कोरोना के बढ़ते मामलों को देख स्टेशन पर 24 घंटे लोगों की होगी कोरोना जांच

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-बस स्टैंड में भी कोरोना जांच की व्यवस्था की गई

भागलपुर, 17 मार्च
पिछले दो दिनों में कोरोना के 27 मामले मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना जांच को लेकर सख्ती बढ़ा दी है. स्टेशन पर 24 घंटे लैब टेक्नीशियन लोगों की कोरोना जांच करने के लिए तैनात रहेंगे. इसके अलावा बस स्टैंड में भी कोरोना जांच की व्यवस्था की गई है. सदर अस्पताल और मायागंज अस्पताल में पहले की तरह कोरोना जांच होती रहेगी. इसके अलावा सभी सरकारी अस्पतालों में भी लोगों की कोरोना जांच होगी. जिले के सिविल सर्जन डॉ. उमेश शर्मा ने बताया कि कोरोना के बढ़ रहे मामलों के बीच विभाग ने एहतियातन जांच की व्यवस्था बढ़ा दी है. खासकर वैसी जगहों पर जहां पर कि लोग बाहर से आना-जाना करते हैं. रेलवे स्टेशन पर तीन शिफ्ट में स्वास्थ्यकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है. एक लैब टेक्नीशियन वहां पर हमेशा मौजूद रहेगा जो लोगों की कोरोना जांच करेगा.

बाहर से आने वालों से कोरोना संक्रमण की संभावना :
मालूम हो कि महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में कोरोना के मामले फिर से सामने आने लगे हैं और अभी होली का त्यौहार आने वाला है. इस वजह से बड़ी संख्या में लोग बाहर से आएंगे. ऐसे में उनसे कोरोना होने की संभावना है. इस वजह से रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड में कोरोना जांच की सुविधा फिर से बहाल कर दी गई है.

मायागंज में फिर से चालू होगा 100 बेड का आइसोलेशन वार्ड:
मालूम हो कि पिछले साल 5 अप्रैल को मायागंज अस्पताल को कोरोना अस्पताल में तब्दील कर दिया गया था. इसके बाद से वहां पर सिर्फ कोरोना मरीजों का इलाज हो रहा था, लेकिन जैसे-जैसे कोरोना मरीजों की संख्या घटती गई, वहां सामान्य मरीजों का इलाज शुरू हो गया. इधर कोरोना के बढ़ते मामले के बीच एक बार फिर से मायागंज अस्पताल में 100 बेड का आइसोलेशन वार्ड शुरू किया जाएगा. अधीक्षक डॉ अशोक कुमार भगत ने बताया कि आइसोलेशन वार्ड के साथ 30 बेड की आईसीयू को रिजर्व में रखा जाएगा, ताकि कोरोना के मरीज सामने आते हैं तो उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं हो.

कोरोना की गाइडलाइन का हर हाल में करें पालन:
कोरोना के खिलाफ लड़ाई में स्वास्थ्य विभाग मजबूती के साथ खड़ा है. ऐसे में आमलोगों को भी इसमें योगदान करने की जरूरत है. अगर घर से निकलें तो जरूरी तौर पर मास्क लगा लें. साथ ही भीड़भाड़ से बचने की कोशिश करें. इसके अलावा सामाजिक दूरी का भी पालन करें. बाहर से आने पर हाथ की धुलाई अवश्य करें

सदर अस्पताल से लेकर बस स्टैंड तक में हो रही कोरोना जांच

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कोरोना जांच को लेकर स्वास्थ्य विभाग फिर से हुआ सक्रिय
जिले की पंचायतों में भी स्वास्थ्य विभाग की टीम कर रही जांच

बांका, 17 मार्च

जिले में कोरोना जांच का दायरा एक बार फिर से बढ़ा दिया गया है. स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से सक्रिय हो गया है. सदर अस्पताल और बस स्टैंड से लेकर जिले की पंचायतों तक में भी लोगों की कोरोना जांच हो रही है. दरअसल, होली के मौके पर बड़ी संख्या में बाहर से लोग घर आने वाले हैं या आ रहे हैं. अभी महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में कोरोना के मामले फिर से बढ़ रहे हैं. ऐसे में वहां से आने वाले लोगो से कई और लोग संक्रमित ना हो जाए, इस वजह से स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना जांच के दायरे को और बढ़ा दिया है.
बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और बाजारों में भी लोगों की कोरोना जांच हो रही-
सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार महतो ने बताया कि जिले में कोरोना जांच पहले से ही चल रही है. हां, होली के मौके पर बाहर से आने वाले लोगों को ध्यान में रखते हुए जांच का दायरा और भी बढ़ा दिया गया है. सभी सरकारी अस्पतालों में तो कोरोना जांच हो ही रही है. इसके अलावा बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और बाजारों में भी लोगों की कोरोना जांच हो रही है. न सिर्फ बांका बस स्टैंड, बल्कि कटोरिया बस स्टैंड में भी लोगों की कोरोना जांच की जा रही है. कोरोना को लेकर हर तरह की चुनौतियों से निपटने में स्वास्थ्य विभाग सक्षम है. उन्होंने कहा कि जांच का दायरा बढ़ाने की वजह से ही मंगलवार को 1700 लोगों की कोरोना जांच हुई. इसमें से 1200 लोगों की जांच एंटीजन किट से हुई जबकि 500 लोगों की जांच आरटीपीसीआर मशीन से की गई.

