टीबी रोगियों की पहचान एवं उनके ईलाज में सभी का सहयोग टीबी उन्मूलन का है मूलमंत्र: मंगल पाण्डेय

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• स्वास्थ्य मंत्री ने 37 ट्रू-नेट मशीन का किया लोकापर्ण
• निक्षय पोषण योजना के सुदृढ़ीकरण के लिए आईवीआरएस के पायलट की शुरुआत
• राज्य के टीबी अस्पतालों में रिक्त पदों पर होगी बहाली

पटना/ 24, मार्च: हर वर्ष 24 मार्च विश्व यक्ष्मा दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस वर्ष के विश्व टीबी दिवस की थीम ‘द क्लॉक इज टीकिंग’ रखी गयी है. यह थीम सही अर्थों में तात्कालिकता को दर्शाता है और टीबी को खत्म करने के वादों को पूरा करने के लिए विश्व के पास कम समय शेष होने का बोध कराता है. अधिक से अधिक टीबी रोगियों की पहचान एवं उनके ईलाज में सभी का सहयोग टीबी उन्मूलन का मूलमंत्र है. उक्त बातें राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने बुधवार को शहर के एक होटल में विश्व यक्ष्मा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान कही.

37 ट्रू नेट मशीन का लोकापर्ण:
कार्य्रकम की शुरुआत स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय सहित राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार एवं अपर कार्यपालक निदेशक अनिमेष पराशर ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर की. साथ ही मंगल पाण्डेय ने राज्य के लिए 37 ट्रू-नेट मशीन का लोकार्पण और निक्षय पोषण योजना के सुदृढ़ीकरण के लिए आईवीआरएस के पायलट की शुरुआत की. इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री सहित राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार अन्य विशिष्ट पदाधिकारियों ने राज्य के टीबीफैक्ट शीट का भी विमोचन किया.

वर्ष 2025 तक लक्ष्य करना है प्राप्त:
इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने कहा कि टीबी वर्तमान में सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंताओं में से एक है. भारत में टीबी के मामले विश्व में सबसे अधिक है. पूरे विश्व की तुलना में भारत में 27% टीबी के मरीज हैं. वहीं टीबी के कारण देश में प्रत्येक साल 4 लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है. इस दिशा में मजबूत इच्छाशक्ति और संकल्प दिखाते हुए माननीय प्रधानमंत्री ने भारत को वर्ष 2025 तक टीबी से मुक्त करने के प्रति प्रतिबद्धता जाहिर की है, जिसे वैश्विक लक्ष्य से पांच साल पहले ही राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत प्राप्त करने का लक्ष्य है. उन्होंने बताया इसको लेकर बिहार में भी कई प्रयास किये जा रहे हैं.
उन्होंने बताया कि टीबी रोगियों की प्रभावी पहचान के लिए राज्य भर में 70 सीवी-नेट मशीन हैं एवं अब 37 ट्रू-नेट मशीन भी राज्य को उपलब्ध कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से मेडिकल कॉलेज तक टीबी रोगियों की जाँच एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध है. साथ ही टीबी अस्पतालों में मानव संसाधन की कमी हो पूरा करने के लिए सभी एसटीएस एवं एसटीएलएस के खाली पदों पर नई नियुक्ति जल्द ही पूरी कर ली जाएगी. उन्होंने कहा कि टीबी रोगियों के नोटिफिकेशन को बढ़ाने के लिए किसी आम व्यक्ति, निजी अस्पतालों एवं प्रैक्टिसनर को टीबी रोगियों की जानकारी देने पर 500 रूपये एवं उनके दवाओं के कोर्स खत्म होने पर पुनः 500 रूपये की प्रोत्साहन राशी भी दी जा रही है. साथ ही एमडीआर-टीबी के नोटिफिकेशन में 1500 रूपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है. वहीँ टीबी रोगियों के उनके ईलाज के दौरान उनके बेहतर पोषण के लिए प्रति माह 500 रूपये की धनराशि भी दी जा रही है.
जनांदोलन से टीबी मुक्त समाज का सपना होगा साकार:
मंगल पाण्डेय ने कहा कि टीबी उन्मूलन प्रयासों को लंबे समय तक जारी रखते और इनपर पूर्णत: ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन जी ने हाल ही में साल 2021 को पूरे देश में टयूबरक्लोसिस वर्ष के रूप में मनाये जाने की घोषणा की है. इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार में सभी 38 जिलों में रोगी सहायता समूह (पेशेंट सपोर्ट ग्रूप) के माध्यम से पूरे मार्च महीने में अभियान चलाया जा रहा है. पेशेंट सपोर्ट ग्रूप रोगियों, टीबी सर्वाइवर, रोगियों की देखभाल करने वाले लोगों, स्थानीय निकायों के जनप्रतिनिधि, धार्मिक गुरुओं तथा अन्य सरकारी पदाधिकारियों का एक समग्र समूह है. उन्होंने कहा कि मार्च महीने में चलाए जा रहे जनांदोलन में अभी तक कुल 1640 जन-प्रतिनिधि, 232 धर्म गुरु, 1682 टीबी चैंपियन, 4541 ट्रीटमेंट सपोर्टर, 400 मीडिया पर्सन एवं 286 संगठन आदि ने अपनी प्रतिभागिता सुनिश्चित की. इसका लक्ष्य टीबी रोगियों को टीबी के इलाज के बेहतर अनुभवों के प्रति सक्षम बनाना है. इस जनांदोलन में रोगियों को सक्रिय सहभागी माना गया है. यह समूह ना सिर्फ रोगियों व उनकी सेवा-प्रदाताओं को रोगियों के स्वस्थ होने तक भावनात्मक सहयोग प्रदान करता है,बल्कि टीबी से स्वस्थ्य हुए लोगों की सहायता के लिए उन्हें सूचीबद्ध भी करता है.
टीबी से जुड़े भेदभाव को दूर करने की जरूरत:
राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री ने वर्ष 2025 तक देश से टीबी को खत्म करने का संकल्प लिया है. इसलिए इस दिशा में हमें मिलकर प्रयास करने होंगे. इस रोग की प्रकृति और चुनौतियां विभिन्न स्तरों पर सामुदायिक भागीदारी की जरूरत को बताती है. इसलिए जनांदोलन के माध्यम से समुदाय को शामिल करना एनटीईपी की सफलता के लिए महत्वपूर्ण रणनीति है. जनांदोलन का लक्ष्य जागरूकता लाने और समुदाय को सशक्त करना है. इसके केंद्र में समुदाय के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने वाले व्यवहार को प्रोत्साहित करना तथा टीबी से जुड़ी भेदभाव की भावना को सूचना, शिक्षा तथा संचार के माध्यम से दूर करना है. टीबी के लक्षणों की पहचान और इलाज से संबंधित आवश्यक जानकारियों के माध्यम से आमजन को सशक्त करने की दिशा में यह पहला कदम है.
एक मजबूत संकल्प से लक्ष्य होगा पूरा:
इस अवसर पर राज्य स्वास्थ्य समिति के अपर कार्यपालक निदेशक ने टीबी को खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ समुदाय की सहभागिता को भी महत्वपूर्ण बताया. स्वास्थ्य विभाग के रोग नियंत्रण सेल के निदेशक प्रमुख डॉ. नवीन चंद्र ने भी लोगों को संबोधित किया.
वहीं टीबी के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. बीके मिश्रा ने पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन के द्वारा राज्य से टीबी उन्मूलन की रणनीति पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि राज्य में प्रति लाख की जनसँख्या में 150 से अधिक टीबी रोगियों की पहचान कर उनके पूर्ण ईलाज का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके लिए डिटेक्ट, ट्रीट, प्रिवेंट एवं बिल्ड रणनीति को और मजबूत किया जाएगा.
टीबी अभियान में बेहतर प्रदर्शन करने वाले हुए सम्मानित:
इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम के तहत चयनित सूचकांकों पर उत्कृस्ट उपलब्धि हासिल करने वाले प्रथम तीन पदाधिकारियों, कर्मियों, रोग मुक्त टीबी चैंपियन एवं यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम में बेहतर योगदान देने के लिए प्राइवेट प्रैक्टिसनर को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया. सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च के राज्य कार्यक्रम प्रबधंक रणविजय कुमार को मीडिया के माध्यम से टीबी जनांदोलन अभियान में सर्वाधिक सकारात्मक मीडिया कवरेज सुनिश्चित कराने में सहयोग करने के लिए मंगल पाण्डेय ने उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया.
इस दौरान टीबी एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रशिद्ध समाज सेवी उपेन्द्र विद्यार्थी, केयर इन्डिया के चीफ ऑफ़ पार्टी श्री सुनील बाबू, केयर इण्डिया के स्ट्रेटेजिक प्रोग्राम मैनेजर संजय सुमन, विश्व स्वास्थ्य संगठन के डॉ सुब्रम्न्या बीपी, डॉ उमेश त्रिपाठी, क्लिंटन चाइल्ड हेल्थ इनिशिएटिव की डॉ. प्रणति, डॉ. युवराज सिंह सहित अन्य डेवलपमेंट पार्टनर के प्रतिनिधि शामिल हुए.

