कोरोना खौफ के बीच अमिताभ बच्चन के घर में घुसा चमगादड़

0

सदी के महानायक शहंशाह अमिताभ बच्चन ने दुनियाभर में फैले कोरोना के खौफ के बीच एक ‘ब्रेकिंग न्यूज’ शेयर की है. जी हां यह फिल्म के बारे में ब्रेकिंग नहीं. न ही कोई सोशल मैसेज. बल्कि ऐसी खबर थी जिसे जानकर आप भी अंचभित हो जाएंगे.

दरअसल, ऐसे तो कोरोना कही दिख नहीं रहा है लेकिन जिस सवार पर बैठकर आया वह ही आपके घर आए जाए तो कैसा लगेगा.

चलिए हम आपको बता देंते यह क्या खबर थी. अमिताभ बच्चन शनिवार रात को सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए से बताया कि एक चमगादड़ उनके घर में घुस गया. जहां यह चमगादड़ बचन साहब पर सीधा वार करने की कोशिश कर रहा था.

https://www.freepressjournal.in/entertainment/bollywood/bat-enters-amitabh-bachchans-mumbai-house-actor-says-corona-peecha-chodh-hi-nahin-raha

 

इसपर अमिताभ बच्चन ने लिखा, ‘ब्रेकिंग न्यूज, इस घंटे की खबर, एक बैट, हां एक चमगादड़ अभी मेरे कमरे जो कि जलसा के तीसरे फ्लोर पर है, आ गया.’ इस जगह हम सभी बैठते हैं.’

इसके साथ ही महानायक ने आगे लिखा कि उसे पहले कभी नहीं देखा गया. हमारा ही घर मिला उसे. कोरोना तो पीछा छोड़ ही नहीं रहा. उड़ उड़ के आ रहा है, कमबख्त.

बता दें कि अमिताभ बच्चन अपने परिवार के साथ बढ़िया वक्त बिता रहे हैं. लॉकडाउन की वजह से उनकी वाइफ जया बच्चन दिल्ली में हैं. बिग बी अपने फैंस के लिए अपनी डेली ऐक्टिविटीज शेयर करते रहते हैं. अब उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर ‘बड़ी खबर’ शेयर जिसके बाद कई लोगों ने उनका हालचाल पूछा.


बॉलीवुड स्टार के इस पोस्ट को शेयर करने के बाद उनके फैन्स ने कमेंट्स करने शुरू कर दिए. फैन्स ने उन्हें सुरक्षित रहने के लिए कहा. अमिताभ के इस पोस्ट को इंस्टाग्राम में महज कुछ ही घंटों बाद दो लाख से अधिक लाइक्स मिल गए. इसके अलावा दो हजार से अधिक यूजर्स ने कमेंट किया है.

गौरतलब है कि चीन के वुहान से शुरू हुआ कोरोना की वजह से पूरी दुनिया में उथल-पुथल मची हुई है. ऐसी कई रिपोर्ट्स आई हैं कि वुहान में एक चमगादड़ से इंसानों में कोरोना आया. इसके बाद पूरी दुनिया में यह संक्रमण फैल गया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक जारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मौदी कोरोना को लेकर चौथी बार मुख्यमंत्रियों से बात की। जिसमें खास चर्चा लॉकडाउन को बढ़ाने के लेकर हो रही है। इस चर्चा में कई राज्यों के मुख्यमंत्री ने लॉकडाउन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं वहीं कई मुख्यमंत्री इस लॉकडाउन को हटाए लेकिन कुछ शर्तों के साथ इसपर चर्चा हुई। वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने खास तौर पर मजदूरों की स्थिति पर रणनीति बनाने पर जोर दिया और कहा कि सरकार नीति बनाए जिससे की मजदूर अपने घर वापस जा पाएं। वहीं कई राज्यों के मुख्यमंत्री और पैसे की मांग कर रहे हैं। कास बात यह है कि प्रधानमंत्री खुद सभी मुख्यमंत्रियों की मांग को नोट कर उसके लिए अलग से निर्देश जारी करेंगे।

सबसे क्रूर तानाशाह किम जोंग उन की हो चुकी है मौत ? सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ ये खुलासा, दिखी ट्रेन

0
  • किम जोंग-उन की ट्रेन और उनके बारे में दक्षिण कोरिया ने बताया
  • उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग-उन की सेहत को लेकर चल रही अटकलों पर दक्षिण कोरिया ने विराम लगा दिया है.

दक्षिण कोरिया ने सीएनएन से कहा है कि किम जोंग-उन ज़िंदा हैं और स्वस्थ हैं. दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जाइ-इन के विदेशी मामलों के सलाहकार मून चुंग-इन ने सीएएन को दिए इंटरव्यू में कहा, ”मेरी सरकार इस बात की पुष्टि करती है कि किम जोंग-उन ज़िंदा हैं और स्वस्थ हैं. वो 13 अप्रैल से उत्तर कोरिया के वोनसन इलाक़े में रह रहे हैं. इसमें कुछ भी संदिग्ध नहीं है.”

kim-jong-un-1

15 अप्रैल को किम जोंग-उन अपने दादा के जन्मदिन के उत्सव में शामिल नहीं हुए थे और इसके बाद से ही उनकी सेहत को लेकर कई तरह की अफ़वाह उड़ रही थी. उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए के अनुसार आख़िरी बार 11 अप्रैल को किम जोंग-उन एक पोलित-ब्यूरो की बैठक में शामिल हुए थे.

