही इन्हीं 14 जिलों के चयनित प्रखण्डों में 10 अगस्त से एम.डी.ए. राउंड संचालित होगा। किसी भी क्षेत्र में माइक्रो फाइलेरिया के प्रसार की दर को जानने के लिए नाईट ब्लड सर्वे की गतिविधि संपादित की जाती है, जिसमें रात्रि 8:30 के बाद ही रक्त के नमूने को लेकर उसका परीक्षण किया जाता है
राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण विभाग ने फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में एक नई रणनीति को शामिल किया है और इसी रणनीति के तहत साल में दो बार 10 फरवरी एवं 10 अगस्त को देशभर में एक साथ एम.डी.ए. राउंड चलाने का निर्णय लिया गया था. देश की फाइलेरिया उन्मूलन की प्रतिबद्धता इस बात से भी उजागर होती है कि अब फाइलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को 2030 से घटाकर 2027 कर दिया गया है.
प्रखंड स्तरीय रणनीति साबित कारगर :
एम.डी.ए. राउंड की सफलता के लिए प्रखंड स्तर के स्वास्थ्यकर्मियों का तकनीकी प्रशिक्षण एवं निरंतर संवेदीकरण जरुरी है और इसे ही ध्यान में रखते हुए एम.डी.ए. राउंड से पूर्ण प्रखंड स्तरीय रणनीति पर जोर दिया जा रहा है. इस क्रम में प्रखंड स्तर पर फाइलेरिया क्लीनिक का निर्माण, प्रखंड स्तर पर नाईट ब्लड सर्वे एवं एम.डी.ए. के दौरान इवनिंग मीटिंग पर भी जोर दिया जा रहा है.इसी वर्ष 10 फरवरी से शुरू हुए एम.डी.ए. राउंड के पहले राज्य के 24 जिलों के 350 प्रखंडों में माइक्रो फ़ाइलेरिया प्रसार दर को जानने के लिए नाईट ब्लड सर्वे का आयोजन किया गया. जिसमें 39 प्रखंडों में माइक्रो फाइलेरिया दर 1% से कम पाई गयी जिसका आशय यह है कि इन प्रखंडों में अब फाइलेरिया प्रसार न्यूनतम स्तर पर आ गया है और यहाँ पर एम.डी.ए. राउंड नहीं करना पड़ा.
राज्य में हाथीपांव के 1,27,201 एवं हाइड्रोसील के 17,486 मामले प्रतिवेदित
अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी कार्यालय में पदस्थ राज्य सलाहकार, फाइलेरिया डॉ. अनुज सिंह रावत ने बताया कि राज्य के सभी 38 जिलें फाइलेरिया से प्रभावित हैं । राज्य में दिसम्बर, 2022 तक हाथीपांव के 1,27,201 एवं हाइड्रोसील के 17,486 मामले प्रतिवेदित हैं. वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्व के 72 देशों में 85.9 करोड़ आबादी फाइलेरिया के खतरे में हैं.विश्व भर में फाइलेरिया दीर्घकालीक विकलांगता का दूसरा प्रमुख कारण है. डॉ. रावत ने बताया कि बिहार में वर्ष 2004 से ही एम.डी.ए. राउंड चलाया जा रहा है. परंतु 2023 में पहली बार इसे प्रखण्ड स्तर पर संपादित किया जा रहा है. जबकि इससे पहले यह जिला स्तर से संपादित किया जाता था. फाइलेरिया के प्रसार को रोकने के लिए ही एम.डी.ए. राउंड चलाया जाता है. इसीलिए इसे प्रिवेंटिव कीमोथेरेपी भी कहा जाता है.
एम.डी.ए. की दवाएं पूर्णतः सुरक्षित एवं प्रामाणिक दवा है जिसे 2 वर्ष से ऊपर आयु वर्ग के सभी को दिया जाता है.यह दवा गर्भवती महिलाओं, 2 वर्ष से कम आयु के बच्चों, एक सप्ताह की धात्री महिलाओं व गंभीर बीमारी से ग्रसित को छोडकर अन्य सभी को स्वास्थ्य कार्यकर्ता के सामने खिलाया जाता है.
