जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा की सफलता को ले जिले भर में चल रहा जागरूकता अभियान 

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– सारथी रथ के माध्यम से सामुदायिक स्तर पर योग्य और इच्छुक लाभार्थियों को किया जा रहा है जागरूक
– आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी लाभार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही है अस्थाई साधन की सुविधा
खगड़िया, 16 जुलाई-
जिले में  जनसंख्या स्थिरीकरण  पखवाड़ा की सफलता को लेकर सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक करने के लिए प्रचार-प्रसार तेज कर दिया गया  है। सारथी रथ (ई-रिक्शा) के माध्यम से जिले के सभी प्रखंडों में गाँव-गाँव व टोले-मोहल्ले तक परिवार नियोजन का संदेश पहुँचाया जा रहा है । इसके अलावा संबंधित क्षेत्र की एएनएम और आशा कार्यकर्ता के साथ-साथ अन्य स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा एक-एक योग्य, सक्षम और इच्छुक लाभार्थी से संपर्क कर परिवार नियोजन के साधन अपनाने से होने वाले फायदे की जानकारी दी जा रही है। साथ हीं  साधन को अपनाने के लिए प्रेरित भी किया  जा रहा  है। ताकि एक-एक परिवार तक परिवार नियोजन का संदेश पहुँच सके और सभी योग्य, सक्षम और इच्छुक लाभार्थी परिवार नियोजन के साधन को अपनाने के लिए आगे आ सकें। जिससे  पखवाड़े का  सफल संचालन सुनिश्चित हो सके। वहीं, पखवाड़े की सफलता को लेकर केयर इंडिया, डब्ल्यूएचओ, यूनिसेफ, पिरामल स्वास्थ्य के अलावा अन्य सहयोगी स्वास्थ्य संगठन भी सहयोग कर रहे हैं।
– जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में चल रहा जनसंख्या स्थिरीकरण  पखवाड़ा :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों  में जनसंख्या स्थिरीकरण  पखवाड़ा चल रहा है।कोई भी योग्य और इच्छुक व्यक्ति अपने नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में जाकर इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं। यह सुविधा ना सिर्फ पूरी तरह मुफ्त है बल्कि, इस साधन को अपनाने वाले लाभार्थी को सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। इतना ही नहीं, सरकार द्वारा चलाई गई यह सुविधा छोटा और खुशहाल परिवार के लिए सबसे बेहतर साधन भी है। इसलिए, मैं जिले के तमाम योग्य दंम्पत्तियों से अपील करता हूँ कि पूरी तरह निःसंकोच और पुराने  ख्यालातों से बाहर आकर इस साधन को अपनाएं। वहीं, उन्होंने बताया, प्रसव के उपरांत एक सप्ताह के अंदर परिवार नियोजन का ऑपरेशन कराने वाली लाभार्थी को तीन हजार रु पये की सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि दी जाती है। जबकि, सामान्य दिनों यानी प्रसव के एक सप्ताह बाद ऑपरेशन कराने वाली लाभार्थी को दो हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
– गुणवत्तापूर्ण और बेहतर जिंदगी जीने के लिए परिवार नियोजन जरूरी :
परिवार नियोजन के अस्थाई साधन के रूप में अंतरा का इंजेक्शन लेने वाली सन्हौली पंचायत के वार्ड संख्या 02 निवासी शबनम कुमारी ने बताया, गुणवत्तापूर्ण और बेहतर जिंदगी जीने के लिए परिवार नियोजन साधन को अपनाना  बेहद जरूरी है। क्योंकि, छोटा परिवार ही खुशहाल परिवार की पहली पहल और नींव है। इसलिए, अब पुराने  ख्यालातों से बाहर आने और बेहतर जिंदगी जीने के लिए बेहतर फैसले लेने की जरूरत है। इसलिए   सभी योग्य महिला  को गुणवत्तापूर्ण और बेहतर जिंदगी जीने के लिए परिवार नियोजन के साधन को जरूर अपनाना चाहिए। अस्थाई साधन भी पूरी तरह सुरक्षित है और मैं इस सुविधा  को अपनाने के बाद पूरी तरह सुरक्षित हूँ।
– आंगनबाड़ी  केंद्रों पर भी लाभार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही है अस्थाई साधन की सुविधा :
पिरामल स्वास्थ्य के डीपीएल प्रफुल्ल झा ने बताया, पखवाड़े की सफलता को लेकर के आंगनबाड़ी  केंद्रों पर नियमित और कोविड टीकाकरण शिविर के दौरान भी योग्य लाभार्थियों को परिवार नियोजन के साधन  अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। जिसके दौरान दोनों साधन (स्थाई और अस्थाई) की जानकारी देकर लाभार्थियों को अपनी  सुविधा के अनुसार दोनों में से कोई साधन को अपनाने के लिए प्रेरित किया  जा रहा  है। वहीं, उन्होंने बताया, शुक्रवार को सन्हौली पंचायत स्थित आवास बोर्ड परिसर में संचालित आंगनबाड़ी  केंद्र संख्या 307 पर आयोजित नियमित सह कोविड टीकाकरण शिविर में 12 योग्य लाभार्थियों को अस्थाई साधन की सुविधा उपलब्ध कराई गई। जिसमें एक महिला को अंतरा का इंजेक्शन लगाया गया। जबकि, शेष महिलाओं को अन्य अस्थाई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई।