पिछले हफ़्ते सीएनएन ने रिपोर्ट की थी कि किम जोंग-उन की हालत एक सर्जरी के बाद गंभीर है.

उत्तर कोरिया पर केंद्रीत दक्षिण कोरिया का ऑनलाइन अखबार डेली एनके ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि “ज़्यादा स्मोकिंग, मोटापा और ज़्यादा काम करने की वजह” से प्रभावित हुए किम के हृदय का इलाज चल रहा है.

अख़बार की वेबसाइट के मुताबिक़ किम की हालत में सुधार होने के बाद उनका इलाज कर रही मेडिकल टीम के ज़्यादातर सदस्य 19 अप्रैल को प्योंगयांग लौट आए हैं जबकि कुछ अब भी उनके पूरी तरह से ठीक होने तक वहीं बने रहेंगे.

रविवार को उत्तर कोरिया के अख़बार रोडोंग सिनमुन ने कहा है कि किम ने उन सबों को धन्यवाद दिया है जिन्होंने उत्तर कोरियाई शहर समजियों को फिर से बनाने में मदद की है.

ऐसा पहली बार नहीं है कि उत्तर कोरिया के नेता के स्वास्थ्य को लेकर ख़बरे आने के बाद वहां की मीडिया ने किम की गतिविधियों की रिपोर्ट दी हो.

Kim Jong Un Train

वोनसान में खड़ी ट्रेन

उत्तर कोरिया अपने नेता के किसी भी जानकारी को लेकर नियंत्रण रखता है. उन्हें शहर में किसी ईश्वर की तरह लिया जाता है. सरकारी मीडिया से उनकी ग़ैर-मौजूदगी अक्सर उनके स्वास्थ्य को लेकर अटकलें और अफ़वाहों को जन्म देती है.

उत्तर कोरिया में कोई स्वतंत्र प्रेस नहीं है और जब भी देश के नेतृत्व की बात आती है तो अक्सर एक ब्लैक होल ही दिखता. विश्लेषक बहुत हद तक सरकारी मीडिया से मिलने वाली जानकारियों और प्रौपेगेंडा वीडियो पर निर्भर रहते हैं.

उत्तर कोरिया के मामलों को प्रमुखता से उठाने वाली एक वेबसाइट ने शनिवार को वोनसान शहर में खड़ी एक ट्रेन की तस्वीर डाली है, जिसे विशेषज्ञ ‘संभवत: किम जोंग उन से संबंधित ट्रेन’ मानते हैं. बताया गया है कि 12 अप्रैल से यह ट्रेन यहाँ खड़ी है.

38 नॉर्थ में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक ट्रेन की मौजूदगी इस बात का प्रमाण नहीं है कि किम जोंग उन वोनसान में ही हैं लेकिन ये उन रिपोर्ट्स को ‘हवा देती’ है कि वो इस क्षेत्र में ही रूके हुए हैं.

उत्तर कोरिया के मामलों पर 38 नॉर्थ विश्लेषण प्रकाशित करता है और वॉशिंगटन डीसी स्थिति थिंक टैंक हेनरी एल. स्टीमसन का एक प्रोजेक्ट है.

इस वेबसाइट पर रिपोर्ट छपी है कि जो ट्रेन वोनसान में खड़ी है, उसका ‘इस्तेमाल किम का परिवार’ करता है. सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों के अनुसार 15 अप्रैल तक इस इलाक़े में यह ट्रेन नहीं थी. यह 21 अप्रैल से पहले किसी दिन यहां आई है और 23 अप्रैल को “यहाँ से रवाना होने के लिए इसकी जगह बदली हुई दिखी है.”

वेबसाइट के मुताबिक वोनसान के आलिशान परिसर में नौ बड़े-बड़े गेस्टहाउस, एक मनोरंजन का केंद्र, किम के सत्ता में आने के बाद बनी एक बड़ी इमारत, एक सुरक्षित बंदरगाह, एक शूटिंग रेंज और एक छोटा रनवे हैं जिसे 2019 में घुड़सवारी के ट्रैक में तब्दील कर दिया गया है. किम को घुड़सवारी का शौक़ है.

बचपन में यहाँ के समुद्री तट पर किम ने अपनी गर्मियां बिताई है. अक्सर वो यहाँ छुट्टियां मनाने आया करते थे. किम हालांकि अक्सर जहाज या सड़के के रास्ते वोनसान आते रहते हैं.

श्रोत : बीबीसी हिंदी

कैलाश विजयवर्गीय: जिंदगी में कभी न हारने वाला व्यक्तित्व

0

हार नहीं मानूंगा, रार नई ठानूंगा,
काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूं,
गीत नया गाता हूं.

BJP के राष्ट्रीय महासचिव Kailash Vijayvargiya का जन्मदिन 26 अप्रैल को आता है। हर वर्ष गौशाला और गरीबो के बीच अपने जन्मदिन को सेलिब्रेट करने वाले विजयवर्गीय ने आज अपना जन्मदिन गाना गाकर क्वारंटीन के लोगों के साथ मनाया

Image
विजयवर्गीय ने 2013 के विधानसभा चुनाव में महू विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवार अंतर सिंह दरबार को 12,216 वोट से हराकर लगातार छह बार विधानसभा चुनाव जीतकर अजेय रहने का रिकॉर्ड कायम किया था.
भारतीय जनता पार्टी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने सियासी जीवन में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. 13 मई, 1956 को जन्मे विजयवर्गीय पहली बार इंदौर के मेयर चुने गए थे और उसके बाद से संसदीय राजनीति में वह लगातार आगे ही बढ़ते रहे. इस क्रम में उन्होंने अपने नाम से एक रिकॉर्ड भी दर्ज किया है. उन्होंने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कभी हार का मुंह नहीं देखा. 12 साल तक राज्य में मंत्री का पद संभालने के बाद अब वह संगठन में राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.