शहरी क्षेत्रों में एम.डी.ए. कवरेज बढ़ाने पर जोर:
राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र की निदेशक डॉ. तनु जैन ने एम.डी.ए. राउंड की सफलता के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किया है और राज्यों से इसके सफल कार्यान्वयन के लिए माइक्रो-लेवल प्लानिंग को मजबूत बनाने को कहा है.डॉ. तनु जैन ने अपने पत्र में शहरी क्षेत्रों में एम.डी.ए. कवरेज को बेहतर करने पर विशेष जोर दिया है. एम.डी.ए. राउंड की सफलता के लिए माइक्रोप्लान, अर्बन टास्क फ़ोर्स, संचार सुदृढ़ीकरण, प्रशिक्षण सहित मेडिकल कॉलेज की सक्रिय भूमिका पर विशेष बल दिया गया है
कॉन्सिएंट स्पोर्ट्स और दिल्ली कैपिटल्स ने पांच क्रिकेट अकादमियों की शुरुआत करने के लिए की साझेदारी
कॉन्सिएंट स्पोर्ट्स और दिल्ली कैपिटल्स ने पांच क्रिकेट अकादमियों की शुरुआत करने के लिए की साझेदारी
~ अगस्त, 2023 से शुरू की जाएंगी क्रिकेट अकादमियां
~ ये पांच क्रिकेट अकादमियां दिल्ली एनसीआर में एकमात्र ब्रैंडेड क्रिकेट अकादमियां होंगी
नई दिल्ली, 17 जून, 2023:
कॉन्सिएंट स्पोर्ट्स और दिल्ली कैपिटल्स ने आज यह घोषणा की है कि वे अगस्त, 2023 से पूरे दिल्ली एनसीआर में पांच क्रिकेट अकादमियां बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। शुरू होने के पहले वर्ष में ये क्रिकेट अकादमियां 5 वर्ष से लेकर 20 वर्ष तक उम्र के लगभग 500 उभरते हुए क्रिकेटरों के कौशल को निखारने की दिशा में काम करेगी। इन खिलाड़ियों को दिल्ली कैपिटल्स टेक्निकल टीम द्वारा तैयार की गई थकाऊ ट्रेनिंग से होकर गुज़रना होगा।
हर अभ्यास सत्र और मैच के दिन की तैयारी बहुत ही शानदार तरीके से दिल्ली कैपिटल्स के प्रशिक्षित प्रशिक्षकों ने की है, जिसकी समीक्षा टेक्निकल डायरेक्टर और मैनेजमेंट लगातार करते रहेंगे। इन खिलाड़ियों को टूर्नामेंट और लीग में खेलने का मौका भी दिया जाएगा।
कॉन्सिएंट स्पोर्ट्स और दिल्ली कैपिटल्स के बीच की साझेदारी की घोषणा करते हुए कीर्ति जैन गुप्ता, एसोसिएट डायरेक्टर, कॉन्सिएंट स्पोर्ट्स ने कहा, “दिल्ली कैपिटल्स के साथ साझेदारी करना कॉन्सिएंट स्पोर्ट्स में हमारे लिए सच में गर्व का क्षण है। पिछले एक दशक के दौरान, कॉन्सिएंट स्पोर्ट्स ने फुटबॉल क्लब ऑफ बार्सलोना के साथ खास साझेदारी की मदद से जमीनी स्तर पर आयोजित किए जाने वाले फुटबॉल ट्रेनिंग प्रोग्राम में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। अब हम जमीनी स्तर पर भारत के उभरते हुए क्रिकेटरों को खेल की गहरी समझ और प्रशिक्षण देना चाहते हैं। इन दो जानी-मानी इकाइयों के बीच की साझेदारी से क्रिकेट की कुशलता में गुणवत्ता और निरंतरता सुनिश्चित करने, व्यक्तित्व के संपूर्ण विकास और हमारे उभरते हुए क्रिकेटरों के बीच आपसी सामंजस्य स्थापित करने में मदद मिलेगी।”
इस साझेदारी के बारे में धीरज मल्होत्रा, सीईओ, दिल्ली कैपिटल्स ने कहा, “कॉन्सिएंट स्पोर्ट्स ने भारत में फुटबॉल की प्रतिभा को निखारने में अहम भूमिका निभाई है और हम उनके साथ मिलकर पांच क्रिकेट अकादमियां शुरू करने और अपनी क्षमता के हिसाब से क्रिकेट की प्रतिभा को निखारने में मदद करने को लेकर बेहद उत्साहित हैं। हम इस साझेदारी के लंबे समय तक चलने और इसके लाभदायक बने रहने की उम्मीद करते हैं।”