बेलहर के मधुबन की रहने वाली नूतन ने महज छह माह में दी टीबी को मात

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-नियमित तौर पर दवा का सेवन करने से मिला फायदा
-अब वह दूसरों को भी टीबी को लेकर कर रहीं जागरूक
बांका, 17 जुलाई-
बेलहर प्रखंड के मधुबन की रहने वाली नूतन कुमारी महज 19 साल की उम्र में टीबी की चपेट में आ गई थी। न खांसी होती  और न ही बलगम के साथ खून आने की समस्या थी। हालांकि बुखार रहता था। पहले तो ग्रामीण स्तर के डॉक्टर से दिखाया, लेकिन जब ठीक नहीं हुई तो सदर अस्पताल गई। वहां पर जांच में जब टीबी की पुष्टि हुई तो जिला यक्ष्मा केंद्र से नूतन का इलाज चला। वहां पर डीपीएस गणेश से नूतन की मुलाकात हुई। गणेश झा ने नूतन की सही काउंसिलिंग की और इसके बाद उसका इलाज शुरू हुआ। छह महीने तक इलाज चलने के बाद नूतन पूरी तरह से स्वस्थ हो गई। अब वह स्वस्थ जीवन जी रही है।
नूतन कहती है कि मैं जब बीमार पड़ी थी तो मुझमें टीबी के लक्षण नहीं थे। हां, बुखार आता था। मुझे लगा कि यह एक सामान्य बीमारी है, लेकिन जब ठीक नहीं हुई तो सदर अस्पताल इलाज कराने के लिए गई। वहां पर मेरी मुलाकात डीपीएस गणेश झा जी से हुई। उन्होंने मेरा मार्गदर्शन किया और समझाया कि टीबी का इलाज संभव है और यह सरकारी अस्पतालों में बिल्कुल मुफ्त में होता है। इससे मुझे बड़ी तसल्ली हुई, क्योंकि मेरी आर्थिक स्थिति भी उतनी अच्छी नहीं थी कि मैं दवा और इलाज का खर्च वहन कर सकूं। इसलिए जब मैंने यह जाना कि टीबी के इलाज का पैसा नहीं लगेगा तो मुझे बहुत राहत मिली। इसके बाद मेरा इलाज शुरू हुआ। छह महीने तक मैंने दवा का नियमित सेवन किया। इसके बाद जब मैं दोबारा जांच कराने गई तो स्वस्थ निकली। अब मुझे कोई परेशानी नहीं होती है। हां, मैंने इस दौरान एक बार भी दवा का सेवन करना नहीं भूली। जिला यक्ष्मा केंद्र के कर्मियों के साथ-साथ मैं सरकार का भी शुक्रिया अदा करना चाहती हूं कि मेरे जैसी गरीब लड़की का बिल्कुल मुफ्त में इलाज करवाया। अब तो मैं दूसरे लोगों को भी सरकार की इस सुविधा के बारे में बताती हूं।
शुरुआत में इलाज होने पर जल्द हो जाएंगे ठीकः जिला ड्रग इंचार्ज राजदेव राय कहते  हैं कि टीबी का इलाज सरकारी अस्पतालों में बिल्कुल मुफ्त है। इस बात को आमजन तक पहुंचाना बड़ी जिम्मेदारी है। हमलोग इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसका असर भी पड़ रहा है। अब जिले के अधिकांश लोगों को टीबी के लक्षण, इसके इलाज के बारे में जानकारी मिल रही है। अभियान के जरिये लोगों तक जानकारी पहुंचाई जा रही है। नूतन का शुरुआती दौर में इलाज हो गया तो यह छह महीने में ही ठीक हो गई। इसी तरह अन्य लोग भी शुरुआत में इलाज करवा लें तो ज्यादा बेहतर रहेगा। कम समय में ही ठीक हो जाएंगे। पैसे की चिंता नहीं करें। इलाज तो मुफ्त होगा ही, साथ में जब तक इलाज चलेगा, तब तक सरकार की ओर से पांच सौ रुपये प्रतिमाह पोषण के लिए भी दिया जाएगा।

हर घर दस्तक वैक्सीनेशन अभियान • प्रत्येक व्यक्ति को चिह्नित  कर लगाया जा रहा है कोरोना का टीका 

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– जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में भी नियमित तौर पर जारी है कोविड टीकाकरण
– कोविड के खतरे से बचाव के लिए टीकाकरण की पूरी डोज जरूरी, इसलिए जरूर लें टीका
लखीसराय, 16 जुलाई-
प्रदेश के विभिन्न जिलों में कोविड संक्रमण की शिकायत आने के बाद इस घातक महामारी से सुरक्षा के मद्देनजर एकबार फिर से जिले में टीकाकरण अभियान तेज कर दिया  गया  है। ताकि जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लाभार्थियों का टीकाकरण सुनिश्चित हो सके और सामुदायिक स्तर पर लोग इस घातक महामारी के प्रभाव से खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें । इसके साथ हीं जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों  में तो नियमित तौर पर  टीकाकरण अभियान चल ही रहा है। वहीं  वर्तमान में जिले भर में हर घर दस्तक टीकाकरण अभियान की भी शुरुआत की गई है। जिसके तहत जिले के सभी प्रखंडों में टीकाकरण टीम घर-घर पहुँच रही  और निर्धारित समय के अनुसार पहला डोज ले चुके व्यक्ति को दूसरा और दूसरी  डोज ले चुके व्यक्ति को प्रीकाॅशनरी (तीसरा) डोज से टीकाकृत कर रहे हैं। साथ ही जो व्यक्ति किसी भी कारण वश अबतक टीका नहीं ले पाएं, उन्हें प्रेरित कर टीके की  पहली  डोज लगा रहे हैं।
– कोविड के खतरे से बचाव के लिए टीकाकरण की पूरी डोज जरूरी, इसलिए जरूर लें टीका :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया, एकबार फिर से प्रदेश के विभिन्न जिलों से कोविड संक्रमण की शिकायत सामने आने लगी है। इसलिए, इस घातक महामारी से बचाव के लिए हर व्यक्ति को टीका लेना जरूरी है। एक भी व्यक्ति टीका से वंचित नहीं रहे, इसी उद्देश्य से जिले में हर घर दस्तक टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। जिसके तहत टीकाकरण टीम जिले के सभी प्रखंडों के सभी क्षेत्रों में घर-घर दस्तक देकर एक-एक व्यक्ति को चिह्नित  कर टीकाकृत कर रही है।
– सुदूरवर्ती इलाके में भी पहुँच रही है टीकाकरण टीम, लोगों को प्रेरित कर किया जा रहा है टीकाकृत :
लखीसराय सदर पीएचसी के प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक निशांत राज ने बताया, किसी भी स्थिति में एक भी व्यक्ति टीका से वंचित नहीं रहे और सभी लाभार्थियों को हर हाल में निर्धारित दूसरा और प्रीकाॅशनरी डोज का टीका लगाया जा सके। इसके लिए टीकाकरण टीम सुदूरवर्ती इलाके में भी पहुँच रही  और एक-एक व्यक्ति को चिह्नित  कर टीकाकृत किया जा रहा है। इसके अलावा संबंधित क्षेत्र की एएनएम, आशा कार्यकर्ता समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा टीकाकरण के लिए लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।