पत्रकार पांडुरंग रायकर के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेवारी लेगा सूर्यदत्ता एज्युकेशन फाउंडेशन : सुषमा चोरडिया

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पुणे : टीवी 9 के पत्रकार पांडुरंग रायकर का निधन पिछले साल सितंबर में कोरोना के कारण हो गया था. उनके निधन से परिवार के सिर पर से आधार हट गया. जरूरत के ऐसे समय में परिवार को आधार देने की भावना से सूर्यदत्ता एज्युकेशन फाउंडेशन ने रायकर के बच्चों की शिक्षा का बीड़ा उठाया. उनकी शिक्षा का पूरा खर्च सूर्यदत्ता उठाएगा. जिसके तहत एक लाख का पहला चेक शुक्रवार को रायकर की पत्नी शीतल रायकर को सौंपा गया.

पांडुरंग रायकर के निधन के बाद अनेक संस्था, व्यक्ति उनके परिवार की मदद के लिए आगे आए थे. रायकर का पांच साल एक लड़का व ढाई साल की एक लड़की है. उनकी शिक्षा की जिम्मेदारी लेने की घोषणा उसी समय सूर्यदत्ता ग्रुप ऑफ इन्स्टिट्यूट के संस्थापक अध्यक्ष प्रा. डॉ. संजय चोरडिया ने की थी. समाज को दिशा देनेवाले, जनजागृति करनेवाले इस प्रामाणिक पत्रकार की मृत्यु दुःखद है. उनके परिवार के साथ सूर्यदत्ता परिवार हमेशा खड़ा रहेगा. ऐसी भावना भी संयज चोरडिया ने व्यक्त की थी.

विश्व महिला दिन पर सूर्यदत्ता ग्रुप ऑफ इन्स्टिट्यूट में १ मार्च से 31 मार्च तक महिला महोत्सव (वुमेन मंथ) मनाया जाता है. इस कार्यक्रम में शीतल रायकर को बुलाया गया. ताकि उन्हें अहसास कहराया जा सके कि हमसब उनके साथ हैं. ‘सूर्यदत्ता’ की ओर से संस्था की उपाध्यक्षा सुषमा चोरडिया के हाथों चेक दिया गया. इस समय रायकर का परिवार, संस्था के संचालक प्रा. सुनील धाडीवाल, मुख्य विकास अधिकारी सिद्धांत चोरडिया, अधिष्ठाता प्रा. डॉ. प्रतीक्षा वाबले व अन्य महिला स्टाफ उपस्थित था.