दिल्ली कैपिटल्स क्रिकेट एकेडमी में हर खिलाड़ी पर खास ध्यान दिया जाएगा और उन्हें क्रिकेट के हिसाब से अपनी खूबियों को समझने में मदद दी जाएगी। खिलाड़ी अपनी छिपी हुई क्षमताओं के बारे में जान सकें, इसके लिए कोच खिलाड़ियों के साथ समय बिताएंगे और उन्हें उनकी खूबियों को समझने में मदद करेंगे। इसके अलावा कोच खिलाड़ियों को बल्लेबाज़ी, गेंदबाज़ी, विकेट-कीपिंग, ऑलराउंडर के लिहाज़ से पसंद तय करने में मदद करेंगे। कोच हर खिलाड़ी की खूबियों और दिलचस्पी के हिसाब से मूलभूत चीज़ों का प्रशिक्षण देना शुरू करेंगे। दिल्ली कैपिटल्स क्रिकेट एकेडमी के पाठ्यक्रम के मुताबिक, इन नए खिलाड़ियों को न सिर्फ सर्वश्रेष्ठ तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा, बल्कि उन्हें क्रिकेट के माध्यम से सम्मान, प्रयास और टीमवर्क जैसे मूल्यों के बारे में भी सिखाया जाएगा। हर अभ्यास सत्र और मैच के दिनों की तैयारी दिल्ली कैपिटल्स के प्रशिक्षित कोच करेंगे, ताकि बिल्कुल मैच जैसी स्थितियां पैदा की जा सकें और इनकी समीक्षा टेक्निकल डायरेक्टर व मैनेजमेंट टीम लगातार करते रहेंगे। दिल्ली कैपिटल्स क्रिकेट एकेडमी के लिए आगे की योजनाओं में दिल्ली कैपिटल्स द्वारा संभावनाओं को तलाशना और टूर्नामेंट व लीग तक पहुंच बनाना शामिल है।
कॉन्सिएंट स्पोर्ट्स अपनी फुटबॉल इकाई कॉन्सिएंट फुटबॉल के माध्यम से देश में जमीनी स्तर के सबसे बड़े और सम्मानित फुटबॉल डेवलपमेंट प्रयासों में से एक का संचालन करता है। पिछले एक दशक से भी ज़्यादा समय से फुटबॉल क्लब बार्सिलोना (एफसीबी) का आधिकारिक पार्टनर रहा है। इस इकाई ने 50,000 से ज़्यादा खिलाड़ियों को प्रशिक्षित किया है और देश में 40 से ज़्यादा शीर्ष स्कूलों से समझौता भी किया है।
कॉन्सिएंट स्पोर्ट्स के बारे में
कॉन्सिएंट स्पोर्ट्स (सीएस) खेल ब्रैंड्स को खेल के विकास में लगे हुए सभी पक्षों और बच्चों को जोड़ता है। यह भारत में अपने कार्यक्रमों का संचालन कर युवाओं को श्रेणी के लिहाज़ से सर्वश्रेष्ठ अनुभव उपलब्ध कराता है। इसके अलावा, कंपनी स्कूलों को अनोखी सेवाएं उपलब्ध कराने और दुनिया भर में अन्य खेल संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को सेवाएं देती है, ताकि वे खेल से जुड़ी पेशकशों को बेहतर बना सकें। कॉन्सिएंट स्पोर्ट्स, सबसे व्यापक फुटबॉल प्रशिक्षण तैयार करने और कॉन्सिएंट फुटबॉल के माध्यम से विकास संबंधी प्रयास करने में अग्रणी रही है। विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और खेल का यूरोप जैसा ही स्टैंडर्ड उपलब्ध कराते हुए कॉन्सिएंट फुटबॉल ने एफसी बार्सिलोना के साथ साझेदारी की है, ताकि भारत में बार्सा एकेडमी की शुरुआत की जा सके।
दिल्ली कैपिटल्स एकेडमी के बारे में
डीसी अकादमियां देश में जमीनी स्तर पर क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए फ्रैंचाइज़ की ओर से शुरू किया गया एक प्रयास है। दिल्ली कैपिटल्स ने 6 राज्यों में सफलतापूर्वक 12 केंद्र स्थापित किए हैं। इन केंद्रों के चार खिलाड़ी अलग-अलग आईपीएल फ्रैंचाइज़ों का हिस्सा रह चुके हैं। इनमें से एक आईसीसी अंडर-19 विश्व कप जीतने वाली टीम के कप्तान यश ढल भी हैं जो फिलहाल दिल्ली कैपिटल्स टीम का हिस्सा हैं।
दिल्ली कैपिटल्स के बारे में
दिल्ली कैपिटल्स टीम इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) और वूमेंस प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) दोनों में हिस्सा लेती है। जीएमआर ग्रुप और जेएसडब्ल्यू ग्रुप के मालिकाना हक वाली टीम दिल्ली कैपिटल्स की स्थापना 2008 में दिल्ली डेयरडेविल्स के तौर पर की गई थी। 2019 में टीम को नए अवतार में पेश किया गया। वर्ष 2020 में टीम पहली बार फाइनल में पहुंची। 2023 में दिल्ली कैपिटल्स, वूमेंस प्रीमियर लीग में हिस्सा लेने वाली पहली पांच टीमों में से एक बन गई। टीम टूर्नामेंट के पहले स