तेज धूप और उमस से बचाव के लिए रहें सतर्क

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-धूप में बेवजह घरों से निकलने से करें परहेज
-पौष्टिक और प्रोटीनयुक्त आहार का सेवन करें
बांका, 16 जुलाई-
बारिश का मौसम चल रहा है, लेकिन तेज धूप और उमस से लोगों का बुरा हाल है। मानसून के रूठने की वजह से लोग बेमौसम बीमारियों की चपेट में आने लगे हैं। ऐसे मौसम में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। अभी के समय में 40 डिग्री के आसपास तापमान रहने और चिलचिलाती धूप ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।   इस तरह के मौसम में लू, डिहाइड्रेशन समेत अन्य बीमारियों की चपेट में आने की संभावना बढ़ गई है। पिछले कई दिनों से तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। इस वजह से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में इन परेशानियों के प्रभाव से दूर रहने के लिए सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है, ताकि मौसमी बीमारियों से आप दूर रह सकें। अन्यथा थोड़ी सी लापरवाही बड़ी मुसीबत बन सकती है। इन बदलते मौसम में खासकर नवजातों व बुजुर्गों के स्वास्थ्य के प्रति विशेष ख्याल रखने की जरूरत है। युवाओं के मुकाबले नवजातों और बुजुर्गों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। इसलिए नवजातों और बुजुर्गों के  खान-पान समेत अन्य दिनचर्या का ख्याल रखने की जरूरत है।
एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी कहते हैं कि इस बदलते मौसम में लोगों को सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। थोड़ी सी लापरवाही भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। मौसमी बीमारी से बचाव के लिए पौष्टिक और प्रोटीनयुक्त आहार का सेवन करना चाहिए। साथ ही इस मौसम में नवजातों व बुजुर्गों का भी विशेष ख्याल रखने की जरूरत है। साफ-सफाई का भी विशेष ख्याल रखें। दरअसल, साफ-सफाई हमें न सिर्फ मौसमी बीमारियों से बचाता है, बल्कि हर संक्रामक बीमारी से दूर रखता और स्वस्थ शरीर निर्माण में भी सहयोग करता है।
धूप में अनावश्यक निकलने से करें परहेजः डॉ. चौधरी कहते हैं कि तापमान में हो रही वृद्धि के कारण मौसमी बीमारियों की संभावना रहती है। ऐसे में हर आयु वर्ग के लोगों को खाली पेट और अनावश्यक घरों से बाहर निकलने से परहेज करना चाहिए। अगर निकलते भी हैं तो निश्चित तौर पर खाना खाकर और निकलने के पूर्व नींबू-पानी जरूर ले लें। यह आग उगलती धूप के प्रभाव से बचाव के लिए काफी हद तक कारगर होगा। खासकर बच्चों को अनावश्यक घर से बाहर नहीं निकलने दें और बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें।
डॉक्टर से सलाह लेकर दवा का करें सेवनः डॉ. चौधरी कहते हैं कि बदलते मौसम में स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए व्यायाम पर भी बल दें और नियमित रूप से व्यायाम करें। साथ ही समय पर खाना खाएं। किसी प्रकार की स्वास्थ्य पीड़ा होने पर तुरंत चिकित्सकों से आवश्यक जांच करानी चाहिए। खुद से डॉक्टर बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। यह नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए डॉक्टर को दिखाएं और उनके परामर्श के मुताबिक दवा का सेवन करें। साथ ही मौसमी व संक्रामक बीमारी से बचने के लिए पूर्व की भाति रहन-सहन में भी सकारात्मक बदलाव करें। इसके लिए शौचालय समेत घर के अन्य जगहों की नियमित साफ-सफाई करें। आवश्यकतानुसार ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराएं। घर के आसपास जलजमाव नहीं होने दें। कूड़ेदान का उपयोग करें।

दस्त से होनेवाली शिशु मृत्यु दर को शून्य स्तर तक लाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष सघन दस्त पखवाड़ा का आयोजन होता  : सिविल सर्जन