बाहर से आने वाले लोग कोरोना जांच जरूर कराएं:
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि जो भी लोग बाहर से घर आ रहे हैं, वे लोग कोरोना जरूर करा लें. साथ ही उनके परिवार के सदस्यों की भी जिम्मेदारी है कि बाहर से आने वाले लोगों को स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर कोरोना जांच करा लें. ऐसा करने से सभी लोग कोरोना से संक्रमित होने से बचे रहेंगे.

कोरोना की गाइडलाइन का पालन जरूरी: डॉ चौधरी ने बताया कि कोरोना की गाइडलाइन का पालन अभी हर हाल में करें. घर से निकलते वक्त मास्क लगाएं और भीड़भाड़ में जाने से बचें. सामाजिक दूरी का पालन करें. 2 गज की दूरी बनाकर रहें. इसके अलावा बाहर से घर आने पर अच्छी तरह से हाथ की धुलाई करें. ऐसा करते रहने से आप कोरोना की जद में आने से बचे रहेंगे.

सही समय पर जांच और उपयुक्त इलाज से मिली ब्रेन टीबी से निजात : लखन कुमार

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– जिला यक्ष्मा केंद्र मुंगेर सहित जिले के सभी अस्पतालों एवं प्राथमिक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर उपलब्ध है ब्रेन टीबी की जांच और इलाज की सुविधा
– पंजाब के स्पोर्ट्स कम्पनी में काम करता है लखन, जिसे 2018 में काम करने के दौरान हुई थी सिर दर्द की शिकायत

मुंगेर-

सही समय पर बीमारी कि पहचान के लिए सही जांच और उसके बाद उपयुक्त इलाज के बाद ब्रेन टीबी जैसी बीमारी से भी निजात मिल सकती है। यह कहना है ब्रेन टीबी जैसी गंभीर बीमारी को मात देकर स्वस्थ्य होने वाले मुंगेर जिले के बरियारपुर प्रखण्ड क्षेत्र अंतर्गत लोहची गांव के रहने वाले टीबी चैंपियन 32 वर्षीय लखन कुमार का। लखन कुमार ने बताया कि वो पंजाब के एक स्पोर्ट्स कम्पनी में काम करता है। सन 2018 के मई- जून के महीने में काम के दौरान उसे सिर में दर्द होना शुरू हुआ तो लगा कि यह सामान्य सिर दर्द है जो सिर दर्द की दवा लेने के बाद ठीक हो जाएगा। इसके बाद वो एक दवा दुकान हॉल से सिर दर्द की दवा लेकर खाने लगा। इसके बाद दवा खाने के कुछ दिनों तक तो सब कुछ ठीक रहा लेकिन बाद में फिर से सिर में दर्द होना शुरू हो गया। कुछ दिनों तक ऐसा ही होने पर आसपास के प्राइवेट डॉक्टर से मिलकर अपनी परेशानी बताई तो उन्होंने भी सिर दर्द का ही इलाज चला कर दवाइयां दी लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ और तबियत और भी बिगड़ने लगी| उल्टियां भी होनी शुरू हो गई। इस दौरान 20 से 25 हजार रुपये भी खर्च हो गए।

पंजाब में तबियत ज्यादा बिगड़ने के बाद वापस लौट आया अपने घर बिहार :
लखन कुमार ने बताया कि पंजाब में तबियत ज्यादा बिगड़ने के बाद वह मुंगेर के बरियारपुर प्रखंड के लोहची गांव स्थित अपने घर लौट आया। यहां आने के बाद उसके भाई ने बेहतर इलाज के लिए मुंगेर स्थित प्राइवेट हॉस्पिटल सेवायान में भर्ती कराया जहां भयंकर सिरदर्द की वजह से वह घण्टों- घण्टों तक चिल्लाता रहता था। इसके बाद सेवायान के डॉक्टरों ने उसकी बिगड़ती स्थिति को देखते हुए मुझे आईसीसीयू में भर्ती कर इलाज शुरू किया। यहां इलाज के दौरान जांच कराने के बाद जानकारी मिली कि उसे ब्रेन टीबी है। इसके बाद ब्रेन टीबी का इलाज शुरू किया गया और टीबी की दवाइयां दी जाने लगी। इसी दौरान उसे एक अन्य रिश्तेदार से जानकारी मिली कि जिला यक्ष्मा केंद्र मुंगेर में किसी भी तरह की टीबी की जांच और इलाज की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है। इसके साथ ही टीबी की दवाइयां भी यहां से निःशुल्क ही मिल जाती हैं ।