बाधाएं आती हैं आएं,
घिरें प्रलय की घोर घटाएं
पावों के नीचे अंगारे
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं
निज हाथों में हंसते हंसते
आग लगा कर जलना होगा,
कदम मिला कर चलना होगा.

केंद्रीय राजनीति तक की यात्रा

अक्सर अपने बयानों की वजह से विवादों में रहने वाले विजयवर्गीय को 2014 में बीजेपी का हरियाणा चुनाव प्रचार का प्रभारी बनाया गया, जहां भगवा पार्टी ने बहुमत हासिल किया. हरियाणा में बीजेपी को जीत दिलाने के बाद उन्हें पार्टी में केंद्रीय भूमिका के लिए चुना गया और 2015 में अमित शाह ने उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त कर दिया. साथ ही पश्चिम बंगाल में पार्टी का प्रभारी बना दिया गया, जहां बीजेपी को खोने के लिए कुछ नहीं था और हासिल करने को पूरा आसमान पड़ा हुआ था. विजयवर्गीय के नेतृत्व में पार्टी ने बंगाल में बढ़त भी हासिल की है.

इंदौर में राजनीतिक करियर शुरू करने की कहानी से पहले विजयवर्गीय के छात्र जीवन की भी एक सियासी यात्रा है. दरअसल उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1975 में उसी दिन ही कर दिया था, जिस दिन वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की छात्र ईकाई एबीवीपी से जुड़े थे.

एबीवीपी के रास्ते वह राजनीति की गहराई में गोते लगाते गए. 1983 में वह इंदौर नगर निगम के मेयर और 1985 में स्थायी समिति के सदस्य चुने गए. बाद में वह भारतीय जनता युवा मोर्चो (भाजयुमो) के राज्य सचिव बने. बाद में उन्हें इंदौर और बीजेपी के विधि प्रकोष्ठ का स्टेट को-ऑर्डिनेटर बनाया गया. 1985 में ही वह विद्यार्थी परिषद के स्टेट कॉर्डिनेटर भी बने.


लगातार जीतने का रिकॉर्ड

विजयवर्गीय ने 2013 के विधानसभा चुनाव में महू विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवार अंतर सिंह दरबार को 12,216 वोट से हराकर लगातार छह बार विधानसभा चुनाव जीतकर अजेय रहने का रिकॉर्ड कायम किया था. विजयवर्गीय को 89,848 वोट मिले थे, जबकि उनके प्रतिद्वन्द्वी दरबार को 77,632 मतों से संतोष करना पड़ा था. वहीं 2008 के विधानसभा चुनावों में महू क्षेत्र से विजयवर्गीय और दरबार आमने-सामने थे. इन चुनावों में विजयवर्गीय ने दरबार को 9,791 मतों से मात दी थी. वह लगातार 1990, 1993, 1998, 2003, 2008, और 2013 के विधानसभा चुनावों में विधायक चुने जाते रहे हैं.

एक प्रतिज्ञा पूरी करने के लिए 20 साल अन्न जल का त्याग किया

अनाज खाने के लिए 20 साल तक बजरंगबली का इंतज़ार क्यों करते रहे कैलाश विजयवर्गीय?

कैलाश विजयवर्गीय ने हाल ही में 20 साल बाद अन्न ग्रहण किया है. उन्होंने 20 साल पहले अपनी जन्मभूमि इंदौर में हनुमान जी की प्रतिमा की स्थापना का संकल्प लिया था. साथ ही हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित होने तक अन्न ग्रहण करना छोड़ दिया था.

20 साल तक अन्न ना खाना भी अपने आप में एक बड़ी बात है. अपने गुरु के हाथ से खाना खाते कैलाश

कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि उन्होंने करीब 20 साल पहले इंदौर में पितृ पर्वत के पास हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करने का संकल्प लिया था. इसके साथ ही उन्होंने अन्न ग्रहण करना छोड़ दिया था. विजयवर्गीय ने पितृ दोष को खत्म करने के लिए हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करने का संकल्प लिया था. पितृ पर्वत की भी स्थापना बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने ही की थी. उस समय वो इंदौर के मेयर हुआ करते थे.

‘जिस दिन हनुमान जी की स्थापना हुई उस दिन महा-भोज का भी आयोजन किया गया. इस महाभोज जैसा आयोजन इंदौर ने इससे पहले कभी नहीं देखा. उम्मीद 10 लाख लोगों की थी लेकिन 14 लाख से ज़्यादा लोग हनुमान जी का दर्शन करके भोजन किए इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है. महाभोज के लिए इंदौर शहर ने रिकॉर्ड बना दिया.’

