गरीब बच्चों को इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में दक्ष बनाने के लिए आवर मिट्टी फाउन्डेशन ने उठाया जिम्मा

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मिट्टी फाउंडेशन के एडॉप्ट अ स्कूल प्रोग्राम के तहत बहुराष्ट्रीय आईटी कंपनी स्टेफनीनी ने नोएडा के स्कूल को लिया गोद
नई दिल्ली: – वैश्विक दुनिया में आज आप स्वयं को कितने भी सैन्य साजो समान या धन दौलत से लैस कर ले फिर भी आपको ज्यादा ताकतवर नहीं माना जा सकता है। इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के बदौलत पूरे विश्व में जिस समाज का निर्माण हो रहा है उसको सूचना समाज (इनफॉर्मेशन सोसायटी ) के नाम से जाना जाता है। इस वैश्विक सूचना समाज में जिस भी व्यक्ति के पास जितनी ज्यादा सूचना होगी वही इस वैश्विक समाज का सबसे ताकतवर व्यक्ति होगा। सोशल मीडिया के इस युग में इस कला में जो सबसे ज्यादा दक्ष होगा उसका दुनिया में बोलबाला सबसे जायदा होगा। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए समाज के मुख्यधारा से कटे हुए गरीब बच्चों को इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में दक्ष बनाने के लिए आवर मिट्टी फाउंडेशन ने कदम बढ़ाया है। मिट्टी फाउंडेशन ने अपने स्कूल को गोद लेने का कार्यक्रम (एडॉप्ट अ स्कूल प्रोग्राम) के तहत मल्टीनेशनल आईटी कंपनी स्टेफनीनी के सहयोग से नोएडा के राधा बल्लभ पब्लिक स्कूल को अडॉप्ट किया है। इस स्कूल में आई टी कंपनी स्टेफनीनी और आवर मिट्टी फाउंडेशन ने इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी लैब और प्ले स्कूल का निर्माण किया है। इस कार्यक्रम का उद्घाटन स्टेफनीनी के सीओओ डेविड गवेंडा ने किया। इनके साथ कंपनी के सीनियर डायरेक्टर ऑपरेशन इंडिया रुचिर गौड़, सीनियर मैनेजर एचआर सुश्री श्रद्धा , प्रवीर सिंह, डायरेक्टर एचआर, सुशील कुमार आईसीटी मैनेजर , एचआरबीपी सुनील सिंह और दिव्या जैन ,मार्केटिंग मैनेजर हर्षिता और अन्य गणमान्य अधिकारियों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। साथ ही मिट्टी फाउंडेशन के चेयरमैन प्रमोद कुमार सुमन,प्रेसिडेंट चंदन कुमार, सीएसआर हेड और वाइस प्रेसिडेंट सुश्री संगीता भगत, जनरल सेक्रेटरी रवि वर्मा, सलाहकार आईटी प्रो अमित कुमार, सलाहकार फिल्म डायरेक्टर आकाश कुमार सिंह, सलाहकार विनय कुमार गुप्ता उपस्थित रहे।
स्टेफनीनी के सीओओ डेविड गवेंडा ने कहा की इस एडॉप्ट ए स्कूल प्रोग्राम से बच्चे आईटी की अच्छी शिक्षा ले सकेंगे और भविष्य में इन बच्चों को रोजगार के कई अवसर प्राप्त होंगे। उनकी कंपनी भी इन बच्चों को रोजगार के लिए प्राथमिकता देगी।
मिट्टी फाउन्डेशन के चेयरमैन प्रमोद कुमार सुमन ने कहा कि हमारी संस्था का उद्देश्य है कि देश में 2025 तक इस तरीके के स्कूल जहां पर गरीब तबकों के बच्चे पढ़ाई कर रहे है ऐसे करीब 100 स्कूल को अडॉप्ट किया जाएं ताकि उनको समाज के मुख्यधारा में शामिल आई टी में दक्ष बच्चों के साथ वह कदम मिला कर समाज को योगदान दे सकें। प्रेसिडेंट चंदन कुमार ने कहा कि हमारी संस्था इन बच्चों को दक्ष करके आई टी के क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने को लेकर प्रयास करेगी। मिट्टी फाउंडेशन के सीएसआर हेड एवम उपाध्यक्ष संगीता भगत ने अपनी संस्था द्वारा किए जा रहे कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि हम कारपोरेट सेक्टर से अपील करते है जिस तरीके से स्टेफनीनी ने बच्चों के शिक्षा के लिए सहयोग किया है वैसे अन्य मल्टीनेशनल कंपनी आगे आए जिससे हम शिक्षा के क्षेत्र में मूलभूत सुधार कर सकें। मिट्टी फाउंडेशन के महासचिव रवि वर्मा ने कहा कि देश के ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल को हम एडॉप्ट अ स्कूल प्रोग्राम से जोड़ा जाएगा ताकि उनको भी आई टी सेक्टर में हो रहे नित नए बदलाव से रूबरू कराया जा सकें।
ग्लोबल आईटी कम्पनी स्टेफनीनी के सभी अधिकारियों ने आवर मिट्टी फाउन्डेशन के द्वारा किए गए कार्य की सराहना की और भविष्य में भी साथ काम करने का आश्वासन दिया।

राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम- टीबी उन्मूलन के कई इंडिकेटर्स में मुंगेर ने हासिल की शानदार उपलब्धि

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– टीबी मरीजों के नोटिफिकेशन के इंडिकेटर्स में मुंगेर ने हासिल किए निर्धारित 20 में 20 अंक
– ट्रीटमेंट सक्सेस रेट और ट्रीटमेंट रेजीमेन के इंडिकेटर्स में मुंगेर हासिल किए क्रमशः 13 और 14 अंक