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ओआरएस घोल और जिंक टैबलट के बावजूद भी  बच्चा ठीक नहीं हुआ तो ले जाएं नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र : डीपीएम
– सघन दस्त पखवाड़ा में उम्र के अनुसार बच्चों को दी जाने वाली ओआरएस और जिंक टैबलेट की तय की गई है खुराक : डीसीएम
मुंगेर, 15 जुलाई-
दस्त से होने वाली  शिशु मृत्यु को शून्य स्तर तक लाने के उद्देश्य से प्रति वर्ष सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष 15 से 30 जुलाई तक जिला भर में सघन दस्त पखवाड़ा मनाया जा रहा है। उक्त बातें शुक्रवार को सदर अस्पताल परिसर में आयोजित सघन दस्त पखवाड़ा का उद्घाटन  करते हुए सिविल सर्जन डॉ. पीएम सहाय ने कही। उन्होंने बताया कि पूरे पखवाड़ा के दौरान कोरोना महामारी के सुरक्षात्मक उपायों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा ताकि कोरोना वायरस के संक्रमण से खुद के साथ-साथ अपने नौनिहालों का भी बचाव किया जा सके। इस अवसर पर जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक नसीम रजि, जिला सामुदायिक उत्प्रेरक निखिल राज सहित सदर अस्पताल के कई अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।
ओआरएस घोल और जिंक टैबलेट देने के बावजूद भी यदि बच्चा ठीक नहीं हुआ तो तुरंत नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाएं : डीपीएम
ज़िला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक नसीम रजि ने बताया कि ओआरएस का घोल और जिंक टैबलेट का उपयोग दस्त होने के दौरान बच्चों को अनिवार्य रूप से कराया जाएगा। हालांकि दस्त बंद हो जाने के बावजूद जिंक की खुराक 2 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को उम्र के अनुसार 14 दिनों तक जारी रखी  जाए। जिंक और ओआरएस के उपयोग के बावजूद भी यदि दस्त ठीक नहीं हो रहा है तो जल्द ही अपने बच्चे को नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र पर लेकर जाएं। दस्त के दौरान और दस्त के बाद भी नौनिहालों को आयु के अनुसार स्तनपान, ऊपरी आहार एवं भोजन जारी रखना चाहिए।
उन्होंने बताया कि पखवाड़ा के दौरान आशा कार्यकर्ता और एएनएम के द्वारा उम्र के अनुसार शिशु पोषण से संबंधित परामर्श देने के साथ ही पीने के लिए साफ एवं सुरक्षित पेयजल का उपयोग करने, खाना बनाने एवं खाना खाने से पूर्व और बच्चे का मल व मूत्र की सफ़ाई करने के बाद साबुन या हैंड सेनिटाइजर से रगड़-रगड़कर हाथ धोने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा। इससे शरीर के अंदर किसी भी तरह की बैक्टीरिया  प्रवेश नहीं कर पायेगी। यहां सबसे अहम बात यह है कि डायरिया होने पर ओआरएस और जिंक का उपयोग करने से बच्चों में तीव्र गति से सुधार होता है। उन्होंने बताया कि सघन दस्त पखवाड़ा कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पूरे अभियान की  सतत निगरानी एवं अनुश्रवण करने के लिए वरीय अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई है।  पखवाड़े के दौरान कुछ विशेष क्षेत्रों में विशेष रूप से ध्यान दिया जाएगा। इन स्थानों में पर्याप्त सफाई व्यवस्था के अभाव वाले इलाकों के अलावा शहरी क्षेत्रों के झुग्गी- झोपड़ी, कठिन पहुंच वाले क्षेत्र, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र, निर्माण कार्य में लगे मजदूरों के परिवार, ईंट भट्टे वाले क्षेत्र, अनाथालय तथा ऐसा चिह्नित क्षेत्र जहां दो- तीन वर्ष पूर्व तक दस्त के मामले अधिक संख्या में पाये गये हों वहां इस अभियान को वृहद रूप से चलाया जाएगा। इसके साथ ही पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों के घरों में प्रति बच्चा एक-एक ओआरएस पैकेट का वितरण किया जाएगा।
 उम्र के अनुसार बच्चों के लिए   ओआरएस और जिंक टैबलेट की  तय की गई है खुराक : डीसीएम
जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला सामुदायिक उत्प्रेरक निखिल राज ने बताया कि इंटेंसीफाइड डायरिया कंट्रोल फोर्टनाइट के दौरान उम्र के अनुसार बच्चों के लिए ओआरएस और जिंक टैबलेट की खुराक तय की गई है।
दस्त के दौरान ओआरएस घोल की  खुराक :
2 माह से कम आयु के बच्चे – पांच चम्मच ओआरएस प्रत्येक घोल के अनुसार ।
2 माह से 2 वर्ष तक के बच्चे – 1/4 ग्लास पानी में 1/2 ग्लास प्रत्येक दस्त के बाद ।
2 से 5 वर्ष तक के बच्चे – 1/2 ग्लास पानी में 1ग्लास प्रत्येक दस्त के बाद ।
जिंक की  खुराक :
2 से 6 माह तक – साफ चम्मच में जिंक की आधी गोली मां के दूध में अच्छी तरह घुलाकर पिलाएं (10) एमजी ।
6 माह से 5 साल तक – साफ चम्मच में जिंक की  एक गोली पीने के पानी में अच्छी तरह घोलकर पिलाएं। (20 एमजी)
ओआरएस और जिंक टैबलेट सभी निकटतम स्वास्थ्य केंद्रों पर निःशुल्क उपलब्ध है। आशा कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रमण कर पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों के घरों में प्रति बच्चा एक-एक ओआरएस घोल का पैकेट का वितरण करेगी और परिवार के सदस्यों के समक्ष ओआरएस घोल बनाने और उपयोग की विधि , इससे होने वाले लाभ और साफ-सफाई के महत्व के बारे में जागरूक करेगी।

सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा • जिले के सभी प्रखंडों में ओआरएस पैकेट का वितरण शुरू 