वृन्दावन के संत गुरुशरनानंद महाराज और मुरारी बापू के भक्त हैं कैलाश विजयवर्गीय. जब तब दर्शन आशीर्वाद के लिए जाते रहते हैं. कहते हैं कि गुरु जी और हनुमान जी की कृपा ना होती तो इतने बरसों तक व्रत रखना संभव नहीं था. गुरुशरनानंद महाराज के हाथों ही बीजेपी राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने 20 साल बाद अन्न खाया.
कैलाश बताते हैं कि वो बीस साल से गेंहूं, चावल, मक्का, बाजरा, ज्वार समेत हर किस्म की दाल नहीं खाते थे. बल्कि मोरधन, राजगिरा, साबूदाना और फल खाते थे.कैलाश विजयवर्गीय की पत्नी बताती हैं कि उनके अनाज छोड़ने की वजह से ही उन्होंने मोरधन और साबूदाने से 20 तरह के व्यंजन बनाने सीख लिए. बाद में परिवार की सभी महिलाएं ये व्यंजन बनाने सीख गईं. बताते हैं कि कैलाश विजयवर्गीय जब इंदौर शहर से बाहर रहते हैं तो केवल सब्ज़ी और फल ही खाते हैं.साल 2000 में कैलाश विजयवर्गीय इंदौर शहर के मेयर चुने गए. पितृ पर्वत पर हरियाली नहीं थी. विजयवर्गीय ने तब एक अभियान चलाया. लोगों से जा जाकर कहा कि अपने पुरखों के नाम पर पेड़ लगाओ. हर पुरखे के नाम पर सिर्फ़ एक पेड़. लेकिन पेड़ लगाना है पितृ पर्वत पर. लोगों ने पेड़ लगाना शुरू किया. आज पितृ पर्वत पर तक़रीबन एक लाख पेड़ हैं.

सभी किसानों को मोदी सरकार देगी खेती के लिए 3 लाख रूपये, जानें कैसे

हर किसान को सालाना 6,000 रुपये की नगद सहायता देने के लिए शुरू की गई इस स्कीम में इस दौरान पांच बड़े बदलाव हुए हैं. जिससे किसानों को 6 हजार रुपये की सहायता से कहीं अधिक का फायदा होने वाला है.
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि स्कीम (Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi Scheme) शुरू हुए आज एक साल पूरे हो गए. हर किसान को सालाना 6000 रुपये की नगद सहायता देने के लिए शुरू की गई इस स्कीम में इस दौरान पांच बड़े बदलाव हुए हैं. जिससे किसानों को छह हजार रुपये की सहायता से कहीं अधिक का फायदा होने वाला है. मोदी सरकार ने इस स्कीम की औपचारिक शुरुआत 24 फरवरी 2019 को गोरखपुर से की थी.

 

आपको बता दें कि सरकार ने PM-Kisan के लाभार्थियों को किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card) जारी करने के लिए 15 दिन का विशेष अभियान शुरू किया है. अगले 15 दिन तक सभी किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड दिए जाएंगे. इसके जरिए 3 लाख रुपये तक का कर्ज खेती के लिए लिया जा सकता है. ये कर्ज 4 प्रतिशत की दर से मिलता है. केसीसी बनवाने का फायदा 25 फरवरी तक उठा सकते हैं.

यदि आपने भी इस स्कीम का लाभ लेने के लिए आवेदन दिया है और अब तक बैंक अकाउंट (Bank Account) में पैसा नहीं आया है तो उसका स्टेटस जानना बहुत आसान हो गया है. केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी (Kailash Chaudhary) ने बताया कि पीएम किसान पोर्टल (PM Kisan Portal) पर जाकर कोई भी किसान भाई अपना आधार, मोबाइल और बैंक खाता नंबर दर्ज करके इसके स्टेटस की जानकारी ले सकता है.
लाभ पाने के लिए खुद कर सकते हैं रजिस्ट्रेशन
>>अब किसी किसान को इस योजना में रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए अधिकारियों के पास नहीं जाना पड़ेगा. कोई भी ‘किसान पोर्टल’ पर जाकर खुद ही अपना रजिस्ट्रेशन कर सकता है. इसका मकसद सभी किसानों को स्कीम से जोड़ना और रजिस्टर्ड लोगों को समय पर लाभ पहुंचाना है. कृषि मंत्रालय (Ministry of Agriculture) की इस सुविधा के शुरू होने के बाद राज्य सरकारों को किसानों के ब्योरे में आई गलतियों को ठीक करने और वेरीफिकेशन में अब पहले से काफी कम समय लगेगा.

इससे केसीसी को लिंक कर दिया गया है

पीएम किसान सम्मान निधि स्कीम का लाभ पाने वाले सभी किसानों को मोदी सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) भी मुहैया करवाने का फैसला किया है. यानी पीएम-किसान योजना को केसीसी से लिंक कर दिया गया है. इससे 3 लाख रुपये तक का लोन सिर्फ 4 फीसदी की दर पर मिल जाएगा.

इस समय देश में 6.67 करोड़ एक्टिव किसान क्रेडिट कार्ड हैं. पीएम-किसान सम्मान निधि के लगभग 3 करोड़ लाभार्थी हैं जिनके पास केसीसी नहीं है. चूंकि बैंकों के पास पहले से ही PM-KISAN लाभार्थियों की अधिकांश जानकारी मौजूद है इसलिए बैंकों को किसानों के लिए केसीसी जारी करने में दिक्कत नहीं आएगी.
केसीसी के लिए फसल बीमा करवाने से छूट
पहले किसान क्रेडिट कार्ड लेने वाले किसानों को फसल बीमा स्‍कीम (PMFBY) में भी शामिल होना पड़ता था. भले ही किसान न चाहे. इसे पीएम किसान स्कीम में लिंक करने के बाद अब फसल बीमा को स्वैच्छिक बना दिया गया है. सरकार के इस फैसले के बाद देश के लाखों किसानों को राहत मिलने की उम्‍मीद है.