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सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा • जिले के सभी प्रखंडों में ओआरएस पैकेट का वितरण शुरू
– सदर अस्पताल में सिविल सर्जन ने बच्चों के बीच ओआरएस पैकेट वितरित कर की पखवाड़े की शुरुआत
– दो लाख इकतालीस हजार से अधिक परिवार का निर्धारित किया गया है लक्ष्य
लखीसराय-
शुक्रवार को जिले में डायरिया से बचाव के लिए सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा का शुभारंभ किया गया। जिसका शुभारंभ सिविल सर्जन डॉ . बीपी सिन्हा एवं डीआईओ सह एसीएमओ डॉ अशोक कुमार भारती ने संयुक्त रूप से बच्चों के बीच ओआरएस पैकेट का वितरण कर किया। इसके बाद जिले के सभी प्रखंडों में संचालित रेफरल अस्पताल, पीएचसी, सीएचसी समेत अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में पखवाड़े का शुभारंभ हुआ। यह पखवाड़ा जिले भर में 30 जून तक चलेगा। इस दौरान शहरी क्षेत्रों में यूनिसेफ की मॉनिटरिंग में निजी स्वयंसेवी (कर्मी) द्वारा और ग्रामीण क्षेत्रों में ऑगनबाड़ी सेविका और आशा कार्यकर्ता द्वारा 0 से 05 से नीचे के आयु वर्ग के बच्चों में ओआरएस का वितरण कराया जाएगा। इस मौके पर डीपीएम सुधांशु नायायण लाल , यूनिसेफ के एसएमसी नैय्यर उल आजम, , सदर पीएचसी के प्रभारी डॉ धीरेन्द्र कुमार के साथ डीसीएम आशुतोष कुमार आदि मौजूद थे।
– डायरिया से संक्रमित बच्चे के बीच ओआरएस पैकेट के साथ-साथ जिंक टैबलेट का भी किया जाएगा वितरण :
सिविल सर्जन डॉ .बीपी सिन्हा ने बताया, पखवाड़े के दौरान डायरिया से संक्रमित बच्चे के बीच ओआरएस पैकेट के साथ-साथ जिंक टैबलेट/सीरप का भी वितरण किया जाएगा।साथ ही सामुदायिक स्तर पर लोगों को डायरिया से बचाव के लिए जागरूक भी किया जाएगा और डायरिया के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की भी विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इस दौरान लोगों को बताया जाएगा कि डायरिया होने पर क्या करें, इससे बचाव के क्या उपाय हैं। साफ-सफाई का ध्यान रखने समेत अन्य आवश्यक जानकारी दी जाएगी। ताकि शुरुआती दौर में ही संबंधित व्यक्ति बीमारी की पहचान कर सके और समय पर इलाज शुरू हो सके।
– जिले 2 लाख 41 हजार 20 परिवार के बच्चों के बीच ओआरएस पैकेट का होगा वितरण :
डीआईओ सह एसीएमओ डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया, पखवाड़े के दौरान जिले भर में दो लाख इकतालीस हजार बीस परिवार के बच्चों के बीच ओआरएस पैकेट का वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वहीं, उन्होंने बताया, डायरिया होने पर लगातार 14 दिनों तक जिंक का सेवन करें। 02 माह से 06 माह तक के बच्चों को जिंक की 1/2 गोली 10 मिग्रा पानी में घोलकर या माँ के दूध के साथ घोलकर चम्मच से पिलाएं। 06 माह से 05 साल के बच्चों को एक गोली साफ पानी के साथ या माँ के दूध में घोलकर पिलाएं। जबकि, दो माह से कम आयु के बच्चों को 05 चम्मच ओआरएस प्रत्येक दस्त के बाद पिलाएं। 02 माह से 02 वर्ष तक बच्चे को 1/4 ग्लास से 1/2 ग्लास प्रत्येक दस्त के बाद पिलाएं। 02 से 05 वर्ष तक के बच्चों को 1/2 ग्लास प्रत्येक दस्त के बाद पिलाएं।
– जानें क्या है डायरिया और लक्षण :
टट्टी की अवस्था में बदलाव या सामान्य से ज्यादा बार, ज्यादा पतला या पानी जैसी होने वाली टट्टी ही डायरिया (दस्त) का पहला लक्षण है। इसके अलावा बच्चा बेचैन व चिड़चिड़ा अथवा सुस्त या बेहोश है। बच्चे की ऑखें अन्दर की और धसने लगता है । बच्चे को बहुत ज्यादा प्यास लगना आदि डायरिया का ही कारण और लक्षण है।