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– सदर अस्पताल में सिविल सर्जन ने  बच्चों के बीच ओआरएस पैकेट का वितरण कर की पखवाड़े की शुरुआत
– एक लाख 77 हजार 497 बच्चों के बीच ओआरएस पैकेट वितरण का निर्धारित किया गया है लक्ष्य
लखीसराय, 15 जुलाई-
शुक्रवार को जिले में डायरिया से बचाव के लिए सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा का शुभारंभ हो गया। जिसका शुभारंभ सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र कुमार चौधरी एवं डीआईओ सह एसीएमओ डाॅ अशोक कुमार भारती ने संयुक्त रूप से बच्चों के बीच ओआरएस पैकेट का वितरण कर किया। इसके बाद जिले के सभी प्रखंडों में संचालित रेफरल अस्पताल, पीएचसी, सीएचसी समेत अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में पखवाड़े का शुभारंभ हुआ।  यह पखवाड़ा जिले भर में 30 जुलाई तक चलेगा। इस  दौरान शहरी क्षेत्रों में यूनिसेफ की  मानिटरिंग में निजी स्वयंसेवी (कर्मी) द्वारा और ग्रामीण क्षेत्रों में ऑगनबाड़ी सेविका और आशा कार्यकर्ता द्वारा 0 से 05  से  नीचे के  आयु वर्ग के  बच्चों में  ओआरएस  का वितरण  कराया जाएगा। इस मौके पर यूनिसेफ के एसएमसी नैय्यर उल आजम, केयर इंडिया के डीटीओ-ऑन राकेश साहू, सदर पीएचसी के बीएचएम निशांत राज, बीसीएम नुसरत परवीण, एचएम बिनोद भारती, डीएस डाॅ राकेश कुमार आदि मौजूद थे।
– डायरिया से संक्रमित बच्चे के बीच ओआरएस पैकेट के साथ-साथ जिंक टैबलेट का भी किया जाएगा वितरण :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र कुमार चौधरी ने बताया, पखवाड़े के दौरान डायरिया से संक्रमित बच्चे के बीच ओआरएस पैकेट के साथ-साथ जिंक टैबलेट/सीरप का भी वितरण किया जाएगा।साथ ही सामुदायिक स्तर पर लोगों को डायरिया से बचाव के लिए जागरूक भी किया जाएगा और डायरिया के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की भी विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इस  दौरान लोगों को बताया जाएगा कि डायरिया होने पर क्या करें, इससे बचाव के  क्या उपाय हैं , साफ-सफाई का ध्यान रखने समेत अन्य आवश्यक जानकारी दी जाएगी। ताकि शुरुआती दौर में ही संबंधित व्यक्ति बीमारी की पहचान कर सके और समय पर इलाज शुरू हो सके।
– जिले के एक लाख 77 हजार 497 बच्चों के बीच ओआरएस पैकेट का होगा वितरण :
डीआईओ सह एसीएमओ डाॅ अशोक कुमार भारती ने बताया, पखवाड़े के दौरान जिले भर में एक लाख 77 हजार 497 बच्चों के बीच ओआरएस पैकेट का वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसे सुनिश्चित करने को लेकर गठित स्वास्थ्य टीम दो लाख 41 हजार 20 घरों का भ्रमण करेंगी । वहीं, उन्होंने बताया, डायरिया होने पर लगातार 14 दिनों तक जिंक का सेवन करें। 02 माह से 06 माह तक के बच्चों को जिंक की  1/2 गोली 10 मिग्रा पानी में घोलकर या माँ के दूध के साथ घोलकर चम्मच से पिलाएं। 06 माह से 05 साल के बच्चों को एक गोली साफ पानी के साथ या माँ के दूध में घोलकर पिलाएं। जबकि, दो माह से कम आयु के बच्चों को 05 चम्मच ओआरएस प्रत्येक दस्त के बाद पिलाएं। 02 माह से 02 वर्ष तक बच्चे को 1/4 ग्लास से 1/2 ग्लास प्रत्येक दस्त के बाद पिलाएं। 02 से 05 वर्ष तक के बच्चों को 1/2 से ग्लास प्रत्येक दस्त के बाद पिलाएं।
– जानें क्या है डायरिया और लक्षण :
टट्टी की  अवस्था में  बदलाव या सामान्य से ज्यादा बार, ज्यादा पतला या पानी जैसी होने वाली टट्टी ही डायरिया (दस्त) का पहला का लक्षण है। इसके अलावा बच्चा बेचैन व चिड़चिड़ा है, अथवा सुस्त या बेहोश है। बच्चे की ऑखें डाउन हो रही हैं । बच्चे को बहुत ज्यादा प्यास लगना अथवा पानी ना पी पाना आदि डायरिया का ही कारण और लक्षण है।
– जिंक सेवन के ये हैं विशेष लाभ :
जिंक सेवन से दस्त और तीव्रता दोनों कम होती  है। तीन महीने तक दस्त का खतरा नहीं के बराबर रहता है। रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। जबकि, ओआरएस से शरीर में पानी की कमी नहीं होती है एवं दस्त के खतरे से बचाव करता है।

डायरिया से बचाव को लेकर जिले में सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा शुरू 