जिला यक्ष्मा केंद्र मुंगेर से 12 महीने तक निःशुल्क चला इलाज और मिलती रही दवाइयां :
उन्होंने बताया कि जिला यक्ष्मा केंद्र मुंगेर से लगभग 12 महीने तक उनका इलाज चला। इस दौरान यहां से दवाइयों के साथ ही निक्षय पोषण योजना के तहत खाने- पीने के लिए 500 प्रति माह के रूप में अनुदान राशि भी मिलती रही।

जिला यक्ष्मा केंद्र मुंगेर के जिला टीबी/ एचआईवी रोग समन्वयक शलेन्दु कुमार ने बताया कि ब्रेन टीबी एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी की श्रेणी में आता है। इसे माईनरी भी कहा जाता है। इसमें टीबी मरीज ट को नेक इरिडिटी की समस्या होती है। जिसमें मरीज की ठुड्डी उसके सीने से नहीं सटती है। बताया कि ब्रेन टीबी के मामले में खाँसी की समस्या नहीं हो कर अन्य सभी लक्षण जैसे वजन का कम होना, बुखार का होना सहित अन्य लक्षण मौजूद रहते हैं। ब्रेन टीबी के इलाज के लिए जिला यक्ष्मा केंद्र सहित जिले के सभी अस्पतालों और प्राथमिक, सामुदायिक केन्द्रों पर आवश्यक चिकित्सकीय जांच कराने के बाद बेहतर इलाज की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है। ब्रेन टीबी के मामले में टीबी मरीज को 12 महीनों तक लगातार दवाइयां दी जाती हैं ।

फीडिंग डेमोनस्ट्रेटर वीणा मुर्मू ने अपने प्रयासों से संवारे दो दर्जन नौनिहालों के जीवन

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– पोषण पुनर्वास केंद्र में कुपोषित बच्चों की हो रही है बेहतर देखभाल

जमुई-

जिले के पोषण पुनर्वास केंद्र की उपलब्धियों में वहाँ कार्य कर रहे समस्त कर्मियों के साथ-साथ फीडिंग डेमोनस्ट्रेटर वीणा मुर्मू का भी खास योगदान माना जा रहा है। इन्होंने क्लीनिकल न्यूट्रीशन एवं डायेटिक में परास्नातक की पढ़ाई तो की ही है साथ में संबंधित विषय पर कार्य करने का अनुभव भी प्राप्त किया है | वीणा कहती हैं कि बच्चों को कुपोषण से बचाने की स्वास्थ्य विभाग की मुहिम में वह एक अनुशाषित योद्धा की तरह तन्मयता के साथ लगी हुई है। उन्होने जिले के सभी जागरूक लोगों से अपील की है कि पोषण पुनर्वास केंद्र की सेवाओं का लाभ कुपोषण जैसी गंभीर समस्या से जूझ रहे बच्चों के जीवन में स्वाभाविक किलकारी लाने में अवश्य करें | वर्ष 2021 के 25 जनवरी से मार्च के प्रथम सप्ताह तक 24 बच्चों को पोषण की श्रेणी में लाये जाने की जानकारी साझा करते हुए कहती हैं कि यहाँ अधिकतर अभिभावकों के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता और उम्र अनुसार खानपान को अपने व्यवहारों में शामिल करने की जरूरत है | यहाँ 14 से 21 दिनों तक एक माह से 59 महीने के कुपोषण ग्रसित बच्चों को शामिल किया जाता है |
इस मुद्दे पर वहां सेवा पाने वाली एक चौबीस माह की बच्ची की माता लक्ष्मी देवी जो सदर प्रखंड के राजपुरा गाँव की रहने वाली है ने बताया मेरी बेटी के शारीरिक विकास में विलम्ब होने की जानकारी अपने गाँव की आंगनबाड़ी दीदी और आशा कार्यकर्ता से मिलते ही मैंने यहाँ आने का निर्णय लिया । वीणा दीदी से मिले परामर्श को लगातार दो सप्ताह से अपना रही हूँ । मेरी बेटी में काफी सुधार आया है |
15-15 दिनों पर दो माह तक आशा और आंगनबाड़ी दीदी करती हैं अनुश्रवण:
एक 3 वर्षीय बच्चे की माँ सविता देवी सिकंदरा प्रखंड ने बताया कि यहाँ से जाने के बाद 15-15 दिनों पर अगले दो माह तक आशा और आंगनबाड़ी दीदी के माध्यम से मेरी बच्ची के पोषण स्वास्थ्य की जानकारी ली जाएगी इससे मुझे भरोसा है कि अब स्वस्थ आदतों को अपनाकर मैं स्वयं और आसपास के मेरी जैसी माताओं को यहाँ आने के लिए आश्वस्त करुँगी ताकि पोषण पुनर्वास केंद्र से मिलने वाले सेवाओं की जानकारी सभी जरूरतमंदों तक पहुँच सके |