सुषमा चोरडिया ने कहा कि पांडुरंग रायकर के परिवार के साथ सूर्यदत्ता परिवार हमेशा ख़ड़ा रहेगा. बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले, इसके लिए उनको सभी मदद , ज्ञानार्थदान किया जाएगा. महिला दिन पर उत्सव के अवसर पर बस इतना ही कहूंगी कि शीतल रायकर सक्षम रूप से खड़ा रहें व अपने बच्चों की बेहतर परवरिश करें. इस दौरान जो भी सहयोग उन्हें लगेगा वे हम करेंगे. ‘सूर्यदत्ता’ में इन बच्चों ने किसी भी पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया तो उन्हें पूरी शिक्षा नि:शुल्क होगी.

शीतल रायकर ने सूर्यदत्ता परिवार का आभार जताया. साथ ही पांडुरंग रायकर के प्रति अपनी भावना व्यक्त की. उन्होंने कहा कि उनके पति प्रामाणिक पत्रकारिता करते थे. इसलिए आज अनेक संस्था, व्यक्ति उनके समर्थन में खड़े हैं. उनका साथ दे रहे हैं. ‘ सिद्धांत चोरडिया ने कहा कि समाज के सभी संस्थाओं ने जरूरतमंदों की मदद की तो इस देश का सर्वांगीण विकास होने में मदद होगी. शिक्षा जैसे मूलभूत अधिकार सभी को मिले, इसके लिए हम सभी को प्रयत्न करना चाहिए.

टीबी का हल्का सा भी लक्षण दिखे तो जांच कराएं: सिविल सर्जन

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– टीबी उन्मूलन में जनभागीदारी बहुत ही जरूरी
2025 तक भागलपुर जिला हो जाएगा टीबी से मुक्त
सदर अस्पताल में टीवी हारेगा, देश जीतेगा अभियान के तहत मीडिया कार्यशाला आयोजित
– जिला स्वास्थ्य समिति, केयर इंडिया और सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च द्वारा आयोजित

भागलपुर, 24 मार्च
टीबी का हल्का सा भी लक्षण दिखे तो जांच कराने स्वास्थ्य केंद्र जाएं. जांच में पुष्टि हो जाने के बाद आपको मुफ्त में दवा मिलेगी. साथ में भोजन के लिए भी पैसे मिलेंगे. जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच और इलाज की व्यवस्था है. इसलिए अगर लक्षण दिखे तो तत्काल जांच कराएं. यह बात सदर अस्पताल में बुधवार को “टीबी हारेगा देश जीतेगा अभियान” के तहत जिला स्वास्थ्य समिति, केयर इंडिया और सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च द्वारा आयोजित मीडिया कार्यशाला में सिविल सर्जन डॉ उमेश शर्मा ने कही. उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन में जनभागीदारी बहुत ही जरूरी है. अगर लोग सहयोग करें तो यह बीमारी समय से पहले खत्म हो सकती है.

2025 तक टीबी का उन्मूलन करने को लेकर स्वास्थ्य विभाग प्रतिबद्ध:
सिविल सर्जन ने कहा कि 2025 तक जिले को टीबी से मुक्त कराया जाएगा. इसे लेकर विभाग प्रतिबद्ध है. टीबी के क्षेत्र में बढ़िया काम हुआ है. पहले के मुकाबले मृत्यु दर में काफी कमी आई है. पहले टीबी मरीजों की मृत्यु दर काफी अधिक थी, लेकिन अब इसमें काफी कमी आई है. उम्मीद है कि जल्द ही जिले में टीबी पर काबू पा लिया जाएगा.

एक टीबी मरीज कई लोगों को कर सकता है संक्रमित:
मौके पर मौजूद सीडीओ डॉ. दीनानाथ ने कहा कि टीबी की बीमारी को हल्के में नहीं लेना चाहिए. एक टीबी का मरीज साल में 10 से अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है और फिर आगे वह कई और लोगों को भी संक्रमित कर सकता है, इसलिए लक्षण दिखे तो तत्काल इलाज कराएं.

इलाज नहीं कराने पर एक से कई लोगों में इसका प्रसार हो सकता

डॉ. दीनानाथ ने कहा कि टीबी का अगर आप इलाज नहीं कराते हैं तो यह बीमारी आग लगा सकती है. एक के जरिए कई लोगों में इसका प्रसार हो सकता है. अगर एक मरीज 10 लोगों को संक्रमित कर सकता है तो फिर वह भी कई और लोगों को संक्रमित कर देगा. इसलिए हल्का सा लक्षण दिखे तो तत्काल जांच कराएं और जांच में पुष्टि हो जाती है तो इलाज कराएं.

छुआछूत की बीमारी नहीं रही टीबी:
डॉ. दीनानाथ ने कहा कि टीबी अब छुआछूत की बीमारी नहीं रही. इसे लेकर लोगों को अपना भ्रम तोड़ना होगा. टीबी का मरीज दिखे तो उससे दूरी बनाने के बजाय उसे इलाज के लिए प्रोत्साहित करना होगा. इससे समाज में जागरूकता बढ़ेगी और जागरूकता बढ़ने से इस बीमारी पर जल्द काबू पा लिया जाएगा. ऐसा करने से कई और लोग भी इस अभियान में जुड़ेंगे और धीरे-धीरे टीबी समाप्त हो जाएगा. मौके पर स्वास्थ्यकर्मी, वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर, केयर इंडिया और सीफार के प्रतिनिधि मौजूद थे

पोषण पखवाड़ा ; ऑगनबाड़ी केंद्रों पर पौधा लगाकर दिया जा रहा है पोषण का संदेश

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– वर्तमान ही नहीं भविष्य के सुरक्षा के लिए भी पौधारोपण जरूरी, मिलेगा शुद्ध वातावरण
– 31 मार्च तक चलेगा पोषण पखवाड़ा, विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों को किया जाएगा जागरूक