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– खगड़िया के सन्हौली पंचायत के आवास बोर्ड स्वास्थ्य उपकेंद्र में सिविल सर्जन ने की पखवाड़े की शुरुआत
– 30 जुलाई तक चलेगा पखवाड़ा, घर-घर जाकर 05 वर्ष तक के बच्चों के बीच किया जाएगा ओआरएस पैकेट का वितरण
खगड़िया, 15 जुलाई-
शुक्रवार से जिले में डायरिया से बचाव को लेकर सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा शुरू हो गया। इस पखवाड़ा का सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने खगड़िया के सन्हौली पंचायत स्थित आवास बोर्ड स्वास्थ्य उप केंद्र परिसर में फीता काटकर एवं बच्चों को ओआरएस घोल पिलाकर शुभारंभ किया। इसके बाद जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों  में पखवाड़े का शुभारंभ हुआ। वहीं, पखवाड़े के माध्यम से जिले भर में ऑगनबाड़ी सेविका, आशा कार्यकर्ता समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा घर-घर जाकर 05 आयु वर्ष तक के  बच्चों के बीच ओआरएस पैकेट का वितरण किया जाएगा और डायरिया से बचाव के लिए बच्चों के माता-पिता को आवश्यक जानकारी दी जाएगी। साथ ही डायरिया के कारण, लक्षण, बचाव एवं इसके उपचार की भी विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इस मौके पर जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान, डीपीएम (हेल्थ) पवन कुमार, खगड़िया सदर पीएचसी प्रभारी डॉ कृष्ण कांत कुमार, केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद, पिरामल स्वास्थ्य के डीपीएल प्रफुल्ल झा के अलावा डब्ल्यूएचओ, यूनिसेफ समेत अन्य सहयोगी स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि मौजूद थे।
– डायरिया से बचाव के लिए जागरूकता  जरूरी, घर-घर जाकर ओआरएस पैकेट के  वितरण के साथ-साथ जागरूक भी किया जाएगा :
इस मौके पर सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने कहा, डायरिया से बचाव के लिए सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। इसके लिए पखवाड़ा के दौरान ना सिर्फ ओआरएस पैकेट का वितरण किया जाएगा बल्कि, डायरिया से बचाव के लिए सामुदायिक स्तर पर लोगों को जरूरी जानकारी और आवश्यक चिकित्सा परामर्श भी दिया जाएगा। ताकि शुरुआती दौर में ही संबंधित व्यक्ति बीमारी की पहचान कर सके और समय पर इलाज शुरू हो सके। वहीं, उन्होंने बताया, मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है। जिसके कारण जहाँ सर्दी-खाँसी, जुकाम समेत अन्य मौसमी बीमारी आम हो गई है वहीं, इसके साथ डायरिया की भी संभावना बढ़ गई है। ऐसे में हमें विशेष सावधान और सतर्क रहने की जरूरत है। डायरिया से बचाव के  लिए लोगों को स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना चाहिए।
– डायरिया होने पर 14 दिनों तक जिंक का करें सेवन :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, पखवाड़ा के दौरान डायरिया संक्रमित बच्चों को ओआरएस घोल के साथ-साथ जिंक टैबलेट/सीरप भी दिया जाएगा और संक्रमित बच्चों के माता-पिता को दवाई का सेवन कराने के लिए आवश्यक जानकारी भी दी जाएगी। वहीं, उन्होंने बताया, डायरिया होने पर लगातार 14 दिनों तक जिंक का सेवन करें। 02 माह से 06 माह तक के बच्चों को जिंक की  1/2 गोली 10 मिग्रा पानी में घोलकर या माँ के दूध के साथ घोलकर चम्मच से पिलाएं। 06 माह से 05 साल के बच्चों को एक गोली साफ पानी के साथ माँ के दूध में घोलकर पिलाएं। जबकि, दो माह से कम आयु के बच्चों को 05 चम्मच ओआरएस प्रत्येक दस्त के बाद पिलाएं। 02 माह से 02 वर्ष तक बच्चे को 1/4 ग्लास से 1/2 ग्लास प्रत्येक दस्त के बाद पिलाएं। 02 से 05 वर्ष तक के बच्चों को 1/2 से ग्लास प्रत्येक दस्त के बाद पिलाएं।
– जानें क्या है डायरिया और लक्षण :
टट्टी  की  अवस्था बदलाव या सामान्य से ज्यादा बार, ज्यादा पतला या पानी जैसी होने वाली टट्टी ही डायरिया (दस्त) का पहला का लक्षण है। इसके अलावा बच्चा बेचैन व चिड़चिड़ा है, अथवा सुस्त या बेहोश है। बच्चे की ऑखें डाउन हो रही हैं । बच्चे को बहुत ज्यादा प्यास लगना अथवा पानी ना पाना। चिकोटी काटने पर पेट के बगल की त्वचा खींचने पर धीरे-धीरे पूर्वावस्था में आना अर्थात त्वचा के ललीचेपन में कमी आना आदि डायरिया का ही कारण और लक्षण है।
– जिंक सेवन के ये हैं विशेष लाभ :
जिंक सेवन से दस्त और तीव्रता दोनों कम होता है। तीन महीने तक दस्त का खतरा नहीं के बराबर रहता है। रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। जबकि, ओआरएस से शरीर में पानी की कमी नहीं होती है एवं दस्त के खतरे से बचाव करता है।

भागलपुर जिले में डायरिया से बचाव को लेकर सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा शुरू