पहले छोटे किसानों के लिए थी अब सबके लिए है.

जब दिसंबर 2018 में इस स्कीम के तहत पैसा देना शुरू किया गया था तब यह स्कीम सिर्फ लघु एवं सीमांत किसानों के लिए ही थी. इस दायरे में केवल 12 करोड़ ही किसान आते थे. इसलिए इसका बजट 75 हजार करोड़ रुपये तय किया गया था. लेकिन लोकसभा चुनाव 2019 से पहले बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में वादा किया कि मोदी सरकार दोबारा सत्ता आई तो सभी 14.5 करोड़ किसानों को लाभ मिलेगा.
बीजेपी जीत गई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल की पहली कैबिनेट बैठक में वादा पूरा कर दिया. इसके साथ ही स्कीम का फंड बढ़ाकर 87 हजार करोड़ कर दिया गया.

अक्षय तृतीया (श्री परशुराम प्रकटोत्सव) कैसे मनाएं

0

Akshay tritiya-beyond india

मदनरत्न के अनुसार :
“अस्यां तिथौ क्षयमुर्पति हुतं न दत्तं।
तेनाक्षयेति कथिता मुनिभिस्तृतीया॥

उद्दिष्य दैवतपितृन्क्रियते मनुष्यैः।
तत् च अक्षयं भवति भारत सर्वमेव॥

अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहते हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है । इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है। वैसे तो सभी बारह महीनों की शुक्ल पक्षीय तृतीया शुभ होती है, किंतु वैशाख माह की तिथि स्वयंसिद्ध मुहूर्तो में मानी गई है। भविष्य पुराण के अनुसार इस तिथि की युगादि तिथियों में गणना होती है, सतयुग और त्रेता युग का प्रारंभ इसी तिथि से हुआ है । भगवान विष्णु ने नर-नारायण, हयग्रीव और परशुराम जी का अवतरण भी इसी तिथि को हुआ था । ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का आविर्भाव भी इसी दिन हुआ था । इस दिन श्री बद्रीनाथ जी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती है और श्री लक्ष्मी नारायण के दर्शन किए जाते हैं। प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बद्रीनारायण के कपाट भी इसी तिथि से ही पुनः खुलते हैं।

इसी दिन महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ था और द्वापर युग का समापन भी इसी दिन हुआ था

वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी जी मन्दिर में भी केवल इसी दिन श्री विग्रह के चरण दर्शन होते हैं, अन्यथा वे पूरे वर्ष वस्त्रों से ढके रहते हैं। इसी दिन महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ था और द्वापर युग का समापन भी इसी दिन हुआ था। ऐसी मान्यता है कि इस दिन से प्रारम्भ किए गए कार्य अथवा इस दिन को किए गए दान का कभी भी क्षय नहीं होता। इस दिन से शादी-ब्याह करने की शुरुआत हो जाती है। बड़े-बुजुर्ग अपने पुत्र-पुत्रियों के लगन का मांगलिक कार्य आरंभ कर देते हैं। अनेक स्थानों पर छोटे बच्चे भी पूरी रीति-रिवाज के साथ अपने गुड्‌डा-गुड़िया का विवाह रचाते हैं। इस प्रकार गाँवों में बच्चे सामाजिक कार्य व्यवहारों को स्वयं सीखते व आत्मसात करते हैं।
स्कंद पुराण और भविष्य पुराण में उल्लेख है कि वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को रेणुका के गर्भ से भगवान विष्णु ने परशुराम रूप में जन्म लिया। कोंकण और चिप्लून के परशुराम मंदिरों में इस तिथि को परशुराम जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। दक्षिण भारत में परशुराम जयंती को विशेष महत्व दिया जाता है। परशुराम जयंती होने के कारण इस तिथि में भगवान परशुराम के आविर्भाव की कथा भी सुनी जाती है। इस दिन परशुराम जी की पूजा करके उन्हें अर्घ्य देने का बड़ा माहात्म्य माना गया है। सौभाग्यवती स्त्रियाँ और क्वारी कन्याएँ इस दिन गौरी-पूजा करके मिठाई, फल और भीगे हुए चने बाँटती हैं, गौरी-पार्वती की पूजा करके धातु या मिट्टी के कलश में जल, फल, फूल, तिल, अन्न आदि लेकर दान करती हैं। मान्यता है कि इसी दिन जन्म से ब्राह्मण और कर्म से क्षत्रिय भृगुवंशी परशुराम का जन्म हुआ था। एक कथा के अनुसार परशुराम की माता और विश्वामित्र की माता के पूजन के बाद प्रसाद देते समय ऋषि ने प्रसाद बदल कर दे दिया था। जिसके प्रभाव से परशुराम ब्राह्मण होते हुए भी क्षत्रिय स्वभाव के थे और क्षत्रिय पुत्र होने के बाद भी विश्वामित्र ब्रह्मर्षि कहलाए। उल्लेख है कि सीता स्वयंवर के समय परशुराम जी अपना धनुष बाण श्री राम को समर्पित कर संन्यासी का जीवन बिताने अन्यत्र चले गए। अपने साथ एक फरसा रखते थे तभी उनका नाम परशुराम पड़ा।

सुंदरकाण्ड का नाम सुंदरकाण्ड क्यों रखा गया?