मुंगेर, 15 अप्रैल-

राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) 2025 के तहत टीबी उन्मूलन गतिविधियों के कई इंडिकेटर्स में मुंगेर जिला ने शानदार उपलब्धि हासिल की है। इस आशय की जानकारी जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ ध्रुव कुमार शाह ने दी। उन्होंने बताया कि सन 2025 तक जिला को टीबी के संक्रमण से मुक्ति दिलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जमीनी स्तर पर इन दिनों जोर- शोर से टीबी रोगी खोज अभियान चल रहा है। पिछले दिनों स्टेट टीबी सेंटर बिहार के द्वारा राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन अभियान के तहत निर्धारित इंडिकेटर्स में विभिन्न जिलों के द्वारा प्राप्त किए गए अंकों के आधार पर एक रैंकिंग जारी की गई है। जिसके अनुसार टीबी नोटिफिकेशन के इंडिकेटर्स में मुंगेर जिला ने निर्धारित 20 में से 20 अंक हासिल करते हुए शानदार उपलब्धि हासिल की है। इसके अलावा एचआईवी के साथ टीबी पेशेंट के नोटिफिकेशन के इंडिकेटर के लिए निर्धारित 10 अंक में मुंगेर जिला ने 10 अंक हासिल किया है। इसके साथ- साथ ट्रीटमेंट सक्सेस रेट और ट्रीटमेंट रेजीमेन के इंडिकेटर्स में भी निर्धारित 20 अंक में से मुंगेर जिला ने क्रमशः 13 और 14 अंक हासिल किए हैं।
डिस्ट्रिक्ट टीबी सेंटर मुंगेर में डिस्ट्रिक्ट टीबी/एचआईवी कॉर्डिनेटर शैलेंदु कुमार ने बताया कि स्टेट टीबी सेंटर बिहार के द्वारा जारी विभिन्न जिलों की पॉइंट्स रैंकिंग में मुंगेर जिला ने शानदार उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के विभिन्न इंडिकेटर्स में निर्धारित कुल अंक में से विभिन्न जिलों के द्वारा प्राप्त अंक के आधार पर रैंकिंग जारी की गई है।
इस रैंकिंग के आधार पर टोटल टीबी इंडेक्स में मुंगेर जिला ने राज्य भर में 68 अंक हासिल किए हैं । मुंगेर से आगे सिर्फ गोपालगंज जिला है , जो 70 अंक के साथ टीबी इंडेक्स में राज्य भर में पहले स्थान पर है। वहीं मुंगेर के अलावा गया और शिवहर जिला भी 68- 68 अंक के साथ राज्य भर में संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर है।
उन्होंने बताया कि टीबी नोटिफिकेशन अचीवड इंडिकेटर्स में निर्धारित 20 अंक में से मुंगेर के अलावा भागलपुर, बक्सर, दरभंगा, गया और गोपालगंज जिला 20 अंक हासिल कर राज्य भर में पहले पायदान पर है । इसके साथ ही एचआईवी के साथ टीबी मरीजों के नोटिफिकेशन के इंडिकेटर में भी निर्धारित 10 में से 10 अंक प्राप्त किया है। इसके अलावा टीबी मरीजों के सक्सेस रेट इंडिकेटर्स के लिए निर्धारित 15 में से मुंगेर जिला ने 13 अंक प्राप्त किए हैं। वहीं टीबी ट्रीटमेंट इनिशिएशन रेजीमेन के इंडिकेटर्स के लिए निर्धारित 15 अंक में से मुंगेर जिला ने 14 अंक हासिल किए हैं।
उन्होंने बताया कि टीबी के पॉइंट्स ओन यूडीएसटी या माइक्रो बायोलॉजिकल कन्फर्म केस के इंडिकेटर के लिए निर्धारित 10 अंक में से मुंगेर को 4 अंक प्राप्त हुए हैं। वहीं टीबी मरीजों के लिए निक्षय पोषण योजना के लिए निर्धारित इंडिकेटर के लिए निर्धारित 10 अंक में से मुंगेर जिला ने 5 अंक हासिल किए हैं। इसके अलावा बच्चों की टीबी जांच के इंडिकेटर के लिए निर्धारित 5 में से मुंगेर जिला को 2 अंक मिले हैं । उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय य टीबी उन्मूलन अभियान में मुंगेर जिला के द्वारा प्राप्त यह उपलब्धि जिला भर में ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, कर्मियों और फ्रंट लाइन वर्कर के द्वारा लगातार चलाए जा रहे टीबी उन्मूलन गतिविधियों का परिणाम है। जिला भर में पीएचसी/सीएचसी से लेकर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर तक टीबी की निःशुल्क जांच और उपचार के साथ टीबी की दवा उपलब्ध कराई गई है। इन दिनों जिला भर में लगातार टीबी रोगी खोज अभियान चल रहा है। इसके अलावा प्रत्येक महीने की 16 तारीख को जिलाभर के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर निक्षय दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।

ग्लोबल पीस लीडरशिप कान्फ्रेस – इंडो-पैसिफिक 2023 नई दिल्ली, भारत में आयोजित किया गया

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ग्लोबल पीस लीडरशिप कॉन्फ्रेंस इंडो-पैसिफिक 2023 (जीपीएलसी 2023) का आयोजन 11-13 अप्रैल, 2023 को ली मेरिडियन और रॉयल प्लाजा होटल्स, नई दिल्ली, भारत में किया गया। जिसमें 1000 से अधिक छात्रों, राजदूतों और शांति निर्माताओं को वर्चुअली और व्यक्तिगत प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का विषय “वसुधैव कुटुम्बकम: मानव चेतना और शांति को आगे बढ़ाने के लिए विजन” था।

“वसुधैव कुटुम्बकम” एक लक्ष्य है लेकिन हमारी इस प्रक्रिया में चार घटक हैं, 1. युवाओं की भागीदारी, युवाओं का निर्माण, राष्ट्र का निर्माण। 2. मूल्य शिक्षा। शिक्षा अधिकांश वैश्विक समस्याओं को हल करने की कुंजी है, इसका ज्ञान से संबंध हो सकता है। 3. मूल्य-आधारित शांति निर्माण – शांति हमारे भीतर है। शांत कैसे बनें, खुद का निर्माण करें, प्यार करें और दूसरों को सेवा प्रदान करें, 4. पर्यावरण संरक्षण – ग्लोबल पीस फाउंडेशन इंडिया के अध्यक्ष डॉ. मार्कंडेय राय ने कहा कि पृथ्वी के मित्र बनें शत्रु नहीं क्योंकि प्रकृति में जबरदस्त शक्ति है, हम पृथ्वी के बिना टिके नहीं रहेंगे। ये चार अवयव मानव चेतना और शांति को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे।”