खगड़िया-

जिले में चल रहे पोषण पखवाड़ा की सफलता को लेकर जिले में आईसीडीएस द्वारा तमाम गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। ताकि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पोषण का संदेश पहुँचाई जा सकें। इसी कड़ी में ऑंगनबाड़ी केंद्रों पर पौधारोपण कर लोगों को पोषण का संदेश दिया जा रहा है। दरअसल, पर्यावरण संरक्षण एवं शुद्ध वातावरण के लिए पौधारोपण जरूरी है। इसलिए, इस कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए पौधारोपण जरूरी है। क्योंकि, जब हम पौधा लगाएँगे तभी हमको शुद्ध वातावरण मिलेगा और शुद्ध वातावरण से स्वस्थ शरीर का निर्माण होगा। पोषण पखवाड़ा का भी मुख्य उद्देश्य यही है कि लोगों उचित पोषण की जानकारी मिल सकें और कुपोषण मुक्त समाज निर्माण हो सकें।

– वर्तमान ही नहीं, भविष्य के सुरक्षा के लिए भी पौधारोपण जरूरी :-
आईसीडीएस के एनएनएम जिला समन्वयक अंबुज कुमार ने बताया सिर्फ वर्तमान ही नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा के लिए भी प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक पौधा लगाना चाहिए। दरअसल, वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ी समस्या है। इस समस्या का निदान पर्यावरण संरक्षण के बिना संभव नही है। इसलिए वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, भूमि प्रदूषण की समस्या को जल, जंगल एवं प्रकृति को संरक्षित करते हुए पौधा रोपण कर संतुलन बनाया जा सकता है। इसलिए, इसे बढ़ावा देने एवं इस संदेश को समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए जिले के सभी ऑगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण पखवाड़ा के तहत पौधारोपण किया जा रहा है।

– पौधारोपण के साथ लोगों को किया जा रहा है जागरूक :-
वहीं, एनएनएम के जिला समन्वयक अंबुज कुमार ने बताया सभी ऑगनबाड़ी केंद्रों पर पौधारोपण के दौरान संबंधित केंद्र की सेविका द्वारा पोषक क्षेत्र के लोगों को पौधारोपण के लिए जागरूक भी किया जा रहा है। ताकि समाज में अधिकाधिक पौधारोपण हो सकें और परिवार संरक्षण को बढ़ावा मिल सके। इसको लेकर सभी सेविकाओं को आवश्यक निर्देश भी दिए गए हैं। यह पखवाड़ा आगामी 31 मार्च तक चलेगा।

– तमाम गतिविधियों का आयोजन कर लोगों की दी जा रही है पोषण की जानकारी :-
जिले में चल रहे पोषण पखवाड़ा का सफल संचालन एवं इस पखवाड़े के उद्देश्य को समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए ऑगनबाड़ी केंद्र से लेकर प्रखंड व जिला स्तर पर तमाम गतिविधियों का आयोजन कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। ताकि लोगों स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए उचित पोषण की जानकारी मिल सकें। इस दौरान हमारे शरीर के लिए उचित पोषण कितना जरूरी है, इसका क्या महत्व है, इस कार्यक्रम का क्या उद्देश्य है आदि लोगों को विस्तृत जानकारी देकर जागरूक किया जा रहा है। साथ ही लोगों को उचित और पौष्टिक आहार का सेवन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

– कुपोषण से बचाव के लिए उचित पोषण जरूरी :-
कुपोषण को मिटाने एवं इससे बचाव के लिए उचित पोषण बेहद जरूरी है। इसके लिए समय पर खाना, स्वास्थ्य के प्रति हर आवश्यक बातों का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। लोगों को जागरूक करने के लिए सरकार द्वारा तमाम गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। जिसके माध्यम से पोषण का संदेश को घर-घर पहुँचाई जा रही है।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं।
– लक्षण दिखते ही कोविड-19 जाँच कराएं।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– आवश्यकतानुसार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।
– वैक्सीनेशन के बाद भी गाइडलाइन का पालन जारी रखें।

कोविड-19 टीकाकरण को गति देने के लिए जिले के सभी एपीएचसी व एचएससी पर वैक्सीनेशन शुरू

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– जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी ने पत्र जारी कर सभी पीएचसी प्रभारी को दिए निर्देश
– सभी सेंटरों पर तिथिवार होगा वैक्सीनेशन, मेडिकल टीम की गई तैनात

खगड़िया-
कोविड-19 संक्रमण के खिलाफ जिले में चल रहे वैक्सीनेशन अभियान को गति देने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह कटिबद्ध और इसके लिए लगातार आवश्यक कदम भी उठा रहा है । इसी कड़ी में वैक्सीनेशन अभियान की रफ्तार को और तेज गति देने के लिए जिले में पूर्व से पीएचसी स्तर पर संचालित वैक्सीनेशन सेंटर के साथ-साथ सभी एपीएचसी (अतिरिक्त स्वास्थ्य उप केंद्र) और एचएससी (स्वास्थ्य उपकेंद्र) पर वैक्सीनेशन अभियान शुरू किया गया है। जहाँ लगातार योग्य व्यक्तियों को वैक्सीन दी जा रही है। वहीं, इसे सुनिश्चित करने को लेकर जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ आर एन चौधरी ने पत्र जारी कर जिले के सभी पीएचसी प्रभारी को आवश्यक निर्देश दिए हैं।