0

हनुमानजी, सीताजी की खोज में लंका गए थे और लंका त्रिकुटांचल पर्वत पर बसी हुई थी। त्रिकुटांचल पर्वत यानी यहां 3 पर्वत थे। पहला सुबैल पर्वत, जहां के मैदान में युद्ध हुआ था। दुसरा नील पर्वत, जहां राक्षसों के महल बसे हुए थे। तीसरे पर्वत का नाम है सुंदर पर्वत, जहां अशोक वाटिका निर्मित थी। इसी वाटिका में हनुमानजी और सीताजी की भेंट हुई थी। इस काण्ड की सबसे प्रमुख घटना यहीं हुई थी, इसलिए इसका नाम सुंदरकाण्ड रखा गया।

शुभ अवसरों पर सुंदरकाण्ड का पाठ क्यों?

शुभ अवसरों पर गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के सुंदरकाण्ड का पाठ किया जाता है। शुभ कार्यों की शुरूआत से पहले सुंदरकाण्ड का पाठ करने का विशेष महत्व माना गया है। जबकि किसी व्यक्ति के जीवन में ज्यादा परेशानियाँ हों, कोई काम नहीं बन पा रहा हो, आत्मविश्वास की कमी हो या कोई और समस्या हो, सुंदरकाण्ड के पाठ से शुभ फल प्राप्त होने लग जाते हैं, कई ज्योतिषी या संत भी विपरित परिस्थितियों में सुंदरकाण्ड करने की सलाह देते हैं।

सुंदरकाण्ड का पाठ विषेश रूप से क्यों किया जाता है?

माना जाता हैं कि सुंदरकाण्ड के पाठ से हनुमानजी प्रशन्न होते हैं। सुंदरकाण्ड के पाठ में बजरंगबली की कृपा बहुत ही जल्द प्राप्त हो जाती है। जो लोग नियमित रूप से सुंदरकाण्ड का पाठ करते हैं, उनके सभी दुखः दुर हो जाते हैं, इस काण्ड में हनुमानजी ने अपनी बुद्धि और बल से सीता माता की खोज की है। इसी वजह से सुंदरकाण्ड को हनुमानजी की सफलता के लिए याद किया जाता है।

सुंदरकाण्ड से क्यों मिलता है मनोवैज्ञानिक लाभ?

वास्तव में श्रीरामचरितमानस के सुंदरकाण्ड की कथा सबसे अलग है, संपूर्ण श्रीरामचरितमानस भगवान श्रीराम के गुणों और उनके पुरूषार्थ को दर्शाती है, सुंदरकाण्ड एक मात्र ऐसा अध्याय है जो श्रीराम के भक्त हनुमान की विजय का काण्ड है। मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो यह आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति बढ़ाने वाला काण्ड है, सुंदरकाण्ड के पाठ से व्यक्ति को मानसिक शक्ति प्राप्त होती है, किसी भी कार्य को पूर्ण करने के लिए आत्मविश्वास मिलता है।

सुंदरकाण्ड से क्यों मिलता है धार्मिक लाभ?

सुंदरकाण्ड के वर्णन से मिलता है धार्मिक लाभ, हनुमानजी की पूजा सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली मानी गई है। बजरंगबली बहुत जल्दी प्रशन्न होने वाले देवता हैं, शास्त्रों में इनकी कृपा पाने के कई उपाय बताए गए हैं, इन्हीं उपायों में से एक उपाय सुंदरकाण्ड का पाठ करना है, सुंदरकाण्ड के पाठ से हनुमानजी के साथ ही श्रीराम की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है। किसी भी प्रकार की परेशानी हो सुंदरकाण्ड के पाठ से दूर हो जाती है, यह एक श्रेष्ठ और सरल उपाय है, इसी वजह से काफी लोग सुंदरकाण्ड का पाठ नियमित रूप से करते हैं, हनुमानजी जो कि वानर थे, वे समुद्र को लांघकर लंका पहुंच गए वहां सीता माता की खोज की, लंका को जलाया सीता माता का संदेश लेकर श्रीराम के पास लौट आए, यह एक भक्त की जीत का काण्ड है, जो अपनी इच्छाशक्ति के बल पर इतना बड़ा चमत्कार कर सकता है, सुंदरकाण्ड में जीवन की सफलता के महत्वपूर्ण सूत्र भी दिए गए हैं, इसलिए पुरी रामायण में सुंदरकाण्ड को सबसे श्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि यह व्यक्ति में आत्मविश्वास बढ़ाता है, इसी वजह से सुंदरकाण्ड का पाठ विशेष रूप से किया जाता है।