इन मुद्दों को पीएलसी 2023 (GPLC 2023) के दौरान आयोजित कार्यशालाओं के चार ट्रैक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया था। युवा सशक्तिकरण ट्रैक का लक्ष्य मौजूदा समस्याओं को हल करने के लिए युवाओं के दृष्टिकोण में सुधार करना, वैश्विक परिप्रेक्ष्य से कैसे सोचना है, और नैतिक और अभिनव नेता बनना – पुनर्विचार करना, फिर से इन सबको इन अर्थों में परिभाषित करना था और रूपांतरित करना है । दूसरा ट्रैक, ट्रांसफॉर्मिंग एजुकेशन फॉर द फ्यूचर, में छात्रों को उनके जीवन के सभी पहलुओं में सफल होने और समग्र शांति में योगदान देने के लिए तैयार करने के लिए नए रुझानों, विचारों और नीतियों का विश्लेषण किया गया । मूल्य-आधारित शांति निर्माण ट्रैक ने प्रभावी मॉडल, सर्वोत्तम प्रथाओं, व्यावहारिक तरीकों और शैक्षिक कार्यक्रमों, युवा नेतृत्व विकास और समुदाय-आधारित शांति निर्माण के लिए भूमिका पर विचार किया और मूल्यांकन किया कि शांति निर्माण को कैसे लागू किया जाए। अंतिम ट्रैक, पर्यावरण संरक्षण ने पर्यावरण की देखभाल के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया जाए, भविष्य की पीढ़ियों से समझौता न करके जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया जाए और कचरे का मुकाबला करके हरियाली की रक्षा और बड़ावा दिया जाए।

अंतर्राष्ट्रीय वक्ताओं और स्थानीय राजदूतों ने भी उच्च पूर्ण सत्र (हाई प्लनेरी) के दौरान अपने विचार व्यक्त किए। जिसमें स्थानीय नृत्य प्रदर्शन, शांति और शांति को बढ़ावा देने के लिए एक ध्यान, और C20 की प्रतिनिधि गले लगाने वाली संत माता अर्मिताानंदमयी और राजदूत विजय नांबियार, शेरपा C20 के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न वक्ताओं की टिप्पणियां और वक्तव्य शामिल थे ।

ग्लोबल पीस फाउंडेशन के चेयरमेन डॉ. ह्यून जिन प्रेस्टन मून ने उच्च पूर्ण सत्र का समापन करते हुए कहा, ‘मुझे आशा है कि आप में से प्रत्येक अपने-अपने प्रभाव क्षेत्र में शांति निर्माता बनेंगे और वैश्विक शांति के महान आंदोलन में हमारे साथ शामिल होंगे।’ डॉ. मून ने शांति के महत्व पर जोर दिया और यह भी बताया कि कैसे संघर्षों और स्वतंत्रता के माध्यम से भी इसे हासिल किया जा सकता है, जैसा कि महात्मा गांधी, मार्टिन लूथर किंग जूनियर और नेल्सन मंडेला जैसे महान नेताओं ने प्रदर्शित किया। माता अमृतानंदमयी देवी ने गरिमा मयी वर्चुअल उपस्थिति (अम्मा) में कहा कि हमें लालच और अन्याय से भरी दुनिया में निस्वार्थ और करुणामय होने के लिए प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने बुरी विचारधाराओं का विरोध करने और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए हाथ बढ़ाने का आग्रह किया।
राजदूत वीरेंद्र गुप्ता कहा कि युद्धों को रोकने के पारंपरिक तरीके अप्रभावी साबित हुए हैं, और हमें एक मजबूत और शांतिपूर्ण विकल्प तलाशना चाहिए। राजदूत विजय नांबियार ने कहा कि संघर्ष की प्रकृति पर एक गहन अंतर्दृष्टि प्रदान करते हुए इस बात पर प्रकाश डाला कि सच्चाई को छिपाने के लिए अक्सर इसका उपयोग कैसे किया जाता है। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने 21वीं सदी में प्रतिकूलता का सामना करते हुए समावेशिता की आवश्यकता पर बल देते हुए ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के सही सार पर ध्यान केंद्रित किया और सभी को प्रेम, शांति और सद्भाव के साथ मिलकर चलने के लिए प्रोत्साहित किया। पद्म श्री अगुस इंद्र बाली ने कहा कि इंडोनेशिया के गहन ज्ञान को दुनिया के साथ साझा करते हैं, एक नया और अनूठा दृष्टिकोण प्रदान करते हैं। फादर जोसेफ ने कहा कि विश्वास और धर्म के माध्यम से प्रेम फैलाने पर जोर देते हैं।
ग्लोबल पीस फाउंडेशन के अध्यक्ष, श्री जेम्स पी. फ्लिन, हमारा ध्यान भविष्य के लिए तैयार रहने के लिए आवश्यक कदमों की ओर निर्देशित करते हैं। वह साहसिक और सहयोगात्मक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर देते हैं जो कृत्रिम सीमाओं को पार करते हैं क्योंकि हम एक ऐसे भविष्य की ओर प्रयास कर रहे हैं जो उनसे परे है। डॉ. विक्रांत तोमर ने हमारे मतभेदों को ठीक करने के बजाय हमारी समानताओं को संजोने के महत्व पर जोर दिया, जो सभी सौभाग्यशाली लोगों पर एक स्थायी प्रभाव छोड़ते हैं।

जीपीएलसी 2023 की शुरुआत यूथ सस्टेनैथॉन: लीप हब चैलेंज 2023 के उद्घाटन के साथ हुई, जहां मानव रचना विश्वविद्यालय के छात्रों ने पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए अभिनव समाधानों को प्रस्तुत किया, मेंटर्स ने छात्रों की सहायता कि जिससे वे समस्याओं की पहचान और चुनौतीयों के दौरान समाधान के साथ आगे आए।

अंतिम दिन, “नई दिल्ली घोषणा” पत्र को वहाँ उपस्थित लोगों द्वारा व्यक्तिगत रूप से और वर्चुअल रूप में हस्ताक्षर किए गए। घोषणा में संबोधित मुद्दों को पूरा करने के लिये नौ विशिष्ट कियान्वयन बिंदुओं (एक्शन प्लान) को शामिल हैं, शांति सलाह के माध्यम से युवाओं को विकसित करना, सभी के लिए सेवा-आधारित प्रथाओं को प्रोत्साहित करना, गरीबी निवारण में सहायता करना, पर्यावरण संरक्षण, युवा विकास और अन्य प्रमुख सिद्धांत; और शिक्षा प्रथाओं को बदलना प्रमुख है । हस्ताक्षरित घोषणा सिविल-20 (C-20 ) इंडिया 2023 और G-20 को प्रस्तुत किया जाएगा। जिसकी मेजबानी सितंबर में भारत में की जाएगी।