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– डीआईओ ने शहरी स्वास्थ्य उपकेंद्र बरारी में बच्चों को ओआरएस घोल पिलाकर की पखवाड़े की शुरुआत
– जिले भर में 5 लाख 17 हजार 107 घरों के 05 वर्ष तक के बच्चों के बीच ओआरएस पैकेट का किया जाएगा वितरण
भागलपुर, 15 जुलाई-
शुक्रवार को जिले में डायरिया से बचाव के लिए सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा का शुभारंभ हुआ।  डीआईओ डाॅ मनोज कुमार चौधरी ने शहरी स्वास्थ्य उप केंद्र बरारी पर 10 बच्चों को खुद दवा पिलाकर पखवाड़े की शुरुआत की। इसके बाद जिले में संचालित सभी स्वास्थ्य संस्थानों  में पखवाड़े का शुभारंभ हुआ। जिसका समापन 30 जुलाई को होगा। इस दौरान जिले भर में ऑगनबाड़ी सेविका और आशा समेत अन्य स्वास्थ्यकर्मी  घर-घर जाकर 0 से 05 आयु वर्ग के तक के बच्चों के बीच ओआरएस पैकेट का वितरण करेंगे। इस मौके पर शहरी स्वास्थ्य केंद्र बरारी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ वरुण कुमार सिन्हा, यूनिसेफ एसएमसी अमित कुमार, यूएनडीपी के संदीप सिंह, बीएमसी अजीत कुमार आदि मौजूद थे।
– डायरिया से संक्रमित बच्चे के बीच ओआरएस पैकेट के साथ-साथ जिंक टेबलेट का भी किया जाएगा वितरण :
डीआईओ डाॅ मनोज कुमार चौधरी ने बताया, पखवाड़े के दौरान डायरिया से संक्रमित बच्चे के बीच ओआरएस पैकेट के साथ-साथ जिंक टेबलेट/सीरप का भी वितरण किया जाएगा।साथ ही सामुदायिक स्तर पर लोगों को डायरिया से बचाव के लिए जागरूक भी किया जाएगा और डायरिया के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की भी विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इस  दौरान लोगों को बताया जाएगा कि डायरिया होने पर क्या करें, इससे बचाव के  क्या उपाय हैं  , साफ-सफाई  रखने समेत अन्य आवश्यक जानकारी दी जाएगी। ताकि शुरुआती दौर में ही संबंधित व्यक्ति बीमारी की पहचान कर सके और समय पर इलाज शुरू हो सके।
– जिले के पाँच लाख 17 हजार 107 घरों में पाँच वर्ष तक के बच्चों के ओआरएस पैकेट का किया जाएगा वितरण :
डीआईओ ने बताया, पखवाड़े के दौरान जिले भर में एक लाख 77 हजार 497 बच्चों के बीच ओआरएस पैकेट का वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसे सुनिश्चित करने को लेकर गठित स्वास्थ्य टीम दो लाख 41 हजार 20 घरों का भ्रमण करेंगी । वहीं, उन्होंने बताया, डायरिया होने पर लगातार 14 दिनों तक जिंक का सेवन करें। 02 माह से 06 माह तक के बच्चों को जिंक की  1/2 गोली 10 मिग्रा पानी में घोलकर या माँ के दूध के साथ घोलकर चम्मच से पिलाएं। 06 माह से 05 साल के बच्चों को एक गोली साफ पानी के साथ या माँ के दूध में घोलकर पिलाएं। जबकि, दो माह से कम आयु के बच्चों को 05 चम्मच ओआरएस प्रत्येक दस्त के बाद पिलाएं। 02 माह से 02 वर्ष तक बच्चे को 1/4 ग्लास से 1/2 ग्लास प्रत्येक दस्त के बाद पिलाएं। 02 से 05 वर्ष तक के बच्चों को 1/2 से ग्लास प्रत्येक दस्त के बाद पिलाएं।
– जानें क्या है डायरिया और लक्षण :
टट्टी की  अवस्था बदलाव या सामान्य से ज्यादा बार, ज्यादा पतला या पानी जैसी होने वाली टट्टी ही डायरिया (दस्त) का पहला का लक्षण है। इसके अलावा बच्चा बेचैन व चिड़चिड़ा है, अथवा सुस्त या बेहोश है। बच्चे की ऑखें डाउन हो रही है। बच्चे को बहुत ज्यादा प्यास लगना अथवा पानी ना पी पाना आदि डायरिया का ही कारण और लक्षण है।
– जिंक सेवन के ये हैं विशेष लाभ :
जिंक सेवन से दस्त और तीव्रता दोनों कम होती  है। तीन महीने तक दस्त का खतरा नहीं के बराबर रहता है। रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। जबकि, ओआरएस से शरीर में पानी की कमी नहीं होती है एवं दस्त के खतरे से बचाव करता है।

बांका जिले में सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा का आगाज, 30 जुलाई तक चलेगा

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-आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर परिवार के सदस्यों को ओआरएस के इस्तेमाल की जानकारी दे रहीं
-जिले के तीन लाख 56 हजार तीन सौ 20 घरों में ओआरएस पैकेट वितरण का रखा गया है लक्ष्य
बांका, 15 जुलाई-
जिले में शुक्रवार से सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा का आगाज हो गया, जो 30 जुलाई तक चलेगा। बांका जिले में अभियान के दौरान तीन लाख 56 हजार तीन सौ 20 घरों में आशा कार्य़कर्ताओं द्वारा प्रति बच्चा ओआरएस के एक-एक पैकेट वितरण का लक्ष्य रखा गया है। इसे लेकर सारी तैयारी पूरी कर ली गई है। शहरी क्षेत्र समेत जिले के सभी प्रखंडों में आज से ओआरएस घोल वितरण का काम शुरू कर दिया गया है। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी को इस अभियान के लिए नोडल पदाधिकारी बनाया गया है।
सिविल सर्जन डॉ. रविंद्र नारायण ने बताया कि शिशु मृत्यु का एक बड़ा कारण दस्त होना है। इसे देखते हुए जिले में शुक्रवार से 30 जुलाई तक सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही दस्त के कारण शिशु-मृत्यु और इसकी रोकथाम के बारे में आमलोगों को इसकी जानकारी दी जा रही है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत दस्त से होने वाली शिशु मृत्यु दर को शून्य तक लाने के लिए सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़े का आयोजन किया जा रहा है। पखवाड़े के दौरान कोरोना की गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है। आशा कार्यकर्ता ओआरएस के पैकेट वितरण और इसके इस्तेमाल की जानकारी के दौरान गाइडलाइन का पूरी तरह से पालन कर रही हैं।
पांच वर्ष के उम्र तक के बच्चे को किया गया है लक्षित: सिविल सर्जन ने बताया कि दस्त नियंत्रण पखवाड़ा के दौरान जिले के सभी पांच वर्ष तक के बच्चों को लक्षित किया गया है। अभियान के तहत स्वास्थ्य उपकेंद्र, अतिसंवेदनशील क्षेत्र, शहरी झुग्गी-झोपड़ी, निर्माण कार्य में लगे मजदूरों के परिवार, ईंट-भट्ठे के निर्माण वाला क्षेत्र, अनाथालय और ऐसे चिह्नित क्षेत्र जहां दो तीन वर्ष पूर्व तक दस्त के मामले अधिक संख्या में पाये गये हों, छोटे गांव व टोले जहां साफ सफाई और पानी की आपूर्ति एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी हो, ऐसी जगहों को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में रखा गया है। जिला प्रतिरक्षण कार्यालय से अभियान की 15 दिनों तक लगातार निगरानी की जाएगी।
आशा कार्यकर्ताओं के पास है सूचीः सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा का क्रियान्वयन सही तरीके से हो, इसे लेकर आशा कार्यकर्ताओं ने क्षेत्र के पांच वर्ष तक के बच्चे वाले घरों की सूची बना ली है, जो उनके पास है। अभियान के दौरान पांच वर्ष से कम उम्र वाले बच्चों के घरों में प्रति बच्चा एक-एक ओआरएस पैकेट का वितरण किया जा रहा है। आशा कार्यकर्ता परिवार के सदस्यों को ओआरएस के घोल बनाने और इसके उपयोग की विधि और इसके लाभ के बारे में भी बता रही हैं। परिवार के सदस्यों को साफ-सफाई और हाथ धोने के तरीकों की जानकारी भी दे रही हैं। परिवार के सदस्य को दस्त होने के दौरान बच्चे को जिंक का उपयोग करने की जानकारी दी जा रही है। जिंक का प्रयोग करने से दस्त की तीव्रता में कमी आ जाती है। दस्त ठीक नहीं होने पर गंभीर स्थिति में बच्चे को नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाने की सलाह परिवार के सदस्यों को दी जा रही है। पखवाड़ा के दौरान दस्त के कारण हुई मृत्यु की रिपोर्ट प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को देनी है। दस्त से ग्रसित अति गंभीर कुपोषित बच्चों को रेफर करना है और घर पर पीने के पानी को शुद्ध करने के लिए क्लोरीन गोली के उपयोग को भी बढ़ावा देना है।