– तिथिवार सभी एपीएचसी व एचएससी पर होगा वैक्सीनेशन अभियान :-
जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ आर एन चौधरी ने बताया जिले के सभी पीएचसी के अधीनस्थ संचालित सभी एपीएचसी व एचएससी पर अलग-अलग तिथि में वैक्सीनेशन होगा। इसको लेकर सभी पीएचसी प्रभारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं और अपने सुविधानुसार सभी तिथि तय कर बारी-बारी से सभी एपीएचसी व एचएससी को चिह्नित कर वैक्सीनेशन अभियान सुनिश्चित कराने को कहा गया है। इससे जिले में चल रहे वैक्सीनेशन अभियान की रफ्तार को और गति मिलेगी एवं निर्धारित समय लक्ष्य पूरा होगा। साथ ही अधिकाधिक लोगों को टीका दिया जाएगा।

– वैक्सीनेशन अभियान की सफलता को लेकर मेडिकल टीम गठित :-
पीएचसी के अधीनस्थ संचालित सभी एपीएचसी व एचएससी पर होने वाले वैक्सीनेशन अभियान की सफलता को लेकर चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की टीम गठित की गई है। जिसमें अलग-अलग तिथि में अलग चिकित्सकों एवं कर्मियों की ड्यूटी लगाई है। इस टीम में संबंधित एपीएचसी व एचएससी पर तैनात एएनएम के साथ चिकित्सकों एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को शामिल किया गया है। इसके अलावा संबंधित क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता का भी सहयोग लिया जा रहा है।

– ग्रामीण व दुर्गम क्षेत्र के लोग वैक्सीन से नहीं रहें वंचित, इस उद्देश्य से शुरू की गई यह पहल :-
जिले में पीएचसी के अधीनस्थ संचालित कई एपीएचसी व एचएससी ग्रामीण व दुर्गम इलाके में स्थित हैं । जिसके कारण उस क्षेत्र में वृद्ध समेत अन्य योग्य व्यक्ति को वैक्सीन लेने के लिए पीएचसी आने में काफी दूरी और परेशानियों का सामना करना पड़ता था। जिसे दूर करने के लिए जिले के सभी एपीएचसी व एचएससी पर वैक्सीनेशन अभियान शुरू किया गया है। ताकि लोगों को वैक्सीन लेने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। इससे ना सिर्फ योग्य व्यक्तियों की परेशानी दूर होगी, बल्कि वैक्सीनेशन अभियान को गति भी मिलेगी और शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित होगा ।

– इन मानकों का करें पालन, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
– मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।
– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
– अनावश्यक यात्रा से बचें।
– बाहरी खाना खाने से परहेज करें।
– साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएं।
– यात्रा के दौरान आवश्यक दूरी का ख्याल रखें और निश्चित रूप से मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग करें।
– गर्म व ताजा खाना का सेवन करें, बासी खाना से बिलकुल दूर रहें।
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं।
– बाहर से आने पर कोविड-19 जाँच कराएं।

बेहतर कार्य कौशल, योग्यता से जिले और विभिन्न प्रखंडों में टॉप करने वाली जीएनएम और एएनएम को सिविल सर्जन और डीपीएम ने किया सम्मानित

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— जिले भर में टॉप आने वाली जीएनएम निधि कुमारी 5000 रुपये के रिवॉर्ड से सम्मानित
– प्रत्येक प्रखंड क्षेत्र में टॉप करने वाली सभी 9 जीएनएम और एएनएम को मिला 3000 रुपये का रिवार्ड

मुंगेर-

जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के सभागार में मंगलवार को सदर मुंगेर सहित जिले के सभी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के लेबर रूम और ऑपरेशन थियेटर में बेहतर तरीके से काम करने वाली जीएनएम और एएनएम को जिले के सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र आलोक, डीपीएम नसीम रजि ने संयुक्त रूप से सम्मानित किया । सम्मानित होने वाली सभी जीएनएम और एएनएम का चुनाव कॉम्पटेंसी बेस्ड स्किल असेस्मेंट रैंकिंग के आधार पर किया गया है। इस रैंकिंग के आधार पर लेबर रूम और ओटी में काम करने वाली सदर अस्पताल मुंगेर की जीएनएम निधि कुमारी ने जिले भर में सर्वोच्य स्थान प्राप्त किया है। उन्हें रिवॉर्ड के पर 5000 रुपये का चेक सिविल सर्जन और डीपीएम ने संयुक्त रूप से प्रदान किया । इसके साथ ही जिले के सभी प्रखण्डों में कॉम्पटेंसी बेस्ड स्किल रैंकिंग के आधार पर सर्वाधिक अंक हासिल करने वाली जीएनएम और एएनएम को भी 3000 रुपये का चेक प्रदान किया गया। जिले भर में टॉप करने वाली निधि कुमारी और सभी प्रखंडों में टॉप करने वाली जीएनएम और एएनएम को रिवॉर्ड की राशि पब्लिक फण्ड मैनेजमेंट सिस्टम( पीएफएमएस) या डायरेक्ट बेनिफिसरी ट्रांसफर ( डीबीटी) के माध्यम से सीधे जीएनएम औऱ एएनएम के एकाउंट में भेजी जाएगी।
उत्कृष्ट कार्य कौशल, योग्यता एवं कार्यानुभव के जरिये प्रखंड क्षेत्र में टॉप करने वाली एएनएम, जीएनएम को मिला रिवॉर्ड –
कॉम्पटेंसी बेस्ड स्किल रैंकिंग के आधार पर अपने उत्कृष्ट कार्य कौशल, योग्यता एवं कार्यानुभव के जरिये प्रखंड क्षेत्र में टॉप करने वाली असरगंज पीएचसी की एएनएम बरखा कुमारी, बरियारपुर पीएचसी की एएनएम निगम कुमारी, धरहरा सीएचसी की एनएमएम निशा रानी, हवेली खड़गपुर पीएचसी की एएनएम भारती कुमारी,जमालपुर पीएचसी की एएनएम प्रतिमा कुमारी, सदर अस्पताल की जीएनएम निधि कुमारी, संग्रामपुर पीएचसी की एएनएम कुमार, तारापुर अनुमंडल अस्पताल की जीएनएम सिंधु कुमारी और टेटिया बम्बर पीएचसी की कोमल कुसुम को रिवॉर्ड के रूप में 3000 रुपये का चेक दिया गया है। मालूम हो कि सदर अस्पताल के लेबर रूम और ऑपरेशन थियेटर में काम करने वाली निधि कुमारी ने अपने प्रखंड मुंगेर सदर सहित पूरे जिले में टॉप किया है इसलिए निधि कुमारी को मुंगेर सदर ब्लॉक में टॉप करने के लिए 3000 रुपये और पूरे जिले में टॉप करने के लिए 5000 रुपये सहित कुल 8000 रुपये का चेक प्रदान किया गया। इसके साथ ही राज्य स्वास्थ्य समिति पटना के द्वारा जारी किए गए निर्देश के अनुसार सभी जीएनएम और एएनएम नर्सो को एप्रोन, बैज, स्ट्रिप्स भी प्रदान किया जाना है। इस अवसर पर जिला मूल्यांकन एवं अनुश्रवण पदाधिकारी रचना कुमारी, सदर अस्पताल मुंगेर के अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. रामप्रीत सिंह, अस्पताल प्रबंधक तौसीफ हसनैन, डीटीएल केयर डॉ. अजय आर्य, डीटीओएफ डॉ. नीलू , जिला सामुदायिक उत्प्रेरक निखिल राज सहित कई पदाधिकारी मौजूद थे।