ग्लोबल पीस लीडरशिप कॉन्फ्रेंस इंडो-पैसिफिक 2023 (GPLC 2023) का आयोजन ग्लोबल पीस फाउंडेशन (GPF) और सह-आयोजकों अंतर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद (ARSP), मानव रचना यूनिवर्सिटी और युवसत्ता यूथ फॉर पीस ने सिविल 20 इंडिया 2023 के सहयोग से किया है । भारत में इससे पूर्व GPLC आयोजन 2014 में नई दिल्ली में किया था . ग्लोबल पीस फाउंडेशन ने अब तक जीपीएलसी का आयोजन मलेशिया, फिलीपींस, नेपाल, इंडोनेशिया, भारत, दक्षिण कोरिया, नाइजीरिया, मंगोलिया, तंजानिया, युगांडा, उत्तरी आयरलैंड, ब्राजील और संयुक्त राज्य अमेरिका आदि देशों में किया है।

गर्भवती महिलाएँ सुरक्षित प्रसव के लिए करें पौष्टिक और प्रोटीनयुक्त आहार का सेवन

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– गर्भधारण के बाद किसी प्रकार की परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सकों से कराएं जाँच
– चिकित्सा परामर्श का करें पालन, व्यक्तिगत साफ-सफाई का रखें ख्याल

लखीसराय-

सुरक्षित प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं को गर्भधारण के पूर्व और बाद में पूर्ण रूप से स्वस्थ होना जरूरी है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक और प्रोटीनयुक्त आहार का सेवन करना बेहद जरूरी है। तभी सुरक्षित प्रसव संभव है और स्वस्थ बच्चे का जन्म होगा।

सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं को स्वस्थ रहना जरूरी :-
सुरक्षित और सामान्य प्रसव तभी संभव है जब गर्भवती महिला शारीरिक और मानसिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ रहेगी। इसके लिए महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान समय-समय पर जाँच करानी चाहिए और चिकित्सा परामर्श का पालन करना चाहिए। साथ ही पौष्टिक और प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करना भी बेहद जरूरी है। इससे ना सिर्फ महिलाएँ स्वस्थ रहती हैं बल्कि गर्भस्थ शिशु भी स्वस्थ और मजबूत होता है।

गर्भधारण के पूर्व शारीरिक और मानसिक रूप से रहें स्वस्थ :-
अगर कोई महिला गर्भधारण के बारे में सोच रही है तो उन्हें तीन-चार माह पूर्व से योजना बनानी चाहिए और सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ रहना चाहिए। ताकि गर्भावस्था से लेकर प्रसव तक किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानियां उत्पन्न नहीं हो ।

– गर्भधारण के लिए सही उम्र होना जरूरी :-
अपर मुख्य -चिकित्सा पदाधिकारी डॉ . अशोक कुमार भारती बताते हैं कि गर्भधारण के लिए महिलाओं का सही उम्र होना भी बेहद जरूरी है। क्योंकि, कम उम्र में गर्भधारण होने से हमेशा समय पूर्व शिशु होने की संभावना बनी रहती है। जिससे महिलाओं को कई प्रकार की परेशानियों से जूझना पड़ जाता है। इसलिए, गर्भधारण के लिए महिलाओं का कम से कम 20 वर्ष का होना जरूरी है। इसलिए, इस उम्र में ही गर्भधारण कराना चाहिए। ताकि किसी प्रकार की परेशानी उत्पन्न नहीं हो।

– गर्भवती महिलाओं की कोविड-19 से बचाव के लिए व्यक्तिगत साफ-सफाई जरूरी :-
अब जब कोविड-19 का संक्रमण फिर से अपना पाँव फैला रहा है तो इस दौर में इससे बचाव के लिए गर्भवती महिलाओं को खासकर व्यक्तिगत साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखना चाहिए। साथ ही मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करना चाहिए। दो गज की शारीरिक-दूरी का हमेशा पालन करना चाहिए।

– प्रसव पूर्व समय-समय पर कराते रहें जाँच :-
सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं को समय-समय पर जाँच कराते रहना चाहिए। प्रसव पूर्व जाँच के लिए सरकार द्वारा पीएचसी स्तर पर भी मुफ्त जाँच सुविधा की व्यवस्था की गई है । जहाँ हर माह नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क जाँच होती और जाँचोपरांत आवश्यक चिकित्सा परामर्श दी जाती है।

– गर्भावस्था के दौरान प्रोटीन, आयरन और कैल्सियम युक्त खाने का सेवन ज्यादा करना चाहिए :-
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को प्रोटीन, आयरन और कैल्सियम युक्त खाने का ज्यादा से ज्यादा सेवन करना चाहिए। इस दौरान दाल, पनीर, अंडा, पालक, सोयाबीन, नॉनवेज, गुड़, अनार, नारियल, चना, हरी सब्जी आदि का सेवन करना चाहिए।

इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें।
– दो गज की शारीरिक-दूरी का हमेशा पालन करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– ऑख, नाक, मुँह छूने से बचें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।

पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान की तर्ज पर हो फाइलेरिया उन्मूलन के लिए प्रयास -नूतन देवी की

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– जिला को पूरी तरह से फाइलेरिया मुक्त होने तक सरकार के द्वारा लगातार चलाया जाय अभियान
– घर – घर जाकर लोगों को जागरूक कर रही हैं साई राम पेशेंट सपोर्ट ग्रुप की नूतन देवी

खगड़िया –

‘पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान की तर्ज पर फाइलेरिया उन्मूलन के लिए प्रयास होना चाहिए । राज्य और जिला को पूरी तरह से फाइलेरिया मुक्त होने तक केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा लगातार अभियान चलाए जाने की आवश्यकता है।‘ उक्त बातें परबत्ता प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत रूपौली- नौरंगा में कार्यरत पेशेंट सपोर्ट ग्रुप (पीएसजी) की सदस्य नूतन देवी ने कही। मालूम हो कि खगड़िया जिला को फाइलेरिया जैसी बीमारी से मुक्त बनाने के लिए साई राम पेशेंट सपोर्ट ग्रुप की सदस्य नूतन देवी घर – घर जाकर लोगों को लगातार जागरूक कर रही हैं । वो फाइलेरिया रोगियों को नियमित साफ- सफाई, व्यायाम और योगाभ्यास के लिए भी प्रेरित करती हैं ताकि फाइलेरिया के रोगियों को बीमारी से कुछ आराम मिल सके । इसके अलावा सरकार के द्वारा साल में एक बार चलाए जाने वाले सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम (एमडीए) अभियान के दौरान नूतन देवी घर – घर जाकर दो वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को फाइलेरिया की दवा के रूप डीईसी और अल्बेंडाजोल का सेवन साल में एक बार और लगातार कम से कम पांच वर्षों तक करने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