अमेरिका में कोरोना के 9 लाख से ज्यादा मरीज, दुनियाभर में करीब 2 लाख लोगों की मौत

0

कोरोना वायरस महामारी के कारण दुनिया भर में मरने वालों की संख्या करीब दो लाख हो गई है जिनमें से दो तिहाई सबसे बुरी तरह प्रभावित यूरोप से हैं। जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी ने यह जानकारी दी है। यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर सिस्टम साइंस एंड इंजीनियरिंग (सीएसएसई) द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चला है कि शनिवार (25 अप्रैल) रात करीब 9:30 बजे (भारतीय समयानुसार) तक कुल 1,99,272 लोगों की बीमारी से मौत हो चुकी है, जबकि कोरोनो वायरस के संक्रमित मामलों की वैश्विक संख्या 28,40,830 हो गई है, जिनमें से 8,03,139 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं।

अमेरिका में सबसे ज्यादा मौत

आंकड़ों के मुताबिक दुनिया में अमेरिका अब कोरोना वायरस के संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित है जहां कोविड-19 से मृतकों की संख्या 52,063 हो गई है और कुल संक्रमितों की संख्या 9,07,096 है। इनमें से 99,121 लोग संक्रमण से मुक्त हो चुके हैं। इटली कोविड-19 से दूसरा सबसे अधिक प्रभावित देश है जहां 25,969 लोगों की मौत के साथ 1,92,994 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है, जबकि 60,498 लोग इस बीमारी से निजात पा चुके हैं।

पाकिस्तान में जुलाई तक 2 लाख हो सकती है कोरोना मरीजों की संख्या: WHO

इसी प्रकार स्पेन में 2,23,759 लोग संक्रमित हुए हैं जिनमें से 22,902 लोगों की मौत हुई। फ्रांस में कोरोना वायरस के संक्रमण से 22,279 लोगों ने जान गंवाई है एवं कुल 1,59,952 मामलों की पुष्टि हुई है। ब्रिटेन में 20,380 मौतों के साथ कुल 1,49,554 लोग संक्रमित हुए हैं। चीन में जहां पर दिसंबर में सबसे पहले संक्रमण की शुरुआत हुई, वहां 4,636 लोगों की कोविड-19 से मौत हुई है और 83,901 लोग संक्रमित हुए हैं।

सिनेमाघर की जगह ऑनलाइन रिलीज होगी अक्षय की ‘लक्ष्मी बम’

0

कोरोना वायरस की वजह से कई उद्योगों पर असर पड़ा है। वहीं फिल्म इंडस्ट्री की बात करें तो सभी फिल्मों की रिलीज और शूटिंग रोकी जा चुकी है। बॉलीवुड की कई बड़ी फिल्में ऐसी हैं जो रिलीज के बिल्कुल तैयार हैं। इन्हीं में से एक अक्षय कुमार की ‘लक्ष्मी बम’ भी है।

खबर है कि मेकर्स अपनी इस फिल्म की रिलीज के लिए सिनेमाघरों के खुलने का इंतजार नहीं करेंगे। बल्कि, इसके लिए खास तैयारी की जा रही है।

खबरों के अनुसार कोरोना के कारण हालत बिगड़ते देख अब निर्माता अपनी फिल्मों की रिलीज करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का रुख कर रहे हैं।

इसके लिए उन्होंने OTT प्लेफॉर्म्स से बातचीत भी शुरु कर दी है।

‘लक्ष्मी बम’ के निर्माताओं ने हाल ही में डिज्नी प्लस हॉटस्टार से रिलीज के लिए बात की है।

अगर ऐसा होता है तो अक्षय कुमार सिनेमाघर से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आने वाले पहले अभिनेता भी बन जाएंगें।

अभी फिल्म के पोस्ट प्रोडक्शन का काफी काम बाकी

इन खबरों की पुष्टि करते हुए एक सूत्र ने मिड डे को बताया, “अक्षय, डायरेक्टर राघव लॉरेंस और निर्माता इस ऑफर पर विचार कर रहे हैं। अभी फिल्म के पोस्ट प्रोडक्शन का काफी काम बाकी है। फिलहाल टीम घर से ही काम कर रही है। लेकिन इसमें लंबा समय लग सकता है।”

Laaxmi Bomb: Big B to play transgender woman in Akshay Kumar and ...

रिलीज से पहले यह बात सुनिश्चित करना चाहते हैं अक्षय

सूत्र ने आगे कहा, “कोरोना के कारण बिगड़े हालातों को देखते हुए 3 मई के बाद भी लॉकडाउन खुलने की कोई उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है। इसी कारण अब मेकर्स सीधे फिल्म की वेब रिलीज के बारे में सोच रहे हैं।”

रिपोर्ट के मुताबिक, अक्षय पहले यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि फिल्म ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंचे। हॉटस्टार की पहुंच दुनियाभर में है। उनके लिए चिंता का विषय है फिल्म को भारत के छोटे शहरों में पहुंचाना।

corona release

इस फिल्म की रीमेक है ‘लक्ष्मी बम’

गौरतलब है कि अक्षय की ‘लक्ष्मी बम’ दक्षिण भारतीय हॉरर फिल्म ‘कंचना’ की हिन्दी रीमेक है। कुछ समय पहले ही फिल्म से उनका लुक भी जारी कर दिया गया था। जिसके बाद से ही दर्शकों में फिल्म को लेकर काफी उत्सुकता बढ़ गई थी।

Clueless about Laxmmi Bomb? Watch the original version titled ...