टीबी हारेगा, देश जीतेगा ” अभियान के प्रचार- प्रसार के लिए 15 से 24 मार्च तक जिले भर में आयोजित किए जा रहे हैं विविध कार्यक्रम : सिविल सर्जन

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– सभी प्रखंडों में स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रखंडस्तरीय अधिकारियों के बीच आयोजित होंगे कई कार्यक्रम
– राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) 2025 की सफलता के लिए देश भर में चलाया जा रहा है ” टीबी हारेगा, देश जीतेगा ” अभियान
– प्रति वर्ष 24 मार्च को देश भर में मनाया जाता है विश्व यक्ष्मा दिवस

लखीसराय-

राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) कि सफलता के लिए देश भर में ” टीबी हारेगा, देश जीतेगा ” अभियान चलाया जा रहा है। मालूम हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कि नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने सन 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से देश भर में ” टीबी हारेगा, देश जीतेगा ” का अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के प्रचार- प्रसार के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देशानुसार जिला स्वास्थ्य समिति लखीसराय के द्वारा 15 से 24 मार्च तक जिले के सभी प्रखण्डों में स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों के साथ टीबी जागरूकता के लिए विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उपर्युक्त बातें मंगलवार को लखीसराय पीएचसी में आयोजित एएनएम उन्मुखीकरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिले के सिविल सर्जन डॉ. आत्मानंद कुमार ने कही।
उंन्होने बताया कि जिले के सभी प्रखंडों में अलग- अलग कार्यक्रम आयोजित कर सुविधाओं, निक्षय पोषण योजना के बारे में जानकारी दी जानी है।
जिला सिविल सर्जन ने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति से प्राप्त निर्देश के अनुसार ” टीबी हारेगा, देश जीतेगा ” अभियान को एक जनांदोलन के रूप में चलाया जाना है। इसी के तहत 15 से 24 मार्च तक जिले के सभी प्रखंड में विविध कार्यक्रम आयोजित कर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रखंड स्तर के पदाधिकारी जैसे पीएचसी के एमओआईसी, बीडीओ, सीडीपीओ, हॉस्पिटल मैनेजर, ब्लॉक हेल्थ मैनेजर के अलावा टीबी चैंपियन,पेशेंट सपोर्टर के बीच राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के अंतर्गत सुविधाओं, निक्षय पोषण योजना के बारे में आवश्यक जानकारी दी जानी है। बताया कि सन 2025 तक जिले को यक्ष्मा मुक्त बंनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जिले में और भी कई प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत जिले के विभिन्न प्रखण्डों में एक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक गांव में सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइज़र (एसटीएस) के माध्यम से आम लोगों को टीबी के बारे में जागरूक करने के साथ ही चिह्नित रोगियों को नजदीकी अस्पताल में इलाज भी कराया जाता है।

उंन्होने बताया कि तय किए गए कार्यक्रम के अनुसार 15 मार्च को सभी प्रखंड मुख्यालय में टीबी हारेगा, देश जीतेगा कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में सभी प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी प्रतिभागी थे और कार्यक्रम के सफल संचालन कि जिम्मेदारी सम्बंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की थी। इसी तरीके से मंगलवार 16 मार्च को प्रखंड मुख्यालय पर प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों की बैठक और एएनएम का उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें सभी प्रखंडस्तरीय पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि के अलावा प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, ब्लॉक हेल्थ मैनेजर और सभी एएनएम उपस्थित थी। कार्यक्रम को डीपीएम मो. खालिद और जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार भारती ने सम्बोधित किया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने की जिम्मेवारी सबंधित ब्लॉक हेल्थ मैनेजर, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और यक्ष्मा विभाग के चिकित्सा पदाधिकारी की थी।