खुशी देवी ने लोगों के सहयोग से टीबी पर पाई विजय

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24 साल की उम्र में हो गई थी पीड़ित, अब हो गई स्वस्थ
नाथनगर प्रखंड के चंपानगर की रहने वाली है खुशी देवी

भागलपुर, 23 मार्च
नाथनगर प्रखंड के चंपानगर की रहने वाली खुशी देवी (25) को 1 साल पहले खांसी के दौरान बलगम में खून आने लगा था. यह सिलसिला 2 हफ्ते से भी अधिक समय तक चला. समाज के लोग इनसे दूरी नहीं बना ले, इस वजह से खुशी देवी यह बात लोगों को बता भी नहीं रही थी लेकिन इनके साथ हुआ ठीक उल्टा. जब समाज के लोगों को इस बात की जानकारी हुई तो खुशी देवी से दूरी बनाने के बजाय सहयोग करने लगे. पड़ोस के शिबू साव ने गांव की आशा कार्यकर्ता को इस बात की जानकारी दी. आशा कार्यकर्ता जब जांच के लिए नाथनगर रेफरल अस्पताल ले गई तो वहां पर टीबी होने की पुष्टि हुई. इसके बाद खुशी देवी को 6 महीने की दवा दी गई. दवा का डोज पूरा करने के बाद खुशी देवी ने दोबारा जांच कराई, जिसमें वह निगेटिव आई अब वह पूरी तरह से स्वस्थ है.

स्वास्थ्य विभाग का अभियान ला रहा रंग: खुशी देवी के मामले से पता चलता है कि स्वास्थ्य विभाग का अभियान अब रंग ला रहा है. टीबी जैसी बीमारी को लेकर लोगों के मन में जो संदेह था, वह खत्म हो रहा है और लोग सहयोग करने के लिए भी सामने आ रहे हैं. खुशी देवी बताती हैं जब 2 हफ्ते तक मुझे लगातार खांसी हुई और बलगम में खून आने लगा तो मुझे आशंका हो गई थी, लेकिन मैं यह बात किसी को बताने से डर रही थी.

हर कोई नहीं करता भेदभाव: खुशी देवी कहती हैं कि डर इसलिए रही थी कि कहीं लोग मुझसे भेदभाव नहीं करने लगे, लेकिन जब यह सिलसिला लंबा चला तो मैंने अपने पति दिलीप साव को इस बात की जानकारी दी. वह भी हतप्रभ रह गए और कुछ नहीं बोले, लेकिन यह बात धीरे- धीरे पड़ोस के लोगों को पता चल गई. पड़ोस के शिबू साव ने जब आशा कार्यकर्ता को इसकी जानकारी दी तब मेरा इलाज शुरू हुआ. मैं यह कहना चाहती हूं कि हर कोई भेदभाव ही नहीं करता है, बल्कि सहयोग भी करते हैं.

पति भी बताने से कर रहे थे परहेज: पति दिलीप साव कहते हैं कि खुशी ने मुझे जब यह बात बताई तो मैं डर गया था. 3-3 छोटे बच्चे हैं मुझे. मैं थोड़ा आशंकित हो गया था, लेकिन पड़ोस के लोगों को जब यह जानकारी मिली तो उनलोगों ने दूरी बनाने की बजाय सहयोग किया और इसका परिणाम सामने है.

जागरूकता का दिखा असर: आशा कार्यकर्ता को जानकारी देने वाले शिबू कहते हैं कि हमलोग पिछले काफी समय से यह देखते, सुनते और पढ़ते आ रहे हैं कि टीबी सिर्फ छूआछूत से ही नहीं होता है और इसका इलाज भी संभव है. इसलिए मैंने सोचा कि अगर खुशी का इलाज हो जाएगा तो इससे समाज में एक बेहतर संदेश जाएगा. इस वजह से मैंने आशा कार्यकर्ता को इसकी जानकारी दी. इससे समाज में न सिर्फ बेहतर संदेश गया, बल्कि अब दूसरे लोग भी टीबी के मरीज से छूआछूत जैसा अपराध नहीं करेंगे.