सांख्यिकी  विभाग  करेगा  शत  प्रतिशत  एमसीसीडी में  रजिस्ट्रेशन, पूरे राज्य भर मे होगा डिजिटल  नवाचार- निदेशक  एवं  संयुक्त  सचिव  आईएएस डॉ.ओम प्रकाश  बैरवा

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 *एमसीसीडी में  राज्य  बनेगा  सिरमौर,ज़िला टीम  सहयोग  से करेंगे  पंजीयन  का  लक्ष्य  पूरा- डॉ सुदेश  अतिरिक्त मुख्य  रजिस्ट्रार*
 *राज्य  सरकार के मिशन मेडिकल सर्टिफिकेशन काज  ऑफ  डेथ हेतु आम जन में जागरूकता  हेतु तत्पर  है सांख्यिकी  विभाग-डॉ सुदेश अतिरिक्त  मुख्य  रजिस्ट्रार*
हाल  ही  मे राजस्थान  सरकार अर्थिक  एवं  सांख्यिकी  निदेशालय  योजना  भवन  स्थित  कांफ्रेंस  हाल  में  एक  दिवसीय  राज्य  स्तरीय  कार्यशाला  का  भव्य  आयोजन निदेशक सयुंक्त  सचिव एवं  मुख्य  रजिस्ट्रार  आईएएस डॉ.ओम  प्रकाश  बैरवा की अध्यक्षता में सम्पन्न  किया  गया . कार्यशाला में जीवनाक शाखा  के  संयुक्त  निदेशक  डॉ.सुदेश कुमार  ने जन्म  विवाह  मृत्यु  एवं एमसीसीडी  आदि  पर विभिन्न  जिलों  एवं  ब्लाक से  सम्मिलित उप  निदेशक  ,सहायक निदेशक,बीएसओ को  क्षेत्र  की  समेकित  प्रगति  हेतु  आवश्यक  प्रशिक्षण  दिया. सांख्यिकी  विभाग से
तकनीकी  सत्र के दोरान एनआईसी से पूरे  राज्य  की  तकनीकी  क्षेत्र  का प्रतिनिधित्व  कर  रहे
वरिष्ठ  तकनीकी  निदेशक   अमित अग्रवाल ने ऑनलाइन  रजिस्ट्रेशन  में  ई साईन डिजिटल  एवं  पोर्टल  पर  आने  वालीं लाभार्थियों  से आये  नवीन  संशोधन  एवं  कार्य  के  दोरान  क्रमिक  रूप  से आने  वालीं
समस्या  के समाधान  हेतु  बेह्तरीन  प्रशिक्षण  प्रदान  किया ताकि आम  जन हितार्थ अधिकाधिक समाधान  हो  सके. आगे डॉक्टर  सुदेश  कुमार  ने बताया  कि  कोरोना काल  के  दोरान  कई  परिवारों  मैं  मृत्यु का  कारण  सही  से  इंगित  न  होने के  कारण  सरकार  का  आम  जन  हितार्थ  जो  लाभ  देय हैं  वह उस  मुश्किल  की घड़ी में  जरुरतमंद  परिवार  को  नहीं  मिल  पा रहा  है  आज  जरूरत है  आप  सभी  जिलों  ब्लॉक  से आए  टीम  को  एकजुट  होने  की  और एमसीसीडी फॉर्म अपने  स्तर  से  यथा सम्भव  भरवाने  की  और  उचित  समय  पर  लाभार्थी  को  प्रदान  करने  की  यह  आधिकारिक  नहीं  सामाजिक  सम्वेदना  का  विषय  है  .
कार्यशाला  में सहायक  निदेशक
सीमा तनेजा ,सहायक  सांख्यिकी  अधिकारी  राजेंद्र  कल्ला,प्रोग्राम  ऑफिसर नयन प्रकाश  गाँधी ,अनिल  खंडेलवाल , रामस्वरूप,नरेश,मीनाक्षी  ,अंकिता ,कनिका एवं अन्य  सभी  जीवनाक शाखा  के कर्मचारी आदि कार्यशाला में मौजूद  थे