जिला के संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. पीसी वर्मा ने बताया कि 18 मार्च को जिले के सभी स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर स्वास्थ्य उपकेंद्र के प्रतिनिधियों की बैठक होगी जिसमें सबंधित स्वास्थ्य उपकेंद्र कि सभी आंगनबाड़ी सेविका और आशा कार्यकर्ता शामिल होंगी । इस कार्यक्रम को सफल बनाने की जिम्मेदारी सबंधित एचएस सी की एएनएम और बीएसीएम की होगी। इसी तरह 20 मार्च को क्लस्टर बैठक आयोजित की जाएगी जिसमें क्लस्टर से संबंधित सभी आशा कार्यकर्ता शामिल होंगी । इसे सफल बनाने की जिम्मेदारी सबंधित क्षेत्र की बीसीएम और आशा फैसिलिटेटर की होगी। बताया कि 22 मार्च को सभी सेक्टर स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जिसको सफल बनाने की जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और महिला पर्यवेक्षिका की होगी। इसके साथ ही 23 मार्च को सभी आंगनबाड़ी केंद्र पर जन जागरूकता रैली आयोजित की जाएगी जिसमें जनसमुदाय शामिल होगी और इसे सफल बनाने की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी सेविका और आशा कार्यकर्ता की होगी। इसी दिन सभी प्रखंड कार्यालय पर वाद- संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे जिसमें बुद्धिजीवी और मीडिया कर्मी शामिल होंगे। इस कार्यक्रम को सफल बनाने की जिम्मेदारी प्रखंड विकास पदाधिकारी और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की होगी।

24 मार्च को आयोजित होगा ‘टीबी हारेगा, देश जीतेगा’ कार्यक्रम :
उन्होंने बताया कि 24 मार्च को विश्व यक्ष्मा दिवस के दिन जिला समाहरणालय में ” टीबी हारेगा, देश जीतेगा” कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। जिसमें जिला स्तर के पदाधिकारी और मीडिया कर्मी शामिल होंगे। इस कार्यक्रम को सफल बनाने कि पूरी जिम्मेदारी जिला सिविल सर्जन निभाएंगे।

” टीबी हारेगा, देश जीतेगा ” अभियान के प्रचार- प्रसार के लिए 15 से 24 मार्च तक जिले भर में आयोजित किए जाएंगे विविध कार्यक्रम

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– जिले के सभी प्रखंडों में स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रखंड स्तरीय अधिकारियों के बीच आयोजित किया जाना है कई तरीके का कार्यक्रम

– राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) 2025 कि सफलता के लिए देश भर में चलाया जा रहा है ” टीबी हारेगा, देश जीतेगा ” अभियान

– प्रति वर्ष 24 मार्च को देश भर में मनाया जाता है विश्व यक्ष्मा दिवस

लखीसराय-

राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) कि सफलता के लिए देश भर में चलाया जा रहा है ” टीबी हारेगा, देश जीतेगा ” अभियान चलाया जा रहा है। मालूम हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कि नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने सन 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से देश भर में ” टीबी हारेगा, देश जीतेगा ” का अभियान भी चलाया जा रहा है। इसी अभियान के प्रचार- प्रसार के लिए राज्य स्वास्थ्यय समिति के निर्देशानुसार जिला स्वास्थ्यय समिति लखीसराय के द्वारा 15 से 24 मार्च तक जिले के सभी प्रखण्डों में स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों के साथ टीबी जागरुकता को ले समूह बैठक आयोजित की जाएगी। इससे संबंधित एक पत्र जिला स्वास्थ्यय समिति लखीसराय के अध्यक्ष सह जिलाधिकारी संजय कुमार ने जिला संचारी पदाधिकारी के द्वारा सभी प्रखंडों में कार्ररत स्वास्थ्यय विभाग के पदाधिकारी सहित अन्य पदाधिकारियों को जारी किया है।

जिला संचारी रोग पदाधिकारी पी सी वर्मा ने बताया कि राज्य स्वास्थ्यय समिति से प्राप्त निर्देश के अनुसार ” टीबी हारेगा, देश जीतेगा ” अभियान को एक जनांदोलन के रूप में चलाया जाना है। इसी के तहत 15 से 24 मार्च तक जिले के सभी प्रखंड में विविध आयोजित कर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रखंड स्तर के पदाधिकारी जैसे पीएचसी के एमओआईसी, बीडीओ, सीडीपीओ, होस्पिटल मैनेजर, ब्लॉक हेल्थ मैनेजर के अलावे टीबी चैंपियन,पेशेंट सपोर्टर के बीच राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के अंतर्गत सुविधाओं, निक्षय पोषण योजना के बारे में आवश्यक जानकारी दिया जाना है। उंन्होने बताया कि सन 2025 तक जिले को यक्ष्मा मुक्त बंनाने के लिए स्वास्थ्यय विभाग के द्वारा जिले में और भी कई प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत जिले के विभिन्न प्रखण्डों में एक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक गांव में सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइज़र (एसटीएस) के माध्यम से आम लोगों को टीबी के बारे में जागरूक करने के साथ ही चिन्हित रोगियों को नजदीकी अस्पताल में ईलाज भी कराया जाता है।