– जिंक सेवन के ये हैं विशेष लाभ :
जिंक सेवन से दस्त और तीव्रता दोनों कम होती है। तीन महीने तक दस्त का खतरा नहीं के बराबर रहता है। रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। जबकि, ओआरएस से शरीर में पानी की कमी नहीं होती है एवं दस्त के खतरे से बचाव करता है।
आयरन की कमी एनीमिया का है मुख्य कारण, बचाव के लिए उचित आहार जरूरी
– किशोरावस्था और गर्भावस्था में सबसे अधिक रहती है एनीमिया होने की संभावना
– लौह तत्वयुक्त चीजों का करें सेवन और विटामिन ए व सी खाद्य पदार्थ भरपूर खाएँ
लखीसराय-
एनीमिया होने का सबसे मुख्य और बड़ा कारण शरीर में आयरन की कमी होना है। इसलिए, इससे बचाव के लिए उचित पोषण बेहद जरूरी है। आहार में बदलाव ही इस बीमारी से बचाव के लिए सबसे सरल उपाय है। यह बीमारी खून में पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं या हीमोग्लोबिन कम होने से होता है। इसलिए, लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज कराऐं और चिकित्सा परामर्श का पालन करें। अन्यथा थोड़ी सी लापरवाही बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती है। इससे घबराने की भी जरूरत नहीं है। ऐसे में समय पर जाँच के लिए अस्पताल जाने के साथ चिकित्सकों की सलाह माननी चाहिए।
– आयरनयुक्त खाना का करें सेवन :-
जिला के सिविल सर्जन डॉ बीपी सिन्हा ने बताया कि आयरन की कमी के कारण एनीमिया होता है। इसलिए इस बीमारी से बचाव के लिए लोगों को आहार बदलना होगा एवं आयरन युक्त आहार का सेवन करना होगा। अन्यथा थोड़ी सी लापरवाही जान पर भारी पड सकती है।
– ये हैं एनीमिया के लक्षण :-
एनीमिया की बीमारी का शुरुआती लक्षण थकान, कमजोरी, त्वचा का पीला होना, दिल की धड़कन में बदलाव, साँस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, सीने में दर्द, हाथों और पैरों का ठंडा होना, सिरदर्द, त्वचा सफेद दिखना आदि है। ऐसा लक्षण होते ही ससमय इलाज कराएं।
– प्रोटीनयुक्त खाने का करें सेवन :-
एनीमिया के दौरान प्रोटीन युक्त खाने का सेवन करें। जैसे कि पालक, सोयाबीन, चुकंदर, लाल मांस, मूँगफली , मक्खन, अंडे, टमाटर, अनार, शहद, सेब, खजूर आदि प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करें। जो कि आपके शरीर की कमी को पूरा करता है एवं हीमोग्लोबिन जैसी कमी भी दूर होती तथा इससे आपको एनीमिया बीमारी से बचाव मिल सकता है।
– लौह तत्वयुक्त चीजों का करें सेवन :-
एनीमिया से बचाव के लिए लौह तत्वयुक्त चीजों का सेवन करें। यहाँ तक कि सब्जी भी लोहे की ही कढ़ाई में बनाएँ। लोहे की कढ़ाई में सब्जी बनाने से आयरन की मात्रा काफी बढ़ जाती है।
– चिकित्सकों की सलाह का करें पालन :-
एनीमिया के दौरान आप तुरंत किसी अच्छे चिकित्सक से दिखाएं एवं चिकित्सकों के अनुसार आवश्यक जाँच कराएं। जिसके बाद चिकित्सकों के आवश्यक चिकित्सा परामर्श का पालन करें। जो आपके लिए फायदेमंद साबित होगा।
– गर्भवती महिलाएँ रखें विशेष ख्याल :-
यह बीमारी महिलाओं में अधिक पाई जाती है। खासकर गर्भवती महिलाओं को गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए शरीर में रक्त का निर्माण करना पड़ता है। जिसमें कमी होने के कारण एनीमिया होने की प्रबल संभावना हो जाती है। इसलिए गर्भवती महिला को गर्भधारण के दौरान लगातार हीमोग्लोबिन समेत अन्य आवश्यक जाँच करानी चाहिए एवं चिकित्सा परामर्श का पालन करना चाहिए।