साई राम पेशेंट सपोर्ट ग्रुप की सदस्य नूतन देवी के पति राकेश कुमार एक मामूली सा दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं । इनके परिवार में सास- ससुर के अलावा कुल तीन बच्चे हैं। नूतन देवी ने मैट्रिक तक की पढ़ाई पूरी की है। वो अपनी पूरी योग्यता और अनुभव का इस्तेमाल फाइलेरिया बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने में कर रही हैं । इस निः स्वार्थ समाज सेवा में उनके पति के साथ – साथ पूरे परिवार का सहयोग और समर्थन मिल रहा है। उन्होंने बताया कि आज के इस सामाजिक परिवेश में महिलाओं का घर से बाहर निकलकर काम करना ही काफी चुनौती पूर्ण है। फाइलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निःशुल्क बगैर किसी स्वार्थ के घर घर जाकर लोगों को फाइलेरिया बीमारी के उन्मूलन के लिए जागरूक करना काफी संघर्ष पूर्ण कार्य है। इस दौरान मुझे लोगों के कई कड़वे सवालों जैसे आपको इस काम के लिए क्या मिलता है, आप ऐसा क्यों करती हैं, फाइलेरिया तो खत्म ही नहीं हो सकता है का सामना करना पड़ता है। मैं सभी लोगों को यह जवाब देती हूं कि मुझे भले ही कुछ नहीं मिलता है लेकिन मेरे प्रयास से किसी फाइलेरिया के रोगी का कुछ भी भला होता है तो यही मेरे लिए पारिश्रमिक है। उन्होंने बताया कि साई राम पेशेंट सपोर्ट ग्रुप को आंगनबाड़ी सेविका गीता देवी और सहायिका गायत्री देवी का पूरा सहयोग मिल रहा है। हमलोग स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्र पर ही बैठक आयोजित कर बच्चों, महिलाओं को फाइलेरिया से बचने के लिए नियमित साफ सफाई और व्यायाम,योगाभ्यास के लिए प्रेरित करती हूं। इसके अलावा फाइलेरिया के रोगियों को स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, परबत्ता ले जाकर आवश्यक दवाइयां, एमएमडीपी किट उपलब्ध करवाने का प्रयास कर रही हूं। इस काम में हमलोगो को स्थानीय वेक्टर जनित रोग सुपरवाइजर (वीबीडीएस) मनीष कुमार का भी पूरा सहयोग मिलता है।
उन्होंने बताया कि मैं अपने पूरे पंचायत को फाइलेरिया से पूरी तरह मुक्त बनाना चाहती हूं। इसके लिए अपने स्तर से हर संभव प्रयास करने के लिए सदैव तत्पर हूं।

जी-20 की अध्यक्षता के साथ ऊंची छलांग मारने को तैयार है भारत- डॉ. शंकर घनश्यामदास अंदानी, सीए

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नईदिल्ली-

डॉ. शंकर घनश्यामदास अंदानी। सीए व सामाजिक कार्यकर्ता। भारत के विकास पर वर्ल्ड रिकॉर्ड स्पीकर में आपका नाम शामिल है। इनका मानना है कि देश जी-20 की अध्यक्षता के बाद तेजी से आगे बढ़ेगा। इनका लक्ष्य है कि जरूरतमंद लोगों को सर्वोत्तम शिक्षा प्रदान करना। जिसके लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। करीब 200 से अधिक सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हैं। इन्हें कई प्रतिष्ठित अवार्ड से भी सम्मानित किया गया है। डॉ शंकर घनश्यामदास अंदानी से संवाददाता मानवेंद्र ने खास बातचीत की पेश है उसके कुछ अंश।

-जी-20 जनभागीदार में आप स्पीकर के रूप में भागीदार किया। जो एक रिकॉर्ड बन गया है। जनभागीदार स्पीकर सम्मेलन में आप किस मुद्दे को लेकर अपनी बात रखी।

जी -20 एक अद्भूत कांसेप्ट है। जिसे भारत अभी अध्यक्षता कर रहा है। एक ही मंच पर 320 स्पीकर अलग-अलग विषय पर अपनी बात रखें। जिसमें भारत के विषय पर चर्चा की गई। दरअसल, जी-20 ऐसा कांसेप्ट है जिसमें 20 ऐसे विकसीत देश हैं जहां की 80 फीसदी जनसंख्या के पास विश्व की 90 जीडीपी है। आज भी भारत को विकासशील देश में रखा गया है। अब देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। इनकम बढ़ाना है। और अपने देश को विकसित देश में शामिल करना है। इसके लिए एक्सपार्ट बढ़ाना आवश्यक है। इंपोर्ट घटाना है।

-तो क्या इस सम्मेलन में भारत को विकसित देश बनाने के लिए कार्य योजना पर भी चर्चा हुई।

आपने बिल्कुल सही सवाल उठाया है। सरकार आम आदमी की आमदनी बढ़ाने के लिए कई कार्य योजना पर कार्य कर रही है। डबल टैक्सेसन अवार्डर एग्रीमेंट किया हुआ है जिससे की मैन्यूफैक्चरींग करने वाले उद्योगपति को काफी लाभ मिलने वाला है। खास तौर पर इनकम टैक्स जो आम आदमी को 25 फीसदी की छूट है तो कॉरपोरेट के लिए 30 फीसदी। अगर मैन्यूफैक्चरिंग करते हैं तो उन्हें दस फीसदी की सुविधा दी जाएगी। टैक्स की रियायत मिलेगा तो मैन्यूफैक्चरिंग बढ़ेंगी। उत्पादन बढ़ेगा।

-सरकार स्वरोजगार के लिए लगातार कार्य कर रही है क्या इस सम्मेलन में इस पर चर्चा हुई।

सरकार मेक इन इंडिया पर जोर दे रही है। दरअसल भारत में श्रमिक सस्ते हैं। मैन्यूफैक्चरिंग बढ़ेगा तो रोजगार बढ़ेगा। कह सकते हैं रोजगार सृजन होगा। आज देश में स्टार्ट अप की बाढ़ है। विश्व में दूसरे-तीसरे नंबर पर हम हैं।

-देश में विभिन्नताएं हैं। ऐसे में कैसे हम वैश्विक स्तर पर प्रतियोगिता कर सकेंगे।

देश की विभिन्नता व विषमता ही शक्ति हैं, गुण है। आज डेवलप के लिए मेट्रो में जगह नहीं है लेकिन मेट्रो शहर के अलावे अन्य जगहों पर विकास किया जा रहा है। छोटे शहरों में इंडस्ट्री लगाना आसान है सरकार कई प्रोत्साहन कार्यक्रम चला रही है। एमएसएमई में कई प्रोत्साहन कार्यक्रम चलाए गए हैं। आज जी-20 में इसपर भी चर्चा हुई।