इसमें अक्षय को एक किन्नर भूत का किरदार निभाते हुए देखा जाएगा।

फिल्म में उनके अलावा कियारा आडवाणी भी मुख्य किरदार निभाती हुई नजर आएंगी।

यह फिल्म 22 मई को रिलीज होने वाली थी।

इन फिल्मों की रिलीज पर भी पड़ा कोरोना की मार

हाल ही में खबर आई थी कि कंगना रनौत की ‘धाकड़’ जो दिवाली पर रिलीज होने वाली थी वह भी फिलहाल रोक दी गई है। इसके इसके अलावा उनकी ‘थलाइवी’, आमिर खान की ‘लाल सिंह चड्ढा’, रणवीर सिंह की ’83’, सलमान खान की ‘राधे: यॉर मोस्ट वॉन्टेड भाई’, अक्षय कुमार की ‘सूर्यवंशी’ और वरुण धवन की ‘कुली नं 1’ भी रिलीज की कतार में लगी है।

Radhe Your Most Wanted Bhai | | MOVIESPIE.COM

 

Coolie No. 1 (2020 film) - WikipediaSuryavanshi Movie | Akshay Kumar, Katrina Kaif | Confirm Rohit ...

इन फिल्मों में नजर आने वाले हैं अक्षय कुमार

अक्षय की अगली फिल्मों की बात करें तो उन्हें ‘लक्ष्मी बम’ के अलावा रोहित शेट्टी की ‘सूर्यवंशी’ में भी देखा जाने वाला है। लंबे समय से वह अपनी इस फिल्म को लेकर चर्चा में हैं। इसमें उन्हें एक पुलिस ऑफिसर के किरदार में देखा जाएगा। उनकी यह फिल्म भी सिर्फ अपनी रिलीज डेट का इंतजार कर रही है।

इसके अलावा वह ‘पृथ्वीराज’, ‘हेरा फेरी 3’ और ‘बच्चन पांडे’ में भी नजर आने वाले हैं।

कोरोना लॉकडाउन: जानें आज से कौन से दुकान खुलेंगे

0

कोरोना लॉकडाउन के बीच दुकान खोलने के मुद्दे पर पर काफी लोगों में भ्रम की स्थिति है। कई जगहों पर उन दुकानों के भी खोल जाने की सूचना है, जिन्हें अनुमति नहीं मिली है। यही वजह है कि दुकानों के खुलने को लेकर भ्रम दूर करने के लिए गृह मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि ग्रामीण इलाकों में शॉपिंग मॉल को छोड़कर सभी दुकानें खुली रहेंगी। वहीं, शहरी इलाकों के लिए कहा गया है कि सभी स्टैंडअलोन दुकानें, पड़ोस की दुकानें और आवासीय परिसरों में दुकानें खोलने की अनुमति है। गृह मंत्रालय के स्पष्टीकरण आदेश में कहा गया है कि शराब की बिक्री पूरी तरह से बंद रहेगी।

Centre gives clearance for neighbourhood shops to open | India ...

जानें क्या क्या खुलेंगी और कहां

गृह मंत्रालय के संशोधित आदेश में कहा गया है कि मार्केट में स्थित दुकानें, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और शॉपिंग मॉल को खोलने की इजाजत नहीं है। साथ ही मंत्रालय ने कहा कि यह स्पष्ट किया जाता है कि ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा बिक्री केवल आवश्यक वस्तुओं के लिए ही जारी रहेगी। यह भी स्पष्ट किया गया है कि शराब और अन्य वस्तुओं की बिक्री पर प्रतिबंध जारी रहेगा। दरअसल, यह भ्रम पैदा हो गया था कि ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा अब कुछ भी खरीदा जा सकता है। मगर अब सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसा कुछ भी नहीं है।

कहां नहीं खुलेंगी दुकानें

नए आदेश में खास तौर पर कहा गया है कि जैसा कि समेकित संशोधित दिशानिर्देशों में उल्लेख किया गया है, इन दुकानों को उन क्षेत्रों में खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी, चाहे वे ग्रामीण या शहरी क्षेत्र में हो, जिन्हें संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश द्वारा कंटेनमेंट क्षेत्र घोषित किया गया है। यानी किसी भी शहरी या ग्रामीण इलाके वाले हॉटस्पॉट्स या कंटेनमेंट जोन में दुकानें नहीं खुलेंगी।

ये भी पढ़े

कोरोना पीड़ित पत्रकारों को आर्थिक सहायता दे दिल्ली सरकार : के पी मलिक

हॉटस्पॉट इलाकों में कोई छूट नहीं

इससे पहले केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने एक आदेश में कहा था कि नगर निगमों के दायरे और उसके पड़ोस में स्थित सभी एकल दुकानों को लॉकडाउन के दौरान खोले जाने की अनुमति होगी। हालांकि, नगर निगम के दायरे में स्थित बाजार वाले स्थानों की दुकानें तीन मई तक बंद रहेंगी। यह छूट संक्रमण के अति प्रभावित इलाकों (हॉटस्पॉट इलाकों)में नहीं दी गई है।

करना होगा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन

गृह मंत्रालय के आदेश के मुताबिक देश में 25 अप्रैल से खुलने वाली दुकानों में 50 फीसदी कर्मचारी ही काम कर पाएंगे और इन सभी को मास्क पहनना जरूरी होगा साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा। गौरतलब है कि देश में कोरोना वायरस के प्रकोप को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन के मद्देनजर आवश्यक आपूर्ति के सामान की दुकानों के अलावा बाकी सभी दुकानों को 3 मई तक बंद रखने के आदेश दिए गए थे।