समाज में सहयोग की भावना बढ़ी: वहीं पड़ोसी भोलू साव कहते हैं कि अब वह समय चला गया जब लोग इन सब बातों से डरा करते थे. अब समाज में सहयोग की भावना बढ़ी है. हर कोई एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ रहते हैं और जब मुझे पता चला तो मैं भी खुशी के घर जाया करता था. दिलासा देता था और बताता था कि यह बीमारी जल्द ठीक हो जाएगी. आज वह स्वस्थ है. उसे तो खुशी है, ही, हमलोग भी खुश हैं.

टीबी के लक्षण दिखे तो घबराए नहीं, इलाज कराएं

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विश्व टीबी दिवस आज-
इस बीमारी को लेकर सामाजिक भेदभाव खत्म करने की जरूरत
साल 2025 तक टीबी को खत्म करने का रखा गया है लक्स

बांका, 23 मार्च

आज बुधवार को विश्व टीबी दिवस मनाया जायेगा. इस बार का थीम द क्लॉक ईज टीकिंग है यानी कि समय खत्म होता जा रहा है. टीबी को लेकर जो लक्ष्य रखा गया है, उस पर जल्द से जल्द काम करने की जरूरत है. आज जगह-जगह कार्यक्रम होंगे , रैली निकाली जाएगी. इसके जरिए लोगों को टीवी के प्रति जागरूक किया जायेगा. दरअसल, टीबी जैसी गंभीर बीमारी को लेकर जागरूकता बहुत जरूरी है. लोग अगर सही समय पर अपना इलाज करा लें तो इस बीमारी से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है. शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि विश्व टीबी दिवस मनाने का मकसद ही है लोगों को इस बीमारी के बारे में अधिक से अधिक जानकारी देना. टीबी एक संक्रामक बीमारी है. एक-दूसरे से फैलने का खतरा रहता है. इस वजह से अगर किसी को टीबी हो जाता है तो लोग उससे दूरी बना लेते हैं. यहां तक कि छूने से भी बचते हैं और उसके साथ रहने से डरते हैं. ऐसा नहीं करना चाहिए. छूने से टीवी नहीं होता और इसके इलाज कराने में लोगों को मदद करनी चाहिए.

टीबी का इलाज बिल्कुल मुफ्त है: डॉ चौधरी कहते हैं कि सभी सरकारी अस्पतालों में टीबी का इलाज बिल्कुल ही मुफ्त में होता है. इसलिए अगर किसी को टीबी के लक्षण दिखे तो तत्काल जांच करवा लें. जांच में पुष्टि हो जाने पर डॉक्टर 6 महीने तक की दवा देंगे. 6 महीने बाद दोबारा आप फिर से जांच करवा लें. जांच में अगर निगेटिव आ गए तो फिर आप पूरी तरह से स्वस्थ हो गए.

बीच में दवा नहीं छोड़ें: डॉ चौधरी कहते हैं कि टीबी की दवा बीच में नहीं छोड़नी चाहिए. ऐसा करने से एमडीआर टीबी होने की संभावना हो जाती है. एमडीआर टीबी हो जाने पर उससे मुक्त होने में और अधिक समय लगता है. उसका इलाज और भी जटिल हो जाता है. इसलिए टीबी की दवा बीच में नहीं छोड़े. 2025 तक टीबी मुफ्त होना है. इसके लिए इलाज कराना बहुत जरूरी है.

2 हफ्ते तक लगातार खांसी हो तो जांच करवाएं: डॉ चौधरी ने बताया कि 2 सप्ताह तक लगातार खांसी हो, साथ में बलगम में खून आए तो यह टीबी के लक्षण हैं. अगर ऐसा हो तो नजदीकी अस्पताल में जाकर जांच करा लें. इसके अलावा शाम को पसीने के साथ बुखार आना व कमजोरी होना भी टीबी के लक्षण हैं. कई बार तो बिना लक्षण वाले मरीज भी सामने आते हैं. इसलिए अगर टीबी के लक्षण दिखे तो अपना इलाज करवा लें.

साथ रहने और छूने से नहीं होता है टीबी: डॉ चौधरी कहते हैं टीबी एक संक्रामक रोग है, लेकिन साथ रहने और छूने से यह बीमारी नहीं होती है. इस बीमारी को लेकर सामाजिक जो भेदभाव होता है उसे बंद करने की जरूरत है.अगर किसी को यह बीमारी हो जाए तो उसे इलाज में मदद करनी चाहिए. आशा कार्यकर्ता को इसकी सूचना देनी चाहिए, ताकि उसका इलाज हो सके

थलाईवी के ट्रेलर में जयललिता की हुबहु दिखी कंगना

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New delhi: बॉलीवुड में क्वीन के नाम से मशहूर एक्ट्रेस हर मुद्दे पर अपना बेबाक राय देने वाली कंगना रनौत आज अपना 34वां जन्मदिन मना रही हैं. पिछले कुछ सालों से कंगना रनौत सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव हैं. इस प्लेटफार्म पर वो अपनी बेबाकी के लिए जानी जाती हैं. कंगना ने अपने दम पर फिल्म इंडस्ट्री में एक मुकाम हासिल किया है.Kangana Ranaut completed Thalaivi shooting got emotional | Kangana Ranaut  ने पूरी की 'थलायवी' की शूटिंग, इमोशनल होकर कही ये बात | Hindi News, बॉलीवुड

बिना हीरो के 100 करोड़ी फिल्में देती हैं कंगना 

कंगना एक ऐसी अभिनेत्री हैं जिन्हें महज 22 साल की उम्र में ही नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था. कंगना को 2010 में फिल्म फैशन के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिया गया था. बॉलीवुड में कंगना एक ऐसी एक्ट्रेस बनकर सामने आई हैं जो बिना हीरो के 100 करोड़ी फिल्में देती हैं. कंगना फिल्मों के साथ ही सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखती हैं. अपने बेबाक बोल की वजह से कई बार उन्हें विवाद का सामना भी करना पड़ा है. कंगना रनोट के जन्मदिन (23 मार्च) पर उनकी आने वाली फ़िल्म थलाइवी का ट्रेलर रिलीज़ कर दिया गया है।