-आप लगातार सामाजिक कार्यों में रूचि रखते हैं। 200 से अधिक सामाजिक संस्था से आप जुड़े हैं। समाज में कौन सी समस्याएं हैं जिसे लेकर आप लगातार कार्य कर रहे हैं।

समाज में कई तरह की समस्याएं हैं। जिसमें सबसे ज्यादा जो हमें झकझोरती है वह है गरीबी। इसको लेकर हम कार्य कर रहे हैं। दूसरों की मदद करने में हम नहीं हिचकिचाते हैं। हमारा उद्देश्य गरीबी से उबरने के लिए सभी के जीवन में सुधार करना है और लोगों को एक बेहतर जीवन देना है। हमारा लक्ष्य है सभी जरूरतमंद लोगों को सर्वोत्म शिक्षा देना। क्योंकि शिक्षा से ही जीवन शैली को बदला जा सकता है।

-आपको कई पुरस्कार मिले हैं जिसमें भारतीय सेवा रत्न पुरस्कार,इंडियन इंटरनेशनल अचीवमेंट अवार्ड हिंदुस्तान रत्न पुरस्कार, महात्मा गांधी सेवा रत्न पुरस्कार, ग्लोबल यूथ अचीवमेंट गौरव श्री सम्मान, ग्लोबल प्रोफेशनल अवार्ड, भारतीय एकता सम्मान पुरस्कार, टीपीएल टेक्नोबिजनेस अवार्ड 2022, इंडियन सीएसआर अवार्ड 2022, इंटरनेशनल ग्लोरी अवार्ड सहित कई अवार्ड मिल चुका है। आप इसको कैसे देखते हैं।

हमारी कोशिश है देश की सेवा करना। लगातार हम समाज के लिए कार्य करते हैं। समाज की संस्थाएं कार्य को देखते हुए सम्मान देती है जिससे हमारी जिम्मेवारी और बढ़ जाती है। और दोगुने उत्साह के साथ हम कार्य करते हैं।

दवा का नियमित सेवन नहीं करने से टीबी मरीज हो सकते हैं मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट टीबी से संक्रमित

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– राज्यभर के छह मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में संचालित है नोडल एमडीआर टीबी सेंटर
– जिला स्तर पर सीबीनेट जैसी मशीन से निः शुल्क होती है टीबी मरीजों की जांच

मुंगेर, 13 अप्रैल-

टीबी की दवा का नियमित सेवन नहीं करने से टीबी मरीज हो सकते हैं मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) टीबी से संक्रमित । उक्त आशय की जानकारी जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉर ध्रुव कुमार शाह ने दी। उन्होंने बताया कि टीबी अब लाइलाज बीमारी नहीं है। सरकारी अस्पतालों में टीबी का सम्पूर्ण और निः शुल्क इलाज संभव है। जिला मुख्यालय सहित जिला भर के सभी सरकारी अस्पतालों और डॉट्स केंद्रों पर टीबी जांच और उपचार की सम्पूर्ण व्यवस्था उपलब्ध है। इसके अलावा टीबी मरीजों के सही पोषण के लिए भी सरकार के द्वारा निक्षय पोषण योजना के तहत प्रति माह 500 रुपए की सहायता राशि दी जाती है। इसके लिए टीबी मरीजों का रजिस्ट्रेशन/नोटिफिकेशन निक्षय पोर्टल पर होना अनिवार्य है। बावजूद इसके सबसे अधिक आवश्यक है कि टीबी मरीजों के द्वारा टीबी की दवा की सम्पूर्ण डोज पूरी की जाय। टीबी मरीजों के द्वारा दवा लेने में अनियमितता बरतने पर उस मरीज के मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट टीबी से संक्रमित होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। इसके अलावा बिना चिकित्सकीय परामर्श के दुकानों से टीबी की दवा लेने और दवा खाने से पहले ड्रग सेंसेटिव जांच नहीं कराने से भी मरीजों के एमडीआर टीबी से संक्रमित होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

राज्य भर के छह मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में संचालित है नोडल एमडीआर टीबी सेंटर :
जिला यक्ष्मा केंद्र मुंगेर में जिला टीबी/एचआईवी समन्वयक शैलेंदु कुमार ने बताया कि राज्य के विभिन्न जिलों में कार्यरत छह मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में नोडल एमडीआर टीबी सेंटर कार्यरत है। जहां मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के मरीजों के निःशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध है। ये मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल हैं –
1. पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, पटना
2. जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, भागलपुर
3. इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना
4. श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, मुजफ्फरपुर
5. दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, दरभंगा
6. अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, गया ।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम का मूल उद्देश्य टीबी के मामलों में 2025 तक 2015 की तुलना में 80% तक कमी लाना है। इसके अलावा टीबी से होने वाली मृत्यु के मामलों में 2025 तक 90% तक कमी लाना मुख्य उद्देश्य है। इसके साथ – साथ किसी भी परिवार को टीबी बीमारी के कारण अत्यधिक बोझ का सामना नहीं करना पड़े यह भी राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम 2025 के प्रमुख उद्देश्य में शामिल है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए सरकार, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मियों के साथ – साथ आम लोगों का भी महत्वपूर्ण सहयोग आवश्यक है।

लगातार बढ़ती गर्मी के साथ ही लोगों के डायरिया से ग्रसित होने की बढ़ी संभावना

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– आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर – घर जाकर ओआरएस और जिंक टैबलेट करेगी वितरित
मुंगेर-