उन्होने बताया कि तय किए गए कार्यक्रम के अनुसार 15 मार्च को सभी प्रखंड मुख्यालय पर 11 बजे से टीबी हारेगा, देश जीतेगा कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में सभी प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी प्रतिभागी थे और कार्यक्रम के सफल संचालन कि जिम्मेदारी सम्बंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी थी। इसी तरीके से मंगलवार 16 मार्च को प्रखंड मुख्यालय पर प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों कि बैठक और एएनएम का उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें सभी प्रखंडस्तरीय पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि के अलावे प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, ब्लॉक हेल्थ मैनेजर और सभी एएनएम उपस्थित थी। इस कार्यक्रम को सफल बनाने कि जिम्मेवारी सबंधित ब्लॉक हेल्थ मैनेजर, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और यक्ष्मा विभाग के चिकित्सा पदाधिकारी की थी।

लखीसराय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के ब्लॉक हेल्थ मैनेजर निशांत राज ने बताया कि 18 मार्च को जिले के सभी स्वास्थ्यय उपकेंद्रों पर स्वास्थ्यय उपकेंद्र के प्रतिनिधियों कि बैठक होगी जिसमें सबंधित स्वास्थ्यय उपकेंद्र कि सभी आंगनबाड़ी सेविका और आशा कार्यकर्ता शामिल होगी। इस कार्यक्रम को सफल बनाने की जिम्मेदारी सबंधित एचएस सी कि एएनएम और बीएसीएम की होगी। इसी तरह 20 मार्च को क्लस्टर बैठक आयोजित की जाएगी जिसमें क्लस्टर से संबंधित सभी आशा कार्यकर्ता शामिल होगी। इसे सफल बनाने की जिम्मेदारी सबंधित क्षेत्र कि बीसीएम और आशा फैसिलिटेटर की होगी। उंन्होने बताया कि 22 मार्च को सभी सेक्टर स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जिसको सफल बनाने की जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और महिला पर्यवेक्षिका की होगी। इसके साथ ही 23 मार्च को सभी आंगनबाड़ी केंद्र पर जनजागरूकता रैली आयोजित की जाएगी जिसमें जनसमुदाय शामिल होगी और इसे सफल बनाने की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी सेविका और आशा कार्यकर्ता की होगी। इसी दिन सभी प्रखंड कार्यालय पर वाद- संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे जिसमें बुद्धिजीवी और मीडिया कर्मी शामिल होंगे। इस कार्यक्रम को सफल बनाने की जिम्मेदारी पखण्ड विकास पदाधिकारी और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की होगी।

24 मार्च को आयोजित होगा ‘टीबी हारेगा, देश जीतेगा’ कार्यक्रम :
उन्होने बताया कि 24 मार्च को विश्व यक्ष्मा दिवस के दिन जिला समाहरणालय में ” टीबी हारेगा, देश जीतेगा” कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। जिसमें जिला स्तर के पदाधिकारी और मीडिया कर्मी शामिल होंगे। इस कार्यक्रम को सफल बनाने कि पूरी जिम्मेदारी जिला सिविल सर्जन कि होगी।

46 केंद्रों पर हजारों लोगों को लगे कोरोना के टीके

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पहले और दूसरे चरण के छूटे हुए लाभुकों को भी लगाया गया कोरोना का टीका
टीका का पहला डोज लेने वालों के 28 दिन पूरा होने पर दिया गया बूस्टर डोज

भागलपुर-

जिले में कोरोना टीकाकरण अभियान जोर-शोर से चल रहा है. धीरे धीरे कोरोना का टीका लेने वाले लाभुकों की संख्या भी बढ़ती जा रही है. मंगलवार को जिले के 46 केंद्रों पर हजारों लाभुकों को कोरोना के टीके पड़े. जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ मनोज कुमार चौधरी ने बताया कि मंगलवार को 45 से 59 साल के बीमारी के अलावा 60 साल से अधिक के बुजुर्गों को कोरोना के टीके दिए गए. हजारों की संख्या में लाभुक केंद्रों पर टीका लेने के लिए सामने आए. टीकाकरण के बाद आधे घंटे तक स्वास्थ्यकर्मियों की टीम ने लाभुकों की निगरानी की. साथ में कोरोना का पहला टीका लेने वालों को 28 दिन पूरा होने पर बूस्टर डोज लेने के लिए भी कहा गया. उन्हें तारीख भी बता दी गई.