3 मिनट 22 सेकंड का ट्रेलर रिलीज हुई

तमिलनाडु की कद्दावर नेता और तमिल सिनेमा की लीजेंड्री अभिनेत्री रहीं जे जयललिता की इस बायोपिक में कंगना शीर्षक रोल में हैं। ट्रेलर में जयललिता के सिल्वर स्क्रीन से राजनीतिक गलियारों तक पहुंचने के सफ़र को क़ैद किया गया है। ट्रेलर में जयललिता के एक्ट्रेस से पॉलिटिशियन बनने, एमजीआर से उनके रिश्ते और फिर तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने तक के सफर की झलक दिखाई गई है। इसमें विधानसभा में डीएमके विधायक द्वारा जयललिता के साथ किए गए अभद्र व्यवहार वाले सीन को भी शामिल किया गया है, जो महाभारत के समय धृतराष्ट्र की सभा में हुए द्रौपदी के चीर हरण की याद दिलाता है। 3 मिनट 22 सेकंड के पूरे ट्रेलर में महिला सशक्तिकरण की झलक दिखाई देती है।

23 अप्रैल को सिनेमाघरों में होगी रिलीज 

कंगना पर फिल्माया गया हर डायलॉग महिलाओं की ताकत दिखाता है। कुछ डायलॉग्स और सीन कंगना की ‘मणिकर्णिका : द क्वीन ऑफ झांसी’ की याद भी दिलाते हैं, जिसके लिए एक दिन पहले ही बेस्ट एक्ट्रेस के नेशनल फिल्म अवॉर्ड के लिए उनके नाम का एलान हुआ है। ट्रेलर में कंगना के अलग-अलग ट्रांसफॉर्मेशन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। कई के लिए उन्होंने वजन बढ़ाया और घटाया तो कई के लिए उन्होंने प्रोस्थेटिक मेकअप का सहारा लिया। ए. एल विजय के निर्देशन में बनी इस फिल्म में कंगना के अलावा, अरविंद स्वामी, नसर, भाग्यश्री, राज अर्जुन और मधु बाला की भी अहम भूमिका है। फिल्म 23 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

उर्वशी डांस म्यूजिक आर्ट एंड कल्चरल सोसायटी ने अनोखा कार्य किया- विजय गोयल,सांसद

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नई दिल्ली: उर्वशी डांस म्यूजिक आर्ट एंड कल्चरल सोसायटी ने दो दिवसीय कत्थक नृत्य महोत्सव का आयोजन त्रिवेणी कला संगम नईदिल्ली में किया। महोत्सव के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सांसद विजय गोयल मौजूद थे जिन्होंने पूरे कार्यक्रम को बड़े ही शिद्दत के साथ अंत तक कलाकारों का हौसला आफजाई किया। 

दिवसीय कत्थक नृत्य महोत्सव का आयोजन

इस मौके पर विजय गोयल ने कहा कि देश के कलाकारों में अद्भूत प्रतिभा है। जिस प्रकार से उर्वशी संस्था ने इस काल में कलाकारों को एकजुट किया और ओन लाइन प्रतियोगिता चलाई यह अपने आप में अनोखा कार्य है।

दो दिवसीय कत्थक नृत्य महोत्सव का आयोजनइकबाल दुर्रानी ने किया उर्वशी संस्था का सराहना

महोत्सव के उद्धघाटन के अवसर पर मौजूद प्रसिद्ध फिल्मकार इकबाल दुर्रानी ने कहा कि उर्वशी डांस म्यूजिक आर्ट कल्चरल सोसायटी जैसी संस्था को आगे लाने की जरूरत है। जो ऐसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया है। दुर्रानी ने कहा कि उन्होंने ने भी इसी त्रिवेणी में पहला परफोर्मेंस दिया था। जिससे उऩकी यादें जुडी हैं। इस मौके पर कत्थक डायरेक्टर सुमन कुमार ने कहा कि ऐसी परफोर्मेंस कम ही देखने को मिलती है। उर्वशी संस्था लगातार कलाकारों को आगे बढ़ाता रहा है।

संदीप मारवाह कलाकारों को शुभकामना दिया

उर्वशी संस्था को प्रसिद्ध एकेडमिशियन, डायरेक्टर, प्रोडयूसर वचांसलर संदीप मारवाह ने कलाकारों को शुभकामना देते हुए कहा कि सुर ताल हुनर का कमाल कार्यक्रम की शुरुआत उनकी स्टुडियो से हुई जिसका आज यहां परफोर्मेंस देखकर काफी खुशी हो रही है। हमारा स्टुडियों नवोदित कलाकारों के लिए सदा खुला है।

मनुष्य के शारीरिक क्षमता को बढ़ाता हैं कत्थक

इस मौके पर पद्मसीरि शोभना नारायण ने नवोदित कलाकारों को हौसला आफजाई करते हुए कहा कि आज ऐसे मंच की जरूरत थी, जिसकी पूर्ति उर्वशी कर रही है. फेम एक्ट्रैस जय श्री ने इस महोत्सव में शुरु से अंत तक सभी कलाकारों का हौसला आफजाई किया। जय श्री ने कलाकारों के साथ साथ आयोजक के प्रयास की सराहना की. उर्वसी डांस म्यूजिक आर्ट एंड कल्चरल सोसायटी के संयोजक उमेश शर्मा ने कहा कि कत्थक मनुष्य के शारीरिक क्षमता को दैविक रूप से बढ़ा देता है। उर्वसी विगत कई वर्षों से ऐसे कार्यक्रम करता रहा है लेकिन कोरोना के बाद यह पहला कार्यक्रम है जिसमें दर्शकों और कलाकारों को उत्साह देखते ही बना है।