जिला में पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ रही गर्मी से बच्चों सहित अन्य लोगों के डायरिया से ग्रसित होने कि संभावना काफी बढ़ गई है। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य विभाग डायरिया से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने कि तैयारी कर रहा है। इसके लिए सामुदायिक स्तर पर दस्त को लेकर लोगों को जागरूक करने की प्रमुख जिम्मेदारी आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को दी गई है। आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गृह भ्रमण के दौरान घर घर जाकर लोगों को डायरिया से बचाव के लिए ओआरएस और जिंक टैबलेट के इस्तेमाल के लिए जागरूक करते हुए वहां तक ओआरएस और जिंक टैबलेट भी पहुंचाएगी ।
ओआरएस और जिंक टैबलेट के इस्तेमाल से ही जिला को डायरिया मुक्त किया जा सकता-
सिविल सर्जन डॉ. पीएम सहाय ने बताया कि डायरिया से होने वाली शिशु और बाल मृत्यु दर में कमी लाने के लिए सामुदायिक स्तर पर ओआरएस और जिंक टैबलेट के इस्तेमाल से ही जिला को डायरिया मुक्त किया जा सकता है। इसके अलावा भोजन और पानी को ढंक कर रखना, साफ – सफाई का ख्याल रखना भी बहुत जरूरी है ताकि खुद को और खासकर बच्चों को डायरिया से बचाया जा सके । उन्होंने बताया कि आशा अपने क्षेत्र के सभी पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों के अभिभावकों को दस्त के बारे में जानकारी देते हुए इससे बचाव के लिए ओरल रिहाइड्रेशन सोल्यूशन ( ओआरएस ) के इस्तेमाल के लिए प्रेरित करेंगी । उन्होंने बताया कि जिला के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में ओआरएस और जिंक टैबलेट की उपलब्धता सुनिश्चित करवाई जायेगी ताकि आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के द्वारा घर घर जाकर लोगों तक इसे वितरित किया जा सके ।
डायरिया से पीड़ित को तरल पदार्थों का सेवन अधिक से अधिक करना चाहिए-
जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) मो. फैजान आलम असरफी ने बताया कि पानी जैसे लगातार मल का होना, बार- बार उल्टी होना, अधिक प्यास लगना, पानी भी नहीं पचना, दस्त के साथ बुखार का होना, मल के साथ खून का आना ही डायरिया के होने का प्रमुख लक्षण है। यदि कोई व्यक्ति डायरिया से पीड़ित है तो उसके शरीर में पानी कि कमी नहीं हो इसके लिए तरल पदार्थों का सेवन अधिक से अधिक करना चाहिए। केला, उबला हुआ आलू, अनार,अंगूर, संतरा आदि खट्टे फलों का सेवन करने से डायरिया से पीड़ित लोगों को काफी राहत मिलती है। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार बच्चों में 24 घंटा के दौरान तीन या उससे अधिक बार पानी जैसा दस्त होना डायरिया है। डायरिया जीवाणु और विषाणु के कारण तो होता ही है इसके अलावा प्रदूषित पानी, खान पान में गड़बड़ी और आंत में संक्रमण का होना भी डायरिया होने का प्रमुख कारण है। डायरिया होने पर शरीर में पानी की कमी हो जाती है इससे शरीर काफी कमजोर हो जाता। यदि समय पर सही इलाज नहीं मिले तो डायरिया से पीड़ित व्यक्ति की मृत्यु तक हो सकती है। डायरिया के ये लक्षण किसी भी व्यक्ति में दिखाई दे तो उसे तत्काल स्वास्थ्य संस्थानों में भर्ती कराया जाना चाहिए।

लोगों को मस्तिष्क ज्वर के लक्षण, बचाव एवं उपचार की जानकारी देकर जागरूक करने की जरूरत

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-मस्तिष्क ज्वर से बचाव के लिए जिलास्तरीय बैठक का आयोजन
– सिविल सर्जन की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में जिले के चिकित्सक हुए शामिल

शेखपुरा-

सिविल सर्जन कार्यालय परिसर में बुधवार को सिविल सर्जन डाॅ. अशोक कुमार सिंह की अध्यक्षता में एईएस/जेई (चमकी बुखार/मस्तिष्क ज्वर) से बचाव के लिए एक दिवसीय जिला स्तरीय बैठक का आयोजन हुआ। जिसमें जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के चिकित्सक एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मी शामिल हुए। बैठक के दौरान बताया गया कि 15 अप्रैल से मस्तिष्क ज्वर की संभावना काफी तेज हो जाती और बच्चों के इसकी चपेट में आने की प्रबल संभावना रहती है। इसलिए, इससे बचाव एवं इसपर रोकथाम के लिए सभी को अलर्ट रहने की जरूरत है। साथ ही सामुदायिक स्तर पर लोगों को मस्तिष्क ज्वर के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की जानकारी देकर जागरूक करने की जरूरत है। तभी इस बीमारी से बचाव और इसपर रोकथाम संभव है। साथ ही जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों को भी मस्तिष्क ज्वर के खिलाफ अलर्ट रहने की जरूरत है।

– चमकी बुखार के कारण, लक्षण, बचाव और समुचित उपचार की दी गई जानकारी :
सिविल सर्जन डाॅ. अशोक कुमार सिंह ने बताया, आयोजित बैठक में मौजूद सभी प्रतिभागियों को चमकी बुखार (एईएस/जेई) के कारण, लक्षण, बचाव और समुचित इलाज की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही सामुदायिक स्तर पर लोगों को लोगों को भी जागरूक करने को कहा गया और मस्तिष्क ज्वर से निपटने के लिए हर स्तर पर तैयार रहने को कहा गया।

– चमकी बुखार से बचाव के लिए जागरूकता भी जरूरी :
वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी ने बताया, चमकी बुखार से बचाव के लिए सामुदायिक स्तर पर जन जागरूकता भी बेहद आवश्यक और जरूरी है। इसलिए, बैठक के दौरान संबंधित मरीजों की जरूरी समुचित जाँच और इलाज के साथ-साथ इस बीमारी से बचाव के लिए सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक करने की भी जानकारी दी जाएगी। साथ ही मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि बच्चों को एईएस से बचाने के लिए माता-पिता को शिशु के स्वास्थ्य के प्रति अलर्ट रहना चाहिए। समय-समय पर देखभाल करते रहना चाहिए। स्वस्थ बच्चों को मौसमी फलों, सूखे मेवों का सेवन करवाना चाहिए। साफ सफाई पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। छोटे बच्चों को माँ का दूध पिलाना बेहद आवश्यक है। अप्रैल से जुलाई तक बच्चों में मस्तिष्क ज्वर की संभावना बनी रहती है। बच्चे के माता-पिता चमकी (मस्तिष्क) बुखार के लक्षण दिखते ही तुरंत जाँच और जाँच के बाद आवश्यक इलाज कराना चाहिए।

– ये है चमकी बुखार के प्रारंभिक लक्षण :
– लगातार तेज बुखार चढ़े रहना।
– बदन में लगातार ऐंठन होना।
– दांत पर दांत दबाए रहना।
– सुस्ती चढ़ना।
– कमजोरी की वजह से बेहोशी आना।
– चिउंटी काटने पर भी शरीर में कोई गतिविधि या हरकत न होना आदि।