पहले और दूसरे चरण के छूटे हुए लाभुकों को भी पड़े टीके:
डॉ. चौधरी ने बताया कि पहले और दूसरे चरण में छूटे हुए स्वास्थ्यकर्मियों एवं फ्रंटलाइन वर्करों को भी मंगलवार को कोरोना के टीके दिए गए. इसके अलावा पहले और दूसरे चरण में पहला डोज ले लेने वाले लाभुकों को कोरोना टीका का बूस्टर डोज दिया गया. सभी केंद्रों पर हर तरह की व्यवस्था थी, जिसका 28 दिन पूरा हो गया था उसे बूस्टर डोज दिया गया.

रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आसान होने से लाभुकों में उत्साह:
डॉ चौधरी ने बताया कि टीकाकरण केंद्रों पर लाभुकों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आसान हो जाने से ज्यादा संख्या में टीका लेने के लिए लाभुक सामने आ रहे हैं. लाभुक अपने साथ आधार कार्ड लाते हैं और साथ में पहचान पत्र, जिसके बाद केंद्र पर मौजूद डाटा ऑपरेटर उनका रजिस्ट्रेशन कर देते हैं. रजिस्ट्रेशन हो जाने के बाद लाभुक टीका लेने के लिए योग्य हो जाते हैं और वह टीका ले लेते .

महिला दिवस पर दूसरे स्थान पर रहा था भागलपुर:
डॉ चौधरी ने बताया की टीका लेने के लिए लाभुकों में उत्साह बढ़ता जा रहा है. इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि महिला दिवस पर 8 मार्च को फिर 12 मार्च को पंचायत प्रतिनिधियों के लिए जो टीकाकरण का अभियान चलाया गया था उसमें दोनों ही दिन भागलपुर सूबे में दूसरे स्थान पर रहा था. जैसे-जैसे टीका लेने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे लोगों में कोरोना टीका के प्रति भरोसा भी बढ़ता जा रहा है. यही वजह है कि लाभुकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है.

गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को सही पोषण की जानकारी दे रहीं सेविका मुन्नी कुमारी

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दुधारी पंचायत स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 1 में हैं कार्यरत
पोषण को लेकर घर-घर जाकर लोगों को कर रही जागरूक

बांका-

जिले के आखिरी व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने में स्वास्थ्यकर्मियों के साथ आईसीडीएस के कर्मी भी सहयोग कर रहे हैं. गांव में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र के जरिए सेविका और सहायिका बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दे रही हैं. बांका के दुधारी पंचायत स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 1 में कार्यरत सेविका मुन्नी कुमारी क्षेत्र की गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के पोषण से संबंधित काम में खासा रुचि रखती हैं. इसका फायदा क्षेत्र की महिलाओं को मिल रहा है.
सही पोषण को लेकर जागरूक भी कर रही हैं-
मुन्नी कुमारी न सिर्फ गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के स्वास्थ्य की सही देखभाल कर रही हैं, बल्कि उन्हें सही पोषण को लेकर जागरूक भी कर रही हैं. मुन्नी कुमारी बताती हैं सबसे पहले मैं अपने क्षेत्र की गर्भवती एवं धात्री महिलाओं की रजिस्ट्रेशन करती हूं. इसके बाद उसको जांच की सलाह देती हूं. आंगनबाड़ी केंद्र संख्या में उसकी जांच करवाकर उसका नियमित तौर पर वजन जांच करती हूं एवं उसके खान-पान पर विशेष निगरानी रखती हूं. गर्भावस्था में अगर महिलाओं को सही पोषण मिल जाता है तो इससे उसके बच्चे भी स्वस्थ रहते हैं.

पोषण बगीचा लगाने को बता रही तरीके:
मुन्नी कुमारी बताती हैं कि सही पोषण के लिए लोगों को अपने घर में पोषण बगीचा लगाना चाहिए. बगीचे में उन चीजों को लगाना चाहिए जिसके सेवन से शरीर स्वस्थ रहता है. जैसे- हरी सब्जियां, साग, इन सब चीजों को बगीचा में लगाना चाहिए. इसे लेकर मैं अभी घर-घर लोगों को बता रही हूं. लोगों को समझा रही हूं कि घर के बगीचे में क्या-क्या लगाना चाहिए.

कुपोषण को दूर करने की बता रही उपाय: सेविका मुन्नी कुमारी कहती हैं जब से कोरोना काल शुरू हुआ है, तब से वह लोगों के घर-घर जाकर ही सारा काम कर रही है. उन्होंने बताया कोरोना संक्रमण काल में सुपोषण की अहमियत अधिक बढ़ी है. इसलिए वह अब लोगों को बेहतर पोषण की जरूरत के बारे में जागरूक कर रही है. बेहतर पोषण मिलने से लोगों की प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत रहती है और वह दूसरी बीमारियों से भी बच्चे रहते हैं.
पहले की तुलना में अधिक जागरूक हुए लोग:
गर्भवती और धात्री महिलाओं के लिए पोषण की जरूरत अधिक होती है. सही मात्रा में सभी पोषक तत्वों को आहार में शामिल करने से उनका शरीर कैसे स्वस्थ रह सकता है, इस विषय में भी वह महिलाओं को जानकारी दे रही हैं. उन्होंने बताया स्तनपान एवं अनुपूरक आहार के बारे में पहले की तुलना में लोग अधिक जागरूक भी हुए हैं. ऐसे मुद्दों पर नियमित तौर पर जानकारी देते रहने से समुदाय में इसकी महता पर गंभीरता बनी रहती है

इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास के लिए कैबिनेट की DFI को मंजूरी

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New delhi: केंद्रीय कैबिनेट ने डिवेलपमेंट फाइनैंस इंस्टिट्यूशन के गठन को मंजूरी दे दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि DFI के गठन से विकास कार्यों में आड़े आने वाली आर्थिक बाधाएं दूर हो जाएंगी.

इन्फ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विकास होगा। वित्त मंत्री ने कहा कि पहले भी ऐसे कई प्रयास किए जा चुके हैं लेकिन अब तक इस तरह के बैंक का गठन नहीं हो सकता था। उन्होंने कहा कि यह DFI लॉन्ग टर्म रिस्क लेने में सक्षम होगा और विकास के लिए फंडिंग कर सकेगा।

उन्होंने कहा, ‘बजट के दौरान भी हमने कहा था कि इन्फ्रास्ट्रक्चर और विकास की गतिविधियों के लिए फंडिंग के लिए एक संस्था का गठन किया जाएगा। डीएफआई के माध्यम से लंबी अवधि की फंडिंग आसानी से हो सकेगी और बजट में किए गए ऐलान के मुताबिक पहले ही साल 20 हजार करोड़ का कैपिटल इन्फ्यूजन किया जाएगा। इसके लिए इनीशल ग्रांट 5 हजार करोड़ का होगा।’

बैंकों के निजीकरण का मामला संसद में गुंजा

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New delhi: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण के खिलाफ दो दिवसीय हड़ताल का मुद्दा मंगलवार को संसद में गूंजा। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे को उठाते हुए समस्या के समाधान के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से बयान देने की मांग की।

आम जनता से लेकर कोराबारी तक इससे परेशान

उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए खड़गे ने कहा कि कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से बैंकों का कामकाज ठप्प पड़ गया है और आम जनता से लेकर कोराबारी तक इससे परेशान हैं। उन्होंने कहा, ‘‘देश भर में लगभग 12 राष्ट्रीयकृत बैंक हैं और इनकी एक लाख शाखाएं हैं। इनमें करीब 13 लाख लोग काम करते हैं और 75 करोड़ से ज्यादा खातेदार हैं। ये खातेदार भी बैंक के हितधारक हैं और उनके पूछे बगैर सरकार ने निजीकरण का फैसला कर लिया।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ‘‘गलत नीतियों और अंधाधुंध निजीकरण’’ के चलते आज यह स्थिति पैदा हुई है और उनक रोजी-रोटी पर भी संकट उत्पन्न हो गया है।

LIC का निजीकरण नहीं हो रहा

उधर, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का निजीकरण नहीं किया जा रहा है व बैंकों के संदर्भ में अफवाहों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। जावड़ेकर ने शिवसेना सांसद अरविंद सावंत के प्रश्न के उत्तर में यह बात कही। मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का हमेशा यह प्रयास होता है कि जिन सार्वजनिक उपक्रमों को फिर से खड़ा किया जा सकता है, उसे किया जाए।

LIC का निजीकरण क्यों नहीं हो रहा है ?

सावंत के एक पूरक प्रश्न के उत्तर में सूचना एवं प्रसारण तथा भारी उद्योग मंत्री जावड़ेकर ने कहा, ‘‘एलआईसी का निजीकरण नहीं हो रहा है। यह गलतफहमी है। जहां तक बैंकों का सवाल है जो उस बारे में अफवाहों पर विश्वास नहीं करें।’’ इससे पहले, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने सोमवार को लोकसभा में कहा था कि एलआईसी का आईपीओ लाने का प्रस्ताव है तथा इस कदम से किसी भी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी तथा एलआईसी एवं निवेशकों दोनों को फायदा होगा।

बता दें कि नौ यूनियनों के संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने 15 और 16 मार्च को हड़ताल का आह्वान किया है। ये नौ बैंक यूनियनें हैं…एआईबीईए, एआईबीओसी, एनसीबीई, एआईबीओए, बीईएफआई, आईएनबीओसी, एनओबीडब्ल्यू और एनओबीओ। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले महीने पेश आम बजट में सरकार की विनिवेश योजना के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों के निजीकरण की घोषणा की थी।