– चमकी बुखार से बचाव के लिए ये सावधानियाँ हैं जरूरी :
– बच्चे को बेवजह धूप में घर से न निकलने दें।
– गन्दगी से बचें , कच्चे आम, लीची व कीटनाशकों से युक्त फलों का सेवन न करें।
– ओआरएस का घोल, नीम्बू पानी, चीनी लगातार पिलायें।
– रात में भरपेट खाना जरूर खिलाएं।
– बुखार होने पर शरीर को पानी से पोछें।
– पैरासिटामोल की गोली या सिरप दें।

भावी पीढ़ी को हाथीपांव से बचाव के लिए साफ-सफाई व फाइलेरिया की दवा खाने को प्रेरित कर रही हैं रानी जायसवाल

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– परबत्ता प्रखंड के रुपौली नौरंगा पंचायत में साईं राम पेशेंट सपोर्ट ग्रुप की संस्थापक सदस्य हैं रानी
– 30 नवंबर 2022 में 7 फाइलेरिया रोगियों के साथ हुई थी साई राम पेशेंट सपोर्ट ग्रुप की स्थापना

खगड़िया-

हमारी आने वाली पीढ़ी हाथीपांव (फाइलेरिया) से ना हो ग्रसित इसलिए घर- घर जाकर लोगों को साफ- सफाई के साथ फाइलेरिया की दवा खाने के लिए प्रेरित कर रही हूं । उक्त बात परबत्ता प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत रुपौली नौरंगा पंचायत में साईं राम पेशेंट सपोर्ट ग्रुप की संस्थापक सदस्य रानी जायसवाल ने कही। उन्होंने बताया कि मैं एक कुशल गृहणी हूं। मैंने मैट्रिक तक की पढ़ाई – लिखाई की है। मेरे परिवार में पति अजय चौधरी, सास- ससुर के अलावा कुल चार बच्चे हैं। मेरे पति के रोजगार का कोई खास साधन नहीं है। मैं और मेरे पति दोनों मिलकर घर पर ही एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। हमलोगों को परिवार चलाने के लिए आर्थिक स्तर पर काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बावजूद इसके साईं राम पेशेंट सपोर्ट ग्रुप के माध्यम से फाइलेरिया के रोगियों सहित अन्य लोगों को अपने स्तर से हर संभव मदद करने के लिए मुझे मेरे परिवार का पूरा सहयोग मिल रहा है। मैं साई पेशेंट सपोर्ट के ग्रुप के सदस्यों के साथ घर- घर जाकर फाइलेरिया के रोगियों को साफ- सफाई, नियमित व्यायाम और योगाभ्यास के साथ- साथ फाइलेरिया की दवा का सेवन करने के लिए प्रेरित कर रही हूं। इसके अलावा आम लोग को भी सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों के साथ उनके घर जाकर अपने सामने फाइलेरिया की दवा का सेवन करवाती हूं। अन्य लोगों को भी फाइलेरिया की दवा सेवन के लिए प्रेरित करती हूं।
उन्होंने बताया कि एमडीए अभियान के दौरान मैंने मेरी साई राम पेशेंट ग्रुप के सदस्यों ने 50 से अधिक परिवारों में दो वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रोग से ग्रसित लोगों को छोड़कर सभी लोगों को फाइलेरिया की दवा के रूप में अल्बेंडाजोल और डीईसी का सेवन करवाया है। इसके अलावा 5 से अधिक फाइलेरिया रोगियों का परबत्ता सीएचसी से लिंकेज करवा कर उन्हें एमएमडीपी क्लिनिक से अभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवायी है ।

उन्होंने बताया कि साई राम पेशेंट सपोर्ट ग्रुप, रूपौली नौरंगा पंचायत, परबत्ता में मेरे अलावा रूबी खातून, सहनून खातून, नूतन देवी, दयावती देवी, मंजू देवी, पूनम देवी, सुमित्रा देवी, श्याम सुन्दर देवी, रामवतार शाह शामिल हैं । सभी खुद फाइलेरिया की रोगी होते हुए भी अन्य लोग फाइलेरिया जैसी बीमारी से पीड़ित न हो इसके लिए स्वस्थ्य समाज की भावना से निः स्वार्थ भाव से समाज की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने बताया घर – घर जाकर लोगों को जागरूक करने के दौरान लोगों के कई सवालों का भी सामना करना पड़ता है। लोगों को फाइलेरिया की दवा का सेवन करने, साफ सफाई, योगाभ्यास, व नियमित व्यायाम के लिए तैयार करना थोड़ा मुश्किल होता है। बावजूद इसके अब लोग बातों को समझते हुए एमडीए अभियान के दौरान फाइलेरिया की दवा के रूप में अल्बेंडाजोल और डीईसी का सेवन और नियमित व्यायाम और योगाभ्यास को अपने जीवन शैली में शामिल कर चुके हैं। जिसका काफी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। साई राम पेशेंट सपोर्ट ग्रुप में फाइलेरिया रोगियों के अलावा गैर फाइलेरिया रोगी भी काफी बढ़कर सहयोग कर रहे हैं। इसमें मुख्य रूप से रूपौली नौरंगा की आंगनबाड़ी सेविका गीता देवी और सहायिका गायत्री देवी का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। हमलोग आंगनबाड़ी केंद्र और कन्या मध्य विद्यालय रूपौली नौरंगा में जाकर बच्चों- बच्चियों और आंगनबाड़ी केंद्र पर आने वाली महिलाओं को फाइलेरिया से बचने के लिए अपनाए जाने वाले उपाय के बारे में विस्तार पूर्वक बताते उन्हें साफ सफाई और नियमित व्यायाम और योगाभ्यास के लिए प्रेरित करते हैं।
फाइलेरिया रोगियों को दिव्यांगजन की तरह मिले सुख सुविधाएं :
उन्होंने बताया कि हाथी पांव फाइलेरिया के रोगियों को आजीवन एक दिव्यांग की तरह ही गुजारना पड़ता है। ऐसी जानकारी मिली है कि राज्य सरकार के द्वारा फाइलेरिया के रोगियों को दिव्यांग की श्रेणी में शामिल किया गया है। मेरी सभी फाइलेरिया रोगियों के हित में यह अपील है कि सभी फाइलेरिया के रोगियों को दिव्यांग जन की तरह सभी सुख सुविधाएं प्राप्त हो ताकी उनकी जिंदगी की परेशानियाँ कुछ कम हो।